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छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 390 ]
नवा रायपुर , बुधवार, दिनांक 15 जुलाई 2026 आषाढ़ 24 , शक 1948
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
नवा रायपुर अटल नगर, मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई , 2026 (आषाढ़ 23, 1948)
क्रमांक-9445/ वि.स./ विधान/ 2026.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 11 सन् 2026) जो मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई , 2026 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
779 780
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधेयक (क्रमांक 11 सन् 2026)
छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026
विधेयक । छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005 (क्र. 2 सन् 2005) को और संशोधन करने हेतु भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1.
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2026 कहलायेगा ।
संक्षिप्त नाम एवं प्रारंभ.
(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।
धारा 2 का संशोधन.
2. छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2005 (क. 2 सन् 2005) (जो इसमें इसके पश्चात् " मूल अधिनियम" के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में, खण्ड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात:-
"(ख - क) "मण्डल " से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता 1959 (1959 का सं. 20) की धारा 3 के अंतर्गत गठित राजस्व मण्डलः "
3. मूल अधिनियम की धारा 3 - क का लोप किया जाए ।
धारा 3 -क का लोप.
4. मूल अधिनियम की धारा ३- क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
"(3-ख) कार्यवाहियों का अंतरण. इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के दिनांक से. छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण के समक्ष लंबित समस्त कार्यवाहियों 'छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता, 1959 (1959 का सं. 20) की धारा 3 के अंतर्गत गठित राजस्व मण्डल को अंतरित हो जायेंगी । "
5. मूल अधिनियम की धारा 22, 24, 40, 47, 48 , 49, 50. 54, 55 , 56 तथा 71 में शब्द " अधिकरण " जहां कहीं भी आया हो, के स्थान पर शब्द " मण्डल " प्रतिस्थापित किया जाए ।
धारा 22, 24, 40, 47, 48, 49, 50, 54, 55, 56 तथा 71 का संशोधन.
780( 1)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः , राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम , 2005 (क्र. 2 सन् 2005) माल के विक्रय तथा क्रय पर, कर के उग्रहण हेतु उपबंध करने के विचार से अधिनियमित किया गया था ।
और यतः, 1 जुलाई 2017 से वस्तु एवं माल कर लागू होने के पश्चात् छत्तीसगढ़ राज्य में मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005 केवल पेट्रोलियम उत्पादों और पदार्थों एवं विदेशी मदिरा पर ही प्रभावशील है । जिसके परिणामस्वरूप वस्तु एवं माल कर के पूर्व के अधिनियमों के अंतर्गत पारित आदेशों के संबंध में द्वितीय अपील के प्रकरणों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है तथा भविष्य में अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत होने वाले प्रकरणों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना नहीं है तथा धर्तमान में, छत्तीसगढ़ राज्य में माल और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की भी स्थापना हो चुकी है । इन कारणों से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त किये जाने हेतु मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा "उ- क अधिकरण " का लोप किये जाने एवं संबंधित धाराओं में संशोधन हेतु मूल अधिनियम में संशोधन किया जाना अपेक्षित है ।
अतएव उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए. राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा ' 3-क अधिकरण के लोप और छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण के समक्ष लंबित समस्त कार्यवाहियों को, छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता 1959 (1959 का सं. 20) के. अन्तर्गत गठित राजस्व मण्डल को अंतरित किये जाने हेतु छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005 में संशोधन किये जाने का निर्णय लिया गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
ओ.पी. चौधरी
वाणिज्यिक कर मंत्री रायपुर,
(भारसाधक सदस्य) दिनांक 13 जुलाई, 2026
"संविधान के अनुच्छेद 207 (1 ) के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित " 780( 2)
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उपाबंध
छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम , 2005 (क्र. 2 सन् 2005) की धारा 2 , 3 , 22,24,40,47,48,49,50,54,55,56 तथा धारा 71 का सुसंगत उद्धरण
अध्याय-1
प्रारंभिक
परिभाषाएं. 2. (ख) "सहायक आर्युक्त" से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन नियुक्त किया गया सहायक आयुक्त वाणिज्यिक कर और उसमें अपर सहायक आयुक्त वाणिज्यिक कर सम्मिलित है;
अध्याय-2
कर विनिर्धारक प्राधिकारी
अधिकरण 3 - क ( 1 ) ऐसे नियमों के अध्यधीन रहते हुये, जो कि इस संबंध में बनाये जायें , राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा , उस तारीख से, जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई हैं, अधिकरण का गठन इस हेतु कर सकेगी कि वह अधिकरण उन शक्तियों का, जो कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिकरण को प्रदत्त की गई हैं, प्रयोग करें तथा उन कृत्यों का, जो कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन अधिकरण को प्रदत्त किये गये हैं, पालन करें ।
(
2) उपधारा ( 1 ) के अधीन की अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई तारीख तक, राजस्व मण्डल , छत्तीसगढ़ इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये अधिकरण के रूप में कार्य करेगा तथा पूर्व वर्णित तारीख को वे समस्त कार्यवाहियाँ, जो अधिकरण के रूप में कार्य करते हुए राजस्व मण्डल , छत्तीसगढ़ के समक्ष लंबित हैं, उपधारा (1 ) के अधीन गठित अधिकरण को अंतरित हो जायेंगी । (3) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए , अधिकरण अपनी प्रक्रिया का तथा अपने कामकाज के निपटारे का विनियमन करने वाले ऐसे विनियम, जो इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबंधों से संगत हों, समय- समय पर बना सकेगा ।
अध्याय-6
विवरणियां , निर्धारण, भुगतान तथा कर की वसूली
22. (1 ) जहां इस अधिनियम के या इस अधिनियम द्वारा निरसित किए गए अधिनियम के अधीन किसी व्यापारी का कर निर्धारण या पुनः कर निर्धारण किया जा चुका है और इस अधिनियम के या इस अधिनियम द्वारा निरसित किए गए अधिनियम के अधीन कर के दायित्वाधीन माल के किसी विक्रय या क्रय पर किसी कारण से , किसी कालावधि के दौरान,-
कतिपय परिस्थिति में कर निर्धारण/ पुनः कर निर्धारण.
(क) कम कर निर्धारण हुआ है या वह कर निर्धारण से छूट गया है ; या (ख) उस पर कम दर से कर निर्धारण हुआ है; या
(ग) कर निर्धारण करते समय उसमें से कोई कटौती गलत तौर पर की गई
है; या
(घ) कर निर्धारण करते समय आगत कर की रिबेट गलती से अनुज्ञात की गई है; या
(ङ) वह किसी न्यायालय या अधिकरण के किसी निर्णय या आदेश जो अंतिम हो चुका है, के परिणामस्वरूप या उसकी दृष्टि से गलत और 780 ( 3)
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राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला हो जाता है;
तो आयुक्त, कर निर्धारण के आदेश अथवा किसी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय अथवा आदेश की तारीख से पांच कलैंडर वर्ष की कालावधि के भीतर, किसी भी समय , विहित प्ररूप में नोटिस जारी करके ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी कि वह आवश्यक समझे, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए , उस कर का जो ऐसे व्यापारी द्वारा देय है , यथास्थिति, कर निर्धारण करने के लिए अग्रसर हो सकेगा तथा कर के लिए उसका निर्धारण या पुनः निर्धारण कर सकेगा.
(2) जहां उपधारा (1 ) के अधीन किया गया कर निर्धारण या पुनः कर निर्धारण व्यापारी के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां आयुक्त, धारा 19 की उप-धारा (4 ) के खण्ड (क) के उप- खण्ड (तीन) में विनिर्दिष्ट दर से ब्याज के अतिरिक्त, इस प्रकार निर्धारित या पुनः निर्धारित की गई कर की रकम के दो गुने से अनधिक किन्तु निर्धारित की गई कर की रकम के डेढ़ गुने से अन्यून , शास्ति उस पर अधिरोपित करेगा.
(3) उपधारा ( 1 ) के अधीन कर निर्धारण या पुनः कर निर्धारण उक्त उपधारा के अधीन कार्यवाहियां प्रारंभ होने की तारीख से दो कलैंडर वर्ष की कालावधि के भीतर किया जाएगा.
विनिर्धारक प्राधिकारिय के समक्ष उपस्थिति
24. (1 ) कोई भी व्यापारी , जो उस स्थिति को छोड़कर जबकि वह धारा 45 के अधीन शपथ या प्रतिज्ञान पर परीक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के अपेक्षित किया गया है, इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के संबंध में धारा 3 के अधीन नियुक्त किए गए किसी अधिकारी के समक्ष हाजिर होने के लिए या उपसंजात होने के लिए हकदार है या अपेक्षित किया गया है, उस निमित्त किसी व्यक्ति द्वारा लिखित में प्राधिकृत किये गये ऐसे व्यक्ति के माध्यम से हाजिर या उपसंजात हो सकेगा जो व्यापारी का संबंधी है या चार्टर्ड अकाउन्टेंट या कर विधि व्यवसायी है.
(2) उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए , कोई भी व्यक्ति जो;
(क) इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व विक्रय कर विधि व्यवसायी (सेल्स टैक्स प्रेक्टिशनर ) कर व्यवसायी (टैक्स प्रेक्टिशनर) के रूप में नामांकित किया गया था; या
(ख) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा निगमित किसी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा या ऐसे किसी अन्य विश्वविद्यालय द्वारा जिसे कि राज्य सरकार, समय - समय पर, अधिसूचना द्वारा , विनिर्दिष्ट करे , प्रदत्त विधि या वाणिज्य की उपधि या कला स्नातक (बी.ए.) की उपाधि जिसमें कि अर्थशास्त्र उसके विषयों में से एक विषय हो, धारण करता है; या
(ग) उपखण्ड (ख) में निर्दिष्ट की गई अर्हताओं में से कोई भी अर्हता नहीं रखता है किंतु जिसने विक्रयकर / वाणिज्यिक कर विभाग में कम से कम दस वर्ष तक कोई ऐसा पद धारण किया है जो सहायक विक्रय कर अधिकारी / सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी से निम्न श्रेणी का नहीं है और जिसे आयुक्त ने उस विभाग में उसकी सेवा के अभिलेख को ध्यान में रखते हुए , इस आशय का प्रमाणपत्र दिया है कि वह इस अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही में उपसंजात होने के लिए 780( 4)
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योग्य व उपयुक्त व्यक्ति है,
कर विधि व्यवसायी के रूप में उपसंजात होने के लिए हकदार होगा.
(3) उपधारा (2) के खण्ड (ख ) या खण्ड (ग) में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन किन्हीं भी कार्यवाहियों में कर - विधि व्यवसायी के रूप में उपसंजात होने के लिए पात्र है , ऐसी फीस का भुगतान करके जो कि विहित की जाए , स्वयं को उस रूप में नामांकित कराएगा.
(4) यदि आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि नामांकन के लिए किया गया आवेदन व्यवस्थित है , तो वह आवेदक को नामांकन प्रमाणपत्र विहित प्ररूप में जारी करेगा , यदि आयुक्त का, ऐसी जांच, जैसी कि वह आवश्यक समझे, करने के पश्चात् तथा आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ऐसा समाधान नहीं होता है , तो वह लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, उस आवेदन को नामंजूर कर देगा .
(5 ) उपधारा ( 1 ) तथा (2 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई जिसने वाणिज्यिक / विक्रय कर विभाग में कोई ऐसा पद धारण किया हो जो वाणिज्यिक / विक्रय कर निरीक्षक की पद श्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो . इस अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही में किसी व्यापारी का प्रतिनिधित्व करने का,-
(एक) उस दशा में कि उसने, जब कि वह उस विभाग में कोई पद धारण किए हुए था , ऐसी कार्यवाही में किसी भी समय कोई आदेश पारित किया था,
(दो) उस दशा में जब कि उस व्यापारी का, जिसका कि प्रतिनिधित्व करना चाहता है , कारबार का स्थान उस जिले का सर्किल में है जिसके कि प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर वाणिज्यिक/ विक्रय कर विभाग के उस कार्यालय का, जिसमें कि उसने ऐसा पद धारण किया था , मुख्यालय स्थित है , उस समय तक जब तक कि उस समय से , जबकि वह उस पद का धारणकर्ता नहीं रह गया है, दो वर्ष व्यतीत नहीं हो गए हैं;
हकदार नहीं होगा :
परन्तु खण्ड (दो) में की गई कोई भी बात उस दशा में ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जबकि प्रतिनिधित्व ऐसे पदाधिकारी के समक्ष किया जाना है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा अंत में धारण किए गए पद से उच्चत्तर पद धारण करता है.
(6) कोई भी व्यक्ति, जो शासकीय सेवा से पदच्युत कर दिया गया है उपधारा (1 ) के अधीन किसी व्यापारी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अर्ह नहीं होगा.
(7) यदि कोई कर व्यवसायी का प्रतिनिधित्व या केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 (1956 का सं. 74 ) के अधीन या इस अधिनियम द्वारा निरसित अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही के संबंध में, आयुक्त द्वारा अवचार 780 (5)
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का दोषी पाया जाए तो आयुक्त उसे दंड देने के लिए कोई आदेश जो कि वह उचित समझे, पारित कर सकेगा जिसमें इसे उपरोक्त अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में कर व्यवसायी के रूप में उपस्थित होने से निरर्हित करना भी सम्मिलित है :
परंतु ऐसा आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो.
(8) कोई कर विधि व्यवसायी जिसका कि नामांकन के लिए आवेदन उपधारा (4) के अधीन नामंजूर कर दिया जाता है , या जो उपधारा (7 ) के अधीन निरर्हित हो गया हो , उससे संबंधित निदेश दिए जाने के साठ दिन के भीतर अधिकरण को अपील कर सकेगा,
(9) यदि कोई अधिवक्ता या चार्टर्ड अकाउन्टेंट इस अधिनियम के अधीन की या इस अधिनियम द्वारा निरसित अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही के संबंध में अवचार का दोषी पाया जाए , तो आयुक्त इन व्यवसायों के व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही करने के लिए सशक्त प्राधिकारी को समुचित कार्रवाई करने के लिए मामला निर्दिष्ट करेगा.
अध्याय-7
प्रतिदाय
प्रतिदाय
कतिपय मामलों में को रोक रखने की शक्ति
40. जब कोई ऐसा आदेश पारित किया जाता है जिससे कि प्रतिदाय का प्रश्न उत्पन्न हो जाता है और आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि प्रतिदाय की मंजूरी दे देने से राजस्व के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है और धारा 49 की उपधारा (३) या उपधारा (5) के अधीन कार्रवाई का शुरू किया जाना अपेक्षित है या उद्गृहित कर में या अधिरोपित की गई शास्ति में वृद्धि करने के लिए अधिकरण को आवेदन किया जाना अपेक्षित है या उक्त आदेश धारा 55 के अधीन किसी कार्यवाही की विषयवस्तु है, तो आयुक्त, प्रतिदाय को ऐसे समय तक रोके रह सकेगा जब तक कि पूर्वोक्त कार्यवाहियों का अंतिम रूप से विनिश्चय नहीं हो जाता है;
परंतु व्यापारी को प्रतिदाय की उस रकम पर, जो कि अंततोगत्वा पूर्वोक्त कार्यवाहियों के परिणामस्वरूप शोध्य अवधारित की गई है उस कालावधि के लिए , जो उस आदेश के , जिससे कि प्रतिदाय का प्रश्न उत्पन्न हो गया था, प्राप्त होने की तारीख से साठ दिन समाप्त हो जाने के पश्चात् प्रारंभ होती है, धारा 39 की उपधारा (5) के अधीन ब्याज का भुगतान किया जाएगा.
अध्याय-9
आयुक्त की कतिपय शक्तियां और आयुक्त द्वारा अपनी शक्तियों का प्रत्यायोजन
कार्यवाहिय 47. आयुक्त, -
को
रोकने की (क) विधि के किसी प्रश्न की परीक्षा लंबित रहने तक , 780( 6)
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आयुक्त की शक्ति
(एक) अपने समक्ष; या
(दो) धारा 55 की उपधारा ( 1 ) के अधीन अपील किए जाने पर अधिकरण के समक्ष; या
(तीन) धारा 55 की उपधारा (2) के अधीन अपील किए जाने पर उच्च न्यायालय के समक्ष; या
(ख) लेखबद्ध किए जाने वाले किसी अन्य कारण से ;
किसी व्यापारी या व्यापारियों के किसी वर्ग के संबंध में धारा 21 के अधीन कार्यवाही या कार्यवाहियां साधारण या विशेष आदेश द्वारा रोक सकेगा,
अध्याय-10
अपील , पुनरीक्षण तथा परिशुद्धि
अपील. 48. (1 ) कोई भी व्यापारी या व्यक्ति जो उसके संबंध में धारा 21 के अधीन पारित किए गए शास्ति या शास्ति रहित कर निर्धारण या पुनः कर निर्धारण के किसी आदेश से या उस पर शास्ति अधिरोपित करने वाले किसी आदेश से या ऐसे किसी आदेश से जिसके परिणामस्वरूप प्रतिदाय या आगत कर रिबेट में कमी होती हो या धारा 54 के अधीन पारित किसी आदेश से व्यथित हो , विहित रीति में, ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील जो धारा 3 की उप- धारा (1 ) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट किसी अधिकारी द्वारा पारित किया गया था, अपर आयुक्त को तथा धारा 3 की उप- धारा (1 ) के खंड ( घ) , (ङ) तथा (च ) में विनिर्दिष्ट किसी अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध अपील , अपीलीय उपायुक्त को कर सकेगा:
परंतु किसी ऐसे मामले में जिसमें कि धारा 36 के अधीन किया गया आवेदन नामंजूर कर दिया गया है, वहां ऐसा व्यापारी या व्यक्ति कर निर्धारण के एक पक्षीय आदेश के विरुद्ध अपील वैसी ही रीति में कर सकेगा , और अपील फाइल करने के लिए परिसीमा काल की संगणना करने में धारा 36 के अधीन आवेदन फाइल किए जाने की तारीख से उस तारीख , जिसको कि ऐसे आवेदन को नामंजूर करने वाले आदेश की तामील की गई हो, तक कि कालावधि अपवर्जित कर दी जाएगी.
(2) उपधारा (1 ) के अधीन फाइल की गई अपील में पारित किसी, आदेश से, व्यथित कोई व्यापारी या व्यक्ति विहित रीति में ऐसे आदेश के विरुद्ध अधिकरण को अपील कर सकेगा;
(3) अधिकरण द्वारा तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विरचित नियमों या विनियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपायुक्त की श्रेणी से अनिम्न श्रेणी के किसी भी ऐसे अधिकारी को जो आयुक्त द्वारा इस संबंध में सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया गया है, यह अधिकार होगा कि उसे उपधारा (2) के अधीन अपील की सुनवाई में सुना जाए.
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(4) कोई अपील, -
(एक ) अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त द्वारा उपधारा (1 ) के अधीन, तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक कि व्यापारी द्वारा शोध्य कुल अतिशेष में से, -
(क) उस दशा में , जब कि उस कालावधि के लिए जिससे कि वह आदेश, जिसके कि विरुद्ध अपील की गई है , संबंधित है , समस्त विवरणियां फाइल कर दी गई हैं, तथा ऐसी विवरणियों के अनुसार देय कर का भुगतान कर दिया गया है , ऐसे अतिशेष का पन्द्रह प्रतिशत;
(ख) उस दशा में जब कि उस कालावधि के लिए जिससे कि वह आदेश , जिसके कि विरुद्ध अपील की गई है , संबंधित है, एक या अधिक विवरणियां फाइल नहीं की गई हैं तथा कर का भुगतान नहीं किया गया है या उस दशा में जब कि ऐसी विवरणी या विवरणियां फाइल की गई हैं किन्तु कर का भुगतान नहीं किया गया है , अतिशेष का,-
(एक) तैतीस प्रतिशत, जहां व्यतिक्रम एक तिमाही से संबंधित है;
(दो) पचास प्रतिशत, जहां व्यतिक्रम दो तिमाही से संबंधित है; तथा
(तीन) पचहत्तर प्रतिशत, जहां व्यतिक्रम दो तिमाही से अधिक से संबंधित है;
के बराबर होगा.
(ग) उस दशा में जब कि धारा 54 के अधीन कोई शास्ति अधिरोपित की गई है, ऐसे अतिशेष का पचास प्रतिशत;
(घ) उस दशा में जब कि वह आदेश , जिसके कि विरुद्ध अपील की गई है , धारा 22 के अधीन पारित किया गया है और उक्त धारा के अधीन कोई शास्ति अधिरोपित की गई है , ऐसे अतिशेष का पचास प्रतिशत; और
(ङ) किसी अन्य दशा में ऐसे अतिशेष का पच्चीस प्रतिशत , और
(दो) अधिकरण द्वारा उपधारा (2) के अधीन अपील तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक कि उपधारा (1 ) के अधीन अपील में पारित आदेश के पश्चात् व्यापारी . द्वारा शोध्य कुल अतिशेष में से ऐसे अतिशेष का बीस प्रतिशत नहीं चुका दिया गया है और अपील के ज्ञापन के साथ ऐसी रकम के भुगतान का समाधानप्रद सबूत संलग्न नहीं किया गया है और तदुपरि अधिकरण कर तथा / या शास्ति के अतिशेष की वसूली अपील का विनिश्चय होने तक के लिए रोक देगा:
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परंतु जहां कोई व्यापारी खण्ड (एक ) के उपधारा (1 ) के अधीन फाइल की गई किसी अपील के मामले में खण्ड (1 ) के एक से अधिक उपखण्डों में अंतर्गत आता है , वहां ऐसे व्यापारी को उस उपखण्ड के उपबंध लागू होंगे जो उच्चतम रकम के भुगतान की अपेक्षा करता है और अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त द्वारा अपील केवल तभी स्वीकार की जाएगी जबकि व्यापारी ने ऐसी स्कम का भुगतान कर दिया है;
(5) उपधारा (1 ) के अधीन प्रत्येक अपील अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त के समक्ष तीस दिन के भीतर और अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त के आदेश के विरुद्ध उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक अपील, उस आदेश की, जिसके कि विरूद्ध अपील की जानी है, संसूचना की तारीख से साठ दिन के भीतर अधिकरण के समक्ष फाइल की जाएगी .
(5 -क) जहां आयुक्त यह मानता है कि किसी अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर द्वारा पारित किया गया कोई आदेश , जहां तक कि वह राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है , तो वह ऐसे आदेश की तारीख से दो वर्ष के भीतर अधिकरण में अपील प्रस्तुत (फाइल) कर सकेगा
(6) ऐसी प्रकिया के अध्यधीन रहते हुए जैसी कि विहित की जाए तथा ऐसी और जांच करने के पश्चात् जैसा कि वह उचित समझे,
(क) अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त प्रत्येक अपील का निपटारा ऐसी अपील फाईल करने के दिनांक से एक कैलेण्डर वर्ष के भीतर करेगा. ऐसी अपील का निपटारा करते समय , अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त कर निर्धारण या शास्ति के अधिरोपण या दोनों की पुष्टि कर सकेगा, उसे कम कर सकेगा , उसमें वृद्धि कर सकेगा या उसे निरस्त कर सकेगा किन्तु मामले का प्रतिप्रेषण नहीं करेगा ।
(ख) अधिकरण-
(एक) कर निर्धारण या शास्ति के अधिरोपण या दोनों की पुष्टि कर सकेगा, उसे कम कर सकेगा , उसमें वृद्धि कर सकेगा या उसे निरस्त कर सकेगा, या
(दो) कर निर्धारण या शास्ति के अधिरोपण या दोनों को अपास्त कर सकेगा और उस अधिकारी को जिसके कर निर्धारण या शास्ति के अधिरोपण आदेश के विरूद्ध अपील की गई है. यह निर्देश दे सकेगा कि वह ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी की निर्देशित की जाए , नवीन रूप से कर निर्धारण करे या शास्ति पुनः अधिरोपित करें ।
(तीन) ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा वह उचित समझे ।
(7) अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त द्वारा पारित किसी आदेश की दशा में, ऐसा आदेश , यथास्थिति, इस धारा की उपधारा (2) या धारा 49 की उपधारा 780 ( 9)
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(1 ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए अंतिम होगा तथा अधिकरण द्वारा पारित किसी आदेश की दशा में , ऐसा आदेश , धारा 55 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए अंतिम होगा.
49.
आयुक्त द्वारा पुनरीक्षण की शक्ति
(1 ) आयुक्त, स्वप्रेरणा से किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसमें धारा 3 की उप-धारा (ख) से (च) में विनिर्दिष्ट किसी अधिकारी द्वारा आदेश पारित किया गया था, अभिलेख मंगा सकेगा और उस अभिलेख के प्राप्त होने पर ऐसी जांच कर सकेगा या ऐसी जांच करवा सकेगा, जैसी कि वह आवश्यक समझे और इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुये , उस पर ऐसा आदेश , जैसा कि वह उचित समझे, जो कि उस व्यापारी या व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव न डालता हो , पारित कर सकेगा ।
परन्तु,-
(क) आयुक्त इस उप - धारा के अधीन किसी आदेश का पुनरीक्षण तब नहीं करेगा, जबकि उस आदेश के विरुद्ध अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त अथवा अधिकरण के समक्ष अपील लंबित है या यदि , ऐसी अपील की जा सकती है तो उस समय का, जिसके कि भीतर वह फाइल की जा सकती है, अवसान नहीं हुआ है;
(ख) कोई पुनरीक्षण नही होगा. -
(एक) कर के भुगतान करने के संबंध में किसी व्यापारी का दायित्व अवधारित करने वाले किसी आदेश के विरुद्ध या निर्धारण के लिये इस अधिनियम के अधीन जारी की गई किसी सूचना के विरुद्ध , निर्धारण आदेश पारित किये जाने के पश्चात् को छोडकर; और
(दो) धारा 36 के अधीन पारित किसी आदेश के विरुद्ध
स्पष्टीकरण. - आयुक्त के किसी ऐसे आदेश, जिसके द्वारा हस्तक्षेप करने से इंकार किया गया है , के संबंध में यह नहीं समझा जायेगा कि यह किसी व्यापारी या किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला आदेश है .
(1-क) उपधारा ( 1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी. यदि उपधारा एक के अधीन पुनरीक्षण किसी ऐसे पुनः कर निर्धारण या शास्ति के पुनः अधिरोपण के किसी ऐसे आदेश के संबंध में है , जो अपील या पुनरीक्षण में दिए गए किसी निर्देश के अनुसरण में है, तो आयुक्त उपधारा (1 ) के उपबंधों के. अनुसार आदेश पारित कर सकेगा , किन्तु मामले का प्रतिप्रेषण नहीं करेगा । (2) आयुक्त स्वप्रेरणा से किसी ऐसी कार्यवाही का, जिसमें कि उपधारा (1 ) के अधीन कोई आदेश किसी ऐसे अधिकारी द्वारा पारित किया गया है जिसे कि आयुक्त ने धारा 43 के उपबंधों के अनुसरण में अपनी शक्तियां प्रत्यायोजित कर दी है , अभिलेख मंगा सकेगा और उस अभिलेख के प्राप्त होने पर ऐसी जांच कर सकेगा या ऐसी जांच करवा सकेगा, जैसी कि वह आवश्यक समझे और इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , उस पर ऐसा आदेश , जैसा कि व उचित समझे जो कि उस व्यापारी या व्यक्ति पर प्रतिकूल 780( 10)
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प्रभाव न डालता हो, पारित कर सकेगा.
(3) आयुक्त स्वप्रेरणा से या प्राप्त जानकारी के आधार पर , इस अधिनियम के अधीन किसी भी कार्यवाही का अभिलेख मंगा सकेगा और उसका परीक्षण कर सकेगा यदि वह यह समझता हो कि उसकी सहायता के लिए धारा 3 के अधीन नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति द्वारा , जिसमें कोई ऐसा अधिकारी, जिसको, उसने अपनी शक्तियां प्रत्यायोजित की हैं , सम्मिलित हैं उसमें (उस कार्यवाही में ) पारित किया गया कोई आदेश , उस सीमा तक, जहां तक कि वह राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, गलत है, तो व्यापारी या व्यक्ति की सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने या करवाने के पश्चात् जैसी कि वह आवश्यक समझे, उस पर ऐसा आदेश , जो कि मामले की परिस्थितियों के अनुसार न्यायोचित हो, कार्यवाही शुरू होने की तारीख से एक कलेण्डर वर्ष के भीतर पारित कर सकेगा, जिसमें कर निर्धारण में वृद्धि करने वाला या उसे उपान्तरित करने वाला या कर निर्धारण को रद्द करने वाला तथा नवीन रूप से कर निर्धारण करने का निर्देश देने वाला आदेश सम्मिलित है.
परन्तु
(क) उस आदेश की, जिसका कि पुनरीक्षण चाहा गया है , तारीख से तीन वर्ष का अवसान हो जाने के पश्चात् कोई भी कार्यवाही इस उपधारा के अधीन शुरू नहीं की जाएगी ,
(ख) आयुक्त इस उपधारा के अधीन किसी आदेश का पुनरीक्षण उस दशा में नहीं करेगा जबकि ऐसे आदेश के विरुद्ध अधिकरण के समक्ष द्वितीय अपील लंबित है या ऐसी अपील गुणागुण के आधार पर विनिश्चित की गई है.
(4) आयुक्त द्वारा उपधारा (3 ) के अधीन पारित किए गए आदेश के संबंध में आक्षेप करने वाला कोई भी व्यापारी या व्यक्ति उसको आदेश संसूचित किए जाने की तारीख से साठ दिन के भीतर अधिकरण को अपील कर सकेगा.
(5) उपधारा (4) के अधीन फाइल की गई अपीलों को धारा 49 की उपधारा (4) , (5) तथा (6) के उपबंध यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे.
(6) जहां आयुक्त यह मानता है कि उसके पूर्वाधिकारी द्वारा या किसी अपर आयुक्त, विक्रय कर द्वारा उपधारा (1 ) के अधीन पारित किया गया कोई आदेश उस सीमा तक जहां तक कि वह राजस्व के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है , गलत है, वहां वह ऐसे आदेश के विरुद्ध अधिकरण के समक्ष अपील, ऐसे आदेश की तारीख से दो वर्ष के भीतर फाइल कर सकेगा इस उपधारा के अधीन फाइल की गई अपीलों को धारा 48 के उपबंध यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे
(7) उपधारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किंतु ऐसे निर्बन्धनों तथा शर्तों के, जैसा कि विहित किया जाय, अध्यधीन रहते हुए , जहां किसी व्यापारी 780 (11)
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द्वारा किये गये आवेदन के प्राप्त होने पर, राज्य सरकार की यह राय है कि किसी व्यापारी को किसी ऐसे आदेश , जो कि धारा 25 के अधीन के किसी आदेश से या किसी ऐसे आदेश से, जो अधिकरण या सिविल न्यायालय, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के किसी आदेश के अनुसरण में या उसके परिणामस्वरूप पारित किया गया है , भिन्न है, के कारण कष्ट हो रहा है, वहां राज्य सरकार आयुक्त को यह निर्देश दे सकेगी कि वह ऐसे आदेश के संबंध में उपधारा (1 ) के अधीन कार्यवाहियां शुरू करे तथा ऐसा निर्देश होने पर आयुक्त , ऐसी कार्यवाहियों को विधि के अनुसार इस प्रकार निपटा सकेगा मानों कि वे कार्यवाहियां उसके द्वारा उपधारा (1 ) के खण्ड (दो) के अधीन शुरू की गई थीः
परन्तु कोई ऐसा निर्देश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि-
(क) व्यापारी ने वे उपचार , जो कि उसे , यथास्थिति धारा 36. धारा 48 , इस धारा की उपधारा (1 ) , या धारा 56 के अधीन उपलब्ध है निःशेष नहीं कर लिये हैं या जब तक कि उस कालावधि का, जिसके भीतर पूर्वोक्त उपबंधों के अधीन कोई उपचार किया जा सकता है, अवसान नहीं हो गया है, तथा/या
(ख) उपधारा (1 ) के अधीन पुनरीक्षण संबंधी उसका आवेदन गुणागुण के आधार पर नामंजूर नहीं कर दिया गया है :
परन्तु यह और भी कि ऐसा कोई आवेदन राज्य सरकार द्वारा केवल एक बार ग्रहण किया जाएगा. "
पुनरीक्षण में अतिरिक्त साक्ष्य. अपील या 50. कोई भी व्यापारी अपील में , अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण या पुनरीक्षण में आयुक्त के समक्ष कोई भी अतिरिक्त साक्ष्य , चाहे वह में मौखिक हो या दस्तावेजी, उस दशा में के सिवाय पेश करने के लिए हकदार नहीं होगा जबकि दिया जाने के लिए उद्दिष्ट साक्ष्य है , जिसे कि कर निर्धारण प्राधिकारी ने ग्रहण करने से गलत तौर पर इंकार कर दिया था या जो सम्यक् तत्परता बरतने के पश्चात् भी उस व्यापारी की जानकारी में नहीं था या उसके द्वारा कर निर्धारण प्राधिकारी के समक्ष पेश नहीं किया जा सका था , या जिसके पेश किए जाने के लिए कर निर्धारण प्राधिकारी द्वारा पर्याप्त समय नहीं दिया गया था; और प्रत्येक ऐसे मामले में अतिरिक्त साक्ष्य लेखबद्ध कर लिया जाने पर, चुनौती देने या खण्डन करने का युक्तियुक्त अवसर आयुक्त को दिया जाएगा,
54. (1) यदि आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण का इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के अनुक्रम में यह समाधान हो जाता है कि व्यापारी ने अपनी कुल राशि ( टर्न ओवर) या किसी माल के संबंध में क्रय कीमतों की कुल रकम छिपाई है या किसी वर्ष या उसके भाग के लिए अपनी विवरणी या विवरणियों में अपने यथास्थिति विक्रयों या क्रयों की मिथ्या विशिष्टियां दी हैं यथास्थिति, आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण इस धारा के अधीन शास्ति के अधिरोपण के लिए कार्यवाही शुरू करेगा.
(2) उपधारा (1 ) के अधीन कार्यवाही यथास्थिति, आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण द्वारा व्यापारी को सुनवाई का अवसर देने कतिपय परिस्थिति यों में शास्ति अधिरोपित करने की आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त 780( 12)
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या अधिकरण की शक्ति.
के लिए , विहित प्ररूप में सूचना जारी कर के शुरू की जाएगी . व्यापारी की सुनवाई कर ली जाने पर यथास्थिति , आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण ऐसी कार्यवाही शुरू किए जाने की तारीख से एक कैलेंडर वर्ष के भीतर , व्यापारी को इस संबंध में निदेश देते हुए आदेश पारित करेगा कि वह उसके द्वारा देय कर के अतिरिक्तं धारा 19 की उप- धारा (4) के खण्ड (क) के उप- खण्ड (तीन) में विनिर्दिष्ट दर से ब्याज के अतिरिक्त, शास्ति के तौर पर ऐसी रकम चुकाए जो अपवंचित कर की रकम के डेढ़ गुने से कम किन्तु दो गुने से अधिक नहीं होगी
(3) यदि किसी व्यापारी द्वारा किसी कालावधि या उसके भाग के लिए अपनी विवरणी या विवरणियों के अनुसार देय दर्शाया गया तथा चुकाया गया कुल कर धारा 18 के अधीन निर्धारित या पुनः निर्धारित किए गए कुल कर के अस्सी प्रतिशत से कम है तो ऐसे व्यापारी के संबंध में यह समझा जाएगा कि उसने उपधारा (1 ) के प्रयोजन के लिए अपनी कुल राशि (टर्न ओवर ) या अपनी क्रय कीमतों का कुल योग छिपाया है या अपनी विवरणी या विवरणियों में अपने विक्रयो या क्रयों की मिथ्या विशिष्टियां दी हैं या मिथ्या विवरणी या विवरणियों जब तक कि वह यथास्थित्ति आयुक्त या अपर आयुक्त या अपीलीय उपायुक्त या अधिकरण के समाधानप्रद रूप में यह साबित नहीं कर देता है कि उक्त कुल राशि ( टर्न ओवर) या क्रय कीमतों के कुल योग को छिपाना या विक्रयों या क्रयों की मिथ्या विशिष्टियां देना या मिथ्या विवरणी या विवरणियां देना उसकी ओर से किसी कपट या चोर उपेक्षा के कारण नहीं था .
उच्च न्यायालय की मामले का विवरण.
55. ( 1 ) अधिकरण द्वारा किसी व्यापारी की या आयुक्त को धारा 48 , धारा 49 , धारा 56 के अधीन किसी आदेश के संसूचित किए जाने की तारीख से साठ दिन के भीतर, ऐसा व्यापारी या आयुक्त, लिखित आवेदन द्वारा , जिसके साथ उस दशा में जबकि आवेदन किसी व्यापारी द्वारा किया जाये, एक सौ रुपये की फीस संलग्न होगी अधिकरण से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे आदेश से उद्भूत होने वाले विधि संबंधी किसी प्रश्न को उच्च न्यायालय को निर्देशित करे , और जहां अधिकरण उच्च न्यायालय को निर्देश करने का विनिश्चय करता है, वहां वह मामले का एक विवरण तैयार करेगा तथा उसे तद्नुसार निर्देशित करेगा.
(2) यदि अधिकरण, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, निर्देश करने से इंकार कर देता है तो आवेदक ऐसी इंकारी के संसूचित किए जाने की तारीख से साठ दिन के भीतर-
(क) अपने आवेदन को वापस ले सकेगा और यदि वह ऐसा करे तो उसके द्वारा दी गई फीस वापस कर दी जाएगी , या
(ख) उच्च न्यायालय को इस बात के लिए आवेदन कर सकेगा कि वह अधिकरण से निर्देश करने की अपेक्षा करें.
(3) यदि उपधारा (2) के खण्ड (ख ) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर, उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि इन्कार न्यायोचित नहीं था, तो वह अधिकरण से वह अपेक्षा कर सकेगा कि वह मामले का विवरण दे और उसका निर्देश करे और ऐसी अध्यपेक्षा के पास होने पर अधिकरण तद्नुसार कार्य करेगा.
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(4) यदि उच्च न्यायालय का यह समाधान नहीं होता है कि वह मामला जिसका कि विवरण दिया गया है उठाये गये विधि के प्रश्न का अवधारण करने में उसे समर्थ बनाने के लिए पर्याप्त है तो वह अधिकरण से यह अपेक्षा कर सकेगा कि यह उसमें ऐसे परिवर्धन या परिवर्तन करे जैसा कि न्यायालय उस संबंध में निर्देश दें.
(5) उच्च न्यायालय इस धारा के अधीन निर्देश की सुनवाई करने के पश्चात्, उसके द्वारा उठाये गये विधि संबंधी प्रश्न का विनिश्चय करेगा और उस पर निर्णय देगा जिसमें विनिश्चय के आधार अंतर्विष्ट होगे और निर्णय की प्रति न्यायालय की मुद्रा तथा रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर सहित अधिकरण को भेजेगा और अधिकरण तद्नुसार उस मामले का निपटारा करेगा.
(6) जहां उपधारा (5) के अधीन उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायालय द्वारा ग्रहण कर ली जाती है, वहां अधिकरण उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के अनुसार मामले का निपटारा करेगा तथा इस प्रयोजन के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्णय की प्रति उच्च न्यायालय द्वारा , अपनी मुद्रा तथा रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर सहित अधिकरण को भेजी जाएगी.
(7) इस धारा के अधीन निर्देश के खर्चे, जिनमें उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट फीस का चयन भी सम्मिलित है , न्यायालय के विवेकानुसार होगे .
(8) वह कर, जिसके भुगतान किये जाने का आदेश अधिकरण द्वारा ऐसे आदेश द्वारा दिया गया है जिसके कि संबंध में उपधारा ( 1 ) के अधीन आवेदन किया गया है , इस बात के होते हुए भी कि ऐसा आवेदन किया गया है या उसके परिणामस्वरूप कोई निर्देश किया गया है, उस आदेश के दिये जाने पर देय होगा.
(9) जहां इस धारा के अधीन निर्देश के परिणामस्वरूप , किसी व्यापारी से शोध्य कर उपधारा (8) के अधीन उसके द्वारा चुकाई गई रकम से कम कर दिया गया है वहां अंतर की रकम धारा 39 के उपबंधों के अनुसार उसे वापस कर भूलों परिशोधन का 56
दी जायेगी .. ( 1 ) भूल सुधार से अभिप्रेत है, किसी लिपिकीय या गणित संबंधी भूल जो अभिलेख के देखने से स्पष्ट है, को परिशोधित करना.
(2) आयुक्त
(एक) अपने द्वारा पारित किए गए किसी आदेश की तारीख से छः माह के भीतर किसी भी समय, स्वप्रेरणा से या
(दो) व्यापारी द्वारा कोई आवेदन किया जाने पर , ऐसे आवेदन को छः माह के भीतर, किसी आदेश को, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की, जाए , परिशोधित करेगा या जैसा वह उपयुक्त समझे आदेश पारित करेगा.
परंतु,- 780(14)
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(एक) आयुक्त, व्यापारी के किसी आवेदन को तब तक ग्रहण नहीं करेगा जब तक कि वह उस आदेश की, जिसका कि परिशोधन किया जाना चाहा गया है, तारीख से छः माह के भीतर नहीं किया गया है ;
(दो) कोई भी ऐसा परिशोधन, यदि उसके कारण कर में वृद्धि हो जाती है, या वापसी की रकम कम हो जाती है , तब तक नहीं किया जाएगा , जब तक आयुक्त ने ऐसा करने के अपने आशय की सूचना विहित प्ररूप में व्यापारी को नहीं दे दी है तथा व्यापारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है.
(3) (क) उपधारा (1 ) तथा उपधारा (2 ) के उपबंध अधिकरण द्वारा पारित
किसी आदेश में, या अपीलीय उपायुक्त तथा अपर आयुक्त द्वारा पारित किसी आदेश में किसी भूल के परिशोधन को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे किं आयुक्त द्वारा किसी भूल के परिशोधन को लागू होते हैं.
(ख) अधिकरण अपने द्वारा पारित किये गये किसी आदेश का परिशोधन,-
(एक) स्वप्रेरणा से, ऐसे आदेश के पारित किए जाने की तारीख से छः माह के भीतर किसी भी समय; और
(दो) व्यापारी या आयुक्त द्वारा कोई आवेदन किया जाने पर ऐसे आवेदन के प्राप्त होने की तारीख से छः माह भीतर, किसी भी समय कर सकेगी .
(4) जहां किसी ऐसे परिशोधन के कारण कर की रकम कम हो जाती है, वहां आंयुक्त व्यापारी को शोध्य कोई रकम विहित रीति में वापस कर देगा.
(5) जहां कोई ऐसा परिशोधन कर की रकम में वृद्धि करने या वापसी की रकम को कम करने का प्रभाव रखता हैं, वहां आयुक्त व्यापारी से शोध्य रकम धारा 25 में उपबंधित की गई रीति में वसूल करेगा.
*
अध्याय-14
नियम बनाने की शक्ति, निरसन तथा व्यावृत्ति, अस्थाई उपबंध तथा कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
नियम
बनाने की
शक्ति.
71. (1 ) राज्य सरकार , इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में पूर्व प्रकाशन के पश्चात् तथा अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी या उसमें कोई संशोधन कर सकेगी:
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परन्तु यदि राज्य सरकार नियम या उसमें कोई संशोधन तत्काल प्रवृत्त करना आवश्यक समझे तो वह ऐसे नियम या उनमें संशोधन राजपत्र में पूर्व प्रकाशन के बिना बना सकेगी / कर सकेगी.
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना , राज्य सरकार , निम्नलिखित को विहित करते हुए नियम बना सकेगी, -
(क) ऐसे समस्त विषय, जिनका इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन विहित किया जाना अभिव्यक्त रूप से अपेक्षित है या जो इस अधिनियम के अधीन विहित किए जाएं ;
(ख) धारा 2 के खण्ड (ग) के प्रयोजन के लिए सिविल संरचना;
(ग) धारा 4 की उपधारा (1 ) तथा धारा 9 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन सीमा;
(घ) वह रीति जिसमें धारा 5 की उपधारा (1 ) के अधीन कार्यवाहियां संस्थित की जाएंगी;
(ङ) वह रीति जिसके द्वारा ठेकेदार अथवा उप- ठेकेदार द्वारा धारा 6 की उपधारा ( 1 ) के अन्तर्गत कर का भुगतान प्रमाणित किया जावेगा;
(च) संदत्त किए जाने हेतु एकमुश्त राशि के अवधारण के प्रयोजन के लिए दर तथा वह रीति जिसमें एकमुश्त राशि अवधारित की जाएगी तथा वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिसमें ऐसी एकमुश्त राशि का संदाय धारा 10 की उपधारा (1 ) एवं उपधारा (2) के अधीन किया जाएगा;
(छ) वह रीति तथा कालावधि जिसमें धारा 13 के अधीन किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापारी द्वारा आगत कर पर छूट का दावा किया जाएगा या उसे अनुज्ञात किया जाएगा;
(ज) (एक) वह रीति जिसमें कोई व्यापारी उपधारा (1 ) तथा (2) के अधीन स्वयं को रजिस्ट्रीकृत कराएगा और वह कालावधि जिसके भीतर व्यापारी धारा 16 की उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन स्वयं को रजिस्ट्रीकृत कराएगा, वह प्ररूप तथा रीति जिसमें रजिस्ट्रीकृत प्रमाणपत्र को प्रदान किए जाने के लिए आवेदन धारा 16 की उपधारा (3) के अधीन किया जाएगा;
(दो) धारा 16 की उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र की प्ररूप तथा रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र मंजूर किए जाने की रीति और उक्त धारा के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र मंजूर किए जाने के लिए आवेदन में दी गई विशिष्टियों का सत्यापन;
(तीन) वह समय जिसके भीतर तथा वह प्राधिकारी जिसे कारबार 780( 16)
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की तब्दीलियों के संबंध में जानकारी धारा 16 की उपधारा (8) के अधीन दी जाएगी;
(पांच) धारा 18 की उपधारा (1 ) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करने की रीति एवं प्ररूप;
(झ) (एक) नोटिस तामील करने की रीति और वह प्राधिकारी जिसको वह कालावधि, जिसके लिए वह प्ररूप , वह रीति जिसमें और वे तारीखें जिन तक धारा 19 की उपधारा (1 ) के अधीन विवरणियां दी जाएंगी;
(दो) वह रीति जिसमें तथा वह समय जिसके भीतर पुनरीक्षित विवरणी धारा 19 की उपधारा (2 ) के अधीन दी जाएगी;
(तीन) वह प्ररूप तथा वह रीति जिसमें , वह कालावधि जिसके लिए और वह तारीख जिसके द्वारा धारा 19 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड (ख ) के अधीन विवरण पत्रक दिए जाएंगे;
(चार) धारा 20 की उपधारा ( 1 ) के अधीन वह रीति, जिसमें तथा वह दिनांक जिसकी एवं अधिकारी जिसके समक्ष विवरण पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे ;
(ञ) (एक) वे शर्तें तथा निर्बन्ध जिनके अध्यधीन रहते हुए किसी वर्ष के भाग के लिए निर्धारण किया जा सकेगा;
(दो) उस नोटिस का प्ररूप तथा वह रीति जिसमें कर का निर्धारण / पुनः निर्धारण धारा 21 की उपधारा (4 ) , (5) तथा (6) के अधीन और पुनः निर्धारण धारा 22 के अधीन किया जाएगा;
(ट) (एक) वह फीस जिसका भुगतान करने पर कोई कर व्यवसायी या कोई व्यक्ति कर व्यवसायी के रूप में उपसंजात होने के लिए हकदार है धारा 24 की उपधारा (3 ) के अधीन स्वयं को नामांकित कराएगा;
(दो) धारा 24 की उपधारा (4 ) के अधीन नामांकन प्रमाणपत्र का प्ररूप;
(ठ) (एक) वह रीति जिसमें वह समय जिसके भीतर तथा वे अंतराल जिन पर कर धारा 25 की उपधारा (1 ) के अधीन चुकाया जाएगा;
(दो) वह रीति जिसमें शोध्य कर की रकम का भुगतान धारा 25 की उपधारा (2 ) के अधीन सरकार को किया जाएगा तथा वे 780(17)
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निबंधन तथा शर्त जिनके अध्यधीन रहते हुए बही समायोजन द्वारा धारा 25 की उपधारा (4 ) के अधीन भुगतान के लिए अनुज्ञा दी जा सकेगी;
(तीन) वह प्रारूप जिसमें धारा 25 की उपधारा (5 ) के अधीन सूचना जारी की जाएगी;
(चार) वे निर्बंधन तथा शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए आयुक्त द्वारा धारा 25 की उपधारा (7) के अधीन और समय प्रदान किया जा सकेगा;
(पांच) वह रीति जिसमें और वह कालावधि जिसके भीतर आयुक्त धारा 25 की उपधारा (11 ) के अधीन कर के बकाया की वसूली के संबंध में व्यापारी या व्यक्ति तथा प्राधिकारी को इत्तिला देगा;
(छः) उस सूचना का प्ररूप तथा वह रीति जिसमें और वह समय जिसके भीतर अग्रिम में देय कर धारा 26 की उपधारा (3 ) के अधीन चुकाया जाएगा;
(सात) वह रीति जिसमें क्रेता या संविदा भाड़े पर देने वाले व्यक्ति द्वारा काटी गई रकम , धारा 27 की उपधारा (4) तथा (5 ) के अधीन चुकायी तथा समायोजित की जाएगी और धारा 27 की उपधारा (3) के अधीन जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्र का प्ररूप तथा रीति जिसमें, वह प्राधिकारी जिसको तथा वह कालावधि जिसके भीतर उक्त धारा की उपधारा (8 ) के अधीन विवरण दिया जाएगा
(आठ) वह प्ररूप तथा रीति जिसमें, तथा वह प्राधिकारी जिसके द्वारा धारा 28 के अधीन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा ;
(नौ) धारा 29 की उपधारा ( 1 ) के अधीन दी जाने वाली सूचना का प्ररूप ;
( ड) (एक) धारा 37 की उपधारा (3 ) के अधीन दी जाने वाली सूचना का प्ररूप ;
(दो) धारा 37 की उपधारा (5) के अधीन सूचना का प्ररूप तथा सूचना के प्रकाशन की रीति ;
(तीन) उस आवेदन का प्ररूप जिसमें प्रतिदाय का दावा धारा 37 की उपधारा (6) के अधीन किया जा सकेगा
(ढ) वह रीति जिसमें धारा 39 की उपधारा (1 ) के अधीन प्रतिदाय किया जाएगा ;
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(ण) वह तारीख जिसके द्वारा लेखा संपरीक्षित किए जाएंगे और वह प्ररूप तथा रीति जिसमें और वह समय जिसके भीतर धारा 41 के अधीन संपरीक्षा की रिपोर्ट दी जाएगी ;
(त) वे विशिष्टियाँ जो धारा 42 के अधीन जारी किए गए बिल , बीजक, केशमेमों में दी जाएगी :
(थ) वे निर्बन्धन तथा शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए आयुक्त धारा 43 के अधीन अपनी शक्तियों तथा इस अधिनियम के अधीन कर्तव्य प्रत्यायोजित कर सकेगा ;
(द) धारा 45 की उपधारा (1 ) के खण्ड (फ ) के अधीन प्राधिकारियों और अधिक शक्तियों को विहित किया जाना ;
(ध) (एक) वह रीति जिसमें अपील धारा 48 तथा धारा 49 की उपधारा (4) और (6) के अधीन फाइल की जा सकेगी ;
(दो) अपील उप आयुक्त या अधिकरण द्वारा धारा 48 की उपधारा (6) के अधीन अपीलों का निपटारा करने में अनुसरण करने के लिए प्रक्रिया ;
(तीन) धारा 49 की उपधारा (3 ) के अधीन सूचना का प्ररूप ;
( चार) धारा 48 , 49 या 56 के अधीन अपीलों, पुनरीक्षण संबंधी आवेदनों के निपटारे या भूल के परिशोधन के लिए और इस अधिनियम के अधीन अनुतोष के लिए प्रकीर्ण आवेदनों या याचिकाओं के निपटारे के लिए प्रक्रिया तथा फीस को सम्मिलित करते हुए उससे आनुषंगिक अन्य विषय ;
(न) ऐसे न्यायालय फीस स्टाम्पों का मूल्य जो धारा 51 के अधीन अपील या पुनरीक्षण संबंधी आवेदन पर लगाये जाएंगे ;
(प) धारा 54 की उपधारा (2) के अधीन जारी की जाने वाली सूचना का प्ररूप ;
(फ) धारा 56 की उपधारा (1 ) के परंतुक के खण्ड (दो) के अधीन सूचना देने का प्ररूप ;
धारा 57 की उपधारा (3) के अधीन वे शर्तें जिनके अध्यधीन
(एक)
(ब)
रहते हुए , आयुक्त लेखा, रजिस्टर या दस्तावेज पेश करने अथवा अन्य जानकारी देने की अपेक्षा कर सकेगा ;
(दो) धारा 57 की उपधारा (6) के खण्ड (ख ) के अधीन तामील की जाने वाली सूचना का प्ररूप ;
(तीन) रीति जिसके अनुसार धारा 57 की उपधारा (6 ) के खण्ड 780 ( 19)
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(च) के अधीन माल का व्ययन किया जाएगा
(चार) (
क) वह रीति जिसमें जांच चौकियां स्थापित की जाएंगी या नाके (बेरियर्स) बनाए जाएंगे , वह रीति जिसमें और वह फीस जिसका भुगतान करने पर घोषणापत्र अभिप्राप्त किया जायेगा , वह प्ररूप तथा रीति जिसमें घोषणा तथा अन्य दस्तावेज परिदत्त किए जाएंगे या फाइल किए जाएंगे , वह रीति जिसमें माल अभिगृहीत किया जाएगा या निर्मुक्त किया जाएगा, सूचना तामील किए जाने का प्ररूप, वह रीति जिसमें शास्ति जमा की जाएगी , वह रीति जिसमें अभिगृहीत माल बेचा जाएगा , वह कालावधि जिस तक घोषणा तथा अन्य दस्तावेजें धारा 58 के अधीन परेषिती द्वारा रखे जाएंगे;
(ख) वे निर्बन्धन जिनके अधीन रहते हुए धारा 58 के अधीन किसी यान को रोका जा सकेगा;
(ग) वह प्ररूप तथा रीति जिसमें धारा 59 के अधीन पास अभिप्राप्त होगा;
(घ) वह प्राधिकारी जिसे , वह समय जिसके भीतर तथा वह प्ररूप जिसमें धारा 62 के अधीन जानकारी दी जाएगी;
(भ) वे शर्तें जिनके अध्यधीन रहते हुए , आयुक्त उसकी सहायता के लिए धारा 3 के अधीन नियुक्त किए गए व्यक्तियों को इस अधिनियम के अधीन समस्त अपराधों का धारा 64 की उपधारा (4 ) के अधीन अन्वेषण करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगाः
(म) वह प्ररूप तथा वह रीति जिसमें, वह प्राधिकारी जिसके द्वारा वह समय जिसके भीतर तथा वह कालावधि जिसके लिए कर समाशोधन प्रमाणपत्र धारा 65 के अधीन जारी किया जाएगा;
(य) वह प्ररूप तथा वह रीति जिसमें प्राधिकारी को आवेदन किया जाएगा तथा वह प्रक्रिया जिसके अनुसार प्राधिकारी धारा 70 के अधीन कोई आदेश पारित करेगा;
(क-1 ) (एक) वह रीति तथा वह कालावधि जिसमें आगत कर धारा 73 के अधीन किया जाएगा या अनुज्ञात किया जाएगा ;
(दो) वह प्ररूप तथा रीति जिसमें तथा वह 780 ( 20)
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कालावधि जिसके भीतर माल के भण्डारण ( स्टाक) के ब्यौरे धारा 73 की उपधारा (1 ) के अधीन दिए जाएंगे;
(ख -1 ) (एक) इस अधिनियम के अधीन कैसे तथा कितने समय के भीतर, आवेदन किए जाएंगे जानकारी दी जाएगी और सूचना तामील की जाएगी;
(दो) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रवर्तित करने के प्रयोजन के लिये नियुक्त किए गए अधिकारियों के कर्तव्य तथा उनकी शक्तियां; और
(तीन) साधारणतः इस अधिनियम के अधीन कार्यवाही में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया का विनियमन और उक्त कार्यवाहियों में प्रयुक्त किए जाने वाले प्ररूप;
(3) इस धारा के अधीन नियम बनाने की शक्ति में वह शक्ति भी सम्मिलित है कि नियमों को या उनमें से किसी भी नियम को किसी ऐसी तारीख से, जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से पूर्वतर हो, भूतलक्षी प्रभाव दिया जाए ;
(4) कोई भी नियम बनाते समय राज्य सरकार यह निर्देश दे सकेगी कि-
(क) उसका भंग , जुर्माने से, जो दस हजार से अधिक न हो , और यदि अपराध चालू रहने वाला है, तो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसमें कि अपराध चालू रहता है; ऐसे जुमनि से , जो एक सौ रूपये से अधिक न हो, दण्डनीय होगा; और
(ख) किसी नियम के उल्लंघन के संबंध में आयुक्त ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकेगा जो दस हजार रूपये से अधिक न हो;
परंतु ऐसी कोई भी शास्ति संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी.
(5) इस धारा के अधीन बनाए गए समस्त नियम , उनके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधान सभा के पटल पर रखे जाएंगे .
दिनेश शर्मा
सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2026.