Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 157–2019/Ext.] चण्डीगढ़, शुक्रवार, दिनांक 13 सितम्बर, 2019
(22 भाद्र, 1941 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
1. पेप्सु अभिधृति और कृषि भूमि (हरियाणा संशोधन) अधिनियम, 2017 245—246 (2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 29)
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
अधिसूचना संख्या का०आ० 69/के०अ०29/2005/धारा 25/2019, दिनांक 13 सितम्बर, 2019 - 593—607 हरियाणा निजी सुरक्षा अभिकरण (रोकड़ परिवहन कार्यकलापों के लिए निजी सुरक्षा) नियम, 2019.
(प्राधिकृत अंग्रेजी अनुवाद सहित)
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(lxxxviii)
245 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), SEPT. 13, 2019 (BHDR. 22, 1941 SAKA)भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 13 सितम्बर, 2019
संख्या लैज.30/2019.- दि पेप्सु टिनेन्सी ऐन्ड ऐग्रीकल्चर लैण्डज़ (हरियाणा अमेन्डमेन्ट)
ऐक्ट, 2017, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 05 सितम्बर, 2019 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (ख) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 29
पेप्सु अभिधृति और कृषि भूमि (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2017 पेप्सु अभिधृति और कृषि भूमि अधिनियम, 1955, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में
यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम। 1. यह अधिनियम पेप्सु अभिधृति और कृषि भूमि (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2017, कहा जा सकता है।
2. पेप्सु अभिधृति और कृषि भूमि अधिनियम, 1955 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 7 की उप-धारा (1) के खण्ड (च) में,-
1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 7 का संषोधन। (i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''; या'' चिह्न तथा शब्द प्रतिस्थापित किए
जाएंगे ; तथा
(ii) खण्ड (च) के बाद, निम्नलिखित खण्ड जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
''(छ) कि अभिधृति भू-स्वामी और अभिधारी द्वारा किए गए पंजीकृत करार द्वारा समर्थित
किसी नियत अवधि के लिए है तथा ऐसी अवधि समाप्त हो गई है।''।
3. मूल अधिनियम की धारा 15 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 15-क का रखा जाना। ''15-क. धारा 15 के उपबंधों का नियत अवधि के लिए अभिधृति को लागू न होना.- धारा 15 के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां अभिधृति भू-स्वामी और अभिधारी द्वारा किए गए पंजीकृत करार द्वारा समर्थित किसी नियत अवधि के लिए है तथा ऐसी अवधि समाप्त हो गई है।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 18 की उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 18 का संशोधन। ''(1) यदि किसी अभिधारी की मृत्यु उसकी अभिधृति की अवधि के दौरान हो जाती है, तो अभिधृति, उप-धारा (2) के उपबंधों के अध्यधीन, उसके पारंपरिक वंशजों को या विधवा, यदि उसने पुनर्विवाह नहीं किया है को न्यागत होगी।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 20 के खण्ड (ख) के परन्तुक में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा ; तथा
1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 20 का संषोधन। (ii) विद्यमान परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
''परन्तु यह और कि यह परिभाषा वहां लागू नहीं होगी जहां अभिधृति भू-स्वामी और अभिधारी द्वारा किए गए पंजीकृत करार द्वारा समर्थित किसी नियत अवधि के लिए है तथा ऐसी अवधि समाप्त हो गई है ।''।246 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), SEPT. 13, 2019 (BHDR. 22, 1941 SAKA) 6. मूल अधिनियम की धारा 22 की उप-धारा (3) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 22 का संषोधन।
''(4) उप-धारा (1), (2) तथा (3) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, यदि अभिधारी कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 18) के अधीन पंजीकृत कोई कम्पनी है, तो यह इस धारा के अधीन इसकी अभिधृति, सांपत्तिक अधिकारों को समाविष्ट करते हुए भूमि के संबंध में इसके भू-स्वामी से अर्जित करने के लिए हकदार नहीं होगा।''।
7. मूल अधिनियम की धारा 30 में, ''पुरुष'' शब्द जहां कहीं भी आए का लोप कर दिया जाएगा। 1955 का पेप्सु अधिनियम 13 की धारा 30 का संषोधन।
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मीनाक्षी आई० मेहता, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
57371—L.R.—H.G.P., Chd.