Haryana Government Gazette
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© Govt. of Haryana
No. 19-2021/Ext.] चण्डीगढ़, मंगलवार, दिनांक 2 फरवरी, 2021
(13 माघ, 1942 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
9-13 हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संषोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 31)
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं
भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं
(vii)9 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 2, 2021 (MAGH. 13, 1942 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 02 फरवरी, 2021
संख्या लैज. 41/2020.- दि हरियाणा पंचायती राज (सेकण्ड अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2020, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 27 जनवरी, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद््द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 31
हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020
हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994,
को आगे संषोधित करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित होः-
1. यह अधिनियम हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है। संक्षिप्त नाम। 2. हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 9 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 की धारा 9 का प्रतिस्थापन। "9. ग्राम पंचायत में आरक्षण तथा समान प्रतिनिधित्व.-(1) किसी ग्राम पंचायत में सभी वार्डों तथा किसी खण्ड में सभी ग्राम पंचायतों को इस धारा के प्रयोजन के लिए ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में अनुक्रम में क्रमांकित किया जाएगा :
परन्तु ऐसे अनुक्रमिक क्रमांकन के लिए, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित वार्डों या ग्राम पंचायतों को एक ग्रुप के रूप में तथा शेष वार्डों या ग्राम पंचायतों को दूसरे ग्रुप के रूप में समझा जाएगा।
(2) प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंच के पद, ऐसे ढंग में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या, उस ग्राम सभा क्षेत्र में कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के रूप में उस ग्राम पंचायत में स्थानों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में यथाशक्य निकटतम होगी तथा ऐसे स्थान, अनुसूचित जातियों से संबंधित जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता रखने वाले ऐसे वार्डों को आबंटित किए जाएंगे।
(3) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु, कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, किसी ग्राम पंचायत के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकती है जो उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, किसी ग्राम पंचायत के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करती है तथा आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेनः
परन्तु यदि किसी ग्राम पंचायत में, जहाँ अनुसूचित जातियों के लिए केवल एक ही वार्ड आरक्षित है, तो केवल महिला, जोे अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है और अनुसूचित जाति से संबंधित है, को ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा।
(4) प्रत्येक पंचायत में पिछड़े वर्गों से संबंधित एक पंच होगा, यदि इसकी जनसंख्या, सभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या के दो प्रतिशत अथवा से अधिक है और ऐसा स्थान, पिछड़े वर्गाें से संबंधित व्यक्तियों की जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता रखने वाले ऐसे वार्ड को आबंटित किया जाएगा।
व्याख्या.- यदि किसी ग्राम पंचायत का एक ही वार्ड, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए वांछनीय है, तो अधिमान अनुसूचित जातियों को दिया जाएगा और ग्राम पंचायत का आगामी वांछनीय वार्ड पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित होगा।10 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 2, 2021 (MAGH. 13, 1942 SAKA) (5) किसी खण्ड में ग्राम पंचायतों के सरपंचों के पदों को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किया जाएगा और आरक्षित पदों की संख्या, उस खण्ड की कुल जनसंख्या में खण्ड में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के अनुसार खण्ड में सरपंचों के पदों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में होगी और ऐसे स्थान, प्रथमतः अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली और दूसरी बार अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की आगामी सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली भिन्न-भिन्न ग्राम पंचायतों के लिए चक्रानुक्रम में होंगे और इसी प्रकार जब तक अंतिम वांछनीय ग्राम पंचायत आरक्षित नहीं की जाती है और उसके बाद क्रम दुबारा से आरम्भ होगाः
परन्तु सरपंच का पद, अनुसूचित जातियों के लिए केवल तभी आरक्षित होगा, यदि उस ग्राम पचांयत में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या के दस प्रतिशत से अधिक है। (6) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, ऐसी ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ सकती है, जो उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, ऐसी किसी ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए सरपंच के पद के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करती है और आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेन। (7) किसी खण्ड में सरपंच के कुल पदों की संख्या का आठ प्रतिशत तथा आगामी उच्चतर पूर्णांक का पूर्णांकित, यदि दशमलव मूल्य 0.5 अथवा उससे अधिक है, पिछडे़ वर्ग (क) के लिए डॅ्रा आफ लॉटस के माध्यम से आरक्षित होगी और ऐेसे स्थान, प्रत्येक उत्तरवर्ती आम निर्वाचन में ग्राम पंचायतों के लिए चक्रानुक्रम में होंगेः
परन्तु यदि कोई ग्राम पंचायत डॅ्रा आफ लॉटस के माध्यम से आरक्षित की गई हैं किन्तु पिछड़े वर्ग (क) से सम्बंधित ग्राम सभा में सरपंच के रूप में निर्वाचित किए जाने के लिए अन्यथा से योग्य कोई सदस्य नहीं है, तो ऐसी ग्राम पंचायत के प्रतिस्थापन हेतु, शेष अनारक्षित पंचायतों के लिए डॅ्रा आफ लॉटस से किया जायेगा।
(8) वार्डों की संख्या प्रत्येक दस वर्षीय जनगणना के बाद ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में पुनः नियत की जाएगी।"।
3. मूल अधिनियम की धारा 10 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
"10.पदावधि.- (1) सरपंच की पदावधि, जब तक अन्यथा से हटाया नहीं जाता है, पाँच वर्ष होगी।
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 की धारा 10 का प्रतिस्थापन। (2) ऐसे प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट तिथि तथा समयावधि पर ग्राम सभा के उपस्थित सदस्यों के गुप्त मतदान के माध्यम से किए गए मतों के कम से कम दो तिहाई मतों द्वारा पारित संकल्प के परिणामस्वरूप ऐसे प्राधिकारी, जो विहित किया जाए, के आदेश द्वारा किसी सरपंच को उसके पद से हटाया जा सकता हैः
परन्तु विहित प्राधिकारी द्वारा ऐसा कोई भी मतदान तब तक नहीं करवाया जाएगा जब तक ग्राम सभा के कुल सदस्यों के कम से कम आधे सदस्यों द्वारा इस निमित्त माँग नहीं की जाती है। (3) उप-धारा (2) के अधीन की गई माँग पर, उप-धारा (2) में यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, उसकी यथार्थता की जांच करने के बाद, माँग प्राप्ति की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर ग्राम सभा के गुप्त मतदान के प्रयोजन के लिए तिथि तथा समयावधि अधिसूचित करेगाः परन्तु कोई भी ऐसी प्रक्रिया, सरपंच के चुनाव की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रारम्भ नहीं की जाएगी और हटाने के लिए कोई पश्चात््वर्ती प्रस्ताव, सरपंच को हटाने के लिए किसी प्र्र्रस्ताव पर विचार करने हेतु ग्राम सभा के अन्तिम मतदान के एक वर्ष के मध्यांतर में नहीं लाया जाएगा।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 59 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 की धारा 59 का प्रतिस्थापन।
"59. आरक्षण तथा समान प्रतिनिधित्व.-(1) पंचायत समिति के सभी वार्डों और राज्य में सभी पंचायत समितियों को इस धारा के प्रयोजन के लिए ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में अनुक्रम में क्रमांकित किया जाएगा :
परन्तु ऐसे अनुक्रमिक क्रमांकन के लिए, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित वार्डों तथा पंचायत समितियों को एक ग्रुप के रूप में तथा शेष वार्डों तथा पंचायत समितियों को दूसरे ग्रुप के रूप में समझा जाएगा।11 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 2, 2021 (MAGH. 13, 1942 SAKA) (2) प्रत्येक पंचायत समिति में सदस्य के पद, ऐसे ढंग में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या, उस पंचायत समिति के क्षेत्र में कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के रूप में उस पंचायत समिति में स्थानों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में यथाशक्य निकटतम होगी तथा ऐसे स्थान, अनुसूचित जातियों से संबंधित जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता रखने वाले ऐसे वार्डों को आबंटित किए जाएंगे।
(3) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु, कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, पंचायत समिति के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकती है, जो उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, पंचायत समिति के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करती है और आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेनः
परन्तु यदि किसी पंचायत समिति में, जहाँ अनुसूचित जातियों के लिए केवल एक ही वार्ड आरक्षित है, तो केवल महिला, जोे अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है और अनुसूचित जन-जातियों से संबंधित है, को ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा।
(4) किसी पंचायत समिति में सदस्यों के पदों की कुल संख्या का आठ प्रतिशत तथा आगामी उच्चतर पूर्णांक का पूर्णांकित, यदि दशमलव मूल्य 0.5 अथवा उससे अधिक है, तो इस शर्त के अध्यधीन पिछड़े वर्ग (क) के लिए ड्रॅा ऑफ लॉटस के माध्यम से आरक्षित होगा कि ऐसे आरक्षित पदों की कुल संख्या दो से कम नहीं होगी और ऐसे स्थान, प्रत्येक उत्तरवर्ती आम निर्वाचन में भिन्न-भिन्न वार्डों के लिए चक्रानुक्रम में होंगे ।
(5) राज्य में पंचायत समितियों के अध्यक्ष के पदों को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किया जाएगा और आरक्षित पदों की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के अनुसार राज्य में अध्यक्ष के पदों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में होगी और ऐसे स्थान, प्रथमतः अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली और दूसरी बार अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की आगामी सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली भिन्न-भिन्न पंचायत समितियों के लिए चक्रानुक्रम में होंगे और इसी प्रकार जब तक अंतिम वांछनीय पंचायत समिति आरक्षित नहीं की जाती है और उसके बाद क्रम दुबारा से आरम्भ होगाः
परन्तु किसी पंचायत समिति में अध्यक्ष का पद, अनुसूचित जातियों के लिए केवल तभी आरक्षित होगा, यदि उस पचांयत समिति में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या के दस प्रतिशत से अधिक है।
(6) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, ऐसी किसी पंचायत समिति से चुनाव लड़ सकती है, जो उप-धारा (1) के अधीन उप ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, ऐसी किसी पंचायत समिति से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अध्यक्ष के पद के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करती है और आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेन है।
(7) वार्डों की संख्या प्रत्येक दस वर्षीय जनगणना के बाद ऐसी रीति, जो विहित की जाए,
में पुनः नियत की जाएगी।"।
5. मूल अधिनियम की धारा 62 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात््ः-
''62क सदस्यों की पदावधि.-(1) पंचायत समिति के सदस्यों की पदावधि, जब तक
अन्यथा हटाया नहीं जाता है, पांच वर्ष होगी ।
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 में धारा 62क का रखा जाना । (2) ऐसे प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट तिथि तथा समयावधि पर सम्बद्ध वार्ड के उपस्थित सदस्यों के गुप्त मतदान के माध्यम से किए गए मतों के कम से कम दो तिहाई मतों द्वारा पारित संकल्प के परिणामस्वरूप ऐसे प्राधिकारी, जो विहित किया जाए, के आदेश द्वारा पंचायत समिति के किसी सदस्य को उसके पद से हटाया जा सकता हैः
परन्तु विहित प्राधिकारी द्वारा ऐसा कोई भी मतदान तब तक नहीं करवाया जाएगा जब तक सम्बद्ध वार्ड के कुल मतदाताओं के कम से कम आधे मतदाताओं द्वारा इस निमित्त माँग नहीं की जाती है।12 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 2, 2021 (MAGH. 13, 1942 SAKA) (3) उप-धारा (2) के अधीन की गई माँग पर, उप-धारा (2) में यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, उसकी यथार्थता की जांच करने के बाद, माँग प्राप्ति की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर सम्बद्ध वार्ड के गुप्त मतदान के प्रयोजन के लिए तिथि तथा समयावधि अधिसूचित करेगाः परन्तु कोई भी ऐसी प्रक्रिया, सदस्य के चुनाव की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रारम्भ नहीं की जाएगी और हटाने के लिए कोई किसी पश्चात््वर्ती प्रस्ताव, पंचायत समिति के उस सदस्य को हटाने के लिए किसी प्र्र्रस्ताव पर विचार करने हेतु सम्बद्ध वार्ड के अन्तिम मतदान के एक वर्ष के मध्यांतर में नहीं लाया जाएगा।''।
6. मूल अधिनियम की धारा 120 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 की धारा 120 का प्रतिस्थापन।
"120. आरक्षण तथा समान प्रतिनिधित्व.-(1) जिला परिषद्् के सभी वार्डों और राज्य की सभी जिला परिषदों को इस धारा के प्रयोजन के लिए ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में अनुक्रम में क्रमांकित किया जाएगा :
परन्तु ऐसे अनुक्रमिक क्रमांकन के लिए, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित जिला परिषद्् के वार्डों आरक्षित को एक ग्रुप के रूप में तथा जिला परिषद् के शेष वार्डों को दूसरे ग्रुप के रूप में समझा जाएगा।
(2) प्रत्येक जिला परिषद्् में सदस्य के पद, ऐसे ढंग में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या, उस जिला परिषद्् के क्षेत्र में कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के रूप में उस जिला परिषद्् में स्थानों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में यथाशक्य निकटतम होगी तथा ऐसे स्थान, अनुसूचित जातियों से संबंधित जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता रखने वाले ऐसे वार्डों को आबंटित किए जाएंगे। (3) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु, कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, जिला परिषद्् के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकती है, जो उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, को केवल जिला परिषद्् के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करता है और आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेनः परन्तु यदि किसी जिला परिषद्् में, जहाँ अनुसूचित जातियों के लिए केवल एक ही वार्ड आरक्षित है, तो केवल महिला, जोे अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है और अनुसूचित जन-जातियों से संबंधित है, को ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा। (4) किसी जिला परिषद्् में सदस्यों के पदों की कुल संख्या का आठ प्रतिशत तथा आगामी उच्चतर पूर्णांक का पूर्णांकित, यदि दशमलव मूल्य 0.5 अथवा उससे अधिक है, तो इस शर्त के अध्यधीन पिछड़े वर्ग (क) के लिए ड्रॅा ऑफ लॉटस के माध्यम से आरक्षित होगा कि ऐसे आरक्षित पदों की कुल संख्या दो से कम नहीं होगी और ऐसे स्थान, प्रत्येक उत्तरवर्ती आम निर्वाचन में भिन्न-भिन्न वार्डों के लिए चक्रानुक्रम में होंगे;
(5) राज्य में जिला परिषदों के अध्यक्ष के पद अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित होंगे और आरक्षित पदों की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के अनुसार राज्य में प्रधान के पदों की कुल संख्या के समरूप अनुपात में होगी और ऐसे स्थान, प्रथमतः अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली और दूसरी बार अनुसूचित जातियों की जनसंख्या की आगामी सबसे बड़ी अधिकतम प्रतिशतता रखने वाली भिन्न-भिन्न जिला परिषदों के लिए चक्रानुक्रम में होंगे और इसी प्रकार जब तक अंतिम वांछनीय जिला परिषद्् आरक्षित नहीं की जाती है और उसके बाद क्रम दुबारा से आरम्भ होगाः परन्तु किसी जिला परिषद्् में प्रधान का पद, अनुसूचित जातियों के लिए केवल तभी आरक्षित होगा, यदि उस जिला परिषद्् में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या के दस प्रतिशत से अधिक है।
(6) समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु कोई महिला, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, किसी जिला परिषद्् को ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकती है, जो उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में सम संख्या प्राप्त करती है तथा महिला से भिन्न कोई व्यक्ति, जो अन्यथा से निर्वाचित किए जाने के लिए योग्य है, ऐसी किसी जिला परिषद्् के ऐसे वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, जो किसी आम निर्वाचन में उप-धारा (1) के अधीन उस ग्रुप के लिए प्रधान के पद के लिए अनुक्रमिक क्रमांकन में विषम संख्या प्राप्त करती है और आगामी आम निर्वाचन में विपर्ययेन।
(7) वार्डों की संख्या प्रत्येक दस वर्षीय जनगणना के बाद ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में पुनः नियत की जाएगी।"।13 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 2, 2021 (MAGH. 13, 1942 SAKA) 7. मूल अधिनियम की धारा 123 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात््ः-
''123क. सदस्यों की पदावधि.-(1) जिला परिषद्् के सदस्यों की पदावधि, जब तक अन्यथा
हटाया नहीं जाता है, पांच वर्ष होगी ।
1994 के हरियाणा अधिनियम 11 में धारा 123क का रखा जाना । (2) ऐेसे प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट तिथि तथा समयावधि पर सम्बद्ध वार्ड के उपस्थित मतदाताओं के गुप्त मतदान के माध्यम से किए गए मतों के कम से कम दो तिहाई मतों द्वारा पारित संकल्प के परिणामस्वरूप ऐसे प्राधिकारी जो विहित किया जाए, के आदेश द्वारा जिला परिषद के किसी सदस्य को उसके पद से हटाया जा सकता हैः
परन्तु विहित प्राधिकारी द्वारा ऐसा कोई भी मतदान तब तक नहीं करवाया जाएगा जब तक सम्बद्ध वार्ड के कुल मतदाताओं के कम से कम आधे मतदाताओं द्वारा इस निमित्त माँग नहीं की जाती है।
(3) उप-धारा (2) के अधीन की गई माँग पर, उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, उसकी यथार्थता की जांच करने के बाद, माँग प्राप्ति की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर सम्बद्ध वार्ड के गुप्त मतदान के प्रयोजन के लिए तिथि तथा समयावधि अधिसूचित करेगाः
परन्तु कोई भी ऐसी प्रक्रिया, सदस्य के चुनाव की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रारम्भ नहीं की जाएगी और हटाने के लिए कोई किसी पश्चात््वर्ती प्रस्ताव, जिला परिषद्् के उस सदस्य को हटाने के लिए किसी प्र्र्रस्ताव पर विचार करने हेतु सम्बद्ध वार्ड के अन्तिम मतदान के एक वर्ष के मध्यांतर में नहीं लाया जाएगा।''।
व्यावृृत्ति। 8. (1) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रारम्भ के बाद, किन्तु हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रारम्भ के बाद पंचायती राज संस्थाओं के प्रथम आम निर्वाचन आयोजित किए जाने से पूर्व उत्पन्न होने वाली किसी रिक्ति को हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रारम्भ से पूर्व लागू विधि के अनुसार भरा जाएगा ।
(2) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 में यथा उपबंधित सरपंच को हटाने के सम्बंध में उपबंध, हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 के प्रारम्भ के बाद पंचायती राज संस्थाओं के प्रथम आम निर्वाचन आयोजित किए जाने के बाद लागू होंगे ।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9058—L.R.—H.G.P., Pkl.