Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY Published by Authority
© Govt. of Haryana
No. 16–2020/Ext.] चण्डीगढ़, सोमवार, दिनांक 27 जनवरी, 2020
(07 माघ, 1941 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
5—11 हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 37)।
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं।
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(vii)5 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 27 जनवरी, 2020
संख्या लैज. 39/2019.- दि हरियाणा गुडज़ एण्ड सर्विसज टैक्स (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2019, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 17 जनवरी, 2020 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2019 का हरियाणा अधिनियम संख्या 37
हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2019 हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017, को आगे संशोधित करने के लिए, अधिनियम
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2019, कहा जा सकता है। (2) यह इस संशोधित अधिनियम की धारा 22, जो इस अधिनियम के प्रकाशन की तिथि से लागू होगी, को छोड़कर ऐसी तिथि से लागू होगा, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे । 2. हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 2 के खण्ड (4) में, ''अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी,'' शब्दों तथा चिह्न के बाद, ''राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी,'' शब्द तथा चिह्न रखे जाएंगे।
3. मूल अधिनियम की धारा 10 में,-
(I) उपधारा (1) में, द्वितीय परंतुक के बाद, निम्नलिखित व्याख्या रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 2 का संशोधन। 2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 10 का संशोधन। "व्याख्या.- द्वितीय परंतुक के प्रयोजनों के लिए, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या छूट के रूप में वर्णित किया जाता है, के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय के मूल्य को राज्य में आवर्त के मूल्य के अवधारण के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा।'';
(II) उपधारा (2) में,-
(i) खंड (घ) में, अन्त में आने वाले "और" षब्द का लोप कर दिया जाएगा; (ii) खंड (ङ) में, "अधिसूचित किया जाएः" षब्दों और चिह्न के स्थान पर, "अधिसूचित
किया जाए; और" षब्द और चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (iii) खंड (ङ) के बाद, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"(च) वह न तो कोई नैमिािक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी
कराधेय व्यक्ति हैः'';
(III) उपधारा (2) के बाद, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
"(2क) इस अधिनियम में दी गई किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किन्तु धारा 9 की उपधारा (3) और (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो उपधारा (1) और (2) के अधीन कर के भुगतान का चुनाव करने के लिए पात्र नहीं है, जिसकी पूर्व विाीय वर्ष में सकल आवर्त पचास लाख रूपए से अधिक नहीं है, उसके द्वारा धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन भुगतानयोग्य कर के बदले में, ऐसी दर, जो विहित की जाए, पर संगणित कर की राशि, किन्तु राज्य में उसकी आवर्त के तीन प्रतिषत से अधिक नहीं हो, का निम्नलिखित षर्तों के अधीन रहते हुए भुगतान करने का चुनाव कर सकता है, यदि वह,- (क) ऐसे किसी माल या सेवाओं के प्रदाय में नहीं लगा हुआ है, जो इस अधिनियम के
अधीन कर उद्ग्रहणीय नहीं है;
6 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA)(ख) माल या सेवाओं के किसी भी अंतरराज्यीय जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है;
(ग) किसी ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्यिक प्रचालक, जिससे धारा 52 के अधीन स्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है, के माध्यम से माल या सेवाओं के किसी भी प्रदाय में नहीं लगा है;
(घ) ऐसे माल का विनिर्माता या ऐसी सेवाओं का प्रदायकर्ता नहीं है, जो सरकार द्वारा
परिषद् की सिफारिषों पर अधिसूचित की जाएं; और
(ङ) कोई नैमिािक कराधेय व्यक्ति नहीं है या कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति नहीं हैः
परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का केन्द्रीय अधिनियम 43) के अधीन जारी की गई वही स्थायी खाता संख्या रखते हैं, तो रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उपधारा के अधीन तब तक स्कीम के लिए चुनाव करने का पात्र नहीं होगा, जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उपधारा के अधीन कर का भुगतान करने का चुनाव नहीं करते हैं।'';
(IV) उपधारा (3) में, दो बार आने वाले, "उपधारा (1)" षब्द, कोष्ठकों और अंक के बाद, ''या उपधारा (2क), जैसी भी स्थिति हो," षब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(V) उपधारा (4) में, "उपधारा (1)" षब्द, कोष्ठकों और अंक के बाद, ''या उपधारा (2क), जैसी भी स्थिति हो,'' षब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(VI) उपधारा (5) में, "उपधारा (1)" षब्द, कोष्ठकों और अंक के बाद, "या उपधारा (2क), जैसी भी स्थिति हो,'' षब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(VII) उपधारा (5) के बाद, निम्नलिखित व्याख्या रखी जाएंगी, अर्थात्ः-
"व्याख्या 1.- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति की कर का भुगतान करने की उसकी पात्रता का अवधारण करने के लिए इसके सकल आवर्त की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, "सकल आवर्त" अभिव्यक्ति में किसी विाीय वर्ष के प्रथम अपै्रल से उस तिथि तक ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए प्रदायों के मूल्य शामिल होंगे, जिसको वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए दायी बन जाता है, किन्तु निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या छूट के रूप में वर्णित किया जाता है, के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदायों का मूल्य शामिल नहीं होगा। व्याख्या 2.- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा भुगतानयोग्य कर का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए, "राज्य में आवर्त" अभिव्यक्ति में निम्नलिखित प्रदायों का मूल्य शामिल नहीं होगा, अर्थात्ः-
(i) किसी विाीय वर्ष के प्रथम अपै्रल से उस तिथि तक के प्रदाय, जिसको ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए दायी बन जाता है; और
(ii) निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या छूट के रूप में वर्णित किया जाता है, के माध्यम से उपलब्ध करवाई गई छूट प्राप्त सेवाओं का प्रदाय।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 22 में, उपधारा (1) में,-
(i) द्वितीय परंतुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा;
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 22 का संशोधन।
(ii) द्वितीय परंतुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
"परन्तु यह और कि सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, ऐसे प्रदायकर्ता की दषा में, जो माल के अनन्य प्रदाय में लगा है, ऐसी षर्तों और परिसीमाओं, जो अधिसूचित की जाएं, के अधीन रहते हुए बीस लाख रूपए से चालीस लाख रूपए से अनधिक की ऐसी राशि तक के सकल आवर्त को बढ़ा सकती है। व्याख्या.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति को तब भी यह समझा जाएगा कि वह माल के अनन्य प्रदाय में लगा है, यदि वह निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या छूट के रूप में वर्णित किया जाता है, के माध्यम से छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है।''।7 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) 5. मूल अधिनियम की धारा 25 की उपधारा (6) के बाद, निम्नलिखित उपधाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 25 का संशोधन। "(6क) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, आधार संख्या का सत्यापन कराएगा या उसे धारित करने का प्रमाण प्रस्तुत करेगाः
परंतु यदि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को कोई आधार संख्या समनुदेषित नहीं की गई है, तो ऐसे व्यक्ति को ऐसी रीति, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर विहित करे, में पहचान के किसी वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन का प्रस्ताव दिया जाएगा :
परंतु यह और कि आधार संख्या का सत्यापन कराने या उसे धारित करने का प्रमाण प्रस्तुत करने या पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्तुत करने में असफल रहने की दषा में, ऐसे व्यक्ति को आबंटित रजिस्ट्रीकरण को अविधिमान्य समझा जाएगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंध लागू होंगे मानो ऐसे व्यक्ति के पास रजिस्ट्रीकरण नहीं है।
(6ख) अधिसूचना की तिथि को तथा से, प्रत्येक वैयक्तिक, रजिस्ट्रीकरण प्रदान के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, में आधार संख्या का सत्यापन कराएगा या उसे धारित करने का प्रमाण प्रस्तुत करेगा :
परंतु यदि किसी वैयक्तिक को आधार संख्या समनुदेषित नहीं की गई है, तो ऐसे वैयक्तिक को ऐसी रीति, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, में पहचान के किसी वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन का प्रस्ताव दिया जाएगा।
(6ग) अधिसूचना की तिथि को तथा से, वैयक्तिक से भिन्न प्रत्येक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, उक्त अधिसूचना विनिर्दिष्ट करे, में कर्ता, प्रबंध निदेषक, पूर्णकालिक निदेषक, ऐसे भागीदारों, संगम की प्रबंध समिति के सदस्यों, बोर्ड न्यासियों, प्राधिकृत प्रतिनिधियों, प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्गों की आधार संख्या का सत्यापन कराएगा या उसे धारित करने का प्रमाण प्रस्तुत करेगा :
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग, जिन्हें आधार संख्या समनुदेषित नहीं की गई है, उन्हें ऐसी रीति, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, में पहचान के किसी वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन का प्रस्ताव दिया जाएगा।
(6घ) उपधारा (6क) या (6ख) या (6ग) के उपबंध ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग या राज्य के भाग को लागू नहीं होंगे, जो सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे।
व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "आधार संख्या" अभिव्यक्ति का वही अर्थ होगा, जो आधार (विाीय और अन्य सहायिकियों, प्रसुविधाओं और सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम, 2016 (2016 का केन्द्रीय अधिनियम 18) की धारा 2 के खंड (क) में इसे दिया गया है।''। 6. मूल अधिनियम की धारा 31 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 31क का रखा जाना। "31क. प्राप्तिकर्ता को डिजिटल भुगतान की सुविधा.- सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग को विहित कर सकती है, जो उसके द्वारा किए गए माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के प्राप्तिकर्ता को इलैक्ट्रोनिक भुगतान का विहित ढंग उपलब्ध कराएगा और ऐसे प्राप्तिकर्ता को ऐसी रीति में और ऐसी षर्तों और निर्बधनों, जो विहित किए जाएं, के अधीन रहते हुए तदनुसार भुगतान करने के लिए विकल्प प्रदान कराएगा।''।
7. मूल अधिनियम की धारा 39 में,-
(I) उपधारा (1) तथा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी,
अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 39 का संशोधन। "(1) किसी इनपुट सेवा वितरक या अनिवासी कराधेय व्यक्ति या धारा 10 या 51 या 52 के उपबंधों के अधीन कर का भुगतान करने वाले किसी व्यक्ति से भिन्न, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए, माल या सेवाओं या दोनों के आवक और जावक प्रदायों, प्राप्त किए गए इनपुट कर प्रत्यय, भुगतानयोग्य कर, भुगतान किया गया कर और ऐसे अन्य ब्यौरे ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रोनिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करेगा :
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्ग को अधिसूचित कर सकती है, जो ऐसी षर्तों और निर्बंधनोें, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अधीन रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके किसी भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेगा।8 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) (2) धारा 10 के उपब्धों के अधीन कर का भुगतान करने वाला कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक विाीय वर्ष या उसके किसी भाग के लिए, माल या सेवाओं या दोनों के आवक प्रदायों, भुगतानयोग्य कर, भुगतान किया गया कर और ऐसे अन्य ब्यौरे ऐसे प्ररूप तथा रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रानिक रूप से राज्य में आवर्त की विवरणी प्रस्तुत करेगा।'';
(II) उपधारा (7) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"(7) उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन या उपधारा (3) या (5) में निर्दिष्ट व्यक्ति से भिन्न, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिसके द्वारा उपधारा (1) के अधीन विवरणी प्रस्तुत की जानी अपेक्षित है, सरकार को, ऐसी विवरणी के अनुसार षोध्य कर का भुगतान अन्तिम तिथि, जिसको उसके द्वारा ऐसी विवरणी प्रस्तुत की जानी अपेक्षित है, के अपश्चात् करेगा :
परंतु उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी मास के दौरान, माल या सेवाओं या दोनों के आवक और जावक प्रदायों, प्राप्त किए गए इनपुट कर प्रत्यय, भुगतानयोग्य कर और ऐसे अन्य ब्यौरों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को षोध्य कर का भुगतान करेगा :
परंतु यह और की उपधारा (2) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी तिमाही के दौरान राज्य में आवर्त, माल या सेवाओं या दोनों के आवक प्रदायों, भुगतानयोग्य कर और ऐसे अन्य ब्यौरों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को षोध्य कर का भुगतान करेगा ।''।
8. मूल अधिनियम की धारा 44 की उपधारा (1) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा;
(ii) निम्नलिखित परन्तुक रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 44 का संशोधन।
"परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिषों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने हेतु समय-सीमा में विस्तार कर सकता हैः
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के किसी विस्तार को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।''।
9. मूल अधिनियम की धारा 49 की उपधारा (9) के बाद, निम्नलिखित उपधाराएं जोड़ी जाएंगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 49 का संशोधन।
"(10) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसी षर्तों और निर्बधनों, जो विहित किए जाएं, के अधीन रहते हुए, सामान्य पोर्टल पर, इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते में उपलब्ध किसी कर, ब्याज, षास्ति, फीस की किसी राषि या किसी अन्य राषि को एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या उपकर हेतु इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित कर सकता है और ऐसे अंतरण को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते से प्रतिदाय के रूप में समझा जाएगा।
(11) जहां किसी राषि को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित किया गया है, वहां उसे उपधारा (1) में यथा उपबन्धित उक्त खाते में जमा किया गया समझा जाएगा।''।
10. मूल अधिनियम की धारा 50 की उपधारा (1) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 50 का संशोधन।
"पंरतु किसी कर अवधि के दौरान किए गए प्रदायों और धारा 39 के उपबंधो के अनुसार नियत तिथि के पष्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी, जहां ऐसी विवरणी उक्त अवधि के संबंध में धारा 73 या 74 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारम्भ के पष्चात् प्रस्तुत की जाती है, को छोड़कर, में घोषित प्रदायों के संबंध में भुगतानयोग्य कर पर ब्याज, उस कर के उस भाग पर उद्गृहीत किया जाएगा, जिसका भुगतान इलैक्ट्रानिक नकद खाते से राषि को निकालकर किया गया है।''।9 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) 11. मूल अधिनियम की धारा 52 में,- (I) उपधारा (4) में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 52 का संशोधन। (i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; (ii) निम्नलिखित परन्तुक रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
"परंतु आयुक्त, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के लिए, विवरणी प्रस्तुत करने की समय-सीमा का विस्तार कर सकता है :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के
किसी विस्तार को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।''।
(II) उपधारा (5) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; (ii) निम्नलिखित परन्तुक रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
"परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिषों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय-सीमा का विस्तार कर सकता हैः
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा के
किसी विस्तार को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा।''।
12. मूल अधिनियम की धारा 53 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 में धारा 53क का रखा जाना। "53क. कतिपय राशियों का अन्तरण.- जहां किसी राषि को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते से केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) के अधीन या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 13) के अधीन या माल और सेवा कर (राज्यों को प्रतिकर) अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 15) के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित किया गया है, तो वहां सरकार, केन्द्रीय कर खाते या एकीकृत कर खाते या उपकर खाते में, इलैक्ट्रानिक नकद खाते से अंतरित की गई राषि के बराबर राषि का ऐसी रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अंतरण करेगी।''।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 54 का संशोधन। 13. मूल अधिनियम की धारा 54 की उपधारा (8) के बाद, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "(8क) जहां केन्द्रीय सरकार ने राज्य कर के प्रतिदाय का वितरण किया है, तो वहां सरकार, केन्द्रीय सरकार को इस प्रकार प्रतिदाय की गई राषि के बराबर राषि का अंतरण करेगी।''।
14. मूल अधिनियम की धारा 95 में,-
(I) खंड (क) में,-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 95 का संशोधन। (i) "अपील प्राधिकरण" षब्दों के बाद, ''या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे; (ii) ''धारा 97 की उपधारा (2) या धारा 100 की उपधारा (1)" षब्दों, अंकों और कोष्ठकों के स्थान पर, "अधिनियम की धारा 97 की उपधारा (2) या धारा 100 की उपधारा (1) या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) की धारा 101ग" षब्द, अंक, कोष्ठक और अक्षर रखे जाएंगे;
(II) खंड (ङ) में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर, '';'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; (ii) खंड (ङ) के बाद, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"(च) ''राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण' से अभिप्राय है, धारा 101क में निर्दिष्ट राष्ट्रीय
अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण।''।
15. मूल अधिनियम की धारा 101 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
नई धारा 101क का रखा जाना। ''101क. राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण.- इस अधिनियम के प्रयोजनोें के लिए, इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) की धारा 101क के अधीन गठित राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण को इस अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण समझा जाएगा।''।10 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) 16. मूल अधिनियम की धारा 102 में,- (i) दो बार आने वाले "अपील प्राधिकरण" षब्दों के पष्चात्, "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे;
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 102 का संशोधन। (ii) "धारा 98 या धारा 101" षब्दों और अंकों के स्थान पर, "क्रमषः अधिनियम की धारा 98 या धारा 101 या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12)की धारा 101ग" षब्द, अंक, और अक्षर रखे जाएंगे;
(iii) "या अपीलार्थी" षब्दों के स्थान पर, "या अपीलार्थी, प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण" षब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 17. मूल अधिनियम की धारा 103 में,-
(I) उपधारा (1) के बाद, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
"(1क) राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण द्वारा इस अध्याय के अधीन सुनाया गया अग्रिम विनिर्णय निम्नलिखित पर आबद्धकर होगा-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 103 का संशोधन।
(क) आवेदक, जो सुभिन्न व्यक्ति हैं, जिन्होंने केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) की धारा 101ख की उपधारा (1) के अधीन विनिर्णय चाहा था और वे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनकी वही स्थायी खाता संख्या है जो आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का केन्द्रीय अधिनियम 43) के अधीन जारी की गई है;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट आवेदकों और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनकी वही स्थायी खाता संख्या है, जो आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का केन्द्रीय अधिनियम 43) के अधीन जारी की गई है, के संबंध में सम्बद्ध अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी।'';
(II) उपधारा (2) में, "उपधारा (1)" षब्द, कोष्ठकों और अंक के बाद, ''और उपधारा (1क)" षब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
18. मूल अधिनियम की धारा 104 में, उपधारा (1) में,-
(i) "प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण" षब्दों के पश्चात्, "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे;
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 104 का संशोधन।
(ii) "धारा 98 की उपधारा (4) के अधीन या धारा 101 की उपधारा (1)'' षब्दों, अंको और कोष्ठकों के स्थान पर, ''अधिनियम की धारा 98 की उपधारा (4) के अधीन या धारा 101 की उपधारा (1) या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) की धारा 101ग के अधीन" षब्द, अंक, और अक्षर रखे जाएंगे।
19. मूल अधिनियम की धारा 105 में,-
(i) विद्यमान उपांतिक षीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित उपांतिक षीर्ष प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की षक्तियां'';
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 105 का संशोधन।
(ii) उपधारा (1) में, "अपील प्राधिकरण" षब्दों के बाद, "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे;
(iii) उपधारा (2) में, दो बार आने वाले, "अपील प्राधिकरण" षब्दों के बाद, "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे।
20. मूल अधिनियम की धारा 106 में,-
(i) विद्यमान उपांतिक षीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित उपांतिक षीर्ष प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 106 का संशोधन।
2017 का हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 171 का संशोधन।
"प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की प्रक्रिया''; (ii) "अपील प्राधिकरण" षब्दों के बाद, "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" षब्द रखे जाएंगे। 21. मूल अधिनियम की धारा 171 की उपधारा (3) के बाद, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "(3क) जहां उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकरण, उक्त उपधारा के अधीन यथा अपेक्षित जांच करने के पष्चात्, इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने उपधारा (1) के अधीन मुनाफाखोरी की है, तो ऐसा व्यक्ति इस प्रकार मुनाफाखोरी की गई राषि के दस प्रतिषत के बराबर षास्ति का भुगतान करने का दायी होगाः
पंरतु ऐसी कोई भी षास्ति उद्ग्रहणीय नहीं होगी यदि मुनाफाखोरी की राषि, प्राधिकरण द्वारा आदेश पारित करने की तिथि से तीस दिन के भीतर जमा करवा दी जाती है। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए "मुनाफाखोरी" अभिव्यक्ति से अभिप्राय होगा, माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय पर कर की दर में कमी का लाभ या माल या सेवाओं या दोनों की कीमत में कमी की अनुरूपता के माध्यम से प्राप्तिकर्ता को इनपुट कर प्रत्यय का लाभ नहीं देने के कारण अवधारित राशि।''।11 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JAN. 27, 2020 (MAGH. 7, 1941 SAKA) भूतलक्षी रूप से अधिसूचना का संशोधन। 22. (1) हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन परिषद् की सिफारिषों पर, सरकार द्वारा जारी की गई, हरियाणा सरकार, आबकारी तथा कराधान विभाग, अधिसूचना संख्या 36/एसटी-2, दिनांक 30 जून, 2017 में, अनुसूची में, क्रम संख्या 103 और उसके सामने प्रविष्टियों के बाद, निम्नलिखित क्रम संख्या और उसके सामने प्रविष्टियां रखी जाएंगी और प्रथम जुलाई, 2017 से रखी गई समझी जाएंगी, अर्थात्ः-
(1) (2) (3) "103क 26 यूरनियम अयस्क सांद्र''
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, सरकार के पास उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अधिसूचना को भूतलक्षी रूप से संषोधन करने की षक्ति होगी और समझी जाएगी मानो सरकार के पास उक्त अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन उक्त अधिसूचना को भूतलक्षी रूप से संषोधन करने की षक्ति सभी तात्विक समयों पर थी।
(3) कोई भी प्रतिदाय सभी ऐसे कर, जिन्हें संगृहित किया गया है, किंतु जो इस प्रकार संगृहीत नहीं किए गए होते यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना सभी तात्विक समयों पर लागू हुई होती, में से नहीं किया जाएगा।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
57686—L.R.—H.G.P., Chd.