Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 75-2021/Ext.] चण्डीगढ़, वीरवार, दिनांक 13 मई, 2021
(23 वैषाख, 1943 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
117-122
123
125
133
135
137 1. हरियाणा नगर निगम (संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 4) 2. हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 7) 3. हरियाणा आकस्मिकता निधि (संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 10) 4. हरियाणा लोक व्यवस्था मे विघ्न के दौरान सम्पत्ति क्षति वसूली अधिनियम, 2021 127-132 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 11) 5. हरियाणा ग्रामीण विकास (संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 12) 6. हरियाणा पंचायती राज (संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 13) 7. पंजाब श्रमिक कल्याण निधि (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 16) (केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं
भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं
(xxxviii)
HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) 117भाग-I
हरियाणा सरकार विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना दिनांक 13 मई, 2021
संख्या लैज. 4/2021.- दि हरियाणा म्यूनिसिपल कारपोरेशन (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2021, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 06 मई, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद््द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 4
हरियाणा नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2021 हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994, को आगे संशोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. यह अधिनियम हरियाणा नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है । स्ांक्षिप्त नाम ।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 67 का संशोधन। 2. हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 67 की उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी तथा 31 मई, 1994 से प्रतिस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्् :- ''(1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, विहित रीति में, निगम सेवाओं के सभी या किन्हीं प्रवर्गों का गठन कर सकती है तथा इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, निगम सेवाओं के किसी प्रवर्ग के एक बार गठन होने के बाद, प्रवर्ग के सभी कर्मचारी, जो ऐसे गठन की तिथि को सेवा मेें हैं या जो किसी पश्चात््वर्ती तिथि को सेवा में आएंगे, तो वे निगम सेवाओं के उस प्रवर्ग के एक-एकल संयुक्त संवर्ग का गठन करेेंगेः परन्तु सरकार, प्रत्येक निगम के लिए इस अधिनियम के अधीन निगम सचिव को उसे सौंपे गए कर्तव्यों के पालन के लिए नियुक्त करेगी।''। 3. मूल अधिनियम की धारा 87 में,-
(i) उप-धारा (1) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा,
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 87 का संशोधन। अर्थात्् :- ''(क) क्षेत्र जिसमें भवन या भूमि स्थित है के आधार पर संगणित नगरपालिका क्षेत्र में किसी भवन या भूमि के स्वामी या अधिभोगी द्वारा भुगतानयोग्य कोई सम्पत्ति कर, इसकी अवस्थिति, प्रयोजन जिसके लिए यह उपयोग किया जाता है, लाभयोग्य उपयोग के लिए इसकी क्षमता, निर्माण की गुणवत्ता तथा अन्य सुसंगत कारक, आवेदन के लिए संगणना का ढंग तथा दर, ऐसी होगी जो सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। कर की दरें, सम्पत्तियों की विभिन्न किस्मों के लिए भिन्न-भिन्न हो सकती हैं, जैसे आवासीय, गैर-आवासीय या वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत इत्यादि तथा समान दरों या श्रेणीकृृत पैमाने पर हो सकती है; तथा सभी मामलों में, ये फ्लोर दरें होेंगी तथा निगम सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सम्यक्् प्रक्र्रिया अपनाते हुए किसी भी समय दरों में भविष्यलक्षी प्रभाव से वृृद्धि कर सकती हैः परन्तु केवल कृृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही किसी भी भूमि पर कोई सम्पत्ति कर देय नहीं होगा। व्याख्या.- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए.-
(1) ''केवल कृृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही भूमि'', भूमि जिस पर टयूबबैल कनेक्शन के लिए बिजली के मीटर तथा अन्य विद्युत स्थिरता रखने के उदेद््श्यों से कोई संरचना बनाई गई है, शब्द शामिल होंगे।118 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) (2) ''फलौर दर'' शब्दों से अभिप्राय है, उक्त खण्ड के अधीन जारी
की जाने वाली अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट न्यूनतम दर ; (ii) उप-धारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
''(3) उप-धारा (1) के खण्ड (क) में यथा उपबंधित के सिवाय, उप-धारा (1) तथा उप-धारा (2) में यथा विनिर्दिष्ट कर, ऐसी दर पर उद््गृृहीत किया जाएगा, जो सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट की जाएं तथा इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाई गई उप-विधियों के उपबंधों के अनुसार निर्धारित तथा संगृृहीत किया जाएगा ।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 87ग के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्् :-
''87घ- अवैध भवन पर शास्ति का उद््ग्रहण.- (1) जो कोई भी,-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 में धारा 87घ तथा 87ड़ का रखा जाना।
(क) इस अधिनियम या तत्समय लागू किसी अन्य विधि या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या उप-विधियों के अधीन अनुमति प्राप्त किए बिना या ऐसी अनुमति से जुड़ी किसी शर्त की उल्लंघना में अपनी भूमि पर; या
(ख) उससे सम्बंधित स्थल, जो सुसंगत लागू विधि, जिसमें इसके अधीन बनाए गए नियम/जारी किए गए अनुदेश शामिल हैं, के अधीन अनुमोदन के बिना, बनाया गया है, पर; या
(ग) इस अधिनियम या तत्समय लागू किसी अन्य विधि तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों तथा उपविधियों के किन्हीं उपबंधों के भंग में, निगम, केन्द्रीय सरकार या सरकार, या ऐसी किसी सरकार द्वारा स्थापित किसी वैधानिक बोर्ड/निगम या संगठन या कम्पनी से सम्बंधित या द्वारा पट््टे पर दी गई किसी भूमि पर, किसी भवन या भवन के भाग पर अवैध निर्माण या पुनर्निर्माण करता है, तो वह प्रत्येक वर्ष शास्ति, जो ऐसे भवन पर उद््गृृहणीय सम्पत्ति कर की राशि के दोगुना के बराबर होगी, के भुगतान हेतु दायी होगा जब तक यह किन्हीं कार्यवाहियों, जो ऐसे अवैध निर्माण के सम्बंध में उसके विरूद्ध संस्थित की जा सकती हैं, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अवैध निर्माण रहता है तथा उप-धारा (1) के अधीन भुगतान की गई शास्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन यथा संगृृहीत अवधारित की जाएगी मानो उसकी राशि किसी ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध देय सम्पत्ति कर था :
परन्तु ऐसे कर के उद््गृृहण तथा संग्रहण तथा शास्ति का उनकी ऐसी अवैध विद्यमानता की किसी अवधि जो भी हो के लिए ऐसे अवैध निर्माण या पुनर्निर्माण को नियमित करने के रूप में अर्थ नहीं लगाया जाएगा।
87ड़.- भवन या भूमि के अवैध उपयोग पर शास्ति का उद्गृृहण.- (1) जो कोई भी या तो ऐसे भवन या भूमि या उसके किसी भाग के किसी उपयोग को विनियमित या नियन्त्रित करने वाली तत्समय लागू किसी विधि की उल्लंघना में या ऐसी विधि के अधीन जारी किए गए किसी आदेश या निर्देश, यदि कोई हो, की उल्लंघना में भवन या भूमि या उसके किसी भाग का उपयोग करता है, तो वह शास्ति, जो सम्पत्ति कर की राशि, जो सम्पूर्ण वर्ष के रूप में किसी वर्ष के संगणित परिकलित भाग, वार्षिक आधार पर ऐसे अवैध उपयोग की सम्पूर्ण अवधि के लिए इस अधिनियम की धारा 87 की उप-धारा (1) के अधीन ऐसे भवन या भूमि या उसके भाग, जैसी भी स्थिति हो, पर उद््गृृहणीय है, के दोगुना के बराबर होगी, के भुगतान के लिए दायी होगा तथा इस उप-धारा के अधीन भुगतान की गई शास्ति इस अधिनियम के उपबधों के अधीन यथा संगृृहीत अवधारित की जाएगी, मानो उसकी राशि किसी ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध देय सम्पत्ति कर था।
(2) उप-धारा (1) के अधीन अधिरोपित या भुगतान की गई शास्ति, किन्हीं कार्यवाहियों, जो ऐसे अवैध उपयोग के सम्बंध में उपयोगकर्ता के विरूद्ध संस्थित की जा सकती हैं, पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी तथा ऐसे अवैध उपयोग के विनियमन के किसी तर्क को उत्पन्न करने वाले किसी अधिकार के साथ ढ़की नहीं जाएगी तथा कोई प्रशमन जो उससे विधिपूर्ण स्वीकार किया जा सकता है, के विरूद्ध बदला नहीं जाएगा।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 89 के खण्ड (क) में, ''वार्षिक मूल्य'' शब्दों के स्थान पर, ''मूल्य'' शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 89 का संशोधन।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) 119 6. मूल अधिनियम की धारा 96 के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात््ः-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 में धारा 96क तथा धारा 96ख का रखा जाना। ''96क कतिपय दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए बेबाकी प्रमाणपत्र जारी करना.- नगरपालिका क्षेत्र में स्थित किन्हीं भूमियों या भवनों का किसी रीति में विक्रय, अन्तरण, पट््टा, उपहार या अन्य संक्रामण के संबंध में कोई दस्तावेज जो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) की धारा 17 के अधीन पंजीकृृत किया जाना अपेक्षित है, तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक उक्त दस्तावेज आयुक्त द्वारा जारी किए गए बेबाकी प्रमाणपत्र के साथ न हो, जो तीन मास की अवधि के लिए या ऐसी अन्य समयावधि, जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, यह प्रमाणित करते हुए कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों, उप-विधियों या विनियमों के अधीन भुगतानयोग्य या वसूलीयोग्य, दस्तावेज में यथा वर्णित ऐसी भूमियों तथा/या भवनों के सम्बंध में किरायों, करों, उपकरों, प्रभारों, फीसों, जुर्मानों तथा शास्तियों सहित सभी नगरपालिका देयों का पूर्ण रूप से भुगतान कर दिया गया है, विनिर्दिष्ट की जाए, के लिए वैध रहेगाः
परन्तु सरकार आदेश द्वारा, ऐसी भूमियों तथा भवनों जो अधिनियम की धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना के परिणामस्वरूप नगरपालिका क्षेत्र में प्रथम बार या नए सिरे से आए हैं, को, ऐसी अवधि, जो सरकार उचित समझे, के लिए इस धारा की अपेक्षाओं से पूर्णतः या भागतः छूट दे सकती है।
96ख. बिजली, जल तथा मलजल कनक्शन की स्वीकृृति/जारी करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करना.-कोई भी व्यक्ति, किन्हीं परिसरों के लिए बिजली, जल तथा मलजल कनक्शन की स्वीकृृति/जारी करने के लिए सम्बद्ध प्राधिकारी को आवेदन करने से पूर्व, सम्बद्ध नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा तथा कोई भी प्राधिकारी ऐसा कनक्शन तब तक स्वीकृृत/ जारी नहीं करेगा जब तक आवेदन के साथ अनापत्ति प्रमाण पत्र न हो। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, 'स्वीकृृति/जारी करना' अभिव्यक्ति में डिसकनक्शन
के रेस्टोरेशन या क्षमता/लोड इत्यादि में वृृद्धि शामिल होगी।''।
7. मूल अधिनियम की धारा 122 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 122 का प्रतिस्थापन। ''122. सार्वजनिक स्थानों में विज्ञापन का नियन्त्रण तथा विनियमन.- (1) आयुक्त या सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसा अन्य प्राधिकारी, नगरपालिका क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों तथा परिवहन के साधनों में प्रदर्शित सभी विज्ञापनों को नियन्त्रित तथा विनियमित करेगा। वे इस प्रयोजन के लिए, नगरपालिका क्षेत्र में विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए उपयुक्त स्पाटॅस तथा स्थलों को परिलक्षित करेंगे तथा इस अभ्यास के भाग के रूप में, विज्ञापनों के प्रदर्शन के लिए अपने परिसरों या वाहनों के सार्वजनिक दृृश्य परिदृृश्यों को किराए पर देने के लिए इच्छुक व्यक्तियों से, व्यापक प्रचार द्वारा, आवेदन आमऩ्त्रित कर सकते हैं। आयुक्त या सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, ऐसे सुसंगत कारकों, जो या तो सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट हैं या ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करने वाले विधि न्यायालय के किसी आदेश के अनुसार निर्देशित या सरकार की किसी पॉलिसी के अधीन विनिर्दिष्ट किए गए हैं, पर विचार करने के बाद स्पॉटस, स्थलों तथा वाहनों की पहचान को अन्तिम रूप देते हुए उसके द्वारा किए गए सभी आवेदनों का विनिश्चय करेगा।
(2) उप-धारा (1) के अधीन परिलक्षित स्पॉट, स्थल या वाहन पर विज्ञापन लगाने का इच्छुक कोई व्यक्ति, आयुक्त या अनुमति के लिए प्राधिकारी को ऐसी रीति, जो सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में आवेदन करेगा जो युक्तियुक्त समय के भीतर सभी सुसंगत कारकों पर विचार करते हुए उसका निपटान करेगा तथा ऐसा करते समय ऐसे अन्य निबंधन तथा शर्तें अधिरोपित कर सकता है, जो प्रत्येक मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों के अनुकूल हों। किसी भी परिस्थिति में, उप-धारा (1) के अधीन परिलक्षित से भिन्न किसी स्पॉट, स्थल या वाहन पर कोई विज्ञापन लगाने हेतु कोई भी आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा। (3) आयुक्त या सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, उप-धारा (2) के अधीन कोई विज्ञापन लगाने हेतु ऐसी कोई अनुमति देने से पूर्व, परिलक्षित परिसरों के स्वामी/अधिभोगी या परिलक्षित वाहन (नगर निगम से सम्बन्धित भवन, भूमि या वाहन से भिन्न) जहां विज्ञापन लगाया जाना है के स्वामी/उपयोगकर्ता के साथ रेंट शेयरिंग व्यवस्था करेगा; तथा अनुमति देते समय, इस प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किसी प्राधिकारी द्वारा यथा अवधारित दरों पर आवेदक विज्ञापनदाता से अनुमति फीस प्रभारित करेगा तथा राज्य के भिन्न-भिन्न निगमों या क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न प्राधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।120 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) (4) सरकार, स्थलों, स्पॉट तथा वाहनों की पहचान विज्ञापन लगाने हेतु अनुमति देने के लिए किए गये आवेदनों की प्रक्रिया, रेंट शेयरिंग व्यवस्था और अन्य सम्बंधित मामलों, जो वह उचित समझे, के लिए मार्गदर्शन/पॉलिसी अधिकथित कर सकती है। (5) कोई भी विज्ञापन, आयुक्त या सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, की लिखित अनुज्ञा के बिना, किसी भूमि, भवन, दीवार, होर्डिंग, फ्रेम, खंभा या संरचना या किसी वाहन पर खड़ा नहीं किया जाएगा, प्रदर्शित नहीं किया जाएगा, लगाया नहीं जाएगा या रखा नहीं जाएगा या नगरपालिका क्षेत्र के भीतर किसी भी स्थान में किसी भी रीति जो भी हो, में प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''सार्वजनिक स्थान'' से अभिप्राय है, कोई स्थान, जो साधारणतः जनता के लिए खुला तथा की पहुंच में हो, तथा इसमें निम्नलिखित शामिल हैं :- (i) सड़क, फलाईओवर, खंड़जा, पटरी, गली सार्वजनिक चौक, पार्क, बाग, जल निकाय, झील, नदी किनारा, सड़कों के साथ-साथ हरित पट््टी ; (ii) सरकारी भवन जो जनता के लिए खुले हैं, जैसे कि सार्वजनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, संस्मारक, चिड़िया घर, मछलीघर, खुला थियेटर, खेल मैदान, स्टेडियम ;
(iii) रेलवे स्टेशन, मैट्रो रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, टैक्सी अड््डा, रिक्शा अड्डा,
बस क्यू शैल्टर, गली फर्नीचर, पार्किंग स्थान ;
(iv) सभी अन्य भूमियां, भवन तथा संरचनाएं चाहे सरकारी हाथों में या निजी हो, जो पटरी, सार्वजनिक आम रास्ते से दृश्य हैं और अन्य सार्वजनिक स्थान जहां तक वे सार्वजनिक दृश्य परिदृृश्य को प्रभावित करते हैं।''। 8. मूल अधिनियम की धारा 132 में, ''वार्षिक मूल्य'' शब्दोें के स्थान पर, ''मूल्य'' शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 132 का संशोधन।
9. (1) मूल अधिनियम की धारा 164 में,-
(i) विद्यमान खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्् 1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 164 का संशोधन।
ः- ''(क) आयुक्त,-
(i) निगम से संबंधित किसी चल सम्पत्ति, जिसका मूल्यहृास मूल्य पांच लाख रूपये से अधिक न हो, का विक्रय द्वारा या अन्यथा निपटान कर सकता है; (ii) निगम से संबंधित किसी अचल सम्पत्ति को दस वर्ष से अनधिक अवधि के
लिए पट््टे पर दे सकता है; या
(iii) निगम से संबंधित किसी अचल सम्पत्ति, जिसका चालू कलक्टर दर मूल्य पांच लाख रूपये से अधिक न हो, या जिसका वार्षिक बाजार किराया पचास हजार रूपये से अधिक न हो, को बेच सकता है या स्थायी पट््टे पर दे सकता है;'';
(ii) खण्ड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्् :-
''(ग) इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, पूर्वोक्त खण्डों के अधीन प्रतिफल, जिसके लिए कोई अचल सम्पत्ति बेची, पट््टे पर दी या अन्यथा अन्तरित की जा सकती है, जिस पर ऐसी अचल सम्पत्ति, सामान्य तथा उचित प्रतियोगिता में ऐसी अचल सम्पत्ति बेची, पट्टे पर दी या अन्यथा अन्तरित की जा सकती थी, से कम नहीं होगाः
परन्तु सरकारी विभाग को अचल सम्पत्ति के विक्रय या पट््टे पर देने या अन्यथा के रूप में अन्तरण की दशा में, सम्पत्ति सरकार के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन कलक्टर दर पर अन्तरित की जा सकती हैः
परन्तु यह और कि किसी व्यक्ति को दुकान या गृृह का अन्तरण करने की दशा में, जिसके पास किराए या पट््टे या अन्यथा के रूप में पिछले बीस वर्ष या अधिक के लिए ऐसी सम्पत्ति का कब्जा है, ऐसे प्राधिकारी, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन, सम्पत्ति विक्रय के रूप में कलक्टर दर या किसी अन्य रियायती दर, जो सरकार द्वारा अवधारित की जाए, पर अन्तरित की जा सकती है :
HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) 121परन्तु यह और कि दुकान या गृह जो पिछले बीस वर्ष या से अधिक के लिए पट््टे या किराये पर या अनुज्ञति फीस या तहबजारी या अन्यथा पर हैं, के संबंध में स्वामित्व अधिकार, सरकार द्वारा, समय-समय पर, इस निमित्त बनाई गई पॉलिसी में यथा विनिर्दिष्ट दर जिस पर ऐसे स्वामित्व अधिकार अन्तरित किए जाएंगे सहित ऐसे निबन्धन तथा शर्तों पर विक्रय के माध्यम से अन्तरित किए जा सकते हैं ।'';
(iii) खण्ड (गक) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''(गख) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, आयुक्त निम्नलिखित परिस्थितियों के अधीन निगम से संबंधित किसी चल या अचल सम्पत्ति को बेचेगा, पट््टे पर देगा या किराए पर देगा या अन्यथा अन्तरित करेगा, अर्थात्् :- (i) सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसे प्रतिफल के लिए सरकार के निर्देश पर निगम की कोई चल या अचल सम्पत्ति को बेचना, पट्टे पर देना या अन्यथा अन्तरित करना;
(ii) जब सरकार द्वारा बनाई गई कोई पॉलिसी उसके किसी भाग के रूप में, निगम की किसी चल या अचल सम्पत्ति को बेचने, पट्टे पर देने या अन्यथा अंतरण करने के लिए उपरोक्त पॉलिसी में यथा विनिर्दिष्ट प्रतिफल के लिए अपेक्षित है :
परन्तु खण्ड (ii) के अधीन आयुक्त के निर्णय लेने से पूर्व सरकार
की पूर्व स्वीकृृति अपेक्षित होगी।
10. मूल अधिनियम की धारा 350 घ में,-
(i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा ।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 350 घ का संशोधन। (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा तथा प्रथम अप्रैल, 2014 से जोड़ा गया समझा जाएगा,
अर्थात् :-
''परन्तु पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) तथा नगरपालिका सीमाओं के भीतर क्षेत्रों को यथा लागू इसके अधीन बनाए नियमों के अधीन निदेशक, नगर तथा ग्राम आयोजना, हरियाणा द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियां तथा कृृत्य निदेशक द्वारा किए जाएंगे। उपरोक्त निर्दिष्ट अधिनियम के अधीन आयुक्त एवं सचिव, हरियाणा सरकार, नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग की शक्तियां नगरपालिका सीमाओं के भीतर, इस अधिनियम के अधीन प्रशासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा प्रयोग की जाएंगीः
परन्तु यह और कि जहां इस अधिनियम के उपबंध नियन्त्रित क्षेत्र के उपबंध के सम्बंध में मौन हैं, तब पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियन्त्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) के उपबंध नगरपालिका सीमा के भीतर यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू हुए समझे जाएंगे।''।
11. मूल अधिनियम की धारा 385 के खण्ड (ख) में, ''वार्षिक मूल्य'' शब्दों के स्थान पर, ''मूल्य'' शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 385 का संशोधन। 12. मूल अधिनियम की धारा 419 में,-
(i) विद्यमान परन्तुक में, अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्न के स्थान पर ''ः'' चिह्न प्रतिस्थापित
किया जाएगा;
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 419 का संशोधन। (ii) विद्यमान परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा तथा 31 मई, 1994 से
जोड़ा गया समझा जाएगा, अर्थात् :-
''परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन आयुक्त द्वारा उनके पदनाम के निर्धारण पर, अधिकारी तथा कर्मचारी अपने पदनाम, कार्य स्वरूप तथा कर्तव्य के अनुकूल निगम सेवा के ऐसे प्रवर्गों के भाग गठित करेंगे तथा उनकी सेवाएं ऐसी अधिसूचना की तिथि से निगम सेवाओं के सभी या किन्हीं प्रवर्गों को गठित करते हुए, इस अधिनियम की धारा 67122 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), MAY 13, 2021 (VYSK. 23, 1943 SAKA) की उप-धारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचनाओं के अनुसार सम्बंधित सेवा के प्रवर्ग को विनियमित करने वाले उपबंधों द्वारा शासित होंगी तथा यदि पदनाम, कार्य स्वरूप तथा कर्तव्य, जो किसी व्यक्ति या अधिकारी/कर्मचारी के प्रवर्ग या प्रवर्गों की सेवाओं के अनुकूल हैं, के सम्बंध में,ं कोई संदेह उत्पन्न होता है या दावा किया जाता है, तो मामला सरकार को भेजा जाएगा, इस सम्बंध में उनका निर्णय अन्तिम तथा बाध्यकारी होगा।''।
13. मूल अधिनियम की धारा 422 की उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी तथा 31 मई, 1994 से प्रतिस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात् :-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 422 का संशोधन।
''(1) धारा 67 के उपबंधों के अध्यधीन, जब ग्रामीण क्षेत्र या उसके किसी भाग, यदि कोई हो, के समाविष्ट क्षेत्र सहित किसी नगरपालिका को इस अधिनियम की धारा 3 तथा 4 के अधीन किसी निगम के रूप में घोषित तथा गठित किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्र या उसके किसी भाग, यदि कोई हो, के समाविष्ट क्षेत्र सहित किसी नगरपालिका में सेवारत सम्पूर्ण अधिकारी तथा कर्मचारी, पद जिसके सम्बंध में निगम गठित किया गया है, निगम की घोषणा तथा गठन पर, विद्यमान सेवा अवधि पर निगम में अन्तरित किए गए समझे जाएंगे तथा निगम सेवाओं में एकीकृत होंगे।''।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9169—L.R.—H.G.P., Pkl.