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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 9 सन् 2026) संबंधी।

Published 15 July 2026

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
388
Notification no.
9441/वि.स./विधान/2026
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-07-15.388
Languages
English, Hindi

10000

0000

छत्तीसगढ़शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "

सत्यमेव जयते

"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 388 ]

नवा रायपुर , बुधवार, दिनांक 15 जुलाई 2026 आषाढ़ 24 , शक 1948

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

नवा रायपुर अटल नगर, मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई , 2026 (आषाढ़ 23, 1948)

क्रमांक-9441 /वि.स./ विधान/ 2026.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 9 सन् 2026) जो मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई, 2026 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।

हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.

775 776

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 9 सन् 2026)

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (क्र . 19 सन् 2012) को और संशोधित करने हेतु विधेयक।

भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. (1)

संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.

यह अधिनियम छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम , 2026 कहलाएगा ।

(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा।

2.

धारा 2 का संशोधन.

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (क्र. 19 सन् 2012) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में, -

(एक) खण्ड (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतः स्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

"स्पष्टीकरणः- भवन स्वामी और किराएदार के मध्य निष्पादित करारनामा, यथास्थिति , भवन स्वामी या किराएदार की मृत्यु की दशा में , उनके हित उत्तराधिकारियों पर बाध्यकारी होंगे , ऐसी किराएदारी की शेष अवधि के लिए , मृतक भवन स्वामी या किराएदार के उत्तराधिकारियों के वही अधिकार और दायित्व होंगे , जैसा कि किरायेदारी अनुबंध में सहमति दी गई थी। "

(दो) खण्ड (5 ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित की जाये, अर्थात्ः-

"(5) " भवन स्वामी" से अभिप्रेत है , ऐसा व्यक्ति, जो किसी

वास सुविधा का भाड़ा ( किराया) चाहे अपने स्वयं के लेखे या किसी ऐसे अन्य व्यक्ति के लेखे या उसकी ओर से या उसके लाभ के लिए एवं जिसमें अवयस्क या विकृतचित्त व्यक्ति सम्मिलित हो अथवा जो 776(1)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

अनुबंध करने में असमर्थ हो , तत्समय प्राप्त कर रहा है या प्राप्त करने का हकदार है और इसमें यह भी सम्मिलित होंगे , -

(एक) उसके उत्तराधिकारी; और

(दो) कोई न्यासी या संरक्षक या रिसीवर। "

(तीन

) खण्ड (8 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः- "(8अ) "सम्पत्ति प्रबंधक" से अभिप्रेत है , ऐसा व्यक्ति जो परिसर का प्रबंध करने के लिए भवन स्वामी द्वारा प्राधिकृत है और जो किरायेदार के साथ अपने व्यवहार में भवन स्वामी का प्रतिनिधित्व करता है;

(चार) खण्ड (13) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्: - (13अ) " हित-उत्तराधिकारी " से अभिप्रेत है, ऐसा व्यक्ति जो किरायेदार एवं भवन स्वामी के पति - पत्नी, पुत्र, पुत्री, माता या पिता जो समान्यतः उसके साथ ऐसे वास सुविधा में उसके परिवार के सदस्य के रूप में उसकी मृत्यू अथवा विकृतचित्त होने तक रहते हों। "

3.

धारा 4अ का जोड़ा जाना.

मूल अधिनियम की धारा 4 के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्: -

"4अ. संपत्ति प्रबंधक के विषय में सूचना, उनके कर्तव्य एवं उल्लंघन करने पर परिणाम. ( 1 ) जहाँ भवन स्वामी द्वारा संपत्ति प्रबंधक को नियुक्त किया गया है , वहाँ भवन स्वामी , किरायेदार को निम्नलिखित सूचना प्रदान करेगा , अर्थात्: -

(क) संपत्ति प्रबंधक का नाम;

(ख) प्रमाण कि भवन स्वामी द्वारा ऐसे संपत्ति प्रबंधक को प्राधिकृत किया गया है;

(ग ) विशेष प्रयोजन, जिसके लिए सम्पत्ति प्रबंधक को भवन स्वामी द्वारा प्राधिकृत किया गया है और ऐसे प्राधिकरण की अवधि; और

(घ ) जहाँ संपत्ति प्रबंधक एक विधिक इकाई है , तो उस इकाई का नाम और उस विधिक इकाई द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत व्यक्ति का नाम , जिससे 776 (2)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

किरायेदारी अनुबंध के संबंध में संपर्क किया जा सकेगा।

(

2) संपत्ति प्रबंधक के कर्तव्यों में निम्निलिखित सम्मिलित होंगे , अर्थात्ः-

(क) रसीद देकर भाड़ा संग्रहित करना;

(ख) भवन स्वामी की ओर से आवश्यक मर्मत करना;

(ग) समय - समय पर परिसर का निरीक्षण करना;

(घ) निम्नलिखित के लिए किरायेदार को नोटिस देना-

(एक) वास सुविधा का उचित रख- रखावः

(दो) भाड़े के संदाय में विलंब;

(तीन) भाड़े का पुनरीक्षण;

(चार) परिसर को खाली करना;

(पाँच) किरायेदारी का नवीकरण ।

(ङ) किरायेदारों के मध्य तथा भवन स्वामी और किरायेदार के मध्य विवादों के निपटारे में सहायता करना;

(च) किरायेदारी से संबंधित कोई अन्य विषय , जैसे कि भवन स्वामी द्वारा निर्देशित किये जाएं।

(3) जहाँ संपत्ति प्रबंधक , उप- धारा (2 ) के उपबंधों के उल्लंघन में या भवन स्वामी के निर्देशों के विपरीत कार्य करता है, तब इस निमित भवन स्वामी या किराएदार की ओर से आवेदन किए जाने पर , भाड़ा नियंत्रक , संपत्ति प्रबंधक को हटा सकता है या संपत्ति प्रबंधक पर ऐसा परिव्यय अधिरोपित कर सकता है, जिससे भवन स्वामी या किराएदार को ऐसे उल्लंघन के कारण हुए किसी भी नुकसान की क्षतिपूर्ति हो सके या दोनों कर सकता है। "

धारा 5 का संशोधन.

4.

मूल अधिनियम की धारा 5 की उप- धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-

"(3 ) ऐसे मामलों में भाड़े के भुगतान की प्रक्रिया, जहाँ भवन स्वामी कोई भाड़ा लेने से इंकार कर दे.- (क) यदि भवन स्वामी देय किसी भाड़े और अन्य शुल्कों को स्वीकार करने से इंकार कर देता है या रसीद देने 776 (3)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

से इंकार कर देता है, तो वहाँ भाड़ा और अन्य प्रभार भवन स्वामी को डाक, मनीऑर्डर या अन्य किसी रीति से, जैसा कि विहित किया जाए, लगातार दो माह के लिए संदत्त किए जाएंगे और यदि इस अवधि में भी भवन स्वामी , भाड़ा और अन्य प्रभार स्वीकार करने से इंकार कर देता है, तो किराएदार उसे भाड़ा नियंत्रक के समक्ष , ऐसी रीति में जो विहित की जाए, जमा कर सकेगा।

(ख) जहाँ खण्ड (क) के अधीन भाड़ा जमा किया जाता है, तो भाड़ा नियंत्रक उस मामले में जांच करेगा और मामले के तथ्यों के आधार पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह उचित समझे।

( ग) जहाँ खण्ड (क) के अधीन भाड़ा या अन्य प्रभार जमा

किया जाता है , तो भवन स्वामी उक्त राशि को भाड़ा नियंत्रक के पास विहित रीति में आवेदन प्रस्तुत कर आहरित कर सकेगा। "

5.

मूल अधिनियम की धारा 6 में, -

धारा 6 का संशोधन.

(एक) उप- धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतः स्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

" (2 क) अध्यक्ष उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है , 3 वर्ष की अवधि के लिए या उस समय तक के लिए, जब तक कि वह 65 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेता, इनमें से जो भी पूर्वतर हो , पद धारण करेगा। "

(दो) उप- धारा (7) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-

" (8) इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक सदस्य, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45 ) की धारा 2 के खण्ड (28) के अंतर्गत एक लोक सेवक समझा जाएगा। "

6.

मूल अधिनियम की धारा 10 में, -

धारा 10 का संशोधन.

(एक) उप-धारा (2) एवं (3) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः- 776(4)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

"(2) यदि पर्याप्त कारण दर्शित किया जाता है, तो भाड़ा नियंत्रण अधिकरण , पक्षकारों के आवेदन पर अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से सुनवाई को स्थगित कर सकता है तथा स्थगन की मांग करने वाले पक्षकार को युक्तियुक्त खर्च (व्यय) अदा करने का आदेश दे सकता है:

परन्तु यह कि, प्राधिकरण किसी भी पक्षकार को संपूर्ण कार्यवाही के दौरान तीन से अधिक स्थगन नहीं देगा।

(3 ) भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के समक्ष कोई भी कार्यवाही, भारतीय न्याय संहिता , 2023 (2023 का 45) की धारा 229 और 267 के अर्थ के अन्तर्गत तथा धारा 233 के प्रयोजन के लिए, विधिक कार्यवाही मानी जायेगी तथा भाड़ा नियंत्रक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 (2023 का 46) की धारा 215 और अध्याय 28 के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय माना जायेगा। "

(दो) उप- धारा (3 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-

"(4) भाड़ा नियंत्रण अधिकरण , यथाशक्य शीघ्र , मामले का निपटान करेगा तथा आवेदन या अपील प्राप्त होने की तारीख से 60 दिवस की अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास करेगाः

परंतु यह कि , जहाँ ऐसे किसी आवेदन या अपील , यथास्थिति , का निपटान 60 दिवस की उक्त अवधि के भीतर नहीं किया जा सका , तो भाड़ा नियंत्रण अधिकरण उक्त अवधि के भीतर निपटान न कर पाने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेगा।

(5) भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही में साक्षियों का साक्ष्य, शपथ पत्र पर दिया जाएगा:

परंतु यह कि, यदि भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण को यह प्रतीत होता है कि न्याय हित में किसी साक्षी को परीक्षण या प्रतिपरीक्षण के लिए 776 ( 5)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

बुलाना आवश्यक है, तो ऐसे साक्षी की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश पारित कर सकेगा। "

7.

धारा 10अ का जोड़ा जाना.

मूल अधिनियम की धारा 10 के पश्चात्, निम्निलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-

" 10अ. न्यायालय शुल्क (1 ) न्यायालय शुल्क अधिनियम , 1870 ( 1870 का 7) के उपबंध, यथास्थिति, भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत अपीलों या आवेदनों के संबंध में लागू होंगे।

(2) न्यायालय फीस की गणना के प्रयोजनों के लिए , भाड़ा नियंत्रक को कब्जे के प्रत्युद्धरण के लिए किए गये आवेदन और भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत अपील के ज्ञापन को, भवन स्वामी और किराएदार के मध्य एक वाद समझा जाएगा।

(3) भाड़ा नियंत्रक के समक्ष प्रस्तुत आवेदन के लिए न्यायालय शुल्क वही होगा , जैसा कि दीवानी ( सिविल) न्यायालय में प्रस्तुत एक अंतर्वर्ती आवेदन के लिए होता है। " 776(6)

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धारा 12 का संशोधन.

8.

मूल अधिनियम की धारा 12 के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-

" 12. किरायेदार का अधिकार. प्रत्येक किरायेदार को निम्नानुसार अधिकार प्राप्त होंगे: - (1 ) अभिधृति प्रारंभ होने पर करारनामा की एक प्रति प्राप्त करने का अधिकार ।

(2) भवन स्वामी को किये गये भुगतान के लिए पावती प्राप्त करने का अधिकार , चाहे यह भुगतान सुरक्षा निधि, भाड़ा या अन्य किसी से संबंधित हो।

(3) प्रवेश के पूर्व वास सुविधा अच्छी और वासयोग्य स्थिति मेंप्राप्त करने का अधिकार।

(4) भाड़ा नियमित रूप से भुगतान किये जाने के अध्यधीन तथा वास सुविधा का उसी प्रयोजन हेतु जिसके लिए वह भाड़े पर प्रदान किया गया था, उपयोग किये जाने के अध्यधीन , वास सुविधा के कब्जे का निर्विघ्न्न भोग का अधिकारः

(5) समस्त सुविधायें तथा साधन , जो वास सुविधा का भाग हो, को सर्वथा कार्यशील एवं क्रियाशील स्थिति में पाने काअधिकार ।

(6) भवन स्वामी द्वारा वास सुविधा का वार्षिक रख - रखाव एवं अनुरक्षण कराये जाने का अधिकार या भवन स्वामी द्वारा वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति कर वार्षिक रखरखाव हेतु कार्य करवाने का अधिकार , ऐसी प्रतिपूर्ति, अधिभोग के ग्यारह माह के प्रत्येक खण्ड के पश्चात् एक माह के भाड़े से अधिक नहीं होगी।

(7) बिजली और जल जैसी आवश्यक आपूर्ति, भवन स्वामी या उसके अभिकर्ता द्वारा जानबूझकर नहीं रोके जाने कीगारंटी।

(8) धारा 12अ के अंतर्गत भवन स्वामी के अधिकारों के अध्यधीन अभिधृति की सुरक्षा । " 776( 7)

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मूल अधिनियम की धारा 12 के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-

9.

धारा 12अ, 12 ब तथा 12स का जोड़ा जाना.

"12अ. भवन स्वामी के अधिकार. प्रत्येक भवन स्वामी निम्नलिखित अधिकारों के हकदार होंगे: - ( 1 ) वास सुविधा पर स्वामित्व की सुरक्षा, चाहे किरायेदार की अभिधृति की अवधि जो भी हो ।

(2) सुरक्षा निधि, जो तीन माह के भाड़े से अधिक राशि की नहीं होगी, मांगने और प्राप्त करने का अधिकार।

(3) करारनामे में सहमति के अनुसार, देय तिथि पर या उसके पूर्व नियमित रूप से भाड़ा प्राप्त करने का अधिकार।

(4) करारनामे के अनुसार भाड़े में वार्षिक वृद्धि प्राप्त करने का अधिकार , जहाँ मासिक भाड़ा ₹ 2000/- या इससे कम हो, ऐसे प्रकरणों में 5 % से अधिक नहीं होगा तथा अन्य समस्त प्रकरणों में 10 % से अधिक नहीं होगा।

(5) किरायेदार द्वारा उपयोग कि जाने वाली बिजली , पानी आदि जैसी आपूर्तियों में किसी मूल्यवृद्धि की तत्स्थानी राशि मांगने तथा प्राप्त करने का अधिकार ।

(6) किरायेदार की पूर्व सहमति से किरायेदार अथवा उनके परिवार के किसी ऐसे वयस्क पुरूष सदस्य , जिसके किरायेदार के साथ रहने की जानकारी हो , की उपस्थिति में दिन के दौरान वास- सुविधा के निरीक्षण का अधिकार ।

(7) वास सुविधा में वृद्धि करना तथा/या सुधार करना तथा/या विस्तार करना तथा/या सुविधाओं में वृद्धि का अधिकारः परंतु, यदि यह वृद्धि/ विस्तार किरायेदार के परामर्श के बिना किया गया हो, तो भवन स्वामी को भाड़े में वृद्धि का अधिकार नहीं होगा।

(8) वास सुविधा के वार्षिक रख - रखाव, अपनी सुविधा के अनुसार कराने का अधिकार , या व्यय की प्रतिपूर्ति के विरुद्ध किरायेदार को वास सुविधा के वार्षिक रख- रखाव कराने की अनुमति देने के विकल्प का अधिकार , ऐसी प्रतिपूर्ति, एक माह के भाड़े से अधिक नहीं होगी । 776(8)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

(9) न्याय संगत और ठोस आधार पर किसी भी समय भाड़ा नियंत्रक को भाड़ा तथा/या सुरक्षा निधि में पुनरीक्षण करवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार।

( 10 ) किरायेदार द्वारा जानबूझकर, उपेक्षापूर्वक या अन्य कारणों से जिसमें किरायेदार का दोष हो, वास सुविधा को क्षति पहुंचाये जाने पर भाड़ा नियंत्रक को उचित क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार ।

(11 ) निम्नलिखित आधार पर किरायेदार को बेदखल करवाने हेतु भाड़ा नियंत्रक से प्रार्थना करने का अधिकारः-

(क) यदि किरायेदार भाड़ा तथा/या अन्य देयकों के भुगतान करने में आदतन व्यतिक्रमी है।

(ख) यदि किसी भी कारण से, किरायेदार वास सुविधा को व्यापक क्षति पहुंचाता है या ऐसे किये जाने की अनुमति देता है ।

(ग) यदि किरायेदार वास सुविधा का उपयोग , जिस प्रयोजन ( प्रयोजनों) के लिए भाड़े पर दिया गया था, उससे भिन्न किसी प्रयोजन हेतु करता है।

(घ) यदि किरायेदार सामाजिक उपताप बन जाता है।

(ड. ) यदि किरायेदार को किसी न्यायालय द्वारा नैतिक अधमता से युक्त किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया हो ।

(च) वृहद स्तर पर सुधार कार्य करने हेतु , जो किरायेदार के मकान में रहते हुए करना संभव नहीं है।

(छ) किरायेदार को लिखित में 3 माह का नोटिस देने पर, यदि वास सुविधा स्वयं के अधिभोग के लिए तथा/या परिवार के किसी सदस्य ( जिसमें पति-पत्नी, मां-बाप , पुत्र, पुत्री, दामाद, पुत्र-वधु सम्मिलित है) के अधिभोग के लिए अपेक्षित हो।

(ज) किरायेदार को लिखित में 6 माह का नोटिस देकर , कोई कारण समनुदेशित करने की बाध्यता के बिना, किन्तु इस शर्त पर कि वास सुविधा को तत्पश्चात् कम से कम 12 माह के लिये ऊंचे भाड़े पर अन्य किसी को किराये पर नहीं देगाः

परंतु , निम्नलिखित विशेष श्रेणी के भवन स्वामियों को तथा/या उनके पति/पत्नी को यदि अपनी 776 ( 9)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

वास सुविधा स्वयं के उपयोग के लिए वापस चाहिए हो तो , ऐसी स्थिति में सूचना की अवधि मात्र एक माह की होगी: -

सेवारत या सेवानिवृत्त शासकीय सेवक, विधवा , सशस्त्र बलों के कार्मिक , शारीरिक या मानसिक विकलांगता को प्राप्त व्यक्ति एवं वरिष्ठ नागरिक (65 वर्ष की आयु के ऊपर) ।

(12) वसूली के लिए किसी कार्यवाही में , जहाँ किरायेदार बेदखली के लिए दावे का प्रतिवाद करता है, तो भवन स्वामी, कार्यवाही के किसी भी स्तर पर, भाड़ा नियंत्रक को धारा 5 के अधीन किरायेदार को देय किराये का भुगतान करने का निर्देश देने के लिए आवेदन कर सकेगा और भाड़ा नियंत्रक, किरायेदार को धारा 5 की उप - धारा (3) के खण्ड ( क) के प्रावधानों के अनुसार , किरायेदार से ऐसे भुगतान के साथ अन्य सभी प्रभारों और भुगतान में ऐसे विलंब के कारण दण्डात्मक प्रभारों , यदि कोई हो , के संदाय करने का आदेश दे सकेगा।

(

13) अभिधृति अवधि के अंत में , मौसमी और समय के कारण होने वाली घिसावट (दोषों) के संतुलन के लिए भत्ता प्रदान करते हुए , अच्छे आकार तथा स्थिति में जैसा अभिधृति के प्रारंभ होने पर था , वास सुविधा वापस प्राप्त करने का अधिकारः परंतु-

(क) भाड़े से संबंधित विषय में , भवन स्वामी और किरायेदार के हितों की व्याख्या में किसी अस्पष्टता की दशा में ऐसी अस्पष्टता का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा जिससे किरायादार को लाभ हो।

(ख) किरायेदार के वास सुविधा के कब्जे के प्रत्यावर्तन से संबंधित किसी भी विषय में , भवन स्वामी और किरायेदार के हितों की व्याख्या में किसी अस्पष्टता की दशा में ऐसी अस्पष्टता का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा जिससे भवन स्वामी कोलाभ हो। " 776( 10)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

" 12ब. भवन स्वामी की बाध्यताएँ. भवन स्वामी की बाध्यताएँ निम्नानुसार होगी:- (1 ) इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित अनुसार, सम्यक् रूप से नोटरी कृत करारनामा निष्पादित कर लेने के पश्चात् ही , किरायेदार को प्रवेश प्रदान करना ।

(2) किरायेदार के प्रवेश के 7 दिवस के भीतर स्थानीय पुलिस थाने के समक्ष निर्धारित प्रारूप- ग पर जानकारी प्रस्तुत करना।

(3) किरायेदार से प्राप्त समस्त भुगतान की उचित पावती प्रदान करना।

(4) धारा 12स में विनिर्दिष्ट बाध्यताओं को पूरा करने के अध्यधीन , किरायेदार को वास सुविधा एवं धारा 12 में उल्लिखित समस्त अधिकार के सुखमय भोग करने कीअनुमति देना ।

(5) वास सुविधा तथा परिसर को हर समय अच्छी तथा वासयोग्य स्थिति में रखना।

(6) नगरीय निकाय द्वारा निर्धारित रीति से घरेलू कूड़ा का निराकरण कराना तथा किरायेदारी के प्रारंभ में किरायेदार को इस व्यवस्था (रीति) की जानकारी देना।

(7) निर्माण में त्रुटियों से तथा/या आवास में समय के कारण आने वाली प्राकृतिक घिसावट (प्राकृतिक दोषों) के समस्त दीर्घ संरचनाओं में तत्परता से उचित सुधार करना।

(8) राज्य विद्युत मंडल द्वारा जहाँ कहीं भी अनुमति दी जाये , किरायेदार द्वारा उपभोग किए गये विद्युत के अभिलेखन के लिए पृथक एवं सही मीटर उपलब्ध कराना।

(9) किसी भी स्थिति में, जानबूझकर वास सुविधा के विद्युत एवं जल जैसी आवश्यक आपूर्ति को बंद नहीं करना, न ही किसी दूसरे से ऐसा करवाना।

(10) कभी भी जब किरायेदार अनुपस्थित हो , या केवल परिवार के महिला सदस्य उपस्थित हों और ऐसे प्रवेश हेतु आपत्ति कर रहीं हों ,तो निरीक्षण हेतु वास सुविधा में अपने प्रवेश के अधिकार का प्रयोग नहीं करना। 776(11)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

(11 ) वास सुविधा के वार्षिक रख - रखाव का कार्य करना, या अधिकतम एक माह के किराये की राशि के बराबर , वास्तविक आधार पर उसके व्यय की अनुमति देकर किरायेदार को कार्य करवाने की अनुमति देना।

(12) वास सुविधा को खाली कराने हेतु किरायेदार को बेदखल करने का दबाव बनाने के लिए कभी भी अवैधानिक तरीकों का प्रयोग नहीं करना।

(13) अभिधृति की समाप्ति के पूर्व किरायेदार को सुरक्षा निधि की वापसी करना।

12स. किरायेदार की बाध्यताएँ. किरायेदार की बाध्यताएँ निम्नानुसार होगी: - (1 ) वास सुविधा पर भवन स्वामी के स्वामित्व को सदैव मान्यता देना , तथा धारा 12अ में विनिर्दिष्ट अधिकारों का बिना आपत्ति के सम्मान करना।

(2) वास सुविधा जिस प्रयोजन हेतु भाड़े पर प्रदान की गई है, केवल उसी हेतु उसका उपयोग करना।

(3) भवन स्वामी की अनुमति से या अनुमति के बिना, धन संबंधी प्रतिफल ( भाड़ा ) के लिये या धन संबंधी प्रतिफल (भाड़ा) के बिना, औपचारिक या अनौपचारिक रूप से , कभी भी वास सुविधा के किसी भी भाग को उप- अभिधृति पर प्रदान नहीं करना।

(4) वास सुविधा के भाग के वास स्थान तथा समस्त विद्युत, स्वच्छता एवं अन्य उपकरणों का संरक्षण एवं सुरक्षा करना।

(5) भवन स्वामी से प्रतिपूर्ति की अपेक्षा रखे बिना, समय- समय पर छोटे - मोटे सुधार कार्य और आवर्ती प्रतिस्थापनायें आवश्यक होने पर करना।

(6) वास सुविधा को सर्वथा स्वच्छ और स्वास्थ्यकर स्थिति में रखना तथा आवास में या चारों ओर वायु, जल तथा/ या ध्वनि प्रदूषण न करना जिससे इस तरह के शांतिपूर्ण, सहजीविका को क्षति पहुंचे।

(7) वास सुविधा के कूड़े को, नगरपालिका द्वारा निर्धारित रीति के अनुसार विसर्जित करना तथा बाहर 776 ( 12)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

रास्तों पर या सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा नहीं फेंकना।

(8) भवन स्वामी के साथ तय की गई रीति में सुरक्षा निधि, भाड़ा तथा अन्य देयकों का पूरा और नियमित भुगतान करना ।

(9) मौसमी या समय के कारण होने वाली प्राकृतिक घिसावट (प्राकृतिक दोषों) को छोड़कर , जानबूझकर या अन्यथा वास सुविधा में हुई, किसी भी क्षति के लिए भवन स्वामी को क्षतिपूर्ति प्रदान करना।

(10) अभिधृति की अवधि के दौरान सामाजिक उपताप नहीं बनना।

स्पष्टीकरण: - "सामाजिक उपताप ' से अभिप्रेत है, निम्नलिखित कार्यों में से कोई या ऐसे समस्त कृत्य करना या करवानाः नशा कर झगड़ना , पत्नी को पीटना, वेश्यावृति , आदतन देर रात तक हल्ला करते रहना या/ एवं अन्यथा अत्यधिक शोर -शराबा करना जो आस- पड़ोस को परेशान करें , सामान्य सुविधायें जैसे सीढ़ी आदि स्थानों पर थूकना, घर के भीतर खतरनाक पदार्थ या बेहद बदबूदार या ऐसे पदार्थ जिनसे कीड़े बढ़ते हों जमा करना, कूड़ा यहाँ- वहाँ बिखेरना या गन्दा पानी फैला देना, अनियमित स्थानों पर लघु/दीर्घ शंका करना या कराना जिससे वातावरण दूषित होता हो , या/एवं अन्य कोई कृत्य जिससे आस -पड़ोस को क्षति तथा बुरा सामाजिक प्रभाव पड़ता हो। "

10.

अनुसूची 1 , 2 , 3 अनुसूची1 , 2 , 3 एवं 4 का लोप किया जाये ।

एवं 4 का लोप किया जाना.

776( 13)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

उद्देश्यों और कारणों का कथन

यतः , छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम , 2011 (क्र. 19 सन् 2012) की धारा 6 के अनुसरण में, भारत के संविधान के अनुच्छेद 323 - ख के अनुसार भाड़ा नियंत्रण अधिकरण , एक न्यायालय है , जो कि भाड़ा नियंत्रक द्वारा पारित किसी आदेश से व्यथित समस्त व्यक्तियों की शिकायतों पर विचार करने हेतु अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।

और यतः , आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भवन स्वामी द्वारा परिसर को किराये पर देने के व्यवसाय में आने वाली समस्याओं के समाधान हेतु एक आदर्श भाड़ा नियंत्रण कानून के रूप में " आदर्श किरायेदारी अधिनियम , 2021 " लागू किया गया है तथा सभी राज्यों को अपनी - अपनी परिस्थितियों के अनुसार अधिनियम में आवश्यक संशोधन या रूपातंरण करने के लिए निर्देशित किया गया है। उक्त अधिनियम बिना किसी अतिरिक्त संशोधन के उत्तरप्रदेश में लागू किया गया है तथा तमिलनाडु में कतिपय संशोधन के पश्चात् लागू किया गया है एवं वर्तमान में मध्यप्रदेश, बिहार आदि राज्यों में लागू करने की प्रक्रिया जारी है । इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य भवनस्वामियों को अपनी खाली पड़ी संपत्तियों को किराये पर देने के लिए प्रोत्साहित करना तथा भाड़े (किराये ) से संबंधित विवादों एवं शिकायतों का न्यायनिर्णयन किया जाना है। इस अधिनियम में , भवनस्वामी एवं किराएदार दोनों के हितों एवं दायित्वों का निर्धारण किया गया है, ताकि भवनस्वामी एवं किराएदार दोनों के हितों की रक्षा की जा सके।

वर्तमान में, छत्तीसगढ़ राज्य में "छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम , 2011 ( क्र.19 सन् 2012 ) " लागू है । उक्त अधिनियम की धाराओं में भारत सरकार द्वारा लागू " आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के महत्वपूर्ण प्रावधानों को समाहित किया जाना है ।

अतएव , छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम , 2011 की कतिपय धाराएँ अर्थात् धारा 2 , 5, 6, 10, 12, में संशोधन तथा नवीन धारा 4अ एवं 6 (2)( क) का अंतःस्थापन किया जाना प्रस्तावित है।

अतः यह विधेयक प्रस्तुत है।

ओ.पी. चौधरी

आवास एवं पर्यावरण मंत्री रायपुर,

(भारसाधक सदस्य) दिनांक 10 जुलाई , 2026 776 ( 14)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

उपाबंध

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम , 2011 (क्र. 19 सन् 2012 ) का उद्धरण धारा

क्र.

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम 2011 अनुसार प्रस्ताव

1

प्रारंभ संक्षिप्त नाम एवं

2 प्रोद्धरण

छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011

3 धारा-2 खण्ड (2) छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 ( क्र . 19 सन् 2012) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में, - खण्ड (2) "करारनामा" से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित किये गये अनुसार, भवन स्वामी तथा किरायेदार द्वारा निष्पादित लिखित कारारनामा;

4 धारा-2 खण्ड (5) खण्ड (5) " भवन स्वामी" से अभिप्रेत है , ऐसा व्यक्ति जो किसी वास सुविधा का भाड़ा (किराया) , चाहे अपने स्वयं के लेखे या किसी अन्य व्यक्ति के लेखे या उसकी ओर से या उसके लाभ के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के न्यासी , पालक अथवा रिसीवर की हैसियत से तत्समय प्राप्त कर रहा है, या प्राप्त करने का हकदार है, या यदि अभिधारी (किरायेदार ) को वास सुविधा भाड़े (किराये) पर दिया गया है तो इस प्रकार भाड़ा ( किराया) प्राप्त करेगा या भाड़ा (किराया ) प्राप्त करने का हकदार होगा;

धारा-2-खण्ड (8) खण्ड (8 ) " पुराना अधिनियम " से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ स्थान नियंत्रण अधिनियम, 1961 (क्र. 41 सन् 1961 ) सहित समस्त संशोधन अधिनियम;

धारा-2 खण्ड(13) खण्ड ( 13) " सामाजिक उपताप" से अभिप्रेत है , ऐसा किरायेदार जो सामान्यतः वास सुविधा का उपयोग , अनुसूची 4 के सरल क्रमांक 10 में सूचीबद्ध कोई या समस्त क्रियाओं हेतु करता हो;

776( 15)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

5 धारा - 4

मूल अधिनियम की धारा 4 ( 1 ) संपत्ति अंतरण अधिनियम , 1882 (केन्द्रीय अधिनियम 1882 का 4) की धारा 107 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी लिखित में अनुबंध ( करार) निष्पादित किये जाने के सिवाय, कोई भी व्यक्ति, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पश्चात् किसी भी वास सुविधा को भाड़े पर नहीं देगा या नहीं लेगा.

(2) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पूर्व जहां अभिधृति प्रारंभ हुई हो , तो इसके संबंध में-

(क) यदि कोई अनुबंध पहले ही निष्पादित हो गया हो तो उसे भाड़ा नियंत्रक के समक्ष दर्ज (फाइल) किया जायेगा.

(ख ) यदि कोई अनुबंध निष्पादित नहीं हुआ हो तो भवन स्वामी और किरायेदार, उस अभिधृति से संबंधित अनुबंध लिखित में निष्पादित करेंगे और उसे भाड़ा नियंत्रक के समक्ष यथावत् दर्ज ( फाइल ) करेंगे :

परंतु जहां खण्ड (क) के अधीन भवन स्वामी और किरायेदार संयुक्त रूप से अनुबंध दर्ज करने में विफल रहते हों , या खण्ड (ख ) के अनुसार अनुबंध निष्पादित करने में विफल रहते हों, तो ऐसे भवन स्वामी और किरायेदार पृथक-पृथक रूप से ऐसी अभिधृति के बारे में जानकारी दर्ज करेंगे.

(3) उप- धारा ( 1 ) में निर्दिष्ट या उप- धारा (2) के अधीन निष्पादन के लिए अपेक्षित प्रत्येक अनुबंध , ऐसे रूपविधान (फारमेट) में होगा तथा ऐसी रीति में एवं ऐसी समयावधि के भीतर दर्ज किया जायेगा जैसा कि विहित किया जाए .

6 धारा 5 उप-धारा (2)

मूल अधिनियम की धारा 5 की उप- धारा ( 2 ) जब तक कि अन्यथा सहमति न हो तब तक प्रत्येक किरायेदार , भाड़े ( किराये) का भुगतान ठीक आगामी माह जिस माह के लिए भाड़ा देय हो , के पंद्रहवें दिन तक करेगा.

7 धारा 6 उप-धारा (2)

मूल अधिनियम की धारा 6 में, उप- धारा (2) राज्य श्वसन, उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश को भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करेगा.

उप- धारा (7) अधिकरण के अध्यक्ष एवं सदस्यों की निबंधन एवं सेवा की शर्तें ऐसी होंगी, जैसा कि राज्य शासन द्वारा विहित किया जाये. " 776( 16)

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8 धारा-10

मूल अधिनियम की धारा 10

(1 ) भाड़ा नियंत्रक तथा भाड़ा नियंत्रण अधिकरण, सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 (केन्द्रीय अधिनियम 1908 का 5) में नियत प्रक्रिया से बाध्य नहीं होंगे, किन्तुं वे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए तथा इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाये गये नियमों के अन्य प्रावधांनों के अध्यधीन रहते हुए , उन्हें स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी , तथा इस अधिनियम के अंतर्गत उनके कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजन के लिए, उन्हें ऐसा समतुल्य अधिकार प्राप्त होगा जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 ( केन्द्रीय अधिनियम 1908 का 5) में निहित है , वाद या अपील के विचारण के लिए निम्नलिखित विषय संबंधित होंगे : -

(क) किसी भी व्यक्ति को समन करना तथा उपस्थिति प्रवर्तित करना तथा शपथ दिलाकर उसको परीक्षण करना;

(ख ) दस्तावेजों की खोज तथा प्रस्तुति की अपेक्षा करना ;

(ग) अपने निर्णय का पुनरीक्षण करना;

(घ) गवाहों या दस्तावेजों के परीक्षण हेतु कमीशन जारी करना;

(ङ) व्यतिक्रम या एक पक्षीय कार्यवाही हेतु याचिका खारिज करना;

(च) व्यतिक्रम के लिए किसी याचिका को खारिज करने के किसी आदेश या इसके द्वारा एक पक्षीय पारित किसी आदेश को अपास्त करना;

(छ) विधिक प्रतिनिधियों को अभिलेख पर लाना;

(ज) अन्य कोई विषय जैसा कि विहित किया जाए .

मूल अधिनियम की धारा 10

(2) भाड़ा नियंत्रण अधिकरण , लिखित में आवेदन तथा उसके लिए कारणों को अभिलिखित किये बिना , कोई भी स्थगन प्रदान नहीं करेगा.।

(3) भाड़ा नियंत्रक या भाड़ा नियंत्रण अधिकरण के समक्ष कोई भी कार्यवाही भारतीय दण्ड संहिता , 1860 ( केन्द्रीय अधिनियम 1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ के अन्तर्गत तथा धारा 196 के प्रयोजन के लिए , विधिक कार्यवाही मानी जायेगी तथा भाड़ा नियंत्रक को दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (केन्द्रीय अधिनियम 1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय छब्बीस के प्रयोजन केलिए सिविल कोर्ट माना जायेगा.

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धारा 12

9

मूल अधिनियम की धारा 12 ( 1 ) प्रत्येक किरायेदार को अनुसूची 1 के अनुसार अधिकार प्राप्त होगा. अधिकरण तथा भाड़ा नियंत्रक , सदैव किरायेदार को इन अधिकारों को सुनिश्चित कराने हेतु कार्य करेंगे.

(2) प्रत्येक भवन स्वामी को अनुसूची 2 के अनुसार अधिकार प्राप्त होगा. अधिकरण तथा भाड़ा नियंत्रक, सदैव भवन स्वामी को इन अधिकारों को सुनिश्चित कराने हेतु कार्य करेंगे :

परंतु-

(क) यदि भाड़े ( किराये ) से संबंधित किसी भी विषय में भवन स्वामी और किरायेदार के हितों में संघर्ष की स्थिति प्रकट हो , तथा/या संशय का कोई बिन्दु हो , तो उसका लाभ किरायेदार को प्राप्त होगा.

(ख) यदि वास सुविधा के कब्जे के प्रत्यावर्तन से संबंधित किसी भी विषय में भवन स्वामी और किरायेदार के हितों में संघर्ष की स्थिति प्रकट हो , तथा/या संशय का कोई बिन्दु हो , तो उसका लाभ भवन स्वामी को प्राप्त होगा.

(3) प्रत्येक भवन स्वामी पर अनुसूची 3 के अनुसार बाध्यताएं होंगी. अधिकरण तथा भाड़ा नियंत्रक, सदैव भवन स्वामी पर, इन बाध्यताओं को प्रवर्तित करने का कार्य करेंगे .

(4) प्रत्येक किरायेदार पर अनुसूची 4 के अनुसार बाध्यताएं होंगी. अधिकरण तथा भाड़ा नियंत्रक , सदैवं किरायेदार पर , इन बांध्यताओं को प्रवर्तित करने का कार्य करेंगे.

(5) भवन स्वामी द्वारा, अनुसूची 1 के अंतर्गत किरायेदार को प्राप्त अधिकारों से उसे वंचित करने का जानबूझकर किंयां गया कोई भी प्रयास या कार्य , इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध होगा जो 5000/- रुपये से अनधिक के जुमनि से या तीन माह से अनधिक कालावधि. के साधारण कारावास से या दोनों से दण्डनीय होगा

( 6) यदि किरायेदार द्वारा , अनुसूची 2 के अंतर्गत भवन स्वामी को प्राप्त अधिकारों से उसे वंचित करने का जानबूझकर किया गया कोई प्रयास या कार्य इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध होगा जो 5000/- रुपये से अधिक के, जुर्माने से या तीन माह से अनधिक कालावधि के साधारण कारावास से 776 (18)

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या दोनों से दण्डनीय होगा

( 7 ) अनुसूची 3 के अंतर्गत यदि किसी भवन स्वामी द्वारा सारहीन तथा/या अपर्याप्त कारणों से बाध्यताओं की उपेक्षा करने को कोई भी प्रयास , इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध होगा जो 5000/- रुपये से अनधिक के जुर्माने से सा तीन माह से अनधिक कालावधि के साधारण कारावास से या दोनों से दण्डनीय होगा.

(8) अनुसूची 4 के अन्तर्गत यदि किसी किरायेदार द्वारा भारहीन तथा/ या अपर्याप्त कारणों से बाध्यताओं की उपेक्षा करने का कोई भी प्रयास , इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध होगा जो 5000/- रुपये से अनधिक के जुर्माने से या तीन माह से अनधिक कालावधि के साधारण कारावास से या दोनों से दण्डनीय होगा.

10

अनुसूची 1 [ अधिनियम की धारा 12 ( 1 ) देखिए] अधिनियम के अंतर्गत किरायेदार को प्राप्त अधिकार.-

स.क्र.

अधिकार

1 अभिधृति प्रारंभ होने पर करारनामा की एक प्रति प्राप्त करने का अधिकार ।

2 भवन स्वामी को किये गये भुगतान के लिए पावती प्राप्त करने का अधिकार , चाहे यह भुगतान सुरक्षा निधि, भाड़ा या अन्य किसी से संबंधित हो।

3 प्रवेश के पूर्व वास सुविधा अच्छी और वासयोग्य स्थिति में प्राप्त करने का अधिकार ।

4 भाड़ा नियमित रूप से भुगतान किये जाने के अध्यधीन तथा वास सुविधा का उसी प्रयोजन हेतु जिसके लिए वह भाड़े पर प्रदान किया गया था, उपयोग किये जाने के अध्यधीन , वास सुविधा के कब्जे का निर्विघ्न्न भोग का अधिकारः

परंतु किरायेदार की मृत्यु अथवा मानसिक रोग से पीड़ित होने की स्थिति में उसकी विधवा/पत्नी को , उसके पति द्वारा निष्पादित करारनामा में अंतर्विष्ट समस्त अधिकार एवं बाध्यता अपने पर लेने के लिए एक उप- करारनामा के माध्यम से उसके द्वारा उल्लेख करने पर , स्वमेव किरायेदार माना जायेगा.

5 समस्त सुविधायें तथा साधन, जो वास सुविधा का भाग हो , को सर्वथा कार्यशील एवं क्रियाशील स्थिति में पाने का अधिकार ।

6 भवन स्वामी द्वारा वास सुविधा का वार्षिक रख - रखाव एवं अनुरक्षण कराये जाने का अधिकार या भवन स्वामी द्वारा वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति कर वार्षिक रखरखाव हेतु कार्य करवाने का अधिकार , ऐसी प्रतिपूर्ति, अधिभोग के ग्यारह माह के प्रत्येक खण्ड के पश्चात् एक माह के भाड़े से अधिक नहीं होगी। 776( 19)

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7 बिजली और जल जैसी आवश्यक आपूर्ति, भवन स्वामी या उसके अभिकर्ता द्वारा जानबूझकर नहीं रोके जाने की गारंटी।

8 अभिधृति की सुरक्षा अनुसूची 2 में सम्मिलित भवन स्वामी के अधिकारों का हनन न हो रहा हो। "

अनुसूची 2

[ अधिनियम की धारा 12 (2) देखिए] अधिनियम के अंतर्गत भवनस्वामी को प्राप्त अधिकार.-

स.क्र.

अधिकार

1 वास सुविधा पर स्वामित्व की सुरक्षा , चाहे किरायेदार की अभिधृति की अवधि जो भी हो । 2 सुरक्षा निधि, जो तीन माह के भाड़े से अधिक राशि की नहीं होगी, मांगने और प्राप्त करने का अधिकार।

3 करारनामे में सहमति के अनुसार, देय तिथि पर या उसके पूर्व नियमित रूप से भाड़ा प्राप्त करने का अधिकार ।

4 करारनामे के अनुसार भाड़े में वार्षिक वृद्धि प्राप्त करने का अधिकार , जहाँ मासिक भाड़ा ₹ 2000/ - या इससे कम हो, ऐसे प्रकरणों में 5 % से अधिक नहीं होगा तथा अन्य समस्त प्रकरणों में 10% से अधिक नहीं होगा।

5. बिजली, पानी आदि आपूर्तियों के किसी मूल्यवृद्धि की तत्स्थानी राशि किरायेदार से मांगने तथा प्राप्त करने का अधिकार.

6. दिन के समय वास सुविधा के निरीक्षण का अधिकार, यदि किरायेदार से पहले से ही नियत किया गया हो , किरायेदार या उसके परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य जिसे जानता हो कि वह उसके साथ रहता है , की उपस्थिति में किया जा रहा हो .

7. वास सुविधा में वृद्धि करना तथा/ या सुधार करना तथा/या विस्तार करना तथा/या सुविधाओं में वृद्धि का अधिकार . परंतु यदि यह वृद्धि/विस्तार किरायेदार की सहमति के बिना किया गया हो तो भवन स्वामी को भाड़े में वृद्धि प्रवर्तन का अधिकार नहीं होगा .

8. वास सुविधा के वार्षिक रख - रखाव , अपनी सुविधा के अनुसार कराने का अधिकार , या व्यय की प्रतिपूर्ति के विरुद्ध किरायेदार को वास सुविधा के वार्षिक रख- रखाव कराने की अनुमति देने के विकल्प का अधिकार , ऐसी प्रतिपूर्ति, एक माह के भाड़े से अधिक नहीं होगी.

776 (20)

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9. न्याय संगत और ठोस आधार पर कभी भी भाड़ा नियंत्रक को भाड़ा तथा/ या सुरक्षा निधि में पुनरीक्षण करवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार ।

10. किरायेदार द्वारा जानबूझकर उपेक्षापूर्वक या अन्य कारणों से जिसमें किरायेदार का दोष हो , वास सुविधा को क्षति पहुंचाये जाने पर भाड़ा नियंत्रक को उचित क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार.

11. निम्नलिखित आधार पर किरायेदार को बेदखल करवाने हेतु भाड़ा नियंत्रक से प्रार्थना करने काअधिकार:

(क) यदि किरायेदार भाड़ा तथा/ या अन्य देयकों के भुगतान करने में आदतन व्यतिक्रमी है। (ख ) यदि किसी भी कारण से, किरायेदार वास सुविधा को व्यापक क्षति पहुंचाता है या ऐसे किये जाने की अनुमति देता है ।

(ग) यदि किरायेदार वास सुविधा का उपयोग, जिस प्रयोजन (प्रयोजनों) के लिए भाड़े पर दिया गया था, उससे भिन्न किसी प्रयोजन हेतु करता है।.

(घ ) यदि किरायेदार सामाजिक उपताप बन जाता है।

(ड. ) यदि किरायेदार भारतीय दंड संहिता की किसी धारा के अंतर्गत दोष सिद्ध हो जाता है। (च ) वृहद स्तर पर सुधार कार्य करने हेतु , जो किरायेदार के मकान में रहते हुए करना संभव नहीं है।

(छ) किरायेदार को 3 माह पूर्व लिखित सूचना देकर , यदि वास सुविधा स्वयं के अधिभोग के लिए तथा/ या परिवार के किसी सदस्य ( जिसमें पति- पत्नी, मां- बाप, पुत्र , पुत्री, दामाद, पुत्र- वधु सम्मिलित है) के अधिभोग के लिए अपेक्षित हो।

(ज) किरायेदार को 6 माह पूर्व लिखित सूचना देकर , कोई कारण बताने की बाध्यता के बिना , किन्तु इस शर्त पर कि वास सुविधा को तत्पश्चात् कम से कम 12 माह तक ऊंचे भाड़े पर अन्य किसी को किराये पर नहीं देगाः

परंतु , निम्नलिखित विशेष श्रेणी के भवन स्वामियों को तथा/ या उनके पति/ पत्नी को यदि अपनी वास सुविधा स्वयं के उपयोग के लिए वापस चाहिए हो तो , ऐसी स्थिति में सूचना की अवधि मात्र एक माह की होगी: - सेवारत या सेवानिवृत्त शासकीय सेवक , विधवा, सशस्त्र बलों के कार्मिक , शारीरिक वा मानसिक विकलांगता को प्राप्त व्यक्ति एवं वरिष्ठ नागरिक ( 65 वर्ष की आयु के ऊपर) ।

12. अभिधृति अवधि के अंत में मौसमी और समय के कारण होने वाली घिसावट' ( दोषों) के संतुलन के लिए रक्षण ( भत्ता ) देते हुए , अच्छे आकार में तथा अच्छी स्थिति में जैसा अभिधृति के प्रारंभ होने पर था , उसी अवस्था में वास सुविधा वापस प्राप्त करने का अधिकार.

776 ( 21)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

अनुसूची 3

[ अधिनियम की धारा 12 ( 3 ) देखिए]

अधिनियम के अंतर्गत भवन स्वामी की बाध्यता

स.क्र .

बाध्यता

1 इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित अनुसार , सम्यक् रूप से नोटरी कृत करारनामा निष्पादित कर लेने के पश्चात् ही , किरायेदार को प्रवेश प्रदान करना।

2. किरायेदार के प्रवेश के 7 दिवस के भीतर स्थानीय पुलिस थाने के समक्ष निर्धारित प्रारूप -ग पर जानकारी प्रस्तुत करना।

3. किरायेदार से प्राप्त समस्त भुगतान की उचित पावती प्रदान करना।

4. किरायेदार को, जब तक कि वह अनुसूची 4 में निर्दिष्ट अपनी बाध्यताओं को पूरा नहीं करता , वास सुविधा का अनुसूची 1 में सम्मिलित समस्त अधिकार का सुखमय भोग करने कीअनुमति देना.

5. वास सुविधा तथा परिसर को अच्छी अवस्था में तथा समय पर सुधार कर वासयोग्य बनाये रखना.

6. नगरीय निकाय द्वारा निर्धारित रीति से घरेलू कूड़ा का निराकरण कराना तथा किरायेदारी के प्रारंभ में किरायेदार को इस व्यवस्था (रीति) की जानकारी देना।

7. निर्माण में त्रुटियों से तथा/या आवास में समय के कारण आने वाली प्राकृतिक घिसावट (प्राकृतिक दोषों) के समस्त दीर्घ संरचनाओं में तत्परता से उचित सुधार करना।

8. राज्य विद्युत मंडल द्वारा जहाँ कहीं भी अनुमति दी जाये , किरायेदार द्वारा उपभोग किए गये विद्युत के अभिलेखन के लिए पृथक एवं सही मीटर उपलब्ध कराना।

9. किसी भी स्थिति में , जानबूझकर वास सुविधा के विद्युत एवं जल जैसी आवश्यक आपूर्ति को बंद नहीं करना, न ही किसी दूसरे से ऐसा करवाना।

10. कभी भी जब किरायेदार अनुपस्थित हो , या केवल परिवार के महिला सदस्य उपस्थित हों और ऐसे प्रवेश हेतु आपत्ति कर रहीं हों , तो निरीक्षण हेतु वास सुविधा में अपने प्रवेश के अधिकार का प्रयोग नहीं करना।

11. वास सुविधा के वार्षिक रख - रखाव का कार्य करना, या अधिकतम एक माह के किराये की राशि के बराबर , वास्तविक आधार पर उसके व्यय की अनुमति देकर किरायेदार को कार्य करवाने की अनुमति देना।

12 वास सुविधा को खाली कराने हेतु किरायेदार को बेदखल करने का दबाव बनाने के लिए कभी भी गैर कानूनी तरीकों का प्रयोग नहीं करना।

13 अभिधृति की समाप्ति के पूर्व किरायेदार को सुरक्षा निधि की वापसी करना। 776 (22)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026

अनुसूची 4

[ अधिनियम की धारा 12 (4 ) देखिए]

अधिनियम के अंतर्गत किरायेदार की बाध्यता

बाध्यता

स.क्र .

1. वास सुविधा पर भवन स्वामी के स्वामित्व को सदैव मान्यता देना , तथा अनुसूची 2 में निर्दिष्ट उसके अधिकारों का बिना आपत्ति के सम्मान करना.

2. वास सुविधा जिस प्रयोजन हेतु भाड़े पर प्रदान किया गया है, केवल उसी हेतु उसका उपयोग करना.

3. भवन स्वामी की अनुमति से या बिना अनुमति के , धन संबंधी प्रतिफल ( भाड़ा) के लिये या धन संबंधी प्रतिफल ( भाड़ा ) के बिना , औपचारिक या अनौपचारिक रूप से, कभी भी वास सुविधा के किसी भी भाग को उप- अभिधृति (उप किराया) पर प्रदान नहीं करना

4. वास सुविधा का भाग जिसमें समस्त विद्युत , स्वच्छता एवं अन्य उपकरणों का संरक्षण एवं सुरक्षा करना.

5. भवन स्वामी से प्रतिपूर्ति की चाह रखे बिना, छोटे-मोटे सुधार कार्य और आवर्ती प्रतिस्थापनायें आवश्यक होने पर समय - समय पर करना,

6. वास सुविधा को सर्वथा साफ और स्वच्छ रखना , वायु , जल तथा/ या ध्वनि प्रदूषण न करना तथा वास सुविधा में वातावरण को शांत , सहजीविका के अनुकूल बनाये रखना.

7. वास सुविधा के कूड़े को नगरपालिका द्वारा निर्धारित रीति के अनुसार विसर्जित करना तथा बाहर रास्तों पर या सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा नहीं फेंकना .

8. भवन स्वामी के साथ तय की गई व्यवस्था की रीति में सुरक्षा निधि , भाड़ा तथा अन्य देयकों का पूरा और नियमित भुगतान करना.

9. मौसमी या समय के कारण होने वाली प्राकृतिक घिसावट (प्राकृतिक दोषों) को छोड़कर, जानबूझकर या अन्यथा वास सुविधा में हुई . किसी भी क्षति के लिए भवन स्वामी को क्षतिपूर्ति प्रदान करना.

10. अभिधृति की अवधि में सामाजिक उपताप नहीं बनना.

स्पष्टीकरण : - " सामाजिक उपताप से अभिप्रेत है , निम्नलिखित में से कोई या ऐसे समस्त कृत्य करना या करवानाः नशा कर झगड़ना, पत्नी को पीटना, वेश्यावृत्ति , आदतन द्रेर रात तक हल्ला करते रहना या/ एवं अन्यथा अत्यधिक शोर - शराबा करना जो आस- पड़ोस को परेशान करें, सामान्य सुविधायें जैसे सीढ़ी आदि स्थानों पर थूकना , घर के भीतर खतरनाक पदार्थ या बेहद बदबूदार या ऐसे पदार्थ जिनसे कीड़े बढ़ते हों जमा करना , कूड़ा यहां- वहां बिखेरना या गन्दा पानी फैला देना , अनियमित स्थानों पर लघु/दीर्घ शंका करना या कराना 776 ( 23)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026

जिससे वातावरण दूषित होता हो , या/ एवं अन्य कोई कृत्य जिससे आस- पड़ोस को क्षति तथा बुरा सामाजिक प्रभाव पड़ता हो.

दिनेश शर्मा सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2026.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 15 July 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-07-15.388/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-07-15.388.