Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 113–2018/Ext.] चण्डीगढ़, सोमवार, दिनांक 9 जुलाई, 2018
(आषाढ़ 18, 1940 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता 207—208 अधिकार (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2017 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 21)।
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं।
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(lxi)207 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 9, 2018 (ASAR. 18, 1940 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 9 जुलाई, 2018
संख्या लैज. 24/2018.- राइट टू फेयर कम्पनसेशन एण्ड ट्रैन्सपैरन्सि इन लैन्ड ऐकविजिशन, रीअबिलिटेशॅन एण्ड रीसैटलमैन्ट (हरियाणा अमेन्डमैन्ट) ऐक्ट, 2017 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 2 जुलाई, 2018 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 21
भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता अधिकार (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2017 भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता अधिकार अधिनियम, 2013, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में
यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्षिता अधिकार (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2017, कहा जा सकता है। (2) यह ऐसी तिथि से लागू होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
(3) उप-धारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम की धारा 2 तथा 5 जनवरी, 2014 के प्रथम दिन से लागू हुई समझी जाएंगी।
2. मूल अधिनियम की धारा 24 में,-
(i) उप-धारा (1) के बाद, निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात्ः-
2013 का केन्द्रीय अधिनियम 30 की धारा 24 का संषोधन । ''स्पष्टीकरण.- इस उप-धारा के प्रयोजन हेतु, किसी भूमि के अर्जन की कार्यवाही, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 1) के अधीन प्रारम्भ की गई समझी जाएगी, जहां उक्त अधिनियम की धारा 4 के अधीन अधिसूचना, उक्त धारा की उप-धारा (1) के अधीन किसी भी रूप में प्रकाषित की गई है ।'';
(ii) उप-धारा (2) में,-
(क) ''भौतिक ''शब्द का लोप कर दिया जाएगा; (ख) ''भूमि का कब्जा नहीं लिया गया है'' शब्दों के बाद आने वाला ''या'' शब्द के स्थान पर, ''और'' शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा;
(ग) परन्तुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा; तथा
(घ) विद्यमान परन्तुक के बाद, अन्त में, निम्नलिखित परन्तुक जोड़े जाएंगे, अर्थात्ः-
''परन्तु यह और कि इस उप-धारा में निर्दिष्ट अवधि की संगणना करते हुए, ऐसी अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा, जिसके दौरान भूमि के अर्जन के लिए कार्यवाहियां किसी न्यायालय के आदेष द्वारा जारी किसी रोक या व्यादेष के कारण रोकी गई थी :
परन्तु यह और कि भूमि अर्जन अधिकारी या राजस्व अधिकारी द्वारा अभिलिखित कब्जा लेेने अथवा देने संबंधी रपट रोजनामचा में की गई प्रविष्टि को सभी उद्देष्यों तथा प्रयोजनों के लिए कब्जा लिया गया समझा जाएगा ।''।208 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 9, 2018 (ASAR. 18, 1940 SAKA) 3. मूल अधिनियम की धारा 46 के स्पष्टीकरण के खण्ड (ख) में, ''से भिन्न कोई व्यक्ति आता है'' शब्दों के स्थान पर, ''आते हैं'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
2013 का केन्द्रीय अधिनियम 30 की धारा 46 का संषोधन।
4. मूल अधिनियम की धारा 87 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2013 का केन्द्रीय अधिनियम 30 की धारा 87 का संशोधन।
''87क. सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपराध.-जहां इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा कोई अपराध किया गया है, जो ऐसे अभिकथित अपराध को करने के समय पर केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, में नियोजित है अथवा था, तो कोई भी न्यायालय तब तक ऐसे अपराध का संज्ञान नहीं लेगा, जब तक दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम 2) की धारा 197 में अधिकथित प्रक्रिया अपनाई नहीं गई है।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 101 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2013 का केन्द्रीय अधिनियम 30 में धारा 101 क का रखा जाना ।
''101क.-भूमि की अधिसूचना रद्द करने की शक्ति.- जब कोई सार्वजनिक प्रयोजन, जिसके लिए भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 1) के अधीन भूमि अर्जित की गई है, अलाभप्रद या अनावष्यक हो गया है, तो राज्य सरकार, ऐसे अर्जन के कारण भू-स्वामी द्वारा उठाई गई हानियों, यदि कोई हों, के कारण प्रतिकर के भुगतान सहित ऐसे निबंधनों, जो राज्य सरकार द्वारा सुविचारित समीचीन होंं, पर ऐसी भूमि की अधिसूचना को रद्द करने हेतु स्वतंत्र होगीः
परन्तु जहां अर्जित भूमि के किसी भाग का उपयोग कर लिया गया है या कोई बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं, भू-स्वामी को राज्य सरकार द्वारा यथा निर्धारित हानियों, यदि कोई हाें, के भुगतान सहित वैकल्पिक भूमि उपलब्ध करवाते हुए क्षतिपूरित किया जा सकता है ।''।
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कुलदीप जैन, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
56385—L.R.—H.G.P., Chd.