PART-I
हरियाणा सरकार
विधि तथा विधायी विभाग
अधिसूचना
दिनांक 4 फरवरी, 2026
संख्या लैज. 1/2026.- दि हरियाणा प्राइवेट युनिवर्सिटीज (अमेन्डमेन्ट) ऐक्ट, 2025 का निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद हरियाणा के राज्यपाल की दिनांक 30 जनवरी, 2026 की स्वीकृति के अधीन एतद्द्वारा प्रकाषित किया जाता है और यह हरियाणा राजभाषा अधिनियम, 1969 (1969 का 17) की धारा 4-क के खण्ड (क) के अधीन उक्त अधिनियम का हिन्दी भाषा में प्रामाणिक पाठ समझा जाएगाः-
2026 का हरियाणा अधिनियम संख्या 1
हरियाणा निजी विष्वविद्यालय (संषोधन) अधिनियम, 2025 हरियाणा निजी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2006 को आगे संषोधित करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में हरियाणा राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित हो :-
1. यह अधिनियम हरियाणा निजी विष्वविद्यालय (संषोधन) अधिनियम, 2025 कहा जा सकता है। संक्षिप्त नाम। 2. हरियाणा निजी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2006 (जिसे, इसमें, इसके बाद, मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड (क) से पूर्व, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्् :-
2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 2 का संषोधन। '(iक) ''प्रषासक'' से अभिप्राय है, इस अधिनियम की धारा 44ख या धारा 46 के अधीन सरकार द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति अथवा पांच से अनधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली कोई समिति।'।
3. मूल अधिनियम की धारा 34क की उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्् :-
"(3) विष्वविद्यालय, सरकार के विषिष्ट प्राधिकार के बिना छात्रों का प्रथम नामांकन प्रारम्भ
2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 34क का संषोधन। नहीं करेगा।''।
4. मूल अधिनियम की धारा 34ख के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- 2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 34ख का प्रतिस्थापन। ''34ख. पाठ्यक्रम रद्द करने की शक्ति.- सरकार, यदि इसकी संतुष्टि हो जाती है कि विष्वविद्यालय इस पर अधिरोपित कर्तव्यों और बाध्यताओं का दक्षतापूर्ण निर्वहन करने की स्थिति में नहीं है, तो यह ऐसी जांच करने के बाद, जो ठीक समझे, अध्ययन पाठ्यक्रम या कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति रद्द कर सकती है।''।
5. मूल अधिनियम की धारा 44 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- 2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 44 का प्रतिस्थापन। ''44. सरकार की विष्वविद्यालय का निरीक्षण करने तथा शैक्षणिक तथा प्रषासकीय लेखा-परीक्षा करने की शक्ति.- (1) सरकार, विष्वविद्यालय से सम्बन्धित अध्यापन, परीक्षा तथा अनुसंधान या किसी अन्य मामले के मानकाें का अभिनिष्चन करने के प्रयोजन के लिए किए जाने वाला निर्धारण करवा सकती है।
(2) सरकार, किसी विष्वविद्यालय में उच्चतर षिक्षा के विभिन्न स्तरों की गुणवत्ता को अभिनिष्चिन तथा सुनिष्चित करने और इन्हें सतत् बनाए रखने हेतु उच्चतर षिक्षा विभाग, हरियाणा या इस द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य निकाय या व्यक्तियों के माध्यम से वार्षिक शैक्षिक तथा प्रषासकीय लेखा-परीक्षा का संचालन करेगी, जो संवीक्षा करेगी कि क्या विष्वविद्यालय इस अधिनियम, परिनियमों, अध्यादेषों, नियमों, उपविधियों के उपबन्धों, अनुदेषों तथा आषय पत्र की शर्तों का अनुपालन कर रहा है तथा के अनुसार कार्य कर रहा है।
(3) ऐसे व्यक्ति या निकाय, विषिष्ट सिफारिषों तथा कमियाें, यदि पाई गई हों, के साथ सरकार को तीन मास के भीतर अपनी रिपोर्ट देेंगे। सरकार रिपोर्ट पर विचार करेगी और कुुलाधिपति/प्रायोजक निकाय को पंद्रह दिन का कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है कि क्यों न धारा 44क की उपधारा (1) में यथा उपबंधित एक या एक से अधिक शास्ति अधिरोपित की जाए।
(4) उपधारा (3) में वर्णित कारण बताओ नोटिस के जवाब, यदि कोई हो, पर विचार करने के बाद, सरकार को कारण बताओ नोटिस में यथा विनिर्दिष्ट शास्तियां अधिरोपित करने की शक्ति होगी।''।80 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 4, 2026 (MAGH. 15, 1947 SAKA) 6. मूल अधिनियम की धारा 44क के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः- ''44क. शास्तियां.- (1) विष्वविद्यालय पर कुुषासन, मिथ्या सूचना केे लिए और मानकों को न बनाए रखने के लिए निम्नलिखित शास्तियां अधिरोपित की जा सकती हैं, अर्थात्ः- 2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 44क का प्रतिस्थापन।
(i) एक या एक से अधिक संकायों में प्रवेष पर रोक लगाना; (ii) न्यूनतम दस लाख रुपए और अधिकतम एक करोड़ रुपए की वित्तीय शास्ति; (iii) विष्वविद्यालय का चरणबद्ध रीति में विघटन।
(2) जहां उपधारा (1) के खण्ड (i) या (ii) के अधीन शास्ति अधिरोपित की जाती है और तीस दिन के भीतर सुधारत्मक कार्रवाई नहीं की जाती है अथवा सन्तोषजनक नहीं पाई जाती है, तो सरकार किसी अतिरिक्त नोटिस के बिना उपधारा (1) के खण्ड (iii) के अधीन शास्ति के अधिरोपण का उपाय कर सकती है।
44ख. चरणबद्ध विघटन के लिए प्रक्रिया.- (1) जहां धारा 44क की उपधारा (1) के खण्ड (iii) के अधीन विष्वविद्यालय को विघटित करने का निर्णय लिया जाता है, तो सरकार विष्वविद्यालय के प्राधिकरणों को विघटित करेगी और ऐसे चरणबद्ध विघटन के दौरान विष्वविद्यालय के मामलों का पर्यवेक्षण, प्रबन्धन और विनियमित करने के लिए एक प्रषासक नियुक्त करेगी। (2) प्रषासक को सभी शक्तियां हाेंगी और इस अधिनियम के अधीन शासकीय निकाय और प्रबन्धन बोर्ड के सभी कर्तव्याें के अध्यधीन होेंंगी।
(3) प्रषासक की नियुक्ति पर, विष्वविद्यालय की सभी आस्तियां और संपत्तियां प्रषासक की नियुक्ति की तिथि से उसमें निहित होंगी और वह उन पर सम्पूर्ण नियंत्रण और प्रबन्धन का प्रयोग करेगा।
(4) प्रषासक, विष्वविद्यालय की आय/चल आस्तियों से दिन प्रतिदिन के खर्च पूरे करेगा। आय/चल आस्तियों की अपर्याप्तता के मामले में, सरकार के पूर्व अनुमोदन से, प्रषासक को विष्वविद्यालय की सम्पत्तियों और आस्तियों का निपटान करने की शक्ति होगी।
(5) सरकार, यदि आवष्यक समझे, किसी भी समय इस धारा के अधीन नियुक्त प्रषासक को दूसरे प्रषासक को नियुक्त करके बदल सकती है तथा इस प्रकार नियुक्त प्रषासक, अपनी नियुक्ति की तिथि से इस अधिनियम के अधीन सभी शक्तियों का प्रयोग तथा सभी कृत्यों का निर्वहन करेगा।
(6) जहां प्रषासक, वस्तुनिष्ठ सामग्री के आधार पर और लिखित में कारणों को लिपिबद्ध करते हुए समझता है कि किसी पाठ्यक्रम या कार्यक्रम में नये प्रवेष करना लोकहित में अथवा शैक्षणिक निरंतरता या छात्र कल्याण सुनिष्चित करने हेतु आवष्यक हैं, तो वह सरकार को सिफारिष प्रस्तुत कर सकता है और सरकार, लिखित में कारणों को लिपिबद्ध करके अधिनियम, परिनियमों, अध्यादेषों के उपबन्धों और लागू विनियामक मानदण्डों की अनुपालना के अध्यधीन ऐसे प्रवेषों का अनुमोदन कर सकती है।
(7) इस धारा के अधीन नियुुक्त प्रषासक तब तक विष्वविद्यालय के मामलों का संचालन करता रहेगा जब तक नियमित पाठ्यक्रमों के अंतिम बैच के छात्र अपने पाठ्यक्रमों को पूरा नहीं कर लेते और उपाधियाँ, डिप्लोमे या पुरस्कार, जैसी भी स्थिति हो, प्रदान नहीं कर दिए जाते और उसके बाद सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
(8) उपधारा (7) के अधीन रिपोर्ट प्राप्ति पर, सरकार अनुसूची से संबंधित विष्वविद्यालय का लोप करते हुए उसमें संषोधन करेगी तथा ऐसे संषोधन की तिथि से विष्वविद्यालय की सभी आस्तियां और दायित्व प्रायोजक निकाय में निहित होंगेः
परन्तु उपधारा (7) के अधीन प्रदान की गई उपाधियाँ या डिप्लोमे या पुरस्कार, केवल इस आधार पर अमान्य नहीं होेंगे कि विष्वविद्यालय का विघटन कर दिया गया है।''।
7. (1) मूल अधिनियम की धारा 46 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
''46. कतिपय परिस्थितियों में सरकार की विषेष शक्तियाँ.- (1) इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, जहां सरकार को यह प्रतीत होता है कि- 2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की धारा 46 का प्रतिस्थापन।
(क) विष्वविद्यालय ने इस अधिनियम, या इसके अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेषों या नियमों के किसी भी उपबन्ध की उल्लंघना की है, अथवा इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा जारी किसी निर्देष का उल्लंघन किया है; या81 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 4, 2026 (MAGH. 15, 1947 SAKA) (ख) विष्वविद्यालय धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन अधिकथित किसी अपेक्षा
या शर्तों की अनुपालना करने में विफल हो गया है; या
(ग) विष्वविद्यालय वित्तीय कुप्रबन्धन, कुषासन, शैक्षणिक समझौतों, विनियामक
उल्लंघनों या शासन विफलताओं में शामिल है; या
(घ) किसी भी कार्य, चूक, भूल, अनियमितता, दुव्र्यवहार किया है या प्राधिकार का दुरूपयोग किया है, जो विष्वविद्यालय की कार्य प्रणाली की अखंडता या मानकों को गम्भीर रूप से प्रभावित करता है; या
(ङ) राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत की प्रभुता और अखंडता, लोक सुरक्षा, कानून व्यवस्था से संबंधित मामलाें सहित कोई गम्भीर भूल, विधिविरूद्ध या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों (भारत की प्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले कृत्यों सहित किन्तु इन्हीं तक सीमित नहीं) के लिए विष्वविद्यालय परिसरों का उपयोग या दुरूपयोग हुआ है या लोक हित के प्रतिकूल कोई अन्य गम्भीर कार्य हुआ है,
तो सरकार, उपरोक्त यथा वर्ण्ाित किसी भी ऐसे कार्य, उल्लंघन या भूल की जांच करवाने का आदेष दे सकती है और इस प्रयोजन के लिए जांच अधिकारी नियुक्त कर सकती है या पांच से अनधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली समिति गठित कर सकती है।
(2) इस प्रकार नियुक्त जांच अधिकारी या गठित समिति द्वारा जांच की जाएगी और ऐसी
नियुक्ति/गठन की तिथि से तीस दिन के भीतर सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
(3) जांच अधिकारी या समिति को वही शाक्तियां होंगी जो निम्नलिखित मामलों के संबंध में किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का केन्द्रीय अधिनियम 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्ः-
(क) किसी व्यक्ति को समन जारी करना और उपस्थित होने के लिए बाध्य करना
तथा शपथ पर उसका परीक्षण करना;
(ख) ऐसे किसी दस्तावेज या अन्य सामग्री, जिस का साक्ष्य में अनुमान लगाया जा
सकता है, का अन्वेषण करने और प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना;
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख की मांग
करना; तथा
(घ) कोई अन्य मामला, जो विहित किया जाए।
(4) इस अधिनियम के अधीन जांच करने वाले जांच अधिकारी या समिति को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का केन्द्रीय अधिनियम 46) की धारा 215 और अध्याय XXVIII के प्रयोजनों हेतु किसी सिविल न्यायालय के रूप में समझा जाएगा।
(5) उपधारा (2) के अधीन जांच अधिकारी या समिति से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर, यदि सरकार की संतुष्टि हो जाती है कि विष्वविद्यालय ने उपधारा (1) में वर्णित किसी भी उपबन्ध की उल्लंघना की है, तो यह कुलाधिपति, कुलपति, कुल-सचिव और प्रायोजक निकाय को सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी करेगी कि क्यों न धारा 14 के खण्ड (1) के अधीन वर्णित कुलाध्यक्ष को छोड़कर धारा 14, 16, 17, 18, 18क, 19, 20, 21, 24 तथा 29 के अधीन प्राधिकरणों के कृत्य और शक्तियां उक्त प्राधिकरणों को विघटित करके प्रषासक को प्रदान कर दी जाएं।
(6) सात दिन की उक्त अवधि के भीतर कारण बताओ नोटिस के जवाब, यदि कोई हो, पर विचार करने पर, और यदि सरकार, प्राप्त किए गए जबाब, यदि कोई हो, से संतुष्ट नहीं है, प्रषासक नियुक्त कर सकती है। इस प्रकार नियुक्त प्रषासक का कार्यकाल तीन वर्ष की अवधि के लिए अथवा ऐसी बढ़ाई गई अवधि, जो सरकार बढ़ाना उचित समझे, के लिए होगा, इस दौरान धारा 14 के खण्ड (1) के अधीन वर्णित कुलाध्यक्ष को छोड़कर धारा 14, 16, 17, 18, 18क, 19, 20, 21, 24 तथा 29 के अधीन अनुध्यात सभी प्राधिकरण कृत्य करना बन्द कर देंगे। प्रषासक, सरकार के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण के अधीन कृत्य करेगा।
(7) प्रषासक अपने कार्यकाल या ऐसी बढ़ाई गई अवधि के दौरान उपधारा (1) के खण्ड (क) से (घ) के अधीन अनुध्यात उल्लंघनाें के निवारण को दर्षाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। उपधारा (1) के खण्ड (ङ) के भीतर आने वाले कार्यों के मामले में, सामान्य स्थिति बहाल करने बारे सरकार को संतुष्ट करने के लिए प्रषासक द्वारा समरूप रिपोर्ट उपलब्ध करवाई जाएगी।82 HARYANA GOVT. GAZ. (EXTRA.), FEB. 4, 2026 (MAGH. 15, 1947 SAKA) (8) उपधारा (1) के खण्ड (क) से (घ) के अधीन आने वाले कार्यों के मामले में, उपधारा (7) के अधीन यथा अनुध्यात रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, यदि सरकार की संतुष्टि हो जाती है, तो यह प्रषासक को हटा देगी और धारा 14 के खण्ड (1) के अधीन वर्णित कुलाध्यक्ष को छोड़कर धारा 14, 16, 17, 18, 18क, 19, 20, 21, 24 तथा 29 के अधीन नए प्राधिकरणों का गठन करेगी। (9) उपधारा (1) खण्ड (ङ) के अधीन आने वाले कार्यों के मामले में, केवल सरकार ही होगी, जो प्रायोजक निकाय का अपवर्जन करते हुए धारा 14 के खण्ड (1) के अधीन वर्णित कुलाध्यक्ष को छोड़कर धारा 14, 16, 17, 18, 18क, 19, 20, 21, 24 तथा 29 के अधीन अनुध्यात सभी प्राधिकरणों का गठन करेगी तथा निरन्तर गठन करेगी तथा प्राधिकरणों की सभी आस्तियां, दायित्व, कृत्य, शक्तियां और जिम्मेवारियां इस प्रकार नियुक्त किए गए संबंधित प्राधिकरणों में निहित होंगी। (10) जहां सरकार द्वारा इस धारा के अधीन प्रषासक को नियुक्त करने का निर्णय लिया जाता है, तो वह धारा 44ख की उपधारा (2) से (7) के उपबन्धों के अनुसार कृत्य करेगा।''। 8. मूल अधिनियम की अनुसूची में, क्रम संख्या 26 तथा उसके सामने प्रविष्टियों के बाद, निम्नलिखित क्रम संख्या तथा उसके सामने प्रविष्टियां जोड़ी जाएंगी, अर्थात्ः-
2006 के हरियाणा अधिनियम 32 की अनुसूची का संषोधन।
''27. डिजाइन, नवाचार और प्रौद्योगिकी जिला गुरूग्राम।''। विष्वविद्यालय
रितु गर्ग, प्रषासकीय सचिव, हरियाणा सरकार, विधि तथा विधायी विभाग।
12396—L.R.—H.G.P., Pkl.