भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 19 फरवरी, 2021
संख्या लैज. 1/2021.- दि हरियाणा अॅकाउन्टअॅबिलिटि ऑफ पब्लिक फाइनेन्नस (अमेन्डमेनट) ऐक्ट, 2020, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 12 फरवरी, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद््द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 1
हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व (संशोधन) अधिनियम, 2020 हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व अधिनियम, 2019, को आगे संशोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व (संशोधन) अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि से लागू होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे।
2. हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व अधिनियम, 2019 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) के वृृहत्् शीर्ष में, ''संपरीक्षा प्रणाली'' शब्दों के स्थान पर, ''आंतरिक संपरीक्षा प्रणाली'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 के वृृहत्् शीर्ष का संशोधन । 3. मूल अधिनियम की धारा 2 में,-
(i) खण्ड (ख) में, ''किसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था'' शब्दों से पूर्व ''आन्तरिक
संपरीक्षा के अध्यधीन'' शब्द रखे जाएंगे ;
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 2 का संशोधन। (ii) खण्ड (ग) में, ''किसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था'' शब्दों से पूर्व'' आन्तरिक
संपरीक्षा के अध्यधीन'' शब्द रखे जाएंगे ;
(iii) खण्ड (घ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्् :-
'(घ)''आन्तरिक संपरीक्षा'' में शामिल हैं आन्तरिक पूर्व-संपरीक्षा, आन्तरिक समवर्ती संपरीक्षा, आन्तरिक नमूना संपरीक्षा, आन्तरिक विशेष संपरीक्षा, आन्तरिक क्रमबद्ध संपरीक्षा, आन्तरिक संपादन संपरीक्षा तथा लेखों की ऐसी अन्य जांच, जो विनिर्दिष्ट की जाए ;';-
(iv) खण्ड (च) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्् :-
'(च)''आन्तरिक समवर्ती संपरीक्षा'' से अभिप्राय है, दैनिक संव्यवहार के लेखों की सतत्् आन्तरिक संपरीक्षा ;';
(v) खण्ड (झ) में,''संपादन संपरीक्षा'' शब्दों के स्थान पर, ''आन्तरिक संपादन संपरीक्षा'' शब्द
प्रतिस्थापित किए जांएगे ;
(vi) खण्ड (ञ) का लोप कर दिया जाएगा ; (vii) खण्ड (ट) में, ''पूर्व-संपरीक्षा'' शब्दों के स्थान पर, ''आन्तरिक पूर्व-संपरीक्षा'' शब्द
प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(viii) खण्ड (ड) में, ''विशेष संपरीक्षा'' शब्दों के स्थान पर,''आन्तरिक विशेष संपरीक्षा'' शब्द
प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(ix) खण्ड (ढ) में,''क्रमबद्ध संपरीक्षा'' शब्दों के स्थान पर, ''आन्तरिक क्रमबद्ध संपरीक्षा'' शब्द
प्रतिस्थापित किए जाएंगे ;
(x) खण्ड (थ) में, ''नमूना संपरीक्षा'' शब्दों के स्थान पर, ''आन्तरिक नमूना संपरीक्षा'' शब्द
प्रतिस्थापित किए जाएंगे।36 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) 4. मूल अधिनियम की धारा 3 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 3 का प्रतिस्थापन ।
''3.लेखों की आन्तरिक संपरीक्षा.- इस अधिनियम में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी तथा नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक (कत्र्तव्य शक्तियां तथा सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 (1971 का केन्द्रीय अधिनियम 56) की शक्तियों तथा कृृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था के संबंध में ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में किसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था की आन्तरिक संपरीक्षा का संचालन करना तथा आन्तरिक संपरीक्षा की लागत की वसूली करना विधिपूर्ण होगा ।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 4 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात््ः- 2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 4 का प्रतिस्थापन ।
''4 राज्य आन्तरिक संपरीक्षा तथा राज्य लेखा विंग का अलग होना-.(1) आन्तरिक संपरीक्षा विंग तथा लेखा विंग होंगी और उनकी अगुवार्ई क्रमशः निदेशक, आन्तरिक संपरीक्षा तथा निदेशक, लेखा द्वारा की जाएगी जो प्रशासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, वित्त विभाग के पर्यवेक्षणाधीन कार्य करेंगी । (2) प्रत्येक लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था या किसी विशिष्टसंस्था के लेखों की आन्तरिक संपरीक्षा तथा रख-रखाव की रीति ऐसी होगी, जो विहित की जाए ।''।
6. मूल अधिनियम की धारा 5 तथा 6 का लोप कर दिया जाएगा ।
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 5 तथा 6 का लोप ।
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 7 का प्रतिस्थापन ।
7. मूल अधिनियम की धारा 7 के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात््ः- ''7. आन्तरिक संपरीक्षा हेतु लेखों को तैयार करने तथा प्रस्तुत करने के लिए प्राधिकरण का दायित्व.- (1) वित्त वर्ष से सम्बन्धित लेखे, प्रत्येक वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद तीन मास के भीतर प्राधिकरण द्वारा आन्तरिक संपरीक्षा हेतु ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में तैयार तथा प्रस्तुत किए जाएंगे। (2) प्राधिकरण, निम्नलिखित ब्यौरों के साथ-साथ लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था के विभिन्न बैंक खातों के ब्यौरों सहित प्रत्येक वर्ष की 30 जून तक या ऐसी तिथि जिस तक संस्था के लिए किसी पृृथक्् अधिनियम द्वारा अनिवार्य किया गया है, को प्रमाणित वित्तीय प्रकटीकरण प्रस्तुत करेगा- (i) विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई लोक-निधियां; (ii) उस पर ब्याज;
(iii) उस तिथि को उपयोग तथा भावी खर्च योजना; (iv) कोई अन्य ब्यौरा, जो विहित किया जाए ।
(3) राज्य सरकार, किसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था, जो वित्त वर्ष के अन्त से तीन मास की समाप्ति पर अनिवार्य वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहती है, को जारी की गई निधियों को रोक सकती है।
(4) राज्य सरकार, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में संपरीक्षा अधिकारी द्वारा यथा परिलक्षित हानि की वसूली हेतु आवश्यक कार्रवाई करेगी।
(5) प्राधिकरण, यह जांच-पड़ताल करेगा कि किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए किसी लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था को उपलब्ध करवाई गई लोक निधियां वित्त वर्ष में खर्च कर ली गई हैं, जिसमें असफल रहने पर, राज्य सरकार मितव्ययिता, दक्षता तथा प्रभाविता, जिनसे संसाधनों का उपयोग किया गया है, से जांच प्रारम्भ कर सकती है तथा सुनवाई का अवसर दिए जाने के बाद-
(i) वित्त वर्ष के भीतर अनुपयोग के लिए स्पष्टीकरण मांग सकती है; (ii) विलम्ब के लिए स्पष्टीकरण मांग सकती है;
(iii) ऐसी निधि पर प्रोद्भूत ब्याज सहित राज्य द्वारा आबंटित निधि को वापस ले सकती
है तथा राज्य सरकार द्वारा नामित बैंक खाते में इसे जमा करवा सकती हैः
परन्तु उपरोक्त वापस ली गई निधि, उपयोग के लिए निश्चित कार्य योजना सहित लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था द्वारा निवेदन प्रस्तुत किए जाने पर राज्य सरकार द्वारा जारी की जा सकती है :
37 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)परन्तु यह और कि भारत के संविधान या तत्समय लागू किसी अन्य विधि
के उपबन्धों के प्रतिकूल कोई भी निधि वापस नहीं ली जाएगी।
7क. लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था को स्थापित या शासित करने वाले विषयों का प्रभाव.- यह अधिनियम, इस अधिनियम के अधीन आन्तरिक संपरीक्षा के अध्यधीन लेखादायी तथा संपरीक्षायोग्य संस्था को स्थापित या शासित करने के किसी विषय के अतिरिक्त होगा तथा के अल्पीकरण में नहीं होगा ।''।
8. मूल अधिनियम की धारा 8 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात््ः-
''8. नियम बनाने की शक्ति.-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यान्वयन के लिए नियम बना सकती है।
2019 के हरियाणा अधिनियम 12 की धारा 8 का प्रतिस्थापन । (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सरकार निम्नलिखित के लिए उपबन्ध करने हेतु नियम बना सकती हैः-
(क) धारा 3 के अधीन आन्तरिक संपरीक्षा के संचालन हेतु तथा लागत की वसूली हेतु रीति;
(ख) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन लेखों की आन्तरिक संपरीक्षा तथा रख-रखाव की रीति;
(ग) धारा 7 की उप-धारा (1) के अधीन आन्तरिक संपरीक्षा के लिए लेखों को तैयार तथा
प्रस्तुत करने के लिए प्ररूप तथा रीति;
(घ) धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन हानि की वसूली के लिए रीति;
(ङ) कोई अन्य मामला, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित किया
जाना है या किया जा सकता है।''।
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बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9073—L.R.—H.G.P., Pkl.