10000
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छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 389 ]
नवा रायपुर , बुधवार, दिनांक 15 जुलाई 2026 आषाढ़ 24 , शक 1948
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
नवा रायपुर अटल नगर, मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई , 2026 (आषाढ़ 23, 1948)
क्रमांक-9443 /वि.स./विधान/ 2026.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 10 सन् 2026) जो मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई , 2026 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
777 778
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 10 सन् 2026)
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026.
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2005 (क्र. 13 सन् 2005 ) को और संशोधित करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
1.
संक्षिप्त नाम
तथाप्रारंभ.
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) अधिनियम, 2026 कहलाएगा ।
(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा ।
धारा 2 का संशोधन.
2. छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2005 (क्र.13 सन् 2005 ) , (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में,-
(एक) खण्ड ( 8 ) का लोप किया जाये।
(दो) खण्ड (25 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
" (25क) "रक्षित निधि" से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा संधारित रक्षित निधि। "
धारा 7 का संशोधन .
3.
मूल अधिनियम की धारा 7 में, -
(1 ) उप- धारा (1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" ( 1 ) वह स्थापित करेगा , राज्य में ही मुख्य परिसर, दूर परिसर केन्द्र एवं अध्ययन केन्द्र। "
(2) उप- धारा (2) का लोप किया जाये ।
(3) उप- धारा (3 ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्: -
"( 3 ) वह राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम निर्मित क्षेत्र, आधारभूत संरचना तथा अन्य सुविधाएँ प्राप्त करेगा तथा स्वामित्व संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करेगा। "
(4) उप- धारा (4) के खण्ड (ग) एवं (घ) के स्थान पर, निम्नलिखित 778 ( 1)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्: -
" (ग) पर्याप्त उपकरण, कम्प्यूटर, फर्नीचर तथा अन्य आवश्यक सामग्रियाँ, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अथवा किसी अन्य सक्षम नियामक प्राधिकरण द्वारा विहित विनियमों या मानकों के अनुसार उपलब्ध करायी जायेगी ।
(घ) ग्रंथालय में पुस्तकों तथा पत्रिकाओं सहित कम्प्यूटर नेटवर्किंग एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अथवा किसी अन्य सक्षम नियामक प्राधिकरण द्वारा विहित विनियमों या मानकों के अनुसार उपलब्ध करायी जायेगी । "
4. मूल अधिनियम की धारा 11 का लोप किया जाये ।
धारा 11 का संशोधन.
धारा 12 का संशोधन.
5. मूल अधिनियम की धारा 12 के द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित -जोड़ा जाये, अर्थात्: -
"परन्तु यह और कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, धारा 12 के खण्ड (क) के अधीन संगहीत राशि के अधिकतम 0.5 % की सीमा के अध्यधीन रहते हुए, विनियामक आयोग द्वारा संधारित रक्षित निधि में जमा की जाने वाली अतिरिक्त राशि विनिर्दिष्ट कर सकेगी तथा वह ऐसी अतिरिक्त राशि के देय होने की अवधि भी विनिर्दिष्ट कर सकेगी । "
धारा 36 का संशोधन.
6.
मूल अधिनियम की धारा 36 की उप - धारा (8 ) के खण्ड (च) में, शब्द " विन्यास निधि" के स्थान पर, शब्द "रक्षित निधि" प्रतिस्थापित किया जाये।
धारा 40 का संशोधन.
7.
मूल अधिनियम की धारा 40 की उप- धारा (2) में, शब्द एवं चिन्ह "विनियामक आयोग विन्यास निधि को समपहृत कर लेगा और " तथा "विन्यास निधि एवं / या " का लोप किया जाये ।
धारा 41 का संशोधन.
8.
मूल अधिनियम की धारा 41 की उप - धारा ( 10) में, शब्द "विन्यास निधि" के स्थान पर, शब्द "रक्षित निधि" प्रतिस्थापित किया जाये ।
धारा 42 का संशोधन.
9.
मूल अधिनियम की धारा 42 की उप - धारा (2) के खण्ड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" (ग) रक्षित निधि की स्थापना, विनिवेश, प्रबंधन तथा उपयोग की रीति तथा प्रायोजक निकायों द्वारा पूर्व में जमा की गई
विन्यास निधि की धनराशि की वापसी की रीति । "
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उद्देश्य और कारणों का कथन
यतः , भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ ने अनुशंसा कि है कि राज्य, उच्च शिक्षा संस्थान हेतु विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए न्यूनतम भूमि की आवश्यकता को समाप्त करने पर विचार कर सकते है । अतएव , राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम , 2005 ( 13. सन् 2005 ) की धारा 2 , 7 ( 1 ) , 7 (2 ) , 7 (4) (ग ) , 7 (4) (घ) , 11 , 12 , 36 , 40 , 41 और 42 को संशोधित करते हुए उक्त अनुशंसा को स्वीकृत करने का विनिश्चय किया है। अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर,
टंकराम वर्मा उच्च शिक्षा मंत्री (भारसाधक सदस्य) दिनांक 10 जुलाई, 2026 778 ( 3)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
उपाबन्ध
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम 2005 (क्र. 13 सन् 2005 ) की धारा 2 , 7 , 11 , 12, 36, 40, 41 एवं 42 का सुसंगत उद्धरण : -
धारा
प्रावधान
धारा-2 का खण्ड (8) " विन्यास निधि" से अभिप्रेत है , निजी विश्वविद्यालय की विन्यास निधि वह स्थापित करेगाः-
धारा-7 की उपधारा 1
(क) छत्तीसगढ़ राज्य में ही मुख्य परिसर, दूर परिसर एवं अध्ययन केन्द्र,
धारा-7 की उपधारा 2
(ख) इस अधिनियम की धारा 11 के प्रावधानों के अनुरूप विन्यास निधि वह न्यूनतम निम्नलिखित प्राप्त करेगा-
(क) 15 एकड़ भूमि यदि रायपुर नगर- निगम की सीमा के अंदर मुख्य परिसर की स्थापना प्रस्तावित है ,
(ख) 25 एकड़ भूमि यदि अन्यत्र मुख्य परिसर स्थापना प्रस्तावित है, तथा साथ ही वह इनके भू- स्वामित्व अभिलेख प्रस्तुत करेगा
धारा-7 की उपधारा 3 वह प्रशासकीय कार्यों तथा अकादमी कार्यों के सम्पादन के लिए कम से कम 1,00,000 वर्गफीट का निर्मितः क्षेत्र, भवनों तथा अन्य सहायक निर्माणों के रूप में उपलब्ध करायेगा
धारा-7 (4) का खण्ड (ग)
पर्याप्त संख्या में उपकरण , कम्प्यूटर , फर्नीचर तथा अन्य आवश्यक सामग्री सुलभ करायी जायेगी , तथा प्रथम पांच वर्षो में रूपये बीस लाख राशि प्रति वर्ष खर्च की जावेगी
धारा-7 (4) का खण्ड (घ)
प्रथम वर्ष में कम से कम दास लाख की पुस्तकें तथा पत्रिकाए , क्रय की जावेगी तथा प्रथम तीन वर्ष में पचास लाख रूपये की राशि पुस्तको, पत्रिकाओं तथा कम्प्यूटर नेटवर्किंग तथा अन्य सुविधाओं पर व्यय की जावेगी जो कि ग्रंथालय में पर्याप्त समकालीन अध्यापन तथा शोध कार्य की जरूरतों के मुताबित हो
धारा-11
(1 ) उपर्युक्त धारा 6 ( 2 ) के अंतर्गत राज्य शासन से इच्छा पत्र प्राप्त होने पर ऐसा प्रायोजक निकाय जो इच्छा पत्र में दी गई शर्तों एवं परिवचनो को पूर्ण करने तत्पर है, निजी विश्वविद्यालय के लिए विन्यास निधि की स्थापना, विनियामक आयोग के कोष में निर्धारित प्रक्रिया अनुसार नीचे दर्शाई गयी राशि जमा करोगा.
(क) राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय की स्थापना होने पर एक करोड रूपये
(ख) अन्य प्रकरणों में तीन करोड़ रूपये
परंतु, प्रायोजक निकाय द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व विन्यासः निधि में जमा राशि समायोजित कर ली जावेगी.
(2) यह सुनिश्चित करने के लिए कि निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, परिनियम तथा अध्यादेश के उपबंधों के अनुरूप कार्य कर रहा है, वह विन्यास निधि सुरक्षा निधि के रूप में प्रयुक्त होगी . प्रायोजक निकाय द्वारा अधिनियम , परिनियम, अध्यादेश तथा विनियमन के किसी भी उपबंध के उल्लंखन या भंग करने पर विनियामक आयोग की अनुशंसा पर, राज्य शासन संपूर्ण विन्यास निधि या उसके किसी अंग को समपहृत कर सकेगा.
(3 ) विन्यास निधि के स्थापना की विधि, उसके विनियोजन की विधि, इससे प्राप्त आय को प्रायोजक निकाय को भुगतान, उसके राजसात 778 (4)
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करने और प्रायोजक निकाय को वापस करने की विधि इस प्रकार होगी जैसी कि विहित की जावे .
धारा -12 का द्वितीय परंतुक
परंतु आगे यह भी कि विनियामक आयोग इस राशि को यथोचित समय में राज्य के संचित निधि में जमा करेगा.
धारा-36(8 ) का खण्ड (च)
निजी विश्वविद्यालय के विद्यटन संबंधी सभी मामले में कार्यवाही करें, जिसमें विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम पूरा करने, परीक्षा संचालन करने एवं उपाधि देने का कार्यक्रम शामिल है. इस कार्य को किसी अन्य विश्वविद्यालय को इस प्रकार सौपेगे ताकि विद्यार्थियों के हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो. विद्यार्थियों के लिये किये जाने वाले इन सब कार्यों पर तथा साथ में विश्वविद्यालयों के विद्यटन पर होने वाले व्यय को विन्यास निधि एवं / सामान्य निधि से पूरा किया जाएगा.
धारा-40 की उपधारा (2)
इस प्रकार की सूचना प्राप्त होने पर विनियामक आयोग को यह अधिकार होगा कि वह प्रायोजक निकाय को ऐसा निर्देश दे जो उपधारा 1 के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक हो. यदि प्रायोजक निकाय उपधारा 1 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो विनियामक आयोग विन्यास निधि को समपहृत कर लेगा और पाठ्यक्रम पूरा करने, परीक्षा संचालन, उपाधि देने आदि के संबंध में या तो स्वयं कार्य करने या यह कार्य किसी अन्य विश्वविद्यालय को सौपने संबंधी व्यवस्था इस प्रकार करेगा कि विद्यार्थियों के हित किसी तरह प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो विद्यार्थियों के लिए की गई इन व्यवस्थाओं पर जो व्यय होगा , उसे विन्यास निधि एवं/ या विश्वविद्यालय की सामान्य निधि से पूरा किया जायेगा.
धारा -41 की उपधारा (10)
जांच की प्रक्रिया में और विद्यार्थियों के प्रवेश पूर्ण होते तक हुए सभी व्यय विश्वविद्यालय के विन्यास निधि और सामान्य निधि से पूर्ण किये जायेंगे .
धारा -42(2) का खण्ड (14)
धारा 11 की उपधारा (3 ) के अंतर्ग विन्यास निधि के स्थापना की विधि, राशि के विनियोजन की विधि, प्राप्त आय की प्रायोजक निकाय को भुगतान की विधि, उसके समपहृत करने की विधि तथा उसका उपयोग करने की विधि.
दिनेश शर्मा सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2026 .