Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 110–2018/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 4 जुलाई, 2018
(आषाढ़ 13, 1940 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन (हरियाणा संषोधन) 205—206 अधिनियम, 2018 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 19)।
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
अधिसूचना संख्या का०आ०37/के०अ०5/1938/धा०9/2018, दिनांक 04 जुलाई, 2018 513—524 -अम्बाला तथा पंचकूला जिले की नारायणगढ़ तहसील, रायपुररानी उप-तहसील तथा मोरनी उप-तहसील के सम्पूर्ण अधिसूचित क्षेत्र में गोला चलाने तथा तोप दागने के अभ्यास को प्राधिकृत करने बारे।
(प्राधिकृत अंग्रेजी अनुवाद सहित)
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(lx)205 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 4, 2018 (ASAR. 13, 1940 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 4 जुलाई, 2018
संख्या लैज. 22/2018.— दि पंजाब शेड्यूल्ड रोडज ऐण्ड कन्ट्रोलड एरियाज़ रस्ट्रिकशन आफ अनरेगुलेटिड डिवेलपमैन्ट (हरियाणा अमेन्डमैन्ट) ऐक्ट, 2018, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 25 जून, 2018 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (ख) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 19
पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2018 पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित होः-
संक्षिप्त नाम । 1. यह अधिनियम पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2018, कहा जा सकता है।
2. पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 2 में,-
1963 का पंजाब अधिनियम 41 की धारा 2 का संषोधन। (i) खण्ड 13 में, अन्त में, विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, '';'' चिह्न प्रतिस्थापित किया
जाएगा ;
(ii) खण्ड 13 के बाद, निम्नलिखित खण्ड़ जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
'(14) "लोकेशन प्रीमियम" से अभिप्राय है, विहित फीस तथा प्रभारों से अधिक कोई राशि जिसका आवेदक धारा 8 की उप-धारा (1क) के अधीन प्राप्त किए गए आवेदनों के लिए अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए सरकार को भुगतान करने का इच्छुक है, जो सरकार द्वारा, इस संबंध में, समय-समय पर, जारी की गई पॉलिसी के अनुसरण में बोली/ नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अवधारित की जाए;'।'
3. मूल अधिनियम की धारा 8 में,-
(i) उप-धारा (1) में,-
1963 का पंजाब अधिनियम 41 की धारा 8 का संशोधन। (क) अन्त में, विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा ;
(ख) अन्त में, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु जहां सरकार की राय में, विभिन्न अधिसूचित विकास योजनाओं के ऐसे भूमि उपयोग क्षेत्रों में अवस्थित ऐसे उपयोगों हेतु, जिनके लिए अनुज्ञाओं की सीमित संख्या विहित की गई है, सरकार द्वारा, इस सम्बन्ध में, समय-समय पर, बनाई गई पॉलिसी के अनुसरण में बोलियां आमन्त्रित करने या नीलामी प्रक्रिया अपनाने के बाद अनुज्ञाएं जारी की जानी हैं, तो ऐसा आवेदन केवल तभी मान्य समझा जाएगा यदि यह निदेशक के नोटिस के जवाब में दायर किया जाता है तथा विहित निबन्धनों तथा शर्तों को पूरा करता है।''।206 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 4, 2018 (ASAR. 13, 1940 SAKA) (ii) उप-धारा (1) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा रखी जाएगी, अर्थात् :-
''(1क) अनुज्ञाओं की नीलामी के लिए पॉलिसी के लिए निदेशक द्वारा जारी किए गए नोटिस के जवाब में प्राप्त किए गए सभी ऐसे आवेदन, जिनके लिए अनुज्ञाओं की सीमित संख्या विहित की गई है, जो निदेशक द्वारा सही समझे गए हैं, विहित अपेक्षाओं के अतिरिक्त, लोकेशन प्रीमियम का भी भुगतान करने के अधीन होंगे, जो निदेशक द्वारा यथा सूचित ऐसी रीति में तथा ऐसी समय सीमा में बोली/ नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अवधारित किया जाए। लोकेशन प्रीमियम के लिए प्राप्त की गई राशि, हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 में यथा उपबन्धित बाहरी विकास संकर्मों के प्रबन्ध, रख-रखाव तथा संवर्धन के लिए उपयोग की जाएगी और आवेदक से बाहरी विकास संकर्मों के लिए प्राप्त किए गए विकास प्रभारों की विहित दर के अतिरिक्त वसूल की जाएगी, यदि लागू हो।''।
(iii) उप-धारा (4) में,-
(क) द्वितीय परन्तुक में, अन्त में, विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न
प्रतिस्थापित किया जाएगा ; और
(ख) द्वितीय परन्तुक के बाद, अन्त में, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :
''परन्तु यह और कि तीन मास की ऐसी समय सीमा उन मामलों में लागू नहीं होगी, जिनमें समय-समय पर जारी की गई अधिसूचनाओं में अनुज्ञाओं की सीमित संख्या विनिर्दिष्ट की गई है।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 8 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात् :-
''8क. ऑनलाईन प्राप्ति तथा स्वीकृति.- (1) इस अधिनियम के अधीन किए गए सभी कृत्य 1963 का पंजाब अधिनियम 41 में धारा 8क का रखा जाना।
इलैक्ट्रानिक रूप में तथा इन्टरनेट के द्वारा भी किए जा सकते हैं।
(2) उप-धारा (1) की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कृत्यों में निम्नलिखित कोई या सभी शामिल हो सकते हैं :-
(क) आवेदनों तथा भुगतानों की रसीद या पावती ;
(ख) स्वीकृतियों, आदेशों या निर्देशों को जारी करना ;
(ग) अनुज्ञा, इसका विस्तार प्रदान करने के लिए पत्राचार की संवीक्षा, जांच करना;
(घ) प्लानों की स्वीकृति, अधिभोग प्रमाणपत्र इत्यादि प्रदान करना ;
(ङ) दस्तावेज दायर करना ;
(च) वसूलियों इत्यादि के लिए नोटिस जारी करना ;
(छ) रजिस्टरों तथा अभिलेखों का रखरखाव ;
(ज) कोई अन्य कृत्य जो निदेशक लोक हित में उचित समझे।
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कुलदीप जैन, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
56376—L.R.—H.G.P., Chd.