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Haryana Gazette · Government of Haryana

The Panchkula Metropolitan Development Authority Act, 2021 (Haryana Act No.23 of 2021).

Published 22 December 2021

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
214-2021/Ext
Notification no.
Leg. No.23/2021
Identifier
in.gazette.haryana.2021-12-22.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2021
Languages
English, Hindi
Published at
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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 214-2021/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 22 दिसम्बर, 2021

(1 पौष, 1943 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

277-300 1. पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2021 (2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 23)

(केवल हिन्दी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं

भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(xcvii)277 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 22 दिसम्बर, 2021

संख्या लैज. 23/2021.- दि पंचकूला मेट्रोपोलिटन डिवेलपमेन्ट अथोरिटि ऐक्ट, 2021 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 17 दिसम्बर, 2021 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2021 का हरियाणा अधिनियम संख्या 23

रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के माध्यम से निवासियों को जीवन की गुणवत्ता और उचित जीविका स्तर उपलब्ध करवाने के माध्यम से पंचकूला महानगर क्षेत्र के निरन्तर, स्थायी तथा संतुलित विकास के लिए विजन विकसित करने हेतु, एकीकृत और समन्वित योजना, अवसंरचना विकास की व्यवस्था के लिए तथा नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन के उपबन्ध करने हेतु, तेजी से बढ़ रही नगर बस्तियों के रूप में पंचकूला के आविर्भाव के संदर्भ में स्थानीय प्राधिकरणों के समन्वय में नगरीय सुशासन और वितरण ढांचे को पुनःपरिभाषित करने हेतु, उक्त प्रयोजन के लिए और उससे सम्बन्धित और उसके आनुषंगिक मामलों के लिए वैधानिक प्राधिकरण स्थापित करने हेतु अधिनियम

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम प्ांचकूला महानगर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2021, कहा जा सकता है। (2) यह ऐसी तिथि से लागू होगा, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे और इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिए भिन्न-भिन्न तिथियां नियत की जा सकती हैं और इस अधिनियम के प्रारम्भ हेतु इस अधिनियम के किसी ऐसे उपबन्ध में किसी संदर्भ का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबन्ध के लागू होने के लिए संदर्भ के रूप में है।

परिभाषाएं। 2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''प्राधिकरण'' से अभिप्राय है, धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्ांचकूला

महानगर विकास प्राधिकरण;

(ख) ''बोर्ड'' से अभिप्राय है, किसी राज्य विधि द्वारा या के अधीन स्थापित कोई बोर्ड;

(ग) ''मुख्य कार्यकारी अधिकारी'' से अभिप्राय है, धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन

नियुक्त प्राधिकरण का मुख्य कार्यकारी अधिकारी;

(घ) ''कम्पनी'' से अभिप्राय है, कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 18),

के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई कम्पनी;

(ङ) ''सामूहिक-समाजमूलक जवाबदेही पॉलिसी'' से अभिप्राय है, कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 18) की धारा 135 की उपधारा (4) के खण्ड (क) के उपबन्धों के अधीन बोर्ड द्वारा यथा अनुमोदित पॉलिसी ;

(च) ''भू-स्थानिक आधारित प्रणाली'' से अभिप्राय है, डाटासेट तथा सूचना को प्राप्त करने, कुशलता से प्रयोग करने, योजना बनाने तथा संग्रहण करने हेतु प्रयुक्त प्रक्रिया तथा प्रौद्योगिकी, जो अधिसूचित क्षेत्र में भौगोलिक अवस्थिति, प्राकृतिक अभिलक्षणों और अन्य लक्षणों या निर्मित विशेषताओं की पहचान करती है और जिसमें शामिल हैं-278 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (i) प्राकृतिक या निर्मित विशेषताओं के सीमांकन तथा अधिकारिताएं;

(ii) सांख्यिकीय डाटा ; (iii) अन्य वस्तुओं, मॅपिंग, रिमोट सैंसिंग तथा सर्वेइंग टैक्नोलोजिज से प्राप्त की

गई सूचना;

(छ) ''हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण'' से अभिप्राय है, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 (1977 का 13) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण;

(ज) ''अवसंरचना विकास योजना'' से अभिप्राय है, धारा 17 की उपधारा (5) के अधीन

प्रकाशित अवसंरचना योजना ;

(झ) ''अवसंरचना विकास कार्य'' से अभिप्राय है, अवसंरचना विकास जैसे सड़कें, जल-आपूर्ति प्रणालियां और जल-शोधन, मल-जल प्रणाली, मल-जल शोधन और निपटान, जल-निकास, बिजली प्रेषण और वितरण प्रणालियां, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन सुविधा, मैट्रो-रेलवे प्रणाली, पाइप्ड प्राकृतिक गैस, संसूचनाएं या ऐसी अन्य नगरीय अवसंरचना जो दो या अधिक सैक्टरों, नगर कालोनियों या गांवों को जोड़ती हो या जो अधिसूचित क्षेत्रों को अवसंरचना जरूरतें उपलब्ध करवाती हैं, किन्तु इसमें कोई आंतरिक विकास कार्य शामिल नहीं है ;

(ञ) ''आंतरिक विकास कार्य'' से अभिप्राय है, अधिसूचित क्षेत्र में अवस्थित सैक्टर, कॉलोनी, नगर कॉलोनी या गांवों के आबादी देह क्षेत्रों के भीतर सड़कों का विकास, जल-आपूर्ति, मल-जल, जल-निकास, बिजली, सफाई या ऐसी अन्य नगरीय सुविधाएं या नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था ;

(ट) ''सीमित दायित्व भागीदारी'' से अभिप्राय है, सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2009 (2009 का केन्द्रीय अधिनियम 6), के अधीन निगमित सीमित दायित्व भागीदारी ;

(ठ) ''स्थानीय प्राधिकरण'' से अभिप्राय है, अधिसूचित क्षेत्र में नगर निगम, नगर परिषद्‌, नगरपालिका समिति, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद्‌, जैसी भी स्थिति हो ;

(ड) ''गतिशीलता'' से अभिप्राय है, व्यक्तियों की पैदल या किसी प्रकार के पहियों वाले

वाहनों पर गतिशीलता ;

(ढ) ''गतिशील प्रबन्धन योजना'' से अभिप्राय है, धारा 21 की उप-धारा (5) के अधीन

अनुमोदित गतिशील प्रबन्धन योजना ;

(ण) ''अधिसूचना'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य के राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना ; (त) ''अधिसूचित क्षेत्र'' से अभिप्राय है, धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित

पंचकूला महानगर क्षेत्र;

(थ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित ; (द) ''विनियम'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए प्राधिकरण के

विनियम ;

(ध) ''निवासी'' से अभिप्राय है, भारत का कोई नागरिक जो सामान्यतः अधिसूचित क्षेत्र में

निवास करता है ;

(न) ''निवासी सलाहकार परिषद्‌'' से अभिप्राय है, धारा 11 के अधीन गठित निवासी

सलाहकार परिषद्‌ ;

(प) ''राज्य सरकार'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार ; (फ) ''अन्तरणीय विकास अधिकार'' से अभिप्राय है, प्रमाण-पत्र में वर्णित मंजिल क्षेत्र तक निर्माण के लिए प्रमाण-पत्र के प्राधिकृत धारक को अधिकार प्रदान करने वाला प्रमाण-पत्र, जिसे प्राधिकृत धारक ऐसे सामान्य निबन्धनों और शर्तों पर तथा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पॉलिसी के अनुसार ऐसी स्वीकृति के बाद, किसी दूसरे व्यक्ति या कम्पनी या अन्य अभिकरण को अंतरित कर सकता है, जिस पर निर्माण का अधिकार ऐसे व्यक्ति या कम्पनी या अन्य अभिकरण को अंतरित हो जाएगा ;

(ब) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ''नगरीय क्षेत्र'' में नगर निगम, पंचकूला की परिधि में ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल है जो राज्य सरकार की राय में नगरीयकृत होना संभाव्य है ;

279 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

(भ) ''नगरीय सुख-सुविधाओं'' से अभिप्राय है, नगरीय सुख-सुविधाएं जैसे कि पार्क, खेल-मैदान, हरित स्थान, पार्किंग सुविधाएं, सार्वजनिक वाई-फाई सुविधाएं, सार्वजनिक बस परिवहन, बस शैल्टर, टैक्सी और रिक्शा स्टैण्ड, पुस्तकालय, किफायती अस्पताल, सांस्कृतिक केन्द्र, मनोरंजन केन्द्र, स्टेडियम, स्पोर्टस कम्पलैक्स और कोई अन्य नगरीय सुविधा जिसे राज्य सरकार, प्राधिकरण की सिफारिश पर, नगरीय सुख-सुविधा के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकती है, किन्तु इसमें अवसंरचना विकास कार्य शामिल नहीं है ;

(म) ''नगरीय पर्यावरण'' इसमें अधिसूचित क्षेत्र में जल, वायु, हरित स्थान, खुले स्थान

और नगरीय वानिकी शामिल हैं।

(2) इसमें प्रयुक्त और अपरिभाषित किन्तु हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियन्त्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) या हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) या हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (1994 का 16) में परिभाषित शब्दों तथा अभिव्यक्तियों और इस अधिनियम से अनअसंगत हैं, के वही अर्थ होंगे, जो उन्हें क्रमशः उस अधिनियम में दिए गए हैं।

पंचकूला महानगर क्षेत्र की घोषणा। 3. (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नगरीय विस्तार के लिए सम्भावना रखने वाले पंचकूला जिले में नियंत्रित क्षेत्र की सीमाओं के भीतर और निम्नलिखित किन्हीं या सभी स्थानीय प्राधिकरणों के अधीन आने वाले किसी क्षेत्र को अधिसूचित क्षेत्र के रूप में घोषित कर सकती है, अर्थात्‌ :-

(क) नगर निगम, पंचकूला; (ख) पंचकूला जिले में कोई पंचायत, जहां तक हो सके, ऐसी पंचायत की आबादी देह

से संबंधित है।

(2) राज्य सरकार, उपधारा (1) के अधीन की गई घोषणा की विषय-वस्तु अंग्रेजी और हिन्दी भाषाओं में मुद्रित कम से कम दो दैनिक समाचार-पत्रों में प्रकाशित करवाएगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन की गई घोषणा प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।

प्राधिकरण की स्थापना। 4. (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा तथा ऐसी तिथि, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, से इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण कहा जाने वाले प्राधिकरण की स्थापना करेगी।

(2) प्राधिकरण शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा रखने वाला उक्त नाम से, इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन चल और अचल दोनों सम्पत्ति अर्जित, धारण तथा निपटान करने और संविदा करने की शक्ति सहित निगमित निकाय होगा, और वह उक्त नाम से वाद चला सकेगा या उस पर उक्त नाम से वाद चलाया जा सकेगा।

5. प्राधिकरण निम्नलिखित सदस्यों से गठित होगा, अर्थात्‌ :-

प्राधिकरण का गठन। (क) मुख्यमंत्री हरियाणा, अध्यक्ष; (ख) कार्यभारी मंत्री, नगर तथा ग्राम आयोजना, पदेन सदस्य; (ग) कार्यभारी मंत्री, शहरी स्थानीय निकाय, पदेन सदस्य; (घ) कार्यभारी मंत्री, परिवहन, पदेन सदस्य;

(ङ) अधिसूचित क्षेत्र के भीतर आने वाले संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले

संसद सदस्य, पदेन सदस्य;

(च) अधिसूचित क्षेत्र के भीतर आने वाले विधान सभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य

विधानमण्डल के सदस्य, पदेन सदस्य;

(छ) नगर निगम, पंचकूला का महापौर, पदेन सदस्य;

(ज) नगर निगम, पंचकूला का वरिष्ठ उप महापौर, पदेन सदस्य; (झ) अध्यक्ष, जिला परिषद्‌, पंचकूला, पदेन सदस्य;

(ञ) अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव, जैसी भी स्थिति हो, नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग,

पदेन सदस्य;

(ट) अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव, जैसी भी स्थिति हो, शहरी स्थानीय निकाय विभाग,

पदेन सदस्य;

280 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

(ठ) छह से अनधिक राज्य सरकार के ऐसे अधिकारी, जो प्रधान सचिव की पदवी से नीचे के न हाें, जो राज्य सरकार, समय-समय पर नामनिर्दिष्ट करे, पदेन सदस्य;

(ड) नगरीय अवसंरचना, सुशासन, लोक प्रशासन, वित्त, प्रबंधन, नगरीय वानिकी, पर्यावरण, इंजीनियरी, नगर योजना इत्यादि के क्षेत्र से छह से अनधिक ऐसे विशेषज्ञ, जो राज्य सरकार, समय-समय पर नामनिर्दिष्ट करे, सदस्य;

(ढ) निदेशक, नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग, पदेन सदस्य; (ण) मण्डल आयुक्त, पंचकूला, पदेन सदस्य;

(त) आयुक्त, नगर निगम, पंचकूला, पदेन सदस्य;

(थ) पुलिस आयुक्त, पंचकूला, पदेन सदस्य;

(द) उपायुक्त, पंचकूला, पदेन सदस्य;

(ध) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पदेन सदस्य।

6. (1) पदेन सदस्यों से भिन्न, सदस्य, प्राधिकरण की बैठकों में उपस्थित होने के लिए ऐसे भत्ते, जो विहित किए जाएं, प्राप्त करेंगे।

सदस्यों के भत्ते, अवसान तथा त्यागपत्र।

(2) जहां कोई व्यक्ति पदाभिधान या पदवी धारण करने से प्राधिकरण का सदस्य हो जाता है या के रूप में नामनिर्दिष्ट किया जाता है, जैसे ही वह ऐसे पद या पदवी, जैसी भी स्थिति हो, को धारण करने से प्रविरत हो जाता है, प्राधिकरण के सदस्य के रूप में नहीं रहेगा।

(3) पदेन सदस्य से भिन्न सदस्य, किसी भी समय, अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अध्यक्ष को सम्बोधित करते हुए अपना पद त्याग सकता है।

प्राधिकरण की बैठक।

7. (1) प्राधिकरण ऐसे समय पर, ऐसे स्थान पर बैठक करेगा और उपधारा (2) और (3) के उपबन्धों के अध्यधीन बैठकों के संचालन और कारबार के संव्यवहार के लिए प्रक्रिया के ऐसे नियमों की अनुपालना करेगा, जो विहित किए जाएं। (2) प्राधिकरण की प्रत्येक बैठक में, अध्यक्ष, यदि उपस्थित है या उसकी अनुपस्थिति में सदस्यों में से कोई एक सदस्य, जिसका उपस्थित सदस्य चुनाव करते हैं, अध्यक्षता करेगा। (3) बैठक में सभी प्रश्नों का निर्णय उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाएगा तथा मतों की समानता की दशा में, अध्यक्ष या अध्यक्षता करने वाले सदस्य, जैसी भी स्थिति हो, का निर्णायक मत होगा।

(4) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राधिकरण की बैठकों के अभिलेख, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में रखेगा।

8. (1) प्राधिकरण अपने सदस्यों में से गठित कार्यकारी समिति को, उपधारा (2) में वर्णित शक्तियों से भिन्न, अपनी किन्हीं शक्तियों को जैसा अध्यक्ष निर्णय करे, प्रत्यायोजित कर सकता है और कार्यकारी समिति के सभी निर्णयों का वही प्रभाव होगा मानो इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा लिए गए हों :

कार्यकारी समिति को प्राधिकरण की शक्तियों का प्रत्यायोजन।

परन्तु कार्यकारी समिति में धारा 5 के खण्ड (ड) के अधीन नामनिर्दिष्ट प्राधिकरण के कम से कम तीन सदस्य शामिल होंगे। (2) प्राधिकरण, कार्यकारी समिति को निम्नलिखित शक्तियां प्रत्यायोजित नहीं करेगा, अर्थात्‌ :-

(क) धारा 17 की उपधारा (5) के अधीन अवसंरचना विकास योजना तैयार करना तथा

उसका प्रकाशन करवाना ;

(ख) धारा 21 की उपधारा (4) के अधीन गतिशील प्रबन्धन योजना का अनुमोदन करना ; (ग) धारा 23 के अधीन नगरीय पर्यावरण के सतत्‌ प्रबन्धन के लिए योजना का अनुमोदन

करना ;

(घ) धारा 39 के अधीन प्राधिकरण के बजट का अनुमोदन करना ; (ङ) धारा 58 के अधीन कोई विनियम बनाना, संशोधन करना या निरसन करना। मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति, निबंधन तथा शर्तें इत्यादि।

9. (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, राज्य सरकार के किसी अधिकारी, जो सचिव की पदवी से नीचे का न हो, को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त करेगी। (2) मुख्य कार्यकारी अधिकारी को प्राधिकरण की निधि में से ऐसा मासिक वेतन और ऐसी अन्य सुविधाओं सहित ऐसे मासिक भत्तों का भुगतान किया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, नियत किए जाएं।281 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (3) जब कभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवकाश पर है या अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है, तो राज्य सरकार जब तक वह वापिस नहीं आता किसी दूसरे अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए उसके स्थान पर नियुक्त कर सकती है।

10. (1) प्राधिकरण, ऐसे अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को ऐसी रीति में और ऐसी अर्हताओं सहित, जो विहित की जाएं, नियुक्त कर सकता है।

प्राधिकरण के अधिकारी और अन्य कर्मचारी। (2) प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को भुगतानयोग्य वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।

(3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ऐसे अन्य कर्मचारियों, जो वह इसके कृत्यों की दक्ष अनुपालना के लिए आवश्यक समझे, ऐसी अस्थायी अवधि के लिए, ऐसी रीति में और ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, नियुक्त कर सकता है।

निवासी सलाहकार परिषद्‌। 11. (1) प्राधिकरण को सलाह देने के लिए और इसकी शक्तियों के प्रयोग और इसके कृत्यों के अनुपालन पर मार्गदर्शन देने के लिए निवासी सलाहकार परिषद्‌ होगी।

(2) निवासी सलाहकार परिषद्‌, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जो परिषद्‌ की बैठकों की अध्यक्षता करेगा और निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्‌ :-

(क) आयुक्त, नगर निगम, पंचकूला, पदेन सदस्य; (ख) पुलिस आयुक्त, पंचकूला, पदेन सदस्य; (ग) उपायुक्त, पंचकूला, पदेन सदस्य; (घ) हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का मुख्य प्रशासक या मुख्य प्रशासक द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाला कोई अधिकारी, जो प्रशासक की पदवीं से नीचे का न हो, पदेन सदस्य;

(ङ) चार से अनधिक, प्राधिकरण के ऐसे अधिकारी, जिन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी,

समय-समय पर, नामनिर्दिष्ट करे, पदेन सदस्य;

(च) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा पूर्णरूप से स्वामित्वाधीन और अधिसूचित क्षेत्र में अपना मुख्यालय रखने वाले किसी बोर्ड या कम्पनी या किसी अभिकरण के तीन से अनधिक ऐसे अधिकारी, जिन्हें कार्यकारी समिति, समय-समय पर, नामनिर्दिष्ट करें, पदेन सदस्य;

(छ) प्राधिकरण या कार्यकारी समिति द्वारा निवासी कल्याण संघ, सिविल सोसाइटी, श्रम, उद्योग, भू-सम्पदा विकासकों, वाणिज्य और सेवाओं में से नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले अधिसूचित क्षेत्र के निवासी होते हुए कम से कम दस और अधिक से अधिक पन्द्रह ऐसे व्यक्ति, ऐसी रीति में और ऐसी अवधि के लिए, जो विहित की जाए, सदस्य।

(3) निवासी सलाहकार परिषद्‌, अवसंरचना विकास, गतिशील प्रबन्धन योजना के लिए कार्यवाही की वार्षिक योजना और नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना के कार्यान्वयन को मानीटर करेगी और ऐसी सिफारिश करेगी, जो वह विनिश्चय करे। (4) निवासी सलाहकार परिषद्‌ की सिफारिशों के साथ-साथ उस पर की गई या की जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई पर व्याख्यात्मक ज्ञापन मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्राधिकरण के समक्ष रखा जाएगा। (5) निवासी सलाहकार परिषद्‌ की बैठकों के संचालन और कारबार के संव्यवहार के लिए प्रक्रिया ऐसी होगी, जो विहित की जाए। (6) उपधारा (2) के खण्ड (छ) के अधीन निवासी सलाहकार परिषद्‌ के नामनिर्दिष्ट सदस्य प्राधिकरण की बैठकों में उपस्थित होने के लिए ऐसे भत्ते प्राप्त करेंगे, जो विहित किए जाएं।

प्राधिकरण के कार्यकलापों का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबन्धन। 12. (1) इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों और विनियमों के अन्य उपबन्धों के अध्यधीन, प्राधिकरण के कार्यकलापों का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और प्रबन्धन मुख्य कार्यकारी अधिकारी में निहित होगा। (2) मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदेश द्वारा, अपनी किन्हीं शक्तियों को ऐसे निबंधनों और शर्तों, जो अवधारित की जाएं, पर प्राधिकरण के किसी अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकता है :

परन्तु प्रत्यायोजन का प्रत्येक ऐसा आदेश और ऐसे प्रत्यायोजन के निबंधन और शर्तें प्राधिकरण के सम्मुख रखी जाएंगी।282 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) हित के विरोध का बचाव।

13. प्राधिकरण या निवासी सलाहकार परिषद्‌, जैसी भी स्थिति हो, की बैठकों में विचारण के लिए आने वाले किसी मामले में किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित, चाहे धन सम्बन्धी या अन्यथा हो, रखने वाला प्राधिकरण का कोई सदस्य या निवासी सलाहकार परिषद्‌ का कोई सदस्य ऐसी बैठक में अपने हित का स्वरूप प्रकट करेगा और उस मामलें के सम्बन्ध में प्राधिकरण या निवासी सलाहकार परिषद्‌, जैसी भी स्थिति हो, के किसी विचार-विमर्श या निर्णय में कोई भाग नहीं लेगा।

सूचना का प्रकटीकरण।

14. मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्राधिकरण के ऐसे अधिकारी, जो प्राधिकरण अवधारित करे और निवासी सलाहकार परिषद्‌ के सदस्य, नियुक्ति के यथाशीघ्र बाद और उसके बाद प्रत्येक वर्ष ऐसे प्ररूप और रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में अधिसूचित क्षेत्र में किसी सम्पत्ति, कारबार या किसी पारिवारिक सदस्य के नियोजन या प्राधिकरण के कार्यकलापों से सम्बद्ध या सम्बधित किसी मामले में, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो और चाहे धन सम्बन्धी हो या अन्यथा हो, अपने हित की सीमा की घोषणा करेंगे और इस प्रकार की गई घोषणा को प्राधिकरण की वैबसाइट पर डालेगा।

15. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिसूचित क्षेत्र की सीमाओं के भीतर, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियन्त्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) के अधीन निदेशक को प्रदत्त की गई हैं।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रयोग की जाने वाली निदेशक की शक्तियां।

16. (1) प्राधिकरण की शक्तियों, कृत्यों तथा कर्तव्यों, अन्य बातों के साथ निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबन्ध किया जा सकता है, अर्थात्‌ :-

प्राधिकरण की शक्तियां, कृत्य और कर्तव्य।

(क) अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास और नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था के लिए योजनाएं, परियोजनाएं और स्कीमें तैयार करने, स्वीकृत करने, कार्यान्वित करने ;

(ख) प्राधिकरण में निहित या के नियंत्रणाधीन और प्रबन्धनाधीन सभी अवसंरचना विकास कार्य, नगरीय सुख-सुविधाओं तथा सम्पत्तियों का रख-रखाव करने या रख-रखाव करवाने ;

(ग) अधिसूचित क्षेत्र में समन्वित और एकीकृत अवसंरचना विकास और नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन के लिए परियोजनाएं, स्कीमें या उपाय कार्यान्वित करने, जो प्राधिकरण की सहमति से इसको केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी बोर्ड, कम्पनी या किसी अन्य अभिकरण द्वारा सौंपे जाएं ;

(घ) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बोर्डों, कम्पनियों या अन्य अभिकरणों के साथ एकीकृत अवसंरचना विकास, नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन के प्रयोजनों के लिए समन्वय करने ;

(ङ) अधिसूचित क्षेत्र में गतिशील प्रबन्धन योजना के विनियमन का समन्वय करने; (च) अधिसूचित क्षेत्र के भीतर सामूहिक यातायात या एकीकृत बहु-मॉडल यातायात सहित सार्वजनिक यातायात की स्थापना, विकास और प्रचालन में संयुक्त उद्यम कम्पनियों या सीमित दायित्व भागीदारी बनाने के माध्यम से संचालित करने या सहयोग करने ;

(छ) अधिसूचित क्षेत्र के भीतर प्लानिंग, पुनः विकास और क्षेत्रों के नवीकरण के माध्यम से

नगरीय पुनरूद्वार और नवीनीकरण को बढ़ावा देने ;

(ज) अधिसूचित क्षेत्र, में आपदा प्रबन्धन योजना तैयार करने और आपदाओं को रोकने और इनके प्रभावों को कम करने के लिए ऐसे उपाय करने, जहां तक हो सके वे अवसंरचना विकास से सम्बन्धित हों ;

(झ) अधिसूचित क्षेत्र के लिए आपात प्रतिक्रिया प्रणाली वाला सार्वजनिक सुरक्षा संकेत

स्थापित करने, प्रचालित करने और अनुरक्षित करने ;

(ञ) पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए सर्वे करने ;

283 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

(ट) अधिसूचित क्षेत्र में समन्वित और एकीकृत अवसंरचना विकास, नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था के लिए किसी मामले में राज्य सरकार को सलाह देने या सिफारिश करने ;

(ठ) स्थानीय प्राधिकरणों को समुचित विधि, जिनके द्वारा वे स्थापित किए गए हैं, के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने और अपने कृत्यों का पालन करने में उन्हें समर्थ बनाने हेतु क्षमता निर्माण के माध्यम से उनकी सहायता करने ;

(ड) इस अधिनियम के अधीन नगरीय योजना, नगरीय पुनरूद्वार और नवीनीकरण, समन्वित और एकीकृत अवसंरचना विकास और नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था या किसी अन्य प्रयोजन के लिए अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करने या करवाने;

(ढ) ऐसे अन्य कृत्य करने और ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करने, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इसके उद्‌देश्य को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायित्व लेने हेतु प्राधिकरण से अपेक्षा करे।

(2) प्राधिकरण अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अपने कृत्यों का पालन करते हुए या अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए,-

(क) राज्य सरकार को तत्समय लागू किसी विधि के अनुसार प्राधिकरण के प्रयोजनों के

लिए भूमि अर्जित करने हेतु सिफारिश कर सकता है ;

(ख) ऐसी रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में भूमि का क्रय, विनिमय,

अंतरण, धारण, पट्‌टा, प्रबन्ध और निपटान कर सकता है;

(ग) राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में अधिसूचित पॉलिसी के अनुसार, प्राधिकरण द्वारा ऐसी रीति में और ऐसे विनिमय मूल्य के लिए भूमि की लागत के सम्बन्ध में निर्धारित भुगतान के बदले में जारी किए गए अंतरणीय विकास अधिकारों के विनिमय द्वारा अवसंरचना विकास और नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए भूमि का अर्जन कर सकता है ;

(घ) भूमि से अन्यथा चल या अचल सम्पत्ति का अर्जन, पट्‌टा, धारण, प्रबन्ध, अनुरक्षण

और निपटान कर सकता है ;

(ङ) अधिसूचित क्षेत्र में योजनओं के प्रयोजनों के लिए तथा भूमि, अवसंरचना, नगरीय सुख-सुविधाओं और नगरीय पर्यावरण के लिए आधुनिक भू-स्थानिक आधारित प्रणाली स्थापित कर सकता है ;

(च) किसी व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी, स्थानीय प्राधिकरण या अन्य अभिकरण के साथ संविदा

या करार कर सकता है ;

(छ) राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से और ऐसे निबन्धन तथा शर्तें, जो राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, पर बोर्डों, कम्पनियों या अन्य अभिकरणों के साथ संयुक्त उद्यम कम्पनियों और सीमित दायित्व भागीदारी बना सकता है ;

(ज) प्राधिकरण में निहित या के नियन्त्रणाधीन और प्रबन्धनाधीन साईकलिंग ट्रैक, खुले स्थान, पैदल फुटपाथ या सम्पत्तियों सहित सड़कों पर कोई बाधा या अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारिता रखने वाले समुचित स्थानीय प्राधिकरण या जिला मजिस्ट्रेट को निदेश दे सकता है ;

(झ) प्राधिकरण की सहायता से शीघ्र यथासाध्य कार्रवाई करने के लिए पुलिस से अपेक्षा

कर सकता है ;

(ञ) सभी ऐसे अन्य कार्य और बातें कर सकता है, जो किसी मामलें के लिए आवश्यक या आनुषंगिक या सहायक हों, जो शक्तियों का प्रयोग करने और कृत्यों का पालन करने के कारण उत्पन्न हाें और जो उद्‌देश्यों, जिनके लिए प्राधिकरण स्थापित किया गया है, के बढ़ावे के लिए आवश्यक हाें।284 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) अवसंरचना विकास योजना।

17. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इस अधिनियम के प्रारम्भ से नौ मास की अवधि के भीतर और उसके बाद ऐसे अंतरालों, जो विहित किए जाएं, पर ऐसे परामर्श, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, करने के बाद, अधिसूचित क्षेत्र के लिए अवसंरचना विकास योजना तैयार करेगा :

परन्तु ऐसी अवसंरचना विकास योजना, हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियन्त्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) की धारा 5 की उपधारा (7) के अधीन प्रकाशित अन्तिम योजना के अनुरूप होगी। (2) अवसंरचना विकास योजना में-

(क) अधिसूचित क्षेत्र या उसके भाग के निवासियों के रहन-सहन के उचित जीविका स्तर को बनाए रखने के लिए अपेक्षित असीमित सड़कें, जल आपूर्ति, मलजल निस्तारण, बाढ़ जल निकास नाली, बिजली, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन, सार्वजनिक यातायात, पार्किंग और अन्य नगरीय सुख-सुविधाओं सहित अवसंरचना विकास कार्य और नगरीय सुख-सुविधाओं का वर्णन और विवरण होगा :

परन्तु इस खण्ड की कोई भी बात स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण और प्रबन्धन के अधीन किसी आंतरिक विकास कार्य या किसी स्वामी द्वारा किए गए या किए जाने के लिए आशयित आंतरिक विकास कार्य को लागू नहीं होगी, जिसे हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है :

परन्तु यह और कि निवासियों के रहन-सहन के उचित स्तर के माप हेतु

पैरामीटर ऐसे होंगे, जो प्राधिकरण द्वारा अवधारित किए जाएं।

(ख) किसी राज्य विधि द्वारा या के अधीन जारी की गई अनुज्ञप्ति के अधीन उपलब्ध करवाई गई असीमित बिजली, दूरसंचार, प्राकृतिक गैस पाइप सहित प्राधिकरण में निहित या के नियंत्रणाधीन या प्रबन्धनाधीन किसी सड़क या सार्वजनिक गली या किसी सम्पत्ति में, नीचे, ऊपर, साथ-साथ, आर-पार या उस पर अवसंरचना विकास कार्यों के लिए मार्ग-अधिकार की आवश्यकता विनिर्दिष्ट होगी :

परन्तु मार्ग-अधिकार की आवश्यकता के लिए सड़क और उस पर खड़ी की गई सम्बन्धित अवसंरचना को बार-बार होने वाले नुकसान को रोकने के लिए व्यवस्था करेगा।

(3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आक्षेपों या सुझावों को आमन्त्रित करने के प्रयोजन के लिए अवसंरचना विकास योजना प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित करवाएगा।

(4) धारा 11 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के अधीन निवासी सलाहकार परिषद्‌ के नामनिर्दिष्ट किसी सदस्य सहित कोई व्यक्ति उपधारा (3) केे अधीन योजना के प्रकाशन की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ऐसी योजना के सम्बन्ध में लिखित में अपने आक्षेप या सुझाव, यदि कोई हाें, भेज सकता है और वह उपर्युक्त तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर प्राधिकरण को अपनी सिफारिशों के साथ अवसंरचना विकास योजना प्रस्तुत करेगा। (5) आक्षेप और सुझाव, यदि कोई हों, और उस पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, प्राधिकरण ऐसे उपांतरण, जो वह ठीक समझे, के अध्यधीन अन्तिम अवसंरचना विकास योजना तैयार करेगा और उसे प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित करेगा।

(6) अवसंरचना विकास योजना, जहां तक रूपांतरण से संबंधित है, उपधारा (3) से (5) में वर्णित प्रक्रिया अपनाने के बाद, समय-समय पर, यथा अपेक्षित उपांतरित की जा सकती है।

वार्षिक अवसंरचना विकास योजना।

18. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, धारा 17 की उपधारा (5) के अधीन प्रकाशित अवसंरचना विकास योजना और संसाधनों की उपलब्धता के निर्धारण पर आधारित, अवसंरचना विकास और आगामी वित्तीय वर्ष में नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वार्षिक कार्य योजना तैयार करेगा।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवसंरचना विकास तथा नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वार्षिक कार्य योजना में आगामी वित्त वर्ष में प्रस्तावित अवसंरचना विकास कार्यों या नगरीय सुख-सुविधाओं के लिए इनके कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित निधियों के अनुमान तथा निधिकरण के स्रोत सहित स्कीमें या परियोजनाएं अन्तर्विष्ट होंगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन अवसंरचना विकास के लिए वार्षिक कार्य योजना में अवसंरचना विकास कार्यों तथा नगरीय सुख-सुविधाओं के निम्नलिखित विवरण शामिल हाेंगे-285 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (क) चालू वित्त वर्ष की वार्षिक कार्य योजना, जो प्रारम्भ नहीं हुई है तथा उसके कारण ;

(ख) जो या तो चालू वित्त वर्ष में या चालू वित्त वर्ष के पूर्ववर्ती चालू वित्त वर्ष में

प्रारम्भ हो गई थी, किन्तु पूरी नहीं हुई है तथा उसके कारण ;

(ग) चालू वित्त वर्ष में पूरी हो गई है या पूरी की जानी संभावित है।

(4) अवसंरचना विकास के लिए वार्षिक कार्य योजना में अधिसूचित क्षेत्र में किसी व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण द्वारा प्रस्तावित अवसंरचना विकास तथा नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था या कार्यान्वयनाधीन के प्रयोजन के लिए अपेक्षित सूचना प्राप्त करने के बाद मुख्य कार्यकारी अधिकारी का निर्धारण शामिल होगा।

(5) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राधिकरण को उपधारा (2) में निर्दिष्ट अवसरंचना विकास तथा नगरीय सुख सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वार्षिक कार्य योजना तथा उपधारा (3) में निर्दिष्ट विवरण वित्त वर्ष की समाप्ति से कम से कम एक मास पूर्व प्रस्तुत करेगा । (6) प्राधिकरण, आगामी वित्त वर्ष के प्रारम्भ से पूर्व और अवसंरचना विकास तथा नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वार्षिक कार्य योजना पर विचार करने के बाद, ऐसे संषोधनों या उपांतरणों, यदि कोई हाें, जो यह ठीक समझे, के साथ योजना का अनुमोदन करेगा : श् परन्तु ऐसी वार्षिक कार्य योजना में कोई संषोधन या उपांतरण, केवल इसके कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित निधियों के अनुमान के निर्धारण तथा इसके निधिकरण के स्रोत के बाद किया जाएगा । (7) मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐसे संशोधनों या उपांतरणों, जो प्राधिकरण निदेश करे, सहित अवसंरचना विकास तथा नगरीय सुख सुविधाओं की व्यवस्था के लिए वार्षिक कार्य योजना, ऐसी योजना के अनुमोदन पर, यथासाध्य शीघ्रता से, तुरन्त प्राधिकरण की वैब साईट पर प्रकाषित करवायेगा ।

अवसंरचना विकास योजना के अनुसार किया जाने वाला अवसरंचना विकास। 19. (1) तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी बोर्ड, कम्पनी, अभिकरण या व्यक्ति, अवसरंचना विकास योजना के उपबन्धों के सिवाय, अधिसूचित क्षेत्र के भीतर, ऐसे स्वरूप का कोई अवसरंचना विकास नहीं करेगा, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन प्राधिकरण को सौंपा गया है। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अवसरंचना विकास का उत्तरदायित्व लेने का इच्छुक कोई बोर्ड, कम्पनी, अभिकरण या व्यक्ति लिखित में मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अवसरंचना विकास के लिए अपना प्रस्ताव, ऐसे रूप तथा ऐसी रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में इस आशय के प्रमाण-पत्र सहित कि प्रस्ताव अवसरंचना विकास योजना के अनुसार है, सूचित करेगा : परन्तु स्थानीय प्राधिकरण या कोई स्वामी, जिसे हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3 की उपधारा (3) के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है, प्राधिकरण को आंतरिक विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं करेगा :

परन्तु यह और कि स्थानीय प्राधिकरण, प्राधिकरण को आंतरिक विकास कार्य से भिन्न किसी अवसंरचना विकास कार्य को करने के अपने आषय के बारे सूचित करेगा तथा ऐसी सूचना, सिवाय जब यह आपातिक स्वरूप की है, को छोड़कर ऐसे अवसंरचना विकास कार्य के प्रारम्भ से कम से कम तीस दिन पूर्व दी जाएगी। (3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रस्ताव की प्राप्ति पर तुरन्त किन्तु तीन कार्य दिवसों से अपष्चात्‌, प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों सहित प्रस्ताव को प्राधिकरण की वैब साईट पर डलवाएगा।

(4) अधिसूचित क्षेत्र का कोई निवासी, ऐसी तिथि, जिसको उपधारा (3) के अधीन प्रस्ताव प्राधिकरण की वैब साईट पर डाला गया था, से इक्कीस दिन की अवधि के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को प्रस्ताव पर अपने आक्षेपों या सुझावों को प्रस्तुत करेगा।

(5) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ऐसी तिथि, जिसको उपधारा (3) के अधीन प्रस्ताव प्राधिकरण की वैब साईट पर डाला गया था, से साठ दिन की अवधि के भीतर और आक्षेपों तथा सुझावों की जांच करने के बाद तथा ऐसी जांच-पड़ताल, जो वह आवष्यक समझे करने के बाद, या तो प्रस्ताव पर अपनी सहमति देगा या अपनी सिफारिषें उसके कारणों सहित, उपधारा (2) के अधीन प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले बोर्ड, कम्पनी, अभिकरण अथवा व्यक्ति को प्रस्तुत करेगा ।

(6) उपधारा (5) में निर्दिष्ट सहमति या सिफारिषें उसके कारणों सहित प्राधिकरण की वैब साईट पर डाली जायेंगी ।286 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (7) यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपधारा (5) के अधीन अपनी सिफारिषें प्रस्तुत करते समय इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि प्रस्ताव का सारवान तथा व्यापक प्रभाव है तथा जनहित को प्रभावित करता है, तो वह प्राधिकरण के अध्यक्ष को अपनी सिफारिषें प्रस्तुत करने के लिए तुरन्त अग्रसर होगा । (8) प्राधिकरण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सिफारिषों पर विचार करने के बाद, इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अध्यधीन ऐसे निर्देष देगा, जो वह ठीक समझे तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐसे निर्देषों के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य होगा । 20. (1) प्राधिकरण, प्राधिकरण में निहित या के नियंत्रणाधीन या प्रबन्धनाधीन किसी सड़क या सार्वजनिक गली या किसी सम्पत्ति के नीचे, ऊपर, साथ-साथ, आर-पार या उस पर अवसंरचना विकास कार्य करने के लिए मार्ग-अधिकार की आवश्यकता विनिर्दिष्ट करेगा :

अवसंरचना विकास कार्यों के लिए मार्ग- अधिकार संबंधी विशेष उपबन्ध। परन्तु ऐसा आवश्यक मार्ग-अधिकार निम्नलिखित के उपबन्धों से संगत होगा- (i) दूरसंचार अवसंरचना के सम्बन्ध में, भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1885 का

केन्द्रीय अधिनियम 13) या इसके अधीन बनाए गए नियमों ;

(ii) विद्युत अवसंरचना के सम्बन्ध में, विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का केन्द्रीय

अधिनियम 36) या इसके अधीन बनाए गए नियमों ;

(iii) मेट्रो रेलवे अवसंरचना के सम्बन्ध में, भूमिगत रेल (संकर्म सन्निर्माण) अधिनियम, 1978 (1978 का केन्द्रीय अधिनियम 33) या इसके अधीन बनाए गए नियमों ; (iv) पैट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस पाईपलाइन के सम्बन्ध में, पैट्रोलियम और खनिज पाईपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम, 1962 (1962 का केन्द्रीय अधिनियम 50) या इसके अधीन बनाए गए नियमों।

(2) प्राधिकरण, इसमें निहित या इसके नियंत्रणाधीन या प्रबन्धनाधीन किसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में-

(i) भूमिगत तार अवसंरचना तथा भूमि के ऊपर तार अवसंरचना के लिए भारतीय तार अधिनियम, 1885 (1885 का केन्द्रीय अधिनियम 13) के अधीन स्थानीय प्राधिकरण तथा भारतीय तार मार्ग-अधिकार नियम, 2016 के अधीन समुचित प्राधिकरण की ;

(ii) विद्युत अवसंरचना के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का केन्द्रीय अधिनियम 36) की धारा 67 तथा 68 के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन प्रदत्त,

शक्तियों का प्रयोग करेगा। (3) कोई भी व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण अधिसूचित क्षेत्र के भीतर आवश्यक मार्ग-अधिकार के उपबन्धों के सिवाय कोई अवसरंचना विकास कार्य नहीं करेगा।

(4) जहां प्राधिकरण में निहित या के नियंत्रणाधीन या प्रबन्धनाधीन किसी सड़क या सार्वजनिक गली या किसी सम्पत्ति के अधीन अवसरंचना विकास कार्य उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित है, तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राधिकरण को समर्थ बनाने हेतु ऐसे अवसंरचना विकास कार्य की अवस्थिति पर वास्तविक समय सूचना प्राप्त करने हेतु ऐसे अवसरंचना विकास कार्य के प्रदाता से समुचित प्रौद्योगिकी के माध्यम से स्थितिपरक आसूचना व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपेक्षा करेगा।

(5) प्राधिकरण या तो स्वयं या किसी अवसंरचना विकास कार्य के एक या अधिक प्रदाताओं के सहयोग से, सभी सार्वजनिक उपयोगिताओं, जो किसी सड़क या सार्वजनिक गली में की जानी सम्भाव्य है, के लिए साझी अवसंरचना का निर्माण कर सकता है तथा ऐसी साझी अवसंरचना के निर्माण पर किसी सड़क या सार्वजनिक गली पर किए गए या किए जाने के लिए प्रस्तावित किसी अवसंरचना विकास कार्यों के सभी प्रदाताओं से ऐसी साझी अवसंरचना के उपयोग की अपेक्षा करेगा :

परन्तु साझी अवसंरचना का स्वरूप, इसके निर्माण के निबन्धन तथा शर्तें और साझा उपयोग ऐसा होगा, जैसा प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया जाए।

(6) यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी की राय है कि प्राधिकरण में निहित या के नियंत्रणाधीन या प्रबन्धनाधीन किसी सड़क या सार्वजनिक गली या किसी सम्पत्ति में, ऊपर, साथ-साथ, आर-पार या उस पर किए गए किसी अवसंरचना विकास कार्य का स्थानान्तरण करना लोक हित में लाभदायक है, तो वह ऐसे अवसंरचना विकास कार्य के स्वामी को इस प्रकार उपलब्ध करवाई गई अवसंरचना, ऐसे समय, जो वह युक्तियुक्त रूप से अवधारित करे, के भीतर स्थानान्तरित या रूपांतरित करने के निदेश दे सकता है :

287 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

परन्तु यदि प्राधिकरण या इसके हितबद्ध पूर्वाधिकारी को अवसंरचना विकास कार्य करते समय मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया था, तो ऐसी अवसंरचना का स्थानान्तरण या रूपांतरण, ऐसी अवसंरचना के स्वामी द्वारा उनकी अपनी लागत पर किया जाएगा, जब तक प्राधिकरण के आदेश द्वारा विशिष्ट रूप में छूट न दी गई हो : परन्तु यह और कि जहां अवसंरचना विकास कार्य का स्थानान्तरण या रूपांतरण, दूसरे अवसंरचना विकास कार्य के कार्यान्वयन के लिए अपेक्षित है, तब स्थानान्तरण या रूपांतरण, जिसमें उसके ऐसे स्थानान्तरण या रूपांतरण की लागत भी शामिल है, यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस प्रकार निदेश करे, अन्य अवसंरचना विकास कार्य के स्वामी द्वारा किया जाएगा :

परन्तु यह और कि यदि अवसंरचना विकास कार्य का स्वामी, ऐसी अवसंरचना विकास कार्य के स्थानान्तरण या रूपांतरण के लिए समय अवधि में विस्तार के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी को उसके कारणों सहित अनुरोध करता है, तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी लोक हित में तथा समय अवधि में विस्तार के लिए उसमें दिए गए कारणों को ध्यान में रखते हुए विस्तार की अनुमति दे सकता है या देने से इनकार कर सकता है।

व्याख्या.- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए ''मुआवजा'' शब्द में भूमि की क्षति के पुनः स्थापन या

पुनरूद्वार पर किए गए या उपगत भुगतान शामिल नहीं होंगे।

गतिशील प्रबंधन योजना। 21. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पुलिस आयुक्त, पंचकूला, नगर निगम आयुक्त, पंचकूला, उपायुक्त, पंचकूला के परामर्श से तथा ऐसे अन्य परामर्शों के बाद, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी ठीक समझे, अधिसूचित क्षेत्र में गतिशील प्रबन्ध करने के लिए समय-समय पर, गतिशील प्रबन्धन योजना तैयार करेगा।

(2) गतिशील प्रबन्धन योजना में शामिल होगा-

(क) अवसंरचना विकास के लिए उपाय, जिसमें सड़क जंक्शनों, सड़कों के सन्निर्माण, पुलों, पैदल चलने के लिए फुटपाथों, सब-वे तथा ऐसे अन्य सन्निर्माण या सुधार, जैसी भी स्थिति हो, भी शामिल हैं ;

(ख) सार्वजनिक सड़कों पर जीवन सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा दुर्घटनाओं को रोकने के

लिए लक्षित अवसंरचना विकास के लिए उपाय ;

(ग) सार्वजनिक यातायात, सामूहिक यातायात, एकीकृत मल्टीमॉडल यातायात, बस

शैल्टर, पार्किंग तथा उनके सुधार के संबंध में उपाय ;

(घ) पार्किंग, टै्रफिक, ट्रैफिक सिगनलों की संस्थापना तथा वाहनों के पारगमन को विनियमित करने के लिए उपाय, इसमें इनकी गति, रूप, सन्निर्माण, भार, आकार या ऐसी भारी वस्तुओं के लादेन या अनलादेन, जिनसे क्षति होने की सम्भावना है, भी शामिल हैं ;

(ङ) तीव्र गति की गाड़ियों के आवागमन वाली किसी विशिष्ट सार्वजनिक गली से

परिसरों तक पहुंच को विनियमित करने के लिए उपाय ;

(च) ऐसे अन्य उपाय, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पुलिस आयुक्त, पंचकूला तथा नगर निगम आयुक्त, पंचकूला की राय में, अधिसूचित क्षेत्र में गतिशील प्रबन्धन के लिए अपेक्षित हाें।

(3) गतिशील प्रबन्धन योजना, निवासी सलाहकार परिषद्‌ को प्रस्तुत की जाएगी तथा यह ऐसी सिफारिशें, यदि कोई हों, करेगी जो यह विनिश्चय करे।

(4) गतिशील प्रबन्धन योजना, निवासी सलाहकार परिषद्‌ की सिफारिशें, यदि कोई हों, सहित प्राधिकरण को प्रस्तुत की जाएगी तथा प्राधिकरण ऐसे संशोधनों या उपांतरणों, यदि कोई हों, जो वह ठीक समझे, सहित योजना का अनुमोदन करेगा।

(5) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गतिशील प्रबन्धन योजना को ऐसे संशोधनों या उपांतरणों सहित जैसा प्राधिकरण निदेश करे, योजना के अनुमोदन पर प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित करवाएगा।

(6) पुलिस आयुक्त, पंचकूला, नगर निगम आयुक्त, पंचकूला या ऐसा अन्य अधिकारी, जिसे प्रयोजन के लिए विधि के अधीन सशक्त किया जाए, तत्समय लागू ऐसी विधि के उल्लंघन के लिए किसी शास्ति के अधिरोपण की अपेक्षा करते हुए उपधारा (2) के खण्ड (घ) तथा (ङ) के सम्बन्ध में उपायों के प्रवर्तन के लिए जिम्मेवार होगा।288 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (7) हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (1994 का 16), की धारा 221 के अधीन नगर निगम आयुक्त, पंचकूला द्वारा शक्तियों का प्रयोग गतिशील प्रबन्धन योजना के अनुसार किया जाएगा। सिटी बस सेवा के प्रचालन के संबंध में विशेष उपबन्ध।

22. राज्य सरकार, लोकहित में तथा दक्ष, पर्याप्त, मितव्ययी तथा उचित रीति से समन्वित सड़क परिवहन सेवा उपलब्ध करवाने के प्रयोजन के लिए मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का केन्द्रीय अधिनियम 59), की धारा 99 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार प्रकाशित तथा उक्त अधिनियम की धारा 100 की उपधारा (3) के अधीन प्रकाशित स्कीम के संबंध में प्रस्ताव के अनुसरण में अधिसूचित क्षेत्र के भीतर सिटी बस सेवा के परिचालन हेतु प्राधिकरण को अनुमत करेगी।

स्थायी पर्यावरण प्रबन्धन के लिए योजना।

23. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वन संरक्षक, उपायुक्त, पंचकूला, नगर निगम आयुक्त, पंचकूला तथा ऐसे अन्य व्यक्तियों, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी ठीक समझे, के परामर्श से, समय-समय पर, अधिसूचित क्षेत्र के नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना तैयार करेगा।

(2) नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना में निम्नलिखित शामिल होगा- (i) नगरीय वानिकी, वृक्षारोपण तथा उद्यान के लिए उपबंध ताकि हरित स्थानों के लिए ऐसे अन्तरराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करने के प्रयत्न किए जा सके, जैसा प्राधिकरण अवधारित करे;

(ii) ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन तथा जल संरक्षण के लिए उपाय, जो आवश्यक तथा

वांछनीय हो।

(3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना पर आक्षेपों या सुझावों को आमन्त्रित करने के प्रयोजन के लिए प्राधिकरण की वैबसाइट पर उसे प्रकाशित करवायेगा। (4) धारा 11 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के अधीन निवासी सलाहकार परिषद्‌ के नामनिर्दिष्ट किसी सदस्य सहित कोई व्यक्ति, उपधारा (3) के अधीन योजना के प्रकाशन की तिथि से इक्कीस दिन की अवधि के भीतर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ऐसी योजना के सम्बन्ध में अपने आक्षेप तथा सुझाव, यदि कोई हों, भेजेगा तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपर्युक्त तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर, प्राधिकरण को अपनी सिफारिशों सहित नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना प्रस्तुत करेगा। (5) प्राधिकरण, आक्षेपों तथा सुझावों, यदि कोई हों, तथा उस पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, ऐसे उपांतरणों, जो वह ठीक समझे, के अध्यधीन नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए अंतिम योजना के बारे में निर्णय करेगा तथा उसे प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित करेगा। (6) नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लिए योजना, समय-समय पर, जैसा अपेक्षित हो, जहां तक इसके उपांतरण का सम्बन्ध है, उपधारा (3) से (5) में वर्णित प्रक्रिया का अनुसरण करने के बाद उपांतरित की जा सकती है।

(7) स्थायी पर्यावरण प्रबन्धन के लिए योजना के अनुमोदन पर, नगर निगम, पंचकूला या हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, जैसी भी स्थिति हो, अधिसूचित क्षेत्र में लागू नगर निगम या हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, जैसी भी स्थिति हो, की भवन उपविधियों में जल संरक्षण, अपजल को दोबारा उपयोग में लाना, वर्षा जल एकत्र करना, छत के शीर्ष भाग पर सोलर ऊर्जा के उपबंध करना, जैसी भी स्थिति हो, सहित किन्तु असीमित ऐसे उपायों, जो भवनों के सन्निर्माण से संबंधित हों, को शामिल करेगा। 24. जहां कोई अवसंरचना विकास कार्य उपलब्ध करवाया गया है या प्राधिकरण के नियन्त्रणाधीन तथा प्रबन्धनाधीन है, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्थानीय प्राधिकरण से, जिसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसा अवसंरचना विकास कार्य अवस्थित है, ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों, जैसा प्राधिकरण तथा उक्त स्थानीय प्राधिकरण के बीच सहमति हो, पर ऐसे अवसंरचना विकास कार्य के रखरखाव का उत्तरदायित्व लेने की अपेक्षा करेगा :

स्थानीय प्राधिकरण से रखरखाव हेतु उत्तरदायित्व लेने की अपेक्षा करने के लिए प्राधिकरण की शक्ति।

परन्तु जहां ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों पर सहमति नहीं होती है, तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सम्बद्ध स्थानीय प्राधिकरण के आयुक्त या कार्यकारी अधिकारी के परामर्श से, विशिष्ट निबन्धनों तथा शर्तों पर, मतभेद होने पर, विवरणी तैयार करेगा तथा ऐसे विवरण राज्य सरकार को निर्णय के लिए प्रस्तुत करेगा और राज्य सरकार का निर्णय अन्तिम होगा और प्राधिकरण तथा स्थानीय प्राधिकरण पर बाध्य होगा। प्राधिकरण की सर्वेक्षण करने की शक्ति।

25. प्राधिकरण, इसकी शक्तियों का प्रयोग या इसके कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनों हेतु, अधिसूचित क्षेत्र के भीतर किसी भूमि या भवन का सर्वेक्षण करवा सकता है तथा उस प्रयोजन के लिए प्राधिकरण के किसी अधिकारी या कर्मचारी या इस सम्बन्ध में सम्यक्‌ रूप से प्राधिकृत किसी स्थानीय प्राधिकरण, कम्पनी या अन्य अभिकरण द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति के लिए निम्नलिखित मामलों हेतु विधिपूर्ण होगा-289 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) (क) किसी भूमि में या पर प्रवेश करना तथा ऐसी भूमि का तलमापन करना;

(ख) अवमृदा के भीतर खोदना या बेधन करना ; (ग) चिह्‌न लगाते हुए तथा खाइयां खोदकर तल तथा सीमाओं का सीमांकन करना;

(घ) जहां अन्यथा सर्वेक्षण पूरा नहीं किया जा सकता या तलमापन नहीं किया जा सकता और

सीमाएं चिन्हित नहीं की जा सकती वहां किसी अवरोधन को काटना या साफ करना ;

(ङ) किसी अवसंरचना विकास कार्य, नगरीय सुख-सुविधा, नगरीय वानिकी या किसी प्रयोजन, जिसके लिए प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन उत्तरदायित्व लेने में सक्षम है, के आशयित सुयोजन का सीमांकन;

(च) किसी अवसंरचना कार्य, नगरीय सुख-सुविधा, नगरीय वानिकी या किसी प्रयोजन, जिसके लिए प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन सक्षम है, से सम्बन्धित निर्माणाधीन संकर्मों का परीक्षण करना;

(छ) सुनिश्चित करना कि क्या हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) की धारा 5 की उपधारा (7) के अधीन प्रकाशित अन्तिम विकास योजना, या निबन्धन तथा शर्तें, जिनके अधीन हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) के अधीन विकास अनुमत किया गया है, जैसी भी स्थिति हो, के अनुसार किसी भूमि या सम्पत्ति का विकास किया जा रहा है या किया गया है;

(ज) इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा शक्तियों का प्रयोग करने या कृत्यों का पालन

करने के लिए आवश्यक सभी ऐसे कार्य करना :

परन्तु-

(i) कोई भी प्रवेश 0600 तथा 1800 घण्टों के बीच के सिवाय नहीं किया जाएगा ; (ii) प्रवेश के आशय का नोटिस, ऐसी तिथि, जिसको प्रवेश किया जाना प्रस्तावित है,

से कम से कम एक दिन पूर्व दिया जाएगा।

26. मुख्य कार्यकारी अधिकारी अधिसूचित क्षेत्र में किसी अप्राधिकृत विकास या सड़कों पर अवरोधन तथा अतिक्रमण, जिसमें साईकलिंग ट्रैक, खुले स्थान, पैदल फुटपाथ या प्राधिकरण में निहित या के नियन्त्रणाधीन तथा प्रबन्धनाधीन सम्पत्तियां भी शामिल हैं, को हटाने के लिए अधिकारिता रखने वाले स्थानीय प्राधिकरण को ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में निदेश दे सकता हैः

मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अप्राधिकृत विकास, अवरोधन या अतिक्रमण को हटाने के निदेश देने की शक्ति। परन्तु जहां मुख्य कार्यकारी अधिकारी की राय है कि अधिकारिता रखने वाला स्थानीय प्राधिकरण ऐसे अप्राधिकृत विकास, अवरोधन या अतिक्रमण को हटाने में असमर्थ है या असमर्थ हो सकता है, तो वह ऐसे अप्राधिकृत विकास, अवरोधन या अतिक्रमण को हटाने हेतु जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे प्ररूप तथा रीति, जो विहित की जाए, में निदेश करेगा।

27. (1) प्राधिकरण, अधिसूचित क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास की उन्नति के लिए ऐसे उपाय करेगा, जो वह आवश्यक समझे।

सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास की उन्नति के लिए उपाय। (2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, प्राधिकरण किफायती अस्पतालों, खेलकूद सुविधाओं, सांस्कृतिक केन्द्रों, नवीन ज्ञान के क्षेत्रों के अनुसंधान में लगी हुई या लगने के लिए प्रस्तावित अनुसंधान संस्थाओं, नवीन ज्ञान के क्षेत्रों में स्टार्ट अप कम्पनियां, कौशल विकास केन्द्रों तथा ऐसे अन्य संस्थाओं, जो प्राधिकरण द्वारा अवधारित की जाएं, की स्थापना को प्रोन्नत करेगा, सहयोग देगा तथा सुकर बनाएगा। व्याख्या.- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ''नवीन ज्ञान क्षेत्रों'' शब्दों से अभिप्राय होगा, ज्ञान के ऐसे क्षेत्र, नवाचार या उद्यम, जिसे प्राधिकरण, समय-समय पर, अवधारित करे और प्राधिकरण की वैबसाइट पर प्रकाशित करे।

(3) प्राधिकरण, कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 18) की अनुसूची VII के अधीन वर्णित कार्यकलापों के लिए उक्त अधिनियम की धारा 135 के उपबन्धों के अधीन सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व पॉलिसी के अनुसरण में खर्च की जाने के लिए अपेक्षित राशियों को प्राप्त करने तथा अधिसूचित क्षेत्र में उपयोग करने हेतु प्राधिकरण की सहायता से अधिसूचित क्षेत्र के निवासियों द्वारा प्रबंधित किए जाने वाले और भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का केन्द्रीय अधिनियम 2) के उपबन्धों के अधीन लोक न्यास की स्थापना को समर्थ बनाएगा।

(4) प्राधिकरण, ऐसे उपायों द्वारा तथा ऐसे समन्वयता सुनिश्चित करते हुए, जो प्रयोजन के लिए आवश्यक होे, जो प्राधिकरण, समय-समय पर, निर्णीत करे, कारबार करने की सुगमता को सुकर बनाएगा :

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परन्तु राज्य सरकार, प्राधिकरण की सिफारिशों पर तथा अधिसूचना द्वारा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी या प्राधिकरण के किसी अधिकारी को ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों पर सशक्त कर सकती है, जो अधिसूचना में वर्णित की जाएं, जो राज्य सरकार या राज्य के अधीन बोर्ड के किसी अधिकारी द्वारा प्रयोग की जा रही हैं। (5) प्राधिकरण संभार-तंत्र अवसंरचना सहित उद्योगों, सेवाओं या कारबार के लिए सामान्य सुविधाओं के प्रतिष्ठान को स्थापित करेगा, प्रोन्नत करेगा या सुकर बनाएगा। (6) उपधारा (2) के अधीन प्रोन्नति, सहयोग तथा सरलीकरण का मेकनिज्म ऐसा होगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।

28. हरियाणा गंदी-बस्ती क्षेत्र (सुधार तथा उन्मूलन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 24) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उक्त अधिनियम के अध्याय IV के अधीन गंदी-बस्ती के उन्मूलन तथा पुनर्विकास के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में समझा जाएगा तथा उक्त प्रयोजनों के लिए उक्त अधिनियम के अधीन ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित करे।

1961 के पंजाब अधिनियम 24 के अधीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा शक्तियों का प्रयोग।

समन्वयन समितियां और स्थायी समितियां।

29. (1) प्राधिकरण, ऐसे निबन्धनों तथा शर्ताें के अध्यधीन, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, प्राधिकरण की किसी शक्ति का प्रयोग करने या किसी कृत्य के निर्वहन के लिए या द्वारा अवधारित किसी मामले से सम्बन्धित विचारणीय विषयों की मॉनिटरिंग या रिपोर्टिंग करने या मन्त्रणा देने के लिए अनेक समन्वयन समितियों और अनेक स्थायी समितियों, जैसा यह उचित समझे, का गठन कर सकता है, जो प्राधिकरण, समन्वयन समितियों और स्थायी समितियों को विनिर्दिष्ट करे। (2) समन्वयन समिति, केवल प्राधिकरण या राज्य सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियन्त्राधीन किसी बोर्ड या कम्पनी के अधिकारियों से गठित होगी, किन्तु स्थायी समिति में अधिसूचित क्षेत्र के निवासी शामिल होंगे जो प्राधिकरण या राज्य सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियन्त्राधीन किसी बोर्ड या कम्पनी के कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे व्यक्तियों की संख्या, इसकी कुल सदस्यता का एक तिहाई से अधिक नहीं होगी। (3) प्राधिकरण या राज्य सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी बोर्ड या कम्पनी के अधिकारियों से भिन्न, उपधारा (1) के अधीन गठित स्थायी समितियों के सदस्यों को समिति की बैठकों में उपस्थित होने और उसके किसी अन्य कार्य के लिए ऐसी फीस और भत्ते का भुगतान किया जाएगा, जो प्राधिकरण द्वारा, समय-समय पर, अवधारित किया जाए।

हित के विरोध का बचाव।

30. (1) ऐसी समन्वयन समिति या स्थायी समिति, जैसी भी स्थिति हो, की बैठक में विचारण के लिए आने वाले किसी मामले में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित, चाहे धन संबंधी या अन्यथा हो, रखने वाला किसी समन्वयन समिति या स्थायी समिति का कोई सदस्य, ऐसी बैठक में अपने हित का स्वरूप प्रकट करेगा और उस मामले के संबंध में ऐसी समन्वयन समिति या स्थायी समिति, जैसी भी स्थिति हो, के किसी विचार-विमर्श और निर्णय में कोई भाग नहीं लेगा।

(2) किसी समन्वयन समिति या किसी स्थायी समिति का सदस्य, यथाशीघ्र नियुक्ति के बाद और उसके बाद प्रत्येक वर्ष अधिसूचित क्षेत्र में किसी सम्पत्ति, कारबार या परिवार के किसी सदस्य के नियोजन या प्राधिकरण के कार्यकलापों के मामले के संबंध में या से संबंधित उसके हित, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो की सीमा तक और चाहे धन संबंधी या अन्यथा हो, यथाशीघ्र ऐसे प्ररूप और रीति में घोषणा करेगा, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, और इस प्रकार की गई घोषणा प्राधिकरण की वैबसाइट पर डलवाएगा। 31. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ऐसा अनुभव रखने वाले ऐसे विशेषज्ञों का, ऐसी फीस और पारिश्रमिक पर और ऐसी अवधि, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, के लिए नियोजन कर सकता है।

विशेषज्ञों को नियोजित करने की शक्ति।

32. प्राधिकरण अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता और सूचना प्रौद्योगिकी को अपनाना सुनिश्चित करेगा।

प्राधिकरण द्वारा पारदर्शिता इत्यादि सुनिश्चित करना।

33. (1) प्राधिकरण अपनी स्वयं की निधि रखेगा और बनाए रखेगा जिसमें निम्नलिखित जमा होगा- प्राधिकरण की निधियां।

(क) ऐसी धन राशियां जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित तथा उपलब्ध करवाई जाएं, की

प्रारम्भिक आधारभूत निधि ;

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(ख) राज्य सरकार द्वारा अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व प्राप्त या प्राप्त किए जाने के लिए देय और हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति के स्वामी द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में बाह्य विकास संकर्मों के लिए भुगतानयोग्य आनुपातिक विकास प्रभारों के कारण इस अधिनियम के प्रारम्भ के समय पर अव्ययित सभी धन राशियां ;

(ग) राज्य सरकार द्वारा अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व प्राप्त या प्राप्त किए जाने के लिए देय और हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3क की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचित क्षेत्र में उद्‌गृहीत अवसंरचना विकास प्रभारों के कारण तथा उक्त अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान किए गए स्वामी द्वारा भुगतानयोग्य इस अधिनियम के प्रारम्भ के समय पर अव्ययित सभी धन राशियां ;

(घ) इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व नगर निगम, पंचकूला द्वारा संगृहीत और राज्य

सरकार के पास जमा धन राशियों का ऐसा हिस्सा, जो राज्य सरकार अवधारित करे ;

(ङ) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या नगर निगम, पंचकूला से अनुदानों, ऋणों,

अग्रिमों या अन्यथा के रूप में प्राधिकरण द्वारा प्राप्त सभी धन राशियां ;

(च) राज्य सरकार से भिन्न स्रोतों से ऋणों या डिबेंचरों के रूप में प्राधिकरण द्वारा

उधार ली गई सभी धन राशियां ;

(छ) इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा प्राप्त सभी फीसें, प्रभार या उद्‌ग्रहण; (ज) चल और अचल सम्पत्ति के निपटान से प्राधिकरण द्वारा प्राप्त सभी धन राशियां ;

तथा

(झ) किराए और लाभों के रूप में या किसी अन्य रीति में या किसी अन्य स्रोत से

प्राधिकरण द्वारा प्राप्त सभी धन राशियां।

(2) निधि निम्नलिखित खर्च पूरा करने के लिए प्रयुक्त की जाएगी-

(क) अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास, नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था करने में ;

(ख) अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास, नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था करने के प्रयोजनों के लिए सृजित आस्तियों के परिचालन तथा अनुरक्षण में ;

(ग) प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के

वेतन तथा भत्ते ; (घ) अधिनियम के प्रशासन में ; (ङ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भूमि के अर्जन हेतु ; (च) अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास, नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक तथा औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन की व्यवस्था करने के लिए संयुक्त उद्यम और परिसीमित दायित्व भागीदारी में ;

(छ) अधिसूचित क्षेत्र में पुनर्विकास और नगरीय नवीनीकरण पर ;

(ज) इस अधिनियम के अधीन शक्तियों के प्रयोग या कृत्यों के निर्वहन में ऐसे प्रयोजनों हेतु, जो प्राधिकरण अनुमोदित करे या राज्य सरकार निदेश या अनुज्ञात करे।

प्राधिकरण को वार्षिक अनुदान, ऋण और अग्रिम। 34. राज्य सरकार, प्राधिकरण को प्रतिवर्ष ऐसी धन राशियों का अनुदान, ऋण या अग्रिम दे सकती है, जो राज्य सरकार आवश्यक समझे और इस प्रकार दिए गए सभी अनुदान, ऋण या अग्रिम ऐसे निबंधनों और शर्तों पर होंगे, जो राज्य सरकार अवधारित करे।

प्राधिकरण की उधार लेने की शक्ति। 35. प्राधिकरण, समय-समय पर, राज्य सरकार सेे भिन्न स्रोतों से, सामान्य या विशेष, ऐसे निबंधनों और शर्ताें पर, जो राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, ऋणों, बन्ध-पत्रों या डिबेंचरों या अन्य लिखितों के रूप में धन उधार ले सकता है।292 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) प्राधिकरण कीे निवेश करने की शक्ति।

36. (1) प्राधिकरण ऐसे निवेशों, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, में इसकी निधियों के किसी भाग का निवेश कर सकता है। (2) प्राधिकरण, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास और नगरीय सुख-सुविधाओं, गतिशील प्रबंधन, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबंधन की व्यवस्था करने के लिए संयुक्त उद्यम कम्पनियों और सीमित दायित्व भागीदारी के प्रतिष्ठान में निवेश कर सकता है।

37. प्राधिकरण द्वारा ऋणों पर ब्याज या ऋणों के पुनर्भुगतान के कारण सभी भुगतानों को प्राधिकरण के सभी अन्य देयों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

ऋणों के ब्याज और पुनर्भुगतान के लिए भुगतान को प्राथमिकता।

निधियों का प्रयोग।

38. प्राधिकरण में निहित सभी सम्पत्तियां, निधियां और अन्य आस्तियां, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए और उपबंधों के अध्यधीन इस द्वारा धारण और प्रयुक्त की जाएंगी।

बजट। 39. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रत्येक वर्ष ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो विहित किया जाए, प्राधिकरण की अनुमानित प्राप्तियों और अदायगियों को दर्शाते हुए आगामी अनुवर्ती वित्त वर्ष के संबंध में बजट प्रस्तुत करेगा। (2) प्राधिकरण उप-धारा (1) के अधीन प्रस्तुत बजट, ऐसे उपान्तरणों और पुनरीक्षणों के अध्यधीन, जैसा यह विनिश्चय करे, का अनुमोदन करेगा। (3) प्राधिकरण द्वारा यथा उपान्तरित और पुनरीक्षित बजट अधिप्रमाणित प्रतियों की ऐसी संख्या, जो राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित हो, सहित राज्य सरकार को अग्रेषित किया जाएगा और राज्य सरकार, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखवाएगी। (4) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उप-धारा (3) के अधीन राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखे जाने के बाद प्राधिकरण द्वारा यथा उपान्तरित अथवा पुनरीक्षित बजट प्राधिकरण की वैबसाइट पर डलवाएगा।

लेखे और लेखापरीक्षा।

40. (1) प्राधिकरण ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में उचित लेखे और अन्य सुसंगत रिकार्ड बनाए रखेगा और तुलन-पत्र सहित लेखों का वार्षिक विवरण तैयार करेगा। (2) प्राधिकरण के लेखे, महालेखाकार, हरियाणा से प्रतिवर्ष लेखापरीक्षा के अध्यधीन होंगे और ऐसी लेखापरीक्षा से संबंधित उपगत कोई खर्च प्राधिकरण द्वारा महालेखाकार, हरियाणा को भुगतानयोग्य होगा।

(3) प्राधिकरण के लेखों की लेखापरीक्षा के संबंध में महालेखाकार, हरियाणा और उन द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को ऐसी लेखापरीक्षा के संबंध में समान अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जैसे महालेखाकार, हरियाणा को सरकारी लेखों की लेखापरीक्षा के संबंध में हैं और विशिष्टतया, पुस्तकें, लेखों, सम्बन्धित वॉउचरों और अन्य दस्तावेजों और पेपरों को प्रस्तुत करने की मांग और प्राधिकरण के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।

(4) महालेखाकार, हरियाणा या इस निमित्त उन द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथा प्रमाणित प्राधिकरण के लेखों के साथ-साथ उस पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट और इस प्रकार की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई पर व्याख्यात्मक ज्ञापन राज्य सरकार को प्रतिवर्ष भेजा जाएगा और राज्य सरकार उसकी प्रति राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखवाएगी।

(5) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपधारा (4) के अधीन राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखने के बाद प्राधिकरण के लेखों के साथ-साथ लेखापरीक्षा रिपोर्ट और व्याख्यात्मक ज्ञापन प्राधिकरण की वैबसाइट पर डलवाएगा।

वार्षिक रिपोर्ट। 41. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रत्येक वर्ष के लिए उस वर्ष के दौरान किए गए क्रियाकलापों की रिपोर्ट तैयार करेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट ऐसे प्ररूप और ऐसी तिथि, जो विहित की जाए, को या से पूर्व भेजेगा और राज्य सरकार, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखवाएगी। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रिपोर्ट में अवसंरचना विकास, गतिशील प्रबन्धन और स्थायी पर्यावरण-सम्बन्धी प्रबन्धन पर वार्षिक कार्य योजना के लागूकरण की स्थिति पर व्याख्यात्मक ज्ञापन और लागूकरण में कमियां, यदि कोई हों, और ऐसी कमी के लिए कारण भी शामिल होंगे।

(3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपधारा (1) के अधीन राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रिपोर्ट रखने के बाद प्राधिकरण की वैबसाइट पर व्याख्यात्मक ज्ञापन सहित रिपोर्ट डलवाएगा।293 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) प्राधिकरण द्वारा प्राप्य प्रभार और उद्‌ग्रहण। 42. (1) प्राधिकरण, बाह्य विकास संकर्मों और हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) के अधिसूचित क्षेत्र में उक्त अधिनियम के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति के स्वामी द्वारा भुगतान किए गए या भुगतानयोग्य आनुपातिक विकास प्रभारों को प्राप्त करने के लिए पात्र होगाः परन्तु ऐसे आनुपातिक विकास प्रभार उक्त अधिनियम के अधीन निदेशक द्वारा संगृहीत किए जाएंगे और प्राधिकरण को अन्तरित किए जाएंगे। (2) प्राधिकरण, अधिसूचित क्षेत्र में हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3क की उपधारा (1) के अधीन निर्धारित तथा उक्त अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान किए गए स्वामी द्वारा भुगतान किए गए या भुगतानयोग्य अवसंरचना विकास प्रभार को प्राप्त करने के लिए पात्र होगा।

(3) राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्राधिकरण द्वारा उपयोग की जा रही हरियाणा राज्य की संचित निधि में जमा उपधारा (1) के अधीन बाह्‌य विकास संकर्मों तथा उपधारा (2) के अधीन अवसंरचना विकास प्रभारों के लिए आनुपातिक विकास प्रभारों की सम्पूर्ण आय, समय-समय पर, इस निमित्त विधि द्वारा हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा किए गए विनियोग के बाद प्राधिकरण को भुगतान की जाएगी।

(4) प्राधिकरण, हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) की धारा 7 की उपधारा (1) तथा (1क) के अधीन भुगतानयोग्य परिवर्तन प्रभार प्राप्त करेगा। (5) प्राधिकरण को नीचे विनिर्दिष्ट किस्म कीे प्रत्येक लिखत पर और ऐसी दर पर, जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा निदेश करें, जो ऐसी लिखतों पर नीचे विनिर्दिष्ट राशि पर दो प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, हरियाणा राज्य में तत्समय लागू भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का केन्द्रीय अधिनियम 2) के अधीन अधिरोपित शुल्क के अतिरिक्त अधिसूचित क्षेत्र की सीमाओं के भीतर स्थित अचल सम्पत्तियों के अन्तरण पर शुल्क उद्‌ग्रहण करने की शक्ति होगी :-

(i) विक्रय लिखत में अचल सम्पत्ति के विक्रय हेतु दर्शाई गई राशि या प्रतिफल का

मूल्य ;

(ii) अचल सम्पत्ति का विनिमय- सम्पत्ति का मूल्य या लिखत में दर्शाया अधिक मूल्य ;

(iii) अचल सम्पत्ति का उपहार - लिखत में दर्शाई गई सम्पत्ति का मूल्य ; (iv) अचल सम्पत्ति का कब्जा सहित रेहन - लिखत में दर्शाई गई रेहनदार द्वारा प्राप्त

राशि ;

(v) अचल सम्पत्ति का शाश्वतिक पट्‌टा - लिखत में दर्शाई गई किराए की पूर्ण राशि या मूल्य, जो पट्‌टे के प्रथम पचास वर्षों में भुगतान या परिदत्त की जाएगी, के एक बटा छह के बराबर राशि :

परन्तु भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) के अधीन रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार द्वारा दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के समय पर उक्त शुल्क का संग्रहण किया जाएगा और प्राधिकरण को भुगतान किया जाएगा।

(6) प्राधिकरण, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, अधिसूचित क्षेत्र में शराब के विक्रय और उपभोग पर ऐसी दरों, जो अधिसूचित की जाएं, पर प्रभार उद्‌ग्रहण कर सकती है :

परन्तु ऐसा प्रभार हरियाणा आबकारी अधिनियम, 1914 (1914 का पंजाब अधिनियम 1) के अधीन आबकारी आयुक्त द्वारा संगृहीत किया जाएगा और प्राधिकरण को अन्तरित किया जाएगा।

(7) प्राधिकरण, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, अधिसूचित क्षेत्र में मोटर यानों के किसी प्रवर्ग पर, ऐसी दर पर, जो अधिसूचित की जाए, प्रभार उद्‌गृहीत कर सकती है।

प्राधिकरण का सम्पत्ति पर उपकर प्राप्त करना। 43. (1) राज्य सरकार, प्राधिकरण की सिफारिश पर अधिसूचना द्वारा, अधिसूचित क्षेत्र या उसके किसी भाग में सम्पत्ति, भूमियों और भवनों पर ऐसी दर, जो समय-समय पर अवधारित की जाए, पर उपकर उद्‌ग्रहण कर सकती है : परन्तु विशेष रूप से अवसंरचना विकास योजना या नगरीय पर्यावरण के स्थायी प्रबन्धन के लागूकरण के प्रयोजनों हेतु और अन्य प्रयोजन के लिए नहीं, राज्य सरकार से भिन्न स्रोतों से प्राधिकरण द्वारा केवल ब्याज के भुगतान और उधार लिए गए ऋणों, बन्ध-पत्रों या डिबंचरों के पुनर्भुगतान के प्रयोजन के लिए उपकर उद्‌गृहीत किया जाएगा :

294 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

परन्तु यह और कि यदि प्रथम परन्तुक के अधीन अनुज्ञेय ऐसी धन राशियों के भुगतान के बाद शेष उपकर के कारण कोई अधिशेष रह जाता है, तो ऐसा अधिशेष, ऐसी रीति, जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, में वापस या समायोजित किया जाएगा।

(2) उपकर विभिन्न क्षेत्रों और सम्पत्तियों के विभिन्न वर्गों के लिए विभिन्न दरों पर उद्‌गृहीत किया जा सकता है।

(3) उपकर, स्थानीय प्राधिकरण, जिसके क्षेत्र में सम्पत्तियां स्थित हैं, द्वारा संगृहीत किया जाएगा मानो उपकर ऐसे स्थानीय प्राधिकरण को शासित करने वाली विधि के अधीन इसके द्वारा उद्‌गृहीत किए गए सम्पत्ति कर थे और पहले हरियाणा राज्य की संचित निधि में जमा करवाए जाएंगे।

(4) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्राधिकरण द्वारा उपयोग की जा रही हरियाणा राज्य की संचित निधि में जमा उपकर की सम्पूर्ण आय, समय-समय पर, राज्य विधानमण्डल द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए विनियोग के बाद, प्राधिकरण को भुगतान करेगी।

उपभोक्ता प्रभारों को उद्‌ग्रहण करने की शक्ति।

44. (1) प्राधिकरण, इसके प्राधिकार के अधीन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस द्वारा किसी अवसंरचना विकास कार्य या उपलब्ध करवाई गई या अनुरक्षित नगरीय सुख-सुविधा पर किसी खर्च की पूर्णतः या भागतः वसूलियों के प्रयोजनों हेतु, ऐसे अवसंरचना विकास कार्य या नगरीय सुख-सुविधा के उपभोक्ताओं से प्रभार उद्‌ग्रहण कर सकता है और संगृहण कर सकता है।

(2) प्रत्येक अवसंरचना विकास कार्य या नगरीय सुख-सुविधा के लिए उपभोक्ता प्रभार ऐसा होगा, जो प्राधिकरण द्वारा अवधारित किया जाए :

परन्तु प्राधिकरण, प्राधिकरण की वैबसाइट पर उपभोक्ता प्रभार को प्रकाशित करने की तिथि से कम से कम सात दिन की अवधि के बाद आने वाली तिथि से उपभोक्ता प्रभार संगृहण करने के लिए पात्र होगा।

(3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी, किसी व्यक्ति, कम्पनी, बोर्ड या किसी अन्य अभिकरण को, ऐसे निबन्धन तथा शर्त, जो प्राधिकरण के पूर्व अनुमोदन से मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा अवधारित की जाएं, पर उपभोक्ता प्रभार संग्रहण करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है अथवा सौंप सकता है।

बकाया धनराशि की वसूली का ढंग।

45. बाह्य विकास प्रभारों या अन्य प्रभारों या भूमियों, संनिर्माणों या अन्य सम्पत्तियों, चल या अचल या किराए और लाभों के कारण से प्राधिकरण को प्राप्त किसी धनराशि की वसूली निम्नानुसार की जा सकती है, अर्थात्‌ :-

(i) मुख्य कार्यकारी अधिकारी या इस सम्बन्ध में उस द्वारा सम्यक्‌ रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा कलक्टर को भेजी गई बकाया राशि के प्रमाण-पत्र पर भू-राजस्व के बकायों के रूप में ; या

(ii) किसी व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण, जिसकी तरफ प्राधिकरण की धन राशि बकाया है, के बैंक खाता के नियन्त्रक बैंक को बकाया धन राशि की सीमा तक ऐसे खाता के स्थिरीकरण हेतु निदेश करके ; या

(iii) हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3 की उपधारा (3) के खण्ड (क) के अधीन प्रस्तुत बैंक ग्रारंटी का प्रतिसंहरण करके :

परन्तु प्राधिकरण, वसूली के लिए खण्ड (i), खण्ड (ii) या खण्ड (iii) में विनिर्दिष्ट तीन ढंगों में से कोई एक ढंग को प्रारम्भ या जारी करेगा : परन्तु यह और कि जहां हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 3 की उपधारा (3) के खण्ड (क) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति वाले किसी व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण की तरफ बाह्य विकास प्रभारों के कारण धनराशि बकाया है, तो मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधिकारिता रखने वाले उप-रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) की धारा 71 के अधीन उपनिवेश, जिसके लिए ऐसी अनुज्ञप्ति प्रदान की गई थी, में अवस्थित किसी अचल सम्पत्ति के विक्रय, विनिमय, उपहार, रेहन या पट्‌टे के लिए किसी दस्तावेज को रजिस्टर करने से इनकार करने के लिए लिखेगा : परन्तु यह और कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी या प्राधिकरण का ऐसा अधिकारी, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्राधिकृत किया जाए, यदि खण्ड (ii) के ढंग के अधीन वसूली प्रारम्भ की गई है, तो व्यक्ति, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण, जिसकी तरफ धन राशि बकाया है, को ऐसी तिथि, जिसको बैंक को निर्देश दिया गया है, से तीन दिन के भीतर सुनवाई का अवसर उपलब्ध करवाएगा : परन्तु यह और कि व्यतिक्रमी, तत्समय लागू किसी विधि के अधीन ऐसे व्यतिक्रम के लिए आपराधिक कार्रवाई सहित कार्रवाई के लिए दायी होगा।295 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) प्राधिकरण में हरियाणा नगरीय विकास प्राधिकरण की सम्पत्ति का अन्तरण। 46. (1) राज्य सरकार, मुख्य प्रशासक, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सिफारिशों पर, इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन मास की अवधि के भीतर अधिसूचना द्वारा, प्राधिकरण को इसमें, इसके बाद, उपबन्धित रीति में, सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों के अन्तरण का प्रबन्ध करते हुए अन्तरण स्कीम प्रकाशित करेगी। (2) जहां मुख्य प्रशासक, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बीच मतभेद है, तो राज्य सरकार ऐसा निर्णय लेगी, जो वह ठीक समझे और ऐसा निर्णय अन्तिम होगा और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और प्राधिकरण पर बाध्य होगा।

(3) हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में निहित कोई सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकार और दायित्व, जहां तक वे इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा प्रयोग की जाने वाली किन्हीं शक्तियों अथवा निर्वहन किए जाने वाले किन्हीं कृत्यों से सम्बन्धित हैं, तो ऐसे निबन्धन तथा शर्त, जो राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, पर इस प्रकार प्रकाशित अन्तरण स्कीम के अनुसार प्राधिकरण में राज्य सरकार द्वारा पुनः निहित किए जाएंगे।

(4) इस धारा में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां,-

(ंक) अन्तरण स्कीम में किसी व्यक्ति से किसी सम्पत्ति या अधिकारों का अन्तरण अथवा की वचनबद्धता हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्णतया स्वामित्वाधीन नहीं है, शामिल है, तो स्कीम, केवल हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को प्राधिकरण द्वारा भुगतान किए जाने वाले उचित मूल्य के लिए अन्तरण को प्रभाव देगी ;

(ख) किसी किस्म का संव्यवहार, अन्तरण स्कीम के अनुसरण में प्रभावित होता है, तो यह तृतीय पक्षकारों सहित सभी व्यक्तियों पर बाध्य होगा और यद्यपि ऐसे व्यक्तियों या तृतीय पक्षकारों ने इसकी सहमति नहीं दी हो।

(5) इस धारा के अधीन अन्तरण स्कीम में,-

(क) अन्तरण की जाने वाली सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों को

परिभाषित किया जा सकता है- (i) प्रश्नगत सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों को विनिर्दिष्ट

या वर्णित करते हुए ; या

(ii) अन्तरक की वचनबद्धता के वर्णित भाग में समाविष्ट सभी सम्पत्ति, सम्पत्ति

में हित, अधिकारों और दायित्वों को निर्दिष्ट करते हुए ; या

(iii) भागतः एकतरफा और भागतः अन्य ;

(ख) उपबन्ध कर सकती है कि स्कीम में नियत या वर्णित किन्हीं अधिकारों या दायित्वों

को अन्तरक या अन्तरिती द्वारा या के विरूद्ध लागू होंगे ;

(ग) अन्तरक पर किसी अन्य पश्चात्‌वर्ती अन्तरिती से ऐसा लिखत करार या के पक्ष में ऐसी अन्य लिखत निष्पादित करने के लिए बाध्यता अधिरोपित कर सकती है, जो स्कीम में नियत की जाए ;

(घ) अन्तरण के लिए भौतिक और डिजिटल रिकार्ड उपबन्धित कर सकती है ; (ङ) अन्तरिती के कृत्य और कर्तव्यों को वर्णित कर सकती है ;

(च) ऐसे अनुपूरक, आनुषंगिक और परिणामिक उपबन्ध कर सकती है, जो आदेश को

प्रभाव देने की शर्त के उपबन्ध सहित अन्तरक समुचित समझे ; तथा

(छ) उपबन्ध कर सकती है कि अन्तरण नियत अवधि के लिए अनन्तिम होगा।

(6) अन्तरण स्कीम के प्रभावी होने से पूर्व, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा, से या के लिए उपगत सभी ऋण और बाध्यताएं, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए सभी मामले और बातें, सुसंगत अन्तरण स्कीम में विनिर्दिष्ट सीमा तक, प्राधिकरण द्वारा उपगत, प्राधिकरण से की गई समझी जाएंगी और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा या के विरूद्ध संस्थित किए गए सभी वाद या अन्य विधिक कार्यवाहियां, प्राधिकरण द्वारा या के विरूद्ध जारी या संस्थित रहेंगी।

(7) हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का प्रभार समाप्त हो जाएगा और प्रभावी तिथि को या के बाद किए गए अन्तरणों के संबंध में कृत्यों और कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा।296 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) 47. (1) यथासाध्य शीघ्रता से और इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन मास की अवधि के भीतर, राज्य सरकार, प्रबन्ध निदेशक, हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम और प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सिफारिशों पर और अधिसूचना द्वारा, इसमें, इसके बाद, उपबन्धित रीति में, प्राधिकरण को सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों के अन्तरण का उपबन्ध करते हुए अन्तरण स्कीम प्रकाशित करेगी।

प्राधिकरण में हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम की सम्पत्ति का अन्तरण।

(2) जहां प्रबन्ध निदेशक, हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम और प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बीच मतभेद है, तो राज्य सरकार ऐसा निर्णय करेगी, जो वह ठीक समझे और ऐसा निर्णय अन्तिम होगा और हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम और प्राधिकरण पर बाध्य होगा। (3) हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम में निहित कोई सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकार और दायित्व, जहां तक वे इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा प्रयोज्य किन्हीं शक्तियों अथवा निर्वहन किए जाने वाले किन्हीं कृत्यों से सम्बन्धित हैं, तो ऐसे निबन्धन तथा शर्त, जो राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित की जाएं, पर इस प्रकार प्रकाशित अन्तरण स्कीम के अनुसार प्राधिकरण में राज्य सरकार द्वारा पुनः निहित किए जाएंगे। (4) इस धारा में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां,-

(ंक) अन्तरण स्कीम में किसी व्यक्ति से किसी सम्पत्ति या अधिकारों का अन्तरण अथवा की वचनबद्धता हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम द्वारा पूर्णतया स्वामित्वाधीन नहीं है, शामिल है, तो स्कीम, केवल हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम को प्राधिकरण द्वारा भुगतान किए जाने वाले उचित मूल्य के लिए अन्तरण को प्रभाव देगी ;

(ख) किसी किस्म का संव्यवहार, अन्तरण स्कीम के अनुसरण में प्रभावित होता है, तो यह तृतीय पक्षकारों सहित सभी व्यक्तियों पर बाध्य होगा और यद्यपि ऐसे व्यक्तियों या तृतीय पक्षकारों ने इसकी सहमति नहीं दी हो।

(5) इस धारा के अधीन अन्तरण स्कीम मेें,-

(क) अन्तरण की जाने वाली सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों को

परिभाषित किया जा सकता है- (i) प्रश्नगत सम्पत्ति, सम्पत्ति में हित, अधिकारों और दायित्वों को विनिर्दिष्ट या

वर्णित करते हुए ; या

(ii) अन्तरक की वचनबद्धता में वर्णित भाग में समाविष्ट सभी सम्पत्ति, सम्पत्ति में

हित, अधिकारों और दायित्वों को निर्दिष्ट करते हुए ; या

(iii) भागतः एकतरफा और भागतः अन्य ;

(ख) उपबन्ध कर सकती है कि स्कीम में नियत या वर्णित किन्हीं अधिकारों या दायित्वों

को अन्तरक या अन्तरिती द्वारा या के विरूद्ध लागू होंगे ;

(ग) अन्तरक पर किसी अन्य पश्चातवर्ती अन्तरिती से ऐसा लिखत करार या के पक्ष में ऐसी अन्य लिखत निष्पादित करने के लिए बाध्यता अधिरोपित कर सकती है, जो स्कीम में नियत की जाए ;

(घ) अन्तरण के लिए डिजिटल रिकार्ड उपबन्धित कर सकती है ; (ङ) अन्तरिती के कृत्य और कर्तव्यों को वर्णित कर सकती है ; (च) ऐसे अनुपूरक, आनुषंगिक और परिणामिक उपबन्ध कर सकती है, जो आदेश को

प्रभाव देने की शर्त के उपबन्ध सहित अन्तरक समुचित समझे ; तथा (छ) उपबन्ध कर सकती है कि अन्तरण नियत अवधि के लिए अनन्तिम होगा। (6) अन्तरण स्कीम के प्रभावी होने से पूर्व, हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम द्वारा, से या के लिए उपगत सभी ऋण बाध्यताएं, की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए सभी मामले और बातें, सुसंगत अन्तरण स्कीम में विनिर्दिष्ट सीमा तक, प्राधिकरण द्वारा उपगत, प्राधिकरण से की गई समझी जाएंगी और हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम द्वारा या के विरूद्ध संस्थित किए गए सभी वाद या अन्य विधिक कार्यवाहियां, प्राधिकरण द्वारा या के विरूद्ध जारी या संस्थित रहेंगी। (7) हरियाणा राज्य औद्योगिक तथा अवसंरचना विकास निगम का प्रभार समाप्त हो जाएगा और प्रभावी तिथि को या के बाद, किए गए अन्तरणों के संबंध में कृत्यों और कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा।297 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) प्राधिकरण के निष्पादन का पुनर्विलोकन। 48. (1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर, उक्त अवधि में प्राधिकरण के निष्पादन के मूल्याकंन और पुनर्विलोकन के लिए ऐसी रीति में, जो विहित किए जाएं, ऐसे सदस्यों से मिलकर बनने वाली समिति का गठन करेगी।

(2) समिति राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और नगरीय शासन, अवसंरचना विकास, पर्यावरण, प्रबंधन, लोक प्रशासन के क्षेत्रों में प्रतिष्ठा रखने वाले विशेषज्ञों को सम्मिलित करेगी।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट समिति, प्राधिकरण के कार्यों का मूल्याकंन और पुनर्विलोकन करेगी और राज्य सरकार को निम्नलिखित के बारे में सिफारिशें करेगी-

(क) इस अधिनियम में कथित प्राधिकरण की प्राप्तियों और उद्‌देश्यों के संपादन के परिमाण जो अधिसूचित क्षेत्र के अवसंरचना, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की अवस्था द्वारा प्रमाणिकता ;

(ख) अधिसूचित क्षेत्र में अवसंरचना विकास, नगरीय पर्यावरण और सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास के स्थायी प्रबन्धन में शामिल प्राधिकरण, स्थानीय प्राधिकरण, पंचकूला पुलिस, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण तथा राज्य सरकार के ऐसे अन्य अभिकरणों के बीच समन्वयन मेकनिज्म की प्रभाविकता ; (ग) सुधारक उपाय, यदि कोई हाें, सहित प्राधिकरण का भावी दृष्टिकोण ;

(घ) ऐसे अन्य मामले, जो राज्य सरकार द्वारा समिति को निर्दिष्ट किए जाएं।

(4) राज्य सरकार, उपधारा (1) के अधीन गठित समिति की रिपोर्ट समिति की प्रत्येक सिफारिश के संबंध में उस पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई पर व्याख्यात्मक ज्ञापन सहित राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखवाएगी।

49. इस अधिनियम द्वारा या के अधीन गठित प्राधिकरण या किसी समिति का कोई कार्य या कार्यवाहियां, मात्र इसके सदस्यों में किसी रिक्ति तथा रिक्तियों के विद्यमान होने के कारण अविधिमान्य नहीं हाेंगी।

रिक्तियों द्वारा कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना।

विवरणी और सूचना। 50. प्राधिकरण, इसके क्रियाकलापों के संबंध में ऐसी विवरणियां या अन्य सूचनाएं, जो राज्य सरकार को, समय-समय पर, अपेक्षित हों, ऐसी अवधि, जो विनिर्दिष्ट की जाए, के भीतर राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।

प्राधिकरण की स्थानीय प्राधिकरण से रिपोर्ट, विवरणी अथवा सूचना मांगने की शक्ति। 51. प्राधिकरण को इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में प्रयोज्य शक्तियों के संदर्भ में केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियन्त्राधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी अन्य प्राधिकरण, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण से किसी अवसंरचना विकास कार्य, नगरीय सुख-सुविधा से सम्बन्धित कोई विवरणी, रिपोर्ट, सांख्यिकी या अन्य सूचना मांगने की शक्ति होगी, जो इस अधिनियम या किसी अन्य राज्य विधि के अधीन इसकी शक्तियों का प्रयोग करने और इसके कर्तव्यों को करने में अपेक्षित हो और ऐसा स्थानीय प्राधिकरण या ऐसा अन्य प्राधिकरण, बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण ऐसी सूचना प्रस्तुत करने के लिए बाध्य होगा।

कतिपय मामलों में राज्य सरकार की शक्ति। 52. (1) प्राधिकरण ऐसे निर्देशों को कार्यान्वित करेगा, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर, इसे जारी किए जाएं। (2) यदि इस अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा इसकी शक्तियों का प्रयोग करने और इसके कृत्यों के पालन करने में या के संबंध में, अधिसूचित क्षेत्र में प्राधिकरण और स्थानीय प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण या राज्य सरकार के किसी बोर्ड, कम्पनी या अन्य अभिकरण के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो ऐसा विवाद, राज्य सरकार को भेजा जाएगा और किसी ऐसे विवाद पर राज्य सरकार का निर्णय अन्तिम होगा।

(3) राज्य सरकार, किसी भी समय पर, या तो स्वप्रेरणा से या इस निमित्त इसे किए गए आवेदन पर, पारित किसी आदेश या जारी निर्देश की वैधता या औचित्य के बारे में स्वयं को सन्तुष्ट करने के प्रयोजन के लिए प्राधिकरण के किसी अधिकारी द्वारा निपटाए गए किसी मामले या पारित आदेश के अभिलेख मांग सकती है और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित या ऐसा निर्देश जारी कर सकती है, जैसा यह उचित समझे : परन्तु राज्य सरकार ऐसे व्यक्ति को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई आदेश पारित नहीं करेगी।298 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना।

53. हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) और हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) के उपबन्धों के अध्यधीन, किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात का इससे असंगत होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबन्धों का अध्यारोही प्रभाव होगा।

54. इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में ।

अन्य विधियों के लागूकरण का अवर्जन होना।

सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण।

55. इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं हो सकेगी।

56. इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन गठित प्राधिकरण या किसी समिति का प्रत्येक सदस्य और प्रत्येक अधिकारी और अन्य कर्मचारिवृन्द भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझा जाएगा।

सदस्यों और अधिकारियों का लोक सेवक होना।

नियम बनाने की शक्ति।

57. (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबन्ध किए जा सकते हैं, अर्थात्‌ :-

(क) भत्ते जो पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्य, धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन,

प्राधिकरण की बैठकों में उपस्थित होने के लिए प्राप्त करेंगे;

(ख) धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण की बैठक का समय, कारबार और

कारबार संव्यवहार करने के लिए प्रक्रिया के नियम;

(ग) रीति जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी धारा 7 की उपधारा (4) के अधीन प्राधिकरण

की बैठकों के अभिलेख रखेगा;

(घ) धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की

नियुक्ति की रीति और योग्यताएं;

(ङ) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारिवृन्दों को भुगतानयोग्य वेतन और भत्ते और सेवा के अन्य निबन्धन तथा शर्तें;

(च) अधिसूचित क्षेत्र के निवासी होते हुए, धारा 11 की उपधारा (2) के खण्ड (छ) के अधीन निवासी सलाहकार परिषद्‌ के लिए नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले व्यक्तियों की नियुक्ति की रीति तथा निबन्धन;

(छ) धारा 11 की उपधारा (5) के अधीन निवासी सलाहकार परिषद्‌ की बैठकें करने और

कारबार संव्यवहार के लिए प्रक्रिया;

(ज) भत्ते जो पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्य धारा 11 की उपधारा (6) के अधीन निवासी

सलाहकार परिषद्‌ की बैठकों में उपस्थित होने के लिए प्राप्त करेंगे;

(झ) धारा 16 की उपधारा (2) के खण्ड (झ) के अधीन प्राधिकरण की सहायता में प्ररूप

जिसमें पंचकूला पुलिस से कार्रवाई करने की अपेक्षा की जा सकती है;

(ञ) अन्तराल जिन पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन

अधिसूचित क्षेत्र के लिए अवसंरचना विकास योजना तैयार करेगा;

(ट) प्ररूप, जिसमें अधिकारिता रखने वाला समुचित स्थानीय प्राधिकरण धारा 26 के अधीन अधिसूचित क्षेत्र में किसी अप्राधिकृत विकास या अवरोधनों या अतिक्रमणों को हटाने के लिए निदेश दे सकता है;

(ठ) प्ररूप और रीति जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी धारा 26 के परन्तुक के अधीन अधिसूचित क्षेत्र में किसी अप्राधिकृत विकास या अवरोधन या अतिक्रमण को हटाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को निदेश देगा;

(ड) प्ररूप और समय जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी धारा 39 की उपधारा (1) के

अधीन बजट प्रस्तुत करेगा;

299 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA)

(ढ) प्ररूप, जिसमें प्राधिकरण धारा 40 की उपधारा (1) के अधीन उचित लेखे और अन्य सुसंगत अभिलेख रखेगा और तुलन-पत्र सहित लेखों की वार्षिक विवरणी तैयार करेगा;

(ण) प्ररूप और तिथि, जिसको या से पूर्व, मुख्य कार्यकारी अधिकारी धारा 41 की उपधारा (1) के अधीन उस वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों की रिपोर्ट तैयार करेगा और राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा;

(त) सदस्यों की संख्या, उनकी विशेषज्ञ राय और धारा 48 की उपधारा (1) के अधीन

समिति के गठन की रीति;

(थ) कोई अन्य मामला जो विहित किया जाना है या किया जा सकता है।

विनियम बनाने की शक्ति। 58. (1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन, प्राधिकरण, अपनी वैबसाइट पर प्रकाशन द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए विनियम बना सकता है। (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, निम्नलिखित सभी या किन्हीं मामलों के लिए ऐसे विनियमों का उपबन्ध कर सकता है, अर्थात्‌ :-

(क) धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन अस्थाई अमले की नियुक्ति की रीति, अवधि

और निबन्धन तथा शर्तें;

(ख) प्ररूप तथा रीति, जिसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्राधिकरण के अधिकारी और निवासी सलाहकार परिषद्‌ के सदस्य धारा 14 के अधीन उनकी नियुक्ति के बाद और उनके हित का विस्तार होने के बाद यथाशीघ्र प्रत्येक वर्ष घोषणा करेंगे; (ग) रीति जिसमें प्राधिकरण धारा 16 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) के अधीन भूमि का

क्रय, विनिमय, अन्तरण, धारण, पट्‌टा, प्रबन्ध और निपटान कर सकता है;

(घ) प्ररूप और रीति जिसमें धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन कोई बोर्ड, कम्पनी,

अभिकरण या व्यक्ति प्रस्ताव करता है;

(ङ) धारा 27 की उपधारा (6) के अधीन प्रोन्नति, सहयोग और सरलीकरण का

मेकनिज्म;

(च) किसी शक्ति का प्रयोग करने या किसी कृत्य का निर्वहन करने या किसी मामले, जो प्राधिकरण धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन समन्वयन समिति और स्थायी समिति को निर्दिष्ट करे, की मॉनिटरिंग या रिपोर्टिंग करने या किसी मामले पर मन्त्रणा देने के लिए उनके गठन के निबन्धन तथा शर्तें;

(छ) प्ररूप तथा रीति, जिसमें कोई सदस्य धारा 30 की उपधारा (2) के अधीन घोषणा

करेगा;

(ज) धारा 31 के अधीन विशेषज्ञों की फीस, पारिश्रमिक और नियुक्ति की अवधि;

(झ) निवेशों, जिनमें प्राधिकरण धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन इसकी निधियों के

किसी भाग का निवेश कर सकता है;

(ञ) रीति, जिसमें धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन उपकर के कारण अधिशेष को

वापस या समायोजित किया जाएगा;

(ट) कोई अन्य मामला जो विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाना है या किया जा

सकता है।

(3) प्राधिकरण, समय-समय पर, किसी विनियम को संशोधित या निरसित कर सकता है और प्रत्येक ऐसा विनियम, इसका संशोधन या निरसन, जैसी भी स्थिति हो, प्राधिकरण की वैबसाइट पर इसके प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगा।

कठिनाईयां दूर करने की शक्ति। 59. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभाव देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्‌असंगत ऐसे उपबंध कर सकती है, जो इसे कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हाेंः

परन्तु इस अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से दो वर्ष की समाप्ति के बाद, इस धारा के अधीन कोई भी आदेश नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, इसके किये जाने केे पश्चात्‌, यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के सम्मुख रखा जाएगा।300 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 22, 2021 (PAUS. 1, 1943 SAKA) 60. धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन जारी अधिसूचना, इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम, इसके जारी किए जाने या बनाए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

राज्य विधानमण्डल के सम्मुख अधिसूचना, नियमों और विनियमों को रखना।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9430—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 22 December 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2021-12-22.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2021/. Archive identifier in.gazette.haryana.2021-12-22.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2021.