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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 231, 07 February 2011

Published 07 February 2011

Gazette no.
231
Gazetteid
231/GAZETTE/2011-07/02/2011
Identifier
in.gazette.himachal.2011-02-07.231_gazette_2011-07_02_2011
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला,शिमला,शिमला,शिमला, सोम सोम सोम सोमवार, वार, वार, वार, 7777 फर फर फर फरवरी, 2011वरी, 2011वरी, 2011वरी, 2011////11118888 माघ, 1932 माघ, 1932 माघ, 1932 माघ, 1932

हिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकारहिमाचल प्रदेश सरकार

विधि विभागविधि विभागविधि विभागविधि विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 3 फरवरी, 2011

संख्या एल0एल0आर0-डी0(6)-24संख्या एल0एल0आर0-डी0(6)-24संख्या एल0एल0आर0-डी0(6)-24संख्या एल0एल0आर0-डी0(6)-24/2010-लेज/2010-लेज/2010-लेज/2010-लेज....--------हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 31-01-2011 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश प्राईवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) विधेयक, 2010 (2010 का विधेयक संख्यांक 19) को वर्ष 2011 के अधिनियम संख्यांक 15 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348 (3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित करती हैं।

आदेश द्वारा,

अवतार चन्द डोगराअवतार चन्द डोगराअवतार चन्द डोगराअवतार चन्द डोगरा सचिव, विधि। 231-राजपत्र/2011-7-2-2011 (8799)8800 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियवनियवनियवनियामक आयोग) अधिनियम, 2010ामक आयोग) अधिनियम, 2010ामक आयोग) अधिनियम, 2010ामक आयोग) अधिनियम, 2010 हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (ि हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (ि हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (ि

धाराओंधाराओंधाराओंधाराओं का क्रम का क्रम का क्रम का क्रम

धाराधाराधाराधारा : : : :

1. संक्षिप्त नाम और लागू होना । 2. परिभाषाएं । 3. आयोग की स्थापना । 4. आयोग की संरचना । 5. सदस्य का हटाया जाना । 6. आयोग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी । 7. बैठकें । 8. निधि । 9. आयोग की शक्तियां और कृत्य । 10. आयोग की प्रक्रिया और शक्तियां । 11. शास्तियां । 12. आयोग के लेखे और संपरीक्षा । 13. वार्षिक रिपोर्ट । 14. क्षतिपूर्ति । 15. सदस्यों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना । 16. निदेश जारी करने की शक्ति । 17. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना । 18. नियम बनाने की शक्ति । 19. विनियम बनाने की शक्ति । 20. विधान सभा में रखे जाने वाले नियम और विनियम । 21. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति ।

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2222011 का अधिनियम संख्यांक 15011 का अधिनियम संख्यांक 15011 का अधिनियम संख्यांक 15011 का अधिनियम संख्यांक 15

ाा (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्थ्संस्थ्संस्थ्संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 ाा (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 ाा (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010

(राज्यपाल महोदया द्वारा तारीख 31 जनवरी, 2011 को यथा अनुमोदित)

प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान का समुचित स्तरमान सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों के संरक्षण हेतु, राज्य स्तर पर विनियामक आयोग और विनियामक तंत्र की स्थापना करने तथा उससे संबन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियमअधिनियमअधिनियमअधिनियम । । । ।

भारत गणराज्य के इकसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1111.... संक्षिप्त नाम और लासंक्षिप्त नाम और लासंक्षिप्त नाम और लासंक्षिप्त नाम और लागू होनागू होनागू होनागू होना....--------(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 है ।

(2) यह हिमाचल प्रदेश राज्य में प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं को लागू होगा ।

2222.... परिभाषाएंपरिभाषाएंपरिभाषाएंपरिभाषाएं....--------इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''आयोग'' से इस अधिनियम की धारा 3 के अधीन स्थापित विनियामक आयोग अभिप्रेत है;

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8801 (ख) ''सदस्य'' से आयोग का सदस्य अभिप्रेत है और इसका अध्यक्ष इसके अन्तर्गत है ;

(ग) ''प्राइवेट शिक्षा संस्था'' से, किसी मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों (स्कूलों) के सिवाय, राज्य में समस्त प्राइवेट शिक्षा संस्थाएं अर्थात्‌ महाविद्यालय, शिक्षा के व्यावसायिक महाविद्यालय, तकनीकी शिक्षा के संस्थान, प्रबन्धन, विधि, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, फार्मेसी, सह-चिकित्सीय संस्थाएं और विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस या उच्चतर विद्या की कोई अन्य शिक्षा संस्थाएं अभिप्रेत हैं ;

(घ) ''विनियम'' से इस अधिनियम की धारा 19 के अधीन आयोग द्वारा बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं ;

(ङ) ''विनियामक निकाय'' से इस प्रयोजन के लिए स्थापित कोई राज्य या केन्द्रीय कानूनी विनियामक निकाय अभिप्रेत है ;

(च) ''छात्र'' से किसी उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाण-पत्र या अन्य विद्या संबंधी उपाधि के लिए पाठ्‌यक्रमानुसार अध्ययन करने वाला प्राइवेट शिक्षा संस्था में प्रविष्ट व्यक्ति अभिप्रेत है ;

(छ) ''विश्वविद्यालय अनुदान आयोग'' से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के अधीन स्थापित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अभिप्रेत है ;

(ज) ''विहित'' से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;

(झ) ''राज्य सरकार'' से हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है; और

() ''उच्चतर शिक्षा'' से दस जमा दो स्तर से ऊपर के ज्ञान के अध्ययन के लिए, पाठ्‌यचर्या या पाठ्‌यक्रम का अध्ययन अभिप्रेत है।

3333.... आयोग की स्थापनाआयोग की स्थापनाआयोग की स्थापनाआयोग की स्थापना....--------(1) राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, राज्य में विनियामक तंत्र उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए और प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान, विस्तार कार्यक्रमों का समुचित स्तरमान सुनिश्चित करने के प्रयोजन तथा छात्रों के हितों के संरक्षण हेतु राज्य सरकार और केन्द्रीय विनियामक निकायों के मध्य एक अन्तरानीक बिन्दु के रूप में कार्य करने के लिए हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग की स्थापना कर सकेगी ।

(2) आयोग शाश्वत्‌ उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा वाला एक निगमित निकाय होगा और वह उक्त नाम से वाद लाएगा और उस पर वाद लाया जाएगा ।

(3) आयोग का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए । 4444.... आयोग की संरचनाआयोग की संरचनाआयोग की संरचनाआयोग की संरचना....--------(1) आयोग, अध्यक्ष तथा लोक जीवन या उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में विख्यात व्यक्तियों में से या उनमें से जो तीन वर्ष की अवधि के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार में सचिव या इससे ऊपर रहे हों, या जिन्होंने भारत सरकार में तीन वर्ष या इससे अधिक अवधि के लिए समतुल्य पद धारित किया हो, में से अधिकतम दो सदस्यों से गठित होगा :

परन्तु अध्यक्ष और सदस्य विशेषज्ञता के समरूप क्षेत्र में से नहीं होगा।

(2) आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा जांच समिति की सिफारिशों पर तीन वर्ष की अवधि के लिए या जब तक वह पैंसठ वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेता/लेती; जो भी पूर्वतर हो, की जाएगी और ऐसा अध्यक्ष या ऐसे सदस्य, पैंसठ वर्ष की ऊपरी आयु सीमा के अध्यधीन, दूसरी पदावधि के लिए पात्र हो सकेंगेः 8802 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 परन्तु पदावधि की समाप्ति के पश्चात्‌, यथास्थिति, अध्यक्ष या सदस्य हिमाचल प्रदेश में किसी भी प्राइवेट शिक्षा संस्था या हिमाचल प्रदेश में या इसके बाहर उनके सहायक कार्यालयों या कम्पनियों में तीन वर्ष की अवधि के लिए आगामी नियोजन या किसी कर्त्तव्य भार के लिए पात्र नहीं होगा।

(3) जांच समिति निम्नलिखित से गठित होगी, अर्थात्‌ः--

(i) मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार --- अध्यक्ष;

(ii) प्रधान सचिव (तकनीकी शिक्षा) --- सदस्य; और हिमाचल प्रदेश सरकार

(iii) प्रधान सचिव (उच्चतर शिक्षा) --- सदस्य सचिव। हिमाचल प्रदेश सरकार

5555.... सदस्य का हटाया जानासदस्य का हटाया जानासदस्य का हटाया जानासदस्य का हटाया जाना....--------(1) किसी भी सदस्य को, इस धारा के उपबंधों के अनुसार के सिवाय, अपने पद से हटाया नहीं जाएगा ।

(2) राज्य सरकार, आदेश द्वारा, किसी भी सदस्य को पद से हटा सकेगी, यदि--

(क) वह सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया हो; या

(ख) वह ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया हो, जिसमें राज्य सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतर्वलित होे; या

(ग) वह शारीरिक और मानसिक रूप से सदस्य के रूप में कार्य करने में असमर्थ हो गया हो; या (घ) उसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है, जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव पड़ने की संभावना है; या

(ङ) उसने अपनी स्थिति का ऐसा दुरूपयोग किया है, जिससे उसके पद पर बने रहने से लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; या

(च) वह सिद्ध कदाचार का दोषी हो; या

(छ) वह अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहा होः

परन्तु किसी भी सदस्य को खण्ड (घ), (ङ), (च) या (छ) में विनिर्दिष्ट किसी आधार पर अपने पद से तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक इस प्रयोजन के लिए कोई जांच न की गई और सदस्य को अपनी प्रतिरक्षा का अवसर न दे दिया गया हो।

6666.... आयोग केआयोग केआयोग केआयोग के अधिकारी और अन्य कर्मचारी अधिकारी और अन्य कर्मचारी अधिकारी और अन्य कर्मचारी अधिकारी और अन्य कर्मचारी....--------(1) आयोग का एक सचिव होगा, जिसे राज्य सरकार द्वारा, आयोग के परामर्श से, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो विहित की जाएं, नियुक्त किया जाएगा। (2) आयोग, राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात्‌, अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण पालन के लिए ऐसे अधिकारी और कर्मचारी, जैसे यह आवश्यक समझे, नियुक्त कर सकेगा ।

(3) आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी, जैसी विहित की जाएं ।

7777.... बैठकेंबैठकेंबैठकेंबैठकें....--------आयोग, ऐसे समय और स्थान पर, उतनी बार, जितनी बार आवश्यक हो, बैठक करेगा तथा ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगा, जैसी विनियमों द्वारा विहित की जाए । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8803 8888.... निधिनिधिनिधिनिधि....--------आयोग एक निधि की स्थापना करेगा, जिसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे, अर्थात्‌ः- (क) प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं द्वारा प्रति वर्ष कुल फीस का, ऐसा प्रतिशत, जो आयोग द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाए; परन्तु यह कुल फीस के एक प्रतिशत से अधिक नहीं होगा;

(ख) राज्य सरकार से प्राप्त ऋण, जो तीन वर्षों के भीतर प्रतिसंदेय होगा;

(ग) किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त दान और अन्य कोई अनुदान; और

(घ) शास्तियों के रूप में प्राप्त समस्त रकम ।

9999.... आयोग की शक्तियों और कृत्यआयोग की शक्तियों और कृत्यआयोग की शक्तियों और कृत्यआयोग की शक्तियों और कृत्य....--------(1) यह सुनिश्चित करना आयोग का कर्त्तव्य होगा कि प्रवेश, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान, विस्तार कार्यक्रम, अर्हित शिक्षकों और अवसंरचना के स्तरमान सन्नियमों के अनुसार, प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं द्वारा केन्द्रीय सरकार/राज्य सरकार के विनियामक निकायों द्वारा या केन्द्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार बनाए रखे जा रहे हैं। शिक्षा संस्था द्वारा अधिकथित स्तरमानों को पूरा करने में विफलता की दशा में, आयोग को अधिनियम की धारा 11 के अधीन शिक्षा संस्थाओं पर शास्ति अधिरोपित करने की शक्ति होगी और संस्था द्वारा स्तरों को पूरा करने में क्रमवार विफलता की दशा में आयोग, राज्य सरकार/विनियामक निकाय को किसी संस्था को बंद करने की सिफारिश कर सकेगा ।

(2) आयोग सुनिश्चित करेगा कि प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश, राष्ट्रीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा या राज्य सरकार द्वारा यथा-अधिसूचित राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा में या किसी अन्य परीक्षा में प्राप्त योग्यता (मैरिट) पर आधारित है और जहां पर राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त प्रवेश परीक्षा या राज्य स्तरीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा या कोई अन्य परीक्षा नहीं है, वहां योग्यता (मैरिट), सर्वथा अर्हता परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर अवधारित की जाएगी ।

(3) आयोग, छात्रों और माता-पिता की शिकायतों की प्राप्ति और उनके निवारण के लिए, समुचित क्रिया प्रणाली विकसित करेगा और प्राइवेट संस्थाओं को आयोग को, रिपोर्ट की गई शिकायतों के निवारण के लिए, एक समुचित शिकायत निवारण क्रिया प्रणाली स्थापित करने हेतु निदेश कर सकेगा। ऐसी शिकायतों को, आयोग द्वारा नियत समय के भीतर, संस्था द्वारा ऐसी शिकायत के निवारण हेतु उठाए गए कदमों के विवरण सहित, निवारण किया जाएगा ।

(4) आयोग जब कभी अपेक्षित हो, प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं का निरीक्षण कर सकेगा और प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं के निरीक्षण के लिए विशेषज्ञ समितियां गठित कर सकेगा ।

(5) आयोग को प्राइवेट शिक्षा संस्थाओं में फीस का अनुश्रवण और विनियमन करने की शक्ति होगी। 10101010.... आयोग की प्रक्रिया और शक्तियांआयोग की प्रक्रिया और शक्तियांआयोग की प्रक्रिया और शक्तियांआयोग की प्रक्रिया और शक्तियां....--------(1) आयोग को, इस अधिनियम के अधीन किसी जांच या कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित विषयों की बाबत वही शक्तियां होंगी, जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908(1098 का 5) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात्‌ः-

(क) किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा उसकी शपथ पर परीक्षा करना;

(ख) किसी दस्तावेज या साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य अन्य भौतिक पदार्थ का प्रकटीकरण और पेश किया जाना;

(ग) शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;

(घ) किसी लोक अभिलेख को मांगना;

8804 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 (ङ) साक्षियों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;

(च) अपने विनिश्चयों, निदेशों और आदेशों का पुनर्विलोकन करना; और

(छ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए ।

(2) आयोग को किसी कार्यवाही, सुनवाई या विषय में ऐसा अंतरिम आदेश पारित करने की शक्तियां हाेंगी जैसा आयोग समुचित समझे ।

(3) आयोग अपने समक्ष कार्यवाहियों में छात्रों तथा माता-पिता के हित में प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भी व्यक्ति को, जैसा वह उचित समझे, प्राधिकृत कर सकेगा ।

(4) इस अधिनियम के अधीन समस्त विवाद, सिविल प्रक्रिया संहिता 1908(1908 का 5) के आदेश 37 के उपबन्धों के अनुसार संक्षेपतः विनिश्चित किए जाएंगे ।

11111111.... शास्तियांशास्तियांशास्तियांशास्तियां....--------(1) आयोग, इस अधिनियम या तद्‌धीन बनाए गए नियमों या विनियमों के किसी भी उपबन्ध या आयोग द्वारा जारी किए गए निदेशों के उल्लंघन के लिए, ऐसी रीति में जैसी विहित की जाए शास्ति अधिरोपित कर सकेगा जो एक करोड़ रूपए से अधिक नहीं होगी :

परन्तु द्वितीय या पश्चात्‌वर्ती उल्लंघन के लिए अधिकतम शास्ति, पांच करोड़ रूपए होगी :

परन्तु तब तक कोई शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी, जब तक सम्बद्ध संस्था को सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं कर दिया गया हो ।

(2) उपधारा (1) के अधीन अधिरोपित शास्ति, सम्बद्ध शिक्षा संस्था से विन्यास निधि या किसी अन्य निधि से या भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूलीय होगी।

12121212.... आयोग के लेखे और संपरीक्षाआयोग के लेखे और संपरीक्षाआयोग के लेखे और संपरीक्षाआयोग के लेखे और संपरीक्षा....--------(1) आयोग अपने लेखों को ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में रखेगा, जैसी विहित की जाए ।

(2) आयोग के लेखों की, भारत के नियन्त्रक व महालेखा परीक्षक द्वारा वार्षिक संपरीक्षा करवाई जाएगी और आयोग, संपरीक्षा रिपोर्ट की एक प्रति राज्य सरकार को भेजेगा ।

13131313.... वार्षिक रिपोर्टवार्षिक रिपोर्टवार्षिक रिपोर्टवार्षिक रिपोर्ट....--------(1) आयोग, यथाशीघ्र, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्‌, पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान उसके क्रियाकलापों का विवरण दर्शाती एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे ऐसी तारीख को और ऐसे प्ररूप में, राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा, जैसी विहित की जाए और राज्य सरकार ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट को इसकी प्राप्ति के पश्चात्‌ यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखवाएगी ।

(2) आयोग प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार को आयोग के संपरीक्षित वार्षिक लेखों की एक प्रति भेजेगा और राज्य सरकार ऐसे लेखों को विधान सभा के समक्ष रखवाएगी।

14141414.... क्षतिपूर्तिक्षतिपूर्तिक्षतिपूर्तिक्षतिपूर्ति....--------इस अधिनियम या तद्‌धीन बनाए गए नियमों के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां आयोग के अध्यक्ष, किसी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के विरूद्ध न होंगी ।

सदस्यों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना....--------आयोग के सदस्य और अन्य कर्मचारी, 15151515.... सदस्यों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना सदस्यों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना सदस्यों और कर्मचारियों का लोक सेवक होना भारतीय दण्ड संहिता, 1860(1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ के अन्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8805 16161616.... निदेश जारी करने की शक्तिनिदेश जारी करने की शक्तिनिदेश जारी करने की शक्तिनिदेश जारी करने की शक्ति....--------राज्य सरकार, आयोग को ऐसे निदेश जारी कर सकेगी, जो इसकी राय में इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक या समीचीन हों और आयोग ऐसे समस्त निदेशों को कार्यान्वित करेगा ।

17171717.... अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होनाअधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होनाअधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होनाअधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना....--------इस अधिनियम या तद्‌धीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के उपबन्धों का, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के उससे असंगत होते हुए भी, प्रभाव होगा ।

18181818.... नियम बनाने की शक्तिनियम बनाने की शक्तिनियम बनाने की शक्तिनियम बनाने की शक्ति....--------(1) राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्‌ः-

(क) आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव की सेवा के निबन्धन और शर्तें ;

(ख) आयोग के आदेशों और विनिश्चयों तथा इसके द्वारा जारी लिखतों के अधिप्रमाणन की रीति ;

(ग) प्ररूप और रीति जिसमें धारा 12 के अधीन आयोग द्वारा लेखों का अनुरक्षण किया जाएगा;

(घ) धारा 11 के अधीन शास्ति की न्यूनतम और अधिकतम सीमा तथा रीति, जिसमें ऐसी शास्ति अधिरोपित की जानी है; और

(ङ) ऐसे अन्य मामले जो आयोग के उचित कार्यकरण के लिए अपेक्षित हों ।

19191919.... विनियम बनाने की शक्तिविनियम बनाने की शक्तिविनियम बनाने की शक्तिविनियम बनाने की शक्ति....--------आयोग, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से इस अधिनियम के उपबन्धों के कार्यान्वयन के लिए विनियम बना सकेगी ।

20202020.... विधान सभाविधान सभाविधान सभाविधान सभा में रखे जाने वाले नियम और विनियम में रखे जाने वाले नियम और विनियम में रखे जाने वाले नियम और विनियम में रखे जाने वाले नियम और विनियम....--------इस अधिनियम की धारा 18 और 19 के अधीन बनाए गए प्रत्येक नियम और विनियम, इनके बनाए जाने के पश्चात्‌ यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखे जाएंगे ।

21212121.... कठिनाइयाँ दूर करने की शक्तिकठिनाइयाँ दूर करने की शक्तिकठिनाइयाँ दूर करने की शक्तिकठिनाइयाँ दूर करने की शक्ति....--------यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों और जो ऐसी कठिनाई दूर करने के प्रयोजन हेतु इसे आवश्यक प्रतीत होः

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात्‌ नहीं किया जाएगा।

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THE HIMACHAL PRADESH PRIVATE EDUCATIONAL INSTITUTIONS

(REGULATORY COMMISSION) ACT, 2010

ARRANGEMENT OF SECTIONS

Sections:

1. Short title and application.

8806 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932

2. Definitions. 3. Establishment of Commission. 4. Composition of Commission. 5. Removal of member. 6. Officers and other employees of the Commission. 7. Meetings. 8. Fund. 9. Powers and functions of the Commission. 10. Procedure and powers of the Commission. 11. Penalties. 12. Accounts and audit of the Commission. 13. Annual report. 14. Indemnity. 15. Members and employees to be public servants. 16. Power to issue directions. 17. Act to have overriding effect. 18. Power to make rules. 19. Power to make regulations. 20. Rules and regulations to be laid in the Legislative Assembly. 21. Power to remove difficulties.

__________

ACT No. 15 of 2011

THE HIMACHAL PRADESH PRIVATE EDUCATIONAL INSTITUTIONS

(REGULATORY COMMISSION) ACT, 2010

(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 31ST JANUARY, 2011 )

AN

ACT

to provide for establishment of the Regulatory Commission and Regulatory mechanism in

the State for the purpose of ensuring appropriate standard of admission, teaching, examination,

research and protection of interest of students in the Private Educational Institutions and for

matters connected therewith or incidental thereto;

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-first Year of the Republic of India as follows:—

1. Short title and application.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010.

(2) It shall apply to the Private Educational Institutions in the State of Himachal Pradesh.

2. Definitions.—In this Act, unless the context otherwise requires,—

(a) "Commission" means the Regulatory Commission established under section 3 of this Act;

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8807

(b) "member" means a member of the Commission and includes the Chairperson;

(c) "Private Educational Institutions" means all the Private Educational Institutions in the State viz. degree colleges, professional colleges of Education, Institutes of Technical Education, Management, Law, Engineering, Medicine, Pharmacy, Paramedical Institutions and Universities, deemed Universities, Centres of Excellence or any other educational institutions of higher learning, except schools affiliated to any recognized Board of School Education;

(d) "regulations" means regulations made by the Commission under section 19 of this Act;

(e) "Regulatory body" means any State or Central Statutory Regulatory Body set up for the purpose;

(f) "student" means a person enrolled in the Private Educational Institution for pursuing a course of study for the award of a degree, diploma, certificate or other academic distinction;

(g) "University Grants Commission" means the University Grants Commission established under the University Grants Commission Act, 1956;

(h) "prescribed" means prescribed by rules made under this Act;

(i) "State Government" means the Government of Himachal Pradesh; and

(j) "Higher Education" means study of a curriculum or course for the pursuit of knowledge beyond 10+2 level.

3. Establishment of Commission.—(1) The State Government may, by notification published in the Official Gazette, establish the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission for the purpose of providing a regulatory mechanism in the State and for working as an interface between the State Government and the Central Regulatory Bodies for the purpose of ensuring appropriate standards of admission, teaching, examination, research, extension programmes and protection of the interest of the students of the Private Educational Institutions.

(2) The Commission shall be a body corporate having perpetual succession and a common seal and shall sue and be sued by the said name.

(3) The headquarters of the Commission shall be at such place as may be notified by the State Government.

4. Composition of Commission.—(1) The Commission shall consist of a Chairperson and maximum of two members from amongst persons of eminence in public life or in the field of higher education or who have remained Secretary or above to the Government of Himachal Pradesh or held equivalent post in the Government of India for a period of three years or more.

Provided that the Chairperson and the members shall not be from the same field of specialization.

(2) The Chairperson and members of the Commission shall be appointed by the State Government, on the recommendations of a Search Committee, for a period of three years or until he8808 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 or she attains the age of 65 years, whichever is earlier, and such Chairperson or member may be eligible for a second term subject to the upper age limit of 65 years:

Provided that after the expiry of the term of office, the Chairperson or the member, as the case may be, shall be ineligible for further employment or any assignment in any of the Private Educational Institutions within Himachal Pradesh or their associate offices or companies within or outside Himachal Pradesh for a period of three years.

(3) The Search Committee shall consist of the following, namely:—

(i) Chief Secretary to the Government — Chairperson; of Himachal Pradesh

(ii) Principal Secretary (Technical Education) — Member; and to the Government of Himachal Pradesh

(iii) Principal Secretary (Higher Education) —Member- Government of Himachal Pradesh Secretary.

5. Removal of member.—(1) No member shall be removed from office except in accordance with the provisions of this section.

(2) the State Government may, by order, remove from office any member, if he—

(a) has been adjudged an insolvent by the competent court; or

(b) has been convicted of an offence which, in the opinion of the State Government, involves moral turpitude; or

(c) has become physically or mentally incapable of acting as a member; or

(d) has acquired such financial or other interest as is likely to affect prejudicially his functions as a member; or

(e) has so abused his position as to render his continuance in office prejudicial to the public interest; or

(f) has been guilty of proven misbehavior; or

(g) has failed to discharge his duties:

Provided that no member shall be removed from his office on any ground specified in clauses (d), (e), (f) or (g) unless an enquiry has been conducted for this purpose and the member has been given an opportunity to defend himself.

6. Officers and other employees of the Commission.—(1) There shall be a Secretary of the Commission who shall be appointed by the State Government in consultation with the Commission on such terms and conditions, as may be prescribed.

(2) The Commission may appoint such officers and employees as it considers necessary, for the efficient performance of the functions of the Commission, after approval of the State Government.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8809

(3) The terms and conditions of service of the officers and employees of the Commission shall be such as may be prescribed.

7. Meetings.—The Commission shall meet, as often as may be necessary, at such time and place and observe such procedure, as may be prescribed by the regulations.

8. Fund.—The Commission shall establish a fund to which shall be credited—

(a) by the Private Educational Institutions such percentage of total fees every year as may be assessed by the Commission from time to time but not exceeding one per cent of the total fees;

(b) loan from the State Government which will be repayable within three years;

(c) any other grants received from any other source; and

(d) all sums received by way of penalties.

9. Powers and functions of the Commission.—(1) It shall be the duty of the Commission to ensure that standards of admission, teaching, examination, research, extension programme, qualified teachers and infrastructure, are being maintained by the Private Educational Institutions in accordance with the guidelines issued by the Regulatory Bodies of the Central Government or the State Government or by the Central Government or the State Government from time to time. In case of failure of the Educational Institution to meet the standards laid down, the Commission shall have the power to penalize the Educational Institutions under section 11 of the Act and in case of successive failure of an institution to meet the standards, the Commission may recommend to the State Government/ Regulatory Body for the winding up of the institution.

(2) The Commission shall ensure that the admissions in the Private Educational Institutions are based on merit achieved in National Common Entrance Test or the State Common Entrance Test or any other test as notified by the State Government and where there is no National level Common Entrance Test, or State level Common Entrance Test or any other test, the merit shall be determined strictly on the basis of the marks obtained in the qualifying examination.

(3) The Commission shall develop an appropriate mechanism for receipt and redressal of grievances of students and parents, and direct the private institution to set-up a proper Grievances Redressal mechanism for redressal of complaints reported to the Commission. Such complaints shall be redressed within the time fixed by the Commission with details of the steps taken by the institution to redress such complaint.

(4) The Commission may conduct inspections of Private Educational Institutions as and when required and may form expert committees, for inspections of Private Educational Institutions.

(5) The Commission shall have the power to monitor and regulate fees in Private Educational Institutions.

10. Procedure and powers of the Commission.—(1) The Commission shall, for the purposes of any inquiry or proceedings under this Act, have the same powers as are vested in a civil court under the Code of Civil Procedure, 1908(5 of 1908) in respect of the following matters, namely :—

(a) summoning and enforcing the attendance of any person and examining him on oath;

8810 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932

(b) discovery and production of any document or other material object producible as evidence;

(c) receiving evidence on affidavits;

(d) requisitioning of any public record;

(e) issuing commission for the examination of witnesses;

(f) reviewing its decisions, directions and orders; and

(g) any other matter which may be prescribed.

(2) The Commission shall have the power to pass such interim order in any proceeding, hearing or matter as the Commission may consider appropriate.

(3) The Commission may authorize any person, as it deems fit, to represent the interest of the students and parents in the proceedings before it.

(4) All disputes under this Act shall be decided summarily in accordance with the provisions of Order XXXVII of the Code of Civil Procedure, 1908(5 of 1908).

11. Penlties.—(1) The Commission may, for the contravention of any of the provision of this Act or the rules or regulations made thereunder, or directions issued by the Commission, impose penalty, in such manner, as may be prescribed, but not exceeding one crore rupees:

Provided that the maximum penalty for a second or subsequent contravention shall be five crore rupees :

Provided further that no penalty shall be imposed unless the institution concerned is given an opportunity of being heard.

(2) The penalty imposed under sub-section (1) shall be recoverable from the endowment fund or any other fund or as arrear of land revenue from the Educational Institution concerned.

12. Accounts and audit of the Commission.—(1) The Commission shall maintain its accounts in such form and in such manner, as may be prescribed.

(2) The accounts of the Commission shall be audited annually by the Comptroller and Auditor General of India and the Commission shall send a copy of the audit report to the State Government.

13. Annual report.—(1) The Commission shall, as soon as may be, after the end of each financial year, prepare and submit to the State Government, before such date and in such form, as may be prescribed, a report giving an account of its activities during the previous year and the State Government shall cause every such report to be laid before the Legislative Assembly, as soon as may be, after its receipt.

(2) The Commission shall send a copy of the audited annual accounts of the Commission to the State Government every year, and the State Government shall cause such accounts to be laid before the Legislative Assembly.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8811

14. Indemaity.—No suit, prosecution or other legal proceedings shall lie against Chairperson, any member, officer or employee of the Commission in respect of anything which is, in good faith, done or intended to be done in pursuance of this Act or the rules made thereunder.

15. Members and employees to be public servants.—The members and other employees of the Commission shall be deemed to be public servants within the meaning of section 21 (45 of 1860) of the Indian Penal Code.

16. Power to issue directions.—The State Government may issue such directions to the Commission as in its opinion, are necessary or expedient for carrying out the purposes of this Act and the Commission shall give effect to all such directions.

17. Act to have overriding effect.—The provisions of this Act or rule or order made thereunder, shall have effect, notwithstanding anything inconsistent therewith contained in any other law for the time being in force.

18. Power to make rules.—(1) The State Government may, by notification publish in the Official Gazette, make rules for carrying out the provisions of this Act.

(2) Without prejudice to the generality of the foregoing powers, such rules may provide for all or any of the following matters, namely :—

(a) the terms and conditions of service of the Chairperson, the members and the Secretary of the Commission;

(b) mode of authentication of the orders and decisions of the Commission and instruments issued by it;

(c) the form and manner in which the accounts shall be maintained by the Commission under section 12;

(d) the minimum and maximum limit of the penalty under section 11 and the manner in which such penalty is to be imposed; and

(e) such other matters as may be required for proper functioning of the Commission.

19. Power to make regulations.—The Commission may, with the prior approval of the State Government, make regulations to carry out the provisions of this Act.

20. Rules and regulations to be laid in the Legislative Assembly.—Every rule and regulation made under sections 18 and 19 of this Act shall respectively be laid, as soon as may be, after these are made, before the Legislative Assembly.

21. Power to remove difficulties.—If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the State Government may, by order published in the Official Gazette, make such provisions, not inconsistent with the provisions of this Act, as appear to it to be necessary for the purpose of removing the difficulty:

Provided that no such order shall be made after the expiry of two years from the commencement of this Act.

8812 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932

In the Court of Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District

Mandi, Himachal Pradesh

In the matter of :

1. Shri Pupul Dutta Prasad s/o Sh. Prem Dutta Prasad, r/o Rajiv Nagar, Road No. 8, P. O. Keshri Nagar, Patna-800024 (Bihar) (At present Suprintendent of Police, Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh.

2. Smt. Madhulika d/o Sh. Kamleshwari Prasad Mehta, r/o 156/A, Shivpuri, Shastri Nagar, Patna-800023 (Bihar). (At present wife of Sh. Pupul Dutta Prasad (At present Suprintendent of Police, Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh s/o Sh. Prem Dutta Prasad, r/o Rajiv Nagar, Road No. 8, P. O. Keshri Nagar, Patna-800024 (Bihar). . . Applicants.

Versus

General public

Subject.—Application for registration of marriage under section 15 of Special Marriage Act, 1954.

Shri Pupul Dutta Prasad s/o Sh. Prem Dutta Prasad, r/o Rajiv Nagar, Road No. 8, P. O. Keshri Nagar, Patna-800024 (Bihar). (At present Suprintendent of Police, Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh and Smt. Madhulika d/o Sh. Kamleshwari Prasad Mehta, r/o 156/A, Shivpuri, Shastri Nagar, Patna-800023 (Bihar) (At present wife of Sh. Pupul Dutta Prasad (At present Suprintendent of Police, Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh s/o Sh. Prem Dutta Prasad, r/o Rajiv Nagar, Road No. 8, P. O. Keshri Nagar, Patna-800024 (Bihar) have filed an application alongwith affidavits in the Court of undersigned under section 15 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 7-6-2004 according to Hindu rites and customs at Patna (Bihar) and they are living together as huaband and wife since then, hence their marriage may be registered under the Special Marriage Act, 1954.

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 17th February, 2011 after that no objection will be entertained and the marriage will be registered.

Issued today on 17th day of January, 2011 under my hand and seal of the court.

Seal. Sd/- Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District Mandi (H. P.).

_______

In the Court of Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District

Mandi, Himachal Pradesh

In the matter of :

1. Shri Munish Malhotra s/o Late Sh. Bhoop Chand Malhotra, r/o H. No. 286/1, Khaliar, Mandi Town, District Mandi, Himachal Pradesh.

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8813

2. Smt. Aarti Chadda d/o Sh Rajender Kumar Chadda, r/o Village and P. O. Bhamla, Tehsil Sarkaghat, District Mandi, Himachal Pradesh (At present wife of Shri Munish Malhotra s/o Late Sh. Bhoop Chand Malhotra, r/o H. No. 286/1, Khaliar, Mandi Town, District Mandi, Himachal Pradesh

Versus

General public

Subject.— Application for registration of marriage under section 15 of Special Marriage Act, 1954.

Shri Munish Malhotra s/o Late Sh. Bhoop Chand Malhotra, r/o H. No. 286/1, Khaliar, Mandi Town, District Mandi, Himachal Pradesh and Smt. Aarti Chadda d/o Sh Rajender Kumar Chadda, r/o Village and P. O. Bhamla, Tehsil Sarkaghat, District Mandi, Himachal Pradesh (At present wife of Shri Munish Malhotra s/o Late Sh. Bhoop Chand Malhotra, r/o H. No. 286/1, Khaliar, Mandi Town, District Mandi, Himachal Pradesh have filed an application alongwith affidavits in the Court of undersigned under section 15 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 14-4-2009 at Mandi, H. P. according to Hindu rites and customs and they are living together as huaband and wife since then, hence their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 22nd February, 2011 after that no objection will be entertained and marriage will be registered.

Issued today on 22nd day of January, 2011 under my hand and seal of the court.

Seal. Sd/- Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District Mandi (H. P.).

_______

In the Court of Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District

Mandi, Himachal Pradesh

In the matter of :

1. Shri Kelsang Chodak s/o Sh. Tsering Samdup, r/o No. 2, Quinghe St., Neighborhood 27, Fengfu Village, Xitun District Taichung City, Taiwan.

2. Smt. Pema Dickyi d/o Late Nyima Tsering, r/o V. P. O. Rewalsar, Tehsil Sadar, Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh (At present wife of Shri Kelsang Chodak s/o Sh. Tsering Samdup, r/o No. 2, Quinghe St., Neighborhood 27, Fengfu village, Xitun District Taichung City, Taiwan)

Versus

General public

Subject.— Application for registration of marriage under section 15 of Special Marriage Act, 1954.

8814 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932

Shri Kelsang Chodak s/o Sh. Tsering Samdup, r/o No. 2, Quinghe St., Neighborhood 27, Fengfu village, Xitun District Taichung City, Taiwan and Smt. Pema Dickyi d/o Late Nyima Tsering, r/o V. P. O. Rewalsar, Tehsil Sadar Mandi, District Mandi, Himachal Pradesh (At present wife of Shri Kelsang Chodak s/o Sh. Tsering Samdup, r/o No. 2, Quinghe St., Neighborhood 27, Fengfu Village, Xitun District Taichung City, Taiwan) have filed an application alongwith affidavits in the Court of undersigned under section 15 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 9-1-2011 according to Buddhist rites and customs at Village and P. O. Rewalsar, District Mandi, Himachal Pradesh and they are living together as huaband and wife since then, hence their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 22nd February, 2011 after that no objection will be entertained and marriage will be registered.

Issued today on 22nd day of January, 2011 under my hand and seal of the court.

Seal. Sd/- Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District Mandi (H. P.).

_______

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील लडभड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश मिसल नं0 : 53. तारीख मरजुआ : 26-11-2010. तारीख पेशी : 25-2-2011.

श्रीमती रूमा देवी विधवा श्री रोशन लाल, निवासी गांव मठाठाणा, तहसील लडभड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत आवेदन-पत्र। श्रीमती रूमा देवी विधवा श्री रोशन लाल, निवासी गांव मठाठाणा, तहसील लडभड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में आवेदन-पत्र गुजार कर अनुरोध किया है कि उसकी जन्म तिथि 28-6-1957 है जो ग्राम पंचायत कथौण के जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज है, जो कि सही है। परन्तु ग्राम पंचायत कथौण के परिवार रजिस्टर में केवल 1957 ही दर्ज है, जो सही नहीं है जिसकी दरुस्ती के आदेश दिए जाएं।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार राजपत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रार्थिन की जन्म तिथि ग्राम पंचायत कथौण के परिवार रजिस्टर में दर्ज करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 25-2-2011 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हाजर होकर अपने उजर/ एतराज पेश कर सकता है अन्यथा गैर हाजरी की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। आज दिनांक 29-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी,

तहसील लडभड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8815 ब अदालत श्री एस0 एल0 बन्सल, कार्यकारी दण्डाधिकारी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 : 34/2010 तारीख दायर : 7-12-2010 श्रीमती मीना देवी पत्नी श्री होशियार सिंह, निवासी गांव गौरा, ग्राम पंचायत धार-गौरा, तहसील रामपुर . . प्राकर्थिया। बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटस बनाम आम जनता।

श्रीमती मीना देवी पत्नी श्री होशियार सिंह, निवासी गांव गौरा, ग्राम पंचायत धार-गौरा, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उनकी पुत्री रोहिनी की जन्म तिथि 2-11-2000 स्कूल व पंचायत अभिलेख में दर्शाई गई है, जो कि गलत है जबकि प्रार्थिया की पुत्री की सही जन्म तिथि 2-11-2001 हैै। अपनी पुत्री की जन्म तिथि 2-11-2000 के स्थान पर 2-11-2001 ग्राम पंचायत धार-गौरा के अभिलेख में दरुस्त करवाना चाहती है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रार्थिया की पत्री की जन्म तिथि दरुस्त करने बारा कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 28-2-2011 को या इससे पूर्व अदालत हजा में हाजिर आकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। बाद गुजरने मियाद कोई भी उजर/एतराज काबिले समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दरुस्त करवाने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

एस0 एल0 बन्सल,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

-------

ब अदालत श्री पी0 एस0 नेगी, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

श्री अनोखी राम पुत्र श्री भलकू, निवासी गांव कापटी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला . . प्रार्थी। शिमला, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। दरख्वास्त दरुस्ती नाम माल कागजात खसरा नं0 1121, खाता/खतौनी नं0 176 मिन/457, वाका चक धार, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

नोटिस बनाम आम जनता। 8816 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 दरख्वास्त नाम दरुस्ती कागजात माल हमारे समक्ष प्रार्थी श्री अनोखी राम पुत्र श्री भलकू, निवासी गांव कापटी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस आशय के साथ प्रस्तुत की है कि उसका नाम नकल जमाबन्दी वर्ष 2005-2006 के खाता/खतौनी नं0 105/240 वाका चक धार, तहसील रामपुर बुशैहर, श्री अनोखी राम पुत्र श्री भलकू सही दर्ज है परन्तु माल कागजात के खसरा नं0 1121, खाता खतौनी नं0 176 मिन/457, वाका चक धार, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश में नोखी राम पुत्र भलकू दर्ज है जो गलत दर्ज हैै। प्रार्थी का सही नाम अनोखी राम पुत्र भलकू है जिसकी पुष्टि के लिए प्रार्थी ने नकल जमाबन्दी वर्ष 2005-2006 खाता/खतौनी नं0 105/240, वाका चक धार संलग्न कर रखी है। प्रार्थी अपना नाम उक्त माल कागजात में नोखी राम के स्थान पर अनोखी राम उर्फ नोखी राम दरुस्त करवाना चाहता है।

अतः आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि राजस्व अभिलेख में अनोखी राम उर्फ नोखी राम दरुस्त/दर्ज करने बारा किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 28-2-2011 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है अन्यथा एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

पी0 एस0 नेगी,

सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

-------

ब अदालत श्री एस0 एल0 बन्सल, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

श्री रुकम पुत्र श्री बनी राम, निवासी गांव शाह, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, . . प्रार्थी। हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। दरख्वास्त दरुस्ती नाम माल कागजात अराजी कित्ते 26, खाता/खतौनी नं0 134/407 ता 431 व खसरा नं0 1123, खाता/खतौनी नं0 97 मिन/275, वाका चक शाह, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

दरख्वास्त नाम दरुस्ती कागजात माल हमारे समक्ष प्रार्थी रुकम पुत्र श्री बनी राम, निवासी गांव शाह, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस आशय के साथ प्रस्तुत की है कि अराजी कित्ते 26, खाता/खतौनी नं0 134/407 ता 431 व खसरा नं0 1123, खाता/खतौनी नं0 97 मिन/275, वाका चक शाह, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश का वरुए इन्तकाल नं0 203 वरास्त का वशराक्त हिस्सेदार चरन दास आदि मालिक व काबिज दर्ज कागजात माल है। वरवक्त इन्तकाल वरास्त प्रार्थी का नाम राहुल दर्ज हो गया है जबकि प्रार्थी का सही नाम रुकम है जिसकी पुष्टि के लिए प्रार्थी ने नकल परिवार रजिस्टर संलग्न दरख्वास्त कर रखी है। प्रार्थी अपना नाम उक्त माल कागजात में राहुल के स्थान पर रुकम उर्फ राहुल दरुस्त/दर्ज करवाना चाहता है।

अतः आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि राजस्व अभिलेख में रूकम उर्फ राहुल दरुस्त/दर्ज करने बारा किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 28-2-2011 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है अन्यथा एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8817 आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

एस0 एल0 बन्सल,

सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

-------

ब अदालत श्री एस0 एल0 बन्सल, कार्यकारी दण्डाधिकारी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 : 1/2011 तारीख दायर : 10-1-2011 श्री धर्मजीत पुत्र श्री सदी राम, निवासी गांव मसारना, ग्राम पंचायत भड़ावली, तहसील रामपुर बुशैहर, . . प्रार्थी। जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटस बनाम आम जनता।

श्री धर्मजीत पुत्र श्री सदी राम, निवासी गांव मसारना, ग्राम पंचायत भड़ावली, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय पंजी—त दत्तकनामा गुजारा है कि प्रार्थी ने दिनांक 14-5-2010 को अपने भाई चरन दास की पुत्री दीपा कुमारी को गोद लिया है। दीपा कुमारी को अपने साथ ग्राम पंचायत भड़ावली के परिवार रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहता है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को दीपा कुमारी को धर्मजीत पुत्र श्री सदी राम के साथ पंचायत अभिलेख में दर्ज करने बारा कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 28-2-2011 को या इससे पूर्व अदालत हजा में हाजिर आकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। बाद गुजरने मियाद कोई भी उजर/एतराज काबिले समायत न होगा तथा नियमानुसार पंचायत अभिलेख में प्रार्थी के साथ दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

एस0 एल0 बन्सल,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

-------

ब अदालत श्री एस0 एल0 बन्सल, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

श्री मोहन सिंह पुत्र श्री बालकू, निवासी गांव कोछड़ी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला . . प्रार्थी। शिमला, हिमाचल प्रदेश8818 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 बनाम

1. श्री दिलमी राम पुत्र श्री बालकू, निवासी गांव कोछड़ी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, . . प्रतिवादी। जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश, 2. आम जनता

दरख्वास्त मकफूल-उल-खबरी इन्तकाल लापता श्री दिलमी राम पुत्र श्री बालकू, गांव कोछड़ी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश बाबत खाता/खतौनी नं0 146/393 ता 408, वाका चक त्यावल, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

दरख्वास्त मकफूल-उल-खबरी हमारे समक्ष प्रार्थी श्री मोहन सिंह पुत्र श्री बालकू, निवासी गांव कोछड़ी, परगना सराहन, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस आशय के साथ प्रस्तुत की है कि उसका बड़ा भाई श्री दिलमी राम पुत्र श्री बालकू अरसा 30 साल से घर से लापता है। उसका पता नहीं चला है तथा न ही उसकी ओर से कोई चिट्‌ठी पत्र आया है। उसकी शादी नहीं हुई थी, जब वह घर से गया तब प्रार्थी 18-19 वर्ष का था। अब प्रार्थी मकफूल-उल-खबरी का इन्तकाल तस्दीक करवाना चाहता है। अतः इस इश्तहार के माध्यम से श्री दिलमी राम व सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि उपरोक्त मकफूल-उल-खबरी का इन्तकाल जायज वारसान के नाम तस्दीक करने बारा किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 28-2-2011 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है अन्यथा एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उक्त इन्तकाल दिलमी के जायज वारसान के नाम तस्दीक करने का आदेश पारित किया जाएगा।

आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

एस0 एल0 बन्सल,

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री एस0 एल0 बन्सल, कार्यकारी दण्डाधिकारी, रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 : 35/2010 तारीख दायर : 7-12-2010 श्री वीर सिंह पुत्र श्री नुनू राम, निवासी गांव धराली, ग्राम पंचायत बघाल, तहसील रामपुर बुशैहर, . . प्रार्थी। जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। क्षेत्रीय पंचायत बघाल के परिवार रजिस्टर में पत्नी तारा देवी का नाम दर्ज करने बारा प्रार्थना-पत्र। नोटिस बनाम आम जनता।

श्री वीर सिंह पुत्र श्री नुनू राम, निवासी गांव धराली, ग्राम पंचायत बघाल, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि प्रार्थी ने अपना दूसरा विवाह तारा देवी पुत्री स्व0 श्री जितमुआ, निवासी गांव थाच, तहसील निचार से 5 साल पूर्व कर रखा है जिसकी एक पुत्री कु0 स्नेह पैदा हुई जो प्रार्थी के साथ दर्ज है परन्तु अपनी पत्नी का नाम पंचायत अभिलेख राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 8819 में दर्ज न करवा सका है। अब अपनी पत्नी तारा देवी का नाम अपने साथ ग्राम पंचायत बघाल के परिवार रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहता है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त तारा देवी का नाम उसके पति वीर सिंह के साथ पंचायत अभिलेख के परिवार रजिस्टर मेें दर्ज करने बारा कोई उजर या एतराज हो तो दिनांक 28-2-2011 को या इससे पूर्व अदालत हजा में हाजिर आकर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। बाद गुजरने मियाद कोई भी उजर/एतराज काबिले समायत न होगा तथा नियमानुसार पंचायत अभिलेख मेें प्रार्थी के साथ दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 27-1-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

एस0 एल0 बन्सल,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

रामपुर बुशैहर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा

अधिसूचना

शिमला-4, 7 फरवरी, 2011

संख्याः वि0स0-विधायन-प्रा0/1-21-2008संख्याः वि0स0-विधायन-प्रा0/1-21-2008संख्याः वि0स0-विधायन-प्रा0/1-21-2008संख्याः वि0स0-विधायन-प्रा0/1-21-2008....--------राज्यपाल महोदया का निम्नलिखित आदेश दिनांक 5 फरवरी, 2011 सर्वसाधारण की सूचनार्थ प्रकाशित किया गया है :--

''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा प्रदत्त द्वारा प्रदत्त द्वारा प्रदत्त द्वारा प्रदत्त ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, 28 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 228 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 228 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 228 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 2....00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती हूँ।हूँ।हूँ।हूँ।

उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश।''

आदेश द्वारा,

गोवर्धन सिंह, सचिव, हि0प्र0 विधान सभा।

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HIMACHAL PRADESH ELEVENTH VIDHAN SABHA

NOTFICATION

Shimla-04, the 7th February, 2011

No.VS-Legn.-Pre/1-21/2008.—The following order dated, the 5th February, 2011 by the Governor of the State of Himachal Pradesh, Shimla-2, is hereby published for general information:—

8820 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 फरवरी, 2011/18 माघ, 1932 ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा प्रदत्त ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा प्रदत्त ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा प्रदत्त ''मैं उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, शक्तियों के अनुसरण में हिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभा के ग्यारहवें सत्र का आह्‌वान सोमवार, 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 28282828 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 2 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 2 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 2 फरवरी, 2011 को अपराह्‌न 2....00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती 00 बजे से परिषद्‌ सदन, शिमला-4 में समवेत होने के लिए करती हूँ।हूँ।हूँ।हूँ।

उर्मिला सिंह, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश।''

By order,

GOVERDHAN SINGH, Secretary, H.P. Vidhan Sabha.

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नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 07 February 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2011-02-07.231_gazette_2011-07_02_2011/. Archive identifier in.gazette.himachal.2011-02-07.231_gazette_2011-07_02_2011.