हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 6 फरवरी, 2019
संख्या लैज. 39/2018.- दि हरियाणा स्टेट कमिशन फार शेडयूल्ड कास्टस ऐक्ट, 2018 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 30 जनवरी, 2019 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2018 का हरियाणा अधिनियम संख्या 34 हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018 हरियाणा राज्य में अनुसूचित जाति आयोग के गठन के लिए तथा उनसे सम्बन्धित या उनसे आनुषंगिक मामलोें के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम, 2018, कहा जा सकता है। (2) यह ऐसी तिथि को लागू होगा, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) 'अध्यक्ष'' से अभिप्राय है, आयोग का अध्यक्ष; (ख) ''आयोग'' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन गठित हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग; (ग) ''सरकार'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार; (घ) ''सदस्य'' से अभिप्राय है, आायोग का सदस्य तथा इसमें षामिल हैं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा
सदस्य-सचिव;
(ड) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाये गए नियमों द्वारा विहित; (च) ''अनुसूचित जाति'' से अभिप्राय है, भारत के सविधान के अनुच्छेद 341 के अधीन हरियाणा राज्य के सम्बंध में अनुसूचित जातियों के रूप में विनिर्दिष्ट ऐसी जातियां, वंष या जनजातियां या ऐसी जातियाें, वंषों या जनजातियाें में उनके अंश या समूह;
(छ) ''उपाध्यक्ष'' से अभिप्राय है, आयोग का उपाध्यक्ष।
आयोग का गठन। 3. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग के रूप में ज्ञात निकाय का गठन इस अधिनियम के अधीन इसको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए और समनुदेषित कृृत्यों को करने के लिए करेगी । (2) आयोग सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किये जाने वाले निम्नलिखित सदस्यों से गठित होगा, अर्थात् :-
(क) अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष जो सामाजिक जीवन में व्यापक अनुभव रखने वाला किन्हीं अनुसूचित जातियों से सम्बंधित प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा और जिसने सरकारी गतिविधियों में काम किया हो, सहयोग दिया हो या अनुसूचित जातियों से सम्बंधित सरकार का कोई सेवानिवृृत्त अधिकारी हो। उपाध्यक्ष सदस्यों में से पदाभिहित किया जाएगा;
(ख) सदस्य-सचिव, जो सरकार का अधिकारी है या रहा है, जो विषेष सचिव की
पदवी से नीचे का न हो;
(ग) योग्यता, सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जिन्होंने अनुसूचित जातियों के कल्याण और उत्थान के लिए कार्य किया है तथा सेवा की है, में से अनुसूचित जातियों से सम्बंधित चार से अनधिक सदस्य और उनमें से कम से कम एक महिला होगी।64 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 6, 2019 (MAGH. 17, 1940 SAKA) सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन तथा षर्तें।
4. (1) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्य अपना पद ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगेः परंतु जहां अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सदस्य तीन वर्ष की उपरोक्त अवधि की समाप्ति से पूर्व पैंसठ वर्ष की आयु का हो जाता है, तो वह दिन, जिसको वह ऐसी आयु का हो जाता है, से अपना पद रिक्त करेगा; (2) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य, किसी भी समय, लिखित में तथा सरकार को सम्बोधित करते हुए पद से त्यागपत्र दे सकता है। (3) सरकार किसी सदस्य को हटा सकती है, यदि वह-
(क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है; या (ख) ऐसे अपराध, जो सरकार की राय में नैतिक अधमता वाला हो, के लिए सिद्धदोष
तथा कारावास से दण्डित हो जाता है; या
(ग) विकृृत चित्त हो जाता है तथा सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया जाता
है; या
(घ) कार्य करने से इन्कार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है; या (ङ) आयोग से अनुपस्थित रहने की छुट््टी प्राप्त किये बिना, आयोग की तीन लगातार
बैठकों से अनुपस्थित रहता है; या
(च) सरकार की राय में, उसने सदस्य के पद का इस प्रकार दुरूपयोग किया है कि ऐसे व्यक्ति का पद पर बना रहना अनुसूचित जातियाें के हितों या लोक हित के लिए हानिकर हैः
परन्तु इस खण्ड के अधीन किसी ऐसे व्यक्ति को तब तक नहीं हटाया
जायेगा जब तक उस व्यक्ति को मामले में सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो । (4) उप-धारा (2) के अधीन या अन्यथा से हुई कोई रिक्ति नये नामनिर्देषन द्वारा भरी जायेगी और इस प्रकार नामनिर्दिष्ट व्यक्ति अपने पूर्वाधिकारी की षेष अवधि के लिए पद धारण करेगा (5) अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सदस्यों को भुगतानयोग्य वेतन तथा भत्ते, तथा उनकी सेवा के अन्य निबंधन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं ।
आयोग के अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी।
5. (1) सरकार, आयोग को आयोग के कृृत्यों के दक्ष अनुपालन के लिए, ऐसे अधिकारी तथा कर्मचारी, जो आवष्यक हों, उपलब्ध करवायेगी । (2) आयोग के प्रयोजन के लिए नियुक्त अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों को भुगतानयोग्य वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं। 6. अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को भुगतानयोग्य वेतन, भत्ते और पेंषन सहित सदस्यों को भुगतानयोग्य वेतन और भत्ते तथा प्रषासनिक खर्चों का भुगतान धारा 11 की उप-धारा (1) में निर्दिष्ट अनुदानों में से किया जाएगा।
अनुदानों में से भुगतान किए जाने वाले वेतन और भत्ते।
7. आयोग का कोई भी कार्य या कार्यवाहियां केवल आयोग में किसी रिक्ति के होने या के गठन में किसी त्रुटि के आधार पर अविधिमान्य नहीं होंगी।
रिक्ति के कारण कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना।
आयोग द्वारा विनियमित की जाने वाली प्रक्रिया।
8. (1) आयोग जब कभी आवष्यक हो ऐसे समय और स्थान पर बैठक करेगा, जैसा अध्यक्ष ठीक समझे । (2) आयोग अपनी स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करेगा। (3) आयोग के सभी आदेश तथा विनिष्चय सदस्य-सचिव या सदस्य-सचिव द्वारा इस निमित्त सम्यक्् रूप से प्राधिकृृत आयोग के किसी अन्य अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किए जायेेंगे । आयोग के कृत्य तथा षक्तियां।
9. (1) आयोग निम्नलिखित षक्तियों का प्रयोग करेगा तथा निम्नलिखित कृृत्यों का पालन करेगा, अर्थात््ः-
(i) अनुसूचित जातियों के कल्याण तथा संरक्षण के लिए भारत के सविधान में या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के अधीन या सरकार के किसी आदेष के अधीन उपबंधित विभिन्न रक्षोपायों के कार्योेंं का अन्वेषण और जांच करना;
(ii) अनुसूचित जातियों के अधिकारों के वंचन तथा रक्षोपाय के सम्बंध में विनिर्दिष्ट षिकायतों की जांच करना तथा ऐसे मामलों को समुचित प्राधिकरणों के पास उठाना;
65 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 6, 2019 (MAGH. 17, 1940 SAKA)(iii) अनुसूचित जातियों के समाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में षामिल होना तथा सलाह देना और उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना; (iv) अनुसूचित जातियों के संरक्षण, कल्याण तथा समाजिक-आर्थिक विकास के लिए सुरक्षा तथा अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वन के लिए सरकार द्वारा किये जाने वाले उपायों के बारे में सिफारिषें करना और सरकार को प्रतिवर्ष तथा ऐसे अन्य समय पर, जैसा आयोग उचित समझे, रिपोर्ट करना;
(v) अनुसूचित जातियों के संरक्षण, कल्याण, विकास तथा प्रगति के सम्बंध में ऐसे अन्य
कृृत्यों का निर्वहन करना, जो विहित किए जाएं ।
(2) आयोग को उप-धारा (1) के अधीन अपने कृृत्यों को करते समय किसी वाद का और विषिष्टतया निम्नलिखित विषयों के सम्बंध में, विचारण करने के लिए सिविल न्यायालय की सभी षक्तियां हाेंगी, अर्थात््ः-
(i) भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना तथा हाजिर करवाना
तथा षपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ii) किसी दस्तावेज को प्रकट तथा प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना;
(iii) षपथ पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;
(iv) किसी न्यायालय अथवा कार्यालय सेे किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की
मांग करना;
(v) साक्षियों तथा दस्तवेजों के परीक्षण के लिए कमीषन जारी करना; तथा (vi) कोई अन्य मामला, जो विहित किया गया है या किया जा सकता है।
अनुसूचित जातियों का समय-समय पर पुनरीक्षण करना। 10. (1) सरकार, किसी भी समय, और इस अधिनियम के लागू होने से दस वर्ष की समाप्ति पर तथा उसके बाद दस वर्ष की प्रत्येक उत्तरवर्ती अवधि पर, राज्य में अनुसूचित जातियों का पुनरीक्षण कर सकती है तथा करेगी । (2) सरकार उप-धारा (1) के अधीन कार्य करते समय आयोग से परामर्ष करेगी।
सरकार द्वारा अनुदान। 11. (1) सरकार, इस निमित्त विधि द्वारा राज्य विधानमण्डल द्वारा किए गए सम्यक्् विनियोग के बाद, आयोग को, अनुदानों के माध्यम से ऐसी धनराषियों का भुगतान करेगी, जो सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने के लिए ठीक समझे ।
(2) आयोग ऐसी धन-राषियां खर्च कर सकता है, जो यह इस अधिनियम के अधीन कृृत्य करने के लिए ठीक समझे, तथा ऐसी धन-राषियां उप-धारा (1) में निर्दिष्ट अनुदानों में से भुगतानयोग्य खर्च के रूप में समझी जाएंगी ।
लेखे। 12. आयोग उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा तथा लेखों के वार्षिक विवरण ऐसे प्ररूप और रीति, जो विहित की जाए, में तैयार करेगा ।
वार्षिक रिपोर्ट। 13. (1) आयोग पूर्व वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी गतिविधियों के सम्पूर्ण लेख्ेा देते हुए अपनी वार्षिक रिपोर्ट, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, तैयार करेगा और उसकी एक प्रति सरकार को भेजेगा । (2) सरकार राज्य विधानमंडल के पटल पर रखी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट रखवाएगी ।
14. आयोग के सदस्य और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझे जाएंगे।
आयोग के सदस्यों तथा कर्मचारियों का लोक सेवक होना।
अधिकारिता का वर्जन। 15. किसी भी सिविल न्यायालय को इस अधिनियम के उपबंधों से होने वाले या सम्बन्धित किसी मामले के सम्बंध में कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी ।
नियम बनाने की षक्ति। 16. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है । (2) विषिष्टतया और पूर्वगामी षक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबन्ध कर सकते हैं, अर्थात्ः-
(क) सदस्यों को भुगतानयोग्य वेतन और भत्ते, तथा की नियुक्ति के अन्य निबन्धन और
शर्तें ;
66 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 6, 2019 (MAGH. 17, 1940 SAKA)(ख) प्ररूप जिसमें धारा 12 के अधीन लेखों के वार्षिक विवरण तैयार किए जाएंगे;
(ग) प्ररूप, जिसमें और समय जिस पर, धारा 13 के अधीन वार्षिक रिपोर्ट तैयार की
जाएगी;
(घ) कोई अन्य मामला, जो विहित किया जाना अपेक्षित है या किया जा सकता है । (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखा जाएगा।
कठिनाइयां दूर करने की शक्ति।
17. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हाें तथा जो इसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों। (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके किए जाने के बाद, यथाषीध्र्र, राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखा जाएगा।
सदभावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।
18. आयोग के किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध किसी बात, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन सदभावपूर्वक की गई है या किये जाने के लिए आषयित है, के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं हो सकेंगी।
.........
मीनाक्षी आई० मेहता, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
8550—L.R.—H.G.P., Pkl.