भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 13 मई, 2021
संख्या लैज. 11/2021.- दि हरियाणा रिकवरी आफ डैमजिज़ टु प्राप्रटी डयूरिंग डिस्टर्बैंस टु आडर ऐक्ट, 2021, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 06 मई, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद््द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 11 हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान सम्पत्ति क्षति वसूली अधिनियम, 2021
हरियाणा राज्य में किसी जनसमूह द्वारा दंगों और हिंसात्मक अव्यवस्था सहित विधिपूर्ण या विधिविरूद्ध लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान किन्हीं व्यक्तियों द्वारा सम्पत्तियों को पहुंचाई गई क्षति की वसूली हेतु तथा दायित्व के अवधारण हेतु, पहुंचाई गई क्षति के निर्धारण तथा मुआवजा देने हेतु दावा अधिकरण का गठन करने के लिए तथा उससे सम्बंधित या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करने हेतु अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान सम्पत्ति क्षति वसूली अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में होगा। (3) यह ऐसी तिथि को लागू होगा, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
परिभाषाएं । 2. इस अधिनियम में, जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''दावा आयुक्त'' से अभिप्राय है, राज्य सरकार द्वारा ऐसे रूप में पदाभिहित कोई
अधिकारी, जो उप-मण्डल मजिस्ट्रेट की पदवी से नीचे का नहीं होगा;
(ख) ''दावा अधिकरण'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम की धारा 6 के अधीन गठित दावा
अधिकरण;
(ग) ''क्षति'' से अभिप्राय है, लोक व्यवस्था में विघ्न के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा कोई प्रदर्षन एवं चूक करते हुए किसी अन्य व्यक्ति या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की सम्पत्ति को पहुंचाया गया नुकसान, हानि या क्षय;
(घ) ''लोक व्यवस्था में विघ्न'' से अभिप्राय है, किसी जनसमूह द्वारा दंगे, विद्रोह या हिंसात्मक
अव्यवस्था सहित विधिपूर्ण या विधिविरूद्ध किया गया विघ्न;
(ड़) ''स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए धारा 5 की उप-धारा (6) के अधीन राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित कोई अभिकरण;
(च) ''विधिक प्रतिनिधि'' से अभिप्राय है, कोई व्यक्ति, जो विधिक रूप से मृृतक व्यक्ति की सम्पदा का प्रतिनिधित्व करता है तथा इसमें शामिल हैं कोई व्यक्ति, जो मृृतक की सम्पदा के मामले में हस्तक्षेप करता है और जहां कोई पक्षकार प्रतिनिधि के रूप में वाद चला सकता है या के विरूद्ध वाद चलाया जा सकता है, ऐसे व्यक्ति, जिसके द्वारा इस प्रकार वाद चलाया गया है या जिसके विरूद्ध वाद चलाया गया है, को पक्षकार की मृृत्यु पर सम्पदा सौंपी गई है;
128 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA)(छ) ''सदस्य से अभिप्राय है, दावा अधिकरण का सदस्य तथा इसमें पीठासीन अधिकारी भी शामिल है;
(ज) ''व्यक्ति'' का वही अर्थ होगा, जो भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 45) की धारा 11 में यथा परिभाषित है;
(झ) ''सम्पत्ति'' में वाहन, पशुधन, आभूषण, वस्तुएं तथा ऐसी अन्य सम्पत्तियों, जिनका न्यूनतम मूल्य एक हजार रूपये है, सहित सभी प्रकार की अचल या चल सम्पत्तियां शामिल हैं;
(ञ) राज्य से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य;
(ट) ''राज्य सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार। मुआवजा के दावे के लिए आवेदन आमंत्रित करना।
3. (1) लोक व्यवस्था में किसी विघ्न के परिणामस्वरूप किसी सम्पत्ति को क्षति पहुंंचाने की सूचना की प्राप्ति पर, पुलिस थाने का प्रभारी पुलिस अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट को प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति सहित घटना के घटित होने की तुरन्त रिपोर्ट देगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति सहित ऐसी रिपोर्ट की प्राप्ति पर, जिला मजिस्ट्रेट, ऐसी रीति में तथा ऐसी समय अवधि, जो विहित की जाए, में लोक व्यवस्था में विघ्न डालने में शामिल व्यक्तियों द्वारा पहुुंचाई गइर््र क्षति हेतु मुआवजा के लिए दावोें हेतु आवेदन आमन्त्रित करने हेतु प्रख्यापन जारी करेगा।
जिला मजिस्टे्रट द्वारा रिपोर्ट तैयार करना।
4. जिला मजिस्ट्रेट, प्रथम सूचना रिपोर्ट तथा क्षति के लिए मुआवजा हेतु प्राप्त किए गए आवेदनों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे ऐसी अवधि, जो विहित की जाए, के भीतर राज्य सरकार को भेजेगा।
दावे के लिए आवेदन दायर करने हेतु प्रक्रिया।
5. (1) किसी स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण की रिपोर्ट सहित क्षति के लिए मुआवजा हेतु दावे का आवेदन, धारा 3 की उप-धारा (2) के अधीन आवेदन आमन्त्रित करने के प्रख्यापन की तिथि से इक्कीस दिन की अवधि के भीतर ऐसे प्ररूप, रीति तथा ऐसी फीस सहित, जो विहित की जाए, में, जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर किया जाएगा।
(2) मुआवजा के लिए दावा, स्वामी या उसके विधिक प्रतिनिधि, जिसको क्षति हुई है, द्वारा दायर किये जा सकते हैं। (3) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन अथवा केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन तथा नियंत्रणाधीन किसी संगठन की सम्पत्ति की दशा में, मुआवजा के लिए दावा कार्यालयाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष द्वारा इस सम्बंध में प्राधिकृृत किसी अधिकारी द्वारा दायर किया जाएगा। (4) किसी कम्पनी, न्यास, विश्वविद्यालय, सोसाइटी या किसी वैधानिक बोर्ड के स्वामित्वाधीन सम्पत्ति की दशा में, मुआवजा के लिए दावा, ऐसी कम्पनी, न्यास, विश्वविद्यालय, सोसाइटी या वैधानिक बोर्ड द्वारा इस सम्बंध में प्राधिकृृत किसी अधिकारी द्वारा दायर किया जाएगा। (5) जिले का पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक, लोक व्यवस्था में विघ्न, जहां लोक व्यवस्था में ऐसे विघ्न के फलस्वरूप क्षति हुई है, के प्रबन्धन के लिए पुलिस या राज्य के बाहर से अर्धसैनिक बलों की मांग की लागत के मद््दे मुआवजा का दावा करते हुए आवेदन दायर कर सकता है। (6) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बैकिंग तथा बीमा सेक्टर में अनुभव रखने वाले स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरणों की सूची अधिसूचित करेगी, जो मुआवजे के लिए दावे के आवेदन सहित मुल्यांकन रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकता है।
दावा अधिकरण का गठन।
6. (1) राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर, क्षति हेतु मुआवजा के लिए दावों के न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए तथा इस अधिनियम के अधीन इसको सौंपे गए कृृत्यों के पालन के लिए, ऐसी घटना तथा ऐसी अधिकारिता, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, एक या एक से अधिक दावा अधिकरणों का गठन करेगी।
(2) दावा अधिकरण की अध्यक्षता, पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से ऐेसे रूप में पदाभिहित किए जाने वाले हरियाणा वरिष्ठ न्यायिक सेवा में से किसीे व्यक्ति द्वारा की जाएगी तथा जहां इसमें दो या दो से अधिक सदस्य शामिल हैं, तो दावा अधिकरण के अन्य सदस्य, राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों, जो अपर उपायुक्त की पदवी से नीचे के न हों, में से होंगे। (3) जहां किसी क्षेत्र के लिए दो या दो से अधिक दावा अधिकरण गठित किए गए हैं, तो राज्य सरकार, साधारण या विश्ेाष आदेश द्वारा, उनमें कारबार के वितरण को विनियमित कर सकती है। (4) दावा अधिकरण, बैकिंग, मूल्यांकन, बीमा या लेखों के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों की सहायता ले सकते हैैं।129 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) दावा अधिकरण के अधिकारी/कर्मचारी। 7. राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन षक्तियों का प्रयोग करने तथा कृृत्यों का पालन करने के लिए, सेवा के ऐसे निबंधनों तथा षर्तों, जो विहित की जाएं, पर दावा अधिकरण को ऐसी संख्या में अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध करवाएगी, जो वह उचित समझे।
दावा अधिकरण के कृृत्य तथा शक्तियां। 8. (1) दावा अधिकरण, दायित्व का अवधारण करेगा, इसको भेजे गए मुआवजा हेतु दावों का निर्धारण करेगा तथा क्षति के आर्थिक मूल्य का अवधारण करेगा तथा ऐसे अवधारण पर, इससे सम्बंधित उपयुक्त मुआवजा देगा तथा उसका प्रभाजन करेगा। (2) इस प्रकार अवधारित मुआवजा, ऐसे अनुपात, जो दावा अधिकरण द्वारा अवधारित किया जाए, में लोक व्यवस्था में विघ्न, जिसके फलस्वरूप क्षति हुई है, का नेतृृत्व करने वाले, आयोजित करने वाले, योजना बनाने वाले, प्रोत्साहित करने वाले, भड़काने वाले, भाग लेने वाले या अंजाम देने वाले व्यक्तियों द्वारा भुगतानयोग्य होगा।
9. जिला मजिस्ट्रेट, दावा अधिकरण के गठन के बाद, धारा 3 की उप-धारा (2) के अधीन क्षति हेतु मुआवजे के दावे के लिए प्राप्त किए गए आवेदनों को न्यायनिर्णयन के लिए दावा अधिकरण को भेजेगा।
जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दावा अधिकरण को भेजे जाने वाले मुआवजा हेतु दावे।
पक्षकारों को सम्मन जारी करना। 10. (1) दावा अधिकरण, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार ऐसी घटना, जिसके फलस्वरूप क्षति हुई है, का नेतृृत्व, आयोजित करने वाले, योजना बनाने वाले, प्रोत्साहित करने वाले, भड़काने वाले, भाग लेने वाले या अंजाम देने वाले व्यक्तियों को तथा दावा हेतु आवदेन प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों को भी नियत तिथि तथा समय, जिस पर यह दावा हेतु आवेदनों को सुनेगा, वर्णित करते हुए सम्मन जारी करेगा ।
(2) यदि किसी व्यक्ति, जिसे सम्मन जारी किया गया है, आवेदन की सुनवाई के लिए नियत तिथि तथा समय पर दावा अधिकरण के समक्ष पेश होने में असफल रहता है, तो दावा अधिकरण, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में प्रकाशन द्वारा तामील करवा सकता है। (3) दावा अधिकरण, किसी व्यक्ति, जो उप-धारा (2) के अधीन सम्मनों की तामील के बावजूद इसके समक्ष पेश होने में असफल रहता है, के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही कर सकता हैः
परन्तु व्यक्ति, जिसके विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई है, आदेष को रद्द करने के लिए आवेदन दायर कर सकता है और यदि वह दावा अधिकरण को संतुष्ट कर देता है कि उसे पेष होने से किसी पर्याप्त कारण द्वारा रोका गया था जब आदेष पारित किया गया था या कि सम्मनों की सम्यक्् तामील नहीं की गई थी, तो दावा अधिकरण आदेष को अपास्त कर सकता है, जिसके द्वारा ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई थी।
(4) दावा अधिकरण, व्यक्ति, जिसके विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई है, के स्वामित्वाधीन सम्पत्ति की जिला मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट मांग सकता है तथा जिला मजिस्ट्रेट पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर ऐसे व्यक्ति के स्वामित्वाधीन सम्पत्ति तथा बैंक खाते के ब्योैरों की रिपोर्ट दावा अधिकरण को प्रस्तुत करेगा।
(5) जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, या किसी अधिकारी या किसी बैंक या किसी अन्य शासकीय अधिकरण से ऐसी सम्पत्ति तथा बैक खातों के सम्बंध में सूचना मांग सकता है तथा ऐसा अधिकारी, ऐसी सूचना, जो उसे उपलब्ध हो या उस द्वारा प्राप्त की जाए, जिला मजिस्ट्रेट को उपलब्ध करवाने हेतु कर्तव्य द्वारा आबद्ध होगा।
(6) दावा अधिकरण, उप-धारा (4) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर, सम्बद्ध व्यक्ति को उपस्थित होने के लिए बाध्य करने हेतु उसकी सम्पत्ति तथा बैंक खातों की कुर्की के आदेश जारी करने की कार्यवाही कर सकता है तथा अधिकारी, जिसको सम्पत्ति या बैंक खाते की कुर्की करने का ऐसा आदेश जारी किया जाता है, इसकी प्राप्ति पर तुरन्त ऐसे आदेश की अनुपालना करने हेतु कर्तव्य द्वारा आबद्ध होगा :
परन्तु इस उप-धारा के अधीन सम्पत्ति की कुर्की के लिए कार्यवाही करने से पूर्व, दावा अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 5) के आदेश XXXVIII, नियम 5 के अधीन यथा उपबंधित सिद्धान्तों का अनुसरण करेगा।
पक्षकारों का पेश होना तथा लिखित कथन दायर करना। 11. व्यक्ति, जिसके विरूद्ध दावा अधिकरण द्वारा धारा 10 के अधीन सम्मन जारी किया गया है, प्रथम सुनवाई को या से पूर्व या ऐसे और समय, जिसे दावा अधिकरण अनुमत करे, जो सम्मन की तामील या धारा 10 की उप-धारा (2) के अधीन प्रकाशन की तिथि से इक्कीस दिन तक ही, लिखित कथन दायर करेगा तथा ऐसा लिखित कथन अभिलेख का भाग रूप होगा।130 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) दावा अधिकरण की प्रक्रिया।
12. (1) दावा अधिकरण, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 5) में अधिकथित प्रक्रिया द्वारा बाध्य नहीं होगा, किन्तु नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों और इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमाें के अन्य उपबन्धों के अध्यधीन निर्देशित होगा। दावा अधिकरण को इसकी बैठकों के स्थान तथा समय नियत करने सहित इसकी अपनी प्रक्रिया को विनियमित करने की शक्ति होगी।
(2) दावा अधिकरण, दस्तावेजों तथा लिखित कथनों के अवलोकन पर और ऐसे साक्ष्य प्राप्त करने या ऐसे मौखिक तर्कों, जो अग्रिम में हैं, को सुनने के बाद, इसको किए गए प्रत्येक आवेदन पर यथासम्भव शीघ्रता से निर्णय करेगा और सामान्यतः प्रत्येक आवेदन धारा 10 की उप-धारा (1) के अधीन सम्मन की तिथि से तीन मास की अवधि के भीतर निर्णीत किया जाएगा।
(3) इस अधिनियम के अधीन दावा अधिकरण की कार्यवाहियां, जहाँ तक यह व्यवहारिक हों और न्याय के हित में हों, इसके निष्कर्ष तक दिन-प्रतिदिन के आधार पर जारी रहेंगी, जब तक दावा अधिकरण अभिलिखित किए जाने वाले कारणों के लिए अनुवर्ती दिन तक कार्यवाही स्थगित करने के लिए आवश्यक न समझे।
(4) दावा अधिकरण को इस अधिनियम के अधीन अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी वाद के विचारण के दौरान वही शक्तियाँ होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात््ः-
(क) किसी व्यक्ति को सम्मन जारी करने और हाजिर होने के लिए बाध्य करना तथा
शपथ पर उसकी जांच करना ;
(ख) दस्तावेजों का प्रकटीकरण तथा पेष किया जाना आवष्यक होना;
(ग) शपथ-पत्र पर साक्ष्य स्वीकार करना ; (घ) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 ( 1872 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 1) की धारा 123 तथा 124 के उपबन्धों के अध्यधीन, किसी कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की अपेक्षा करना ;
(ङ) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करना।
दावा आयुक्त तथा स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण।
13. (1) दावा अधिकरण, यदि इस प्रकार ऐसा अपेक्षित हो, लोक व्यवस्था में विघ्न के फलस्वरूप हुई क्षति के आर्थिक मूल्य का अनुमान लगाने में दावा अधिकरण की सहायता के लिए एक या एक से अधिक दावा आयुक्तों, जो उप-मण्डल मजिस्ट्रेट की पदवी के नीचे के न हों, की नियुक्ति कर सकता है। (2) दावा अधिकरण, सम्पत्ति की क्षति के आर्थिक मूल्य के मूल्यांकन के लिए दावा आयुक्त की सहायता करने हेतु स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण भी नियोजित कर सकता है।
(3) दावा अधिकरण को दावा आयुक्त और स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण को ऐसे निर्देश जारी करने की शक्ति होगी, जो वह उचित समझे और उनमें क्षति के मूल्यांकन के लिए निजी या सार्वजनिक स्रोतों से विडियो, ऑडियो या अन्य रिकार्डिंग सहित साक्ष्य के लिए सम्मन करने की शक्तियाँ निहित होंगी। (4) स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण को भुगतान किया जाने वाला पारिश्रमिक ऐसा होगा, जो राज्य सरकार द्वारा अवधारित किया जाए।
(5) दावा आयुक्त, दावा अधिकरण को ऐसी अवधि, जो दावा अधिकरण द्वारा प्रदान की जाए, के भीतर स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण की रिपोर्ट, यदि कोई हो, सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
मुआवजा देना और इसका प्रभाजन।
14. (1) दावा अधिकरण, पक्षकारों को सुनने के बाद और रिकार्ड में उपलब्ध तथ्यों और दावा आयुक्त तथा स्वतंत्र मूल्यांकन अभिकरण की रिपोर्ट के आधार पर व्यक्ति के दायित्व को तथा प्रत्येक आवेदक को दिए जाने वाले मुआवजे के आर्थिक मूल्य को अवधारित करेगा।
(2) दावा अभिकरण, मुआवजे के लिए प्रत्येक दावे का अवधारण करते समय घटना, जिसके फलस्वरूप क्षति हुई है, का नेतृृत्व करने वाले, आयोजित करने वाले, योजना बनाने वाले, प्रोत्साहित करने वाले, भड़काने वाले, भाग लेने वाले या अंजाम देने वाले व्यक्तियों से वसूलीयोग्य मुआवजे के प्रभाजन का भी निर्णय करेगा। (3) दावा अधिकरण, उपधारा (1) के अधीन पंचाट सहित इस प्रकार दी गई राशि की क्षति की वसूली हेतु प्रमाण-पत्र जारी करेगा। कलक्टर, भू-राजस्व के बकायों के रूप में उसी रीति में पंचाट के निष्पादन के लिए आवेदन पर राशि की वसूली के लिए कार्यवाही करेगा :
131 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA)परन्तु दावा अधिकरण, आवेदक द्वारा दावा किए गए मुआवजे या दस करोड़ रूपए, जो भी कम हो, से उच्चतर मुआवजा नहीं देगा : परन्तु यह और कि कोई भी व्यक्ति एक करोड़ रूपए से अधिक के भुगतान के लिए दायी नहीं होगा। (4) दावा अधिकरण, अभिलिखित किए जाने वाले कारणों के लिए, लोक व्यवस्था में विघ्न की घटना के फलस्वरूप हुई क्षति के लिए दिए गए मुआवजे की कुल राशि से अनधिक अनुकरणीय क्षति का पंचाट भी कर सकता है और ऐसी क्षति, घटना, जिसके फलस्वरूप क्षति हुई है, का नेतृृत्व करने वाले, आयोजित करने वाले, योजना बनाने वाले, प्रोत्साहित करने वाले, भड़काने वाले, भाग लेने वाले या अंजाम देने वाले व्यक्तियों द्वारा संयुक्ततः और पृृथक्तः भुगतानयोग्य होगीः
परन्तु ऐसी अनुकरणीय क्षति का भुगतान, राज्य की समेकित निधि में किया जाएगा।
(5) कलक्टर को किसी व्यक्ति, जिसके विरूद्ध दावा अधिकरण द्वारा मुआवजा का भुगतान करने के लिए पंचाट पारित किया गया है, की सम्पत्ति या बैंक खाता की कुर्की का आदेश जारी करने की शक्ति होगी और ऐसी सम्पत्ति या बैंक खाता तब तक कुर्क रहेगा जब तक व्यक्ति देय राशि का भुगतान नहीं कर देता है। (6) निम्नलिखित के संबंध में मुआवजा प्राप्य है -
(i) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन किसी सम्पत्ति को या पुलिस अथवा राज्य के बाहर से आए पुलिस अर्द्धसैनिक बलों की मांग की लागत के कारण हुई क्षति जिला मजिस्ट्रेट द्वारा संघ या राज्य, जैसी भी स्थिति हो, की समेकित निधि में जमा करवाई जाएगी;
(ii) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन और नियंत्रणाधीन किसी संगठन के स्वामित्वाधीन किसी सम्पत्ति को हुई क्षति ऐसे संगठन के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भुगतान की जाएगी ;
(iii) उपरोक्त (ii) के अधीन किसी संगठन से भिन्न किसी कंपनी, न्यास, विश्वविद्यालय या सोसाइटी या वैधानिक बोर्ड के स्वामित्वाधीन वाली किसी सम्पत्ति को हुई क्षति जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसी कंपनी, न्यास, विश्वविद्यालय या सोसाइटी या वैधानिक बोर्ड, जैसी भी स्थिति हो, को भुगतान की जाएगी;
(iv) उपरोक्त (iii) से भिन्न किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन वाली किसी सम्पत्ति को हुई क्षति की वसूली जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी और ऐसे व्यक्ति को भुगतान की जाएगी :
परन्तु यदि मुआवजा के रूप में कोई राशि, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या किसी बीमा कंपनी या इस निमित्त किसी अन्य अधिकरण द्वारा घटना (घटनाओं) में क्षतिग्रस्त किसी सम्पत्ति के स्वामी को भुगतान की गई है, तो जिला मजिस्ट्रेट, भुगतान किए जाने वाले मुआवजा की राशि से ऐसी राशि समायोजित करेगा और इस प्रकार समायोजित की गई राशि, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या ऐसी बीमा कंपनी या ऐसे अन्य अधिकरण को भुगतान की जाएगी।
(7) दावा अधिकरण, मुआवजा के लिए दावे हेतु आवेदनों का निपटान करते हुए, कार्यवाहियों में उपगत लागत और व्यय के संबंध में ऐसे आदेश पारित कर सकता है, जो वह उचित समझे।
ब्याज देना। 15. दावा अधिकरण निर्देश कर सकता है कि मुआवजा राशि के अतिरिक्त, प्रतिवर्ष छह प्रतिशत से अनधिक साधारण ब्याज का भी भुगतान किया जाएगा।
अपील। 16. दावा अधिकरण द्वारा पारित पंचाट से व्यथित कोई व्यक्ति, पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर कर सकता है :
परन्तु कोई भी अपील तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी जब तक दावा अधिकरण द्वारा इस प्रकार दिए गए मुआवजे की राशि का बीस प्रतिशत कलक्टर के पास जमा नहीं करवा दिया जाता है।
अधिकारिता का वर्जन। 17. किसी भी सिविल न्यायालय को मुआवजा के लिए दावे के संबंध में किसी मामले को ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी और कोई भी व्यादेश, किसी बात, जो इस अधिनियम द्वारा या के अधीन की गई है या किए जाने के लिए आशयित है, के संबंध में किसी सिविल न्यायालय द्वारा प्रदान नहीं किया जाएगा।132 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) 18. इस अधिनियम के अधीन सम्पत्ति की क्षति के लिए मुआवजा हेतु कार्यवाहियाँ, किसी भी सक्षम विधि न्यायालय के समक्ष आपराधिक कार्यवाहियों, यदि कोई हों, के माध्यम से किए गए या किए जाने के लिए संभाव्य किसी आपराधिक दायित्व के अतिरिक्त होंगी न कि उसके अल्पीकरण में।
आपराधिक कार्यवाहियों पर वर्जन नहीं होना।
सामान्य अपराध। 19. जो कोई भी, इस अधिनियम से आबद्ध होते हुए, इस अधिनियम के अधीन दावा अधिकरण या जिला मजिस्ट्रेट को उसके कर्तव्य का निष्पादन करने में सहायता देने या उपलब्ध करवाने में असफल रहता है, तो वह भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 187 के अधीन अपराध के लिए दण्डनीय होगा।
20. किसी दावा अधिकरण के समक्ष सभी कार्यवाहियां, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 2) की धारा 2 के खण्ड (i) के अर्थ के भीतर न्यायिक कार्यवाहियां समझी जाएंगी। दावा अधिकरण के समक्ष कार्यवाहियों का न्यायिक कार्यवाहियां होना।
21. दावा अधिकरण को उपलब्ध करवाए गए पीठासीन अधिकारी और अन्य सदस्य, दावा आयुक्त तथा अधिकारी और अन्य कर्मचारी, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक समझे जाएंगे।
दावा अधिकरण के सदस्यों तथा अमले का लोक सेवक होना।
सद््भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।
22. कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही, किसी बात, जो इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद््भावपूर्वक की गई है या किए जाने के लिए आशयित है, के लिए किसी प्राधि—त व्यक्ति के विरूद्ध नहीं हो सकेगी।
कठिनाइयां दूर करने की शक्ति।
23. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्ध को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से संगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो उसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।
(2) उप-धारा (1) के अधीन कोई भी आदेश, इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा। (3) उप-धारा (1) के अधीन किए गए प्रत्येक आदेश को यथासंभव शीघ्रता से राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखा जाएगा।
नियम बनाने की शक्ति।
24. राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9169—L.R.—H.G.P., Pkl.