Haryana Government Gazette
EXTRAORDINARY
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No. 209-2025/Ext.] चण्डीगढ़, बुधवार, दिनांक 17 दिसम्बर, 2025
(26 मार्गषीर्ष, 1947 शक)
विधायी परिषिष्ट
क्रमांक विषय वस्तु
पृृष्ठ भाग-I अधिनियम
1. हरियाणा श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी पूजास्थल 209—217 अधिनियम, 2022 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25)।
2. हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुखसुविधाओं तथा 219—220 अवसंरचना का प्रबंधन (विषेष उपबंध) संषोधन अधिनियम, 2025 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 26)।
(केवल हिन्दी में)।
भाग-II अध्यादेष
कुछ नहीं
भाग-III प्रत्यायोजित विधान
कुछ नहीं
भाग-IV शुद्धि पर्ची, पुनः प्रकाषन तथा प्रतिस्थापन
कुछ नहीं
(xcv)209 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) भाग-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 17 दिसम्बर, 2025
संख्या लैज. 31/2025.- दि हरियाणा श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी श्राइन ऐक्ट, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 13 दिसम्बर 2025 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 25
हरियाणा श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी पूजास्थल अधिनियम, 2022 श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी तथा पूजास्थल से सम्बद्ध या आनुषंगिक भूमियों और भवनों सहित उसके विन्यासों के बेहतर प्रबन्धन, प्रषासन और अभिषासन के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। 1. (1) यह अधिनियम हरियाणा श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी पूजास्थल अधिनियम, 2022 कहा जा सकता है। (2) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तिथि से लागू होगा।
परिभाषाएं। 2. इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''बोर्ड'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम की धारा 4 के अधीन गठित श्री माता भीमेष्वरी देवी
मंदिर (आश्रम), बेरी पूजास्थल बोर्ड ;
(ख) ''विन्यास'' से अभिप्राय है, पूजास्थल से सम्बन्धित या के रख-रखाव, सुधार, परिवर्धन के लिए या पूजार्थ या उससे संबंधित किसी सेवार्थ या धर्मार्थ अनुष्ठान के लिए दी गई या दान की गई समस्त सम्पत्ति, चल या अचल और इसमें शामिल हैं उसमें स्थापित मूर्तियां, पूजास्थल के परिसर और पूजास्थल के अहाते के भीतर किसी भी व्यक्ति को दिया गया सम्पत्ति-दान और उससे सम्बद्ध या आनुषंगिक भूमियां और भवन ;
(ग) ''सरकार'' से अभिप्राय है, हरियाणा राज्य की सरकार; (घ) ''मठ'' से अभिप्राय है, हिन्दू विधि के अधीन समझा जाने वाला मठ; (ड.) ''सदस्य'' से अभिप्राय है, धारा 4 के अधीन गठित बोर्ड का सदस्य और इसमें शामिल है हिन्दू धर्म को मानने वाला सदस्य-सचिव, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष, यदि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य-सचिव गैर-हिन्दू हैं, तो सरकार उसके स्थान पर हिन्दू धर्म को मानने वाले किसी अन्य सदस्य को नियुक्त कर सकती है ;
(च) ''विहित'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित; (छ) ''पुजारी'' से अभिप्राय है, पुजारी और इसमें शामिल हैं पण्डित और पुरोहित या ऐसा अन्य
व्यक्ति जो पूजा या अन्य कर्मकाण्ड करता है या करवाता है;
(ज) ''पूजास्थल'' से अभिप्राय है, श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी का पूजास्थल और श्री माता भीमेष्वरी देवी मंदिर (आश्रम), बेरी पूजास्थल के परिसरों के भीतर सभी मन्दिर, मठ और मूर्तियां तथा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए धार्मिक उद्देष्य से स्थापित उससे सम्बद्ध विन्यास और इसमें निम्नलिखित भी शामिल हैं,- (i) मन्दिर से सम्बन्धित या में पूजार्थ, उसके रख-रखाव या सुधार, परिवर्धन के लिए या उससे सम्बद्ध किसी सेवार्थ या धर्मार्थ अनुष्ठान के लिए दी हुई या दान की गई समस्त सम्पत्तियां, चल या अचल; और
(ii) मन्दिर में स्थापित मूर्तियां और सजावट इत्यादि के लिए वस्त्र, आभूषण तथा अन्य
वस्तुएं ;
210 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA)(झ) ''पूजास्थल-निधि'' से अभिप्राय है, और इसमें शामिल हैं, पूजास्थल के लाभ के लिए उस द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त की गई या तत्समय धारित सभी धन राषियां, और सभी विन्यास, जो पूजास्थल के लाभ या किसी व्यक्ति के नाम से वहां के किसी अन्य देवी-देवता के लिए, या वहां पर आने वाले यात्रियों की सुविधा, आराम या लाभ के लिए दिये गये हैं या इसके बाद दिये जा सकते हैं, इसमें पूजास्थल में समाविष्ट किसी देवी-देवता को अर्पित समस्त चढ़ावा भी शामिल है;
(ञ) ''मन्दिर'' से अभिप्राय है, किसी भी पदनाम से ज्ञात कोई स्थान, जो सार्वजनिक धार्मिक पूजा के स्थान के रूप में उपयोग किया जाता है, और जो हिन्दू समुदाय या उसके किसी वर्ग को सार्वजनिक धार्मिक पूजा के स्थान के रूप में समर्पित है या उसके हित के लिए, या अधिकार स्वरूप उपयोग किया जाता है।
पूजास्थल निधि निहित करना।
3. इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूजास्थल तथा पूजास्थल निधि का स्वामित्व बोर्ड में निहित होगा और बोर्ड इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये इसके कब्जे, प्रशासन और उपयोग का हकदार होगा। बोर्ड का गठन। 4. (1) पूजास्थल का प्रषासन, प्रबन्धन और अभिषासन, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और ग्यारह से अनधिक सदस्यों से मिलकर बनने वाले बोर्ड में निहित होगा। बोर्ड की संरचना निम्न प्रकार से होगीः- (क) मुख्य मन्त्री, हरियाणा, अध्यक्ष होगा;
(ख) कार्यभारी मन्त्री, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा, उपाध्यक्ष होगा; (ग) सचिव, हरियाणा सरकार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, चाहे अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव, हरियाणा सरकार, शहरी स्थानीय निकाय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, के रूप में पदाभिहित पदेन सदस्य होगा;
(घ) उपायुक्त, झज्जर, पदेन सदस्य-सचिव होगा; (ड.) सरकार द्वारा निम्नलिखित रीति में सदस्यों के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले
सात व्यक्तिः- (i) ऐसे दो व्यक्ति, जिन्होंने सरकार की राय में हिन्दू धर्म या संस्कृति की सेवा
में प्रतिष्ठा प्राप्त की हो ;
(ii) ऐसी दो महिलाएं, जिन्होंने सरकार की राय में हिन्दू धर्म, संस्कृति या सामाजिक कार्य की सेवा में विषेषकर महिलाओं की उन्नति के सम्बन्ध में प्रतिष्ठा प्राप्त की हो ;
(iii) ऐसे दो व्यक्ति, जिन्होंने सरकार की राय में प्रषासन, विधिक कार्यकलापों या
वित्तीय मामलों में प्रतिष्ठा प्राप्त की हो ;
(iv) हरियाणा राज्य का एक प्रतिष्ठित हिन्दू।
(2) कोई भी व्यक्ति बोर्ड के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए या सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि वह इस अधिनियम की धारा 8 में यथा विनिर्दिष्ट किसी भी अयोग्यता से ग्रस्त है या पीड़ित है।
5. पूजास्थल निधि को निम्नलिखित के लिए उपयोग में लाया जाएगा,-
पूजास्थल निधियों का चुकाना।
(क) मन्दिर के उचित रख-रखाव, पूजा तथा अन्य कर्मकाण्ड करने के लिए व्यय चुकाने में; (ख) दर्षनार्थ आये श्रद्धालुओं को सुखसाधन, सुविधाएं उपलब्ध करवाने में; (ग) शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना और रख-रखाव करने में; (घ) विद्यार्थियों के प्रषिक्षण में; (ड.) पूजास्थल में दर्षानार्थ आये अनुयायियों, तीर्थ-यात्रियों और उपासकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा को सुनिष्चित करने में; तथा (च) किसी राष्ट्रीय आपदा के मामले में।
बोर्ड का निगमन।
6. बोर्ड एक निगमित निकाय होगा और इसका शाष्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगी और यह उक्त नाम से वाद लायेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा।
नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि।
7. बोर्ड का नामनिर्दिष्ट सदस्य, सरकार के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगाः परन्तु उसकी पदावधि, धारा 4 के अधीन उसके नामनिर्देशन की तिथि से तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी।211 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) 8. किसी भी व्यक्ति को बोर्ड के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट किये जाने के लिये निम्नलिखित कारणों से अयोग्य ठहराया जायेगा, यदि वह,-
बोर्ड की सदस्यता के लिए अयोग्यताएं। (क) हिन्दू नहीं है; (ख) विकृत चित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है या वह बहरा,
गूंगा है या संक्रामक कुष्ठ रोग या किसी विषाक्त संक्रामक रोग से पीड़ित है;
(ग) अनुन्मोचित दिवालिया है; (घ) बोर्ड के विरूद्ध विधि व्यवसायी के रूप में पेष हो रहा है; (ड.) किसी दंड न्यायालय द्वारा नैतिक अधमता वाले किसी अपराध में सजा दी गई है, ऐसी
सजा को उलटाया नहीं गया है;
(च) बोर्ड का पदधारी या सेवक है; (छ) पूजास्थल के प्रषासन में भ्रष्टाचार या कदाचार का दोषी पाया गया है; (ज) नषीली शराब या मादक द्रव्यों का आदी है; और (झ) उसने सरकार की राय में, पूजास्थल के हितों के विरूद्ध कार्य किया है।
बोर्ड का विघटन और अधिक्रमण। 9. (1) यदि सरकार की राय में, बोर्ड इस अधिनियम के अधीन उसको सौंपे गए कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम नहीं है, या उसका पालन करने में लगातार चूक करता है या अपनी शक्तियों का अतिलंघन या गलत प्रयोग करता है, तो सरकार, सम्यक् जांच करने के बाद और बोर्ड को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, आदेष द्वारा, बोर्ड का विघटन या अधिक्रमण कर सकती है और इस अधिनियम के अनुसार दूसरे बोर्ड का पुनर्गठन कर सकती है। (2) जहां इस धारा के अधीन बोर्ड विघटित या अधिक्रमित किया गया है, तो सरकार सभी शक्तियां धारण करेगी और तीन मास से अनधिक अवधि के लिये या दूसरे बोर्ड के गठन तक, जो भी पहले हो, बोर्ड के सभी कृत्यों का पालन करेगी और बोर्ड की सभी शक्तियों का प्रयोग करेगी।
रिक्तियों का भरा जाना। 10. (1) किसी सदस्य की आकस्मिक रिक्ति धारा 4 में यथा उपबंधित समरूप रीति में भरी जाएगी। (2) आकस्मिक रिक्ति भरने के लिए नामनिर्दिष्ट सदस्य की पदावधि उस दिन समाप्त होगी जिस दिन उस सदस्य की पदावधि समाप्त हुई होती जिसकी रिक्ति के स्थान पर नामनिर्देषन किया गया है। (3) बोर्ड द्वारा की गई कोई भी बात, केवल किसी आकस्मिक रिक्ति के होने के कारण अविधिमान्य नहीं होगी।
त्याग-पत्र। 11. कोई भी नामनिर्दिष्ट सदस्य, सदस्य के रुप में अपने पद से अध्यक्ष को लिखित नोटिस देते हुए त्याग-पत्र दे सकता है और सरकार द्वारा उसके त्याग-पत्र की स्वीकृति की तिथि से उसका पद रिक्त हो जाएगा।
बोर्ड का कार्यालय और बैठकें। 12. (1) बोर्ड ऐसे स्थान पर अपना कार्यालय बनाएगा, जैसा वह विनिश्चित करे। (2) बोर्ड की प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा की जाएगी। (3) किसी बैठक में तब तक कोई भी कारबार संव्यवहारित नहीं किया जाएगा जब तक कम से कम पांच सदस्य उपस्थित न हों। (4) बोर्ड का प्रत्येक निर्णय, इस अधिनियम द्वारा स्पष्ट रुप से उपबंधित के सिवाय, बहुमत द्वारा किया होगा, और मतों की बराबरी की दषा में, अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का निर्णायक मत होगा।
बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति। 13. (1) इस अधिनियम के अधीन बोर्ड को सौंपे गए कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन करने के लिए, बोर्ड ऐसे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियोंं, जैसा वह आवष्यक समझे, को ऐसे पदनामों, वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक तथा अनुलाभों सहित, जो बोर्ड समय-समय पर अवधारित करे, नियुक्त कर सकता है : परन्तु उप मण्डल अधिकारी (नागरिक), बेरी तथा सचिव, नगर पालिका, बेरी बोर्ड के क्रमषः मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा कार्यकारी अधिकारी होंगे। (2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन, बोर्ड के अध्यक्ष को बोर्ड के किसी अधिकारी या कर्मचारी को अनुषासन भंग करने, लापरवाही, अनुपयुक्तता, कर्तव्य की उपेक्षा करने या कदाचार या किसी अन्य पर्याप्त कारण से स्थानान्तरित करने, निलंबित करने, हटाने या पदच्युत करने की शक्ति होगी : परन्तु जहां अधिकारी या कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या कर्मचारी है, तो उसे सरकार में उसके मूल संवर्ग या विभाग में वापस भेजा जा सकता है।212 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) (3) बोर्ड के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन तथा शर्तें ऐसी होंगी, जो विहित की जाएं।
सदस्य का दायित्व।
चल तथा अचल संपत्ति का हस्तांतरण।
उधार लेने या देने की शक्ति।
लोक सेवक। 14. इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसरण में कार्य करते हुए या कार्य करने के लिए तात्पर्यित बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 21 के अर्थ के भीतर लोक सेवक के रूप में समझा जाएगा। 15. बोर्ड का प्रत्येक सदस्य, पूजास्थल निधि की हानि, फिजूलखर्ची या दुरुपयोग के लिए दायी होगा, यदि ऐसी हानि, फिजूलखर्ची या दुरुपयोग, सदस्य के रुप में कार्य करते हुए उसके द्वारा जानबूझकर किए गए कार्य या चूक के सीधे परिणामस्वरुप है, तो बोर्ड द्वारा प्रतिकर के लिए उसके विरुद्ध वाद संस्थित किया जा सकता है। 16. चल तथा अचल दोनों सम्पत्तियों और जेवर, आभूषणों, जो कभी मूर्तियों पर सुषोभित रहे हैं या पूजास्थल निधि का भाग बनने वाली किसी अविनष्वर प्रकृति की अन्य बहुमूल्य संपत्तियों को बोर्ड की सिफारिषों पर सरकार की पूर्व स्वीकृति से हस्तांतरित, विनिमय, विक्रय या निपटान किया जाएगा। 17. बोर्ड के संकल्प और सरकार के अनुमोदन के बिना कोई भी धनराषि उधार ली या दी नहीं जाएगी।
बोर्ड के कर्तव्य। 18. इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अध्यधीन, बोर्ड के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे,-
(i) पूजास्थल में उचित रुप से पूजा करने की व्यवस्था करना; (ii) तीर्थ-यात्रियों को उचित रुप से पूजा करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाना; (iii) पूजास्थल निधियों, बहुमूल्य प्रतिभूतियों और जेवरों की सुरक्षित अभिरक्षा और परिरक्षण की व्यवस्था करना;
(iv) उपासकों और तीर्थ-यात्रियों के लाभ के लिए निम्नलिखित कार्य करना-
(क) उनके आवास हेतु भवनों का निर्माण ; (ख) स्वास्थ्यकर संकर्मों का निर्माण ; तथा (ग) संचार साधनों में सुधार;
(v) पूजास्थल और उसके इर्द-गिर्द के क्षेत्र से सम्बन्धित विकासात्मक कार्य-कलाप करवाना; (vi) धार्मिक षिक्षण और सामान्य षिक्षा प्रदान करने के लिये उपयुक्त व्यवस्था करना; (vii) उपासकों और तीर्थ-यात्रियों के लिए चिकित्सा राहत की व्यवस्था करना; (viii) वैतनिक अमले को उपयुक्त परिलाभों के भुगतान के लिए उपबन्ध करना; (ix) ऐसे सभी कार्य करना, जो पूजास्थल तथा पूजास्थल निधि और तीर्थ-यात्रियों की सुविधा के दक्ष प्रबन्धन, रख-रखाव और प्रषासन से आनुषंगिक और उसमें सहायक हों। पुजारी के अधिकार तथा विद्यमान कर्मचारियों तथा अन्य व्यक्तियों के निबन्धन तथा शर्तें।
19. (1) इस अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से पुजारी के सभी अधिकार समाप्त हो जाएंगे : परन्तु सरकार एक या एक से अधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाले किसी अधिकरण का ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में गठन कर सकती है, जो पुजारी और बोर्ड के प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रुप में सुनने के पष्चात् उनके अधिकारों के निर्वापण के बदले में बोर्ड द्वारा भुगतान किये जाने वाले प्रतिकर की सिफारिषें करेगा। अधिकरण, बोर्ड को अपनी सिफारिषें करते समय, ऐसी आय, जो पुजारी प्राप्त करता था, का सम्यक् ध्यान रखेगा : परन्तु यह और कि जहां कोई पुजारी प्रतिकर का अपना अधिकार छोड़ देता है और बोर्ड में स्वयं को नियोजन के लिये पेष करता है, तो बोर्ड ऐसे नियोजन के लिये उसकी उपयुक्तता का निर्णय करेगा और यदि वह इस प्रयोजन के लिये नियुक्त की जाने वाली चयन समिति द्वारा उपयुक्त पाया जाता है, तो उसे ऐसे नियोजन की पेषकष कर सकता है बषर्ते कि यह पुजारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन बोर्ड के प्रषासनिक तथा अनुषासनिक नियंत्रण के अनुपालन का वचन दे। (2) पूजास्थल के सभी ऐसे कर्मचारी, जो पूजास्थल से सम्बद्ध किसी कार्य पर लगाये जाते हैं जब तक वे इसके प्रतिकूल किसी विकल्प का प्रयोग नहीं करते, इस अधिनियम के प्रारम्भ से बोर्ड के कर्मचारी बन गये समझे जाएंगे और बोर्ड के प्रषासनिक तथा अनुषासनिक नियंत्रण के अध्यधीन होंगे। उनकी सेवा के निबंधन तथा शर्तें इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनियमित की जाएंगी तथा ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेंगे, जो यथासाध्य उनकी सेवा के पारिश्रमिक तथा अन्य निबंधन और शर्तों के वर्तमान स्तर से कम नहीं होंगे। (3) दुकानदार तथा अन्य पट्टा धारक, जो इस अधिनियम में निर्दिष्ट क्षेत्र में पूजास्थल के किराएदार हैं, बोर्ड के किराएदार बन जाएंगे।213 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) पुजारी की नियुक्ति, कार्यकाल और अन्य निबंधन तथा शर्तें। 20. (1) बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, पूजास्थल के पुजारी की नियुक्ति करेगा और ऐसी नियुक्ति करने में धार्मिक संप्रदाय से संबंध रखने वाले व्यक्तियों के दावों का सम्यक् ध्यान रखेगा जिनके लाभ के लिये पूजास्थल का मुख्य रुप से रख-रखाव किया जाता है। (2) पुजारी तब तक पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा जब तक बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा इस दौरान उसे हटा नहीं दिया जाता या पदच्युत नहीं कर दिया जाता या उसका त्याग-पत्र स्वीकार नहीं कर लिया जाता या अन्यथा से वह पुजारी नहीं रहता। (3) पुजारी पुनः नियुक्ति के लिए पात्र होगा। (4) जब पूजास्थल के पुजारी के कार्यालय में कोई स्थाई रिक्ति हो जाती है, तो बोर्ड द्वारा या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पुजारी नियुक्त किया जाएगा। (5) जब ऐसे किसी कार्यालय में किसी पुजारी के निलंबन के कारण कोई अस्थाई रिक्ति हो जाती है, तो बोर्ड अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पुजारी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिये उसके स्थान पर उसकी निर्योग्यता समाप्त होने तक किसी अन्य पुजारी की नियुक्ति की जायेगी ।
21. (1) बोर्ड या उस द्वारा प्राधिकृत अधिकारी पुजारी को निम्नलिखित आधारों पर निलंबित, हटा या पदच्युत कर सकता है,-
निलंबित करने, हटाने या पदच्युत करने की शक्ति। (क) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जारी किये गये किसी आदेष की जानबूझकर
की गई अवज्ञा;
(ख) इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में पूजास्थल या किसी संपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में किसी अपकरण, दुष्करण, विष्वास भंग या कर्तव्य की उपेक्षा;
(ग) पूजास्थल की संपत्तियों के किसी दुविर्नियोग, या अनुचित संव्यवहार; (घ) पूजास्थल में नषीली शराब या मादक द्रव्यों के नषे में पाए जाने ; तथा (ड.) विकृत-चित्त या अन्य मानसिक या शारीरिक दोष या अषक्तता, जो उसे पुजारी
के कृत्यों का निर्वहन करने के लिये अयोग्य बनाती है :
परन्तु किसी भी पुजारी को इस धारा के अधीन बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा तब तक हटाया या पदच्युत नहीं किया जाएगा जब तक उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
(2) कोई पुजारी, जिसे उपधारा (1) के अधीन बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा निलंबित, हटाया या पदच्युत किया गया है, निलंबित, हटाए या पदच्युत किये जाने के आदेष की प्राप्ति की तिथि से एक मास के भीतर, ऐसे प्राधिकारी को तथा ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अपील दायर कर सकता है। (3) इस प्रकार निलंबित, हटाये गये या पदच्युत किए गए किसी पुजारी को ऐसा भरण-पोषण अनुज्ञात किया जायेगा, जो पूजास्थल की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए बोर्ड या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा नियत किया जाए।
पुजारी की अयोग्यताएं। 22. कोई भी व्यक्ति पुजारी के रुप में नियुक्त किये जाने और बने रहने के लिये अयोग्य होगा, यदि वह,-
(क) अनुन्मोेचित दिवालिया है; (ख) विकृत चित्त है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है; (ग) पूजास्थल के किसी अस्तित्वयुक्त पट्टे या किसी संपत्ति में, या उससे की गई संविदा या किए जा रहे किसी कार्य में या तो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः हित रखता है या पूजास्थल को भुगतान योग्य किन्हीं बकायों में देनदार है;
(घ) पूजास्थल की ओर से या उसके विरुद्ध विधिक व्यवसायी के रुप में पेष हो रहा है; (ड.) उसे दंड न्यायालय द्वारा नैतिक अधमता वाले किसी अपराध में सजा दी गई है और ऐसी
सजा को उलटाया नहीं गया है;
(च) उसने पूजास्थल के हित के प्रतिकूल कार्य किया है; (छ) नषीली शराब और मादक द्रव्यों का आदी है; (ज) उसने आयु के इक्कीस वर्ष पूरे नहीं किए हैं ; तथा (झ) हिन्दू धर्म या उस मान्यता को छोड़ देता है या उस धार्मिक संप्रदाय से संबंध तोड़ लेता
है, जिससे पूजास्थल संबंध रखता है।214 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) 23. (1) ऐसे प्ररूप और रीति, जो विहित की जाएं, में निम्नलिखित को दर्षाने वाला रजिस्टर तैयार किया जाएगा और बनाए रखा जाएगा,-
(क) पूजास्थल के उद्गम तथा इतिहास तथा पूजास्थल के रीति-रिवाज या प्रथा के रजिस्टर तैयार करना और रख-रखाव करना।
संबंध में ब्यौरे ;
(ख) प्रषासन की योजना तथा खर्च के मापमान के ब्यौरे ; (ग) सभी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के नाम, जिनसे कोई वेतन, परिलाभ या अनुलाभ
संबद्ध है तथा प्रत्येक मामले में सेवा का स्वरुप, अवधि तथा शर्तें;
(घ) पूजास्थल से संबंधित धन, जेवर, रत्न, सोना, चांदी, कीमती नगीनें, पात्र तथा बर्तन तथा अन्य चल संपत्ति, उनका भार, संघटक तत्वों के विवरण तथा उनके अनुमानित मूल्य सहित;
(ड.) पूजास्थल की अचल संपत्तियों तथा सभी अन्य विन्यासों के ब्यौरे तथा सभी हक
विलेख तथा अन्य दस्तावेज;
(च) पूजास्थल में या उससे संबद्ध मूर्तियों तथा अन्य प्रतिमाओं के संघटक तत्वों तथा रंगीन चित्रों के विवरणों के ब्यौरे, चाहे वे पूजा के लिये या शोभा यात्रााओं में ले जाने के लिये आषयित हों;
(छ) प्राचीन या ऐतिहासिक अभिलेखों के साथ उनकी संक्षिप्त विषय-वस्तु सहित ब्यौरे;
तथा
(ज) ऐसे अन्य ब्यौरे, जो बोर्ड द्वारा अपेक्षित किए जाएं।
(2) मुख्य कार्यकारी अधिकारी या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा इस निमित्त उसे सदस्य-सचिव द्वारा नोटिस तामील किये जाने की तिथि से तीन मास के भीतर अथवा ऐसी और अवधि, जो सदस्य-सचिव द्वारा अनुज्ञात की जाए, के भीतर रजिस्टर तैयार, हस्ताक्षरित तथा सत्यापित किया जाएगा। (3) बोर्ड ऐसी जांच, जो वह आवष्यक समझे, करने के पष्चात् मुख्य कार्यकारी अधिकारी या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को रजिस्टर में ऐसे परिवर्तन, लोप या परिवर्धन करने के लिए सिफारिष कर सकता है और निदेष दे सकता है, जो बोर्ड उचित समझे। (4) मुख्य कार्यकारी अधिकारी या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, बोर्ड के निदेषों को कार्यान्वित करेगा और आदेष की तिथि से तीन मास की अवधि के भीतर अनुमोदन के लिये रजिस्टर बोर्ड को प्रस्तुत करेगा।
रजिस्टर का वार्षिक सत्यापन।
24. (1) मुख्य कार्यकारी अधिकारी या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी प्रति वर्ष या ऐसे अंतरालों पर, जो विहित किए जाएं, रजिस्टर की प्रविष्टियों की संवीक्षा करेगा, तथा उसे बोर्ड को उसके अनुमोदन के लिये सदस्य-सचिव के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। (2) बोर्ड उस पर, ऐसी जांच, जिसे वह आवष्यक समझे, करने के पष्चात् रजिस्टर में परिवर्तन, लोप या परिवर्धन, यदि कोई हो, करने का निदेष दे सकता है। (3) मुख्य कार्यकारी अधिकारी या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, आदेष की तिथि से तीन मास के भीतर बोर्ड द्वारा किये गये आदेष के अनुसार उस द्वारा रखी गई रजिस्टर की प्रति में परिवर्तन, लोप अथवा परिवर्धन करेगा।
संपत्ति तथा दस्तावेजों का निरीक्षण।
25. (1) बोर्ड का सदस्य-सचिव या बोर्ड अथवा सरकार द्वारा उस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी, पूजास्थल से संबंधित सभी चल या अचल संपत्तियों, तथा सभी अभिलेखों, पत्र-व्यवहार, योजनाओं, लेखों तथा अन्य दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकता है और उसके अधीन कार्य करने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों तथा उसके प्रषासन से संबंध रखने वाले किसी व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वे ऐसी सभी सहायता तथा सुविधाएं प्रदान करें, जो ऐसे निरीक्षण के संबंध में आवष्यक या समुचित रुप से अपेक्षित हों तथा यदि इस प्रकार अपेक्षित हो, तो निरीक्षण के लिए कोई ऐसी चल संपत्ति या दस्तावेज भी प्रस्तुत करें। (2) यथा पूर्वोक्त निरीक्षण के प्रयोजनों के लिये, निरीक्षण प्राधिकारी को स्थानीय परिपाटी, रिवाज या प्रथा के अध्यधीन पूजास्थल के परिसरों में किसी भी उचित समय पर प्रवेष करने की शक्ति होगी। (3) इस धारा की किसी बात से किसी व्यक्ति को उपधारा (2) में निर्दिष्ट परिसरों या स्थान या उसके किसी भाग में प्रवेष करने के लिये तब तक प्राधिकृत नहीं समझा जाएगा जब तक ऐसा व्यक्ति उस धर्म को नहीं मानता है, जिससे परिसर या स्थान संबंधित है।215 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण पर प्रतिबंध। 26. रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 16) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी पूजास्थल से संबंधित अचल संपत्ति का कोई विलेख या हस्तांतरण तब तक रजिस्ट्रीकरण के लिए स्वीकार नहीं करेगा जब तक विलेख के साथ धारा 16 के अधीन ऐसे हस्तांतरण को स्वीकृति देने वाले आदेश की प्रमाणित प्रति साथ न लगाई जाए।
विधिविरूद्ध हस्तांतरित अचल संपत्ति की वसूली। 27. (1) जब कभी बोर्ड के ध्यान में यह आता है कि पूजास्थल से संबंधित कोई अचल सम्पत्ति इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में हस्तांतरित की गई है, तो यह मामला सरकार को निर्दिष्ट करेगा। (2) उपधारा (1) के अधीन किये गये संदर्भ की प्राप्ति पर, सरकार ऐसी रीति, जो विहित की जाए, में संक्षिप्त जांच करवाएगी और संतुष्ट हो जाने पर कि कोई ऐसी सम्पत्ति इस प्रकार हस्तांतरित की गई है, तो विधि के अनुसार कार्यवाही करेगी।
पूजास्थल से संबंधित भूमि तथा परिसरों के अतिक्रमण को हटाना। 28. (1) हरियाणा लोक परिसर तथा भूमि (बेदखली तथा किराया वसूली) अधिनियम, 1972 (1972 का 24) में दिए गए उपबंध, जहां तक हो सके, पूजास्थल से संबंधित किसी भूमि या परिसरों के अप्राधिकृत अधिभोग के संबंध में लागू होंगे, मानो यह उस अधिनियम के अर्थ के भीतर सरकार की संपत्ति थी। (2) बोर्ड का सदस्य-सचिव, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिनियम के अधीन समुचित कार्यवाहियां करने के लिये उसके अधीन सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकता है और उस पर उस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार कार्रवाई करना ऐसे प्राधिकारी के लिए विधिपूर्ण होगा।
29. जहां बोर्ड के पास यह विष्वास करने का कारण है कि -
(क) पूजास्थल से संबंधित किसी संपत्ति को किसी व्यक्ति द्वारा बेकार किये जाने, क्षति पहुंचाये
जाने या अनुचित रुप से हस्तांतरित किये जाने का खतरा है; या
पूजास्थल के सरंक्षण के लिये कार्यवाही करने की शक्ति। (ख) ऐसा व्यक्ति उस संपत्ति को हटाने या उसके निपटान की धमकी देता है, या ऐसा करना
चाहता है,
तो बोर्ड का सदस्य-सचिव, ऐसी संपत्ति को बेकार करने, क्षति पहुंचाने, हस्तांतरित करने, बेचने, हटाने या निपटान को रोकने और निवारित करने के प्रयोजन के लिये विधि के अनुसार कार्यवाही कर सकता है।
पूजास्थल का बजट। 30. (1) बोर्ड का सदस्य-सचिव, प्रति वर्ष दिसम्बर की समाप्ति से पूर्व, ऐसे प्राधिकारी को ऐसे प्ररुप तथा रीति, जो विहित की जाए, में पूजास्थल के आगामी वित्त वर्ष के दौरान संभावित प्राप्तियों तथा संवितरणों को दर्षाते हुए बजट प्रस्तुत करेगा।
(2) प्रत्येक ऐसे बजट में निम्नलिखित के लिये पर्याप्त उपबंध होंगे,-
(क) उस समय लागू खर्च तथा रुढ़िगत खर्च के मापमान;
(ख) पूजास्थल पर बाध्यकारी सभी दायित्वों के सम्यक् निर्वहन;
(ग) धार्मिक, शैक्षणिक तथा धर्मार्थ प्रयोजनों पर खर्च, जो पूजास्थल के उद्देष्यों से
असंगत न हो;
(घ) पूजास्थल के सिद्वांतों के अनुसार धार्मिक षिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा उसका
प्रसार;
(ड.) पूजास्थल के भवनों की मरम्मत तथा उनके नवीकरण तथा उसकी संपत्तियों और
परिसंपत्तियों के परिरक्षण तथा संरक्षण पर खर्च ।
(3) बोर्ड, बजट की प्राप्ति पर, उसमें ऐसे परिवर्तन, विलोपन अथवा परिवर्धन कर सकता है, जो वह उचित समझे।
(4) उस समय लागू किसी अन्य विधि अथवा किसी रिवाज, प्रथा अथवा परिपाटी में दी गई किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, किसी पदधारी के पारिश्रमिक अथवा पूजास्थल के संबंध में किसी अन्य मद के खर्च के लिये किये गये उपबन्ध, बोर्ड द्वारा बढ़ाए, घटाये अथवा उपांतरित किये जा सकते हैं, यदि पूजास्थल की वित्तीय स्थिति तथा हित को ध्यान में रखते हुए ऐसी वृद्धि, कमी करना अथवा उपांतरण करना आवष्यक समझा जाता है।
लेखे। 31. (1) बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, सभी प्राप्तियों तथा संवितरणों के नियमित लेखों को अनुरक्षित रखेगा। ऐसे लेखे प्रत्येक कलैंडर वर्ष के लिए ऐसे प्ररुप में पृथक् रुप से रखे जाएंगे तथा उनमें ऐसे ब्यौरे समाविष्ट होंगे, जो विहित किये जाएं।216 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) (2) पूजास्थल के लेखों की प्रतिवर्ष संपरीक्षा ऐसे व्यक्ति जो चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिनियम, 1949 (1949 का केन्द्रीय अधिनियम 38) के अर्थ के भीतर चार्टर्ड अकाउंटेंट हो अथवा ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा की जाएगी, जिसे सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए। (3) उपधारा (2) के अधीन लेखापरीक्षा करने वाले प्रत्येक लेखापरीक्षक की बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी के कब्जे में अथवा नियंत्रणाधीन लेखों तथा सभी बहियों, वाउचरों, अन्य दस्तावेजों तथा अभिलेखों तक पहुंच होगी।
शास्ति। 32. यदि पूजास्थल के प्रषासन से सम्बन्धित कोई पुजारी, अधिकारी, कर्मचारी अथवा कोई अन्य व्यक्ति- (क) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या उसके अधीन जारी किए गए आदेषों तथा निदेषों के उपबंधों की अनुपालना करने से इनकार करता है अथवा जानबूझकर उनका अनुपालन करने में असफल रहता है अथवा इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन की गई किसी कार्यवाही में बाधा डालता है ; या
(ख) इस अधिनियम के अधीन मांगी गई किन्हीं रिपोर्टों, विवरणों, लेखों या अन्य जानकारी देने से इनकार करता है अथवा जानबूझकर देने में असफल रहता है,
तो बोर्ड या बोर्ड द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी, पुजारी, अधिकारी, कर्मचारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति के विरूद्ध षिकायत दर्ज करवा सकता है तथा वह ऐसे कारावास, जो छह मास तक का हो सकेगा तथा ऐसे जुर्माने, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, से दण्डनीय होगा।
33. कोई भी व्यक्ति जो,-
पूजास्थल से संबंधित संपत्ति के सदोष विधारण के लिए शास्ति।
(क) पूजास्थल से संबंधित किसी ऐसी संपत्ति, दस्तावेज अथवा लेखा बहियों का कब्जा, अभिरक्षा अथवा नियंत्रण रखते हुए, जिसका प्रबन्धन तथा नियंत्रण इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन विनियमित किया गया है, बोर्ड अथवा किसी अन्य व्यक्ति, जिसे सरकार अथवा बोर्ड द्वारा उसका निरीक्षण करने या उसकी मांग करने के लिए सम्यक् रुप से प्राधिकृत किया गया है, से ऐसी संपत्ति अथवा दस्तावेज अथवा लेखा बहियों का सदोष विधारण करता है; या
(ख) बोर्ड की किसी संपत्ति, दस्तावेजों अथवा लेखा बहियों का सदोष कब्जा लेता है, अथवा उन्हें रखता है अथवा उन्हें बोर्ड अथवा इस निमित्त उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति से जानबूझकर विधारित करता है अथवा प्रस्तुत करने अथवा देने में असफल रहता है; या
(ग) पूजास्थल की किसी संपत्ति, दस्तावेज अथवा लेखा बहियों को गलत ढंग से हटाता है, नष्ट करता है, या बिगाड़ता है,
तो ऐसी अवधि, जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, के कारावास अथवा जुर्माने से अथवा दोनों से दण्डनीय होगा।
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण।
34. (1) सरकार का कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी, इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन किए गए अथवा किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के संबंध में किसी सिविल अथवा दांडिक कार्यवाहियों के लिए दायी नहीं होगा, यदि कार्य सद्भावपूर्वक और इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा या के अधीन अधिरोपित कर्तव्यों के निष्पादन अथवा सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन के अनुक्रम में किया गया है। (2) इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों के फलस्वरुप अथवा इस अधिनियम अथवा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई अथवा किए जाने के लिए आषयित किसी बात से हुए या सम्भावित किसी हानि अथवा सहन की गई या सम्भावित किसी क्षति के लिए सरकार के विरुद्ध कोई भी वाद अथवा अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं हो सकेंगी।
निदेष देने की शक्ति।
35. सरकार, समय-समय पर, इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बोर्ड को लिखित में ऐसे सामान्य अथवा विषिष्ट निदेष दे सकती है और ऐसा करते हुए, बोर्ड द्वारा किए गए किसी आदेष को विखंडित, परिवर्तित अथवा उपांतरित कर सकती है और बोर्ड अपने कर्तव्यों के निर्वहन में उनका अनुसरण करेगा।
सरकार की पुनर्विलोकन की शक्ति।
36. सरकार, स्वप्रेरणा से अथवा इस अधिनियम के अधीन किए गए बोर्ड के किसी आदेष या निर्णय से स्वयं को व्यथित समझने वाले किसी व्यक्ति के आवेदन पर, ऐसे आदेष या निर्णय का पुनर्विलोकन कर सकती है तथा उस पर ऐसा आदेष कर सकती है जो वह ठीक समझे : परन्तु इस धारा के अधीन कोई आदेष करने से पूर्व, सरकार, ऐसे व्यक्ति, जिसकी ऐसे आदेष से प्रतिकूल रुप से प्रभावित होने की संभावना है, को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगी।217 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), DEC. 17, 2025 (AGHN. 26, 1947 SAKA) कठिनाइयां दूर करने की शक्ति। 37. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी बनाने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाषित आदेष द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से अनुअसंगत ऐसे उपबंध कर सकती है, जो इसे कठिनाई दूर करने के लिए आवष्यक अथवा समीचीन प्रतीत हों : परन्तु ऐसा कोई आदेष इस अधिनियम के प्रारम्भ से तीन वर्ष की समाप्ति के बाद नहीं किया जाएगा। (2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेष, इसके जारी करने के बाद, यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सम्मुख रखा जाएगा।
अधिकारिता का वर्जन। 38. इस अधिनियम में अभिव्यक्त रुप से उपबंधित के सिवाय, किसी भी सिविल न्यायालय को किसी विवाद या मामला, जो इस अधिनियम के अधीन किसी अधिकारी अथवा प्राधिकारी द्वारा निर्णीत किया जाना है और जिसके संबंध में ऐसे अधिकारी अथवा प्राधिकरण का निर्णय अथवा आदेष अंतिम तथा निष्चायक हो गया है, को ग्रहण करने या न्याय-निर्णयन करने की अधिकारिता नहीं होगी ।
नियम बनाने की शक्ति। 39. (1) सरकार, पूर्व प्रकाषन की शर्तों के अध्यधीन, इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकती है। (2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकती है-
(क) धारा 13 और 19 केे अधीन पूजास्थल के कर्मचारियों की सेवा के निर्बन्धन तथा
शर्तें;
(ख) धारा 19 के अधीन अधिकरण का गठन; (ग) प्राधिकारी, जिसे तथा रीति, जिसमें धारा 21 के अधीन अपील की जानी है; (घ) प्ररुप तथा रीति, जिसमें धारा 23 के अधीन रजिस्टर रखे जाने हैं; (ड.) धारा 24 के अधीन रजिस्टर में प्रविष्टियों की संवीक्षा; (च) रीति, जिसमें धारा 27 के अधीन जांच की जानी है; (छ) प्ररुप तथा रीति, जिसमें धारा 30 के अधीन बजट तैयार किया जाना है तथा
प्राधिकारी जिसको प्रस्तुत किया जाना है;
(ज) इस अधिनियम द्वारा या के अधीन रखे जाने के लिए अपेक्षित विवरणों, विवरणियों
के प्ररुप तथा रीति, जिसमें ये रखे जाने हैं;
(झ) बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली विवरणियां, लेखे या अन्य
सूचना;
(ण) पूजास्थल की संपत्तियों और भवनों का परिरक्षण, रख-रखाव, प्रबन्धन तथा सुधार; (ट) पूजास्थल में मूर्तियों तथा प्रतिमाओं का परिरक्षण ; और (ठ) कोई अन्य मामला, जो इस अधिनियम के अधीन विहित किया जाना है या विहित
किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के पष्चात् यथाषीघ्र, राज्य विधानमण्डल के सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, रखा जाएगा।
40. इस अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से, किन्हीं अन्य विधियों के उपबंध, जो पूजास्थल को लागू होते हैं, उसे लागू नहीं रहेंगे : परन्तु ऐसी समाप्ति किसी भी प्रकार से निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेगी-
पूजास्थल को कतिपय अधिनियमितियों का लागू नहीं होना। (क) पहले से अर्जित, प्रोदभूत या उपगत कोई अधिकार, हक, हित, बाध्यता या दायित्व; (ख) ऐसे अधिकार, हक, हित, बाध्यता या दायित्व के संबंध में किसी उपचार के लिए संस्थित
की गई कोई विधिक कार्यवाही; या
(ग) सम्यक् रुप से की गई या सहन की गई कोई बात।
रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
12287—L.R.—H.G.P., Pkl.