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Haryana Gazette · Government of Haryana

THE HARYANA ABADI DEH (VESTING[ RECRODING AND RESOLVING OF OWNERSHIP RIGHTS) ORDINANCE, 2025 (HARYANA ORDINANCE NO. 6 OF 2025).

Published 16 December 2025

Department
Law and Legislative
Type
Extra-Ordinary
Gazette no.
208-2025/Ext
Notification no.
Leg. No.30/2025
Identifier
in.gazette.haryana.2025-12-16.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2025
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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Haryana Government Gazette

EXTRAORDINARY

Published by Authority

© Govt. of Haryana

No. 208-2025/Ext.] चण्डीगढ़, मंगलवार, दिनांक 16 दिसम्बर, 2025

(25 मार्गषीर्ष, 1947 शक)

विधायी परिषिष्ट

क्रमांक विषय वस्तु

पृृष्ठ भाग-I अधिनियम

कुछ नहीं

भाग-II अध्यादेष

हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितीकरण, अभिलेखन और समाधान) 103—118 अध्यादेष, 2025 (2025 का हरियाणा अध्यादेष संख्या 6)।

(केवल हिन्दी में)।

भाग-III प्रत्यायोजित विधान

1. अधिसूचना संख्या का० आ० 85/ह०अ० 25/2008/धा० 92/2025, दिनांक 16 दिसम्बर, 2025- 3135—3136 पंजाब पुलिस (हरियाणा संषोधन) नियम, 2025 ।

2. अधिसूचना संख्या का० आ० 86/पं० अ० 18/1961/धा० 15/2025, दिनांक 16 दिसम्बर, 2025- 3137—3142 पंजाब ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) हरियाणा संशोधन नियम, 2025 ।

भाग-IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन

कुछ नहीं

(xciv)103 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) भाग-II

हरियाणा सरकार

विधि तथा विधायी विभाग

अधिसूचना

दिनांक 16 दिसम्बर, 2025

संख्या लैज. 30/2025.- दि हरियाणा आबादी देह (वेस्टिंग, रिकॉर्डिंग एण्ड रिजॉल्विंग ऑफ

ऑनरषिप राइट्‌स) ऑर्डिनन्स, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 12 दिसम्बर, 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्‌द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (ग) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-

2025 का हरियाणा अध्यादेष संख्या 6

हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितीकरण, अभिलेखन और समाधान) अध्यादेष, 2025 किसी राजस्व सम्पदा की आबादी देह के क्षेत्र के भीतर अधिभोगी में स्वामित्व अधिकारों के निहितीकरण, अभिलेखन और समाधान तथा उससे सम्बन्धित या उसके आनुंषगिक मामलों के लिए उपबन्ध करने हेतु अध्यादेष

चूँकि, भूमि में मालिकाना और साम्पत्तिक दोनों अधिकार, भूमि जोत के बंदोबस्त के नाम से ज्ञात प्रक्रिया के माध्यम से स्पष्ट किए गए थे, जो पंजाब बंदोबस्त मैनुअल में अंगीभूत हैं और अंततः हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) की अधिनियमिति से अंगीभूत हैं। निजी कृषि भूमि के अधिकारों का अभिलेख, भूमि पर किसी व्यक्ति के स्थायी कब्जे में अधिकार को मान्यता देकर तैयार किया गया, जिससे भूमि पर साम्पत्तिक अधिकार का सृजन हुआ या दूसरे षब्दों में स्वामित्व कहा गया, इसके अलावा "षामलात देह" के नाम से ज्ञात साझा उपयोग के लिए षामलात भूमि को अलग रखा गया, जिसके मालिकाना और साम्पत्तिक अधिकार भी "षरत-वाजिब-उल-अर्ज" नाम से ज्ञात ग्राम प्रषासन पत्र के अध्यधीन, स्वामियों में निहित थे;

चूँकि, राजस्व सम्पदा में कृषि भूमि को खेवट, खतौनी और खसरा संख्याओं में सीमांकित किया गया था और उसे भू-राजस्व के निर्धारण हेतु संषोधित किया गया था। तथापि, गांव का आबादी क्षेत्र, साथ ही उससे जुड़े छोटे भूखण्डों, जिनमें मवेषी रखे जाते थे, गोबर का भण्डारण किया जाता था, भूसा रखा जाता था और गाँव की भूमि के साथ लगती अन्य बंजर भूमि को एक ही संख्या में नापा गया था और "आबादी देह" के नाम से ज्ञात ऐसे क्षेत्र को एक ही खेवट, खतौनी और खसरा संख्या आबंटित की गई थी। उक्त क्षेत्र का भू-राजस्व के लिए निर्धारण नहीं किया गया था;

चूँकि, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) को शामलात देह और आबादी देह में अधिकारों को विनियमित करने वाली विधि को समेकित और संषोधित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। उक्त अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) में यथा अंगीभूत निहितीकरण उपबन्ध के माध्यम से उस भूमि में, किसी गांव की आबादी देह के बाहर या भीतर स्थित भूमि और जो किसी गैर-स्वामी के स्वामित्व वाले घर के अधीन थी, में सभी अधिकार, हक और हित, जो भी हो, शामलात विधि के प्रारंभ पर, ऐसे गैर-स्वामी में निहित माने जाते थे;

चूँकि, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) के अधीन उपबन्धित निहितीकरण के बावजूद, आबादी देह में स्वामित्व का सामान्य नियम बना रहा और जिसका पालन आज भी किया जाता है, वह यह है कि स्वामित्व, कब्जे के बाद आता है, तथापि आबादी देह की भूमि पर इस तरह के स्वामित्व की न तो कोई अभिस्वीकृति दी गई है और न ही कोई वैध समरूप कानूनी दस्तावेज तैयार किया गया है, जो किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से अधिभोग की गई आबादी देह की भूमि के स्वामी के रूप में विधिमान्य करे और मान्यता प्रदान करे। जिसके परिणामस्वरूप, आबादी देह के परिवारों को उनके द्वारा स्थायी रूप से अधिभोग की गई भूमि पर मान्यताप्राप्त स्वामित्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया है;

104 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

चूँकि, हरियाणा राज्य में आबादी देह क्षेत्र स्वत्वधारियों के अधिकारों का अभिलेखन करने, अभिलेख तैयार करने या सर्वेक्षण द्वारा सीमाओं का चिह्‌नांकन नहीं किया गया है। अधिकारधारक, अपने जीवनकाल में भूमि/सम्पाि के उपयोग और अधिभोग का आन्नद लेते हैं और मृत्यु होने पर, कब्जे सहित अधिकार हितबद्ध उत्तराधिकारी (उत्तराधिकारियों) को हस्तांतरित हो जाता है/जाते हैं, तथापि, अभिलिखित अधिकारों के अभाव में अधिकारों, जैसे स्वामित्व, पट्‌टा, वसीयत, बंधक इत्यादि के हस्तांतरण में बहुत कठिनाई आती है। जिसके परिणामस्वरूप, वर्षों से आवास और अन्य क्षेत्रों में सीमाओं के सीमांकन और अधिकारों की पहचान के बारे में विवाद उत्पन्न हुए हैं; इसके अलावा, अधिकारों के प्रभावी हस्तांतरण में भी कठिनाई हो रही है;

चूंकि, आबादी देह में अधिभोगियाें को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने को ध्यान में रखते हुए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) और राज्य सरकार के बीच 8 मार्च, 2019 को सर्वेक्षण, सर्वेक्षण का अद्यतन करने और बन्दोबस्त लाभ के लिए एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे और उसके बाद दिनांक 24 अपै्रल, 2020 को गांव सिरसी (करनाल) में एक पायलट परियोजना शुरू की गई थी, जिसमें अधिकारों के अभिलेख तैयार करने के प्रयोजनाें हेतु क्षेत्र का नक्षा तैयार करने के लिए सर्वेक्षण किया गया था। तत्पष्चात्‌, ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ नक्षा तैयार करने, जिसे निकट भविष्य में स्वामित्व स्कीम के रूप में जाना जाता है, को ग्रामीण आबाद (आबादी) क्षेत्रों में सम्पत्ति के स्पष्ट स्वामित्व की स्थापना के मामले में एक सुधारात्मक कदम के रूप में शुरू किया था। जिससे ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भू-खण्डों पार्सल का नक्षा तैयार किया गया था और संपत्ति के स्वामी (स्वामियाें) को कानूनी स्वामित्व कार्ड अर्थात्‌ स्वामित्व अधिकार प्रमाण-पत्र/संपत्ति पहचान अधिकार प्रमाण-पत्र/ प्रमाण-पत्र/हक/स्वामित्व विलेख जारी करने के साथ गांव के घरेलू स्वामियों को 'अधिकारों का अभिलेख' प्रदान किया गया। उक्त स्कीम के अधीन आबादी देह क्षेत्र के भीतर भूमि का सीमांकन करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण द्वारा हरियाणा राज्य में कई गांवों में व्यापक रूप से ड्रोन द्वारा नक्षा तैयार किया गया और हक विलेख निष्पादित किए गए और व्यक्तियाें को आबादी देह क्षेत्रों में उनके द्वारा अधिभोग की गई भूमि के स्वामियों के रूप में घोषित करते हुए सम्पत्ति कार्ड जारी किए गए;

चूंकि, अधिसूचना संख्या CFMS-824-R-2022/3185, दिनांक प्रथम अपै्रल, 2022 द्वारा हरियाणा भूमि अभिलेख मैनुअल में 'The Record of Rights-Abadi Deh' शीर्षक वाला एक नया अध्याय 7क जोड़ते हुए, संषोधन किया गया था, ताकि अधिकाराें के अभिलेखाें की पहचान करने और तैयार करने की प्रक्रिया विहित की जा सके और सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने के हकदार व्यक्ति सुनिष्चित करने की प्रक्रिया द्वारा आबादी देह के भीतर अधिभोगियों के मौजूदा अधिकारों का समाधान किया जा सके;

चूंकि, हरियाणा राज्य में आबादी देह क्षेत्रों में अधिकारों का अभिलेख तैयार करने के लिए कार्यान्वित की गई और भविष्य में कार्यान्वित किए जाने के लिए चाही गई सम्पूर्ण प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता प्रदान करने के लिए समीचीन समझा गया। इसलिए इस अध्यादेष का उद्‌देष्य स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने के लिए हकदार श्रेष्ठ व्यक्ति का पता लगाने की प्रक्रिया से आबादी देह के भीतर अधिभोगियों के मौजूदा अधिकारों को सुनिष्चित करना, दर्ज करना और निपटान करना तथा ऐसे व्यक्तियों में स्वामित्व अधिकार निहित करना; इसके अतिरिक्त प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई की सीमाओं और क्षेत्र का परिसीमन, अवरेखन और इस प्रकार तैयार किए गए अभिलेखों में यद्यपि खण्डनयोग्य हो, सत्य की परिकल्पना सृजित करना;

चूंकि, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) में ऐसे निहितीकरण के समरूप अभिलेख तैयार करने में कमी और पष्चात्‌वर्ती परिर्वतनों के कारण स्वत्वधारियों और अस्वत्वधारियों को आबादी देह क्षेत्र के भीतर उस पर निर्मित मकान वाली भूमि का निहितीकरण प्रदान करने के बावजूद स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने के हकदार श्रेष्ठ व्यक्ति का पता लगाने के लिए अंतिम तिथि प्रदान करना आवष्यक समझा गया, जिसे भारतीय सर्वेक्षण और राज्य सरकार के बीच 08 मार्च, 2019 को एक सहमति पत्र के माध्यम से हस्ताक्षर किए गए और आगे स्वामित्व स्कीम के माध्यम से शुरू किया गया था और क्याेंकि भारतीय सर्वेक्षण और राज्य सरकार के बीच 08, मार्च 2019 को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे, अतः इस अध्यादेष के प्रयोजनों के लिए उक्त तिथि को नियत अंतिम तिथि के रूप में माना जा रहा है;

और चूंकि इस अभिलेख के तैयार होने से आबादी देह का विकास होगा, जिससे गांव की विरासत को यथा संभव संरक्षित रखा जा सके, गांव में नागरिक सेवाएं और पर्यावरण उपलब्ध करवाया जा सके और उन्हें नियोजित शहरी विकास के साथ एकीकृत किया जा सके, सामुदायिक विकास के लिए उपकर लगाया जा सके, भूमि के ले आउट में सुधार करके भूमि का मूल्य बढ़ाया जा सके और इसके अतिरिक्त, वित्तीय सहायता प्राप्त करके संपत्ति का मुद्रीकरण करने में अधिभोगियों को सुविधा प्रदान की जा सके।105 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।

चूंकि हरियाणा राज्य विधानमण्डल का सत्र नहीं हो रहा है तथा राज्यपाल की सन्तुष्टि हो गई है

कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं, जिनके कारण तुरन्त कार्रवाई करना उनके लिए आवष्यक हो गया है;

इसलिए, अब, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग

करते हुए, हरियाणा के राज्यपाल, इसके द्वारा, निम्नलिखित अध्यादेष प्रख्यापित करते हैंः-

संक्षिप्त नाम, विस्तार, लागूकरण तथा प्रारम्भ।

परिभाषाएं। 1. (1) यह अध्यादेष हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहितीकरण, अभिलेखन और समाधान) अध्यादेष, 2025 कहा जा सकता है। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में होगा। (3) यह नगरपालिका सीमाओं से बाहर पड़ने वाले आबादी देह क्षेत्रों पर लागू होगाः परन्तु अधिकारों के अभिलेखन की प्रक्रिया इस अध्यादेष के अधीन प्रारम्भ हो गई है या नियत दिन को स्वामित्व स्कीम के अधीन प्रारम्भ की गई थी, तो उसे इस अध्यादेष के अधीन संपन्न मानी जाएगी या संपन्न हुई मानी जाएगी, भले ही ऐसे समापन से पूर्व, वह क्षेत्र नगरपालिका सीमा के भीतर आता हो। (4) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा। 2. (1) इस अध्यादेष में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "आबादी देह" से अभिप्राय है, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) के अधीन तैयार और अनुरक्षित किए गए अधिकार अभिलेख में ऐसे रूप में अभिलिखित स्थल, जिसका भू-राजस्व के रूप में मूल्यांकन नहीं किया गया है;

(ख) इस अध्यादेष के प्रयोजनों हेतु "नियत दिन", 8 मार्च, 2019 होगा अर्थात्‌ वह दिन जिसको भारतीय सर्वेक्षण तथा राज्य सरकार के बीच सहमति पत्र हस्ताक्षरित किया गया था;

(ग) "सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी" से अभिप्राय है तथा इसमें षामिल है, सहायक

कलक्टर प्रथम श्रेणी के —त्यों का पालन करने हेतु हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) के अधीन यथा अधिसूचित कोई अधिकारी;

(घ) "सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी" से अभिप्राय है तथा इसमें षामिल है, सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी के —त्यों का पालन करने हेतु हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम) के अधीन यथा अधिसूचित कोई अधिकारी;

(ङ) "कलक्टर" से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल है, कलक्टर के —त्यों का पालन करने हेतु हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम) के अधीन यथा अधिसूचित कोई अधिकारी;

(च) "आयुक्त" से अभिप्राय है, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब

अधिनियम XVII) के अधीन ऐसे रूप में अधिसूचित मण्डल आयुक्त;

(छ) "षामलात क्षेत्र" से अभिप्राय है, ऐसा क्षेत्र किन्तु आबादी देह के भीतर किसी ऐसे क्षेत्र या भवन तक सीमित नहीं है, जो समुदाय की किसी साझी आवश्यकता, सुविधा या लाभ के लिए उपयोग किया जाता है और इसमें सड़कें, रास्ते, गलियां, सार्वजनिक पार्क, नालियां, सार्वजनिक शौचालय, तालाब, टैंक, कुएं, जलमार्ग, खेल के मैदान, बस स्टैंड या प्रतीक्षा स्थल, सार्वजनिक बैठकों और समारोहों के लिए या निवासियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले किन्हीं अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाने वाले स्थान और आबादी देह में कोई खाली स्थल या भू-खण्ड भी शामिल हैं, जो शामलात विधियों के अधीन ग्राम पंचायत में निहित हैं किन्तु इसमें ऐसा कोई भवन या क्षेत्र शामिल नहीं है, जो केन्द्रीय या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन किसी प्रतिष्ठान/कार्यालय/संस्था के सदन हैं;

(ज) "प्रांगण" से अभिप्राय है, आवास और आवासीय क्षेत्रों के भीतर और आसपास खुले स्थान, जिन्हेें या तो चारदीवारी, कांटेदार तार की बाड़ से या किसी अन्य साधन से घेरा जा सकता है;

(झ) "वित्तायुक्त" से अभिप्राय है, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) के अधीन —त्यों का पालन करने के लिए ऐसे रूप में अधिसूचित वित्तायुक्त, राजस्व;

106 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

() "सरकार" से अभिप्राय है, प्रषासकीय विभाग में हरियाणा राज्य की सरकार; (ट) "अधिभोगी" से अभिप्राय है, ऐसे व्यक्ति (व्यक्तियों), जो अपने प्रांगण, दुकानों और प्रतिष्ठानों के साथ आवास और आवासीय क्षेत्रों सहित निर्मित संरचना का स्थायी कब्जाधारी है, उसके पास स्वामी के समरूप अधिकार हैं, और वह किरायेदार, पट्टेदार, बंधक, समनुदेशिती या ऐसे अन्य कब्जे में नहीं हैं, जो अस्थायी प्र—ति के हैं ; (ठ) "स्वामी" से अभिप्राय है, ऐसा अधिभोगी, जिसका नाम इस अध्यादेष के अधीन तैयार

किए गए अधिकारों के अंतिम अभिलेख में दर्ज है;

(ड) "स्वामित्व अधिकार" से अभिप्राय है, किसी व्यक्ति, पंचायत, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार, न्यायिक व्यक्ति या किसी अन्य संस्था के नाम पर अभिलिखित स्वामित्व अधिकार किन्तु इसमें किरायेदार, पट्टेदार, बंधक के अधिकार या कोई अन्य अधिकार शामिल नहीं हैं, जो स्वामित्व प्रदान नहीं करते;

(ढ) "पंचायत" से अभिप्राय है, हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 11)

के अधीन गठित ग्राम पंचायत;

(ण) "विहित" से अभिप्राय है, इस अध्यादेष के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित; (त) "राजस्व अधिकारी" से अभिप्राय है तथा इसमें षामिल है, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) के अधीन यथा अधिसूचित कोई अधिकारी;

(थ) "अनुसूची" से अभिप्राय है, इस अध्यादेष से संलग्न अनुसूची; (द) "राज्य सरकार" से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार; (ध) "सर्वेक्षण अभिकरण" से अभिप्राय है तथा इसमें शामिल है, भारतीय सर्वेक्षण या इस अध्यादेष के अधीन कार्य और कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सरकार द्वारा पदाभिहित कोई अभिकरण;

(न) "सर्वेक्षण अधिकारी" से अभिप्राय है, इस अध्यादेष के अधीन कार्यों और कृत्यों का

निवर्हन करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी;

(प) "सर्वेक्षण संख्या" से अभिप्राय है, विहित रीति में प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई को दी गई

विषिष्ट संख्या;

(फ) "सर्वेक्षण इकाई" से अभिप्राय है, आबादी देह के भीतर का क्षेत्र, जिसे इस अध्यादेष

के अधीन सर्वेक्षण संख्या दी गई है;

(ब) "स्वामित्व स्कीम" से अभिप्राय है, ग्रामीण आवास आबादी क्षेत्र में सम्पत्ति के स्पष्ट स्वामित्व की स्थापना के लिए ग्राम आबादी का सर्वेक्षण करना और ग्रामीण क्षेत्र स्कीम में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ नक्षा तैयार करना। (2) इस अध्यादेष में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) में उन्हें दिए गए हैं। अधिभोगी में अधिकार निहित होना।

3. (1) हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) की धारा 4 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) सहित तत्समय लागू किसी अन्य राज्य विधि में दी गई प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, भूमि में सभी अधिकार, हक और हित, जो भी हो, जिसमें स्वामित्व भी शामिल है, जो किसी गांव की आबादी देह के भीतर स्थित है, जिस पर आवास और आवासीय इकाई के रूप में निर्मित संरचना, उसके प्रांगण, खाली भूमि, भू-खण्ड, दुकानें और प्रतिष्ठान मौजूद हैं, नियत दिन को ऐसी भूमि के अधिभोगी में निहित समझे जाएंगेः परन्तु ऐसा निहितीकरण, तथापि अधिकारों के स्थायी अभिलेख तैयार करने के संबंध में इस अध्यादेष के अधीन अधिकथित प्रक्रिया के अध्यधीन होगाः परन्तु यह और कि आबादी देह में ऐसी भूमि, जो हरियाणा ग्राम षामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) की धारा 4 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अनुसार ग्राम पंचायत में निहित थी, ग्राम पंचायत में निहित रहेगी तथा नियत दिन को अधिभोगी में निहित नहीं होगी, उन मामलों के सिवाय, जिनमें कब्जा हरियाणा ग्राम षामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) के उपबंधों के अनुसार अभिस्वीकृत किया गया हो, प्राधि—त किया गया हो या ग्रहण किया गया हो या जिसमें संभाव्यता इस अध्यादेष के उपबंधों के अनुसार भूमि ऐसे अधिभोगी में निहित हो जाएगी।107 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) (2) आबादी देह के भीतर की भूमि, जो खाली पड़ी थी और हरियाणा ग्राम षामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 की धारा 4 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन ग्राम पंचायत में निहित थी, के संबंध में इस अध्यादेष की कोई भी बात, हरियाणा ग्राम षामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) की वैधता और प्रवर्तन को प्रभावित नहीं करेगी।

अधिकारी। 4. (1) निम्नलिखित अधिकारी इस अध्यादेष के अधीन —त्यों का पालन करेंगे और शक्तियों का प्रयोग करेंगे, अर्थात्‌ः-

(क) वित्तायुक्त;

(ख) आयुक्त;

(ग) कलक्टर;

(घ) सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी ;

(ङ) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी; तथा

(च) सर्वेक्षण अधिकारी।

(2) इस अध्यादेष के उपबंधों के अध्यधीन, अधिकारियों को इस अध्यादेष के अधीन अपने —त्यों के निर्वहन के प्रयोजनों के लिए वही षक्तियां होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 5) के अधीन निम्नलिखित मामलों के संबंध में सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्‌ः-

(i) किसी व्यक्ति को समन करना तथा हाजिर करवाना तथा उसका परीक्षण करना;

(ii) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण तथा प्रस्तुतीकरण की अपेक्षा करना;

(iii) शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना;

(iv) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (2023 का केन्द्रीय अधिनियम 47) के सुसंगत उपबन्धों के अध्यधीन, किसी भी कार्यालय से किसी भी सार्वजनिक अभिलेख या दस्तावेज या ऐसे अभिलेख या दस्तावेज की प्रति की मांग करना; तथा

(v) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।

5. (1) इस अध्यादेष के अधीन सभी अधिकारियों के प्रशासनिक कार्यकलापों का अधीक्षण और नियंत्रण वित्तायुक्त में निहित होगा।

अधिकारियों का अधीक्षण और नियंत्रण। (2) वित्तायुक्त के अधीक्षण और नियंत्रण के अध्यधीन, मंडल आयुक्त, अपने मंडल के भीतर सभी अधिकारियों को नियंत्रित करेगा।

(3) यथा पूर्वोक्त और आयुक्त के नियंत्रण के अध्यधीन, कलक्टर अपने जिले के भीतर सभी अधिकारियों को नियंत्रित करेगा।

सर्वेक्षण करना और नक्शा तैयार करना। 6. (1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अध्यादेष के प्रयोजनोें के लिए सर्वेक्षण करवाने हेतु किसी तहसील में आबादी देह क्षेत्र (क्षेत्रों) के लिए एक या एक से अधिक सर्वेक्षण अधिकारी नियुक्त कर सकती है। (2) सरकार, स्वयं या किसी अभिकरण के माध्यम से सर्वेक्षण करवाएगी और नक्षा तैयार करवाएगी या नियत दिन से आबादी देह की सीमाएं अवधारित करने, प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई का क्षेत्र और परिमाप परिनिष्चित करने हेतु ऐसे क्षेत्र की स्वामित्व स्कीम के अधीन किए गए सर्वेक्षण पर विचार कर सकती है और प्रत्येक ऐसी इकाई को एक विषिष्ट सर्वेक्षण संख्या प्रदान कर सकती है। (3) प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई के लिए अनुसूची-1 में यथा उपबन्धित रीति और फार्मेट में 'फील्ड बुक' तैयार की जाएगी, जिसमें सर्वेक्षण इकाई का परिमाप, क्षेत्र, किस्म और उपयोगकर्ता के संबंध में ब्योरे और ऐसे अन्य ब्योरे दिए जाएंगे, जो ऐसी रीति में अभिलिखित किए जाएं, जो विहित की जाए। (4) क्षेत्र की तैयार की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट और नक्षा, सर्वेक्षण इकाइयों में अधिकारों का स्थायी अभिलेख तैयार करने के प्रयोजन के लिए सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी को प्रस्तुत किया जाएगा। (5) फील्ड बुक के साथ उपधारा (2) के अधीन तैयार किया गया नक्षा, अधिकारों के अभिलेख का भाग बनेगा और जहां तक ऐसे व्यक्तियों, जो सर्वेक्षण इकाई में अधिभोगी/किराएदार/ पट्‌टेदार/समनुदेशिती हैं, के हित की प्रकृति और सीमा को दर्शाने वाले विवरण के साथ-साथ अधिकारों के अभिलेखों के संबंध में स्थायित्व की विषेषता होगी।108 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) (6) इस अध्यादेष में दी गई किसी बात के होते हुए भी, इस अध्यादेष के प्रारम्भ होने से पूर्व, सरकार द्वारा, समय-समय पर, जारी किए गए अनुदेशों, निदेशों या आदेशों के अनुसार किसी आबादी देह की सीमा की पहचान करने और आबादी देह के भीतर इकाइयों का सीमांकन करने के लिए केन्द्रीय या राज्य सरकार के किसी अभिकरण द्वारा किया गया सर्वेक्षण और तैयार किया गया नक्षा, इस अध्यादेष के अधीन किया गया सर्वेक्षण/तैयार किया गया नक्षा समझा जाएगा और इस अध्यादेष के अधीन सभी आशयों और प्रयोजनों के लिए वैध और विधिक दस्तावेज माना जाएगा।

प्रवेश करने की शक्ति।

7. सर्वेक्षण अधिकारी या ऐसेे रूप में कार्य करने के लिए सरकार द्वारा प्राधि—त कोई अधिकारी, सीमाओं या सीमा चिह्‌नों का मापन, सीमांकन, नियतन या निरीक्षण के प्रयोजन के लिए या इस अध्यादेष के उपबंधों के अधीन उसके पद के विधिपूर्ण प्रयोग से संबंधित किसी अन्य प्रयोजन के लिए किसी भूमि या परिसर, चाहे वह सरकार का हो या निजी व्यक्तियों का हो, में प्रवेश, जब आवश्यक हो, कर सकता हैः परन्तु मानव आवास के रूप में उपयोग किए जाने वाले किसी परिसर में उसके अधिभोगी की सहमति के सिवाय या अधिभोगी को यथा विहित रीति में कम से कम तीन दिन के नोटिस की तामील किए बिना और इसे प्राप्त करने से मना करने के मामले में, नोटिस की एक प्रति इकाई पर चिपकाए बिना प्रवेश नहीं किया जाएगा : परन्तु यह और कि अधिभोगियों के सामाजिक और धार्मिक पूर्वाग्रहों पर हमेशा उचित ध्यान दिया जाएगा।

अधिकारों का स्थायी अभिलेख।

8. प्रत्येक आबादी देह क्षेत्र के लिए अधिकारों का एक स्थायी अभिलेख होगा, जिसमें निम्नलिखित को दर्शाने वाले विवरण शामिल होंगे, अर्थात्‌ः-

(i) (क) ऐसे व्यक्ति, जो गांव में आबादी देह के भीतर भूमि के स्वामी, किरायेदार, पट्टेदार या समनुदेशिती हैं या जो उस भूमि का किराया, लाभ प्राप्त करने और अधिभोग करने के हकदार हैं;

(ख) उन व्यक्तियों के हितों की प्र—ति और सीमा तथा उनसे जुड़ी शर्तें और देयताएं;

(ग) प्रत्येक उन व्यक्तियों से तथा को और सरकार को देय किराया, दरें, उपकर या अन्य

भुगतान; या

(ii) प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई के स्वामित्व अधिकारों का अभिलेख;

(iii) तैयार की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट और तैयार किया गया नक्षा; या (iv) संपत्ति पहचान अधिकार प्रमाण-पत्र/स्वामित्व अधिकार प्रमाण-पत्र/प्रमाण-पत्र/हक/ स्वामित्व विलेख; या

(v) स्वामी की वंश या वंशावली तालिका; या

(vi) ग्राम समिति की बैठकों की कार्यवाहियों का अभिलेख; या

(vii) ऐसे अन्य दस्तावेज, जो विहित किए जाएं।

9. (1) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, सर्वेक्षण इकाइयों में अधिभोगियों के स्वामित्व अधिकारों की पहचान करने के लिए निम्नलिखित से मिलकर बनने वाली एक ग्राम समिति का गठन करेगा, अर्थात्‌ः- सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा जाँच करना।

(क) पंचायत का सरपंच; (ख) उस गांव का नम्बरदार, जिसके अधिकार का स्थायी अभिलेख तैयार किया जाना है;

(ग) पंचायत की एक महिला पंच, यदि कोई हो या ग्राम सभा द्वारा नामनिर्दिष्ट एक

महिला;

(घ) अनुसूचित जातियों/पिछड़े वर्ग से संबंधित एक पंच;

(ङ) कोई अन्य सदस्य, जिसे सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।

(2) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, आबादी देह, जिसके अधिकारों का स्थायी अभिलेख तैयार किया जाना है, के संबंध में ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई के लिए ऐसे अभिलेख के प्रस्ताव के बारे में क्षेत्र के निवासियों को सूचित करेगा।

अधिकारों के स्थायी अभिलेख प्रारूप तैयार करना।

10. (1) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, ग्राम समिति के साथ विचार-विमर्श और परामर्श करने के बाद, संक्षिप्त रीति, जो विहित की जाए, में नियत दिन को अनुसूची-II के अनुसार अधिकारों के स्थायी अभिलेख में सर्वेक्षण इकाई की सीमाओं के स्वामियों, उनके स्वामित्व अधिकारों की प्रस्तावित प्रविष्टियाँ दर्ज करेगा।109 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) (2) स्वामी और उसके स्वामित्व अधिकारों की प्रविष्टि, सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा निम्नलिखित के नाम पर दर्ज की जाएगी-

(i) उस निर्मित संरचना का अधिभोगी, जिसमें आंगन, खाली भूमि, भू-खण्ड, दुकान

और प्रतिष्ठान सहित आवास और आवासीय क्षेत्र भी शामिल हैंः

परन्तु सह-अधिभोगियों के मामले में, स्वामित्व अधिकार, उनके संबंधित हिस्से में तब तक दर्ज नहीं किए जाएंगे जब तक ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में दर्ज किए जाने वाले हिस्से को अधिभोगी के पक्ष में अभिव्यक्त रूप से त्याग या निर्मुक्त नहीं किया जाता है;

(ii) शामलात क्षेत्र और ऐसी उस भूमि हेतु पंचायत, जो हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) की धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अनुसार ग्राम पंचायत में निहित है, उन मामलों को छोड़कर, जिनमें कब्जा, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 (1961 का पंजाब अधिनियम 18) के उपबंधों के अनुसार अभिस्वीकृत, अधि—त या स्वीकृत किया गया है;

(iii) उस भूमि या संस्थान के संबंध में केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, न्यायिक व्यक्ति

या अन्य संस्था जिसके पास इसका स्वामित्व है :

अभिलेख का प्रदर्शन।

आक्षेप उठाना और उनका विनिश्चय करना।

अधिकारों का अंतिम स्थायी अभिलेख तैयार करना। परन्तु सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, उपरोक्त प्रविष्टि दर्ज करते समय, ऐसे उत्तराधिकार, अंतरण, दान इत्यादि के मद्‌दे हुए किसी परिवर्तन को भी ध्यान में रखेगा, जो नियत दिन और अधिकारों के अभिलेख तैयार करने के बीच हुए हैं। (3) उपधारा (1) और (2) के अधीन अधिकारों के अभिलेख तैयार करते समय, यदि कोई सर्वेक्षण इकाई उपविभाजित पाई जाती है, जो सर्वेक्षण के समय सर्वेक्षण अधिकारी के ध्यान में नहीं आई, तो सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, ऐसी प्रत्येक सर्वेक्षण इकाई को एक विशिष्ट संख्या प्रदान करेगा। 11. अनुसूची II के अनुसार सर्वेक्षण इकाई के सीमांकन, सीमा और क्षेत्र के साथ धारा 6 के अधीन तैयार किए गए सर्वेक्षण नक्षा को आक्षेप आमंत्रित करने के प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाने वाली वेबसाइट पर, गांव में किसी सहजदृष्य स्थान जैसे पंचायत घर, ग्राम सहकारी समिति, पटवार खाना, धर्मशाला, सामुदायिक केन्द्र, ग्राम सचिवालय, नागरिक सेवा केन्द्र या सामान्य धार्मिक स्थलों पर प्रदर्शित किया जाएगा और इसकी एक प्रति ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में ग्राम सरपंच के माध्यम से पंचायत को अग्रेषित की जाएगी। 12. (1) सर्वेक्षण अभिलेख में किसी सीमा के सीमांकन या सर्वेक्षण इकाई में अधिकारों के स्थाई अभिलेख प्रारूप में स्वामित्व अधिकारों के संबंध में किसी प्रविष्टि से व्यथित कोई भी व्यक्ति, धारा 11 में यथा उपबंधित रीति में अभिलेख के प्रदर्शन की तिथि से नब्बे दिन की अवधि के भीतर अनुसूची II के अनुसार सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी के सम्मुख उसमें सुधार करने के संबंध में आक्षेप दायर कर सकता हैः परन्तु सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद भी आक्षेप (आक्षेपों) को ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी सन्तुष्टि हो जाती है कि उस अवधि के भीतर आक्षेप दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था। (2) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, पक्षकारों की सुनवाई करने तथा अभिलेख, यदि कोई हो, का अवलोकन करने के पश्चात्‌, सर्वेक्षण नक्षा में सीमाओं में आवश्यक सुधार करेगा और सर्वेक्षण इकाई के स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने के लिए सर्वोत्तम हकदार अधिभोगी को सुनिष्चित करेगा और इस संबंध में हितबद्ध पक्षकारों के उपस्थित होने की तिथि से नब्बे दिन की अवधि के भीतर कारण अभिलिखित करते हुए आदेश पारित करेगा या उनके विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही करेगा। (3) आदेश पारित करते समय सर्वेक्षण इकाई के क्षेत्र, सीमा या सीमांकन में किए गए किसी सुधार या संशोधन को सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा फील्ड बुक में लाल स्याही से दर्ज करवाया जाएगा। (4) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, इस अध्यादेष के प्रयोजनों के लिए, दस्तावेजीकरण के दौरान तैयार किए गए ऐसे सुसंगत और तात्विक दस्तावेज और लिखितों पर विचार कर सकता है। 13. (1) यदि धारा 10 के अधीन दर्ज की गई किसी प्रविष्टि के लिए धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन उपबंधित अवधि के भीतर कोई आक्षेप दायर नहीं किया जाता है, तो उसे अंतिम माना जाएगा और उसे अनुसूची-IV में उपबंधित फॉर्मेट में अधिकारों के अंतिम अभिलेख में ऐसे रूप में दर्ज किया जाएगा। (2) धारा 12 की उपधारा (1) के अधीन दर्ज किए गए किसी आक्षेप के मामले में, ऐसे निर्णय की तिथि से तीस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌, धारा 12 के अधीन लिए गए निर्णय के अनुसार अधिकारों के अभिलेख में प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।110 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) (3) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा अंतिम रूप दिए गए अधिकारों के स्थायी अभिलेख को अपील, पुनर्विलोकन या पुनरीक्षण, जैसी भी स्थिति हो, के निर्णय के अनुसार संशोधित या उपान्तिरित किया जाएगा। (4) सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, उस अधिभोगी, जिसका नाम ऐसे प्ररूप, जो विहित किया जाए, में अधिकारों के अंतिम अभिलेख में दर्ज है, को स्वामित्व अधिकार प्रमाण-पत्र/संपत्ति पहचान अधिकार प्रमाण-पत्र/प्रमाण-पत्र /हक/स्वामित्व विलेख जारी करेगा, जब तक उसका खंडन न किया जाए। (5) इस अध्यादेष में दी गई किसी बात के होते हुए भी, सरकार या राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग के निर्देशों के अधीन कार्यरत किसी प्राधिकारी द्वारा नियत दिन को जारी किए गए प्रमाण-पत्र को इस अध्यादेष के अधीन जारी किया गया माना जाएगा। (6) यथा अभिलिखित प्रविष्टि से व्यथित किसी भी व्यक्ति को इस अध्यादेष के अधीन उपबंधित किसी अपील, पुनर्विलोकन और पुनरीक्षण, जैसी भी स्थिति हो, के उपबंधों को लागू करवाने का अधिकार होगा और ऐसे मामलों के लिए परिसीमा अवधि, इस अध्यादेष के राजपत्र में प्रकाषन की तिथि से प्रारम्भ होगी।

अपील। 14. (1) धारा 12 के अधीन सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश के पारित होने की तिथि से तीस दिन के भीतर, सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी के सम्मुख अपील दायर कर सकता हैः परन्तु सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी, ऐसी अवधि की समाप्ति के पष्चात्‌ भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि उस अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था। (2) सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी, हितबद्ध और प्रभावित होने वाले संभावित पक्षकारों की सुनवाई करने के बाद या तो अपील स्वीकार कर लेगा या तर्कपूर्ण आदेश पारित करके उसे खारिज कर देगा। (3) उपधारा (2) के अधीन सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश के पारित होने के तीस दिन के भीतर, आगे कलक्टर को अपील दायर कर सकता है, जो हितबद्ध और प्रभावित होने वाले संभावित पक्षकारों की सुनवाई करने के बाद या तो अपील स्वीकार कर लेगा या तर्कपूर्ण आदेश पारित करके उसे खारिज कर देगा। (4) उपधारा (2) और (3) के अधीन दायर की गई अपीलों का निर्णय, सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी और कलक्टर, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा प्रतिवादियों के उपस्थिति होने की तिथि से साठ दिन के भीतर किया जाएगा या उनके विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी जब तक लिखित में कारण दर्ज न किए जाएं या अन्यथा से निदेश न दिया जाए। (5) अपील प्राधिकारी द्वारा किसी मामले का प्रतिप्रेषण नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि अभिलेख से यह सिद्ध न हो जाए कि किसी आवश्यक पक्षकार के विरुद्ध प्रतिकूल आदेश पारित किया गया है, जिसको विधिवत्‌ तामील नहीं हुई।

पुनर्विलोकन। 15. सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी और कलक्टर, उस आदेश, जिसका पुनर्विलोकन किया जाना है, के साठ दिन के भीतर या तो स्व-प्रेरणा से या किसी हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर, प्रभावित होने वाले संभावित पक्षकार को नोटिस देने और युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देने के बाद, पुनर्विलोकन कर सकता है और ऐसे पुनर्विलोकन पर उसके द्वारा पारित किसी आदेष को संशोधित, उलट या पुष्ट कर सकता हैः परन्तु-

(i) जब सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी किसी आदेश का पुनर्विलोकन करना आवश्यक

समझता है, तो वह प्रथमतः सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी की स्वीकृति प्राप्त करेगा;

(ii) जब सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी किसी आदेश का पुनर्विलोकन करना आवश्यक

समझता है, तो वह प्रथमतः कलक्टर की स्वीकृति प्राप्त करेगा;

(iii) जब कलक्टर किसी आदेश का पुनर्विलोकन करना आवश्यक समझता है, तो वह

प्रथमतः आयुक्त की स्वीकृति प्राप्त करेगा;

(iv) जब सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी या सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी द्वारा किसी ऐसे आदेश को पुनर्विलोकन में उपांतरित किया जाता है या उलटा जाता है, तो सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी के आदेश के विरुद्ध सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी को और सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी के आदेश के विरूद्ध कलक्टर को अपील की जा सकती है और ऐसी अपील पर आदेश अंतिम होगा;

111 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

(v) उस आदेश, जिसके विरुद्ध कोई अपील या पुनरीक्षण किया गया है, उसका

पुनर्विलोकन नहीं किया जाएगा; तथा

(vi) किसी पूर्व आदेश का पुनर्विलोकन करने से इनकार करने या अनुमति देने या पुनर्विलोकन पर उसकी पुष्टि करने वाले आदेश के विरुद्ध अपील नहीं की जाएगी।

आयुक्त द्वारा पुनरीक्षण। 16. आयुक्त, किसी आदेश के पारित होने के साठ दिन के भीतर, किसी व्यथित पक्षकार के आवेदन पर, या स्वप्रेरणा से, ऐसे आदेश या कार्यवाही की वैधता या औचित्य के सम्बन्ध में स्वयं की सन्तुष्टि करने के प्रयोजनार्थ इस अध्यादेष के अधीन पारित किसी आदेश या की गई कार्यवाही से संबंधित अभिलेखों को मांग सकता है और उनकी जांच कर सकता है और प्रभावित पक्षकारों की सुनवाई करने के बाद, उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जो वह उचित समझे अथवा इस अध्यादेष के अधीन पारित किसी आदेश को उपांतरित या उलट या पुष्ट कर सकता है।

जिला कलक्टर को अभिलेख का अन्तरण। 17. (1) आबादी देह क्षेत्र के अधिकारों के स्थायी अभिलेखों को तैयार करने और अंतिम रूप देने के बाद, सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी उसे सत्यापित करेगा और संबंधित जिला कलक्टर को अन्तरित करेगा, जो जिला कार्यालय को सौंप दिया जाएगा। (2) यथा तैयार किए गए अधिकारों के स्थायी अभिलेख का एक सेट, संबंधित पटवारी के पास अनुरक्षित रखा जाएगा। उसके बाद नामान्तरण, अनुसूची-V के अनुसार अधिकारों के स्थाई आदेष के आधार पर दर्ज किया जाएगा।

18. इस अध्यादेष की धारा 17 के अधीन अभिलेख के अन्तरण के बाद, हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 (1887 का पंजाब अधिनियम XVII) के अध्याय IV के उपबंध, ऐसे अभिलेख को यथा आवश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे।

1887 के पंजाब अधिनियम XVII के अध्याय IV का लागू होना।

सर्वेक्षण इकाई का सर्वसम्मति से विभाजन। 19. यदि जहां सभी सह-स्वामियों की आबादी देह के भीतर स्थित सर्वेक्षण इकाइयों के विभाजन के बारे में सर्वसम्मति हो गई है, तो सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी आदेष पारित करते हुए अधिकारों के अभिलेख को अंतिम रूप देगाः परन्तु सर्वेक्षण इकाई के सह-स्वामियों और अन्य व्यक्तियों का परीक्षण करने के बाद, यदि सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी की राय है कि सर्वेक्षण इकाई अविभाज्य है या विभाजन अव्यावहारिक है, और विभाजन को अस्वीकार करने के लिए उचित और पर्याप्त कारण हैं, तो वह अपने इनकार के आधारों को लिपिबद्ध करके सकारण आदेष पारित करते हुए सर्वेक्षण इकाई का विभाजन करने से इनकार कर सकता है।

विभाजन के संबंध में विवाद। 20. किसी विवाद के मामले में, किसी सर्वेक्षण इकाई के विभाजन के लिए आवेदन, ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा। सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी, सर्वेक्षण इकाई के अधिकारों के अन्तिम अभिलेख में यथा उल्लिखित सभी सह-स्वामियों को नोटिस जारी करेगा और ऐसी रीति में और ऐसी अवधि, जो विहित की जाए, के भीतर न्यायनिर्णयन करने हेतु कार्यवाही करेगा।

विभाजन के मामले में अपील। 21. (1) धारा 20 के अधीन सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश के पारित होने की तिथि से तीस दिन के भीतर, सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी के सम्मुख अपील दायर कर सकता हैः परन्तु सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी, ऐसी अवधि की समाप्ति के पष्चात्‌ भी अपील ग्रहण कर सकता है, यदि उसकी संतुष्टि हो जाती है कि उस अवधि के भीतर अपील दायर नहीं करने का पर्याप्त कारण था। (2) सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी, हितबद्ध और प्रभावित होने वाले संभावित पक्षकारों की सुनवाई करने के बाद या तो अपील स्वीकार कर लेगा या तर्कपूर्ण आदेश पारित करके उसे खारिज कर देगा। (3) उपधारा (2) के अधीन सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश के पारित होने के तीस दिन के भीतर, आगे कलक्टर को अपील कर सकता है, जो हितबद्ध और प्रभावित होने वाले संभावित पक्षकारों की सुनवाई करने के बाद या तो अपील स्वीकार कर लेगा या तर्कपूर्ण आदेश पारित करके उसे खारिज कर देगा। (4) उपधारा (2) और (3) के अधीन दायर अपीलों का निर्णय, सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी और कलक्टर, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा प्रतिवादियों के उपस्थिति होने की तिथि से साठ दिन के भीतर किया जाएगा या उनके विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी, जब तक लिखित में कारण दर्ज न किए जाएं या अन्यथा से निदेश न दिया जाए।112 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) (5) अपील प्राधिकारी द्वारा किसी मामले का प्रतिप्रेषण नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि अभिलेख से यह सिद्ध न हो जाए कि किसी आवश्यक पक्षकार के विरुद्ध प्रतिकूल आदेश पारित किया गया है, जिसको विधिवत्‌ तामील नहीं हुई।

समन। 22. (1) इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त किसी अधिकारी द्वारा जारी किए गए समन की तामील निम्नलिखित अनुसार की जाएगी-

(i) उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप मेें, जिसे यह संबोधित है; या

(ii) उसके मान्यताप्राप्त अभिकर्ता; या (iii) सामान्यतः उसके साथ निवास करने वाले उसके परिवार के किसी वयस्क सदस्य। (2) समन की तामील ,उस व्यक्ति, जिसे वह संबोधित है, के व्यावहारिक या अंतिम ज्ञात निवास स्थान पर उसकी एक प्रति चिपकाकर की जा सकती है।

(3) यदि इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त कोई अधिकारी ऐसा निदेश देता है, तो समन की तामील उसमें नामित व्यक्ति को या तो तामील के किसी अन्य ढंग के अतिरिक्त, या उसके स्थान पर उस व्यक्ति को संबोधित और भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का केन्द्रीय अधिनियम VI) के अध्याय VI के अधीन पंजीकृत पत्र से डाक द्वारा समन भेजकर या इस निमित्त सरकार द्वारा अधिसूचित किसी प्रतिष्ठित कूरियर अभिकरण के माध्यम से भेजकर की जा सकती है।

(4) जब कोई समन, पत्र के रूप में इस प्रकार अग्रेषित किया जाता है, और यह साबित हो जाता है कि पत्र उचित रूप से संबोधित था और सम्यक्‌ रूप से डाक द्वारा भेजा गया था और पंजी—त किया गया था, तो इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त अधिकारी यह मान सकता है कि समन की तामील उस समय की गई थी, जब उसके वितरण की रसीद दी गई हैः

परन्तु पंजी—त डाक के माध्यम से भेजे गए पत्र के मामले में, यदि वह तीस दिन की ऐसी अवधि के भीतर बिना वितरित हुए वापस प्राप्त नहीं होता है, तो उपरोक्त अवधि के दौरान उसका वितरण हुआ मान लिया जाएगा।

(5) समन की तामील क्षेत्र में व्यापक प्रसार वाले दैनिक हिन्दी समाचार पत्र में नामित व्यक्ति की विषय-वस्तु का प्रकाषन करवाते हुए की जा सकती हैः परन्तु यदि समन किसी ऐसे मामले से संबंधित है, जिसमें समरूप हित रखने वाले व्यक्ति इतने अधिक हैं कि उन सभी पर व्यक्तिगत तामील करना युक्तियुक्त रूप से साध्य नहीं है, तो प्रथम दृष्टांत में और यदि इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त अधिकारी इस प्रकार निर्देष देता है, तो उसकी तामील उन व्यक्तियों में से ऐसे किसी व्यक्ति, जो इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त अधिकारी द्वारा इस निमित्त नामित किया जाए, को उसकी एक प्रति का वितरण करते हुए और अन्य हितबद्ध व्यक्तियों की सूचना के लिए क्षेत्र में व्यापक प्रसार वाले किसी दैनिक हिन्दी समाचार पत्र में उसकी विषय-वस्तु का प्रकाषन करवाते हुए की जा सकती है।

(6) समन की तामील लघु संदेश सेवा, ई-मेल या फोन नंबर पर किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक ढंग के माध्यम से या अन्यथा से ज्ञात या इस अध्यादेष के अधीन नियुक्त अधिकारी को बताए गए ई-मेल पते पर भी की जा सकती हैः

परन्तु यदि तामील उपरोक्त किसी भी ढंग के माध्यम से की जाती है, तो समन के वितरण का प्रिंटआउट रिकार्ड में रखा जाएगा।

(7) इस अध्यादेष के अधीन किसी अधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को तामील करने के लिए जारी किया गया नोटिस, उद्‌घोषणा का आदेश या ऐसे किसी दस्तावेज की प्रति की तामील, समन की तामील के लिए इस धारा में यथा उपबंधित समरूप रीति में की जाएगी।

(8) उपरोक्त उप-धाराओं में निर्दिष्ट किसी ढंग के माध्यम से समनों की तामील के मामले में, समनों के वितरण का प्रिंटआउट रिकार्ड में रखा जाएगा, जो समनों की तामील का प्रमाणिक सबूत होगा। 23. इस अध्यादेष के उपबंधों के अनुसार अधिकारों के स्थायी अभिलेख में की गई कोई प्रविष्टि तब तक सत्य मानी जाएगी जब तक इसेे प्रतिकूल सिद्ध नहीं कर दिया जाता या उसके स्थान पर कोई नई प्रविष्टि विधिपूर्वक प्रतिस्थापित नहीं कर दी जाती।

अधिकारों के स्थायी अभिलेख में प्रविष्टियों के पक्ष में उपधारणा।

अधिकारिता का वर्जन।

24. किसी भी सिविल न्यायालय को इस अध्यादेष के अधीन आने वाले मामलों से संबंधित किसी भी प्रश्न को ग्रहण करने या का निर्णय करने की अधिकारिता नहीं होगी।113 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA) लेखन त्रुटियों में सुधार करना। 25. इस अध्यादेष के अधीन किसी अधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश में लेखन या गणितीय त्रुटियों मेें सुधार संबंधित प्राधिकारी द्वारा किसी भी समय या तो स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार के आवेदन पर किया जा सकता है और ऐसे सुधार की सूचना पक्षकारों को निःषुल्क दी जाएगी और इसके कार्यान्वयन के लिए संबंधित अधिकारी को भी दी जाएगी।

सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण। 26. इस अध्यादेष या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम के उपबंधों के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आषयित किसी बात के लिए इस अध्यादेष के अधीन किसी अधिकारी या ऐसे अधिकारी के निर्देशाधीन कार्य करने वाले किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं हो सकेगी।

कठिनाइयां दूर करने की शक्ति। 27. (1) यदि इस अध्यादेष के उपबंधों को प्रभावी रूप देने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अध्यादेष के उपबंधों से अनुअसंगत ऐसे उपबंध कर सकती है, जो इसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हाेंः परन्तु ऐसा कोई भी आदेश, इस अध्यादेष के प्रारम्भ की तिथि से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा। (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, इसके किए जाने के बाद, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

परिसरों में प्रवेष करने की शक्ति। 28. इस अध्यादेष के अधीन अधिकारी, अपने शासकीय कर्त्तव्य का निर्वहन करने में, इस अध्यादेष के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में भूमि पर प्रवेश कर सकता है और उसका सर्वेक्षण कर सकता है, उस पर सर्वेक्षण चिह्‌न लगा सकता है और निर्मित कर सकता है और उसकी सीमाओं का सीमांकन कर सकता है और ऐसे सभी आवश्यक कार्य कर सकता है।

जुर्माना और पुरस्कार। 29. (1) यदि कोई व्यक्ति विधिपूर्ण निर्मित या लगाए गए सर्वेक्षण या सीमांकन चिह्‌न को जानबूझकर नष्ट करता है, खंडित करता है या विधिक प्राधिकार के बिना हटाता है, तो सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी इस प्रकार नष्ट, खंडित या हटाए गए प्रत्येक चिह्‌न के लिए एक हजार रूपए से अनधिक का जुर्माना लगाएगा, जो ऐसे अधिकारी की राय में, उसे पुनः स्थापित करने के खर्च को वहन करने और उस व्यक्ति, जिसने नष्ट, खंडित करने या हटाए जाने की सूचना दी थी, यदि कोई हो, को पुरस्—त करने के लिए आवश्यक हो। (2) उपधारा (1) के अधीन उद्‌गृहीत जुर्माने की राषि, यदि यथा विहित रीति में भुगतान नहीं की जाती है, तो भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूली योग्य होगी।

नियम बनाने की शक्ति। 30. (1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अध्यादेष के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है। (2) इस अध्यादेष के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।

व्यावृत्ति। 31. इस अध्यादेष के प्रयोजनों के सम्बन्ध में स्वामित्व योजना, हरियाणा भू-अभिलेख मैनुअल के अध्याय 7क तथा सरकार द्वारा, समय-समय पर, जारी किए गए आदेशों के अधीन नियत दिन से सरकार द्वारा की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अध्यादेष के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी।114 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

अनुसूची-I

{देखिए धारा 6(3)}

अधिकारों के अभिलेख- आबादी देह (लाल डोरा)

(फील्ड बुक)

राजस्व संपदा ..........., हदबस्त संख्या ......., (आबादी देह), तहसील ..........., जिला .......

1 2 3 4 5 6 7
क्रम संख्या परिक्षेत्र का नाम, जो भी पहचान योग्य हो सर्वेक्षण इकाई संख्या मीटर/ सेंटीमीटर/गज/फुट तथा इंच में परिमाप सीमाएंः पूर्वः पष्चिमः उत्तरः दक्षिणः वर्ग मीटर तथा वर्ग गज में कुल क्षेत्र सम्पत्ति की किस्म लाल स्याही से अभिलिखित की जाने वाली अपील, पुनरीक्षण इत्यादि में खाना 2 से 6 में की गई कोई टिप्पणी/सुधार और संषोधन, यदि कोई हो

क्षेत्रीय कानूनगो पटवारी

किस्म- क्या मकान, दुकान, संस्थान, सामुदायिक क्षेत्र, पथ इत्यादि है।

टिप्पणः- सर्वेक्षण इकाई की संख्या दर्षाते हुए आबादी देह का सर्वेक्षण इस अनुसूची में प्रस्तुत किया जाएगा।

सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी115 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

अनुसूची- II

{देखिए धारा 10(1)}

अधिकारों के अभिलेख-आबादी देह

(सर्वेक्षण इकाई में स्वामी की प्रविष्टियों का प्रारूप अभिलेख)

गांव का नाम .......... राजस्व संपदा ..........., हदबस्त संख्या ......., तहसील ..........., जिला .......

वित्तीय वर्षः

1 2 3 4 5 6 7 8
स्वत्वधारिता की क्रम संख्या परिक्षेत्र का नाम, जो भी पहचान योग्य हो स्वामी का नाम (पंचायत तथा सरकार और इसकी संस्थाएं/पिता/दादा या पति तथा पति के पिता के नाम के सहित निजी स्वामी का नाम और प्रत्येक हिस्से की सीमा, यदि सर्वेक्षण इकाई में एक से अधिक सह-हिस्सेदारी हैं) सर्वेक्षण इकाई संख्या मीटर/ सेंटीमीटर/ गज/फुट तथा इंच में परिमाप सीमाएंः पूर्वः पष्चिमः उत्तरः दक्षिणः वर्ग मीटर तथा वर्ग गज में कुल क्षेत्र सम्पत्ति की किस्म टिप्पणी

क्षेत्रीय कानूनगो पटवारी

सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी116 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

अनुसूची-III

{देखिए धारा 12(1)}

अधिकारों के अभिलेख- आबादी देह

(सर्वेक्षण इकाइयों के संंबंध में आक्षेप)

गांव का नाम .......... राजस्व संपदा ..........., हदबस्त संख्या ......., तहसील ..........., जिला .......

सेवा में,

राजस्व अधिकारी,

तहसील ...... जिला......

विषयः- सर्वेक्षण इकाई संख्या ......... के संबंध में आक्षेप।

महोदय/महोदया,

आवेदक निम्नलिखित के संबंध में आक्षेप प्रस्तुत करता है (एक को चिह्नित करें)ः-

i. परिमाप, माप, सीमा या क्षेत्र;

ii. स्वामित्व/स्वत्वधारी के अधिकार; या

iii. उपरोक्त दोनों;

iv. कोई अन्य आक्षेप।

आक्षेप(आक्षेपों) के संक्षिप्त विवरणः

स्थान (आवेदक/आक्षेपकर्ता के हस्ताक्षर)

दिनांकः नाम (आई.डी. प्रमाण के साथ)ः

पिता और दादा या पति और पति

के पिता का नामः

पूरा पताः

टिप्पणः पंचायत तथा सरकार और इसकी संस्थाओं के मामले में, उन द्वारा भी इसी प्ररूप में आक्षेप दायर किया जाएगा।117 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

अनुसूची-IV

{देखिए धारा 13(1)}

अधिकारों के अभिलेख- आबादी देह

(सर्वेक्षण इकाईयों के अधिकारों का अंतिम अभिलेख)

गांव का नाम .......... राजस्व संपदा ..........., हदबस्त संख्या ......., तहसील ..........., जिला .......

वित्तीय वर्षः

1 2 3 4 5 6 7 8
स्वत्वधारिता की क्रम संख्या परिक्षेत्र का नाम, जो भी पहचान योग्य हो स्वामी का नाम (पंचायत तथा सरकार और इसकी संस्थाएं/पिता/दादा या पति तथा पति के पिता के नाम के सहित निजी स्वामी का नाम और प्रत्येक हिस्से की सीमा, यदि सर्वेक्षण इकाई में एक से अधिक सह-हिस्सेदारी हैं) सर्वेक्षण इकाई संख्या मीटर/ सेंटीमीटर/ गज/फुट तथा इंच में परिमाप सीमाएंः पूर्वः पष्चिमः उत्तरः दक्षिणः वर्ग मीटर तथा वर्ग गज में कुल क्षेत्र सम्पत्ति की किस्म टिप्पणी

यह प्रमाणित किया जाता है कि सभी आवष्यक सुधार कर दिए गए हैं और अधिकारों के अभिलेख में प्रविष्टियां सभी प्रकार से पूर्ण तथा सही हैं।

पटवारी क्षेत्रीय कानूनगो

सहायक कलक्टर द्वितीय श्रेणी/सहायक कलक्टर प्रथम श्रेणी स्थानः

तिथिः118 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 16, 2025 (AGHN. 25, 1947 SAKA)

अनुसूची-V

{देखिए धारा 17(2)}

अधिकार के अभिलेख- आबादी देह

(नामांतरण रजिस्टर)

राजस्व संपदा ..........., हदबस्त संख्या ....... (आबादी देह)......, तहसील ..........., जिला .......

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
अंतिम जमाबन्दी आबादी देह में प्रविष्टि, जिसमें सुधार किया जाना प्रस्तावित है नई प्रविष्टि प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित है
क्रम संख्या अंतिम जमाबन्दी आबादी देह में जोत संख्या स्वामी का नाम, पिता का नाम, दादा का नाम, पति का नाम, पति के पिता का नाम, हिस्से की सीमा सर्वेक्षण इकाई संख्या क्षेत्र और किस्म (मीटर/ सेंटीमीटर/ गज/फुट तथा इंच) नई जमाबन्दी आबादी देह में जोत संख्या स्वामी का नाम, पिता का नाम, दादा का नाम, पति का नाम, पति के पिता का नाम, हिस्से की सीमा सर्वेक्षण इकाई संख्या क्षेत्र और किस्म (मीटर/ सेंटीमीटर/ गज/फुट तथा इंच) विक्रय के मामले में मूल्य के साथ अन्तरण की किस्म और तिथि तथा बन्धक के मामले में बन्धक ऋण की राषि नामांतरण फीस रिपोर्ट और निर्णय

चण्डीगढ़ः दिनांक 12 दिसम्बर, 2025.

प्रो0 असीम कुमार घोष, राज्यपाल, हरियाणा।

रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।

12274—L.R.—H.G.P., Pkl.

Cite this issue. Haryana Gazette, Government of Haryana, 16 December 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.haryana.2025-12-16.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2025/. Archive identifier in.gazette.haryana.2025-12-16.Extra-Ordinary_Leg-No-30-2025.