भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 9 फरवरी, 2022
संख्या लैज. 5/2022.- दि हरियाणा मैन्इज्मॅन्ट ऑफ सिव़्इक अॅमेनिटिज ऐन्ड इन्फ्रॅस्ट्रॅक्चॅर डिफिशॅन्ट एअॅरिअॅज आउटसाइड म्यूनिसिपॅल एअॅरिआ (स्पेशॅल प्रॅविश्जॅनस) ऐक्ट, 2021 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 04 फरवरी, 2022 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 5
हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों से बाह्य क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा अवसंरचना का प्रबन्धन (विषेष उपबन्ध) अधिनियम, 2021 हरियाणा राज्य में नगरपालिका क्षेत्रों से बाह्य क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा अवसंरचना के लिए आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था करने हेतु तथा उससे संबंधित तथा उनसे आनुषंगिक मामलों के लिए विशेष उपबन्ध करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम।
परिभाषाएं। 1. यह अधिनियम हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों सेे बाह्य क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा अवसंरचना का प्रबन्धन (विषेष उपबन्ध) अधिनियम, 2021 कहा जा सकता है। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''घोषित क्षेत्र'' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा
अवसंरचना वाले क्षेत्र के रूप में घोषित कोई क्षेत्र ;
(ख) ''विकास अभिकरण'' से अभिप्राय है, ऐसा अभिकरण, जिसे सरकार, राजपत्र में अधिसूचना
द्वारा, अधिसूचित करे ;
(ग) ''निदेशक'' से अभिप्राय है, निदेशक, नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग, हरियाणा ; (घ) ''जिला स्तरीय संवीक्षा समिति'' से अभिप्राय है, धारा 4 के अधीन गठित कोई समिति ; (ङ) ''आवश्यक सेवाओं'' में शामिल हैं, जल आपूर्ति, मल निकास, सड़कें तथा स्ट्रीट लाइटें ; (च) ''सरकार'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार ; (छ) ''नगरपालिका क्षेत्र'' से अभिप्राय है, हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 (1973 का 24) या हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (1994 का 16), जैसी भी स्थिति हो, में यथा परिभाषित नगरपालिका क्षेत्र ;
(ज) ''सार्वजनिक भूमि'' से अभिप्राय है, ग्राम पंचायत या नगरपालिका के स्वामित्वाधीन भूमि सहित केन्द्रीय या राज्य सरकार, किसी केन्द्रीय या राज्य विधि के अधीन गठित या केन्द्रीय या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन बोर्डों या निगमों के स्वामित्वाधीन भूमि ; (झ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित ; (ञ) ''अप्राधिकृत निर्माण'' से अभिप्राय है, ऐसा निर्माण, जो हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8), हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41), हरियाणा नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम, 1952 (1953 का पंजाब अधिनियम 1) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबंधों के उल्लंघन में परिनिर्मित किया गया है; (ट) ''अप्राधिकृत विकास'' से अभिप्राय है, ऐसा क्षेत्र, जो हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8), हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41), हरियाणा नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम, 1952 (1953 का पंजाब अधिनियम 1) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबंधों के उल्लंघन में विकसित किया गया है; (ठ) ''अप्राधिकृत प्लाट'' से अभिप्राय है, ऐसा क्षेत्र, जो हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8) की धारा 7 के उपबन्धों के उल्लंघन में उप-विभाजित किया गया है।30 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 9, 2022 (MAGH. 20, 1943 SAKA) घोषित क्षेत्र। 3. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट मानकों के अनुसार निदेशक द्वारा की गई सिफारिशों पर विचार करने के बाद, नगरपालिका क्षेत्र से बाह्य किसी क्षेत्र को अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा अवसंरचना वाले क्षेत्र के रूप में घोषित कर सकती है। (2) तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि, इसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों, विनियमों या उपविधियों, किसी न्यायालय या किसी प्राधिकरण के किसी न्याय-निर्णय, डिक्री या आदेश में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, सरकार घोषित क्षेत्र में अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा अवसंरचना की समस्या से निपटने हेतु मानकों, पॉलिसी, दिशा-निर्देशों तथा साध्य रणनीतियों को अन्तिम रूप देने के लिए सभी संभव उपाय करेगी।
जिला स्तरीय संवीक्षा समिति।
4. सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सदस्यों की ऐसी संख्या, जो सरकार उचित समझे, से मिलकर बनने वाली जिला स्तरीय संवीक्षा समिति का गठन करेगी, जिसकी अध्यक्षता सम्बद्ध उपायुक्त द्वारा की जाएगी, जो सम्बद्ध मण्डल आयुक्त को धारा 3 के प्रयोजनों हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी। मण्डल आयुक्त अपनी सिफारिशें निदेशक को अग्रेषित करेगा।
कार्यवाहियाँ आस्थगित रखना।
5. ऐसे व्यक्तियों, जिन्होंने हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (1975 का 8), हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबंधों की उल्लंघना में प्राधिकर के बिना भूमि का उप-विभाजन किया है या अप्राधिकृत निर्माण का परिनिर्माण या पुनःपरिनिर्माण किया है या अप्राधिकृत विकास किया है, के विरूद्ध विधिक कार्रवाई प्रारम्भ करने के लिए घोषित क्षेत्र में निदेशक या इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व या अधिनियम की धारा 3 के अधीन इस प्रभाव की गई घोषणा, जैसी भी स्थिति हो, से पूर्व जारी सभी नोटिसों तथा पारित प्रत्यावर्तन आदेश, घोषित क्षेत्र में निलम्बित किए गए समझे जाएंगे तथा विधि के किसी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए तथा लम्बित मामलों के सिवाय, कोई भी दण्डात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नियमितीकरण। 6. तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, सम्बद्ध विकास अभिकरण, जिसके अधीन घोषित क्षेत्र आता है, ऐसे क्षेत्र में आवश्यक सेवाओं को उपलब्ध करवाने के लिए कार्य प्रारम्भ कर सकता है तथा आगे घोषित क्षेत्र में अवस्थित प्लाटों या निर्माणों या विकास क्षेत्र को विनिर्दिष्ट समय के भीतर फीस के भुगतान तथा निबंधनों तथा शर्तों, जो विहित की जाएं, को पूरा करने के अध्यधीन नियमित किया गया समझा जाएगा।
लाभ के लिए हकदारी।
7. कोई भी व्यक्ति तब तक किसी लाभ या राहत के दावे का हकदार नहीं होगा जब तक कि सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सभी निबंधन तथा शर्तें पूरी न की गई हों तथा अपेक्षित फीस, जो विहित की जाए, जमा न करवाई गई हो।
सरकार द्वारा नियन्त्रण।
8. निदेशक, इस अधिनियम के कुशल प्रशासन के लिए ऐसे निर्देशों का कार्यान्वयन करेगा, जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, उसे जारी किए जाएं।
निर्देश जारी करने की शक्ति।
9. निदेशक, सरकार के अनुमोदन से, समय-समय पर या धारा 8 के अधीन सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अधीन, ऐसे निर्देश जारी करेगा, जो इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक या समीचीन हों।
ढील देने की शक्ति।
10. यदि सरकार की राय है कि इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों या इस अधिनियम के अधीन जारी की गई अधिसूचना के किसी भाग के कार्यान्वयन में अनुचित कठिनाई हुई है या होती है या ऐसी परिस्थितियां विद्यमान है, जो इसे ऐसा करने के लिए समीचीन बनाती हैं, तो यह ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों, जो यह आदेश द्वारा अधिरोपित करे, के अध्यधीन इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबन्धों से व्यक्तियों के किसी वर्ग या क्षेत्र या भूमि के संबंध में ढील दे सकती है।
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।
11. (1) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई है या सद्भावपूर्वक किए जाने के लिए आशयित किसी बात के संबंध में किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं की जा सकेंगी।
(2) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई है या सद्भावपूर्वक किए जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई या सम्भावित किसी क्षति के संबंध में सरकार के विरूद्ध कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं हो सकेंगी।
अधिकारिता का वर्जन।
12. किसी भी सिविल न्यायालय को इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन आने वाले मामलों के संबंध में कोई वाद ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी।31 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 9, 2022 (MAGH. 20, 1943 SAKA) छूट। 13. इस अधिनियम की कोई भी बात उस क्षेत्र को लागू नहीं होगी-
(क) जो भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 1), भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 30), वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (1980 का केन्द्रीय अधिनियम 69), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (1986 का केन्द्रीय अधिनियम 29), रक्षा संकर्म अधिनियम, 1903 (1903 का केन्द्रीय अधिनियम 7), भारतीय विद्युत अधिनियम, 1910 (1910 का केन्द्रीय अधिनियम 9) या किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अधिसूचित किया गया है या आता है;
(ख) जिसमें सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण किया गया है;
(ग) जहां कोई औद्योगिक इकाई अवस्थित है;
(घ) जहां कोई वाणिज्यिक निर्माण, माल, मल्टीप्लेक्स, होटल या दावत खाना अवस्थित है; (ङ) जहां इस प्रकार का कोई निर्माण, जो विहित किया जाए, अवस्थित है ।
नियम बनाने की शक्ति। 14. सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा तथा पूर्व प्रकाशन के अध्यधीन, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9478—L.R.—H.G.P., Pkl.