Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY Published by Authority
© Govt. of Haryana
No. 125–2022/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 13 जुलाई, 2022
(22 आषाढ़, 1944 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग I अधिनियम
1. हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022
177-192 (2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 15)
(केवल हिन्दी में)
भाग II अध्यादेष
कुछ नहीं
भाग III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं
भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं
(lxv)HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 177 भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 13 जुलाई, 2022
संख्या लैज.15/2022.- दि हरियाणा गुड कन्डक्ट प्रिजनरस (टेमपररि रिलीज) ऐक्ट, 2022 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 01 जुलाई, 2022 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 15
हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 सदाचार के लिए कतिपय षर्तों पर बंदियों की अस्थाई रिहाई के लिए उपबंध करने हेतु अधिनियम
संक्षिप्त नाम, विस्तार, लागूकरण तथा प्रारंभ।
परिभाषाएं। भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :- 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022, कहा जा सकता है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में है। (3) यह ऐसे सभी सिद्धदोष ठहराए गए बंदियों पर लागू होगा, जो हरियाणा में अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों के आदेषों द्वारा परिरूद्ध हैं। (4) यह ऐसी तिथि को लागू होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस निमित नियत करे। 2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) "सक्षम प्राधिकारी" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार
द्वारा यथा अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी;
(ख) "सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, भारत में दण्ड न्यायालय की षक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी न्यायालय या सेना न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा आजीवन कारावास या कारावास के दंडादेष के अधीन किसी जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था में परिरूद्ध कोई व्यक्ति;
(ग) "पुलिस उपायुक्त" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस उपायुक्त, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थायी रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है;
(घ) "जिला मजिस्ट्रेट" से अभिप्राय है, जिले का जिला मजिस्ट्रेट, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है;
(ङ) "प्ररूप" से अभिप्राय है, इस अधिनियम से संलग्न प्ररूप; (च) "फरलो" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट से अधिक समय अवधि के लिए सिद्धदोष बन्दी के अच्छे व्यवहार तथा आचरण के कारण प्रोत्साहन के रूप में उसकी अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई। फरलो अवधि की गणना इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों में यथा विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन दी गई सजा के लिए की जा सकती है;
(छ) "कट्टर सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, कोई अपराधी-
(i) जिसे निम्नलिखित में से किसी भी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया
हैं :- (1) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की
धारा 392 या धारा 394 के अधीन लूट; या
178 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA)(2) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की
धारा 395 या धारा 396 या धारा 397 के अधीन डकैती; या
(3) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की
धारा 364-क के अधीन फिरौती के लिए अपरहण; या
(4) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 302 के साथ पठित धारा 387 या धारा 307 के साथ पठित धारा 387 के अधीन जबरदस्ती वसूली के लिए हत्या या हत्या करने का प्रयास; या
(5) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376 या धारा 302 के साथ पठित धारा 377 के अधीन बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या हत्या के साथ अप्राकृतिक अपराध; या
(6) सोलह वर्ष से कम आयु के किसी बालक के साथ बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या अप्राकृतिक अपराध; या (7) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376-क या धारा 376-ग या धारा 376-घ या धारा 376-ङ के अधीन आने वाला सामूहिक बलात्कार या बलात्कार; या
(8) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 302 के अधीन विभिन्न प्रथम सूचना रिपोर्टो (एफ.आई.आरज़) में दो या से अधिक मामलों में सीरियल किलिंग अर्थात् हत्या; या
(9) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 302 के अधीन हत्या, यदि मामले के न्यायनिर्णय में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि अपराधी संविदा हत्या में शामिल है; या
(10) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 458 या धारा 459 या धारा 460 के अधीन छिपकर अनुधिकार गृह प्रवेष तथा सिद्धदोष ठहराना ; या
(11) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 121 या धारा 121-क या धारा 122 या धारा 123 या धारा 124 या धारा 124-क के अधीन अपराध; या
(12) अवयस्कों को शामिल करते हुए अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (1956 का केन्द्रीय अधिनियम 104) की धारा 3, 4 या 5 के अधीन या भारतीय दण्ड संहिता,1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 366-क, 366-ख, 372 या धारा 373 के अधीन अनैतिक व्यापार; या
(13) स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केन्द्रीय अधिनियम 61) की धारा 15(ग) या धारा 17(ग) या धारा 18(ख) या धारा 19 या धारा 20(ग) या धारा 21(ग) या धारा 22(ग) या धारा 23(ग) या धारा 24 या धारा 27-क के अधीन अपराध; या
(14) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 224 या धारा 225 के अधीन विधिपूर्ण अभिरक्षा से भागना या भागने में सहायता करना और सिद्धदोष ठहराना;
(ii) जिसे अपनी दोषसिद्धि से ठीक पूर्व पाँच वर्ष की अवधि के दौरान, उपरोक्त खण्ड (i) के अधीन आने वाले अपराधों के सिवाय, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) के अध्याय XII या XVII में वर्णित उसी संव्यवहार का भाग रूप नहीं होते हुए विभिन्न अवसरों पर किए गए एक या से अधिक अपराधों के लिए पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया है और दण्डादिष्ट किया गया है और ऐसी दोषसिद्धि के परिणामस्वरूप कम से कम बारह मास की अवधि का कारावास भोग चुका हैः
परन्तु यदि दोषसिद्धि, जो अपील या पुनरीक्षण में अपास्त की गई है, तो उसके संबंध में भोगे गए किसी कारावास को उपरोक्त प्रयोजन के लिए गणना में नहीं लिया जाएगा; याHARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 179 (iii) जिसे मृत्यु दण्ड या प्राकृतिक जीवन तक कारावास से दण्डादिष्ट किया गया
है; या
(iv) जेल परिसरों में उसके अधिकार में बेतार संचार यंत्र या इसके घटक या कोई अप्राधिकृत इलैक्ट्रानिक यंत्र पाया गया है या उसका उपयोग करते हुए पाया गया है; या
(v) जो ऐसी तिथि, जिसको उस द्वारा पैरोल या फरलो की अवधि, जिस के लिए उसे रिहा किया गया था, की समाप्ति पर इस प्रकार आत्मसमर्पण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करने में असफल होता है या हुआ हैै; या
(vi) जो इस अधिनियम के अधीन जेल में परिरूद्ध होने के दौरान या अपनी अस्थाई रिहाई के दौरान सात वर्ष या से अधिक अवधि के लिए कारावास से दंडनीय कोई संज्ञेय अपराध करता है; या
(vii) जिसे कोई जेल अपराध करने हेतु सम्बन्धित अधीक्षक जेल द्वारा बडे़ दण्ड से दो बार से अधिक दण्डित किया गया है या सम्बन्धित न्यायालय द्वारा न्यायायिक कार्यवाहियों में सिद्धदोष ठहराया गया है ; या
(viii) जिसे संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (1980 का केन्द्रीय अधिनियम 65), आतंकवादी और विध्वंसकारी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1987 (1987 का केन्द्रीय अधिनियम 28), शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (1923 का केन्द्रीय अधिनियम 19), विदेषियों विषयक अधिनियम, 1946 (1946 का केन्द्रीय अधिनियम 31) या किसी अधिनियम (केन्द्रीय या राज्य) के अधीन परिरूद्ध रखा गया है या सिद्धदोष ठहराया गया है;
(ज) "सिद्धदोष बंदी के परिवार के सदस्य" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी का पति-पत्नी,
बालक, सहोदर भाई या बहन, माता-पिता, दादा-दादी तथा पोता-पोती;
(झ) "पैरोल" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी की अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई, जो निम्नुसार
वर्गीकृत की गई हैंः- (i) 'अभिरक्षा पैरोल' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित विनिर्दिष्ट अवधि के लिए तथा विनिर्दिष्ट कारणों के लिए सषत्र पुलिस अभिरक्षा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को मुलाकात के लिए (भारत के गणराज्य के राज्यक्षेत्र के भीतर) ले जाने तथा वहाँ से वापस लाने का मार्गरक्षण;
(ii) 'आपातकालीन पैरोल' से अभिप्राय है, अधीक्षक जेल द्वारा किसी सिद्धदोष बंदी को दी गई पैरोल, जब धारा 5 के अधीन सिद्धदोष बन्दी के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई है या गम्भीर अवस्था में है या सिद्धदोष स्वयं गम्भीर अवस्था में है;
(iii) 'नियमित पैरोल' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी
सिद्धदोष बंदी को प्रदान की गई पैरोल ;
() "पुलिस अधीक्षक" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस अधीक्षक, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है;
(ट) "दण्डादेष" से अभिप्राय है, अंतिम रूप से अपील या पुनरीक्षण या अन्यथा से दिया गया कारावास का दण्डादेष और इसमें एक या से अधिक दण्डादेष का कुलयोग भी शामिल है;
(ठ) "अधीक्षक जेल" से अभिप्राय है, जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था का प्रभारी
अधिकारी, जिसमें सिद्धदोष बंदी परिरूद्ध है;
(ड) "राज्य सरकार" से अभिप्राय है, प्रषासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ढ़) "अस्थाई रिहाई" से अभिप्राय है, अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल या नियमित
पैरोल या फरलो पर किसी सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई।
(2) इसमें प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो उन्हें कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 9), इसके अधीन बनाए नियमों तथा पंजाब जेल मैनुअल में दिए गए हैं।180 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 3. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को नियमित पैरोल प्रदान करेगा।
कतिपय शर्तों पर नियमित पैरोल पर सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई। (2) ऐसी अवधि, जिसके लिए इस धारा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को रिहा किया जा सकता है, कैलेंडर वर्ष में कुल मिलाकर दस सप्ताह होगी और सिद्धदोष बंदी इसे दो भागों में प्राप्त कर सकता हैः
परन्तु किसी सिद्धदोष महिला बंदी के प्रसव के मामले में, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि छह मास की होगी, जो जेल के चिकित्सा अधिकारी द्वारा यथा प्रमाणित प्रसव की सम्भावित तिथि से एक मास पूर्व शुरू होगी।
(3) सिद्धदोष बंदी, जिसने दोषसिद्धि के बाद एक वर्ष का दण्डादेष पूरा नहीं किया है, नियमित पैरोल का पात्र नहीं होगाः
परन्तु पुरूष के मामले में सत्तर वर्ष या उससे अधिक तथा महिला के मामले में पैंसठ वर्ष या उससे अधिक आयु के सिद्धदोष वृद्ध बंदी पर निर्बन्धन अधिरोपित नहीं होगा।
(4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, की रिपोर्ट और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिषें, सक्षम प्राधिकारी को किसी सिद्धदोष बन्दी की नियमित पैरोल पर अस्थाई रिहाई के लिए इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएंगी।
(5) इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि, किसी बन्दी की वास्तविक सजा की ओर नहीं गिनी जाएगी। कोई भी सामान्य माफी इस अवधि के लिए प्रदान नहीं की जाएगी।
4. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को फरलो प्रदान करेगा।
कतिपय शर्तों पर फरलो पर सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई।
(2) ऐसी अवधि, जिस के लिए इस धारा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को रिहा किया जा सकता है, तीन सप्ताह होगी तथा इस अवधि को भागों में प्राप्त नहीं किया जाएगाः
परन्तु सिद्धदोष बन्दी, जिसने दण्डादेष की अवधि के मामले में कुल दण्डादेष का तीन/चौथाई और आजीवन कारावास के मामले में दस वर्ष की सजा पूरी कर ली है, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि चार सप्ताह होगी और इस अवधि को भागों में प्राप्त नहीं किया जाएगा। (3) सिद्धदोष बंदी, जिसने दोषसिद्धि के बाद तीन वर्ष की सजा पूरी नहीं की है, फरलो के लिए पात्र नहीं होगाः
परन्तु सिद्धदोष बंदी, जिसे किसी जेल अपराध के लिए या पिछले तीन वर्ष के दौरान अस्थाई रिहाई की शर्ताें की उल्लंघना के लिए दण्डित किया गया है, फरलो के लिए पात्र नहीं होगाः परन्तु यह और कि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केन्द्रीय अधिनियम 61) के अधीन या राजद्रोह या हत्या के साथ बलात्कार या हत्या के साथ लूट या डकैती या फिरौती वसूलने या जबरदस्ती वसूली के आषय के साथ हत्या या बारह वर्ष से कम आयु के बालक के साथ लैगिंग अपराध के लिए दण्डादिष्ट या प्राकृतिक जीवन तक कारावास के लिए दण्डादिष्ट सिद्धदोष बंदी फरलो के लिए पात्र नहीं होंगे।
(4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, की रिपोर्ट और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिष, सक्षम प्राधिकारी को किसी सिद्धदोष बंदी की फरलो पर अस्थाई रिहाई के लिए इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।
(5) धारा 9 की उपधारा (3) के खण्ड (घ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि की गणना किसी बंदी द्वारा भोगी जा रही वास्तविक सजा के लिए की जाएगी। कतिपय शर्तों पर आपातकालीन पैरोल पर सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई।
5. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को आपातकालीन पैरोल प्रदान करेगा। यदि किसी सिद्धदोष बन्दी के परिवार के किसी सदस्य की मुत्यु हो गई है या गम्भीर अवस्था में है या सिद्धदोष बंदी स्वयं गम्भीर अवस्था में है, तो उसके द्वारा भोगी जा रही सजा की अवधि पर विचार किए बिना किसी सिद्धदोष बंदी को किसी भी समय आपातकालीन पैरोल प्रदान की जाएगी।
(2) सक्षम प्राधिकारी, संबंधित पुलिस थाना के प्रभारी के माध्यम से या जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक जेल की पदवी से नीचे का न हो, के माध्यम से तथ्यों का सत्यापन करेगा, जो चौबीस घण्टे के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सिद्धदोष बंदी या उसके परिवार के सदस्य की गम्भीर अवस्था के तथ्य, सम्बन्धित चिकित्सा अधिकारी द्वारा सत्यापित किए जाएंगे तथा सम्बन्धित सिविल सर्जन द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किए जाएंगे।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 181 (3) अवधि, जिसके लिए किसी सिद्धदोष बंदी को इस धारा के अधीन रिहा किया जा सकता है, सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णित की जाएगी, जो कैलेंडर वर्ष में कुल मिलाकर चार सप्ताह से अधिक नहीं होगी तथा अवधि भागों में भी हो सकती है।
(4) इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि की गणना किसी बन्दी की वास्तविक सजा के लिए नहीं की जाएगी। कोई भी सामान्य माफी इस अवधि के लिए प्रदान नहीं की जाएगी।
6. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्ताें तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को अभिरक्षा पैरोल प्रदान करेगा।
(2) धारा 3, 4 तथा 5 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी कट्टर सिद्धदोष बन्दी आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो पर रिहा किए जाने के लिए हकदार नहीं होगाः
अभिरक्षा पैरोल पर सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई तथा कट्टर सिद्धदोष बंदियों के लिए विषेष उपबंध। परन्तु कट्टर सिद्धदोष बंदी को उसके परिवार के सदस्य की अंत्येष्टि तथा अपने बालकों या सहोदर भाईयों या बहनों की शादी में उपस्थित होने के लिए अभिरक्षा पैरोल प्रदान की जा सकती है। (3) उपधारा (1) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कट्टर सिद्धदोष बन्दी, जिसे मृत्यु दण्ड या प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा नहीं दी गई है और पिछले पांच वर्ष के दौरान कोई बड़ा जेल अपराध या कोई संज्ञेय अपराध किए बिना, अपनी सजा के पाँच वर्ष (विचारण अवधि के अधीन अधिकतम दो वर्ष सहित) पूरे कर लिए हैं, सिद्धदोष बंदियों के बराबर आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो के लिए हकदार होगा। पांच वर्ष की ऐसी अवधि की गणना उसके नवीनतम अपराध या कृत्य, जो कट्टर सिद्धदोष बंदी की श्रेणी में आता है, की तिथि से की जाएगीः परन्तु कट्टर सिद्धदोष बंदी, जिसे प्राकृतिक जीवन तक कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया है, सिद्धदोष बंदियों के बराबर आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल के लिए केवल सात वर्ष की कारावास की सजा पूरी होने के बाद ही पात्र होगाः
परन्तु यह और कि इस प्रकार अस्थाई रूप से रिहा किया गया कोई कट्टर सिद्धदोष बंदी, पैरोल या फरलो की किसी शर्त का उल्लंघन करता है या कोई संज्ञेय अपराध करता है, तो उसे आगामी तीन वर्ष के लिए ऐसी रिहाई से वंचित कर दिया जाएगा।
(4) कट्टर सिद्धदोष बंदी सहित सिद्धदोष बंदी को अपने परिवार के सदस्य की अंत्येष्टि या अपने बालकों या सहोदर भाईयों या बहनों की शादी में उपस्थित होने के लिए उसकी सजा की अवधि पूरी होने पर विचार किए बिना, अभिरक्षा पैरोल प्रदान की जा सकती है।
(5) सक्षम प्राधिकारी, पुलिस थाना, जहां से बंदी अभिरक्षा पैरोल प्राप्त करना चाहता है, के प्रभारी के माध्यम से या जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक जेल की पदवी से नीचे का न हो, के माध्यम से अभिरक्षा पैरोल प्रदान करने हेतु तथ्यों का सत्यापन करेगा।
(6) अभिरक्षा पैरोल, यात्रा समय को निकालते हुए एक प्रसंग के लिए छह घंटे से अधिक के लिए प्रदान नहीं की जाएगी और अभिरक्षा पैरोल के लिए पुलिस एस्कोर्ट गार्ड, जिले के पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त, जिसकी अधिकारिता में जेल अवस्थित है, द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। अभिरक्षा पैरोल की अवधि, जेल में बिताई गई अवधि के रूप में समझी जाएगी।
7. धारा 3, 4 तथा 5 के अधीन किसी बंदी की अस्थाई रिहाई की अवधि की गणना करने के प्रयोजन हेतु, जेल से प्रस्थान और में पहुँचने की तिथियों को छोड़कर की जाएगी।
धारा 3, 4 तथा 5 के अधीन अवधि की गणना करते हुए कतिपय दिनों को छोड़ना।
कतिपय मामलों में बंदी का रिहाई के लिए हकदार नहीं होना। 8. इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी सिद्धदोष बंदी, इस अधिनियम के अधीन रिहाई के लिए हकदार नहीं होगा, यदि, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पर या अन्यथा से, राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि हो जाती है कि उसकी रिहाई से राज्य की सुरक्षा खतरे में पड़ने या लोक व्यवस्था बनाए रखने में या शांति भंग करने में यथोचित आषंका पैदा होनेे की संभावना है।
9. (1) ऐसी अवधि की समाप्ति, जिसके लिए सिद्धदोष बंदी को इस अधिनियम के अधीन रिहा किया जाता है, पर वह आत्मसम्पर्ण के दिन सांय 5ः00 बजे से पूर्व उस जेल में आत्मसमर्पण करेगा, जहाँ से उसे रिहा किया गया था। नषे की अवस्था में अस्थाई रिहाई से आत्मसमर्पण को जेल अपराध के रूप में माना जाएगा।
अस्थाई रिहाई अवधि समाप्त होने पर सिद्धदोष बंदी का आत्मसमर्पण करने का दायित्व और समय अवधि से अधिक ठहरने के परिणाम।182 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) (2) यदि कोई सिद्धदोष बंदी उपधारा (1) द्वारा यथा अपेक्षित उस तिथि, जिसको उसने आत्मसमर्पण करना चाहिए, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो यह अपराध के समतुल्य होगा और किसी पुलिस अधिकारी या जेल अधिकारी द्वारा किसी वारंट के बिना गिरफ्तार किया जाएगा और उस जेल, जिससे वह रिहा हुआ था, के प्रभारी अधिकारी को उसकी सजा के असमाप्त भाग को भोगने के लिए सपुर्द कर दिया जाएगा। (3) यदि कोई सिद्धदोष बन्दी, उस तिथि, जिसको उसे आत्मसमपर्ण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर उस जेल अधीक्षक के सम्मुख आत्मसमर्पण कर देता है, जिससे वह रिहा किया गया था, किन्तु अधीक्षक जेल को संतुष्ट नहीं कर पाता कि उस अवधि, जिसके लिए उसे रिहा किया गया था, के समाप्त होने पर, उसे तुरंत आत्मसमपर्ण करने के लिए किसी पर्याप्त कारण से रोका गया था, तो अधीक्षक जेल बंदी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, निम्नलिखित सभी या कोई भी शास्ति अधिरोपित कर सकता है, अर्थात्ः-
(क) अधिक समय तक ठहरने के प्रत्येक दिन के लिए माफी में अधिकतम पांच दिन की
कटौती करना;
(ख) अधिकतम एक मास की अवधि के लिए कैन्टीन रियायत बन्द करना; (ग) अधिकतम तीन मास की अवधि के लिए मुलाकात (इलैक्ट्रानिक मुलाकात सहित)
रियायत रोकना;
(घ) धारा 4 के अधीन बन्दी की फरलो पर अस्थाई रिहाई की अवधि को उसकी सजा
में नहीं गिना जाना;
(ङ) चेतावनी; (च) उच्चतर से किसी निम्नतर श्रेणी या ग्रेड में कमी करना।
आत्मसमर्पण करने में असफल रहने पर शास्ति।
10. (1) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन किसी अपराध का सिद्धदोष बन्दी, किसी भी प्रकार के कारावास, जो दो वर्ष से कम नहीं होगा, जो तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और एक लाख रूपए तक के जुर्माने से दण्डनीय होगा। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस धारा के अधीन दिया गया दण्ड, बन्दी को उस अपराध के लिए दिए गए दण्ड (दण्डों) के अतिरिक्त होगा, जिसके लिए उसे पूर्व में सिद्धदोषी ठहराया गया था तथा ऐसे सभी पूर्व दण्ड (दण्डों) के पूरा होने के बाद शुरू होगा तथा इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के विचारण के दौरान बिताई गई अवधि, ऐसी अवधि के सिवाय, जो केवल इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के लिए बन्दी द्वारा व्यतीत की थी, इस अधिनियम के अधीन दिए गए दण्ड के विरूद्ध मुजरा नहीं होगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन दण्डनीय अपराध को संज्ञेय और अजमानतीय समझा जाएगा। (3) जमानत की पूरी राषि, अधीक्षक जेल की सिफारिष पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जब्त की जाएगी। (4) ऐसा सिद्धदोष बंदी, धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट किसी भी दण्ड के लिए भी दायी होगा।
सामान्य उपबंध। 11. (1) कोई भी सिद्धदोष बंदी केवल तभी इस अधिनियम के अधीन नियमित पैरोल या फरलो या आपातकालीन पैरोल या अभिरक्षा पैरोल के लिए विचार करने का हकदार होगा, यदि वह उन सभी मामलों में जमानत पर है, जो किसी न्यायालय या सक्षम प्राधिकरण के सम्मुख उसके विरूद्ध लम्बित हैं। (2) (क) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य से बाहर की अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा सिद्धदोष ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से हरियाणा की किसी जेल में कारावास भोग रहे हैं, अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे तथा उस राज्य के सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे दोषसिद्ध ठहराया गया था, को उस राज्य के पैरोल या फरलो अधिनियम या नियमों के अनुसार विचारण या मंजूरी या निपटान के लिए भेजा जाएगा। (ख) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य के भीतर अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा दोषी ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से अन्य राज्य की जेल में कारावास भोग रहे हैं, सम्बद्ध अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे और हरियाणा राज्य में उस सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे सिद्धदोष ठहराया गया था, को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विचारण/मंजूरी/निपटान के लिए भेजेगा।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 183 (ग) हरियाणा राज्य के किसी सिद्धदोष बंदी की दषा में, जो हरियाणा से अन्यथा राज्य (राज्यों) का भी सिद्धदोषी है तथा हरियाणा या अन्य राज्य की जेल में परिरूद्ध है, उस राज्य के सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसके पैरोल या फरलो के मामले पर विचार किया जाएगा, जहां से उसे सिद्धदोषी ठहराया गया है और अधिक गम्भीर अपराध के लिए सजा सुनाई गई है। यदि, बंदी को एक ही अपराध के लिए अन्य राज्य (राज्यों) में सिद्धदोष ठहराया गया है, तो उसका पैरोल या फरलो का मामला, उस सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णीत किया जाएगा, जहां से वह पहले सिद्धदोष ठहराया गया है। ऐसे मामलों में, सभी अन्य राज्य (राज्यों) से सहमति या निराक्षेप प्रमाण-पत्र भी प्राप्त किए जाएंगेः
परन्तु यदि एक मास के भीतर निराक्षेप प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं होता है, तो यह समझा जाएगा कि राज्य (राज्यों) को पैरोल या फरलो की मंजूरी के लिए कोई आपत्ति नहीं है।
(घ) कोई सिद्धदोष बंदी, जो हरियाणा राज्य से अन्यथा राज्य का निवासी है, किन्तु हरियाणा राज्य का सिद्धदोष बंदी है, तो ऐसे सिद्धदोष बंदी की पैरोल या फरलो का मामला, अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किया जाएगा तथा स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी को भेजेगा और उसकी एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जहाँ से बन्दी पैरोल या फरलो लेना चाहता है, को उसकी रिपोर्ट या सिफारिष विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी को भेजने के लिए प्रेषित की जाएगी।
(ङ) सिद्धदोष बंदी के मामले में, जिसे किसी जनरल सेना न्यायालय द्वारा दण्डादिष्ट किया जाता है, तो सेना अधिनियम, 1950 (1950 का केन्द्रीय अधिनियम 46) की धारा 179 के खण्ड (घ) के उपबंधों के अनुसार सेना प्राधिकारियों द्वारा पैरोल या फरलो प्रदान की जाएगीः
परन्तु ऐसे सिद्धदोष बंदी को अधीक्षक जेल द्वारा अभिरक्षा पैरोल प्रदान की जा
सकती है।
(3) कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसको किसी जेल अपराध के लिए छोटा दण्ड दिया गया है, ऐसे अपराध की तिथि से छह मास के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगा; और कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसे किसी जेल अपराध के लिए बड़ा दण्ड दिया गया है या जिसने अस्थाई रिहाई की शर्तों की उल्लंघना की है, ऐसे अपराध की तिथि से एक वर्ष के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगाः
परन्तु ऐसे सिद्धदोष बंदी को अपने परिवार के सदस्यों की अंत्येष्टि में उपस्थित होने के लिए अभिरक्षा पैरोल पर भेजा जा सकता है।
(4) सिद्धदोष बंदी की पष्चात्वर्ती पैरोल या फरलो का मामला, अंतिम स्वीकृति पैरोल या फरलो प्राप्त करने के बाद, अस्थायी रिहाई के दौरान या जेल में उसके आत्मसमपर्ण के एक मास बाद, जो भी पहले हो, उसके आचरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त के माध्यम से संबंधित पुलिस थाना के प्रभारी से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आरम्भ किया जाएगाः
परन्तु इस तथ्य पर विचार किए बिना कि सिद्धदोष बंदी की अन्य पैरोल या फरलो का मामला अभी विचाराधीन है, उसे किसी भी समय आपातकालीन पैरोल प्रदान की जाएगी।
(5) किसी भी मामले में पैरेाल या फरलो बढ़ाई नहीं जाएगी।
(6) साधारणतः सह-अभियुक्त सिद्धदोष बंदियों को साथ-साथ नियमित पैरोल या फरलो प्रदान नहीं की जाएगी।
(7) आपातकालीन पैरोल वारंट की वैधता अवधि, आदेष जारी होने की तिथि से पन्द्रह दिन होगी।
(8) नियमित पैरोल या फरलो वारंट की वैधता अवधि, आदेष जारी होने की तिथि से चार मास होगी। रिहाई या आत्मसमर्पण की विषिष्ट तिथि, रिहाई वारंट में नियत नहीं होगी।
(9) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन आपराधिक मामला, उस पुलिस थाना में दर्ज किया जाएगा, जहां पात्र सिद्धदोष बंदी द्वारा अस्थाई रिहाई की अवधि व्यतीत की जा रही है या आवेदन में जिसका पता दिया गया है। हरियाणा राज्य के बाहर का पता होने के मामले में, आपराधिक मामला, उस पुलिस थाने में दर्ज किया जाएगा, जिसकी अधिकारिता में जेल अवस्थित है।184 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) (10) सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमित पैरोल या फरलो अस्वीकार करने के मामले में, अस्वीकृति की तिथि से तीन मास की अवधि से पूर्व समरूप प्रयोजन हेतु अन्य आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
(11) किसी भी सिद्धदोष बंदी को पैरोल या फरलो पर रिहा करने से पूर्व, सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के लिए वह कम से कम दो जमानतियों सहित न्यूनतम एक लाख रूपए की राषि, जिसे तीन लाख रूपए तक बढाया जा सकता है, का बंधपत्र निष्पादित करेगा। ब्ांधपत्र में यह शर्त होगी कि सिद्धदोष बंदी या कट्टर सिद्धदोष बंदी, जैसी भी स्थिति हो, पैरोल या फरलो की अवधि समाप्त होने से पूर्व अधीक्षक जेल के सम्मुख आत्मसमर्पण करेगाः
परन्तु कट्टर सिद्धदोष बंदी के मामले में, सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के लिए कम से कम दो जमानतियों सहित न्यूनतम दो लाख रूपए की राषि, जिसे पाँच लाख रूपए तक बढाया जा सकता है, का बंधपत्र निष्पादित करेगा :
परन्तु यह और कि उन सिद्धदोष बंदियों तथा कट्टर सिद्धदोष बंदियों, जिन्होंने दो नियमित पैरोल या एक फरलो शांतिपूर्वक प्राप्त की है, के लिए जमानत राषि क्रमषः एक लाख रूपए तथा तीन लाख रूपए से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह और कि सक्षम प्राधिकारी लिखित में कारणों को लिपिबद्ध करते हुए अधिकतम पांच की सीमा तक दो से अधिक जमानतियों की मांग कर सकता है।
(12) सक्षम प्राधिकारी, उपधारा (11) के अधीन बंधपत्र को स्वीकार करते समय ऐसी शर्ते अधिरोपित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे। जमानतियों की उपयुक्तता तथा पर्याप्तता सक्षम प्राधिकारी द्वारा अवधारित की जाएगी।
पैरोल या फरलो के लिए प्रक्रिया।
12. (1) पैरोल या फरलो प्रदान करने हेतु आवेदन, सिद्धदोष बंदी द्वारा स्वयं या उसके परिवार के वयस्क सदस्य द्वारा अधीक्षक जेल के सम्मुख प्ररूप क में प्रस्तुत किया जा सकता है।
(2) अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल के सम्बन्ध में किसी सिद्धदोष बंदी से आवेदन की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक को सूचित करते हुए अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल, जैसी भी स्थिति हो, के तथ्यों का सत्यापन करने के लिए जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक की पदवी से नीचे का न हो, को नियुक्त करते हुए सम्बन्धित पुलिस थाना के प्रभारी को तुरंत अनुरोध भेजेगा तथा स्वयं को संतुष्ट करेगा कि आवेदन में दिए गए तथ्य वास्तविक हैं और इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार हैं।
(3) नियमित पैरोल या फरलो के लिए किसी सिद्धदोष बंदी सेे आवेदन की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, नियमित पैरोल या फरलो प्रदान करने के लिए पात्र सिद्धदोष बंदी का मामला पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, संबंधित पुलिस थाने के प्रभारी को एक प्रति प्रेषित करते हुए जिला मजिस्ट्रेट तथा सक्षम प्राधिकारी को भेजेगा। यदि, सिद्धदोष बंदी नियमित पैरोल या फरलो के लिए पात्र नहीं पाया जाता है, तो अधीक्षक जेल स्पीकिंग ऑडर पारित करेगा।
(4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करेगा।
(5) उन सिद्धदोष बंदियों के मामले में, जिन्होंने शांतिपूर्वक दो नियमित पैरोल या एक फरलो प्राप्त की है, एक कैलेंडर वर्ष में केवल एक ही पुलिस सत्यापन आवष्यक होगा। तथापि, सक्षम प्राधिकारी अपने विवेक से नई रिपोर्ट की मांग कर सकता है।
(6) जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (11) में यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी को अपनी सिफारिष या गैर-सिफारिष प्रस्तुत करेगा।
(7) सक्षम प्राधिकारी, सम्बन्धित क्वार्टर से सिफारिष या रिर्पोट प्राप्त होने के बाद, निर्णय लेगा तथा प्ररूप ख के अनुसार नियमित पैरोल या फरलो रिहाई वारंट जारी करेगा तथा नियमित पैरोल या फरलो को अस्वीकार करने की दषा में, स्पीकिंग ऑडर पारित किया जाएगा। स्वीकृति या अस्वीकृति, जैसी भी स्थिति हो, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट तथा अधीक्षक जेल को भेजी जाएगी और इसकी एक प्रति पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित सिद्धदोष बंदी को भी भेजी जाएगी।
(8) सक्षम प्राधिकारी से पैरोल या फरलो रिहाई वारंट की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, संबंधित बंदी तथा बंदी के परिवार के ऐसे सदस्य, जिसे बंदी रिहाई प्राप्त करने के लिए क्रमषः प्ररूप ग तथा घ के अनुसार व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानत बंधपत्र के निष्पादन की व्यवस्था करने के लिए उस निमित निर्दिष्ट करे, को सूचित करेगाःHARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 185 परन्तु सिद्धदोष बंदी के लिखित अनुरोध पर, अधीक्षक जेल, रिहाई आदेष की प्राप्ति की तिथि से पांच दिन की अवधि के लिए उसकी रिहाई मुल्तवी कर सकता है।
(9) पैरोल या फरलो पर सिद्धदोष बंदी को रिहा करने से पूर्व, उसे शर्तों को पढ़ाया जाएगा और समझाया जाएगा और उसके आत्मसमपर्ण की तिथि के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा। उसके बाद, उसकी रिहाई आदेष पर उसके अंगूठे का निषान तथा हस्ताक्षर प्राप्त किए जाएंगे तथा ऐसी रिहाई के बारे में सूचना प्ररूप ङ के अनुसार संबंधित प्राधिकारियों को भेजी जाएगी।
(10) संबंधित पुलिस थाना का प्रभारी, अस्थाई रिहाई के दौरान सिद्धदोष बंदी के आचरण और गतिविधियों पर नजर रखेगा तथा इस सम्बन्ध में पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक के माध्यम से यथासंभव शीघ्रता से अधीक्षक जेल को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, किन्तु एक मास पष्चात् नहीं।
(11) किसी नियमित पैरोल या फरलो के लिए आवेदन पर निर्णय लेने की प्रक्रिया, विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा शीघ्रता से पूरी की जाएगी। विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा किसी नियमित पैरोल या फरलो के आवेदन की प्रक्रिया के लिए अधिकतम समय सीमा निम्नानुसार होगीः-
एक सप्ताह
अधीक्षक जेल
पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक दो सप्ताह
जिला मजिस्ट्रेट दो सप्ताह
सक्षम प्राधिकारी दो सप्ताहः
परन्तु यदि सिफारिष या रिपोर्ट नियत समय अवधि के भीतर प्राप्त नहीं होती है, तो सक्षम प्राधिकारी यह मान सकता है कि बंदी के विरूद्ध कुछ भी प्रतिकूल नहीं है और तदनुसार आवेदन पर निर्णय ले सकता है।
नियम बनाने की शक्ति। 13. (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथा षीघ्र, राज्य विधान मण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा, जब सत्र हो।
निरसन तथा व्यावृत्तियां। 14. हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 1988 (1988 का 28), इसके द्वारा, निरसित किया जाता हैः
परन्तु ऐसा निरसन निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेगा-
(क) इस प्रकार निरसित अधिनियम के पूर्व प्रवर्तन या उसके अधीन सम्यक् रूप से की गई या
सहन की गई किसी बात; या
(ख) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन अर्जित या उपगत कोई अधिकार, विषेषाधिकार,
बाध्यता या दायित्व; या
(ग) इस प्रकार निरसित अधिनियम के विरूद्ध किए गए किसी अपराध के बारे में उपगत कोई
शास्ति, जब्ती या दण्ड; या
(घ) उपरोक्त किसी ऐसे अधिकार, विषेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, जब्ती या दण्ड के बारे में कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार; और ऐसे किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार को संस्थित किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है, और कोई ऐसी शास्ति, जब्ती या दण्ड अधिरोपित किया जा सकता है मानो यह अधिनियम पारित ही नहीं हुआ थाः
परन्तु यह और कि इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई कोई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी और तदनुसार तब तक लागू रहेगी जब तक इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या की गई किसी कार्रवाई द्वारा अधिक्रांत नहीं की जाए।186 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) प्ररूप क
[देखिए नियम 12(1)]
(पैरोल/फरलो के लिए सिद्धदोष बंदी या उसके परिवार के किसी वयस्क सदस्य द्वारा भरा जाने वाला आवेदन-पत्र) 1. बन्दी की संख्या तथा नाम : 2. पिता का नाम : 3. जाति : 4. पूर्ण निवास पता : 5. रिहाई के लिए कारणः आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो/अभिरक्षा पैरोल :
(आवेदक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निषान)
पात्र सिद्धदोष बन्दी द्वारा घोषणा मैं, इसके द्वारा, घोषित करता हूँ कि मैं, हरियाणा सदाचारी बन्दी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 की धारा 3 या 4 या 5 या 6 के अधीन अस्थाई रूप से (आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो/अभिरक्षा फरलो) रिहा होने के लिए अनुरोध करता हूँ तथा इस प्रकार रिहा हो जाने पर, अपनी रिहाई शर्तों का निष्ठापूर्वक पालन करूंगा।
(आवेदक के हस्ताक्षर या अंगूठे का निषान) (अधीक्षक जेल द्वारा भरा जाना) आकस्मिक/कट्टर 1. बन्दी की संख्या, नाम तथा आयु : 2. प्रथम सूचना रिपोर्ट के ब्यौरे : 3. जुर्माने सहित दोषसिद्धि के पूर्ण ब्यौरे : 4. आवेदन पत्र की तिथि तक जेल में
व्यतीत की गई वास्तविक अवधि के ब्यौरे वर्ष मास दिन (_______से_______तक)
5. प्राप्त माफी : वर्ष मास दिन 6. असमाप्त दण्डादेष : वर्ष मास दिन 7. अन्य दोषसिद्धि मामलों के ब्यौरे, यदि कोई हो : 8. लम्बित मामलों के ब्यौरे, यदि कोई हो : 9. बन्दी की शारीरिक तथा मानसिक स्थिति : 10. जेल में आचरण
(संलग्न किए जाने वाले अपराधों के ब्यौरे, यदि कोई हो) :
11. (i) तिथि, जिसको अन्तिम अस्थाई रिहाई दी गई थी :
(ii) तिथि, जिसको अन्तिम अस्थाई रिहाई अस्वीकृत की गई थी : 12. क्या बन्दी अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार रिहाई के लिए पात्र है ? 13. जेल अधीक्षक की सिफारिषें : 14. कोई अतिरिक्त कथन :
प्रविष्टियों की वारंट के साथ जांच की गई
अधीक्षक जेल
दिनांक..................... -- जेल--।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 187 प्ररूप ख
[देखिए नियम 12(7)]
बन्दियों की अस्थाई रिहाई के लिए वारंट
चूंकि बन्दी _______ (संख्या, नाम, पिता का नाम तथा पता) द्वारा, जो वर्तमान में _______ (दण्ड देने वाले न्यायालय का नाम) के वारंट दिनांक _______ (दोषसिद्धि की तिथि) के अधीन _______ जेल, _______में परिरूद्ध है, ने हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 की धारा 3 या 4 या 5 के अधीन अपनी अस्थाई रिहाई के लिए आवेदन किया है;
और चूंकि रिहाई प्राधिकारी सन्तुष्ट है कि आवेदक अधिनियम के अधीन रिहा किए जाने का हकदार है;
इसलिए, अब, रिहाई प्राधिकारी, इसके द्वारा, उक्त बन्दी को अभिरक्षा से आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर ______________ (रिहाई की अवधि) एक अवधि के लिए नीचे विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन अस्थाई रिहाई के लिए प्राधिकृत करता हूँ;
1. बन्दी अपनी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान ______________ (पूरा पता) पर निवास करेगा। वह उक्त अवधि के दौरान किसी ऐसे स्थान, जो रिहाई वारंट में विनिर्दिष्ट नहीं हैं, पर जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना नहीं जाएगा।
2. आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर अपनी अस्थाई रिहाई के समय पर बन्दी, जिला मजिस्ट्रेट _______ को उस स्थान के पूर्ण विवरण देगा, जहां वह अपनी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान रहना चाहता है तथा उक्त अवधि के दौरान अपने निवास में किसी पष्चात्वर्ती परिवर्तन की सूचना जिला मजिस्ट्रेट _______ को देगा।
3. बंदी, अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान शान्ति बनाए रखेगा तथा अच्छा आचरण करेगा।
4. उक्त अवधि ______________ (रिहाई की अवधि) की समाप्ति पर जिसके लिए बंदी को आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर अस्थाई रूप से रिहा किया गया है, उक्त बंदी उस अधीक्षक जेल, जिससे वह अपनी सजा की असमाप्त अवधि को भुगतने के लिए इस प्रकार रिहा किया जाता है, को आत्मसमर्पण करेगा।
5. बंदी अपनी आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर रिहाई से पूर्व जिला मजिस्टे्रट ______________ की सन्तुष्टि हेतु ______________ रिहाई वारंट में विनिर्दिष्ट शर्तों को निष्ठापूर्वक अनुपालना करने के लिए व्यक्तिगत बन्धपत्र और ______________ /- रूपए (_______रूपए ) (षब्दों में) की धनराषि की ______________ प्रतिभूति (प्रतिभूतियों की संख्या) प्रस्तुत करेगा। 6. जब प्रस्तुत जमानती दिवालिया हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो सरकार बन्दी को तुरन्त नया जमानती प्रस्तुत करने का आदेष देगी और यदि ऐसा जमानती प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार इस प्रकार कार्यवाही कर सकती है मानो इस आदेष की शर्तों की अननुपालना की गई थी।
7. इस अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (2) तथा (3) तथा धारा 10 के अधीन कार्रवाई के अतिरिक्त, बंधपत्र की किसी शर्त को पूरा नहीं करने के मामले में, बंधपत्र की राषि राज्य सरकार द्वारा जब्त कर ली जाएगी। यह दिनांक _______________को ________________ मेरे हस्ताक्षर से प्रदत्त।
मोहर
रिहाई प्राधिकारी के हस्ताक्षर पृष्ठांकन संख्या
दिनांक
इसकी एक प्रति :-
1. अधीक्षक जेल ____________________________ जेल _____________________ को आवष्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाती है।
2. जिला मजिस्ट्रेट ___________________________________ को निष्पादन तथा आवष्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाती है।188 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 3. पुलिस अधीक्षक, ____________________________ को अस्थाई रिहाई के दौरान उक्त बंदी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देष सहित प्रेषित की जाती है। रिहाई प्राधिकारी के हस्ताक्षर मैं, ____________________________ पुत्र ____________________________ इसके द्वारा, उक्त वारंट को प्राप्त करने की पावती देता हूँ और रिहाई के उक्त वारंट में विनिर्दिष्ट शर्तों को मैंने समझ लिया है और मैं उन्हें स्वीकार करता हूँ।
बन्दी के हस्ताक्षर तथा अगूँठे का निषान।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 189 प्ररूप ग
[देखिए नियम 12(8)]
बन्दी का व्यक्तिगत बन्धपत्र
जिला मजिस्ट्रेट _________________________ के न्यायालय में, यह बन्धपत्र दिनांक ______________ को ______________ (बन्दी की संख्या, नाम, पिता का नाम तथा पता) द्वारा किया गया है।
चूंकि, रिहाई प्राधिकारी, नीचे विनिर्दिष्ट शर्ताें की अनुपालना करने के लिए मेरे द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक ______________/- रूपये की धनराषि का व्यक्तिगत बन्धपत्र तथा प्रतिभूति बंधपत्र की शर्तों पर हरियाणा सदाचारी बन्दी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 की धारा 3 या 4 या 5 के अधीन ______________ की अवधि (रिहाई की अवधि) के लिए मेरी आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर मेरी रिहाई करने की कृपा करें। इसलिए, अब, मैं, इसके द्वारा, नीचे वर्णित सभी शर्तों को निष्ठापूर्वक मानने के लिए स्वंय को बाध्य करता हूँ और इनमें से किसी भी शर्त की अनुपालना करने में चूक के मामले में, मैं, राज्य सरकार को ______________ रूपये की राषि जब्त करने के लिए स्वयं को बाध्य करता हूँ।
1. मैं अपनी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान ______________ (पूरा पता) पर निवास करूंगा और जिला मजिस्ट्रेट, ______________ की अनुमति प्राप्त किए बिना किसी अन्य स्थान, जो रिहाई वारंट में विनिर्दिष्ट नहीं किया गया हो, पर नहीं जाऊँगा।
2. मैं अपनी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान शान्ति बनाए रखूंगा तथा अच्छा आचरण बनाए रखूंगा। 3. उक्त अवधि ______________ (रिहाई की अवधि), जिसके लिए मुझे अस्थाई रूप से रिहा किया गया है, की समाप्ति पर, मैं, अधीक्षक जेल ______________ जेल ______________ को अपनी सजा के शेष भाग को भोगने के लिए आत्मसमर्पण करूंगा।
4. यदि मेरे द्वारा प्रस्तुत जमानती दिवालिया हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है, तो मैं, तुरन्त नया जमानती प्रस्तुत करूंगा।
बन्दी के हस्ताक्षर या अगूँठे का निषान रिहाई प्राधिकारी के निमित्त और उसकी ओर से स्वीकृत।190 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) प्ररूप घ
[देखिए नियम 12(8)]
प्रतिभूति बंधपत्र
जिला मजिस्ट्रेट _____________________ के न्यायालय में,
यह बन्धपत्र दिनांक ______________ को _________________ (प्रथम जमानती) तथा _________________ (द्वितीय जमानती) (जिन्हें, इसमें, इसके बाद, सामूहिक रूप से ''जमानतियों'' के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) द्वारा किया गया है (रिहाई प्राधिकारी द्वारा नियत जमानतियों की संख्या) ;
चूंकि, रिहाई प्राधिकारी, उन शर्ताें की अनुपालना, जिन पर बन्दी को अस्थाई रूप से रिहा किया गया है, की अनुपालना करने के लिए ------रूपये की धनराषि के प्रत्येक बन्धपत्र के साथ-साथ प्रतिभूति बंधपत्र प्रस्तुत करते हुए बन्दी की शर्तों पर हरियाणा सदाचारी बन्दी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 की धारा 3 या 4 या 5 के अधीन _________________ (बन्दी की संख्या, नाम, पिता का नाम तथा पता) (जिसे, इसमें, इसके बाद ''बंदी'' के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) को _________________ की अवधि के लिए आपातकालीन पैरोल/नियमित पैरोल/फरलो पर रिहा करने के आदेष करने की कृपा करें;
और, चूंकि बंदी ने दिनांक ______________ (बंदी के व्यक्तिगत बंधपत्र के निष्पादन की तिथि) को इसमेें विनिर्दिष्ट शर्तों की अनुपालना करने के लिए __________ रूपये की धनराषि का व्यक्तिगत बंधपत्र का निष्पादन किया है। इसलिए, अब, जमानती संयुक्त रूप से या पृथक रूप से, इसके द्वारा, _________ रूपये की धनराषि राज्य सरकार को जब्त करने के लिए स्वयं को बाध्य करते हैं, यदि बंदी अस्थाई रिहाई के लिए बंधपत्र में विनिर्दिष्ट किसी भी शर्त की अनुपालना करने में चूक करता है।
प्रथम जमानती के हस्ताक्षर द्वितीय जमानती के हस्ताक्षर रिहाई प्राधिकारी के निमित्त और उसकी ओर से स्वीकृत।HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) 191 फार्म ङ
[देखिए नियम 12(9)]
सषर्त रिहाई का प्रमाण-पत्र
हरियाणा सदाचारी बन्दी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 की धारा 3 /4/5 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, रिहाई प्राधिकारी, इसमें, इसके पष्चात् उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन, इसके द्वारा, बन्दी _____________ (बन्दी की संख्या, नाम, पिता का नाम तथा पता), जो वर्तमान में _____________ जेल _____________ में परिरूद्ध है, को वारंट दिनांक _____________ (रिहाई प्राधिकारी के वारंट की तिथि) के अनुसरण में (रिहाई की अवधि) की अवधि के लिए रिहा करने के निर्देष देता हूँ। उसे नीचे उल्लिखित स्थानों पर निम्नलिखित विनिर्दिष्ट रूटों से जाने की अनुज्ञा दी गई है :-
प्रस्थान __________ जेल ___________ से _____________ (पूरा पता) तक वापसी ___________ (पूरा पता) से _________ जेल ____________ तक रिहा किए गए बन्दी द्वारा अनुपालित की जाने वाली शर्तें :-
1. बन्दी तत्काल _________ (पूरा पता) के लिए प्रस्थान करेगा।
2. वह दिनांक _________ (आत्मसमर्पण की तिथि तथा समय) को _________ जेल _________ में वापिसी की रिपोर्ट करेगा।
3. वह उन स्थानों से भिन्न किसी स्थान पर प्रस्थान नहीं करेगा, जिनके लिए उसे प्राधिकृत किया गया है। 4. वह अपनी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान शान्ति बनाए रखेगा तथा अच्छा आचरण बनाए रखेगा। 5. यदि रिहाई प्राधिकारी की राय में, वह इन शर्तों में से किसी को भंग करता हुआ पाया जाता है, तो वह उसका रिहाई वारंट रद्द कर सकता है तथा उसे पुनः जेल में दाखिल होने का निर्देष दे सकता है। यह प्रमाणित किया जाता है कि उपर्युक्त अस्थाई रिहाई वारंट में विनिर्दिष्ट शर्तें बन्दी को पढ़ा दी गई है, वह उन्हें समझता है तथा स्वीकार करता है तथा मानता है कि उसे उपरोक्त वर्णित शर्तों पर अस्थाई रूप से रिहा किया जा रहा है।
मुझे, जेल, ______________ में दिनांक _________ (आत्मसमर्पण की तिथि) को उपस्थित होने के निर्देष प्राप्त हुए है।
बन्दी के अंगूठे का निषान मेरा विष्वास है कि बन्दी शर्ताें को समझता है तथा इन्हें स्वीकार करता है।
सत्यापन
अस्थाई रिहाई की तिथि (..........................)
पुलिस उप अधीक्षक --- जेल---।192 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), JULY 13, 2022 (ASAR. 22, 1944 SAKA) क्रमांक दिनांक
इसकी एक प्रति निम्नलिखित को सूचनार्थ तथा आवष्यक आगामी कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाती हैः- 1. मण्डल आयुक्त, _____________ मण्डल _____________ के संदर्भ में (रिहाई वारंट)
2. जिला मजिस्ट्रेट, _____________ के संदर्भ में (जमानतियों की स्वीकृति के बारे में आदेष) (बंदी के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा प्रतिभूति बंधपत्र साथ संलग्न हैं।)
3. पुलिस अधीक्षक, _____________ को अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान उक्त बंदी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए सम्बन्धित थानागृह अधिकारी को अनुरोध सहित।
4. थाना गृह अधिकारी, पुलिस थाना _____________, जिला _____________ अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान उक्त बंदी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा तथा अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (10) के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
जेल अधीक्षक -- जेल--।
बिमलेश तंवर, सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
9742—L.R.—H.G.P., Pkl.