Servants of Knowledge
Extraordinary Gazette of India · Government of India

Subject NOT available

Published 18 February 1964

Ministry
Ministry NOT available
Type
Extra Ordinary
Download
GV_Content_Detail$ctl05$lnkflname_Pdf_Img
Gazetteid
E-1812-1964-0024-82441
Identifier
in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-18.E-1812-1964-0024-82441
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

REGISTERED No. D. 221

The Gazette of Endia

मन्यमेव जयते

EXTRAORDINARY

PART I- Section 1

PUBLISHED BY AUTHORITY

No. 24] NEW DELHI , TUESDAY , FEBRUARY 18 , 1964 / MAGHA 29 , 1885

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्रालय

संकल्प

नई दिल्ली, ३ जनवरी, १६६४.

सं ० २६ ( १ ) एम्सपो ०/ ६३-भारत सरकार के भूतपूर्व वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग ) ने, भारत के औद्योगिक वित्त निगम , नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री के ० पी० मांथरानी की अध्यक्षता में एक अध्ययन दल ३१ मई १६६२ को नियुक्त किया था जो भारत के निर्यात व्यापार के विकास के लिये देश में ही उपलब्ध ऋण की सुविधाओं के पुनरीक्षण , निर्यात सम्बन्धी ऋण की वर्तमान तथा भावी मांग को ध्यान में रखकर विद्यमान वित्तीय संस्थाओं को सुदृढ़ करने और बढ़ाने के लिये आवश्यक उपायों का निर्धारण करने के साथ साथ निम्नलिखित तथ्यों पर विशेष रूप से विचार करेगा :-

( १ ) उदार तथा विस्तृत आधार पर निर्यात के लिये लघु , मध्यम तथा दीर्घकालीन विश्स की व्यवस्था करने वाला संस्थागत प्रबन्ध,

( २ ) उधार देने वाली विभिन्न संस्थाओं द्वारा निर्यातकों पर प्रभार्य ब्याज और बट्टे की रियायती दरों सम्बन्धी नीति,

( ३ ) क्याएक निर्यात वित्त निगम अथवा निर्यात ऋण तथा प्रत्याभूति निगम की स्थापना करना आवश्यक है ? और

(४) ऊपर लिखे कामों को पूरा करने के लिये आवश्यक उपाय ।

इस अध्ययन दल ने अपनी रिपोर्ट भूतपूर्व वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय ( अन्तर्राष्ट्रीय व्य. पार विभाग ) को ३० अप्रैल , १६६३ को प्रस्तुत कर दी थी ।

२. इस अध्ययन दल की मुख्य सिफारिशें और उनके बारे में सरकार के निर्णयों को संलग्न अनुबन्ध में अलग से दिया गया है ।

३. अध्ययन दल द्वारा किये गये इस मूल्यवान काम के लिये सरकार उसकी प्रशंसा करती है ।

( 71 ) THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY

72

[PART I- SEC , 1 ]

आदेश

आवेश दिया जाता है कि इस संकल्प की एक एक प्रति सभी सम्बन्द्धों को भेजी जाय ।

यह भी आदेश दिया जाता है कि सर्व साधारण की जानकारी के लिये इस संकल्प को भारत के गजट में प्रकाशित किया जाय ।

डो० एस ० जोशी, सचिव ।

सरकारका निर्णय अध्ययन दल की सिफारिशें

क्रमांक

सिद्धांतरूप में स्वीकार है और प्रत्येक मामले के गुणावगुणों के अनुसार कार्यान्वित किया जायगा ।

1. निर्यातकों और भारतीय बैंकों के प्रतिनिधियों को विदेशी बाजारों की पड़ताल करने के लिये प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये और विदेश स्थित त्रिकोशीय संस्थाओं तथा आयातकों से सम्पर्क स्थापित करना चाहिये ।

विचाराधीन है ।

2. व्यापार के स्वरूप , बाजार की दशायें और विदेशी खरीदारों में भारतीय निर्यातकों के व्यवसायिक सम्बन्धों के बारे में निरन्तर जान- कारी देने वाले संगठन को और सशक्त बनाया जाय ।

3. चूंकि निर्यात जोखिम बीमा निगम का अनुभव स्वीकृत । अपना संवेष्ठन ऋण पालिसी के बारे में संतोष- जनक रहा है अतः कोई अवांछित जोखिम उठाये बिना और निर्यातकों को पर्याप्त लाभ पहुंचाते हुए निगम बैंकों के प्रति अपनी प्रत्याभूति की वर्तमान दर 50 प्र ० श ० से बढ़ाकर 66-2/ 3 प्र ० श ० कर सकता है ।

सिद्धांतरूप में स्वीकृत ।

4. रिजर्व बैंक आफ इंडिया को अन्य बैंकों द्वारा दिये गये संवेष्ठन ऋण के बारे में सावधिक जानकारी एकत्र करनी चाहिये और अधिक उदार नीति अपनाने के लिये उनको अपनी नैतिक अभिप्रेरणा देनी चाहिये ।

5. अभ्रक , कच्चे खनिज और दस्तकारियों के मामले विचाराधीन ह ।

में, मानकीकरण के अभाव और मूल्यों में अधिक उतार चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सरकार को, लदान से पूर्व निरीक्षण THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY

[PART I-SEC , 1 ]

73

क्रमांक

अध्ययन दल सिफारिशें

सरकार का निर्णय

तथा वर्गीकरण की उपयुक्त सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिये और यदि आ- वश्यक हो तो लदान से पूर्व माल के निरीक्षण , वर्गीकरण और मानकीकरण के आधार पर बैंकों को ऋण के विरुद्ध प्रत्याभूति की व्यवस्था करनी चाहिये ।

सिद्धान्त रूप में स्वीकृत ।

६. जिन निर्यातों के लिए आयात लाइसेंस प्रदान करने के रूप में प्रोत्साहन देना अभिप्रेत है उन के बारे में , सरकार को चाहिये कि आन्तरिक और बाह्य मूल्यों के अन्तर के ७५ प्रतिशत तक की राशि के लिये ऋणदात्री संस्थाओं को प्रत्याभूति दे , प्रत्याभूति योजना के उद्देश्य के लिये इस अन्तर की सीमा , हर हालत में निर्यात किये गये माल के जहाज पर मूल्यों के २५ प्रतिशत तक ही सीमित है । ऋण देने वाली संस्थाओं को चाहिये कि इन्हीं प्रत्या- भूतियों के आधार पर अपने ऋणों को जहां भी व माल के नीचे अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों से सम्बद्ध हैं उन को एक पर्याप्त स्तर तक बढ़ा दें । भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को ऋण लेने के अतिरिक्त सुविधायें दी जानी चाहियें जिससे कि वे , उपर्युक्त मूल्यान्तर के परिणाम स्वरूप होने वाले सौदों का वित्त पोषण करने में समर्थ हो सकें ।

७. व्यापार प्रत्याभूतियां देने के व्यवसाय में भाग लेने के लिये बीमा कम्पनियों को समर्थ बनाने में कुछ प्रबन्ध करने की आवश्यकता है ।

दुबारा बीमा करने की सुविधाओं के अभाव के कारण इस सिफारिश को स्वीकार करना सम्भव नहीं है ।

परीक्षा की जा रही है ।

८. मुदलियर समिति द्वारा मुझाई गई रीति के अनुसार एक आयात निर्यात स्थिरीकरण कोष के संचालन के लिये एक केंन्द्रीय समन्वय अभिकरण स्थापित किया जाना चाहिये , जिससे कि निर्यात बढ़ाने के लिए आवश्यक कच्चे मालों के आयात में सुविधा हो सक ।

THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY

[ PART I - SEC , 1 ] 74

क्रमांक अध्ययन दल की सिफारिशें

सरकार का निर्णय

परीक्षा की जा रही है ।

६. स्टलिंग विपत्रावधि के अंश के हुंडावन का भारत में बैंक दर से मूलभूत सम्बन्ध होना चाहिये । भारतीय रिजर्व बैंक रुपये , स्टलिंग और डालर की विपत्रावधियों के हुंडावन के अंश के सम्बन्ध में ऐसी अधिकतम सीमायें निश्चित कर सकता है जो विदेशों में इसी प्रकार की दरों के साथ प्रतिस्पर्धात्मक हों । रिजर्व बैंक द्वारा इस प्रकार निश्चित की गई अधिकतम सीमायें भारत में ब्याज की दर में किसी भी प्रकार की वृद्धि होने पर भी लागू होती रहनी चाहियें । जब कभी ब्रिटेन और अन्य प्रमुख देशों में हुंडावन की दरें उस मूल स्तर से नीचे चली जायें जिस के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा के विपत्रों के बारे में हुंडावन की दरें निश्चित की जाती हैं, तो उप अधिकतम सीमा में ऐसा संशोधन कर दिया जाना चाहिये जिससे भारतीय निर्यातकों को होने वाली किसी भी प्रकार की हानि को कम किया जा सके अथवा उनका निरमन किया जा सके ।

परीक्षा की जा रही है ।

१०. हाल में ही संशोधित अधिनियम के अनुसार निर्यात के लिये जो लघु- कालीन ऋण १८० दिन तक के लिये दिया जा सकता है , उसके सम्बन्ध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुसूचित बैंकों को दिये गये ऋणों पर. ३ प्रतिशत की रियायती दर अर्थात् बैंक दर वसूल करना चाहिये बैंक निर्यातकों को ४-१ / २ प्रतिशत की दर पर धन उधार दे सकें । ये अधिमान्य दरें मुख्यतः गैर - परम्परागत वस्तुओं के निर्यात में सहायता के निमित हैं किन्तु इन्हें केवल ऐसी ही वस्तुओं तक सीमित रखने की आवश्यकता नहो है अतः अन्य योग्य निर्यातों के लिये भी उपलब्ध होनी चाहियें । से १-१ / २ प्रतिशन कम जिससे कि अनुसूचित

विचाराधीन है

११. उद्याग पुवित्त निगम लि० को चाहिये कि विदेशी मुद्रा के अधिकृत व्यापारियों को विये गये ऋणों पर अपने ब्याज की दर ५ प्रतिशत THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY

[PART I - SEC , 1 ]

75

क्रमांक

अध्ययन दल की सिफारिशें

सरकार का निर्णय

से घटा कर कम करने के प्रयत्न करें जिस से अन्ततोगत्वा भारतीय निर्यातक से मध्यम कालीन ऋणों पर वसूल की जाने वाली ब्याज की दर ६ प्रतिशत ( ४-१ / २ प्रतिशत के बिरुद्ध ) से अधिक न हो जाय , जैसी कि ऊपर के अनुच्छेद में निर्यात के लिये लधुकालीन वित्त के बारे में सिफारिश की गई है ।

स्वीकृत , इस सिफारिश को अमल में लाने के लिये आगे की कार्रवाई की जा रही है ।

१२. उद्योग पुर्नावत्त निगम लि ० से उपलब्ध होने वाली सुविधाओं को और बढ़ाने के लिये प्रयत्न किये जाने चाहियें जिससे कि निर्यात संवर्धन के लिये इस निकाय के स्त्रोतों का यथा- सम्भव उपयोग किया जा सके ।

१३. एक निर्यात ऋण तथा प्रत्याभूति निगम की स्थापना की जानी चाहिये जिसके निम्नलिखित कार्य हों: -

सिद्धान्त रूप में स्वीकृत और वर्तमान निर्यात जोखिम बीमा निगम में उप- युक्त परिवर्तन कर के कार्यान्दिन की जायेगी ।

( १ ) निर्यात जोखिम बीमा सम्बन्धी योज- नाओं का प्रशासन करना जो इस समय निर्यात जोखिम बीमा निगम द्वारा किया जा रहा है ।

( २ ) प्रत्याभूतियों की योजना का प्रशासन करना जिन की स्वीकृति समय समय पर की जा सकती है जिस से देश में निर्यात के लिए ऋण की प्रणाली में विद्यमान विभिन कमियों का निराकरण किया जा सके ।

( ३ ) ऐसी सम्पूरक ऋण की सुविधाओं की व्यवस्था करना जो कि निर्यात के संवर्धन और विकास के लिये आवश्यक हो , और

(४) ऐसे अन्य काम भी करना जो कि सरकार निर्यात ऋण तथा प्रत्या- भूतियों के सम्बन्ध में समय समय पर इस को सौंपे ।

PRINTED IN INDIA BY THE GENERAL MANAGER , GOVERNMENT OF INDIA PRESS ,

RV

Cite this issue. Extraordinary Gazette of India, Government of India, 18 February 1964. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-18.E-1812-1964-0024-82441/. Archive identifier in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-18.E-1812-1964-0024-82441.