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Haryana Gazette · Government of Haryana

THE HARYANA FIRE AND EMERGENCY SERVICES ACT, 2022 (HARYANA ACT NO.14 OF 2022).

Published 06 July 2022

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
120-2022/Ext
Notification no.
Leg. No.14/2022
Identifier
in.gazette.haryana.2022-07-06.Extra-Ordinary_Leg-No-14-2022
Languages
English, Hindi
Published at
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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 120–2022/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 6 जुलाई, 2022

(15 आषाढ़, 1944 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

163-176 1. हरियाणा अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 (2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 14)

(केवल हिन्दी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग III प्रत्यायोजित विधान

633-634 1. अधिसूचना संख्या का०आ० 62/के०अ० 16/1927/धा० 41, 42, 51 तथा 76/2022, दिनांक 06 जुलाई, 2022 - हरियाणा काष्ठ आधारित उद्योग (स्थापना और विनियमन) संषोधन नियम, 2022.

भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

3HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 163 भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 06 जुलाई, 2022

संख्या लैज.14/2022.- दि हरियाणा फायर एण्ड इमरजेंसी सर्विसज़ ऐक्ट, 2022 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 30 जून, 2022 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-

2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 14

हरियाणा अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022

हरियाणा राज्य में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं से सम्बन्धित विधि को समेकित करने हेतु तथा निर्माण में अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय उपलब्ध करवाने और इससे सम्बन्धित तथा इसके आनुषंगिक मामलों के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम

भारत गणराज्य के तिहारवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. यह अधिनियम हरियाणा अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022, कहा जा सकता है। संक्षिप्त नाम।

परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''अपील प्राधिकारी'' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में अपर मुख्य सचिव/ प्रधान सचिव,

हरियाणा सरकार ;

(ख) ''निर्माण'' का वही अर्थ होगा, जो इसे हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973

(1973 का 24) अथवा उस क्षेत्र में तत्समय लागू किसी विधि में दिया गया है, जिसमें यह अधिनियम लागू है और इसमें भूमि या निर्माण, या किसी भूमि या निर्माण के भाग से मिलकर बने स्थल या परिसर, चाहे प्राधिकृत हों अथवा अन्यथा से हों, ऐसे निर्माण या उसके भाग और पेट्रोल, डीजल या गैस लाइन, संस्थापनाओं या पम्पों से सम्बन्धित आउटहाउस, यदि कोई हों, भी शामिल हैं ;

(ग) ''उप-विधियों'' से अभिप्राय है, हरियाणा भवन संहिता, 2017 में यथा विहित, समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों, भारतीय मानक ब्यूरो, तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय मार्ग-निर्देशिका, 1986, पैट्रोलियम अधिनियम, 1934 (1934 का केन्द्रीय अधिनियम 30) और इसके अधीन बनाए गए नियमों तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 (1884 का केन्द्रीय अधिनियम 4) और इसके अधीन बनाए गए नियमों में अधिकथित निर्माणों को लागू किए जाने वाले अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपायों में दिए गए अग्नि सुरक्षा विनियम ;

(घ) ''भारतीय मानक ब्यूरो (बी.आई.एस.)'' से अभिप्राय है, भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 (2016 का केन्द्रीय अधिनियम 11) के अधीन स्थापित भारतीय राष्ट्रीय मानक निकाय ;

(ङ) ''अग्निशमन अधिकारी'' में शामिल हैं, दमकल केन्द्रों तथा अन्य क्षेत्रीय संरचनाओं, जैसी भी स्थिति हो, के लिए नियुक्त सहायक मण्डल अग्निशमन अधिकारी और अग्निशमन केन्द्र अधिकारी ;

(च) ''निदेशक'' से अभिप्राय है, धारा 4 के अधीन सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक, जैसी भी

स्थिति हो ;

(छ) ''आपदा'' से अभिप्राय है, आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 (2005 का केन्द्रीय

अधिनियम 53) में यथा परिभाषित आपदा;

164 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA)

(ज) ''परिनिर्माणकर्ता'' से अभिप्राय है, कोई व्यक्ति या व्यक्तियों की संस्था, चाहे निगमित हो या अन्यथा हो, जो नियमित या अस्थाई आधार पर लोगों की सभा के लिए किसी पंडाल का निर्माण करती है या कोई संरचना बनाती है;

(झ) ''अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा'' से अभिप्राय है, कोई गम्भीर स्थिति या घटना, जो अकस्मात घटित होती है और सरकार या स्थानीय प्राधिकरण की अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं की तुरन्त कार्रवाई की मांग करना;

(ञ) ''दमकल केन्द्र'' से अभिप्राय है, अग्निशमन उपकरण, यन्त्र तथा अमले को रखने के लिए और इस अधिनियम की धारा 6 के अधीन सरकार द्वारा अग्निशमन केन्द्र के रूप में घोषित कोई परिनिर्मित निर्माण और यथा निर्मित अन्य क्षेत्रीय संरचनाएं ;

(ट) ''अग्नि निवारण तथा जीवन सुरक्षा उपाय'' से अभिप्राय है, ऐसे उपाय, जो अग्नि की रोकथाम, नियन्त्रण और बुझाने के लिए तथा जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों के अनुसार आवश्यक हों ;

(ठ) ''अग्नि सुरक्षा अधिकारी'' से अभिप्राय है, ऐसे निर्माणों में संस्थापित अग्नि निवारण तथा अग्नि सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए इस निमित्त यथा विनिर्दिष्ट कतिपय निर्माणों के स्वामी या अधिभोगी द्वारा धारा 22 के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति ;

(ड) ''सरकार'' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार ;

(ढ) ''स्थानीय प्राधिकरण'' से अभिप्राय है, नगर निगम, नगर परिषद्‌, नगर समिति, ग्राम पंचायत, छावनी बोर्ड या अग्निशमन सेवाएं प्रदान करने तथा उनके रख-रखाव के लिए स्थापित, गठित या निगमित कोई अन्य प्राधिकरण ;

(ण) ''अधिभोग'' से अभिप्राय है, मुख्य अधिभोग, जिसके लिए सहायक अधिभोगों, जो उस पर निर्भर है, सहित किसी निर्माण या निर्माण के किसी भाग का उपयोग किया जाता है या उपयोग किया जाना आशयित है ;

(त) ''अधिभोगी'' से अभिप्राय है-

(i) कोई व्यक्ति, जो तत्समय, भूमि या निर्माण, जिसके संबंध में ऐसे किराए का भुगतान किया जा रहा है या भुगतानयोग्य है, का किराया या किराए के किसी भाग का स्वामी को भुगतान कर रहा है या भुगतान करने का दायी है ;

(ii) किसी भूमि या निर्माण के अधिभोग में है, या अन्यथा से उसका उपयोग करने वाला

कोई स्वामी ;

(iii) किसी भूमि या निर्माण का निःशुल्क अधिभोगी ;

(iv) किसी भूमि या निर्माण के अधिभोग में कोई अनुज्ञप्तिधारी ; तथा

(v) कोई व्यक्ति, जो किसी भूमि या निर्माण के उपयोग और अधिभोग के लिए स्वामी

को क्षतियों का भुगतान करने के लिए दायी है ;

(थ) ''स्वामी'' में शामिल है, कोई व्यक्ति, जो तत्समय किसी भूमि या निर्माण का किराया, चाहे अपने खाते में या अभिकर्ता, न्यासी, संरक्षक या प्राप्तिकर्ता के रूप में प्राप्त कर रहा है या प्राप्त करने के लिए हकदार है अथवा कोई अन्य व्यक्ति, जो किराया प्राप्त करेगा या किराया प्राप्त करने के लिए हकदार है, यदि भूमि या निर्माण या उसके भाग को किराएदार को किराए पर दिया गया है ;

(द) ''पंडाल'' से अभिप्राय है, घास-फूस, सूखी घास, यूलू घास, गोलपट्‌टी, होगला, दार्मा, चटाई, कैनवास, कपड़े या इसी प्रकार की किसी सामग्री से बनी छत या दीवारों वाली कोई अस्थाई संरचना, जिसे स्थाई या निरन्तर अधिभोग के लिए नहीं अपनाया जाता है ;

(घ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित ;

(न) ''राज्य'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य।

अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा।

3. हरियाणा राज्य के लिए अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलकर बनने वाली अग्निशमन और आपातकालीन सेवा होगी, जिन्हें राज्य के भीतर कहीं भी पदस्थ किया जाएगा :

परन्तु सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी अन्य सेवा या आपदा को अग्निशमन और आपातकालीन सेवा घोषित कर सकती है।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 165 निदेशक की नियुक्ति। 4. सरकार, ग्रुप क सेवाओं के किसी भी उपयुक्त अधिकारी को निदेशक, हरियाणा अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा के रूप में नियुक्त कर सकती है।

निदेशक की शक्तियां, र्काव्य तथा कृत्य। 5. (1) निदेशक, सरकार के अधीक्षण और नियन्त्रण के अध्यधीन, अग्नि सुरक्षा और निवारण, अग्निशमन उपकरणों, मशीनरी और यन्त्रों, प्रशिक्षण, र्काव्यों का बटँवारा, विधियों के अध्ययन के सभी मामलों और अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के कार्मिकों में अनुशासन बनाए रखने बारे निर्देश देगा और विनियमित करेगा।

(2) निदेशक,-

(i) अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं के विकास हेतु सरकार के साथ सम्पर्क

बनाए रखेगा ;

(ii) सरकार का अनुमोदन प्राप्त करने के बाद अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के विकास से संबंधित नीतियों को कार्यान्वित करने के लिए रूपरेखा तैयार करेगा और कदम उठाएगा;

(iii) अग्निशमन उपकरणों, सम्पत्तियों तथा अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मानवशक्ति का समय-समय पर पुनर्विलोकन करने के संबंध में योजनाएं तथा प्रस्तावों को तैयार करेगा और सरकार को भेजेगा ;

(iv) यह सुनिश्चित करेगा कि दमकल केन्द्रों और अन्य क्षेत्रीय संरचनाओं की अग्निशमन और आपातकालीन प्रबन्ध योजनाएं, राज्य की संबंधित आपदा प्रबंधन योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई हैं ;

(v) राज्य के भीतर तथा आसपास के राज्यों के लिए किसी अग्नि प्रतिक्रिया या किसी अन्य आपातकाल के लिए अतिरिक्त अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं, संसाधनों, उपकरणों और अग्निशमन कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करेगा ;

(vi) भीषण अग्नि, मकान के ढहने और अन्य आपातकालीन सेवाओं के मामले में ऐसे

प्रभावी कदम उठाएगा तथा उपाय करेगा या करवाएगा ;

(vii) अग्नि के कारण की जांच करेगा या जांच करवाएगा और अग्निशमन पूर्वोपायों के

कार्यान्वयन सहित सिफारिशों के साथ सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ;

(viii) ऐसी संख्या में अधिकारियों/ कार्मिकों को प्रतिनियुक्त करेगा, जो अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के किसी अग्निशमन अधिकारी की सहायता के लिए आवश्यक हों ;

(ix) सरकार द्वारा, समय-समय पर, बनाई गई नीतियों को कार्यान्वित करेगा; (x) अग्निशमन और बचाव कार्यों के क्षेत्र में प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए अग्रिम

प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना करेगा ;

(xi) अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं के मानकों को अद्यतन करने के लिए राष्ट्रीय

और अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर हरियाणा राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा ;

(xii) कोई अन्य कृत्य या र्काव्य करेगा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों को पूरा करने के

लिए आवश्यक हो।

अग्निशमन मण्डलों, दमकल केन्द्रों

तथा अन्य क्षेत्रीय संरचनाएं स्थापित करना। 6. (1) राज्य के भीतर अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के प्रयोजन हेतु, सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, पर्याप्त अग्निशमन मण्डलों, दमकल केन्द्रों और अन्य क्षेत्रीय संरचनाओं का गठन करेगी, जो यह औद्योगिक सैक्टरों, वाणिज्यिक और व्यापारिक प्रतिष्ठानों और निर्माणों में जनसंख्या, संभावित अग्निशमन खतरों के संबंध में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उचित समझे।

(2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना में प्रशासनिक तथा कार्यात्मक निपुणता के लिए अग्निशमन मण्डलों, दमकल केन्द्रों और अन्य क्षेत्रीय संरचनाओं की सीमा परिभाषित होगी।

7. (1) सरकार या निदेशक, प्रत्येक दमकल केन्द्र के लिए अग्निशमन अधिकारी की नियुक्ति करेगा, जो दमकल केन्द्र का प्रभारी होगा और अपने क्षेत्र के भीतर संचार प्रणाली, हाईड्रेन्ट सहित जल संसाधन के रख-रखाव, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के परिचालन के लिए जिम्मेदार होगा।

अग्निशमन अधिकारी की नियुक्ति, शक्तियां, कर्तव्य तथा कृत्य। (2) निदेशक के नियंत्रण, निर्देशन और अधीक्षण के अध्यधीन, अग्निशमन अधिकारी, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे र्काव्यों का निर्वहन करेगा, जो विहित किए जाएं।166 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) (3) उपधारा (2) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संबंधित अग्निशमन अधिकारी,- (i) अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की दशा में, कमांडिंग अधिकारी के रूप में कार्य करेगा और ऐसी स्थिति में, अन्य अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं, जो उसके नियन्त्रणाधीन नहीं हैं, उसके आदेश के अधीन कार्य करेगा ;

(ii) सुनिश्चित करेगा कि दमकल केन्द्र और अन्य क्षेत्रीय संरचनाओं की अग्निशमन और आपातकालीन प्रबन्धन योजना, जिला आपदा प्रबन्धन की संबंधित योजना के अनुरूप तैयार की गई है ;

(iii) ऐसी मानक परिचालन प्रक्रिया, जो विहित की जाए, के अनुसार अग्निशमन और आपातकालीन संबंधी काल पर अग्निशमन इकाइयों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करेगा ;

(iv) उसकी अधिकारिता के भीतर किसी अग्निशमन प्रतिक्रिया या किसी अन्य आपातकाल के लिए अतिरिक्त अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं, संसाधनों, उपकरणों तथा अग्निशमन कार्मिकों के नियोजन को सुनिश्चित करेगा। 8. नियुक्त या नियोजित अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के सदस्यों की भर्ती का ढंग, वेतन और भत्ते तथा सभी अन्य सेवा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।

अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के सदस्यों की भर्ती का ढंग।

सहायक अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा।

9. जब भी सरकार को यह प्रतीत होता है कि अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं में वृद्धि करना आवश्यक है, तो यह ऐसे क्षेत्र के लिए और ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों पर, जो यह उचित समझे, स्वयंसेवक भर्ती करते हुए अग्निशमन तथा आपातकालीन सहायक सेवा बना सकती है।

प्रभारी अधिकारी की शक्तियां।

10. किसी भी क्षेत्र में आग लगने पर, मौके पर अग्निशमन कार्यों का अधिकारी/कर्मचारी, प्रभारी अधिकारी होगा, जो,-

(i) किसी व्यक्ति, जो अपनी उपस्थिति से आग बुझाने या जीवन या सम्पत्ति के बचाव में विघ्न डालता है या बाधित करता है, को हटाने के लिए अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के किसी अन्य सदस्य को आदेश दे सकता है ;

(ii) किसी भी गली या रास्ते को बन्द कर सकता है, जिसमें या जिसके नजदीक आग लगी हो या बचाव कार्य प्रगति पर हो, ;

(iii) आग बुझाने और बचाव कार्यों को करने के प्रयोजन हेतु, जल की पाइप या उपकरणों के लिए रास्ता बनाने हेतु किसी भी परिसर में घुस सकता है या उसके एक ओर से दूसरी ओर जा सकता है या उसे ढहा सकता है या उन्हें तुड़वा सकता है या एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए या जितना सम्भव हो उतना कम नुकसान पहुंचाते हुए, ढहाने के लिए मजबूर कर सकता है ;

(iv) क्षेत्र में जल आपूर्ति प्रभारी प्राधिकारी से जल के मुख्य प्रणाल को विनियमित करने की अपेक्षा कर सकता है ताकि आग लगने वाले स्थान पर एक निर्दिष्ट दबाव पर पानी उपलब्ध करवाया जा सके और ऐसी आग को बुझाने या आग के फैलने को कम करने तथा बचाव कार्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए और किसी भी स्रोत, जलाशय, कुएं या टैंक के जल या जल के उपलब्ध किसी भी स्रोत, चाहे सार्वजनिक या निजी हो, का उपयोग किया जा सके ;

(v) अग्निशमन कार्यों को नुकसान पहुंचाने वाले सम्भावित व्यक्तियों की किसी सभा को तितर-बितर करने के लिए उन्हीं शक्तियों का प्रयोग कर सकता है मानो वह किसी पुलिस थाना का प्रभारी अधिकारी है/ था और पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के रूप में समान प्रतिरक्षा और सुरक्षा का हकदार होगा ;

(vi) किसी व्यक्ति को निरूद्ध कर सकता है, जो जानबूझकर अग्निशमन तथा बचाव कार्यों में अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के कार्मिकों के लिए बाधा उत्पन्न करता है तथा रूकावट डालता है और लिखित में निरूद्ध करने का समय, तिथि तथा कारण विनिर्दिष्ट करते हुए अविलम्ब उसे किसी पुलिस अधिकारी या किसी नजदीकी पुलिस थाना के सुपुर्द कर सकता है।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 167 अग्निशमन संपत्ति की मांग। 11. जहां निदेशक या अग्निशमन अधिकारी या अग्निशमन या किसी आपातकालीन अभियान के प्रभारी अधिकारी को किसी अन्य प्राधिकरण या किसी संस्था या व्यक्ति के अग्निशमन उपकरण और यन्त्र या संपत्ति की आवश्यकता होती है, तो वह आदेश द्वारा, प्राधिकरण या किसी संस्था या व्यक्ति, जैसी भी स्थिति हो, से किसी क्षेत्र में अग्नि बुझाने के प्रयोजन हेतु या किसी भी अन्य आपातकाल से निपटने के लिए ऐसे उपकरण या संपत्ति की मांग कर सकता है और उसका कब्जा ले सकता है।

12. (1) अग्निशमन कार्यों के प्रभारी अधिकारी के लिए क्षेत्र में किसी स्रोत से जल लेना विधिपूर्ण होगा, जिसे वह अग्निशमन कार्यों, जो अपेक्षित हों, के दौरान आवश्यक समझे और ऐसे अवसर पर, ऐसे जल स्रोत का नियन्त्रण रखने वाला स्वामी या अधिभोगी, उस प्रयोजन के लिए जल आपूर्ति करेगा।

जल आपूर्ति और अन्य आवश्यक उपायों की व्यवस्था करने की शक्ति। (2) अग्निशमन कार्यों का प्रभारी अधिकारी, आग लगने की स्थिति में उपयोग के लिए पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और अग्निशमन कार्यों हेतु सभी आवश्यक उपाय करेगा।

जल आपूर्ति के अवरोध के लिए कोई मुआवजा नहीं होना। 13. किसी क्षेत्र में जल आपूर्ति के प्रभारी किसी व्यक्ति को धारा 12 की उपधारा (1) की अनुपालना में जल आपूर्ति के किसी अवरोध के कारण हुई क्षति के लिए किसी मुआवजे के लिए दावा करने का अधिकार नहीं होगा ।

जल उपभोग के लिए प्रभार। 14. किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अग्निशमन कार्यों या अग्नि अभ्यास में या हाईड्रेन्ट स्थैतिकी जल टैंकों की स्थापना और रख-रखाव या अग्निशमन प्रयोजनों के लिए जल आपूर्ति की किसी अन्य व्यवस्था के लिए प्रयुक्त जल हेतु किसी भी प्रभार का दावा नहीं किया जाएगा।

निवारक उपाय। 15. सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी क्षेत्र में किसी स्थान या परिसरों के किसी स्वामी या अधिभोगी से ऐसे निवारक उपाय, जो ऐसी अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, करने की अपेक्षा कर सकती है, जो इसकी राय में अग्नि के जोखिम के लिए सम्भव हो।

16. (1) पंडालों के परिनिर्माणकर्ताओं को इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय करने के लिए स्व-विनियामक के रूप में समझा जाएगा।

पंडालों में अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय। (2) पंडाल का परिनिर्माणकर्ता, पंडाल में प्रमुख स्थान पर इस आशय की घोषणा विहित प्ररूप में अपने हस्ताक्षराधीन प्रदर्शित करेगा कि उसने सभी विहित अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय किए हैं।

(3) निदेशक या निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी को उपधारा (2) के अधीन परिनिर्माणकर्ता द्वारा इस प्रकार की गई घोषणा के सहीपन के सत्यापन के लिए पंडाल में प्रवेश करने और उसका निरीक्षण करने की शक्ति होगी और ऐसी त्रुटियों, यदि कोई हों, को बताने, उन्हें विनिर्दिष्ट समय के भीतर हटाने के लिए निर्देश देने की भी शक्ति होगी। यदि ऐसे निर्देशों की अनुपालना दिए गए समय के भीतर नहीं की जाती है, तो निदेशक या उस द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, पंडाल को सील करेगा ;

(4) किसी पंडाल का कोई परिनिर्माणकर्ता, जो झूठी घोषणा करता है कि उसने पंडाल में विहित अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपायों की अनुपालना की है, तो उसे अपराध करने वाला समझा जाएगा और कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन मास तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माने, जो दस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है या दोनों से और जहां अपराध जारी रहता है, तो अपराध जारी रहने के दौरान प्रतिदिन के लिए अतिरिक्त जुर्माने, जो एक हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा।

अग्निशमन जोखिम या अग्निशमन में किसी अवरोध के लिए संभावित अतिक्रमण, सामग्री या माल को हटाना। 17. (1) जब कभी निदेशक या उस द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के ध्यान में यह आता है, तो वह किसी स्थल की सुरक्षा के लिए अतिक्रमण, सामग्रियों या मालों, जिनसे अग्नि जोखिम या अग्निशमन में किसी अवरोध के उत्पन्न होने की सम्भावना है, को हटाने का निदेश दे सकता है और स्वामी, अधिभोगी या परिनिर्माणकर्ता, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा ऐसा करने में असफल रहने पर, निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, स्वामी या अधिभोगी या परिनिर्माणकर्ता, जैसी भी स्थिति हो, को प्रतिवेदन करने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद और यदि निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ऐसे प्रतिवेदन से संतुष्ट नहीं है, तो सम्बद्ध जिला मजिस्ट्रेट को मामले की विस्तृत कारणों सहित रिपोर्ट करेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर, जिला मजिस्ट्रेट, ऐसी रीति, जो वह उचित समझे, में नोटिस की तामील द्वारा, ऐसे अतिक्रमण या सामग्रियों या मालों, जिनसे अग्नि के जोखिम अथवा अग्निषमन में बाधा उत्पन्न होने की सम्भावना है, को हटाने के कारण दर्शाते हुए स्वामी, अधिभोगी या परिनिर्माणकर्ता को युक्तियुक्त अवसर देगा।168 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) (3) स्वामी या अधिभोगी या परिनिर्माणकर्ता, जैसी भी स्थिति हो, को उपधारा (2) के अधीन प्रतिवेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, जिला मजिस्ट्रेट, प्रतिवेदन पर विचार करने के बाद, नोटिस को वापिस ले सकता है या ऐसे अतिक्रमण या सामग्रियों या मालों को जब्त करने, निरूद्ध करने या हटाने के लिए आदेश कर सकता है।

(4) उपधारा (3) में किए गए आदेश के निष्पादन के लिए प्रभारी व्यक्ति, सामग्रियों और मालों, जिन्हें वह ऐसे आदेश के अधीन जब्त करता है, की सूची तैयार करेगा और उसी समय, उनका कब्जा रखने वाले व्यक्ति को ऐसी रीति, जो विहित की जाएं, में लिखित नोटिस देगा कि ऐसी सामग्रियों या मालों का विक्रय कर दिया जाएगा यदि उक्त नोटिस में नियत अवधि के भीतर उनका दावा नहीं किया जाता है।

(5) व्यक्ति, जिसके कब्जे में जब्ती के समय सामग्री या माल थे, उपधारा (4) के अधीन दिए गए नोटिस के अनुसरण में जब्त किए गए मालों का दावा करने में असफल रहता है, तो जिला मजिस्ट्रेट सार्वजनिक नीलामी में उनका विक्रय करेगा।

अग्निषमन स्कीम के अनुमोदन के लिए स्वामी या अधिभोगी का दायित्व।

18. (1) समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV, हरियाणा भवन संहिता, 2017 तथा संबंधित परिसरों पर यथा लागू किसी अन्य राज्य विधि या उपविधियों के उपबन्धों की अनुपालना में, किसी निर्माण के स्वामी या अधिभोगी, जो या तो व्यक्तिगत रूप से या संयुक्त रूप से उारदायी है-

(i) अग्निशमन संस्थापनाएं तथा जीवन सुरक्षा उपाय उपलब्ध करवाएगा ;

(ii) हर समय चालू हालत में अग्नि निवारण तथा जीवन सुरक्षा उपायों का रख-रखाव

करेगा।

(2) इसके अधीन खण्ड (क) तथा (ख) में यथा वर्णित किसी निर्माण का प्रस्तावित संनिर्माण करने वाला कोई व्यक्ति, सुसंगत विधि के अधीन उसका अनुमोदन करने वाले सक्षम प्राधिकारी से भवन नक्शाें का अनुमोदन करवाने के बाद, इस अधिनियम तथा समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों के अनुरूप अग्निशमन स्कीम के अनुमोदन के लिए निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी को ऐसी फीस के साथ ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में आवेदन करेगा, अर्थात्‌ः-

(क) सभी गगनचुंबी भवन (16.5 मीटर की ऊँचाई तक आवासीय भवनों के सिवाए) ;

तथा

(ख) विशेष भवन, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं -

(i) होटल, शैक्षणिक, संस्थागत, कारबार, व्यापारिक, औद्योगिक, भण्डारण, संंकटमय तथा मिश्रित अधिभोग, जहां इनमें से किसी निर्माण का फर्श क्षेत्र किसी एक या अधिक मंजिलों पर पाँच सौ वर्ग मीटर (500 वर्गमीटर) से अधिक है ;

(ii) नौ मीटर (9 मीटर) और उससे अधिक ऊँचाई वाले शैक्षणिक भवन ;

(iii) नौ मीटर (9 मीटर) और उससे अधिक ऊँचाई वाले संस्थागत भवन ;

(iv) सभी सभा भवन ;

(v) ऐसे निर्माण, जिनका किसी मंजिल पर आकस्मिक सभा अधिभोग का क्षेत्र

तीन सौ वर्ग मीटर (300 वर्गमीटर) से अधिक है ; तथा

(vi) दो या दो से अधिक बेसमैंटों, या पाँच सौ वर्ग मीटर (500 वर्गमीटर) से अधिक क्षेत्र की एक बेसमैंट वाले निर्माण जब तक उपबन्धों में विशेष रूप से अन्यथा उपबन्धित न हों।

(3) निदेशक द्वारा इस निमित्त सम्यक्‌ रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी, किसी आवेदन पर संज्ञान ले सकता है और हरियाणा भवन संहिता, 2017 तथा समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV की अपेक्षाओं के संबंध में आवेदन की संवीक्षा करेगा। निदेशक या उस द्वारा इस निमिा प्राधिकृत कोई अधिकारी, संवीक्षा के बाद अग्निशमन स्कीम का अनुमोदन कर सकता है, जो उपधारा (2) के खण्ड (क)े में वर्णित निर्माणों हेतु पाँच वर्ष तक की अवधि के लिए तथा उपधारा (2) के खण्ड (ख) में वर्णित निर्माणों हेतु दो वर्ष की अवधि के लिए वैध होगी या ऐसा समय, जो विहित किया जाए, के भीतर कारण लिपिबद्ध करने के बाद उक्त आवेदन को रद्‌द कर सकता है :

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परन्तु अग्निशमन स्कीम का अनुमोदन करते समय निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, कोई अतिरिक्त शर्त/ अग्नि सुरक्षा उपाय अधिरोपित कर सकता है, जो वह जमीनी स्थिति पर निर्भर रहते हुए जन-साधारण की सुरक्षा और निर्माण की सुरक्षा के लिए उचित समझे।

(4) पहुँच सड़क/साथ लगती सड़क, जिस पर निर्माण का संनिर्माण किया जाना है, तथा संनिर्मित किए जाने वाले ऐसे निर्माणों के ईर्द-गिर्द बाधाएं या खुले स्थान के मामले में हरियाणा भवन संहिता, 2017 के अधीन अधिकथित पैरामीटर लागू होंगे।

(5) भण्डार भवन की अधिकतम ऊंचाई, इस शर्त के अध्यधीन इक्कीस मीटर (21 मीटर) तक अनुज्ञेय होगी कि कोई भी नियमित/ निरंतर मानव बस्ती ऊंचाई में पन्द्रह मीटर (15 मीटर) से अधिक के लिए सर्व-साधारण की पहुंच में न हो। अधिभोग या निर्माण, की श्रेणियों के मामले में, जिनके लिए अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपाय समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों में वर्णित नहीं है और भारतीय मानक ब्यूरो और भारतीय तेल सुरक्षा निदेशालय द्वारा अलग से दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, तो निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, ऐसे अधिभोग या निर्माण या परिसरों के स्वामी या अधिभोगी से राष्ट्रीय अग्निशमन संरक्षण संघ संस्था (यू.एस.ए.) द्वारा अधिकथित पैरामीटरों के अनुसार अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों की व्यवस्था करने के लिए अपेक्षा कर सकता है।

(6) निर्माण से यात्रा की अधिकतम दूरी ऐसी होगी, जो समय-समय पर यथा पुनरीक्षित हरियाणा भवन संहिता, 2017 में यथा विनिर्दिष्ट है।

(7) औद्योगिक भवन की अधिकतम ऊंचाई इस शर्त के अध्यधीन निम्न और मध्यम संकट भवनों (उच्च जोखिम वाले भवनों को छोड़कर) के लिए तीस मीटर (30 मीटर) तक अनुज्ञेय होगी कि कोई नियमित/ निरंतर मानव बस्ती को निम्न और मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए ऊंचाई अठारह मीटर (18 मीटर) से अधिक के लिए अनुज्ञेय न हो। अधिभोग या निर्माण या परिसर की श्रेणियों के मामले में, जिनके लिए अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपाय समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों में वर्णित नहीं है, और भारतीय मानक ब्यूरो और भारतीय तेल सुरक्षा निदेशालय द्वारा अलग से दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, तो निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, ऐसे अधिभोग या निर्माण या परिसरों के स्वामी या अधिभोगी से राष्ट्रीय अग्निशमन संरक्षण संघ संस्था (यू.एस.ए.) द्वारा अधिकथित पैरामीटरों के अनुसार अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों की व्यवस्था करने की अपेक्षा कर सकता है।

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र जारी करना। 19. (1) धारा 18 की उपधारा (2) के अधीन वर्णित निर्माण के संनिर्माण की समाप्ति पर तथा अनुमोदित अग्निशमन स्कीम के अनुसार अग्नि सुरक्षा तथा निवारक उपायों की संस्थापना पर, निर्माण का स्वामी, ऐसी फीस के साथ ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त सम्यक्‌ रूप से प्राधिकृत किसी अधिकारी को अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, सम्बद्ध अधिकारी आवेदन की संवीक्षा करेगा तथा अग्निशमन स्कीम की अनुपालना के लिए निर्माण का निरीक्षण करेगा।

(3) अनुमोदित अग्निशमन स्कीम के अनुसार अग्नि सुरक्षा संस्थापना तथा बचाव कार्यों का निरीक्षण करने के बाद, सम्बद्ध अधिकारी ऐसे समय, जो विहित किया जाए, के भीतर निदेशक या उस द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। जांच के बाद, निदेशक या उस द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी ऐसे समय, जो विहित किया जाए, के भीतर अनुमोदन प्रदान कर सकता है या अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी कर सकता है या कारण लिपिबद्ध करने के बाद उक्त आवेदन को रद्‌द कर सकता है।

(4) धारा 18 की उपधारा (2) के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट निर्माणों हेतु जारी किया गया अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र तीन वर्ष के लिए वैध होगा, साढे सौलह मीटर (16.5 मीटर) से अधिक के आवासीय भवनों के लिए पांच वर्ष के लिए वैध होगा तथा धारा 18 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) में यथा विनिर्दिष्ट विशेष निर्माणों हेतु तीन वर्ष के लिए वैध होगा।

(5) तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, ऐसे निर्माण के अधिभोग प्रमाण-पत्र को जारी करने हेतु कोई भी सषक्त प्राधिकारी तब तक अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी नहीं करेगा, जब तक इस धारा के उपबन्धों की अनुपालना नहीं की जाती :

परन्तु अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का अनुमोदन करने हेतु सक्षम प्राधिकारी, जमीनी स्थिति पर निर्भर रहते हुए जनसाधारण तथा निर्माण की सुरक्षा के लिए अग्नि सुरक्षा तथा जीवन सुरक्षा उपाय के सम्बन्ध में कोई अतिरिक्त शर्त, जो वह उचित समझे, अधिरोपित कर सकता है।170 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) (6) निर्माण का स्वामी या अधिभोगी प्रतिवर्ष इस प्रभाव का स्वतः घोषणा प्रमाण-पत्र देगा कि उसके निर्माण में संस्थापित अग्निषमन प्रणाली अच्छी स्थिति में है तथा निर्माण में कोई परिवर्धन/परिवर्तन नहीं है। अग्निशमन अधिकारी ऐसे निर्माण की रैंडमली जांच कर सकता है। यदि, हरियाणा भवन संहिता, 2017 के अधीन अनुज्ञेय सीमा से अधिक कोई परिवर्धन/ परिवर्तन है, तो उक्त अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण प्रभावहीन हो जाएगा तथा स्वामी धारा 18 के उपबन्धों के अनुसार पुनरीक्षित अग्निषमन स्कीम के अनुमोदन के लिए आवेदन करेगा।

20. (1) निर्माण का स्वामी या अधिभोगी ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी फीस, जो विहित की जाए, के साथ अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण के लिए आवेदन करेगा।

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण।

(2) अग्निशमन अधिकारी आवेदन की संवीक्षा करेगा तथा अग्नि सुरक्षा संस्थापनाओं, बचाव के साधनों इत्यादि का निरीक्षण करेगा तथा यदि निर्माण विहित मानदण्डों को पूरा करता है, तो अग्निशमन अधिकारी या निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी ऐसे समय, जो विहित किया जाए, के भीतर प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण जारी करेगा या इस सम्बन्ध में कारण लिपिबद्ध करने के बाद उसे रद्‌द करेगा :

परन्तु अग्निशमन अधिकारी या निदेषक द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी जो अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण का अनुमोदन करने में सक्षम है, जमीनी स्थिति पर निर्भर रहते हुए जनसाधारण तथा निर्माण की सुरक्षा के लिए, अग्नि सुरक्षा तथा जीवन सुरक्षा उपायों के संबंध में कोई अतिरिक्त शर्त, जो वह उचित समझे, अधिरोपित कर सकता है।

(3) धारा 18 की उपधारा (2) के खण्ड (क) तथा (ख) के अधीन यथा वर्णित निर्माणों हेतु अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की वैधता तीन वर्ष होगी।

(4) निर्माण का स्वामी या अधिभोगी प्रतिवर्ष इस प्रभाव का स्वतः घोषणा प्रमाण-पत्र देगा कि उसके निर्माण में संस्थापित अग्निषमन प्रणाली अच्छी स्थिति में है तथा निर्माण में कोई परिवर्धन/परिवर्तन नहीं है। अग्निशमन अधिकारी ऐसे निर्माण की रैंडमली जांच कर सकता है। यदि, हरियाणा भवन संहिता, 2017 के अधीन अनुज्ञेय सीमा से अधिक कोई परिवर्धन/ परिवर्तन है, तो उक्त अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण प्रभावहीन हो जाएगा तथा स्वामी धारा 18 के उपबन्धों के अनुसार पुनरीक्षित अग्निषमन स्कीम के अनुमोदन के लिए आवेदन करेगा।

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का रद्‌दकरण।

21. (1) यदि स्वामी या अधिभोगी, जैसी भी स्थिति हो, निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा जारी किए गए निर्देशों की अनुपालना करने में असफल रहता है, तो धारा 19 तथा 20 के अधीन जारी किए गए अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र या अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण, स्वामी या अधिभोगी को सुनवाई का अवसर देने के बाद जारीकर्ता प्राधिकारी द्वारा रद्‌द किया जा सकता है। (2) निर्माण का स्वामी या अधिभोगी, जिसका अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र रद्‌द कर दिया गया है, अग्नि निवारण तथा जीवन सुरक्षा उपायों की अननुपालना के आधार पर निर्माणों या परिसरों का अधिभोग करने का हकदार नहीं होगा।

22. (1) समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबंधों के अनुसार सभी निर्माणों में प्रभावी अग्नि निवारण तथा जीवन सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने हेतु, प्रत्येक स्वामी और अधिभोगी, पृथक रूप से या संयुक्त रूप से, जैसी भी स्थिति हो, ऐसी योग्यताएं, जो विहित की जाएं, रखने वाले अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति करेगा।

स्वामी या अधिभोगी द्वारा अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति तथा उसके कृत्य ।

(2) उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त किए गए अग्नि सुरक्षा अधिकारी की रिक्ति की दषा में, या तो त्यागपत्र द्वारा या अन्यथा से, स्वामी या अधिभोगी वैयक्तिक रूप से या संयुक्त रूप से, जैसी भी स्थिति हो, तुरंत अग्नि सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करेगा।

(3) उप-धारा (1) तथा (2) के अधीन अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने की दशा में, अग्नि सुरक्षा अधिकारी, इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार ऐसे कदम उठायेगा, जो वह आवश्यक समझे।

(4) अग्नि सुरक्षा अधिकारी, सरकार द्वारा स्थापित अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लेना होगा :

परन्तु किसी व्यक्ति, जिसने गृह मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय, नागपुर या सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त किसी अन्य समकक्ष संस्थान से ऐसा प्रशिक्षण पहले से ले लिया है, से ऐसा प्रशिक्षण लेने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 171 निरीक्षण की शक्ति। 23. (1) निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अग्निशमन अधिकारी, किसी स्थान या निर्माण या उसके भाग के अधिभोगी, या जहां कोई अधिभोगी नहीं है, तो उसके स्वामी को तीन घण्टे का नोटिस देने के बाद, सूर्योदय और सूर्यास्त होने के मध्य किसी भी समय पर ऐसे स्थान या निर्माण या उसके भाग में प्रवेश कर सकता है और उसका निरीक्षण कर सकता है, जहां अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपायों की दक्षता या उल्लंघना सुनिश्चित करने के लिए ऐसा निरीक्षण आवश्यक प्रतीत हो :

परन्तु निदेषक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अग्निशमन अधिकारी, किसी भी समय किसी स्थान या निर्माण या उसके भाग में प्रवेश कर सकता है और उसका निरीक्षण कर सकता है, यदि यह जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अनुक्रम में ऐसा करना समीचीन और आवश्यक प्रतीत हो।

(2) ऐसे स्थान या निर्माण या उसके भाग के स्वामी या अधिभोगी, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा उपधारा (1) के अधीन निरीक्षण करने हेतु, अग्निशमन अधिकारी को हर सम्भव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

(3) स्वामी या अधिभोगी या कोई अन्य व्यक्ति, किसी अग्निशमन अधिकारी को किसी स्थान या भवन या उसके भाग में प्रवेश करने के लिए कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगा या कोई बाधा उत्पन्न नहीं करवाएगा और ऐसे निरीक्षण के दौरान अग्निशमन अधिकारी के साथ हाथापाई नहीं करेगा।

(4) मानव निवास के रूप में उपयोग किए गए किसी ऐसे स्थान या निर्माण या उसके भाग में प्रवेश करने पर, अग्निशमन अधिकारी द्वारा अधिभोगियों की सामाजिक और धार्मिक भावनाओं का उचित सम्मान किया जाएगा :

परन्तु यदि कोई स्थान, निर्माण या उसका भाग वास्तव में किसी महिला के अधिभोग में है, जो प्रथा के अनुसार सार्वजनिक रूप से उपस्थित नहीं होती है, तो ऐसी महिला को ऐसे स्थान पर स्वयं उपस्थित नहीं होने की स्वतन्त्रता के साथ नोटिस दिया जाना अपेक्षित है और ऐसे प्रयोजन हेतु उसे हर उचित सुविधा वहन की जानी अपेक्षित है।

(5) इस धारा के अधीन निरीक्षण करने के बाद, अग्निशमन अधिकारी, निदेशक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को ऐसे किसी निरीक्षण की रिपोर्ट देगा।

(6) निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, रिपोर्ट की प्राप्ति के बाद, निर्माण की ऊंचाई या ऐसे स्थान या निर्माण या उसके भाग में चल रही गतिविधियों के स्वरूप के संदर्भ में अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपायों के संबंध में आवश्यकताओं से विचलन या उल्लंघन या इसमें उपलब्ध करवाए गए या उपलब्ध करवाए जाने वाले ऐसे उपायों की अपर्याप्तता या अननुपालना पर अपने विचार लिपिबद्ध करेगा और ऐसे स्थान, निर्माण या उसके भाग के स्वामी या अधिभोगी को ऐसे समय, जो नोटिस में विनिर्दिष्ट किया जाए, के भीतर ऐसे उपाय करने के निर्देश देते हुए नोटिस जारी करेगा।

(7) जारी किए गए नोटिस की अननुपालना के मामले में, निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी ऐसे कदम उठायेगा, जो वह इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उचित समझे।

कतिपय निर्माणों के संबंध में उपबन्ध। 24. (1) अग्निशमन अधिकारी या निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, किसी निर्माण, जिसका संनिर्माण इस अधिनियम के प्रारम्भ को या से पूर्व पूर्ण हुआ था या कोई निर्माण, जो ऐसी तिथि, जिसमें अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों की अपर्याप्तता सुनिश्चित करने के लिए ऐसा निरीक्षण करना आवश्यक प्रतीत हो, को निमार्णाधीन था, में प्रवेष कर सकता है और उसका निरीक्षण कर सकता है।

(2) अग्निशमन अधिकारी या निदेषक द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, उप-धारा (1) के अधीन निर्माण का निरीक्षण करने के बाद और -

(i) उपबन्ध, जिसके अधीन उक्त भवन का नक्शा स्वीकृत किया गया था;

(ii) उक्त भवन के नक्शे की स्वीकृति के समय स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अधिरोपित शर्त,

यदि कोई हो; तथा

(iii) समय-समय पर यथा पुनरीक्षित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, 1983 के भाग-IV के उपबन्धों के अनुसार ऐसे भवन के लिए विनिर्दिष्ट अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों हेतु न्यूनतम मानकों,

पर विचार करने के बाद, निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी को उस द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।172 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) धारा 12 के उपबन्धों की उल्लंघना हेतु शास्तियां।

25. जो कोई भी, इस अधिनियम के अधीन उसके विरूद्ध की गई किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 12 की उपधारा (1) के उपबन्धों की उल्लंघना करता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन मास तक बढ़ाई जा सकती है, या ऐसे जुर्माने, जो पचास हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा।

अग्नि सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति नहीं करने के मामले में शास्ति।

26. (1) यदि किसी निर्माण का कोई स्वामी या अधिभोगी, निदेशक या अग्निशमन अधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा इस निमित्त दिए गए नोटिस की प्राप्ति से तीस दिन के भीतर धारा 22 के अधीन अग्नि सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करने में असफल रहता है, तो संयुक्त रूप से और पृथक्‌ रूप से चूककर्ता समझा जाएगा और चूक या उसके भाग के प्रत्येक मास के लिए निदेशक या उस द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा यथा निर्धारित भवनों के सामूहिक क्षेत्रों सहित स्वामित्वाधीन अधिभोग वाले क्षेत्र के लिए ऐसी धनराशि, जो प्रति वर्गमीटर दस रूपए से कम न हो और प्रति वर्गमीटर पचास रूपए से अनधिक हो, का भुगतान करने के लिए दायी होगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन शास्ति के रूप में बकाया राशि, भू-राजस्व बकायों के रूप में वसूल की जाएगी।

मुआवजे का भुगतान करने के लिए स्वामी का दायित्व।

27. (1) कोई व्यक्ति, जिसका निर्माण उसके स्वयं की या उसके अभिकर्ता द्वारा जानबूझकर या लापरवाही से की गई किसी कार्यवाही के कारण आग पकड़ती है, तो ऐसी अग्नि से हुई क्षति से पीड़ित किसी अन्य व्यक्ति को मुआवजे का भुगतान करने के लिए दायी होगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन सभी दावों को ऐसी तिथि, जिसको क्षति हुई थी, से तीस दिन के भीतर निदेषक को निर्दिष्ट किया जाएगा।

(3) निदेषक, सम्बद्ध व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, मुआवजे की राशि का निर्धारण करेगा और ऐसे मुआवजे का भुगतान करने के लिए व्यक्तियों का दायित्व नियत करते समय आदेष पारित करेगा। इस उपधारा के अधीन पारित किए गए आदेष को किसी सिविल न्यायालय की डिक्री का बल होगा और आदेष की प्राप्ति की तिथि से तीस दिन के भीतर कार्यान्वित किया जाएगा। अग्निशमन, बचाव कार्यों में स्वेच्छापूर्वक बाधा उत्पन्न हेतु शास्ति।

28. कोई व्यक्ति, जो जानबूझकर अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के किसी सदस्य, जो अग्निशमन कार्यों में नियोजित किया गया है, के लिए स्वेच्छापूर्वक बाधा या विघ्न उत्पन्न करता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन मास तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माने, जो दस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा।

झूठी रिपोर्ट। 29. कोई भी व्यक्ति, जो कथन, संदेश या अन्यथा के माध्यम से जानबूझकर आग लगने की झूठी रिपोर्ट ऐसी रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को देता है या दिलवाता है, तो कारावास, जो तीन मास तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना, जो दस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा।

दण्ड हेतु सामान्य उपबन्ध।

30. जो कोई भी इस अधिनियम में विशिष्ट रूप से यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या की गई अधिसूचना के किन्हीं उपबन्धों की उल्लंघना करता है, तो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन उसके विरूद्ध की गई किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन मास तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना, जो दस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा और जहां अपराध जारी रहता है, तो ऐसे अतिरिक्त जुर्माने, जो ऐसे अपराध के जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए एक हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, से दण्डनीय होगा।

कम्पनियों द्वारा अपराध।

31. (1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो कम्पनी के कार्यकलापों को करने के लिए कम्पनी का प्रभारी था, और उत्तरदायी था, जिस समय अपराध किया गया था, तो कारावास, जिसे तीन मास तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना, जिसे दस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा :

परन्तु इस उपधारा में दी गई कोई भी बात, किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड के लिए दायी नहीं बनाएगी, यदि वह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या कि उसने ऐसे अपराध को होने से रोकने के लिए सभी सम्यक्‌ तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत या मौनोनुकूलता से हुआ है, तो ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उप-धारा (1) के अनुसार दण्ड के लिए दायी होगा।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 173 व्याख्या.- (i) 'कम्पनी' से अभिप्राय है, कोई निगमित निकाय और इसमें कोई फर्म या अन्य व्यष्टि

संगम भी शामिल है; तथा

(ii) 'निदेशक' से अभिप्राय है, किसी फर्म का कोई निदेशक या भागीदार।

अपराधों का प्रशमन। 32. (1) इस अधिनियम के अधीन किए गए किसी अपराध को या तो अभियोजन के संस्थित होने से पूर्व या के बाद ऐसे अधिकारी द्वारा और ऐसी राशि, जो सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, के लिए प्रशमित किया जा सकता है :

परन्तु कोई भी अपराध तब तक प्रशमित नहीं किया जाएगा जब तक इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए नोटिसों या आदेशों की अनुपालना नहीं की जाती है।

(2) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का प्रशमन किया गया है, तो ऐसे अपराध के संबंध में किसी अपराधी के विरूद्ध कोई भी आगामी कार्यवाही नहीं की जाएगी।

सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। 33. इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आषयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्रवाई नहीं हो सकेगी।

अभियोजन का संज्ञान। 34. कोई भी न्यायालय, निदेशक या अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं के सम्बन्धित अग्निशमन अधिकारी की शिकायत या से प्राप्त सूचना के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा।

अधिकारिता। 35. उपमण्डल मजिस्ट्रेट का न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण करेगा।

अपील। 36. (1) निदेशक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के किसी नोटिस या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, साठ दिन की अवधि के भीतर अपील प्राधिकारी को ऐसे नोटिस या आदेश के विरूद्ध अपील दायर कर सकता है :

परन्तु अपील प्राधिकारी ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद अपील ग्रहण कर सकता है, यदि इसकी संतुष्टि हो जाती है कि उस अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था।

(2) अपील प्राधिकारी द्वारा अपील में पारित आदेश अंतिम होगा।

अग्निशमन और आपातकालीन प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना करना। 37. (1) सरकार, अग्निशमन सेवा कार्मिकों और उद्योगों, बहुमंजिले निर्माण और अन्य सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिष्ठानों से निजी उम्मीदवारों हेतु अग्नि के निवारण और निर्वापन में शिक्षण कोर्स उपलब्ध करवाने हेतु हरियाणा राज्य में एक या एक से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना कर सकती है और रख-रखाव कर सकती है।

(2) सरकार, स्थानीय निकायों और औद्योगिक उपकर्मों के साथ-साथ अन्य राज्यों की अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के लिए ऐसी फीस और प्रभारों, जो विहित किए जाएं, के भुगतान पर प्रशिक्षण सुविधाओं में विस्तार कर सकती है।

(3) सरकार, अग्नि के निवारण और निर्वापन में शिक्षण कोर्स उपलब्ध करवाने हेतु ऐसी प्रक्रिया विहित करेगी, जो यह उचित समझे।

(4) प्रशिक्षण के संबंध में सरकार के अन्य कर्मचारियों को लागू सामान्य नियमों की अनुपालना के अध्यधीन, अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारियों को इस अधिनियम के उपबन्धों के क्रियान्वयन हेतु सरकारी लागत तथा व्यय पर भारत के भीतर या बाहर किसी संस्थान में अग्निशमन संरक्षण और अग्नि सुरक्षा उपायों के वैज्ञानिक तथा आधुनिक तकनीकी के क्षेत्र और सहबद्ध मामलों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा सकता है।

सामुदायिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम। 38. अग्निशमन अधिकारी, अग्निषमन और अन्य आपातकालीन निवारण उपायों पर सामुदायिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। अग्निशमन अधिकारी, अग्नि निवारण से संबंधित मामलों में समुदायों को सहायता और परामर्श दे सकता है।

अग्निशमन कर का उद्‌ग्रहण। 39. (1) ऐसे निर्माण, जिन पर किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा सम्पत्ति कर उद्‌गृहीत किया जाता है, पर अग्निशमन कर उद्‌गृहीत किया जाएगा।

(2) अग्निशमन कर, सम्पत्ति कर की प्रतिशतता के अनुसार ऐसी दर, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर, अवधारित करे, पर उद्‌गृहीत किया जाएगा।174 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) अग्निशमन कर के निर्धारण, संग्रहण इत्यादि का ढंग।

40. (1) ऐसे कर के उद्‌ग्रहण के लिए क्षेत्र के स्थानीय प्राधिकरण को प्राधिकृत करने वाली विधि के अधीन सम्पत्ति कर के निर्धारण, संग्रहण और भुगतान के प्रवर्तन के लिए सशक्त प्राधिकारी, सरकार के निमित्त, उसी रीति में, जिसमें सम्पत्ति कर का निर्धारण, भुगतान और संग्रहण किया जाता है, अग्निशमन कर का निर्धारण, संग्रहण करेगा और भुगतान का प्रवर्तन करेगा।

(2) अग्निशमन कर, जो सरकार द्वारा अवधारित किया जाए, की कुल राशि के ऐसे भाग की कटौती, स्थानीय प्राधिकरण द्वारा अग्निशमन कर के संग्रहण की लागत पूरी करने के लिए की जाएगी। (3) अग्निशमन कर के संग्रहण की लागत की कटौती करते हुए इस अधिनियम के अधीन संगृहीत अग्निशमन कर की शुद्ध राशि का भुगतान, ऐसी रीति में और ऐसे अन्तरालों, जो विहित किए जाएं, पर सरकार को किया जाएगा।

राज्य की सीमाओं से बाहर अग्निषमन और आपातकालीन सेवाओं के नियोजन पर प्रभार।

41. (1) जहां अग्निषमन और आपातकालीन सेवाओं के सदस्यों को किसी सरकार या स्थानीय निकाय या अग्निषमन और आपातकालीन सेवाओं के अनुरोध पर पड़ोस में आग बुझाने के लिए राज्य की सीमाओं से बाहर उपकरणों तथा यन्त्रों के साथ नियोजित किया जाता है, तो ऐसी सरकार या स्थानीय निकाय या अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाएं, जैसी भी स्थिति हो, ऐसे प्रभारों, जो विहित किए जाएं, का भुगतान करने के लिए दायी हाेंगी।

(2) अग्निषमन और आपातकालीन सेवाओं के सदस्यों को निदेषक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी, जो उप निदेषक (तकनीकी) की पदवी के नीचे का न हो, के पूर्व अनुमोदन के बिना उप-धारा (1) में यथा वर्णित प्रयोजन के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा। (3) उप-धारा (1) में र्निदिष्ट फीस, निदेषक या निदेषक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा मांग के नोटिस की तामील के एक मास के भीतर भुगतानयोग्य होगी, और यदि उस अवधि के भीतर भुगतान नहीं की जाती है, तो यह भू-राजस्व बकायों के रूप में वसूलीयोग्य होगी।

42. (1) राज्य के भीतर अग्निशमन और बचाव कार्यों के लिए कोई प्रभार उद्‌गृहीत नहीं किया जाएगा।

राज्य के भीतर अतिरिक्त ड्‌यूटी हेतु अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवाओं पर प्रभार।

(2) सरकार, किसी विशिष्ट अवधि के दौरान निजी प्रयोजन और अतिरिक्त ड्‌यूटी हेतु उपकरणों और यन्त्रों सहित अग्निषमन तथा आपातकालीन सेवा के सदस्यों के नियोजन हेतु अधिसूचना द्वारा प्रभार विनिर्दिष्ट करेगी।

बकायों की वसूली। 43. इस अधिनियम के अधीन भुगतानयोग्य किसी राशि की वसूली भू-राजस्व बकायों के रूप में की जाएगी।

अन्य अग्निषमन तथा आपातकालीन सेवाओं के लिए पारस्परिक अग्निशमन व्यवस्था।

44. निदेषक, सरकार की पूर्व स्वीकृति से, किसी अग्निषमन और आपातकालीन सेवाओं या प्राधिकरण, जो किसी क्षेत्र, जिसमें यह अधिनियम अग्निशमन प्रयोजनों के लिए कार्मिक या उपकरण या दोनों उपलब्ध करवाने के लिए लागू हैं, की सीमाओं से बाहर उपरोक्त अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं बनाए रखता है, के साथ लोकहित में पारस्परिक आधार पर करार द्वारा या के अधीन उपबंधित ऐसे निबन्धनों पर करार कर सकता है।

45. विषय पर तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा के किसी वर्ग या प्रवर्ग को तकनीकी सेवा के रूप में घोषित कर सकती है।

अग्निषमन तथा आपातकालीन सेवाओं को तकनीकी सेवा के रूप में घोषित करना।

सूचना प्राप्त करने की सामान्य शक्ति।

46. निदेषक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन अपने र्काव्यों का निर्वहन करने के प्रयोजन के लिए, किसी निर्माण के स्वामी या अधिभोगी से ऐसे निर्माण की विशेषता के बारे में, उपलब्ध जल आपूर्ति तथा उसमें पहुँच के साधन तथा अन्य तात्विक ब्यौरों, जो वह आवश्यक समझे, के सम्बन्ध में सूचना देने की अपेक्षा कर सकता है तथा ऐसा स्वामी या अधिभोगी, उसके आधिपत्य की सभी सूचनाएं देने के लिए दायी होगा।

निर्माण या परिसरों को सील करने की शक्ति।

47. (1) जहाँ धारा 23 तथा 24 के अधीन अग्निषमन अधिकारी से रिपोर्ट की प्राप्ति पर, या स्वप्रेरणा से निदेषक या उस द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि किसी निर्माण या परिसरों की स्थिति जीवन या सम्पाि के लिए खतरनाक है, तो वह, इस अधिनियम के अधीन की गई किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आदेष द्वारा, ऐसे निर्माण के कब्जाधारी व्यक्ति या अधिभोगी से तुरन्त उन्हें ऐसे निर्माण हटाने की अपेक्षा करेगा।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) 175 (2) यदि उप-धारा (1) के अधीन निदेषक या उस द्वारा प्राधिकृा किसी अधिकारी द्वारा किए गए किसी आदेश की अनुपालना नहीं की जाती है, तो निदेषक या उस द्वारा प्राधिकृा कोई अधिकारी,-

(i) संबंधित प्राधिकारी को निर्माण की बिजली की आपूर्ति को काटने के निदेष दे

सकता है तथा ऐसा प्राधिकारी उक्त निदेषों की अनुपालना करेगा;

(ii) सम्बन्धित प्राधिकारी को निर्माण या परिसरों के जल तथा सीवर कनैक्शन काटने के निर्देश दे सकता है तथा ऐसा प्राधिकारी उक्त निदेषों की अनुपालना करेगा;

(iii) क्षेत्र की अधिकारिता रखने वाले किसी पुलिस अधिकारी को निर्माण से ऐसे व्यक्तियों को हटाने के निदेश दे सकता है तथा ऐसा अधिकारी ऐसे निदेषों की अनुपालना करेगा।

(3) उप-धारा 2 के खण्ड (iii) के अधीन व्यक्तियों को हटाने के बाद, निदेषक या उस द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी निर्माण को सील करेगा।

(4) कोई भी व्यक्ति, निदेषक या उस द्वारा प्राधिकृृा किसी अधिकारी द्वारा किए गए आदेष के सिवाय ऐसी सील नहीं हटाएगा।

(5) कोई भी व्यक्ति, जो निदेषक या उस द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा किए गए आदेष के सिवाय, ऐसी सील को हटाता है, तो कारावास की ऐसी अवधि, जो तीन मास तक बढ़ाई जा सकती है, या जुर्माने, जो पच्चीस हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है, या दोनों से दण्डनीय होगा।

पुलिस अधिकारियों तथा अन्यों द्वारा सहयोग करना। 48. अग्निशमन कार्यों के प्रभारी अधिकारी के अनुरोध पर आग बुझाने के कार्यों या आग के जोखिम वाले किसी माल को जब्त करने, निरूद्ध करने या हटाने से सम्बन्धित किसी भी अन्य कार्य में पुलिस अधिकारी या पुलिस बल के कर्मचारियों का ऐसे र्काव्यों के निर्वहन में अग्निशमन कार्यों के प्रभारी अधिकारी की सहायता तथा सहयोग करने का कर्तव्य होगा।

अग्निषमन तथा आपातकालीन सेवा के सदस्य हेतु मुआवजा। 49. यदि अग्निशमन या बचाव अभियान के कर्तव्यों के दौरान अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा का सदस्य स्थाई रूप से निःशक्त हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो सरकार ऐसे सदस्य या मृतक के निकट सम्बन्धी, जैसी भी स्थिति हो, को पर्याप्त मुआवजे का भुगतान करेगी, जो सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।

अधिकारियों का लोक सेवक होना। 50. अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा के प्रत्येक सदस्य को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझा जाएगा।

51. सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना, अग्निशमन तथा आपातकालीन सेवा का कोई भी सदस्य,-

(i) किसी यूनियन, श्रमिक यूनियन और राजनीतिक संघ का सदस्य नहीं होगा, या किसी भी

संघ या संघ का भाग इत्यादि बनाने पर निर्बन्धन। प्रकार से सहयोजित नहीं होगा;

(ii) किसी पुस्तक, पत्र या अन्य दस्तावेज के बारे में प्रैस को संसूचित नहीं करेगा या का प्रकाशन नहीं करेगा या करवाएगा, ऐसी संसूचना या प्रकाशन के सिवाय जो उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने में लाभदायक है या विशुद्ध रूप से साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक विशेषता वाला है।

नियम बनाने की शक्ाि। 52. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के सम्मुख, जब वह सत्र में हो, रखा जाएगा।

शक्तियों का प्रत्यायोजन। 53. निदेशक, आदेश द्वारा, निदेश दे सकता है कि इस अधिनियम के द्वारा या के अधीन उसे प्रदत्त किसी शक्ति या अधिरोपित किसी कर्तव्य का, ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन, जो आदेष में विनिर्दिष्ट की जाएं, आदेश में यथा विनिर्दिष्ट ऐसे अधिकारी द्वारा प्रयोग की जाएगी और निर्वहन किया जाएगा।

कठिनाईयां दूर करने की शक्ति। 54. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाषित आदेष द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अनुअसंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो इसे कठिनाई दूर करने के लिए आवष्यक या समीचीन प्रतीत होंः परन्तु कोई भी ऐसा आदेश, इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात्‌ नहीं किया जाएगा।176 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 6, 2022 (ASAR. 15, 1944 SAKA) (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके किए जाने के पश्चात्‌, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा।

55. तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई इससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबन्धों का अध्यारोही प्रभाव होगा।

अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना।

निरसन तथा व्यावृत्ति ।

56. (1) हरियाणा अग्निषमन सेवा अधिनियम, 2009 (2009 का 12), इसके द्वारा, निरसित किया जाता है।

(2) इस अधिनियम की कोई भी बात,-

(i) इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व अर्जित, प्रोद्‌भूत या उपगत किसी अधिकार, हित

या दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगी ; या

(ii) ऐसे अधिकार, हित या दायित्व के संबंध में किन्हीं विधिक कार्यवाहियों या उपाय पर

प्रभाव नहीं डालेगी ; या

(iii) इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व की गई या सहन की गई किसी बात पर प्रभाव

नहीं डालेगी ; या

(iv) निरसित अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम पर प्रभाव नहीं डालेगी, जो

इस अधिनियम से अनुअसंगत है।

बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

9736—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 06 July 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2022-07-06.Extra-Ordinary_Leg-No-14-2022/. Archive identifier in.gazette.haryana.2022-07-06.Extra-Ordinary_Leg-No-14-2022.