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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्‍तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन संबंधी

Published 23 April 2026

Department
वाणिज्य और उद्योग विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
196
Notification no.
GENCOR-35/942/2025-C&I
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-04-23.196
Languages
English, Hindi

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 वाणिज्य एवं उद्योग विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर

नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 23 अप्रैल 2026

अधिसूचना

ंकि, राज्य सरकार का यह समाधान हो गया है कि राज्य के औद्योगिक क्रमांक GENCOR-35/942/2025-C&I. चू

विकास नीति 2024-30 के प्रावधानों के अनुसार औद्योगिक स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए प्रावधानों को संशोधित करना लोकहित में आवश्यक है,

अतएव् राज्य शासन, एतद् द्वारा, छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में, इन नियमों के नियम 3.15 की शक्तियों का प्रयोग करते हुये, निम्नानुसार अग्रतर संशोधन करती है, अर्थात्:-

संशोधन

उक्त नियमों में,

1. नियम 2.1.1 में खंड (iii) के पश्चात, निम्नानुसार खंड जोड़ा जाए, अर्थात-

"(iv) राज्य शासन की प्रचलित औद्योगिक विकास नीति के अंतर्गत परिभाषित सेवा क्षेत्र की इकाइयाँ (Service Sector Enterprises), जिनकी स्थापना संबंधित भूमि उपयोग अनुसार स्वीकृ त हो।"

2. नियम 2.1 अंतर्गत मार्गदर्शी प्रावधान के खंड (अ) में निम्नानुसार परन्तुक जोड़ा जाए, अर्थात -

"परन्तु यह प्रावधान, लैंड बैंक तथा कं डिका 2.7.4 (1) में उल्लेखित भूमि पर लागू नहीं होगा।"

3. नियम 2.3.2 के खंड (ब) के स्थान पर, निम्नानुसार खंड प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"(ब) सामान्यतः आवंटन की जाने वाली भूमि की अधिकतम मात्रा उद्यम की श्रेणी अनुसार निम्नानुसार होगी- (1) सूक्ष्म उद्यम- 1,000 वगर्मीटर तक। (2) लघु उद्यम- भूमि की आवश्यकता 1,000 वगर्मीटर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक रुपये 25 लाख के निवेश के स्लैब के लिये 500 वगर्मीटर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम भूमि 1 (एक) हेक्टेयर तक। (3) मध्यम उद्यम- भूमि की आवश्यकता 1(एक) हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक रुपये 1 करोड़ के निवेश के स्लैब के लिये 0.2 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम 5 (पांच) हेक्टेयर भूमि तक। (4) वृहद उद्यम- भूमि की आवश्यकता पांच हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक पांच करोड़ रुपये के निवेश के स्लैब के लिये 0.4 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम भूमि 25 (पच्चीस) हेक्टेयर तक। (5) 100 करोड़ रूपये से अधिक निवेश वाले वृहद उद्यम- भूमि की आवश्यकता पच्चीस हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक पांच करोड़ रुपये के निवेश के स्लैब के लिये 0.4 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि।" 4. नियम 2.3.7 के खंड (ब) के पश्चात, नवीन खंड निम्नानुसार जोड़ा जाए, अर्थात-

"(स) जहाँ लैंड बैंक (औद्योगिक प्रयोजन) से आबंटित भू-खण्ड अथवा निजी औद्योगिक/ व्यवसायिक भूमि को सार्वजनिक मार्ग से सीधा संपर्क उपलब्ध नहीं हो, वहाँ आबंटन प्राधिकारी न्यूनतम आवश्यक क्षेत्रफल की भूमि को एप्रोच रोड हेतु पृथक पट्टे पर आबंटित कर सके गा।"

5. संशोधन अधिसूचना दिनांक 31.10.2019 के द्वारा अंतःस्थापित नियम 2.5.13 को, नियम 2.5.14 के रूप में पुनक्र्र मांकित किया जाए।

6. नियम 3.1.2.2 के स्थान पर, निम्नानुसार नियम प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात-

"3.1.2.2 यदि इकाई द्वारा उपरोक्तनुसार अवधि में भूमि का पूर्ण उपयोग नहीं किया जाता है, तो प्रचलित प्रीमियम का दस (10) प्रतिशत लेकर आबंटन प्राधिकारी छह माह की अतिरिक्त समयावधि प्रदान कर सकें गे।

इसके उपरांत भी भूमि का पूर्ण उपयोग न किये जाने की स्थिति में निर्मित क्षेत्र के आधार पर कु ल भूमि की पात्रता का आंकलन किया जाएगा तथा अतिशेष भूमि समर्पित की जाएगी; अन्यथा आबंटनकर्ता ऐसी अतिशेष भूमि का एकपक्षीय कब्जा प्राप्त कर सकें गे।

परंतु यह कि —

(i) यदि अतिशेष भूमि पृथक औद्योगिक इकाई की स्थापना हेतु आबंटन योग्य हो तथा पृथक मार्ग उपलब्ध हो, तो सक्षम अनुमोदन प्राप्त कर मूल आबंटी द्वारा आंशिक समर्पण किया जा सके गा।

(ii) आंशिक समर्पण के वल चालू (Operational) इकाई को ही अनुमति होगी तथा वैध उत्पादन प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

(iii) संबंधित आबंटी (मूल) द्वारा उसे आबंटित भूमि का आंशिक समर्पण किये जाने पर, आंशिक समर्पित भूमि नवीन इकाई की स्थापना हेतु संबंधित आबंटी द्वारा प्रस्तावित नये निवेशक के पक्ष में विभाग के आबंटन प्राधिकारी के समक्ष आंशिक समर्पण के पश्चात नवीन आबंटी द्वारा प्रश्नाधीन आंशिक भूखंड हेतु आबंटन आवेदन प्रस्तुत करने की दिनांक पर संबंधित क्षेत्र हेतु निर्धारित/प्रचलित प्रब्याजी की 100 प्रतिशत की दर पर आबंटित की जा सके गी।

(iv) ऐसे प्रत्येक समर्पण के प्रकरण में मूल आबंटी से मूल आबंटित संपूर्ण भू-खण्ड के प्रचलित प्रब्याजी मूल्य के 20 प्रतिशत के समतुल्य अतिरिक्त विनियामक प्रभार देय होगा, चाहे समर्पण आंशिक क्षेत्र का ही क्यों न हो।

(v) उप-विभाजन एक समय में के वल एक ही भाग में किया जा सके गा; किसी भी अवस्था में मूल या उप-विभाजित भू- खण्ड को एक साथ एक से अधिक भागों में विभाजित किये जाने की अनुमति नहीं होगी।

(vi) तथापि, यदि उप-विभाजन पश्चात शेष अथवा नवीन सृजित भू-खण्ड का पूर्ण उपयोग न हो तथा इकाई चालू अवस्था में हो, तो सक्षम अनुमोदन प्राप्त कर पुनः उप-विभाजन किया जा सके गा, बशर्ते कि प्रत्येक बार उप-विभाजन स्वीकृ त मास्टर ले-आउट, सड़क, खुली भूमि एवं भूमि उपयोग में कोई परिवर्तन न करे। (vii) समर्पण पश्चात सृजित नवीन भू-खण्ड पर स्थापित इकाई को नवीन आबंटन की भाँति इन नियमों का अनुपालन करना होगा।

(viii) एक बार समर्पित भूमि को मूल आबंटी द्वारा पुनः प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं होगा।

(ix) आवंटी के द्वारा मूल आवंटित भूखंड का 50% से अधिक भूमि का अंतरण उपरोक्त रीति से नहीं किया जा सके गा।" 7. नियम 3.1.2.5 के पश्चात्, नवीन नियम निम्नानुसार जोड़ा जाए, अर्थात-

"3.1.3 भू-खण्डों का एकीकरण (Amalgamation)– एक ही औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सन्निहित भू-खण्डों के आबंटी, सक्षम अनुमोदन प्राप्त कर दो या अधिक भू-खण्डों का एकीकरण करा सकें गे।

परंतु यह कि – (i) एकीकरण से औद्योगिक क्षेत्र की स्वीकृ त सड़क, खुली भूमि, सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र अथवा भूमि उपयोग श्रेणी में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

(ii) संयुक्त भू-खण्ड का उपयोग मूल स्वीकृ त प्रयोजन के अनुरूप रहेगा।

(iii) एकीकरण से पूर्व समस्त देय प्रीमियम, भू-भाटक एवं संधारण शुल्क का पूर्ण भुगतान अनिवार्य होगा। (iv) एकीकृ त भू-खण्ड हेतु संशोधित अभिलेख एवं नक्शा अभिप्रमाणित किया जाएगा।"

8. नियम 3.2.2 के स्थान पर निम्नानुसार नियम प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"3.2.2 भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुज्ञा प्राप्त अनुसूचित बैंकों तथा भारतीय रिज़र्व बैंक में विधिवत पंजीकृ त गैर-बैंकिं ग वित्तीय कं पनियों (Non-Banking Financial Companies– NBFCs) एवं कं पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत घोषित लोक हित वित्त संस्थाओं अथवा राज्य वित्त अधिनियम, 1951 के अंतर्गत गठित वित्त निगम, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, अनुसूचित जाति/जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के पक्ष में, जैसी भी स्थिति हो, पट्टाग्रहिता को उसे प्रदत्त पट्टाधिकारों को संबंधित वित्तीय संस्था के पक्ष में अभिहस्तांकन करने की अनुमति संबंधित आबंटन प्राधिकारी द्वारा आवेदन करने पर दी जा सके गी।"

9. नियम 3.4.1.1 के खंड (अ) के परंतुक के स्थान पर, निम्नानुसार परंतुक प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात- "परन्तु, एकल स्वामित्व से भागीदारी या कम्पनी, भागीदारी से कम्पनी, भागीदारी से एकल स्वामित्व, कम्पनी से एकल स्वामित्व/ भागीदारी, बनाने में संगठन/ गठन के स्वरुप में किया गया परिवर्तन को अंतरण की श्रेणी में नहीं माना जाएगा, यदि मूल आबंटी/ मूल आबंटियों का हिस्सा/ अंश संगठन में एकल या संयुक्त रूप से 51 प्रतिशत या अधिक बना रहता है।"

10. नियम 3.4.1.1 के खंड (ब) के स्थान पर, निम्नानुसार खंड प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"(ब) आबंटन के समय एकल स्वामित्व के प्रकरणों में एक व्यक्ति, साझेदारी के प्रकरणों में कोई एक साझेदार अथवा एक से अधिक साझेदार तथा कम्पनी के प्रकरणों में कोई एक अंशधारी अथवा एक से अधिक अंशधारी हो सकते हैं एवं ये ही मूल आबंटिती (पट्टाग्रहिता/ पट्टेदार) कहलाएंगे ।

स्पष्टीकरण– सार्वजनिक सीमित कं पनी (Public Limited Company) के मामले में, शेयरधारिता में परिवर्तन मात्र से मूल आबंटिती की स्थिति प्रभावित नहीं होगी, जब तक कि कं पनी का पूर्ण अधिग्रहण अथवा नियंत्रण परिवर्तन न हो।"

11. नियम 3.4.1.3 के खंड (अ) के स्थान पर, निम्नानुसार खण्ड प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"(अ) कं पनियों के मामले में हस्तांतरण से वही तात्पर्य मान्य किया जाएगा, जो लागू कं पनी अधिनियम के प्रावधानों में निहित है। परंतु यह कि —

(i) निजी सीमित कं पनियों (Private Limited Companies) के प्रकरण में मूल प्रवर्तकों (Promoters) की अंशधारिता 51 प्रतिशत से कम होने पर हस्तांतरण माना जाएगा।

(ii) सार्वजनिक सीमित कं पनियों (Public Limited Companies) के प्रकरण में शेयरधारिता में परिवर्तन को मात्र इस आधार पर हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।

(iii) सार्वजनिक सीमित कं पनी का पूर्ण अधिग्रहण (Complete Takeover), विलय (Merger) अथवा ऐसी स्थिति जिसमें नियंत्रण किसी अन्य कं पनी/संस्था को स्थानांतरित हो जाए, हस्तांतरण माना जाएगा।"

12. नियम 3.4.2.7 के परंतुक में शब्द "3 माह की अवधि तक" के पश्चात, शब्द "अर्थात दिनांक 28.11.2025 तक प्राप्त आवेदनों पर," जोड़ा जाए।

13. नियम 3.4.2.11 के स्थान पर, निम्नानुसार नियम प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"3.4.2.11 सिक्योरिटाइजेशन एण्ड रिकन्स्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एण्ड एनफोसर्मेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट (सर्फे सी एक्ट), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016), राष्ट्रीय कं पनी विधि अधिकरण (NCLT), ऋण वसूली अधिकरण (DRT) अथवा किसी अन्य सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण के अंतर्गत बैंक/वित्तीय संस्था द्वारा वित्त पोषित स्थापित उद्योग/आंशिक रूप से स्थापित परियोजना/निर्माणाधीन परियोजना की नीलामी अथवा विक्रय की जाने की स्थिति में, नवीन आबंटी को तद्समय प्रचलित प्रीमियम का 10 प्रतिशत (दस प्रतिशत) हस्तांतरण शुल्क अदा करने पर भू-हस्तांतरण की अनुमति प्रदान की जाएगी।"

14. नियम 3.5.2 के पश्चात, निम्नानुसार नियम जोड़ा जाए, अर्थात-

"3.5.3 राज्य शासन द्वारा अनुमोदित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public Private Partnership– PPP) परियोजनाओं के अंतर्गत विकसित औद्योगिक क्षेत्र/ परियोजना/ लैंड बैंक में भूमि, भवन, शेड अथवा प्रकोष्ठ के आबंटन, उपपट्टा, प्रबंधन, संचालन तथा संबंधित शर्तों के निर्धारण हेतु छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सी.एस.आई.डी.सी.) के संचालक मंडल को, राज्य शासन के पूर्वानुमोदन से, समय-समय पर, पृथक नियम/ दिशा-निर्देश/ मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार होगा।

ऐसे प्रकरणों में सी.एस.आई.डी.सी. के संचालक मंडल द्वारा अनुमोदित प्रावधान प्रभावी एवं बाध्यकारी होंगे, तथा आवश्यकतानुसार ऐसी परियोजनाओं हेतु पृथक दिशा-निर्देश शासन की पूर्व स्वीकृ ति से निर्धारित किए जा सकें गे।"

15. नियम 3.10.2 के स्थान पर, निम्नानुसार नियम प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात-

"3.10.2 उपरोक्त नियम 3.10.1 से भिन्न प्रकरणों में पट्टा निरस्तीकरण के मामलों में भूमि, भवन/शेड की पुनस्र्थापना के प्रत्येक प्रकरण में गुण-दोष के आधार पर इकाई की अद्यतन स्थिति, रोजगार, पू ंजी निवेश, उल्लिखित प्रावधानों की पूर्ति एवं उद्योग स्थापना/नये प्रस्तावों को दृष्टिगत रखते हुए पुनस्र्थापना की अनुमति प्रदान की जा सके गी। ऐसा करते समय आबंटन प्राधिकारी द्वारा प्रचलित प्रीमियम दिनांक 07 मार्च, 2015 के पूर्व के मूलतः भूमि आबंटन के मामलों में पुनस्र्थापना दिनांक पर लागू प्रीमियम का 45 प्रतिशत तथा 07 मार्च, 2015 के पश्चात मूलतः भूमि आबंटन के मामलों में पुनस्र्थापना दिनांक पर लागू प्रीमियम का 25 प्रतिशत राशि पुनस्र्थापना शुल्क एवं अन्य देय राशि के बराबर का एकमुश्त भुगतान प्राप्त कर भूमि आबंटन पुनस्र्थापना की अनुमति दी जा सके गी।

उक्त अनुमोदन की दिनांक से आगामी 05 (पांच) वर्ष तक भूमि का हस्तांतरण अथवा स्थापित उद्योग इकाई के संगठन का स्वरूप, इन नियमों में अन्यथा स्वीकृ त होने की स्थिति को छोड़कर, परिवर्तित नहीं किया जा सके गा। परंतु यदि उक्त 05 (पांच) वर्ष की अवधि के भीतर भूमि का पुनः हस्तांतरण अथवा उद्योग इकाई के संगठन का परिवर्तन किया जाता है, तो—

(i) उल्लंघन नियमितीकरण हेतु दिनांक 07 मार्च, 2015 के पूर्व मूलतः भूमि आबंटन के मामलों में उल्लंघन नियमितीकरण दिनांक पर लागू प्रीमियम का 40 प्रतिशत तथा दिनांक 07 मार्च, 2015 के पश्चात मूलतः भूमि आबंटन के मामलों में उल्लंघन नियमितीकरण दिनांक पर लागू प्रीमियम का 20 प्रतिशत राशि, प्रचलित प्रीमियम के समतुल्य हस्तांतरण शुल्क एवं शास्ति शुल्क नियमितीकरण दिनांक पर लागू प्रीमियम के 10 (दस) प्रतिशत के बराबर, अतिरिक्त रूप से देय होगी।

(ii) शास्ति सहित पूर्ण राशि का भुगतान न करने की स्थिति में उद्योग के पक्ष में जारी आबंटन आदेश तथा लीजडीड नियमों के अनुसार निरस्त की जा सके गी।"

16. परिशिष्ट–1 की कं डिका 2. (अ) की सारणी में प्रविष्टि (5) के पश्चात, निम्नानुसार प्रविष्टि जोड़ा जाए, अर्थात-

"(6) ल ैंड बैंक से एप्रोच रोड हेतु आबंटित भूमि लघु विनिर्माण उद्योग हेतु निर्धारित दरों की न्यूनतम चार गुना अथवा नीलामी दर जो भी अधिक हो, परन्तु यह दर भूमि के अधिग्रहण की दर से कम नहीं होगी।"

17. परिशिष्ट–1 की कं डिका 2.(स) में प्रविष्टि 7 के पश्चात, निम्नानुसार प्रविष्टि जोड़ा जाए, अर्थात-

"8. राज्य शासन की प्रचलित औद्योगिक विकास नीति के अंतर्गत परिभाषित सेवा क्षेत्र (Service Sector Enterprises) की इकाइयाँ, जिनकी स्थापना संबंधित भूमि उपयोग अनुसार स्वीकृ त हो लघु विनिर्माण उद्योग हेतु निर्धारित दरों की न्यूनतम चार गुना अथवा नीलामी दर जो भी अधिक हो।"

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

रजत कु मार, सचिव.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 23 April 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-04-23.196/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-04-23.196.