Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY Published by Authority
© Govt. of Haryana
No. 211–2018/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 19 दिसम्बर, 2018
(28 अग्रहायण, 1940 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
1. हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2018
315-323 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25)।
2. भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2018
325-327 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 26)।
329 3. हरियाणा नगरपालिका नागरिक भागीदारी (संषोधन) अधिनियम, 2018 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 27)।
331-335 4. हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संषोधन) अधिनियम, 2018 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 28)।
337-338 5. पंजाब भूमि सुधार स्कीम (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2018 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 30)।
339 6. हरियाणा विष्वकर्मा कौषल विष्वविद्यालय (संषोधन) अधिनियम, 2018 (2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 32)।
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं।
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(cxii)HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) 315 भाग - I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग,
अधिसूचना
दिनांक 19 दिसम्बर, 2018
संख्या लैज. 30/2018.- दि हरियाणा गुडज़ एण्ड सर्विसज़ टैक्स (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2018 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 10 दिसम्बर, 2018 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25
हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2018
हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017,
को आगे संशोधित करने के लिए,
अधिनियम
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2018, कहा जा सकता है ।
(2) अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम के उपबन्ध ऐसी तिथि को लागू होंगे, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे :
परंतु इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तिथियां नियत की जा सकती हैं और किसी ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के लागू होने के प्रतिनिर्देश है ।
2. हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 2 में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 2 का संशोधन। (क) खण्ड (4) में, ''और अपील अधिकरण शामिल नहीं है'' शब्दों के स्थान पर, '',अपील अधिकरण और धारा 171 की उप-धारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी शामिल नहीं हैं'' चिह्न, शब्द, अंक तथा कोष्ठक रखे जाएंगे;
(ख) खण्ड (16) में, ''केंद्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड'' शब्दों के स्थान पर,
''केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड'', शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ग) खण्ड (17) के, उप-खण्ड (ज) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-खण्ड प्रतिस्थापित किया
जाएगा, अर्थात् :-
''(ज) घुड़-दौड़ क्लब के क्रियाकलाप में शामिल है, योगमान या बुक मेकर की अनुज्ञप्ति
या ऐसे क्लब में किसी अनुज्ञप्त बुक मेकर के रूप में क्रियाकलाप;'';
(घ) खण्ड (18) का लोप कर दिया जाएगा;
(ङ) खण्ड (35) में, ''खण्ड (ग)'' शब्द, कोष्ठकों तथा अक्षर के स्थान पर, ''खण्ड (ख)'' शब्द,
कोष्ठक तथा अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(च) खण्ड (69) के उप-खण्ड (च) में, ''अनुच्छेद 371'' शब्द तथा अंकों के बाद, ''और
अनुच्छेद 371ञ'' शब्द, अंक तथा अक्षर जोड़े जाएंगे;
(छ) खण्ड (102) में,-
(i) अन्त में विद्यमान '';'' चिह्न के स्थान पर, ''।'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा;
तथा316 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) (ii) निम्नलिखित व्याख्या जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
''व्याख्या.- संदेह दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि अभिव्यक्ति
''सेवाओं'' में शामिल है, प्रतिभूतियों में संव्यवहार को सुकर या प्रबंधित करना;''।
3. मूल अधिनियम की धारा 7 में,-
(क) उप-धारा (1) में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 7 का संशोधन।
(i) खण्ड (ख) में, ''चाहे वह कारबार के दौरान या उसे अग्रसर करने के लिए हो या नहीं'' शब्दों के पश्चात्, ''और'' शब्द रखा गया जाएगा और प्रथम जुलाई, 2017 से रखा गया समझा जाएगा ;
(ii) खण्ड (ग) में, ''क्रियाकलाप'' शब्द के पश्चात्, ''और'' शब्द का लोप कर दिया
जाएगा और प्रथम जुलाई, 2017 से लोप किया गया समझा जाएगा ;
(iii) खण्ड (घ) का लोप कर दिया जाएगा और प्रथम जुलाई, 2017 से लोप किया गया
समझा जाएगा ;
(ख) उप-धारा (1) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा रखी जाएगी और प्रथम जुलाई, 2017 से रखी गई समझी जाएगी, अर्थात् :-
''(1क) जहां कतिपय क्रियाकलाप या संव्यवहार उप-धारा (1) के उपबन्धों के अनुसार कोई प्रदाय हैं, उन्हें अनुसूची II में यथानिर्दिष्ट या तो मालों का प्रदाय या सेवाओं का प्रदाय माना जाएगा।'';
(ग) उप-धारा (3) में, ''उप-धारा (1) तथा (2)'', शब्दों, चिह्न, कोष्ठकों तथा अंकों के स्थान पर, ''उप-धारा (1), (1क) तथा (2)'' शब्द, चिह्न, कोष्ठक, अंक तथा अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे और प्रथम जुलाई, 2017 से प्रतिस्थापित किए गए समझे जाएंगे। 4. मूल अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (4) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 9 का संशोधन।
''(4) सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकती है, जो किसी अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता से प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों के विनिर्दिष्ट प्रवर्गों के प्रदाय के संबंध में ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के प्राप्तिकर्ता के रूप में प्रतिलोम प्रभार के आधार पर कर का भुगतान करेंगे तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता को इस प्रकार लागू होंगे मानो वह माल या सेवाओं या दोनों के ऐसे प्रदाय के संबंध में कर का भुगतान करने के लिए दायी व्यक्ति है।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 10 में,- I. उप-धारा (1) में-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 10 का संशोधन।
(i) ''उसके द्वारा भुगतानयोग्य कर के स्थान पर, ऐसी दर'' शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, ''धारा 9 की उप-धारा (1) के अधीन उसके द्वारा भुगतानयोग्य कर के स्थान पर, ऐसी दर'' शब्द, अंक, चिह्न और कोष्ठक प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) परन्तुक में,-
(क) ''एक करोड़ रूपए'' शब्दों के स्थान पर, ''एक करोड़ पचास लाख रूपए''
शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(ख) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया
जाएगा;
(iii) परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति, जो खण्ड (क) या खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन कर भुगतान करने का विकल्प लेता है, राज्य में पूर्ववर्ती वित्त वर्ष में आवर्त के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य की सेवाओं (अनुसूची II के पैरा 6 के खण्ड (ख) में निर्दिष्ट से भिन्न) या पांच लाख रूपए, जो भी अधिक हो, का प्रदाय कर सकता है।'';
II. उप-धारा (2) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
''(क) उप-धारा (1) में यथा उपबन्धित के सिवाय, वह सेवाओं के प्रदाय में नहीं
लगा हुआ है;''।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) 317 6. मूल अधिनियम की धारा 12 की उप-धारा (2) के खण्ड (क) में, ''की उप-धारा (1)'' शब्दों, चिह्न, कोष्ठक और अंक का लोप कर दिया जाएगा।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 12 का संशोधन। 7. मूल अधिनियम की धारा 13 की उप-धारा (2) में,-
(क) खण्ड (ख) में, ''की उप-धारा (2)'' शब्दों, चिह्न, कोष्ठकों और अंक का लोप कर दिया
जाएगा; और
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 13 का संशोधन। (ख) खण्ड (ख) में, ''की उप-धारा (2)'' शब्दों, चिह्न, कोष्ठकों और अंक का लोप कर दिया
जाएगा।
8. मूल अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (2) में,-
(क) खण्ड (ख) में, व्याख्या के स्थान पर, निम्नलिखित व्याख्या प्रतिस्थापित की जाएगी,
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 16 का संशोधन। अर्थात्ः- ''व्याख्या.- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति
(i) जहां माल प्रदायकर्ता द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता या ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निर्देश पर किसी अन्य व्यक्ति, चाहे वह अभिकर्ता या अन्यथा के रूप में माल के संचालन से पूर्व या के दौरान, या तो माल पर हक के दस्तावेजों के अन्तरण के माध्यम से या अन्यथा कार्य कर रहा हो, को परिदत्त कर दिया जाता है ;
(ii) जहां सेवाएं प्रदायकर्ता द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निर्देश पर या के मद्दे उपलब्ध करवाई जाती है।'';
(ख) खण्ड (ग) में, ''धारा 41'' शब्द और अंकों के स्थान पर, ''धारा 41 या धारा 43क'' शब्द,
अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
9. मूल अधिनियम की धारा 17 में,-
(क) उप-धारा (3) में, निम्नलिखित व्याख्या जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 17 का संशोधन। ''व्याख्या.- इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए ''छूट-प्राप्त प्रदाय का मूल्य'' अभिव्यक्ति में, अनुसूची III में विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों या संव्यवहारों के मूल्य सम्मिलित नहीं होंगे, सिवाय उनके जो उक्त अनुसूची के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट हैं।'';
(ख) उप-धारा (5) के खण्ड (क) और (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किए
जाएंगे, अर्थात्ः- ''(क) व्यक्तियों के परिवहन के लिए मोटरयान, तेरह व्यक्तियों से अनधिक (चालक सहित) अनुमोदित बैठने की क्षमता रखते हों, सिवाय जब उनका उपयोग निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात् :- (क) ऐसे मोटरयानों के आगे के प्रदाय के लिए ; या (ख) यात्रियों के परिवहन के लिए ; या (ग) ऐसे मोटरयानों को चलाने हेतु प्रशिक्षण देने के लिए ;
(कक) जलयानों और वायुयान सिवाय जब उनका उपयोग-
(i) निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात् :- (क) ऐसे जलयानों या वायुयान के आगे के प्रदाय के लिए ; या (ख) यात्रियों के परिवहन के लिए ; या (ग) ऐसे जलयानों पर नौपरिवहन का प्रशिक्षण देने के लिए ; या (घ) ऐसे वायुयान की उड़ान पर प्रशिक्षण देने के लिए ;
(ii) माल के परिवहन के लिए;
(कख) साधारण बीमा की सेवाओं, सर्विसिंग, मरम्मत और अनुरक्षण, जहां तक उनका संबंध खण्ड (क) या खण्ड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयानों, जलयानों या वायुयान से है :
परन्तु ऐसी सेवाओं के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा-
(i) जहां खण्ड (क) या खण्ड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयानों, जलयानों या
वायुयान का उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है ;
318 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA)(ii) जहां किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो-
(I) ऐसे मोटरयानों, जलयानों या वायुयान के विनिर्माण में लगा हुआ है;
या
(II) उसके द्वारा बीमाकृत ऐसे मोटरयानों, जलयानों या वायुयान के संबंध में साधारण बीमा सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है ;
(ख) माल या सेवाओं या दोनों का निम्नलिखित प्रदाय -
(i) खाद्य और पेय-पदार्थ, बाह्य खानपान, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाओं, प्रसाधन और प्लास्टिक शल्य-चिकित्सा, खण्ड (क) या खण्ड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयानों, जलयानों या वायुयान को पट्टे, किराये या भाड़े पर लेने के सिवाय जब उनका उपयोग उनमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा :
परन्तु ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा जब ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के आवक प्रदाय का उपयोग किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उसी प्रवर्ग के माल या सेवाओं या दोनों के जावक कराधेय प्रदाय के लिए या कराधेय समिश्र या मिश्रित प्रदाय के तत्व के रूप में किया जाता है ;
(ii) किसी क्लब, स्वास्थ्य और फिटनेस केंद्र की सदस्यता ; और
(iii) अवकाश पर कर्मचारियों के लिए विस्तारित यात्रा लाभ जैसे छुट्टी या गृह
यात्रा रियायत :
परन्तु ऐसे माल या सेवाओं या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा, जहां ये किसी नियोक्ता के लिए अपने कर्मचारियों को तत्समय लागू किसी विधि के अधीन उपलब्ध कराना बाध्यकर हो।''। 10. मूल अधिनियम की धारा 20 में, व्याख्या के खण्ड (ग) में, ''प्रविष्टि 84 के अधीन'' शब्दों और अंकों के स्थान पर, ''प्रविष्टि 84 और 92क के अधीन'' शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 20 का संशोधन।
11. मूल अधिनियम की धारा 22 में,-
(क) उप-धारा (1) में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 22 का संशोधन।
(i) परन्तुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा; तथा
(ii) परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु यह और कि जहां ऐसा व्यक्ति, विशेष प्रवर्ग राज्य जिसके संबंध में केन्द्रीय सरकार प्रथम परन्तुक में निर्दिष्ट समग्र आवर्त को बढ़ा दिया है, से माल या सेवाओं या दोनों का कराधेय प्रदाय करता है, तो वह रजिस्ट्रीकृत होने के लिए दायी होगा यदि वित्त वर्ष में उसका समग्र आवर्त ऐसे बढ़े हुए आवर्त की समकक्ष राशि से अधिक होता है।'';
(ख) व्याख्या के खण्ड (iii) में, ''संविधान'' शब्द के बाद, ''जम्मू और कश्मीर राज्य तथा अरूणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखण्ड राज्यों के सिवाय'' शब्द तथा चिह्न जोड़े जाएंगे।
12. मूल अधिनियम की धारा 24 के खण्ड (x) में, ''वाणिज्य प्रचालक'' शब्दों के पश्चात्, ''जिससे धारा 52 के अधीन स्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है'' शब्द और अंक जोड़े जाएंगे। 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 24 का संशोधन।
13. मूल अधिनियम की धारा 25 में,-
(क) उप-धारा (1) में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 25 का संशोधन।
(i) परन्तुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा; तथाHARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) 319 (ii) परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु यह और कि व्यक्ति, जिसके पास किसी विशेष आर्थिक जोन में, विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का केन्द्रीय अधिनियम 28) में यथापरिभाषित कोई यूनिट है या जो विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता है, को ऐसे किसी पृथक् रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करना होगा, जो कि राज्य में विशेष आर्थिक जोन के बाहर अवस्थित उसके कारबार के स्थान से सुभिन्न है।'';
(ख) उप-धारा (2) के परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक प्रतिस्थापित किया जाएगा,
अर्थात् :-
''परन्तु व्यक्ति, जिसके पास राज्य में कारबार के बहु स्थान हैं, को ऐसी शर्तें, जो विहित की जाएं, के अधीन रहते हुए, कारबार के प्रत्येक ऐसे स्थान के लिए पृथक् रजिस्ट्रीकरण स्वीकृत किया जा सकता है।''।
14. मूल अधिनियम की धारा 29 में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 29 का संशोधन। (क) उपांतिक शीर्ष में, ''रद्दकरण'' शब्द के बाद, ''या निलम्बन'' शब्द रखे जाएंगे; (ख) उप-धारा (1) में,-
(i) खंड (ग) में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा; तथा
(ii) खंड (ग) के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु रजिस्ट्री—त व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के संबंध में दायर की गई कार्यवाहियों के लम्बित रहने के दौरान, रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में स्थगित किया जा सकता है ;
(ग) उप-धारा (2) में,-
(i) परन्तुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा; तथा
(ii) विद्यमान परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु यह और कि रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के संबंध में कार्यवाहियों के लम्बित रहने के दौरान, समुचित अधिकारी रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में स्थगित कर सकता है।''।
15. मूल अधिनियम की धारा 34 में,-
(क) उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 34 का संशोधन। ''(1) जहां किन्हीं मालों या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के लिए एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं और उस कर बीजक में कराधेय मूल्य या प्रभारित कर ऐसे प्रदाय के संबंध में कराधेय मूल्य या भुगतानयोग्य कर से अधिक पाया जाता है, या जहां प्राप्तकर्ता द्वारा प्रदाय किए गए माल को वापस किया जाता है, या जहां प्रदाय किए गए माल या सेवाओं या दोनों में कमी पाई जाती है, वहां रजिस्ट्री—त व्यक्ति जिसने ऐसे माल या सेवाओं या दोनों का प्रदाय किया है, प्राप्तिकर्ता को ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, अंतर्विष्ट करते हुए किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या अधिक जमा पत्र जारी कर सकता है।'';
(ख) उप-धारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
''(3) जहां किन्हीं मालों या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के लिए एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं और उस कर बीजक में कराधेय मूल्य या प्रभारित कर ऐसे प्रदाय के संबंध में कराधेय मूल्य या भुगतानयोग्य कर से कम पाया जाता है, वहां रजिस्ट्री—त व्यक्ति जिसने ऐसे माल या सेवाओं या दोनों का प्रदाय किया है, प्राप्तिकर्ता को ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, अंतर्विष्ट करते हुए किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या अधिक नामे पत्र जारी करेगा।''।
16. मूल अधिनियम की धारा 35 की उप-धारा (5) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; तथा
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 35 का संशोधन।320 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु इस उप-धारा की कोई भी बात, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण को लागू नहीं होगी, जिसकी लेखा बहियां, भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक या तत्समय लागू किसी विधि के अधीन स्थानीय प्राधिकरणों के लेखों की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी लेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा किए जाने के अधीन हैं।''।
17. मूल अधिनियम की धारा 39 में,-
(क) उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 39 का संशोधन।
''(1) किसी इनपुट सेवा वितरक या किसी अनिवासी कराधेय व्यक्ति या धारा 10 या धारा 51 या धारा 52 के उपबधों के अधीन कर भुगतान करने वाले किसी व्यक्ति से अन्यथा प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए इलेक्ट्रोनिक रूप में माल या सेवाओं या दोनों के आवक और जावक प्रदायों, प्राप्त इनपुट कर प्रत्यय, भुगतानयोग्य कर, भुगतान किया गया कर ऐसे प्ररूप, रीति तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, में विवरणी देगाः
परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्री—त व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकती है, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षा के उपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अधीन रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे।'';
(ख) उप-धारा (7) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा;
तथा
(ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्री—त व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकती है, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षा के उपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अधीन रहते हुए, ऐसी विवरणी के अनुसार, ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तिथि को या इससे पूर्व सरकार को देय कर या उसके किसी भाग का भुगतान करेंगे।'';
(ग) उप-धारा (9) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
''(9) धारा 37 और 38 के उपबंधों के अध्यधीन, यदि किसी रजिस्ट्री—त व्यक्ति को उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने के पश्चात, कर प्राधिकारियों द्वारा संवीक्षा, संपरीक्षा, निरीक्षण या प्रवर्तन क्रियाकलाप के परिणामस्वरूप से अन्यथा, उसमें किसी लोप या अशुद्ध विशिष्टियों का पता चलता है, तो वह इस अधिनियम के अधीन ब्याज के भुगतान के अध्यधीन, ऐसे रूप तथा रीति, जो विहित की जाएं, में ऐसे लोप या अशुद्ध विशिष्टियों का सुधार करेगाः
परंतु किसी लोप या अशुद्ध विशिष्टियों का ऐसा सुधार वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् सितंबर मास के लिए या आगामी दूसरी तिमाही के लिए विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि के या सुसंगत वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की वास्तविक तिथि, जो भी पूर्वतर हो, के पश्चात् अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।''।
18. मूल अधिनियम की धारा 43 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 43क का रखा जाना।
''43क. विवरणी प्रस्तुत करने तथा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया.- (1) धारा 16 की उप-धारा (2), धारा 37 या 38 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्री—त व्यक्ति, धारा 39 की उप-धारा (1) के अधीन प्रस्तुत विवरणियों में प्रदायकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रदायों के ब्यौरों का सत्यापन, विधिमान्यकरण, उपांतरण करेगा या उन्हें हटाएगा। (2) धारा 41, धारा 42 या धारा 43 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्य्ाय का फायदा लेने की प्रक्रिया और उसका सत्यापन ऐसा होगा, जो विहित किया जाए।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) 321 (3) प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के प्रयोजनों के लिए, सामान्य पोर्टल पर प्रदायकर्ता द्वारा जावक प्रदायों के ब्यौरे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जो विहित की जाए।
(4) उपधारा (3) के अधीन प्रस्तुत न किए गए जावक प्रदायों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में इनपुट कर प्रत्यय की ऐसी अधिकतम राशि सम्मिलित हो सकती है, जिसका इस प्रकार फायदा लिया जा सकता है, जो उक्त उप-धारा के अधीन प्रदायकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत ब्यौरों के आधार पर, उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
(5) ऐसे जावक प्रदायों, जिनके लिए प्रदायकर्ता द्वारा उप-धारा (3) के अधीन ब्यौरे प्रस्तुत किए गए हैं, में विनिर्दिष्ट कर की राशि को अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उसके द्वारा भुगतानयोग्य कर के रूप में माना जाएगा।
(6) प्रदाय के प्रदायकर्ता और प्राप्तिकर्ता, जावक प्रदायों जिनके लिए उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के अधीन ब्यौरे प्रस्तुत किए गए हैं किन्तु जिसकी विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है, के सम्बन्ध में, संयुक्तः और पृथकतः कर के भुगतान या प्राप्त इनपुट कर प्रत्यय के भुगतान, जैसी भी स्थिति हो, के लिए दायी होंगे।
(7) उपधारा (6) के प्रयोजनों के लिए, वसूली ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में की जाएगी और ऐसी प्रक्रिया में गलती से प्राप्त की गई एक हजार रुपए से अनधिक कर या इनपुट कर प्रत्यय की राशि की वसूली न करने के लिए उपबंध किया जा सकता है।
(8) ऐसे जावक प्रदायों, जिनके ब्यौरे किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उप-धारा (3) के अधीन निम्नलिखित अवधि में प्रस्तुत किए जा सकते हैं, के संबंध में प्रक्रिया, सुरक्षा उपाय और कर की राशि की अवसीमा,-
(i) रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने के छह मास के भीतर ;
(ii) जिसने कर के भुगतान में व्यतिक्रम किया है और जहां ऐसा व्यतिक्रम, ऐसी व्यतिक्रम की राशि के भुगतान की नियत तिथि से दो मास से अधिक की अवधि के लिए जारी रहता है,
ऐसी होगी, जो विहित की जाए।''।
19. मूल अधिनियम की धारा 48 की उप-धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 48 का संशोधन। ''(2) कोई रजिस्ट्री—त व्यक्ति किसी अनुमोदित माल और सेवा कर व्यवसायी का,े धारा 37 के अधीन जावक प्रदायों के ब्यौरे, धारा 38 के अधीन आवक प्रदायों के ब्यौंरे और धारा 39 या धारा 44 या धारा 45 के अधीन विवरणी को और ऐसे अन्य कृत्यों का पालन करने के लिए ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में प्रस्तुत करने के लिए प्राधि—त कर सकता है।''।
20. मूल अधिनियम की धारा 49 में,-
(क) उप-धारा (2) में, ''धारा 41'' शब्द तथा अंकों के स्थान पर, ''धारा 41 या धारा 43क''
शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 49 का संशोधन। (ख) उप-धारा (5) के खण्ड (ग) में,-
(i) '';'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; तथा (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात् :
''परन्तु राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के भुगतान के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं है;''।
21. मूल अधिनियम की धारा 49 के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 में धारा 49क तथा 49ख का रखा जाना। ''49क. कतिपय शर्तों के अध्यधीन इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.- धारा 49 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्य्ाय का उपयोग, एकीकृत कर या राज्य कर, जैसी भी स्थिति हो, का भुगतान केवल तब किया जाएगा, जब एकीकृत कर के मद्दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे भुगतान के लिए पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है।322 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) ''49ख. इनपुट कर प्रत्य्ाय के उपयोग का आदेश.- इस अध्याय में दी गई किसी बात के होते हुए भी और धारा 49 की उप-धारा (5) के खण्ड (घ) और खण्ड (ङ) के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर, जैसी भी स्थिति हो, के मद्दे किसी ऐसे कर के भुगतान के लिए इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग के क्रम और रीति विहित कर सकती है।''।
22. मूल अधिनियम की धारा 52 की उप-धारा (9) में, ''धारा 37'' शब्द तथा अंकों के स्थान पर, ''धारा 37 या धारा 39'' शब्द तथा अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 52 का संशोधन ।
23. मूल अधिनियम की धारा 54 में,-
(क) उप-धारा (8) में, खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 54 का संशोधन।
''(क) मालों या सेवाओं या दोनों के निर्यात या ऐसे निर्यातों को करने में प्रयुक्त इनपुट
या इनपुट सेवाओं पर भुगतान किए गए कर का प्रतिदाय;'';
(ख) व्याख्या के खण्ड (2) में,-
(i) उप-खण्ड (ग) की मद (i) में, ''विदेशी मुद्रा'' शब्दों के पश्चात्, ''या भारतीय रुपए
में, जहां कहीं भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमत किया जाए'' शब्द रखे जाएंगे;
(ii) उप-खण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा,
अर्थात् :-
''(ङ) उप-धारा (3) के प्रथम परन्तुक के खण्ड (ii) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय का दावा उत्पन्न होता है, धारा 39 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि;''।
24. मूल अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (4) के बाद, निम्नलिखित व्याख्या जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, व्यक्ति शब्द में शामिल होंगे, ''सुभिन्न व्यक्ति'', जो 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 79 का संशोधन।
धारा 25 की उप-धारा (4) या उप-धारा (5), जैसी भी स्थिति हो, में निर्दिष्ट है।''। 25. मूल अधिनियम की धारा 107 की उप-धारा (6) के खण्ड (ख) में, ''उक्त आदेश'' शब्दों से पहले ''अधिकतम पच्चीस करोड़ रूपए के अध्यधीन'' शब्द रखे जाएंगे।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 107 का संशोधन।
26. मूल अधिनियम की धारा 112 की उप-धारा (8) के खण्ड (ख) में, ''उक्त आदेश'' शब्दों से पहले ''अधिकतम पचास करोड़ रूपए के अध्यधीन'' शब्द रखे जाएंगे।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 112 का संशोधन।
27. मूल अधिनियम की धारा 129 की उप-धारा (6) में, दो बार आने वाले ''सात दिन'' शब्दों के स्थान पर, क्रमशः ''चौदह दिन'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 129 का संशोधन।
28. मूल अधिनियम की धारा 143 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) के परन्तुक में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; तथा 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 143 का संशोधन।
(ii) परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
''परन्तु यह और कि पर्याप्त कारण दर्शाने पर, एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि को, आयुक्त द्वारा क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष से अनधिक की और अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है।''।
29. मूल अधिनियम की अनुसूची I में, पैरा 4 में, ''कराधेय'' शब्द का लोप कर दिया जाएगा। 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की अनुसूची I का संशोधन।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 19, 2018 (AGHN. 28, 1940 SAKA) 323 30. मूल अधिनियम की अनुसूची II में, शीर्ष में, ''क्रियाकलापों'' शब्द के बाद ''या संव्यवहारों'' शब्द रखे जाएंगे और प्रथम जुलाई, 2017 से रखे गए समझे जाएंगे।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की अनुसूची II का संशोधन। 31. मूल अधिनियम की अनुसूची III में,-
(i) पैरा 6 के बाद, निम्नलिखित पैरे रखे जाएंगे, अर्थात् :-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की अनुसूची III का संशोधन। ''7. भारत के बाहर किसी स्थान से, भारत से बाहर किसी अन्य स्थान पर, ऐसे माल का भारत में प्रवेश के बिना माल का प्रदाय।
8.(क) घरेलू उपभोग के लिए निकासी से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागारित माल
का प्रदाय।
(ख) प्रेषिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को, माल का भारत से बाहर अवस्थित मूल पत्तन से प्रेषण किए जाने के पश्चात् किन्तु घरेलू उपभाग के लिए निकासी से पूर्व, माल के मालिकाना हक के दस्तावेज के पृष्ठांकन द्वारा माल का प्रदाय।''
(ii) व्याख्या को व्याख्या 1 के रूप में सांख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार सांख्यांकित
व्याख्या 1 के पश्चात्, निम्नलिखित व्याख्या जोड़ी जाएगी, अर्थात् :-
''व्याख्या 2.- पैरा 8 के प्रयोजनों के लिए, ''भांडागारित माल'' अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा, जो इसे सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का केन्द्रीय अधिनियम 52) में दिया गया है।''।
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मीनाक्षी आई० मेहता, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
8482—L.R.—H.G.P., Pkl.