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Extraordinary Gazette of India · Government of India

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Published 27 February 1964

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Type
Extra Ordinary
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Gazetteid
E-1812-1964-0020-82437
Identifier
in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-27.E-1812-1964-0020-82437
Languages
English, Hindi
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REGISTERED No. D. 132

The Gazette of Endia

EXTRAORDINARY

PART I - Section 1

PUBLISHED BY AUTHORITY

No. 20] NEW DELHI , TUESDAY, FEBRUARY 11 , 1964 / MAGHA 22 , 1885

Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation

श्रम और रोजगार मंत्रालय

संकल्प

नई दिल्ली, 27 सितम्बर , 1963

संख्पा WB.5 (16 ) / 63.-भारत सरकार ने अपने संकल्प संख्या WB -5 ( 1 ) /60 तारीख 25 अगस्त 1960 द्वारा जुट उद्योग के लिए एक केन्द्रीय मजदूरी बोर्ड बनाया था, जिसका गठन और जिसके विचारार्थ विषय निम्नलिखित थेः-

I गठन

अध्यक्ष

श्री एल० पी० दर्ष।

स्वतंत्र सद्स्य

श्री घनश्यामलाल ओझा , संसद सदस्य ।

डा० परमानन्द प्रसाद ।

मालिकों के प्रतिनिधि

श्री डी० सी० बी० पिकिगटन , ओ ० बी ० ई० ।

श्री डी० पी० गोइन्का ।

कर्मचारियों के प्रतिनिधि

श्री काली मुखर्जी ।

श्री इन्द्रजीत गुप्त, संसद सदस्य ।

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II विचारार्थ विवच

(क) उन कर्मचारियों ( श्रमिक, क्लर्क, पर्यवेक्षक आदि ) के वर्ग निश्चित करना जिन्हें प्रस्तावित मजदूरी - निर्धारण के प्रभावक्षेत्र में लाया जाना चाहिये ।

( ख ) उचित मजदूरी समिति की रिपोर्ट में निर्धारित उचित मजदूरी के सिद्धान्तों के आधार पर एक मजदूरी -विन्यास तैयार करना ।

भजदूरी- बिन्धास तैयार करते समय, बोर्ड को उचित मजबूरी सम्बन्धी बातों के अलावा मीचे लिखी बातों पर भी ध्यान वृना चाहियेः-

(ⅰ ) विकासशील अर्थव्यवस्था में इस उद्योग की आवश्यकताएं ;

(ii ) निर्यात उद्योग के रूप में जुट उद्योग की विशेषताएं:

(iii ) सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक तत्व ,

( iv) मजदूरी - अन्तरों को ऐसे तरीके से निर्धारित करने की आवश्यकता जिससे कर्मचारियों को अपना कौशल बढ़ाने की प्रेरणा मिले:-

( ग) कार्य के अनुरूप अदायगी की पद्धति लागू करने की वांछनीयता ।

कार्य के अनुरूप अदायगी की पञ्चति लागू करते समय बोर्ड न्यूनतम ( गुआरे लायक ) मजदूरी निर्धारित्त करने की और अतिश्रम तथा अवांछनीय अनुचित गति से काम करने से बचाने की आवश्यकता को ध्यान में रखेगा ।

(घ ) ऐसे सिद्धान्त निश्चित करना जिनके अनुसार जूट उद्योग के कर्मचारियों को बोनस (यदि दिया जा सकता हो ) दिया जाए । बोर्ड से कहा गया था कि वह वेतन के अतिरिक्त अन्य अदागियों के बारे में की आने वाली मांगों पर विचार करे और जिस तारीख से उसने अपना काम शुरू किया है उसके दो महीने के अन्दर श्रमिकों की अन्तरिम सहायता सम्बन्धी मांगों के बारे में अपनी सिफारिशें भेज दें ।

2. बोर्ड की अन्तरिम सहायता सम्बन्धी सिफारिशें 17 जनवरी 1961 को प्राप्त हुई । भारत सरकार ने अपने संकल्प सं० WB - 5 ( 3 ) /61 तारीख 25 जनवरी 1961 के द्वारा ये सिफारिशें स्वीकार कर लीं और सम्बन्धित पक्षों से इन सिफारिशों को लागू करने की प्रार्थना की ।

3. बोर्ड की अन्तिम रिपोर्ट सरकार के पास 4 सितम्बर 1963 को भेजी गई । सिफारिशों का सारांश इसी के साथ संलग्न है ।

4. बोर्ड की रिपोर्ट पर भली भांति विचार करने के पश्चात सरकार ने उसमें की गई सिफारिशों को स्वीकार करने और मालिकों, कर्मचारियों तथा राज्य सरकारों से उन्हें तुरन्त लागू करने की प्रार्थना करने का फैसला किया है ।

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5. सौंपे गए विषयों को निबटाने के लिए बोर्ड ने जो काम किया है और जिस प्रकार उसके सदस्य सभी बातों में एकमत होकर निष्कर्षों पर पहुंचे हैं इसके लिए भारत सरकार उनकी प्रशंसा करती है ।

आर्षश

आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति सभी सम्बन्धित व्यक्तियों को भेजी जाए ।

'यह भी आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को भारत के असाधारण राजपत्र में आम सूचना के लिए प्रकाशित किया जाए ।

पी० एम ० मेनम, सचिव , भारत सरकार

परिशिष्ट

सिफारिशों का सारांश

( 1 ) बोर्ड की सिफारिशें मौजूदा सभी जुट मिलों पर लागू होंगी । इनमें कताई यूनिट और बाद में खुलने वाली मिलें भी शामिल हैं ।

(2) बोर्ड की ये सिफारिशें औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2 ( एस ) में दी गई परिभाषा के अन्तर्गत आने वाले मिलों द्वारा नियुक्त सभी कर्मचारियों पर लागू होंगी, वशर्ते कि इसके विपरीत कोई उल्लेख न हो । मिल क्षेत्र के बाहर स्थित मुख्य कार्यालय में काम करने वाले क्लर्को (लिपिकों ) और अन्य कर्मचारियों पर थे सिफारिशें लागू न होंगी ।

( 3 ) जुट मिल में मजदूरी का काम करने के लिए ठेके के श्रमिकों को न लगाया जाए । यदि कभी ठेके के श्रमिक लगाए भी जाएं तो उनकी मजदूरी अदा करने का जिभ्या प्रधान मालिक का होना चाहिए और उसी पर इस बात का भी. जिम्मा होगा कि मजदूरों से सम्बन्धित सभी कानू‌नों का पूर्णतया पालन हो ।

(4) रिपोर्ट के अध्याय दस में उल्लिखित " अर्ध कुशल हस्त कमियों के लिए अन्तस्संयंत्र शिक्षुता प्रशिक्षण योजना " में निर्धारित शर्तों के अनुसार बोर्ड की सिफारिशें जुट उद्योग के शिक्षुओं और नौसिखियों पर भी लागू होंगी ।

(5 ) आधार वर्ष 1989 के श्रमिक -वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 100 मानते हुए कलकतं के सूचकांक 425 पर पश्चिमी बंगाल की जुट मिलों की कुल निम्नतम मजदूरी, 81 रु ० प्रतिमास होनी चाहिए । इसमें ( 1 ) मूल मजदूरी , ( 2 ) मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई मजदूरी वृद्धि और ( 3 ) परिवती मंहगाई भसा शामिल माना जाय ।

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(6) पश्चिम बंगाल की जुट मिलों में इस समय आठ मूल मजदूरी समूह हैं जिनके स्थान पर अब कंवल निम्नलिखित तीन समूह रहने चाहिये:-

( क ) वर्तमान मूल मजदूरी समूह I से IV तक के अन्तर्गत आने वाले सभी कामगारों की मूल मजदूरियों अर्थात् रु० 34-67 न० ५० , रु० 35-75 न० ५० , रु० 36.84 न० ५० , रु० 87-92 न० ० के स्थान पर एक समान मजदूरी रु० 40.17 न० पैं ० प्रतिमास निश्चित कर दी जाय,

(ख ) मूल मजदूरी समुह V से VII तक के अन्तर्गत आने वाले सभी कामगारों की मूल मजदूरियों अर्थात् रु ० 39.00 न० ५०, रु० 40-09 न०० , रु० 41-17 न ० ० के स्थान पर एक समान मजदूरी रु० 41.17 न० ५० प्रतिमास कर दी जाय ,

(ग ) मूल मजदूरी समूह VIII के अन्तर्गत आने वाले कामगारों की मूल मजदूरी जो इस समय रु ० 42-25 न ० पैं० या अधिक है लगभग वही रहे, अर्थात् रु ० 42.25 न० ५० और उससे अधिक ।

(7) दोहरे ( युग्म) करघा बुनकरों को दो करों के उत्पादन पर निर्धारित मूल मजदूरी के वर्तमान 75 प्रतिशत के स्थान पर 80 प्रतिशत की दर से मजदूरी मिलनी चाहिये ।

(8 ) सभी वर्गों के कर्मचारियों को ( लिपिक वर्ग को छोड़ कर, जिनके मामले में अलग से विचार किया गया है ) मूल मजदूरी के अतिरिक्त रु० 8.33 न ० ५० प्रतिमास की वृद्धि मिलनी चाहिये , जिसमें रु० 3.42 न० ५० प्रतिमास की अन्तरिम वृद्धि भी सम्मिलित है । सभी वर्गों के कर्मचारियों के सम्बन्ध में यह वृद्धि एक अलग मद्द " मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि " के रूप में दिखाई जायेगी । "मजबूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि को बोनस , भविष्य निर्वाध निधि आदि सभी प्रयोजनों के लिये मूल मजबूरी का ही अंश माना जाएगा " ।

(9 ) वर्तमान मंहगाई भत्ते रु० 32.50 न० पै० को आधार वर्ष सन् 1939 के श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 100 मानते हुए कलकत्ते के सूचकांक 425 पर निधर्धारित रु० 32-50 न० ० मंहगाई भत्ता मान लिया जाय । यह मंहगाई भत्ता परिवर्ती मंहगाई भत्ता होना चाहिए और यह कलकत्ते के औसत श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में प्रत्येक अंक की वृद्धि था कमी पर कलकते के लिए 20 न० ५० बढ़ाया या घटाया जाता रहे । जुलाई से दिसम्बर तक और जनवरी से जून तक की प्रिछली छमाहियों के औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर मंहगाई भत्ते का हर छः महीने बाद फरवरी और अगस्त के महीनों में पुनरीक्षण किया जाना चाहिए ।

(10) 26 दिन का या 208 घंटे का महीना मानते हुए जूट मिल के विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों के लिए मूल मजदू‌रियों की एक मानक सूची बनाई गई है जो रिपोर्ट के परिशिष्ट XI में दी हुई है । जुट मिल के किसी ऐसे काम की जिसका उल्लेख सूची में न हो, मजबूरी की दरें वही होंगी जो सूची में उल्लिखित उसी प्रकार के कामों के लिये निश्चित की गई हैं ।

( 11 ) बोर्ड ने मजदूरी की अमानी या उजरती दर निर्धारित करते समथ एक सप्ताह 48 घर्ट का माना है । यदि किसी कारण से सप्ताह के काम के घंटे सामान्य 48 घंटों से कम हों तो कर्मचारियों की मजदूरी का हिसाब निम्न प्रकार से लगाना चाहिए

(1 ) काम के घंटों की संख्या चाहे जो हो, मंहगाई भत्ता न थटाया जाय ।

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( ii ) यदि सप्ताह में काम के घंटे 45 से कम न हों तो मूल मजदूरी में भी कमी न की जाय ।

(iii ) यदि काम के घंटे 45 से कम हों तो मूल मजदूरी 48 घंटे के सप्ताह के आधार पर निर्धारित की गई मजदूरी के अनुपात में कम कर दी जाय ।

खण्ड ( ii ) और ( iii ) में लिखी गई शर्त केवल अमानी पर काम करने वाले कर्मचारियों पर ही लागू होनी चाहिये ।

( 12 ) बोर्ड ने पश्चिम बंगाल की जूट मिलों की वर्तमान उजरती दरों के आधार की जांच अभी तक नहीं की है । चूंकि बोर्ड रिपोर्ट के पैरा 7-53 में उल्लिखित मजदूरी समूह 1 से 6 तक के व्यवसायों की जिन्हें उजरती दरों पर अदायगी की जाती है , मूल मजदूरी में बढ़ोतरी कर चुका है इसलिये इन व्यवसायों पर लागू युनिट दरों में आवश्यक समंजन कर दिया गया है । ये नई उजरती दरें 'तथा अन्य अपरिवर्तित्त उजरती दरें रिपोर्ट के परिशिष्ट XII में दी गई हैं ।

( 13 ) परिशिष्ट XI में उल्लिखित विभिन्न उजरत्ती दरों वाले व्यवसायों की प्रत्याशित कमाई की रकम को 208 घंटे के महीने की गुजारे लायक मजदूरी मानना चाहिये वशर्ते कि कर्मचारी जान बूझ कर काम में ढिलाई का रवैया न अपनाएं ।

( 14 ) नंलीमरला, चितवलसाह , श्री हरदत्तराय , रामेश्वर, कटिहार, जे ० के ० और माहेश्वरी देवी जुट मिलों में काम करने वाले सभी वर्गों के कर्मचारियों ( कमियों और फुटकर कामगारों ) की मूल मजरियां यही होनी चाहिये जिनका पश्चिम बंगाल की जुट मिलों के मामलों में रिपोर्ट के परिशिष्ट XI में उल्लेख है ।

( 15 ) अरुण जुट रोप और ट्‌वाइन कम्पनी, हिन्दुस्तान जनरल प्रोड्यूस कम्पनी, महावीर जुट मिल और रायगढ़ जुट मिल के सभी वर्गों के कर्मचारियों' ( कर्मियों और फुटकर कामगारों ) की मूल मजदू‌रियां रिपोर्ट के परिशिष्ट XI में दी गईं मानक मूल मजदू‌रियों के बराबर ही होनी चाहिए । लेकिन बोर्ड की सिफारिशें लागू होने की तारीख से आगे के 12 महीनों तक इन मिलों के सभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मजदूस्यिां मानक मजदूरियों से दस प्रतिशत कम होंगी । अगले बारह महीनों में इन मिलों के सभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मजदूरियां मानक मूल मजदूरियों से पांच प्रतिशत कम होंगी । इसके पश्चातु इन मिलों के सभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मजदूरियां वैसी ही होंगी जैसी कि इस उद्योग के संबंध में रिपोर्ट के परिशिष्ट XI में दी गई हैं ।

( 16 ) श्री कृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों तथा गाजियाबाद जूट फॅक्ट्री में काम करने वाले सभी वर्गा के कर्मचारियों (कर्मियों और फुटकर कामगारों ) की मूल मंजदूरियां निम्नलिखित शतों के साथ मानक मूल मजदूरियों के बराबर होनी चाहियेः-

बोर्ड की सिफारिशें लागू होने की तारीख से आगे के 24 महीनों में सभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मजदूरियां परिशिष्ट XI में दिखाई गई मानक मजदूरियों से 20 प्रतिशत कम होंगी ।

अगले 12 महीनों में -राभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मजदूरियां परिशिष्ट XI में दिखाई गई मानक मजदूरियों से 10 प्रतिशत कम होंगी ।

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[PART I-SEO , 1 ]

अगले 12 महीनों में -सभी वर्गों के कर्मचारियों की मूल मज़दूरियां परिशिष्ट XI में दिखाई गई मानक मजदू‌रियों से 5 प्रतिशत कम होंगी ।

इसके पश्चात् सभी वगों के कर्मचारियों की मूल मजदू‌रियां परिशिष्ट XI में दिखाई गई मानक मजदूरियों के ही बराबर होंगी ।

(17) पश्चिम बंगाल के बाहर की जुट मिलों में सभी वर्गों के कर्मचारियों को ( लिपिकवर्ग को छोड़कर ) " मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु० 8-33 न० ५० मिलने चाहिए जिसमें रु 3-4% स० ० की अंतरिम सहायता भी सम्मिलित है ।

(18 ) श्री हरव्तराय , रामेश्वर कटिहार और रायगढ़ की जूट मिला के लिपिकवर्गीय अमले समेत सभी वर्गों के कर्मचारियों को उसी दर से मंहगाई भत्ता मिलना चाहिए जिसकी सिफारिश पश्चिम बंगाल की जूट मिलों के लिये की गई है । भविष्य में इन मिलों के मंहगाई भत्ते की घटा-बढ़ी भी कलकत्ते के श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर उसी प्रकार होनी चाहिये जिसकी पश्चिम बंगाल की जुट मिलों के लिये सिफारिश की गई है ।

(19) आधार-वर्ष 1935-36 के श्रमिकवर्ग उपभोक्ता मुल्य सूचकांक को 100 मानते हुए विशाखा- पत्तमम के सन् 1962 के अंतिम 6 महीनों के औसत सूचकांक 479 पर नंलीमरला, और चितवलसाह जुट मिलें, अरुण जूट रोप ट्वाइन कम्पनी तथा हिन्दुस्तान जनरल प्रोड्यूस कम्पनी के लिपिकवर्गीय अमले सहित सभी वर्गों के कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता रु० 36-68 न० ८० मिर्धारित किया जामा चाहिये । यह मंहगाई भत्ता परिवर्ती मंहगाई भत्ता होना चाहिये और यह विशाखापत्तनम् के आँसप्त श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में प्रत्येक अंक की वृद्धि या कमी होने पर 20 न० ५० की दर से बढ़ाया था घटाया जाता रहे । जुलाई से दिसम्बर तक और जनवरी से जून तक की पिछली छमाहियों के औसत श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर मंहगाई भत्ते का हर छः महीने बाद फरवरी और अगस्त के महीनों में पुनरीक्षण किया जाना चाहिये

(20) एलुरू में आधार वर्ष 1935-36 के श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 100 मानते हुए 1962 के अन्तिम छः महीनों के औसत सूचकांक 560 पर श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिला में काम करने वाले सभी वर्गों के कामगारों तथा लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के भत्ते की वर रु० 32-50 न० ५० निश्चित की जानी चाहिये । महंगाई भत्ते की रकम परिवर्ती होनी चाहिये और एलुरू के औसत श्रीमक वर्ग मुल्य सूचकांक में होने वाली प्रत्येक अंक की कमी या वंशी पर मंहगाई भत्ते की इस रकम में 20 न ० ५० की कमी या वंशी होनी चाहिए । जुलाई से दिसम्बर तक और जनवरी से जून तक की पिछली छमाहियों के औसत श्रमिक वर्ग उपभर्भाक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर छः महीने बाद फरवरी और अंगस्त के महीनों में मंहगाई भत्ते का पुनरीक्षण होना चाहिये ।

(21 ) कानपुर में आधार वर्ष सन्‌ 1989 के श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 100 मानतं हुए सन् 1962 के अंतिम महीनों के औसत सूचकांक 519 पर जे० के ० माहेश्वरी देवी और महावीर जुट मिलों और गाजियाबाद जुट कारखाने में काम करने वाले सभी वर्गों के कामगारों तथा लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के भत्ते की दर रु ० 32.50 न० ५० निश्चित की जानी चाहिए । मंहगाई भत्ते की रकम परिवर्ती होनी चाहिए और कानपुर के औसत श्रमिक वर्ग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में होने वाली प्रत्त्वेक अंक की कमी था वंशी पर मंहगाई भत्ते की इस रकम में 20 न ० ५० की कमी या वंशी होनी चाहिये । जुलाई में दिसम्बर तक और जनवरी से जून तक की पिछली छमाहियों के औसत श्रमिकवर्ग उपभोक्ता 'THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY

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मूल्य सूचकांक के आधार पर हर छः महीने बाद फरवरी और अगस्त महीने में मंहगाई भत्ते का पुनरीक्षण होना चाहिए ।

(22 ) श्री हरघुत्तराय , रामेश्वर , कटिहार , रायगढ़ , नेलीमरला और चित्तवलसाह जुट मिलों की उजरती दरें वही होनी चाहिए जो पश्चिम बंगाल की जुट मिलों के लिए मानक हैं । किन्तु रायगढ़ जुट मिल में पश्चिम बंगाल जुट मिलों की मानक उजरती वरं रिपोर्ट के पैरा 7.65 में उल्लिखित योजना के अनुसार कई चरणों में लागू की जानी चाहिएं ।

(28 ) जे ० के० माहेश्वरी देवी , महावीर , श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों के मालिकों को चाचिए कि वं वर्तमान अन्तरक को कायम रखते हुए विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों की अमानी मजदूरी-चर बोर्ड द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी के आधार पर निश्चित करें । उजरती दर पर काम करर्म वाले कर्मचारियों की मजदूरी दरें इस प्रकार समंजित की जायं कि न्यूनतम कमाई करने वाले कर्मी को उससे कम मजदूरी न मिले जिसकी सिफारिश वर्तमान कार्यभार और अन्य वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टि में रखकर बोर्ड ने की हैं । अन्य उजरती र वर्तमान अन्तरकों को यथावत रखते हुए निर्धारिव की जानी चाहिएं । उजरतदरों और अमानी पर काम करने वाले दोनों कमियों को " मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि " और महंगाई भत्ता मिलना चाहिए । बोर्ड की मंशा हैं कि सभी कर्मचारियों के कुल वेतन में कम से कम रु ० 4.91 न० ५० प्रतिमास की वृद्धि ( अन्तरिम सहायता के अतिरिक्त ) अवश्य होनी चाहिए । यदि मालिकों द्वारा परिशोधित मजदूरी दरों और या उजरती दरों के सम्बन्ध में मालिकों और कर्मचारियों के बीच कोई विवाद पैदा हो जाए ती उसे तय करने के लिये सम्बन्धित राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिये ।

(24 ) महावीर , श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों में मानक उजरती दर उसी प्रकार कई चरणों में लागू की जानी चाहिये जैसी कि अमानी त्रों के सम्बन्ध में रिपोर्ट के पैरा 7.65 में उल्लिखित सिफारिश की गई है ।

परिशिष्ट XI में विभिन्न उजरत्ती कामों की / स्याशित कमाई की रकमें बताई गई हैं ।

(25 ) श्री हरवत्तराय , रामेश्वर, कटिहार और रायगढ़ तथा नेलीमरला और चिसवलसाह जुट मिलों के सम्बन्ध में ये ही रकर्म 208 घंटे के माहीने के लिए न्यूनतम (गुजारे लायक ) मजदूरियां भी समझी जांए बशर्ते कि कामगार आनबूझ कर काम में डिलाई का रवैया न अपनाएं । जे० के० माहेश्वरी देवी, महावीर, श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों के सम्बन्ध में मालिकों को परिश्रम और कुशलता से काम करने वाले और औसत मानक उत्पादन देने वाले कर्मचारियों की प्रत्याशित कमाई की रकमों का हिसाब लगा लेना चाहिए और इन्हें ही 208 घंटे के महीने के लिये न्यूनतम ( गुजारे लायक) मजदूरियां समझना चाहिए, बशर्ते कि कर्मचारी जान -बूझ कर काम में ढिलाई का रवैया ने अपनाएं ।

(26 ) पश्चिम बंगाल की जुट मिलों के मिस्त्रियों की परिशोधित मानक मूल्य मजबूरियां और श्रेणियां रिपोर्ट के परिशिष्ट XIII में दिए अनुसार होनी चाहियें ।

(27 ) मिस्त्रियों की 'क' और 'ख ' श्रेणियों का वेतनमान भी श्रेणी 'ग' के समान 6 वर्ष का होमा चाहिए । 'क' श्रेणी का पहला साल 'ख' श्रेणी का छठा साल मानना चाहिये और 'क' श्रेणी में रु ० 4.85 न ० ५० की वार्षिक वृद्धि वाले दो वेतनमान और जोक सुने चाहियें ।

(28 ) स्थिर गूड वाले मिस्त्रियों जैसे हेड मिस्त्री, मिल और सामान्य चार्ज हैंडों, नमूने बनाने वाले आदि को ओ 'क' , ' ख ' और 'ग' श्रेणियों के अन्तर्गत नहीं आते रु ० 4.91 म० ५० प्रतिमास की सामान्य वृद्धि के अतिरिक्त मूल मजदूरी में रु० 14.08 न० ५० प्रतिमास की वृद्धि और दंनी चाहिए ।

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(29 ) 'क' और ' ख' श्रेणी के बीच जर्नीर्मनों के लिये जां वर्तमान रिक्ति अवरोध हैं उसे हटा देना चाहिये ।

( 30 ) "चीनी बढ़इयों " की वर्तमान मूल मजदू‌रियां पहले जैसी ही रहनी चाहियें और उन्हें केवल रु ० 4.91 न० ५० की सामान्य वृद्धि मिलनी चाहिये । यह रकम रु ० 3.42 न० पै० की अन्तरिम सहायता के साथ मिल कर मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु ० 8.88 न० ० हो जायेगी । ' चीनी बढ़इयों का पद समाप्त कर उसके स्थान पर प्रधान विशिष्ट और विशिष्ट बढ़ई रखने चाहिये । प्रधान विशिष्ट बढ़ई की मूल मजदूरी वही होनी चाहिये जो मिल हेड मिस्त्री को मिलती है और विशिष्टि बढ़ई की 'मूल मजदूरी उसनी होनी चाहिये जितनी चार्ज हेडों को दी जाती

( 31 ) तेल बाले खलासी, रस्सा जोड़ने वाले , पिन लगाने वाले ( Pin Boys ) बार पर काम करने वाले (Bar Boys ) रास्ख ढोने वाले , माल उठाने वाले आदि कर्मचारियों की ऐसी श्रेणियां हैं जो आम तौर पर इंजीनियरी विभाग में दिखाई जाती हैं किन्तु इन्हें सामान्य कर्मी ही समझना चाहिये और इनकी मासिक मूल मजदूरियां प्रत्येक के सामने लिखे अनुसार होनी चाहियें ।

(32) कार चालकों , लारी चालकों और ट्रैक्टर चालकों को उसी ' ख ' श्रेणी में रखना चाहिए ओ कि पश्चिम बंगाल में जुट मिलों के मिस्त्रियों को लाम् हैं और उन्हें प्रारंभिक वेतन के रूप में १० 78.00 न० ५० प्रतिमास तथा उसी श्रेणी की वार्षिकवृद्धि मिलनी चाहिए । जिन चालकों के लिए लारी चालकों के रूप में काम करना आवश्यक हो उन्हें रु० 15.00 न० ५० प्रतिमास के हिसाब से विशेष भत्ता देना चाहिए ।

( 33) प्रत्येक श्रेणी की समाप्ति पर कुशलता-परीक्षा के पश्चात् जर्नीमैन श्रेणी के सभी मिस्त्रियों को ' ग ' श्रेणी से ' ख ' श्रेणी में , और ' ख ' श्रेणी से ' क' श्रेणी में चढ़ा देना चाहिए । इस प्रकार की श्रेणी उन्नति के सम्बन्ध में कोई रिक्ति अवरोध नहीं होना चाहिए ।

( 34 ) सभी श्रेणियों के मिस्त्रियों की वार्षिक वेतन वृद्धि की तारीख अपरिवती होनी चाहिये ।

( 35 ) अप्रेंटिस अधिनियम 1961 के अन्तर्गत आने वाले मिस्त्री अप्रेंटिसों के अतिरिक्त अन्य, मिस्त्री, अप्रेंटिसों को वर्तमान दरों से गुजारा भत्ता देना चाहिए, इसके साथ साथ उन्हें मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु ० 8.38 न० ५० प्रतिमास और देना चाहिए । इसमें अंतरिम सहायता के रु ० 3.42 न० ५० भी सम्मिलित हैं । इनको मिलने वाले मंहगाई भत्ते की रकम पश्चिम बंगाल की जुट मिलों में काम करने वाले अन्य कामगारों के मंहगाई भत्ते की रकम के बराबर होनी चाहिए ।

(36) पश्चिम बंगाल की जुट मिलों के मिस्त्रियों के लिए बोर्ड द्वारा परिशोधित्त मानकित गुड और अंतनमान , बोर्ड द्वारा निर्धारित कुछ शतों के अधीन पश्चिम बंगाल के बाहर की जूट मिलों पर भी लागू होंगे ।

( 37 ) पश्चिम बंगाल के बाहर की मिलों के मिस्त्रियों के यथासंभव षष्ठी नाम अपनाने चाहिएं जो पश्चिम बंगाल की जूट मिलों में हैं ।

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( 38 ) पश्चिम बंगाल की जूट मिलों के पहरा और निगरानी स्टाफ की परिशोधित मूल मजदूरियां निम्न प्रकार होनी चाहिएं :-

जमादार

हवलदार

दरबान रु० 75-34 न० ५०

रु० 60-34 न ० ०

रु० 16-34 न० ५०

( 39 ) नेल्लीमरला , चित्तवलसाह और जे ० के ० जुट मिलों को छोड़कर पश्चिम बंगाल के बाहर की सभी जुट मिलों में पहरा और निगरानी स्टाफ की विभिन्न श्रेणियों की मजदूरी दरें , पश्चिम बंगाल की जुट मिलों में उसी श्रेणी के कर्मचारियों को मिलने वाली मानकित मजदूरी दरों के बराबर होनी चाहिए । वोर्ड द्वारा निश्चित्त कुल मजदूरी के अतिरिक्त मिलने वाली रकम व्यक्तिक बेतन के रूप में दी जाती रहेगी लेकिन इस प्रकार के पहरा और निगरानी स्टाफ को मजदूरी बोर्ड द्वारा दी गई वृद्धि के रूप में रु ० 8-33 न० ५० और दिये जायेंगे जिसमें अन्तरिम सहायता की रकम भी सम्मिलित होगी ।

(40 ) नेल्लीमरला, चित्तवलसाह और जे ० के ० जुट मिलों को भविष्य में भर्ती होने वाले कर्मचारियों के सबंध में उन्हीं मजदूरी दरों का अनुसरण करना चाहिए जो पश्चिम बंगाल की जूट मिलों के पहरा और निगरानी स्टाफ की विभिन्न श्रेणियों के लिये निर्धारित की गई हैं । किन्तु वर्तमान पद्धारी का मूल वेतन मान वही होना चाहिए , जिसकी बोर्ड ने सिफारिश की है और वर्तमान कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के अनुसार इन्हीं श्रेणियों में बांट देना चाहिए । बोर्ड द्वारा निश्चित कुल मजदूरी के अतिरिक्त मिलने वाली रकम व्यक्तिक वेतन के रूप में दी जाती रहेगी और इन्हें मजदूरी बोर्डद्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु ० 8-33 न० ० भी मिलेंगे जिसमें अन्तरिम सहायता की रकम भी सम्मिलित होगी ।

(41 ) महाबीर , रायगढ़ , श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों और अरुण जूट रस्सा तथा ट्वाइन कम्पनी, हिन्दुस्तान जनरल प्रोड्यूस और गाजियाबाद जुट कारखाने के पहरा और निगरानी स्टाफ के लोगों का मूल वेतन रिपोर्ट के पैरा 7-65 में मूल मजदूरी के बारे में दी गई क्रमिक वृद्धि योजना द्वारा नियंत्रित होना चाहिए बशर्ते कि इसका पहरा और निगरानी स्टाफ के लोगों की वर्तमान उपलब्धि पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े । इन लोगों को भी अन्तरिम सहायता समेत मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु ० 8-83 न० ५० मिलने चाहिए ।

(42 ) पश्चिम बंगाल के जुट मिलों के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के परिशोधित अंतन -मान मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई रु ० 8-83 न० ५० की वृद्धि को मिलाकर निम्न प्रकार होगें :-

रु० 77-4-137 गोड II

रु० 92-5-162-74-207

रु० 152-10-222

एस० बी० गूड

रु० 222-10-322

एस ० ए० गुड

(43) लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को परिशिष्ट XV की सारिणी में दिखाई गई रीति से मूल बेतन के नये मानों में बांट देना चाहिये । गूड 1 के वर्तमान पधारी को, ओ कुशलतारोध पार कर चुका हो , बोर्ड द्वारा निर्धारित विशेष शत्तों के अनुसार नये गुड में रख बना चाहिए ।

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[ PART I - SEC , 1 ]

(44) विभिन्न प्रकार के काम करने वाले लिपिकों के गूढों का निर्णय बोर्ड द्वारा निर्धारित ढंग से होना चाहिए ।

( 45 ) गूड 1 में लिपिकों की नियुक्ति के लिचे भर्ती का आधार गूड II होना चाहिए किन्तु गुंड I में चढ़ाने के विचार से गृह II में नियुक्त किये गये व्यक्तियों को 2 वर्ष से अधिक गुंड II में नहीं रखना चाहिए । गूड II के लिपिक भी उच्च्च गुंड में पदोन्नत्ति के पात्र समझे जाने चाहियें बशर्ते कि वे इस प्रकार की पदोन्नति के योग्य हों । उच्च गुंडों के रिक्त स्थानों की पूर्ति सामान्यतः निम्न गुड के उपयुक्त लिपिकों में से पदोन्नति द्वारा की जानी चाहिए और पदोन्नति की कसौटी वरीयता और कुशलता होनी चाहिए ।

(16) जब निम्न गूड का लिपिक उच्च गुड के पद पर 15 था अधिक दिनों तक स्थानापन्न रूप से काम करे तो उस अवधि में उसे उसके मूल वेतन के 5 प्रतिशत प्रतिमास के बराबर कार्यवाहक भत्ता मिलना चाहिए जो किसी भी दशा में 5 रु ० से कम न हो ।

( 47 ) लिपिकों के वार्षिक वेतन वृद्धि की तारीख नहीं बदलनी चाहिए ।

( 18) बोर्ड की सिफारिशों के परिणाम स्वरूप लिपिकों को किसी प्रकार की हानि नहीं होनी चाहिए । उन मामलों में जहां बोर्ड द्वारा की गई सिफारिशों की अपेक्षा की सेवा सम्बन्धी वर्तमान शते", कुल मिलाकर अच्छी हैं , वहां ये लोग अपने वर्तमान अधिकारों और विशेषाधिकारों का उपभोग करते रहेंगे ।

( 49 ) पश्चिम बंगाल के बाहर की सभी जुट मिलों को लिपिकों के परिशोधित गुंडों तथा वेतनमानों का और पश्चिम बंगाल के बारे में आंर्ड द्वारा लिपिकों के श्रेणीकरण और पदोन्नत्ति आदि के सम्बन्ध में की गई सिफारिशों का अनुसरण करना चाहिए । पश्चिम बंगाल के बाहर की जुट मिलों के लिपिकवर्गीय कर्मचारियों को मजदूरी बोर्ड द्वारा की गई वृद्धि के रूप में रु ० 8-38 न ० पै ० मासिक की रकम अलग से नहीं दी जायेगी किन्तु विभिन्न श्रेणियों के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों को उनके वर्तमान गूडों के उपयुक्त नये गूडों में रखते समय इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि प्रत्येक लिपिक को' बोर्ड की सिफारिशें लागू होने की तारीख से कम से कम 14 रुपये प्रतिमास की वृद्धि अवश्य मिले ।

( 50 ) नेल्लीमरला और चितवलसाह जुट मिलों के मामलों में वर्तमान गुंडों को बोर्ड द्वारा निर्धारित ढंग से नये गुंडों में विलीन हुआ मान लिया जाना चाहिए ।

(51 ) महावीर , रायगढ़ , श्रीकृष्ण और श्री बजरंग जुट मिलों , अरुण जूट रोप और ट्वाइन कम्पनी, हिन्दुस्तान जनरल प्रोड्यूस कम्पनी और गाजियाबाद जूट कारखाने के मामले में लिपिकों के नये वेतनमानों का प्रवर्तन रिपोर्ट के पैरा 7-65 में दी गई रीति के अनुसार ही कई चरणों में किया जायेगा लेकिन शर्त यह रहेगी कि प्रत्त्येक लिपिक को बोर्ड की सिफारिशें लागू होने की तारीख से कम से कम 14 रुपये प्रतिमास की वृद्धि अवश्य मिले ।

(52 ) देश की सभी जुट मिलों के लिये बोनस की एक मानकित योजना की सिफारिश की जाती है । लेकिन यदि किसी मिल में किसी बर्तमान पंचाट , करार, या प्रभा के कारण धिक सूर पर यौनस दिया जा रहा हो, तो वह पंचाट, करार या प्रभा लागू रहनी चाहिये और बोर्ड की सिफारिशों के अधीन बोनस न देकर उन्हीं के अधीन बोनस दिया जाना चाहिए ।

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[ PART I - SEC . 1 ]

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( 53) सन् 1963 का बोनस 1962 में कर्मचारियों को मिलने वाली मूल मजदूरी के आधार पर देय होगा । पश्चिम बंगाल के बाहर की मिलों में चालू वर्ष के दंय बोनस का हिसाब, 1962 में मिलों के प्रत्येक कर्मचारी को दी गई मूल मजदूरी और रिपोर्ट के परिशिष्ट X में निदिष्ट मजदूरी में से जो भी अधिक हो उसे आधार मानकर लगाया जायेगा । आगामी वर्षों में बोनस पिछले वर्ष दी गई मजदूरियों के आधार पर दिया जाएगा ।

(54 ) जूट उद्योग में बोनस की अदायेगी पर नियन्त्रण रखने के लिये बोर्ड नं नियम निर्धारित कर दिये हैं ।

(55 ) सभी मिलों में 1963 में दिये जाने वाले बोनस की अदायेंगी 12 अक्तूबर 1963 के पहले कर दी जानी चाहिए ।

(56) जूट उद्योग में स्थायी और अस्थायी कामगारों का अनुपात उस कगर द्वारा नियंत्रित होगा जो बोर्ड में सम्मिलित मालिकों और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुआ है और जिसकी शतों के अनुसार बोर्ड ने सिफारिशें की हैं ।

( 57 ) पुरुष कर्मचारियों की सेवा निवृत्ति आयु 58 और महिला कर्मचारियों की 55 होनी चाहिए । यदि मालिक चाहें तो कर्मचारियों को इस आयु के बाद भी काम पर रख सकते हैं किन्तु इसका कर्मचारियों द्वारा उपदान का दावा करने के अधिकार पर कोई विपरीत प्रभाव न होगा ।

( 58 ) रिपोर्ट के परिशिष्ट XVII में दिए हुए काम के व्योरे जानकारी के लिये हैं और वे केवल दृष्टान्त रूप में दिखाए गए हैं । उन्हें स्वतः पूर्ण नहीं मान लेना चाहिए ।

( 59 ) बोर्ड ने जूट मिल के अर्धकुशल कर्मियों के लिये एक अन्तर संयन्त्र शिक्षु प्रशिक्षण योजना बनाई है जो परिशिष्ट XI में दी गई है ।

( 60 ) बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रात पारी भत्ता प्रदान करने की कोई आवश्यकता नहीं हैं । लेकिन फिर भी उसकी सिफारिश है कि इस सम्बन्ध में यदि कोई ऐसी वर्तमान प्रथा प्रचलित हो जो कर्मचारियों के लिए लाभकर हो तो उसे चलने दिया जाए ।

( 61 ) बोर्ड द्वारा अनुमोदित नई मजदूरी दरें 1 जुलाई 1963 से लागू होनी चाहिएं और इसकी सिफारिशें 31 दिसम्बर 1967 तक लागू रहेंगी ।

( 62 ) सरकार द्वारा सिफारिशें स्वीकृत और प्रकाशित हो जाने के पश्चात् मजदूरी की नई दर्श से अदायेगी यथाशीघ्र आरम्भ कर देनी चाहिए और यह अदायेगी किसी भी दशा में 2 नवम्बर 1963 को समाप्त होने वाले सप्ताह की मजदूरी ( आगामी सप्ताह में देय ) अदा करने की तारीख के बाद न हो । पहली जुलाई से उस तारीख तक , जब नया मजदूरी विन्यास वास्तव में लागू किया जाय , नई और पुरानी मजदूरी के बीच के अन्तर की रकम 28 नवम्बर 1963 या उसके पूर्व अदा कर दूंनी चाहिए ।

GOVERNMENT OF INDIA PRESS , PRINTED IN INDIA BY THE GENERAL MANAGER , NEW DELHI AND PUBLISHED BY THE MANAGER OF PUBLICATIONS , DELHI , 1964

Cite this issue. Extraordinary Gazette of India, Government of India, 27 February 1964. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-27.E-1812-1964-0020-82437/. Archive identifier in.gazette.csl_extraordinary.1964-02-27.E-1812-1964-0020-82437.