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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 197, 22 December 2010

Published 22 December 2010

Gazette no.
197
Gazetteid
197/GAZETTE/2010-22/12/2010
Identifier
in.gazette.himachal.2010-12-22.197_gazette_2010-22_12_2010
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला, बुधवार, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932 शिमला, बुधवार, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932 शिमला, बुधवार, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932 शिमला, बुधवार, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932 शिमला, बुधवार, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

शिमला-4, 7 दिसम्बर, 2010

संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 197-राजपत्र/2010-22-12-2010 (7657) 7658 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

(2010 का विधेयक संख्यांक-38) जो आज दिनांक 7 दिसम्बर, 2010 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7659

2010 का विधेयक संख्यांक 38 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक 12) का और संशोधन करने के लिए विधेयक ।विधेयक ।विधेयक ।विधेयक ।विधेयक ।

भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--

1.1.1.1.1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश मूल्य स्ांक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। परिवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2010 है ।

(2) यह 16 नवम्बर, 2010 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।

2005 का 12

धारा 2 का संशोधन। 2.2.2.2.2. हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड (घ) में, ''माल के विनिर्माण'' शब्दों के पश्चात्‌ ''की प्रक्रिया में प्रयुक्त संयन्त्र, मशीनरी या'' शब्दों के स्थान पर '', प्रसंस्करण और पैंकिंग की प्रक्रिया में प्रयुक्त संयन्त्र, मशीनरी या हाइड्रोलिक मोबाइल पिक एण्ड कैरी क्रेन सहित" चिन्ह और शब्द रखे जाएंगे।

3.3.3.3.3. मूल अधिनियम की धारा 16 में,--

धारा 16 का संशोधन। (क) उपधारा (3) में ''ऐसी विवरणियां,'' शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌ ''मैनुअली या इलैक्ट्रोनिकली,'' शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।; और

(ख) उपधारा (4) में ''विहित रीति में,'' शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌ ''मैनुअली या इलैक्ट्रोनिकली,'' शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे । 7660 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

2

4.4.4.4.4. (1) हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अध्यादेश,

2010 को एतद्‌ द्वारा निरसित किया जाता है ।

2010 के अध्यादेश संख्यांक 10 का निरसन और व्यावृतियां ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7661

उद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथन

वर्तमानतः मोबाइल पिक एण्ड कैरी क्रेनज ''पूंजी माल'' की परिभाषा के अन्तर्गत नहीं आते हैं और राज्य में 13.75 प्रतिशत की दर से कराधेय हैं, जबकि पूंजी माल पर मूल्य परिवर्धित कर वर्तमानतः 5 प्रतिशत है । वर्तमानतः दिल्ली, उार प्रदेश, राजस्थान, छतीसगढ़ और हरियाणा जैसे पड़ौसी राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश में मूल्य परिवर्धित कर की दर उच्चतर है और कर की निम्नतर दर के कारण उपरोक्त मदों का व्यापार करने वाली कम्पनियां इन राज्यों में अपनी समसामयिक कम्पनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं। इसलिए फर्मे हिमाचल प्रदेश में अपने परिसरों से अधिकांश विनिर्मित माल के स्टॉक का अन्तरण, अन्य राज्यों में अपने डिपो को, जहां पर माल विक्रीत किया जा रहा है, कर रही हैं । स्टॉक अन्तरण और निर्यात पर राज्य को कोई कर प्राप्त नहीं हो रहा है तथा केन्द्रीय विक्रय कर के अन्तर्गत केवल एक प्रतिशत सीमांत कर ही प्राप्त हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को राजस्व की हानि हो रही है या राज्य का राजस्व पड़ौसी राज्यों को जा रहा है । ''मोबाइल पिक एण्ड कैरी क्रेनज'' को ''पूंजी माल'' की परिभाषा में सम्मिलित करने से राजस्व में प्रतिवर्ष लगभग 2.50 करोड़ रुपए की बढौतरी होने की संभावना है । इसलिए राज्य के राजस्व को अन्य राज्यों को जाने से रोकने के आशय से राजस्व के हित में समीचीन प्रतीत होता है कि पूंजी माल के अन्तर्गत ''हाइड्रोलिक पिक एण्ड कैरी क्रेनज'' को सम्मिलित करके ''पिक एण्ड कैरी क्रेनज'' पर मूल्य परिवर्धित कर की दर को 13.75 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया जाए । इसके अतिरिक्त, विभाग, व्यापारियों को विवरणियां और कर के संदाय को इलैक्ट्रोनिकली दाखिल करने की सुविधा आरम्भ कर रहा है । इससे व्यापारियों को अपनी दुकानों/कार्यालयों अथवा यहां तक कि अपने निवास स्थान से भी कर को जमा करने और विवरणियों को दाखिल करने की प्रसुविधा प्राप्त होगी । नई सुविधा व्यापारियों को राज्य में सौहार्दपूर्ण वातावरण प्रदान करने में दूरगामी सिद्ध होगी । इसलिए हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 में संशोधन करना आवश्यक हो गया था ।

क्योंकि विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 में संशोधन किया जाना अनिवार्य हो गया था, इसलिए, हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अध्यादेश, 2010(2010 का अध्यादेश संख्यांक 10) 12 नवम्बर, 2010 को प्रख्यापित किया गया था, जिसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में 16 नवम्बर, 2010 को प्रकाशित किया गया था । अब उक्त अध्यादेश को नियमित विधान द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना अपेक्षित है ।

यह विधेयक उक्त अध्यादेश को बिना उपान्तरण के प्रतिस्थापित करने के लिए है ।

प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल, मुख्य मन्त्री । धर्मशालाः तारीखः .............................. 2010 7662 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

विाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापन

विधेयक के खण्ड 2 के उपबंध अधिनियमित होने से राज्य के राजस्व में लगभग 2.50 करोड़ रुपए वार्षिक की बढौतरी होगी । विधेयक के उपबंध अधिनियमित होने के पश्चात्‌ विद्यमान सरकारी तन्त्र द्वारा प्रवर्तित किए जाने हैं और इससे कोई अतिरिक्त व्यय अन्तर्वलित नहीं होगा ।

प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

---शून्य---

---------

भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें नस्ति संख्याःई.एक्स.एन.-एफ(10)-1/2006-II

हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010 की विषय-वस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7663

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 38 of 2010

THE HIMACHAL PRADESH VALUE ADDED TAX (AMENDMENT)

BILL, 2010

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 (Act No. 12 of

2005).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in

the Sixty-first Year of the Republic of India as follows:—

1. (1) This Act may be called the Himachal Pradesh Value

Added Tax (Amendment) Act, 2010.

Short title and commence- ment.

(2) It shall be deemed to have come into force on the 16th day

of November, 2010.

Amendment of section 2.

12 of 2005

2. In section 2 of the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 (hereinafter referred to as the "principal Act"), in clause (d), after the words "or equipment", the words "including hydraulic mobile pick and carry cranes" shall be inserted.

3. In section 16 of the principal Act,—

Amendment of section 16.

(a) in sub-section (3), after the words "furnish such returns", the

words "manually or electronically" shall be inserted. ; and

(b) in sub-section (4), after the words and sign "prescribed manner, pay", the words "manually or electronically" shall be inserted.

4. (1) The Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment)

Ordinance, 2010 is hereby repealed.

Repeal of Ordinance No. 10 of 2010 and savings.

(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.

7664 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

The mobile pick and carry cranes presently do not fall within the purview of definition of "Capital Goods" and is taxable @ 13.75% in the State, while the Value Added Tax on Capital goods is presently 5%. Presently there is higher rate of Value Added Tax in Himachal Pradesh as compared to the neighbouring States of Delhi, Uttar Pradesh, Rajasthan, Chattisgarh and Haryana and companies dealing with above item are unable to compete with its contemporaries in these States due to lower rate of tax. Therefore, the firms are resorting to stock transfer of bulk of the manufactured goods from their premises in Himachal Pradesh to their depots in other States from where the goods are being sold. No tax is coming to States on stock transfer and exports and only marginal tax at 1% under Central Sales Tax is coming. As a result, the State is loosing revenue or the State's revenue is getting diverted to the neighbouring States. By including "mobile pick and carry cranes" in the definition of "Capital Goods", there is hope of increasing revenue to the tune of 2.50 crore rupees annually approximately. Thus, in order to avoid shifting of State's revenue to other States, it appears expedient in revenue interest that Value Added Tax rate on "pick and carry cranes" should be reduced from 13.75% to 5% by including the "hydraulic pick and carry cranes" under Capital Goods. Apart from this, it has also been decided to introduce the facility of filing of returns and payment of tax electronically to the traders. This will facilitate the traders to deposit tax and to file returns from their shops/offices or even from the residence. The new facility will go a long way in providing traders friendly environment in the State. This has necessitated amendments in the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005.

Since, the Legislative Assembly was not in session and amendment in the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 had to be made urgently, therefore, the Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment) Ordinance, 2010 (H.P. Ordinance No. 10 of 2010) was promulgated under clause (1) of article 213 of the Constitution of India by the Governor of Himachal Pradesh on 12th November 2010, which was published in the Rajpatra, Himachal Pradesh on 16th November, 2010. Now, the said Ordinance is required to be replaced by a regular enactment.

This Bill seeks to replace the said Ordinance without modification.

PREM KUMAR DHUMAL, Chief Minister.

DHARAMSHALA: Dated________ 2010 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7665

FINANCIAL MEMORANDUM

The provision of clause 2 of the Bill when enacted will result in increase in the State revenue to the tune of approximately 2.50 crore rupees annually. As the provisions of the Bill after being enacted are to be enforced by the existing Government machinery, no additional expenditure will be involved.

________

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

________

RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207

OF THE CONSTITUTION

File No. EXN-F(10)-1/2006-II.

The Governor of Himachal Pradesh after having been informed of the subject matter of the Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment) Bill, 2010, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill by the Legislative Assembly.

7666 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

शिमला-4, 7 दिसम्बर, 2010

संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010 (2010 का विधेयक संख्यांक-39) जो आज दिनांक 7 दिसम्बर, 2010 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7667

2010 का विधेयक संख्यांक 39 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010 हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2010

(विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में)

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 (1970 का अधिनियम संख्यांक 17) का और संशोधन करने के लिए विधेयकविधेयकविधेयकविधेयकविधेयक ।

भारत गणराज्य के इकसठवेंं वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः--

संक्षिप्त नाम। 1.1.1.1.1. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय

(संशोधन) अधिनियम, 2010 है ।

धारा 28 का प्रतिस्थापन । 2.2.2.2.2. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है ) की धारा 28 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ :--

''28. विा समिति.--''28. विा समिति.--''28. विा समिति.--''28. विा समिति.--''28. विा समिति.--(1) एक विा समिति होगी और इसका गठन, पदेन सदस्यों से अन्यथा इसके सदस्यों की पदावधि तथा इसकी शक्तियां और कृत्य ऐसे होंगे जैसे परिनियमों में अधिकथित किए जाएं ।

(2) यदि बैठक में किसी कार्यसूची पर सदस्यों में कोई सहमति नहीं होती है या कार्यकारी परिषद्‌ के किसी मामले पर विा समिति की सिफारिशों के साथ सहमत न होने की दशा में मामले को, कार्यकारी परिषद्‌ द्वारा, मामले के ब्यौरे और विा समिति की सिफारिशों से असहमत होने के कारणों सहित, कुलाधिपति को विनिश्चय के लिए निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर कुलाधिपति का विनिश्चय अंतिम होगा ।''

3.3.3.3.3. मूल अधिनियम की धारा 35-क का लोप किया जाएगा । धारा 35-क का लोप 7668 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन

वर्ष, 2003 में राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 में धारा 35-क अन्तःस्थापित की थी धारा 35-क में निम्नलिखित उपबंध किया गया था :--

''35-क. पदों इत्यादि का सृजन.--''35-क. पदों इत्यादि का सृजन.--''35-क. पदों इत्यादि का सृजन.--''35-क. पदों इत्यादि का सृजन.--''35-क. पदों इत्यादि का सृजन.--विश्वविद्यालय द्वारा सृजित किसी पद, पोजीशन और समनुदेशन का तब तक कोई प्रभाव नहीं होगा जब तक कि राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित न हो'' ।

धारा 35-क इसलिए अन्तःस्थापित की गई थी क्योंकि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को, कृत्यों के निर्बाध निर्वहन के लिए सहायता अनुदान उपलब्ध करवा रही है, इसलिए उपरोक्त अधिनियम में यह उपबंध किया जाना आवश्यक समझा गया था कि विश्वविद्यालय द्वारा सृजित पद/पोजिशन राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात्‌ ही, प्रभावी होंगे । जब से अधिनियम में धारा 35-क अन्तःस्थापित की गई तभी से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों की उक्त धारा का लोप किए जाने की माँग रही है, क्योंकि इससे विश्वविद्यालय के कृत्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है । हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का प्रतिविरोध यह है कि विश्वविद्यालय एक स्वायत निकाय है और इसे पदों के सृजन तथा उन्हें भरने के लिए स्वतन्त्र रखा जाना चाहिए । इसलिए, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों की मांग को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के मामलों को निपटाने के लिए एक समिति गठित की थी । उक्त समिति ने सरकार को पूर्वोक्त अधिनियम की धारा 35-क का लोप करने हेतु विचार करने की सिफारिश की है । इसलिए पूर्वाक्त अधिनियम में संशोधन किए जाने का विनिश्चय किया गया है।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है ।

ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान,ईश्वर दास धीमान, प्रभारी मन्त्री । धर्मशाला : तारीख :.............................., 2010 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7669

वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन

-शून्य-

--------

प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

-शून्य-

-------

7670 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL No. 39 of 2010

THE HIMACHAL PRADESH UNIVERSITY (AMENDMENT)

BILL, 2010

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh University Act, 1970 (Act No. 17 of 1970).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in

the Sixty-first Year of the Republic of India as follows:—

Short title.

1. This Act may be called the Himachal Pradesh University

(Amendment) Act, 2010.

Substitution of section

28.

2. For section 28 of the Himachal Pradesh University Act, 1970 (hereinafter referred to as the "principal Act"), the following section shall be substituted, namely:—

"28. Finance Committee.— (1) There shall be a Finance Committee and its constitution, the term of office of its members other than ex-officio members and its powers and functions shall be as laid down in the Statutes.

(2) If there is no consensus amongst the members on any agenda in the meeting or in case the Executive Council does not agree with the recommendations of the Finance Committee on any issue, the matter shall be referred by the Executive Council, alongwith the details of the case and the reasons for disagreeing with the recommendations of the Finance Committee to the Chancellor for decision, and the decision of the Chancellor thereupon shall be final".

3. Section 35-A of the principal Act shall be omitted.

Omission of section 35-A.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7671 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

The State Government inserted section 35-A in the Himachal Pradesh University Act, 1970 in the year 2003. In section-35-A, the following provision was made:—

"35-A. Creation of posts etc.— No post, position and assignment created by the University shall have any effect unless approved by the State Government". Section-35-A was inserted since the State Government is providing Grant-in- Aid for the smooth functioning of the University, therefore, it was felt necessary to make a provision in the Act ibid that any post/position created by the University shall take effect only after the same has been approved by the State Government. Ever since the insertion of section 35-A in the Act, there has been a demand from the employees and students of the Himachal Pradesh University for the deletion of said section, as it is causing hurdle in the functioning of the University. The contention of the employees of Himachal Pradesh University is that the University is an autonomous body and it should be given free hand in creation and filling up of posts. Thus, in view of the demand of the employees and students of the Himachal Pradesh University, the Government constituted a committee to sort out the issues of the Himachal Pradesh University. The said committee recommended to the Government to consider deletion of section 35-A of the Act ibid. Therefore, it has been decided to carry out amendments in the Act ibid.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

ISHWAR DASS DHIMAN,

Minister-in-Charge.

DHARAMSHALA: The.....................2010.

________

FINANCIAL MEMORANDUM

—Nil—

___________

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

7672 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

शिमला-4, 7 दिसम्बर, 2010

संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2010 (2010 का विधेयक संख्यांक-25) जो आज दिनांक 7 दिसम्बर, 2010 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7673

2010 का विधेयक संख्यांक 25 2010 का विधेयक संख्यांक 25 2010 का विधेयक संख्यांक 25 2010 का विधेयक संख्यांक 25 2010 का विधेयक संख्यांक 25 हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (2010 का अधिनियम संख्यांक 9) का और संशोधन करने के लिए विधेयकविधेयकविधेयकविधेयकविधेयक ।

भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा

निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--

1.1.1.1.1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र स्ांक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अधिनियम, 2010 है ।

(2) यह 13 अक्तूबर, 2010 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

धारा 4 का संशोधन। 2010 का 9.

2.2.2.2.2. हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 4 में,--

(क) उपधारा (1) में द्वितीय परन्तुक का लोप किया जाएगा; और

(ख) उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी,

अर्थात्‌ः--

''(2) कर, मोटरयान के क्रय मूल्य पर, अधिनियम की अनुसूची-2

में यथाविनिर्दिष्ट दर पर उद्‌गृहीत किया जाएगाः

परन्तु जहां मोटरयान का क्रय मूल्य, मूल बीजक की अनुपलब्धता के कारण या उसे प्रस्तुत न किए जाने के कारण अभिनिश्चित नहीं किया जा सकता 7674 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

है या जब प्रस्तुत किया गया बीजक मिथ्या साबित हो जाता है या यदि मोटरयान को क्रय से अन्यथा अवाप्त या अभिप्राप्त किया गया है, तब उसका क्रय मूल्य, वह मूल्य या कीमत होगी जिस पर मोटरयान को उसकी किस्म या गुणवत्ता के आधार पर विक्रीत किया गया है या जिस पर वह खुले बाजार में विक्रय के योग्य है।"।

3.3.3.3.3. मूल अधिनियम की धारा 5 का लोप किया जाएगा ।

धारा 5 का लोप।

4. 4. 4. 4. 4. (1) हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर

(संशोधन) अध्यादेश, 2010 एतद्‌द्वारा निरसित किया जाता है ।

2010 के अध्यादेश संख्यांक 8 का निरसन और व्यावृत्तियां ।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7675

उद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथन

राज्य के बाहर से निजी/वाणिज्यिक उपयोग के लिए व्यक्तियों द्वारा बड़ी संख्या में मोटर यान लाए जा रहे हैं, जिससे राज्य को, ऐसे यानों को राज्य के भीतर क्रय न करने पर, इससे प्राप्त होने वाले समुचित राजस्व से वंचित होना पड़ रहा है । विशेषतया, कम्पनी की कोटा नीति के परिणामस्वरूप, ऐसे यानों की अनुपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में माल यान राज्य के बाहर से लाए जा रहे हैं । राज्य में मोटरयानों, विशेषतया माल यानों की मांग उपलब्धता से सदैव ही अधिक रही है और विभिन्न कम्पनियों की वर्तमान कोटा नीति, लोगों को ऐसे यानों को हिमाचल प्रदेश के बाहर से क्रय करने के लिए बाध्य कर रही है, जिससे राज्य को राजस्व की बहुत हानि हो रही है । मोटरयानों पर प्रवेश कर अधिरोपित करने से वर्तमानतः हिमाचल प्रदेश के बाहर से किया जा रहा यानों का क्रय राज्य के भीतर से ही होना प्रत्याशित है, जिससे राज्य में मूल्य परिवर्धित कर के संग्रहण में वृद्धि होगी और क्रेता को राज्य के भीतर नजदीकी आउटलैट से क्रय करना भी सुकर होगा । इसके अतिरिक्त इस राजस्व ह्नास को रोकने के आशय से ''मोटरयानों'' को हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 की अनुसूची-2 में सम्मिलित किया गया है । राजस्थान जैसे राज्य ने 1988 में ही यानों पर प्रवेश कर अधिरोपित कर दिया था, जो सुचारू रूप से चल रहा है ।

2. इस प्रकार संगृहीत राजस्व को, राज्य में पुरानी और विद्यमान सड़कों, पुलों और अन्य अवसंरचनाओं की मरम्मत और अनुरक्षण सहित, नई सड़कों को बनाने, लोक प्रसुविधाओं तथा अन्य अवसंरचनाओं के लिए व्यय किया जाएगा । क्योंकि राज्य स्थितिकीय प्रतिकूल परिस्थितियों से घिरा हुआ है और राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में पहॅुंचने के लिए तथा लोगों, सामग्री और फसलों के गमना-गमन को सुकर बनाने हेतु प्रवेश शुल्क अधिरोपित कर के, अतिरिक्त राजस्व जुटाकर बेहतर सड़क अवसंरचना तथा लोक प्रसुविधाएं उपलब्ध करवाना अनिवार्य है ।

3. क्योंकि विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 में संशोधन किया जाना अनिवार्य हो गया था । अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अध्यादेश, 2010 को 12 अक्तूबर, 2010 को प्रख्यापित किया गया था, जिसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश (असाधारण) में तारीख 13 अक्तूबर, 2010 को प्रकाशित किया गया था । अब उक्त अध्यादेश को नियमित अधिनियमिति द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना अपेक्षित है ।

4. यह विधेयक उक्त अध्यादेश को बिना उपान्तरण के प्रतिस्थापित करने के लिए है ।

प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल,प्रेम कुमार धूमल, मुख्य मन्त्री । धर्मशालाः तारीखः .......... 2010 7676 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

विाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापनविाीय ज्ञापन

हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 की अनुसूची-2 के अन्तर्गत मोटरयानों को सम्मिलित किया जाना राजस्व ह्नास रोकने में सहायक होगा, क्योंकि निजी/वाणिज्यिक उपयोग हेतु यानों को विशेषतया माल यानों को बड़ी संख्या में राज्य के बाहर से क्रय किया जा रहा है, जिससे राज्य को राजस्व की बहुत हानि हो रही है । विधेयक के खण्ड 2 के अधिनियमित होने पर राजकोष को प्रतिवर्ष लगभग तीन करोड़ रूपए की प्राप्ति होगी और राज्य के भीतर व्यापार के आ जाने से मूल्य परिवर्धित कर संग्रहण में काफी वृद्धि होगी । क्योंकि विधेयक के उपबंध, अधिनियमित किए जाने के पश्चात्‌ विद्यमान सरकारी तन्त्र द्वारा प्रवर्तित किए जाने हैं और इसलिए राजकोष से कोई अतिरिक्त व्यय नहीं होगा।

---------

प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

---शून्य---

------

भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें

नस्ति संख्याःई.एक्स.एन.-एफ(10)-2/2010

हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2010 की विषय-वस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7677

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 25 of 2010.

THE HIMACHAL PRADESH TAX ON ENTRY OF GOODS INTO LOCAL AREA

(AMENDMENT) BILL, 2010

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area

Act, 2010 (Act No. 9 of 2010).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in

the Sixty-first Year of the Republic of India as follows:—

1. (1) This Act may be called the Himachal Pradesh Tax on

Entry of Goods into Local Area (Amendment) Act, 2010.

Short title and commence- ment.

(2) It shall be deemed to have come into force on the 13th day of

October, 2010.

9 of 2010.

2. In section 4 of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 (hereinafter referred to as the "principal Act")—

Amendment of section 4.

(a) in sub-section (1), the second proviso shall be omitted; and

(b) for sub-section (2), the following sub-section shall be

substituted, namely:—

"(2) The tax shall be levied on purchase value of a motor vehicle at the rate as specified in Schedule-II of the Act:

Provided that where the purchase value of a motor vehicle is not ascertainable on account of non-availability or non-production of the original invoice or when the invoice produced is proved to be false or if the motor vehicle is acquired or obtained otherwise then by way of purchase, then the 7678 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

2

purchase value shall be the value or price at which motor vehicle of the kind or quality is sold or is capable of being sold in open market.".

3. 3. Section 5 of the principal Act shall be omitted.

Omission of section 5

4. (1) The Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local

Area (Amendment) Ordinance, 2010 is hereby repealed.

Repeal of Ordinance No. 8 of 2010 and savings.

(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7679 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

Large number of Motor Vehicles are being brought from outside the State by individual for personal/ commercial use, thus depriving the State of its legitimate revenue on the purchase of such vehicles within the State. Especially, large number of goods vehicles are being brought from outside the State due to non-availability of such vehicles because of company's quota policy. The demand in the State has always exceeded the availability of motor vehicles, especially Goods vehicles and the existing quota policy of various companies are forcing people to purchase such vehicles outside of Himachal Pradesh thereby leading to huge revenue loss to the State. With the imposition of Entry Tax on motor vehicles, the purchases currently being made from outside the State are expected to shift inside the State which will increase VAT collection in the State and will facilitate the purchaser to purchase motor vehicles from the nearest outlet within the State. Further, in order to plug this revenue leakage the "motor vehicles" have been included in Schedule-II of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010. The State like Rajasthan has imposed Entry Tax on vehicles way back in 1988, which is working smoothly.

2. The revenue so collected will get re-deployed for building new roads, public facilities and other infrastructure including repair and maintenance of old and existing roads, bridges and other infrastructure in the State. Since, State suffers from locational disadvantages and to reach out the far-flung areas of the State and to facilitate smooth movement of men, material and crops, it is essential to provide better road infrastructure and public facilities by mobilizing additional revenue through imposition of Entry Tax.

3. Since the Legislative Assembly was not in session and amendment in the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 had to be made urgently. Therefore, the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Ordinance, 2010 (H.P. Ordinance No. 8 of 2010) was promulgated under clause (1) of article 213 of the Constitution of India by the Governor of Himachal Pradesh on 12th October 2010, which was published in the Rajpatra, Himachal Pradesh on 13th October 2010. Now, the said Ordinance is required to be replaced by a regular enactment.

4. This Bill seeks to replace the said Ordinance without modification.

PREM KUMAR DHUMAL, Chief Minister.

Dharamshala: Dated________ 2010.

7680 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

FINANCIAL MEMORANDUM

The inclusion of motor vehicle under Schedule-II of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 will help to plug revenue leakage, as large number of vehicles especially Goods vehicles are being purchased from outside the State for personal/commercial use thereby leading to huge revenue loss to the State. Clause 2 of the Bill, if enacted, will yield approximately Rs. 3.00 crore per annum to the State exchequer and with the shifting of trade inside the State, the VAT collection will get sizable boost. As the provisions of the Bill after being enacted are to be enforced through the existing Government machinery, and there will be no additional expenditure from the State exchequer.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7681 MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

______________

RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207 OF

THE CONSTITUTION

File No. EXN-F(10)-2/2010.

The Governor of Himachal Pradesh, having been informed of the subject matter of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Bill, 2010, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill by the Legislative Assembly.

7682 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना

शिमला-4, 7 दिसम्बर, 2010

संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--संख्याः वि0स0/1-63/2010.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन विधेयक, 2010 (2010 का विधेयक संख्यांक-27) जो आज दिनांक 7 दिसम्बर, 2010 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7683

2010 का विधेयक संख्यांक 27 2010 का विधेयक संख्यांक 27 2010 का विधेयक संख्यांक 27 2010 का विधेयक संख्यांक 27 2010 का विधेयक संख्यांक 27 हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान संशोधन विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010विधेयक, 2010

(विधानसभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान अधिनियम, 1999 (1999 का अधिनियम संख्यांक 16) का और संशोधन करने के लिए विधेयक विधेयक विधेयक विधेयक विधेयक ।

भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा

निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। 1.1.1.1.1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान (संशोधन) अधिनियम, 2010 है।

(2) यह 07 अक्तूबर, 2010 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।

धारा 4-क का संशोधन। 1955 का 16

2.2.2.2.2. हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान अधिनियम, 1999 की धारा 4-क में "विक्रय करने या प्रेषण कारित करने या कारित करने के लिए प्राधिकृत करने" शब्दों के स्थान पर "विक्रय करने या क्रय करने या प्रेषण या प्राप्ति कारित करने या करवाने को प्राधिकृत करने" शब्द रखे जाएंगे ।

3. 3. 3. 3. 3. (1) हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान (संशोधन) अध्यादेश, 2010 एतद्‌द्वारा निरसित किया जाता है ।

2010 के अध्यादेश संख्यांक 6 का निरसन ओैर व्यावृत्तियां। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी । 7684 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

उद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथनउद्‌देश्यों और कारणों का कथन

विभिन्न औद्योगिक और अन्य ईकाइयों द्वारा किए गए थोक क्रय और बड़ी औद्योगिक ईकाइयों जैसे कि सीमेंट संयन्त्रों द्वारा हिमाचल प्रदेश से अन्य राज्यों को माल के प्रेषण से, बैरियरोें पर अधिक भीड़-भाड़ हो रही है जिसनेे यानों के आवागमन की गति को ज़बरदस्त रुप से कम कर दिया है। यद्यपि हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान अधिनियम, 1999 की धारा 4-क में सड़क द्वारा वहन के लिए माल के प्रेषण पर कर के संग्रहण को प्राधिकृत करने का उपबन्ध विद्यमान है, तथापि ऐसी औद्योगिक ईकाइयों द्वारा थोक में क्रय किए जाने से बैरियरों पर अभी भी भीड़-भाड़ हो रही है और यातायात के मुक्त आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है । इसलिए बैरियरों पर अधिक भीड़-भाड़ को कम करने और यातायात के आवागमन को सुचारु करने के आशय से तथा विसंगति को भी दूर करने के लिए राजस्व और सार्वजनिक सुविधा के हित में पूर्वाेक्त अधिनियम की धारा 4-क को संशोधित करना समीचीन समझा गया है । थोक में क्रय की प्राप्तियों पर, कर संग्रहण को प्राधिकृत करने से बैरियरों पर भीड़-भाड़ कम हो जाएगी, क्योंकि प्राधिकृत व्यक्ति की ओर से और उसके लिए राज्य के भीतर माल को लाने वाले यानों को, कतार में प्रतीक्षा करनी अपेक्षित नहीं होगी।

क्योंकि विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान अधिनियम, 1999 में संशोधन किया जाना आवश्यक था । अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन हिमाचल प्रदेश (सड़क द्वारा कतिपय माल के वहन पर) कराधान (संशोधन) अध्यादेश, 2010 (2010 का अध्यादेश संख्यांक 6) प्रथम अक्तूबर, 2010 को प्रख्यापित किया गया था जिसे राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में 07 अक्तूबर, 2010 को प्रकाशित किया गया था। अब उपरोक्त अध्यादेश को नियमित विधान द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना अपेक्षित है।

यह विधेयक उपर्युक्त अध्यादेश को बिना उपान्तरण के प्रतिस्थापित करने के लिए है।

प्रो0 प्रेम कुमार धूमल,प्रो0 प्रेम कुमार धूमल,प्रो0 प्रेम कुमार धूमल,प्रो0 प्रेम कुमार धूमल,प्रो0 प्रेम कुमार धूमल, मुख्य मन्त्री। धर्मशाला ः तारीख........................2010 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7685

वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन

विधेयक के उपबन्ध अधिनियमित होने पर विद्यमान सरकारी तन्त्र द्वारा प्रवर्तित किए जाने हैं और इससे राजकोष से कोई अतिरिक्त व्यय नहीं होगा ।

————

प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

विधेयक का खण्ड़ 2 राज्य सरकार को सड़क द्वारा वहन के लिए, थोक में क्रय किए गए माल की प्राप्तियों पर कर का संग्रहण करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत करने के लिए सशक्त करता है । शक्तियों का यह प्रत्यायोजन अनिवार्य और सामान्य स्वरुप का है । 7686 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 27 of 2010 THE HIMACHAL PRADESH TAXATION (ON CERTAIN GOODS CARRIED BY ROAD) AMENDMENT BILL, 2010

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Taxation (on Certain Goods Carried by

Road) Act, 1999(Act No. 16 of 1999).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in

the Sixty- first Year of the Republic of India as follows:—

1. (1) This Act may be called the Himachal Pradesh Pradesh

Taxation (on Certain Goods Carried by Road) Amendment Act, 2010.

Short title and commence- ment.

(2) It shall be deemed to have come into force on 7th day of

October, 2010.

16 of 1999 Amendment of section 4-A.

2. In section 4-A of the Himachal Pradesh Taxation (on Certain Goods Carried by Road) Act, 1999, for the words "selling or causing or authorising to cause despatch", the words "selling or purchasing or causing or authorising to cause despatch or receipt" shall be substituted.

3. (1) The Himachal Pradesh Taxation (On Certain Goods

Carried by Road) Amendment Ordinance,2010 is hereby repealed.

Repeal of Ordinance No. 6 of 2010 and savings.

(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7687 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

The bulk purchases made by various industrial units and others and the despatch of goods from Himachal Pradesh to other States by the big Industrial Units, such as cement Industries have been adding to congestion at the Barriers which drastically curtail the speed of movement of vehicles. Though there exists a provision under section 4-A of the Himachal Pradesh Passengers and Goods Taxation Act, 1955 to authorise for collection of Additional Goods Tax on despatch of goods for carriage by Road, however, the bulk purchases being made by such Industrial Units are still creating congestion at Barriers and free flow of traffic is being hampered. Therefore, in order to decongest the Barriers and to make movement of traffic smooth and also to remove the anomaly, it is considered expedient in the interest of revenue and public convenience to amend section 4-A of the Act ibid. The authorisation to collect additional Goods Tax on receipt of bulk purchases will help in decongesting the Barriers as Vehicles bringing Goods inside the State for and on behalf of authorised person will not be require to wait at Barriers.

2. Since the Legislative Assembly was not in session and amendment in the Himachal Pradesh Passengers and Goods Taxation Act,1955 had to be made urgently. Therefore, the Himachal Pradesh Passengers and Goods Taxation (Amendment) Ordinance, 2010 (H.P.Ordinance No. 6 of 2010) was promulgated under clause (1) of article 213 of the Constitution of India by the Governor of Himachal Pradesh on 1st October, 2010, which was published in Rajpatra, Himachal Pradesh on 7th October, 2010. Now, the said Ordinance is required to be replaced by a regular legislation.

3. This Bill seeks to replace the said Ordinance without modification.

PREM KUMAR DHUMAL, Chief Minister.

Dharamshala:

The .............2010.

7688 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

FINANCIAL MEMORANDUM

The provisions of the Bill when enacted are to be enforced through the existing Govern- ment machinery and there will be no additional expenditure from the State exchequer.

___________

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

Clause 2 of the Bill seeks to empower the State Government to authorise a person to collect tax on receipt of goods purchased in bulk for carriage by road. This delegation is essential and normal in character.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7689 ब अदालत उप-पंजीकाध्यक्ष, सुन्दरनगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

ब मुकद्दमा शीर्षक :

श्रीमती कमला देवी पत्नी श्री रामानन्द भारद्वाज पुत्र श्री झण्डू राम, निवासी सलापड़, डाकघर सदवाहण, तहसील सुन्दरनगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश . .प्रार्थिया।

बनाम

1. आम जनता 2. संजीव, कपिल पुत्रगण व सरोज कुमारी पुत्री श्री रामानन्द भारद्वाज . .प्रत्यार्थीगण। प्रार्थना-पत्र किये जाने अपंजीकृत वसीयत को पंजीकृत करने बारे।

उपरोक्त प्रार्थिया श्रीमती कमला पत्नी स्व0 श्री रामानन्द भारद्वाज, निवासी सलापड़, डाकघर सदवाहण, तहसील सुन्दरनगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने अधोहस्ताक्षरी के न्यायालय में विला पंजीकृत वसीयत को पंजीकृत करने हेतु आवेदन-पत्र प्रस्तुत किया है। प्रार्थिया के पति स्व0 श्री रामानन्द भारद्वाज पुत्र श्री झण्डू राम, निवासी सलापड़, डा0 सदवाहण, तहसील सुन्दरनगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने दिनांक 1-8-2010 को विला पंजीकृत वसीयत अपनी पत्नी श्रीमती कमला के नाम करवा रखी है। प्रार्थिया के पति श्री रामानन्द भारद्वाज का देहान्त 15-8-2010 को हुआ है। जिसका मृत्यु प्रमाण-पत्र आवेदन-पत्र के साथ संलग्न है।

अतः इस इश्तहार राजपत्र के माध्यम से फ्रीकदोयम व आम जनता को सूचित किया जाता है कि उपरोक्त विला पंजीकृत वसीयत को पंजीकृत करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 23-12-2010 को असालतन व वकालतन हाजिर अदालत होकर पेश कर सकते हैं। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर विला पंजीकृत वसीयत को पंजीकृत करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 6-12-2010 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर न्यायालय से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- उप-पंजीकाध्यक्ष, सुन्दरनगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश। 7690 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

ब अदालत श्री देवी चन्द ठाकुर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, पधर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

तारीख पेशी : 23-12-2010 किस्म मुकद्दमा : तकसीम मुकद्दमा नं0 3/2008

हिमाचल प्रदेश

श्री धर्मदेव पुत्र स्व0 श्री लौंगू, निवासी पिपली, डाकघर पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, . .प्रार्थी।

बनाम

कृपाल सिंह आदि

. .प्रत्यार्थीगण। तकसीम जेर धारा 123 भू0-राजस्व अधिनियम, 1954 के भूमि तकसीम खेवट 116, खतौनी नं0 149, कित्ता 7, तादादी रकबा 28-09 बीघा, पिपली, तहसील पधर।

नोटिस बनाम :

1. सर्वश्री राजेन्द्र सिंह पुत्र गोबिन्द, 2. रूपा राम पुत्र लौंगू, 3. धुडू पुत्र सौजू, निवासी पिपली, डा0 पाली, तहसील पधर, 4. तारा चन्द पुत्र दयालू, 5. राम गोपाल, निवासी चमरोग, डा0 तारा देवी, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश, 6. वरफू राम पुत्र देवू, निवासी पिपली, डा0 पाली, तहसील पधर, 7. श्रीमती कली पत्नी लौंगू, निवासी चमरोग, डा0 तारा देवी, 8. नरोतम सिंह मृतक पुत्र ग्याहरू/वारसान 1. मीरा देवी पत्नी नरोतम सिंह, 2. चेतना देवी, 3. सीमा देवी, 4. मिमू राम, 5. रींकू पुत्र व पुत्रियां स्व0 नरोतम सिंह, गांव पिपली, डा0 पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।

यद्यपि उपरोक्त शीर्षक वाद अधोहस्ताक्षरी के न्यायालय में विचाराधीन है। परन्तु इस न्यायालय को पूर्ण विश्वास हो चुका है कि उपरोक्त प्रतिवादीगणों की तलवी साधारण तौर पर सम्भव नहीं है। अतः उपरोक्त प्रतिवादीगणों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि वे असालतन या वकालतन दिनांक 23-12-2010 को प्रातः 10.00 बजे आकर मुकद्दमा की पैरवी करें अन्यथा गैर-हाजरी की सूरत में कार्यवाही एकतरफा अमल में लाई जायेगी।

आज दिनांक 7-12-2010 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

देवी चन्द ठाकुर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, पधर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7691 ब अदालत श्री राजपाल भारद्वाज, सहायक समाहर्ता, द्वितीय श्रेणी, तह0 सुन्नी, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा संख्या 7-IX/2010

उनवान मुकद्दमा :

जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

श्री प्रमोद कुमार पुत्र श्री मनसा राम, निवासी नगर, डा0 सैन्ज, परगना छोटाबल, तह0 सुन्नी, . .प्रार्थी (फरीक अब्बल)।

बनाम

सर्व श्री/श्रीमती यादव, गोपाल, वेद प्रकाश पुत्रगण सुनु गुड्‌डी, खपडी, रामकु, द्रौपती, निर्मला पुत्रियां देवकी वेवा माठू कौशल्या पुत्री छांगु, परस राम, दीप राम, मोहन लाल, खेम राज, निका राम पुत्रगण सावित्री, शन्ति, प्रभु पुत्रियां विद्याधर, जयनन्द, रेवा, पूर्ण, दुलीचन्द पुत्रगण सनैहरू पुत्री फौजराम, अशोक, खेमराज, सन्तोष पुत्रगण शकुन्तला, कमला पुत्रियां देवकी वेवा बुलीचन्द, रोशन लाल पुत्र कौशल्या वेवा निका राम, अगरू पुत्र रूपु, दिवाकर, जगदीश, ललित पुत्रगण नीमराम, मस्त राम, गुलाब पुत्रगण अमरदत, पदम पुत्र सीस राम, खुबचन्द पुत्र पीरू, ओम प्रकाश पुत्र मीना, राधा पुत्रियां विद्या वेवा बुलीचन्द, कृष्ण लाल, दिवान, मेहरचन्द, धर्मचन्द पुत्रगण पार्वती वेवा तेजराम, हिमचन्द पुत्र नीलकण्ठ, शंकरी वेवा हेतराम, लीलाधर, योगानन्द पुत्रगण नरसिंहदत, दिवली पुत्री भीमी, तुला राम, दुलीचन्द, ओम प्रकाश, गीता राम, चन्द प्रकाश पुत्रगण रीतुराज, खेमराज, परस राम, टिका राम, मती प्रकाश पुत्रगण तारा, कान्ता पुत्रियां विद्या वेवा धनानन्द, घनश्याम पुत्र सेवानन्द, युगल पुत्र सत्या, लता, अंजना पुत्रियां दसोदा वेवा सीता राम, प्यारे लाल, टेकचन्द पुत्रगण जमना, नागणु, निर्मला पुत्रियां चम्पा वेवा दीपराम, हेमप्रकाश, जितेन्द्र पुत्रगण सन्तोष पुत्री कमला वेवा मेदराम, अनन्त राम, चन्दु पुत्रगण रंगीया, नरेन्द्र, हिराम लाल पुत्रगण कमला, पुश्पा, शशि पुत्रियां बसन्ती वेवा भजनदास, चुनी लाल, नन्द लाल, घनश्याम पुत्रगण केसरू, धनी राम, रूपचन्द, दीपराम पुत्रगण सुबदा, सवित्री पुत्रियां चिन्ता राम निवासीगण शावली। निका राम, धर्मदत, उमादत, तिलकराम पुत्रगण सनैहरू, गोदावरी, सवित्री, हिरी, निर्मला, सरस्वती पुित्रयां दिवली वेवा धनी राम, जगतराम पुत्र निशा पुत्री ठाकुरदत निवासीगण नगर। रेवादास, छांगु, भगत राम, जीतराम, लीलादत, नीमचन्द पुत्रगण कौशल्या पुत्री संवारू वेवा मौजीराम निवासीगण सोहल

. .प्रतिवादीगण (फरीक दोयम)। दरख्वास्त हि0 प्र0 भू-राजस्व अधिनियम की जेर धारा 123 के अन्तर्गत भूमि मंदर्जा खेवट/खतौनी नं0 45/177 ता 191 कुल किता 88 तादादी रकबा 10-22-22 है0 वाका मौजा शावली, तहसील सुन्नी, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश। 7692 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

इश्तहार प्रकाशन।

हरगाह मुकद्दमा हजा में उपरोक्त प्रतिवादियों को इस अदालत द्वारा कई बार समन जारी किये गये। परन्तु फरीकदोयम हाजिर अदालत नहीं हो रहे हैं। इसलिए अदालत हजा को ऐसा प्रतीत होता है कि इन प्रतिवादियों की तामील साधारण तरीके से की जानी सम्भव नहीं है। अतः बजरिया इश्तहार जेर आदेश 5, रूल 20 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के अन्तर्गत जारी किया जाकर फरीकदोयम को सूचित किया जाता है कि वे अदालत में मिति 22-12-2010 को असालतन व वकालतन जैसी भी सूरत हो हाजिर आवे अन्यथा मुकद्दमा उपरोक्त में कार्यवाही एकतरफा अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 3-12-2010 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

राजपाल भारद्वाज, सहायक समाहर्ता, द्वितीय श्रेणी, तह0 सुन्नी, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री योगेन्द्र सैन, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार, रोनहाट, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश

ब मुकद्दमा :

श्री कली राम पुत्र श्री कमना, ग्राम खलाण्डो, उप तहसील रोनहाट।

बनाम

आम जनता

प्रार्थना-पत्र बराए दरुस्ती बारे।

श्री कली राम पुत्र श्री कमना, ग्राम खलाण्डो, उप तहसील रोनहाट ने इस न्यायालय में ब्यान हल्फी सहित एक प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसका हकीकी नाम कली राम व पिता का नाम कमना है, जो कि प्रार्थी के ग्राम पंचायत कोटी-बोंच के पंचायती रिकार्ड में भी दर्ज है, परन्तु राजस्व रिकार्ड वाका मौजा बोराड़, उप तहसील रोनहाट के रिकार्ड में प्रार्थी का नाम कलिया व पिता का नाम मालू दर्ज है जोकि गलत है। प्रार्थी इस गलती को दरुस्त करवाना चाहता है। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7693 अतः आम जनता व सम्बन्धित रिश्तेदारों को इस अदालती इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि अगर उपरोक्त दरुस्ती बारे किसी को कोई एतराज हो तो वह अपने उजर या एतराज असालतन या वकालतन दिनांक 25-12-2010 को प्रातः 10.00 बजे या इससे पूर्व पेश कर सकता है। बाद गुजरने मियाद कोई भी उजर या एतराज काबिले समायत न होगा और प्रार्थना-पत्र उपरोक्त पर आगामी कार्यवाही अमल में लाई जावेगी।

आज दिनांक 25-11-2010 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

योगेन्द्र सैन, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार, रोनहाट, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।

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लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 21 दिसम्बर, 2010

सं0 पी0बी0डब्ल्यू (बी0) एफ(5)28/2010.-सं0 पी0बी0डब्ल्यू (बी0) एफ(5)28/2010.-सं0 पी0बी0डब्ल्यू (बी0) एफ(5)28/2010.-सं0 पी0बी0डब्ल्यू (बी0) एफ(5)28/2010.-सं0 पी0बी0डब्ल्यू (बी0) एफ(5)28/2010.-यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु गांव जमूनी, तहसील कोटखाई, जिला शिमला में नेहराघाटी-वडैव-क्यारी सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह घोषित किया जाता है कि निम्नलिखित विवरणी में वर्णित भूमि उपर्युक्त प्रयोजन के लिए अपेक्षित है ।

2. यह घोषणा, भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-6 के उपबन्धों के अधीन इससे सम्बन्धित सभी व्यक्तियों को सूचना हेतु की जाती है तथा उक्त अधिनियम की धारा-7 के अधीन भू-अर्जन समाहर्ता लोक निर्माण विभाग (शिमला क्षेत्र) शिमला को उक्त भूमि के अर्जन करने के आदेश लेने का एतद्‌द्वारा निर्देश दिया जाता है।

3. भूमि रेखांक का निरीक्षण भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग (शिमला क्षेत्र) शिमला के कार्यालय में किया जा सकता है। 7694 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

विवरणीविवरणीविवरणीविवरणीविवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 रकवा (है0) में शिमला कोटखाई जमूनी 553 0-02-03 564 0-04-05 कुल किता 2 0-06-08कुल किता 2 0-06-08कुल किता 2 0-06-08कुल किता 2 0-06-08कुल किता 2 0-06-08

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (लोक निर्माण)।

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लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला 21 दिसम्बर, 2010

संख्या पी0 बी0 डब्ल्यू0 (बी) 3 (6) 7/93.-संख्या पी0 बी0 डब्ल्यू0 (बी) 3 (6) 7/93.-संख्या पी0 बी0 डब्ल्यू0 (बी) 3 (6) 7/93.-संख्या पी0 बी0 डब्ल्यू0 (बी) 3 (6) 7/93.-संख्या पी0 बी0 डब्ल्यू0 (बी) 3 (6) 7/93.-मैसर्ज ए0 पॅावर हिमालयाज लिमिटेड, रीजेंसी काम्पलैक्स पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश पिन-173025 ने राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश के साथ पर्यटन विभाग हिमाचल प्रदेश सरकार के सचिव के माध्यम से, 18 जनवरी, 2003 को सोलंग नाला, तहसील मनाली, जिला कुल्लु, हिमाचल प्रदेश में आकाशी रज्जु मार्ग एवं स्की केन्द्र परियोजना के निर्माण, स्वामित्व, परिचालन और अन्तरण (''बी0 ओ0 ओ0 टी0'') आधार पर, विनिर्माण के लिए एक प्राधिकार करार किया गया है।

और विशेशज्ञ समिति और निरीक्षक आकाशी रज्जु मार्ग हिमाचल प्रदेश ने, हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग अधिनियम, 1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 7) की धारा 10 के अधीन रिपोर्ट दे दी है कि पूर्वोक्त आकाशी रज्जु मार्ग लोक यातायात के लिए उपयुक्त हैं।

अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग अधिनियम, 1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 7) की धारा 10 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से, पूर्वोक्त कम्पनी द्वारा यातायात के लिए उक्त आकाशी रज्जु मार्ग को प्रारम्भ करने की मंजूरी प्रदान करती हैं ।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (लोक निर्माण)। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7695 [Authoritative English text of this Department Notification No.PBW(B) 3 (6) 7/93 dated 21.12.2010 as required under Article 348 (3) of the Constitution of India].

PUBLIC WORKS DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 21st Dec, 2010

No. PBW(B)3(6)7/93.—Wheras M/S A.Power Himalayas Ltd. Regency Complex Paonta Sahib, Distt. Sirmour, HP PIN-173025 has entered into an AUTHORIZATION AGREEMENT on 18th January, 2003 with the Governor of Himachal Pradesh through Secretary, Department of Tourism, Government of Himachal Pradesh to construct the Aerial Ropeway–cum-Ski-Centre Project on a Build, Own, Operate and Transfer ("BOOT" ) basis at Solang Nallha, Tehsil Manali, Distt. Kullu, HP.

And whereas, the Expert Committee and the Inspector Aerial Ropeway, Himachal Pradesh reported under Section-10 of the Himachal Pradesh Aerial Ropeways Act, 1968 (Act No. 7 of 1969) that the aforesaid aerial ropeway is fit for public traffic.

Now, therefore, in exercise of the powers conferred by Section-10 of the Himachal Pradesh Aerial Ropeways Act, 1968 (Act NO. 7 of 1969), the Governor, Himachal Pradesh is pleased to sanction the opening of the aforesaid aerial ropeway for traffic by the aforesaid Company, from the date of publication of notification in the official Gazettee.

By order Sd/- Pr. Secretary (PW).

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7696 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग अधिसूचना शिमला-171002, 18 दिसम्बर, 2010

संख्या सिंचाई 11-64/2010-मण्डी.-संख्या सिंचाई 11-64/2010-मण्डी.-संख्या सिंचाई 11-64/2010-मण्डी.-संख्या सिंचाई 11-64/2010-मण्डी.-संख्या सिंचाई 11-64/2010-मण्डी.-यतः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव सेरड/108 तहसील सुन्दरनगर जिला मण्डी में उठाऊ सिंचाई योजना नैहरा पलौहटा में पम्प हाऊस के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है । 2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को जो इस से सम्बन्धित हैं, या हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है। 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने तथा सर्वेक्षण करने और उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः सभी अन्य कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस दिनों की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू-अर्जन समाहर्ता हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग, मण्डी के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।

विस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणी जिला तहसील गांव खसरा नं0 बीघा/विस्वा/विस्वांसी मण्डी सुन्दरनगर सेरड/108 974/सा0 0-01-04 973/सा0 0-00-16 किता-2 0-02-00किता-2 0-02-00किता-2 0-02-00किता-2 0-02-00किता-2 0-02-00

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

------- सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग अधिसूचना शिमला-171002, 18 दिसम्बर, 2010

संख्या सिंचाई 11-62/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-62/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-62/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-62/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-62/2010-बिलासपुर.-यतः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव भगतपुर तहसील झण्डूता जिला बिलासपुर में सीवरेज टैंक तलाई के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7697 2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को जो इस से सम्बन्धित हैं, या हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है। 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने तथा सर्वेक्षण करने और उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः सभी अन्य कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस दिनों की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू-अर्जन समाहर्ता, मण्डी हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।

विस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 क्षेत्र (बीघा-विस्वा में) बिलासपुर झण्डूता भगतपुर 706/217 5.00

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

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सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग

अधिसूचना

शिमला-171002, 18 दिसम्बर, 2010

संख्या सिंचाई 11-65/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-65/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-65/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-65/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-65/2010-बिलासपुर.-यतः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव नेरसा तहसील झण्डूता जिला बिलासपुर में जल भण्डारण टैंक नेरसा देवीजी के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है । 7698 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को जो इस से सम्बन्धित हैं, या हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है। 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने तथा सर्वेक्षण करने और उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः सभी अन्य कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस दिनों की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू-अर्जन समाहर्ता, मण्डी हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।

विस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 क्षेत्र (बीघा-विस्वा में) बिलासपुर झण्डूता नेरसा 2/1 0.162/1 0.162/1 0.162/1 0.162/1 0.16

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

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सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागसिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग

अधिसूचना

शिमला-171002, 18 दिसम्बर, 2010

संख्या सिंचाई 11-66/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-66/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-66/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-66/2010-बिलासपुर.-संख्या सिंचाई 11-66/2010-बिलासपुर.-यतः राज्यपाल हिमाचल प्रदेश को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव तुगड़ी तहसील झण्डूता जिला बिलासपुर में उठाऊ पेयजल योजना पम्प हाऊस एवं टैंक बडोल देवीजी के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

7699 2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को जो इस से सम्बन्धित हैं, या हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा-4 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है। 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने तथा सर्वेक्षण करने और उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः सभी अन्य कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस दिनों की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू-अर्जन समाहर्ता, मण्डी हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।

विस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणीविस्तृत विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 क्षेत्र (बीघा-विस्वा में) बिलासपुर झण्डूता तुंगड़ी 13/1 3.1013/1 3.1013/1 3.1013/1 3.1013/1 3.10

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

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7700 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 दिसम्बर, 2010/1 पौष, 1932

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नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 22 December 2010. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2010-12-22.197_gazette_2010-22_12_2010/. Archive identifier in.gazette.himachal.2010-12-22.197_gazette_2010-22_12_2010.