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Haryana Gazette · Government of Haryana

The Haryana Yog Aayog Act, 2021 (Haryana Act No.17 of 2021)

Published 07 July 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
108-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.17/2021
Identifier
in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-17-2021
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗
165 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA)

भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 7 जुलाई, 2021

संख्या लैज. 17/2021.- दि हरियाणा योग आयोग ऐक्ट, 2021 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 29 जून, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद्‌्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 17

हरियाणा योग आयोग अधिनियम, 2021 हरियाणा राज्य में योग तथा प्रा—ितक चिकित्सा को प्रोन्नत, प्रबन्धन, विनियमन, प्रषिक्षण के लिए, आयुर्विज्ञान की प्रा—तिक चिकित्सा पद्धति की प्रोन्नति हेतु, उसके व्यवसाय को विनियमित करने हेतु तथा अन्य मामलों जैसे खेल इत्यादि के रूप में प्रषिक्षण, प्रोन्नति तथा योगासन, के निपटान हेतु तथा उससे सम्बन्धित तथा उससे आनुषांगिक मामलों के लिए आयोग की स्थापना करने हेतु अधिनियम

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा योग आयोग अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा।

परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "आयोग" से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन स्थापित हरियाणा योग आयोग ;

(ख) "आयुष" से अभिप्राय है, आयुर्वेद, योग तथा प्रा—तिक-चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोआ-

रिग्पा तथा होम्योपैथी से सम्बन्धित आयुर्विज्ञान की स्वदेषी पद्धति ;

(ग) "अध्यक्ष" से अभिप्राय है, आयोग का अध्यक्ष ; (घ) "समिति" से अभिप्राय है, अधिनियम की धारा 16 के अधीन गठित समिति ; (ङ) "संस्था" से अभिप्राय है, राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त योग या प्रा—

तिक-चिकित्सा पाठ्‌्‌यक्रमों का संचालन करने वाला विधि द्वारा स्थापित कोई महाविद्यालय/संस्था/विष्वविद्यालय/बोर्ड/संकाय ;

(च) "सदस्य" से अभिप्राय है, अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष सहित आयोग के सरकारी या गैर-सरकारी

सदस्य ;

(छ) "प्रा—तिक-चिकित्सा" से अभिप्राय है, स्वास्थ्य प्रवर्तक, रोग निवारण, रोगहर तथा पुष्टिकर संभाव्य वाले जीवन के षारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक स्तर पर प्र—ति के रचनात्मक सिद्धांतों के समन्वय से मानव शरीर रचना की पद्धति;

(ज) "प्रा—तिक-चिकित्सा पद्धति थैरेपी" से अभिप्राय है, जिसमें जीवन षक्ति सिद्धान्त, विषरक्तता, षरीर की स्व-उपचार क्षमता तथा स्वस्थ जीवन यापन के सिद्धान्तों पर आधारित इसके उपचार में प्रा—तिक तत्वों के उपयोग वाली थैरेपी की औषधि रहित, गैर-आक्रमणषाली पद्धति, ;

(झ) "विहित" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित;

166 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA)

(ञ) "रजिस्टर" से अभिप्राय है, धारा 18 की उप-धारा (2) के खण्ड (क) के अधीन अनुरक्षित व्यवसायियों का रजिस्टर ;

(ट) "पंजी—त योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायी" से अभिप्राय है, इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अधीन पंजी—त कोई योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायी ;

(ठ) "रजिस्ट्रार" से अभिप्राय है, आयोग का रजिस्ट्रार ; (ड) "राज्य सरकार" से अभिप्राय है, प्रषासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ढ) "योग" से अभिप्राय है, संतुलित रीति, जो सम्पूर्ण आत्म-बोध को प्राप्त करने का साधन है, में किसी की अन्तर्निहित षक्ति में सुधार या विकास हेतु षिक्षण तथा यह मन परिवर्तन का षमन करने हेतु कोई तकनीक है।

आयोग की स्थापना।

3. (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन हरियाणा योग आयोग के नाम से ज्ञात इसको प्रदत्त षक्तियों का प्रयोग करने तथा —त्यों का पालन करने हेतु निकाय की स्थापना करेगी।

(2) आयोग का षाष्वत उत्तराधिकार तथा सामान्य मोहर होगी तथा उक्त नाम से वाद चला सकता है तथा के विरूद्ध वाद चलाया जा सकता है।

आयोग का गठन।

4. राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाले आयोग का गठन करेगी, अर्थात्‌्‌ :-

(1) सरकारी सदस्य :-

(क) निदेषक, खेल तथा युवा कार्यक्रम विभाग, हरियाणा या उसका प्रतिनिधि, जो

उपनिदेषक/सहायक निदेषक की पदवी से नीचे का न हो ;

(ख) निदेषक आयुष, हरियाणा या उसका प्रतिनिधि, जो उपनिदेषक/सहायक निदेषक

की पदवी के नीचे का न हो ;

(ग) डीन/रजिस्ट्रार, श्री —ष्ण आयुष विष्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र या उसका प्रतिनिधि, जो

आचार्य/विभागाध्यक्ष, योग की पदवी से नीचे का न हो ;

(घ) निदेषक, माध्यमिक षिक्षा विभाग, हरियाणा या उसका प्रतिनिधि, जो उपनिदेषक/

सहायक निदेषक की पदवी से नीचे का न हो ;

(ङ) चिकित्सा अधिकारी, आयुष विभाग ;

(2) गैर-सरकारी सदस्य :-

राज्य सरकार द्वारा निम्नलिखित में से नाम निर्दिष्ट किए जाने वाले अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष सहित ग्यारह गैर-सरकारी सदस्य होंगे :-

(क) योग षिक्षा/ प्रषिक्षण/व्यवसाय में कम से कम पांच वर्ष के अनुभव सहित आयुष

में स्नातक उपाधि रखने वाले तीन सदस्य ;

(ख) प्रा—तिक-चिकित्सा में कम से कम पांच वर्ष के अनुभव सहित प्रा—तिक चिकित्सा

तथा योग विज्ञान में स्नातक उपाधि रखने वाले दो सदस्य ;

(ग) अनुसंधान पृृृष्ठभूमि सहित योग/प्रा—तिक-चिकित्सा में स्नातक उपाधि रखने वाला

एक सदस्य ;

(घ) योग षिक्षा/प्रषिक्षण/व्यवसाय में कम से कम पांच वर्ष के अनुभव प्रमाण-पत्र

सहित किसी भी स्ट्रीम में स्नातक उपाधि रखने वाले तीन सदस्य;

(ङ) पंजी—त योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायियों में से दो सदस्य। अध्यक्ष। 5. आयोग का अध्यक्ष, गैर-सरकारी सदस्यों में से राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा तथा ऐसी षक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे —त्यों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं।

उपाध्यक्ष। 6. आयोग का उपाध्यक्ष, गैर-सरकारी सदस्यों में से राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा तथा अध्यक्ष की रिक्ति या अनुपस्थिति की दशा में अध्यक्ष के कत्र्तव्यों का पालन करेगा।

रजिस्ट्रार। 7. (1) राज्य सरकार, आयुष विभाग, हरियाणा से चिकित्सा अधिकारी को आयोग के रजिस्ट्रार केे रूप में प्रतिनियुक्त करेगी, जो आयोग का सदस्य सचिव होगा तथा ऐसे कत्र्तव्यों का पालन करेगा, जो विहित किए जाएं। (2) रजिस्ट्रार, बैठक में पारित किए गए सभी निर्णयों तथा संकल्पों को अभिप्रमाणित करेगा तथा बैठक की कार्यवाहियों में ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए।167 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) 8. गैर-सरकारी सदस्यों तथा अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन तथा षर्तें निम्नानुसार होंगी :-

(i) गैर-सरकारी सदस्य पाँच वर्ष की अवधि के लिए नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे, जो राज्य

सरकार के अनुमोदन से और अवधि के लिए विस्तारयोग्य हो सकती है;

गैर-सरकारी सदस्यों तथा अन्य कर्मचारियों की सेवा के निबन्धन तथा षर्तें। (ii) गैर-सरकारी सदस्य की कालावधि आयोग की प्रथम बैठक से आरम्भ होगी ; (iii) गैर-सरकारी सदस्य, किसी भी समय अपने हस्ताक्षर सहित लिखित में अध्यक्ष को सम्बोधित करते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है तथा उससे हुई रिक्ति नए सिरे से नामांकन द्वारा भरी जाएगी ;

(iv) गैर-सरकारी सदस्य, आयोग की बैठक में उपस्थित होने के लिए ऐसा मानदेय तथा ऐसे

अन्य भत्ते, जो विहित किए जाएं, प्राप्त करेंगे ;

(v) अयोग के गैर-सरकारी सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों को भुगतानयोग्य वेतन, भत्ते तथा मानदेय इत्यादि का भुगतान राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान में से किया जाएगा ;

(vi) आयोग के गैर-सरकारी सदस्यों, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों को भुगतानयोग्य

वेतन तथा भत्ते, तथा सेवा के अन्य निबन्धन तथा षर्तें ऐसी हाेंगी, जो विहित की जाएं।

9. (1) कोई गैर-सरकारी सदस्य पद पर रहने हेतु अयोग्य हो जाएगा यदि वह सदस्य-

(क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है ;

गैर-सरकारी सदस्यों की अयोग्यता। (ख) नैतिक अधमता वाले किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है तथा

कारावास से दण्डादिष्ट किया है ;

(ग) वि—तचित हो गया है तथा सक्षम चिकित्सा बोर्ड द्वारा इस प्रकार घोषित कर दिया

जाता है ;

(घ) किसी चिकित्सा कारण या अन्यथा के परिणामस्वरूप अपने कत्र्तव्यों का पालन

करने में अक्षम हो जाता है ;

(ङ) आयोग से अनुपस्थिति छुट्‌्‌्‌टी प्राप्त किए बिना स्वयं को आयोग की तीन लगातार

बैठकों से अनुपस्थित रखता है ; या

(च) अपने पद का इस प्रकार दुरूपयोग करता है, जिससे उसका पद पर बने रहना

लोकहित में प्रतिकूल हो गया है :

परन्तु किसी भी सदस्य को इस खण्ड के अधीन तब तक हटाया नहीं जाएगा जब तक उस सदस्य को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो।

10. राज्य सरकार, किसी भी समय, किसी या सभी गैर-सरकारी सदस्यों को हटा सकती है, यदि विष्वास के पर्याप्त कारण हैं कि सदस्य अधिनियम के भाव के बारे में विरोधी है/हैं।

गैर-सरकारी सदस्यों का हटाया जाना।

रिक्ति। 11. गैर-सरकारी सदस्य की मृृत्यु, त्यागपत्र, अयोग्यता या हटाए जाने की दशा में, ऐसे पद में रिक्ति हुई समझी जाएगी तथा ऐसी रिक्ति, सदस्य के रूप में किसी व्यक्ति का नए सिरे से नामांकन करते हुए यथा सम्भव शीघ्रता से भरी जाएगी, जो अपने पूर्वाधिकारी की असमाप्त अवधि के लिए पद धारण करेगा।

12. आयोग की कोई भी कार्रवाई या कार्यवाही केवल किसी रिक्ति के होने या आयोग के गठन में किसी त्रुटि के आधार पर प्रष्नगत नहीं होगी या अविधिमान्य नहीं होगी।

कार्यवाहियों का रिक्ति के कारण अविधिमान्य न होना।

अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी। 13. राज्य सरकार, आयोग की मांग पर, आयोग के निर्बाध रूप से कार्य संचालन के लिए ऐसे अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी, जो यह उचित समझे, उपलब्ध करवाएगी।

आयोग की बैठक। 14. आयोग प्रत्येक तीन मास में कम से कम एक बार तथा यथा आवष्यक बैठकें बुलाएगा तथा बैठक की गणपूर्ति सदस्यों की कुल संख्या का एक-तिहाई होगी।

15. राज्य सरकार, आयोग को युक्तियुक्त नोटिस देने के बाद तथा इसके आक्षेप, यदि कोई हों, सुनने के बाद, आयोग द्वारा पारित किसी संकल्प को निलम्बित, रद्‌्‌द या उपांतरित कर सकती है।

संकल्पों का निलम्बन, रद्‌्‌द किया जाना तथा उपांतरण।168 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) समिति। 16. (1) आयोग के निर्बाध रूप से कार्य संचालन हेतु, आयोग 1ः2 के अनुपात में सरकारी सदस्यों तथा गैर-सरकारी सदस्यों से न्यूनतम तीन सदस्यों से मिलकर बनने वाली इतनी समितियों, जो उचित समझे, का गठन कर सकता है।

(2) इस प्रकार गठित समिति, विहित समय-सीमा में, अपनी रिपोर्ट/प्रस्ताव/सुझाव/परामर्ष प्रस्तुत करेगी तथा उन्हें आयोग को प्रस्तुत करेगी।

आयोग के —त्य। 17. आयोग निम्नलिखित —त्य करेगा, अर्थात्‌्‌ :-

(क) राज्य सरकार के परामर्ष से योग या प्रा—तिक-चिकित्सा को प्रोन्नत करने, प्रषिक्षण तथा विनियमन के लिए कार्य करना ;

(ख) प्राथमिक, माध्यमिक तथा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के लिए राज्य/जिला/ निगम/ नगरपालिका/तहसील/पंचायत स्तर पर योगासन (योग-मुद्रा) प्रतियोगिताओं का अयोजन करना ;

(ग) योग या प्रा—तिक-चिकित्सा के लाभों के बारे में जनसाधारण को षिक्षित करना, अभियान चलाना और जागरूक करना तथा विद्यालय के पाठ्‌्‌यक्रम की अध्ययन सूची में षामिल करने हेतु कदम उठाना ;

(घ) योग कोर्सों, पाठ्‌्‌य-विवरणों, षैक्षणिक मानकों की, समय-समय पर, समीक्षा करना तथा उन पर राज्य सरकार को सिफारिषें करना ; (ङ) ऐसे अन्य —त्य करना, जो विहित किए जाएं।

18. (1) रजिस्ट्रार, ऐसी फीस सहित ऐसे प्ररूप, रीति, जो विहित की जाए, में ऐसे योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायी का पंजीकरण करेगा, जो किसी संस्था से अर्हक है।

रजिस्ट्रार के —त्य तथा षक्तियाँ।

(2) रजिस्ट्रार, -

(क) राज्य में योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायियों के रजिस्टर का रख-रखाव

करेगा ;

(ख) नीति संहिता, जो विहित की जाए, द्वारा पंजी—त योग या प्रा—तिक-चिकित्सा

व्यवसायियों का व्यवसाय आचरण विनियमित करना;

(ग) योग या प्रा—तिक-चिकित्सा व्यवसायियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, उसे निलम्बित करना या रजिस्टर से उसका नाम हटाना, या उसके विरूद्ध ऐसी अन्य अनुषासनिक कार्रवाई करना, जो विहित की जाए।

19. (1) किसी व्यक्ति के पंजीकरण या रजिस्टर में किसी प्रविष्टि के संबंध में रजिस्ट्रार के निर्णय से व्यथित कोई व्यक्ति, आयोग को अपील कर सकता है।

(2) ऐसी अपील आयोग के पास विहित रीति में दायर की जाएगी, और आयोग द्वारा सुनी तथा निर्णीत की जाएगी।

रजिस्ट्रार के निर्णय के विरूद्ध आयोग को अपील करना तथा आयोग की अन्य षक्तियाँ।

बजट। 20. (1) आयोग, अनुमानित प्राप्तियों तथा व्यय को दर्षाते हुए आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ऐसी तिथि, जो विहित की जाए, पर अनुदान मांग तैयार करेगा और विहित प्ररूप में राज्य सरकार को भेजेगा। (2) राज्य सरकार, ऐसा उपान्तरण, यदि कोई हो, जो यह उचित समझे, सहित इसे प्रस्तुत किए गए अनुदान को स्वी—त कर सकती है।

(3) जब राज्य सरकार द्वारा अनुदान स्वी—त किया जाता है, तो आयोग उस प्रयोजन, जिसके लिए बजट में उपबन्ध किया गया है, के लिए अनुदान में से राशि का उपयोग करने के लिए सक्षम होगा। लेखें तथा लेखा-परीक्षा।

21. (1) आयोग, ऐसे प्ररूप तथा रीति, जो विहित की जाए, में उचित लेखे तथा अन्य सुसंगत अभिलेख का रख-रखाव करेगा और आय तथा व्यय तथा तुलन-पत्र, उपयोग प्रमाण-पत्र सहित लेखों की वार्षिक विवरणी तैयार करेगा। (2) आयोग के लेखों की जांच तथा लेखा-परीक्षा, निदेशक, स्थानीय निधि लेखा द्वारा सुसंगत उपबन्धों के अनुसार की जाएगी।

(3) आयोग के लेखों की संपरीक्षित विवरणी और कार्य रिपोर्ट, आयुष विभाग को प्रति वर्ष 31 जुलाई से पूर्व भेजी जाएगी।169 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) आयोग की निधि। 22. (1) आयोग की निधि, पंजीकरण, नवीकरण फीस इत्यादि के रूप में संगृृहीत की गई निधियों से गठित होगी और ऐसी निधि राष्ट्रीय—त बैंक में बैंक खाता खुलवाते हुए अनुरक्षित की जाएगी। (2) आयोग का अध्यक्ष तथा रजिस्ट्रार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए उक्त बैंक खाते को संयुक्त रूप से संचालित करेंगे।

नियम बनाने की शक्ति। 23. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के पश्चात्‌्‌, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा।

अधिकारियों तथा कर्मचारियों का लोक सेवक होना। 24. इस अधिनियम के अधीन नियुक्त प्रत्येक अधिकारी तथा कर्मचारी, इस अधिनियम के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग करते समय या किसी कत्र्तव्य का पालन करते समय, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझे जाएंगे।

कठिनाईयाँ दूर करना। 25. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्‌्‌असंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो वह कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन समझे : परन्तु ऐसा कोई भी आदेश, इस अधिनियम के प्रारम्भ की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌्‌, नहीं किया जाएगा।

(2) इस अधिनियम के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके बनाए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

सद्‌्‌भावनापूर्वक की गई कार्यवाहियों का संरक्षण। 26. कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियाँ, इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्‌्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए राज्य सरकार के किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध नहीं हो सकेंगी।

व्यावृृत्ति। 27. इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व, हरियाणा योग परिषद्‌्‌ या अधिसूचना संख्या 9/24/2019-6HB-II, दिनांक 15 जनवरी, 2021 द्वारा हरियाणा योग आयोग के रूप में पुनःनामित आयोग द्वारा की गई कोई बात, सामान्य खण्ड अधिनियम की धारा 6 के उपबन्धों के अनुसार इस अधिनियम के अधीन की गई समझी जाएगी।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9232—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 07 July 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-17-2021/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-17-2021.