भाग-II
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 26 नवम्बर, 2025
संख्या लैज. 24/2025.- दि हरियाणा जन विष्वास (अमेन्डमेन्ट ऑफ प्रॅविष्जॅ़नस) ऑर्डिनन्स, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 19 नवम्बर, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (ग) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2025 का हरियाणा अध्यादेष संख्या 2
हरियाणा जन विष्वास (उपबन्धों का संशोधन) अध्यादेष, 2025 जीवन की सुगमता और कारबार करने की सुगमता के लिए विष्वास आधारित षासन को और बेहतर बनाने हेतु अपराधों के निरापराधीकरण और सुव्यवस्थीकरण के लिए कतिपय अधिनियमितियों को संषोधित करने हेतु अध्यादेष
भारत गणराज्य के छिहारवें वर्ष में हरियाणा के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।
चूंकि हरियाणा राज्य विधानमण्डल का सत्र नहीं हो रहा है तथा राज्यपाल की सन्तुष्टि हो गई है
कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं, जिनके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उनके लिए आवष्यक हो गया है ;
इसलिए, अब, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग
करते हुए, हरियाणा के राज्यपाल, इसके द्वारा, निम्नलिखित अध्यादेष प्रख्यापित करते हैंः-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अध्यादेष हरियाणा जन विष्वास (उपबन्धों का संशोधन) अध्यादेष, 2025 कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा।
2. अनुसूची के खाना (4) में वर्णित अधिनियमितियों को उसके खाना (5) में वर्णित सीमा तक और रीति में इसके द्वारा संषोधित किया जाता है।
कतिपय अधिनियमितियों का संषोधन।
शास्तियों का उपांतरण। 3. अनुसूची में वर्णित अधिनियमितियों में विभिन्न उपबन्धों के अधीन उपबन्धित शास्तियां, इस अध्यादेष के प्रारम्भ की तिथि से प्रत्येक तीन वर्ष की समाप्ति के बाद, उसकी उपबन्धित शास्ति की न्यूनतम राषि के दस प्रतिषत तक बढ़ाई जाएगी।
शास्ति अधिरोपित करने/अपील सुनने हेतु प्राधिकारी। 4. (1) सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनवाई के नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्त का पालन किए बिना अनुसूची में वर्णित सुसंगत अधिनियमिति के किसी भी उपबन्ध की उल्लंघना में कोई भी शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी। व्याख्या.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "सक्षम प्राधिकारी" से अभिप्राय है, ऐसा प्राधिकारी, जो इस अध्यादेष के अधीन संषोधित की जाने वाली सुसंगत अधिनियमिति में उपबन्धित है अथवा यदि अधिनियमिति में सक्षम प्राधिकारी उपबंधित नहीं है, तब ऐसा प्राधिकारी, जिसे सरकार/राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।
(2) सक्षम प्राधिकारी के किसी आदेष से व्यथित कोई व्यक्ति, अपील प्राधिकारी को ऐसी अवधि, जो आदेष की तिथि से विनिर्दिष्ट की जाए, के भीतर ऐसी रीति, जो विनिर्दिष्ट की जाए, में अपील दायर कर सकता हैः परन्तु अपील प्राधिकारी उक्त विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि अपीलकर्ता को नियत अवधि के भीतर अपील दायर करने से उपयुक्त कारणों से रोका गया था। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए "अपील प्राधिकारी" से अभिप्राय है, ऐसा प्राधिकारी, जिसे
सरकार/राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।
62 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 26, 2025 (AGHN. 5, 1947 SAKA)शास्ति की वसूली।
5. यदि यथा अधिरोपित शास्ति की राषि जमा नहीं करवाई जाती है, तो भू-राजस्व के बकायों के रूप में वसूल किए जाने हेतु दायी होगी।
व्यावृाि। 6. इस अध्यादेष द्वारा किसी भी अधिनियमिति का संषोधन या निरसन, किसी अन्य अधिनियमिति को प्रभावित नहीं करेगा, जिसमें संषोधित या निरसित अधिनियमिति को लागू ,शामिल या निर्दिष्ट किया गया है; और यह अध्यादेष पहले से की गई या सहन की गई किसी बात की वैधता, अवैधता, प्रभाव या परिणामों, या पहले से अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, हक, बाध्यता या दायित्व, या उनके सम्बन्ध में किसी उपचार या कार्यवाही, या किसी ऋण, शास्ति, बाध्यता, दायित्व, दावे या मांग की अथवा से किसी निर्मुक्ति या उन्मोचन, या पहले से दी गई किसी क्षतिपूर्ति या किसी पूर्व कार्य या बात के सबूत को प्रभावित नहीं करेगा; न ही यह अध्यादेष विधि के किसी सिद्धान्त या नियम, या स्थापित अधिकारिता, अभिवचन, व्यवहार या प्रक्रिया के रूप या क्रम, या विद्यमान प्रथा, रूढ़ि, विषेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, पद या नियुक्ति को प्रभावित करेगा, इस बात के होते हुए भी कि यह क्रमषः इसके द्वारा संषोधित या निरसित किसी अधिनियमिति द्वारा, में या से किसी भी रीति में अभिपुष्ट किया गया हो या मान्यता दी गई हो या व्युत्पन्न हुआ हो; न ही इस अध्यादेष द्वारा किसी अधिनियमिति का संषोधन या निरसन, किसी अधिकारिता, पद, रूढ़ि, दायित्व, अधिकार, हक, विषेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, प्रथा, व्यवहार, प्रक्रिया या अन्य मामले या बात को पुनर्जीवित या प्रत्यावर्तित करेगा जो अब प्रचलित या लागू नहीं है।63 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 26, 2025 (AGHN. 5, 1947 SAKA)
| अनुसूची | ||||
| क्रम संख्या | वर्ष | संख्या | संक्षिप्त नाम | संशोधन |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
| 1. | 1872 | पंजाब अधिनियम IV | हरियाणा विधि अधिनियम, 1872 | 1. धारा 42 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "42. सहायता रोकने या मौन स्वीकृति देने या भगाने के लिए शास्ति.- यदि ऐसा मुखिया या पहरेदार तत्काल ऐसी सहायता नहीं देता, या यदि ऐसे गांव के निवासी अपने घरों में अपराधियों की तलाषी के लिए पूरा अवसर नहीं देते हैं, या यदि मामले की परिस्थितियों से यह विष्वास करने का ठोस कारण प्रतीत होता है कि ऐसे गांव के निवासी, या उनमें से कोई भी अपराध करने में या अपराधियों को भगाने में मौन सहमति दे रहे थे, और ऐसे अपराधियों का गांव से बाहर जाने का सुराग नहीं मिला है, तो जिला मजिस्ट्रेट, ऐसे उन निवासियों पर, जो तुरंत सहायता नहीं देते हैं या अपराधी को भागने में मौन सहमति देते हैं या मदद करते हैं, तो ऐसी शास्ति, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, अधिरोपित कर सकता है।"। 2. धारा 50ख के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "50ख. नियमों का भंग करने पर शास्ति.- यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी नियम के उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम की नहीं हो सकेगी, किन्तु पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी।"। |
| 2. | 1883 | पंजाब अधिनियम 20 | हरियाणा जिला बोर्ड अधिनियम, 1883 | धारा 57 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "57. विनियमों का अतिलंघन करने के लिए शास्ति.- धारा 56 के अधीन बनाए गए किसी विनियमन का अतिलंघन करने के मामले में, बोर्ड यह अवधारित कर सकता है कि उसका भंग करने पर ऐसी शास्ति, जो पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी, और भंग जारी रहने के मामले में, प्रत्येक दिन, जिसके दौरान भंग जारी रहता है, के लिए एक हजार रुपए की अतिरिक्त शास्ति, जो बीस हजार रुपए तक की अधिकतम सीमा तक की हो सकेगी, के लिए दायी होगा : परन्तु उपायुक्त ऐसी शास्ति अधिरोपित करने से पूर्व अपराधी को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा।"। |
| 3. | 1913 | पंजाब अधिनियम 3 | हरियाणा वन (इमारती लकड़ी की बिक्री) अधिनियम, 1913 | धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (च) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "(च) इस धारा के अधीन बनाए गए किसी नियम का अतिलंघन करने के लिए पचास हजार रुपए की शास्ति विहित की जा सकती है। यदि भंग सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किया जाता है, या विधिपूर्ण प्राधिकार के प्रतिरोध की तैयारी के बाद किया जाता है, या यदि अपराधी को पहले भी समरूप अपराध के लिए दोषसिद्ध |
| ठहराया जा चुका है, तो शास्ति पहले से अधिरोपित शास्ति की राशि का दुगुनी होगी। इसके अतिरिक्त, पुनरावृत्त भंग करने के मामले में, शास्ति, शास्ति की दुगुनी होगी। संज्ञान लेने और शास्ति वसूल करने वाला अधिकारी उप रेंज वन अधिकारी की पदवी से नीचे का नहीं होगा।"। | ||||
| 4. | 1914 | पंजाब अधिनियम I | हरियाणा आबकारी अधिनियम, 1914 | 1. धारा 65 के खंड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "(क) किसी आबकारी अधिकारी या ऐसी मांग करने हेतु सम्यक् रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा ऐसी मांग करने पर ऐसी अनुज्ञप्ति, परमिट या पास को प्रस्तुत करने में जानबूझकर असफल रहता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम नहीं हो सकेगी, किन्तु एक लाख रुपए तक की हो सकेगी।"। 2. धारा 70 में,- (i) "यदि कोई आबकारी अधिकारी" "शब्दों से पूर्व, "(1)" अंक तथा चिह्न जोड़े जाएंगे; (ii) "तो वह कारावास सेे जिसकी अवधि तीन मास तक हो सकती है, अथवा जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक हो सकता है, अथवा दोनों के लिये दायी होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह आबकारी आयुक्त द्वारा अधिरोपित की जाने वाली ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो एक लाख रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (iii) उपधारा (1) के बाद, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः- "(2) शास्तियां अवधारित करने के प्रयोजन हेतु, आबकारी आयुक्त, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज जो आबकारी आयुक्त की राय में विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि संबंधित अधिकारी ने उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन किया है, तो वह ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकता है, जैसा वह उचित समझेः परन्तु संबंधित आबकारी अधिकारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना, ऐसी कोई भी शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी।"। 3. धारा 70 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "70क. अपील.- (1) धारा 70 के अधीन पारित किसी आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश की प्राप्ति की तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर अपील प्राधिकारी, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, को अपील कर सकता हैः |
| परन्तु अपील प्राधिकारी उक्त साठ दिन की अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि अपीलकर्ता को नियत अवधि के भीतर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था। (2) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद, ऐसे आदेश पारित कर सकता है, जो वह उचित समझे। (3) उपधारा (1) के अधीन किसी अपील का निपटान अपील दायर करने की तिथि से एक सौ अस्सी (180) दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।"। | ||||
| 5. | 1938 | पंजाब अधिनियम 3 | हरियाणा साहूकार पंजीकरण अधिनियम, 1938 | धारा 4 की उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(3) कोई भी साहूकार, जो उप-धारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो वह प्रथम उल्लंघन के लिए पचास हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। पश्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले मे ं, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति का दुगुनी होगी।"। |
| 6. | 1948 | पूर्वी पंजाब अधिनियम 50 | हरियाणा जोत (चकबंदी तथा खण्डकरण रोकथाम) अधिनियम, 1948 | धारा 38 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "38. शास्तियां.- यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी सर्वेक्षण चिह्न को नष्ट करता है, क्षति पहुँचाता है, या विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना हटाता है, तो उसे चकबंदी अधिकारी द्वारा ऐसी शास्ति का भुगतान करने का आदेश दिया जा सकता है, जो उस अधिकारी की राय में, उसे पुनः स्थापित करने और उस व्यक्ति, यदि कोई हो, जिसने नष्ट करने, क्षति पहुँचाने या हटाए जाने की सूचना दी थी, को पुरस्कृत करने का व्यय वहन करने के लिए आवष्यक हो। ऐसे व्ययों की वसूली के अतिरिक्त, चकबंदी अधिकारी इस प्रकार नष्ट किए गए, क्षति पहुँचाए गए या हटाए गए प्रत्येक सर्वेक्षण चिह्न के लिए ऐसी शास्ति भी अधिरोपित कर सकता है, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी।"। |
| 7. | 1949 | पूर्वी पंजाब अधिनियम 1 | हरियाणा ईंट-आपूर्ति नियंत्रण अधिनियम, 1949 | 1. धारा 6 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "6. शास्तियां.- यदि कोई व्यक्ति, धारा 3 के अधीन किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए।"। 2. धारा 9 में, "कारावास से जो तीन वर्ष तक हो सकता है या जुर्माने से अथवा दोनों से दण्डनीय होगा" शब्दों के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 3. धारा 10, 11 तथा 12 का लोप कर दिया जाएगा। |
| 8. | 1953 | पंजाब अधिनियम 10 | हरियाणा भू-धृति सुरक्षा अधिनियम, 1953 | 1. धारा 11 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "11. अभिधारी का जल पर अधिकार.- अभिधृति, यदि कोई हो, में कमी के अनुपात के सिवाय, भू-स्वामी इस अधिनियम के प्रारम्भ से तुरन्त पूर्व अभिधारी द्वारा उपयोग किए जाने वाले नहर की जलापूर्ति या कुएँ के |
| जल के उपयोग को कम या बंद करने के लिए सक्षम नहीं होगा, और इस उपबंध का भंग करने पर प्रथम उल्लंघन के लिए बीस हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। पष्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति, की दुगुनी होगी।"। 2. धारा 14 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(2) कोई भी भू-स्वामी, जो ऐसी रसीद देने में असफल रहता है, तो वह पांच हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा।"। | ||||
| 9. | 1953 | पंजाब अधिनियम 40 | हरियाणा गन्ना (क्रय तथा आपूर्ति विनियमन) अधिनियम, 1953 | धारा 9 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "9. शास्तियां.- यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी भी उपबंध का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो प्रथम उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपए से कम नहीं हो सकेगी, किन्तु जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रुपए तक की हो सकेगी और यदि उल्लंघन फिर भी जारी रहता है, तो अनुज्ञप्ति अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए निलंबित कर दी जाएगी।"। |
| 10. | 1958 | पंजाब अधिनियम 2 | हरियाणा भाण्डागार अधिनियम, 1957 | धारा 32 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "32. शास्ति तथा प्रक्रिया.- (1) जो कोई भी- (क) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति प्राप्त किए बिना अनुज्ञप्त भाण्डागारिक के रूप में कार्य करता है या स्वयं को उस रूप में बताता है; या (ख) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबंधों या अपेक्षाओं का जानबूझकर उल्लंघन करता है या का अनुपालन करने में असफल रहता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पांच लाख रुपए तक की हो सकेगी। (2) जहां उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति, कंपनी या संगम या व्यष्टि निकाय है, चाहे वह निगमित हो या नहीं, वहां ऐसी कंपनी, संगम या निकाय के कार्यों का प्रबंध करने वाले प्रबंधक, सचिव, अभिकर्ता या अन्य प्रधान अधिकारी को उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघनकर्ता समझा जाएगा।"। |
| 11. | 1963 | पंजाब अधिनियम 23 | हरियाणा भूमि सुधार स्कीम अधिनियम, 1963 | धारा 20 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "20. शास्तियां.- कोई भी व्यक्ति, जो कोई ऐसा कार्य करता है, जो किसी ऐसी स्कीम, जो धारा 11 के अधीन लागू हुई है, के अधीन कार्यान्वित या अनुरक्षित संकर्मों में से किसी को कोई हानि पहुंचाता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस हज़ार रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पचास हजार रुपए तक हो सकेगी। यदि वह शास्ति का भुगतान करने में असफल |
| रहता है, तो उसे दो वर्ष की अवधि के लिए विभागीय स्कीमाें का लाभ प्राप्त करने से वंचित कर दिया जाएगा।"। | ||||
| 12. | 1971 | 20 | हरियाणा आवासन बोर्ड अधिनियम, 1971 | 1. धारा 76 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "76. उपविधियों की उल्लंघना करने के लिए शास्ति. - जो कोई भी धारा 75 के अधीन बनाई गई किसी भी उपविधि का उल्लंघन करता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रूपए तक की हो सकेगी।"। 2. धारा 77 में, "तो वह दोषसिद्वि पर, कारावास से, जो एक मास की अवधि तक हो सकता है, या जुर्मान सेे, जो पांच सौ रूपए तक हो सकता है, या दोनों से, दंडित किया जाएगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह पचास हजार रूपए की शास्ति के लिए दायी होगा" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 13. | 1972 | 24 | हरियाणा लोक परिसर और भूमि (बेदखली तथा किराया वसूली) अधिनियम, 1972 | 1. धारा 11 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "11. शास्तियां.- (1) यदि कोई भी व्यक्ति, जिसेे इस अधिनियम के अधीन किसी भी लोक परिसर से बेदखल कर दिया गया है, तो वह ऐसे अधिभोग के प्राधिकार के बिना ऐसे परिसरों का पुनः अधिभोग करता है, तो वह एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा और प्रत्येक पुनरावृा अधिभोग के लिए, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति की दुगुनी होगी। (2) उपधारा (1) के अधीन किसी व्यक्ति पर शास्ति अधिरोपित करने वाला सक्षम प्राधिकारी, उस व्यक्ति को बेदखल करने के लिए संक्षेपतः आदेश देगा और वह इस अधिनियम के अधीन उसके विरुद्ध की जाने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी बेदखली के लिए दायी होगा।"। |
| 14. | 1972 | 26 | हरियाणा भूमि जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 | धारा 21 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "21. मिथ्या कथन करने के लिए शास्तियां.- (1) यदि कोई व्यक्ति धारा 9 द्वारा यथा अपेक्षित कोई घोषणा प्रस्तुत करने में असफल रहता है, या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के दौरान कोई ऐसी घोषणा या ऐसा कथन करता है या कोई ऐसी जानकारी प्रस्तुत करता है जो मिथ्या है, या जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान है या जिसके मिथ्या होने का विष्वास करने का कारण रखता है, या जिसके सत्य होने का उसे विष्वास नहीं है, तो वह पचास हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। (2) यदि कोई व्यक्ति ऐसी कोई जानकारी प्रस्तुत करके आबंटन प्राप्त करता है, जो मिथ्या है या जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान है या जिसके मिथ्या होने का विष्वास करने का कारण रखता है या जिसके सत्य होने का उसे विष्वास नहीं है, तो वह पचास हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगाः परंतु इस धारा के अधीन किसी शास्ति का अधिरोपण, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का केन्द्रीय |
| अधिनियम 45) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन अभियोजन के लिए वर्जित नहीं होगा।"। | ||||
| 15. | 1973 | 35 | हरियाणा अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अर्जन अधिनियम, 1973 | धारा 23 में, "जुर्माने से दंडनीय होगा, जो एक हजार रूपए तक हो सकता है" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो एक हजार रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 16. | 1973 | 24 | हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 | 1. धारा 86 की उपधारा (2) में, "जुर्माने से दण्डनीय" के स्थान पर, "षास्ति के लिए दायी" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 2. धारा 87 की उपधारा (5) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(5) जो कोई भी उपधारा (1) और (3) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो किसी अन्य शास्ति, जो उसकी ऐसी उपेक्षा के कारण उपगत होती है, के अतिरिक्त ऐसी शास्ति, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी और भंग जारी रहने के मामले में, प्रत्येक दिन, जिसके दौरान भंग जारी रहता है, के लिए दस रुपए की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगा।"। 3. धारा 127 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(2) यदि कोई भी व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए प्रतिषेधात्मक नोटिस का उसकी तामील की तिथि से छह मास के भीतर अनुपालन करने में असफल रहता है, तो वह ऐसी शास्ति, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी और प्रत्येक दिन, जिसके दौरान भंग जारी रहता है, के लिए दस रुपए की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगा।"। 4. धारा 141 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(2) उपधारा (1) के निबंधनों की उल्लंघना में कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी।"। 5. धारा 149 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रूपए और अधिक से अधिक दो सौ रूपये होगा" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 6. धारा 150 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "150. पशुओं को इस प्रकार रखना कि वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हों.- जो कोई भी सूअर या अन्य पशु को ऐसे किसी भी आदेश, जो समिति उन्हें उाापी बनने से रोकने के लिए दे सकती है, की अवहेलना करते हुए रखता है, या इस प्रकार रखता है कि वे निवासियों या पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हों, |
| तो वह पांच सौ रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा और ऐसे प्रत्येक पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा।"। 7. धारा 158 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा जो कम से कम एक हजार रुपए तथा अधिक से अधिक पांच हजार रुपए और प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके दौरान अपराध चालू रहता है एक सौ रुपए के अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा" शब्दों के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति, जो एक हजार रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पांच हजार रुपए तक की हो सकेगी तथा प्रत्येक ऐसे दिन, जिसके दौरान अपराध जारी रहता है, के लिए एक सौ रुपए की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगा" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 8. धारा 159 में, "प्रथम या द्वितीय वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्धि पर, जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम के कम पच्चीस रूपये और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्नों के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 9. धारा 160 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्नों के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम नहीं होगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्द और चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 10. धारा 164 की उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(3) जो कोई भी इस धारा के उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी।"। 11. धारा 189 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 12. धारा 190 में,- (i) उपधारा (1) में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (ii) उपधारा (2) का लोप कर दिया जाएगा। 13. धारा 191 की उपधारा (2) में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगी, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 14. धारा 194 की उपधारा (1) में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 15. धारा 195 में,- (i) "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी ही होगी, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (ii) उप-धारा (2) में, "जुर्माने का दायी होगा, जो कम से कम पच्चीस रूपए और अधिक से अधिक दो सौ रूपए होगा" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 16. धारा 196 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 17. धारा 198 में, "जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो कम से कम पच्चीस रुपए और अधिक से अधिक दो सौ रुपए होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो सौ रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 18. धारा 214 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "214. उपविधियों के अतिलंघन के लिए शास्ति.- इस अध्याय की किसी धारा के अधीन कोई उपविधि बनाते समय, राज्य सरकार निदेश दे सकती है कि उसका कोई भंग या उसके भंग का दुष्प्रेरण ऐसी शास्ति, जो तीन सौ रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो हजार रुपए तक की हो सकेगी, और जब भंग जारी रहता है, तो प्रत्येक दिन, जिसके दौरान भंग जारी रहता है, के लिए दस रुपए की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगाः परंतु धारा 200 के खंड (भभ) के अधीन भंग या भंग का दुष्प्रेरण ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दो हजार पांच सौ रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पांच हजार रुपए तक की हो सकेगीः परंतु यह और कि धारा 200 के खंड (भभभ) के अधीन भंग या भंग का दुष्प्रेरण ऐसी शास्ति, जो एक लाख रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दो लाख रुपए तक की हो सकेगी, और भंग जारी रहने के मामले मे ं, प्रत्येक दिन, जिसके दौरान भंग जारी रहता है, के लिए दो हजार रुपए की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगा।"। | ||||
| 17. | 1974 | 24 | हरियाणा शरीर-रचना विज्ञान अधिनियम, 1974 | 1. धारा 6 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "6. शास्तियां- जो कोई भी इस अधिनियम के उपबंधों को विफल करने के आशय से, इस अधिनियम द्वारा यथा अनुज्ञात के सिवाय किसी लावारिस शव का निपटान करता है या निपटान करने के लिए दुष्प्रेरण करता है, या किसी अनुमोदित संस्था के किसी भारसाधक प्राधिकारी या प्राधि—त अधिकारी को इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए ऐसे शव को सौंपने, कब्जा लेने, हटाने या उपयोग करने से रोकता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो प्रथम उल्लंघन के मामले में, दो लाख रुपए तक की हो सकेगी और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में पांच लाख रुपए तक की हो सकेगी।"। 2. धारा 6 के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्ः- "6क. न्यायनिर्णयन.- (1) राज्य सरकार, शास्ति अधिरोपित करने के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता रखने वाले उप-मण्डल मजिस्ट्रेट को जांच करने और शास्ति अधिरोपित करने के लिए न्यायनिर्णयन अधिकारी के रूप में प्राधि—त कर सकती है। (2) न्यायनिर्णयन अधिकारी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज, जो न्यायनिर्णयन अधिकारी की राय में जांच के लिए उपयोगी या उससे सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और उसे हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि ऐसी जांच करने के बाद, उसकी संतुष्टि हो जाती है कि संबंधित व्यक्ति धारा 6 के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहा है, तो वह शास्ति अधिरोपित कर सकता हैः परन्तु संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना ऐसी कोई शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी। 6ख. अपील.- (1) जो कोई भी धारा 6क के अधीन न्यायनिर्णयन अधिकारी द्वारा पारित आदेश से व्यथित है, तो आदेश प्राप्ति की तिथि से साठ दिन के भीतर अपील प्राधिकारी के रूप में अधिकारिता रखने वाले उपायुक्त को अपील कर सकता है, जो इस निमित्त राज्य सरकार या प्रशासन द्वारा विशेष रूप से प्राधि—त किया गया होः परन्तु अपील प्राधिकारी उक्त विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि अपीलकर्ता को नियत अवधि के भीतर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था। (2) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात ऐसा आदेश पारित कर सकता है, |
| जैसा वह उचित समझे। (3) उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटान ऐसी अपील दायर किए जाने की तिथि से साठ दिन के भीतर किया जाएगा।"। | ||||
| 18. | 1974 | 29 | हरियाणा नहर तथा जल- निकास अधिनियम, 1974 | 1. धारा 58 में, "तो उपर्युक्त खंड (क), (ख), (ग), (छ) तथा (ट) के अधीन अपराधों के बारे में, दोषसिद्धी पर, पांच हजार रूपए से अनधिक जुर्माने अथवा छह मास से अनधिक कारावास अथवा दोनों और निरन्तर अपराध/उल्लंघना की दषा में अतिरिक्त जुर्माने जो प्रत्येक पष्चात्वर्ती दिन के लिए पांच सौ रूपए तक हो सकता है, से दायी होगा। अन्य अपराधों के बारे में, अपराधी दोषसिद्धि पर एक हजार रूपए से अनधिक जुर्माने अथवा एक मास से अनधिक कारावास, अथवा दोनों से दायी होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "उपर्युक्त खंड (क), (ख), (ग), (छ) तथा (ट) के अधीन उल्लंघनों के संबंध में, वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो एक लाख रुपए से अधिक की नहीं हो सकेगी और उल्लंघन जारी रहने के मामले में, प्रत्येक पश्चात्वर्ती दिन के लिए अतिरिक्त शास्ति, जो पांच हजार रुपए तक हो सकेगी। खण्ड (घ), (ङ), (च), (ज), (झ) तथा (ञ) के अधीन अन्य उल्लंघनों के सम्बन्ध में, वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पच्चीस हजार रूपए से अधिक की नहीं हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 19. | 1975 | 8 | हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 | धारा 10 की उपधारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''10 शास्तियां.- "(1) कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी भी उपबंध या धारा 3 के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी होगा, जो विनिर्दिष्ट की जाएः परन्तु कोई भी व्यक्ति, जो धारा 7 के उपबन्धों का उल्लंघन करता है, किसी भी भांति के कारावास, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, से दण्डनीय होगा और ऐसे जुर्माने का भुगतान करने के लिए भी दायी होगा, जो कलक्टर दर के दुगुना तक का हो सकेगा, किन्तु उस भूमि, जिस पर उल्लंघन किया गया है, पर लागू कलक्टर दर के आधे से कम का नहीं हो सकेगा''। |
| 20. | 1975 | 9 | हरियाणा चल संपत्ति अधिग्रहण तथा अर्जन अधिनियम, 1975 | धारा 16 में "कारावास है, जो एक वर्ष तक हो सकता है, अथवा जुर्माने से या दोनों से, दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह षास्ति के लिए दायी होगा, जो एक हजार रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 21. | 1983 | 10 | हरियाणा कक्ष-समूह स्वामित्व अधिनियम, 1983 | धारा 24क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "24क. शास्तियां.- (1) संपत्ति/भवन का कोई भी स्वामी, जो धारा 2 के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर घोषणा दायर नहीं करता है, तो वह ऐसी शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी होगा, जो दस लाख रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु जो पचास लाख रुपए तक की हो सकेगी। |
| (2) यदि संपत्ति/भवन का स्वामी उपधारा (1) के अधीन यथा अधिरोपित शास्ति का भुगतान विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, किन्तु छह माह से अधिक नहीं, करने में असफल रहता है, तो निदेशक या प्राधि—त अधिकारी ऐसा उपाय कर सकता है, जो आवश्यक प्रतीत हो और इसकी चूक में संपत्ति/भवन का स्वामी किसी भी भांति के कारावास, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, से दण्डनीय होगा और कम से कम पचास लाख रुपए तथा अपराध जारी रहने के प्रत्येक दिन के लिए दस हजार रुपए के जुर्माने के लिए भी दायी होगा।"। | ||||
| 22. | 1984 | 22 | हरियाणा सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 | 1. धारा 117 में,- (i) उपधारा (2) में, "जुर्माने से दंडनीय होगा, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकता है", शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह ऐसी षाास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (ii) उपधारा (3), (4), (5), (6), (7) और (8) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः- "(3) कोई सहकारी सोसाइटी या उसका कोई अधिकारी या सदस्य मिथ्या विवरणी देता है या मिथ्या जानकारी देता है, या कोई व्यक्ति, जो जानबूझकर या बिना किसी उचित कारण के इस अधिनियम के अधीन जारी किए गए किसी समन, अध्यपेक्षा या विधिपूर्ण लिखित आदेश की अवज्ञा करता है, या किसी प्राधि—त व्यक्ति द्वारा अपेक्षित जानकारी देने में असफल रहता है, तो वह रजिस्ट्रार या उस द्वारा प्राधि—त किसी अधिकारी द्वारा अधिरोपित की जाने वाली ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी। (4) कोई नियोक्ता या अधिकारी या ऐसे नियोक्ता की ओर से कार्य करने वाला अभिकर्ता, जो पर्याप्त कारण के बिना, धारा 45 के अधीन उसके द्वारा कटौती की गई राशि को कटौती की तिथि से चौदह दिन के भीतर सहकारी सोसाइटी के पास जमा करने में असफल रहता है, तो वह किसी भी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो तत्समय लागू किसी भी विधि के अधीन उसके विरूद्ध की जा सकती है, ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी। (5) कोई अधिकारी या संरक्षक, जो सहकारी सोसाइटी से संबंधित पुस्तकों, अभिलेखों, नकदी, प्रतिभूति और अन्य संपत्ति को धारा 50, 51, 95, 97, 98, 99 और 106 के अधीन हकदार व्यक्ति को प्रस्तुत करने या सौंपने में जानबूझकर असफल रहता है, तो |
| वह ऐसी शास्ति, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी या एक मास के वेतन की कटौती, जो भी अधिक हो तथा ऐसे प्रथम भंग के लिए शास्ति अधिरोपित करने पश्चात्, छह मास से अधिक समय तक भंग रहने के मामले में, उल्लंघन जारी रहने दौरान प्रत्येक दिन के लिए सौ रुपए तक की अतिरिक्त शास्ति के लिए दायी होगा। (6) कोई भी व्यक्ति, ऐसी किसी संपत्ति, जो धारा 52 और 53 के अधीन प्रभार के अध्यधीन है, को कपटपूर्वक अर्जित करता है या अर्जित करने में दुष्प्रेरण करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी। (7) कोई भी व्यक्ति, जो समिति के प्रभार वाली संपत्ति को उसकी बिक्री या कुर्की से बचाने के आषय से अन्तरित करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी। (8) प्रबंध समिति का सदस्य होने के नाते कोई भी व्यक्ति, जो पर्याप्त कारण के बिना, धारा 95 के उपबंधों के अनुसार लेखों की लेखापरीक्षा करवाने में असफल रहता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी।"; (iii) उपधारा (16) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(16) कोई भी व्यक्ति, जो जानबूझकर मिथ्या प्रमाणपत्र देता है, चाहे वह किसी भी रूप में हो, जिससे यह पता चले कि कोई व्यक्ति चूककर्ता है या सक्रिय सदस्य है या नहीं, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी।"; (iv) उपधारा (18) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(18) यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या य ुक्तियुक्त कारण के बिना विहित अवधि के भीतर धारा 120 की उपधारा (2) के अधीन यथा अपेक्षित जानकारी प्रदान करने में असफल रहता है, तो वह प्रतिदिन एक हजार रुपए की शास्ति, जो कुल मिलाकर तीस हजार रुपए तक की हो सकेगी, के लिए दायी होगा। व्याख्या.- उपधारा (2), (3), (4), (5), (6), (7), (8), (16) और (18) के अधीन शास्तियां, भू-राजस्व के बकायों के रूप में वसूली योग्य होंगी और धारा 117क के अधीन सरकार के समक्ष अपील योग्य होंगी।"; (v) उपधारा (20) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(20) उपधारा (2), (3), (4), (5), (6), (7), (8), (16) और (18) के अधीन विनिर्दिष्ट उल्लंघन, रजिस्ट्रार या उस द्वारा प्राधि—त किसी अधिकारी द्वारा शमनीय और न्यायनिर्णय योग्य होंगे।"। 2. धारा 117 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "117क. अपील.- (1) धारा 117 की उपधारा (2), (3), (4), (5), (6), ( 7), (8), (16) और (18) के अधीन पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश की तिथि से साठ दिन के भीतर सरकार को अपील कर सकता है। (2) सरकार, अपीलकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद, उस आदेष को पुष्ट, उपांतरित या अपास्त कर सकती है, जिसके विरूद्ध अपील की गई है और उसका निर्णय अंतिम होगा।"। | ||||
| 23. | 1991 | 14 | हरियाणा श्री माता मनसा देवी पूजास्थल अधिनियम, 1991 | 1. धारा 33 में, "जुर्माने से, जो एक हजार रूपए तक बढ़ाया जा सकता है अथवा व्यतिक्रम की दषा में, ऐसी अवधि के लिए, जो एक मास तक बढ़ाई जा सकती है, कारावास से दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो वह प्रत्येक ऐसी मनाही या असफलता के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 2. धारा 34 में, "ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, अथवा जुर्माने से अथवा दोनों से दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रूपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 24. | 1992 | 10 | हरियाणा श्री माता शीतला देवी पूजास्थल अधिनियम, 1991 | 1. धारा 26 की उपधारा (4) में, "एक वर्ष तक की अवधि के लिए सिविल कारागार में नजरबन्द किए जाने" शब्दों के स्थान पर "षाास्ति, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, का भुगतान करने" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 2. धारा 33 में, "जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकता है अथवा व्यतिक्रम की दषा में, ऐसी अवधि के लिए, जो एक मास तक बढ़ाई जा सकती है, कारावास से दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो वह प्रत्येक ऐसी मनाही या असफलता के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगी, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। 3. धारा 34 के खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "(ग) मंदिर की संपत्ति, दस्तावेजों या लेखा-बहियों को गलत तरीके से हटाता है, नष्ट करता है या विकृत करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगी, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी।"। |
| 25. | 1992 | 15 | हरियाणा क्रेशर विनियमन तथा नियंत्रण अधिनियम, 1991 | 1. धारा 12 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "12. शास्तियां.- जो कोई भी इस अधिनियम की धारा 3 के किसी भी उपबंध की उल्लंघन करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगी, जो दो लाख रुपए से कम नहीं होगी किन्तु चार लाख रुपए तक की हो सकेगी।"। 2. धारा 13 का लोप कर दिया जाएगा। |
| 26. | 1993 | 16 | हरियाणा कपास ओटाई तथा दबाई कारखाना अधिनियम, 1992 | 1. धारा 5 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "5. विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में कपास के अधिमिश्रण का प्रतिषेध और उसके लिए शास्ति.-(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी क्षेत्र में, कपास ओटई या कपास दबाई वाले कारखाने में ओटे या दबाए गए कपास के किसी अधिमिश्रण का प्रतिषेध कर सकती है। (2) उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी क्षेत्र में, यदि- (क) किसी कपास ओटई या कपास दबाई वाले कारखाने का कोई स्वामी किसी कपास को ओटता या दबाता है या ओटने या दबाने को अनुमत करता है, जिसके बारे में वह जानता है या विष्वास करने का कारण रखता है कि उसमें कपास का अधिमिश्रण है; या (ख) कोई भी व्यक्ति, जो कपास का कोई अधिमिश्रण बनाता है या ऐसी कपास, जिसको किसी कपास दबाई कारखाने में ओटा जाता है और जिसे दबाया जा रहा है या दबाया जाना आषयित है, के ऐसे अधिमिश्रण का दुष्प्रेरण करता है या जानबूझकर अनुज्ञात करता है या मौन सहमति देता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो प्रथम उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रुपए तक हो सकेगी और यदि उल्लंघन फिर भी जारी रहता है, तो अनुज्ञप्ति दो वर्ष की न्यूनतम अवधि के लिए निलंबित कर दी जाएगी।"। 2. धारा 6 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "6. पानी मिलाने इत्यादि के लिए शास्ति.- (1) कपास ओटने या कपास दबाने वाले कारखाने का कोई भी स्वामी, जो जानबूझकर या यह विष्वास करने का कारण रखते हुए कि किसी कपास में पानी मिलाया गया है या उसमें विहित अनुपात से अधिक बिनौले हैं या कोई विजातीय पदार्थ या कपास अपशिष्ट है, ऐसे कारखाने में ऐसे कपास को ओटता है या दबाता है या ओटने या दबाने की अनुमति देता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो प्रथम उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपए से कम की नहीं सकेगी, किन्तु पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी, पष्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रुपए |
| तक की हो सकेगी और यदि उल्लंघन फिर भी जारी रहता है, तो अनुज्ञप्ति दो वर्ष की न्यूनतम अवधि के लिए निलंबित कर दी जाएगी। | ||||
| (2) कोई भी व्यक्ति, जो किसी ऐसी कपास, जिसको किसी कपास दबाई कारखाने में ओटा जाता है और जिसे दबाया जा रहा है या दबाया जाना आषयित है, में जानबूझकर पानी मिलाता है या उसे गीली करता है अथवा कपास में बिनौले या विजातीय पदार्थ या कपाल अपष्ष्टि मिश्रित करता है या कपास में ऐसे पानी मिलाने, गीली करने या मिश्रण करने का दुष्प्रेरण करता है या जानबूझकर अनुज्ञात करता है या मौन सहमति देता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो प्रथम उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपए से कम की नहीं हो सकती किन्तु पच्चास हजार रुपए की हो सकेगी, पष्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रूपए तक की हो सकेगी, तथा यदि उल्लंघन फिर भी जारी रहता है, तो अनुज्ञप्ति दो वर्ष की न्युनतम अवधि के लिए निलम्बित कर दी जाएगी।''। | ||||
| 27 | 1994 | 16 | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 | धारा 380 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''380. कतिपय अपराधों के लिए दंड अथवा शास्तियां.- (1) जो कोई भी,- (क) इस अध्यादेष से अनुबंध क के रूप में यथा संलग्न तृतीय अनुसूची में सारणी (i) या सारणी (ii) के प्रथम खाने में वर्णित इस अधिनियम के किसी भी उपबंध का उल्लंघन करता है; या (ख) उक्त किन्हीं धाराओं, उप-धाराओं, खंडों, परंतुकों या अन्य उपबन्धों के अधीन उसे विधिपूर्वक दिए गए किसी आदेष का या उससे विधिपूर्वक की गई किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफल रहता है- (i) तो वह ऐसे जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो तृतीय अनुसूची की सारणी (i) के तृतीय खाने में विनिर्दिष्ट राशि तक का हो सकेगा; तथा उल्लंघन या असफलता जारी रहने के मामले मे ं, जो ऐसे उल्लंघन या असफलता के लिए दोषसिद्धि के पष्चात् प्रत्येक दिन, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन या असफलता जारी रहती है, तो अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा, के लिए सारणी (i) के चतुर्थ खाने में विनिर्दिष्ट राषि तक का हो सकेगा; या (ii) तो वह ऐसी शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी होगा, जो तृतीय अनुसूची की सारणी के तृतीय खाने में विनिर्दिष्ट राषि तक की हो सकेगी; तथा उल्लंघन या असफलता जारी रहने के मामलें में, जो ऐसे उल्लंघन या असफलता के लिए दोषसिद्धि के पष्चात् प्रत्येक दिन, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन या असफलता जारी रहती है, तो अतिरिक्त शास्ति का भुगतान करने के लिए दायी होगा, के लिए सारणी (ii) के चतुर्थ खाने में विनिर्दिष्ट राषि तक की हो सकेगी।''। (2) विद्यमान तृतीय अनुसूची के स्थान पर, इस अध्यादेश से अनुबंध 'क' के रूप में यथा संलग्न तृतीय अनुसूची प्रतिस्थापित की जाएगी।"। |
| 28 | 1996 | 9 | हरियाणा यांत्रिक यान (पथकर-उद्ग्रहण) अधिनियम, 1996 | धारा 10 की उपधारा (1) में, ''दोषसिद्धि पर, एक हजार रुपए के जुर्माने का दायी होगा, जो पांच हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, चूक की दषा में छह मास से अनधिक किसी अवधि के साधारण कारावास से दण्डित किया जाएगा'' शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, ''तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए से कम नहीं हो सकेगी किन्तु एक लाख रुपए तक की हो सकेगी'' शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 29 | 2001 | 6 | हरियाणा मुर्राह भैंस तथा अन्य दुधारू पशु नस्ल (पशुपालन तथा डेरी विकास क्षेत्र का परिरक्षण तथा परिवर्धन) अधिनियम, 2001 | धारा 11 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "11. शास्तियां.- (1) कोई भी व्यक्ति, जो धारा 10 में दिए गए उपबन्धाें की उल्लंघना में किसी कार्य को करता है या करने के लिए उकसाता है, तो संबंधित जिले के उप निदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, द्वारा अधिरोपित की जाने वाली बीस हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। द्वितीय या पष्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, व्यक्ति एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। (2) किसी शास्ति के अधिरोपण से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसी शास्ति के अधिरोपण की तिथि से पंद्रह दिन के भीतर अपील दायर कर सकता है। महानिदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग इस प्रयोजन के लिए अपील प्राधिकारी होगा। अपील प्राधिकारी अपील की सुनवाई करने की अपनी शक्ति विभाग के किसी भी अधिकारी, जो संयुक्त निदेशक की पदवी से नीचे का न हो, को प्रत्यायोजित कर सकता है। अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, अपील प्राधिकारी द्वारा तीस दिन के भीतर अपील विनिष्चित की जाएगी ।"। |
| 30 | 2003 | 6 | हरियणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 | 1. धारा 53 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''(2) उपधारा (3) में यथा उपबंधित के सिवाय, यदि राज्य सरकार का कोई अधिकारी, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी ब्यौरे को प्रकट करता है, तो वह आयुक्त द्वारा अधिरोपित की जाने वाली ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो एक लाख रुपए तक की हो सकेगी। व्याख्या.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, आयुक्त मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति को साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज, जो आयुक्त की राय में विषय-वस्तु के लिए उपयोगी या सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि संबंधित अधिकारी ने उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन किया है, तो वह ऐसी शास्ति अधिरोपित कर सकता है, जैसी वह उचित समझेः परन्तु ऐसी कोई भी शास्ति संबंधित अधिकारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी।"। 2. धारा 53 के बाद, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः- "53क. अपील.- (1) धारा 53 की उपधारा (2) के अधीन पारित किसी आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश की प्राप्ति की तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर अपील प्राधिकारी, जिसे विनिर्दिष्ट किया जाए, को अपील कर सकता हैः परन्तु अपील प्राधिकारी साठ दिन की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि अपीलकर्ता को नियत अवधि के भीतर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था। (2) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे। (3) उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटान अपील दायर करने की तिथि से एक सौ अस्सी (180) दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।"। |
| 31. | 2008 | 7 | हरियाणा निष्क्रांत सम्पत्ति (प्रबन्धन तथा निपटान) अधिनियम, 2008 | धारा 13 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "13. शास्तियां.- कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किसी अधिकारी को किसी भी रीति में मिथ्या, असत्य या गलत जानकारी या दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो बीस हजार रुपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पचास हजार रुपए तक की हो सकेगीः परन्तु इस धारा के अधीन किसी शास्ति का अधिरोपण, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का केन्द्रीय अधिनियम 45) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि के उपबंधों के अधीन अभियोजन के लिए वर्जन नहीं होगा।"। |
| 32 | 2008 | 31 | हरियाणा भूमिगत पाइपलाइन (भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन) अधिनियम, 2008 | धारा 16 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "16. शास्तियां.- (1) जो कोई भी धारा 5, 6 या 7 के अधीन प्राधि—त कार्यों में से किसी कार्य को करने से जानबूझकर रोकता है या धारा 5 के अधीन जानबूझकर किसी खाई को भरता है, नष्ट करता है, क्षति पहुंचाता हैै अथवा लगाए गए निषान का स्थान बदलता है या धारा 8 की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन वर्जित कोई बात जानबूझकर करता है, तो वह पचास हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी। (2) जो कोई भी बिछाई गई किसी भूमिगत पाइपलाइन को जानबूझकर हटाता है, उसका स्थान बदलता है, क्षति पहुंचाता है या नष्ट करता है, तो क्षति के लिए मुल्यांकित राशि के भुगतान सहित दस हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा और पष्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी।''। |
| 33 | 2008 | 38 | हरियाणा सम्पत्ति व्यवहारी तथा परामर्षदाता विनियमन अधिनियम, 2008 | धारा 17 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "17. शास्तियां.- (1) कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के किसी भी उपबन्ध का उल्लंघन करता है, तो वह पचास हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होेगा तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी। (2) इस अधिनियम के अधीन वैध अनुज्ञप्ति के बिना, सम्पत्ति व्यवहार या सम्पत्ति परामर्षी कारबार में लिप्त पाया जाने वाला कोई व्यक्ति या कंपनी या सोसाइटी, व्यक्तिगत मामलें में, पचास हजार रुपए या सोसाइटी, कम्पनी या किसी संगठन के मामले में, एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा तथा इस प्रकार प्राप्त सभी लाभांषों तथा सम्पत्ति व्यवहार के दौरान, जिसके लिए किसी पक्षकार द्वारा व्यवहार के संबंध में कमीषन का भुगतान किया गया है, प्रभावित पक्षकार द्वारा सहन की गई क्षतियाें का भुगतान करने के लिए भी दायी होगा। पश्चातवर्ती उल्लंघन के मामले ं मे ं, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन के लिए अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी।''। |
| 34 | 2008 | 26 | पंड़ित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विष्वविद्यालय रोहतक अधिनियम, 2008 | 1. धारा 5 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''(2) उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दो लाख रुपए तक की हो सकेगी, तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन के मामले में, सक्षम प्राधिकरणोें तथा षिक्षा निकायों जैसे कि सरकार तथा विष्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी किए गए आदेषों तथा दिषा-निर्देषों के दृष्टिगत इस संबंध में अधिकथित विनियमों के अनुसार पांच लाख रुपए तक की हो सकेगी।''। 2. धारा 5 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः- "5क. न्यायनिर्णयन.- (1) सरकार, शास्तियों के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता रखने वाले उपायुक्त को जांच करने और शास्ति अधिरोपित करने के लिए ऐसी रीतिं, जो विनिर्दिष्ट की जाए, में न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में प्राधि—त कर सकती है। (2) न्यायनिर्णायक अधिकारी तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति कोे साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज, जो न्यायनिर्णायक अधिकारी की राय में जांच के लिए उपयोगी या विषय-वस्तु से सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और उसे हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि ऐसी जांच पर उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि संबंधित व्यक्ति धारा 6 के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहा है, तो वह शास्ति अधिरोपित कर सकता हैः परन्तु ऐसी कोई शास्ति संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी। 5ख. अपील .-(1) धारा 5क के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, इस निमित्त सरकार या प्रशासन द्वारा विशेष रूप से प्राधि—त अपील प्राधिकारी की अधिकारिता रखने वाले मण्डल आयुक्त के समक्ष, आदेश प्राप्ति की तिथि से साठ दिन के भीतर, ऐसे प्ररूप और रीति, जो विनिर्दिष्ट की जाए, में अपील कर सकता है। (2) कोई अपील साठ दिन की अवधि की समाप्ति के बाद भी स्वीकार की जा सकती है, यदि अपीलकर्ता, अपील प्राधिकारी की सन्तुष्टि कर दे कि उसके पास उस अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था। (3) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे। (4) उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटान अपील दायर करने की तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।"। |
| 35 | 2009 | 6 | हरियाणा भूमिगत जल परिरक्षण अधिनियम, 2009 | धारा 7 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "षास्तियां.-(1) कोई भी कृषक, जो इस अधिनियम के किसी भी उपबन्ध की उल्लंघना करता है, तो वह भूमि के प्रति हेक्टेयर प्रत्येक मास या उसके भाग के लिए पच्चीस हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। यदि कृषक शास्ति का भुगतान करने में असफल रहता है, तो उसे दो वर्ष की अवधि के लिए विभागीय स्कीमों का लाभ प्राप्त करने से वंचित कर दिया जाएगा। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट शास्ति, अधिसूचित तिथि से पूर्व बोई गई या प्रतिरोपित धान की नर्सरी को नष्ट करने के लिए वास्तविक रूप से उपगत खर्चों की वसूली के अतिरिक्त होगी। (3) उपधारा (1) के अधीन कोई शास्ति अधिरोपित करने वाले किसी आदेश को पारित करने से पूर्व, प्राधि—त अधिकारी ऐसी जांच करेगा, जो वह आवश्यक समझे तथा संबंधित कृषक को सुनवाई का अवसर देगा। |
| 36 | 2010 | 12 | हरियाणा श्री कपाल मोचन, श्री बद्री नारायण, श्री मन्त्रा देवी तथा श्री केदार नाथ पूजास्थल अधिनियम, 2009 | 1. धारा 33 के खंड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- ''(ख) इस अधिनियम के अधीन मांगी गई किसी रिर्पोट, विवरण, लेखे या अन्य जानकारी देने से इंकार करता है अथवा जानबूझकर देने मे ें असफल रहता है, तो प्रत्येक ऐसी इंकारी या असफलता के लिए, ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी।''। 2. धारा 34 के खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- ''(ग) पूजास्थल की किसी संपत्ति, दस्तावेज अथवा लेखा बहियों को गलत ढ़ंग से हटाता है, नष्ट करता है या विकृत करता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी।''। |
| 37 | 2014 | 6 | हरियाणा नैदानिक स्थापना (पंजीकरण तथा विनियमन) अधिनियम, 2014 | धारा 36 में,- 1. (i) उपधारा (2) में, "जुर्माने" शब्द के स्थान पर, "षास्ति" शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा; (ii) उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''(3) उपधारा (2) के अधीन बंद के आदेश के बाद भी कोई व्यक्ति किसी नैदानिक स्थापना को निरन्तर चलाता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा जो पांच लाख रुपए तक की हो सकेगी।''। 2. धारा 37 में,- (i) उपधारा (2) में, "जुर्माने जो एक मास के सकल वेतन या पच्चीस हजार रुपए, जो भी कम हो, तक हो सकता है, से दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्नों के स्थान पर, "तो ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो एक मास के सकल वेतन या पच्चीस हजार रुपए, जो भी कम हो, तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (ii) उपधारा (3) में, "जुर्माने जो एक लाख रुपए तक हो सकता है, से दण्डनीय होगा" शब्दों और चिह्न के स्थान पर, "ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो एक लाख रुपए तक की हो सकेगी'' शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे; (iii) उपधारा (4) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(4) जो कोई भी इस अधिनियम द्वारा या केे अधीन आपूर्ति के लिए अपेक्षित किसी सूचना को जानबूझकर रोकता है या ऐसी सूचना देता है, जो वह जानता है कि झूठी है या जिस पर उसे सत्य होने का विष्वास नहीं है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दो लाख रुपए तक की हो सकेगी।''; (iv) उपधारा (5) में, "कोई जुर्माना" शब्दों के स्थान पर, "षास्ति" शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा; (v) उपधारा (7) में, "जुर्माने जो दस हजार रुपए तक का हो सकता है, से दण्डनीय होगा" शब्दों तथा चिह्न के स्थान पर, "तो ऐसी षास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए तक की हो सकेगी" शब्द तथा चिह्न प्रतिस्थापित किए जाएंगे। |
| 38 | 2016 | 27 | पंड़ित दीन दयाल उपाध्याय स्वास्थ्य विज्ञान विष्वविद्यालय करनाल, अधिनियम, 2016 | 1. धारा 5 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''(2) उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दो लाख रुपए तक की हो सकेगी तथा पश्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले मेें, सक्षम प्राधिकरणों तथा षिक्षा निकायों जैसे कि सरकार तथा विष्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी किए गए आदेषों तथा दिषानिर्देषों के दृष्टिगत इस संबंध में अधिकथित विनियमों के अनुसार पांच लाख रुपए तक की हो सकेगी।''। 2. धारा 5 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः- "5क. न्यायनिर्णयन.- (1) सरकार, शास्तियों के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता रखने वाले उपायुक्त को जांच करने और शास्ति अधिरोपित करने के लिए ऐसी रीति, जो विनिर्दिष्ट की जाए, में न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में प्राधि—त कर सकती है। (2) न्यायनिर्णायक अधिकारी तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति कोे साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज, जो न्यायनिर्णायक अधिकारी की राय में जांच के लिए उपयोगी या विषय-वस्तु से सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और उसे हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि ऐसी जांच पर उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि संबंधित व्यक्ति धारा 6 के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहा है, तो वह शास्ति अधिरोपित कर सकता हैः परन्तु ऐसी कोई शास्ति संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी। 5ख. अपील.- (1) धारा 5क के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, इस निमित्त सरकार या प्रशासन द्वारा विशेष रूप से प्राधि—त अपील प्राधिकारी की अधिकारिता रखने वाले मण्डल आयुक्त के समक्ष, आदेश प्राप्ति की तिथि से साठ दिन के भीतर, ऐसे प्ररूप और रीति, जो विनिर्दिष्ट की जाए, में अपील कर सकता है। (2) कोई अपील साठ दिन की अवधि की समाप्ति के बाद भी स्वीकार की जा सकती है, यदि अपीलकर्ता, अपील प्राधिकारी की सन्तुष्टि कर दे कि उसके पास उस अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था। (3) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे। (4) उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटान अपील दायर करने की तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।"। |
| 39 | 2017 | 3 | हरियाणा नर्स तथा नर्स-सेविका अधिनियम, 2017 | 1. धारा 32 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''(2) जो कोई भी उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, तो ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दो लाख रुपए तक की हो सकेगी।''। 2. धारा 32 के बाद, निम्नलिखित धाराएँ जोड़ी जाएंगी, अर्थात्ः- ''32क. न्यायनिर्णयन.- (1) सरकार, शास्तियों के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, अधिकारिता रखने वाले उप मण्डल मजिस्ट्रेट को जांच करने और शास्ति अधिरोपित करने के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में प्राधि—त कर सकती है। (2) न्यायनिर्णायक अधिकारी तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित किसी व्यक्ति कोे साक्ष्य देने या कोई दस्तावेज, जो न्यायनिर्णायक अधिकारी की राय में जांच के लिए उपयोगी या विषय-वस्तु से सुसंगत हो, प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है और उसे हाजिर होने के लिए बाध्य कर सकता है और यदि ऐसी जांच पर उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि संबंधित व्यक्ति धारा 32 के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहा है, तो वह शास्ति अधिरोपित कर सकता हैः परन्तु ऐसी कोई शास्ति संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना अधिरोपित नहीं की जाएगी। 32ख. अपील.- (1) धारा 32क के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, इस निमित्त सरकार या प्रशासन द्वारा विशेष रूप से प्राधि—त अपील प्राधिकारी की अधिकारिता रखने वाले उपायुक्त के समक्ष, आदेश प्राप्ति की तिथि से साठ दिन के भीतर, अपील कर सकता हैः परन्तु अपील प्राधिकारी उक्त विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि अपीलकर्ता को नियत अवधि के भीतर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था। (2) अपील प्राधिकारी, अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बाद ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जैसा वह उचित समझे। (3) उपधारा (1) के अधीन अपील का निपटान अपील दायर करने की तिथि से साठ दिन की अवधि के भीतर किया जाएगा।"। |
| 40. | 2019 | 17 | हरियाणा पशु (पंजीकरण, प्रमाणीकरण और प्रजनन) अधिनियम, 2019 | 1. धारा 26 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "26. धारा 16 और 17 के उल्लंघन के लिए शास्तियां.- (1) कोई भी व्यक्ति जो धारा 16 और धारा 17 में दिए गए उपबन्धाें की उल्लंघना में किसी कार्य को करता है या करने के लिए उकसाता है, संबंधित जिले के उप निदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, द्वारा अधिरोपित की जाने वाली बीस हजार रुपए की शास्ति के |
| लिए दायी होगा। द्वितीय या पष्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, व्यक्ति एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। (2) किसी शास्ति के अधिरोपण से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसी शास्ति के अधिरोपण की तिथि से पंद्रह दिन के भीतर अपील दायर कर सकता है। महानिदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग इस प्रयोजन के लिए अपील प्राधिकारी होगा। अपील प्राधिकारी अपील की सुनवाई करने की अपनी शक्ति विभाग के किसी भी अधिकारी, जो संयुक्त निदेशक की पदवी से नीचे का न हो, को प्रत्यायोजित कर सकता है। अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, अपील प्राधिकारी द्वारा तीस दिन के भीतर अपील विनिष्चित की जाएगी।"। 2. धारा 27 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "27. शास्तियां- (1) कोई भी व्यक्ति जो धारा 16 और धारा 17 से अन्यथा धाराओं में निहित उपबन्धों की उल्लंघना में किसी कार्य को करता है या करने के लिए उकसाता है, संबंधित जिले के उप निदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी, जो विनिर्दिष्ट किया जाए, द्वारा अधिरोपित की जाने वाली एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। द्वितीय या पष्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, व्यक्ति दो लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा। (2) किसी शास्ति के अधिरोपण से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसी शास्ति के अधिरोपण की तिथि से पंद्रह दिन के भीतर अपील दायर कर सकता है। महानिदेशक, पशुपालन तथा डेयरिंग विभाग इस प्रयोजन के लिए अपील प्राधिकारी होगा। अपील प्राधिकारी अपील की सुनवाई करने की अपनी शक्ति विभाग के किसी भी अधिकारी, जो संयुक्त निदेशक की पदवी से नीचे का न हो, को प्रत्यायोजित कर सकता है। अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, अपील प्राधिकारी द्वारा तीस दिन के भीतर अपील विनिष्चित की जाएगी ।"। | ||||
| 41 | 2022 | 14 | हरियाणा अग्निषमन तथा आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 | 1. धारा 25 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "25. धारा 12 की उल्लंघना हेतु शास्तियां- जो कोई भी, इस अधिनियम के अधीन उसके विरूद्ध की गई किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, धारा 12 की उपधारा (1) के उपबन्धों की उल्लंघना करता है, तो निदेषक या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधि—त किसी भी अधिकारी द्वारा अधिरोपित की जाने वाली ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पचास हजार रुपए तक की हो सकेगी। पश्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन पर अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी।"। 2. धारा 29 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''29. मिथ्या रिपोर्ट.- कोई भी व्यक्ति, जो कथन, संदेष या अन्यथा के माध्यम से जानबूझकर आग लगाने की मिथ्या रिपोर्ट, ऐसी रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को देता है या दिलवाता है, तो निदेषक या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधि—त किसी अधिकारी द्वारा अधिरोपित की जाने वाली ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो दस हजार रुपए तक की हो सकगी। पश्चात्वर्ती उल्लंघन के मामले में, अधिरोपित शास्ति, प्रथम उल्लंघन पर अधिरोपित शास्ति की दुगुना होगी।"। |
| 42. | 2024 | 12 | हरियाणा निजी कोचिंग सस्थानों का पंजीकरण और विनियमन अधिनियम, 2024 | धारा 10 के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः- ''10. शास्ति.-इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों या जारी किए गए दिषा-निर्देषों के किसी भी उपबन्ध की उल्लंघना के मामले में, निजी कोचिंग संस्थान, प्रथम उल्लंघना के लिए प्रत्येक ए ेसी उल्लंघना हेतु पच्चीस हजार रुपए, पश्चात्वर्ती उल्लंघना के लिए एक लाख रुपए की शास्ति के लिए दायी होगी तथा यदि उल्लंघना फिर भी जारी रहती है, तो निजी कोचिंग सस्थान का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। 10क. सक्षम प्राधिकरण तथा अपील प्राधिकरण.- इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन गठित प्राधिकरण, किसी संस्थान को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद धारा 10 के अधीन शास्ति अधिरोपित करने के लिए सक्षम प्राधिकरण होगा तथा सक्षम प्राधिकरण के ऐसे आदेष के विरूद्ध कोई अपील इस अधिनियम की धारा 8 के अधीन गठित अपील प्राधिकरण को ऐसे आदेष के तीस दिन के भीतर दायर की जा सकती है।''। |
तृतीय अनुसूची
(देखिए धारा 380)
सारणी (i)
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परंतु | विषय | जुर्माना या कारावास जो अधिरोपित किया जा सकेगा | दैनिक जुर्माना जो अधिरोपित किया जा सकेगा |
| 1 | 2 | 3 | 4 | |
| रूपए | रूपए | |||
| 1. | धारा 188 | प्रवेश इत्यादि से इंकारी | 500 | -- |
| 2. | धारा 191, उपधारा (1) | जलनलों इत्यादि को ऐसी स्थिति में बिछाया जाना जहां उन्हें क्षति पहुंच सकती है या उनका जल प्रदूषित हो सकता है | 500 | 50 |
| 3. | धारा 195 | नगरपालिका नाली की या नगरपालिका नाली में गिरने वाली नाली की सामग्री के प्रवाह को क्षति पहुंचाना या हस्तक्षेप करना | 500 | 50 |
| 4. | धारा 197 | जल निस्सारण रहित परिसरों की जल निकासी के लिए अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | 500 |
| 5. | धारा 198 | नाली के बिना नए परिसर बनाना | 1000 | 100 |
| 6. | धारा 199 | परिसरों के किसी समूह या ब्लाक के लिए जल निकास संकर्मों को बनाए रखने की अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | 50 |
| 7. | धारा 200 | कतिपय मामलों में निजि नाली को बन्द कर देने या उसका उपयोग सीमित करने के निदेष का अनुपालन न करना | 500 | 50 |
| 8. | धारा 201 | किसी नाली के स्वामी से भिन्न व्यक्ति द्वारा उसके प्रयोग के बारे में आयुक्त के आदेष का अनुपालन न करना | 500 | -- |
| 9. | धारा 202 | मलहवाही और वर्षा जलवाही नालियों को बनाए रखने की अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | -- |
| 10. | धारा 203 | प्रांगण इत्यादि को पाटने की अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | -- |
| 11. | धारा 208, उपधारा (4) | पाइप या नाली को बन्द करने, हटाने या उसकी दिषा बदलने की अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | 50 |
| 12. | धारा 215 | जल या मलवाही संकर्मों के संबंध में जानबूझकर या उपेक्षापूर्वक किए गए कार्यों का प्रतिषेध करना | 500 | -- |
| 13. | धारा 223, उपधारा (3) | पथ इत्यादि नियमित लाईन के बाहर निकले भवन का अनुज्ञा के बिना निर्माण करना | 2000 | 200 |
| 14. | धारा 228 | भवनों को पथ की नियमित लाईन तक आगे बढ़ाने की अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफलता | 500 | 50 |
| 15. | धारा 235, उपधारा (1) | पथों इत्यादि पर बाहर की ओर निकलती हुई संरचनाओं का प्रतिषेध | एक मास का कारावास या 1000 रूपये या दोनों | 100 |
| 16. | धारा 235, उपधारा (2) | गलियों पर बाहर की ओर से निकलती हुई संरचनाओं को हटाने की अध्यपेक्षा के अनुपालन मेें असफलता | 500 | 50 |
| 17. | धारा 236, उपधारा (2) | ऐसे बरामदे, छज्जे इत्यादि, जो धारा 236 (1) के अनुसार बनाए गए हैं, को हटाने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 18. | धारा 237 | निचली मंजिल के दरवाजे इत्यादि में ऐसा बदलाव करना कि वे बाहर की ओर न खुलें, अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 1000 | 50 |
| 19. | धारा 246, उपधारा (1) | खतरनाक स्थान की मरम्मत करने, बचाव करने या अहाताबन्दी करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 20. | धारा 257 | गलियों के कोनों पर भवनों को गोलाकार करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 21. | धारा 258, उपधारा (2) | गली की नियमित लाईन से आगे को निकालने या किसी स्कीम या योजना के उल्लंघन में भवन बनाना या संकर्मों का निष्पादन | 1000 | -- |
| 22. | धारा 261 | मंजूरी के बिना बनाये गए भवनों को तोड़ने में असफलता या आदेष का उल्लंघन करके भवन बनाना | 2000 | 200 |
| 23. | धारा 262 | म्ांजूरी की शर्तों इत्यादि के उल्लंघन में भवन बनाना | 2000 | 200 |
| 24. | धारा 263 | परिर्वतन करने में असफलता | 2000 | -- |
| 25. | धारा 264, उपधारा (1) और (2) | समापन प्रमाण-पत्रों का अनुपालन न करना, अनुज्ञा के बिना अधिभोग या प्रयोग इत्यादि | 500 | 50 |
| 26. | धारा 265, उपधारा (1) | भवनों के प्रयोग पर निर्बन्धनों का अनुपालन न करना | 1000 | 100 |
| 27. | धारा 265, उपधारा (2) और (3) | खण्डहर हो चुकी या गिरने वाली संरचनाओं को हटाने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 2000 | 200 |
| 28. | धारा 266, उपधारा (1) | खतरनाक स्थिति इत्यादि वाले भवनों को खाली करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 1000 | 100 |
| 29. | धारा 281, उपधारा (2) | अति भिड़े वाले भवनों को हटाने की अध्यपेक्षा अनुपालन में असफलता | 1000 | 100 |
| 30. | धारा 282 | मानव-निवास के लिए अनुपयुक्त भवनों के सुधार करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 1000 | -- |
| 31. | धारा 284, उपधारा (1), (2), (3) और (4) | मानव-निवास के लिए अनुपयुक्त भवनों को तोड़ने के आदेष के अनुपालन मे ं असफलता | 2000 | 200 |
| 32. | धारा 289 | भवनों या वस्तुओं की सफाई करने और उनके विसंक्रामण की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | -- |
| 33. | धारा 302 | संक्रमित शवों को इस धारा के उपबंधों के उल्लंधन में हटाना | 500 | -- |
| 34. | धारा 305 | नए शमषान या कब्रिस्तानों का अनुज्ञा के बिना उपयोग करना | 500 | -- |
| 35. | धारा 306, उपधारा (1) | शमषान या कब्रिस्तान बंद करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | - |
| 36. | धारा 306, उपधारा (2) | किसी शमषान या कब्रिस्तान को बंद करने के पष्चात् उसमें शवों को जलाना या दफनाना | 500 | - |
| 37. | धारा 307 | विहित मार्गों से भिन्न मार्गों से शवाें को ले जाना | 500 | -- |
| 38. | धारा 309, उपधारा (1), (2) और (3) | उपद्रव करना | 500 | -- |
| 39. | धारा 310 | उपद्रव को हटाने या उपषमन के लिए अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 40. | धारा 311, उपधारा (4) | कुत्तों को जंजीर से बांधे बिना पथ में खुला घूमने न देना | 500 | -- |
| 41. | धारा 311, उपधारा (5) | हिंसक कुत्ते को मुखबंध इत्यादि लगाये बिना खुला घूमने देना | 500 | -- |
| 42. | धारा 312 | प्रतिषेध के उल्लंघन में ज्वनषील सामग्री का ढेर लगाना | 5000 | -- |
| 43. | धारा 314 | ऐसी आतिषबाजी, अग्नयायुध, इत्यादि छोड़ना जिनसे खतरा उत्पन्न होना सम्भाव्य है | 500 | -- |
| 44. | धारा 315 | भवनों, कुओं, इत्यादि को सुरक्षित करने की अध्यपेक्षा करने के अनुपालन में असफलता | 500 | -- |
| 45. | धारा 316 | अनुचित प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग घेरा लगाने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | -- |
| 46. | धारा 322, उपधारा (1) | स्थानों का निजि बाजारों के रूप में अनुज्ञप्ति के बिना उपयोग करना और नगरपालिका वधषाला से भिन्न स्थानों का वधषालाओं के रूप में उपयोग करना | 500 | 50 |
| 47. | धारा 322, उपधारा (2) परन्तुक (क) | आयुक्त द्वारा अधिरोपित शर्तों का अनुपालन न करना | 500 | -- |
| 48. | धारा 329 | बिना अनुज्ञप्ति के बुचड, मच्छी व्यापार या पोल्ट्री व्यापार करना | 500 | 50 |
| 49. | धारा 331 | अनुज्ञप्ति इत्यादि के बिना कतिपय वस्तुएं नहीं रखी जाएंगी और कतिपय व्यापार और संक्रियाएं जारी नहीं रखी जाएंगी | 500 | 100 |
| 50. | धारा 333, उपधारा (5) | घोषणा के उल्लंघन में परिसरों का उपयोग | 500 | -- |
| 51. | धारा 353 | आयुक्त या उस द्वारा इस निमित प्राधिकृत किसी व्यक्ति को प्रवेष इत्यादि संबंधी उसकी शक्ति का प्रयोग करने से रोकना | 500 | 100 |
| 52. | धारा 354 | आयुक्त या उसकी ओर से प्राधिकृत किसी व्यक्ति को किसी साथ लगती अन्य भूमि पर प्रवेष करने की शक्ति का प्रयोग करने से रोकना | 500 | -- |
| 53. | धारा 359 | संकर्म के निष्पादन में बाधा डालना या परेषानी पैदा करना | 500 | -- |
| 54. | धारा 366, उपधारा (4) | परिसरों के स्वामियाें के नाम और पते बताने की अपेक्षा के अनुपालन में असफल रहना | 500 | -- |
| 55. | धारा 375 उपधारा (3) | जिला न्यायाधीष के आदेषों के जारी होने से आठ दिन के बाद, आदेष के उपबंधों के अनुपालन या भूमि या निर्माण के अधिभोगी के स्वामी को सुविधाएं प्रदान करने में असफल रहना | 500 | 50 |
| 56. | धारा 405 | महापौर या किसी अन्य नगर निगम प्राधिकरण इत्यादि के कार्यों में बाधा डालना | 500 | -- |
| 57. | धारा 406 | तल इत्यादि को सूचित करने हेतु स्थापित किसी चिह्न को हटाना | 500 | - |
| 58. | धारा 407 | निगम आयुक्त इत्यादि के आदेष द्वारा या के अधीन दर्षित किसी नोटिस (सूचना पट्ट) इत्यादि को हटाना | 500 | -- |
| 59. | धारा 408 | निगम में निहित किसी भूमि से विधिविरूद्ध मिट्टी, र ेत या अन्य सामग्री का हटाना अथवा किसी सामग्री को जमा करना या अनधिकार प्रवेष करना | 500 | -- |
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परन्तु | विषय | शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी | दैनिक शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी |
| 1 | 2 | 3 | 4 | |
| रूपए | रूपए | |||
| 1. | धारा 101, उपधारा (1) और (2) | भूमि या भवन के अन्तरण या हस्तान्तरण की सूचना देने में असफलता | 500 | 50 |
| 2. | धारा 101, उपधारा (3) | अन्तरण की लिखत पेष करने में असफलता | 500 | 50 |
| 3. | धारा 102 | नया भवन, इत्यादि बनाने की सूचना देने मे ं असफलता | 500 | -- |
| 4. | धारा 103 | भवन तोड़ने या हटाने की सूचना देने मे ं असफलता | 500 | 50 |
| 5. | धारा 104 | जानकारी इत्यादि देने की अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में असफलता | 500 | -- |
| 6. | धारा 108, उपधारा (2) | मूल्यांककों को जानबूझकर विलंब कराना या बाधित करना | 500 | -- |
| 7. | धारा 122 | अनुज्ञा के बिना विज्ञापन का प्रतिषेध | 500 | 50 |
| 8. | धारा 142, उपधारा (2) | आयुक्त के समक्ष हाजिर होने की अध्यपेक्षा का अनुपालन न करना | 500 | -- |
| 9. | धारा 145 | दायित्व प्रकट करने में असफलता | 500 | -- |
| 10. | धारा 180 | नोटिस देने में असफलता | 500 | -- |
| 11. | धारा 182 | जल आपूर्ति की व्यवस्था किए बिना नए परिसरों को अधिभोग में लेने का प्रतिषेध | 500 | 50 |
| 12. | धारा 191, उपधारा (2) | शौचालयों इत्यादि का ऐसी स्थिति में निर्माण करना जहां पाइपों को क्षति पहुंच सकती है या उनका जल दूषित हो सकता है | 500 | 50 |
| 13. | धारा 196, उपधारा (2) | निजी नाली को नगरपलिका नाली के साथ नोटिस के बिना जोड़ा नहीं जाना | 500 | 50 |
| 14. | धारा 205 | लिखत अनुज्ञा के बिना नगरपालिका जल संकर्म का नालियों से कनैक्षन | 500 | 50 |
| 15. | धारा 214, उपधारा (1) | अनुज्ञप्त नलसाज से भिन्न व्यक्ति द्वारा संकर्म का निष्पादन | 500 | -- |
| 16. | धारा 214, उपधारा (2) | नियोजित किए गए अनुज्ञप्त नलसाज का नाम देने की अपेक्षा किए जाने पर नाम न देना | 500 | -- |
| 17. | धारा 214, उपधारा (6) | अनुज्ञप्त नलसाजों द्वारा विहित प्रभारों से अधिक प्रभार न मांगा जाना | 500 | -- |
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परन्तु | विषय | शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी | दैनिक शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी |
| 1 | 2 | 3 | 4 | |
| रूपए | रूपए | |||
| 18. | धारा 214, उपधारा (8) | अनुज्ञप्त नलसाज उपविधियों का उल्लंघन नहीं करेंगे या संकर्मों का निष्पादन इत्यादि असावधानी से या उपेक्षा पूर्वक नहीं करेंगे | 500 | -- |
| 19. | धारा 231, उपधारा (5) | निगम के आदेषों की अनुपालन से अन्यथा किसी भूमि का उपयोग करना, विक्रय करना या उसके बारे में अन्यथा कार्यवाही करना या निजी पथ की व्यवस्था करना | 500 | 50 |
| 20. | धारा 232, उपधारा (1) खण्ड (क) और खण्ड (ख) | गली में बदलाव के लिए हेतुक दर्षित करने की या आयुक्त के समक्ष हाजिर होने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 21. | धारा 233, उपधारा (1) | निजी पथ या उससे लगी हुई भूमि या भवन के स्वामी से ऐसे पथ को समतल करने, इत्यादि की अध्यपेक्षा के अनुपालन में उसकी असफलता | 500 | 50 |
| 22. | धारा 238, उपधारा (1) | ऐसी संरचनाओं या फिक्सचरों का निर्माण, इत्यादि जो पथों में बाधा डालते हैं | 1000 | 100 |
| 23. | धारा 238, उपधारा (2) | गलियों में वस्तुओं का जमा करना इत्यादि | 500 | -- |
| 24. | धारा 241, उपधारा (1) और (2) | सार्वजनिक गलियों मेें जीव जन्तुओं को बांधना और पशुओं को दुहना | 500 | |
| 25. | धारा 242, उपधारा (4) | रोक या तख्ताबंदी इत्यादि को विधि विरूद्ध हटाना या प्रकाष का हटाना या बुझाना | 500 | -- |
| 26. | धारा 243, उपधारा (1) | अनुज्ञा के बिना पथों का खोदना या तोड़ना और इन पर अनुज्ञा के बिना भवन निर्माण सामग्री जमा करना | 500 | 50 |
| 27. | धारा 245, उपधारा (2) | गली का नाम और गृह संख्यांक नष्ट या विरूपित, इत्यादि न करना | 500 | - |
| 28. | धारा 248, उपधारा (1) | लैम्पों का हटाना इत्यादि | 500 | -- |
| 29. | धारा 248, उपधारा (2) | सार्वजनिक गलियों इत्यादि के प्रकाष को जानबूझकर और उपेक्षापूर्वक बुझाना | 500 | -- |
| 30. | धारा 250 | आयुक्त की मंजूरी के बिना भवन बनाना | 5000 | 500 |
| 31. | धारा 251, उपधारा (1) | भवन बनाने के आषय की सूचना देने में असफलता | 500 | -- |
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परन्तु | विषय | शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी | दैनिक शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी |
| 1 | 2 | 3 | 4 | |
| रूपए | रूपए | |||
| 32. | धारा 252 | भवनो में परिवर्धन इत्यादि करने के आषय की सूचना देने में असफलता | 500 | 50 |
| 33. | धारा 255, उपधारा (4) | सूचना इत्यादि के बिना संकर्म का प्रारम्भ | 2000 | 200 |
| 34. | धारा 258, उपधारा (1) | नई गलियों को समतल किए बिना भवनों का बनाया जाना | 1000 | 50 |
| 35. | धारा 260 | ज्वलनषील सामग्री का अनुज्ञा के बिना प्रयोग | 1000 | -- |
| 36. | धारा 271 | कूड़े इत्यादि के संग्रहण, हटाने और जमा करने के लिए व्यवस्था करने और कूड़ेदानों की व्यवस्था करने में असफलता | 500 | 50 |
| 37. | धारा 272 | बाजार इत्यादि के रूप में उपयोग परिसरों से कूड़ा इत्यादि हटाने के लिए अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | -- |
| 38. | धारा 273, उपधारा (1) | कूड़ा और गंदगी इत्यादि चौबीस घंटों से अधिक समय तक रखना | 500 | 50 |
| 39. | धारा 273, उपधारा (2) | गंदगी को गली पर जाने देना | 500 | 50 |
| 40. | धारा 273, उपधारा (3) | कूड़ा या गंदगी इत्यादि को गली इत्यादि में जमा किया जाना | 500 | -- |
| 41. | धारा 275, उपधारा (1) | शौचालय और मूत्रालय अनुज्ञा के बिना या विहित निर्बंधनों का उल्लंघन करके निर्मित नहीं किये जाएंगे | 500 | -- |
| 42. | धारा 277, उपधारा (1) | नवनिर्मित या पुनः निर्मित भवनों में शौचालय, मूत्रालय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने में असफलता | 1000 | 100 |
| 43. | धारा 277, उपधारा (3) | पृथक वासगृहों वाले आवास भवनों में पहली मंजिल पर सेवको ं के लिये शौचालय, स्नान करने या धोने की व्यवस्था करने में असफलता | 500 | -- |
| 44. | धारा 278 | बहुत व्यक्तियों के उपयोग परिसरों में शौचालयों की व्यवस्था करने और उन्हें साफ और उचित स्थिति में रखने में असफलता | 500 | 50 |
| 45. | धारा 279 श् | शौचालय या मूत्रालय इत्यादि के उपबंध का पालन करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परन्तु | विषय | शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी | दैनिक शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी |
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| रूपए | रूपए | |||
| 46. | धारा 280, खण्ड (क), (ख), (ग) तथा (घ) | शौचालय या मूत्रालय के लिए स्थान संबंधी उपबंध का पालन करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 47. | धारा 285 | अस्वच्छ झोंपड़ियों और शैडों इत्यादि को हटाने की आयुक्त की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | 50 |
| 48. | धारा 286, उपधारा (1) | धोबी द्वारा धुलाई की बाबत प्रतिषेध | 500 | -- |
| 49. | धारा 287 | खतरनाक रोग की जानकारी देने में असफलता | 500 | -- |
| 50. | धारा 290 | संक्रामित झोंपड़ियों या शैड़ों को नष्ट करने की अध्यपेक्षा के अनुपालन में असफलता | 500 | -- |
| 51. | धारा 291 | किसी ऐसे स्थान में जो आयुक्त द्वारा अधिसूचित नहीं है, कपड़ों, बिस्तरों इत्यादि की धुलाई | 500 | -- |
| 52. | धारा 293, उपधारा (1) | संक्रमित कपड़े धोबी या लांडरी को भेजना | 500 | -- |
| 53. | धारा 293, उपधारा (2) | जिस धोबी या लांडरी को कपड़े भेजे गए हैं उसका पता देने में असफलता | 500 | -- |
| 54. | धारा 294, उपधारा (1), (2) और (3) | खतरनाक रोग इत्यादि से पीड़ित व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग | 500 | -- |
| 55. | धारा 296 | भवनों का भाटक पर देने से पूर्व उनका विसंक्रामण करने में असफलता | 500 | -- |
| 56. | धारा 297 | संक्रामित वस्तुओं का विसंक्रामण किये बिना व्ययन | 500 | -- |
| 57. | धारा 298 | स्ांक्रामित व्यक्तियों द्वारा भोजन बनाना या विक्रय करना या कपड़े धोना | 500 | -- |
| 58. | धारा 299 | आयुक्त द्वारा लगाए निर्बंधन या प्रतिषेध के उल्लंघन में खाद्य या पेय का विक्रय | 500 | -- |
| 59. | धारा 300 | आयुक्त के प्रतिषेध के उल्ल्ांघन में कूओं और तालाबों से जल ले लाना और उसका प्रयोग | 500 | -- |
| 60. | धारा 301 | किसी खतरनाक रोग, इत्यादि से पीड़ित व्यक्ति की उपस्थिति या आचरण से व्यक्तियों को संक्रमण को जोखिम में डालना | 500 | -- |
| 61. | धारा 303, उपधारा (1) | सूचना के बिना झाड़ कषों इत्यादि की कर्तच्य से अनुपस्थिति | 1000 | -- |
| क्रम संख्या | हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा, उपधारा, खण्ड या परन्तु | विषय | शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी | दैनिक शास्ति जो अधिरोपित की जा सकेगी |
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| रूपए | रूपए | |||
| 62. | धारा 304 | शमषान या कब्रिस्तानाें के भारसाधक व्यक्तियों को जानकारी देने में असफलता | 500 | -- |
| 63. | धारा 308, उपधारा (1) खण्ड (ख) | मृत पशुओं के शवों को हटाने की सूचना में असफलता | 500 | -- |
| 64. | धारा 313 | खुली बत्ती रखना | 500 | -- |
| 65. | धारा 320, उपधारा (1) | नगरपालिका बाजारों में अनुज्ञा के बिना विक्रय करना | 500 | -- |
| 66. | धारा 324 | अनुज्ञप्ति इत्यादि के बिना बाजार चलाना | 2000 | -- |
| 67. | धारा 325 | अननुज्ञप्त बाजार में विक्रय | 500 | -- |
| 68. | धारा 326 | बाजार के समीप कारबार या व्यापार चलाना | 500 | -- |
| 69. | धारा 332, उपधारा (3) | पशुाओं आदि का रखना, छोड़ना अथवा बांधना | 300 जो 2000 तक का हो सकेगा | 100 |
| 70. | धारा 334 | अनुज्ञप्ति इत्यादि के बिना फेरी लगाकर वस्तुओं का विक्रय करना | 500 | -- |
चण्डीगढ़ः दिनांकः 19 नवम्बर, 2025.
प्रो0 असीम कुमार घोष, राज्यपाल, हरियाणा।
रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
12243—L.R.—H.G.P., Pkl.