PART-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 16 अप्रैल, 2025
संख्या लैज. 6/2025.— दि हरियाणा विलेज कॉमन लैन्डज (रेगुलेषन) अमेन्डमेन्ट ऐक्ट, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 11 अप्रैल, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 5
हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संषोधन अधिनियम, 2025 हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम। 1. यह अधिनियम हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संषोधन अधिनियम, 2025 कहा जा सकता है।
1961 के पंजाब अधिनियम 18 की धारा 3 का संषोधन। 2. हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 3 की उप-धारा (2) के खण्ड (iii) में, "कलक्टर द्वारा ऐसे सिद्धांतों के अनुसार तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में यथा निर्धारित ऐसी राषि का पंचायत को भुगतान करने के अध्यधीन ऐसे सभी अधिकार, हक तथा हित उक्त पट्टेदार, अंतरिती या उसके विधिक वारिस" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "ऐसे सिद्धांतों के अनुसार तथा ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में कलक्टर द्वारा यथा निर्धारित ऐसी राषि का पंचायत को भुगतान करने के अध्यधीन ऐसे सभी अधिकार, हक तथा हित उक्त पट्टेदार, अंतरिती या उसके विधिक वारिस" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
3. मूल अधिनियम की धारा 5क में,-
1961 के पंजाब अधिनियम 18 की धारा 5क का संषोधन। (i) उप-धारा (1) में, व्याख्या के साथ प्रथम तथा द्वितीय परन्तुक का लोप कर दिया जाएगा; (ii) उप-धारा (1क) में,-
(क) "राज्य सरकार" षब्दों के स्थान पर, "निदेषक, विकास तथा पंचायत विभाग" षब्द
तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) "ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में निर्धारित की जाने वाली ऐसी दर, जो बाजार दर से कम न हो," षब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "ऐसी दर, जो विहित की जाए," षब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार,
विधि तथा विधायी विभाग।
11803—L.R.—H.G.P., Pkl.