Servants of Knowledge
Haryana Gazette · Government of Haryana

The Haryana Water Resources (Conservation, Regulation and Management) Authority Act, 2020 (Haryana Act No.29 of 2020)

Published 19 February 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
26-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.39/2020
Identifier
in.gazette.haryana.2021-02-19.Extra-Ordinary_Leg-No-39-2020
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

click here for IIIF manifest

Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY

Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 26-2021/Ext.] चण्डीगढ़, शुक्रवार, दिनांक 19 फरवरी, 2021

(30 माघ, 1942 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

1. हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण अधिनियम, 2020 17-28 (2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 29)

2. पंजाब ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) हरियाणा संषोधन अधिनियम, 2020 29 (2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 30)

31-32 3. हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संषोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 32)

33-34 4. हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 33)

35-37 5. हरियाणा लोक वित उत्तरदायित्व (संषोधन) अधिनियम, 2020 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 1)

(केवल हिन्दी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं

भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(xiii)17 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 19 फरवरी, 2021

संख्या लैज. 39/2020.- दि हरियाणा वाटर रिसॉःसज (कॉनसॅवेशॅन रेगुलेशन एण्ड मॅनेजमेन्ट) ऑःथॅारिटि ऐक्ट, 2020, निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 12 फरवरी, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद्‌्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2020 का हरियाणा अधिनियम संख्या 29

हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण अधिनियम, 2020 हरियाणा राज्य के भीतर जल संसाधनों अर्थात्‌्‌ भू-जल तथा सतही जल के संरक्षण, प्रबन्धन तथा विनियमन के लिए तथा उसके न्यायसम्मत, साम्यापूर्ण तथा सतत उपयोग, प्रबन्धन, विनियमन हेतु जल उपयोग की दरें नियत करने को सुनिश्चित करने हेतु हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण की स्थापना करने के लिए तथा उससे संबंधित तथा उनसे आनुंषगिक मामलों के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

1. (1) यह अधिनियम हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है।

संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भ। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में होगा। (3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से लागू होगा।

परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "प्राधिकरण" से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन स्थापित हरियाणा जल संसाधन

(संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण;

(ख) "बल्क जल की हकदारी" से अभिप्राय है, हकदारी प्रदान करने वाले आदेश में विशिष्ट रूप से उपबंधित किसी विशिष्ट प्रवर्ग या प्रवर्गों के उपयोग के लिए तथा किसी विशिष्ट समयावधि के भीतर परिदेय किसी परियोजना, नदी व्यवस्था या भण्डारण सुविधा द्वारा उत्पादित सतही जल संसाधनों के किसी हिस्से की अनुमापी हकदारी ;

(ग) "उपयोग के प्रवर्ग" से अभिप्राय है, विभिन्न प्रयोजनों जैसे पीने, घरेलू सिंचाई, औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जल संसाधनों का उपयोग तथा इसमें ऐसे अन्य प्रयोजन भी शामिल हैं, जो प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ;

(घ) "अध्यक्ष" से अभिप्राय है, प्राधिकरण का अध्यक्ष ;

(ङ) "संस्था" से अभिप्राय है, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद्‌्‌, नगरपालिका सहित किसी विधि के अधीन स्थापित कोई संगठन या प्राधिकरण तथा संघ सरकार या हरियाणा सरकार या इसके किसी भी विभाग द्वारा स्थापित कोई अन्य बोर्ड या निगम ;

(च) "सरकार" से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार ;

(छ) "भू-जल" से अभिप्राय है, अपनी प्रा—तिक अवस्था में उत्पन्न होने वाला जल, जहां यह नमी के भूकटिबन्ध में सतह के नीचे मौजूद होता है, जहाँ इसे कूओं या किन्हीं अन्य साधनों से निकाला जा सकता है या झरनों के रूप में निकलता है तथा धाराओं और नदियों में प्रा—तिक रूप से बहता है ;

(ज) "सदस्य" से अभिप्राय है, प्राधिकरण का कोई सदस्य ;

18 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

(झ) "व्यक्ति" में शामिल है, कोई व्यक्ति, कोई कम्पनी, कोई फर्म, व्यष्टियों का कोई संगम या व्यष्टियों का कोई निकाय चाहे निगमित है या नहीं ;

() "विहित" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित ;

(ट) "विनियमों" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा बनाए गए विनियम ; (ठ) "चयन समिति" से अभिप्राय है, धारा 5 के अधीन गठित चयन समिति ;

(ड) "राज्य" से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य ; (ढ) "उप-सतही हकदारी" से अभिप्राय है, टयूबवैल, बोरवेल या अन्य कूओं से या उप-सतही जल निकालने के किसी अन्य साधन या प्राधिकरण द्वारा सम्यक्‌्‌ रूप से या विधिक रूप से अनुमत, पंजी—त तथा विनिर्दिष्ट मानकों के अनुसार बनाए गए किसी समूह या क्षेत्र या कूओं द्वारा सिंचाई परियोजना के कमाण्ड क्षेत्र में निकाले जाने वाले जल की अनुमापी गुणवत्ता की वैयक्तिक या बल्क जल की हकदारी ;

(ण) "अनुमापी" से अभिप्राय है, मात्रा के आधार पर जल का मापन ;

(त) "जल" में शामिल है, सतही जल तथा भू-जल ;

(थ) "जल उपयोगकर्ता संस्था" से अभिप्राय है, जल उपयोगकर्ता संगम, जनोपयोगी सेवा, औद्योगिक उपयोगकर्ता संगम, अन्य उपयोगकर्ता संगम या कोई अन्य समूह, जिसे प्राधिकरण द्वारा जल प्राप्त करने तथा उसका सदुपयोग करने की हकदारी के लिए प्राधि—त किया गया है।

प्राधिकरण की स्थापना तथा निगमन।

3. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तथा ऐसी तिथि, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, से इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन तथा प्रबन्धन) प्राधिकरण के नाम से ज्ञात प्राधिकरण की स्थापना करेगी।

(2) प्राधिकरण चल और अचल, दोनों संपत्ति अर्जित करने, धारण करने तथा निपटान करने और संविदा करने की शक्ति सहित शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा रखने वाला तथा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सभी आवश्यक कार्य करने के लिए उक्त नाम से निगमित निकाय होगा और वह उक्त नाम से वाद चला सकेगा या उस पर उक्त नाम से वाद चलाया जा सकेगा। (3) प्राधिकरण का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए। (4) प्राधिकरण, अध्यक्ष तथा चार सदस्यों से मिलकर बनेगा।

4. (1) अध्यक्ष ऐसी योग्यता और ईमानदारी वाला व्यक्ति होगा, जिसने अपर मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार के रूप में कार्य किया हो और जल संसाधन से संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी अथवा अभियान्त्रिकी मामलों सहित जल संसाधन प्रबन्धन कार्य का अनुभव रखता हो :

अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्यताएं।

परन्तु अधिमान ऐसे व्यक्ति को दिया जाएगा, जिसने अपर मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, सिंचाई तथा जल संसाधन विभाग के रूप में कार्य किया हो।

(2) सदस्य, ऐसी योग्यता, ईमानदारी तथा पदवी वाला व्यक्ति होगा, जो जल संसाधन से संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी या अभियांत्रिकी मामलों सहित जल संसाधन प्रबन्धन कार्य का न्यूनतम बीस वर्ष का अनुभव रखता हो। (3) अध्यक्ष तथा सदस्य, चयन समिति की सिफारिशों पर सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे। चयन समिति का गठन।

5. (1) सरकार, अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति के प्रयोजन हेतु , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, मुख्य सचिव, हरियाणा तथा सदस्य सचिव के रूप में प्रशासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, सिंचाई तथा जल संसाधन विभाग और जल संसाधनों या जल संसाधनों के प्रबन्धन से संबंधित विज्ञान, प्रौद्योगिकी या अभियांत्रिकी मामलों के क्षेत्र में ज्ञान रखने वाले दो अन्य सदस्यों से मिलकर बनने वाली चयन समिति का गठन करेगी और उसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव, हरियाणा द्वारा की जाएगी।

(2) सरकार, अध्यक्ष या सदस्य की मृृत्यु , त्यागपत्र या हटाए जाने के कारण किसी रिक्ति के होने की तिथि से एक मास के भीतर और अध्यक्ष या किसी सदस्य की पदावधि की समाप्ति से छह मास पूर्व, रिक्ति को भरने के लिए चयन समिति को निर्देश देगी।

(3) चयन समिति, सरकार को निर्दिष्ट की गई प्रत्येक रिक्ति के लिए कम से कम दो नामों के पैनल की सिफारिश करेगी :

19 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

परन्तु सरकार चयन समिति को पुनर्विचार करने के लिए तथा नए सिरे से पैनल की सिफारिश करने के लिए पैनल वापिस भेज सकती है। (4) अध्यक्ष या सदस्य की कोई भी नियुक्ति, चयन समिति में केवल किसी रिक्ति के कारण अवैध नहीं होगी।

अध्यक्ष तथा सदस्य की पदावधि, वेतन तथा भत्ते तथा सेवा की अन्य शर्तें। 6. (1) कोई भी व्यक्ति, पैंसठ वर्ष की आयु पूरी करने के बाद अध्यक्ष या सदस्य के रूप में सेवारत नहीं रहेगा। (2) अध्यक्ष तथा सदस्य, अपना पद ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे :

परन्तु कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष या सदस्य के रूप में दो अवधियों से अधिक के लिए सेवारत नहीं रहेगा।

(3) अध्यक्ष तथा सदस्यों के वेतन, भत्ते तथा सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।

(4) अध्यक्ष तथा सदस्य, अपना पद ग्रहण करने से पूर्व, ऐसे रूप में तथा ऐसी रीति में तथा ऐसे प्राधिकारी के समक्ष, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, पद तथा गोपनीयता की शपथ लेगा। (5) उप-धारा (1) तथा (2) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, अध्यक्ष या सदस्य,-

(i) सरकार को लिखित में कम से कम तीन मास का नोटिस देते हुए अपना पद त्याग

सकता है ; या

(ii) को धारा 7 के उपबन्धों के अनुसार उसके पद से हटाया जा सकता है।

अध्यक्ष या सदस्य का हटाया जाना। 7. (1) सरकार, जांच संस्थित कर सकती है और जांच परिणामों के आधार पर, आदेश द्वारा, अध्यक्ष या किसी सदस्य को निम्नलिखित के संबंध में उसके पद से हटा सकती है, यदि अध्यक्ष या ऐसा सदस्य, जैसी भी स्थिति हो,-

(i) दिवालिया घोषित किया गया है ; या

(ii) किसी अपराध के लिए सिद्धदोष पाया गया है जो, सरकार की राय में, नैतिक

अधमता वाला है ; या

(iii) शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से अध्यक्ष या सदस्य के रूप में कार्य करने में

असमर्थ हो गया है ; या

(iv) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लेता है, जिससे अध्यक्ष या सदस्य के रूप

में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना हो ; या

(v) लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हुए पद पर अपनी निरन्तरता बनाए रखने के

लिए अपने पद का इस प्रकार दुरूपयोग किया है ; या

(vi) यदि उप-धारा (3) के अधीन कोई घोषणा मिथ्या या झूठी पाई जाती है ; या

(vii) कोई अन्य आधार, जो विहित किया जाए :

परन्तु अध्यक्ष या किसी सदस्य को, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना,

खण्ड (iv) से (vi) के अधीन, उसके पद से हटाया नहीं जाएगा।

(2) सरकार, अध्यक्ष या किसी सदस्य के विरूद्ध उप-धारा (1) में यथा वर्णित, जाँच अवधि के दौरान, ऐसे अध्यक्ष तथा सदस्य को उसके पद के कत्र्तव्यों के निर्वहन से निलम्बित कर सकती है।

(3) अध्यक्ष तथा सदस्य, नियुक्ति के यथाशीघ्र बाद और उसके बाद प्रत्येक वर्ष, ऐसे प्ररूप तथा रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में प्राधिकरण से सम्बद्ध या संबंधित मामलों में अपने हित के संबंध में, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो और चाहे धन संबंधी या अन्यथा से हो, की सीमा तक घोषणा करेगा और इस प्रकार की गई घोषणा, प्राधिकरण की वैबसाईट पर रखी जाएगी।

प्राधिकरण का अमला। 8. (1) सरकार, किसी अधिकारी, जिसने हरियाणा राज्य में सेवा की हो, को ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे —त्य, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, करने के लिए प्राधिकरण के सचिव के रूप में नियुक्त कर सकती है।

(2) सचिव का वेतन, भत्ते तथा सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।20 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) (3) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, ऐसी रीति में तथा ऐसी योग्यताओं, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, वाले ऐसे अधिकारियों तथा अन्य अमले को नियुक्त कर सकता है। (4) प्राधिकरण के अधिकारियों तथा अन्य अमले को भुगतानयोग्य वेतन, भत्ते तथा सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं। (5) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, समय-समय पर, जल सेक्टर या प्रशासन के क्षेत्र से किसी सरकारी अधिकारी या विशेषज्ञ, जैसा आवश्यक समझे, को अस्थायी आधार, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, पर नियुक्त कर सकता है।

(6) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, प्राधिकरण को उसके —त्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, पर सलाहकारों, गैर-सरकारी संगठनों या तृृतीय पक्षकार अभिकरणों को ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों पर अस्थाई आधार पर नियुक्त या नियोजित कर सकता है।

प्राधिकरण की कार्यवाहियाँ।

9. (1) प्राधिकरण, ऐसे समय पर, जैसा अध्यक्ष निदेश करे, मुख्यालय पर बैठक करेगा और इसकी बैठकों में कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया के ऐसे नियमों, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, की अनुपालना करेगा। (2) प्राधिकरण की किसी भी बैठक में कारबार के संव्यवहार के लिए आवश्यक गणपूर्ति तीन सदस्यों से कम नहीं होगी। (3) अध्यक्ष, या यदि वह प्राधिकरण की बैठक में भाग लेने में असमर्थ है, तो अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नामनिर्दिष्ट कोई अन्य सदस्य और, ऐसे नामनिर्देशन की अनुपस्थिति में या जहाँ कोई अध्यक्ष नहीं है, तो उपस्थित सदस्यों द्वारा, उनमें से चुना गया कोई सदस्य, बैठक की अध्यक्षता करेगा। (4) प्राधिकरण की किसी बैठक के समक्ष रखे जाने वाले सभी प्रश्न, उपस्थित सदस्यों तथा उनके द्वारा किए गए मतों के बहुमत द्वारा निर्णीत किए जाएंगे और मतों की समानता की दशा में, अध्यक्ष या अध्यक्षता कर रहे व्यक्ति को निर्णायक मत का प्रयोग करने का अधिकार होगा। (5) उप-धारा (4) में यथा अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, प्रत्येक सदस्य का केवल एक मत होगा। (6) यदि अध्यक्ष बीमारी के कारण या अन्यथा से एक मास से अधिक की अवधि के लिए अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है, तो सरकार, जब तक अध्यक्ष को नियुक्त नहीं किया जाता है या वह पुनः पद ग्रहण नहीं कर लेता है, जैसी भी स्थिति हो, अध्यक्ष के कत्र्तव्यों का निर्वहन करने के लिए सदस्यों में से किसी एक को नामनिर्दिष्ट कर सकती है। (7) प्राधिकरण के सभी आदेश तथा निर्णय, सचिव द्वारा या अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त सम्यक्‌्‌ रूप से प्राधि—त प्राधिकरण के किसी अन्य अधिकारी द्वारा, अधिप्रमाणित किए जाएंगे।

10. प्राधिकरण के कोई भी कार्य या कार्यवाहियां केवल किसी रिक्ति के विद्यमान होने या प्राधिकरण के गठन में त्रुटि के आधार पर प्रश्नगत या अविधिमान्य नहीं होगी।

रिक्तियों का कार्य या कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना।

एकी—त राज्य जल परियोजना।

11. (1) प्राधिकरण, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना के एक वर्ष के भीतर तथा उसके बाद, प्रत्येक तीन वर्ष में प्रत्येक खण्ड के लिए तैयार जल परियोजना के आधार पर एकी—त राज्य जल परियोजना तैयार करेगा।

(2) सरकार, प्राधिकरण की सिफारिश पर, यदि आवश्यक समझे, भू-जल विकास की अवस्था, भू-जल स्तर में गिरावट की प्रवृृत्ति, जल की समतल सतह का स्तर, भू-जल की गुणवत्ता, सतही जल की उपलब्धता या अन्य सुसंगत मानदण्ड, जैसा वह स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित समझे, के आधार पर राज्य को विभिन्न प्रवर्गों में विभाजित कर सकती है : परन्तु वर्गीकरण तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक इस संबंध में नोटिस प्रकाशित नहीं करवाया जाता है और आक्षेप, यदि कोई हों, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में विनिश्चित नहीं किए जाते हैं। (3) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राज्य को भू-जल संसाधन क्षमता, उपयोगिता तथा पुनर्भरण के भूकटिबंध में वर्गीकरण के प्रयोजन के लिए प्रतिवर्ष या ऐसी अवधि, जो प्राधिकरण आवश्यक समझे, पर क्षेत्रीय अध्ययन का संचालन कर सकता है या करवा सकता है। (4) उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित वर्गीकरण पर आधारित, प्रत्येक खण्ड के लिए या खण्ड के भीतर किसी क्षेत्र के लिए जल परियोजना ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में प्राधिकरण द्वारा तैयार की जाएगी तथा विभिन्न प्रयोजनों के लिए जल की माँग तथा आपूर्ति के सभी पहलुओं को समावेश करेगी।21 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) (5) एकी—त राज्य जल परियोजना, सरकार या सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधि—त किसी प्राधिकारी के सम्मुख रखी जाएगी जो इसे, ऐसे उपांतरणों सहित जो आवश्यक समझे, प्रस्तुत करने की तिथि से छह मास की अवधि के भीतर इसका अनुमोदन कर सकती है।

(6) प्राधिकरण, सरकार द्वारा एकी—त राज्य जल परियोजना के अनुमोदन की तिथि से प्रत्येक तीन वर्ष के पश्चात्‌्‌ इसका पुनर्विलोकन या पुनरीक्षण करेगा।

12. (1) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, एकी—त राज्य जल परियोजना के अनुसार राज्य के जल संसाधनों के विकास, प्रबन्धन तथा संरक्षण के संबंध में निदेश जारी कर सकता है।

प्राधिकरण की शक्तियां, कार्य तथा कत्र्तव्य। (2) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, सम्पूर्ण राज्य में जल संसाधन क्षमता, उपयोगिता तथा पुनर्भरण वर्गीकरण के लिए निर्बन्धन, यदि कोई हों, अधिरोपित कर सकता है।

(3) प्राधिकरण, धारा 16 के अधीन अनुमति प्रदान करने के लिए या इस अधिनियम के किन्हीं अन्य प्रयोजनों की प्राप्ति के लिए कोई रूप-रेखा तैयार करेगा और सरकार से अनुमोदित करवाएगा। (4) प्राधिकरण, सरकार के पूर्व अनुमोदन से जल संसाधनों के विकास, उपयोग, प्रबन्धन तथा संरक्षण के संबंध में ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में नोटिस देते हुए तथा आक्षेप, यदि कोई हों, आमंत्रित करते हुए, निम्नलिखित के संबंध में निर्देश जारी कर सकता है, अर्थात्‌्‌ :-

(क) विद्यमान जल निकालने वाली संरचनाओं के संचालन तथा उनके विनियमन के

लिए शर्तें ;

(ख) भू-जल का उपयोग करने पर निर्बन्धन ;

(ग) उन क्षेत्रों को विनिर्दिष्ट करना, जिनमें औद्योगिक संचालनों या प्रक्रियाओं सहित जल उपयोगकर्ताओं द्वारा भू-जल का उपयोग नहीं किया जाएगा या कतिपय शर्तों और सुरक्षा-उपायों के अध्यधीन जल का उपयोग किया जाएगा ;

(घ) घरेलू, सिंचाई या औद्योगिक उपयोग हेतु जल का अधिकतम उपयोग ; (ड.) पंजीकरण के बिना भू-जल निकालने के लिए ड्रिल की गई या पहले से खोदी गई

संरचनाएं ;

(च) प्राधिकरण से या ऐसी संस्था, जो दी गई अवधि के भीतर प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, से निष्कर्षण संरचना को पंजीकरण करने हेतु भू-जल निकालने वाले उपयोगकर्ता ;

(छ) जल का सफल उपयोग और जल की बर्बादी या दुरूपयोग को कम करना और

जल की रिसाईक्लिंग और पुनः उपयोग को बढ़ावा देना ;

(ज) भू-जल की गुणवत्ता तथा स्तर को मापने के लिए और भू-जल निष्कर्षण की मात्रा के अनुमापी मापन के लिए उपकरणों की स्थापना तथा रख-रखाव ;

(झ) सुरक्षित वातावरण के –ष्टिगत लघु सिंचाई तकनीक, सतत प्रौद्योगिकी और दक्ष

ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा देना ;

() बरसाती जल एकत्रीकरण सहित जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण ; (ट) राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों के वितरण की प्राथमिकता को अवधारित करना

और साम्यापूर्ण वितरण के लिए प्रयास करना ;

(ठ) पेयजल, घरेलू, औद्योगिक, वाणिज्यिक और —षि उपयोग के लिए भू-जल

निकालने के लिए विनियमन करना ; तथा

(ड) कोई अन्य निदेश, जिन्हें इस अधिनियम के उद्‌्‌देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक

समझा जाए।

(5) प्राधिकरण, समय-समय पर, जल संसाधनों के विकास, प्रबन्धन तथा संरक्षण के लिए संघ सरकार तथा हरियाणा सरकार की नीतियों तथा कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में, सरकार को निम्नलिखित के बारे में परामर्श दे सकता है :-

(i) राज्य के भीतर जल अवसंरचना तथा जल वितरण प्रणाली का सतत्‌्‌ संचालन तथा

रख-रखाव;

(ii) उपलब्ध संसाधनों को दीर्घकालिक अनुमानों के आधार पर, जनहित में सतत जल

प्रणाली को बढ़ावा देना;

22 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

(iii) जल संसाधनों के प्रदूषण तथा गिरावट को कम करना तथा रोकना;

(iv) अधिप्रवाह का उपयोग तथा भण्डारण; (v) राज्य में सृृजित सिंचाई क्षमता का सर्वोत्तम उपयोग;

(vi) विभिन्न प्रयोजनों के लिए नहरी जल के उपयोग के लिए प्राथमिकताएं नियत करना; (vii) जल क्षेत्र में नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाना;

(viii) जल संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देना; (ix) जल सुरक्षा परियोजना के कार्यान्वयन को सुकर बनाना;

(x) जल के संदूषण का पता लगाना तथा रोकथाम करना;

(xi) कृृषि तथा अन्य क्षेत्रों में जल क्षमता में वृृद्धि करना;

(xii) परियोजनाओं तथा नहरी प्रणाली के व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक जल लेखे देते हुए सिंचाई, बहुउद्‌्‌देशीय जल परियोजनाओं, नहरी प्रणाली की जल संपरीक्षा । (6) प्राधिकरण, जल तथा इसके प्रबंधन के बारे में जन जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु वैज्ञानिक डाटा तथा सूचना के प्रसार के लिए ऐसी रिपोर्टों को प्रकाशित कर सकता है या करवा सकता है । (7) प्राधिकरण, सरकार को प्राधिकरण द्वारा यथा जारी हकदारियों की अनुपालना मेें जल उपयोगों की गुणवत्ता तथा प्रकार को लागू करने, निगरानी तथा उपायों के लिए प्रणाली की स्थापना हेतु सिफारिशें करेगा । (8) प्राधिकरण राज्य में भू-जल संसाधनों तथा सतही जल संसाधनों के संबंध में प्रतिवर्ष रिपोर्ट प्रकाशित करेगा । (9) प्राधिकरण, विभिन्न जल उपयोगकर्ताओं द्वारा अपजल के निस्तारण के लिए नियत गुणवत्ता मानकों की निगरानी तथा कार्यान्वयन के लिए, सरकार को सिफारिशें करेगा जैसे अपजल कम से कम ऐसी गुणवत्ता का हो, जो विहित की जाए, ताकि यह सिंचाई हेतु उपयोग किया जा सके तथा उल्लघंनकर्ताओं के विरूद्ध कार्रवाई करेगा ।

(10) प्राधिकरण ग्रामीण जल आपूर्ति, नगरपालिका जल आपूर्ति, सिंचाई जल आपूर्ति या औद्योगिक/वाणिज्यिक जल आपूर्ति के लिए बल्क जल हकदारियों की सिफारिश करेगा। (11) प्राधिकरण के सभी आदेश तथा निर्णय, प्राधिकरण के अध्यक्ष या अध्यक्ष द्वारा सम्यक्‌्‌ रूप से प्राधिकृृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किए जाएंगे ।

(12) प्राधिकरण को जल से संबंधित या अन्तर्वलित वाले किसी विषय का स्वतः संज्ञान लेने की शक्ति होगी तथा सरकार के पूर्व अनुमोदन से निर्देश जारी करेगा । (13) प्राधिकरण सरकार को खण्डों या खण्डों के भीतर क्षेत्र के वर्गीकरण के लिए मानदण्डों की सिफारिश करेगा।

(14) प्राधिकरण, राज्य में आधुनिक प्रौद्योगिक उपकरणों, जलभृृत्‌्‌ नक्शे के परिनियोजन के माध्यम से जल विज्ञान संबंधी नक्शा तथा एकी—त इनपुट बृृहद्‌्‌ जल संसाधन परियोजना तैयार कर सकता है तथा राज्य में जल की सतत्‌्‌ व्यवस्था को बनाने के लिए ऐसे निर्बधन/दायित्व तथा रचनातंत्र अधिरोपित कर सकता है। (15) प्राधिकरण, सरकार के परामर्श से, जल इत्यादि के संरक्षण, उपयोग या गुणवत्ता के संबंध में सर्वेक्षण, अन्वेषण तथा अनुसंधान कार्यान्वित कर सकता है या कार्यान्वित करवा सकता है। राज्य भू-जल तथा सतही जल परियोजना।

13. (1) प्राधिकरण, ऐसी प्ररूप में तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में नोटिस देते हुए तथा आक्षेप, यदि कोई हाें, आमंत्रित करते हुए, जिला जल संसाधन योजना समितियों से प्राप्त योजनाआें के आधार पर राज्य भू-जल तथा सतही जल परियोजना समेकित तथा तैयार करेगा। (2) प्राधिकरण, सरकार के परामर्श से, जिला भू-जल तथा सतही जल परियोजनाएं बनाने, इनपुट मापदण्डों, टैम्प्लेट तथा क्षमता निर्माण के लिए, अस्थायी आधार पर, विशेषज्ञों तथा परामर्शदाताओं को नियोजित कर सकता है।

(3) प्राधिकरण सरकार को विचारण तथा अनुमोदन हेतु राज्य भू-जल तथा सतही जल परियोजना प्रस्तुत करेगा।

14. (1) राज्य के प्रत्येक जिले में कोई जिला जल संसाधन योजना समिति होगी, जो जिला जल संसाधन परियोजना तैयार करेगी।

जिला जल संसाधन योजना समिति।23 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) (2) जिला जल संसाधन योजना समिति की संरचना ऐसी होगी, जो विहित की जाए। (3) जिला जल संसाधन योजना समितियां निम्नलिखित —त्यों का पालन करेंगी, अर्थात्‌्‌ :-

(i) ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में नोटिस देते हुए तथा आक्षेप, यदि कोई हाें, आमंत्रित करते हुए खण्ड वार/क्षेत्र वार परियोजनाओं से मिलकर बनने वाली जिला जल संसाधन परियोजना तैयार करना ;

(ii) जिला जल संसाधन परियोजनाओं के विरूद्ध प्राप्त सभी सुझावों पर दो मास की अवधि के भीतर विचार करना और निर्णय लेना तथा जिला जल संसाधन परियोजना को अंतिम रूप देना तथा प्राधिकरण को प्रस्तुत करना ;

(iii) ऐसे क्षेत्रों में भू-जल और सतही जल प्रदूषण सहित उन क्षेत्रों की पहचान करना तथा सीमांकन करना जो जल की रोकथाम और नियंत्रण के प्रयोजन के लिए जल संसाधन की गुणवत्ता और प्रदूषण के खतरों से प्रभावित पाए जाते हैं और पेय जल की आपूर्ति के लिए सुरक्षित जल गुणवत्ता क्षेत्रों का भी पता लगाना ।

जल सुरक्षा परियोजना। 15. (1) प्राधिकरण राज्य जल सुरक्षा परियोजना तैयार करेगा, जिसे निर्वाचित स्थानीय प्रतिनिधियों के परामर्श से, जलभृृत्‌्‌ सहित जल संसाधन से संबंधित उपलब्ध उारोार जानकारी को ध्यान में रखते हुए सरकार के अनुमोदन के बाद अन्तिम रूप दिया जाएगा।

(2) जल सुरक्षा परियोजना के उद्‌्‌देश्य निम्नलिखित हाेंगे :-

(क) जीवन और सतत्‌ आजीविका के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित जल की प्राप्ति ;

(ख) आपातकालीन स्थिति जैसे सूखा, बाढ़ तथा महामारी या किसी प्रा—तिक आपदा

इत्यादि के समय में भी जल की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

(3) इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जल सुरक्षा परियोजना निम्नतम प्रशासनिक स्तर पर तैयार की जाएगी कि जहां एकल ग्राम पंचायत, खण्ड, जिला, वार्ड या नगरपालिका की अधिकारिता के अधीन कोई भी जलभृृत्‌्‌ नहीं आता है, तो परियोजना को प्राधिकरण, जिसकी अधिकारिता में सम्पूर्ण जलभृृत्‌्‌ आता है, के सभी स्तरों पर एकी—त करना चाहिए।

अनुमति। 16. (1) हरियाणा नहर तथा जल निकास अधिनियम, 1974 (1974 का 29) के अधीन दी गई अनुमतियों से अन्यथा जल उपयोग की सभी अनुमतियां प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाएंगी : परन्तु प्रशासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, सिंचाई तथा जल संंसाधन विभाग, धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन अधिसूचना के पश्चात्‌्‌ तथा प्राधिकरण का गठन किए जाने तक इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अनुमतियां प्रदान करेगा। (2) कोई भी संस्था या व्यक्ति, जो जल का उपयोग करना चाहता है, प्राधिकरण को ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति में, ऐसी फीस सहित, जो विहित की जाए, किसी अवसंरचना या यन्त्र इत्यादि, जैसी भी स्थिति हो, के निर्माण और संस्थापन हेतु अनुमति के लिए आवेदन करेगा।

निर्बन्धनों में छूट। 17. सरकार, प्राधिकरण के परामर्श से, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किसी निर्बन्धन से छूट प्रदान कर सकती है।

18. (1) प्राधिकरण सतही जल के सभी उपयोगों तथा संसाधित अपजल के उपयोग तथा निपटान के लिए टैरिफ हेतु, सरकार को सिफारिश करेगा।

जल के उपयोग या निपटान के लिए टैरिफ। (2) प्राधिकरण द्वारा टैरिफ का निर्धारण किया जाएगा और ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में मितव्यय, क्षमता, निष्पक्षता तथा स्थिरता के सिद्धांतों पर आधारित होगा। यथासम्भव, टैरिफ जल की खपत के अनुमापी मापन पर आधारित होगा तथा उचित रूप से डिजाइन किया जाएगा।

प्राधिकरण की जांच अधिकारी नियुक्त करने की शक्ति। 19. (1) प्राधिकरण अपने किसी अधिकारी को या, सरकार के परामर्श से, ऐसे अधिकारी को, जो सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए इस अधिनियम के अधीन कोई जांच करने के प्रयोजन हेतु जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकता है : परन्तु इस धारा की कोई भी बात, प्राधिकरण को अपनी स्वयं की कोई जांच करने में नहीं रोकेगी।

(2) प्रधिकरण या उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त जांच अधिकारी को निम्नलिखित मामलों के सम्बंध में वही शक्तियां होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केेंद्रीय अधिनियम 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्‌्‌ :-

(i) किसी व्यक्ति को समन भिजवाना और उपस्थित करवाना तथा शपथ पर उसकी

पूछताछ करना ;

24 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

(ii) दस्तावेजों का प्रकटीकरण और पेश किया जाना आवश्यक होना ;

(iii) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना; (iv) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की मांग

करना;

(v) साक्षियों के परीक्षण के लिए समन जारी करना।

(3) जांच अधिकारी, जांच के निष्कर्ष पर, प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगाः परंतु, जांच अधिकारी, प्राधिकरण द्वारा जब भी अपेक्षा की जाए, प्राधिकरण को अन्तरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।

(4) प्राधिकरण, प्राधिकरण द्वारा की गई जांच के निष्कर्ष पर या जांच अधिकारी से अन्तिम या अन्तरिम रिपोर्ट की प्राप्ति पर, इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन ऐसी कार्रवाई करेगा, जो वह उचित समझे ।

प्रवेश तथा निरीक्षण की शक्ति ।

20. धारा 19 के अधीन जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त या इस निमित्त प्राधिकरण द्वारा विशेष रूप से सशक्त किसी व्यक्ति को ऐसी सहायता, जो वह आवश्यक समझे, सहित सभी युक्तियुक्त समयों पर, यह अवधारण करने के लिए कि इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा दिए गए आदेशों या निर्देशों की किसी रीति में अनुपालना की जा रही है, के प्रयोजन के लिए, किसी स्थान में प्रवेश करने का अधिकार होगा ।

21. (1) राज्य के निवासियों को स्व-विनियमन की प्रक्रिया अपनाने हेतु प्राधिकरण द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा । (2) जल प्रतिबलित क्षेत्रों में, भू-जल तथा सतही जल संसाधनों को बचाने, संरक्षण करने तथा विनियमित करने के क्रम में स्व-विनियमन की प्रक्रिया निम्नलिखित रीति में अपनाई जाएगी, अर्थात्‌्‌ :-

बरसाती जल एकत्रीकरण, भू-जल पुनर्भरण, रिसाइकलिंग तथा पुनः उपयोग, जल भराव से बचाव का स्व-विनियमन।

(i) निवासी विभिन्न फसलों के लिए वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित जल की आवश्यकता के अनुसार, फसलों हेतु सिचांई जल/पानी देनेे की बारी की वांछित मात्रा का प्रयोग करना सुनिश्चित करेंगे ताकि भू-जल, सतही जल की बर्बादी तथा अति-सिंचाई से बचा जा सके;

(ii) राज्य के निवासियों को विभिन्न जल संरक्षणों/जल बचाव साधनों, जिसमें फार्म-बंडिग, फार्म पोंड, अवजल वाली फसलों के बीजों का उपयोग, ड्रिप तथा फव्वारा सिंचाई प्रणाली तथा अन्य जल बचाव तकनीक का उपयोग भी शामिल हैं, को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा;

(iii) ग्रामीण तथा शहरी दोनोें क्षेत्रों में, जल के प्रत्येक उपयोगकर्ता को किफायती तथा कुशल ढंग से भू-जल तथा सतही जल के निष्कर्षण तथा उपयोग करने, जल की बर्बादी से बचने, रिसाईकल्ड जल को प्राथमिकता देने, बरसाती जल एकत्रीकरण तथा पुनर्भरण ढंगों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा । (3) प्राधिकरण, भू-जल संबंधी परिस्थितियों के अनुसार बरसाती जल एकत्रीकरण तथा जलग्रहण संरक्षणों को प्रोत्साहित करेगा। प्राधिकरण प्रतिबलित शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बरसाती जल एकत्रीकरण संरचनाओं की उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के बारे में भू-जल के विभिन्न उपयोगकर्ता को सुग्राही बनाएगा। भू-जल के उपयोगकर्ता, प्राधिकरण से बरसाती जल एकत्रीकरण की उपयुक्त तकनीकी ड्राईंग तथा डिजाईन प्राप्त कर सकते हैं।

(4) तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, प्राधिकरण रूफ-टॉप बरसाती जल एकत्रीकरण संरचनाओं को उपलब्ध करवाने हेतु विद्यमान भवन उप-विधियों के अधीन नियत, सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा, सम्यक्‌ रूप से जारी की गई शर्तों की अनुशंसा कर सकता है। ऐसे अनुबन्ध, भवन योजनाओं को स्वीकृृत या अनुमोदित करने वाले सम्बद्ध सरकारी अभिकरणों पर बाध्य होंगे।

(5) प्राधिकरण जलग्रहण संरक्षणों को सुनिश्चित करेगा, जिसमें क्षेत्रीय मृृदा परिस्थितियों तथा क्षेत्र के भू-जल विज्ञान की प्रकृृति पर निर्भर भू-जल संरक्षण/समुचित पुनर्भरण संरचनाएं भी शामिल होंगी।

(6) प्राधिकरण शहरी, औद्योगिक तथा —षि उपयोग हेतु न पीने योग्य जल की रिसाईक्लिंग तथा पुनः उपयोग को प्रोत्साहित करेगा।25 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) (7) प्राधिकरण, ऐसे क्रियाकलापों, जो भूमि के संभावित जल भराव हेतु सभी संभाव्य हैं, को निरूत्साहित तथा रोकेगा तथा जल-भराव के विरूद्ध भूमि की सुरक्षा हेतु सभी संभव विनियामक उपाय करेगा।

(8) प्राधिकरण सम्बद्ध विभागों/निकायों के परामर्श से, समुचित प्रक्रियाओं तथा प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए अपनाए जाने वाले जल भराव शमन उपायों को प्रोत्साहित करेगा।

अपराध के लिए दण्ड । 22. जो कोई भी, इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए किसी निर्देश या आदेश की अनुपालना करने में असफल रहता है या उल्लंघना करता है या उसकी उल्लंघना या अननुपालना को अवपे्ररित करता है, तो उसे इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध हेतु दोषी समझा जाएगा तथा दोषसिद्धि पर,-

(i) प्रथम अपराध के लिए, पचास हजार रूपए तक के जुर्माने से दण्डनीय होगा; तथा

(ii) पश्चात्‌्‌वर्ती अपराध के लिए, ऐसी अवधि, जो छह मास तक बढ़ाई जा सकती है या ऐसे जुर्माने, जो एक लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा।

कम्पनियों द्वारा अपराध । 23. (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, तो वहां प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध किये जाने के समय उस कम्पनी के कारबार के संचालन के लिए कम्पनी का भारसाधक था और उसके प्रति उत्तरदायी था, साथ ही वह कम्पनी भी, उस अपराध के दोषी के रूप में समझी जाएगी और तदनुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किये जाने के लिए दायी होगी : परंतु इस उप-धारा की कोई भी बात किसी ऐसे व्यक्ति को इस अधिनियम में उपबन्धित किसी दण्ड का दायी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसा अपराध करने से रोकने के लिए सभी प्रकार की सम्य्‌्‌क तत्परता बरती थी।

(2) उप-धारा (1) में दी गई किसी भी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है तथा यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही के किए जाने और दण्डित किए जाने के लिए दायी होगा।

व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) ''कम्पनी'' से अभिप्राय है, कोई निगमित निकाय और इसमें कोई फर्म या व्यक्तियों

का संगम या व्यष्टिक निकाय, चाहे निगमित है या नहीं भी शामिल हैं ;

(ख) फर्म के संबंध में ''निदेशक'' से अभिप्राय है, फर्म में कोई भागीदार तथा व्यक्तियों के किसी संगम या व्यष्टिक निकाय के संबंध में अभिप्राय है, इसके मामलों को नियन्त्रित करने वाला कोई सदस्य।

अपराधों का संज्ञान। 24. कोई भी न्यायालय, प्राधिकरण द्वारा या प्राधिकरण द्वारा सम्यक्‌्‌ रूप से प्राधिकृृत किसी अधिकारी द्वारा, लिखित में की गई किसी शिकायत के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।

अप्राधिकृृत कार्य । 25. (1) कोई व्यक्ति या संस्था, अप्राधिकृृत कार्यों के लिए, ऐसी शास्ति, जो विहित की जाए, के लिए दायी होगा/होगी, यदि ऐसा व्यक्ति या संस्था :-

(i) ऐसे क्षेत्रों में अनुमति के बिना, जहां ऐसी अनुमति इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अपेक्षित है, नई संरचना निर्मित करता/करती है या संस्थापित करता/करती है या विद्यमान संरचनाओं में परिवर्तन करता/करती है;

(ii) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्राधिकरण द्वारा अधिरोपित किन्हीं निबन्धनों

तथा शर्तों का उल्ंलघन करता/करती है;

(iii) जल की गुणवत्ता के लिए जल की गुणवत्ता को शोषित करता/करती है या गिराता/गिराती है या प्रदूषित करता/करती है या हानि पहुंचाता/पहुंचाती है या हानि पहुंचाने देता/देती है;

(iv) पूर्व अनुमति के बिना भू-जल निकालने के लिए ड्रिल करता/करती है या खुदाई

करता/करती है;

(v) जल अवसंरचना के संकर्माें में बाधा पहुंचाता/पहुंचाती है या बाधा पहुंचाने को

अवप्रेरित करता/करती है;

26 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

(vi) किसी जल अवसंरचना को क्षति पहुँचाता/पहुंचाती है अथवा क्षति पहुँचवाता/

पहुँचवाती है अथवा क्षति पहुँचाने के लिए अवप्रेरित करता/करती है ;

(vii) ऐसे कार्य करता/करती है अथवा ऐसी शर्तों का उल्लंघन करता/करती है, जो

विहित की जाएं।

अप्राधिकृृत कार्यों का प्रशमन।

26. (1) प्राधिकरण ऐसी शास्ति, जो विहित की जाए, के भुगतान पर किसी अप्राधिकृृत कार्य का प्रशमन कर सकता है। शास्ति की राशि सरकार के पास जमा करवाई जाएगी। (2) उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट शास्ति के भुगतान पर, अप्राधिकृृत कार्य करने वाले किसी व्यक्ति के विरूद्ध उसी कार्य तथा किन्हीं कार्यवाहियों के सम्बंध में, आगे कोई भी कार्यवाही नहीं की जाएगी, यदि पहले किए गए हैं या प्रारंभ की गई हैं, तो रद्‌्‌द हो जाएंगी।

(3) यदि कोई व्यक्ति या संस्था, जिसे धारा 25 के अधीन उसी स्वरूप की उल्लंघना वाले किसी अप्राधिकृृत कार्य का दोबारा दोषी ठहराया गया है, तो द्वितीय और प्रत्येक पश्चात्‌्‌वर्ती दोषसिद्धि पर ऐसा जुर्माना, जो धारा 25 की उप-धारा (1) के अधीन विहित शास्ति के पाँच गुणा से कम नहीं होगा, जो दस गुणा तक बढ़ाया जा सकता या छह मास से अनधिक के कारावास या दोनों से दण्डनीय होगा/होगी। सरकार द्वारा निर्देश।

27. (1) सरकार, प्राधिकरण को लोकहित वाली नीतियों के मामलों में लिखित में ऐसे साधारण या विशेष निर्देश जारी कर सकती है और प्राधिकरण ऐसे निर्देश की अनुपालना करने तथा उसके अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य होगा। (2) यदि कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि कोई ऐसा निर्देश लोकहित वाली नीतियों के मामले से संबंधित है, तो उस पर सरकार का निर्णय अंतिम होगा।

28. प्राधिकरण के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी और इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों द्वारा प्रदत्त किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने वाला प्रत्येक अन्य अधिकारी भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के भीतर लोक सेवक के रूप में समझा जाएगा।

प्राधिकरण के अध्यक्ष, सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य अमले का लोक सेवक होना।

सद्‌्‌भावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण।

29. इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उपबंधों के अनुसरण में सद्‌्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं हो सकेंगी।

सरकार की नियम बनाने की शक्ति ।

30. (1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के किसी या सभी प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबंध कर सकती हैं, अर्थात्‌ :-

(i) धारा 6 की उप-धारा (3) के अधीन अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और अन्य

निबंधन तथा शर्तें ;

(ii) धारा 7 की उप-धारा (1) के खण्ड (vii) के अधीन अध्यक्ष या सदस्यों को हटाने के

लिए कोई अन्य आधार ;

(iii) धारा 8 की उप-धारा (2) के अधीन सचिव का वेतन, भत्ते तथा सेवा के अन्य

निबंधन तथा शर्तें ;

(iv) धारा 11 की उप-धारा (2) के पंरतुक के अधीन नोटिस के प्रकाशन और आक्षेप

आमंत्रित करने के लिए प्ररूप तथा रीति ;

(v) धारा 11 की उप-धारा (4) के अधीन प्रत्येक खण्ड या खण्ड के भीतर किसी क्षेत्र के

लिए जल परियोजना तैयार करने के लिए रीति ;

(vi) धारा 12 की उप-धारा (9) के अधीन सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले अपजल की

गुणवाा ;

(vii) धारा 12 की उप-धारा (4) तथा धारा 13 की उप-धारा (1) के अधीन नोटिस के

प्रकाशन और आक्षेप आमंत्रित करने के लिए प्ररूप तथा रीति ;

(viii) धारा 14 की उप-धारा (2) के अधीन जिला जल संसाधन योजना समिति की

संरचना ;

27 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA)

(ix) धारा 14 की उप-धारा (3) के खण्ड (i) के अधीन जिला जल संसाधन परियोजना के संबंध में नोटिस के प्रकाशन और आक्षेप आमंत्रित करने के लिए प्ररूप तथा रीति ;

(x) धारा 16 की उप-धारा (2) के अधीन अनुमति के लिए आवेदन करने हेतु रीति,

प्ररूप तथा फीस ;

(xi) धारा 18 की उप-धारा (2) के अधीन टैरिफ के अधिरोपण की प्रयोज्यता, मात्रा

तथा प्रक्रिया ;

(xii) धारा 25 की उप-धारा (1) के अधीन शास्ति ;

(xiii) धारा 26 की उप-धारा (1) के अधीन अप्राधिकृृत कार्य के प्रशमन के लिए शास्ति ;

(xiv) धारा 34 के अधीन प्राधिकरण की निधि के विनियोजन के लिए रीति ; (xv) धारा 35 की उप-धारा (1) के अधीन उचित लेखे तथा अन्य अभिलेख बनाए रखने

के लिए प्ररूप तथा रीति ;

(xvi) धारा 36 की उप-धारा (1) के अधीन पूर्ण क्रियाकलापों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार

करने के लिए प्ररूप तथा रीति तथा प्रस्तुतीकरण के लिए तिथि ;

(xvii) कोई अन्य मामला, जो विहित किया जाना है या किया जा सकता है। (3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा ।

प्राधिकरण की विनियम बनाने की शक्ति । 31. प्राधिकरण, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन उपबंधित सभी या किन्हीं मामलों के लिए विनियम बना सकता है, जो प्राधिकरण की राय में, इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने तथा अपने कृृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हैं ।

अन्य विधियों का प्रभाव। 32. (1) इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात से असंगत होते हुए भी, प्रभावी होंगे।

(2) इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे तथा अल्पीकरण में नहीं होंगे।

कठिनाईयां दूर करने की शक्ति। 33. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभाव रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्‌्‌असंगत ऐसे उपबंध कर सकती है, जो इसे ऐसी कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हाें : परंतु इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से दो वर्ष की समाप्ति के बाद इस धारा के अधीन कोई भी आदेश नहीं किया जाएगा ।

(2) उप-धारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, इसके किये जाने केे पश्चात्‌, यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के सम्मुख रखा जाएगा ।

प्राधिकरण की निधि। 34. (1) प्राधिकरण की निधि सरकार द्वारा इसे भुगतान किए जाने वाली राशि तथा उपहार, अनुदान, शास्तियों, फीसों, उपयोग प्रभारों या अन्यथा के माध्यम से सभी अन्य प्राप्तियों से मिलकर बनेगी तथा इस अधिनियम के अधीन भुगतान करने के लिए और इसके कर्तव्यों का पालन करने और इसके कृत्यों का निर्वहन करने के लिए उपयोग की जाएगी।

(2) प्राधिकरण निजी संगठनों से निगमित सामाजिक दायित्व निधि प्राप्त कर सकता है। प्राधिकरण, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में डिपोजिट वर्क के रूप में योजना या कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए राज्य के किसी अन्य विभाग या किसी संगठन को निधियां जारी कर सकता है या से निधियां प्राप्त कर सकता है।

(3) प्राधिकरण, अपनी निधि में से ऐसी धनराशि, जो यह अवधारित करे, किसी अनुसूचित बैंक या इस निमित्त सरकार द्वारा अनुमोदित किसी सहकारी या अन्य बैंक में बचत या जमा लेखा में रख सकता है और उक्त धनराशि से अतिरिक्त कोई राशि ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में निवेश की जाएगी।

(4) लेखे ऐसी रीति में तथा ऐसे अधिकारी, जो विहित किया जाए, द्वारा संचालित किए जाएंगे।

लेखे और संपरीक्षा। 35. (1) प्राधिकरण ऐसे प्ररूप तथा रीति, जो विहित की जाए, में उचित लेखे और अन्य सुसंगत रिकार्ड बनाए रखेगा और तुलन-पत्र सहित लेखों की वार्षिक विवरणी तैयार करेगा।28 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 19, 2021 (MAGH. 30, 1942 SAKA) (2) प्राधिकरण के लेखे, महालेखाकार, हरियाणा से प्रतिवर्ष संपरीक्षा के अध्यधीन होंगे और ऐसी संपरीक्षा के सम्बन्ध में उपगत कोई खर्च प्राधिकरण द्वारा भुगतानयोग्य होगा। (3) महालेखाकार, हरियाणा और प्राधिकरण के लेखों की संपरीक्षा के संबंध में उस द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी संपरीक्षा के संबंध में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जो महालेखाकार, हरियाणा को सरकारी लेखों की संपरीक्षा के संबंध में हैं और विशिष्टतया, पुस्तकों, लेखों, सम्बन्धित वॉउचरों और अन्य दस्तावेजों और पेपरों को प्रस्तुत करने की मांग और प्राधिकरण के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।

(4) महालेखाकार, हरियाणा या इस निमित्त उस द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा यथा प्रमाणित प्राधिकरण के लेखों के साथ-साथ उस पर संपरीक्षा रिपोर्ट और इस प्रकार की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई पर व्याख्यात्मक ज्ञापन सरकार को प्रति वर्ष भेजा जाएगा और सरकार उसकी प्रति राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखवाएगी। (5) प्राधिकरण, उपधारा (4) के अधीन राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखने के बाद, प्राधिकरण के लेखों के साथ-साथ संपरीक्षा रिपोर्ट और व्याख्यात्मक ज्ञापन प्राधिकरण की वैबसाइट पर डलवाएगा।

वार्षिक रिपोर्ट। 36. (1) प्राधिकरण, प्रत्येक वर्ष के लिए उस वर्ष के दौरान की गई अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार करेगा और सरकार को वार्षिक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप तथा रीति में और ऐसी तिथि, जो विहित की जाए, को या से पूर्व भेजेगा और सरकार, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखवाएगी।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्ट में राहत उपायों, कार्यान्वित की गई योजनाओं पर कार्रवाई की वार्षिक प्लान के कार्यान्वयन और कार्यान्वयन में अन्तरालों तथा कमियों, यदि कोई हों, और ऐसी कमी के लिए कारणों की वस्तु-स्थिति पर व्याख्यात्मक ज्ञापन भी शामिल होगा।

(3) प्राधिकरण उपधारा (1) के अधीन राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखने के बाद, प्राधिकरण की वैबसाइट पर रिपोर्ट के साथ-साथ व्याख्यात्मक ज्ञापन डलवाएगा।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9073—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 19 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-02-19.Extra-Ordinary_Leg-No-39-2020/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-02-19.Extra-Ordinary_Leg-No-39-2020.