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Haryana Gazette · Government of Haryana

THE APARNA INSTITUTION (TAKING OVER OF MANAGEMENT AND CONTROL) ACT, 2025 (HARYANA ACT NO. 24 OF 2025)

Published 12 December 2025

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
206-2025/Ext
Notification no.
Leg. No.29/2025
Identifier
in.gazette.haryana.2025-12-12.Extra-Ordinary_Leg-No-29-2025
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY

Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 206-2025/Ext.] चण्डीगढ़, शुक्रवार, दिनांक 12 दिसम्बर, 2025

(21 मार्गषीर्ष, 1947 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग-I अधिनियम

203—207 अपर्णा संस्था (प्रबंधन तथा नियंत्रण ग्रहण) अधिनियम, 2025 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 24)

(केवल हिन्दी में)।

भाग-II अध्यादेष

कुछ नहीं

भाग-III प्रत्यायोजित विधान

कुछ नहीं

भाग-IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(xcii)

203 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 12, 2025 (AGHN. 21, 1947 SAKA)

भाग-I

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 12 दिसम्बर, 2025

संख्या लैज. 29/2025.- दि अपर्णा इंस्टीट्‌यूषन (टेकिंग ओवर ऑफ मैनेजमेंट ऐण्ड कंट्रोल) ऐक्ट, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 10 दिसम्बर, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 24

अपर्णा संस्था (प्रबंधन तथा नियंत्रण ग्रहण) अधिनियम, 2025 हरियाणा राज्य की क्षेत्रीय अधिकारिता में पड़ने वाली, गांव सिलोखरा, जिला गुरूग्राम की राजस्व सम्पदा में स्थित अपर्णा संस्था का लोकहित में उचित तथा कुशल प्रबंधन और नियंत्रण सीमित अवधि के लिए ग्रहण करने हेतु और उससे संबंधित तथा इसके आनुषंगिक मामलों के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह

अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ।

परिभाषाएं। 1. (1) यह अधिनियम अपर्णा संस्था (प्रबंधन तथा नियंत्रण ग्रहण) अधिनियम, 2025 कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''प्रशासक'' से अभिप्राय है, धारा 5 के अधीन सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक; (ख) ''नियत दिन'' से अभिप्राय है, राजपत्र में इस अधिनियम के प्रकाषन की तिथि; (ग) ''सरकार'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार; (घ) ''संस्था'' से अभिप्राय है, गांव सिलोखरा, तहसील वजीराबाद, जिला गुरुग्राम, हरियाणा में

स्थित अपर्णा संस्था;

(ड.) ''सम्पत्ति'' से अभिप्राय है, गांव सिलोखरा, तहसील वजीराबाद, जिला गुरुग्राम की राजस्व सम्पदाओं में स्थित 24 एकड़ 16 मरला मापन भूमि और उस पर विद्यमान सभी भवन, और संस्था का भाग रूप बनने वाली, या से सम्बन्धित किसी भी स्वरूप की अन्य सभी सम्पत्तियां और ऐसी सम्पत्तियों से उत्पन्न होने वाले सभी अन्य अधिकार और हित; (च) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित; (छ) ''सोसाइटी'' से अभिप्राय है, सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 21) के अधीन पंजीकृत अपर्णा आश्रम सोसाइटी (पंजीकरण संख्या 1973-74 का एस-5766), जिसका पंजी—त कार्यालय ए-50, फ्रेंड्‌स कॉलोनी, मथुरा रोड़, नई दिल्ली में है।

सरकार में संस्था का प्रबंधन और नियंत्रण निहित होना। 3. संस्था की सम्पत्ति का प्रबंधन, नियंत्रण और कब्जा जो नियत दिन से ठीक पहले संस्था के प्राधिकरण/षासकीय परिषद्‌, चाहे किसी नाम से ज्ञात हो, के प्रबन्धनाधीन और नियंत्रणाधीन था, नियत दिन से ही और उसके बाद दस वर्ष की अवधि के लिए सरकार में निहित होगा, और नियत दिन से ठीक पहले संस्था के कारबार तथा मामलों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी सभी व्यक्ति, ऐसे नियंत्रण और प्रबंधन का प्रयोग करना बंद कर देंगे और ऐसे रूप में उन द्वारा अपने पदों को छोड़ दिया गया समझा जाएगाः परन्तु यदि सरकार की राय है कि दस वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के बाद संस्था के उचित और कुषल प्रबन्धन और इसके आगामी विकास को सुनिष्चित करने के लिए, वह ऐसी अवधि, जो एक बार में पाँच वर्ष से अधिक नहीं होगी, जो यह उचित समझे, के लिए ऐसे प्रबन्धन को जारी रखने के लिए निर्देष जारी कर सकती है।204 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 12, 2025 (AGHN. 21, 1947 SAKA) अध्यारोही प्रभाव। 4. संस्था के ज्ञापन में तत्समय लागू किसी अन्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी,- (क) नियत दिन से ही संस्था के प्राधिकरण/षासकीय परिषद्‌, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, का प्रत्येक सदस्य, संस्था के सम्बन्ध में प्रबन्धन तथा नियन्त्रण की किसी भी शक्ति, जो भी हो, का प्रयोग करना बंद कर देगा;

(ख) संस्था के प्राधिकरण/षासकीय परिषद्‌, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, के सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी भी रीति, जो भी हो, में संस्था के प्रबंधन और नियंत्रण या संस्था का भाग रूप बनने वाली, या से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की इसकी सम्पत्ति और ऐसी सम्पत्ति से उत्पन्न अन्य सभी अधिकार और हितों की देखभाल करने के लिए नामनिर्दिष्ट या नियुक्त करना विधिपूर्ण नहीं होगा;

(ग) संस्था के प्राधिकरण/षासकीय परिषद्‌, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो, के सदस्यों द्वारा संस्था के संबंध में पारित कोई भी प्रस्ताव प्रभावी नहीं होगा;

(घ) संस्था के विघटन करने या सोसाइटी का किसी अन्य संस्था में विलय करने हेतु या संस्था का भाग रूप बनने वाली, या से संबंधित किसी भी आस्ति, जिसका धारा 3 के अधीन प्रबंधन और नियंत्रण सरकार में निहित है, के संबंध में रिसीवर की नियुक्ति के लिए सरकार की लिखित सहमति के सिवाय किसी भी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं हो सकेगी। प्रशासक तथा उसकी शक्तियां।

5. (1) सरकार, नियत दिन से, सरकार के लिए और की ओर से संस्था के प्रबन्धन को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिए ऐसी रीति में, ऐसी योग्यताएं और अनुभव, जो विहित किए जाएं, रखने वाले किसी व्यक्ति को प्रशासक के रूप में नियुक्त करेगी। (2) इस प्रकार नियुक्त प्रषासक, सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 21) या तत्समय लागू किसी अन्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, संस्था के सम्बन्ध में प्राधिकरण/षासकीय परिषद्‌, चाहे जिस किसी भी नाम से ज्ञात हो, की शक्तियों का प्रयोग करेगा। (3) प्रषासक, समय-समय पर, ऐसी रीति, जिसमें वह संस्था के प्रबन्धन का संचालन करेगा या ऐसे प्रबन्धन के दौरान उत्पन्न होने वाले इसके आगामी विकास सहित किसी अन्य मामले के सम्बन्ध में सरकार से अनुदेष प्राप्त करेगा। (4) प्रशासक, सरकार की पूर्व अनुमति से, संस्था के संचालन और प्र्रबन्धन के लिए किसी व्यक्ति (व्यक्तियों) को नियुक्त कर सकता है। इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति (व्यक्तियों), प्रषासक की ऐसी शक्तियों का प्रयोग उसी रीति में करेगा/करेंगे जो उस व्यक्ति (व्यक्तियों) को प्रत्यक्ष रूप से इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त की गई हों न कि प्राधिकार के माध्यम से। (5) प्रषासक, सरकार के लिए तथा की ओर से संस्था के प्रबन्धन कोे कार्यान्वित करने के प्रयोजनों हेतु उप-धारा (4) के अधीन नियुक्त व्यक्ति (व्यक्तियों) को अपनी किसी भी शक्ति को प्रत्यायोजित कर सकता है। (6) प्रषासक को संस्था द्वारा या उसके विरूद्ध किसी वाद या विधिक कार्यवाहियों को संस्थित करने, का प्रतिवाद करने या में भाग लेने की शक्ति होगी। (7) प्रषासक तथा इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा नियुक्त कोई अन्य व्यक्ति (व्यक्तियों) ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा/करेंगे, जो विहित किया जाए।

समिति का गठन।

6. सरकार, संस्था के उचित और कुषल प्रबन्धन और नियंत्रण को सुनिष्चित करने और प्रषासक की सहायता हेतु, ऐसी योग्यताएं तथा अनुभव, जो विहित किए जाएं, रखने वाले ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली समिति का गठन करेगी।

सरकार द्वारा अग्रिम तथा अनुदान।

7. सरकार, प्रषासक या समिति, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा किए गए आवेदन पर, इसके द्वारा संस्था के कारबार तथा मामलों के प्रबन्धन तथा इसके आगामी विकास के प्रयोजनों हेतु सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट ऐसे निबंधन तथा शर्तों पर संस्था को अनुदान या अग्रिम प्रदान कर सकती है।

संस्था के लक्ष्य तथा उद्‌देष्य।

8. समिति की सहायता से प्रषासक निम्नलिखित लक्ष्यों तथा उद्‌देष्यों को पूरा करने के लिए हर सम्भव प्रयास करेगा, अर्थात्‌ः-

(i) जन साधारण को अपने स्वास्थ्य और शक्ति को पुनः प्राप्त करने, समस्याओं और बीमारियों, जो योगाभ्यास के सहारे से सुसाध्य हैं, का उपचार करने में समर्थ बनाने के लिए षिक्षा, अनुसंधान, प्रषिक्षण तथा प्रसार के माध्यम से जनता में योग के उपयोगी ज्ञान के विस्तार के माध्यम से योग को अधिक लोकप्रिय बनाना;

(ii) योग कला तथा विज्ञान और इसके बहुआयामी पहलुओं विषेषकर, इसके उच्चतर चरणों के बारे में किसी भेदभाव, चाहे जो भी हो, के बिना लोगों को षिक्षित करना;

205 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 12, 2025 (AGHN. 21, 1947 SAKA)

(iii) योग के क्षेत्र में व्यावहारिक पाठ्‌यक्रम तथा प्रषिक्षण का उत्तरदायित्व लेना और मानवता

के कल्याण तथा उन्नति हेतु इसके उपयोग को सुसाध्य बनाना;

(iv) बेहतर सोसाइटी के निर्माण की दृष्टि से स्वस्थ जीवन जीने की कला और एलएसडी (लिसेर्जिक एसीड डायथाईलैमाइड) और अन्य नकली ड्रग्स और पेयों के उपभोग की हानिकारक आदतों के उन्मूलन हेतु लोगों को षिक्षित करना;

(v) मानसिक तनाव से बचने तथा मानसिक असंतुलन को दूर करने के प्राकृतिक और सरल

तरीके सिखाना;

(vi) आत्म-षुद्धि, सार्वजनिक भाईचारे, शांति तथा आध्यात्मिक मूल्यों के लिए वातावरण बनाना

तथा उसके लिए सुविधाएं तथा प्रषिक्षण देना;

(vii) सम्मेलन, व्याख्यान, सेमीनार, यात्राएं आयोजित करना तथा अध्ययन समूह तथा प्रषिक्षण

कार्यक्रम स्थापित करना;

(viii) योग की व्यापक तथा गहन समझ के प्रसार की दृष्टि से उस पर पुस्तकें, विभिन्न अन्य प्रकाषन तथा साहित्य प्रकाषित करना और जीवन शैली और विकसित प्रणाली के रूप में इसकी स्वीकार्यता को प्रोत्साहित करना;

(ix) संस्था के किन्हीं उद्‌देष्यों को उन्नत करने की दृष्टि से किसी व्यक्ति, संगठन या संस्था

को सहायता, अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति, वृत्तिका, अथवा किसी अन्य प्रकार का लाभ देना;

(x) संस्था द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए विद्वानों को आमंत्रित करना

और/या उनके ज्ञान और अनुभव से संस्था को लाभाविन्त करना;

(xi) किन्हीं उद्‌देष्यों को कार्यान्वित करने, प्राप्त करने या आगे बढ़ाने के लिए शाखाओं, केन्द्रों,

जहां भी आवष्यक समझे जाएं, को स्थापित करना या स्थापित करवाना;

(xii) उद्‌देष्याें को आगे बढ़ाने में धनराषि तथा निधियों के लिए अनुरोध करना तथा आवेदन

करना और नकदी या किसी भी स्वरूप में उपहार, दान तथा अभिदान स्वीकार करना;

(xiii) समरूप उद्‌देष्यों में लगे हुए संघों, संस्थाओं, सोसाइटियों इत्यादि की सहायता लेना या से

सहयोग करना या से समन्वय करने के लिए सहायता मांगना;

(xiv) संस्था द्वारा प्राप्त किए गए अग्रिम, अनुदान, धनराषि तथा किसी अन्य राषि को रीति, जो

विहित की जाए, में निवेष करना तथा संव्यवहार करना;

(xv) संस्था के उद्‌देष्यों को बढ़ावा देने में आवष्यक या सुविधाजनक किसी चल अथवा अचल संपत्ति का स्थायी या अस्थायी रूप से अर्जन, क्रय करना या अन्यथा से पट्‌टे या किराए पर लेना और ऐसी भूमि का रख-रखाव करना, जुताई करना या पर निर्माण करना; (xvi) आश्रम, योग अतिथि गृह स्थापित करना, कृषि तथा डेयरी फार्मिंग आरम्भ करना, बागवानी तथा पौधारोपण कार्य करना और स्वास्थ्य रिजोर्ट और तैराकी स्थलों का स्थापन और रख-रखाव करना;

(xvii) किसी भवन या संकर्म, जो आवष्यक अथवा इससे प्रासंगिक हाें, का निर्माण, रख-रखाव,

परिवर्तन सुधार या विकास करना;

(xviii) ऐसे निबंधनों, जो आवष्यक समझे जाएं, पर धनराषि उधार लेना; (xix) संस्था में कार्यरत व्यक्तियों के कल्याण का ध्यान रखना और सुविधाएं उपलब्ध करवाना,

जो आवष्यक समझी जाएं;

(xx) ऐसे सभी विधिपूर्ण कार्य करना, जो सभी या किसी भी उद्‌देष्य को प्राप्त करने या बढ़ावा

देने में आवष्यक और सहायक समझे जाएं।

सम्पत्ति का कब्जा सौंपना। 9. (1) नियत दिन को संस्था का भाग बनने वाली या से सम्बन्धित किसी सम्पत्ति(सम्पत्तियों) का कब्जा, अभिरक्षा या नियंत्रण रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसी सम्पत्ति(सम्पत्तियों) का प्रषासक या सरकार के किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, जिसे सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, को ऐसी सम्पत्ति(सम्पत्तियों) को तुरन्त सौंपगा। (2) कोई भी व्यक्ति, जिसके पास नियत दिन को संस्था से सम्बन्धित कोई पुस्तक, पेपर या अन्य दस्तावेज (नियत दिन से पूर्व संस्था के प्रबन्धन के प्रभारी व्यक्तियों द्वारा अपनाए गए संस्था के सम्बन्ध में संकल्पों वाली कार्यवृत्त पुस्तकों, संस्था से सम्बन्धित चालू चेक-बुक, कोई पत्र, ज्ञापन, नोट्‌स और उसके और संस्था के बीच किसी अन्य पत्र-व्यवहार सहित) हो या उसके नियन्त्रण में हो, तो वह तत्समय लागू किसी अन्य विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, पुस्तकाें, पेपरों तथा अन्य दस्तावेजों (ऐसी कार्यवृत्त पुस्तकों, चेक-बुकों, पत्रों, ज्ञापन, नोट्‌स तथा अन्य पत्र-व्यवहाराें सहित) का लेखा-जोखा, प्रषासक या ऐसे व्यक्ति (सरकार का कोई अधिकारी या अन्य कर्मचारी होते हुए), जिसे सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, को देने हेतु उत्तरदायी होगा।206 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 12, 2025 (AGHN. 21, 1947 SAKA) दुर्भावपूर्वक की गई संविदाओं, अन्तरणों इत्यादि को रद्‌द या परिवर्तित किया जा सकना।

(3) नियत दिन से ठीक पूर्व संस्था के प्रबन्धन का प्रभारी प्रत्येक व्यक्ति, उस दिन से सात दिन के भीतर या ऐसी ओर अवधि, जिसे सरकार, इस निमित्त अनुमत करे, प्रषासक को नियत दिन से पूर्व संस्था का भाग बनने वाली या से सम्बन्धित सभी सम्पत्तियों और आस्तियों (प्राप्त किए गए दानों, लेखा बहियों, निवेषों और सामानों सहित) और उस दिन से ठीक पहले विद्यमान संस्था के सम्बन्ध में सोसाइटी की सभी देयताओं और बाध्यताओं और नियत दिन से ठीक पहले संस्था के सम्बन्ध में सोसाइटी द्वारा किए गए और लागू सभी करारों की भी सम्पूर्ण सूची प्रस्तुत करेगा। 10. (1) यदि सरकार की सन्तुष्टि हो जाती है कि ऐसी जांच, जो यह उचित समझें, करने के बाद, किसी अन्य व्यक्ति के साथ संस्था के सम्बन्ध में किसी भी समय की गई कोई संविदा, अन्तरण, पट्‌टा, करार या कोई अन्य समझौता, जहाँ तक कि संस्था के प्रबन्धन से सम्बन्धित ऐसी संविदा, अन्तरण, पट्‌टा, करार या कोई अन्य समझौता दुर्भावपूर्वक किया गया है, या संस्था के हितों के लिए हानिकर है, तो यह ऐसी संविदा, अन्तरण, पट्‌टे, करार या किसी अन्य समझौते को रद्‌द करने या परिवर्तित करने (या तो शर्त के बिना या ऐसी शर्तों, जो यह लगाना उचित समझे, के अध्यधीन) के आदेष कर सकती है, और इसके बाद, संविदा, अन्तरण, पट्‌टा, करार या कोई अन्य समझौता तद्‌नुसार प्रभावी होगाः परन्तु संविदा या करार के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के सिवाय, कोई भी संविदा या करार रद्‌द या परिवर्तित नहीं किया जाएगा। (2) तत्समय लागू किसी विधि में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी व्यक्ति, जिसके सम्बन्ध में कोई संविदा, अन्तरण, पट्‌टा, करार या अन्य समझौतों को उप-धारा (1) के अधीन समाप्त किया गया हैं, तो ऐसे अन्तरण, पट्‌टे, करार या अन्य समझौतों के समयपूर्व समापन के लिए किसी मुआवजे का दावा करने हेतु हकदार नहीं होगा। 11. कोई भी व्यक्ति ज,-

अपराध और दण्ड।

(क) संस्था का भागरूप बनने वाली या से सम्बन्धित किसी आस्ति या सम्पत्ति का कब्जा या अभिरक्षा या नियंत्रण रखते हुए, प्रषासक या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति से ऐसी आस्ति या सम्पत्ति को सदोषपूर्वक रोके रखता है; या

(ख) संस्था का भागरूप बनने वाली या से सम्बन्धित ऐसी किसी आस्ति या सम्पत्ति का सदोषपूर्वक कब्जा प्राप्त करता है; या

(ग) संस्था का भागरूप बनने वाली या से सम्बन्धित किसी आस्ति या सम्पत्ति को जानबूझकर रखता है, या हटाता है, या इसे नष्ट करता है; या

(घ) संस्था से सम्बन्धित किसी पुस्तक, पेपर या अन्य दस्तावेजों, जो उसके कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में हो सकते हैं, को प्रषासक या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति को सौंपने से जानबूझकर रोके रखता है या में असफल रहता है; या

(ङ) किसी युक्तियुक्त कारण के बिना, धारा 9 की उप-धारा (3) में यथा उपबन्धित सम्पत्तियों और आस्तियों की किसी सूची को प्रस्तुत करने में असफल रहता है,

कम्पनियों द्वारा अपराध।

तो ऐसी अवधि, जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी, के कारावास, से या जुर्माने, जो पचास हजार रूपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डनीय होगा। 12. (1) जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, तो वहाँ कम्पनी के साथ-साथ अपराध किए जाने के समय उसके कारबार के संचालन के लिए कम्पनी का प्रभारी और उसके प्रति उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति को उस अपराध का दोषी माना जाएगा तथा तद्‌नुसार अपने विरूद्ध कार्रवाई तथा दण्डित किए जाने के लिए दायी होगाः परन्तु इस उप-धारा में दी गई कोई भी बात, ऐसे किसी व्यक्ति को दण्ड का दायी नहीं बनाएगी, यदि वह यह सिद्ध कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या कि उसने ऐसे अपराध को होने से रोकने के लिए हर सम्यक्‌ तत्परता बरती थी। (2) उप-धारा (1) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया जाता है या किया गया है और यह सिद्ध हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेषक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य कर्मचारी की किसी सहमति या मौन स्वीकृति से किया गया है या के भाग पर किसी उपेक्षा के कारण हुआ है, तो ऐसे निदेषक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य कर्मचारी को उस अपराध का दोषी माना जाएगा और तद्‌नुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही और दण्डित किए जाने का दायी होगा। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(क) "कम्पनी" से अभिप्राय है, कोई निगमित निकाय तथा इसमें कोई फर्म या अन्य

व्यष्टि संगम शामिल हैं; तथा

(ख) किसी फर्म के सम्बन्ध में "निदेषक" से अभिप्राय है, फर्म में कोई भागीदार।207 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 12, 2025 (AGHN. 21, 1947 SAKA) सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। 13. सद्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आषयित किसी बात के लिए सरकार, इसके किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी, प्रषासक या इस अधिनियम या इसके अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं हो सकेगी।

अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना। 14. इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से भिन्न किसी अन्य विधि के फलस्वरूप प्रभावी किसी लिखत में या किसी न्यायालय की डिक्री या आदेष में दी गई अन्‌असंगत किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम या इसके अधीन की गई किसी अधिसूचना, आदेष या बनाए गए नियमों के उपबन्ध प्रभावी होंगे।

नियम बनाने की शक्ति। 15. (1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

कठिनाइयां दूर करने की शक्ति। 16. (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाषित आदेष द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों से अन्‌असंगत ऐसे उपबन्ध कर सकती है, जो इसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवष्यक या समीचीन प्रतीत होंः परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भ की तिथि से दो वर्ष की समाप्ति के बाद, इस धारा के अधीन कोई भी आदेष नहीं किया जाएगा। (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके किए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

12270—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 12 December 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2025-12-12.Extra-Ordinary_Leg-No-29-2025/. Archive identifier in.gazette.haryana.2025-12-12.Extra-Ordinary_Leg-No-29-2025.