Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY Published by Authority
© Govt. of Haryana
No. 87–2020/Ext.] चण्डीगढ़, सोमवार, दिनांक 22 जून, 2020
(1 आषाढ़, 1942 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
127—137 1. हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020
(2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 6)।
139—140 2. भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2020
(2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 7)।
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं।
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं।
भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं।
(xxxv)127 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 22 जून, 2020
संख्या लैज.6/2020.- दि हरियाणा स्टेट कौंसिल फार फिजियोथेरेपी ऐक्ट, 2020, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 10 जून, 2020 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 6
हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020 राज्य में भौतिक-चिकित्साविद्ों के पंजीकरण के प्रयोजन के लिए तथा भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं को मान्यता देने के लिए तथा भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा के मानकों के समन्वयन तथा अवधारण के लिए हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् का गठन करने के लिए तथा उनसे संबंधित या उनके आनुषंगिक मामलों के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भ।
परिभाषाएं। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में होगा। (3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से लागू होगा। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''परिषद्'' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन गठित हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् ; (ख) ''समानक तथा पंजीकरण समिति'' से अभिप्राय है, धारा 13 के अधीन गठित समानक तथा
पंजीकरण समिति ;
(ग) ''कार्यकारी समिति'' से अभिप्राय है, धारा 12 के अधीन परिषद् द्वारा गठित कार्यकारी
समिति;
(घ) ''सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ङ) ''निरीक्षक'' से अभिप्राय है, धारा 24 के अधीन कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त कोई
निरीक्षक ;
(च) ''संस्था'' से अभिप्राय है, भौतिक-चिकित्सा में शिक्षा तथा प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए
परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त कोई संस्था ;
(छ) ''सदस्य'' से अभिप्राय है, परिषद् का सदस्य तथा इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी शामिल हैं; (ज) ''भौतिक-चिकित्साविद्'' से अभिप्राय है, कोई व्यक्ति जो किसी मान्यताप्राप्त संस्था से भौतिक-चिकित्सा की योग्यता रखता हो तथा जिसका नाम भौतिक-चिकित्साविद्ों के रजिस्टर में दर्ज किया गया हो;
(झ) ''भौतिक-चिकित्सा'' से अभिप्राय है, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की कोई शाखा जिसमें अभ्यास, संघटन, परिचालन, यांत्रिक तथा विद्युत भौतिक-चकित्सा, क्रिया तथा यन्त्र या निदान, उपचार तथा रोकथाम सहित संचालन असामान्यता, शारीरिक रूप से अपक्रिया, शारीरिक विकार, अशक्तता, चोट तथा रोग से चंगा होना तथा पीड़ा, शारीरिक कारकों को प्रयोग करते हुए शारीरिक तथा मानसिक स्थिति के प्रयोजन के लिए या के संबंध में उपक्रमात्मक किसी व्यक्ति को जांच, उपचार, सलाह तथा अनुदेशन शामिल है;
128 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA)(ञ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित;
(ट) ''मान्यताप्राप्त संस्था'' से अभिप्राय है,-
(i) हरियाणा राज्य में लागू विधि द्वारा स्थापित कोई संस्था; या (ii) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कोई अन्य संस्था;
(ठ) ''मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय'' से अभिप्राय है,-
(i) भारत में विधि द्वारा निगमित कोई विश्वविद्यालय ; या (ii) कोई अन्य विश्वविद्यालय, जो सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए
किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय के रूप में घोषित किया गया है ;
(ड) ''रजिस्टर'' से अभिप्राय है, धारा 29 के अधीन परिषद् द्वारा तैयार किया गया तथा अनुरक्षित भौतिक-चिकित्साविद्ों का रजिस्टर ;
(ढ) ''पंजीकृत व्यवसायी'' से अभिप्राय है, कोई भौतिक-चिकित्साविद् जिसका नाम रजिस्टर में दर्ज है तथा बना रहता है ;
(ण) ''रजिस्ट्रार'' से अभिप्राय है, धारा 16 के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रार ; (त) ''विनियम'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन परिषद् द्वारा बनाये गये विनियम ; (थ) ''राज्य'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य ;
परिषद् का गठन।
परिषद् की संरचना।
3. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन इसको प्रदत्त की गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिए और इसके समनुदेशित कृत्य करने के लिए हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् के नाम से ज्ञात कोई निकाय गठित करेगी। (2) परिषद् इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन चल तथा अचल दोनाें सम्पत्ति अर्जन, धारण तथा व्ययन करने और संविदा करने की शक्ति सहित शाश्वत उतराधिकार तथा सामान्य मुद्रा रखने वाली कोई निगमित निकाय होगी और वह उक्त नाम से वाद चला सकेगी तथा उस पर उक्त नाम से वाद चलाया जा सकेगा। (3) परिषद् का मुख्यालय पंचकूला, हरियाणा में होगा। 4. (1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली परिषद् का गठन करेगी, अर्थात् :-
(i) निदेशक, चिकित्सा शिक्षा तथा अनुसंधान विभाग अध्यक्ष होगा ; (ii) चिकित्सा शिक्षा तथा अनुसंधान विभाग में भौतिक-चिकित्सा के विषय से संबंधित
उप निदेशक उपाध्यक्ष होगा;
(iii) सरकार द्वारा राज्य में प्रत्येक सरकारी शिक्षण संस्था से शिक्षण संकाय में से
नामनिर्देशित किये जाने वाला एक भौतिक-चिकित्साविद्;
(iv) सरकार द्वारा राज्य में सरकारी सहायताप्राप्त या निजी संस्थाओं में शिक्षण संकाय में
से नामनिर्देशित किये जाने वाले तीन भौतिक-चिकित्साविद्;
(v) पंजीकृत व्यवसायियों में से परिषद् द्वारा संचालित निर्वाचन में चुने गए दो सदस्य; (vi) सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाला हरियाणा चिकित्सा परिषद् से एक
सदस्य।
(2) परिषद् का रजिस्ट्रार सदस्य-सचिव होगा।
अयोग्यता। 5. (1) कोई व्यक्ति, सदस्य के रूप में, नामनिर्देशित किए जाने के लिए योग्य नहीं होगा, यदि वह,-
(i) विकृतचित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है ; (ii) नैतिक अधमता वाले किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है या किया जाता है,
जो सरकार की राय में उसे परिषद् का सदस्य बनने के लिए अयोग्य ठहराता है ;
(iii) अनुन्मोचित दिवालिया है ; (iv) परिषद् द्वारा व्यवसाय में किसी रीति में कुत्सित आचरण के लिए दण्डित किया गया
है ;
(v) सरकार या किसी संस्था की सेवा से हटाया गया है या पदच्युत किया गया है ; (vi) जिसका नाम रजिस्टर से हटा दिया गया है या में दर्ज नहीं किया गया है; या (vii) बासठ वर्ष की आयु पूरी कर लेता है।
(2) यदि कोई सदस्य, परिषद् की अनुमति के बिना, या ऐसे कारणों, जो परिषद की राय में पर्याप्त हों, के बिना परिषद् की तीन लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो परिषद् उसकी सीट को रिक्त घोषित कर सकती है तथा रिक्ति को भरने हेतु कदम उठा सकती है।129 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) सदस्य की पदावधि।
आकस्मिक रिक्ति।
त्यागपत्र।
परिषद् की बैठकें।
गणपूर्ति।
बैठकों की कार्यवाहियां।
कार्यकारी समिति का गठन। (3) यदि कोई सदस्य, उप-धारा (1) में वर्णित किन्हीं अयोग्यताओं के अध्यधीन अयोग्य बनता है या पाया जाता है, तो परिषद् सरकार को रिर्पोट प्रस्तुत करेगी तथा सरकार अयोग्यताओं के बारे में यदि संतुष्ट हो तो उसकी सीट को रिक्त घोषित करेगी। 6. (1) पदेन सदस्यों से भिन्न, परिषद् के सदस्यों की पदावधि उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष होगी। (2) जहां तीन वर्ष की उक्त अवधि किसी सदस्य के संबंध में समाप्त होने वाली है, तो कोई उत्तराधिकारी उक्त अवधि की समाप्ति से पूर्व तीन मास के भीतर किसी भी समय नामनिर्देशित किया जा सकता है, किन्तु वह तब तक पद ग्रहण नहीं करेगा, जब तक उक्त अवधि समाप्त नहीं हो जाती। (3) कोई भी सदस्य दो अवधियों से अधिक के लिए या बासठ वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, नामनिर्देशित नहीं किया जाएगा। 7. (1) परिषद् के नामनिर्दिष्ट सदस्य के पद पर उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व उसकी मृत्यु, त्यागपत्र, हटाने या निःशक्तता या अन्यथा के कारण होने वाली कोई आकस्मिक रिक्ति, ऐसी रिक्ति के होने की तिथि से छह मास की अनधिक अवधि के भीतर, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में भरी जाएगी। (2) उप-धारा (1) के अधीन नामनिर्दिष्ट कोई व्यक्ति, सदस्य जिसकी रिक्ति में वह नामनिर्दिष्ट किया गया है, के पद की शेष अवधि के लिए पद धारण करेगा। 8. (1) पदेन सदस्य से भिन्न कोई सदस्य, किसी भी समय परिषद् के अध्यक्ष को संबोधित लिखित में नोटिस द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है तथा ऐसा त्यागपत्र सरकार को भेजा जाएगा। (2) प्रत्येक ऐसा त्यागपत्र, तिथि, जिसको यह सरकार द्वारा स्वीकार किया जाता है, से प्रभावी होगा। 9. (1) परिषद् कैलेण्डर वर्ष में कम से कम दो बार बैठक करेगी और अनेक बार भी बैठक कर सकती है, जो इसके कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक हो। (2) अध्यक्ष, जब उपस्थित हो, परिषद् की बैठक की अध्यक्षता करेगा और उसकी अनुपस्थिति में, उपाध्यक्ष अध्यक्षता करेगा। यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों अनुपस्थित हैं, तो उपस्थित सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित कोई अन्य सदस्य ऐसी बैठक की अध्यक्षता करेगा। उस बैठक की अध्यक्षता करने वाले उपाध्यक्ष या सदस्य, जैसी भी स्थिति हो, को अध्यक्ष की सभी शक्तियां होंगी। (3) बैठक में कारबार के सभी संव्यवहार सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चित किए जाएंगे। (4) बैठक की अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी, परिषद् के सदस्य के रूप में अपने मत के अतिरिक्त, मतों की समानता की दशा में, निर्णायक मत रखेगा। 10. परिषद् की बैठक में कारबार के संव्यवहार के लिए गणपूर्ति अध्यक्ष सहित सदस्यों की कुल संख्या की एक-तिहाई होगी : परन्तु यदि बैठक के लिए नियत समय से आधे घण्टे में, गणपूर्ति पूरी नहीं होती है, तो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या अध्यक्षता करने वाला सदस्य, जैसी भी स्थिति हो, आगामी दिन के ऐसे घण्टे के लिए बैठक स्थगित करेगा जैसा वह परिषद् के नोटिस बोर्ड और वैबसाइट पर अधिसूचित करे। कारबार, जो मूल बैठक के समक्ष लाया जा सकता है, स्थगित की गई बैठक के समक्ष लाया जाएगा और ऐसी बैठक या उसके किसी पश्चात्वर्ती स्थगन में निपटान किया जाएगा, चाहे गणपूर्ति पूरी है या नहीं। 11. (1) परिषद् की प्रत्येक बैठक की कार्यवाहियों की प्रति, बैठक की तिथि से पन्द्रह दिन के भीतर, सरकार या इस निमित्त इस द्वारा नियुक्त किसी अन्य प्राधिकरण को भेजी जाएगी। (2) परिषद् का कोई भी कार्य या कार्यवाहियां केवल किसी रिक्ति या परिषद् के गठन में त्रुटि के आधार पर अविधिमान्य नहीं होंगी। 12. (1) परिषद् ऐसे कृत्य, रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में करने के लिए अपने सदस्यों में से कार्यकारी समिति का गठन करेगी। (2) कार्यकारी समिति निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात् :-
(i) परिषद् का अध्यक्ष सभापति होगा ; (ii) परिषद् का उपाध्यक्ष उपसभापति होगा; (iii) परिषद् का रजिस्ट्रार सदस्य-सचिव होगा; (iv) हरियाणा राज्य चिकित्सा परिषद् का एक नामनिर्देशित सदस्य; (v) परिषद् के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाला, धारा 4 के उप-खण्ड (iii),
(iv) तथा (v) से एक-एक सदस्य।
(3) कार्यकारी समिति का सदस्य, परिषद् के सदस्य के रूप में अपनी पदावधि की समाप्ति तक धारण करेगा तथा वह पुनः नामनिर्देशन हेतु पात्र होगा। (4) कार्यकारी समिति ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगी तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी, जो विनियमों द्वारा इसको प्रदत्त की जाएं या किए जाएं।130 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) समानक तथा पंजीकरण समिति।
13. (1) भौतिक-चिकित्सा में प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई डिग्रियों की मान्यता की सिफारिश के प्रयोजन के लिए और भौतिक-चिकित्साविद्ों के पंजीकरण से संबंधित मामलों के विचारण के लिए समानक तथा पंजीकरण समिति होगी। इस समिति की सिफारिशें, कार्यकारी समिति और परिषद्, जब तक इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित न हो, के अनुमोदन के अध्यधीन होंगी। (2) उपाध्यक्ष ऐसी समिति का सभापति होगा। भौतिक-चिकित्सा की विभिन्न शाखाओं में शिक्षाविद्ों और विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से परिषद् के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट पांच अन्य सदस्य होंगे।
उप-समितियां। 14. परिषद् ऐसे प्रयोजनों, जो यह आवश्यक समझे, के लिए अपने सदस्यों में से उप-समितियां गठित फीस तथा भत्तों का भुगतान।
कर सकती है। 15. परिषद् के गैर-सरकारी सदस्यों को परिषद् की बैठकों के सम्बन्ध में उनकी उपस्थिति के लिए ऐसी फीस और भत्तों का भुगतान किया जाएगा, जो विहित किए जाएं।
रजिस्ट्रार। 16. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी, जो भौतिक-चिकित्साविद् परिषद् के अन्य कर्मचारी।
होगा। (2) रजिस्ट्रार की नियुक्ति का ढंग, वेतन, भत्ते, निलंबन, पदच्युति, हटाया जाना तथा सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं। (3) परिषद् के सामान्य अधीक्षण तथा नियन्त्रण के अध्यधीन, रजिस्ट्रार परिषद् के दिन-प्रतिदिन के कार्यकलापों और ऐसे अन्य कृत्य, जो परिषद् द्वारा, समय-समय पर, उसको समनुदेशित किए जाएं, करने के लिए उत्तरदायी होगा। (4) अवकाश या किसी अन्य कारण से रजिस्ट्रार के कार्यालय में किसी अस्थाई रिक्ति के दौरान, कार्यकारी समिति, सरकार की पूर्व स्वीकृति से, उसके स्थान पर कार्य करने के लिए कोई सदस्य नियुक्त कर सकती है तथा इस प्रकार नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति, ऐसी नियुक्ति की अवधि के लिए, इस अधिनियम के प्रयोजनों हेतु रजिस्ट्रार के रूप में समझा जाएगा। (5) परिषद्, के लेखे ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में रजिस्ट्रार द्वारा रखे जाएंगे। (6) रजिस्ट्रार को अमले पर पर्यवेक्षी शक्तियां होंगी तथा ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं। 17. (1) परिषद्, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, रजिस्ट्रार से भिन्न ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों, जो वह इस अधिनियम के अधीन उसके कर्तव्यों के पालन तथा उसके कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक समझे, को नियुक्त कर सकती है। (2) परिषद् द्वारा नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का ढंग, वेतन तथा भत्ते, अनुशासन और सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं। 18. (1) इस अधिनियम या तत्समय् लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, ऐसी तिथि, जो सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए से,-
नई संस्थाओं की स्थापना के लिए अनुमति।
(क) कोई भी व्यक्ति भौतिक-चिकित्सा प्रदान करने वाली संस्था की स्थापना नहीं करेगा;
या
(ख) कोई भी संस्था, इस धारा के उपबन्धों के अनुसार प्राप्त की गई सरकार की पूर्व
अनुमति के सिवाय- (i) कोई नया या उच्चतर पाठ्यक्रम (जिसमें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण शामिल है) प्रारम्भ नहीं करेगी, जो किसी मान्यताप्राप्त भौतिक-चिकित्सा योग्यता प्रदान करने के लिए विद्यार्थी को ऐसे कोर्स या प्रशिक्षण अर्हक होने हेतु समर्थ कर सकती है; या
(ii) भौतिक-चिकित्सा पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण (जिसमें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या
प्रशिक्षण शामिल है), में इसकी प्रवेश क्षमता नहीं बढ़ाएगी।
(2) प्रत्येक व्यक्ति या संस्था, उप-धारा (1) के अधीन अनुमति प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए, सरकार को आवेदन प्रस्तुत करेगी तथा सरकार, आवेदन इसकी सिफारिशों के लिए परिषद् को भेजेगी। (3) उप-धारा (2) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, परिषद् ऐसे अन्य ब्यौरे, जो इसके द्वारा आवश्यक समझे जाएं, प्राप्त कर सकती है तथा इसके बाद यह,
(क) यदि आवेदन त्रुटिपूर्ण है तथा इसमें आवश्यक ब्यौरे नहीं दिए गए हैं, लिखित अभ्यावेदन करने हेतु सम्बद्ध व्यक्ति को युक्तियुक्त अवसर दे सकती है तथा ऐसे व्यक्ति के लिए परिषद् द्वारा विनिर्दिष्ट त्रुटि, यदि कोई हो, में सुधार करना प्रभावनीय होगा ;
(ख) उप-धारा (6) में निर्दिष्ट कारणों के सम्बन्ध में आवेदन पर विचार कर सकती है
तथा आवेदन उस पर इसकी सिफारिशों सहित सरकार को प्रस्तुत कर सकती है।131 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) (4) सरकार, आवेदन तथा परिषद् की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, आवेदन अनुमोदित कर सकती है। प्रदान किया गया अनुमोदन उप-धारा (1) के अधीन अनुमति के रूप में समझा जाएगा। (5) आवेदन के अननुमोदन की दशा में, ऐसे अननुमोदन के लिए कारण अभिलिखित किए जाएंगे तथा कारणों सहित ऐसा निर्णय आवेदक को सूचित किया जाएगाः परन्तु आवेदक, सरकार द्वारा उठाए गए आक्षेपों के लिए स्पष्टीकरण सहित सरकार को अभ्यावेदन दे सकता है तथा सरकार, उन स्पष्टीकरणों पर विचार करने के बाद, अनुमति प्रदान कर सकती हैः परन्तु यह और कि इस उप-धारा की कोई भी बात, किसी व्यक्ति, जिसका आवेदन सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है, को नए सिरे से आवेदन प्रस्तुत करने के लिए नहीं रोकेगी तथा उप-धारा (1) के उपबन्ध ऐसे आवेदन को लागू होंगे। (6) परिषद्, उप-धारा (3) के खण्ड (ख) के अधीन इसकी सिफारिश करते समय निम्नलिखित कारणों पर सम्यक् ध्यान देगी, अर्थात् :-
(क) क्या नया या उच्चतर पाठ्यकम का प्रारम्भ चाहने वाली प्रस्तावित या विद्यमान संस्था, विनियमों द्वारा यथा विनिर्दिष्ट शिक्षा के न्यूनतम मानक देने की स्थिति में है ; (ख) क्या किसी संस्था की स्थापना चाहने वाले व्यक्ति या नया या उच्चतर पाठ्यकम का प्रारम्भ चाहने वाली विद्यमान संस्था, के पास इसकी प्रवेश क्षमता बढ़ाने हेतु पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं ;
(ग) क्या संस्था की उचित कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करने हेतु या नये पाठ्यकम या प्रशिक्षण के संचालन हेतु या बढ़ी हुई प्रवेश क्षमता को समायोजित करने हेतु अमला, उपकरण, आवास, प्रशिक्षण तथा अन्य सुविधाओं के संबंध में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं या आवेदन में विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर उपलब्ध करवा दी जाएंगी ;
(घ) क्या मान्यताप्राप्त भौतिक-चिकित्सा योग्यता रखने वाले व्यक्तियों द्वारा ऐसी संस्था में उपस्थिति या पाठ्यकम या प्रशिक्षण के संभाव्य विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने हेतु कोई व्यवस्था की गई है या कार्यक्रम तैयार किया गया है ;
(ङ) क्या भौतिक-चिकित्सा के व्यवसाय के क्षेत्र में मानव-शक्ति की आवश्यकता को पूरा करने हेतु आवश्यक व्यवस्था की गई है या कार्यक्रम तैयार किया गया है; तथा
(च) ऐसे अन्य कारण, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं।
(7) जहां सरकार इस धारा के अधीन आवेदन का या तो अनुमोदन या अननुमोदन करने के आदेश पारित करती है, तो आदेश की प्रति सम्बद्ध व्यक्ति को संप्रेषित की जाएगी।
व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजन के लिए, ''व्यक्ति'' में कोई विश्वविद्यालय, न्यास, सोसाइटी,
संस्था या कम्पनी शामिल है किन्तु केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार शामिल नहीं है।
कतिपय मामलों में योग्यताओं की अमान्यता।
कतिपय विद्यमान संस्थाओं के लिए अनुमति लेने हेतु समय। 19. (1) जहां इस अधिनियम के प्रारम्भ के बाद, इस अधिनियम के अधीन यथा उपबन्धित सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना स्थापित कोई संस्था, ऐसी संस्था द्वारा किसी विद्यार्थी को प्रदान की गई कोई भौतिक-चिकित्सा योग्यता इस अधिनियम के अधीन मान्यताप्राप्त योग्यता नहीं होगी। (2) जहां कोई संस्था, इस अधिनियम के अधीन सरकार की पूर्व अनुमति के बिना, कोई नया या उच्चतर पाठ्यकम या प्रशिक्षण प्रारम्भ करती है, जिसमें कोई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण शामिल है, तो ऐसी संस्था द्वारा किसी विद्यार्थी को प्रदान की गई योग्यता इस अधिनियम के अधीन मान्यताप्राप्त योग्यता नहीं होगी। (3) जहां कोई संस्था, इस अधिनियम के अधीन यथा उपबन्धित, सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी पाठ्यकम या प्रशिक्षण में इसकी प्रवेश क्षमता बढ़ाती है, इसकी प्रवेश क्षमता में वृद्धि के आधार पर ऐसी संस्था के किसी विद्यार्थी को प्रदान की गई कोई भौतिक-चिकित्सा योग्यता, इस अधिनियम के अधीन मान्यताप्राप्त भौतिक-चिकित्सा योग्यता नहीं होगी। (4) विद्यार्थी, जिसको प्रवेश क्षमता की अप्राधिकृत वृद्धि के आधार पर भौतिक-चिकित्सा योग्यता प्रदान की गई है, को पहचानने के लिए मानदण्ड ऐसे होंगे, जो विहित किए जाएं। 20. (1) यदि, इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व, किसी व्यक्ति ने कोई संस्था स्थापित की है या किसी संस्था ने कोई नया या उच्चतर पाठ्यकम या प्रशिक्षण प्रारम्भ किया है, या इसकी प्रवेश क्षमता में वृद्धि की है, तो ऐसा व्यक्ति या संस्था, जैसी भी स्थिति हो, इस अधिनियम के प्रारम्भ से छह मास की अवधि के भीतर, इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार सरकार की अनुमति लेगा। (2) यदि ऐसी संस्था उप-धारा (1) के अधीन अनुमति लेनेे में असफल रहती है, तो, जहां तक हो सके, धारा 19 के उपबन्ध लागू होंगे, मानो धारा 18 के अधीन सरकार की अनुमति नामंजूर कर दी गई है।132 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) भौतिक-चिकित्सा योग्यता की मान्यता।
21. (1) राज्य में किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा प्रदान की गई योग्यताएं, जो हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हैं, इस अधिनियम के प्रारम्भ की तिथि के बाद भौतिक-चिकित्सा तथा भौतिक-चिकित्साविद्ों के लिए मान्यताप्राप्त योग्यताएं होंगी। (2) हरियाणा राज्य से भिन्न भारत में कोई मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था, जो भौतिक-चिकित्सा में योग्यताएं प्रदान करती है, उसके द्वारा प्रदान की जा रही भौतिक-चिकित्सा योग्यता की मान्यता लेनेे हेतु परिषद् को आवेदन कर सकती है। परिषद् आगे राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसे मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा दी गई भौतिक-चिकित्सा योग्यता को मान्यता प्रदान करने हेतु इसकी सिफारिश सहित सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी।
मान्यता का प्रभाव।
22. (1) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय द्वारा या किसी मान्यताप्राप्त संस्था द्वारा भौतिक-चिकित्सा में प्रदान की गई डिग्री, रजिस्टर में दर्ज करने के लिए पर्याप्त योग्यता होगी। (2) कोई भी व्यक्ति, इस अधिनियम के प्रारम्भ की तिथि के बाद, भौतिक-चिकित्साविद् के रूप में रजिस्टर में दर्ज किए जाने के लिए तब तक हकदार नहीं होगा जब तक वह मान्यताप्राप्त योग्यता धारण नहीं करता : परन्तु किसी वाद की दशा में क्या कोई व्यक्ति नाम दर्ज किए जाने के लिए हकदार है, तो मामला सम्बन्धित समानक तथा पंजीकरण समिति को निर्दिष्ट किया जाएगा जो संदर्भ पर विचार करेगी तथा कार्यकारी समिति को सिफारिश करेगी, जिसका निर्णय अन्तिम होगा। (3) उप-धारा (1) में दी गई किसी बात के होते हुए भी,-
(क) मान्यताप्राप्त योग्यता धारण करने वाला भारत का कोई नागरिक, जो उस देश की सरकार द्वारा किसी विदेश में भौतिक-चिकित्सा की किसी परिषद् में पंजीकृत किए जाने के लिए उसे हकदार बनाती है, परिषद् के अनुमोदन से संबंधित देश द्वारा उक्त योग्यता को मान्यता दिए जाने तक रजिस्टर में अस्थाई रूप से दर्ज किया जा सकता है ;
(ख) कोई व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है, जो अध्यापन, अनुसंधान या पुन्यार्थ कार्य के प्रयोजन के लिए भारत में सम्बद्ध राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त किसी अस्पताल या संस्था में, भौतिक-चिकित्सा अध्यापक के रूप में कार्यरत है, परिषद् के अध्यक्ष के अनुमोदन से, ऐसी अवधि, जो विनिर्दिष्ट की जाए, के लिए रजिस्टर में अस्थाई रूप से दर्ज किया जा सकता हैः
परन्तु ऐसे व्यक्ति को सामान्य भौतिक-चिकित्साविद् के रूप में व्यवसाय हेतु अनुमत नहीं किया जाएगा तथा ऐसा अध्यापन या कार्य अस्पताल या संस्था जिससे वह आसक्त है, तक सीमित होगाः
परन्तु यह और कि खण्ड (क) के अधीन ऐसा कोई भी नामांकन तब तक अनुज्ञेय नहीं होगा जब तक परिषद् स्वयं की संतुष्टि नहीं कर लेती कि ऐसा व्यक्ति स्क्रीन टैस्ट या ऐसा अन्य टैस्ट या परीक्षा, जो विहित किया जाए, संचालित करते हुए भौतिक-चिकित्सा व्यवसाय हेतु अपेक्षित ज्ञान तथा कौशल न रखता हो। 23. राज्य में प्रत्येक संस्था या मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय जो कोई मान्यताप्राप्त योग्यता या मान्यताप्राप्त उच्च योग्यता प्रदान करता है, ऐसे ब्यौरे तथा सूचना, जो समय-समय पर, परिषद् द्वारा ऐसी योग्यता प्राप्त करने के क्रम में किए जाने वाले तथा सामान्यतः ऐसी योग्यता प्राप्त करने हेतु अपेक्षित पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षण तथा परीक्षा अपेक्षित हो, प्रस्तुत करेगा।
पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण तथा परीक्षा के संबंध में सूचना की अपेक्षा हेतु शक्ति। निरीक्षक । 24. (1) कार्यकारी समिति, इस निमित्त बनाए गए विनियमों द्वारा, ऐसी संख्या में निरीक्षक, जो यह किसी संस्था जहां भौतिक-चिकित्सा में शिक्षा या प्रशिक्षण दिया जाता है, के निरीक्षण हेतु तथा कोई मान्यताप्राप्त योग्यता या मान्यताप्राप्त उच्चतर योग्यता प्रदान करने के प्रयोजन के लिए आयोजित किसी परीक्षा में उपस्थिति हेतु, आवश्यक समझे, नियुक्त कर सकती है। (2) इस धारा के अधीन नियुक्त निरीक्षक किसी परीक्षा की चर्या में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, किन्तु कार्यकारी समिति को, प्रशिक्षण के प्रयोजनों के लिए संस्था की उपयुक्तता पर और उसमें प्रशिक्षण की पर्याप्तता पर, जैसी भी स्थिति हो या परीक्षाओं के मानक की पर्याप्ति पर और किन्हीं अन्य मामलों जिनके संबंध में कार्यकारी समिति उनसे रिपोर्ट की अपेक्षा करे, रिपोर्ट करेंगे। (3) कार्यकारी समिति समानक तथा पंजीकरण समिति से परामर्श करने के बाद, ऐसी रिपोर्ट की प्रति सम्बद्ध व्यक्ति या संस्था को भेजेगी और टिप्पणी, यदि कोई हो, सहित प्रति परिषद् तथा सरकार को भेजेगी।133 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) 25. (1) जब कार्यकारी समिति द्वारा रिपोर्ट पर, परिषद् को यह प्रतीत हो कि,-
मान्यता वापस लेना। (क) राज्य में किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय या संस्था से मान्यताप्राप्त योग्यता प्राप्त करने के लिए, लिए जाने वाले पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण तथा परीक्षाएं या ऐसे कोर्सों में प्रवेश या ऐसी परीक्षाओं में उम्मीदवारों से अपेक्षित उत्कृष्टता के मानकों के लिए शर्तें ; या
(ख) ऐसे विश्वविद्यालय या संस्था में उपलब्ध करवाया गया अमला, उपकरण, आवास, प्रशिक्षण तथा अन्य प्रशिक्षण, अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुरूप नहीं हैं या परिषद् द्वारा विहित मानकों से कम हैं, तो परिषद्, सरकार को इस आशय का अभ्यावेदन करेगी। ऐसे अभ्यावेदन पर विचार करने के बाद, सरकार ऐसी टिप्पणियों सहित, जो यह उचित समझे, इसे अवधि, जिसके भीतर विश्वविद्यालय या संस्था सरकार को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकती है, की सूचना सहित सम्बद्ध विश्वविद्यालय या संस्था को भेजेगी।
पंजीकरण।
पंजीकरण का नवीकरण। (2) स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर, यदि संतुष्ट हो, तो सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषणा करेगी कि उक्त विश्वविद्यालय या संस्थाओं द्वारा प्रदत्त योग्यता मान्यताप्राप्त योग्यता होगी। (3) जहां सम्बद्ध विश्वविद्यालय या संस्था द्वारा नियत अवधि के भीतर कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया है या दिए गए स्पष्टीकरण से असंतुष्ट है, तो सरकार, ऐसी और जांच, यदि कोई हो, जो यह ठीक समझे, करने के बाद, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उक्त विश्वविद्यालय या संस्था को दी गई मान्यता वापिस लेगी तथा यह घोषित करेगी कि उक्त विश्वविद्यालय या संस्थाओं द्वारा प्रदत्त योग्यता केवल तब मान्यताप्राप्त योग्यता होगी जब विनिर्दिष्ट तिथि से पूर्व दी गई हो। 26. (1) इस अधिनियम के अधीन पंजीकरण के लिए पात्र प्रत्येक व्यक्ति रजिस्ट्रार को पंजीकरण के लिए आवेदन करेगा। (2) पंजीकरण के लिए आवेदन ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी फीस, जो विहित की जाए, के साथ किया जाएगा। (3) प्रत्येक व्यक्ति जो किसी अतिरिक्त मान्यताप्राप्त योग्यता के संबंध में पंजीकरण के लिए आवेदन करता है, तो ऐसी फीस, जो विहित की जाए, का भुगतान करेगा। (4) कोई व्यक्ति जिसका पंजीकरण के लिए आवेदन रजिस्ट्रार द्वारा अस्वीकार किया जाता है, ऐसी अस्वीकृति की तिथि से तीन मास के भीतर, परिषद् को अपील दायर कर सकता है तथा उस पर परिषद् का निर्णय अंतिम होगा। 27. (1) धारा 26 के अधीन किया गया प्रत्येक पंजीकरण पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा तथा पांचवे वर्ष की समाप्ति से पूर्व नवीकृत करवाना होगा जिसमें असफल रहने पर व्यक्ति का नाम हटाया गया समझा जाएगा। (2) नवीकरण फीस तथा जुर्माना, यदि कोई हो, के भुगतान पर, रजिस्ट्रार, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में सम्बद्ध व्यक्ति को पंजीकरण का प्रमाण-पत्र जारी करेगा। 28. जहां कोई व्यक्ति, जो पंजीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत करने के बाद वापसी के लिए आवेदन करता है या उसका पंजीकरण अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो आवेदन फीस संमपहृत हो जाएगी।
पंजीकरण के लिए आवेदन की वापसी। रजिस्टर को तैयार करना और उसका रख-रखाव।
रजिस्टर से नाम हटाना।
रजिस्टर से नाम हटाए जाने के आदेश के विरूद्ध अपील। 29. (1) परिषद् ऐसे रूप में और ऐसे ब्यौरे, जो विहित किए जाएं, रखने वाले अलग रजिस्टरों का रख-रखाव करेगी। (2) रजिस्टर, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का केन्द्रीय अधिनियम 1) की धारा 74 के अर्थ के भीतर लोक दस्तावेजों के रूप में समझे जाएंगे। 30. परिषद्, आदेश द्वारा, किसी भौतिक-चिकित्साविद् का नाम रजिस्टर से हटा सकती है, जिसे दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम 2) द्वारा यथा परिभाषित किसी संज्ञेय अपराध का दोषी ठहराया गया है या सम्यक् जांच के बाद वृत्तिक अवचार के लिए दोषी पाया गया है। 31. (1) जहां किसी व्यक्ति का नाम किसी अन्य आधार पर रजिस्टर से हटाया गया है, सिवाए इसके कि वह अपेक्षित भौतिक-चिकित्सा योग्यता नहीं रखता है, तो वह तीस दिन की अवधि, ऐसी फीस सहित ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, के भीतर परिषद् को अपील कर सकता है। परिषद् का निर्णय अन्तिम होगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन कोई भी अपील ग्रहण नहीं की जाएगी, यदि यह आदेश की तिथि से तीस दिन की अवधि की समाप्ति के बाद की जाती है : परन्तु कोई अपील तीस दिन की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद ग्रहण की जा सकती है, यदि आवेदक परिषद् की संतुष्टि कर देता है कि उसके पास उक्त अवधि के भीतर अपील नहीं करने के लिए पर्याप्त कारण थे।134 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) 32. किसी भौतिक-चिकित्साविद् से भिन्न, कोई भी व्यक्ति,-
(क) सरकार में या स्थानीय या अन्य प्राधिकरण द्वारा अनुरक्षित किसी संस्था में भौतिक-चिकित्साविद् के रूप में पद धारण नहीं करेगा ;
भौतिक- चिकित्साविद् के अधिकार तथा विशेषाधिकार।
(ख) राज्य में कहीं भी भौतिक-चिकित्सा व्यवसाय नहीं करेगा तथा ऐसे व्यवसाय के संबंध में कोई व्यय या फीस, जिसका वह हकदार हो सकता है, वसूल नहीं करेगा ;
(ग) किसी भौतिक-चिकित्साविद् द्वारा हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित किए जाने के लिए किसी विधि द्वारा अपेक्षित किसी प्रमाणपत्र को हस्ताक्षरित या अधिप्रमाणित करने के लिए हकदार नहीं होगा ;
(घ) भौतिक-चिकित्सा से संबंधित किसी मामले पर, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का केन्द्रीय अधिनियम 1) के अधीन विशेषज्ञ के रूप में किसी न्यायालय में कोई साक्ष्य देने का हकदार नहीं होगा।
वृृत्तिक आचरण। 33. (1) परिषद्् भौतिक-चिकित्साविद्् के लिए वृृािक आचरण तथा षिष्टाचार तथा नीतिषास्त्र संहिता के मानकों को विहित करते हुए विनियम बना सकती है। (2) उप-धारा (1) के अधीन बनाये गये विनियमों में यह निर्दिष्ट कर सकती है कि उसके किन उल्लंघनों से वृृािक अवचार गठित होगा और तत्समय लागू राज्य विधि में किसी बात के होते हुए भी ऐसे उपबन्ध प्रभावी होंगे। (3) जब कभी कार्यकारी समिति, ऐसी जांच, जो वह ठीक समझे, सिफारिष करती है कि रजिस्टर में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम को वहां से हटाया जाना है, तो यह परिषद् को रिपोर्ट करेगी तथा परिषद्् ऐसी जांच, जो वह ठीक समझें, के बाद, आदेष द्वारा, उक्त रजिस्टर से ऐसे व्यक्ति के नाम को या तो स्थाई रूप से या ऐसी अवधि, जो वह आदेष में विनिर्दिष्ट करे, के लिए हटाने के निर्देष देगी। (4) परिषद्् के आदेष से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे प्ररूप और रीति में, ऐसे समय के भीतर तथा ऐसी फीस के भुगतान पर, जो विहित की जाए, सरकार को अपील प्रस्तुत कर सकता है। (5) ऐसी अपील की प्राप्ति पर, सरकार, सम्बन्धित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के पष्चात््, ऐसे आदेष पारित कर सकती है, जो वह ठीक समझे, जो अन्तिम तथा बाध्यकारी होगा। षिक्षा के मानक। 34. (1) परिषद््, राज्य में मान्यताप्राप्त योग्यता की स्वी—ति के लिए अपेक्षित भौतिक-चिकित्सा के क्षेत्र में षिक्षा के मानकों का अवधारण करने के लिए विनियम बना सकती है। (2) विषिष्टतया और पूर्वगामी षक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विनियमों में निम्नलिखित उपबन्ध कर सकती है,-
(क) अध्ययन की प्र—ति, कालावधि तथा परीक्षा में प्रवेष से पूर्व व्यावहारिक प्रषिक्षण के
लिए वचनबध करवाना ;
(ख) अनुमोदित पाठ््यक्रम का अध्ययन कर रहे छात्रों के लिए उपकरण तथा सुविधाएं
उपलब्ध करवाना ;
(ग) परीक्षाओं के विषय तथा मानकों का रखरखाव करवाना ; (घ) परीक्षाओं में प्रवेष की कोई अन्य षर्तें।
सरकार को रिपोर्ट इत्यादि प्रस्तुत करना।
निधि।
(3) परिषद्् द्वारा विनियम सरकार को स्वी—ति हेतु प्रस्तुत किये जाएंगे। (4) कार्यकारी समिति इन विनियमों के प्रभावोत्पादकता पर परिषद्् को समय-समय पर रिपोर्ट करेगी तथा परिषद्् को उसमें ऐसे संषोधनों, जो वह उचित समझे, के लिए सिफारिष करेगी। 35. (1) परिषद््, सरकार को इसके कार्यवृृाों, रिपोर्टों, इसके लेखों के उद्धरण तथा अन्य सूचनाएं, जब भी माँग की जाए, प्रस्तुत करेगी। (2) परिषद्् प्रतिवर्ष एक बार, ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समय, जो विहित किया जाए, पर पूर्व वर्ष के दौरान इसके क्रियाकलापों के यथार्थ तथा पूर्ण लेखे देते हुए वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगी तथा उसकी प्रति सरकार को भेजी जाएगी। 36. (1) परिषद्् की निधि निम्नलिखित से मिलकर बनेगी-
(क) पंजीकरण फीस; (ख) सरकार से प्राप्त अनुदान, यदि कोई हो; (ग) सभी प्राप्त फीस, सभी आय जैसे कि सम्पाियों से व्युत्पन किराया तथा लाभ तथा परिषद्् में निहित निधियाँ, सरकार से प्राप्त सभी अनुदान तथा हानि, यदि कोई हो, किसी स्रोत से प्राप्त वृृत्तिदान तथा दान, सभी अन्य विविध प्राप्तियाँ तथा परिषद्् के कार्यकलापों के संबंध में प्राप्त सभी प्रेषण।
(2) निधि, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का केन्द्रीय अधिनियम 2) में यथा परिभाषित अनुसूचित बैंक में जमा करवाई जाएगी, जैसा परिषद द्वारा विनिष्चित किया जाए।135 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) (3) परिषद्् निम्नलिखित प्रयोजनों के उपगत खर्च के लिए सक्षम होगी, अर्थात््ः-
(क) रजिस्ट्रार तथा परिषद्् द्वारा अनुरक्षित अमले के वेतन तथा भत्ते; (ख) परिषद्् तथा कार्यकारी समिति के सदस्यों को भुगतान की गई फीस तथा भत्ते; (ग) ऐसे अन्य खर्च, जो इस अधिनियम के अधीन कर्तव्यों के पालन तथा —त्यों के
निर्वहन के लिए आवष्यक हों।
बजट।
लेखे और संपरीक्षा।
डिग्री इत्यादि के अप्राधि—त रूप से प्रदान करने पर प्रतिषेध। 37. परिषद््, प्रतिवर्ष ऐसे प्ररूप में तथा ऐसे समय, जो विहित किया जाए, पर आगामी विाीय वर्ष के संबंध में अनुमानित प्राप्तियों तथा खर्च को दर्षाते हुए बजट तैयार करेगी तथा उसकी एक प्रति सरकार को भेजी जाएगी। 38. (1) परिषद्् की वार्षिक रिपोर्ट तथा लेखे, इसके द्वारा अनुमोदित किये जाएंगे तथा प्रतिवर्ष संपरीक्षित करवाए जाएंगेः परन्तु उद्गृहीत तथा संगृृहीत फीस की प्राप्ति तथा खर्च के लेखे वार्षिक रिर्पोट में परिषद्् द्वारा सम्यक् रूप से प्रमाणित किये जाएंगे। (2) नियन्त्रक तथा महालेखापरीक्षक द्वारा अनुमोदित पैनल से कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त किसी चार्टर्ड संपरीक्षक द्वारा संपरीक्षा की जाएगी और परिषद्् ऐसी संपरीक्षा की लागत वहन करेगी। (3) परिषद्् के लेखे, जब कभी सरकार चाहे, राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी द्वारा संपरीक्षिक किए जा सकते हैं। 39. (1) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों मंंें यथा उपबन्धित के सिवाय, किसी भी व्यक्ति को कोई उपाधि पत्र, प्रमाण-पत्र या अन्य दस्तावेज अनुदत्त, प्रदान, जारी नहीं किया जाएगा अथवा स्वयं अनुदत्त, प्रदान या जारी करने का हकदार नहीं होगा, यह कथित करते हुए या अर्थ लगाते हुए कि उसका धारक, प्राप्तिकर्ता या प्रापक भौतिक-चिकित्साविद्् के रूप में व्यवसाय करने के लिए योग्य है। (2) जो कोई भी उप-धारा (1) के उपबन्धों का उल्लंघन करता है, तो दोषसिद्धि पर, ऐसे जुर्माने, जो पाँच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा और यदि उल्लंघना करने वाला व्यक्ति कोई संध है, तो ऐसे संघ का प्रत्येक सदस्य, जो जानते हुए या जानबूझकर उल्लंघना प्राधि—त करता है अथवा अनुज्ञा देता है, तो दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने, जो दो लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा। 40. (1) इस अधिनियम के अधीन पंजी—त व्यक्ति से भिन्न कोई भी व्यक्ति, भौतिक-चिकित्साविद्् के रूप में व्यवसाय नहीं करेगा। (2) कोई भी व्यक्ति, जो इस धारा की उल्लंघना में कार्य करता है, तो दोषसिद्धि पर,-
इस अधिनियम के अधीन अपंजी—त व्यक्तियों द्वारा व्यवसाय न करना। (क) प्रथम अपराध की दषा में ऐसी अवधि, जो छह मास तक बढ़ाई जा सकती है, के कारावास से और ऐसे जुर्माने, जो पचास हजार रुपये तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डनीय होगा; और
(ख) द्वितीय अथवा पष्चात्वर्ती अपराध की दषा में, ऐसी अवधि, जो एक वर्ष तक बढ़ायी जा सकती है, किन्तु जो तीन मास से कम नहीं होगी, के कारावास से और ऐसे जुर्माने, जो दो लाख रूपये से कम नहीं होगा, जिसे पाँच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा।
41. इस अधिनियम के अधीन नियुक्त परिषद्् के प्रत्येक सदस्य, सभी अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 25 के अर्थ के भीतर लोक सेवक समझे जाएंगे।
परिषदों के सदस्यों, अधिकारियों इत्यादि का लोक सेवक होना। अपराध का संज्ञान।
प्ांजीकरण प्रमाण-पत्र को अभ्यर्पण करने में असफल होना।
सरकार द्वारा निर्देषन। 42. कोई भी न्यायालय, परिषद्् द्वारा इस निमित्त प्राधि—त व्यक्ति द्वारा लिखित में की गई षिकायत के सिवाय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान नहीं लेगा। 43. यदि कोई व्यक्ति, जिसका नाम रजिस्टर से हटाया गया है, पर्याप्त कारण के बिना अपने पंजीकरण के प्रमाण-पत्र को तुरन्त अभ्यर्पण करने या पंजीकरण के प्रमाण-पत्र का नवीकरण करवाने या दोनों में असफल रहता है तो, वह दोषसिद्धि पर, ऐसी असफलता के लिए पचास हजार रूपये प्रति मास के जुर्माने से दण्डनीय होगा। 44. (1) परिषद््, ऐसे निर्देषों को कार्यान्वित करेगी जो इस अधिनियम के दक्षतापूर्ण प्रषासन के लिए सरकार द्वारा, समय-समय पर जारी किए जाएं। (2) यदि इस अधिनियम के अधीन इसके प्राधिकार के प्रयोग के संबंध में तथा इसके —त्यों के निर्वहन में, इसके तथा सरकार के बीच कोई वाद उत्पन्न होता है तो, ऐसे वाद पर सरकार का निर्णय अन्तिम होगा।136 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) परिषद्् का अधिक्रमण करने की षक्ति।
45. (1) यदि, सरकार को किसी समय यह प्रतीत होता है कि परिषद्् इस अधिनियम के द्वारा या के अधीन इसे सौंपे गए कर्तव्यों की पालना करने में असफल रहती है अथवा निरंतर चूक करती है, अथवा इस अधिनियम के द्वारा या के अधीन प्रदत्त किन्हीं षक्तियों का अधिक प्रयोग करती है अथवा दुरूपयोग करती है, अथवा जानबूझकर या पर्याप्त कारण के बिना सरकार द्वारा जारी किन्हीं निर्देषों की पालना करने में असफल रहती है, तो सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, ऐसी अवधि, जो अधिसूचना में विहित की जाए, के लिए परिषद्् का अधिक्रमण कर सकती है : परन्तु इस उप-धारा के अधीन अधिसूचना जारी होने से पूर्व, सरकार, परिषद्् को युक्ति-युक्त समय देगी कि क्यों न इसका अधिक्रमण कर दिया जाए और परिषद्् के स्पष्टीकरण तथा आक्षेप यदि कोई हो, पर विचार किया जाएगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन अधिसूचना के प्रकाषन के बाद,-
(क) परिषद्् के सभी सदस्य अधिक्रमण की तिथि को उनकी पदावधि की समाप्ति के न
होते हुए भी, अपने पदों को छोड़ेंगे;
(ख) सभी षक्तियाँ तथा कर्तव्यों, जो इस अधिनियम के द्वारा या अधीन परिषद्् के द्वारा या के निमिा प्रयोग की जा सकती है या का पालन किया जा सकता है, अधिक्रमण की अवधि के दौरान ऐसे व्यक्ति या व्यक्त्यिों, जिन्हें सरकार निर्देष करे, द्वारा प्रयोग और पालन किया जाएगा;
(ग) अधिक्रमण की अवधि के दौरान, परिषद्् में निहित सभी संपाियां, सरकार में निहित
होंगी।
(3) उप-धारा (1) के अधीन जारी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट अधिक्रमण की अवधि की समाप्ति पर, सरकार-
(क) अधिक्रमण की अवधि को ऐसी और अवधि के लिए बढ़ा सकती है जो यह आवष्यक
समझे, किन्तु ऐसी अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होगी; या
(ख) विद्यमान परिषद्् को समाप्त करने तथा नई परिषद्् के गठन के लिए कदम
उठाएगी।
नियम बनाने की षक्ति।
विनियम बनाने की षक्ति।
46. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सभी मामलों जिनके लिए उपबन्ध इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हो, के लिए उपबन्ध करने हेतु नियम बना सकती है। (2) उप-धारा (1) के अधीन बनाये गए नियम पूर्व प्रकाषन के अध्यधीन होंगे। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाये जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा। 47. (1) परिषद््, सरकार की पूर्व स्वीकृति से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन इसके —त्यों का निर्वहन करने और सामान्यतः इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने में समर्थ होने के लिए इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों से अन्असंगत विनियम बना सकती है। (2) विषिष्टतया और पूर्वगामी षक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबन्ध किए जा सकते हैं, अर्थात्् :-
(क) परिषद््् की सम्पत्ति का प्रबन्धन; (ख) परिषद्् के लेखों का रखरखाव तथा संपरीक्षा; (ग) परिषद्् तथा इसकी समितियों के कार्य संचालन की प्रक्रिया के लिए नियम; (घ) निरीक्षकों की नियुक्ति के लिए अर्हताएं, प्रक्रिया, उनकी षक्तियां तथा कर्तव्य; (ङ) प्रारम्भ किए जाने वाले पाठ्यक्रमों तथा अध्ययन या प्रषिक्षण की अवधि, परीक्षा के विषयों और उसमें मान्यताप्राप्त भौतिक-चिकित्साविद्् अर्हता प्रदान करने के लिए किसी मान्यताप्राप्त विष्वविद्यालय या किसी संस्था से प्राप्त की जाने वाली प्रवीणता के मानक;
(च) भौतिक-चिकित्साविद्ों के अध्ययन या प्रषिक्षण के लिए अमले, उपकरण, आवास,
प्रषिक्षण तथा अन्य सुविधाओं के मानक;
(छ) परीक्षाओं का संचालन, परीक्षकों की अर्हताएं और ऐसी परीक्षाओं में प्रवेष की षर्तें; (ज) धारा 33 के अधीन व्यावसायिक भौतिक-चिकित्साविद््ों द्वारा अनुपालित किये जाने
वाले व्यावसायिक आचरण, षिष्टाचार और नीतिषास्त्र संहिता के मानक; (झ) कोई अन्य मामला, जो विनियम द्वारा बनाया जाना है या बनाया जा सकता है। (3) सरकार, इस धारा तथा इसके अधीन बनाए गये किन्हीं विनियमों को, अधिसूचना द्वारा, रद््द या संषोधित कर सकती है, विनियम तदनुसार प्रभावहीन या संषोधित होंगे।137 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) कठिनाईयां दूर करने की षक्ति। 48. यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाषित आदेष द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्असंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो कठिनाई दूर करने के लिए आवष्यक या समीचीन प्रतीत हों : परन्तु इस धारा के अधीन किया गया कोई भी ऐसा आदेष इस अधिनियम के प्रारम्भ होने से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा। .............
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
8810—L.R.—H.G.P., Pkl.