10000
0000
छत्तीसगढ़ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 384 ]
आषाढ़ 24 , शक 1948
नवा रायपुर , बुधवार, दिनांक 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
नवा रायपुर अटल नगर, बुधवार, दिनांक 15 जुलाई, 2026 (आषाढ़ 24, 1948)
क्रमांक-9645 / वि.स./ विधान/ 2026.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 (क्रमांक 15 सन् 2026) जो बुधवार, दिनांक 15 जुलाई, 2026 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
767 768
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 15 सन् 2026 )
छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस विधेयक , 2026
अनुक्रमणिका
अध्याय-एक
प्रारंभिक
खण्ड
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ
2. प्रशासनिक अधिकारिता तथा व्यावृत्तियां
3. परिभाषाएं
अध्याय -दो
कार्यपालक परिषद
4. कार्यपालक परिषद का गठन
5. कार्यपालक परिषद की शक्तियां तथा कार्य
अध्याय-तीन
कार्यपालक समिति
6. कार्यपालक समिति का गठन
7. कार्यपालक समिति की शक्तियां तथा कार्य
अध्याय-चार
जिला सशक्त समिति
8. जिला सशक्त समिति का गठन
9. जिला सशक्त समिति की शक्तियां तथा कार्य
10. जिला सशक्त समिति के आदेशों के विरुद्ध अपील
अध्याय-पाँच
सुधार तंत्रः जोखिम वर्गीकरण - स्व- प्रमाणीकरण , तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण , अभिकल्पित अनुमोदन तथा आजीवन वैधता
11. सेवाओं का जोखिम वर्गीकरण
12. स्व- प्रमाणीकरण सुधार
13. तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण सुधार
14. अभिकल्पित अनुमोदन सुधार
15. अनुमोदनों की वैधता
16. सेवाओं/गतिविधियों का उन्मूलन
अध्याय-छः
अध्यारोही प्रभाव, शिकायत निवारण तंत्र तथा अनुसूची में संशोधन की शक्ति अध्यारोही प्रभाव 17.
18. अनुसूचियों को संशोधित करने की शक्ति
19. शिकायत निवारण तंत्र 768 ( 1)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
अध्याय-सात प्रकीर्ण
20. प्रत्यायोजन की शक्ति
21 . नियम बनाने की शक्ति
22. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
23 . निर्देश जारी करने की शक्ति
24. सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण
अनुसूची
अनुसूची- एक- प्रशासनिक विभागों, अधिनियमों, सेवाओं की सूची 768 ( 2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 15 सन् 2026)
छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस विधेयक , 2026
छत्तीसगढ़ राज्य में निवेश विश्वास तथा उसके द्वारा सतत् आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए अभिकल्पित अनुमोदन, स्व-प्रमाणीकरण, तृतीय- पक्ष प्रमाणीकरण तथा दोहरे अनुज्ञप्ति दायित्वों के उन्मूलन के तंत्रों के माध्यम से ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सक्षम बनाने वाला एक पारदर्शी, जोखिम- आधारित विनियामक ढांचा स्थापित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के सतहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो: -
अध्याय - एक
प्रारंभिक
1. ( 1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026 कहलाएगा ।
संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.
( 2 ) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर होगा ।
( 3 ) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।
2.
प्रशासनिक अधिकारिता तथा व्यावृत्तियां.
( 1 ) अनुसूची- एक में विनिर्दिष्ट संबंधित विधान के संबंध में प्रशासनिक अधिकारिता , यथापूर्व प्रयोग किए जाने के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के संबंधित प्रशासनिक विभागों में निहित रहेगी । संबंधित विभाग अपने प्रशासनिक क्षेत्राधिकार के भीतर, इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक रूप से संबंधित नियमों में संशोधन करने, दिशानिर्देश या निदेश जारी करने तथा ऐसे अन्य उपाय करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे ।
(2) इस अधिनियम की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि, इसके प्रारंभ के पूर्व संस्थित या समाप्त किसी अन्वेषण , जांच, निर्धारण , न्यायनिर्णयन, अपील , प्रवर्तन कार्रवाई या विधिक कार्यवाही को अवैध ठहराया जाये और न ही यह अर्थ लगाया जाएगा कि यह किसी विधिविरुद्ध कार्यवाही को विधिमान्यता प्रदान करता है । 768 (3)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
3.
परिभाषाएं.
इस अधिनियम में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो: -
(क) " प्रशासनिक विभाग " से अभिप्रेत है अनुसूची- एक के स्तंभ संख्या ( 2 ) में उल्लिखित तत्स्थानी सेवाओं के लिए स्तंभ संख्या में उल्लिखित (4) विभाग;
(ख) " आवेदन" से अभिप्रेत है किसी उद्यम द्वारा अनुमोदन या इस अधिनियम के अंतर्गत समाविष्ट अथवा अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी अन्य शासन-से- शासन तथा शासन- से- व्यवसाय सेवा के लिए सक्षम प्राधिकारी को किया गया ऑनलाईन या ऑफलाईन कोई अनुरोध, अभ्यावेदन या प्रस्तुतीकरण;
(ग) " अनुमोदन" से अभिप्रेत है कोई अभिस्वीकृती , अनापत्ति प्रमाण - पत्र , सहमति, पंजीयन , अनुज्ञा, अनुज्ञप्ति, समाशोधन अथवा मंजूरी , अनुसूची- एक में उल्लिखित किसी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त किया जाना अपेक्षित हो, और इसके अंतर्गत कोई अभिकल्पित अनुमोदन, अभिकल्पित अनुज्ञा या सैद्धांतिक अनुमोदन भी सम्मिलित है;
(घ) " सक्षम प्राधिकारी " से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी संबंधित विधान के अंतर्गत इस अधिनियम की अनुसूची- एक में विनिर्दिष्ट किसी सेवा के प्रशासन, विनियमन या प्रदाय के लिए उत्तरदायी प्राधिकारी के रूप में पदाभिहित या गठित कोई प्राधिकारी , अधिकारी या निकाय;
(ड. ) " पूर्ण आवेदन" से अभिप्रेत है ऐसा आवेदन जो सेवा हेतु प्रकाशित जांच- सूची में विनिर्दिष्ट अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित समस्त दस्तावेजों सहित प्रस्तुत किया गया हो एवं निर्धारित शुल्क संदाय कर दिया गया हो ;
(च) " जिला सशक्त समिति " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत गठित समिति;
(छ) " उद्यम" से अभिप्रेत है माल के उत्पादन, सेवाओं, अवसंरचना , सुविधाओं के विकास या अन्य किसी आर्थिक अथवा सामाजिक क्रियाकलाप में संलग्न औद्योगिक, वाणिज्यिक, व्यावसायिक, रियल एस्टेट, वृत्तिक, संस्थागत, शैक्षणिक या सामाजिक क्षेत्र का उपक्रम;
(ज) "कार्यपालक समिति " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत गठित समिति;
(झ) " कार्यपालक परिषद " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 768(4)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
4 के अंतर्गत गठित परिषद;
(ञ) निरीक्षण" से अभिप्रेत है सुसंगत अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी /प्राधिकृत अधिकारी /प्रत्यायित तृतीय - पक्ष प्रमाणकों द्वारा किया गया कोई भौतिक, आभासी या दस्तावेजी सत्यापन;
(ट) " नोडल विभाग " से अभिप्रेत है वाणिज्य तथा उद्योग विभाग , छत्तीसगढ़ शासन;
(ठ) " पोर्टल " से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ शासन की एकल खिड़की प्रणाली , जिसके अंतर्गत प्रस्तुतीकरण , प्रक्रियाकरण , अनुवीक्षण , निराकरण तथा अनुमोदनों के सृजन के लिए कोई विभागीय सूचना प्रणाली या वेबसाइट भी सम्मिलित है ;
(ड) "विहित " से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अंतर्गत निर्मित नियमों में यथा विहित;
(ढ) "स्व- प्रमाणीकरण " से अभिप्रेत है किसी उद्यम द्वारा इस अधिनियम की धारा 12 के अनुसार लागू विधान के अनुपालन की घोषणा करते हुए प्रस्तुत किया गया प्रमाणीकरण;
(ण) "सेवा " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट कोई सेवा;
(त) "विहित समय " का वही अर्थ होगा जो छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम , 2011 (सन् 2011 का क्रमांक 23 ) के अंतर्गत, उसे समनुदेशित है :
परन्तु जहां इस अधिनियम की अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट किसी सेवा के संबंध में छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम , 2011 (सन् 2011 का क्रमांक 23 ) के अंतर्गत कोई विहित समय नियत नहीं है , वहां संबंधित सक्षम प्राधिकारी , अधिसूचना द्वारा, छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम , 2011 (सन् 2011 का क्रमांक 23 ) के अंतर्गत ऐसी सेवा के लिए विहित समय नियत करेगा, और इस प्रकार नियत विहित समय को, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, उस सेवा हेतु विहित समय समझा जाएगा;
( थ) " तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण " से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा 13 के अनुसार सुसंगत विधान के अनुपालन का सत्यापन करने के लिए शासन या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मान्यताप्राप्त या सूचीबद्ध किसी अभिकरण , विशेषज्ञ, वृत्तिक 768 ( 5)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
या संस्था द्वारा जारी किया गया प्रमाणीकरण तथा तृतीय पक्ष प्रमाणक का अर्थ तद्नुसार लगाया जायेगा ।
अध्याय-दो
कार्यपालक परिषद
4. ( 1 ) राज्य शासन , अधिसूचना द्वारा, " कार्यपालक परिषद " (जिसे इसमें इसके पश्चात् " परिषद " कहा गया है) का गठन करेगी।
कार्यपालक परिषद का गठन.
(2) परिषद , इस अधिनियम के अंतर्गत अनुपालन भार में कमी तथा ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस से संबंधित सभी विषयों के लिए शीर्ष निकाय होगी ।
(3) परिषद में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे-
(क) छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री, जो इसके अध्यक्ष होंगे ;
(ख) वित्त के भारसाधक मंत्री, सदस्य;
(ग) विधि तथा विधायी कार्य के भारसाधक मंत्री , सदस्य;
(घ) वाणिज्य तथा उद्योग के भारसाधक मंत्री, सदस्य;
(ङ) विचाराधीन विषय से संबंधित प्रशासनिक विभाग के भारसाधक मंत्री, जो उस विषय के संबंध में सदस्य होंगे; और
(च) छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव, जो संयोजक होंगे ।
(4) परिषद , विचाराधीन किसी विषय के लिए, मंत्री, अधिकारी , विशेषज्ञ अथवा किसी विभाग, बोर्ड, निगम, प्राधिकरण अथवा शासन द्वारा स्थापित सोसाईटी के प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रिती के रूप में अपनी बैठकों में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित कर सकेगी ।
(5)
परिषद , एक या अधिक समितियाँ गठित कर सकेगी और किसी शक्तिया कार्य को ऐसी समिति को प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
5.
(1) परिषद , किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगी, अर्थात्ः-
(एक) ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सरल बनाने हेतु राज्य के सभी विभागों को नीतिगत निर्देश जारी करना;
कार्यपालक परिषद की शक्तियांतथा कार्य.
(दो) अनुसूची- एक में किसी प्रविष्टि को जोड़ने, उपांतरण , 768 ( 6)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
अंतरण या हटाने के लिए धारा 18 के अंतर्गत कार्यपालक समिति की अनुशंसाओं पर विचार करना तथा उन्हें अनुमोदित करना;
(तीन) कार्यपालक समिति तथा जिला सशक्त समिति के कार्य का अनुवीक्षण , पर्यवेक्षण तथा पुनर्विलोकन करना;
(चार) ऐसे मामलों में जहां समिति के सदस्यों के मध्य अभिमतों में भिन्न्ता हो , कार्यपालक समिति द्वारा उसे निर्दिष्ट किये जाने पर निर्णय लेना;
( पाँच) कार्यपालक समिति द्वारा किए गए किसी विनिश्चय की स्वप्रेरणा से परीक्षा तथा पुनर्विलोकन;
(छः ) परिषद के विनियमों तथा प्रक्रियाओं का अनुमोदन करना तथा ऐसे कृत्यों का कार्यपालक समिति को आवंटन करना;
(
सात) अपने कारबार के संव्यवहार के लिए ऐसी प्रक्रिया अपनाना जैसी विहित की जाए ।
अध्याय-तीन
कार्यपालक समिति
6. ( 1 ) राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए एक कार्यपालक समिति गठित करेगा ।
कार्यपालक समिति का गठन.
(2) कार्यपालक समिति में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे-
(क) मुख्य सचिव जो इसके अध्यक्ष होंगे ;
(ख ) सचिव , अधिकारी और विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे जिन्हें राज्य शासन अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे, सदस्य होंगे ।
(3 ) कार्यपालक समिति का सचिवालय , प्रभावी समन्वय तथा विषय- वस्तु विशेषज्ञता के लिए जैसा आवश्यक हो विभागों, मण्डलों , निगमों, प्राधिकरणों या शासन द्वारा स्थापित सोसाइटियों के ऐसे अधिकारियों या प्रतिनिधियों को, अधिसूचना द्वारा, सहयोजित कर सकेगा, जो समिति की बैठकों तथा विचार- विमर्श में भाग लेंगे ।
(4) कार्यपालक समिति, बैठकें बुलाने, कार्य संचालन करने, अभिलेख रखने, कार्यसूची परिचालित करने, विनिश्चय करने के लिए अपनी स्वयं की प्रक्रियाएं अवधारित कर सकेगी तथा अन्य आवश्यक विषयों एवं अपने अधिकार एवं कार्यों को ऐसी समिति को प्रत्यायोजित कर सकेगी ।
( 5) कार्यपालक समिति का सचिवालय राज्य शासन द्वारा अधिसूचित 768 ( 7)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
कार्यालय से संचालित होगा ।
(6 ) कार्यपालक समिति भर्ती विनियमों , वित्तीय विनियमों तथा ऐसे अन्य विनियमों को बना सकेगी, जो इस अधिनियम के उद्देश्यों के प्राप्तिके लिए आवश्यक हो ।
7 . किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कार्यपालक समिति को निम्नलिखित शक्तियां होंगी: -
कार्यपालक समितिकी शक्तियां तथा कार्य.
( 1 ) कार्यपालक समिति इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी ।
(2) जहां किसी उद्यम का राज्य स्तर पर किसी सेवा के संबंध में आवेदन -
(एक) सक्षम प्राधिकारी द्वारा नामंजूर कर दिया गया हो; या
(दो) सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित समय के भीतर निराकरण नहींकिया गया हो,
वहां कार्यपालक समिति, सक्षम प्राधिकारी के विनिश्चय या आचरण का पुनर्विलोकन कर सकेगी और लिखित रूप में अभिलिखित आदेश द्वारा सक्षम प्राधिकारी को यह अनुशंसा कर सकेगी कि वह -
(क) आवेदन पर, कार्यपालक समिति द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसी समय - सीमा के भीतर , पुनर्विचार कर आदेश पारित करे; या
(ख) वह कार्यपालक समिति द्वारा विनिर्दिष्ट समय - सीमा के भीतर लंबित आवेदन का निराकरण करें ।
(3 ) कार्यपालक समिति, किसी क्षेत्र या उद्यमों के वर्ग के लिए, इस अधिनियम अथवा सुसंगत विधान के अंतर्गत अपेक्षित समस्त अनुमोदनों के समन्वयन तथा सुकरीकरण हेतु एकल संपर्क बिंदु अधिसूचित किये जाने के लिये प्रशासकीय विभाग को अनुशंसा कर सकेगी ।
(4 ) यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्राधिकारी विहित समय के अनुसार आवश्यक अनुमोदन प्रदान करें, राज्य - स्तर पर सक्षम प्राधिकारियों का अनुवीक्षण करना;
(5 ) कार्यपालक समिति, जिला सशक्त समिति के कार्य का अनुवीक्षण करेगी;
( 6 ) कार्यपालक समिति इस अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत 768 (8)
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उपबंधित रीति में कृत्यों का निर्वहन करेगी;
(7 ) कार्यपालक समिति, इस अधिनियम के अंतर्गत सुधारों के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक विभागों को अनुशंसाएं करने के लिए सक्षम होगी ।
(8 ) कार्यपालन समिति, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिये , जो आवश्यक हो , ऐसे कार्य , शक्तियों तथा उत्तरदायित्व जिला सशक्त समिति को समनुदेशित करेगी ।
(9 ) कार्यपालक समिति , संबंधित विधान के लिए एक प्रभावी, जोखिम - आधारित निरीक्षण प्रणाली अपनाने की अनुशंसा प्रशासनिक विभागों को कर सकेगी , जिसके अंतर्गत निरीक्षणों को प्राथमिकता देने, पुनरावृत्ति से बचने तथा उद्यमों पर अनुपालन भार को कम करने के उपाय सम्मिलित हैं;
( 10 ) कार्यपालक समिति, इस अधिनियम के अंतर्गत उद्भूत ऐसे सभी विषयों पर विचार करने तथा विनिश्चय करने के लिए सक्षम होगी जो जिला सशक्त समिति के समक्ष रखे जाने के लिए अपेक्षित नहीं हैं, और कोई ऐसा विषय जो अभिव्यक्त रूप से जिला सशक्त समिति को समनुदेशित नहीं है , कार्यपालक समिति को निर्दिष्ट समझा जाएगा ।
अध्याय-चार जिला सशक्त समिति
8.
जिला सशक्त समिति का गठन.
( 1 ) राज्य शासन , इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा प्रत्येक जिले हेतु जिला सशक्त समिति का गठन करेगा। जिला सशक्त समिति, कार्यपालक समिति के समग्र अधीक्षण, निदेशन तथा नियंत्रण के अधीन होगी ।
( 2 ) जिला सशक्त समिति का अध्यक्ष , जिले का कलेक्टर होगा और समिति ऐसे अन्य अधिकारियों और जिला स्तरीय प्राधिकारियों से मिलकर बनेगी जो विहित की जाये ।
( 3 ) जिला सशक्त समिति का कार्यकाल और कार्य की रीति ऐसी होगी जैसा कि विहित किया जाए ।
9. किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक जिला सशक्त समिति को निम्नलिखित शक्तियां होंगी: -
( 1 ) जहां किसी उद्यम का जिला स्तर पर किसी सेवा के संबंध में कोई आवेदन-
जिला सशक्त समितिकी शक्तियांतथा कार्य.
768 ( 9)
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(एक) सक्षम प्राधिकारी द्वारा नामंजूर कर दिया गया हो; या
(दो) सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित समय के भीतर निराकृत
नहींकिया गया हो,
वहां जिला सशक्त समिति, उद्यम द्वारा या तो स्वप्रेरणा हो या किए गए लिखित अनुरोध पर सक्षम प्राधिकारी के विनिश्चय या आचरण का पुनर्विलोकन कर सकेगी और लिखित रूप में अभिलिखित आदेश द्वारा सक्षम प्राधिकारी को यह अनुशंसा कर सकेगी कि वह-
(क) आवेदन पर , जिला सशक्त समिति द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसी समय- सीमा के भीतर , पुनर्विचार कर आदेश पारित करे; या
(ख ) वह जिला सशक्त समिति द्वारा विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर लंबित आवेदन का निराकरण करें:
परन्तु इस खंड के अंतर्गत शक्ति का प्रयोग केवल ऐसे सक्षम प्राधिकारी के संबंध में किया जा सकेगा जो कलेक्टर के पद से नीचे का हो, और जहां सक्षम प्राधिकारी कलेक्टर के पद का या उससे ऊपर का हो, वहां जिला सशक्त समिति ऐसे निदेश के लिए, जो वह उचित समझे , मामला कार्यपालक समिति को निर्दिष्ट करेगी ।
(2) जिला- स्तर पर सक्षम प्राधिकारियों द्वारा प्रदत्त सेवाओं का अनुवीक्षण करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये प्राधिकारी संबंधित विधान के अंतर्गत विहित समय के अनुसार आवश्यक अनुमोदन प्रदान करें;
(3 ) कार्यपालक समिति द्वारा समनुदेशित कोई अन्य कार्य।
10. ( 1 ) जिला सशक्त समिति के विनिश्चय से व्यथित कोई उद्यम या सक्षम प्राधिकारी , इस अधिनियम के अंतर्गत विहित ऐसे प्रारूप और रीति में कार्यपालक समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकेगा ।
जिला सशक्त समितिके आदेशों के विरुद्ध अपील.
(2 ) कार्यपालक समिति, सुनवाई का अवसर देने के पश्चात , अपील का शीघ्रतापूर्वक विनिश्चय करेगी ।
अध्याय-पाँच
सुधार तंत्र: जोखिम वर्गीकरण - स्व-प्रमाणीकरण, तृतीय- पक्ष प्रमाणीकरण , अभिकल्पित अनुमोदन तथा आजीवन
वैधता 768 ( 10)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
11. (
सेवाओं का जोखिम वर्गीकरण.
1 ) ( एक) प्रत्येक प्रशासनिक विभाग , इस अधिनियम के प्रारंभ के दिनांक से नब्बे दिनों के भीतर, अधिसूचना द्वारा , अनुसूची- एक में सूचीबद्ध , संबंधित विधान से संबंधित सेवाओं को क्रियाकलाप की प्रकृति , संक्रियाओं के परिमाण , स्थान , पर्यावरणीय तथा सुरक्षा प्रभाव, भूतपूर्व अनुपालन इतिहास तथा किसी अन्य समुचित मानदंड जैसे पैरामीटर के आधार पर निम्न जोखिम , मध्यम जोखिम तथा उच्च जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत करेगा, और इस उप - धारा में विनिर्दिष्ट पैरामीटर को ध्यान में रखते हुए किसी सेवा, स्थापना या उद्यम को उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत करने के विशिष्ट आधारों को लिखित रूप में अभिलिखित करेगा;
परन्तु प्रशासकीय विभाग , नब्बे दिनों से अनधिक अवधि के लिए और विस्तार हेतु कार्यपालक समिति से अनुरोध कर सकेगा और कार्यपालक समिति , लिखित रूप में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से , उक्त अवधि का विस्तार , जैसा वह आवश्यक समझे, कर सकेगी ।
(दो) इस उप - धारा के अंतर्गत अधिसूचित किया जाने वाला प्रत्येक जोखिम वर्गीकरण , पुनर्विलोकन तथा अनुमोदन के लिए कार्यपालक समिति के समक्ष रखा जाएगा , और कार्यपालक समिति , ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के आधार पर , एक बोलते हुए आदेश के द्वारा-
(क) वर्गीकरण की पुष्टि कर सकेगी;
(ख) प्रशासनिक विभाग को कारण सहित सेवा , स्थापना या उद्यम को भिन्न जोखिम श्रेणी में पुनर्वर्गीकृत करने की अनुशंसा कर सकेगी; या
(ग) उस जनहित की समुचित रक्षा करते हुए, जिसके लिए वर्गीकरण नियत किया गया या विनियामक भार को कम करने के लिए आवश्यक समझी जाने वाली अनुपालन सत्यापन की रीति, आवृत्ति या प्रकार संबंधी ऐसी शर्तें या उपांतरण अनुशंसित कर सकेगी ;
परन्तु यह भी कि जहां इस उप- धारा के अंतर्गत प्रारंभिक वर्गीकरण के पश्चात , कोई प्रशासनिक विभाग किसी सेवा , स्थापना या उद्यम की जोखिम श्रेणी को उपांतरित या पुनर्वर्गीकृत करना आवश्यक समझे , वहां वह ऐसा केवल कार्यपालक समिति के पूर्व 768 ( 11)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
अनुमोदन से और अधिसूचना द्वारा करेगा।
(2 ) अनुसूची- एक में सूचीबद्ध सेवाओं पर लागू सुधार तंत्र , उप - धारा ( 1 ) के अंतर्गत उसके जोखिम वर्गीकरण द्वारा अवधारित होगा , अर्थात्: -
(एक) धारा 12 के अंतर्गत निम्न जोखिम के लिए स्व- प्रमाणीकरण; और
(दो) धारा 13 के अंतर्गत मध्यम जोखिम के लिए तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण ; और
(तीन) धारा 14 के अंतर्गत उच्च जोखिम के लिए अभिकल्पित अनुमोदन; और
(चार) अनुमोदनों की वैधता धारा 15 द्वारा शासित होगी ।
12.
स्व-प्रमाणीकरण सुधार.
( 1 ) प्रयोज्यता- धारा 11 के अंतर्गत निम्न जोखिम के रूप में वर्गीकृत सेवाओं के लिए , संबंधित विधान में विहित ऐसे प्रारूप और रीति में स्व- प्रमाणीकरण के माध्यम से अनुपालन स्थापित किया जा सकेगा।
(2) समय - सीमाबद्ध निराकरण- जहां कोई उद्यम विहित प्रारूप और रीति में पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करता है , वहां सक्षम प्राधिकारी द्वारा पूर्व भौतिक निरीक्षण की अपेक्षा किए बिना, विहित प्रारूप में अनुमोदन प्रमाण - पत्र, ऐसे पूर्ण आवेदन के प्रस्तुतीकरण के पंद्रह दिनों के भीतर , इस बात के अत्यधीन रहते हुए कि उद्यम ने संबंधित विधान के अंतर्गत निर्धारित सभी अपेक्षाओं की पूर्ति की हो और सभी शर्तों, मानदंडों तथा सांविधिक पैरामीटर का अनुपालन किया हो, जारी किया जाएगा;
परन्तु जहां उक्त अवधि के भीतर अनुमोदन प्रमाण - पत्र जारी नहीं किया जाता और विलंब आवेदक के लिए अभिनिर्धार्य नहीं है , वहां ऐसी अवधि की समाप्ति पर अनुमोदन को अभिकल्पित अनुमोदन माना जाएगा, और धारा 14 की उप - धारा (2 ) के खंड (दो) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
परन्तु यह और कि जहां आवेदन में कोई उपचारणीय त्रुटि प्रकट होती है, वहां सक्षम प्राधिकारी , संबंधित विधान के अंतर्गत विहित प्रारूप और रीति में, आवेदक को ऐसी त्रुटि को सुधारने का पर्याप्त अवसर देगा ।
(3 ) निलंबन, प्रतिसंहरण तथा सुधार- यदि स्व- प्रमाणीकरण किसी तात्विक बात में मिथ्या या भ्रामक पाया जाता है , तो सक्षम प्राधिकारी संबंधित अनुमोदन को निलंबित , प्रतिसंहृत या 768 ( 12)
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उपांतरित कर सकेगा। वह संबंधित विधान के अंतर्गत उपबंधित शास्तियां भी अधिरोपित कर सकेगा;
परन्तु, नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतो का पालन किये बिना कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी; और
परन्तु यह और कि जहां त्रुटियां उपचारणीय हों, वहां प्रतिसंहरण से पूर्व समय - सीमाबद्ध सुधार का अवसर दिया जाएगा ।
(4) प्रतिसंहरण का प्रभाव- प्रतिसंहरण भविष्यलक्षी रूप से प्रभावी होगा और ऐसे प्रतिसंहरण के पूर्व सद्भावपूर्वक की गयी किसी कार्यवाही की वैधता या विधिक मान्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा , सिवाय उस सीमा तक जितना सतत होने वाली क्षति को रोकने या कम करने के लिए आवश्यक हो ।
13.
तृतीय- पक्ष प्रमाणीकरण सुधार.
( 1 ) मान्यता- सक्षम प्राधिकारी , कार्यपालक समिति के परामर्श से , धारा 11 के अंतर्गत मध्यम जोखिम के रूप में वर्गीकृत सेवाओं के लिए तृतीय - पक्ष प्रमाणकों को मान्यता तथा सूचीबद्ध करेगा, तथा पात्रता, कर्तव्य , हित के द्वंद्व से संबंधित सुरक्षोपाय और शुल्क मानदंड प्रकाशित करेगा ।
(2) समय- सीमाबद्ध निराकरण- जहां कोई उद्यम सूचीबद्ध प्रमाणक द्वारा विहित प्रारूप और रीति में जारी किए गए विधिमान्य तृतीय - पक्ष प्रमाण-पत्र सहित पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करता है , वहां अनुमोदन प्रमाण-पत्र, सक्षम प्राधिकारी द्वारा , विहित प्रारूप और रीति में , ऐसे आवेदन के प्रस्तुतीकरण के पंद्रह दिनों के भीतर जारी किया जाएगा, पंरतु उद्यम ने संबंधित विधान के अंतर्गत निर्धारित सभी सांविधिक अपेक्षाओं तथा शर्तों का अनुपालन किया हो ।
परन्तु जहां उक्त अवधि के भीतर अनुमोदन प्रमाण- पत्र जारी नहीं किया जाता और विलंब आवेदक के लिए अभिनिर्धार्य नहीं है, वहां ऐसी अवधि की समाप्ति पर अनुमोदन को अभिकल्पित अनुमोदन माना जाएगा , और धारा 14 की उप - धारा (2 ) के खंड (दो) के उपबंध तदनुसार लागू होंगे ।
परन्तु यह और कि जहाँ आवेदन में कोई उपचारणीय त्रुटि प्रकट होती है , वहां सक्षम प्राधिकारी , संबंधित विधान के अंतर्गत यथा विहित प्रारूप और रीति में , आवेदक को ऐसी त्रुटि को सुधारने का पर्याप्त अवसर देगा । 768 ( 13)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
(3 ) तृतीय - पक्ष प्रमाणकों के विरुद्ध निलंबन तथा प्रतिसंहरण कार्रवाई- यदि तृतीय- पक्ष प्रमाणक, जानबूझकर किए गए कदाचार, घोर उपेक्षा, तात्विक मिथ्या- वर्णन, हित के तात्विक द्वंद्व या मिथ्या अथवा भ्रामक प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए दायी होगा, सक्षम प्राधिकारी , कारण बताओ सूचना जारी करने तथा सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, ऐसे प्रमाणक को निलंबित , ब्लैकलिस्ट या सूचीबद्ध सूची से हटा सकेगा ।
परन्तु जहां त्रुटियां उपचारणीय हों, वहां प्रतिसंहरण से पूर्व समय- सीमाबद्ध सुधार का अवसर दिया जाएगा ।
(4) प्रमाणक के निलंबन या प्रतिसंहरण का प्रभाव- किसी तृतीय- पक्ष प्रमाणक का निलंबन, ब्लैकलिस्टिंग या हटाया जाना भविष्यलक्षी रूप से प्रभावी होगा और ऐसी कार्रवाई से पूर्व सद्भावपूर्वक जारी किए गए प्रमाण- पत्र के आधार पर पहले ही प्रदत्त किसी अनुमोदन को अविधिमान्य या विधिविरुद्ध नहीं करेगा , सिवाय उस सीमा तक जितना सतत क्षति या आसन्न जोखिम को निवारित , उपशमित या न्यूनतम करने के लिए आवश्यक हो ।
अभिकल्पित अनुमोदन सुधार .
14. ( 1 ) अभिकल्पित अनुमोदन और इसकी प्रयोज्यता- "अभिकल्पित अनुमोदन" से अभिप्रेत है ऐसा अनुमोदन जिसे अनुसूची - एक में सूचीबद्ध संबंधित सेवाओं के लिए विहित समय की समाप्ति पर प्रदत्त समझा जाएगा , जहां सक्षम प्राधिकारी विहित समय के भीतर अनुमोदन या नामंजूरी का अभिव्यक्त आदेश पारित करने में असफल रहा हो और ऐसी असफलता आवेदक के लिए अभिनिर्धार्य न हो ।
अभिकल्पित अनुमोदन, धारा 11 के अंतर्गत उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत सेवाओं तथा धारा 12 की उप - धारा (2) के परंतुक अथवा धारा 13 की उप - धारा (2 ) के परंतुक के अंतर्गत अभिकल्पित अनुमोदन के रूप में माने गए किसी अनुमोदन पर, ऐसे प्रारूप और रीति में, जैसी विहित की जाए , लागूहोगा ।
(2) समय - सीमाबद्ध निराकरण (एक) जहां कोई उद्यम पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करता है , वहां सक्षम प्राधिकारी विहित समय के भीतर उसका निराकरण करेगा । यदि ऐसी समय - सीमा के भीतर उसका निराकरण नहीं किया जाता, तो उक्त अवधि की समाप्ति पर आवेदन को अभिकल्पित रूप से अनुमोदित समझा जाएगा ।
(दो) खंड (एक) , धारा 12 की उप - धारा (2 ) तथा धारा 13 की उप - धारा (2) के अंतर्गत अभिकल्पित रूप से अनुमोदित 768( 14)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
समझा गया प्रत्येक आवेदन, ऐसे अभिकल्पित अनुमोदन के तुरंत पश्चात्, अभिलिखित किया जाएगा तथा यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित समय - सीमा की समाप्ति के अथवा धारा 12 और धारा 13 के अंतर्गत अनुमोदन प्रमाण - पत्र के लिए उल्लिखित समय- सीमा के तीन दिनों के भीतर अभिकल्पित अनुमोदन प्रमाण - पत्र जारी नहीं किया जाता है , तो कार्यपालक समिति को प्रवर्धित (एस्केलेट) समझा जाएगा ।
अभिकल्पित अनुमोदन के दिनांक और प्रमाण- पत्र जारी करने के दिनांक के बीच की अवधि को छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 (क्रमांक 23 सन् 2011 ) के प्रयोजनों के लिए विलंब माना जाएगा ।
परन्तु सक्षम प्राधिकारी , जहां आवेदन में कोई उपचारणीय त्रुटि प्रकट होती है, संबंधित विधान के अंतर्गत विहित प्रारूप और रीति में, आवेदक को ऐसी त्रुटि को सुधारने का पर्याप्त अवसर देगा ।
(3 ) निलंबन , प्रतिसंहरण तथा सुधार सक्षम प्राधिकारी किसी अभिकल्पित अनुमोदन को निलंबित, प्रतिसंहृत या उपांतरित कर सकेगा , यदि यह पाया जाता है कि -
(
एक) यह कपट, जानबूझकर किए गए मिथ्या- वर्णन या तथ्यों के तात्विक दमन द्वारा प्राप्त किया गया था; या
(दो) मानक शर्तों का तात्विक रूप से उल्लंघन किया गया है ; या
(तीन) अभिकल्पित अनुमोदन के निरंतर प्रचालन से विधिसंगत लोकहित को तात्विक जोखिम उत्पन्न होता है या युक्तियुक्त रूप से उत्पन्न होने की संभावना है ।
परन्तु कारण बताओ सूचना जारी किए बिना, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना तथा संक्षिप्त कारण अभिलिखित किए बिना कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी; और
परन्तु यह कि जहां त्रुटियां उपचारणीय हों , वहां प्रतिसंहरण से पूर्व समय - सीमाबद्ध सुधार का अवसर दिया जाएगा।
(4) प्रतिसंहरण का प्रभाव प्रतिसंहरण भविष्यलक्षी रूप से प्रभावी होगा और सद्भावनापूर्वक पूर्व में किए गए किसी कार्य को 768 ( 15)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
अविधिमान्य या विधिविरुद्ध नहीं करेगा , सिवाय उस सीमा तक जितना सतत क्षति को निवारित या उपशमित करने के लिए आवश्यक हो ।
15. ( 1 ) किसी संबंधित विधान में अनुमोदन की वैधता या नवीनीकरण की अवधि के संबंध में, अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी: -
अनुमोदनों की वैधता.
(एक) धारा 11 के अंतर्गत निम्न जोखिम या मध्यम जोखिम के रूप में वर्गीकृत किसी क्रियाकलाप , स्थापना या उद्यम के संबंध में कोई अनुमोदन, आवधिक अनुपालन के अध्यधीन रहते हुए, उद्यम के आजीवन काल तक वैध रहेगा , जब तक कि इसे स्वेच्छा से अभ्यर्पित न किया जाए या कपट , जानबूझकर किए गए व्यतिक्रम या तात्विक अननुपालन के लिए प्रतिसंहृत न किया जाए;
(दो) धारा 11 के अंतर्गत उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किसी क्रियाकलाप , स्थापना या उद्यम के संबंध में ऐसा कोई अनुमोदन , ऐसी अवधि के लिए वैध होगा जैसा प्रशासकिय विभाग , क्रियाकलाप की प्रकृति , परिमाण तथा जोखिम रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए, अधिसूचना द्वारा अवधारित करे , और यह संबंधित विधान में विहित ऐसे प्रारूप और रीति में नवीकरणीय होगा;
परन्तु जहां किसी क्रियाकलाप, स्थापना या उद्यम का जोखिम वर्गीकरण धारा 11 के अंतर्गत बाद में पुनरीक्षित किया जाता है, वहां खंड ( एक) या (दो) के अंतर्गत पहले से प्रदत्त वैधता तदनुसार भविष्यलक्षी प्रभाव से उपांतरित समझी जाएगी , और ऐसा कोई पुनरीक्षण सद्भावपूर्वक पहले से उपभुक्त वैधता की किसी अवधि को अविधिमान्य नहीं करेगा ।
(2
) आवधिक अनुपालन- उप - धारा ( 1 ) के खंड (एक) के अंतर्गत आजीवन वैधता वाले किसी अनुमोदन के संबंध में, आवधिक अनुपालन निम्नलिखित के माध्यम से स्थापित किया जाएगा -
(एक) निम्न जोखिम के लिए उद्यम द्वारा स्व- प्रमाणीकरण ; या
(दो) मध्यम जोखिम के लिए शासन द्वारा सूचीबद्ध किसी प्रत्यायित वृत्तिक या संस्था द्वारा तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण;
ऐसे प्रारूप , रीति तथा आवधिकता में जैसी संबंधित प्रशासनिक विभाग संबंधित विधान के अंतर्गत , अधिसूचना द्वारा , अधिसूचित करे । 768 ( 16)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
(3 ) तात्विक परिवर्तन की सूचना उद्यम , क्रियाकलाप, प्रक्रिया, क्षमता , स्थान या अन्य अधिसूचित प्राचलों में किसी तात्विक परिवर्तन की सूचना , संबंधित विधान के अंतर्गत विहित रूप में देंगे ।
(4) निलंबन तथा प्रतिसंहरण- कपट , मिथ्याकरण , तात्विक अननुपालन या असूचित तात्विक परिवर्तनों के लिए अनुमोदन सम्यक प्रक्रिया अपनाते हुये निलंबित या प्रतिसंहृत किये जा सकेंगे ।
(5) संक्रमणकालीन उपबंध- इस अधिनियम के प्रारंभ के दिनांक को प्रवृत्त, अनुसूची- एक में सूचीबद्ध सेवाओं से संबंधित सभी अनुमोदन, धारा 11 के अंतर्गत जोखिम वर्गीकरण , इस धारा की उप - धारा ( 1 ) के खंड (दो) के अंतर्गत उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत सेवाओं तथा इस धारा की उप - धारा ( 2 ) में उल्लिखित आवधिक अनुपालन के अध्यधीन रहते हुए, ऐसी अवधि के भीतर , जैसी राज्य शासन अधिसूचना द्वारा विहित करे , इस धारा के अंतर्गत आजीवन वैधता प्रदत्त किया गया समझा जाएगा।
सेवाओं/ गतिविधियों का उन्मूलन.
16. ( 1 ) राज्य शासन, कार्यपालक परिषद के अनुमोदन के साथ , अधिसूचना द्वारा , यह घोषित कर सकेगा कि किसी अधीनस्थ विधान के अंतर्गत अपेक्षित कोई अनुमोदन अपेक्षित होना बंद हो जाएगा, जहां वह इस बात से समाधान प्राप्त कर ले कि ऐसा अनुमोदन असंगत या अनतिशेष हो गया है , किसी अन्य अनुपालन का द्विरावृत्ति करता है , या लोकहित , सुरक्षा , स्वास्थ्य, पर्यावरण अथवा राज्य के राजस्व पर तात्विक प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना समाप्त किया जा सकता है ।
(2 ) जहां किसी अनुमोदन की अपेक्षा सुसंगत अधिनियम में आज्ञापक है, वहां ऐसी अपेक्षा उप - धारा ( 1 ) के अंतर्गत अधिसूचना द्वारा समाप्त नहीं की जाएगी और केवल संबंधित अधिनियम में संशोधन द्वारा ही समाप्त की जा सकेगी ।
अध्याय-छः
अध्यारोही प्रभाव , शिकायत निवारण तंत्र तथा अनुसूची में संशोधन की शक्ति
अध्यारोही प्रभाव.
17. छत्तीसगढ़ राज्य की किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबंध प्रभावी होंगे ।
अनुसूचियों को 18. ( 1 ) कार्यपालक समिति, इस अधिनियम के अंतर्गत उद्यमों पर विनियामक तथा अनुपालन भार का पुनर्विलोकन करती रहेगी 768 ( 17)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
संशोधित करने कीशक्ति.
और अपनी स्वप्रेरणा से अथवा किसी प्रशासनिक विभाग , उद्यम या जिला सशक्त समिति से प्राप्त निर्देश पर , नोडल विभाग को निम्न अनुशंसा कर सकेगी , अर्थात्: -
(क) अनुसूची- एक में किसी नई सेवा या अधीनस्थ विधान को जोड़ना; या
(ख ) अनुसूची - एक में विनिर्दिष्ट किसी सेवा या अधीनस्थ विधान का उपांतरण या हटाना ।
(2 ) राज्य शासन, कार्यपालक परिषद के अनुमोदन के साथ, अधिसूचना द्वारा , अनुसूची - एक में संशोधन कर सकेगा;
परन्तु जहां ऐसे किसी संशोधन के लिए किसी अधिनियम में तत्संबंधी संशोधन अपेक्षित हो, वहां ऐसा संशोधन संबंधित अधिनियम में संशोधन द्वारा ही किया जाएगा ।
19. ( 1 )
प्रत्येक उद्यम या आवेदक निम्नलिखित के संबंध में शिकायत फाइल कर सकेगा: -
शिकायत निवारण तंत्र.
विहित समय से परे सेवा के प्रदाय में विलंब;
(एक)
(दो) लागू विधि या नियमों के अंतर्गत अविहित दस्तावेजों की मांग;
(तीन) विधिमान्य स्व- प्रमाणीकरण या तृतीय- पक्ष प्रमाणीकरण को स्वीकार करने से इंकार ;
(चार) सक्षम प्राधिकारी द्वारा उद्यम को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाला कोई लोप या कार्य ।
(2) निवारण तंत्र- राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा , त्वरित- पथ शिकायत निवारण के लिए आवश्यक शिकायत निवारण तंत्र, समय - सीमा, संबंधित स्तर का प्राधिकारी तथा अपीलीय प्राधिकारी तथा अन्य ऐसी प्रक्रियाएं विहित कर सकेगा ।
(3 ) प्रत्येक शिकायत ऑनलाइन तथा ऐसे अन्य संसूचन के माध्यमों से , जैसे विहित किए जाएं, समनुदेशित की जाएगी ।
अध्याय-सात
प्रकीर्ण
20.
प्रत्यायोजन की शक्ति.
राज्य शासन , अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से संबंधित विषय में अपनी शक्ति नोडल या प्रशासनिक विभाग, समितियों , अधिकारियों या राज्य के प्राधिकारियों को प्रत्यायोजित कर सकेगा । 768 ( 18)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
21.
नियम बनाने की शक्ति.
राज्य शासन, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , कार्यपालक समिति तथा जिला सशक्त समिति की संरचना, कार्यकाल , गणपूर्ति तथा कार्य करने की रीति, आवेदनों के प्रारूप तथा रीति, स्व- प्रमाणीकरण तथा तृतीय - पक्ष प्रमाणीकरण की प्रक्रिया, संदेय फीस , अनुमोदनों के सृजन की रीति तथा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक ऐसे अन्य विषयों सहित , नियम बना सकेगा ।
22.
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति.
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है , तो राज्य शासन , इस अधिनियम के उपबंधों के असंगत न होने वाले आदेश द्वारा , उसे स्पष्ट या दूर कर सकेगा ।
23.
निर्देश जारी करने कीशक्ति.
राज्य शासन , इस अधिनियम के उपबंधों से संबंधित विषय में कार्यपालक समिति या जिला सशक्त समिति अथवा राज्य के किसी विभाग / प्राधिकरण /बोर्ड /निगम को कोई निर्देश जारी कर सकेगा ।
24.
सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण.
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के सुकरीकरण के लिए इस अधिनियम के अंतर्गत सद्भावनापूर्वक की गई किसी बात के लिए कार्यपालक परिषद , शासन के किसी अधिकारी या कर्मचारी अथवा कार्यपालक समिति या जिला सशक्त समिति अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी । 768 ( 19)
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अनुसूची- एक
प्रशासनिक विभागों , अधिनियमों , सेवाओं की सूची
विधि
स.क्र.
सेवाएं
प्रशासनिक विभाग
(3)
(2)
(1)
1. भवन अनुज्ञा (विकास अनुज्ञा)
2. भवन नक्शा अनुमोदन हेतु प्लिंथ अनुमोदन
आवास एवं पर्यावरण विभाग 3.
छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्र . 23 सन् 1973)
ले - आउट प्लान अनुमोदन
4. अधिभोग प्रमाण-पत्र
5. सिनेमाटोग्राफ अनुज्ञप्ति
संस्कृति विभाग 6. सिनेमाटोग्राफ अनुज्ञप्ति का नवीकरण
छत्तीसगढ़ सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1952 (क्र.17 सन् 1952)
7. अग्नि अनुज्ञप्ति/ अनापत्ति प्रमाण- पत्र – पंजीयन
गृह विभाग 8.
छत्तीसगढ़ अग्नि एवं आपात सेवा अधिनियम , 2018 (क्र.19 सन् 2018)
अग्नि अनुज्ञप्ति / अनापत्ति प्रमाण- पत्र- नवीकरण
9. वाणिज्यिक क्लब अनुज्ञप्ति (एफ.एल .4 - ए)
10. गैर - वाणिज्यिक क्लब अनुज्ञप्ति (एफ.एल.4)
11.
वाणिज्यिक कर विभाग (आबकारी) सैन्य कैंटीन खुदरा अनुज्ञप्ति (एफ.एल.7)
छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 (क्र. 02 सन् 1915 )
12. पर्यटन बोर्ड हेतु बार अनुज्ञप्ति (एफ.एल .3- सी)
विदेशी मदिरा का लेबल पंजीयन
13.
768 ( 20)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
14. एयरपोर्ट रेस्तरां बार अनुज्ञप्ति (एफ.एल.3डी)
15. मोबाइल टावर अनुज्ञा (नई)
16. व्यापार अनुज्ञप्ति
17. पानी का कनेक्शन
18. भवन अनुज्ञा
19. अधिभोग प्रमाण-पत्र
20. भवन नक्शा अनुमोदन हेतु प्लिंथ अनुमोदन
21.
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956 )
परिवर्तन तथा वृद्धि/पुनरीक्षण /पुनर्वेधीकरण की अनुज्ञा
22. विध्वंस तथा पुनर्निर्माण की अनुज्ञा
23. विक्रय प्रमाण - पत्र (पथ विक्रेता अनुज्ञप्ति)
24. साइनेज अनुज्ञा
25. वधशाला अनुज्ञप्ति
व्यापार अनुज्ञप्ति का नवीकरण
26.
27. मोबाइल टावर अनुज्ञा (नवीन)
28. व्यापार अनुज्ञप्ति
पानी का कनेक्शन
29 .
30. भवन अनुज्ञा
छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961 )
31. अधिभोग प्रमाण- पत्र
32. भवन नक्शा अनुमोदन हेतु प्लिंथ अनुमोदन
33. परिवर्तन तथा वृद्धि/पुनरीक्षण/पुनर्वेधीकरण की 768 ( 21)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
अनुज्ञा
34. विध्वंस तथा पुनर्निर्माण की अनुज्ञा
35. विक्रय प्रमाण - पत्र (पथ विक्रेता अनुज्ञप्ति)
36. साइनेज अनुज्ञा
वधशाला अनुज्ञप्ति
37.
व्यापार अनुज्ञप्ति का नवीकरण
38.
सोसाइटियों का पंजीयन
39.
40. ज्ञापन , उपविधि या विनियमों में संशोधन का अनुमोदन
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग
छत्तीसगढ़ सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (क्र. 44 सन् 1973 )
41. नाम , रजिस्ट्रीकृत कार्यालय या शासी निकाय में परिवर्तन
42. सड़क खनन अनुज्ञा
लोक निर्माण विभाग (लो.नि.वि. )
छत्तीसगढ़ राज्य राजमार्ग अधिनियम, 2003 (क्र . 12 सन् 2003 )
43. भूजल उद्द्ब्रहण
जल संसाधन विभाग
छत्तीसगढ़ भूजल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम, 2022 (क्र.18सन् 2022) 768 (22)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 जुलाई 2026
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत सरकार ने विकसित भारत की परिकल्पना के अनुसरण में , ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में सुधार , विनियामक भार को कम करने तथा आर्थिक संवृद्धि को सुकर बनाने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी नियंत्रण - मुक्ति चरण -2 ( डीरेगुलेशन फेज़ -2 ) प्रारंभ किया है । यह पहल अनुमोदनों के युक्तिकरण , निम्न-जोखिम अनापत्ति प्रमाण - पत्रों के उन्मूलन , प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण , समय- सीमाबद्ध सेवा प्रदाय तथा विशेष रूप से सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सुव्यवस्थित निरीक्षणों पर केंद्रित है।
छत्तीसगढ़ राज्य में , व्यावसायिक स्थापनाओं को वर्तमान में विभिन्न राज्य अधिनियमितियों के अंतर्गत विभिन्न विभागों तथा प्राधिकारियों से बहुविध अनुमोदन प्राप्त करने अपेक्षित हैं । एक एकीकृत तथा जोखिम - आधारित विनियामक ढांचे के अभाव के परिणामस्वरूप अनुमोदनों की द्विरावृत्ति, समय - सीमाओं में अनिश्चितता , बारंबार नवीकरण , बहुविध निरीक्षण तथा अनुपालन लागत में वृद्धि हुई है , जिसका प्रतिकूल प्रभाव ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस तथा निवेश सुकरीकरण पर पड़ता है ।
विद्यमान विधिक ढांचा जोखिम - आधारित अनुमोदनों , निम्न जोखिम क्रियाकलापों के लिए स्व- प्रमाणीकरण , विहित समय- सीमाओं के भीतर निराकरण न होने के कारण अभिकल्पित अनुमोदन तथा विनिर्दिष्ट अनुमोदनों की आजीवन वैधता के लिए पर्याप्त सांविधिक समर्थन प्रदान नहीं करता है ।
अतएव , नीतिगत पर्यवेक्षण तथा क्रियान्वयन तंत्रों का उपबंध करने , स्व - प्रमाणीकरण तथा अभिकल्पित अनुमोदन सहित जोखिम आधारित अनुमोदनों को प्रवर्तित करने , विनिर्दिष्ट सेवाओं को आजीवन वैधता प्रदान करने तथा अनतिशेष अनुमोदनों का उन्मूलन करने के लिए एक व्यापक अधिनियमिति अधिनियमित करना आवश्यक हो गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
लखनलाल देवांगन रायपुर,
वाणिज्य और उद्योग मंत्री (भारसाधक सदस्य) दिनांक 09 जुलाई, 2026 768 ( 23)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 जुलाई 2026
"संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित " प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन
"छत्तीसगढ़ ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस विधेयक , 2026 " की कंडिका 21 में राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति प्रत्यायोजित करने की संस्थापना है , यह विधि का क्रियान्वन सुनिश्चित करने के लिये सामान्य प्रकृति है ।
दिनेश शर्मा, सचिव , छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2026.