भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 22 जून, 2020
संख्या लैज.7/2020.- दि इंडियन स्टाम्प (हरियाणा अॅमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2020, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 10 जून, 2020 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 7
भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2020 भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम भारतीय स्टाम्प (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से लागू होगा। 2. भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 47-क के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
1899 के केन्द्रीय अधिनियम 2 की धारा 47-क का प्रतिस्थापन। ''47-क. कम मूल्य की लिखतें कैसे निपटाई जानी हैं.- (1) यदि किसी सम्पत्ति का बाजार मूल्य, जो किसी लिखत की विषयवस्तु है, जिस पर शुल्क, ऐसी लिखत में बताए गए बाजार मूल्य पर प्रभार्य है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार अवधारित न्यूनतम मूल्य से कम है, तो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रीकरण अधिकारी लिखत को रजिस्ट्रीकृत करने के बाद, उसे ऐसी सम्पत्ति के बाजार मूल्य तथा उस पर भुगतानयोग्य उचित शुल्क के अवधारण के लिए कलक्टर को भेजेगा।
(2) उप-धारा (1) केे अधीन संदर्भ की प्राप्ति पर, कलक्टर पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने के बाद तथा ऐसी रीति, जो नियमों द्वारा विहित की जाए, में कोई जांच करने के बाद, सम्पत्ति का बाजार मूल्य तथा यथा पूर्वोक्त शुल्क का अवधारण करेगा तथा शुल्क की कम राशि, यदि कोई हो, शुल्क के भुगतान हेतु दायी व्यक्ति द्वारा भुगतानयोग्य होगी।
(3) कलक्टर, स्वःप्रेरणा से या रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) के अधीन नियुक्त रजिस्ट्री-महानिरीक्षक या जिले के रजिस्ट्रार से संदर्भ की प्राप्ति पर जिसकी अधिकारिता के भीतर सम्पत्ति, या उसका कोई भाग, जो लिखत की विषयवस्तु है, स्थित है या भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा या इस निमित्त या अन्यथा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा संपरीक्षा की रिपोर्ट की प्राप्ति पर, उप-धारा (1) के अधीन उसे पूर्व में नहीं भेजे गए किसी लिखत के रजिस्ट्रीकरण की तिथि से तीन वर्ष के भीतर इसके बाजार मूल्य, तथा उस पर भुगतानयोग्य शुल्क के सहीपन बारे अपनी स्वयं की संतुष्टि के प्रयोजन के लिए लिखत की मांग तथा परीक्षण कर सकता है तथा यदि ऐसे परीक्षण के बाद उसे विश्वास करने का कारण है कि लिखत में बाजार मूल्य ठीक नहीं बताया गया है, तो वह उप-धारा (2) में उपबन्धित प्रक्रिया के अनुसार बाजार मूल्य तथा यथा पूर्वोक्त शुल्क का अवधारण कर सकता है; तथा शुल्क की कम राशि, यदि कोई हो, शुल्क के भुगतान हेतु दायी व्यक्ति द्वारा भुगतानयोग्य होगी। 140 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 22, 2020 (ASAR. 1, 1942 SAKA) परन्तु उपरोक्त अवधि की संगणना करने में आदेश, जिसके विरूद्ध अपील की गई, की प्रति प्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय निकाल दिया जाएगा :
परन्तु यह और कि अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
(5) उप-धारा (4) के अधीन अपील में पारित आदेश तथा उप-धारा (2) अथवा उप-धारा (3) के अधीन कलक्टर द्वारा पारित आदेश किसी सिविल न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।
47-ख. मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी के कृत्य.- (1) मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी, आयुक्त के समक्ष लम्बित या निपटाई गई किसी अपील के अभिलेख किसी भी समय मांग सकता है।
(2) उप-धारा (1) केे अधीन मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी, उप-धारा (1) के अधीन मांगी गई किसी अपील का परीक्षण कर सकता है और ऐसे आदेश, जो वह उचित समझे, पारित कर सकता है :
परन्तु वह इस धारा के अधीन आयुक्त की किसी कार्यवाही या आदेश को परिवर्तित करने वाले या उपांतरित करने वाले और अधिकार संबंधी किसी प्रश्न को प्रभावित करने वाले कोई भी आदेश प्रभावित पक्षकार को सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित नहीं करेगा।''।
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बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
8810—L.R.—H.G.P., Pkl.