भाग-II
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 26 नवम्बर, 2025
संख्या लैज 27/2025.- दि हरियाणा शॉपस ऐन्ड कॅमॅःषॅल इस्टैब्-लिष-मॅन्ट (अमेन्डमेन्ट) ऑर्डिनन्स, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 19 नवम्बर, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (ग) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2025 का हरियाणा अध्यादेष संख्या 4
हरियाणा दुकानात तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संषोधन) अध्यादेष, 2025 हरियाणा दुकानात तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 को आगे संषोधित करने के लिए अध्यादेष
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।
चूंकि हरियाणा राज्य विधानमण्डल का सत्र नहीं हो रहा है तथा राज्यपाल की सन्तुष्टि हो गई है
कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं, जिनके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उनके लिए आवष्यक हो गया हैं;
इसलिए, अब भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग
करते हुए, हरियाणा के राज्यपाल, इसके द्वारा, निम्नलिखित अध्यादेष प्रख्यापित करते हैंः-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अध्यादेष हरियाणा दुकानात तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संषोधन) अध्यादेष, 2025 कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा।
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 1 का संषोधन। 2. हरियाणा दुकानात तथा वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 (जिसे, इसमें, इसके बाद मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 1 की उप-धारा (4) के बाद, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्ः- ''(5) धारा 13क के सिवाय इस अधिनियम के उपबंध बीस या उससे अधिक कर्मकारों को नियोजित करने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे और इस अधिनियम की धारा 13क के उपबंध बीस से कम कर्मकारों को नियोजित करने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लागू हाेंगे।''।
3. मूल अधिनियम की धारा 7 में,-
(i) उप-धारा (1) में ''नौ घण्टों'' शब्दों के स्थान पर, ''दस घण्टों'' शब्द प्रतिस्थापित किए
जाएंगे; तथा
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 7 का संषोधन। (ii) उप-धारा (2) में, परन्तुक में, खण्ड (क) में, ''पचास'' शब्द के स्थान पर ''एक सौ छप्पन''
शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
4. मूल अधिनियम की धारा 8 की उप-धारा (1) मेें, ''पांच घण्टे'' शब्दों के स्थान पर ''छह घण्टे'' शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 8 का संषोधन। 5. मूल अधिनियम की धारा 13 के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः- 1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 13 का प्रतिस्थापन। ''13. प्रतिष्ठानों का पंजीकरण.-(1) बीस या उससे अधिक कर्मकाराें को नियोजित करने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान का नियोजक, अपने कारबार के प्रारम्भ की तिथि से एक मास की अवधि के भीतर, ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीस और दस्तावेजों, जो विहित किए जाएं, के साथ ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करेगा, जिसमें निम्नलिखित ब्यौरे दिए जाएंगे-98 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 26, 2025 (AGHN. 5, 1947 SAKA) (क) नियोजक या प्रबन्धक का नाम, यदि कोई हो;
(ख) प्रतिष्ठान की जी.पी.एस. अवस्थिति सहित डाक-पता;
(ग) प्रतिष्ठान का नाम;
(घ) प्रतिष्ठान में नियोजित व्यक्तियों की संख्या; (ड.) प्रतिष्ठान के कारबार की प्रकृति; तथा (य) ऐसे अन्य ब्यौरे, जो विहित किए जाएं।
(2) दस्तावेजों और फीस के साथ आवेदन प्राप्त होने पर, निरीक्षक, आवेदन और उससे संलग्न दस्तावेजों की यथार्थता की जाँच करेगा और संतुष्टि होने पर नियोजक को ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 (2014 का 4) के अधीन यथा अधिसूचित समय-सीमा के भीतर नियोजक को ऑनलाइन पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करेगा। (3) उप-धारा (2) के अधीन जारी किया गया कोई पंजीकरण प्रमाण-पत्र तब तक वैध रहेगा, जब तक संषोधित नहीं किया जाता या प्रतिष्ठान के बन्द होने पर रद्द नहीं कर दिया जाता या निरीक्षक द्वारा जाँच करने के पष्चात्, ऐसी शर्तों पर और ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में प्रतिसंहरण नहीं किया जाता। (4) नियोजक का यह कर्तव्य होगा कि वह पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन में दिए गए विवरणों में किसी भी परिवर्तन की सूचना, परिवर्तन होने के सात दिन के भीतर ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में निरीक्षक को ऑनलाइन देवे। (5) प्रतिष्ठान, नियोजक, प्रबन्धक के नाम और कार्यबल विवरणों के सम्बन्ध में परिवर्तन के मामले में, नियोजक, उप-धारा (2) के उपबन्धों के अनुसार संषोधित पंजीकरण प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करेगा और संषोधित पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी। (6) नियोजक, प्रतिष्ठान के बन्द होने के बारे में, बन्द होने के तीस दिन के भीतर निरीक्षक को ऑनलाइन सूचित करेगा। निरीक्षक, सूचना प्राप्त होने पर और उसकी यथार्थता के बारे में संतुष्ट होने पर, प्रतिष्ठान के रजिस्टर में से ऐसे प्रतिष्ठान का नाम हटा देगा और पंजीकरण प्रमाण-पत्र को रद्द कर देगा। (7) इस धारा के उपबन्धों के किसी भी उल्लंघन, अथवा की अनुपालना करने में असफल रहने के मामले में, नियोजक, प्रथम उल्लंघना के लिए, ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो तीन हजार रूपए सेे कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दस हजार रूपए तक की हो सकेगी और द्वितीय उल्लंघना के मामले में, वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पाँच हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पच्चीस हजार रूपए तक की हो सकेगीः परन्तु लगातार उारगामी उल्लंघना के मामले में, सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी, प्रत्येक दिन के लिए पाँच हजार रूपए की दर से शास्ति अधिरोपित कर सकेगा। 13क. बीस से कम कर्मकारों को नियोजित करने वाले प्रतिष्ठान की सूचना.- बीस से कम कर्मकारों को नियोजित करने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान का नियोजक, अपने कारबार को प्रारम्भ करने की तिथि से एक मास की अवधि के भीतर निरीक्षक को ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में ऑनलाइन सूचना प्रस्तुत करेगा। सूचना देने वाले नियोजक को एक मूल सूचना प्रपत्र आई0डी0 संख्या दी जाएगी।"।
6. मूल अधिनियम की धारा 19 की उप-धारा (3) में, "भारतीय दण्ड संहिता की धारा 21" शब्दों तथा अंकों के स्थान पर, "भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 2 के खण्ड (28)" शब्द, अंक तथा कोष्ठक प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 19 का संषोधन।
7. मूल अधिनियम की धारा 20 की उप-धारा (5) तथा (6) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धाराएं प्रतिस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः-
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 20 का संषोधन। "(5) इस धारा के पूर्वगामी किसी भी उपबन्ध के किसी उल्लंघन के मामले में, किसी प्रतिष्ठान का नियोजक, ऐसे प्रत्येक दिन, जिसके दौरान उल्लंघन होता है या जारी रहता है, के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पाँच सौ रूपए से अधिक की नहीं हो सकेगी। (6) यदि कोई व्यक्ति, धोखा देने के आषय से, यथापूर्वोक्त किसी ऐसे अभिलेख, पंजी या नोटिस में ऐसी कोई प्रविष्टि, करता है या करवाता है या करने को अनुमत करता है, जो उसकी जानकारी के अनुसार किसी तात्विक विषिष्टि की दृष्टि से मिथ्या है, या किसी ऐसे अभिलेख, पंजी या नोटिस से उसमें किए जाने के लिए अपेक्षित किसी प्रविष्टि का जानबूझकर लोप करता है, याHARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), NOV. 26, 2025 (AGHN. 5, 1947 SAKA) 99 लोप करवाता है अथवा लोप करने को अनुमत करता हैै, तो वह प्रथम उल्लंघन के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो तीन हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी, किन्तु दस हजार रूपए तक की हो सकेगी और द्वितीय उल्लंघना के मामले में, वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पाँच हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी, किन्तु पच्चीस हजार रूपए तक की हो सकेगीः परन्तु लगातार उारगामी उल्लंघन के मामले में, सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी प्रत्येक दिन के लिए पाँच सौ रूपए की दर से शास्ति अधिरोपित कर सकेगा।"।
8. मूल अधिनियम की धारा 20 के बाद, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी, अर्थात्ः-
"20क. नियुक्ति पत्र.- किसी प्रतिष्ठान का प्रत्येक नियोजक अपने सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देगा, जिस पर कर्मचारी का फोटो चिपका होगा तथा उसकी पावती प्राप्त करेगा।
1958 के पंजाब अधिनियम 15 में धारा 20क और 20ख का रखा जाना। 20ख. पहचान पत्र.- किसी प्रतिष्ठान का प्रत्येक नियोजक प्रत्येक कर्मकार को एक पहचान पत्र देगा, जिसमें ऐसे विवरण शामिल होंगे, जो विहित किए जाएं।"।
1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 21 का संषोधन। 9. मूल अधिनियम की धारा 21 की उप-धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- "(2) जो कोई भी उप-धारा (1) के उपबन्धों का उल्लघंन करता है या इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने में निरीक्षण प्राधिकारी को जानबूझकर बाधित करता है अथवा प्रतिष्ठान में किसी कर्मचारी को प्राधिकारी के सामने उपस्थित होने से या प्राधिकारी द्वारा परीक्षित किए जाने से छिपाता है या रोकता है, तो वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो तीन हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दस हजार रूपए तक की हो सकेगी।"।
10. मूल अधिनियम की धारा 26 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- 1958 के पंजाब अधिनियम 15 की धारा 26 का प्रतिस्थापन। "26. शास्तियाँ.- इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अध्यधीन, जो कोई भी इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के किसी भी उपबन्ध का उल्लंघन करता है और इस अधिनियम में ऐसे उल्लंघन के लिए किसी शास्ति का उपबन्ध नहीं किया गया है, तो वह प्रथम उल्लंघन के लिए ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो तीन हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु दस हजार रूपए तक की हो सकगी और द्वितीय उल्लंघन के मामले में, वह ऐसी शास्ति के लिए दायी होगा, जो पाँच हजार रूपए से कम की नहीं हो सकेगी किन्तु पच्चीस हजार रूपए तक की हो सकेगीः
परन्तु लगातार उारगामी उल्लंघन के मामले में, सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी प्रत्येक दिन के लिए पाँच सौ रूपए की दर से शास्ति अधिरोपित कर सकेगा।"।
चण्डीगढ़ः दिनांक 19 नवम्बर, 2025.
प्रो० असीम कुमार घोष, राज्यपाल, हरियाणा।
रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
12243—L.R.—H.G.P., Pkl.