Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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© Govt. of Haryana
No. 165-2024/Ext.] चण्डीगढ़, शुक्रवार, दिनांक 25 अक्तूबर, 2024
(3 कार्तिक, 1946 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग-I अधिनियम
कुछ नहीं
भाग-II अध्यादेष
1. हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अध्यादेष, 2024 (2024 का 6)। 45—54 2. हरियाणा सिख गुरूद्वारा (प्रबन्धक) संशोधन अध्यादेष, 2024 (2024 का 7)। 55 (केवल हिन्दी में)
भाग-III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं
भाग-IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं
(lviii)45 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) भाग-II
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 25 अक्तूबर , 2024
संख्या लैज. 19/2024.- दि हरियाणा गुड्स एण्ड सर्विसिज टेक्स (अमेन्डमेन्ट) ऑर्डिनन्स, 2024 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 22 अक्तूबर, 2024 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (ग) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2024 का हरियाणा अध्यादेष संख्या 6
हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अध्यादेष, 2024 हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को आगे संषोधित करने के लिए अध्यादेष
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में हरियाणा के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।
चूंकि हरियाणा राज्य विधानमण्डल का सत्र नहीं हो रहा है तथा राज्यपाल की संतुष्टि हो गई है
कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उनके लिए आवष्यक हो गया है;
इसलिए, अब, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त षक्तियाें का प्रयोग
करते हुए, हरियाणा के राज्यपाल, इसके द्वारा, निम्नलिखित अध्यादेष प्रख्यापित करते हैंः-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अध्यादेष हरियाणा माल और सेवा कर (संषोधन) अध्यादेष, 2024 कहा जा सकता है। (2) धारा 2 से 39 के उपबन्ध ऐसी तिथि से लागू होंगे, जो सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करेः परन्तु सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के प्रारम्भ के लिए भिन्न-भिन्न तिथियां नियत कर सकती है।
2. हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे, इसमें, इसके बाद मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड (61) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 2 का संशोधन। "(61) "इनपुट सेवा वितरक" से अभिप्राय है, माल या सेवाओं या दोनों के ऐसे प्रदायकर्ता का कार्यालय, जो धारा 25 में निर्दिष्ट सुभिन्न व्यक्तियों के लिए या के निमित्त इनपुट सेवाओं, जिसके अन्तर्गत धारा 9 की उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के अधीन कर के लिए दायी सेवाओं के सम्बन्ध में बीजक भी सम्मिलित हैं, की प्राप्ति के मद्दे कर बीजकों को प्राप्त करता है, और धारा 20 में उपबन्धित रीति में ऐसे बीजकों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय का वितरण करने के लिए दायी है;"।
3. मूल अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (1) में, "मानवीय उपभोग के लिए मादक षराब" षब्दों के बाद, "और मानवीय उपभोग के लिए, मादक षराब के विनिर्माण हेतु प्रयुक्त विकृत अतिरिक्त निष्प्रभावी मादक या परिषोधित स्पिरिट" षब्द तथा चिह्न रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 9 का संषोधन। 4. मूल अधिनियम की धारा 10 की उपधारा (5) में, "धारा 73 या 74" षब्दों तथा अंकों के बाद "या धारा 74क" षब्द, अंक तथा अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 10 का संषोधन। 5. मूल अधिनियम की धारा 11 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 में धारा 11क का रखा जाना। "11क. साधारण पद्धति के परिणामस्वरूप उद्गृहीत नहीं किए गए या कम उद्गृहीत किए माल और सेवा कर की वसूली नहीं करने की षक्ति.- इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, यदि सरकार की संतुष्टि हो जाती है कि- (क) माल या सेवाओं या दोनों की किसी प्रदाय पर राज्य कर के उद्ग्रहण (उसके
गैर-उद्ग्रहण सहित) के सम्बन्ध में कोई पद्धति साधारणतया प्रचलन में थी, या है; और46 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) (ख) ऐसी प्रदाय, जो-
(i) उन मामलों में, जहां उक्त पद्धति के अनुसार राज्य कर उद्गृहीत नहीं किया गया
था या उद्गृहीत नहीं किया जा रहा है, राज्य कर; या
(ii) राज्य कर, जिसे उक्त पद्धति के अनुसार उद्गृहीत किया जा रहा था या किया जा
रहा है, से उच्चतर राषि,
के लिए दायी थी या हैं, तो सरकार परिषद् की सिफारिष पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निर्देष कर सकती है कि ऐसी प्रदायों पर भुगतानयोग्य सम्पूर्ण राज्य कर, या ऐसे प्रदायों पर भुगतानयोग्य राज्य कर के अधिक्य में राज्य कर, जैसी भी स्थिति हो, किन्तु उक्त पद्धति हेतु, उन प्रदायों के सम्बन्ध में भुगतान करने की आवष्यकता नहीं होगी, जिन पर राज्य कर उक्त पद्धति के अनुसार उद्गृहीत नहीं किया जा रहा था, या उद्गृहीत नहीं किया जा रहा है, या कम उद्गृहीत किया जा रहा था, या कम उद्गृहीत किया जा रहा है।"।
6. मूल अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (3) में,-
(i) खण्ड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 13 का संषोधन ।
'(ख) प्रदायकर्ता द्वारा, उन मामलों में जहां बीजक प्रदायकर्ता द्वारा जारी किया जाना अपेक्षित है, बीजक या उसके बजाय कोई अन्य दस्तावेज, चाहे किसी नाम से ज्ञात हो, जारी किए जाने की तिथि से साठ दिन के ठीक पष्चात्वर्ती तिथि; या';
(ii) खण्ड (ख) के बाद निम्नलिखित खण्ड जोड़ा जाएगा, अर्थातः-
"(ग) उन मामलों में, जहां बीजक प्राप्तिकर्ता द्वारा जारी किया जाना है, वहाँ प्राप्तिकर्ता
द्वारा बीजक जारी करने की तिथिः";
(iii) प्रथम परन्तुक में, "या (ख)" अक्षर तथा कोष्ठकों के बाद, "या खण्ड (ग)" अक्षर, षब्द तथा कोष्ठक रखे जाएंगे।
7. मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (4) के बाद, निम्नलिखित उपधाराएं जोड़ी जाएंगी तथा जुलाई, 2017 के प्रथम दिन से जोड़ी गई समझी जाएंगी, अर्थात्ः-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 16 का संषोधन।
"(5) उपधारा (4) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 तथा 2020-21 से सम्बन्धित माल या सेवाओं या दोनों की प्रदाय के लिए किसी बीजक या नामे नोट के सम्बन्ध में, रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, धारा 39 के अधीन किसी विवरणी में, जो नवम्बर, 2021 के तीसवें दिन तक दायर की गई है, इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार होगा। (6) जहाँ किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति का रजिस्ट्रीकरण धारा 29 के अधीन रद्द किया जाता है और तत्पष्चात् या तो धारा 30 के अधीन किसी आदेष द्वारा या अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय द्वारा किए गए किसी आदेष के अनुसरण में, रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण प्रतिसंहरण किया जाता है और जहाँ किसी बीजक या नामे नोट के सम्बन्ध में, इनपुट कर प्रत्यय का लाभ रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के आदेष की तिथि को उपधारा (4) के अधीन निर्बन्धित नहीं था, वहाँ उक्त व्यक्ति, धारा 39 के अधीन विवरणी में, माल या सेवाओं या दोनों की प्रदाय के लिए ऐसे बीजक या नामे नोट के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार होगा; जो- (i) उस वित्तीय वर्ष के पश्चात् आने वाले नम्बर के तीसवें दिन, जिससे ऐसा बीजक या नामे नोट सम्बन्धित है या सुसंगत वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने तक, जो भी पहले हाें, दायर की जाती है;
या (ii) रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की तिथि या रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की प्रभावी तिथि, जैसी भी स्थिति हो, से रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के आदेष की तिथि तक की अवधि हेतु, जहाँ ऐसी विवरणी रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के आदेष की तिथि से तीस दिन के भीतर दायर की जाती है,
जो भी बाद में हो।"।
8. मूल अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (5) के खण्ड (झ) में, "धारा 74, 129 और 130" षब्द, अंक और चिह्न के स्थान पर, "वित्तीय वर्ष 2023-24 तक किसी अवधि के सम्बन्ध में धारा 74" शब्द, अंक तथा चिहन् प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 17 का संषोधन।47 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 में धारा 20 का प्रतिस्थापन। 9. मूल अधिनियम की धारा 20 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "20. इनपुट सेवा वितरक द्वारा प्रत्यय के वितरण की रीति.- (1) माल या सेवाओं या दोनों के प्रदायकर्ता के किसी कार्यालय, जो धारा 25 में निर्दिष्ट सुभिन्न व्यक्तियों के लिए या के निमित्त इनपुट सेवाओं की प्राप्ति के मद्दे कर बीजक प्राप्त करता है, जिसमें धारा 9 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन कर के लिए दायी सेवाओं के सम्बन्ध में बीजक भी सम्मिलित हैं, से धारा 24 के खण्ड (अपपप) के अधीन इनपुट सेवा वितरक के रूप में पंजीकृत किए जाने की अपेक्षा की जाएगी और ऐसे बीजकों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय वितरित करेगा। (2) इनपुट सेवा वितरक ऐसी रीति में, ऐसे समय के भीतर तथा ऐसे निबन्धन तथा शर्तों, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन उसके द्वारा प्राप्त किए गए बीजकों पर प्रभारित राज्य कर या एकीकृत कर के प्रत्यय का वितरण करेगा, जिसमें उक्त इनपुट सेवा वितरक के रूप में राज्य में पंजीकृत किसी सुभिन्न व्यक्ति द्वारा धारा 9 की उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन कर के उद्ग्रहण के अध्यधीन सेवाओं के सम्बन्ध में भुगतान किया गया राज्य कर या एकीकृत कर का प्रत्यय भी शामिल है। (3) राज्य कर का प्रत्यय, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में इनपुट कर प्रत्यय की राषि अन्तर्विष्ट करते हुए दस्तावेज जारी करने के माध्यम से राज्य कर या एकीकृत कर के रूप में और एकीकृत कर को एकीकृत कर या राज्य कर के रूप में वितरित किया जाएगा।"।
10. मूल अधिनियम की धारा 21 में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों और अंको के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 21 का संषोधन। 11. मूल अधिनियम की धारा 30 की उपधारा (2) के परन्तुक में,-
(i) अन्त में विद्यमान "।" चिह्न के स्थान पर, "ः" चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; तथा (ii) विद्यमान परन्तुक के बाद, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्ः-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 30 का संषोधन। "परन्तु यह और कि रजिस्ट्रकरण के रद्दकरण का ऐसा प्रतिसंहरण ऐसी शर्तों
तथा निर्बन्धनों के अध्यधीन होगा, जो विहित किए जाएं।"।
12. मूल अधिनियम की धारा 31 की उपधारा (3) के खण्ड (च) में,-
(i) "दोनाें के सम्बन्ध में बीजक" शब्दों के बाद, "यथा विहित के भीतर" शब्द तथा चिह्न रखे
जाएगे;
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 31 का संषोधन। (ii) निम्नलिखित व्याख्या रखी जाएगी, अर्थात्ः-
"व्याख्याः- खण्ड (च) के प्रयोजनों हेतु, "प्रदायकर्ता, जो रजिस्ट्रीकृत नहीं है" अभिव्यक्ति में, ऐसा प्रदायकर्ता शामिल होगा, जो केवल धारा 51 के अधीन कर की कटौती के प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रीकृत है।"।
13. मूल अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (6) में, "धारा 73 या 74" शब्दों और अंकों के स्थान पर, "या धारा 74क" शब्द, अंक तथा अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 35 का संषोधन। 14. मूल अधिनियम की धारा 39 की उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 39 का संषोधन। "(3) धारा 51 के अधीन स्रोत पर कटौती हेतु अपेक्षित प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप तथा रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किए जाए, प्रत्येक कलैंडर मास के लिए मास के दौरान की गई कटौतियों की विवरणी इलेक्ट्रोनिक रूप से प्रस्तुत करेगाः
परन्तु उक्त रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैण्डर मास के लिए विवरणी प्रस्तुत करेगा, चाहे
उक्त मास के दौरान कोई कटौती की गई हो या नहीं।"।
15. मूल अधिनियम की धारा 49 की उपधारा (8) के खण्ड (ग) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 49 का संषोधन। 16. मूल अधिनियम की धारा 50 की उपधारा (ं1) के परन्तुक में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 50 का संषोधन।48 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) 17. मूल अधिनियम की धारा 51 की उपधारा (7) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 51 का संषोधन।
18. मूल अधिनियम की धारा 54 में,-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 54 का संषोधन।
(क) उप धारा (3) में, द्वितीय परन्तुक का लोप कर दिया जाएगा; (ख) उपधारा (14) के बाद और व्याख्या से पूर्व, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "(15) इस धारा में दी गई किसी बात के होते हुए भी, मालों की शून्य दर प्रदाय के मद्दे अनुपयोजित इनपुट कर प्रत्यय का या मालों की शून्य दर प्रदाय के मद्दे भुगतान किए गए एकीकृत कर का कोई भी प्रतिदाय अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, जहां मालों की ऐसी शून्य दर प्रदाय निर्यात शुल्क के अध्यधीन है।"।
19. मूल अधिनियम की धारा 61 की उपधारा (3) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 61 का संषोधन।
20. मूल अधिनियम की धारा 62 की उपधारा (1) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 62 का संषोधन।
21. मूल अधिनियम की धारा 63 में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 63 का संषोधन।
22. मूल अधिनियम की धारा 64 की उपधारा (2) में, "धारा 73 और धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 64 का संषोधन।
23. मूल अधिनियम की धारा 65 की उपधारा (7) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 65 का संषोधन।
24. मूल अधिनियम की धारा 66 की उपधारा (6) में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 66 का संषोधन।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 70 का संषोधन।
25. मूल अधिनियम की धारा 70 की उपधारा (1) के बाद, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "(1क) उपधारा (1) के अधीन समन किए गए सभी व्यक्ति या तो व्यक्तिगत रूप में या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए बाध्य होंगे, जैसा ऐसा अधिकारी निर्देष करे, और इस प्रकार उपस्थित होने वाला व्यक्ति परीक्षण के दौरान सच्चाई बताएगा या बयान देगा या ऐसे दस्तावेज और अन्य वस्तुएं, जो अपेक्षित हाें, प्रस्तुत करेगा।"।
26. मूल अधिनियम की धारा 73 में,-
(i) उपान्तिक शीर्ष में, "किसी अन्य कारण से" शब्दों के बाद, "वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की अवधि से सम्बन्धित" शब्द, अंक तथा चिह्न रखे जाएंगे;
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 73 का संषोधन।
(ii) उपधारा (11) के बाद, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
"(12) इस धारा के उपबन्ध वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की अवधि से सम्बन्धित कर निर्धारण के लिए लागू होंगे।"।49 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) 27. मूल अधिनियम की धारा 74 में;-
(i) उपान्तिक शीर्ष में, "किसी अन्य कारण से" शब्दों के बाद, "वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की
अवधि से सम्बन्धित" शब्द, अंक तथा चिह्न रखे जाएंगे;
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 74 का संषोधन। (ii) उपधारा (11) के बाद, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
"(12) इस धारा के उपबन्ध वित्तीय वर्ष 2023-24 तक की अवधि से सम्बन्धित कर
के निर्धारण के लिए लागू होंगे।"; (iii) व्याख्या 2 का लोप कर दिया जाएगा।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 में धारा 74क का रखा जाना। 28. मूल अधिनियम की धारा 74 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "74क. किसी भी कारण से वित्तीय वर्ष 2024-25 के आगे के लिए भुगतान नहीं किए गए या कम भुगतान किए गए या त्रुटिवष प्रतिदाय किए गए कर अथवा गलत तरीके से लिए गए या उपयोग किए गए इनपुट कर प्रत्यय का निर्धारण.- (1) जहां समुचित अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि किसी कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया है या त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है, या जहां इनपुट कर प्रत्यय गलत तरीके से लिया गया है या उपयोग किया गया है, तो वह ऐसे कर, जो इस प्रकार भुगतान नहीं किया गया है या जो इस प्रकार कम भुगतान किया गया है या जिस व्यक्ति को त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है, या जिसने गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया है या उपयोग किया है, से प्रभार्य व्यक्ति को, उससे यह कारण बताने की अपेक्षा करते हुए कि क्यों न वह धारा 50 के अधीन उस पर भुगतानयोग्य ब्याज के साथ नोटिस में विनिर्दिष्ट राषि तथा इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन उद्गृहणीय शास्ति का भुगतान करे, नोटिस की तामील करेगाः परन्तु कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा, यदि किसी वित्तीय वर्ष में वह कर एक हजार रूपए से कम है, जिसे भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया है या त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है या गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया है या उपयोग किया है। (2) समुचित अधिकारी उस वित्तीय वर्ष के लिए, जिसके लिए कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया है या गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया है या उपयोग किया है, वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए देय तिथि से बयालीस मास के भीतर या त्रुटिवष प्रतिदाय की तिथि से बयालीस मास के भीतर उपधारा (1) के अधीन नोटिस जारी करेगा। (3) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी अवधि के लिए नोटिस जारी किया गया है, वहां समुचित अधिकारी कर से प्रभार्य व्यक्ति पर उपधारा (1) के अधीन आने वाली अवधियों से भिन्न ऐसी कर अवधियों के लिए भुगतान नहीं किए गए या कम भुगतान किए गए या त्रुटिवष प्रतिदाय किए गए कर अथवा गलत तरीके से लिए गए या उपयोग किए गए इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरे अंतर्विष्ट करते हुए एक विवरण तामील कर सकता है। (4) ऐसे विवरण की तामील, उपधारा (1) के अधीन ऐसे व्यक्ति पर, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि उपधारा (1) के अधीन आने वाली अवधियों से भिन्न ऐसी कर अवधियों के लिए जिन आधारों पर विष्वास किया गया है, वे समान हैं जैसा कि पूर्व नोटिस में वर्णित किए गए हैं, पूर्ववर्ती नोटिस में उल्लिखित आधारों के हैं, नोटिस की तामील समझी जाएगी। (5) उस मामले में, जहां किसी कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया या त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है अथवा गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया गया है या उपयोग किया गया है, वहां शास्ति,-
(i) कर अपवंचन के लिए कपट या किसी जानबूझकर किए गए मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने के कारण से भिन्न किसी कारण से, ऐसे व्यक्ति से देय कर के दस प्रतिषत के समतुल्य या दस हजार रूपए, जो भी उच्चतर हो, होगी;
(ii) कर अपवंचन के लिए कपट या किसी जानबूझकर किए गए मिथ्या कथन या तथ्यों
को छिपाने के कारण के लिए ऐसे व्यक्ति से देय कर के समतुल्य होगी।
(6) समुचित अधिकारी, कर से प्रभार्य किसी व्यक्ति द्वारा किए गए अभ्यावेदन, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात्, ऐसे व्यक्ति से देय कर, ब्याज और शास्ति की राषि अवधारित करेगा और आदेष जारी करेगा। (7) समुचित अधिकारी उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट नोटिस को जारी करने की तिथि से बारह मास के भीतर उपधारा (6) के अधीन आदेष जारी करेगाः
परन्तु जहां समुचित अधिकारी विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आदेष जारी करने में असमर्थ है, वहां आयुक्त, या आयुक्त द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, जो समुचित अधिकारी से रैंक में वरिष्ठ हो किन्तु राज्य कर के संयुक्त आयुक्त के रैंक से नीचे का न हो, उपधारा (6) के अधीन आदेष जारी करने में विलंब के कारणों को अभिलिखित करके ध्यान में रखते हुए, विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व, उक्त अवधि को अधिकतम छह मास की और अवधि तक बढ़ा सकता है।50 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) (8) जहां कर अपवंचन के लिए कपट या किसी जानबूझकर किए गए मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने के कारण से भिन्न किसी कारण से किसी कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया है या त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है अथवा गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया गया या उपयोग किया गया है, वहां कर से प्रभार्य व्यक्ति,-
(i) उप-धारा (1) के अधीन नोटिस की तामील से पूर्व, अपने स्वयं के अवधारणा के आधार पर ऐसे कर या समुचित अधिकारी द्वारा यथा अवधारित कर का धारा 50 के अधीन भुगतानयोग्य ब्याज के साथ कर की राषि का भुगतान कर सकता है तथा समुचित अधिकारी को ऐसे भुगतान की लिखित रूप में सूचना दे सकता है, तथा समुचित अधिकारी, ऐसी सूचना की प्राप्ति पर, इस प्रकार भुगतान किए गए कर या इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन भुगतानयोग्य किसी शास्ति के संबंध में उप-धारा (1) के अधीन कोई नोटिस, विवरण या उप-धारा (3) के अधीन, जैसी भी स्थिति हो, तामील नहीं करेगा;
(ii) कारण बताओ नोटिस के जारी करने के साठ दिन के भीतर धारा 50 के अधीन भुगतानयोग्य ब्याज के साथ उक्त कर का भुगतान कर सकता है, तथा ऐसा करने पर कोई शास्ति भुगतानयोग्य नहीं होगी और उक्त नोटिस के संबंध में सभी कार्यवाहियों को समाप्त हुआ समझा जाएगा।
(9) कर से प्रभार्य व्यक्ति, जहां कर अपवंचन के लिए कपट या किसी जानबूझकर किए गए मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाए जाने के कारण किसी कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम भुगतान किया गया है या त्रुटिवष प्रतिदाय किया गया है या जहां गलत तरीके से इनपुट कर प्रत्यय लिया गया है या उपयोग किया गया है, तो,-
(i) उप-धारा (1) के अधीन नोटिस की तामील से पूर्व, धारा 50 के अधीन भुगतानयोग्य ब्याज के साथ कर की राषि तथा ऐसे कर का अपने स्वयं के अवधारणा के आधार पर ऐसे कर या समुचित अधिकारी द्वारा यथा अवधारित कर के पन्द्रह प्रतिषत के समतुल्य शास्ति का, भुगतान कर सकता है तथा समुचित अधिकारी को ऐसे भुगतान की लिखित रूप में सूचना दे सकता है और समुचित अधिकारी ऐसी सूचना की प्राप्ति पर इस प्रकार भुगतान किए गए कर या इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन भुगतानयोग्य किसी शास्ति के संबंध में उप-धारा (1) के अधीन किसी नोटिस की तामील नहीं करेगा;
(ii) नोटिस जारी करने के साठ दिन के भीतर धारा 50 के अधीन भुगतानयोग्य ब्याज के साथ उक्त कर और ऐसे कर के पच्चीस प्रतिषत के समतुल्य शास्ति का भुगतान कर सकता है, तथा ऐसा करने पर, उक्त नोटिस के संबंध में सभी कार्यवाहियों को पूरा कर लिया गया समझा जाएगा;
(iii) आदेष की संसूचना के साठ दिन के भीतर धारा 50 के अधीन कर के साथ उस पर भुगतानयोग्य ब्याज तथा ऐसे कर के पच्चीस प्रतिषत के समतुल्य शास्ति का भुगतान कर सकता है, तथा ऐसा करने पर, उक्त नोटिस के संबंध में सभी कार्यवाहियों को समाप्त हुआ समझा जाएगा।
(10) जहां समुचित अधिकारी की राय है कि उप-धारा (8) के खण्ड (i) या उप-धारा (9) के खण्ड (i) के अधीन भुगतान की गई राषि वास्तविक रूप से भुगतानयोग्य राषि से कम है, तो वह ऐसी राषि के संबंध में, जो वास्तविक रूप से भुगतानयोग्य राषि से कम होती है, उप-धारा (1) में यथा उपबंधित नोटिस जारी करने की कार्यवाही करेगा।
(11) उप-धारा (8) के खण्ड (i) या खण्ड (ii) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (5) के खण्ड (i) के अधीन शास्ति वहां भुगतानयोग्य होगी जहां स्वतः निर्धारित कर की किसी राषि या कर के रूप में एकत्रित की गई किसी राषि का भुगतान ऐसे कर के भुगतान की नियत तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर नहीं किया गया है।
(12) इस धारा के उपबंध वित्तीय वर्ष 2024-25 से आगे से संबंधित कर के निर्धारण के लिए लागू होंगे।
व्याख्या 1.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) "उक्त नोटिस के संबंध में सभी कार्यवाहियां" अभिव्यक्ति में धारा 132 के अधीन
कार्यवाहियां सम्मिलित नहीं होंगी;
51 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA)(ii) जहां उन्हीं कार्यवाहियों के अधीन कर का भुगतान करने के लिए दायी मुख्य व्यक्ति और कुछ अन्य व्यक्तियों को नोटिस जारी किया जाता है, और इस धारा के अधीन ऐसी कार्यवाहियों का मुख्य व्यक्ति के विरूद्ध समापन कर लिया गया है, तो धारा 122 तथा धारा 125 के अधीन शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी सभी व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी जाती हैं।
व्याख्या 2.- इस अधिनियम के प्रयोजनों हेतु, "छिपाना" अभिव्यक्ति का अर्थ होगा कि तथ्यों या सूचना को घोषित नहीं करना, जिन्हें कराधेय व्यक्ति से इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन विवरणी, विवरण, रिपोर्ट या किसी अन्य दस्तावेज में घोषित करना अपेक्षित है, या समुचित अधिकारी द्वारा लिखित में मांगे जाने पर किसी सूचना को प्रस्तुत करने में असफल होना।"।
29. मूल अधिनिम की धारा 75 में,-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 75 का संषोधन। (क) उप-धारा (1) में "धारा 74 की उप-धारा (2) और उप-धारा (10)" शब्दों, अंकों तथा कोष्ठकों के बाद, "या धारा 74क की उप-धारा (2) और उप-धारा (7)" शब्द, अंक, चिह्न तथा कोष्ठक रखे जाएंगे;
(ख) उप-धारा (2) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
"(2क) जहां किसी अपील प्राधिकरण या अपील अधिकरण या न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि धारा 74क की उप-धारा (5) के खण्ड (ii) के अधीन शास्ति इस कारण से मान्य नहीं है कि कर अपवंचन के लिए कपट या किसी जानबूझकर मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने के आरोप उस व्यक्ति के विरूद्ध साबित नहीं होते हैं, जिसे नोटिस जारी किया गया था, तो धारा 74क की उप-धारा (5) के खण्ड (i) के अधीन ऐसे व्यक्ति द्वारा शास्ति भुगतानयोग्य होगी।";
(ग) उप-धारा (10) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"(10) न्यायनिर्णायन कार्यवाहियों को समाप्त हुआ समझा जाएगा, यदि धारा 73 की उप-धारा (10) या धारा 74 की उप-धारा (10) या धारा 74क की उप-धारा (7) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आदेष जारी नहीं किया जाता है।";
(घ) उप-धारा (11) में, "धारा 74 की उप-धारा (10)" शब्दों, अंकों, चिह्न तथा कोष्ठक के बाद, "या धारा 74क की उप-धारा (7)" शब्द, अंक, चिह्न तथा कोष्ठक रखे जाएंगे; (ड.) उप-धारा (12) में, "धारा 74" शब्द तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द तथा अंक
रखे जाएंगे;
(च) उप-धारा (13) में, "धारा 74" शब्द तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द तथा अंक
रखे जाएंगे।
30. मूल अधिनियम की धारा 104 की उप-धारा (1) की व्याख्या में, "धारा 74 की उप-धारा (2) तथा उप-धारा (10)" शब्दों, अंकों तथा कोष्ठकों के बाद, "या धारा 74क की उप-धारा (2) तथा उप-धारा (7)" शब्द, अंक, चिह्न तथा कोष्ठक रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 104 का संषोधन। 31. मूल अधिनिम की धारा 107 में,-
(क) उप-धारा (6) में खण्ड (ख) में, "पच्चीस" शब्द के स्थान पर, "बीस" शब्द प्रतिस्थापित
किया जाएगा;
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 107 का संषोधन। (ख) उप-धारा (11) के द्वितीय परन्तुक में, "धारा 74" शब्द तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क"
शब्द तथा अंक रखे जाएंगे।
32. मूल अधिनिम की धारा 112 में,-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 112 का संषोधन। (क) उप-धारा (1) में, "अपील करने वाले व्यक्ति को संसूचना की तिथि" शब्दों के बाद, "या ऐसी तिथि, जो इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के सम्मुख अपील दायर करने के लिए परिषद् की सिफारिषों पर, सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, जो भी बाद में हो," शब्द तथा चिह्न रखे जाएंगे तथा प्रथम अगस्त, 2024 से रखे गए समझे जाएंगे;
(ख) उप-धारा (3) में, "उक्त आदेष पारित किया गया है," शब्दों तथा चिह्न के बाद, "या ऐसी तिथि, जो इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के सम्मुख आवेदन दायर करने के प्रयोजन हेतु परिषद् की सिफारिषों पर, सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, जो भी बाद में हो," शब्द तथा चिह्न रखे जाएंगे तथा प्रथम अगस्त, 2024 से रखे गए समझे जाएंगे;
52 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA)(ग) उप-धारा (6) में, "अपील स्वीकार कर सकता है," शब्दों तथा चिह्न के बाद, "या उप-धारा (3) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् तीन मास के भीतर आवेदन दायर करने के लिए अनुमति दे सकता है" शब्द, चिह्न, कोष्ठक तथा अंक रखे जाएंगे;
(घ) उप-धारा (8) में, खण्ड (ख) में,-
(i) "बीस प्रतिषत" शब्दों के स्थान पर, "दस प्रतिषत" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (ii) "पचास करोड़ रूपए" शब्दों के स्थान पर, "बीस करोड़ रूपए" शब्द प्रतिस्थापित किए
जाएंगे।
33. मूल अधिनियम की धारा 122 की उप-धारा (1ख) में, "कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक जो" शब्दों के स्थान पर, "कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक जो धारा 52, के अधीन स्रोत पर कर एकत्रित करने के लिए दायी है" शब्द तथा अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे तथा प्रथम अक्तूबर, 2023 से प्रतिस्थापित किए गए समझे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 122 का संषोधन।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 में 122क का रखा जाना।
34. मूल अधिनियम की धारा 122 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "122क. "विषिष्ट प्रक्रिया के अनुसार मालों के विनिर्माण में प्रयुक्त कतिपय मषीनों को रजिस्टर करने में असफलता के लिए शास्ति.- (1) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई व्यक्ति, जो ऐसे मालों के विनिर्माण में लगा हुआ है, जिनके संबंध में धारा 148 के अधीन मषीनों के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित कोई विषिष्ट प्रक्रिया अधिसूचित की गई है, उक्त विषिष्ट प्रक्रिया की उल्लंघना में कार्य करता है, तो वह किसी शास्ति, जिसका भुगतान किया जा चुका है या अध्याय XV या इस अध्याय के किसी अन्य उपबंधों के अधीन भुगतानयोग्य है, के अतिरिक्त इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नहीं की गई प्रत्येक मषीन के लिए एक लाख रूपए की राषि के बराबर शास्ति का भुगतान करने का दायी होगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन शास्ति के अतिरिक्त, इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नहीं की गई प्रत्येक मषीन जब्ती तथा समपहरण के लिए दायी होगीः
परन्तु ऐसी मषीन का समपहरण नहीं किया जाएगा, जहां-
(क) इस प्रकार अधिरोपित शास्ति का भुगतान कर दिया गया है; तथा (ख) शास्ति के आदेष की संसूचना की प्राप्ति के तीन दिन के भीतर विषिष्ट प्रक्रिया के
अनुसरण में ऐसी मषीन का रजिस्ट्रीकरण करवा दिया गया है।"।
35. मूल अधिनियम की धारा 127 में, "धारा 73 या धारा 74" शब्दों तथा अंकों के बाद, "या धारा 74क" शब्द, अंक तथा अक्षर रखे जाएंगे।
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 127 का संषोधन।
36. मूल अधिनियम की धारा 128 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "128क. "कतिपय कर अवधियों के लिए धारा 73 के अधीन उठाई गई मांगों से संबंधित ब्याज या शास्ति या दोनों का अधित्यजन.- (1) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, जहां कर से प्रभार्य व्यक्ति द्वारा कर की कोई राषि,-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 में 128क का रखा जाना।
(क) धारा 73 की उप-धारा (1) के अधीन जारी किए गए नोटिस या धारा 73 की उप-धारा (3) के अधीन जारी किए गए विवरण तथा जहां धारा 73 की उप-धारा (9) के अधीन कोई आदेष जारी नहीं किया गया है; या
(ख) धारा 73 की उप-धारा (9) के अधीन पारित किए गए किसी आदेष तथा जहां धारा 107 की उप-धारा (11) या धारा 108 की उप-धारा (1) के अधीन कोई आदेष पारित नहीं किया गया है; या
(ग) धारा 107 की उप-धारा (11) या धारा 108 की उप-धारा (1) के अधीन पारित किए गए किसी आदेष तथा जहां धारा 113 की उप-धारा (1) के अधीन कोई आदेष पारित नहीं किया गया है,
के अनुसार प्रथम जुलाई, 2017 से 31 मार्च, 2020 की अवधि अथवा उसके किसी भाग से संबंधित भुगतानयोग्य है, और उक्त व्यक्ति ऐसी तिथि, जो परिषद् की सिफारिषों पर सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, को या उससे पूर्व खण्ड (क), खण्ड (ख) या खण्ड (ग) में निर्दिष्ट नोटिस या विवरण या आदेष, जैसी भी स्थिति हो, के अनुसार भुगतानयोग्य कर की सम्पूर्ण राषि का भुगतान करता है, तो धारा 50 के अधीन कोई ब्याज तथा इस अधिनियम के अधीन कोई शास्ति भुगतानयोग्य नहीं होगी तथा उक्त नोटिस या आदेष या विवरण, जैसी भी स्थिति हो, के संबंध में सभी कार्यवाहियां ऐसी शर्तों, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन समाप्त हुई समझी जाएंगीः53 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) परन्तु जहां धारा 74 की उप-धारा (1) के अधीन नोटिस जारी किया गया है, और धारा 75 की उप-धारा (2) के उपबंधों के अनुसार अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निर्देषों की अनुपालना में समुमित अधिकारी द्वारा कोई आदेष पारित किया गया है या पारित किया जाना अपेक्षित है, तो उक्त नोटिस या आदेष को इस उप-धारा के खण्ड (क) या खण्ड (ख) में निर्दिष्ट नोटिस या आदेष, जैसी भी स्थिति हो, के रूप में माना जाएगाः परन्तु यह और कि उन मामलों में जहाँ धारा 107 की उप-धारा (3) या धारा 112 की उप-धारा (3) के अधीन कोई आवेदन दायर किया गया है या धारा 117 की उप-धारा (1) या धारा 118 की उप-धारा (1) के अधीन राज्य कर के किसी अधिकारी द्वारा कोई अपील दायर की गई है या जहां धारा 108 की उप-धारा (1) के अधीन खण्ड (ख) या खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी आदेष के सापेक्ष या पृथक परन्तुक में निर्दिष्ट अपील प्राधीकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निर्देषों के सापेक्ष कोई कार्यवाही संस्थित की गई है, तो इस उप-धारा के अधीन कार्यवाहियों का समापन इस शर्त के अध्यधीन होगा कि उक्त व्यक्ति, अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय या पुनरीक्षण प्राधिकारी, जैसी भी स्थिति हो, के आदेष के अनुसार भुगतानयोग्य कर की अतिरिक्त राषि, यदि कोई हो, का भुगतान उक्त आदेष की तिथि से तीन मास के भीतर करता हैः परन्तु यह और कि जहां ऐसा ब्याज तथा शास्ति पहले ही भुगतान किए जा चुके हैं, उनका कोई प्रतिदाय उपलब्ध नहीं होगा। (2) उप-धारा (1) में दी गई कोई भी बात, त्रुटिवष प्रतिदाय के कारण किसी व्यक्ति द्वारा भुगतानयोग्य किसी राषि के संबंध में लागू नहीं होगी।
(3) उप-धारा (1) में दी गई कोई भी बात, उन मामलों के संबंध में लागू नहीं होगी, जहां उक्त व्यक्ति द्वारा दायर की गई अपील या रिट याचिका, अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय, जैसी भी स्थिति हो, के सम्मुख लंबित है, और उक्त व्यक्ति द्वारा, उप-धारा (1) के अधीन अधिसूचित तिथि को या से पूर्व, वापस नहीं ली गई है। (4) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट किसी राषि का भुगतान किया गया है और उक्त उप-धारा के अधीन कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी गई हैं, धारा 107 की उप-धारा (1) या धारा 112 की उप-धारा (1) के अधीन कोई भी अपील उप-धारा (1) के खण्ड (ख) या खण्ड (ग), जैसी भी स्थिति हो, में निर्दिष्ट किसी आदेष के विरूद्ध नहीं हो सकेगी।
37. मूल अधिनियम की धारा 171 में,-
(क) उप-धारा (2) में,-
2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की धारा 171 का संषोधन। (i) अंत में विद्यमान "।" चिह्न के स्थान पर, "ः" चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा;
तथा
(ii) निम्नलिखित परन्तुक तथा व्याख्या रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
"परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तिथि विनिर्दिष्ट कर सकती है, जिससे उक्त प्राधिकरण, चाहे किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा प्राप्त इनपुट कर प्रत्यय लिया गया है या उस द्वारा प्रदाय किए गए माल या सेवाओं या दोनों के मूल्यों में अनुपातिक कमी के वास्तविक परिणामतः हुई कर दर में कमी की जाँच के लिए कोई अनुरोध स्वीकार नहीं करेगा।
व्याख्या.- इस उप-धारा के प्रयोजनों हेतु, "जाँच के लिए अनुरोध" का अर्थ होगा, चाहे किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा प्राप्त इनपुट कर प्रत्यय या कर दर में कमी, उस द्वारा माल या सेवाओं या दोनों के मूल्यों में अनुपातिक कमी के वास्तविक परिणामतः हुई है, की जाँच के लिए अनुरोध करने वाले किसी आवेदक द्वारा लिखित आवेदन, होगा।
(ख) उप-धारा (3क) में, विद्यमान व्याख्या को उसकी व्याख्या 1 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनः संख्यांकित व्याख्या 1 के बाद, निम्नलिखित व्याख्या जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः-
'व्याख्या 2.- इस उप-धारा के प्रयोजनों हेतु, "प्राधिकरण" अभिव्यक्ति में "अपील अधिकरण" सम्मिलित होगा।'।54 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), OCT. 25, 2024 (KRTK. 3, 1946 SAKA) 2017 के हरियाणा अधिनियम 19 की अनुसूची III का संषोधन।
38. मूल अधिनियम की अनुसूची III में, पैरा 8 के बाद, निम्नलिखित पैरे जोड़े जाएंगे, अर्थात्ः- "9. सह-बीमा करार में बीमाकृत को मुख्य बीमाकर्ता तथा सह-बीमाकर्ता द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान की गई बीमा सेवाओं के लिए मुख्य बीमाकर्ता द्वारा सह-बीमाकर्ता को सह-बीमा प्रीमियम के नियोजन का क्रियाकलाप, इस शर्त के अध्यधीन होगा कि मुख्य बीमाकर्ता, बीमाकृत द्वारा भुगतान किए गए प्रीमियम की सम्पूर्ण राषि पर केन्द्रीय कर, राज्य कर, संघ क्षेत्र कर तथा एकीकृत कर, का भुगतान करता है। 10. बीमाकर्ता द्वारा पुनः बीमाकर्ता को सेवाएं, जिसके लिए बीमाकर्ता द्वारा पुनः बीमाकर्ता को भुगतान किए गए पुनः बीमा प्रीमियम से अध्र्यपक कमीषन या पुनः बीमा कमीषन काटा जाता है, इस शर्त के अध्यधीन होगी कि बीमाकर्ता द्वारा पुनः बीमाकर्ता को भुगतानयोग्य अध्र्यपक कमीषन या पुनः बीमा कमीषन सहित सकल पुनः बीमा प्रीमियम पर केन्द्रीय कर, राज्य कर, संघ क्षेत्र कर तथा एकीकृत कर पुनः बीमाकर्ता द्वारा भुगतान किया जाता है।"।
39. सभी तात्विक समय पर जब धारा 7 लागू हो, भुगतान किए गए सभी कर या रिवर्स किए गए इनपुट कर प्रत्यय, जो इस प्रकार भुगतान नहीं किए हों या रिवर्स नहीं किए हों, के लिए कोई प्रतिदाय नहीं किया जाएगा।
भुगतान किए गए कर या रिवर्स किए गए इनपुट कर प्रत्यय का कोई प्रतिदाय नहीं होना।
चण्डीगढ़ः बंडारू दत्तात्रेय, दिनांकः 22 अक्तूबर, 2024 राज्यपाल, हरियाणा।
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रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
11361—L.R.—H.G.P., Pkl.