Servants of Knowledge
Haryana Gazette · Government of Haryana

The Haryana Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2023 (Haryana Act No. 21 of 2023).

Published 06 November 2023

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
193-2023/Ext
Notification no.
Leg. No. 23/2023
Identifier
in.gazette.haryana.2023-11-06.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2023
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

click here for IIIF manifest

Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 193-2023/Ext.] चण्डीगढ़, सोमवार, दिनांक 6 नवम्बर, 2023

(15 कार्तिक, 1945 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग I अधिनियम

167—172 हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2023 (2023 का हरियाणा अधिनियम संख्या 21)

(केवल हिन्दी में)

भाग II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं

भाग IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(lxxvii)167 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA) भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 6 नवम्बर, 2023

संख्या लैज.23/2023.- दि हरियाणा गुडज़ एण्ड सर्विसज़ टैक्स (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2023 का निम्नलिखित अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 27 अक्तूबर, 2023 की स्वी—ति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2023 का हरियाणा अधिनियम संख्या 21

हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2023 हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप

में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अधिनियम, 2023 कहा जा सकता है। (2) धारा 2 से 27 के उपबन्ध ऐसी तिथि से लागू होंगे, जिसे सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे : परन्तु सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के प्रारम्भ के लिए भिन्न-भिन्न तिथियां नियत कर सकती है। 2. हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे, इसमें, इसके बाद मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 2 में,-

(क) खण्ड (80) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्‌्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 2 का संषोधन। '(80क) "ऑनलाइन गेम खेलना'' से अभिप्राय है, इंटरनेट या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर गेम

की प्रस्थापना और इसके अन्तर्गत ऑनलाइन धनीय गेम खेलना भी है ;

(80ख) "ऑनलाइन धनीय गेम खेलना'' से अभिप्राय है, ऐसा ऑनलाइन गेम खेलना, जिसमें खिलाड़ी किसी आयोजन में, जिसमें गेम, स्कीम, प्रतिस्पर्धा या कोई अन्य क्रियाकलाप या प्रक्रिया भी है, धन या धन के मूल्य, जिसके अन्तर्गत आभासी डिजिटल आस्तियां भी हैं, को जीतने की प्रत्याषा में धन या धन के मूल्य का भुगतान करता है या जमा करता है, जिसके अन्तर्गत आभासी डिजिटल आस्तियां भी हैं, चाहे इसका परिणाम या निष्पादन कौषल, अवसर या दोनों पर आधारित हो या नहीं तथा चाहे वह तत्समय प्रवृृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञेय हो या नहीं;';

(ख) खण्ड (102) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌ :-

'(102क) "विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावे" से अभिप्राय है-

(i) दांव लगाने; (ii) कैसिनो; (iii) द्यूतक्रीड़ा; (iv) घुड़दौड़; (v) लाटरी; या (vi) ऑनलाइन धनीय गेम खेलने,

में अन्तर्वलित या उनके माध्यम से अनुयोज्य दावा;';

(ग) खण्ड (105) में,-

(i) अन्त में विद्यमान ";" चिह्‌्‌न के स्थान पर, "ः" चिह्‌्‌न प्रतिस्थापित किया जाएगा;

तथा168 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA) (ii) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्‌्‌ :-

"परन्तु ऐसे व्यक्ति, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों की पूर्ति का आयोजन या व्यवस्था करता है, जिसके अन्तर्गत वह व्यक्ति भी है, जो ऐसी पूर्ति के लिए डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म का स्वामी है या उसका प्रचालन या प्रबंधन करता है, को ऐसे अनुयोज्य दावों का पूर्तिकार समझा जाएगा, चाहे ऐसे अनुयोज्य दावे, उसके द्वारा या उसके माध्यम से पूर्ति किए जाते हों और चाहे ऐसे अनुयोज्य दावों की पूर्ति के लिए धन या धन के मूल्य, जिसके अन्तर्गत आभासी डिजिटल आस्तियां भी हैं, में प्रतिफल, उसको या उसके माध्यम से भुगतान या सूचित किए जाते हैं या किसी भी रीति में उसको दिए जाते हैं, और इस अधिनियम के सभी उपबन्ध विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों के ऐसे पूर्तिकार को लागू होंगे, मानो वह ऐसे अनुयोज्य दावों की पूर्ति करने के संबंध में कर का भुगतान करने के लिए दायी पूर्तिकार हो ;"; तथा

(घ) खण्ड (117) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌्‌ः-

'(117क) "आभासी डिजिटल आस्ति" का वही अर्थ होगा, जो आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का केन्द्रीय अधिनियम 43) की धारा 2 के खण्ड (47क) में उसे दिया गया हैं;'।

3. मूल अधिनियम की धारा 10 में,-

(क) उप-धारा (2) के खण्ड (घ) में, ''माल या'' शब्दों का लोप कर दिया जाएगा; तथा (ख) उप-धारा (2क) के खण्ड (ग) में, ''माल या'' शब्दों का लोप कर दिया जाएगा। 4. मूल अधिनियम की धारा 16 की उप-धारा (2) में,-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 10 का संषोधन। 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 16 का संषोधन।

(क) द्वितीय परन्तुक में, ''को, उस पर ब्याज के साथ, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उसके आउटपुट कर दायित्व में जोड़ दिया जाएगा'' शब्दों और चिह्‌नों के स्थान पर, ''ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में धारा 50 के अधीन भुगतानयोग्य ब्याज सहित उसके द्वारा भुगतान की जाएगी'' शब्द, चिह्‌न और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे; तथा

(ख) तृतीय परन्तुक में, ''उसके द्वारा'' शब्दों के बाद, ''प्रदायकर्ता को'' शब्द रखे जाएंगे। 5. मूल अधिनियम की धारा 17 में,-

(क) उप-धारा (3) में, व्याख्या में, ''सिवाय उनके जो उक्त अनुसूची के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट हैं'' 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 17 का संषोधन।

शब्दों तथा अंकों के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :- ''सिवाय,- (i) उक्त अनुसूची के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट क्रियाकलापों या संव्यवहारों के मूल्य; तथा (ii) ऐसे क्रियाकलापों या संव्यवहारों के मूल्य, जो उक्त अनुसूची के पैरा 8 के खण्ड (क)

के संबंध में विहित किए जाएं।''; तथा

(ख) उप-धारा (5) के खण्ड (च) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌्‌ :-

''(चक) किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए गए माल या सेवाएं या दोनाें, जो कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का केन्द्रीय अधिनियम 18) की धारा 135 में निर्दिष्ट निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व के अधीन अपनी बाध्यताओं से संबंधित क्रियाकलापों के लिए उपयोग की जाती हैं अथवा उपयोग किए जाने के लिए आषयित हैं;''। 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 23 का संषोधन।

6. मूल अधिनियम की धारा 23 की उप-धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी और जुलाई, 2017 के प्रथम दिन से प्रतिस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्‌ :- ''(2) धारा 22 की उप-धारा (1) अथवा धारा 24 में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, सरकार, परिषद्‌ की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो इसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन, व्यक्तियों का प्रवर्ग विनिर्दिष्ट कर सकती है, जिसे इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट दी जा सकती है।''। 7. मूल अधिनियम की धारा 24 में,-

(क) खण्ड (xi) में, अन्त में विद्यमान ''और'' षब्द का लोप कर दिया जाएगा; तथा (ख) खण्ड (xi) के बाद, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌्‌ः-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 24 का संषोधन।

''(xiक) भारत से बाहर किसी स्थान से भारत में किसी व्यक्ति को ऑनलाइन धनीय गेम

खेलने की पूर्ति करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ; और''।

169 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA)

8. मूल अधिनियम की धारा 30 की उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 30 का संषोधन। ''(1) ऐसी शर्तों, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिसका रजिस्ट्रीकरण किसी समुचित अधिकारी द्वारा स्वप्रेरणा से रद्‌द किया गया है, ऐसी रीति में, ऐसे समय के भीतर तथा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो विहित किए जाएं, के अध्यधीन ऐसे अधिकारी को रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दकरण के प्रतिसंहरण के लिए आवेदन कर सकता है।''।

9. मूल अधिनियम की धारा 37 की उप-धारा (4) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 37 का संषोधन। ''(5) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को किसी कर अवधि के लिए उप-धारा (1) के अधीन जावक प्रदायों के ब्यौरे प्रस्तुत करने हेतु उक्त ब्यौरे प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद अनुमत नहीं किया जाएगाः

परन्तु सरकार, परिषद्‌ की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो इसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को किसी कर अवधि के लिए उप-धारा (1) के अधीन जावक प्रदायों के ब्यौरे प्रस्तुत करने हेतु, उक्त ब्यौरे प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अनुमत कर सकती है।''।

10. मूल अधिनियम की धारा 39 की उप-धारा (10) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्‌ः-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 39 का संषोधन। ''(11) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को किसी कर अवधि के लिए विवरणी प्रस्तुत करने हेतु उक्त विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद अनुमत नहीं किया जाएगाः

परन्तु सरकार, परिषद्‌ की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो इसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को किसी कर अवधि के लिए विवरणी प्रस्तुत करने हेतु, उक्त विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अनुमत कर सकती है।''।

11. मूल अधिनियम की धारा 44 को उसकी उप-धारा (1) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा तथा इस प्रकार पुनः संख्यांकित उप-धारा (1) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 44 का संषोधन। ''(2) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को किसी वित्तीय वर्ष के लिए उप-धारा (1) के अधीन वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने हेतु उक्त वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद अनुमत नहीं किया जाएगा :

परन्तु सरकार, परिषद्‌ की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा तथा ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो इसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को उप-धारा (1) के अधीन किसी वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने हेतु, उक्त वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अनुमत कर सकती है।''।

12. मूल अधिनियम की धारा 52 की उप-धारा (14) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 52 का संषोधन। ''(15) प्रचालक को उप-धारा (4) के अधीन कोई विवरण प्रस्तुत करने हेतु उक्त विवरण प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद अनुमत नहीं किया जाएगा :

परन्तु सरकार, परिषद्‌ की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन किसी प्रचालक या प्रचालकों के वर्ग को उप-धारा (4) के अधीन कोई विवरण प्रस्तुत करने हेतु, उक्त विवरण प्रस्तुत करने के लिए नियत तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी अनुमत कर सकती है।''।

13. मूल अधिनियम की धारा 54 की उप-धारा (6) में, '',जिसमें स्वीकृत इनपुट कर प्रत्यय की राषि को छोड़कर," चिह्‌न तथा शब्दों का लोप कर दिया जाएगा।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 54 का संषोधन।170 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA) 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 56 का संषोधन।

14. मूल अधिनियम की धारा 56 में, ''उक्त धारा के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तिथि से साठ दिन की समाप्ति के तुरन्त पश्चात्‌ की तिथि से ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तिथि तक'' शब्दों के स्थान पर, ''ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तिथि से ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तिथि पर्यन्त साठ दिन से अधिक की विलंब अवधि के लिए ऐसे प्रतिदाय के संबंध मेें, ऐसी रीति में तथा ऐसी शर्तों तथा निर्बन्धनों, जो विहित किए जाएं, के अध्यधीन संगणित किया जाने वाला'' शब्द तथा चिह्‌न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 15. मूल अधिनियम की धारा 62 की उप-धारा (2) में, -

(क) ''तीस दिन'' शब्दों के स्थान पर, ''साठ दिन'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) अंत में विद्यमान ''।'' चिह्‌न के स्थान पर, ''ः'' चिह्‌न प्रतिस्थापित किया जाएगा; तथा 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 62 का संषोधन।

(ग) निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्‌ :-

''परन्तु जहां रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति उप-धारा (1) के अधीन निर्धारण आदेष की तामील के साठ दिन के भीतर विधिमान्य विवरणी प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो वह उक्त निर्धारण आदेष की तामील के साठ दिन से अधिक विलंब के प्रत्येक दिन के लिए एक सौ रूपये की अतिरिक्त विलंब फीस के भुगतान पर आगे साठ दिन की अवधि के भीतर उसे प्रस्तुत कर सकता है तथा यदि वह ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर विधिमान्य विवरणी प्रस्तुत करता है तो उक्त निर्धारण आदेष का प्रतिसंहरण किया गया समझा जाएगा, किन्तु धारा 50 की उप-धारा (1) के अधीन ब्याज का भुगतान करने या धारा 47 के अधीन विलंब फीस का भुगतान करने का दायित्व बना रहेगा।"।

16. मूल अधिनियम की धारा 109 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 109 का प्रतिस्थापन।

''109. अपील अधिकरण और उसकी न्यायपीठों का गठन.- इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का केन्द्रीय अधिनियम 12) के अधीन गठित माल और सेवा कर अधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा पारित आदेषों के विरूद्ध अपीलों की सुनवाई करने के लिए अपील अधिकरण होगा।''।

17. मूल अधिनियम की धारा 110 का लोप कर दिया जाएगा।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 110 का लोप।

18. मूल अधिनियम की धारा 114 का लोप कर दिया जाएगा।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 114 का लोप।

19. मूल अधिनियम की धारा 117 में,-

(क) उप-धारा (1) में, ''राज्य न्यायपीठ या क्षेत्रीय न्यायपीठों'' शब्दों के स्थान पर, ''राज्य न्यायपीठों'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; तथा

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 117 का संषोधन।

(ख) उप-धारा (5) में, खण्ड (क) तथा (ख) में, ''राज्य न्यायपीठ या क्षेत्रीय न्यायपीठों'' शब्दों के स्थान पर, ''राज्य न्यायपीठों'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

20. मूल अधिनियम की धारा 118 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) में, ''राष्ट्रीय न्यायपीठ या प्रांतीय न्यायपीठों'' शब्दों के स्थान पर, ''प्रधान न्यायपीठ'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 118 का संषोधन।

21. मूल अधिनियम की धारा 119 में,-

(क) ''राष्ट्रीय या प्रांतीय न्यायपीठों'' शब्दों के स्थान पर, ''प्रधान न्यायपीठ'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; तथा

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 119 का संषोधन।

(ख) ''राज्य न्यायपीठ या क्षेत्रीय न्यायपीठों'' शब्दों के स्थान पर, ''राज्य न्यायपीठों'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।171 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA) 22. मूल अधिनियम की धारा 122 की उप-धारा (1क) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ :-

''(1ख) कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक जो-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 122 का संषोधन। (i) ऐसा प्रदाय करने के लिए इस अधिनियम के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकरण से छूट- प्राप्त किसी व्यक्ति से भिन्न किसी अरजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उसके माध्यम से माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय की अनुमति देता है;

(ii) किसी व्यक्ति, जो ऐसा अन्तरराज्य प्रदाय करने के लिए पात्र नहीं है, द्वारा उसके माध्यम से माल या सेवाओं या दोनों के किसी अन्तरराज्य प्रदाय की अनुमति देता है; या

(iii) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट-प्राप्त किसी व्यक्ति द्वारा उसके माध्यम से प्रभावित मालों के किसी जावक प्रदाय के संबंध में धारा 52 की उप-धारा (4) के अधीन प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण में सही ब्यौरे प्रस्तुत करने में असफल रहता है,

तो दस हजार रूपये, या अन्तर्वलित कर की राषि के समतुल्य राषि, जो भी अधिक हो, की शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी होगा, यदि धारा 10 के अधीन कर का भुगतान करने वाले किसी व्यक्ति से भिन्न किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा ऐसा प्रदाय किया गया था।''।

23. मूल अधिनियम की धारा 132 की उप-धारा (1) में,-

(क) खण्ड (छ), (ञ) तथा (ट) का लोप कर दिया जाएगा; (ख) खण्ड (ठ) में, ''खण्ड (क) से (ट)'' शब्दों, कोष्ठकों और अक्षरों के स्थान पर, ''खण्ड (क)

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 132 का संषोधन। से (च) तथा खण्ड (ज) तथा (झ)'' शब्द, कोष्ठक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ग) खण्ड (iii) में, ''ऐसे मामलों में'', शब्दों तथा चिह्‌न के स्थान पर, ''खण्ड (ख) में विनिर्दिष्ट

अपराध के मामले में,'' शब्द, कोष्ठक तथा चिह्‌न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; तथा

(घ) खण्ड (iv) में, ''या खंड (छ) या खंड (ञ)'' शब्दों, कोष्ठकों तथा अक्षरों का लोप कर दिया

जाएगा।

24. मूल अधिनियम की धारा 138 में,-

(क) उप-धारा (1) में, प्रथम परन्तुक में,-

(i) खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 138 का संषोधन। ''(क) ऐसा व्यक्ति, जिसे धारा 132 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) से (च), (ज), (झ) तथा (ठ) में विनिर्दिष्ट किन्हीं अपराधों के संबंध में एक बार प्रषमित होने के लिए अनुमत किया गया है;'';

(ii) खण्ड (ख) का लोप कर दिया जाएगा ; (iii) खण्ड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''(ग) ऐसा व्यक्ति, जो धारा 132 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन कोई

अपराध करने वाला अभियुक्त है;'';

(iv) खण्ड (ङ) का लोप कर दिया जाएगा; तथा

(ख) उप-धारा (2) में, ''दस हजार रूपये से कम न हों या शामिल कर का पचास प्रतिषत, जो भी अधिक हो, और अधिकतम राषि, जो तीस हजार रूपये से कम से कम न हो या कर का एक सौ पचास प्रतिषत, जो भी अधिक हो,'' शब्दों तथा चिह्‌नों के स्थान पर, ''अन्तर्वलित कर का पच्चीस प्रतिषत से कम न हो और अधिकतम राषि, जो अन्तर्वलित कर का एक सौ प्रतिषत से अनधिक हो,'' शब्द तथा चिह्‌न प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 158क का रखा जाना। 25. मूल अधिनियम की धारा 158 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ :- ''158क. कराधेय व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की गई सूचना का सहमति आधारित साझाकरण.- (1) धारा 133, 152 तथा 158 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए निम्नलिखित ब्यौरे, उप-धारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन, और परिषद्‌ की सिफारिषों पर, ऐसी अन्य पद्धतियाँ, जो सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएं, ऐसी रीति में तथा ऐसी शर्तों, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन सामान्य पोर्टल द्वारा साझे किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

(क) धारा 25 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन में या धारा 39 के अधीन या

धारा 44 के अधीन दायर की गई विवरणी में प्रस्तुत किए गए विवरण;

172 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 6, 2023 (KRTK. 15, 1945 SAKA)

(ख) बीजक तैयार करने के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड किए गए विवरण, धारा 37 के अधीन प्रस्तुत किए गए जावक प्रदायों के ब्यौरे और धारा 68 के अधीन दस्तावेज जनित करने के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड किए गए विवरण;

(ग) ऐसे अन्य ब्यौरे, जो विहित किए जाएं।

(2) उप-धारा (1) के अधीन ब्यौरे साझा करने के प्रयोजन हेतु ऐसे प्ररूप और रीति, जो विहित की जाए, में निम्नलिखित की सहमति प्राप्त की जाएगी-

(क) उप-धारा (1) के खण्ड (क), (ख) तथा (ग) के अधीन प्रस्तुत किए गए ब्यौरों के

संबंध में, प्रदायकर्ता ; तथा

(ख) उप-धारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन, और उप-धारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन प्रस्तुत किए गए विवरण के संबंध में, प्राप्तिकर्ता, केवल जहाँ ऐसे ब्यौरों में प्राप्तिकर्ता की पहचान सूचना षामिल हो।

(3) तत्समय लागू किसी विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन साझा की गई सूचना के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले किसी दायित्व के संबंध में सरकार या सामान्य पोर्टल के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी और सुसंगत प्रदाय पर या सुसंगत विवरणी के अनुसार कर भुगतान करने के दायित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।''। 26. मूल अधिनियम की अनुसूची III में,-

(क) पैरा 6 में, ''लाटरी, दांव और द्यूत'' षब्दों तथा चिह्‌्‌न के स्थान पर, ''विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों'' षब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;

(ख) (i) पैरा 7 और 8 तथा इनकी व्याख्या 2 (2018 के हरियाणा अधिनियम 25 की धारा 31

द्वारा रखी गई) जुलाई, 2017 के प्रथम दिन सेे इसमें रखी गई समझी जाएगी; (ii) ऐसे सभी करों का प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जो संगृहीत किए गए हैं, किन्तु जिन्हें इस प्रकार संगृहीत नहीं किया जाता, यदि खण्ड (i) सभी तात्विक समयों पर लागू होता।

2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की अनुसूची III का संषोधन तथा कतिपय क्रियाकलापों तथा संव्यवहारों हेतु भूतलक्षी प्रभाव से छूट। अस्थायी उपबन्ध।

27. इस अधिनियम के अधीन किए गए संषोधन, दांव लगाने, कैसिनो, द्यूतक्रीड़ा, घुड़दौड़, लाटरी या ऑनलाइन गेम खेलने को प्रतिषिद्ध, निर्बन्धित या विनियमित करने के उपबंध करने वाली तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे।

नरेन्द्र सुरा, विषेष सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

10696—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 06 November 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2023-11-06.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2023/. Archive identifier in.gazette.haryana.2023-11-06.Extra-Ordinary_Leg-No-23-2023.