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Haryana Gazette · Government of Haryana

THE HARYANA PREVENTION OF UNLAWFULL CONVERSION OF RELIGION ACT, 2022 (HARYANA ACT NO.16 OF 2022).

Published 08 June 2022

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
102-2022/Ext
Notification no.
Leg. No.16/2022
Identifier
in.gazette.haryana.2022-06-08.Extra-Ordinary_Leg-No-16-2022
Languages
English, Hindi
Published at
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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY

Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 102–2022/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 8 जून, 2022

(ज्येष्ठ 18, 1944 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

1. हरियाणा विधिविरूद्ध धर्म परिवर्तन निवारण अधिनियम, 2022

153—157 (2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 16)

2. मानव अंग प्रतिरोपण (हरियाणा विधिमान्यकरण) अधिनियम, 2022

159 (2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 20)

3. हरियाणा यांत्रिक यान (पथकर-उद्‌ग्रहण) संषोधन अधिनियम, 2022

161 (2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 22)

(केवल हिन्दी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं।

भाग III प्रत्यायोजित विधान

अधिसूचना संख्या का०आ० 57/ह०अ० 11/1994/धा० 58 तथा 59/2022, 617—618 दिनांक 08 जून, 2022 - हरियाणा सरकार, विकास तथा पंचायत विभाग, अधिसूचना संख्या का०आ० 20/ह०अ० 11/1994/धा० 58 तथा 59/2022, दिनांक 15 अप्रैल, 2021 में संशोधन करने बारे।

भाग IV षुद्धि-पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं।

(lvi)153 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 8, 2022 (JYST. 18, 1944 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार विधि तथा विधायी विभाग अधिसूचना दिनांक 8 जून, 2022

संख्या लैज.16/2022.— दि हरियाणा प्रिवेन्शॅन आफ अॅन्‌लॉफुल कन्‌वर्शन आफ रिलिजन ऐक्ट, 2022 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 02 जून, 2022 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 16

हरियाणा विधिविरूद्ध धर्म परिवर्तन निवारण अधिनियम, 2022 मिथ्या निरूपण, बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या किन्हीं कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह द्वारा या विवाह के लिए एक धर्म से दूसरे धर्म में विधिविरूद्ध परिवर्तन के निवारण के लिए तथा इससे संबंधित या इसके आनुषंगिक मामलों हेतु उपबन्ध करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के तिहारवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ।

परिभाषाएं। अधिनियमित हो :- 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा विधिविरूद्ध धर्म परिवर्तन निवारण अधिनियम, 2022, कहा जा सकता है। (2) यह ऐसी तिथि से लागू होगा, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे। 2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''प्रलोभन'' से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल है, किसी उपहार या परितोषण या भौतिक लाभ के रूप में किसी प्रलोभन का प्रस्ताव, चाहे नकद या वस्तु या रोजगार के रूप में, किसी धार्मिक निकाय द्वारा चलाये जा रहे विद्यालय में शिक्षा, बेहतर जीवन शैली, दैवीय कृृपा या उसका वायदा देने का कोई कार्य ;

(ख) ''प्रपीड़न'' से अभिप्राय है, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के अधीन दण्डनीय कोई कार्य करना या कार्य करने की धमकी देना या किसी व्यक्ति का अन्य धर्म में परिवर्तन करवाने के आशय से किसी व्यक्ति, जो भी हो, के पक्षपात के लिए किसी सम्पत्ति का विधिविरूद्ध निरूद्ध करना या निरूद्ध करने की धमकी देना ;

(ग) ''धर्म परिवर्तन'' से अभिप्राय है, एक धर्म का त्याग करना तथा दूसरे धर्म को अपनाना, किन्तु इसमें किसी भी व्यक्ति के माता-पिता या दादा-दादी में से किसी एक या दोनों द्वारा माने गए या माने जा रहे धर्म में किसी व्यक्ति की वापसी शामिल नहीं है ;

(घ) ''डिजिटल ढंग'' से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल है,-

(I) सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट, जो व्यैक्तिकों को,-

(i) परिबद्ध प्रणाली के भीतर सार्वजनिक या अर्ध सार्वजनिक प्रोफाइल

का निर्माण करने की अनुमति देती है;

(ii) अन्य उपयोगकर्ताओं, जिनके साथ वे कनैक्शन साझा करते हैं, की

सूची स्पष्ट करने की अनुमति देती है; तथा

(iii) प्रणाली के भीतर उनके तथा दूसरों द्वारा बनाये गए कनैक्शनों की

सूची देखने और अनुप्रस्थ करने की अनुमति देती है; (II) सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन, जिसका उद्‌देश्य उन लोगों के ऑनलाइन समुदायों का निर्माण करना, जो अपनी रूचियों और गतिविधियों को साझा करते हैं, या जो दूसरों की रूचियों और गतिविधियों की छान-बिन में रूचि रखते हैं और उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करने के लिए कई प्रकार के तरीके प्रदान करती है, जैसे ई-मेल और इंस्टेंट मैसेजिंग ;

154 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 8, 2022 (JYST. 18, 1944 SAKA)

(ङ) ''बल'' से अभिप्राय है, किसी अन्य व्यक्ति को उसकी शख्सियत, या सम्पत्ति या किसी अन्य की शख्सियत या सम्पत्ति को क्षति पहुंचाना या पहुंचाने की धमकी देना, जिसमें वह व्यक्ति इस आशय की दिलचस्पी रखता है कि ऐसा व्यक्ति वह कार्य करेगा, जो अपराधी द्वारा उससे इस प्रकार करवाने का उद्‌देश्य है ;

(च) ''कपटपूर्ण'' में शामिल है किसी व्यक्ति को कोई ऐसा कार्य करने के लिए या नहीं करने के लिए किसी प्रकार से बहकाना या प्रेरित करना, जो उसके द्वारा किया गया या नहीं किया गया होता, यदि उसे इस प्रकार बहकाया या प्रेरित नहीं किया गया होता ;

(छ) ''सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ज) ''अवयस्क'' का वही अर्थ होगा, जो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (2007 का

केन्द्रीय अधिनियम 6) की धारा 2 के खण्ड (च) में इसे दिया गया है;

(झ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित; (ञ) ''धर्म'' से अभिप्राय है, भारत में या इसके किसी भाग में प्रचलित और किसी विधि के अधीन परिभाषित विश्वास, आस्था, पूजा या जीवन शैली की कोई संगठित पद्धति और तत्समय लागू कोई प्रथा;

(ट) ''धर्म पुजारी'' से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल है, किसी धर्म को मानने वाला कोई व्यक्ति, जो अनुष्ठान करता है और इसमें किसी भी धर्म का शुद्धिकरण संस्कार या धर्म परिवर्तन समारोह तथा किसी भी नाम से ज्ञात हो, जैसे पुरोहित, पंडित, काजी, मुल्ला, मौलवी, पादरी, पल्ली-पुरोहित या नन;

(ठ) "विषेष अधिकारी" से अभिप्राय है, कोई अधिकारी, जो निरीक्षक की पदवी से नीचे का न हो, जिसे सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों हेतु, विनिर्दिष्ट क्षेत्र के लिए आदेष द्वारा नियुक्त करे;

(ड) "अनुचित प्रभाव" में शामिल है किसी व्यक्ति द्वारा उत्प्रेरणा, जो किसी दूसरे व्यक्ति के साथ उसके वैष्वासिक सम्बन्ध या वास्तविक या दृष्यमान प्राधिकार के कारण, अपने ऐसे पद का प्रयोग करते हुए कोई अनुचित लाभ प्राप्त करने हेतु किसी अन्य की इच्छा को अधिषास्ति करने की स्थिति में है।

(2) इस अधिनियम में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम 2), भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का केन्द्रीय अधिनियम 21) में परिभाषित शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो उस अधिनियम में क्रमशः उन्हें दिए गए हैं।

धर्म परिवर्तन। 3. कोई भी व्यक्ति-

(क) (i) मिथ्या निरूपण द्वारा, बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या

डिजिटल ढंग के उपयोग सहित किन्हीं कपटपूर्ण साधनों द्वारा; या

(ii) विवाह द्वारा या विवाह के लिए, या तो प्रत्यक्षतः या अन्यथा से किसी अन्य व्यक्ति का एक धर्म से अन्य धर्म में परिवर्तन नहीं करवायेगा या परिवर्तन करवाने का प्रयास नहीं करेगाः

परन्तु खण्ड (ii) में दी गई कोई भी बात, इस अधिनियम की धारा 9 के उपबन्धों के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सम्यक्‌ रूप से प्रमाणित इच्छापूर्वक धर्म परिवर्तन को लागू नहीं होगी;

(ख) डिजिटल ढंग सहित किन्हीं साधनों के माध्यम से ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए नहीं उकसाएगा या षड़यन्त्र नहीं करेगा;

(ग) विवाह के आषय से अपना धर्म नहीं छिपाएगा।

अपराध का संज्ञान।

4. कोई भी न्यायालय, पुलिस रिपोर्ट पर या अपराध से व्यथित किसी व्यक्ति द्वारा या उसके माता-पिता या सहोदर भाई या बहनों द्वारा या सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा या न्यायालय की इजाजत से किसी व्यक्ति, जो रक्त, विवाह, दत्तकग्रहण, अभिभावकता या अभिरक्षकता, जैसी भी स्थिति हो, से संबंधित है, द्वारा की गई षिकायत के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।

5. धारा 3 के खण्ड (ग) की उल्लंघना में अनुष्ठापित कोई विवाह, अकृत और शून्य होगा। छुपाकर विवाह करना।155 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 8, 2022 (JYST. 18, 1944 SAKA) न्यायालय की अधिकारिता। 6. धारा 5 के अधीन किसी विवाह को अकृत और शून्य घोषित करवाने के लिए प्रत्येक याचिका, विवाह से व्यथित किसी पक्षकार द्वारा कुटुम्ब न्यायालय या जहां कोई कुटुम्ब न्यायालय स्थापित नहीं है, तो स्थानीय सीमाओं के भीतर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय,- (क) जहां विवाह अनुष्ठापित किया गया था; या (ख) याचिका की प्रस्तुति के समय पर प्रतिवादी, निवास करता है; या (ग) विवाह के दोनों पक्षकार अंतिम बार एक साथ रहे हैं,

के सम्मुख प्रस्तुत की जाएगी।

उत्तराधिकार का अधिकार। 7. धारा 3 की उल्लंघना में अनुष्ठापित विवाह से जन्मे किसी बालक को धर्मज समझा जाएगा तथा ऐसे बालक का सम्पाि पर उत्तराधिकार,-

(i) पिता/ पिता के पूर्वजों की सम्पाि की दषा में, पिता; तथा (ii) माता/ माता के पूर्वजों की सम्पाि की दषा में, माता,

के उत्तराधिकार को शासित करने वाली विधि के अनुसार विनियमित किया जाएगा।

भरण-पोषण का अधिकार। 8. न्यायालय, इस अधिनियम की धारा 6 के अधीन कार्यवाही में किसी पक्षकार द्वारा दायर किए गए आवेदन पर तथा इस प्रकार अकृत और शून्य घोषित विवाह से जन्मे अवयस्क बालक को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, भरण-पोषण तथा कार्यवाहियों का व्यय प्रदान कर सकता है।

धर्म परिवर्तन से पूर्व घोषणा। 9. (1) कोई व्यक्ति, जो धर्म परिवर्तन करने का आषय रखता है, अपने स्वयं की मुक्त इच्छा तथा किसी बल, प्रपीड़न, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन के बिना धर्म परिवर्तन करने हेतु अपना आषय कथित करते हुए जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में ऐसे धर्म परिवर्तन से पूर्व उस प्रभाव की घोषणा प्रस्तुत करेगा। (2) कोई धार्मिक पुरोहित तथा/या कोई व्यक्ति, जो धर्म परिवर्तन का आयोजन करने का आषय रखता है, तो उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट, जहां ऐसे धर्म परिवर्तन का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है, को ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में पूर्व नोटिस देगा। (3) उपधारा (1) तथा (2) के अधीन सूचना प्राप्त होने पर जिला मजिस्ट्रेट, ऐसे पूर्व नोटिस या घोषणा की पावती देगा तथा ऐसे नोटिस या घोषणा की प्रति ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में अपने कार्यालय के सहजदृष्य स्थान या नोटिस बोर्ड पर चस्पाएगा। (4) कोई भी व्यक्ति, उपधारा (3) के अधीन नोटिस बोर्ड पर चस्पाए गए नोटिस की तिथि से तीस दिन की समाप्ति से पूर्व, इस आधार पर कि यह धारा 3 के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, ऐसे आषयित धर्म परिवर्तन के लिए लिखित आक्षेप दायर कर सकता है। (5) यदि नियत समय के भीतर उपधारा (4) के अधीन जिला मजिस्ट्रेट कोई आक्षेप प्राप्त करता है, तो वह ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, सत्यापन करेगा तथा जांच करेगा। (6) यदि जिला मजिस्ट्रेट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि आषयित धर्म परिर्वतन धारा 3 की उल्लंघना है, तो वह उचित आदेष पारित करते हुए आषयित धर्म परिवर्तन को अस्वीकार कर देगा। (7) जिला मजिस्ट्रेट, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संतुष्टि होने के बाद कि धर्म परिवर्तन इच्छापूर्वक है तथा किसी मिथ्या निरूपण, बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन या किन्हीं कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह द्वारा या विवाह करने के प्रयोजन के बिना है, तो ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में उस प्रभाव का प्रमाण-पत्र जारी करेगा। (8) जिला मजिस्ट्रेट, उप-धारा (4) के अधीन यथा उपबंधित नोटिस अवधि की समाप्ति के तीन मास के भीतर उप-धारा (6) के अधीन आदेश पारित करेगा या उप-धारा (7) के अधीन प्रमाण-पत्र जारी करेगा : परन्तु जिला मजिस्ट्रेट, लिखित में कारणों को लिपिबद्ध करते हुए, ऐसी अवधि, जो वह उचित समझे, किन्तु नोटिस अवधि की समाप्ति के बाद छह मास अपश्चात्‌ नहीं, के भीतर आदेश पारित कर सकता है या प्रमाण-पत्र जारी कर सकता है। (9) उपधारा (1) तथा उपधारा (2) की उल्लंघना में किसी धर्म परिवर्तन को विधिविरूद्ध तथा अप्रभावी समझा जाएगा।

अपील। 10. धारा 9 के अधीन जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेष से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में संबंधित मण्डल आयुक्त के सम्मुख आदेष की प्रमाणित प्रति की प्राप्ति या प्रमाण-पत्र, जैसी भी स्थिति हो, जारी करने से तीस दिन के भीतर अपील दायर कर सकता हैः परन्तु मण्डल आयुक्त, व्यथित व्यक्ति द्वारा विलम्ब के लिए उचित कारण दर्षाने पर अपील दायर करने हेतु और तीस दिन के लिए अवधि में विस्तार कर सकता है।156 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 8, 2022 (JYST. 18, 1944 SAKA) 11. इस अधिनियम के उपबंधों की उल्लंघना में कोई धर्म परिवर्तन, अकृत और शून्य होगा। धर्म परिवर्तन का अकृत और शून्य होना।

12. (1) जो कोई भी धारा 3 के खण्ड (क) या (ख) या दोनों के उपबंधों की उल्लंघना करता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी, जो पांच वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है, से दण्डनीय होगा और जुर्माने, जो एक लाख रूपए से कम नहीं होगा, से भी दण्डनीय होगा।

अधिनियम के उपबंधों की उल्लंघना के लिए दण्ड।

(2) जो कोई भी धारा 3 (ग) के उपबंधों की उल्लंघना में उसके द्वारा माने जाने वाले धर्म से भिन्न किसी धर्म वाले व्यक्ति से विवाह करने का आषय रखता है तथा ऐसी रीति में अपने धर्म को छुपाता है कि अन्य व्यक्ति, जिससे वह विवाह करने का आषय रखता है, विष्वास करता है कि वास्तव में उसका धर्म उसके द्वारा माने जाने वाला ही धर्म है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगी, जो दस वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है, से दण्डनीय होगा और जुर्माने, जो तीन लाख रूपए से कम नहीं होगा, से भी दण्डनीय होगा।

(3) जो कोई भी किसी अवयस्क, किसी महिला या अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों से संबंधित किसी व्यक्ति के संबंध में धारा 3 के उपबन्धों की उल्लंघना करता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो चार वर्ष से कम नहीं होगी, जो दस वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है, से दण्डनीय होगा और जुर्माने, जो तीन लाख रूपए से कम नहीं होगा, से भी दण्डनीय होगा।

(4) जो कोई भी सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में धारा 3 के उपबंधों की उल्लंघना करता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगी, जो दस वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है, से दण्डनीय होगा और जुर्माने, जो चार लाख रूपए से कम नहीं होगा, से भी दण्डनीय होगा। व्याख्या.- इस उप-धारा के प्रयोजनों हेतु सामूहिक धर्म परिवर्तन से अभिप्राय है, ऐसा धर्म परिवर्तन, जिसमें एक ही समय पर दो से अधिक व्यक्तियों का धर्म परिवर्तित किया जाता है। (5) जो कोई भी धारा 9 के उपबंधों की उल्लंघना करता है, तो कारवास की ऐसी अवधि, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगी, जो पांच वर्ष के लिए बढ़ाई जा सकती है, से दण्डनीय होगा और जुर्माने, जो दो लाख रूपए से कम नहीं होगा, से भी दण्डनीय होगाः

परन्तु इस धारा में वर्णित द्वितीय या पष्चात्‌वर्ती अपराध के मामले में, कारावास की अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी और जुर्माना भी पांच लाख रूपए से कम नहीं होगा।

13. (1) जहां कोई संस्था या संगठन इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों की उल्लंघना करता है, तो ऐसी संस्था या संगठन, जैसी भी स्थिति हो, के कार्यकलापों का प्रभारी व्यक्ति ऐसी उल्लंघना में लिप्त है, तो धारा 12, जैसी भी स्थिति हो, के अधीन यथा उपबंधित दण्ड से दण्डनीय होगा।

किसी संस्था या संगठन द्वारा अधिनियम के उपबंधों की उल्लंघना के लिए दण्ड।

(2) जहां कोई संस्था या संगठन उप-धारा (1) के अधीन दोषी पाया जाता है, तो ऐसी संस्था या संगठन, जैसी भी स्थिति हो, का पंजीकरण, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में सक्षम प्राधिकारी द्वारा रद्‌द किया जाएगा।

व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों हेतु "सक्षम प्राधिकारी" ऐसा प्राधिकारी होगा, जिसने ऐसी संस्था या

संगठन को पंजीकृत किया है।

14. न्यायालय, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का केन्द्रीय अधिनियम 2) की धारा 357 के उपबन्धों के अनुसार मुआवजे का भुगतान करने हेतु आदेश कर सकता है।

मुआवजा के भुगतान हेतु आदेश।

सबूत का भार। 15. इस अधिनियम के किसी उपबन्ध की उल्लंघना की दशा में, सबूत का भार अपराधी पर होगा। 16. (1) इस अधिनियम के अधीन किया गया प्रत्येक अपराध, संज्ञेय, अजमानतीय होगा और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा।

सत्र न्यायालय द्वारा संज्ञेय, अजमानतीय तथा विचारणीय अपराध।

(2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करते समय, सत्र न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध से भिन्न समरूप घटना से होने वाले किसी अपराध का भी विचारण कर सकता है, जिसके लिए अभियुक्त को उक्त घटना के लिए किसी अन्य विधि के अधीन आरोपित किया जा सकता है।

अन्वेषण। 17. विषेष अधिकारी से भिन्न कोई भी पुलिस अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण नहीं करेगा।157 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JUNE 8, 2022 (JYST. 18, 1944 SAKA) कठिनाई दूर करने की शक्ति। 18. (1) यदि इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाषित आदेष द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुअसंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो इसे ऐसी कठिनाई को दूर करने के लिए आवष्यक या समीचीन प्रतीत होंः

परन्तु कोई भी ऐसा आदेष, इस अधिनियम के प्रारम्भ होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पष्चात्‌ नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके किए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

नियम बनाने की शक्ति। 19. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा, जब सत्र हो रहा हो।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9650—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 08 June 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2022-06-08.Extra-Ordinary_Leg-No-16-2022/. Archive identifier in.gazette.haryana.2022-06-08.Extra-Ordinary_Leg-No-16-2022.