Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 151–2019/Ext.] चण्डीगढ़, वीरवार, दिनांक 05 सितम्बर, 2019
(14 भाद्र, 1941 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
1. हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 241-242 (2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 7)
2. पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण (हरियाणा संशोधन) अधिनियम, 2018 243-244 (2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 8)
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
1. अधिसूचना संख्या सा०का०नि० 40/संवि०/अनु० 309/2019, दिनांक 05 सितम्बर, 2019 - 535-536 हरियाणा राजस्व विभाग जिला अधीनस्थ (ग्रुप ग) सेवा (संशोधन) नियम, 2019.
2. अधिसूचना संख्या सा०का०नि० 41/संवि०/अनु० 309/2019, दिनांक 05 सितम्बर, 2019 - 537-538 हरियाणा राजस्व विभाग मण्डलीय अधीनस्थ (ग्रुप ग) सेवा (संशोधन) नियम, 2019.
3. अधिसूचना संख्या सा०का०नि० 42/संवि०/अनु० 309/2019, दिनांक 05 सितम्बर, 2019 - 539-540 हरियाणा उद्योग तथा वाणिज्य विभाग मुख्यालय संवर्ग (ग्रुप ग) सेवा संशोधन नियम, 2019.
4. अधिसूचना संख्या सा०का०नि० 43/संवि०/अनु० 309/2019, दिनांक 05 सितम्बर, 2019 - 541-542 हरियाणा उद्योग तथा वाणिज्य विभाग क्षेत्रीय संवर्ग (ग्रुप ग) सेवा संशोधन नियम, 2019.
(प्राधिकृत अंग्रेजी अनुवाद सहित)
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(lxxxiv)241 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), SEPT. 5, 2019 (BHDR. 14, 1941 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 5 सितम्बर, 2019
संख्या लैज. 7/2019.- दि हरियाणा डिवेलपमेन्ट ऐन्ड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज (सेकन्ड अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2018 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 29 अगस्त, 2019, की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 7
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संषोधन) अधिनियम, 2018 हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम। 1. यह अधिनियम हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संषोधन) अधिनियम, 2018, कहा जा सकता है।
2. हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम,1975 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 3 में,-
1975 का हरियाणा अधिनियम 8 की धारा 3 का संषोधन। (i) उपधारा (3) के खण्ड (क) के उपखण्ड (iv) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा तथा 3 अपैल, 2018 से प्रतिस्थापित किया गया समझा जायेगा, अर्थात् :-
"(iv) अनुज्ञप्ति प्रदान करने से पांच वर्ष की अवधि के भीतर या निदेषक द्वारा यथा अनुमत विस्तारित अवधि में अपने स्वयं के खर्च पर या किसी अन्य संस्था या व्यक्ति द्वारा उनके खर्च पर इस प्रयोजन के लिए अलग रखी हुई भूमि पर स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केन्द्र और अन्य सामुदायिक निर्माण सन्निर्मित करना या करवाना तथा इसमें असफल रहने पर, भूमि ऐसी विनिर्दिष्ट अवधि के बाद, निःषुल्क, सरकार में निहित होगी, ऐसे मामलों में सरकार, कथित प्रयोजनों के लिए, ऐसे निबन्धन तथा षर्त, जो यह उचित समझे, पर ऐसी भूमि किसी व्यक्ति या संस्था जिसके अन्तर्गत स्थानीय निकाय भी है, को अन्तरित करने के लिए स्वतन्त्र होगीःश्
परन्तु यदि अनुज्ञप्तिधारी, क्रेता या उसके माध्यम से दावा करने वाला व्यक्ति विहित अवधि में निर्माण करने और प्रयोजन जिसके लिए ये उपयोग की जानी थी, में असफल रहता है और विस्तार चाहता है, निदेषक यदि ऐसी जांच, जो वह आवष्यक समझे, करने के बाद, संतुष्ट हो जाता है, तो ऐसी विस्तारित फीस, जो प्रति वर्ष प्रति एकड़ पर विहित की जाए, की वसूली के बाद, एक बार में पांच वर्ष की अधिकतम अवधि के लिए निर्माण अवधि बढा सकता है :
परन्तु यह और कि कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और सरकार
में भूमि निहित करने से पूर्व सुनवाई का अवसर दिया जाएगा :
परन्तु यह और कि आवेदक को इस खण्ड के उपबन्धों से छूट दी जाएगी
जहां निदेषक द्वारा खण्ड (iv-ख) की अनुपालना चाही गई है। व्याख्या.- 3 अप्रैल, 2013 से पूर्व किसी तिथि को जारी सभी अनुज्ञप्तियों में,
3 अप्रैल, 2018 से पूर्व निर्माण की किसी विस्तारित अवधि के लिए कोई विस्तारण फीस उद्ग्रहणीय नहीं होगी;''; (ii) उप-धारा (4) में, "दो वर्ष"श्षब्दों के स्थान पर, "पांच वर्ष"श्षब्द प्रतिस्थापित किये
जाएंगे।242 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), SEPT. 5, 2019 (BHDR. 14, 1941 SAKA) 3. मूल अधिनियम की धारा 8 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
''8. अनुज्ञप्ति का रद््दकरण.- (1) इस अधिनियम के अधीन प्रदान की गई कोई अनुज्ञप्ति, निदेषक द्वारा रद््द की जाने के लिये दायी होगी, यदि उपनिवेषक अनुज्ञप्ति की किन्हीं षर्तों या अधिनियम या इसके अधीन बनाये गए नियमों के उपबन्धों की उल्लंघना करता हैः 1975 का हरियाणा अधिनियम 8 की धारा 8 का संषोधन।
परन्तु ऐसे रद््दकरण से पूर्व उपनिवेषक को सुनवाई का अवसर दिया जाएगाः परन्तु यह और कि अनज्ञप्ति के ऐसे रद््दकरण के जारी होने पर, ऐसी अनुज्ञप्ति में अन्तर्वलित भूमि तथा निर्माण, जब तक सरकार द्वारा इस बाध्यता को विनिर्दिष्ट रूप से मुक्त नहीं कर दिया जाता, सरकार में निहित हुए समझे जाएंगे।
(2) अनुज्ञप्ति के रद््दकरण पर, निदेषक द्वारा या तो स्वयं या उसके द्वारा परिलक्षित तृृतीय पक्षकार अभिकरण के माध्यम से उपनिवेष की आस्तियों को सुरक्षित करने के साथ-साथ अनुज्ञप्तिधारी के विरूद्ध दावों तथा दायित्वों को परिनिष्चित करने के लिए सभी आवष्यक कार्रवाई की जाएगी।
(3) उपधारा (2) के अधीन उपनिवेष की आस्तियों को सुरक्षित करने के बाद तथा तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दिए गए उपबन्धों पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना, निदेषक, देयाें की वसूली के प्रयोजनों के लिए या समापन प्रमाण-पत्र या अन्यथा प्रदान करने के प्रयोजन के लिए, षेष विकास संकर्मो को प्राप्त करने के लिए सभी ऐसे उपायों, जिसमें सरकार की पूर्व सहमति को प्राप्त करने के बाद किसी तृृृतीय पक्षकार में सहयोजित भूमि सहित अनुज्ञप्ति या उसके भाग के हस्तान्तरण को सम्मिलित करते हुए, तथा ऐसी प्रक्रिया, जो विहित की जाए, को अपना सकता है।
(4) यथा उपरोक्त किन्हीं उपबन्धों के होते हुए भी, उपनिवेषक द्वारा इसके आबंटितियों से प्राप्त की गई कोई अतिरिक्त राषि, निदेषक द्वारा वसूल की जाएगी। निदेषक इसके आबंटितियों से प्राप्त कोई अतिरिक्त राषि उपनिवेषक से वसूल करेगा तथा यदि उपनिवेषक से उसकी सीधी वसूली के सभी प्रयास असफल रहते हैं, तो ऐसी वसूली उपनिवेषक के स्वामित्व के अधीन सभी आस्तियों से भू-राजस्वों के बकायों के रूप में की जाएगी।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 10क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''10क. देयों की वसूली.- (1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन निदेषक को भुगतानयोग्य सभी देयों की वसूली निम्न अनुसार की जा सकती है, अर्थात्ः- (i) कलक्टर को निदेषक अथवा उसके द्वारा इस संबंध में सम्यक्् रूप से प्राधिकृृत किसी 1975 का हरियाणा अधिनियम 8 की धारा 10क का संषोधन।
अधिकारी द्वारा देय राषि के भेजे गए प्रमाण-पत्र पर भू-राजस्व के बकाया के रूप में ; या (ii) व्यक्ति, कम्पनी या अन्य अभिकरण जिससे निदेषक को राषि देय है, का बैंक खाता रखने वाले बैंक को देय राषि की सीमा तक ऐसा खाता फ्रीज करने के निदेष दे सकता है :
परन्तु निदेषक वसूली के लिए खण्ड (i) या खण्ड (ii) में विनिर्दिष्ट दो ढंगों में से किसी एक को प्रारम्भ करेगा अथवा जारी रखेगा :
परन्तु यह और कि जहां इस अधिनियम के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति किसी व्यक्ति, कम्पनी या अन्य अभिकरण से बाह््य विकास प्रभारों के मद््दे धन राशि देय है, तो निदेषक अधिकारिता रखने वाले सब-रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) की धारा 71 के अधीन प्राप्त षक्तियों का प्रयोग करते हुए, उपनिवेष, जिसके लिए ऐसी अनुज्ञप्ति प्रदान की गई थी, में अवस्थित किसी अचल सम्पत्ति के विक्रय, विनिमय, दान, बंधक या पट्टे के लिए किसी दस्तावेज को पंजीकृत करने से इन्कार करने के लिए लिखेगा :
परन्तु यह और कि निदेषक या उसके द्वारा इस सम्बन्ध में सम्य््क रूप से प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, यदि खण्ड (ii) के अधीन वसूली का ढंग प्रारंभ करता हैै, तो उस तिथि जिसको बैंक को निर्देष दिये गए हैं, से तीन दिन के अपष्चात् व्यक्ति, कम्पनी या अन्य अभिकरण जिससे राषि देय है, को सुनवाई का अवसर देगा :
परन्तु यह और कि चूककर्ता, तत्समय लागू किसी अन्य विधि के अधीन ऐसी चूक के लिए, आपराधिक कार्रवाई सहित, कार्रवाई के लिए दायी रहेगा।''।
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मीनाक्षी आई० मेहता, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
57344—L.R.—H.G.P., Chd.