भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 24 मई, 2018
संख्या लैज० 7/2018़- दि हरियाणा स्टेट हायर एजूकेशन काउनसिल ऐक्ट, 2018, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 14 मई, 2018, की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 4
हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् अधिनियम, 2018 राज्य में उच्चतर शिक्षा की सभी संस्थाओं की स्वायत्तता और बृहत् उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए पॉलिसी सूत्रीकरण और भावी योजना के लिए शैक्षणिक इनपुट प्राप्त करते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक न्याय प्रोन्नत करने के लिए और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की आवश्यकता के अनुसार राज्य की सामाजिक-आर्थिक अपेक्षाओं के अनुसार उच्चतर शिक्षा के विकास के मार्गदर्शन और उनसे सम्बन्धित या उनसे आनुषंगिक मामलों के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् अधिनियम, 2018, कहा जा सकता है। (2) यह 28 फरवरी, 2018 से लागू हुआ समझा जाएगा।
परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''अध्यक्ष'' से अभिप्राय है, परिषद् का अध्यक्ष ; (ख) ''महाविद्यालय'' से अभिप्राय है, किसी विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित या अनुमोदित या सहबद्ध स्वायत्त महाविद्यालय सहित कोई महाविद्यालय या संस्था जो दाखिले से परीक्षा तक पाठ्यक्रम में अध्ययन की सुविधा प्रदान करता/करती है ;
(ग) ''आयोग'' से अभिप्राय है, धारा 12 के अधीन गठित हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा आयोग;
(घ) ''परिषद्'' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन गठित हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्; (ङ) ''उच्चतर शिक्षा'' से अभिप्राय है, अनुसंधान अध्ययनों सहित कोई शिक्षा स्ट्रीम चाहे वित्तीय, तकनीकी हो, जो डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाणपत्र प्रदान करती है, किन्तु इसमें चिकित्सा, कृषि, पशुपालन तथा उद्यान स्ट्रीम शामिल नहीं हैं;
(च) ''संस्था'' से अभिप्राय है, विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित या विश्वविद्यालय के विशेषाधिकार
से अनुमति प्राप्त कोई उच्चतर शिक्षा शैक्षणिक संस्था ;
(छ) ''सदस्य'' से अभिप्राय है, परिषद् का सदस्य, तथा इसमें अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष शामिल हैं;
(ज) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित ;
(झ) ''राज्य'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य ;
(ञ) ''राज्य सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासनिक विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार ;
(ट) ''विश्वविद्यालय'' से अभिप्राय है, राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित किसी अधिनियम द्वारा
स्थापित कोई विश्वविद्यालय ;
(ठ) ''विश्वविद्यालय अनुदान आयोग'' से अभिप्राय है, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,
1956 (1956 का केन्द्रीय अधिनियम 3) के अधीन स्थापित आयोग ;
(ड) ''उपाध्यक्ष'' से अभिप्राय है, परिषद् का उपाध्यक्ष।170 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 24, 2018 (JYST. 3, 1940 SAKA) परिषद् का गठन।
3. (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् का गठन करेगी, अर्थात् :-
(क) सिद्ध नेतृत्व योग्यता रखने वाला कोई शिक्षाविद् या विख्यात बुद्धिजीवी - अध्यक्ष ;
(ख) अखिल भारतीय ख्यातिप्राप्त कोई शिक्षा प्रशासक जो कम से कम आचार्य या इसके
समकक्ष पद पर है या कार्य किया हो - उपाध्यक्ष ;
(ग) प्रधान सचिव, उच्चतर शिक्षा - सदस्य सचिव ;
(घ) राज्य परियोजना निदेशक - सदस्य ;
(ङ) उच्चतर शिक्षा विभाग का कोई प्रतिनिधि जो उप निदेशक की पदवी से नीचे का न
हो - सदस्य ;
(च) तकनीकी शिक्षा विभाग का कोई प्रतिनिधि जो उप निदेशक की पदवी से नीचे का न
हो - सदस्य ;
(छ) वित्त विभाग का कोई प्रतिनिधि जो संयुक्त सचिव की पदवी से नीचे का न हो -
सदस्य ;
(ज) कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, सामाजिक सैक्टर तथा उद्योग तथा व्यावसायिक
शिक्षा इत्यादि के क्षेत्र से पन्द्रह सदस्य - सदस्य :
परन्तु परिषद् के दस सदस्य राज्य से होंगे तथा पांच सदस्य अन्य राज्यों से
होंगे तथा राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त होंगे।
(झ) राज्य के किन्हीं तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति - सदस्य ;
(ञ) स्वायत्त या सहबद्ध महाविद्यालयों के दो प्रधानाचार्य - सदस्य ; (ट) मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट एक सदस्य -
सदस्य।
(2) परिषद् शाश्वत उत्तराधिकार तथा सामान्य मुद्रा रखने वाली उपरोक्त नाम से निगमित निकाय होगी तथा उस पर उक्त नाम से वाद होगा तथा वाद चला सकेगी।
(3) प्रत्येक नामनिर्दिष्ट सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष की अवधि के लिए होगा तथा एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष के बाद सेवानिवृत्त होंगे। परिषद् प्रत्येक दो वर्ष में सात नए सदस्य नामनिर्दिष्ट करेगी।
(4) परिषद् की बैठक प्रत्येक तीन मास में एक बार आयोजित की जाएगी।
(5) परिषद् की बैठक की गणपूर्ति अध्यक्ष तथा सदस्य सचिव सहित सदस्यों की कुल संख्या के एक तिहाई से होगी।
(6) परिषद् का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए। प्रथम अध्यक्ष। 4. परिषद् का प्रथम अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा तथा ऐसे रूप में तब तक बना रहेगा, जब तक इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन चयन समिति अध्यक्ष का चयन नहीं कर लेती है। सलाहकार समिति।
5. (1) परिषद् के अध्यक्ष के चयन के लिए तीन सदस्य, जो ख्यातिप्राप्त परिषत्सदस्य या विख्यात बुद्धिजीवी होंगे, से मिलकर बनने वाली सलाहकार समिति होगी । (2) उक्त तीन सदस्यों में से, दो सदस्य परिषद् द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे तथा एक सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा।
(3) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट सदस्य सलाहकार समिति का अध्यक्ष होगा।
अध्यक्ष। 6. (1) अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा।
(2) अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा हटाया जा सकता है, यदि उसका कार्य तथा आचरण असंतोषजनक पाया जाता है।
चयन समिति। 7. (1) निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली चयन समिति, सलाहकार समिति की सिफारिश पर अध्यक्ष का चयन करेगी, अर्थात् :-
(क) राज्य विधान सभा का अध्यक्ष ;
(ख) मुख्य मंत्री ; (ग) राज्य विधान सभा में प्रतिपक्ष का नेता।171 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 24, 2018 (JYST. 3, 1940 SAKA) उपाध्यक्ष। 8. (1) उपाध्यक्ष पांच वर्ष की अवधि के लिए तीन सदस्यी समिति द्वारा नियुक्त किया जाएगा। परिषद् का अध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होगा। समिति का एक सदस्य परिषद् द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा तथा एक सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा।
(2) उपाध्यक्ष परिषद् की सिफारिश पर हटाया जा सकता है।
9. (1) राज्य सरकार किसी सदस्य को हटाएगी, यदि वह,-
सदस्य का हटाया जाना। (क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है ;
(ख) ऐसा अपराध, जो राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता वाला है, के लिए
दोषसिद्ध तथा कारावास से दण्डादेश हो गया है, ;
(ग) विकृत चित्त हो जाता है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया
जाता है ;
(घ) कार्य करने से इन्कार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है ; (ङ) परिषद् से अनुपस्थिति का अवकाश प्राप्त किए बिना, परिषद् की तीन लगातार
बैठकों से अनुपस्थित रहता है।
(2) किसी सदस्य की अयोग्यता के सम्बन्ध में किसी विवाद पर, मुख्य मंत्री का निर्णय अन्तिम होगा।
(3) कोई भी व्यक्ति परिषद् के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक वह स्नातक न हो।
10. परिषद् के निम्नलिखित कर्तव्य तथा कृत्य होंगे,-
परिषद् के कर्तव्य तथा कृत्य। (i) आयोग के निर्णयों को लागू करना ; (ii) राज्य (भावी योजना, वार्षिक योजना तथा बजट) के लिए उच्चतर शिक्षा की पॉलिसी
बनाना ;
(iii) योजना तथा कार्यान्वयन में राज्य के उच्चतर शिक्षा संस्थानों की सहायता करना ; (iv) शीर्ष शिक्षा संस्थानों, विनियामक निकायों और राज्य सरकार के बीच समन्वय करना ; (v) उच्चतर शिक्षा की योजना का अन्तरीक्षण तथा कार्यान्वयन करना ; (vi) प्रबन्ध करना, सूचना प्रणाली बनाना तथा इसका रख-रखाव करना ; (vii) समय-समय पर सरकार के स्तर तथा संस्था के स्तर पर उच्चतर शिक्षा से संबंधित डाटा
संग्रहण करना ;
(viii) राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन द्वारा बनाई गई मूल अनुपालन सूचना के अनुसार राज्य में उच्चतर शिक्षा की संस्थाओं का मूल्यांकन करना और यदि आवश्यक हो, तो मानदण्ड बनाना ;
(ix) राज्य में अध्यापन गुणवत्ता तथा अनुसंधान में निरन्तर वृद्धि के लिए योजना बनाना तथा
उपाय सुझाना ;
(x) परीक्षा प्रणाली में सुधारों के सुझाव देना ; (xi) समसामयिक तथा सुसंगत पाठ्यक्रम बनाना ; (xii) अनुसंधान में नवपरिवर्तन को बढ़ावा देना ; (xiii) राज्य की उच्चतर शिक्षा संस्थाओं की स्वायत्ता की सुरक्षा करना ; (xiv) नई संस्थाओं, महाविद्यालयों की स्थापना करने के लिए स्वीकृति प्रदान करना ; (xv) मान्यता की प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए उपाय सुझाना ; (xvi) उच्चतर शिक्षा में निवेशों के लिए राज्य सरकार को मन्त्रणा देना ; (xvii) विनियमों तथा अध्यादेशों को बनाने में विश्वविद्यालयों को मन्त्रणा देना ; (xviii) राज्य सरकार के माध्यम से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन के अंशदान के रूप में प्राप्त
राशि का प्रबन्ध करना ;
(xix) ऐसी प्रक्रियाएं बनाना जिनके माध्यम से राज्य सरकार का सहायता अनुदान उच्चतर शिक्षा
संस्था को अन्तरित किया जा सकता है ;
(xx) राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन के अधीन विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों हेतु वित्तीय
सहायता के अन्तरण की पारदर्शी प्रक्रिया बनाना तथा अनुसरण करना।
172 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 24, 2018 (JYST. 3, 1940 SAKA)परिषद् की बैठकें।
11. (1) परिषद् की बैठकें आवश्यकतानुसार आयोजित की जाएंगी। तथापि, तीन मास में कम से कम एक बैठक बुलाई जानी अनिवार्य होगी।
(2) परिषद् का सदस्य सचिव अध्यक्ष के परामर्श पर परिषद् की बैठक बुलाएगा। (3) परिषद् की बैठक की गणपूर्ति परिषद् के कुल सदस्यों के एक तिहाई सदस्यों से होगी। आयोग का गठन।
12. (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, शिक्षा मन्त्री, हरियाणा तथा ऐसे अन्य सदस्यों, जैसा राज्य सरकार ठीक समझे, की अध्यक्षता के अधीन हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा आयोग गठित कर सकती है।
(2) आयोग के सदस्यों के निबन्धन और शर्तें ऐसी होंगी, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं। (3) आयोग राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सिफारिशें करेगा तथा सुझाव देगा। 13. परिषद् का कोई भी कार्य अथवा कार्यवाहियां केवल किसी रिक्ति के होने, सदस्य की अनुपस्थिति अथवा परिषद् के गठन में त्रुटि के आधार पर अमान्य नहीं होंगी।
रिक्तियों के कारण कार्यवाहियों का अमान्य न होना।
त्यागपत्र। 14. कोई सदस्य अध्यक्ष को त्यागपत्र भेज सकता है, किन्तु वह तब तक सदस्य के रूप में बना रहेगा जब तक उसे लिखित में सूचित नहीं किया जाता है कि उसका त्यागपत्र अध्यक्ष द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।
सदस्यों के भत्तेे।
15. सदस्य ऐसे यात्रा भत्ते, दैनिक भत्ते, स्थानीय खर्चे और सहभागिता फीस, जो राज्य सरकार द्वारा विहित की जाये, प्राप्त करने के हकदार होंगे।
आपातिक रिक्तियां।
16. (1) यदि किसी सदस्य की मृत्यु, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या किसी अन्य कारण से कोई आपातिक रिक्ति होती है, तो राज्य सरकार किसी सदस्य को नामनिर्दिष्ट या नियुक्त करेगी। (2) नये सदस्य का कार्यकाल उस सदस्य, जिसके विरुद्ध वह नामनिर्दिष्ट या नियुक्त किया गया है, के शेष कार्यकाल के लिए होगा।
वार्षिक लेखा और संपरीक्षा।
17. (1) परिषद् के लेखे तथा लेखों की वार्षिक रिपोर्ट ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में रखी जाएगी।
(2) परिषद् के लेखे परिषद् द्वारा नियुक्त लेखा-परीक्षक द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे। (3) सदस्य सचिव वार्षिक रिपोर्ट के प्रकाषन और प्रत्येक सदस्य को रिपोर्ट की सीलबंद प्रति उपलब्ध करवाने तथा उसे अनुमोदन के लिए परिषद् के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेवार होगा। (4) लेखा-परीक्षक द्वारा बताई गई गलतियां और अनियमितताएं सम्यक् प्रक्रिया अपनाते हुए परिषद् द्वारा सुधारी जाएंगी। (5) परिषद् के लेखों की संपरीक्षित रिपोर्ट परिषद् की टिप्पणियों सहित राज्य सरकार को विहित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।
(6) वार्षिक लेखे और संपरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, राज्य सरकार उन्हें यथा सम्भव शीघ्र्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
वार्षिक रिपोर्ट। 18. (1) परिषद् प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार के समक्ष अपने क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
(2) वार्षिक रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, राज्य सरकार उसे यथा शीघ्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।
19. किसी बात, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई है या की जाने के लिए आषयित है, के कारण हुई या होने वाली सम्भाव्य किसी क्षति के संबंध में किसी लोक सेवक या राज्य सरकार के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं होेंगी।
20. (1) परिषद् ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती है जो परिषद् के निर्बाध कार्य के लिए आवष्यक समझे जाएं।
परिषद् के अधिकारी और कर्मचारी।
(2) परिषद् के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन तथा शर्ते ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।173 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 24, 2018 (JYST. 3, 1940 SAKA) 21. परिषद् के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझे जाएंगे।
परिषद् के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना।
विनियम बनाने की शक्ति। 22. परिषद् ऐसे विनियम बना सकती है जो इस अधिनियम के उपबंधों के परस्पर विरोध में न हाें और जो परिषद् के कार्य के लिए आवष्यक हैं।
23. राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। नियम बनाने की
शक्ति।
कठिनाईयां दूर करने की षक्ति। 24. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, आदेष द्वारा ऐसे उपबंध, जो इस अधिनियम के उपबंधों से सुसंगत न हों तथा जो आवष्यक या समीचीन प्रतीत हाें, कर सकती है।
(2) इस धारा के अधीन किया गया कोई आदेष, राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखा जाएगा।
निरसन तथा व्यावृत्ति। 25. (1) हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद् अध्यादेश, 2018 (2018 का हरियाणा अध्यादेश संख्या 3), इसके द्वारा, निरसित किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई समझी जाएगी।
कुलदीप जैन, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
56302—L.R.—H.G.P., Chd.