Servants of Knowledge
Haryana Gazette · Government of Haryana

The Haryana Lease of Agricultural Land Act, 2024 (Haryana Act No. 23 of 2024)

Published 07 February 2025

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
27-2025/Ext
Notification no.
Leg. No. 30/2024
Identifier
in.gazette.haryana.2025-02-07.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2024
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗
37 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA)

भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 7 फरवरी, 2025

संख्या लैज. 30/2024.- दि हरियाणा लीस ऑफ ऐग्रिकॅल्‌चॅरॅल लैन्ड ऐक्ट, 2024 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 03 फरवरी, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2024 का हरियाणा अधिनियम संख्या 23

हरियाणा कृषि भूमि पट्‌टा अधिनियम, 2024 कृषि भूमि को पट्‌टे पर देने को मान्यता देने हेतु मैकेनिज्म के लिए, कृषि भूमि को पट्‌टे पर देने की अनुज्ञा तथा सुकर बनाने हेतु, भूस्वामियों के अधिकारों को संरक्षित करने हेतु और उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम

भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ तथा लागूकरण। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा कृषि भूमि पट्‌टा अधिनियम, 2024 कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा। (3) यह हरियाणा राज्य में जोत के अधीन सभी कृषि भूमियों को लागू होगाः परन्तु अधिनियम के उपबन्ध, निम्नलिखित भूमियों को लागू नहीं होंगे, अर्थात्‌ः-

(i) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994

(1994 का 16) के अधीन किसी नगर निगम या हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 (1973 का 24) के अधीन किसी नगरपालिका निकाय तथा हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 11) के अधीन किसी ग्राम पंचायत या पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ के स्वामित्वाधीन भूमि;

(ii) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के प्रबन्धनाधीन तथा नियंत्रणाधीन किसी वैधानिक निकाय, विष्वविद्यालय, कम्पनी, सोसाइटी या न्यास के स्वामित्वाधीन, प्रबन्धित या नियंत्रणाधीन भूमि;

(iii) शामलात देह, शामलात टिक्कास, शामलात तरफ, पट्‌टी, पाना तथा ठोला के रूप में भू-राजस्व अभिलेख में अभिलिखित भूमि या सुसंगत परिनियम के अधीन शामलात देह की परिधि में आने वाली कोई अन्य भूमि;

(iv) 'जुुमला मालकान वा दिगर हकदारान अराजी हसब रसद रकबा' के रूप में या समान नाम से भू-राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित भूमि, जो हरियाणा जोत (चकबन्दी तथा खण्डकरण रोकथाम) अधिनियम, 1948, (1948 का पूर्वी पंजाब अधिनियम 50) के अधीन सार्वजनिक प्रयोजनों हेतु आरक्षित है।

परिभाषाएं। 2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''कृषि'' में ऐसे क्रियाकलाप शामिल हैं, जो कृषि के साथ-साथ किए जाते हैं या से संबंधित हैं जैसे पषुधन के पालन-पोषण हेतु संरचना का निर्माण, कृषि उत्पाद उपकरणों के भण्डारण, उर्वरक, बीज तथा खाद्य और गैर खाद्य फसलें, चारा या घास, फल तथा सब्जियां, फूल, कोई अन्य बागवानी फसलें तथा पौधा रोपण, पषुपालन तथा डेयरी, मुर्गीपालन, पषु प्रजनन, मत्स्य पालन, कृषि38 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA) वानिकी, कृषि प्रसंस्करण सहित कृषि उत्पाद, जिसका पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार निष्पादित किए गए करार में करने का विनिष्चय करें तथा ऐसे अन्य सहबद्ध क्रियाकलाप, जो सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाएं;

(ख) 'सरकार' से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ग) 'सुधार' से अभिप्राय है, पूंजीगत आस्तियों के सृजन के माध्यम से भूमि का सुधार और इसमें पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार की आपसी सहमति से पट्‌टा करार में यथा वर्णित किए जाने वाले कार्य भी शामिल हैं;

(घ) ''भूमि'' से अभिप्राय है, भूमि जो कृषि के लिए उपयोग की जाती है, किन्तु इसमें ऐसी भूमि पर भवनों के स्थल तथा अन्य संरचनाएं, सिवाय जहां ये कृषि के लिए उपयोग की जाती हैं, शामिल नहीं हैं;

(ड.) ''पट्‌टा करार'' से अभिप्राय है, पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार के बीच लिखित रूप में किया गया कोई करार, जिससे पट्‌टाकर्ता इस अधिनियम के अधीन पट्‌टा धनराषि के रूप में प्रतिफल हेतु किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए कृषि करने हेतु अपनी भूमि का उपयोग तथा अधिभोग पट्‌टेदार को हस्तांतरित करता है;

(च) ''पट्‌टा धनराषि'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन पट्‌टा करार के अनुसार,

पट्‌टाकर्ता को दी गई धनराषि या फसल का हिस्सा;

(छ) ''पट्‌टेदार'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन निष्पादित पट्‌टा करार के

अनुसार धनराषि देते हुए कृषि तथा सहबद्ध क्रियाकलाप करने वाला कोई व्यक्ति;

(ज) ''पट्‌टाकर्ता'' से अभिप्राय है, भूमि का स्वामी तथा इसमें उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि

भी शामिल है;

(झ) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित। (2) इस अधिनियम में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम 17) में उन्हें दिया गया है। कृषि भूमि को पट्‌टे पर देना।

3. (1) इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही, अधिनियम के उपबन्धों के अधीन कृषि भूमि को पट्‌टे पर देने का आषय रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के निबन्धनों के अनुरूप पट्‌टा करार करेेगा;

(2) कृषि भूमि को पट्‌टे पर देने का आषय रखने वाला भू-स्वामी या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि ऐसी अवधि के लिए तथा ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों, जो आपसी सहमति द्वारा करार पाई जाएं, पर लिखित पट्‌टा करार करेगा। (3) पट्‌टा करार में निम्नलिखित ब्यौरे, निबन्धन तथा शर्तें शामिल होंगी, अर्थात्‌ः-

(क) पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार का सम्पूर्ण पता/ पत्र व्यवहार के ब्यौरों सहित उनके नाम; (ख) राजस्व अभिलेखों तथा इनकी सही अवस्थिति के अनुसार पट्‌टे पर दिए जाने वाले

प्रस्तावित खेत की संख्या सहित कृषि भूमि के संदर्भ ब्यौरे;

(ग) कृषि फसल चक्र के अनुकूल पट्‌टे के प्रारम्भ तथा समाप्ति की तिथियों सहित पट्‌टा

करार की अवधि;

(घ) पट्‌टा करार की अवधि के लिए प्रति वर्ष आधार पर पट्‌टा राषि तथा तिथियां

जिनको पट्‌टा राषि पट्‌टाकर्ता को पट्‌टेदार द्वारा भुगतानयोग्य होगी;

(ड.) बहु भू-स्वामियों की दषा में, भू-स्वामी या भू-स्वामियों जिनको पट्‌टा राषि का

भुुगतान किया जाएगा;

(च) पट्‌टा करार के नवीनीकरण या विस्तार, यदि कोई हो, के लिए निबन्धन तथा शर्तें; (छ) ऐसी शर्तों, जो पट्‌टा अवधि की सामान्य समाप्ति से पूर्व पट्‌टा करार के समयपूर्व समाप्ति के लिए पूरी की जानी है, सहित ऐसी शर्तें जो पट्‌टा करार के तात्विक भंग होने का कारण बनेंगी तथा उनके परिणाम;

(ज) सिंचाई तथा मृदा की गुणवत्ता में वृद्धि सहित कृषि उत्पादकता तथा संधारण हेतु

भूमि सुधार हेतु निवेश के लिए पट्‌टाकर्ता की बाध्यताएं;

(झ) कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि के स्वरूप या इसके उपयोग में कोई त्रुटि, कोई लम्बित वाद या पट्‌टाकर्ता की ओर से कोई चूक, जिससे वह अभिज्ञ है तथा जिससे पट्‌टा भूमि पर पट्‌टेदार द्वारा इस अधिनियम के अधीन अधिकारों के उपयोग प्रभावित होते हैं या होने की संभावना है;

39 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA)

(ञ) इस अधिनियम के उपबन्धों से संगत तथा प्रज्ञापूर्ण कृषि परिपाटी की अन्य आपसी

सहमति शर्त;

(ट) पट्‌टेदार को पट्‌टा करार के निबन्धनों तथा शर्तों में यथा विनिर्दिष्ट ऐसे नोटिस, जिस पर आपसी सहमति हो, के साथ पट्‌टाकर्ता को पट्‌टा भूमि के अभ्यर्पण का अधिकार होगा।

(4) पट्‌टा करार, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम संख्या 16) के उपबन्धों के अनुसार पंजीकृत किया जाएगा तथा ऐसी तिथि, जिस पर सहमत हों, को या ऐसी तिथि के बाद, जिसको करार पंजीकृत किया गया है, से लागू होगा। (5) पट्‌टा करार के लागू होने से, पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार इस अधिनियम के अधीन संरक्षणों, अधिकारों तथा बाध्यताओं के लिए हकदार होंगे ।

पट्‌टा भूमि का कब्जा। 4. (1) पट्‌टाकर्ता को धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन किए गए पट्‌टा करार के प्रारम्भ से तुरन्त जुताई के प्रयोजनों के लिए इस उपधारा के उपबंधों के निबन्धनों के सिवाय ऋणभारों से मुक्त पट्‌टा भूमि का कब्जा देने हेतु बाध्य किया जाएगाः

परन्तु जहां पट्‌टा करार के प्रारम्भ से पूर्व पट्‌टा भूमि के सम्बन्ध में कोई ऋणभार है, तथा पट्‌टाकर्ता उस पर सृजित दायित्व या हित के निर्वहन या लिए गए किसी ऋण या उस पर ब्याज के पुनर्भुगतान को स्वीकार करता है, तो पट्‌टेदार को पट्‌टाकर्ता के विरूद्ध खड़े ऐसे ऋणभारों सहित कब्जा दिया जाएगा। (2) पट्‌टा करार तथा उस पट्‌टे की अवधि, अधिकारों के अभिलेख के टिप्पणी खाने में दर्ज की जाएगी किन्तु ऐसी प्रविष्टि तत्समय लागू किसी राज्य विधि के अधीन कोई स्थायी अभिधृति या अधिभोग अभिधृति अधिकारों या अन्यथा का सृजन नहीं करेगी। (3) पट्‌टा भूमि का कब्जा, तुरन्त तथा पट्‌टाकर्ता की ओर सेे अपेक्षित किसी आगामी कार्रवाई के बिना, पट्‌टे की समाप्ति या पर्यवसान पर भू-स्वामी को प्रतिवर्तित हो जाएगा। (4) पट्‌टाकर्ता, पट्‌टा करार की समाप्ति पर या इसके समयपूर्व पर्यवसान होने पर और पट्‌टाकर्ता की ओर से अपेक्षित किसी आगामी कार्रवाई के बिना सभी ऋणभारों से मुक्त पट्‌टा भूमि का कब्जा प्राप्त करने का हकदार होगा : परन्तु पट्‌टा करार के समयपूर्व पर्यवसान की दशा में, पट्‌टेदार, कृषि फसल चक्र के अनुसार पट्‌टा भूमि पर बोई गई खड़ी फसल की कटाई करने का हकदार होगा तथा फसल की कटाई तक पट्‌टा करार के पर्यवसान की तिथि के बाद अधिभोग की ऐसी अवधि के लिए पट्‌टा राशि का भुगतान करने के लिए दायी होगा। (5) पट्‌टेदार की मृत्यु की दशा में, पट्‌टेदार के विधिक वारिस या उत्तराधिकारी, पट्‌टेदार के रूप में समझे जाएंगे तथा ऐसे विधिक वारिस या उत्तराधिकारियों को पट्‌टा करार को समय-पूर्व पर्यवसान करने या पट्‌टे की शेष अवधि के लिए ऐसे विधिक वारिस या उत्तराधिकारी को समनुदेषित पट्‌टा करार को लागू करने का विकल्प होगा। (6) पट्‌टे पर दी गई भूमि के सह-स्वामियों के बीच विभाजन सहित किसी रीति में विक्रय, रेहन, रेहन मोचन, उत्तराधिकार, उपहार या हस्तान्तरण या अन्तरण की दशा में, पट्‌टा करार की अवधि की समाप्ति तक पट्‌टे पर दी गई भूमि पर पट्‌टेदार का कब्जा बना रहेगा और आगे,-

(i) पट्‌टेदार, जिसके पक्ष में भूमि का स्वामित्व या हित अंतरित किया गया है, को

अधिकार-धारक के पट्‌टेदार के रूप में समझा जाएगा; तथा

(ii) पट्‌टा करार, ऐसेे अधिकार धारक के पक्ष में यथा आवश्यक परिवर्तन सहित

समनुदेषित हो जाएगा ।

(7) राजस्व अभिलेखों में जुताई के कब्जे में सम्पूर्ण खसरा संख्या का पट्‌टा या तो साझे में सभी सह-हिस्सेदारों या एकल स्वामी, जैसी भी स्थिति हो, को अनुज्ञेय होगा।

पट्‌टेदार के अधिकार तथा बाध्यताएं। 5. (1) पट्‌टेदार, पट्‌टा करार के निबन्धन तथा शर्तों के अनुसार तथा इस अधिनियम के उपबंधों के सिवाय पट्‌टाकर्ता की ओर से किसी बाधा या हस्तक्षेप के बिना पट्‌टा करार की अवधि के दौरान पट्‌टे पर दी गई भूमि की जुताई करने का हकदार होगा।

(2) पट्‌टेदार, बैंकिंग विधि के उपबंधों के अनुसार पट्‌टे की अवधि के दौरान कृषि फसल चक्र के भीतर पुनर्भुगतानयोग्य कोई फसल ऋण प्राप्त करने का हकदार होगा। (3) उपधारा (2) के अधीन किसी फसल ऋण से भिन्न कोई भी ऋणभार पट्‌टेदार द्वारा पट्‌टाकर्ता की पूर्व लिखित सहमति के बिना सृजित नहीं किया जाएगा।40 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA) (4) पट्‌टेदार इस अधिनियम की धारा 7 के अधीन भूमि सुधार के लिए किसी दायित्व या लिए गए ऋण को छोड़कर, पट्‌टा करार की अवधि के दौरान पट्‌टे पर दी गई भूमि पर लिए गए किसी फसल ऋण या ब्याज के पुनर्भुगतान या किसी अन्य दायित्व के लिए उत्तरदायी होगा। (5) पट्‌टेदार, पट्‌टा अवधि के दौरान, पट्‌टाकर्ता के सिवाय किसी भी व्यक्ति को पट्‌टा भूमि को किसी भी रीति में उप-पट्‌टे पर नहीं देगा या पूर्णतः या भागतः कब्जे का अंतरण नहीं करेगाः परन्तु भूमि की जुताई के लिए श्रमिकों का नियोजन का अर्थ, पट्‌टा भूमि को उप-पट्‌टे पर देने या कब्जे के अंतरण के रूप में नहीं लगाया जाएगा। (6) पट्‌टेदार, पट्‌टा करार के निबन्धनों के अनुसार कृषि या फसलों की जुताई और उससे संयोजित या संबंधित मामलों से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग नहीं करेगा।

पट्‌टाकर्ता के अधिकार तथा बाध्यताएं।

6. (1) इस अधिनियम में या पट्‌टा करार में यथा उपबंधित के सिवाय, पट्‌टाकर्ता पट्‌टा करार के निबन्धनों के अनुसार पट्‌टा अवधि के दौरान कृषि के प्रयोजनों के लिए पट्‌टे पर दी गई भूमि के उपयोग तथा अधिभोग में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

(2) जहां तक ऐसी जुताई के अधिकार, जो पट्‌टे के दौरान पट्‌टा करार में दिए जाएं, के उपयोग के सिवाय, पट्‌टा करार की किसी बात का पट्‌टे के दौरान या की समाप्ति के बाद स्थायी अभिधृति या अधिभोगी अभिधृति के लिए पट्‌टाकर्ता के स्वामित्व अधिकारों को प्रभावित करने या पट्‌टेदार के पक्ष में किसी अधिकार को सृजित करने का अर्थ नहीं लगाया जाएगा।

(3) पट्‌टाकर्ता, पट्‌टेदार द्वारा भुगतान की गई पट्‌टा राशि की प्राप्ति पर पट्‌टाकर्ता द्वारा इसकी लिखित तथा सम्यक्‌ रूप से हस्ताक्षरित रसीद उपलब्ध करवाएगा।

पट्‌टे पर दी गई भूमि पर सुधारों के संबंध में अधिकार तथा बाध्यताएं।

7. (1) पट्‌टेदार, पट्‌टे की अवधि के दौरान पट्‌टाकर्ता की पूर्व सहमति से, सिंचाई तथा मृदा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयोजनों सहित कृषि उत्पादकता तथा संधारणीय सुधार के लिए भूमि में सुधार कर सकता है। (2) उपधारा (1) के अधीन पट्‌टाकर्ता की सहमति के प्रयोजनों हेतु, पट्‌टेदार भूमि में सुधार करने के लिए ब्यौरे तथा अपने आशय की घोषणा करते हुए और भूमि सुधारों की युक्तियुक्त अनुमानित लागत देते हुए पट्‌टाकर्ता को कम से कम तीस दिन का नोटिस तामिल करेगा।

(3) पट्‌टाकर्ता को अपनी लागत पर भूमि में सुधार करने या पट्‌टेदार को ऐसे सुधारों के लिए निधियाँ उपलब्ध करवाने या पट्‌टेदार द्वारा दी गई निधियों से सुधार करने के लिए पट्‌टेदार को अनुमति देने का विकल्प होगा और ऐसे विकल्प को उपधारा (2) के अधीन पट्‌टाकर्ता द्वारा दिए गए उत्तर में दर्शित किया जाएगाः परन्तु जहां पट्‌टेदार उस द्वारा दी गई निधियों से सुधार करवाता है, तो पट्‌टेदार, पट्‌टाकर्ता को भुगतानयोग्य पट्‌टा राशि से पट्‌टेदार द्वारा करवाए गए ऐसे सुधार कार्य के लिए उपगत लागत की कटौती करने के लिए हकदार होगा। (4) उपधारा (3) के अधीन प्रयोज्य विकल्पों के अध्यधीन, पट्‌टाकर्ता, तीस दिन की अवधि के भीतर, उपधारा (2) के अधीन नोटिस में यथा वर्णित भूमि सुधार करने के लिए अपनी सहमति लिखित में देगा या इनकार करेगा।

8. (1) पट्‌टेदार को भूमि पर कोई स्थायी ऋणभार सृजित किए बिना किसी बैंक, सहकारी सोसाइटी या किसी अन्य वित्तीय संस्था से उनके सुसंगत विधि के अनुसार फसल ऋण लेने का अधिकार होगा।

पट्‌टे पर दी गई भूमि पर जुताई के लिए फसल ऋण लेने हेतु पट्‌टेदार का अधिकार।

(2) इस अधिनियम के अधीन स्वीकृत ऋण के लिए भूमि पर कोई ऋणभार सृजित नहीं किया जा सकेगा।

प्राकृतिक आपदा की दशा में राहत के लिए पट्‌टेदार का अधिकार।

9. प्राकृतिक आपदा के कारण या अन्यथा से खड़ी फसल की क्षति की दशा में और जहां ऐसी क्षति के लिए मुआवजा या राहत चाहे किसी फसल बीमा या केन्द्रीय या राज्य सरकार की किसी अन्य स्कीम के अधीन दी गई है, तो पट्‌टेदार को ऐसी क्षति के लिए पट्‌टे की अवधि के दौरान ऐसा मुआवजा या राहत प्राप्त करने का अधिकार होगा।

विवाद संकल्प। 10. (1) पट्‌टा करार से संबंधित कोई व्यथित व्यक्ति, सहायक, कलक्टर प्रथम ग्रेड के सम्मुख विवादित मामलों के ब्यौरे देते हुए आवेदन दायर कर सकता है।

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड, या तो लिखित में अथवा ऐसा अभिहित इलेक्ट्रोनिक साधन, जो विहित किया जाए, द्वारा दूसरे पक्षकार को पट्‌टा करार में विनिर्दिष्ट पता अथवा मोबाइल नम्बर, जैसी भी स्थिति हो, पर नोटिस जारी करवाएगा।41 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA) (3) आवेदन, उपधारा (1) के अधीन आवेदन दायर करने की तिथि से पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड द्वारा विनिश्चित किया जाएगा। (4) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध में या तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन किसी आवेदन पर, संबंधित किसी भी कार्यवाही में, कोई भी अंतरिम आदेश (चाहे व्यादेश या रोक के रूप में या किसी अन्य रीति मेें हो) तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक -

(क) ऐसे आवेदन और ऐसे अन्तरिम आदेश के लिए अभिवचन के समर्थन में सभी दस्तावेजों की प्रतियां पक्षकार, जिसके विरूद्ध ऐसा आवेदन किया गया है या किए जाने के लिए प्रस्तावित है, को प्रस्तुत नहीं की गई हैं; तथा

(ख) ऐसे पक्षकार को मामले में सुनवाई का अवसर नहीं दिया जाता हैः

परन्तु सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड, खण्ड (क) और (ख) की अपेक्षाओं से विमुक्त कर सकता है और किसी आपवादिक उपाय के रूप में कोई अन्तरिम आदेश कर सकता है, यदि अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से उसकी संतुष्टि हो जाती है कि आवेदक को होने वाली किसी हानि को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक है, जिसकी धनराशि से पर्याप्त रूप से क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती किन्तु कोई ऐसा अन्तरिम आदेश, यदि इसे जल्दी ही रद्‌द नहीं किया जाता है, तो उस तिथि, जिसको यह किया गया है, से चौदह दिन की अवधि की समाप्ति पर प्रभावहीन हो जाएगा।

(5) आवेदन पर विनिष्चय करने के प्रयोजन हेतु, सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम 17) के उपबंधों के अधीन राजस्व अधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करेगा।

अपील । 11. (1) धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड द्वारा पारित किसी आदेश की अपील अधिकारिता रखने वाले कलक्टर को हो सकेगी। (2)़ उपधारा (1) के अधीन अपील, धारा 10 की उपधारा (3) के अधीन आदेश की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर दायर की जाएगी। (3) जहां किसी मामले में, कलक्टर की राय है कि सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड ने किसी युक्तियुक्त कारण के बिना पैंतालीस दिन के भीतर वाद का निपटान नहीं किया है, तो वह या तो पक्षकार या अन्यथा से उसको किए गए आवेदन पर केस का रिकार्ड तलब कर सकता है और मामले का विनिश्चय कर सकता है ।

(4) कलक्टर, उपधारा (1) के अधीन अपील अथवा उपधारा (3) के अधीन मामले का विनिश्चय, अपील या आवेदन दायर करने या मामले का रिकार्ड, जहां उस द्वारा स्वप्ररेणा से रिकार्ड तलब किया गया है, प्राप्त होने की तिथि से तीस दिन की अवधि के भीतर करेगा।

(5) अपील में कलक्टर का आदेश अन्तिम होगा। (6) पट्‌टा अवधि के दौरान पट्‌टेदार द्वारा भूमि को पहुंचाई गई किसी क्षति की दशा में, पट्‌टाकर्ता ऐसे मुआवजे का हकदार होगा, जो यथा विहित प्रक्रिया के अनुसार सहायक कलक्टर द्वितीय ग्रेड द्वारा अवधारित किया जाएः

परन्तु यदि मुआवजा प्राप्त करने के लिए हकदार व्यक्ति के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो पट्‌टेदार इसे ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में अधिकारिता रखने वाले सहायक कलक्टर द्वितीय ग्रेड के पास जमा करवाएगा।

पट्‌टे की पर्यवसान के लिए शर्तें। 12. इस अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (4) के अधीन पंजीकृत पट्‌टा करार, दोनों में से किसी पक्षकार द्वारा निम्नलिखित आधारों पर ऐसे पट्‌टा करार का पर्यवसान किया जा सकता है :-

(क) यदि पट्‌टेदार, पट्‌टा करार में दी गई अनुग्रह अवधि के बाद सहमत निबन्धनों के अनुसार

और सहमत समय पर पट्‌टाकर्ता को पट्‌टा राशि का भुगतान करने में असफल रहता है;

(ख) यदि पट्‌टेदार, कृषि या फसलों की जुताई या इससे संयोजित या उससे सम्बन्धित से

भिन्न प्रयोजनों के लिए भूमि का उपयोग करता है;

(ग) यदि पट्‌टेदार, इस अधिनियम के अधीन अनुमत से अन्यथा या पट्‌टाकर्ता की पूर्व लिखित

सहमति के बिना पट्‌टे पर ली गई भूमि पर कोई ऋणभार सृजित करता है;

42 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA)

(घ) यदि पट्‌टेदार उसके द्वारा प्राप्त किए गए किसी फसल ऋण का पुनर्भुगतान करने में या पट्‌टे की अवधि के दौरान पट्‌टा भूमि पर सृजित किसी दायित्व का निर्वहन करने में असफल रहता है;

(ङ) यदि पट्‌टेदार ने पट्‌टाकर्ता को छोड़कर किसी व्यक्ति को किसी रीति में पूर्णतः या भागतः पट्‌टा भूमि उप-पट्‌टा पर दी है या का कब्जा अन्तरित किया है ;

(च) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन पट्‌टाकर्ता की ओर से प्रकटीकरण, यदि कोई हो, करने की असफलता, पट्‌टेदार को पट्‌टे के पर्यवसान तथा पट्‌टाकर्ता से मुआवजे के दावे के लिए हकदार बनाएगी ;

(छ) यदि पट्‌टेदार, पट्‌टाकर्ता की पूर्व सहमति के बिना, कृषि के प्रयोजनों के लिए पट्‌टे पर ली गई भूमि को सारभूत रूप से विकृत या क्षति पहुंचाता है ;

(ज) यदि पट्‌टेदार, पट्‌टाकर्ता की पूर्व लिखित सहमति के बिना पट्‌टा भूमि में सुधार करने का प्रयत्न करता है;

(झ) यदि पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार, पट्‌टा करार के पर्यवसान के लिए परस्पर सहमत हैं;

(ञ) यदि पट्‌टेदार की पट्‌टा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है और पट्‌टेदार का विधिक वारिस या उत्तराधिकारी इस अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (5) के उपबन्धों के अधीन पट्‌टा करार के पर्यवसान के लिए विकल्प का प्रयोग करता है;

(ट) यदि या तो पट्‌टाकर्ता या पट्‌टेदार, पट्‌टा करार के निबन्धनों तथा शर्तों का सारवान या तात्विक उल्लंघन करता है।

पट्‌टा करार के पर्यवसान के लिए प्रक्रिया।

13. (1) या तो पट्‌टाकर्ता या पट्‌टेदार, जैसी भी स्थिति हो, इस अधिनियम की धारा 12 में विनिर्दिष्ट कारणों हेतु, दूसरे पक्षकार को ऐसे प्ररूप तथा रीति, जो विहित की जाए, में पर्यवसान के लिए नोटिस देगाः परन्तु इस प्रकार तामिल नोटिस में, नोटिस का उत्तर देने हेतु दूसरे पक्षकार को कम से कम पन्द्रह दिन दिए जाएंगे और इस अवधि के दौरान नोटिस की तामिल करने वाले पक्षकार द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी। (2) यदि पक्षकार, जिसको उपधारा (1) के अधीन नोटिस तामिल किया गया है, को नोटिस में दिए गए आधारों के बारे में कोई विवाद है, तो ऐसा पक्षकार, नोटिस तामिल करने वाले पक्षकार को पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर कथित कारणों सहित उत्तर दे सकता है। (3) यदि उत्तर पर विचार करने के बाद भी विवाद बना रहता है, तो नोटिस तामिल करने वाला पक्षकार विवाद के निपटान के लिए इस अधिनियम की धारा 10 के उपबन्धों का आह्‌वान कर सकता है। (4) पट्‌टाकर्ता तथा पट्‌टेदार के बीच विवाद के बने रहते हुए भी, पट्‌टेदार, पट्‌टा अवधि की समाप्ति पर पट्‌टाकर्ता को पट्‌टा भूमि का कब्जा देगा।

पट्‌टाकर्ता का पुनः स्थापन।

14. पट्‌टा करार की अवधि की समाप्ति या इसके पर्यवसान पर, यदि पट्‌टेदार, पट्‌टा करार के अधीन भूमि खाली नहीं करता है और का कब्जा नहीं देता है, तो पट्‌टाकर्ता के आवेदन पर, सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड, पट्‌टेदार से पन्द्रह दिन के भीतर पट्‌टाकर्ता को ऐसी भूमि का कब्जा देने की अपेक्षा करते हुए उसको कारण बताओ नोटिस जारी करेगा, जिसमें असफल होने पर सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड उचित बल नियोजित करेगा, जो वह वास्तविक कब्जे को सुनिश्चित करने और ऐसी भूमि पर पट्‌टाकर्ता का कब्जा पुनः स्थापित करने के लिए ठीक समझे।

15. (1) सहायक कलक्टर प्रथम ग्रेड और कलक्टर को पट्‌टा भूमि के संदर्भ में और पट्‌टा के निबन्धनों और शर्तों तथा इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार पट्‌टेदार और पट्‌टाकर्ता के बीच किसी विवाद को विनिश्चत करने के लिए एकमात्र अधिकारिता होगी।

राजस्व अधिकारियों की एकमात्र अधिकारिता।

(2) कोई भी सिविल न्यायालय इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन किए गए पट्‌टा करार के सम्बन्ध में या से संयोजित किसी भी मामले में अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगा।

सदभावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण।

16. इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए नियमों के कार्यान्वयन में कर्तव्य का पालन करने में सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी लोक सेवक के विरूद्ध किसी न्यायालय या प्राधिकरण के सम्मुख कोई वाद, अभियोजन या विधिक कार्यवाहियां नहीं हो सकेंगी। 17. (1) सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। नियम बनाने की शक्ति।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियमों को राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।43 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 7, 2025 (MAGH. 18, 1946 SAKA) अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना। 18. तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई किसी बात से असंगत या ऐसी विधि के फलस्वरूप प्रभाव रखनेे वाली किसी लिखत के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबन्ध का अध्यारोही प्रभाव होगा :

परन्तु पहले ही प्रोदभूत कोई अधिकार, पहले से की गई कार्रवाई या लागू किसी अन्य राज्य विधि के अधीन लम्बित मामले, ऐसी विधि के उपबन्धों द्वारा शासित होंगे।

कठिनाईयां दूर करने की शक्ति। 19. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो इस अधिनियम के प्रारम्भ होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि के भीतर, सरकार, राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध कर सकती है या ऐसे निर्देश दे सकती है, जो इसे ऐसी कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों।

(2) उपधारा (1) के अधीन पारित आदेश की प्रति, इसके अधिसूचित होने के यथा शीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख इसके आगामी आने वाले सत्र में रखी जाएगी।

अमरजीत सिंह, विषेष सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

11632—L.R.—H.G.P., Pkl.

.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 07 February 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2025-02-07.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2024/. Archive identifier in.gazette.haryana.2025-02-07.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2024.