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Haryana Gazette · Government of Haryana

The Haryana Municipal (Amendment) Act, 2021 (Haryana Act No.5 of 2021)

Published 07 July 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
108-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.5/2021
Identifier
in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-5-2021
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY

Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 108-2021/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 7 जुलाई, 2021

(16 आषाढ़, 1943 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

1. हरियाणा नगरपालिका (संषोधन) अधिनियम, 2021

151-157 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 5)

159-164

165-169 2. हरियाणा संक्षिप्त नाम संषोधन अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 15) 3. हरियाणा योग आयोग अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 17) (केवल हिन्दी में) 4. THE PUNJAB LAND REVENUE (HARYANA AMENDMENT) ACT, 2020 171-172 (HARYANA ACT NO. 19 OF 2021). (केवल अंग्रेजी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं

भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(lii)151 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 7 जुलाई, 2021

संख्या लैज. 5/2021.- दि हरियाणा म्यूनिसिपल (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2021 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 26 जून, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद्‌्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 5

हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2021 हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973, को आगे संशोधित करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. यह अधिनियम हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है। संक्षिप्त नाम। 2. हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है), की धारा 2क की व्याख्या 2 की मद (ii) में, "(45)" कोष्ठकों तथा अंकों के स्थान पर, "(19क)" कोष्ठक, अंक तथा अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे तथा 23 जनवरी, 2019 से प्रतिस्थापित किए गए समझे जाएंगे।

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 की धारा 2क का संशोधन। 3. मूल अधिनियम की धारा 60 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 60क का रखा जाना। "60क. उधार लेने की नगरपालिका की शक्ति.- (1) नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका, जैसी भी स्थिति हो, इसके द्वारा पारित किसी संकल्प के अनुसरण में, बैंक से या अन्य लोक वित्त संस्थाओं से, जैसी भी स्थिति हो, इसमें निहित्त किसी अचल सम्पत्ति की प्रतिभूति पर डिबेन्चर या अन्यथा के माध्यम से या इसके द्वारा अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित सम्पत्ति या इस अधिनियम के द्वारा या के अधीन प्राधि—त करों, दरों, उपकरों, फीसों तथा प्रभारों की सभी या किन्हीं धनराशि को उधार ले सकती है जो निम्नलिखित के लिए अपेक्षित हो,-

(क) किसी भूमि, जिसे इसको अर्जित करने की शक्ति हो, को अर्जित करने के लिए ;

या

(ख) किसी भवन, जिसे इसको परिनिर्मित करने की शक्ति हो, को परिनिर्मित करने के

लिए; या

(ग) किसी स्थायी संकर्म के निष्पादन, किसी संयंत्र के उपबन्ध, या किसी अन्य कार्य के निष्पादन, जिसे इसको निष्पादित करने या उपबन्धित करने या करने की शक्ति है, के लिए यदि प्रश्नगत प्रयोजन को कार्यान्वित करने की लागत वर्षो तक विस्तृृत होनी चाहिए ; या

(घ) राज्य सरकार को देय किसी ऋण का भुगतान करने हेतु; या (ङ) इस अधिनियम या पूर्व में लागू किसी अन्य अधिनियम के अधीन पूर्व में लिए गए

किसी ऋण का पुनर्भुगतान करने हेतु ; या

(च) किसी अन्य प्रयोजन जिसके लिए नगर परिषद्‌्‌ या नगर पालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, इस अधिनियम या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के आधार पर उधार लेने हेतु प्राधि—त है :

परन्तु,-

(i) इस धारा के अधीन कोई भी ऋण इत्यादि राज्य सरकार की पूर्व स्वी—ति

के बिना लिया नहीं जाएगा ;

(ii) ऋण की राशि, ब्याज की दर तथा अवधि, जिसमें लिए जाने की तिथि, समय तथा पुनर्भुगतान का ढंग तथा समरूप शामिल हैं, राज्य सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होंगी।152 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) (2) जब कोई धन राशि उप-धारा (1) के अधीन उधार ली गई है, तो उप-धारा (1) के खण्ड (ग) में निर्देशित किन्हीं प्रयोजनों के लिए उधार ली गई किसी धन राशि का कोई भी प्रभाग, केवल उक्त प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के संबंध में नियोजित से भिन्न किसी नगरपालिका अधिकारी या अन्य नगरपालिका कर्मचारी के वेतन तथा भत्तों के भुगतान हेतु लागू नहीं होगा। (3) नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, इस धारा के प्रयोजनों के लिए स्थानीय प्राधिकरण उधार अधिनियम, 1914 (1914 का केन्द्रीय अधिनियम 9) के प्रयोजन के लिए स्थानीय प्राधिकरण के रूप में समझी जाएंगी।"।

4. मूल अधिनियम की धारा 62 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः-

"62क. सम्पत्ति का निपटान.- नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, से सम्बन्धित सम्पत्ति के निपटान के सम्बन्ध में, निम्नलिखित उपबन्ध प्रभावी होंगे, अर्थात्‌्‌ :-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 62क का रखा जाना।

(क) राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकरण,- (i) नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, से सम्बन्धित किसी अचल सम्पत्ति, जिसका मूल्यहृासित मूल्य नगर परिषद्‌्‌ की दशा में दो लाख रूपए से तथा नगरपालिका समिति की दशा में एक लाख रूपए से अधिक नहीं है, का विक्रय या अन्यथा द्वारा निपटान कर सकता है ;

(ii) नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति से सम्बन्धित किसी अचल

सम्पत्ति को पाँच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए पट्‌्‌टे पर दे सकता है;

(iii) सम्बद्ध नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति से सम्बन्धित किसी अचल सम्पत्ति, जिसका चालू कलक्टर दर मूल्य नगर परिषद्‌्‌ की दशा में दो लाख रूपए तथा नगरपालिका समिति की दशा में एक लाख से अधिक नहीं है या जिसका वार्षिक बाजार किराया नगर परिषद्‌्‌ की दशा में बीस हजार रूपए तथा नगरपालिका समिति की दशा में दस हजार रूपए से अधिक नहीं है, को बेच सकता है या स्थायी पट्‌्‌टे पर दे सकता है;

(ख) यदि खण्ड (क) के अधीन शामिल नहीं है, तो उक्त प्राधिकरण, नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, की सिफारिश पर राज्य सरकार की स्वी—ति से, नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति से सम्बन्धित किसी चल या अचल सम्पत्ति को पट्‌्‌टे पर दे सकता है, बेच सकता है, किराए पर दे सकता है या अन्यथा अन्तरित कर सकता है।

(ग) इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अध्यधीन, प्रतिफल जिसके लिए कोई अचल सम्पत्ति उपरोक्त खण्डों के अधीन बेची, पट्‌्‌टे पर दी या अन्यथा अन्तरित की जा सकती है, मूल्य जिस पर सामान्य तथा उचित प्रतियोगिता में ऐसी अचल सम्पत्ति बेची, पट्‌्‌टे पर दी या अन्यथा अन्तरित की जा सकती थी, से कम नहीं होगा :

परन्तु विक्रय या पट्‌्‌टे या अन्यथा द्वारा सरकारी विभाग को अचल सम्पत्ति के अन्तरण की दशा में, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन सम्पत्ति कलक्टर दर पर अन्तरित की जा सकती हैः

परन्तु यह और कि किसी व्यक्ति को दुकान या गृृह का अन्तरण करने की दशा में, जिसके पास किराए या पट्‌्‌टे या अन्यथा के रूप में पिछले बीस वर्ष या अधिक के लिए ऐसी सम्पत्ति का कब्जा है, ऐसे प्राधिकरण, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन, सम्पत्ति विक्रय द्वारा कलक्टर दर या किसी अन्य रियायती दर, जो राज्य सरकार द्वारा अवधारित की जाए, पर अन्तरित की जा सकती है :

परन्तु यह और कि दुकान या गृृह, जो पिछले बीस वर्ष या से अधिक के लिए पट्‌्‌टे या किराए पर या अनुज्ञप्ति फीस या तहबजारी या अन्यथा पर हैं, के संबंध में स्वामित्व अधिकार, राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, इस निमित्त बनाई गई पॉलिसी में यथा विनिर्दिष्ट दर जिस पर ऐसे स्वामित्व अधिकार अन्तरित किए जाएंगेे सहित ऐसे निबन्धन तथा शर्तों पर विक्रय के माध्यम से अन्तरित किए जा सकते हैं। (घ) प्रतिफल, जिसके लिए कोई अचल सम्पत्ति राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकरण द्वारा किसी सामाजिक, धार्मिक या धर्मार्थ या शैक्षणिक संस्था, न्यास या सामाजिक संस्था को विक्रय, पट्‌्‌टे पर दी या अन्यथा से अन्तरित की जा सकती है, निम्न अनुसार होगा :-

153 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA)
क्रम संख्या सुविधा का स्वरूप क्षेत्र विक्रय की अनन्तिम दर
1 2 3 4
1. धार्मिक स्थल- पूजा स्थल (मंदिर, गुरूद्वारा, मस्जिद, चर्च, इत्यादि) के प्रयोजन के लिए नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, की तथा सामुदायिक धर्मशालाओं, जंजघर, बारातघर, सामुदायिक केन्द्रों या शैक्षिणक संस्थाओं इत्यादि के लिए भूमि। 3000 वर्ग मीटर तक (i) 2000 वर्ग मीटर तक, कलक्टर दर, क्षेत्र के विकास की आनुपातिक लागत और उसके अन्य आनुषंगिक प्रभारों का 50 प्रतिशत। ( ii) 2001-3000 वर्ग मीटर के लिए, कलक्टर दर, क्षेत्र के विकास प्रभारों की आनुपातिक लागत और उसके अन्य आनुषंगिक प्रभारों का 100 प्रतिशत।
नन्दीशाला, गोशाला या आवारा पशु प्रांगण। 5 एकड़ तक कलक्टर दर, क्षेत्र के विकास प्रभारों की आनुपातिक लागत और उसके अन्य आनुषंगिक प्रभारों का 50 प्रतिशत :

परन्तु सम्पत्ति, ऐसे प्राधिकारी, जो सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन विक्रय, पट्‌्‌टे या अन्यथा के माध्यम से अन्तरित की जाएगी।

(ड.) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, प्राधिकरण निम्नलिखित परिस्थितियों के अधीन नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति से सम्बन्धित किसी चल या अचल सम्पत्ति को बेचेगा, पट्‌्‌टे पर, या किराए पर या अन्यथा अन्तरित करेगा, अर्थात्‌्‌ :- (i) राज्य सरकार के निर्देशों पर, राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसे प्रतिफल के लिए, नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, की किसी चल या अचल सम्पत्ति को बेचना, पट्‌्‌टे पर देना या अन्यथा अन्तरित करना ;

(ii) जब राज्य सरकार द्वारा बनाई गई किसी पॉलिसी, उसके भाग के रूप में, उक्त पॉलिसी में यथा विनिर्दिष्ट प्रतिफल के लिए नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति की किसी चल या अचल सम्पत्ति को बेचना, पट्‌्‌टे पर देना या अन्यथा अन्तरिक करना अपेक्षित हैः परन्तु खण्ड (ii) के अधीन राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी के निर्णय लेने से पूर्व, राज्य सरकार की पूर्व स्वी—ति अपेक्षित होगी ;

(च) उपरोक्त खण्डों के अधीन राज्य सरकार की स्वी—ति मामलों के किसी वर्ग के लिए या तो सामान्यतः या किसी विशेष मामले के लिए विशेषतः दी जा सकती है ; (छ) किसी शर्त या सीमा, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध द्वारा या के अधीन विनिर्दिष्ट की जा सकती है, के अध्यधीन, इस धारा के पूर्वगामी उपबन्ध इस अधिनियम के अधीन या के प्रयोजनों के लिए नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, से सम्बन्धित सम्पत्ति के प्रत्येक निपटान को लागू होंगे ; (ज) खण्ड (क) के अधीन सम्पत्ति के निपटान का प्रत्येक मामला उक्त प्राधिकरण द्वारा, नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, को अविलम्ब सूचित किया जाएगा।"।154 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) 5. मूल अधिनियम की धारा 69 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌्‌ :-

"69. कर जो समिति अधिरोपित करेगी.- (1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए तथा उसके उपबन्धों के अध्यधीन, प्रत्येक समिति निम्नलिखित कर अधिरोपित करेगी, अर्थात्‌्‌ :-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 की धारा 69 का प्रतिस्थापन।

(क) क्षेत्र जिसमें भवन या भूमि स्थित है के आधार पर संगणित नगर क्षेत्र में किसी भवन या भूमि के स्वामी या अधिभोगी द्वारा भुगतानयोग्य कोई सम्पत्ति कर, इसकी अवस्थिति, प्रयोजन जिसके लिए यह उपयोग किया जाता है, लाभयोग्य उपयोग के लिए इसकी क्षमता, निर्माण की गुणवत्ता तथा अन्य सुसंगत कारक, आवेदन के लिए संगणना का ढंग तथा दर, ऐसी होगी, जो राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे। कर की दरें, सम्पत्तियों की विभिन्न किस्मों के लिए भिन्न-भिन्न हो सकती हैं, जैसे आवासीय, गैर-आवासीय या वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत इत्यादि तथा समान दरों या श्रेणी—त पैमाने पर हो सकती है ; तथा सभी मामलों में, ये फ्लोर दरें होंगी तथा नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सम्यक्‌्‌ प्रक्रिया अपनाते हुए किसी भी समय दरों में भविष्यलक्षी प्रभाव से वृृद्धि कर सकती हैः

परन्तु केवल कृृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही किसी भी भूमि पर

कोई सम्पत्ति कर देय नहीं होगा। व्याख्या.-इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए.-

(1) ''केवल कृृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही भूमि'', भूमि जिस पर टयूबबैल कनेक्शन के लिए बिजली के मीटर तथा अन्य विद्युत स्थिरता रखने के उदेद्‌्‌श्यों से कोई संरचना बनाई गई है, शब्द शामिल होंगे।

(2) ''फलौर दर'' शब्दों से अभिप्राय है, उक्त खण्ड के अधीन जारी की जाने

वाली अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट न्यूनतम दर;

(ख) ऐसी दरें जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा प्रत्येक मामले में निर्देश करे, पर ऐसे अन्य कर ;

(ग) हरियाणा राज्य में तत्समय लागू भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अधीन अधिरोपित शुल्क के अतिरिक्त नगरपालिका क्षेत्र की सीमाओं के भीतर स्थित अचल सम्पत्तियों के अन्तरण पर शुल्क नीचे विनिर्दिष्ट विवरण की प्रत्येक लिखत पर, तथा ऐसी दर पर कोई शुल्क, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट करे, जो ऐसी लिखतों के सामने नीचे विनिर्दिष्ट राशि पर, एक प्रतिशत से कम तथा तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगाः- लिखत का विवरण

राशि जिस पर शुल्क उद्‌्‌गृृहीत किया जाएगा

(i) अचल सम्पत्ति का विक्रय राशि या लिखत में बताए गए विक्रय

के लिए प्रतिफल का मूल्य।

(ii) अचल सम्पत्ति का विनिमय

इन लिखतों में बताई गई अधिसूचना की सम्पत्ति का मूल्य।

(iii) अचल सम्पत्ति का उपहार लिखत में बताई गई सम्पत्ति का

मूल्य।

लिखत में बताई गई प्रतिभूत राशि बंधक द्वारा प्राप्त राशि।

(iv) अचल सम्पत्ति का कब्जे सहित बंधक

(v) अचल सम्पत्ति का स्थायी पट्‌्‌टा

लिखत में बताई गई सम्पूर्ण राशि के छठे भाग के बराबर राशि अथवा किराए का मूल्य, जो पट्‌्‌टे के प्रथम पचास वर्षों के संबंध में भुगतान या परिदत्त किया जाएगा।155 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) उक्त शुल्क दस्तावेज के पंजीकरण के समय न्यायिकेतर स्टाम्प पेपर के रूप में रजिस्ट्रार अथवा उप-रजिस्ट्रार द्वारा संगृृहीत किया जाएगा तथा उसकी सूचना समिति को तुरन्त भेजी जाएगी। इस प्रकार संगृृहीत शुल्क की राशि सम्बद्ध समिति को भुगतान की जाएगी।

(2) उप-धारा (1) के खण्ड (क) में यथा उपबंधित के सिवाय उपरोक्त यथा विनिर्दिष्ट कर, ऐसी दर, जो राज्य सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट की जाए, पर उद्‌गृृहीत किया जाएगा तथा इस अधिनियम के उपबंधों तथा इसके अधीन बनाई गई उप-विधियों के अनसुार निर्धारित तथा संगृृहीत किया जाएगा।

(3) इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों में दी गई किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, विशेष या साधारण आदेश द्वारा, उप-धारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन आने वाले किसी कर, जो पहले अधिरोपित न किया गया हो, को ऐसी अवधि के भीतर जो नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए अधिरोपित करने के लिए जो नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, को निर्दिष्ट कर सकती है तथा तदनुसार उस पर कार्य करेगी।

(4) यदि नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, उप-धारा (3) के अधीन पारित किसी आदेश को कार्यान्वित करने में असफल रहती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचित उपयुक्त आदेश द्वारा, कर अधिरोपित कर सकती है और इस प्रकार पारित किया गया आदेश इस प्रकार लागू होगा मानो कर उप-धारा (1) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा सम्यक्‌्‌ रूप से अधिरोपित किया गया था।

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 70क का रखा जाना। 6. मूल अधिनियम की धारा 70 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः- ''70क. सार्वजनिक स्थानों में विज्ञापन का नियन्त्रण तथा विनियमन.- (1) राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, नगरपालिका क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों तथा परिवहन के साधनों में प्रदर्शित सभी विज्ञापनों को नियन्त्रित तथा विनियमित करेगा। वे इस प्रयोजन के लिए, नगरपालिका क्षेत्र में विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए उपयुक्त स्पाटॅस तथा स्थलों को परिलक्षित करेंगे तथा इस अभ्यास के भाग के रूप में, विज्ञापनों के प्रदर्शन के लिए अपने परिसरों या वाहनों के सार्वजनिक दृृश्य परिदृृश्यों को किराए पर देने के लिए इच्छुक व्यक्तियों, से व्यापक प्रचार द्वारा, आवेदन आमऩ्त्रित कर सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट प्राधिकारी, ऐसे सुसंगत कारकों, जो या तो राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट हैं या ऐसी अधिकारिता का प्रयोग करने वाले विधि न्यायालय के किसी आदेश के अनुसार निर्देशित या राज्य सरकार की किसी पॉलिसी के अधीन विनिर्दिष्ट किए गए हैं, पर विचार करने के बाद स्पॉटस, स्थलों या वाहनों की पहचान को अन्तिम रूप देते हुए उसके द्वारा किए गए सभी आवेदनों का विनिश्चय करेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन परिलक्षित स्पॉट, स्थल या वाहन पर विज्ञापन लगाने का इच्छुक कोई व्यक्ति, अनुमति के लिए प्राधिकारी को ऐसी रीति, जो राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में आवेदन करेगा, जो युक्तियुक्त समय के भीतर सभी सुसंगत कारकों पर विचार करते हुए उसका निपटान करेगा तथा ऐसा करते समय ऐसे अन्य निबंधन तथा शर्ते अधिरोपित कर सकता है, जो प्रत्येक मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों के अनुकूल हों। किन्हीं परिस्थितियों में, उप-धारा (1) के अधीन परिलक्षित से भिन्न किसी स्पॉट, स्थल या वाहन पर कोई विज्ञापन लगाने हेतु कोई भी आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा। (3) राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, उप-धारा (2) के अधीन कोई विज्ञापन लगाने हेतु ऐसी कोई अनुमति देने से पूर्व, परिलक्षित परिसरों के स्वामी/अधिभोगी या परिलक्षित वाहन (नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति से सम्बन्धित भवन, भूमि या वाहन से भिन्न) जहां विज्ञापन लगाया जाना है के स्वामी/उपयोगकर्ता के साथ रेंट शेयरिंग व्यवस्था करेगा; तथा अनुमति देते समय, इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी प्राधिकारी द्वारा यथा अवधारित दरों पर आवेदक विज्ञापनदाता से अनुमति फीस प्रभारित करेगा तथा राज्य के भिन्न-भिन्न नगरपालिकाओेंं या क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न प्राधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।

(4) राज्य सरकार, स्थलों, स्पॉट तथा वाहनों की पहचान हेतु विज्ञापन लगाने की अनुमति देने के लिए किए गये आवेदनों की प्रक्रिया, रेंट शेयरिंग व्यवस्था और अन्य सम्बंधित मामलों, जो वह उचित समझे, के लिए मार्गदर्शन/पॉलिसी अधिकथित कर सकती है।

(5) कोई भी विज्ञापन, राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी की लिखित अनुज्ञा के बिना, किसी भूमि, भवन, दीवार, विज्ञापन होडिंग, फे्रम, खंभा या संरचना या किसी वाहन पर खड़ा नहीं किया जाएगा, प्रदर्शित नहीं किया जाएगा, लगाया नहीं जाएगा या रखा नहीं जाएगा या नगरपालिका क्षेत्र के भीतर किसी भी स्थान में किसी भी रीति जो भी हो, प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।156 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''सार्वजनिक स्थान'' से अभिप्राय है, कोई स्थान जो साधारणतः जनता के लिए खुला तथा की पहुंच में हो, तथा इस में निम्नलिखित शामिल हैंः- (i) सड़क फलाईओवर, खंड़जा, पटरी, गली, सार्वजनिक चौक, पार्क, बाग, जल निकाय, झील, नदी किनारा, सड़कों के साथ-साथ हरित पट्‌्‌टी;

(ii) सरकारी भवन जो जनता के लिए खुले हैं जैसे सार्वजनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, संस्मारक, चिड़िया घर, मछलीघर, खुला थियेटर, खेल मैदान, स्टेडियम;

(iii) रेलवे स्टेशन, मैट्रो रेलवे स्टेशन, बस अड्‌डा, टैक्सी अड्‌्‌डा, रिक्शा अड्‌डा, बस क्यू शैल्टर, गली फर्नीचर, पार्किंग स्थान;

(iv) सभी अन्य भूमियां, भवन तथा संरचना, चाहे सरकारी हाथों में या निजी होे, जो पटरी, सार्वजनिक आम रास्ते से दृश्य हैं अन्य सार्वजनिक स्थान जहां तक वे सार्वजनिक दृश्य परिदृृश्य को प्रभावित करते हैं।

7. मूल अधिनियम की धारा 75ग के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्‌्‌ः-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 75घ तथा 75ड़ का रखा जाना।

''75घ. अवैध भवन पर शास्ति का उद्‌्‌ग्रहण.- (1) जो कोई भी,- (क) इस अधिनियम या तत्समय लागू किसी अन्य विधि या इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या उप-विधियों के अधीन अनुमति प्राप्त किए बिना या ऐसी अनुमति से जुड़ी किसी शर्त की उल्लंघना में अपनी भूमि पर; या

(ख) उससे सम्बंधित स्थल, जो सुसंगत लागू विधि, जिसमें इसके अधीन बनाए गए नियम/जारी किए गए अनुदेश शामिल हैं, के अधीन अनुमोदन के बिना, बनाया गया है, पर; या (ग) इस अधिनियम या तत्समय लागू किसी अन्य विधि या इसके अधीन बनाए गए नियमों तथा उपविधियों के किन्हीं उपबंधों के भंग में, नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या किसी ऐसी राज्य सरकार द्वारा स्थापित किसी वैधानिक बोर्ड/निगम या संगठन या कम्पनी से सम्बंधित या द्वारा पट्‌्‌टे पर दी गई किसी भूमि पर; किसी भवन या भवन के भाग पर अवैध निर्माण या पुनर्निर्माण करता है, तो वह प्रत्येक वर्ष शास्ति, जो ऐसे भवन पर उद्‌्‌गृृहणीय सम्पत्ति कर की राशि के दोगुना के बराबर होगी, के भुगतान हेतु दायी होगा जब तक यह किन्हीं कार्यवाहियों, जो ऐसे अवैध निर्माण के सम्बंध में उसके विरूद्ध संस्थित की जा सकती हैं, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना अवैध निर्माण रहता है तथा उप-धारा (1) के अधीन भुगतान की गई शास्ति इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन यथा संगृृहीत अवधारित की जाएगी मानो उसकी राशि किसी ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध देय सम्पत्ति कर थाः

परन्तु कर के ऐसे उद्‌्‌गृृहण तथा संग्रहण शास्ति का उनकी ऐसी अवैध विद्यमानता की किसी भी अवधि जो भी हो के लिए ऐसे अवैध निर्माण या पुनर्निर्माण को नियमित करने के रूप में अर्थ नहीं लगाया जाएगा।

75ड़.- भवन या भूमि के अवैध उपयोग पर शास्ति का उद्‌गृृहण.- (1) जो कोई भी या तो ऐसे भवन या भूमि या उसके किसी भाग के किसी उपयोग को विनियमित या नियन्त्रित करने वाले तत्समय लामू किसी विधि की उल्लंघना में या ऐसी विधि के अधीन जारी किए गए किसी आदेश या निर्देश, यदि कोई हो, की उल्लंघना में भवन या भूमि या उसके किसी भाग का उपयोग करता है, तो वह शास्ति, को सम्पत्ति कर की राशि, जो सम्पूर्ण वर्ष के रूप में किसी वर्ष के संगणित परिकलित भाग, वािर्षक आधार पर ऐसे अवैध उपयोग की सम्पूर्ण अवधि के लिए इस अधिनियम की धारा 69 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन ऐसे भवन या भूमि या उसके भाग, जैसी भी स्थिति हो, पर उद्‌्‌गृृहणीय है, के दोगुना के बराबर होगी, के भुगतान के लिए दायी होगा तथा इस उप-धारा के अधीन भुगतान की गई शास्ति इस अधिनियम के उपबधों के अधीन यथा संगृृहीत अवधारित की जाएगी, मानो उसकी राशि किसी ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध देय सम्पत्ति कर था। (2) उप-धारा (1) के अधीन अधिरोपित या भुगतान की गई शास्ति, किन्हीं कार्यवाहियों, जो ऐसे अवैध उपयोग के सम्बंध में उपयोगकर्ता के विरूद्ध संस्थित की जा सकती हैं, पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी तथा ऐसे अवैध उपयोग के विनियमन के किसी तर्क को उत्पन्न करने वाले किसी अधिकार के साथ ढ़की नहीं जाएगी तथा कोई प्रशमन जो उससे विधिपूर्ण स्वीकार किया जा सकता है, के विरूद्ध बदला नहीं जाएगा।''।

8. मूल अधिनियम की धारा 84 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः- ''84क. भारत सरकार की सम्पत्तियों का कराधान.- इस अधिनियम में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, भारत सरकार की भूमियां तथा निर्माण सम्पत्तियां होने पर भी धारा 84 में विनिर्दिष्ट भूमियों तथा निर्माणों को करों से छूट दी जाएगीः

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 84क का रखा जाना।157 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 7, 2021 (ASAR. 16, 1943 SAKA) परन्तु इस धारा की कोई भी बात, ऐसी भूमियों तथा निर्माणों पर उक्त करों में से किन्हीं को उद्‌्‌गृृहीत करने से नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, को नहीं रोकेगी जो वे 26 जनवरी, 1950 से ठीक पहले दायी थे या दायी समझे गए थे, जहां तक कि कर अन्य भूमियों तथा निर्माणों पर नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा उद्‌्‌गृृहीत किए जाने के लिए जारी रहता हैः

परन्तु यह और कि इस धारा की कोई भी बात, सम्बद्ध नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, को राज्य सरकार के सामान्य मार्ग-दर्शन तथा भारत सरकार के अनुदेशों के भीतर उक्त नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति द्वारा यथा निर्धारित दी गई सेवाओं के बदले में सेवा प्रभारों को प्रभारित करने के लिए नहीं रोकेगी।''।

9. मूल अधिनियम की धारा 99 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 में धारा 99क का रखा जाना। ''99क. कतिपय दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए बेबाकी प्रमाण-पत्र जारी करना.- नगरपालिका क्षेत्र, में स्थित किन्हीं भूमियों या भवनों का किसी रीति में विक्रय, अन्तरण, पट्‌्‌टा, उपहार या हस्तांतरण के संबंध में कोई दस्तावेज जो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) की धारा 17 के अधीन पंजीकृृत किया जाना अपेक्षित है, तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक उक्त दस्तावेज राज्य सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए बेबाकी प्रमाण-पत्र के साथ न हो, जो तीन मास की अवधि के लिए या ऐसी अन्य समयावधि, जो राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर यह प्रमाणित करते हुए कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों, उप विधियों या विनियमों के अधीन भुगतानयोग्य या वसूलीयोग्य, दस्तावेज में यथा वर्णित ऐसी भूमियों तथा/या भवनों के सम्बंध में किरायों, करों, उपकरों, प्रभारों, फीसों, जुर्मानों तथा शास्तियों सहित सभी नगरपालिका देयों का पूर्ण रूप से भुगतान कर दिया गया है, विनिर्दिष्ट की जाए, के लिए वैध रहेगाः

परन्तु राज्य सरकार आदेश द्वारा, ऐसी भूमियों, या भवनों जो अधिनियम की धारा 3 तथा 4 के अधीन जारी की गई अधिसूचना के परिणामस्वरूप नगरपालिका क्षेत्र में प्रथम बार या नए सिरे से आए हैं, को, ऐसी अवधि, जो राज्य सरकार उचित समझे, के लिए इस धारा की अपेक्षाओं से पूर्णतः या भागतः छूट दे सकती है।''।

10. मूल अधिनियम की धारा 203 छ में,-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 की धारा 203छ का संशोधन। (i) अन्त में विद्यमान ''।'' चिह्‌न के स्थान पर, ''ः'' चिह्‌न प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌्‌ः- (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, तथा 27 मार्च, 2001 से जोड़ा गया समझा जाएगा,

अर्थात्‌ः- ''परन्तु जहां इस अधिनियम के उपबंध नियन्त्रित क्षेत्र के उपबंध के सम्बंध में मौन हैं, तब पंजाब अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) के उपबंध नगरपालिका सीमा के भीतर यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू हुए समझे जाएंगे।''।

11. मूल अधिनियम की धारा 203ज के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, तथा 02 अप्रैल, 2002 से लागू हुई समझी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः-

1973 के हरियाणा अधिनियम 24 की धारा 203ज का प्रतिस्थापन। ''203ज. बिजली, जल तथा मलजल कनक्शन की स्वीकृृति/जारी करने के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करना.-कोई भी व्यक्ति, किन्हीं परिसरों के लिए बिजली, जल तथा मलजल कनक्शन की स्वीकृृति/जारी करने के लिए सम्बद्ध प्राधिकारी को आवेदन करने से पूर्व, सम्बद्ध नगर परिषद्‌्‌ या नगरपालिका समिति, जैसी भी स्थिति हो, से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करेगा तथा कोई भी प्राधिकारी ऐसा कनक्शन तब तक स्वीकृृत/जारी नहीं करेगा जब तक आवेदन के साथ अनापत्ति प्रमाण पत्र न हो।

व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, 'स्वीकृृति/जारी करना' अभिव्यक्ति में, डिसकनक्शन

के रेस्टोरेशन या क्षमता/लोड इत्यादि में वृृद्धि शामिल होगी।''।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9232—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 07 July 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-5-2021/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-07-07.Extra-Ordinary_Leg-No-5-2021.