हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 8 सितम्बर, 2022
संख्या लैज. 25/2022.- दि हरियाणा म्युनिसिपल कारपोरेशन (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2022 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 02 सितम्बर, 2022 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17), की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगा :-
2022 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25
हरियाणा नगर निगम (संषोधन) अधिनियम, 2022 हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994, को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
1. यह अधिनियम हरियाणा नगर निगम (संषोधन) अधिनियम, 2022, कहा जा सकता है। संक्षिप्त नाम। 2. हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 87 में,-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 87 का संशोधन। (i) उप-धारा (1) के खण्ड (ग) में, ''जो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट करे'' शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, ''जो सरकार, प्रत्येक निगम के संबंध में, अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट करे'' शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किये जाएंगे तथा प्रथम अप्रैल, 2021 से प्रतिस्थापित किए गए समझे जाएंगे ;
(ii) उप-धारा (1) के अन्त में विद्यमान ''इस प्रकार संगृहीत शुल्क की राशि निगम को भुगतान कर दी जाएगी'' शब्दों के स्थान पर, ''इस प्रकार संगृहीत शुल्क की राशि, निगम अथवा राज्य के निगम के किसी क्षेत्र, जो सरकार, अधिसूचना द्वारा, अवधारित करे, में अवसंरचना के विकास के लिए निगम की ओर से हरियाणा शहरी अवसंरचना विकास बोर्ड को भुगतान कर दी जाएगी'' शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किये जाएंगे तथा प्रथम अप्रैल, 2021 से प्रतिस्थापित किए गए समझे जाएंगे।
3. मूल अधिनियम की धारा 330 का लोप कर दिया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 330 का लोप। 4. मूल अधिनियम की धारा 331 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात् :- 1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 331 का प्रतिस्थापन। "331. अनुज्ञप्ति के बिना कतिपय प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं किए जाने वाले स्थान/परिसर.- (1) कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए, जो जीवन, स्वास्थ्य या सम्पत्ति के लिए खतरनाक हो या जिससे उपद्रव पैदा होने की सम्भावना हो, इस निमित्त आयुक्त द्वारा प्रदान की गई अनुज्ञप्ति के निबंधनों की अनुरूपता के बिना या अन्यथा से किसी स्थान/ परिसरों का उपयोग नहीं करेगा या उपयोग करने के लिए अनुमत नहीं किया जाएगा।
(2) आयुक्त, अनुज्ञप्ति प्रदान करते समय ऐसी अन्य षर्तें अधिरोपित कर सकता है, जो
वह आवष्यक समझे।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 331 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात् :-
256 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), SEPT. 8, 2022 (BHDR. 17, 1944 SAKA)परन्तु आयुक्त द्वारा प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अनुसार किसी बिल्ली या कुाा या पक्षी को पालतू के रूप में रखा जा सकता है :
परन्तु यह और कि गायों या भैंसों या किन्हीं अन्य दुधारू पशुओं या उनके बच्चों को निगम की सीमाओं में शामिल बाह्य परिधि में आने वाले गाँवोेंं में घरेलू उपयोग हेतु रखने के लिए अनुमत किया जाएगा :
परन्तु यह और कि निगम की सीमाओं में शामिल बाह्य परिधि में आने वाले गाँवों तथा ऐसे क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना में परिवर्तन के आधार पर दुधारू पशुओं को रखने की अवधि, संकल्प के माध्यम से सम्बद्ध निगम द्वारा विनिश्चित की जाएगी। निगम अपने संकल्प द्वारा प्रतिबन्धित क्षेत्र से अनुमत क्षेत्र में पशुओं के पुनर्वास हेतु युक्तियुक्त समय भी प्रदान करेगा :
परन्तु यह और कि इस धारा के उपबन्ध उन जोनों को लागू नहीं होंगे, जहां हरियाणा नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम, 1952 (1953 का पंजाब अधिनियम 1), हरियाणा अनुसूचित सड़क तथा नियन्त्रित क्षेत्र अनियमित विकास निर्बन्धन अधिनियम, 1963 (1963 का पंजाब अधिनियम 41) तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 (1994 का 16) के उपबन्धों के अधीन अधिसूचित योजना के अनुसार इस तरह की गतिविधियां अनुमत हैं :
परन्तु यह और कि इस धारा के उपबन्ध, पंजीकृत गौशालाओं सहित निगम या सरकार के किसी अन्य विभाग के स्वामित्वाधीन/ प्रबन्धनाधीन मवेशीखानों तथा गौशालाओं को लागू नहीं होंगे। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) ''चौपाया पशु या पक्षी'' से अभिप्राय है, ऐसे पशु या पक्षी, जिन्हें किसी विधि के
अधीन रखना या पालना प्रतिषिद्ध है ;
(ii) ''बाह्य परिधि में आने वाले गाँव'' से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल हैं, ऐसे गाँव या क्षेत्र, जिन्हें जनसांख्यिकीय संरचना के अनुसार निगम द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ;
(iii) ''दुधारू पशु'' से अभिप्राय है, गाय, भैंस, बकरी, ऊँटनी इत्यादि, जिन्हें किसी विधि
के अधीन रखना या पालना प्रतिषिद्ध नहीं है।''।
6. मूल अधिनियम की धारा 335 का लोप कर दिया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 335 का लोप।
7. मूल अधिनियम की धारा 336 का लोप कर दिया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 336 का लोप।
8. मूल अधिनियम की धारा 352 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की धारा 352 का संषोधन।
"(2) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाई गई उप-विधियों के अधीन निगम द्वारा अधिरोपित किसी फीस के होते हुए भी, प्रत्येक अनुज्ञप्ति या लिखित अनुज्ञा हेतु, निगम ऐसी दर पर और ऐसी अवधि के लिए ऐसी फीस प्रभारित कर सकता है, जो सरकार, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे।"।
9. मूल अधिनियम की विद्यमान द्वितीय अनुसूची का लोप कर दिया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की द्वितीय अनुसूची का लोप।
10. मूल अधिनियम की तृतीय अनुसूची में, धारा 330, 335 तथा 336 से संबंधित खाना 1,2,3 तथा 4 के नीचे दी गई प्रविष्टियों का लोप कर दिया जाएगा।
1994 के हरियाणा अधिनियम 16 की तृतीय अनुसूची का संषोधन।