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Haryana Gazette · Government of Haryana

THE HARYANA PUBLIC EXAMINATION (PREVENTION OF UNFAIR MEANS) ACT, 2021 (HARYANA ACT NO.25 OF 2021).

Published 06 December 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
202-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.25/2021
Identifier
in.gazette.haryana.2021-12-06.Extra-Ordinary_Leg-No-25-2021
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 202–2021/Ext.] चण्डीगढ़, सोमवार, दिनांक 6 दिसम्बर, 2021

(अग्रहायण 15, 1943 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

255—257 हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25)

(केवल हिन्दी में )

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं।

भाग III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं।

भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं।

(lxxxix)255 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 6, 2021 (AGHN. 15, 1943 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 6 दिसम्बर, 2021

संख्या लैज. 25/2021.- दी हरियाणा पब्लिक इग्जामिनेशन (प्रिवेनशन ऑफ अनफेयर मीनस)

ऐक्ट, 2021 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक प्रथम दिसम्बर, 2021 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25

हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2021 लोक परीक्षा में अनुचित साधनों तथा प्रश्न-पत्र प्रकटन निवारण तथा इससे संबंधित तथा इससे आनुषंगिक मामलों हेतु उपबन्ध करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है। (2) यह ऐसी तिथि से लागू होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।

परिभाषाएं। 2. (1) इस अधिनियम में, जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''लोक परीक्षा का आयोजन'' से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल हैं प्रश्न पत्रों को तैयार करना, मुद्रित करना, पर्यवेक्षण, कोडिंग, प्रक्रिया, वितरण, मूल्यांकन, परिणाम की घोषणा करना इत्यादि ;

(ख) ''परीक्षार्थी'' से अभिप्राय है, ऐसा व्यक्ति, जिसे लोक परीक्षा में उपस्थित होने के लिए परीक्षा प्राधिकारी द्वारा अनुमति प्रदान की गई है और इसमें लोक परीक्षा में उसके निमित्त लिपिक के रूप में प्राधि—त कोई व्यक्ति भी शामिल है ;

(ग) ''परीक्षा प्राधिकरण'' में शामिल हैं, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अथवा लोक परीक्षा आयोजित करने के लिए समय-समय पर राज्य सरकार, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अथवा विश्वविद्यालय द्वारा नियोजित अथवा गठित कोई अन्य प्राधिकरण अथवा अभिकरण अथवा भर्ती समिति ;

(घ) ''परीक्षा केन्द्र'' से अभिप्राय है, लोक परीक्षा आयोजित करने हेतु परीक्षा प्राधिकरण

द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसे परिसर ;

(ड.) ''निरीक्षण टीम'' से अभिप्राय है, किसी परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण करने के लिए

परीक्षा प्राधिकरण द्वारा प्राधि—त व्यक्ति ;

(च) ''लोक परीक्षा'' से अभिप्राय है, स्वायत्त निकायों, प्राधिकरणों, बोर्डों या निगमों

सहित राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर भर्ती के प्रयोजन हेतु कोई परीक्षा ;

(छ) ''राज्य सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासनिक विभाग मेें हरियाणा राज्य की सरकार ; (ज) ''पर्यवेक्षी अमला'' में शामिल हैं, परीक्षा प्राधिकरण द्वारा लोक परीक्षा आयोजित

करने के लिए प्राधि—त व्यक्ति ;

(झ) ''अनुचित साधन'' में शामिल हैं,-

(i) परीक्षार्थी के संबंध में, लोक परीक्षा में किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष रूप से अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अथवा लिखित, लिपिबद्ध, नकल या मुद्रित किसी सामग्री, किसी भी रूप में ज्ञात हो, से अप्राधि—त सहायता लेना, अथवा किसी अप्राधि—त इलेक्ट्रोनिक अथवा मैकेनिकल उपकरण अथवा गैजेट का उपयोग करना ; तथा256 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 6, 2021 (AGHN. 15, 1943 SAKA) (ii) परीक्षार्थी से भिन्न किसी व्यक्ति के संबंध में, अप्राधि—त रूप से प्रश्न-पत्र का प्रतिरूपन अथवा प्रकट करना अथवा प्र्रकट करने का प्रयास करना अथवा प्रकट करने का षड्‌्‌यंत्र करना अथवा दलाली करना या दलाली करने का प्रयास करना या कब्जे में लेना या कब्जे में लेने का प्रयास करना, प्रश्न-पत्र हल करना या हल करने का प्रयास करना या हल करने के लिए सहायता प्राप्त करना या प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से लोक परीक्षा में किसी रीति, जो भी हो, में परीक्षार्थी की सदोष लाभ के लिए अप्राधि—त रूप से सहायता करना।

(2) इसमें प्रयुक्त और अपरिभाषित किन्तु भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) में परिभाषित शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के वहीं अर्थ होंगे, जो उन्हें क्रमशः उस संहिता में दिए गए हैं। 3. कोई भी व्यक्ति, किसी लोक परीक्षा अथवा लोक परीक्षा के आयोजन में किसी अनुचित साधन का उपयोग नहीं करेगा अथवा अनुग्रह नहीं करेगा।

4. लोक परीक्षा के आयोजन में अपने कत्र्तव्यों के फलस्वरूप कोई भी प्राधिकृत व्यक्ति, प्रश्न पत्रों को खोलने और उनका वितरण करने के लिए नियत समय से पूर्व,-

अनुचित साधनों के उपयोग अथवा अनुग्रह का प्रतिषेध। प्रश्न-पत्र को कब्जे में लेना और उसका प्रकटीकरण।

(क) ऐसे प्रश्न -पत्र या उसके किसी भाग या उसकी प्रति को नहीं खोलेगा, प्रकट नहीं करेगा या दलाली नहीं करेगा या दलाली करने का प्रयास नहीं करेगा, कब्जा में नहीं लेगा या हल नहीं करेगा; या

(ख) किसी व्यक्ति या परीक्षार्थी को ऐसी सूचना नहीं देगा या देने का वचन नहीं देगा, जिसके लिए वह जानकारी रखता है या विश्वास का कारण रखता है कि ऐसी सूचना, ऐसे प्रश्न पत्र से संबंधित है या के संदर्भ में है।

सूचना देने हेतु प्रतिषेध।

परीक्षा केन्द्र में प्रवेश करना प्रतिषेध।

सहायता करना प्रतिषेध।

5. कोई भी व्यक्ति, जिसे लोक परीक्षा या लोक परीक्षा आयोजित करवाने से संबंधित कोई कार्य सौंपा जाता है, जहां वह अपने कत्र्तव्यों के फलस्वरूप ऐसा करने के लिए अनुमत है, को छोड़कर प्रत्यक्ष रूप या अप्रत्यक्ष रूप से अनुचित साधनों में शामिल नहीं होगा, कोई सूचना या उसका भाग, जो उसको सौंपे गए कार्य के फलस्वरूप उसकी जानकारी में है, को नहीं देगा अथवा देने का प्रयास नहीं करेगा। 6. कोई भी व्यक्ति, जिसे लोक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य सौंपा नहीं जाता है अथवा जो परीक्षार्थी नहीं है, किसी परीक्षा केन्द्र में लोक परीक्षा के दौरान प्रवेश नहीं करेगा। 7. लोक परीक्षा आयोजित करने के लिए विनिर्दिष्ट अथवा लोक परीक्षा से संबंधित कार्य से न्यस्त किसी संस्था का प्रबंधक या कर्मचारी किसी परीक्षार्थी की सहायता नहीं करेगा अथवा अनुचित साधन में लिप्त नहीं होगा।

शास्तियां। 8. (1) यदि कोई परीक्षार्थी इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों की उल्लंघना करता है अथवा उल्लंघना करने का प्रयास करता है अथवा उल्लंघना करने के लिए उकसाता है, तो वह ऐसी कारावास की अवधि, जो दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है तथा जुर्माने, जो पांच हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा। (2) यदि कोई व्यक्ति निरीक्षण टीम के किसी सदस्य, पर्यवेक्षी अमले, परीक्षा प्राधिकारी या परीक्षा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किसी अधिकारी या व्यक्ति को अपने कत्र्तव्य का पालन करने या किसी परीक्षा केन्द्र में प्रवेश करने में बाधा पहुंचाता है अथवा धमकी देता है, तो वह ऐसी कारावास की अवधि, जो दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है तथा जुर्माने, जो पांच हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा। (3) यदि लोक परीक्षा आयोजित करने के लिए कत्र्तव्य से न्यस्त कोई व्यक्ति, इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों की उल्लंघना करता है अथवा उल्लंघना करने का प्रयास करता है अथवा उल्लंघना करने के लिए उकसाता है, तो वह ऐसी कारावास की अवधि, जो सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माने, जो एक लाख रूपए से कम और तीन लाख रूपए से अधिक नहीं होगा, से दण्डनीय होगा। (4) यदि कोई व्यक्ति परीक्षा प्राधिकारी के साथ षड्‌्‌यंत्र करते हुए संगठित अपराध करता है अथवा अन्यथा से लिप्त है अथवा इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों की उल्लंघना करता है अथवा उल्लंघना करने का प्रयास करता है अथवा उल्लंघना करने के लिए उकसाता है, तो वह कारावास की ऐसी अवधि, जो सात वर्ष से कम नहीं होगी और दस वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माने, जो दस लाख रूपए से कम नहीं होगा, से दण्डनीय होगा। व्याख्या.- इस उपधारा के प्रयोजनार्थ, ''संगठित अपराध'' से अभिप्राय है, सदोष लाभ प्राप्त करने के लिए साझा हित को आगे बढ़ाने अथवा बढ़ावा देने के लिए अनुचित साधनों में लिप्त कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह।257 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 6, 2021 (AGHN. 15, 1943 SAKA) दोषसिद्धि पर विवर्जन। 9. किसी परीक्षार्थी, जिसे इस अधिनियम के उपबन्ध के अधीन किसी अपराध का सिद्धदोष ठहराया गया है, तो उसे दो वर्ष की अवधि के लिए किसी लोक परीक्षा देने से विवर्जित किया जाएगा।

सम्पत्ति की कुर्की। 10. इस अधिनियम की धारा 8 की उप-धारा (4) के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा की गई उल्लंघना के मामले में, न्यायालय, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम 2) में अधिकथित प्रक्रिया की अनुपालना करते हुए ऐसे व्यक्ति की किन्हीं आस्तियों/सम्पत्ति, चल, या अचल अथवा दोनों की कुर्की और विक्रय के माध्यम से ऐसे व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए गए किसी सदोष लाभ की वसूली करने के लिए आदेश करेगा।

लोक सेवक। 11. लोक परीक्षा आयोजित करने में नियोजित प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझा जाएगा।

12. राज्य सरकार, समय-समय पर, इस अधिनियम के उपबन्धों को लागू करने के लिए लिखित में निर्देश या आदेश जारी कर सकती है।

निर्देश या आदेश जारी करने की शक्ति।

कठिनाइयां दूर करने की शक्ति। 13. यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि के भीतर, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्‌्‌असंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो उसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।

नियम बनाने की शक्ति। 14. (1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने अथवा जारी किए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुुख रखा जाएगा।

15. इस अधिनियम के उपबन्ध, विषय के संबंध में लागू किसी अन्य विधि के अतिरिक्त तथा के अल्पीकरण में नहीं होंगे।

अन्य विधियों के लागू होने से वर्जित नहीं होना।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9406—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 06 December 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-12-06.Extra-Ordinary_Leg-No-25-2021/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-12-06.Extra-Ordinary_Leg-No-25-2021.