राजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला, वीरवार, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 शिमला, वीरवार, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 शिमला, वीरवार, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 शिमला, वीरवार, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 शिमला, वीरवार, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा
अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना
शिमला-4, 18 अगस्त, 2010
संख्याः वि0स0/1-35/2010.--संख्याः वि0स0/1-35/2010.--संख्याः वि0स0/1-35/2010.--संख्याः वि0स0/1-35/2010.--संख्याः वि0स0/1-35/2010.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) 105-राजपत्र/2010-19-8-2010 (3669) राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3670
विधेयक, 2010 (2010 का विधेयक संख्यांक 15) जो दिनांक 18 अगस्त, 2010 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है ।
आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह, सचिव । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3671 2010 का विधेयक संख्यांक 15 2010 का विधेयक संख्यांक 15 2010 का विधेयक संख्यांक 15 2010 का विधेयक संख्यांक 15 2010 का विधेयक संख्यांक 15
(स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2010 (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2010 महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2010 महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2010 (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2010 महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय
(विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में) (विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में) (विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में) (विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में) (विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में)
उच्चतर शिक्षा के लिए महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश की स्थापना, निगमन और विनियमन करने तथा इसके क्रियाकलापों का विनियमन करने और उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए विधेयकविधेयकविधेयकविधेयकविधेयक ।
भारत गणराज्य के इकसठवेंं वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा
निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः------
1.1.1.1.1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम महर्षि मारकण्डेश्वर संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 है ।
(2) यह 16 जून, 2010 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
परिभाषाएं । 2.2.2.2.2. इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न
हो,--
(क) ''प्रबन्ध बोर्ड'' से इस अधिनियम की धारा 19 के अधीन गठित
प्रबन्ध बोर्ड अभिप्रेत है;
(ख) "परिसर" (कैम्पस) से विश्वविद्यालय का वह क्षेत्र अभिप्रेत है,
जिसमें यह स्थापित है;
(ग) "दूरवर्ती शिक्षा" से संचार अर्थात् प्रसारण, टेलीकास्टिंग, पत्राचार पाठ्यक्रमोेंं, सेमिनारोेंं, सम्पर्क कार्यक्रमों और ऐसी ही किसी अन्य कार्यपद्धति के किन्हीें भी दो या दो से अधिक साधनों के संयोजन द्वारा दी गई शिक्षा अभिप्रेत है;
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(घ) "कर्मचारी" से विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त कोई व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत शिक्षक और विश्वविद्यालय का अन्य कर्मचारिवृन्द हैं ;
(ङ) "फीस" से, यथास्थिति, विश्वविद्यालय या उसके महाविद्यालयों, संस्थाओं अथवा अध्ययन केन्द्रों द्वारा छात्रों से, किसी भी प्रकार के नाम से किया गया धनीय संग्रहण, जो प्रतिदेय नहीं है, अभिप्रेत है;
(च) "सरकार" या "राज्य सरकार" से हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत
है;
(छ) "शासी निकाय" से इस अधिनियम की धारा 18 के अधीन गठित
शासी निकाय अभिप्रेत है;
(ज) "उच्चतर शिक्षा" से दस जमा दो स्तर से ऊपर के ज्ञान के अध्ययन के लिए, पाठ्यचर्या या पाठ्यक्रम का अध्ययन अभिप्रेत है;
(झ) "छात्रावास" से विश्वविद्यालय या उसके महाविद्यालयों, संस्थाओं और अध्ययन केन्द्रों के छात्रों के निवास के लिए विश्वविद्यालय द्वारा इस रूप में स्थापित या मान्यता प्राप्त निवास स्थान अभिप्रेत है;
() ''अधिसूचना'' से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(ट) ''परिसर (कैम्पस)/बाह्य अध्ययन केन्द्र'' से विश्वविद्यालय द्वारा मुख्य परिसर (कैम्पस) के बाहर स्थापित, उसकी घटक इकाई के रूप में प्रचालित और अनुरक्षित, कोई केन्द्र अभिप्रेत है, जिसमें विश्वविद्यालय की सम्पूरक सुविधाएं, संकाय और कर्मचारिवृन्द (स्टाफ) हो;
(ठ) "राजपत्र" से राजपत्र, हिमाचल प्रदेश अभिप्रेत है;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3673 (ड) ''विहित'' से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा
विहित अभिप्रेत है;
(ढ) ''विनियमन निकाय'' से उच्चतर शिक्षा के शैक्षणिक सन्नियम सुनिश्चित करने के लिए मानदण्ड और शर्तें अधिकथित करने हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित कोई निकाय, जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद्, भारतीय औषधीय परिषद्, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, दूरवर्ती शिक्षा परिषद्, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् आदि अभिप्रेत हैं, और इसके अन्तर्गत सरकार है;
(ण) "धारा" से इस अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;
(त) ''प्रायोजक निकाय'' से महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय न्यास, 55, मॉडल टाऊन, अम्बाला अभिपे्रत है जो, हिमाचल प्रदेश राज्य में, इसके समनुषंगी न्यास ''महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय न्यास'' के माध्यम से भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अन्तर्गत रजिस्ट्रीकृत है ;
(थ) "राज्य" से हिमाचल प्रदेश राज्य अभिप्रेत है;
(द) "परिनियमों", "अध्यादेशों" और "विनियमों" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विश्वविद्यालय के क्रमशः परिनियम, अध्यादेश और विनियम अभिप्रेत हैं;
(ध) "छात्र" से अनुसंधान उपाधि सहित विश्वविद्यालय द्वारा संस्थित किसी उपाधि, डिप्लोमा या अन्य विद्या सम्बन्धी उपाधि के लिए, पाठ्यक्रमानुसार अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालय में नामांकित व्यक्ति अभिप्रेत है;
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(न) "अध्ययन केन्द्र" से ऐसा केन्द्र अभिप्रेत है जो छात्रों को दूरवर्ती शिक्षा के सन्दर्भ में सलाह देने, परामर्श देने या उन द्वारा अपेक्षित कोई अन्य सहायता देने के प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित और अनुरक्षित या मान्यता प्राप्त है;
(प) "शिक्षक" से विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमानुसार अध्ययन करने के लिए छात्रों को शिक्षा देने या अनुसंधान में मार्गदर्शन करने या किसी भी अन्य रूप में मार्गदर्शन करने के लिए अपेक्षित कोई आचार्य, उपाचार्य, प्राध्यापक या कोई अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है; और
(फ) ''विश्वविद्यालय'' से महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन,
हिमाचल प्रदेश अभिपे्रत है ।
3.3.3.3.3. विश्वविद्यालय के उद्देश्यों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे,-
विश्वविद्यालय के उद्देश्य ।
(क) बौद्धिक योग्यताओं के उच्चत्तर स्तर सृजित करने के दृष्टिगत उच्चत्तर शिक्षा में शिक्षण, अध्यापन और प्रशिक्षण का उपबन्ध करना;
(ख) शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए सुविधाएं स्थापित करना;
(ग) अध्यापन और अनुसंधान को कार्यान्वित करना और सतत् शिक्षा
कार्यक्रम प्रस्थापित करना;
(घ) राज्य की आवश्यकताओं से सुसंगत अनुसंधान और विकास के लिए ज्ञान तथा इसके उपयोजन में सहभागी होने के लिए श्रेष्ठता के केन्द्रों का सृजन करना;
(ङ) राज्य में परिसर (कैम्पस) स्थापित करना;
(च) परीक्षा केन्द्र स्थापित करना;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3675 (छ) परीक्षा या ऐसी किसी अन्य पद्धति के आधार पर उपाधियां, डिप्लोमे, प्रमाण-पत्र और अन्य विद्या सम्बन्धी विशेष उपाधियां संस्थित करना; ऐसा करते समय, विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि उपाधियों, डिप्लोमों, प्रमाण-पत्रों और अन्य विद्या सम्बन्धी विशेष उपाधियों का स्तर उससे कम नहीं हो, जो विनियमन निकायों द्वारा अधिकथित किया गया है; और
(ज) लागू नियमों या विनियमों के अध्यधीन परिसर बाह्य केन्द्र (ऑफ
केम्पस सेन्टरज़) स्थापित करना ।
निगमन । 4.4.4.4.4. (1) विश्वविद्यालय के प्रथम कुलाधिपति और प्रथम कुलपति तथा शासी निकाय, प्रबन्ध बोर्ड और विद्या परिषद् के प्रथम सदस्य तथा ऐसे समस्त व्यक्ति, जो इसके पश्चात् ऐसे अधिकारी या सदस्य हो सकेंगे, जब तक वे ऐसा पद धारण करते रहते हैं या सदस्य बने रहते हैं, मिलकर महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश के नाम से एक निगमित निकाय का गठन करेंगे ।
(2) विश्वविद्यालय का शाश्वत् उत्तराधिकार होगा और एक सामान्य मुद्रा होगी तथा उक्त नाम से वह वाद ला सकेगा और उस पर वाद लाया जा सकेगा ।
(3) विश्वविद्यालय और इसका मुख्यालय कुमारहट्टी-सोलन, हिमाचल
प्रदेश में स्थित होगा ।
5.5.5.5.5. (1) विश्वविद्यालय की निम्नलिखित शक्तियां और कृत्य होंगे,
अर्थात्ः--
विश्वविद्यालय की शक्तियां और कृत्य। (i) विद्या की ऐसी शाखाओं में, जिन्हें विश्वविद्यालय समय-समय पर अवधारित करे, शिक्षण की व्यवस्था करना तथा अनुसंधान और ज्ञान की अभिवृद्धि और प्रसारण के लिए तथा प्रसार शिक्षा के लिए उपबंध करना;
(ii) तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में, ऐसी शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के अन्तरराष्ट्रीय मानकोें को बनाए रखने में आधुनिक पद्धतियों और प्रौद्योगिकियों में नई रीति के प्रयोग करना;
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(iii) निवेश-बाह्य अध्यापन और प्रसार सेवाओं की व्यवस्था करना
और जिम्मा लेना;
(iv) किसी विधि के अधीन, किसी कानूनी निकाय द्वारा मान्यता के अध्यधीन, यदि अपेक्षित हो, परीक्षाएं लेना और व्यक्तियों को डिप्लोमे और प्रमाण-पत्र प्रदान करना और उपाधियां तथा अन्य विद्या सम्बन्धी उपाधियां प्रदत्त करना और ऐसे किन्हीं डिप्लोमों, प्रमाण-पत्रों, उपाधियों या अन्य विद्या सम्बन्धी उपाधियोेंेंेंेंं को समुचित और पर्याप्त हेतुक होने पर वापिस लेना;
(v) अध्यापन, प्रशासनिक और अन्य ऐसे पदों का, जिन्हें विश्वविद्यालय समय-समय पर आवश्यक समझे, सृजन करना और उन पर नियुक्तियां करना;
(vi) अध्येतावृत्तियां, अध्ययनवृत्तियां और पुरस्कार संस्थित करना
और प्रदान करना;
(vii) हालों सहित छात्रावासों को स्थापित और अनुरक्षित करना; हालों सहित छात्रावासों, जो विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित न हों और छात्रों के निवास के लिए अन्य आवास को मान्यता देना, मार्गदर्शन करना, पर्यवेक्षण करना और नियन्त्रण करना तथा ऐसी दी गई मान्यता वापिस लेना;
(viii) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों में अनुशासन को विनियमित करना और उसे प्रवर्तित करना तथा ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना, जो आवश्यक समझे जाएं;
(ix) विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के छात्रों और कर्मचारियों केे स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण के संप्रवर्तन (बढ़ावा देने) के लिए व्यवस्था करना;
(x) विश्वविद्यालय या इसके महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए मानदण्ड
अवधारित करना;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3677 (xi) किसी संस्था या उसके सदस्यों या छात्रों को किसी भी प्रयोजन के लिए पूर्णतः या भागतः ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो समय-समय पर विहित की जाएं, मान्यता देना और ऐसी मान्यता को वापिस लेना;
(xii) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 और तद्धीन बनाए गए विनियमों के अध्यधीन, दूरवर्ती शिक्षा सहित उच्चतर शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए विकसित देशों में आधुनिक उच्च प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट केन्द्रों (सेन्टरज ऑफ एॅक्सीलैंस) के साथ द्वियुगमी व्यवस्था विकसित करना और बनाए रखना;
(xiii) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों के समरूप उद्देश्यों और प्रयोजनों वाले किसी अन्य विश्वविद्यालय, प्राधिकरण या संगम या किसी सार्वजनिक निकाय के साथ ऐसे प्रयोजनों के लिए, जैसे करार पाए जाएं, ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, जो समय-समय पर विश्वविद्यालय द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं, सहकार करना;
(xiv) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 और तद्धीन बनाए गए विनियमों के अध्यधीन, अनुसंधान और उच्चतर शिक्षा के संचालन में अन्य राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहकार करना;
(xv) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों के संवर्धन के लिए विश्वविद्यालय से सम्बन्धित या उसमें निहित सम्पत्ति का किसी भी रीति में, जैसी आवश्यक समझी जाए, संव्यवहार करना;
(xvi) विश्वविद्यालय में किसी संस्था को निगमित करने और इसके अधिकारों, सम्पत्तियों और दायित्वों को ग्र्रहण करने और किसी अन्य प्रयोजन के लिए, जो इस अधिनियम के विरूद्ध न हाें, कोई करार करना;
(xvii) ऐसी फीस और अन्य प्रभारों, जो समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए
जाएं, के संदाय की मांग करना और प्राप्त करना;
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(xviii) माता-पिता और छात्रों के सिवाय दान तथा अनुदान प्राप्त करना और विश्वविद्यालय के प्रयोजनों और उद्देश्यों के लिए हिमाचल प्रदेश के भीतर या बाहर, न्यास या विन्यस्त सम्पत्ति सहित किसी स्थावर या जंगम सम्पत्ति को, अर्जित करना, धारित करना, उसका प्रबन्ध और व्ययन करना और निधियों का ऐसी रीति में जिसे विश्वविद्यालय उचित समझे, विनिधान करना;
(xix) अनुसंधान और सलाहकार सेवाओं का उपबन्ध करने के लिए और उस प्रयोजन के लिए अन्य संस्थाओं या निकायों के साथ ऐसी व्यवस्थाएं करना, जैसी विश्वविद्यालय उचित समझे;
(xx) अनुसंधान और अन्य कार्य, जिसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय द्वारा जारी की जाने वाली पुस्तकें भी हैं, के मुद्रण, प्रत्युत्पादन और प्रकाशन की व्यवस्था करना;
(xxi) विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए संस्थाओं और परीक्षाओं को
मान्यता देना;
(xxii) ऐसे अन्य समस्त कार्य करना, जो विश्वविद्यालय के सभी या किन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आनुषंगिक या सहायक हों;
(xxiii) इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार विश्वविद्यालय के उद्देश्यों
की पूर्ति के लिए परिनियम, अध्यादेश और विनियम बनाना;
(xxiv) देश के भीतर तथा बाहर, पारस्परिक आधार पर अन्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ ड्यूल उपाधियां, डिप्लोमे या प्रमाण-पत्रों के लिए उपबन्ध करना;
(xxv) विश्वविद्यालय के शैक्षिक कार्यक्रमों के विभिन्न विषयों, (अनुशासनों)
में एकीकृत पाठ्यक्रमों के लिए उपबन्ध करना;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3679 (xxvi) महाविद्यालय, संस्थाएं, ऑफ कैम्पस केन्द्र, ऑफ शोर केन्द्र और अध्ययन केन्द्र स्थापित करना या केन्द्रीय सरकार के विनियामक निकायों और केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर जारी मानकों और विनियमों को पूर्ण करने के पश्चात् तथा राज्य सरकार का विशेष अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् दूरवर्ती शिक्षा प्रारम्भ करना ; और
(xxvii) पारस्परिक रूप से स्वीकार्य निबन्धनों और शर्तों पर अन्य
संस्थाओं से सहयोग (कलैबोरेशन) करना ।
(2) अपने उद्देश्यों के अनुसरण में और अपनी शक्तियों के प्रयोग तथा अपने कृत्यों के अनुपालन में विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति, चाहे कोई भी हो, के साथ जाति, वर्ग, रंग, पंथ, लिंग, धर्म या मूलवंश के आधार पर कोई भेेदभाव नहीं करेगा।
6.6.6.6.6. विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होगा और वह राज्य सरकार से कोई भी अनुदान या अन्य वित्तीय सहायता प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा ।
विश्वविद्यालय का स्व-वित्तपोषित होना । 7.7.7.7.7. विश्वविद्यालय को किसी भी अन्य संस्था के साथ सम्बद्धता की,
या अन्यथा अपने विशेषाधिकार में लाने की शक्ति नहीं होगी ।
सम्बद्धता की शक्ति का न होना ।
विन्यास निधि । 8.8.8.8.8. (1) प्रायोजक निकाय, विश्वविद्यालय के लिए तीन करोड़ रूपए की रकम से एक विन्यास निधि स्थापित करेगा, जो सरकार के पास गिरवी रखी जाएगी ।
(2) इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों, विनियमों, परिनियमों या अध्यादेशों के उपबन्धों की कड़ी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए, विन्यास निधि को प्रतिभूति निक्षेप के रूप में रखा जाएगा ।
(3) यदि विश्वविद्यालय या प्रायोजक निकाय, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों, अध्यादेशों या विनियमों के किन्हीं उपबन्धों राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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का उल्लंघन करता है, तो राज्य सरकार को, सम्पूर्ण विन्यास निधि या उसके भाग को विहित रीति में समपहृत करने की शक्ति होगी ।
(4) विन्यास निधि से प्राप्त आय का उपयोग, विश्वविद्यालय की अवसंरचना के विकास के लिए किया जाएगा, किन्तु इसका उपयोग विश्वविद्यालय के आवर्ती व्यय की पूर्ति करने में नहीं किया जाएगा ।
(5) विन्यास निधि की रकम, किसी अनुसूचित बैंक में सावधि जमा लेखों के रूप में, इस शर्त के अध्यधीन कि यह निधि राज्य सरकार की अनुज्ञा के बिना प्रत्याहृत नहीं की जाएगी, विश्वविद्यालय के विघटन तक, विनिहित रखी जाएगी ।
9.9.9.9.9. विश्वविद्यालय एक निधि स्थापित करेगा, जिसे साधारण निधि
साधारण निधि ।
कहा जाएगा, जिसमें निम्नलिखित जमा किया जाएगा, अर्थात् :--
(क) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त फीस और अन्य प्रभार;
(ख) प्रायोजक निकाय द्वारा किया गया कोई अभिदाय;
(ग) परामर्शी-सेवा और विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अन्य कार्यों से
प्राप्त कोई आय;
(घ) वसीयतें, दान, विन्यास और अन्य कोई अनुदान; और
(ङ) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त समस्त अन्य राशियां ।
10.10.10.10.10. साधारण निधि, निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई
साधारण निधि का उपयोजन ।
जाएगी, अर्थात्ः--
(क) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षण और अनुसंधान स्टाफ के सदस्यों के वेतन और भत्तों के संदाय के लिए और ऐसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3681
अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भविष्य निधि अभिदायों, उपदान और अन्य फायदों के संदाय के लिए;
(ख) विश्वविद्यालय द्वारा विद्युत, दूरभाष आदि सहित ली गई सेवाओं
के लिए उपगत होने वाले व्ययों के लिए;
(ग) करों या स्थानीय उदग्रहणाें, जहां भी लागू हैं, के संदाय के लिए;
(घ) विश्वविद्यालय की परिसम्पत्तियों के अनुरक्षण के लिए;
(ङ) विश्वविद्यालय द्वारा उपगत ऋणाें, जिसमें उनके ब्याज प्रभार
सम्मिलित हैं, के संदाय के लिए;
(च) शासी निकाय, प्रबन्ध बोर्ड, विद्या परिषद् आदि के सदस्यों के
यात्रा और अन्य भत्तों के संदाय के लिए;
(छ) यथास्थिति, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गाें के छात्रों या अनुसंधान सहकारियों या प्रशिक्षणार्थियों या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों के अधीन ऐसे पुरस्कार के लिए अन्यथा पात्र किसी भी छात्र को अध्येतावृत्तियों, फीस माफियों, छात्रवृत्तियों, सहायकवृत्तियाेंं और अन्य पुरस्कारों के संदाय के लिए;
(ज) इस अधिनियम की धारा 8 और 9 के अधीन सृजित निधियों की
लेखा-परीक्षा की लागत के संदाय के लिए;
(झ) किसी वाद या कार्यवाहियों, जिसमें विश्वविद्यालय पक्षकार है, के
व्यय की पूर्ति के लिए;
() जंगम (चल) और स्थावर (अचल) परिसम्पत्तियों के प्रयोजन के
लिए;
(ट) विश्वविद्यालय द्वारा इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों या नियमों के उपबन्धों को कार्यान्वित करने में उपगत किन्हीं व्ययों के संदाय के लिए; और राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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(ठ) किसी अन्य व्यय के संदाय के लिए, जो प्रबन्ध बोर्ड द्वारा विश्वविद्यालय के प्रयोजनों के लिए व्यय होने के रूप में अनुमोदित होः
परन्तु विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी व्यय, वर्ष के लिए कुल आवर्ती व्यय और कुल अनावर्ती व्यय की सीमाओं, जो प्रबन्ध बोर्ड द्वारा नियत की जाएं, से अधिक, उसके पूर्व अनुमोदन के बिना, उपगत नहीं किया जाएगाः
परन्तु यह और कि उप-खण्ड (ङ) के अधीन विर्निदिष्ट प्रयोजन के लिए
साधारण निधि, शासी निकाय के पूर्व अनुमोदन से उपयोजित की जाएगी ।
11.11.11.11.11. विश्वविद्यालय के निम्नलिखित अधिकारी होंगे, अर्थात्ः-
विश्वविद्यालय के अधिकारी ।
(i) कुलाधिपति; (ii) कुलपति; (iii) रजिस्ट्रार; (iv) मुख्य वित्त और लेखा अधिकारी; और (v) विश्वविद्यालय की सेवा में ऐसे अन्य व्यक्ति, जो परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय के अधिकारी घोषित किए जाएं ।
कुलाधिपति ।
12.12.12.12.12. (1) कुलाधिपति, प्रायोजक निकाय द्वारा, राज्य सरकार के अनुमोदन से, तीन वर्ष की अवधि के लिए, ऐसी रीति में और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर, नियुक्त किया जाएगा जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
(2) कुलाधिपति, विश्वविद्यालय का मुखिया (हैड) होगा ।
(3) कुलाधिपति, शासी निकाय की बैठकों की तथा उपाधियां, डिप्लोमे या अन्य विद्या सम्बन्धी विशेष उपाधियां प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगा ।
(4) कुलाधिपति की निम्नलिखित शक्तियां होंगी, अर्थात् :-
(क) कोई सूचना या अभिलेख मंगवाना;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3683 (ख) कुलपति को नियुक्त करना;
(ग) इस अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (7) के उपबन्धों के
अनुसार कुलपति को हटाना; और
(घ) ऐसी अन्य शक्तियां, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
कुलपति । 13.13.13.13.13. (1) कुलपति की नियुक्ति, शासी निकाय द्वारा संस्तुत तीन व्यक्तियों के पैनल में से, कुलाधिपति द्वारा ऐसे निबन्धनाें और शर्ताें पर की जाएगी, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं और वह उपधारा (7) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अध्यधीन तीन वर्ष की अवधि के लिए पद धारित करेगा :
परन्तु तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात्, व्यक्ति तीन वर्ष की अन्य
अवधि के लिए पुनर्नियुक्ति का पात्र होगाः
परन्तु यह और कि कुलपति अपनी अवधि के अवसान के पश्चात् भी, नए कुलपति के पदग्रहण करने तक, पद धारित करता रहेगा; तथापि किसी भी दशा में यह अवधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी ।
(2) कुलपति, विश्वविद्यालय का प्रधान कार्यपालक और शैक्षणिक अधिकारी होगा तथा उसका विश्वविद्यालय के कार्यकलापों पर साधारण अधीक्षण और नियंत्रण होगा तथा वह विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों के विनिश्चयों का निष्पादन करेगा ।
(3) कुलपति, कुलाधिपति की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के दीक्षांत
समारोह की अध्यक्षता करेगा ।
(4) यदि, कुलपति की राय में किसी ऐसे मामले में, जिसके लिए शक्तियां इस अधिनियम के द्वारा या अधीन किसी अन्य प्राधिकरण को प्रदत्त की गई हैं, तुरन्त कार्रवाई करना आवश्यक हो, तो वह ऐसी कार्रवाई कर सकेगा, जैसी वह आवश्यक समझे, और तत्पश्चात् अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट, यथासंभव शीघ्र अवसर पर, ऐसे अधिकारी या प्राधिकरण को करेगा, जिसने सामान्य अनुक्रम में मामले को निपटाया होताः राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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परन्तु यदि सम्बन्धित अधिकारी या प्राधिकरण की राय में, ऐसी कार्रवाई कुलपति द्वारा नहीं की जानी थी, तो ऐसा मामला कुलाधिपति को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिस पर उसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
(5) यदि, कुलपति की राय में, विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण का कोई भी विनिश्चय, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों या नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों के बाहर है या उससे विश्वविद्यालय के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, तो वह सम्बद्ध प्राधिकरण से इसके विनिश्चय की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर उसके विनिश्चय का पुनरीक्षण करने का अनुरोध कर सकेगा और यदि प्राधिकरण, ऐसे विनिश्चय का पूर्णतः या भागतः पुनरीक्षण करने से इन्कार करता है या पन्द्रह दिन के भीतर कोई विनिश्चय करने में असफल रहता है, तो ऐसा मामला कुलाधिपति को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर उसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
(6) कुलपति ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्त्तव्याें का पालन
करेगा, जो परिनियमों या अध्यादेशों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(7) यदि, किसी भी समय किए गए किसी अभ्यावेदन पर या अन्यथा, और ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसी आवश्यक समझी जाए, स्थिति ऐसी हो और यदि कुलपति का बने रहना विश्वविद्यालय के हित में न हो तो, कुलाधिपति, लिखित आदेश द्वारा, उसमें कारणों को कथित करते हुए, कुलपति को, ऐसी तारीख से, जैसी आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, पद छोड़ने के लिए कह सकेगाः
परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई कार्रवाई करने से पूर्व, कुलपति को
सुनवाई का अवसर दिया जाएगा ।
रजिस्ट्रार ।
14.14.14.14.14. (1) रजिस्ट्रार की नियुक्ति, ऐसी रीति में और सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्ताें पर, जो परिनियमों द्वारा विहित की जाएं, कुलाधिपति द्वारा की जाएगी ।
(2) रजिस्ट्रार को विश्वविद्यालय की ओर से करार करने, संविदा करने, दस्तावेज हस्ताक्षरित करने और अभिलेख अधिप्रमाणित करने की शक्ति होगी तथा वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्त्तव्याें का पालन करेगा, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3685 (3) रजिस्ट्रार शासी निकाय, प्रबन्ध बोर्ड और विद्या परिषद् का
सदस्य-सचिव होगा, परन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा ।
मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी । 15.15.15.15.15. (1) मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी की नियुक्ति, ऐसी रीति और सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्ताें पर, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, कुलाधिपति द्वारा की जाएगी ।
(2) मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और
ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करेगा, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं।
16.16.16.16.16. (1) विश्वविद्यालय ऐसे अन्य अधिकारियों की नियुक्ति कर अन्य अधिकारी । सकेगा, जितने उसके क्रियाकलापों के लिए आवश्यक हों ।
(2) विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की रीति और उनकी शक्तियां और कृत्य ऐसे होंगे, जैसे परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं।
17.17.17.17.17. विश्वविद्यालय के निम्नलिखित प्राधिकरण होंगे, अर्थात् :- विश्वविद्यालय के प्राधिकरण । (i) शासी निकाय; (ii) प्रबन्ध बोर्ड; (iii) विद्या परिषद्; और (iv) ऐसे अन्य प्राधिकरण जो परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय
के प्राधिकरण घोषित किए जाएं ।
शासी निकाय । 18.18.18.18.18. (1) विश्वविद्यालय का शासी निकाय निम्नलिखित से गठित
होगा, अर्थात् :-
(क) कुलाधिपति; (ख) कुलपति; (ग) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट पांच व्यक्ति जिनमें
से दो विख्यात शिक्षाविद् होंगे;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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(घ) विश्वविद्यालय के बाहर से, कुलाधिपति द्वारा नामनिर्दिष्ट, प्रबंधन या सूचना प्रौद्योगिकी का एक विशेषज्ञ;
(ङ) सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति; और (च) राज्य विधानमण्डल द्वारा निर्वाचित किए जाने वाले
राज्य विधान सभा के दो सदस्य।
(2) शासी निकाय, विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्राधिकरण होगा ।
(3) शासी निकाय की निम्नलिखित शक्तियां होंगी, अर्थात्ः--
(क) सामान्य अधीक्षण और निदेशों का उपबन्ध करना और इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों या नियमों द्वारा यथा-उपबंधित ऐसी समस्त शक्तियों के प्रयोग द्वारा विश्वविद्यालय के क्रियाकलापों पर नियंत्रण रखना;
(ख) विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकारियाें के विनिश्चयों का पुनर्विलोकन करना, यदि वे इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों, विनियमों या नियमों के उपबन्धों के अनुरूप नहीं हैं;
(ग) विश्वविद्यालय के बजट और वार्षिक रिपोर्ट का अनुमोदन
करना;
(घ) विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियां अधिकथित
करना;
(ङ) यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाए, जब सभी प्रयासों के बावजूद भी विश्वविद्यालय के कार्यकलापों का सुचारू रूप से चलना संभव नहीं रह जाए, तो विश्वविद्यालय के स्वैच्छिक परिसमापन के बारे में प्रायोजक निकाय को सिफारिश करना; और राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3687 (च) ऐसी अन्य शक्तियां, जो परिनियमों द्वारा विहित की
जाएं।
(4) शासी निकाय, एक कलैण्डर वर्ष में कम से कम तीन बार बैठक
करेगा ।
(5) शासी निकाय की बैठकों की गणपूर्ति पांच से होगी ।
प्रबन्ध बोर्ड । 19.19.19.19.19. (1) प्रबन्ध बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः-
(क) कुलपति;
(ख) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट शासी निकाय के दो
सदस्य;
(ग) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट तीन व्यक्ति, जो
शासी निकाय के सदस्य नहीं हैं; और
(घ) अध्यापकों में से, प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट,
तीन व्यक्ति ।
(2) कुलपति प्रबन्ध बोर्ड का अध्यक्ष होगा ।
(3) प्रबन्ध बोर्ड की शक्तियां और कृत्य ऐसे होंगे, जैसेे परिनियमों
द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
(4) प्रबन्ध बोर्ड की प्रत्येक दो मास में कम से कम एक बार बैठक
होगी ।
(5) प्रबन्ध बोर्ड की बैठकों की गणपूर्ति पांच से होगी ।
विद्या परिषद् । 20.20.20.20.20. (1) विद्या परिषद् में कुलपति और ऐसे अन्य सदस्य होंगे, जो
परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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(2) कुलपति विद्या परिषद् का अध्यक्ष होगा ।
(3) विद्या परिषद्, विश्वविद्यालय की प्रधान शैक्षणिक निकाय होगी, और इस अधिनियम और तदधीन बनाए गए नियमों, परिनियमों और अध्यादेशों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नीतियों का समन्वय करेगी और उन पर सामान्य पर्यवेक्षण रखेगी ।
(4) विद्या परिषद् की बैठकों के लिए गणपूर्ति ऐसी होगी, जैसी
परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
21.21.21.21.21. विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकरणों की संरचना, गठन, शक्तियां
अन्य प्राधिकरण ।
और कृत्य ऐसे होंगे, जो परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
निरर्हताएं ।
22.22.22.22.22. कोई व्यक्ति, विश्वविद्यालय के किसी भी प्राधिकरण या निकाय
का सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा, यदि वह,--
(क) विकृतचित है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित है; या
(ख) अनुन्मोचित दिवालिया है; या
(ग) नैतिक अधमता से अन्तर्वलित किसी अपराध के लिए
सिद्धदोष ठहराया गया है ; या
(घ) निजी कोचिंग कक्षाएं संचालित कर रहा है या उसमें
स्वयं लगा हुआ है; या
(ङ) किसी परीक्षा का संचालन करने में किसी भी रूप में, कहीं पर भी अनुचित आचरण में लिप्त रहने या उसको बढ़ावा देने के लिए दण्डित किया गया है ।
23.23.23.23.23. विश्वविद्यालय के किसी भी प्राधिकरण या निकाय का कोई भी कृत्य या कार्यवाही, उसके गठन में मात्र किसी रिक्ति के या त्रुटि के कारण अविधिमान्य नहीं होगी ।
रिक्तियों से विश्वविद्यालय के किसी भी प्राधिकरण या निकाय की कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना। आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3689 24.24.24.24.24. यदि विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय में कोई आकस्मिक रिक्ति, सदस्य की मृत्यु, पदत्याग या हटाए जाने के कारण होती है, तो उसे उस व्यक्ति या निकाय द्वारा, जो उस सदस्य, जिसका पद रिक्त हुआ है, को नियुक्त या नामनिर्दिष्ट करता है, यथाशक्य शीघ्र भरा जाएगा और आकस्मिक रिक्ति पर नियुक्त या नामनिर्दिष्ट व्यक्ति ऐसे प्राधिकरण या निकाय का, उस शेष अवधि के लिए सदस्य होगा, जिस के दौरान वह व्यक्ति, जिसका स्थान वह भरता है, सदस्य होता ।
समितियां । 25.25.25.25.25. (1) विश्वविद्यालय के प्राधिकारी या अधिकारी निर्देश के ऐसे निबंधनों सहित समितियां गठित कर सकेंगे, जो ऐसी समितियों द्वारा सम्पादित किए जाने वाले विनिर्दिष्ट कार्यों के लिए आवश्यक हों ।
(2) ऐसी समितियों का गठन और उनके कत्र्तव्य ऐसे होंगे, जो
परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
प्रथम परिनियम । 26.26.26.26.26. (1) इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अध्यधीन विश्वविद्यालय के प्रथम परिनियमों मेें निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों और अन्य निकायों, जो समय-समय पर गठित किए जाएं, का गठन, शक्तियां और कृत्य;
(ख) कुलपति की नियुक्ति के निबन्धन और शर्तें तथा उसकी
शक्तियां और कृत्य;
(ग) रजिस्ट्रार और मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी की नियुक्ति की रीति और सेवा के निबंधन और शर्तें तथा उनकी शक्तियां और कृत्य;
(घ) कर्मचारियों की नियुक्ति की रीति, निबंधन और शर्तें तथा
उनकी शक्तियां और कृत्य;
(ङ) विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और
शर्तें;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3690
(च) कर्मचारियों, छात्रों और विश्वविद्यालय के मध्य विवादों
के मामले में माध्यस्थम् के लिए प्रक्रिया;
(छ) छात्रों को शिक्षा फीस (टयूशन फीस) के संदाय से छूट देने और उन्हें छात्रवृत्तियां तथा अध्येतावृत्तियां प्रदान करने के संबन्ध में उपबंध;
(ज) सीटों (स्थानों) के आरक्षण के विनियमन सहित, प्रवेश
की नीति से संबन्धित उपबंध;
(झ) छात्रों से प्रभारित की जाने वाली फीस से सम्बन्धित
उपबंध; और
(ञ) विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटों (स्थानों) की संख्या से
सम्बन्धित उपबंध ।
(2) प्रथम परिनियम, सरकार द्वारा बनाए जाएंगे और राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे तथा उनकी एक प्रति राज्य विधान सभा के समक्ष रखी जाएगी ।
पश्चात्वर्ती परिनियम।
27.27.27.27.27. (1) इस अधिनियम और तदधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय के पश्चात्वर्ती परिनियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः--
(क) विश्वविद्यालय के नए प्राधिकरणों का सृजन;
(ख) लेखा नीति और वित्तीय प्रक्रिया;
(ग) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों में अध्यापकों का प्रतिनिधित्व;
(घ) नए विभागों का सृजन और विद्यमान विभाग का समापन
या पुनः संरचना;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3691 (ङ) पदक और पुरस्कार संस्थित करना; (च) पदों का सृजन और पदों की समाप्ति के लिए प्रक्रिया; (छ) फीस का पुनरीक्षण; (ज) विभिन्न पाठ्य विवरणों में सीटों (स्थानों) की संख्या का
परिवर्तन; और
(झ) अन्य समस्त विषय, जो इस अधिनियम के उपबंधों के
अधीन परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाने हैं ।
(2) प्रथम परिनियम से भिन्न विश्वविद्यालय के परिनियम, प्रबन्ध बोर्ड
द्वारा शासी निकाय के अनुमोदन से बनाए जाएंगे ।
(3) प्रबन्ध बोर्ड, समय-समय पर, नए या अतिरिक्त परिनियम बना सकेगा या इस प्रकार बनाए गए परिनियमों का, इस धारा में इसके पश्चात् उपबंधित रीति मेें, संशोधन या निरसन कर सकेगाः
परन्तु यह कि प्रबन्ध बोर्ड, तब तक विश्वविद्यालय के किसी विद्यमान प्राधिकरण की प्रास्थिति, शक्तियों या गठन को प्रभावित करने वाले परिनियम नहीं बनाएगा या परिनियम में कोई संशोधन नहीं करेगा, जब तक कि ऐसे प्राधिकरण को प्रस्ताव पर राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान नहीं किया गया हो और इस प्रकार व्यक्त कोई राय, लिखित रूप में होगी तथा शासी निकाय द्वारा इस पर विचार किया जाएगा ।
(4) ऐसा प्रत्येक परिनियम या परिनियमों में परिवर्धन या परिनियमों
का संशोधन या निरसन, सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होगा :
परन्तु प्रबंध बोर्ड द्वारा कोई भी परिनियम, जो विद्यार्थियों के अनुशासन और शिक्षण, शिक्षा और परीक्षा के स्तरमानों को प्रभावित करते हों, विद्या परिषद् से परामर्श किए बिना नहीं बनाए जाएंगे ।
प्रथम अध्यादेश । 28.28.28.28.28. (1) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों या परिनियमों के उपबंधों के अध्यधीन, प्रबन्ध बोर्ड, शासी निकाय के अनुमोदन से, ऐसे प्रथम अध्यादेश बना सकेगा, जिन्हें वह विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने के राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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लिए समुचित समझे और ऐसे अध्यादेशों में निम्नलिखित समस्त या किन्हीं भी विषयों के सबंध में उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात् :-
(क) विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रवेेश और इस रूप में उनका
नामांकन;
(ख) विश्वविद्यालय की उपाधियों, डिप्लोमों और प्रमाण-पत्रों
के लिए अधिकथित किए जाने वाले पाठ्यक्रम;
(ग) उपाधियां, डिप्लोमें, प्रमाण-पत्र और अन्य विद्या संबंधी उपाधियां प्रदान करना, उनके लिए न्यूनतम अर्हताएं तथा उनके प्रदान किए जाने और अभिप्राप्त किए जाने के संबंध में साधन;
(घ) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, वृत्तिकाएं, पदक और पुरस्कार
प्रदान किए जाने की शर्तें;
(ङ) परीक्षा निकायों, परीक्षकों और अनुसीमकों (मॉडरेटरज) की पदावधि और नियुक्ति की रीति तथा कर्त्तव्यों सहित परीक्षाओं का संचालन;
(च) विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों, परीक्षाओं, उपाधियों
और डिप्लोमों के लिए प्रभारित की जाने वाली फीस;
(छ) विश्वविद्यालय के छात्रावासों में छात्रों के निवास की
शर्तें;
(ज) छात्रों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में
उपबंध ;
(झ) किसी अन्य निकाय का सृजन, संरचना और कृत्य, जो विश्वविद्यालय के शैक्षणिक जीवन के उन्नयन के लिए आवश्यक समझे जाएं;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3693 (ञ) अन्य विश्वविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा संस्थाओं के
साथ सहकार और सहयोग की रीति; और
(ट) ऐसे सभी अन्य विषय, जिनका इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों के अधीन अध्यादेशों द्वारा उपबन्ध किया जाना अपेक्षित है ।
(2) प्रबंध बोर्ड, या तो शासी निकाय के सुझाव को सम्मिलित करते हुए अध्यादेशों को उपान्तरित करेगा या शासी निकाय द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव को सम्मिलित न करने के कारण प्रस्तुत करेगा और ऐसे कारणों, यदि कोई हों, के साथ अध्यादेशों को शासी निकाय को वापिस भेजेगा और उनकी प्राप्ति पर शासी निकाय, प्रबंध बोर्ड की टिप्पणियों पर विचार करेगा तथा विश्वविद्यालय के अध्यादेशों को ऐसे उपान्तरणों सहित या उनके बिना, अनुमोदित करेगा और तत्पश्चात् शासी निकाय द्वारा यथा अनुमोदित अध्यादेश प्रवृत्त होंगे।
पश्चात्वर्ती अध्यादेश। 29.29.29.29.29. (1) प्रथम अध्यादेश से अन्यथा (भिन्न) समस्त अध्यादेश, विद्या परिषद् द्वारा बनाए जाएंगे, जिन्हेें प्रबंध बोर्ड द्वारा अनुमोदित किए जाने के पश्चात् शासी निकाय को उसके अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा ।
(2) विद्या परिषद्, प्रबंध बोर्ड और शासी निकाय के सुझावों को सम्मिलित करते हुए अध्यादेशों को या तो उपांतरित करेगी या दिए गए सुझावों को सम्मिलित न करने के लिए कारण देगी और ऐसे कारणों सहित, यदि कोई हों, अध्यादेश को वापिस भेजेगी, तथा प्रबंध बोर्ड और शासी निकाय, विद्या परिषद् की टिप्पणियों पर विचार करेेंगे और विश्वविद्यालय के अध्यादेशों को ऐसे उपांतरणों सहित या उनके बिना अनुमोदित करेंगे, और तत्पश्चात् शासी निकाय द्वारा यथा-अनुमोदित अध्यादेश प्रवृत्त होंगे ।
विनियम । 30.30.30.30.30. विश्वविद्यालय के प्राधिकरण, प्रबंध बोर्ड के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन, उनके स्वयं के और उनके द्वारा नियुक्त समितियों के कारबार के संचालन के लिए, इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों और अध्यादेशों से संगत विनियम बना सकेंगे ।
प्रवेश । 31.31.31.31.31. (1) विश्वविद्यालय में प्रवेश, सर्वथा योग्यता के आधार पर
दिया जाएगा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3694
(2) विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए योग्यता (मैरिट) या तो प्रवेश के लिए अर्हता परीक्षा में प्राप्त अंकों या ग्रेड और पाठ्यचर्या के साथ पाठ्येतर और क्रियाकलापों में उपलब्धियों के आधार पर या राज्य स्तर पर या तो समरूप पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों के संगम द्वारा या राज्य के किसी अभिकरण द्वारा संचालित किसी प्रवेश परीक्षा में अभिप्राप्त अंकों या ग्रेड के आधार पर अवधारित की जा सकेगी :
परन्तु व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश, केवल प्रवेश परीक्षा
के माध्यम से ही होगा ।
(3) अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्राें और विकलांग छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए सीटें (स्थान), राज्य सरकार की नीति के अनुसार आरक्षित की जाएंगी ।
(4) प्रत्येक कोर्स में प्रवेश के लिए कम से कम पच्चीस प्रतिशत सीटें
(स्थान), हिमाचल के स्थाई निवासियों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी ।
फीस संरचना ।
32.32.32.32.32. (1) विश्वविद्यालय समय-समय पर अपनी फीस संरचना तैयार तथा पुनरीक्षित करेगा और इसे सरकार को अनुमोदन के लिए भेजेगा और सरकार प्रस्ताव प्राप्ति के तीन मास के भीतर अनुमोदन सूचित (प्रदान) करेगी :
परन्तु यदि सरकार तीन मास के भीतर अनुमोदन सूचित नहीं करती है, तो इसे सरकार द्वारा सम्यक् रूप से अनुमोदित किया गया समझा जाएगा :
परन्तु यह और कि प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए फीस संरचना का, प्रॉस्पेक्टस को ज़ारी करने से पूर्व विनिश्चय कर लिया जाएगा और इसे प्रास्पेक्टस में दर्शित किया जाएगा :
परन्तु यह और भी कि शैक्षणिक वर्ष के दौरान फीस संरचना को पुनरीक्षित
या उपान्तरित नहीं किया जाएगा ।
(2) विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गई फीस संरचना पर, राज्य सरकार द्वारा विहित रीति में गठित की जाने वाली समिति द्वारा विचार किया राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3695 जाएगा, जो इस पर विचार करने के पश्चात् अपनी सिफारिशें सरकार को प्रस्तुत करेगी, कि क्या प्रस्तावित फीसः--
(क) निम्नलिखित के लिएः--
(i) विश्वविद्यालय के आवर्ती व्यय की पूर्ति के लिए;
और
(ii) विश्वविद्यालय के और विकास के लिए अपेक्षित
बचतों के लिए,
स्त्रेात जुटाने के लिए पर्याप्त है; और
(ख) अयुक्तियुक्त रूप से अधिक नहीं है ।
(3) उपधारा (2) के अधीन सिफारिशें प्राप्त होने के पश्चात् यदि सरकार का समाधान हो जाता है, तो वह फीस संरचना को अनुमोदित कर सकेगी।
(4) उपधारा (3) के अधीन सरकार द्वारा अनुमोदित फीस संरचना,
अगले पुनरीक्षण तक विधिमान्य रहेगी ।
परीक्षाएं । 33.33.33.33.33. प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के प्रारम्भ पर और किसी भी दशा मेें प्रत्येक कलैडर वर्ष के 30 अगस्त तक, न कि उसके पश्चात् (अपश्चात्), विश्वविद्यालय स्वयं द्वारा संचालित प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए परीक्षाओं की अनुसूची, यथास्थिति, अर्द्धवार्षिक या वार्षिक आधार पर तैयार और प्रकाशित करेगा और ऐसी अनुसूची का कड़ाई से पालन करेगा :
परन्तु यह कि किसी भी कारण से, यदि विश्वविद्यालय इस अनुसूची का पालन करने में असमर्थ है, तो वह यथासाध्य-शीघ्रता से, एक रिपोर्ट, जिसमें परीक्षा की प्रकाशित अनुसूची का अनुसरण न करने के ब्यौरेवार कारण दिए गए हों, सरकार को प्रस्तुत करेगा । सरकार उस पर ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जिन्हें वह भविष्य में बेहतर अनुपालन के लिए उचित समझे । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
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स्पष्टीकरणः--स्पष्टीकरणः--स्पष्टीकरणः--स्पष्टीकरणः--स्पष्टीकरणः--''परीक्षाओं की अनुसूची'' से, प्रत्येक प्रश्न-पत्र जो परीक्षाओं की स्कीम का भाग हो, के प्रारम्भ होने का समय, दिन और तारीख के बारे में ब्यौरा देने वाली सारणी अभिप्रेत है और जिसमें व्यावहारिक परीक्षाओं का ब्यौरा भी सम्मिलित होगा ।
परिणामों की घोषणा ।
34.34.34.34.34. (1) विश्वविद्यालय अपने द्वारा संचालित प्रत्येक परीक्षा के परिणामों की घोषणा, एक विशिष्ट पाठ्यक्रम की परीक्षा की अंतिम तारीख से तीस दिन के भीतर करने का प्रयास करेगा और किसी भी दशा में उन्हें ऐसी तारीख से ज्यादा से ज्यादा पैंतालीस दिन के भीतर घोषित करेगा :
परन्तु किसी भी कारण से यदि विश्वविद्यालय पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर किसी भी परीक्षा के परिणामों की अंतिम रूप से घोषणा करने में असमर्थ है, तो यह एक रिपोर्ट, जिसमें विलम्ब के ब्यौरेवार कारण दिए गए हों, सरकार को प्रस्तुत करेगा । सरकार उस पर ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जिन्हें वह भविष्य में बेहतर अनुपालना के लिए उचित समझे ।
(2) कोई भी परीक्षा या किसी परीक्षा का परिणाम, केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं ठहराया जाएगा कि विश्वविद्यालय ने धारा 33 और इस धारा में यथा नियत परीक्षा की अनुसूची का पालन नहीं किया है ।
दीक्षांत समारोह ।
35.35.35.35.35. विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह, प्रत्येक शेैक्षणिक वर्ष में उपाधियां, डिप्लोमे प्रदान करने या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, परिनियमों द्वारा यथाविहित रीति में आयोजित किया जाएगा ।
विश्वविद्यालय का प्रत्यायन ।
36.36.36.36.36. विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद् (एन.ए.ए. सी.), बंगलौर से अपनी स्थापना के तीन वर्ष के भीतर, प्रत्यायन अभिप्राप्त करेगा और सरकार तथा ऐसे अन्य विनियमन निकायों को, जो विश्वविद्यालय द्वारा चलाए गए पाठ्यक्रमों से संबद्ध हैं, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद् द्वारा विश्वविद्यालय को दिए ग्रेड के बारे में सूचित करेगा तथा विश्वविद्यालय तत्पश्चात् प्रत्येक पांच वर्ष के अन्तराल पर ऐसे प्रत्यायन को नवीकृत करवाएगा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3697 37.37.37.37.37. इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, विश्वविद्यालय, विनियमन निकायों के समस्त नियमों, विनियमों, सन्नियमों आदि का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा और ऐसे निकायों को ऐसी समस्त सुविधाएं और सहायता उपलब्ध करवाएगा, जो उनके द्वारा कृत्यों के निर्वहन और कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए अपेक्षित हों ।
विश्वविद्यालय द्वारा विनियमन करने वाले निकायों के नियमों, विनियमों, सन्नियमों आदि का अनुसरण ।
वार्षिक रिपोर्ट। 38.38.38.38.38. (1) विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट, प्रबंध बोर्ड द्वारा तैयार की जाएगी, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विश्वविद्यालय द्वारा अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उठाए गए कदम सम्मिलित होंगे और वह शासी निकाय द्वारा अनुमोदित की जाएगी तथा उसकी प्रति, प्रायोजक निकाय को प्रस्तुत की जाएगी।
(2) उपधारा (1) के अधीन तैयार की गई वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियां
सरकार को भी प्रस्तुत की जाएंगी ।
वार्षिक लेखे और लेखा परीक्षा । 39.39.39.39.39. (1) विश्वविद्यालय के तुलन-पत्र सहित वार्षिक लेखे, प्रबंध बोर्ड के निदेशों के अधीन तैयार किए जाएंगे और वार्षिक लेखे विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त लेखा परीक्षकों द्वारा प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार संपरीक्षित किए जाएंगे ।
(2) लेखा परीक्षा रिपोर्ट सहित वार्षिक लेखे की एक प्रति, शासी
निकाय को प्रस्तुत की जाएगी ।
(3) शासी निकाय के संप्रेक्षणों सहित वार्षिक लेखे और लेखा परीक्षा
रिपोर्ट की एक प्रति, प्रायोजक निकाय को प्रस्तुत की जाएगी ।
(4) उपधारा (1) के अधीन तैयार किए गए वार्षिक लेखों और
तुलन-पत्र की प्रतियां, सरकार को भी प्रस्तुत की जाएंगी ।
(5) विश्वविद्यालय के लेखों और लेखापरीक्षा रिपोर्ट से उद्भूत सरकार का परामर्श, यदि कोई हो, शासी निकाय के समक्ष रखा जाएगा और शासी निकाय ऐसे निदेश जारी करेगा, जैसे वह उचित समझे तथा उसकी अनुपालना के बारे में सरकार को रिपोर्ट की जाएगी । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3698
सरकार की विश्वविद्यालय का निरीक्षण करने की शक्तियां ।
40.40.40.40.40. (1) अध्यापन, परीक्षा और अनुसंधान या विश्वविद्यालय से सम्बन्धित किसी अन्य विषय केेे स्तर अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए सरकार, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों से, जैसा यह उचित समझे, निर्धारण करवाएगी ।
(2) सरकार, शोधक कार्रवाई के लिए ऐसेे निर्धारण के परिणाम के संबंध में अपनी सिफारिशें, विश्वविद्यालय को संसूचित करेगी और विश्वविद्यालय ऐसे शोधक उपाय करेगा, जो सिफारिशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हाें ।
(3) यदि विश्वविद्यालय उपधारा (2) में दी गई सिफारिशों का युक्तियुक्त समय में अनुपालन करने में असफल रहता है, तो सरकार, ऐसे निदेश दे सकेगी, जैसे वह ऐसे अनुपालन के लिए समुचित समझे, जो विश्वविद्यालय पर आबद्धकर होंगे ।
प्रायोजक निकाय द्वारा विश्वविद्यालय का विघटन ।
41.41.41.41.41. (1) प्रायोजक निकाय, सरकार और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों को इस प्रभाव का कम से कम एक वर्ष का अग्रिम नोटिस देकर, विश्वविद्यालय का विघटन कर सकेगा :
परन्तु विश्वविद्यालय का विघटन, नियमित पाठ्यक्रम वाले छात्रों के अंतिम बैच द्वारा अपना पाठ्यक्रम पूर्ण किए जाने और उन्हें, यथास्थिति, उपाधियां, डिप्लोमे या पुरस्कार प्रदान किए जाने के पश्चात् ही प्रभावी होगा ।
(2) विश्वविद्यालय के विघटन पर, विश्वविद्यालय की समस्त
परिसम्पत्तियां और दायित्व, प्रायोजक निकाय में निहित हो जाएंगे :
परन्तु यदि प्रायोजक निकाय, विश्वविद्यालय को इसकी स्थापना के पच्चीस वर्ष के भीतर विघटित कर देता है, तो विश्वविद्यालय की सभी परिसम्पत्तियां, समस्त विल्लंगमों से रहित, सरकार में निहित हो जाएंगी ।
42.42.42.42.42. (1) यदि सरकार को यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय ने इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों या अध्यादेशों के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन किया है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी किए
कतिपय परिस्थितियों में सरकार की विशेष शक्तियां । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3699 गए किन्हीं निदेशों का उल्लंघन किया है या दिए गए किन्हीं परिवचनों का पालन करना छोड़ दिया है या विश्वविद्यालय में वित्तीय कुप्रबंध या कुप्रशासन की स्थिति उत्पन्न हो गई है, तो यह, विश्वविद्यालय को, पैंतालीस दिन के भीतर, कारण दर्शित करने की अपेक्षा करते हुए, नोटिस जारी करेगी कि उसके समापन का आदेश क्यों नहीं किया जाना चाहिए ।
(2) यदि सरकार का, उपधारा (1) के अधीन जारी किए गए नोटिस पर विश्वविद्यालय का उत्तर प्राप्त होनेे पर, समाधान हो जाता है कि इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों या अध्यादेशों के समस्त या किन्हीं उपबंधों के उल्लंघन का या इस अधिनियम के अधीन इसके द्वारा जारी किए गए निदेशों के उल्लंघन का, या दिए गए परिवचनों का पालन न करने का या वित्तीय कुप्रबन्ध या कुप्रशासन का प्रथमदृष्टया मामला है, तो वह ऐसी जांच का आदेश करेगी, जैसी वह आवश्यक समझे।
(3) सरकार, उपधारा (2) के अधीन किसी भी जांच के प्रयोजन के लिए, किसी भी अभिकथन की जांच करने और उस पर रिपोर्ट देने के लिए, जांच अधिकारी या अधिकारियों को नियुक्त कर सकेगी ।
1908 का 5 (4) उपधारा (3) के अधीन नियुक्त जांच अधिकारी या अधिकारियों की वही शक्तियां होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन, निम्नलिखित विषयों के संबंध में वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्ः-
(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना और
शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
(ख) कोई ऐसा दस्तावेज या कोई अन्य सामग्री, जो साक्ष्य में पोषणीय हो, का प्रकटीकरण और उसे पेश किए जाने की अपेक्षा करना;
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से लोक अभिलेख की
अपेक्षा करना; और
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3700
(घ) कोई अन्य मामला जो विहित किया जाए ।
1974 का 2
(5) इस अधिनियम के अधीन जांच कर रहे जांच अधिकारी या अधिकारियों को, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 195 और अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा।
(6) उपधारा (3) के अधीन नियुक्त अधिकारी या अधिकारियों से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर, यदि सरकार का समाधान हो जाता है कि विश्वविद्यालय ने इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों या अध्यादेशों के समस्त या किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन किया है, या इस अधिनियम के अधीन इसके द्वारा जारी किन्हीं निदेशों का उल्लंघन किया है या दिए गए परिवचनों का पालन करना छोड़ दिया है या विश्वविद्यालय में वित्तीय कुप्रबंध और कुप्रशासन की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे विश्वविद्यालय के शेैक्षणिक स्तर को खतरा है, तो वह विश्वविद्यालय के समापन के आदेश करेगी और कोई प्रशासक नियुक्त करेगी ।
(7) उपधारा (6) के अधीन नियुक्त प्रशासक को इस अधिनियम के अधीन, शासी निकाय तथा प्रबंध बोर्ड की सभी शक्तियां होंगी और वह इनके सभी कर्त्तव्यों के अध्यधीन होगा और विश्वविद्यालय के कार्यकलापों का प्रशासन करेगा, जब तक कि नियमित पाठ्यक्रम के छात्रों का अंतिम बैच अपना पाठ्यक्रम पूरा न कर ले तथा उन्हें, यथास्थिति, उपाधियां, डिप्लोमे या पुरस्कार प्रदान न कर दिए जाएं ।
(8) नियमित पाठ्यक्रमों के छात्रों के अंतिम बैचों को, यथास्थिति, उपाधियां, डिप्लोमे या पुरस्कार प्रदान किए जाने के पश्चात् प्रशासक, इस प्रभाव की एक रिपोर्ट सरकार को देगा ।
(9) उपधारा (8) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विश्वविद्यालय को विघटित करने का आदेश जारी करेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से विश्वविद्यालय विघटित हो जाएगा तथा विघटन की तारीख से विश्वविद्यालय की समस्त परिसम्पत्तियां समस्त विल्लंगमों से रहित, सरकार में निहित हो जाएंगी । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3701 43.43.43.43.43. (1) सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित नियम बनाने की शक्ति । करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः--
(क) धारा 42 की उपधारा (4) के खण्ड (घ) के अधीन विहित
किए जाने वाले विषय; और
(ख) अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा
विहित किए जाने अपेक्षित हैं, या किए जा सकेंगे ।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए समस्त नियम, उनके इस प्रकार बनाए जाने के पश्चात्, यथाशक्य शीघ्र, राज्य विधान सभा के समक्ष, जब वह सत्र में हो, दस दिन से अन्यून अवधि के लिए, जो एक सत्र में या दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी, रखे जाएंगे और यदि, उस सत्र के, जिसमें वे इस प्रकार रखे गए हों या ठीक बाद के सत्र के अवसान से पूर्व, राज्य विधान सभा ऐसे किन्हीं भी नियमों में उपान्तरण करती है या सहमत हो जाती है कि ऐसे कोई नियम नहीं बनाए जाने चाहिए, तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, ऐसे नियम केवल ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होंगे या उनका कोई प्रभाव नहीं होगा, तथापि ऐसा कोई भी उपान्तरण या बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में की गई किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
कठिनाईयां दूर करने की शक्ति । 44.44.44.44.44. (1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों और जो ऐसी कठिनाई को दूर करने के लिए इसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होंः
परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारम्भ से
दो वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके इस प्रकार किए जाने के पश्चात्, यथाशक्यशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3702
45.45.45.45.45. (1) महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और
विनियमन) अध्यादेश, 2010 का एतद् द्वारा निरसन किया जाता है ।
2010 के अध्यादेश संख्यांक 1 का निरसन और व्यावृत्ति ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3703
उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन
शिक्षा वह बुनियादी कारक है जो मानव के चहुमुखी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । राज्य और देश की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां, शिक्षा के लिए और अधिक ध्यान देने की अपेक्षा करती हैं । विकास की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आधुनिक और परिष्कृत सुविधाओं सहित और अधिक शैक्षिक संस्थाएं खोलना अनिवार्य है। प्रत्येक बीतते दिन के साथ राज्य में, नए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक महाविद्यालयों और संस्थाओं आदि को खोलने की आवश्यकता जोर पकड़ रही है ।
देश में अन्य राज्यों की तरह सोसाइटियां, प्राइवेट सेक्टर में विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव (निवेदन) कर रही हैं। बहुत सी राज्य सरकारों ने प्राइवेट विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति प्रदान कर दी है । राज्य सरकार को भी ऐसे पक्षकारों से, राज्य में प्राइवेट विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए बहुत से आवेदन प्राप्त हो रहे हैं । भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अधीन रजिस्ट्रीकृत महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय न्यास, अम्बाला, ने भी "महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय न्यास" सोलन, हिमाचल प्रदेश के नाम से समनुषंगी न्यास रजिस्ट्रीकृत करने के पश्चात्, प्राइवेट विश्वविद्यालय नामतः "महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश" स्थापित करने बारे प्रस्ताव प्रस्तुत किया था और विस्तृत परीक्षण के पश्चात् सरकार ने 20 अगस्त, 2008 को "आशय पत्र" जारी कर दिया था ।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (प्राइवेट विश्वविद्यालयों की स्थापना और स्तरमानों का बनाए रखना) विनियम, 2003 के उपबन्धों के दृष्टिगत, प्रत्येक प्राइवेट विश्वविद्यालय, राज्य द्वारा अलग से बनाए गए अधिनियम द्वारा स्थापित किया जाना चाहिए तथा जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के उपबन्धों के अनुरूप होना चाहिए । प्राइवेट विश्वविद्यालय न केवल ऐकिक विश्वविद्यालय होना चाहिए, बल्कि उसमें अध्यापन, अनुसंधान, परीक्षण और विस्तारी क्रियाकलापों के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी हों । अतः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम की अपेक्षा तथा मानदण्डों को पूरा करने के आशय से विधान लाने का विनिश्चय किया गया है, जो राज्य में उच्चतर शिक्षा के लिए महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश की स्थापना, निगमन और विनियमन का उपबन्ध करेगा । विधान सभा सत्र में नहीं थी और मामले की अत्यावश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अध्यादेश प्रख्यापित करने का विनिश्चय किया गया था । अतः महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश द्वारा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213(1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अध्यादेश, 2010 (2010 का अध्यादेश संख्यांक 1), तारीख राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3704
11-06-2010 को प्रख्यापित किया गया था, जिसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में तारीख 16-06-2010 को प्रकाशित किया गया था । अब, यह विधेयक, बिना किसी उपान्तरण के उक्त अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिए है ।
यह विधेयक उपयुर्क्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है ।
ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान, प्रभारी मन्त्री । शिमला : तारीख :.........................., ,2010
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वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन
यह विधेयक राज्य में महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय की स्थापना, पूर्णतः प्राइवेट सेक्टर में करने का उपबंध करता है । इस विधेयक के उपबन्धों के अधिनियमित होने से राजकोष पर कोई वित्तीय व्यय अन्तर्वलित नहीं होगा ।
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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
विधेयक के खण्ड 43 और 26 राज्य सरकार को इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने हेतु क्रमशः नियम बनाने और विश्वविद्यालय के प्रथम परिनियम बनाने के लिए सशक्त करते हैं । इसके अतिरिक्त विधेयक के खण्ड 27 और 28 विश्वविद्यालय के प्रबन्ध बोर्ड को विश्वविद्यालय के क्रमशः पश्चात्वर्ती परिनियम और प्रथम अध्यादेश बनाने के लिए सशक्त करते हैं। शक्तियों का प्रस्तावित प्रत्यायोजन अनिवार्य और सामान्य स्वरूप का है । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3705
Bill No. 15 of 2010
THE MAHARISHI MARKANDESHWAR UNIVERSITY
(ESTABLISHMENT AND REGULATION) BILL, 2010
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
to provide for establishment, incorporation and regulation of
Maharishi Markandeshwar University, Solan, Himachal Pradesh for
higher education and to regulate its functioning and for matters
connected therewith or incidental thereto.
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-first Year of the Republic of India as follows:—
1. (1) This Act may be called the Maharishi Markandeshwar
University (Establishment and Regulation) Act, 2010.
Short title and commence- ment.
(2) It shall be deemed to have come into force on 16th of June,
2010.
Definitions.
2. In this Act, unless the context otherwise requires,—
(a) "Board of Management" means the Board of Management
constituted under section 19 of this Act;
(b) "campus" means the area of University within which it is
established;
(c) "distance education" means education imparted by combination of any two or more means of communication, viz. broadcasting, telecasting, correspondence courses, seminars, contact programmes and any other such methodology;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3706
(d) "employee" means any person appointed by the University and
includes teachers and other staff of the University;
(e) "fee" means monetary collection made by the University or its colleges, institutions or study centers, as the case may be, from the students by whatever name it may be called, which is not refundable;
(f) "Government" or "State Government" means the Government
of Himachal Pradesh;
(g) "Governing Body" means the Governing Body constituted under
section 18 of this Act;
(h) "higher education" means study of a curriculum or course for
the pursuit of knowledge beyond 10+2 level;
(i) "hostel" means a place of residence for the students of the University, or its colleges, institutions and study centers, established or recognized to be as such by the University;
(j) "notification" means a notification published in the Official
Gazette;
(k) "off campus/study centre" means a centre of the University established by it outside the main campus operated and maintained as its constituent unit, having the University's complement of facilities, faculty and staff;
(l) "Official Gazette" means the Rajpatra, Himachal Pradesh;
(m) "prescribed" means prescribed by rules made under this Act;
(n) "regulating body" means a body established by the Central Government for laying down norms and conditions for ensuring academic standards of higher education, such as University Grants Commission, All India Council of Technical Education, National Council of Teacher Education, Medical Council of राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3707 India, Pharmaceutical Council of India, National Council of Assessment and Accreditation, Indian Council of Agriculture Research, Distance Education Council, Council of Scientific and Industrial Research etc. and includes the Government;
(o) "section" means a section of this Act;
(p) "sponsoring body" means the Maharishi Markandeshwar University Trust, 55, Model Town, Ambala registered under the Indian Trust Act, 1882 through its subsidiary trust "Maharishi Markandeshwar University Trust" in the State of Himachal Pradesh.
(q) "State" means State of Himachal Pradesh;
(r) "statutes", "ordinances" and "regulations" mean respectively, the statutes, ordinances and regulations of the University made under this Act;
(s) "student" means a person enrolled in the University for taking a course of study for a degree, diploma or other academic distinction instituted by the University, including a research degree;
(t) "study centre" means a centre established and maintained or recognized by the University for the purpose of advising, counseling or for rendering any other assistance required by the students in the context of distance education;
(u) "teacher" means a Professor, Reader, Lecturer or any other person required to impart education or to guide research or to render guidance in any form to the students for pursuing a course of study of the University; and
(v) "University" means Maharishi Markandeshwar University,
Solan, Himachal Pradesh.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3708
3. The objects of the University shall include,—
The objects of the University.
(a) to provide instructions, teaching and training in higher education with a view to create higher levels of intellectual abilities;
(b) to establish facilities for education and training;
(c) to carry out teaching, research and offer continuing education
programmes;
(d) to create centres of excellence for research and development relevant to the needs of the State and for sharing knowledge and its application;
(e) to establish campus in the State;
(f) to establish examination centres;
(g) to institute degrees, diplomas, certificates and other academic distinctions on the basis of examination or any such other method; while doing so, the University shall ensure that the standards of degrees, diplomas, certificates and other academic distinctions are not lower than those laid down by regulating bodies; and
(h) to set up off campus centres, subject to applicable rules or
regulations.
Incorporation.
4. (1) The first Chancellor and the first Vice-Chancellor of the University and the first members of the Governing body, Board of Management and the Academic Council and all persons who may hereafter become such officers or members, so long as they continue to hold such office or membership, are hereby constituted a body corporate by the name of Maharishi Markandeshwar University, Solan, Himachal Pradesh.
(2) The University shall have perpetual succession and a common
seal and shall sue and be sued by the said name.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3709 (3) The University shall be situated and have its head quarters at
Kumarhatti-Solan, Himachal Pradesh.
5. (1) The University shall have the following powers and
functions, namely:—
Powers and functions of the University.
(i) to provide for instructions in such branches of learning as the University may, from time to time, determine, and to make provision for research and for advancement and dissemination of knowledge and for extension of education;
(ii) to conduct innovative experiments in modern methods and technologies in the field of technical education in order to maintain international standards of such education, training and research;
(iii) to organize and to undertake extra-mural teaching and extension
services;
(iv) to hold examinations and grant diplomas and certificates to and confer degrees and other academic distinctions on persons, subject to recognition by any statutory body under any law, if required, and to withdraw any such diplomas, certificates, degrees or other academic distinctions for good and sufficient cause;
(v) to create such teaching, administrative and other posts as the University may deem necessary, from time to time, and make appointments thereto;
(vi) to institute and award Fellowships, Studentships and Prizes;
(vii) to establish and maintain Hostel including Halls; recognise, guide, supervise and control Hostels including Halls not maintained by the University and other accommodation for the residence of the students, and to withdraw any such recognition;
(viii) to regulate and enforce discipline among students and employees of the University and to take such disciplinary measures as may be deemed necessary;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3710
(ix) to make arrangements for promoting health and general welfare of the students and the employees of the University and of the Colleges;
(x) to determine the criterion for admission in the University or its
Colleges;
(xi) to recognize for any purpose, either in whole or in part, any institution or members or students thereof on such terms and conditions as may, from time to time, be specified and to withdraw such recognition;
(xii) to develop and maintain twinning arrangement with centers of excellence in modern advanced technology in the developed countries for higher education training and research, including distance education subject to the University Grants Commission Act, 1956 and the regulations made thereunder;
(xiii) to co-operate with any other University, authority or association or any public body having purposes and objects similar to those of the University for such purposes as may be agreed upon, on such terms and conditions as may, from time to time, be specified by the University;
(xiv) to co-operate with other National and International institutions in the conduct of research and higher education subject to the University Grants Commission Act, 1956 and the regulations made thereunder;
(xv) to deal with property belonging to or vested in the University in any manner which is considered necessary for promoting the objects of the University;
(xvi) to enter into any agreement for the incorporation in the University of any institution and for taking over its rights, properties and liabilities and for any other purpose not repugnant to this Act;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3711 (xvii) to demand and receive payment of such fees and other charges
as may be specified from time to time;
(xviii) to receive donations and grants, except from parents and students and to acquire, hold, manage and dispose of any property, movable or immovable, including trust or endowed property within or outside Himachal Pradesh for the purposes and objects of the University, and to invest funds in such manner as the University thinks fit;
(xix) to make provisions for research and advisory services and for that purpose to enter into such arrangements with other institutions or bodies as the University may deem necessary;
(xx) to provide for the printing, reproduction and publication of research and other work, including text books, which may be issued by the University;
(xxi) to accord recognition to institutions and examinations for
admission in the University;
(xxii) to do all such other things as may be necessary, incidental or conducive to the attainment of all or any of the objects of the University;
(xxiii) to frame statutes, ordinances and regulations for carrying out the objects of the University in accordance with the provisions of the Act;
(xxiv) to provide for dual degrees, diplomas or certificates vis-à-vis other Universities on reciprocal basis within and outside the country;
(xxv)to make provisions for integrated courses in different disciplines
in the educational programmes of the University;
(xxvi) to set-up colleges, institutions, off-campus centres, off-shore campus, study centres or to start distance education, after fulfilling the norms and regulations of the Central Government Regulatory Bodies and Central Government, issued from time to time, and after obtaining the specific approval of the State Government; and राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3712
(xxvii) to seek collaboration with other institutions on mutually
acceptable terms and conditions.
(2) In pursuit of its objects and in exercise of its powers and in performing of its functions, the University shall not discriminate between any person, whosoever, on the basis of caste, class, colour, creed, sex, religion or race.
6. The University shall be self-financed and it shall not be entitled
to receive any grant or other financial assistance from the Government.
University to be self- financed.
7. The University shall have no power to affiliate or otherwise
No power of affiliation. admit to its privileges any other institution.
Endowment Fund.
8. (1) The sponsoring body shall establish an Endowment Fund for the University with an amount of three crore rupees which shall be pledged to the Government.
(2) The Endowment Fund shall be kept as security deposit to ensure strict compliance of the provisions of this Act, rules, regulations, statutes or ordinances made thereunder.
(3) The Government shall have the powers to forfeit, in the prescribed manner, a part or whole of the Endowment Fund in case the University or the sponsoring body contravenes any of the provisions of this Act, rules, statutes, ordinances or regulations made thereunder.
(4) Income from Endowment Fund shall be utilized for the development of infrastructure of the University but shall not be utilized to meet out the recurring expenditure of the University.
(5) The amount of Endowment Fund shall be kept invested, until the dissolution of the University, by way of Fixed Deposit Accounts in any Scheduled Bank subject to the condition that this Fund shall not be withdrawn without the permission of the Government.
9. University shall establish a fund, which shall be called the General
General Fund.
Fund to which following shall be credited, namely:—
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3713 (a) fees and other charges received by the University;
(b) any contribution made by the sponsoring body;
(c) any income received from consultancy and other works
undertaken by the University;
(d) bequests, donations, endowments and any other grants; and
(e) all other sums received by the University.
10. The General Fund shall be utilized for the following purposes,
namely:—
Application of General Fund.
(a) for the payment of salaries and allowances of the employees of the University and members of the teaching and research staff, and for payment of any Provident Fund contributions, gratuity and other benefits to such officers and employees;
(b) for the expenses to be incurred by the University for services availed including services like electricity, telephone etc.;
(c) for the payment of taxes or local levies wherever applicable;
(d) for up keeping of the assets of the University;
(e) for the payment of debts including interest charges thereto
incurred by the University;
(f) for the payment of travelling and other allowances to the members of the Governing Body, the Board of Management and the Academic Council etc.;
(g) for the payment of fellowships, freeships, scholarships, assistantships and other awards to students belonging to economically weaker sections of the society or research associates or trainees, as the case may be, or to any student otherwise eligible for such awards under the statutes, ordinances, regulations or rules made under this Act;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3714
(h) for the payment of the cost of audit of the funds created under
sections 8 and 9 of this Act;
(i) for the meeting of expenses of any suit or proceedings to which
University is a party;
(j) for the purpose of movable and immovable assets;
(k) for the payment of any expenses incurred by the University in carrying out the provisions of this Act or the statutes, ordinances, regulations or rules made thereunder; and
(l) for the payment of any other expenses as approved by the Board of Management to be an expense for the purposes of the University:
Provided that no expenditure shall be incurred by the University in excess of the limits for total recurring expenditure and total non-recurring expenditure for the year, as may be fixed by the Board of Management, without its prior approval:
Provided further that the General Fund shall, for the purpose specified under sub-clause (e), be applied with the prior approval of the Governing Body.
11. The following shall be the officers of the University, namely:—
Officers of the University.
(i) the Chancellor;
(ii) the Vice-Chancellor;
(iii) the Registrar;
(iv) the Chief Finance and Accounts Officer; and
(v) such other persons in the service of the University as may be
declared by the statutes to be the officers of the University.
T h e Chancellor.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3715 12. (1) The Chancellor shall be appointed by the sponsoring body for a period of three years, with the approval of the Government in such manner and on such terms and conditions as may be specified by the statutes.
(2) The Chancellor shall be the Head of the University.
(3) The Chancellor shall preside over at the meetings of the Governing Body and convocation of the University for conferring degrees, diplomas or other academic distinctions.
(4) The Chancellor shall have the following powers, namely:—
(a) to call for any information or record;
(b) to appoint the Vice-Chancellor;
(c) to remove the Vice-Chancellor in accordance with the
provisions of sub-section (7) of section 13 of this Act; and
(d) such other powers as may be specified by the statutes.
The Vice- Chancellor.
13. (1) The Vice-Chancellor shall be appointed by the Chancellor, on such terms and conditions as may be specified by statutes, from a panel of three persons recommended by the Governing Body and shall, subject to the provisions contained in sub-section (7), hold office for a term of three years:
Provided that after the expiry of the term of three years, a person
shall be eligible for re-appointment for another term of three years:
Provided further that Vice-Chancellor shall continue to hold office even after expiry of his term till new Vice-Chancellor joins, however, in any case, this period shall not exceed one year.
(2) The Vice-Chancellor shall be the principal executive and academic officer of the University and shall have the general superintendence and control over the affairs of the University and shall execute the decisions of various authorities of the University.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3716
(3) The Vice-Chancellor shall preside over at the convocation of
the University in the absence of the Chancellor.
(4) If in the opinion of the Vice-Chancellor, it is necessary to take immediate action on any matter for which powers are conferred on any other authority by or under this Act, he may take such action as he deems necessary and shall, at the earliest opportunity thereafter, report his action to such officer or authority as would have in the ordinary course dealt with the matter:
Provided that if in the opinion of the concerned officer or authority such action should not have been taken by the Vice-Chancellor, then such case shall be referred to the Chancellor, whose decision thereon shall be final.
(5) If in the opinion of the Vice-Chancellor, any decision of any authority of the University is outside the powers conferred by this Act or statutes, ordinances, regulations or rules made thereunder or is likely to be prejudicial to the interests of the University, he shall request the concerned authority to revise its decision within fifteen days from the date of decision and in case the authority refuses to revise such decision wholly or partly or fails to take any decision within fifteen days, then such matter shall be referred to the Chancellor and his decision thereon shall be final.
(6) The Vice-Chancellor shall exercise such powers and perform
such duties as may be specified by the statutes or the ordinances.
(7) If at any time upon representation made or otherwise and after making such inquiry as may be deemed necessary, the situation so warrants and if the continuance of the Vice-Chancellor is not in the interests of the University, the Chancellor may, by an order in writing stating the reasons therein, ask the Vice-Chancellor to relinquish his office from such date as may be specified in the order:
Provided that before taking action under this sub-section, the Vice-
Chancellor shall be given an opportunity of being heard.
T h e Registrar.
14. (1) The Registrar shall be appointed by the Chancellor in such manner and on such terms and conditions of service as may be specified by the statutes.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3717 (2) The Registrar shall have power to enter into agreement, contract, sign documents and authenticate records on behalf of the University and shall exercise such powers and perform such duties as may be specified by the statutes.
(3) The Registrar shall be the Member-Secretary of the Governing Body, Board of Management and Academic Council, but shall not have the right to vote.
The Chief Finance and Accounts Officer.
15. (1) The Chief Finance and Accounts Officer shall be appointed by the Chancellor in such manner and on such terms and conditions of service as may be specified by the statutes.
(2) The Chief Finance and Accounts Officer shall exercise such
powers and perform such duties as may be specified by the statutes.
16. (1) The University may appoint such other officers as may Other Officers.
be necessary for its functioning.
(2) The manner of appointment of other officers of the University and their powers and functions shall be such as may be specified by the statutes.
17. The following shall be the authorities of the University, namely:— Authorities of the University.
(i) the Governing Body;
(ii) the Board of Management;
(iii) the Academic Council; and
(iv) such other authorities as may be declared by the statutes to be
the authorities of the University.
18. (1) The Governing Body of the University shall consist of the
following, namely:—
T h e Governing Body.
(a) the Chancellor;
(b) the Vice-Chancellor;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3718
(c) five persons, nominated by the sponsoring body out of whom
two shall be eminent educationists;
(d) one expert of management or information technology from
outside the University, nominated by the Chancellor;
(e) two persons, nominated by the Government; and
(f) two members of the State Legislative Assembly, to be elected
by the State Legislature.
(2) The Governing Body shall be the supreme authority of the
University.
(3) The Governing Body shall have the following powers, namely:—
(a) to provide general superintendence and directions and to control functioning of the University by using all such powers as are provided by this Act or the statutes, ordinances, regulations or rules made thereunder;
(b) to review the decisions of other authorities of the University in case they are not in conformity with the provisions of this Act or the statutes, ordinances, regulations or rules made thereunder;
(c) to approve the budget and annual report of the University;
(d) to lay down the policies to be followed by the University;
\(e) to recommend to the sponsoring body about the voluntary liquidation of the University if a situation arises when smooth functioning of the University does not remain possible in spite of all efforts; and
(f) such other powers as may be prescribed by the statutes.
(4) The Governing Body shall meet at least thrice in a calendar
year.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3719 (5) The quorum for meetings of the Governing Body shall be five.
19. (1) The Board of Management shall consist of the following
members, namely:—
The Board of Manage- ment.
(a) the Vice-Chancellor;
(b) two members of the Governing Body, nominated by the
sponsoring body;
(c) three persons, who are not the members of the Governing
Body, nominated by the sponsoring body; and
(d) three persons from amongst the teachers, nominated by the
sponsoring body.
(2) The Vice-Chancellor shall be the Chairperson of the Board of
Management.
(3) The powers and functions of the Board of Management shall
be such as may be specified by the statutes.
(4) The Board of Management shall meet at least once in every
two months.
(5) The quorum for meetings of the Board of Management shall
be five.
20. (1) The Academic Council shall consist of the Vice-
Chancellor and such other members as may be specified by the statutes.
T h e Academic Council.
(2) The Vice-Chancellor shall be the Chairperson of the Academic
Council.
(3) The Academic Council shall be the principal academic body of the University and shall, subject to the provisions of this Act and the rules, statutes and ordinances made thereunder, co-ordinate and exercise general supervision over the academic policies of the University.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3720
(4) The quorum for meetings of the Academic Council shall
be such as may be specified by the statutes.
Other authorities.
21. The composition, constitution, powers and functions of other authorities of the University shall be such as may be specified by the statutes.
22. A person shall be disqualified for being a member of any of the
D i s q u a l i f i c a - tions.
authorities or bodies of the University, if he,—
(a) is of unsound mind and stands so declared by a competent
court; or
(b) is an undischarged insolvent; or
(c) has been convicted of any offence involving moral turpitude; or
(d) is conducting or engaging himself in private coaching classes;
or
(e) has been punished for indulging in or promoting unfair practice in the conduct of any examination, in any form, anywhere.
23. No act or proceeding of any authority or body of the University shall be invalid merely by reason of any vacancy or defect in the constitution thereof.
Vacancies not to invalidate the proceed- ings of any authority or body of the University.
Filling of casual vacancies.
24. In case there occurs any casual vacancy in any authority or body of the University, due to death, resignation or removal of a member, the same shall be filled, as early as possible, by the person or body who appoints or nominates the member whose place become vacant and person appointed or nominated to a casual vacancy shall be a member of such authority or body for the residue of the term for which the person whose place he fills would have been member.
Committees.
25. (1) The authorities or officers of the University may constitute committees with such terms of reference as may be necessary for specific tasks to be performed by such committees.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3721 (2) The constitution of such committees and their duties shall be
such as may be specified by the statutes.
The first statutes.
26. (1) Subject to the provisions of this Act, and the rules made thereunder, the first statutes of the University may provide for all or any of the following matters, namely:—
(a) the constitution, powers and functions of the authorities and other bodies of the University as may be constituted from time to time;
(b) the terms and conditions of appointment of the Vice-Chancellor
and his powers and functions;
(c) the manner of appointment and terms and conditions of service of the Registrar and Chief Finance and Accounts Officer and their powers and functions;
(d) the manner of appointment and terms and conditions of service
of the employees and their powers and functions;
(e) the terms and conditions of service of employees of the
University;
(f) the procedure for arbitration in case of disputes between
employees, students and the University;
(g) the provisions regarding exemption of students from payment of tuition fee and for awarding to them scholarships and fellowships;
(h) provisions regarding the policy of admissions, including
regulation of reservation of seats;
(i) provisions regarding fees to be charged from the students; and
(j) provisions regarding number of seats in different courses.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3722
(2) The first statutes shall be made by the Government and published in the Official Gazette and a copy thereof shall be laid before the State Legislative Assembly.
T h e subsequent statutes.
27. (1) Subject to the provisions of this Act and the rules made thereunder, the subsequent statutes of the University may provide for all or any of the following matters, namely:—
(a) creation of new authorities of the University;
(b) accounting policy and financial procedure;
(c) representation of teachers in the authorities of the University;
(d) creation of new departments and abolition or restructuring of
existing department;
(e) institution of medals and prizes;
(f) creation of posts and procedure for abolition of posts;
(g) revision of fees;
(h) alteration of the number of seats in different syllabi; and
(i) all other matters which under the provisions of this Act are to
be specified by the statutes.
(2) The statutes of the University other than the first statutes shall be made by the Board of Management with the approval of the Governing Body.
(3) The Board of Management may, from time to time, make new or additional statutes or may amend or repeal the statutes so made in the manner hereinafter provided in this section:
Provided that Board of Management shall not make any statute or any amendment of the statute affecting the status, powers or constitution of राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3723 any existing authority of the University until such authority has been given an opportunity of expressing an opinion on the proposal and any opinion so expressed shall be in writing and shall be considered by the Governing Body.
(4) Every such statute or addition to the statutes or any amendment or repeal of the statutes shall be subject to the approval of the Government:
Provided that no statute shall be made by the Board of Management affecting the discipline of students and standards of instruction, education and examination except in consultation with the Academic Council.
The first ordinances.
28. (1) Subject to the provisions of this Act or the rules or statutes made thereunder, the Board of Management may make such first ordinances with the approval of the Governing Body as it deems appropriate for the furtherance of the objects of the University and such ordinances may provide for all or any of the following matters, namely:—
(a) the admission of students to the University and their enrolment
as such;
(b) the courses of study to be laid down for the degrees, diplomas
and certificates of the University;
(c) the award of the degrees, diplomas, certificates and other academic distinctions, the minimum qualifications for the same and the means to be taken relating to the granting and obtaining of the same;
(d) the conditions for awarding of fellowships, scholarships,
stipends, medals and prizes;
(e) the conduct of examinations, including the terms of office and manner of appointment and the duties of examining bodies, examiners and moderators;
(f) fees to be charged for the various courses, examinations,
degrees and diplomas of the University;
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3724
(g) the conditions of residence of the students in the hostels of the
University;
(h) provision regarding disciplinary action against the students;
(i) the creation, composition and functions of any other body which is considered necessary for improving the academic life of the University;
(j) the manner of co-operation and collaboration with other
Universities and institutions of higher education; and
(k) all other matters which by this Act or statutes made thereunder
are required to be provided by the ordinances.
(2) The Board of Management shall either modify the ordinances incorporating the suggestion of the Governing Body or give reasons for not incorporating any of the suggestions made by the Governing Body and shall return the ordinances alongwith such reasons, if any, to the Governing Body and on receipt of the same, the Governing Body shall consider the comments of the Board of Management and shall approve the ordinances of the University with or without such modifications and then the ordinances, as approved by the Governing Body shall come into force.
T h e subsequent ordinances.
29. (1) All ordinances other than the first ordinances shall be made by the Academic Council which after being approved by the Board of Management shall be submitted to the Governing Body for its approval.
(2) The Academic Council shall either modify the ordinances incorporating the suggestions of the Board of Management and the Governing Body or give reasons for not incorporating the suggestions, and shall return the ordinances alongwith such reasons, if any, the Board of Management and the Governing Body shall consider the comments of the Academic Council and shall approve the ordinances of the University with or without such modification and then the ordinances, as approved by the Governing Body shall come into force.
Regulations.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3725 30. The authorities of the University may, subject to the prior approval of the Board of Management, make regulations, consistent with this Act, the rules, statutes and the ordinances made thereunder, for the conduct of their own business and of the committees appointed by them.
Admissions.
31. (1) Admission in the University shall be made strictly on the
basis of merit.
(2) Merit for admission in the University may be determined either on the basis of marks or grade obtained in the qualifying examination for admission and achievements in co-curricular and extra-curricular activities or on the basis of marks or grade obtained in the entrance test conducted at State level either by an association of the Universities conducting similar courses or by any agency of the State:
Provided that admission in professional and technical courses shall
be made only through entrance test.
(3) Seats for admission in the University, for the students belonging to Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Other Backward Classes and handicapped students, shall be reserved as per the policy of the State Government.
(4) At least 25% seats for admission to each course shall be
reserved for students who are bonafide Himachalis.
Fee structure.
32. (1) The University may, from time to time, prepare and revise, its fee structure and send it to the Government for its approval and the Government shall convey the approval within three months from the receipt of the proposal:
Provided that if the approval of the Government is not conveyed within three months, it shall be deemed to have been approved by the Government:
Provided further that the fee structure for each course shall be decided
before the issue of prospectus and shall be reflected in the prospectus:
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3726
Provided further that the fee structure shall not be revised or modified
during the academic year.
(2) The fee structure prepared by the University shall be considered by a committee to be constituted by the State Government, in the manner as may be prescribed, which shall submit its recommendations to the Government after taking into consideration whether the proposed fee is,—
(a) sufficient for generating-(i) resources for meeting the recurring expenditure of the University; and (ii) the savings required for the further development of the University; and
(b) not unreasonably excessive.
(3) After receipt of the recommendations under sub-section (2), if
the Government is satisfied, it may approve the fee structure.
(4) The fee structure approved by the Government under sub-
section (3) shall remain valid until next revision.
Examinations.
33. At the beginning of each academic session and in any case not later than 30th of August of every calendar year, the University shall prepare and publish a semester-wise or annual, as the case may be, Schedule of Examinations for each and every course conducted by it and shall strictly adhere to such Schedule:
Provided that if, for any reason whatsoever, University is unable to follow this Schedule, it shall, as soon as practicable, submit a report to the Government giving the detailed reasons for making a departure from the published Schedule of Examination. The Government may, thereon, issue such directions as it may deem fit for better compliance in future.
Explanation.—'Schedule of Examination' means a table giving details about the time, day and date of the commencement of each paper which is a part of a Scheme of Examinations and shall also include the details about the practical examinations.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3727
Declaration of results.
34. (1) The University shall strive to declare the results of every examination conducted by it within thirty days from the last date of the examination for a particular course and shall in any case declare the results latest within forty-five days from such date:
Provided that if, for any reason whatsoever, the University is unable to finally declare the results of any examination within the period of forty- five days, it shall submit a report incorporating the detailed reasons for such delay to the Government. The Government may, thereon, issue such directions as it may deem fit for better compliance in future.
(2) No examination or the results of an examination shall be held invalid only for the reasons that the University has not followed the Schedule of Examination as stipulated in section 33 and in this section.
Convocation.
35. The convocation of the University shall be held in every academic year in the manner as may be specified by the statutes for conferring degrees, diplomas or for any other purpose.
Accreditation of the University.
36. The University shall obtain accreditation from the National Council of Assessment and Accreditation (NAAC), Bangalore, within three years of its establishment and inform the Government and such other regulating bodies which are connected with the courses taken up by the University about the grade provided by NAAC to the University and the University shall get renewed such accreditation at an interval of every five years thereafter.
37. Notwithstanding anything contained in this Act, the University shall be bound to comply with all the rules, regulations, norms etc. of the regulating bodies and provide all such facilities and assistance to such bodies as are required by them to discharge their duties and carry out their functions.
University to follow rules, regulations, norms etc. of the regulating bodies.
Annual report.
38. (1) The annual report of the University shall be prepared by the Board of Management which shall include among other matters, the steps taken by the University towards the fulfilment of its objects and shall be approved by the Governing Body and copy of the same shall be submitted to the sponsoring body.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3728
(2) Copies of the annual report prepared under sub-section (1)
shall also be presented to the Government.
Annual accounts and audit.
39. (1) The annual accounts including balance sheet of the University shall be prepared under the directions of the Board of Management and the annual accounts shall be audited at least once in every year by the auditors appointed by the University for this purpose.
(2) A copy of the annual accounts together with the audit report
shall be submitted to the Governing Body.
(3) A copy of the annual accounts and audit report alongwith the observations of the Governing Body shall be submitted to the sponsoring body.
(4) Copies of annual accounts and balance sheet prepared under
sub-section (1) shall also be presented to the Government.
(5) The advice of the Government, if any, arising out of the accounts and audit report of the University shall be placed before the Governing Body and the Governing Body shall issue such directions, as it may deem fit and compliance thereof shall be reported to the Government.
Powers of the Government to inspect the University.
40. (1) For the purpose of ascertaining the standards of teaching, examination and research or any other matter relating to the University, the Government may, cause an assessment to be made in such manner as may be prescribed, by such person or persons as it may deem fit.
(2) The Government shall communicate to the University its recommendations in regard to the result of such assessment for corrective action and the University shall take such corrective measures as are necessary so as to ensure the compliance of the recommendations.
(3) If the University fails to comply with the recommendations made under sub-section (2) within a reasonable time, the Government may give such directions as it may deem fit which shall be binding on the University.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3729 41. (1) The sponsoring body may dissolve the University by giving a notice to this effect to the Government, the employees and the students of the University at least one year in advance:
Dissolution of the University by the sponsoring body.
Provided that dissolution of the University shall have effect only after the last batches of students of the regular courses have completed their courses and they have been awarded degrees, diplomas or awards, as the case may be.
(2) On the dissolution of the University all the assets and liabilities
of the University shall vest in the sponsoring body:
Provided that in case the sponsoring body dissolves the University before twenty five years of its establishment all the assets of the University shall vest in the Government free from all encumbrances.
Special powers of the Government in certain circumstances.
42. (1) If it appears to the Government that the University has contravened any of the provisions of this Act or the rules, statutes or ordinances made thereunder or has contravened any of the directions issued by it under this Act or has ceased to carry out any of the undertakings given or a situation of financial mis-management or mal-administration has arisen in the University, it shall issue notice requiring the University to show cause within forty five days as to why an order of its liquidation should not be made.
(2) If the Government, on receipt of reply of the University on the notice issued under sub-section (1), is satisfied that there is a prima facie case of contravening all or any of the provisions of this Act or the rules, statutes or ordinances made thereunder or of contravening directions issued by it under this Act or of ceasing to carry out the undertaking given or of financial mis-management or mal-administration, it shall make an order of such enquiry as it may consider necessary.
(3) The Government shall, for the purpose of any enquiry under sub-section (2), appoint an inquiry officer or officers to inquire into any of the allegations and to make report thereon.
(4) The inquiry officer or officers appointed under sub-section (3) shall have the same powers as are vested in a civil court under the Code of राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3730
5 of 1908 Civil Procedure, 1908 while trying a suit in respect of the following matters, namely:—
(a) summoning and enforcing the attendance of any person and
examining him on oath;
(b) requiring the discovery and production of any such document or any other material as may be predicable in evidence;
(c) requisitioning any public record from any court or office; and
(d) any other matter which may be prescribed.
2 of 1974 (5) The inquiry officer or officers inquiring under this Act, shall be deemed to be a civil court for the purposes of section 195 and Chapter 26 of the Code of Criminal Procedure, 1973.
(6) On receipt of the enquiry report from the officer or officers appointed under sub-section(3), if the Government is satisfied that the University has contravened all or any of the provisions of this Act or the rules, statutes, or ordinances made thereunder or has violated any of the directions issued by it under this Act or has ceased to carry out the undertakings given by it or a situation of financial mis-management and mal- administration has arisen in the University which threatens the academic standard of the University, it shall issue orders for the liquidation of the University and appoint an administrator.
(7) The administrator appointed under sub-section (6) shall have all the powers and be subject to all the duties of the Governing Body and the Board of Management under this Act and shall administer the affairs of the University until the last batch of the students of the regular courses have completed their courses and they have been awarded degrees, diplomas or awards, as the case may be.
(8) After having awarded the degrees, diplomas or awards, as the case may be, to the last batches of the students of the regular courses, the administrator shall make a report to this effect to the Government.
(9) On receipt of the report under sub-section (8), the Government shall, by notification in the Official Gazette, issue an order dissolving the University and from the date of publication of such notification, the University shall stand dissolved and all the assets of the University shall vest in the Government free from all encumbrances from the date of dissolution.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3731 43. (1) The Government may, by notification in the Official Power to make rules.
Gazette, make rules for carrying out the provisions of this Act.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing power,
such rules may provide for all or any of the following matters, namely:—
(a) matter to be prescribed under clause (d) of sub-section (4) of
section 42; and
(b) other matters which are required to be, or may be, prescribed
by rules under this Act.
(3) All the rules made under this Act shall be laid, as soon as may be after they are so made, before the State Legislative Assembly, while it is in session, for a period of not less than ten days which may be comprised in one session or in two or more successive sessions and if before the expiry of the session in which it is so laid or the successive sessions aforesaid, the Legislative Assembly agrees in making modification in any of such rules or agrees that any such rule should not be made, such rule shall thereafter have effect only in such modified form or be of no effect, as the case may be, so, however, that any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done under that rule.
Power to remove difficulties.
44. (1) If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the Government may, by order published in the Official Gazette, make provisions, not inconsistent with the provisions of this Act, as appear to it to be necessary or expedient for removing the difficulty:
Provided that no such order shall be made under this section after
the expiry of a period of two years from the commencement of this Act.
(2) Every order made under this section shall, as soon as may be
after it is made, be laid before the State Legislative Assembly.
45. (1) The Maharishi Markandeshwar University (Establishment
and Regulation) Ordinance, 2010 is hereby repealed.
Repeal of Ordinance No. 1 of 2010 and savings.
(2) Notwithstanding such repeal any action taken or anything done under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
Education is the basic factor which plays a very important role in the all round development of human beings. The socio-economic conditions of the State and the country require more attention to education. With a view to accelerate the pace of development, it is imperative to open more educational institutions with modern and sophisticated facilities. With each passing day, the need for opening new Colleges, Universities, Professional Colleges and Institutions etc. is gaining momentum in the State.
Like other States in the country, Societies in the private sectors have been approaching the Government for establishing Universities. Many State Governments have allowed the setting up of private Universities. The State Government has been receiving many applications from such parties to establish private Universities in the State. Maharishi Markandeshwar University Trust, Ambala, a Trust registered under the Indian Trusts Act, 1882, and after having been registered its subsidiary Trust in the name of "Maharishi Markandeshwar University Trust" Solan, H.P. had also submitted a proposal to establish a private University namely, "Maharishi Markandeshwar University, Solan, Himachal Pradesh" and after detailed examination the Government had issued "Letter of Intent" on 20th August, 2008.
In the light of the provisions of University Grant Commission (Establishment and Maintenance of Standards of Private Universities) Regulations, 2003 each private University must be established by a separate State Act and shall conform to the provisions of University Grants Commission Act, 1956. Not only that, a private University must be a unitary University having adequate facilities for teaching, research, examination and extension activities. Thus, in order to fulfil the requirement of University Grant Commission Act and the norms, it has been decided to bring a legislation which may provide for establishment, incorporation and regulation of Maharishi Markandeshwar University, Solan, Himachal Pradesh in the State for higher education.
Since the State Legislative Assembly was not in session and after taking into consideration urgency of the matter, it was decided to promulgate an Ordinance. As such, the Maharishi Markandeshwar University (Establishment and Regulation) Ordinance, 2010 (Ordinance No. 1 of 2010) was promulgated by Her Excellency the Governor in exercise of powers confeirred under article 213(1) of the Constitution of India on 11-06-2010 which was published in Rajpatra, Himachal Pradesh on 16-06-2010. Now, this Bill seeks to replace the said Ordinance without any modification.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
ISHWAR DASS DHIMAN, Minister-in-Charge.
SHIMLA: The....................., 2010.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3733
FINANCIAL MEMORANDUM
The Bill seeks to provide for the establishment of Maharishi Markandeshwar University in the State solely in the private sector. The provisions of this Bill, if enacted shall not involve any financial expenditure from the State Exchequer.
__________
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
Clauses 43 and 26 of the Bill seek to empower the State Government to make rules for carrying out purposes of this Act and to make first statutes of the University respectively. Further, clauses 27 and 28 of the Bill seek to empower Board of Management of the University to make subsequent statutes and first ordinances of the University, respectively. The proposed delegations of powers are essential and normal in character.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3734
लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव खुडला, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है। 2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्रे़त्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा खुडला 177/1 0-00-18 520/2/1 0-03-60 520/2/2 0-00-50 473/1 0-00-87 803/1 0-00-20 1045/229 0-00-52 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3735
1044/229 0-00-40 241 0-00-66
कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8 0-06-930-06-930-06-930-06-930-06-93
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 56/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव दरकौहल, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू.-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3736
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा दरकौहल 198/1 0-00-84 197/1 0-02-31 399/1 0-00-46 398/1 0-00-60 432/1 0-00-14 432/2 0-00-18 430/1 0-01-92
कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7 0-06-450-06-450-06-450-06-450-06-45
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
------- लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 59/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 59/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 59/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 59/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 59/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव हवाणी/555, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3737 4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू.-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा हवाणी/555 520/1 0-00-72 478/1 0-00-16 541 0-00-52 543/1 0-03-93 540/1 0-00-64 526/1 0-02-86 524/1 0-04-20 523/1 0-00-86 523/2 0-00-88 522/1 0-01-44
कुल जोड़ किता-10कुल जोड़ किता-10कुल जोड़ किता-10कुल जोड़ किता-10कुल जोड़ किता-10 0-16-210-16-210-16-210-16-210-16-21
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
--------- लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 58/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 58/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 58/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 58/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 58/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव वस्तवातर/481, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3738
2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू.-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा वस्तवातर/481 160/1 0-00-85 162/1 0-00-06 163/1 0-00-12 783/159 0-01-82
कुल जोड़ किता-4कुल जोड़ किता-4कुल जोड़ किता-4कुल जोड़ किता-4कुल जोड़ किता-4 0-02-850-02-850-02-850-02-850-02-85
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
--------- लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 60/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 60/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 60/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 60/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 60/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव नरोला/497, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3739 2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू.-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा नरोला/497 508/440/1 0-00-22 439/1 0-02-22 441/1 0-00-48 445/1 0-00-96 446/1 0-00-33 448/1 0-01-37 450/1 0-01-92 451/1 0-00-63 3511/455/1 0-00-24 452/1 0-00-60 453/1 0-01-89 208/1 0-00-89
कुल जोड़ किता-12कुल जोड़ किता-12कुल जोड़ किता-12कुल जोड़ किता-12कुल जोड़ किता-12 0-11-750-11-750-11-750-11-750-11-75
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3740
लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 61/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 61/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 61/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 61/2010.-संख्या पी.बी.डब्लयू. (बी) एफ (5) 61/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव ध् ारूखडी/498, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होनेे के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू.-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा धरूखडी/498 36/1 0-00-56 39/1 0-00-68 47/1 0-02-17 72/1 0-01-00 73/1 0-01-00 74/1 0-01-29 82/1 0-01-02
कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7 0-08-120-08-120-08-120-08-120-08-12
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3741
लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)62/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)62/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)62/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)62/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)62/2010.--यतः हिमाचल प्र्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव मटौर टाण्डा/487, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकोेेंं को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने केलिए सहर्ष प्र्राधिकार देते हैं।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रक्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जर्न समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी , हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिलाजिलाजिलाजिलाजिला उप-तहसीलउप-तहसीलउप-तहसीलउप-तहसीलउप-तहसील गांवगांवगांवगांवगांव खसरा नम्बरखसरा नम्बरखसरा नम्बरखसरा नम्बरखसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में)क्षेत्र (है0 में)क्षेत्र (है0 में)क्षेत्र (है0 में)क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा मटौर टाण्डा/487 1087/1 0-01-12 1156/1 0-00-76 1101/1 0-02-03 1100/1 0-01-16 1089/1 0-02-90
कुल जोे किता-5कुल जोे किता-5कुल जोे किता-5कुल जोे किता-5कुल जोे किता-5 0-08-170-08-170-08-170-08-170-08-17
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3742
लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)63/2010संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)63/2010संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)63/2010संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)63/2010संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)63/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव कारनी/495, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवी सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रद्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा कारनी/495 189/1 0-00-80 196/1 0-00-74 199/1 0-00-80 198/1 0-01-02 548/219 0-01-08 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3743
353/1 0-01-30 354/1 0-01-11 362/1 0-02-34 380/1 0-00-30 549/219 0-01-56 565/551/1 0-00-30 558/384/1 0-01-18 356/1 0-00-38
कुल जोड़ किता-13कुल जोड़ किता-13कुल जोड़ किता-13कुल जोड़ किता-13कुल जोड़ किता-13 0-12-910-12-910-12-910-12-910-12-91
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)64/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)64/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)64/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)64/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)64/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव मनवाण/490, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3744
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा मनवाण/490 35/1 0-00-52 36/1 0-00-08 37/1 0-00-53 43/1 0-00-52 125/1 0-00-34 127/1 0-00-69 128/1 0-00-49
कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7कुल जोड़ किता-7 0-03-170-03-170-03-170-03-170-03-17
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 11 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)65/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)65/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)65/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)65/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)65/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव फटोह/480, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवीं सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3745 2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा फटोह/480 4 0-01-65
14/1 0-01-02
15/1 0-00-30
16/1 0-00-66
19/1 0-02-72
20/1 0-00-16
38/1 0-00-16
44/1 0-01-15
कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8कुल जोड़ किता-8 0-07-820-07-820-07-820-07-820-07-82
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3746
लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)68/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)68/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)68/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)68/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)68/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव पलासी/501, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवी सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा पलासी/501 333/66 0-02-70 24 0-02-22 23 0-02-20 64 0-03-59 25 0-02-87 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3747
26 0-16-98 91 0-12-55 30 0-03-26 53 0-10-20 20 0-28-91 176 0-01-79 63 0-08-32 28 0-03-95 177 0-04-87 62 0-02-56
कुल जोड़ किता-15कुल जोड़ किता-15कुल जोड़ किता-15कुल जोड़ किता-15कुल जोड़ किता-15 0-06-970-06-970-06-970-06-970-06-97
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13अगस्त, 2010
संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)55/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)55/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)55/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)55/2010.--संख्या पी.बी.डब्लयू (बी)एफ (5)55/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव बलद्वाडा/478, उप-तहसील बलद्वाडा, जिला मण्डी में जोगिन्द्रनगर-सरकाघाट-घुमारवी सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3748
में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता हैं।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) मण्डी बलद्वाडा बलद्वाडा/478 1316/1 0-00-06 1317/1 0-00-12 1284 0-00-76 962/1 0-00-12 931/2 0-00-47 929/1 0-00-18 901/1 0-00-09 882/1 0-00-22 1684/879/1/1 0-00-13
कुल जोड़ किता-9कुल जोड़ किता-9कुल जोड़ किता-9कुल जोड़ किता-9कुल जोड़ किता-9 0-02-150-02-150-02-150-02-150-02-15
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 18 अगस्त, 2010
संख्या पी0बी0डब्लयू0(बी)एफ(5)75/2010.--संख्या पी0बी0डब्लयू0(बी)एफ(5)75/2010.--संख्या पी0बी0डब्लयू0(बी)एफ(5)75/2010.--संख्या पी0बी0डब्लयू0(बी)एफ(5)75/2010.--संख्या पी0बी0डब्लयू0(बी)एफ(5)75/2010.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांंव बाडी, राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3749 तहसील नूरपुर, जिला कांगड़ा में लुधियाड-गारन वाया-सिद्धपुर-धाड-झलुन हरनोटा-चकवाडी-गुरियाल सड़़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।
2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।
3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्र्राधिकार देते है।
4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र मेेेंं कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस दिन की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0 में) कांगड़ा नूरपुर बाड़़ी 94/1 0-07-02
किता 1किता 1किता 1किता 1किता 1 0-07-020-07-020-07-020-07-020-07-02
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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लोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभागलोेक निर्माण विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 13 अगस्त, 2010
संख्या पी0बी0डब्ल्यू0 (बी0)एफ(5) 59/2009.--संख्या पी0बी0डब्ल्यू0 (बी0)एफ(5) 59/2009.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को संख्या पी0बी0डब्ल्यू0 (बी0)एफ(5) 59/2009.--संख्या पी0बी0डब्ल्यू0 (बी0)एफ(5) 59/2009.-- संख्या पी0बी0डब्ल्यू0 (बी0)एफ(5) 59/2009.-- यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु गांव बठूॅह, तहसील शिमला (ग्रामीण), जिला शिमला में तारा देवी गम्वर सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3750
अपेक्षित है, अतएव एतद्द्वारा यह घोशित किया जाता है कि निम्नलिखित विवरणी में वर्णित भूमि उपर्युक्त प्रयोजन के लिए अपेक्षित है।
2. यह घोषणा, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-6 के उपबन्धोंेंं के अधीन इससे सम्बन्धित सभी व्यक्तियों को सूचना हेतु की जाती है तथा उक्त अधिनियम की धारा-7 के अधीन भू-अर्जन समाहर्ता लोक निर्माण विभाग विन्टर फिल्ड, शिमला को उक्त भूमि के अर्जन करने के आदेश लेनेे का एतद्द्वारा निदेश दिया जाता है।
3. भूमि रेखांक का निरीक्षण भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग विन्टर फिल्ड, शिमला के कार्यालय में किया जा सकता है।
विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी
जिला तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (बिघा-बिस्वा) शिमला शिमला (ग्रामीण) बठूॅह 104/1 0-1
104/2 0-5
कुल जोड़ किता 2कुल जोड़ किता 2कुल जोड़ किता 2कुल जोड़ किता 2कुल जोड़ किता 2 0-60-60-60-60-6
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (लोक निर्माण)।
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PUBLIC WORKS DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla–2, the 10th August, 2010
No. PBW (B&R)-(B)3(5)3/2004.—(1) In partial modification of Ministry of Shipping Road Transport and Highway, Govt. of India notification No. G.S.R.838 (E) dated 5th December, 2008 and decision taken in the meeting held on 17/06/2010 under the Chairmanship of Hon'ble Minister Road Transport & Highway, Govt. of India, Governor, Himachal Pradesh is pleased to exempt local residents of Kullu Civil Sub-Division/Tehsil from paying the toll tax while using the Kullu Bye Pass only for own personal use and not for commercial use with immediate effect in the public interest.
2. The pass/permit for this purpose shall be issued by Sub Divisional Officer (C) Kullu on production of proof of local residence.
By order, Sd/- Pr. Secretary (PW).
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932 3751 BEFORE THE HON'BLE HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH ORDINARY ORIGINAL CIVIL JURISDICTION
Company Petition No 9 of 2010
In the matter of Companies Act, 1956 (1 of 1956) And In the matter of Section 391 & 394 of the Companies Act, 1956; And In the matter of Scheme of Amalgamation of
Mahen Boutiques Limited
WITH
Kamla Retail Limited
Mahen Boutiques Limited
A Company incorporated under the provisions of Companies Act, 1956 having its registered office at 801, Surya Kiran Building, 19, KG Marg, New Delhi - 110001.
…Petitioner/Transferor Co.
WITH
Kamla Retail Limited
A Company incorporated under the provisions of Companies Act 1956 having its registered office at Plot No-3 Sector 3, Parwanoo District Solan in the State of Himachal Pradesh.
... Petitioner/Transferee Co.
st
A Petition under Section 394 of the Companies Act, 1956 for Sanctioning the Scheme of Amalgamation of Mahen Boutiques Limited, the Petitioner Company with Kamla Retail Limited, the Transferee Company, was presented by the Petitioner Company on 31 July,2010 and the same has been admitted on the 2nd day of August 2010. The said Petition is fixed for hearing before the Company Judge on 27th day of September,2010 at 10 O'clock in the forenoon before the Company Judge.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 19 अगस्त, 2010/28 श्रावण, 1932
3752
Any person desirous of supporting or opposing the said Petition should send to the Petitioner's Advocate not later than 4 days before the date of hearing of Petition, where he seeks to oppose the Petition, the grounds of opposing or a copy of the affidavit should be furnished with such notice.
A copy of the Petition will be furnished by the undersigned to any person requiring the same on payment of prescribed charges for the same.
Sd/- SHIPLA SOOD/ ATUL JHINGAN, Advocates, 75, The Mall, Shimla, Himachal Pradesh.
Shimla
06.08.2010
नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित