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Haryana Gazette · Government of Haryana

The Punjab Land Revenue (Haryana Amendment) Act, 2020 (Haryana Act No.19 of 2021)

Published 03 August 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
123-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.19/2021
Identifier
in.gazette.haryana.2021-08-03.Extra-Ordinary_Leg-No-19-2021
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗
HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), AUG. 3, 2021 (SRVN. 12, 1943 SAKA) 175

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 03 अगस्त, 2021

संख्या लैज. 19/2021.- दि पंजाब लैंड रेवन्यु (हरियाणा अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2020, का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 27 जुलाई, 2021 की स्वीकृृति के अधीन एतद्‌्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (ख) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 19

पंजाब भू-राजस्व (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2020 पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887, हरियाणा राज्यार्थ, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

स्ांक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ । 1. (1) यह अधिनियम पंजाब भू-राजस्व (हरियाणा संषोधन) अधिनियम, 2020, कहा जा सकता है।

(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा।

2. पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 111 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ः-

1887 का पंजाब अधिनियम XVII में धारा 111-क का रखा जाना। ''111-क. भू-स्वामियों, जो रक्त संबंधी न हों, के बीच संयुक्त सम्पाियों के मामले में विभाजन.-(1) धारा 111 में दी गई किसी बात के होते हुए भी और इस संषोधित अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से तीन मास की अवधि के भीतर, अधिकारिता रखने वाला राजस्व अधिकारी, राजस्व रिकॉर्ड में अभिलिखित सभी संयुक्त भागीदारों या संयुक्त भागीदारों, जिनके पक्ष में नामांतरण स्वी—त किया जाना है, को नोटिस जारी होने की तिथि से छह मास की अवधि के भीतर उनके संयुक्त स्वामित्व में आपसी सहमति से विभाजित भूमि को प्राप्त करने के लिए स्व-प्रेरणा से नोटिस जारी करेगा :

परन्तु यह उपबन्ध वहाँ लागू नहीं होगा जहाँ सभी संयुक्त भागीदार रक्त संबंधी हाें या

जहाँ अन्य संयुक्त भागीदार पति/पत्नी हो।

(2) यदि विभाजन किसी कारण से संयुक्त भागीदारों द्वारा नहीं किया गया है, तो राजस्व अधिकारी, किसी संयुक्त भागीदार द्वारा उसे किए गए आवेदन पर, उनके संयुक्त स्वामित्व में आपसी सहमति से विभाजित भूमि को प्राप्त करने के लिए छह मास तक का और विस्तार प्रदान कर सकता है।

(3) सभी संयुक्त भागीदारों से आपसी सहमति से विभाजन के लिए करार की प्राप्ति पर, राजस्व अधिकारी, एक मास की अवधि के भीतर, सभी या किन्ही संयुक्त भागीदारों के बीच विभाजन को पुष्ट करेगा और धारा 123 के उपबन्धों के अनुसार नामान्तरण रजिस्टर में किए जाने वाले इन्द्राज के लिए निर्देष करेगा :

परन्तु जहाँ किसी सिविल न्यायालय में भूमि के संबंध में कोई विवाद है या जहाँ भूमि पंजाब षामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961(1961 का पंजाब अधिनियम 18) की धारा 2 के खण्ड (छ) में यथा परिभाषित षामलात देय के रूप में अभिलिखित है या की गई है, तो राजस्व अधिकारी, ऐसे करार की पुष्टि करने या नामान्तरण रजिस्टर में कोई इन्द्राज करने से इन्कार करेगा।

(4) यदि विभाजन उप-धारा (1) तथा (2) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नहीं किया गया है और उक्त अवधि की समाप्ति पर तुरन्त, राजस्व अधिकारी संयुक्त भागीदारों में संयुक्त स्वामित्वाधीन भूमि के विभाजन के न्यायनिर्णय के लिए कार्यवाही करेगा और विनिष्चित करेगा :

176 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), AUG. 3, 2021 (SRVN. 12, 1943 SAKA)

परन्तु राजस्व अधिकारी अधिकतम छह मास की अवधि के भीतर मामले का न्यायनिर्णय और विनिष्चय करेगा।

(5) उप-धारा (4) में यथा विनिर्दिष्ट संयुक्त भागीदारों में भूमि के विभाजन पर राजस्व अधिकारी के विनिष्चय के बाद, ऐसा आदेश राजस्व अधिकारी के विनिश्चय की तिथि से संयुक्त भागीदारों को नोटिस देने के बाद राजस्व अधिकारी को उनके संयुक्त स्वामित्वाधीन भूमि के विभाजन के लिए पृृथक्‌्‌ और आपसी सहमति से प्रस्तुत करने के लिए संयुक्त भागीदारों को अधिकार प्रदान करने के लिए तीन मास की अवधि के लिए आस्थगित रखा जाएगाः

परन्तु जहाँ संयुक्त भागीदार भूमि के विभाजन के लिए पृृथक्‌्‌्‌्‌ और आपसी सहमति देते हैं, तो ऐसा विभाजन उप-धारा (4) के अधीन राजस्व अधिकारी के आदेष से लागू होगा और उप-धारा (3) में यथा उपबन्धित राजस्व अधिकारी द्वारा पुष्ट किया जाएगा।

(6) उप-धारा (3) या उप-धारा (5) में यथा उपबन्धित आपसी सहमति से हुए विभाजन को प्रभावी रूप देते समय, संयुक्त भागीदार, विनिमय, विक्रय या उपहार के रूप में भूमि का अंतरण करने के लिए हकदार हाेंगे और भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का केन्द्रीय अधिनियम 2) के अधीन उद्‌्‌ग्रहणीय कोई भी स्टाम्प षुल्क ऐसे अंतरण पर उद्‌्‌गृृहीत नहीं किया जाएगा।

(7) उप-धारा (3) तथा (5) के अधीन आपसी सहमति से संयुक्त स्वामित्वाधीन भूमि के किसी विभाजन के विरूद्ध कोई अपील नहीं होगी।

(8) उप-धारा (4) के अधीन राजस्व अधिकारी के आदेष के विरूद्ध कोई अपील, उप-धारा (4) के अधीन आदेष की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर कलक्टर या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधि—त ऐसे अन्य अधिकारी के सम्मुख दायर की जाएगी।

(9) कलक्टर सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा और अपील को स्वीकार, परिवर्तित या रद्‌द करने का आदेश पारित करेगा। कलक्टर किन्हीं भी परिस्थितियों में अपील प्रतिप्रषेण नहीं करेगा। (10) उप-धारा (9) के अधीन कलक्टर के आदेश के विरूद्ध कोई भी द्वितीय अपील या पुनरीक्षण नहीं किया जा सकेगा।''।

3. मूल अधिनियम की धारा 118 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌्‌ :-

1887 का पंजाब अधिनियम XVII में धारा 118-क का रखा जाना।

''118-क. विभाजन के मामलों का विनिश्चय करने के लिए समय सीमा.-(1) धारा 111-क के अधीन नहीं आने वाले विभाजन के मामलों में, राजस्व अधिकारी विभाजन के लिए आवेदन की तिथि से छह मास की अवधि के भीतर विभाजन की कार्यवाहियों को विनिश्चित करेगा।

(2) यदि राजस्व अधिकारी अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से नियत समय के भीतर विभाजन के मामले का विनिश्चय करने में असमर्थ रहता है, तो वह उस मामले के विस्तार के लिए विहित अवधि की समाप्ति से पूर्व पन्द्रह दिन के भीतर जिला कलक्टर को मामला प्रस्तुत करेगा।

(3) कलक्टर, आपवादिक मामलों में और अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, ऐसी अन्य षर्तों, जो जहाँ तक मामले का अतिषीघ्र निपटान सुनिष्चित करने के लिए उचित समझें, के अध्यधीन, वह तीन मास से अनधिक की अवधि के लिए विभाजन के मामले का विनिश्चय करने हेतु एक बार के लिए विस्तार प्रदान कर सकता है।

(4) यदि राजस्व अधिकारी, वास्तविक या विस्तारित अवधि, जैसी भी स्थिति हो, के भीतर किसी विभाजन के मामले का विनिश्चय करने में असफल रहता है या जिला कलक्टर द्वारा अधिरोपित किसी षर्त का उल्लंघन करता है, तो वह सम्यक्‌्‌ प्रक्रिया का अनुसरण करने के बाद ऐसे अधिकारी को लागू सुसंगत सेवा नियमों के अधीन ऐसी शास्ति, जो विहित की जाए के अधिरोपण सहित ऐसी कार्रवाई के लिए दायी होगा।"।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।9262—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 03 August 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-08-03.Extra-Ordinary_Leg-No-19-2021/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-08-03.Extra-Ordinary_Leg-No-19-2021.