राजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेशराजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला,शिमला,शिमला,शिमला, सोमसोमसोमसोमवारवारवारवार 11111111 अप्रैल,अप्रैल,अप्रैल,अप्रैल, 2011 2011 2011 2011////21212121 चैत्र, 1933 चैत्र, 1933 चैत्र, 1933 चैत्र, 1933
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
शिमला-4, 7 मार्च, 2011
संख्यसंख्यसंख्यसंख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-52 ा ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-52/2011/2011/2011/2011....--------दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) ा ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-52 ा ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-52 विधेयक, 2011 (2011 का विधेयक संख्यांक 9) जो आज दिनांक 7 अप्रैल, 2011 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह, सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । 8-राजपत्र/2011-11-4-2011 (249)250 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 2011 का विधेयक संख्यांक 92011 का विधेयक संख्यांक 92011 का विधेयक संख्यांक 92011 का विधेयक संख्यांक 9 दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2011 दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2011 दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2011 दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2011
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश राज्य में यथा लागू भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का अधिनियम संख्यांक 45) और दण्ड प्रक्रिया संंिहता, 1973 (1974 का अधिनियम संख्यांक 2) का और संशोधन करने के लिए विधेयकविधेयकविधेयकविधेयक। भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--
1111.... संक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नाम....--------इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2011 है।
2222.... 1860 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 45 का संशोधन 1860 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 45 का संशोधन....--------हिमाचल प्रेदश राज्य में यथा लागू 1860 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 45 का संशोधन 1860 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 45 का संशोधन भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 304-कक. में,--
(क) ''सार्वजनिक सेवा यान'', शब्दों के स्थान पर, जहां-जहां ये आते हैं, ''कोई यान'' शब्द रखे जाएंगे; और
(ख) स्पष्टीकरण का लोप किया जाएगा।
1974 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 2 का संशोधन....--------दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की प्रथम 3333.... 1974 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 2 का संशोधन 1974 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 2 का संशोधन 1974 के केन्द्रीय अधिनियम संख्यांक 2 का संशोधन ''भारतीय दण्ड संहिता के अधीन अपराध'' के अधीन, हिमाचल प्रदेश राज्य में यथा लागू अनुसूची के शीर्षक, ''भारतीय दण्ड संहिता के अधीन अपराध'' ''भारतीय दण्ड संहिता के अधीन अपराध'' ''भारतीय दण्ड संहिता के अधीन अपराध'' धारा 304-कक. से सम्बन्धित प्रविष्टियों के सामने स्तम्भ संख्या 2 में ''सार्वजनिक सेवा यान'' शब्दों के स्थान पर ''कोई यान'' शब्द रखे जाएंगे। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 251 उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश राज्य में यथा लागू दण्ड विधि (हिमाचल प्रदेश) अधिनियम, 1997 (1997 का अधिनियम संख्यांक 19), द्वारा अन्तःस्थापित भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 304 कक. यह उपबन्ध करती है कि यदि कोई व्यक्ति मत्तता की अवस्था में ''सार्वजनिक सेवा यान'' चलाता है या चलाने का प्रयत्न करता है और किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है, जो आपराधिक मानव वध की कोटि में नहीं आती है, या कोई ऐसी शारीरिक क्षति कारित करता है जिससे मृत्यु कारित हो जाना संभाव्य हो, को आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, दण्डित किया जाएगा। सरकार के ध्यान में यह लाया गया है कि धारा 304 कक. के उपबन्धों का उस मामलें में अवलम्ब नहीं लिया जा सकता है जहां मत्तता में सरकारी या प्राइवेट यान चलाने वाला कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करता है या शारीरिक क्षति कारित करता है जिससें मृत्यु कारित होना संभाव्य है और अपराधी धारा 304 कक. के बजाए धारा 304 क. के अधीन अभियोजन का भागी हो जाता है जो, जहां तक दण्ड की गम्भीरता का सम्बन्ध है, बहुत ही सामान्य धारा है। ऐसा भी पाया गया है कि धारा 304 कक. के उपबंध संविधान में दिए गए समानता के आधारभूत सिद्वान्त के विरुद्ध है और इसके सर्वव्यापी प्रयोग में विभेदकारी भी हैं। अतः इस असंगति को दूर करने के आशय से हिमाचल प्रदेश राज्य में यथा लागू धारा 304 कक. को संशोधित करने और ''सार्वजनिक सेवा यान'' ''सार्वजनिक सेवा यान'' पद के स्थान पर ''कोई यान''''कोई यान''''कोई यान''''कोई यान'' शब्द रखने, इस धारा के ''सार्वजनिक सेवा यान'' ''सार्वजनिक सेवा यान'' अधीन उपबंघित स्पष्टीकरण का लोप करने तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की प्रथम अनुसूची में धारा 304 कक. से सम्बन्धित प्रविष्टियाें को संशोधित करने का भी विनिश्चय किया गया है। इसलिए पूर्वोक्त अधिनियम को संशोधित किया जाना अनिवार्य हो गया है।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(प्रेम कुमार धूमल) (प्रेम कुमार धूमल) (प्रेम कुमार धूमल) (प्रेम कुमार धूमल) मुख्य मन्त्री। शिमला : तारीख : ......................................, 2011
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वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन
--शून्य--
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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
--शून्य--252 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 9 of 2011
THE CRIMINAL LAW (HIMACHAL PRADESH AMENDMENT) BILL, 2011
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Indian Penal Code, 1860 (Act No. XLV of 1860) and the Code of
Criminal Procedure, 1973(Act No. 2 of 1974), in their application to the State of Himachal
Pradesh.
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-second Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Criminal Law (Himachal Pradesh Amendment) Act, 2011.
2. Amendment of Central Act No. 45 of 1860.—In section 304-AA of the Indian Penal Code, 1860, in its application to the State of Himachal Pradesh,—
(a) for the words "a public service vehicle" where ever these occur, the words "any vehicle" shall be substituted; and
(b) the Explanation shall be omitted.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 253STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
Section 304-AA of the Indian Penal Code,1860, inserted vide the Criminal Law (Himachal Pradesh Amendment) Act,1997 (Act No.19 of 1997), in its application to the State of Himachal Pradesh, provides for punishment with imprisonment for life,or imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and fine,if a person while in a state of intoxication, drives or attempt to drive "a public service vehicle" and causes the death of any person not amounting to culpable homicide, or causes any bodily injury likely to cause death. It has been brought to the notice of the Government that the provisions of section 304-AA cannot be invoked in the cases where, while driving the Government or private vehicle in a state of intoxication a person causes death of any person or bodily injury likely to cause death and the offender is subjected to prosecution under section 304-A instead of section 304-AA, which is a very moderate section in so far as the quantum of punishment is concerned. It has also been observed that the provision of section 304-AA is against the basic principal of equality enshrined in the Constitution and is also discriminatory in its universal application. Thus, in order to remove this discrepancy, it has been decided to amend section 304-AA, in its application to the State of Himachal Pradesh, and to substitute the expression "a public service vehicle" with the words "any vehicle" and to omit the Explanation provided under this section and also to amend the entries relating to section 304- AA in the First Schedule to the Code of Criminal Procedure,1973. This has necessitated amendments in the Act ibid.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(PREM KUMAR DHUMAL)
Chief Minister.
SHIMLA :
The ……......……., 2011.
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FINANCIAL MEMORANDUM
—NIL—
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MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
—Nil—
254 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
शिमला-4, 7 मार्च, 2011
संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-7/2011 संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-7/2011....--------हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-7/2011 संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-7/2011 संस्था और पूर्त विन्यास (संशोधन) विधेयक, 2011 (2011 का विधेयक संख्यांक 11) जो आज दिनांक 7 अप्रैल, 2011 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह, सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 255 2011 का विधेयक संख्यांक 112011 का विधेयक संख्यांक 112011 का विधेयक संख्यांक 112011 का विधेयक संख्यांक 11 हिमाचल प्रदेश हिन्दहिमाचल प्रदेश हिन्दहिमाचल प्रदेश हिन्दहिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास ू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास ू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास ू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास (संशोधन) विधेयक, 2011(संशोधन) विधेयक, 2011(संशोधन) विधेयक, 2011(संशोधन) विधेयक, 2011
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम, 1984 (1984 का अधिनियम संख्यांक 18) का और संशोधन करने के लिए विधेयविधेयविधेयविधेयक ।क ।क ।क ।
भारत गणराज्य के बासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1111.... संक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नाम....--------इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास (संशोधन) अधिनियम, 2011 है।
2222.... धारा 12-क का संशोधनधारा 12-क का संशोधनधारा 12-क का संशोधनधारा 12-क का संशोधन....--------हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम,1984 की धारा 12-क में,-
(क) उप धारा (1) के खण्ड (क) के उप-खण्ड (iii) में, ''सत्तर'' शब्द के स्थान पर ''बीस'' शब्द रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड (iv) अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- ''(iv) पचास प्रतिशत सोने को, सोने के बिस्कुटों या सिक्कों में परिवर्तित किया जाएगा और उनका तत्समय विद्यमान चालू बाजार कीमत पर श्रद्धालुओं तथा तीर्थ यात्रियों को विक्रय किया जाएगा ।''; और
(ख) उपधारा (2) में खण्ड (iv) और (v) का लोप किया जाएगा।256 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था और पूर्त विन्यास अधिनियम, 1984 को हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्थाओं और पूर्त विन्यासों के बेहतर प्रशासन के लिए और ऐसी संस्थाआें तथा विन्यासों की सम्पति के संरक्षण तथा परिरक्षण का उपबन्ध करने की दृष्टि से अधिनियमित किया गया था । पूर्वोक्त अधिनियम की धारा 12-क मन्दिर न्यासों के स्टॅाक में निष्कार्य पड़े सोने और चाँदी का पारदर्शी रीति में व्ययन करने और ऐसे सोने और चाँदी के व्ययन के परिणामस्वरूप प्राप्त विक्रय आगमों के बेहतर उपयोग का उपबन्ध करता है । यह पाया गया है कि सत्तर प्रतिशत सोने को मन्दिरों में आरक्षित (रिजर्व) रखने से मन्दिर न्यासों को करोड़ाें रुपये की हानि हो रही है और इसकी सुरक्षा में अनुचित व्यय भी हो रहा है । इसलिए पचास प्रतिशत सोने को, सोने के बिस्कुटों या सिक्कों में परिवर्तित किया जाना प्रस्तावित किया गया है और उनका विक्रय तत्समय विद्यमान चालू बाजार कीमत पर श्रद्धालुओं तथा तीर्थयात्रियों को किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त पूर्वोक्त अधिनियम की धारा 12-क (2) के अधीन सोने और चाँदी का शोधन और व्ययन करने के लिए अनुमोदन प्रदान करने के प्रयोजनार्थ गठित की जाने वाली समिति में सम्बद्ध जिला परिषद् और पंचायत समिति के अध्यक्ष को सम्मिलित किया जाता है जिनकी मन्दिर न्यासों के क्रियाकलापों में कोई भूमिका नहीं है । अतः उन्हें उक्त समिति से बाहर करना प्रस्तावित है । इसलिए पूर्वोंक्त अधिनियम को उपयुक्त रूप से संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है ।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है ।
(पे्रम कुमार धूमल)(पे्रम कुमार धूमल)(पे्रम कुमार धूमल)(पे्रम कुमार धूमल) मुख्यमन्त्री । शिमलाः तारीखः.........................., 2011
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वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन
----शून्य-----
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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापनप्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
-----शून्य-----
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 257 AUTHORITATIVE ENGLISH TEXTBill No. 11 of 2011
THE HIMACHAL PRADESH HINDU PUBLIC RELIGIOUS
INSTITUTIONS AND CHARITABLE ENDOWMENTS
(AMENDMENT) BILL, 2011
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Hindu Public Religious Institutions and Charitable
Endowments Act,1984 (Act No.18 of 1984).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-second Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Hindu Public Religious Institutions and Charitable Endowments (Amendment) Act, 2011.
2. Amendment of section 12-A.—In section 12-A of the Himachal Pradesh Hindu Public Religious Institutions and Charitable Endowments Act, 1984, (18 of 1984)—
(a) in sub-section (1), in clause (A), in sub-clause (iii), for the figures "70", the figures "20" shall be substituted and thereafter, the following new sub-clause (iv) shall be inserted, namely:—
"(iv) 50% gold shall be converted into gold biscuits or coins and shall be sold to the devotees and pilgrims on the current prevailing market price."; and (b) in sub-section (2), clauses (iv) and (v) shall be omitted.
258 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONSThe Himachal Pradesh Hindu Public Religious Institutions and Charitable Endowments Act, 1984 was enacted with a view to provide for the better administration of Hindu Public Religious Institutions and Charitable Endowments and for protection and preservation of properties of such institutions and endowments. Section 12-A of the Act ibid provides for the disposal of gold and silver lying idle in the stock of temple trusts in a transparent manner and for the better utilization of the sale proceeds received as result of disposal of such gold and silver. It has been felt that keeping 70 per cent gold reserved in the temples is causing loss of crores of rupees to the Temple Trusts and also it involves undue expenditure for the security of the same. Thus, it has been proposed to convert 50% gold into golt biscuits or coins and should be sold to the devotees and pilgrims on current prevailing market price. Further, the Committee to be constituted under section 12-A (2) of the Act ibid, for the purpose of grant of approval for purification of gold and silver and their disposal includes Chairman of Zila Parishad and Panchayat Samiti concerned who have no role to play in the activities of the Temple Trusts. Thus, it has been proposed to drop them from the said Committee. Thus, it has been decided to amend the Act ibid suitably.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(PREM KUMAR DHUMAL) Chief Minister.
Shimla: The ………, 2011.
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FINANCIAL MEMORANDUM
Nil
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
Nil
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HIMACHAL PRADESH ELEVENTH VIDHAN SABHA
NOTIFICATION
Shimla-171004, the 8th April, 2011
No. V.S.-Legn-laid/1-3/2011.—Under Rule 207 of Rules of Procedure and Conduct of Business of Himachal Pradesh Legislative Assembly, 1973, the following documents laid on the Table of the House on the 8th April, 2011 are hereby notified to be published in the Gazette for general information:-
1. Report of the Comptroller and Auditor General of India for the Year 2009-2010 (Finance Accounts Volume I & II) of the Government of Himachal Pradesh (Bilingual);
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 259 2. Report of the Comptroller and Auditor General of India for the Year 2009-2010(Appropriation Accounts) of the Government of Himachal Pradesh (Bilingual).
3. Report of the Comptroller and Auditor General of India for the Year ended on 31 March, 2010 (Revenue Receipts) of the Government of Himachal Pradesh (Bilingual).
4. Reports of the Comptroller and Auditor General of India for the Year ended on 31 March, 2010 (State Finances and Civil) of the Government of Himachal Pradesh (Bilingual);
5. Report of the Comptroller and Auditor General of India for the Year 2009-2010 (Commercial) of the Government of Himachal Pradesh (Bilingual);
By order,
GOVERDHAN SINGH, Secretary.
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हिमाचल प्रदेश ग्याहिमाचल प्रदेश ग्याहिमाचल प्रदेश ग्याहिमाचल प्रदेश ग्यारहवीं विधान सभारहवीं विधान सभारहवीं विधान सभारहवीं विधान सभा
अधिसूचना
शिमला-171004, 8 अप्रैल, 2011
संख्या वि0 स0-विधायन-प्रा0/1-21/2008संख्या वि0 स0-विधायन-प्रा0/1-21/2008संख्या वि0 स0-विधायन-प्रा0/1-21/2008संख्या वि0 स0-विधायन-प्रा0/1-21/2008....----हिमाचल प्रदेश विधान सभा 8 अप्रैल, 2011 को सम्पन्न हुई बैठक की समाप्ति पर अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुई।
गोवर्धन सिंह, सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
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HIMACHAL PRADESH ELEVENTH VIDHAN SABHA
NOTIFICATION
Shimla–171004, the 8th April, 2011
No. V.S.-Legn.-Pre /1-21/2008.—The Himachal Pradesh Legislative Assembly adjourned sine-die with effect from the close of its sitting held on the 8th April, 2011.
GOVERDHAN SINGH, Secretary, H.P. Vidhan Sabha.
260 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालयहिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
शिमला-4, 7 मार्च, 2011
संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-6/2011 संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-6/2011....--------हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-6/2011 संख्या ः वि0 स0 (विधायन) विधेयक/1-6/2011 विधेयक, 2011 (2011 का विधेयक संख्यांक 10) जो आज दिनांक 7 अप्रैल, 2011 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह,गोवर्धन सिंह, सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा । राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 261 2011 का विधेयक संख्यांक 102011 का विधेयक संख्यांक 102011 का विधेयक संख्यांक 102011 का विधेयक संख्यांक 10 हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2011वधेयक, 2011वधेयक, 2011वधेयक, 2011 हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) ि हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) ि हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) ि
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्यांक 12) का और संशोधन करने के लिए विधेयक विधेयक विधेयक विधेयक ।
1111.... संक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नामसंक्षिप्त नाम और प्रारम्भ और प्रारम्भ और प्रारम्भ और प्रारम्भ....--------(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2011 है।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। 2222.... धारा 2 का संशोधनधारा 2 का संशोधनधारा 2 का संशोधनधारा 2 का संशोधन....--------हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 (जिसे इसमें इसके पश्चात् "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 2 में खण्ड (8) के पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
''(8-क.) ''पशु'' से पालतू पशु अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत हाथी, ऊँट, भैंस, गाय, बैल, घोड़ा, घोड़ी, बधिया घोड़ा, टट्टू, बछेड़ा, बछेड़ी, खच्चर, गधा, सुअर, मेढ़ा, भेढ़ी, भेढ़, मेमना, बकरी और उस के मेमने सम्मिलित हैं; "।
3333.... धारा धारा धारा धारा 84848484 का संशोधन का संशोधन का संशोधन का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 84 में,-
(क) उपधारा (1) में खण्ड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- ''परन्तु खण्ड (ख) के अधीन कोई कर तब तक अधिरोपित नहीं किया जाएगा, जब तक नगरपालिका क्षेत्र के निवासियों या प्रभावित पक्षकारों को विहित रीति में आक्षेप करने का अवसर न दे दिया गया हो और आक्षेप, यदि कोई प्राप्त हुए हों, पर विचार नहीं कर लिया गया हो।"; और
(ख) उपधारा (2), (3),(4) और (5) का लोप किया जाएगा।
4444.... धारा धारा धारा धारा 85 का प्रतिस्थापन85 का प्रतिस्थापन85 का प्रतिस्थापन85 का प्रतिस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 85 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः—
''85. फीस और उपयोक्ता प्रभार.- निगम स्वयं द्वारा उपलब्ध करवाई गई सेवा के लिए, ऐसी दर पर और ऐसी रीति में, जैसी निगम द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाए, फीस और उपयोक्ता प्रभार उद्गृहीत कर सकेगा।''।
5555.... धारा धारा धारा धारा 86 का प्रतिस्थापन86 का प्रतिस्थापन86 का प्रतिस्थापन86 का प्रतिस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 86 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः—
''86. भूमि और भवनों पर कर की दर.-इस अधिनियम में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, नगरपालिका क्षेत्र के भीतर भूमि और भवनों पर कर की इकाई क्षेत्र दर, भूमि और भवन के करयोग्य मूल्य, एक प्रतिशत से पच्चीस प्रतिशत के बीच होगा, जो निगम द्वारा समय-समय पर अवधारित किया जाए :
परन्तु निगम भूमि और भवनों या उनके किसी भाग, जिसका उपयोग केवल लोक पूजा के प्रयोजन के लिए किया जाता है और खाली भूमि और भवनों के क्षेत्र या उनके भाग, जिन्हें लोक कब्रस्तान के प्रयोजन के लिए या श्मशान भूमि के रूप में प्रयुक्त किया जाता है या जिसे मृतक की अन्तयेष्टि के लिए प्रयुक्त किया जाता है, पर कर की दर में पूर्णतः या भागतः छूट दे सकेगा या निम्नतर दर उद्गृहीत कर सकेगा।''। 262 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 6666.... धारा 87 का लोपधारा 87 का लोपधारा 87 का लोपधारा 87 का लोप....--------मूल अधिनियम की धारा 87 का लोप किया जाएगा।
7777.... धारा 88 का प्रतिस्थापनधारा 88 का प्रतिस्थापनधारा 88 का प्रतिस्थापनधारा 88 का प्रतिस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 88 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''88. करों के निर्धारण के लिए भूमि और भवनों के करयोग्य मूल्य का अवधारण.-धारा 86 में विनिर्दिष्ट करों के निर्धारण के लिए भूमि और भवनों के कर योग्यमूल्य का अवधारण निम्न प्रकार से होगा,—
(क) भूमि की दशा में करयोग्य मूल्य, भूमि के वास्तविक क्षेत्र के प्रतिवर्ग मीटर को कर की इकाई क्षेत्र दर द्वारा गुणित करके और विशेष क्षेत्र के लिए विहित सुसंगत कारकों पर आधारित होगा तथा भवन की दशा में करयोग्य मूल्य स्तम्भमूल क्षेत्र (प्ंिलंथ ऐरिया) के प्रति वर्गमीटर को कर की इकाई क्षेत्र दर द्वारा गुणित करके और विशेष क्षेत्र के लिए विहित सुसंगत कारकों पर आधारित होगा।
(ख) भूमि और भवनों पर कर के उद्ग्रहण के लिए सम्पूर्ण नगरपालिका क्षेत्र को विभिन्न क्षेत्रों में बांटा जाएगा और प्रत्येक क्षेत्र के भिन्न-भिन्न मूल्यों (उपयोगिता) वाले सुसंगत कारक होंगे। (ग) इकाई क्षेत्र कर का अवधारण करने के प्रयोजन के लिए पांच कारक होंगे, अर्थात् (i) अवस्थिति, (ii) अधिभोगिता, (iii) भवन की मियाद, (iv) भवन का उपयोग और (v) अवसंरचना का प्रकार। प्रत्येक कारक की अलग-अलग क्षेत्र के लिए भिन्न-भिन्न उपयोगिता होगी जो निगम द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाए।
(घ) इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार कर के उद्ग्रहण, संगणना और निर्धारण के लिए पद्धति, जो भवनों के श्रेणीकरण, परम्परागत उपयोग, या भवनों के संविभाजन से सम्बन्धित है, या खाली भूमि और खुले स्थान, जो भूमि और भवन के भाग हैं, उपविधियों द्वारा विहित की जा सकेगीः परन्तु भवन के करयोग्य मूल्य पर, भवन के अनुरक्षण के लिए आवश्यक मरम्मत और अनुरक्षण व्ययों के लेखे में दस प्रतिशत की वार्षिक कटौती अनुज्ञात की जाएगी तथा कर की राशि पर दस प्रतिशत की छूट भी अनुज्ञात की जाएगी, यदि बिल में विनिर्दिष्ट कर की राशि को, ऐसे बिल की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर संदत्त कर दिया गया है, तथापि यह छूट उन व्यतिक्रमियों को लागू नहीं होगी जिन पर कर का बकाया है।"।
8888.... धारा 89 का संशोधनधारा 89 का संशोधनधारा 89 का संशोधनधारा 89 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 89 में विद्यमान द्वितीय परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात्ः—
"परन्तु केन्द्रीय सरकार के पूर्णतः या भागतः स्वामित्वाधीन और नियन्त्रणाधीन पब्लिक सेक्टर उपक्रम या कम्पनियां, इस अधिनियम या तद्धीन बनाई गई उप-विधियों के उपबन्धों के अधीन कर के लिए निर्धारणीय होंगी और निगम द्वारा उपलब्ध करवाई गई सेवा के बदले में, यथास्थिति, फीस या सेवा प्रभारों को संदत्त करने के लिए दायी होंगी।"।
9999.... धारा 90 का प्रतिस्थापनधारा 90 का प्रतिस्थापनधारा 90 का प्रतिस्थापनधारा 90 का प्रतिस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 90 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"90. भूमि और भवनों पर करों का भार.-(1) भूमि और भवनों पर कर मूलतः मालिक से उद्ग्रहणीय होगा और मालिक की अनुपस्थिति में यह किराएदारों सहित, अधिभोगी से उद्ग्रहणीय और वसूलीय होगा।
(2) भूमि और भवन पर कर का निर्धारण, उद्ग्रहण और संदाय, किसी भी रीति में न तो स्वामी का या न तो अधिभोगी का सम्पत्ति में कोई अधिकार, हक या हित प्रदत्त नहीं करेगा और न ही राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 263 इस तथ्य का साक्ष्य होगा कि भवन या परिसर प्राधिकृत है तथा इसके अतिरिक्त भी कि कोई भवन या परिसर या उसका कोई भाग, जो इस अधिनियम, विनियमों या तद्धीन बनाई गई उपविधियों के उपबंधों के उल्लंघन में परिनिर्मित है, पर इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन भूमि और भवनों पर कर के निर्धारण के फलस्वरूप विनियमितिकरण के लिए विचार नहीं किया जाएगा।"।
10101010.... धारा 91,धारा 91,धारा 91,धारा 91, 102 और 107 से 114 तक का लोप102 और 107 से 114 तक का लोप102 और 107 से 114 तक का लोप102 और 107 से 114 तक का लोप....--------मूल अधिनियम की धारा 91, 102 और 107 से 114 का लोप किया जाएगा।
11111111.... धारा 115 का संशोधनधारा 115 का संशोधनधारा 115 का संशोधनधारा 115 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 115 में,-
(क) शीर्षक में ''कर'' शब्द के स्थान पर ''फीस'' शब्द रखा जाएगा; और
(ख) उपधारा (1) में "सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट" शब्दों के स्थान पर "निगम द्वारा विनिर्दिष्ट" शब्द रखे जाएंगे।
12121212.... धारा 120 का लोपधारा 120 का लोपधारा 120 का लोपधारा 120 का लोप....--------मूल अधिनियम की धारा 120 का लोप किया जाएगा।
13131313.... धारा 157 का संशोधनधारा 157 का संशोधनधारा 157 का संशोधनधारा 157 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 157 में खण्ड (क से छ) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"(क) आयुक्त, इस अधिनियम की धारा 40 की उपधारा (4) के अधीन गठित स्थाई समिति के पूर्व अनुमोदन से, लोक नीलामी द्वारा निगम से सम्बन्धित किसी जंगम (चल) या स्थावर (अचल) सम्पत्ति का विक्रय द्वारा, पट्टे पर या अन्यथा व्ययन कर सकेगा;
(ख) स्थावर (अचल) सम्पत्ति के अन्तरण की पद्धति और पुरोभाव्य शर्त, निगम द्वारा बनाए गए विनियमों या उपविधियों द्वारा शासित होगी; और
(ग) आयुक्त, एक रजिस्टर बनाए रख्ेागा जिसमें स्थावर सम्पत्तियों का ब्यौरा दिया जाएगा और उक्त तालिका में, ऐसी रीति में जैसी उप-विधियों द्वारा विहित की जाए, परिवर्तन, यदि कोई हो, दर्शित करते हुए वार्षिक विवरणी तैयार करेगा तथा उसे वर्ष के अन्त में विचार करने के लिए निगम के समक्ष रखेगा। "।
14141414.... धारा 159 का संशोधनधारा 159 का संशोधनधारा 159 का संशोधनधारा 159 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 159 में,-
(क) खण्ड (ग) और (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
"(ग) प्रत्येक संविदा, जिसमें पांच लाख रूपए से अनधिक व्यय या ऐसी उच्चतर रकम, जिसे निगम नियत करे, अन्तवर्लित है, आयुक्त द्वारा की जाएगी;
(ख) विद्यमान परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थातः-
"परन्तु पांच लाख रूपए के मूल्य से अधिक की या ऐसी उच्चतर रकम, जिसे निगम नियत कर सकेगा, की संविदा केवल निगम के पूर्व अनुमोदन के पश्चात् ही आयुक्त द्वारा की जाएगी।"।
15151515.... धारा 254 का संशोधनधारा 254 का संशोधनधारा 254 का संशोधनधारा 254 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 254 में, उपधारा (6) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-264 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 "(6) इस अधिनियम में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, यदि भवन का स्वामी या अधिभोगी, स्वीकृति के बिना अनधिकृत निर्माण करता है या मंजूर प्लान (रेखांक) से विचलन करता है, किसी सरकारी भूमि या निगम में निहित भूमि पर भवन का निर्माण करता है अथवा किसी सार्वजनिक सड़क, मार्ग, रास्ते या नाली को आच्छादित करता है या दुव्र्यपदेशन से अथवा भवन प्लान (रेखांक) की मंजूरी के लिए आवेदन करते समय बुनियादी तथ्यों को छुपाकर, मंजूरी प्राप्त करता है, तो आयुक्त, उसे सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात्, विद्युत आपूर्ति (कनेक्शन), नागरिक सुविधाओं जिसके अन्तर्गत जल और मल प्रणाली कनेक्शन भी हैं, के स्थापन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने से इन्कार कर सकेगा या जारी किए गए को वापिस ले सकेगा।"।
16161616.... नई धारा 254-क का अन्तःस्थापननई धारा 254-क का अन्तःस्थापननई धारा 254-क का अन्तःस्थापननई धारा 254-क का अन्तःस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 254 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा 254-क अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"254-क. अनधिकृत विकास या सन्निर्माण को सील करने की शक्ति- (1) धारा 253 या धारा 254 के अधीन भवन संकर्मों को गिराने या रोकने का आदेश करने से पूर्व या पश्चात्, किसी भी समय आयुक्त के लिए, ऐसे विकास को सील करने हेतु निर्देशित करने का आदेश ऐसी रीति में करना विधिपूर्ण होगा, जैसी निगम द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुपालन के प्रयोजन के लिए या ऐसे विकास के स्वरूप और विस्तार के कारण किसी वाद के निवारण के लिए बनाई गई उप-विधियों द्वारा विहित किया जाए।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी विकास (डिव्लेपमैन्ट) को सील किया गया है, वहां आयुक्त, ऐसे विकास को गिराने के प्रयोजन के लिए, सील को हटाने का आदेश कर सकेगा। (3) कोई भी व्यक्ति, ऐसी सील को, आयुक्त द्वारा उपधारा (2) के अधीन किए गए आदेश या इस अधिनियम के अधीन अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील में किए गए आदेश, के सिवाय नहीं हटाएगा।"।
17171717.... नई धारा 324-क का अन्तनई धारा 324-क का अन्तनई धारा 324-क का अन्तनई धारा 324-क का अन्तःःःःस्थापनस्थापनस्थापनस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 324 के पश्चात्, निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"324-क. पशुओं का रजिस्ट्रीकरण और उनके अभिलेख का रखा जाना.-(1) प्रत्येक परिवार का मुखिया, अपने परिवार द्वारा रखे गए पशुओं के ब्यौरे, हिमाचल प्रदेश नगर निगम(संशोधन) अधिनियम, 2011 के आरम्भ होने से एक मास की अवधि के भीतर और तत्पश्चात् हर समय जब कभी किन्हीं कारणों से पशुओं की संख्या में बदलाव आता है, निगम को मौखिक रूप में या लिखित में देने या दिलवाने के लिए उत्तरदायी होगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन पशुओं के ब्यौरे की प्राप्ति पर निगम, पशु का रजिस्ट्रीकरण करेगा और उनके अभिलेखों को ऐसी रीति में बनाए रखेगा, जैसी निगम द्वारा अधिसूचित की जाएः परन्तु निगम ऐसी दर पर रजिस्ट्रीकरण फीस प्रभारित कर सकेगा, जैसी इसके द्वारा नियत की जाए।
(3) निगम का यह कत्र्तव्य होगा कि प्रत्येक पशु पर समुचित पहचान चिन्ह लगाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा लगाए गए कर्मचारियों या व्यक्तियों की सहायता करे और पहचान का अभिलेख बनाए रखे।
(4) यदि पहचान चिन्ह वाला कोई पशु आवारा पाया जाता है, तो पशु के मालिक को निगम द्वारा बनाए रखे गए अभिलेख से पहचाना जाएगा और ऐसा मालिक, प्रथम अपराध के लिए पांच सौ रूपए की शास्ति के लिए दायी होगा, जिसे आयुक्त द्वारा या उस द्वारा इस निमित्त प्रधिकृत अधिकारी द्वारा अधिरोपित किया जाएगा। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 265 (5) यदि निगम, ऐसे आवारा पशु के पहचान चिन्ह के साथ छेड़छाड़ करने या उसको विकृत करने के कारण पहचान करने में असफल रहता है, तो वह मामले की रिपोर्ट नजदीकी पशुपालन विभाग के प्रभारी को करेगा, जो आवारा पशु को नजदीकी गौशाला में रखवाएगा।
18181818.... धारा 396 का संशोधनधारा 396 का संशोधनधारा 396 का संशोधनधारा 396 का संशोधन....--------मूल अधिनियम की धारा 396 में,-
(क) मूल अधिनियम के राजभाषा पाठ में '(1)' चिन्ह और अंक पहले ही विद्यमान हैं।
(ख) उपधारा (1) में "पांच सौ रूपए'' और "पचास रुपए'', शब्दों के स्थान पर, जहां-जहां ये आते हैं, क्रमशः "पचास हज़ार रुपए" और "पांच हज़ार रुपए'' शब्द रखे जाएंगे।
19191919.... धारा 397 का प्रतिस्थापनधारा 397 का प्रतिस्थापनधारा 397 का प्रतिस्थापनधारा 397 का प्रतिस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 397 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"397. उप-विधियों के बारे में अनुपूरक उपबंध.-इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त उप- विधियां बनाने की कोई शक्ति इस शर्त के अध्यधीन प्रदत्त की गई है कि उप-विधियां निगम द्वारा, पूर्व प्रकाशन के पश्चात्, लोक आक्षेपों को आमन्त्रित करने के लिए, राजपत्र में प्रकाशित होने के पश्चात् बनाई जा रही हैः
परन्तु राज्य सरकार ऐसी किसी उपविधि को, जो इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के प्रतिकूल पाई जाती है, को रद्द कर सकेगी और तदुपरि उपविधि प्रभावहीन हो जाएगी।"।
20202020.... नई धारा 402-क का अन्तनई धारा 402-क का अन्तनई धारा 402-क का अन्तनई धारा 402-क का अन्तःःःःस्थापनस्थापनस्थापनस्थापन....--------मूल अधिनियम की धारा 402 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"402 क. पुनर्विलोकन की शक्ति.-आयुक्त, स्वयं या कार्यवाहियों के किसी पक्षकार द्वारा किए गए आवेदन पर, इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा पारित आदेश का, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 47 के उपबंधों के अनुसार पुनर्विलोकन कर सकेगा और तद्नुसार उसे उपान्तरित या उलट सकेगा। "।
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उद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथनउद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 के अध्याय 8 के अन्तर्गत नगर निगम की सीमाओं के भीतर भूमि और भवनों के अधिभोगियों से करों और फीसों का उद्ग्रहण करने के मूलभूत अधिकार के साथ-साथ करों और फीसों की वसूली के संबंध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रियाएं भी अधिकथित है। सम्पति कर नगर निगम सहित समस्त शहरी स्थानीय निकायों के लिए राजस्व का मुख्य स्रोत है। नगर निगम की दशा में, यह राजस्व सृजन का एकमात्र सबसे बड़ा स्रोत है। वर्तमान में कर का निर्धारण सकल वार्षिक भाटक (किराया) पर किया जाता है और जहां किसी भूमि या भवन का सकल वार्षिक भाटक (किराया) निर्धारित नहीं किया जा सकता है, वहां उसका निर्धारण भवन निर्माण की लागत और भूमि की लागत पर किया जाता है। तेरहवें वित्त आयोग का भी यह निश्चित विचार है कि समस्त शहरी स्थानीय निकायों को सम्पत्ति कर उद्गृहीत करने हेतु समर्थ बनाया जाना चाहिए और इस संबंध में कोई भी बाध्यता हो, उसे दूर किया जाना चाहिए। शहरी स्थानीय निकायों के हालात सरकार को तेरहवें वित्त आयोग वितरण के अनुसार 1-4-2011 से 31-3-2015 तक मिलने वाले निष्पादन योजक अनुदान को प्राप्त करने के लिए समर्थ बनाएंगे। यहां यह कहना प्रासंगिक रहेगा कि शिमला शहर को, "जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण अभियानअभियानअभियानअभियान" (जे एन एन यू आर एम) के अधीन एक अभियान शहर घोषित किया गया है और उक्त अभियान के 266 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 अधीन सम्पत्ति कर सुधार को, स्वैच्छिक अनुपालनों को प्रोत्साहित करने वाली साधारण, पारदर्शी, अवैवेकिक और साम्यापूर्ण सम्पत्ति कर प्रणाली (प्रार्पटी टैक्स रेजीम) की स्थापना के व्यापक उद्देश्य सहित, सम्पत्ति कर के उद्ग्रहण, निर्धारण और संग्रहण की पद्धति की बाबत नगरपालिकाओं द्वारा निष्पादित किए जाने आज्ञापक सुधारों में से एक विहित किया गया है। सम्पत्ति कर के निर्धारण और उद्ग्रहण के लिए प्रक्रिया को साधारण बनाने के लिए भूमि के प्रति वर्ग मीटर वास्तविक क्षेत्रफल और भवन के प्रति वर्ग मीटर स्तम्भमूल क्षेत्र (प्लिंथ एरिया) पर आधारित अनुपातिक मूल्य को ध्यान में रखते हुए निर्धारण को स्वीकृत प्राचल, अर्थात् अवस्थिति, अधिभोग, भवन की मियाद, भवन के उपयोग और निर्मितियों के प्रकार पर, प्रस्तावित किया गया है। इसके अतिरिक्त, निगम के साथ साथ आयुक्त की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाना भी अनिवार्य है, तथा निगम की आय में सुधार लाने और प्रशासनिक विलम्बों को कम करने तथा विकासात्मक क्रियाकलापों के शीघ्र निष्पादन को सुकर बनाने के लिए आयुक्त और निगम की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाना प्रस्तावित है क्योंकि पूर्वोक्त अधिनियम के विद्यमान उपबन्ध विभिन्न विकासात्मक संकर्मों का उत्तरदायित्व लेने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अतिरिक्त, धारा 396 के अधीन उपबंधित उप-विधियों के उल्लंघन के लिए शास्ति, अपराध की गंभीरता की तुलना में नाममात्र ही है, इसलिए, उप-विधियों का कड़ा अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु शास्ति में वृद्धि करने और उपबंधों को और अधिक कड़ा करना भी प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में पूर्वोक्त अधिनियम में अनधिकृत निर्माण को सील करने के लिए कोई उपबन्ध नहीं है और न ही आयुक्त द्वारा पुनर्विलोकन का उपबंध है।
अतः अनधिकृत निर्माण को सील करने हेतु आयुक्त को सशक्त बनाने के लिए उपबंध करने के साथ पुनर्विलोकन का उपबंध करना भी प्रस्तावित किया गया है, ताकि उपबन्धों को और अधिक भयोपरापी बनाया जा सके। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अनुरूप पशुओं के रजिस्ट्रीकरण और उसके अभिलेख के अनुरक्षण की बाबत एक नया उपबंध भी प्रस्तावित किया गया है।
यह विधेयक पूर्वोक्त उद्ेदश्यों की पूर्ति के लिए है।
(महेन्द्र सिंह)(महेन्द्र सिंह)(महेन्द्र सिंह)(महेन्द्र सिंह) प्रभारी मंत्री। शिमला : तारीखः -2011.
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वित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापनवित्तीय ज्ञापन
-शून्य-
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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
-शून्य-राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 267 AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT Bill No. 10 of 2011
THE HIMACHAL PRADESH MUNICIPAL CORPORATION
(AMENDMENT) BILL, 2011
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Municipal Corporation Act, 1994 (Act No. 12
of 1994).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-second Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh Municipal Corporation (Amendment) Act, 2011.
(2) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification published in the Official Gazette, appoint.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Municipal Corporation Act, 1994 (hereinafter referred to as the 'principal Act'), after clause (8), the following new clause shall be inserted, namely:-
"(8-a). "cattle" means domestic animals and includes elephants, camels, buffaloes, cows, oxen, horses, mares, geldings ponies, colts, fillies, mules, asses, pigs rams, ewes, sheep, lambs goats and kids;".
3. Amendment of section 84.—In section 84 of the principal Act,-
(a) in sub-section (1), after clause(b), the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided that no tax shall be imposed under clause (b) unless an opportunity has been given in the prescribed manner to the residents of the municipal area or to the affected parties to file objections and the objections, if any, thus received have been considered." ; and
(b) sub-sections (2), (3), (4), and (5), shall be omitted.
4. Substitution of section 85.—For section 85 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:—
"85. Fee and users charges.—The Corporation may levy a fee and user charges for the services provided by it at such rates and in such manner as may be determined by the Corporation from time to time.".
5. Substitution of section 86.—For section 86 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:—
268 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933"86. Rate of tax on lands and buildings.—Save as otherwise provided in this Act, the unit area rate of tax on lands and buildings within the municipal area shall be between one per cent to twenty five per cent of the rateable value of land and building, as may be determined by the Corporation from time to time:
Provided that the Corporation may exempt wholly or partially or levy lower rate of tax on the lands and buildings or portion thereof, which is exclusively used for the purpose of public worship and the area of vacant lands and buildings or portion thereof, exclusively used for the purpose of public burial or as a cremation ground, or any other place used for the disposal of dead.".
6. Omission of section 87.—Section 87 of the principal Act shall be omitted.
7. Substitution of section 88.—For section 88 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:—
"88. Determination of rateable value of lands and buildings assessable to taxes.—The rateable value of lands and buildings assessable to taxes specified in section 86 shall be,—
(a) in the case of land, the rateable value shall be based upon per square metre of the actual area of land multiplied by the unit area rate of tax and relevant factors prescribed for the particular zone and in the case of building, the rateable value shall be based upon per square metre of plinth area multiplied by unit area rate of tax and relevant factor prescribed for the particular zone.
(b) for levy of tax on lands and buildings, the entire municipal area shall be divided into different zones and each zone shall have relevant factors having different values.
(c) for the purpose of determination of unit area tax, there shall be five factors i.e (i) location, (ii) occupancy, (iii) age of building, (iv)use of building and (v) type of structure. Each factor shall have different value for different zone as may be determined by the Corporation, from time to time.
(d) the mode for levy, calculation and assessment of tax as per provisions of this Act, which relates to the classification, usages of the buildings or apportionment of buildings, or vacant land and open spaces forming part of the land and building shall be prescribed by bye-laws:
Provided that annual deduction of ten per cent on the rateable value of building shall be allowed on account of repair and maintenance expenses necessary for the maintenance of the building and a rebate of ten per cent shall also be allowed on the amount of tax, in case the amount of tax specified in the bill is paid within fifteen days from the date of receipt of such bill, however, this rebate shall not be applicable in the case of defaulters who are in arrear of tax.".
8. Amendment of section 89.—In section 89 of the principal Act, for the existing second proviso, the following proviso shall be substituted, namely:-
"Provided that the public sector undertakings or companies owned and controlled fully or partially by the Central Government shall be assessable to taxes under the provisions of this Act or bye-laws made thereunder, and shall also be liable to pay fee or service charges, as the case may be, in lieu of services provided by the Corporation.".
9. Substitution of section 90.—For section 90 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:-
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 269"90. Incidence of taxes on lands and buildings.—(1) The taxes on lands and buildings shall be primarily leviable upon the owner and in the absence of owner, it shall be leviable and recovered from the occupier including tenants.
(2) The assessment, levy and payment of tax on land and building shall not in any manner confer any right, title or interest in the property upon either on the owner or the occupier and shall not be a proof of the fact that the building or premises is authorized one and further that any building or premises or part thereof which is erected in contravention of the provisions of this Act, regulations or bye-laws made thereunder, shall not be considered for regularization by virtue of being assessed to tax on lands and buildings under the provisions of this Act.".
10. Omission of sections 91, 102 and 107 to 114.—Sections 91, 102 and 107 to 114 of the principal Act shall be omitted.
11. Amendment of section 115.—In section 115 of the principal Act,—
(a) in the heading, for the word "tax", the word "fees" shall be substituted; and (b) in sub-section (1), for the words "specified by the Government", the words "specified by the Corporation" shall be substituted.
12. Omission of section 120.—Section 120 of the principal Act shall be omitted.
13. Amendment of section 157.—In section 157 of the principal Act, for clauses (a) to (g), the following clauses shall be substituted, namely:—
"(a) the Commissioner, with the prior approval of the standing committee, constituted under sub-section (4) of section 40 of this Act, may dispose of, by sale, lease or otherwise, any moveable or immovable properties belonging to the Corporation, by public auction;
(b) the mode and condition precedent to the transfer of immovable property, shall be governed by regulations or bye-laws made by the Corporation; and
(c) the Commissioner shall maintain a register giving therein the detail of the immovable properties and prepare annual statement indicating the changes, if any, in the said inventory, in such manner as may be prescribed by bye-laws, and shall place the same before the Corporation for consideration at the end of the year".
14. Amendment of section 159.—In section 159 of the principal Act,—
(a) for clauses (c) and (d), the following clause shall be substituted, namely:—
"(c) every contract involving an expenditure not exceeding rupees five lac or such higher amount as the Corporation may fix, may be made by the Commissioner:
(b) for the existing proviso, the following proviso shall be substituted, namely:—
"Provided that the contract exceeding rupees five lac in value or such higher amount as the Corporation may fix, shall be made by the Commissioner only after prior approval of the Corporation.".
15. Amendment of section 254.—In section 254 of the principal Act, for sub-section (6), the following shall be substituted, namely:—
270 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933"(6) Notwithstanding anything to the contrary contained in this Act, the Commissioner, may, after affording an opportunity of being heard, deny or withdraw the no objection certificate issued for installation of electricity connection, the civic amenities including water and sewerage connection, if the owner, or the occupier of the building carry out unauthorized construction without sanction or make deviations from the sanctioned plan, erection of a building on any Government land or land vested in the Corporation, or by covering any public road, street, path or drain or obtain sanction on mis-representation or by concealing material facts at the time of making the application for sanction of building plan.".
16. Insertion of new section 254-A.—After section 254 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"254-A. Power to seal unauthorized development or construction.— (1) It shall be lawful for the Commissioner, at any time, before or after making an order of demolition or stoppage of building works under section 253 or section 254 to make an order directing the sealing of such development in the manner as may be prescribed by bye-laws made by the Corporation for the purpose of carrying out the provisions of this Act, or for preventing any dispute as to the nature and extent of such development.
(2) Where any development has been sealed under sub-section (1), the Commissioner may, for the purpose of demolishing such development, order the seal to be removed.
(3) No person shall remove such seal except, under an order made by the Commissioner under sub-section (2) or under an order of the appellate authority made in an appeal under this Act.".
17. Insertion of new section 324-A.—After section 324 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"324-A. Registration of cattle and maintenance of their record.—(1) Head of every family shall be responsible to give or cause to be given, either orally or in writing, the details of cattle owned by his family to the Corporation within a period of one month from the commencement of the Himachal Pradesh Municipal Corporation (Amendment) Act, 2011, and thereafter, every time as and when any charge in the number of cattle takes place by any reason.
(2) On receipt of the details of cattle under sub-section (1), the Corporation shall register cattle and shall maintain records thereof in such manner as may be notified by the Corporation:
Provided that the Corporation may charge registration fee at such rate as may fixed by it.
(3) It shall be the duty of the Corporation to assist the officials or persons engaged by Animal Husbandry Department for applying appropriate identification mark on each cattle and to maintain the record of identification.
(4) If any cattle with identification mark is found strayed, the owner of the cattle shall be identified by the Corporation from the record maintained by it and such owner shall be liable for penalty of rupees five hundred for the first offence which shall be imposed by the Commissioner or the Officer authorized by him in this behalf.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 271(5) If the Corporation fails in identifying such stray cattle due to tempering with identification mark or mutilation thereof, it shall report the matter to the In-charge of the nearest Animal Husbandry Department who shall lodge the stray cattle to the nearest Goshala.".
18. Amendment of section 396.—In section 396 of the principal Act,—
(a) before the words and sign "Any bye-laws", the brackets and figure "(1)" shall be inserted; and
(b) in sub-section (1) as so re-numbered, for the words "five hundred rupees " and "fifty rupees", wherever these occur, the words "fifty thousand rupees" and "five thousand rupees " shall respectively be substituted.
19. Substitution of section 397.—For section 397 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:—
"397. Supplemental provisions respecting bye-laws.—Any power to make bye-laws conferred by this Act is conferred subject to the condition that bye- laws being made after previous publication by the Corporation, after having being published in Official Gazette for inviting public objections:
Provided that State Government may cancel any such bye-law if found to be contrary to the provisions of this Act or the rules made thereunder and thereupon the bye-law shall cease to have effect.".
20. Insertion of new section 402-A.—After section 402 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"402-A. Power to review.—The Commissioner may, on his own or on the application made by any of the party to the proceedings, review the order passed by him under this Act, in accordance with the provisions of order XLVII of the Code of Civil Procedure 1908, and may modify or reverse the same accordingly.".
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
Under Chapter-VIII of Himachal Pradesh Municipal Corporation Act, 1994, there is substantive right to levy taxes and fees and also the procedures to be followed in connection with recovery of taxes and fees from the occupants of the lands and buildings within the limits of the Municipal Corporation. The property tax is the main source of revenue to all the Urban Local Bodies including the Municipal Corporation. In the case of Municipal Corporation, it is the single largest source of revenue generation. At present the tax is assessed on gross Annual Rent and where the gross Annual Rent of any land or building cannot be determined the same is assessed on the cost of erection of building and the cost of land. The 13th Finance Commission is also of the firm view that all Urban Local Bodies should be enabled to levy property tax and any hindrance in this regard must be removed. This will enable the Government to avail the performance linked grants that are to flow w.e.f. 1.4.11 to 31.3.2015 as per 13th Finance Commission dispensation. It is pertinent to mention here that the Shimla city has been declared as one of the mission city under the "Jawahar Lal Nehru National Urban Renewal Mission" (JNNURM) and under the said mission, the property tax reforms has been prescribed as one of the mandatory reform to be carried272 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 out by the municipalities with regard to the method of levy, assessment and collection of property tax with the broad objective of establishing a simple, transparent, non-discretionary and equitable property tax regime that encourage voluntary compliances. In order to simplify the procedure for assessment and levy of property tax, the assessment has been proposed on accepted parameter i.e. location, occupancy, age of building, use of building and type of structures, by taking into consideration the rateable value based upon per square meter of the actual area of land and per square meter of plinth area of the building.
Further, it is imperative to enhance the financial powers of the Corporation as well as the Commissioner and in order to improve the income of the Corporation and also cut down the administrative delays and to facilitate expeditious execution of developmental activities, it has been proposed to enhance financial powers of the Commissioner and the Corporation, as the present provisions of the Act ibid are not adequate to undertake various developmental works. Further, penalty for contravention of bye-laws provided under section 396 is very nominal as compared to the gravity of offence. Therefore, in order to ensure strict compliance of bye-laws, it has been proposed to enhance the penalty and to make the provisions of the Act ibid more stringent. Further, at present, there is no provision in the Act to seal unauthorized construction and provision of Review by the Commissioner. Thus, it has also been proposed to make a provision empowering the Commissioner to seal unauthorized construction and provision of Review, so as to make the provisions more deterrent. A new provision regarding registration of cattle and maintenance of record thereof has also been proposed on the analogy of the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(MAHENDER SINGH)
Minister –in –Charge.
Shimla :
Dated : , 2011.
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FINANCIAL MEMORANDUM
—Nil—
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
—Nil—
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 273 ब अदालत श्री हेम चन्द वर्मा, सहायक समाहर्ता, प्रथम श्रेणी, वडोह, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा नं0 : 8/2011 तिथि पेशी : 22-4-2011
चमारू राम बनाम आम जनता। विषय.--राजस्व रिकार्ड खाता 42 मिन, महाल लोहार लाहड़ी, जमाबन्दी वर्ष 2006-07 के खाना मलकीयत में झौण्डा के साथ उपनाम फौंडा दर्ज करवाने बारे आवेदन।
नोटिस बनाम आम जनता महाल लोहार लाहड़ी।
श्री चमारू राम पुत्र श्री फौंडा, वासी लोहार लाहड़ी ने एक आवेदन के माध्यम से गुजारिश की है कि उसके पिता का नाम फौंडा है जबकि जमाबन्दी खाता 42 मिन, महाल लोहार लाहड़ी, तहसील वडोह के खाना मलकीयत में श्री चमारू पुत्र श्री झौंडा पुत्र श्री रांझा दर्ज हुआ है। इसलिए उसके पिता का असली नाम फौंडा उपनाम के रूप में दर्ज किया जावे।
इस कोर्ट नोटिस द्वारा आम जनता व सम्बन्धित व्यक्तियों को सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के पिता के पूर्व दर्ज नाम झौंडा के साथ उपनाम फौंडा दर्ज करने बारे किसी को कोई उजर/एतराज हो तो तिथि पेशी 22-4-2011 समय 10.00 बजे सुबह अदालत में हाजिर आकर पेश करे। गैर हाजिरी की सूरत में कारवाई जाब्ता अमल में लाई जावेगी।
आज दिनांक 25-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
हेम चन्द वर्मा, सहायक समाहर्ता, प्रथम श्रेणी,
वडोह, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री नरेश कुमार शर्मा, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
मुकद्दमा नं0 2/2011/तह0
श्रीमति कान्ता देवी बनाम आम जनता। विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
नोटिस बनाम आम जनता।
श्रीमती कान्ता देवी विधवा श्री चुनी लाल, निवासी मन्दल, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसके पति चुनी लाल की मृत्यु दिनांक 5-2-1991 को हुई है। परन्तु ग्राम पंचायत मन्दल में मृत्यु पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित सम्बन्धियों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त चुनी लाल की मृत्यु पंजीकृत किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह अपना एतराज 274 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 हमारी अदालत में दिनांक 2-5-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर अपना एतराज पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र मृत्यु तिथि पंजीकृत किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे। आज दिनांक 21-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया। मोहर।
नरेश कुमार शर्मा, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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In the Court of Shri Naresh Kumar Sharma, Naib Tehsildar-cum-Executive Magistrate,
Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh
Case No. 26/NT/11
1. Shri Rajan s/o Shri Vijay Bhadur, r/o H. No. 67, Chilgari, Dharamshala. 2. Smt. Shushan w/o Sh. Rajan r/o H. No. 67, Chilgari, Dharamshala. . . Applicants.
Versus
1. General Public, 2. The Registrar of Marriages.
Subject.—Registration of marriage under section 8 (4) of the H. P. Registration of Marriages Act, 1996 (Act No. 21 of 1997).
PUBLIC NOTICE :
Whereas the above named applicant has made an application under section 8 (4) of the Himachal Pradesh Registration of Marriages Act, 1996 alongwith an affidavit stating there in that they have solemnized their marriage on (date) 11-2-2008 at (Place) Chilgari, H. No. 67, but has not been found entered in the records of the Registrar of Marriages M. C. Dharamshala.
And whereas, they have also stated that they were not aware of the laws for the registration of marriage with the Registrar of marriages and now, therefore, necessary order for the registration of their marriage be passed so that their marriage is registered by the concerned authority.
Now, therefore, objections are invited from the general public that if anyone has any objection regarding the registration of the marriage of the above named applicant, they should appear before the undersigned in my court on (date) 13-5-2011 at (Place) Tehsil Office, Dharamshala at (time)10.00 A. M. either personally or through their authorized agent.
In the event of their failure to do so, orders shall be passed ex parte for the registration of marriage without affording any further opportunity of being heard.
Issued under my hand and seal of the Court on this............day of ...............2011. Seal.
NARESH KUMAR,
Naib-Tehsildar-cum-Executive Magistrate,
Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 275 ब अदालत श्री एच0 सी0 वर्मा, कार्यकारी दण्डाधिकारी, वडोह, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा नं0 : 9/2011. तिथि पेशी : 21-4-2011
संजोगिता देवी बनाम आम जनता। विषय.-- मृत्यु पंजीकरण हेतु धारा 13(3) हि0 प्र0 जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन पत्र।
नोटिस बनाम : आम जनता महाल कमलोटा।
आदेश।
आवेदक श्रीमती संजोगिता देवी ने इस अदालत में एक आवेदन पत्र देकर कहा है कि उसकी सास श्रीमती भोंटा देवी पत्नी श्री राम चन्द, निवासी कमलोटा का देहान्त 24-7-2010 को कमलोटा गांव में हुआ परन्तु इस मृत्यु का पंजीकरण पंचायत दनोआ में अज्ञानतावश नहीं करवाया है। इसलिए इस पंजीकरण का आदेश जारी किया जावे।
अतः इस कोर्ट नोटिस के माध्यम से आम जनता को सूचित किया जाता है कि इस मृत्यु पंजीकरण बारे किसी व्यक्ति विशेष को कोई उजर/एतराज हो तो तिथि पेशी 21-4-2011 समय 10.00 बजे सुबह हाजिर अदालत आकर पेश करे। गैर हाजिरी की सूरत में कारवाई जाब्ता अमल में लाई जावेगी। आज दिनांक 21-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।
मोहर।
एच0 सी0 वर्मा, कार्यकारी दण्डाधिकारी, वडोह, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री पी0 सी0 शर्मा, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, टिक्कर, उप-तहसील टिक्कर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश
श्री गोबिन्द सिंह पुत्र श्री ख्याली राम, निवासी ग्राम कोटी, उप-तहसील टिक्कर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
हरगाह आम जनता को सूचित किया जाता है कि श्री गोबिन्द सिंह उपरोक्त ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजार रखा है कि उसका नाम राजस्व अभिलेख में गोपी दर्ज है जो गलत है जबकि प्रार्थी का असली नाम गोबिन्द सिंह है। प्रार्थी खाता नं0 146, 147 व 148, चक कोटी में अपना नाम सही दर्ज करवाना चाहता है जिस में मिति 26-4-2011 को इस अदालत द्वारा आदेश पारित किए जाने है। 276 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 अतः इस विषय में किसी का कोई उजर व एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन मिति 26-4-2011 को प्रातः 10.00 बजे इस अदालत में पैरवी हेतु पेश होवे अन्यथा प्रार्थी के पक्ष में आदेश पारित किए जावेंगे।
आज दिनांक 23-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
पी0 सी0 शर्मा,
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
टिक्कर, उप-तहसील टिक्कर, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।
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In the Court of Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh
Case No. Next date of hearing : 5-5-2011 Shri Parma Nand s/o Sh. Jawalu Ram, Village Chokiya, Pargana Chanju, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
Versus
General Public
Application for the correction of birth entry.
Notice to :
1. General Public 2. Pradhan, Gram Panchayat Chanju.
Whereas Shri Parma Nand s/o Sh. Jawalu Ram, Village Chokiya, Pargana Chanju, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh has filed an application alongwith an affidavit to the effect that his daughter named as Miss Punam was born on 23-3-1992 and her date of birth has been entered 30-12-1987 in Gram Panchayat record inadvertently. Whereas the date of birth of my elder daughter Miss Seema is 17-5-1988. He has stated that the correct date of birth of Miss Punam is 23-3-1992 and the same be ordered to be entered in the Gram Panchayat Chanju.
Hence, proclamation is hereby made to the respondents General Public/Gram Panchayat Chanju for inviting the objection if any, if some one has any objection regarding registration of birth, he may appear before the undersigned court on or before 5-5-2011 failing which ex parte proceeding will be initiated and the order of the registration of birth be announced.
Given under my hand and the seal of the court on dated 29-3-2011.
Seal. Sd/- Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 277In the Court of Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla,
Himachal Pradesh
Case No. Next date of hearing : 5-5-2011 Shri Ramesh Chand s/o Sh. Hira Singh, r/o village Dhegun, Pargana Jakholi, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
Versus
General Public
Application under section 13 (3) of Himachal Pradesh Registration of Birth and Death Act, 1969 and 10 (3) of H. P. Birth and Death Registration rules of 1973.
Notice to :
1. General Public 2. Pradhan, Gram Panchayat Jheena.
Whereas Shri Ramesh Chand s/o Sh. Hira Singh, r/o village Dhegun, Pargana Jakholi, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh has filed an application alongwith an affidavit to the effect that his son named as Mr. Anshu was born on 8-8-2004 and he could not get entered the date of birth entry with the local Registrar of Birth and Death, Gram Panchayat Jheena and the same be ordered to be entered.
Hence, proclamation is hereby made to the respondents general public/Gram Panchayat Jheena for inviting the objection if any, if some one has any objection regarding registration of birth, he may appear before the undersigned court on or before 5-5-2011 failing which ex parte proceeding will be initiated and the order of the registration of birth be announced.
Given under my hand and the seal of the court on dated 29-3-2011.
Seal. Sd/- Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
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Before Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh
Date of Institution 28-3-2011. Next date of hearing : 5-5-2011 Shri Sahi Ram s/o Sh. Padma Ram, Village Chanjhal, P. O. Deot, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
Versus
1. General Public
2. Pradhan, Gram Panchayat Deot.
278 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 Application under section 13 (3) of Birth and Death Registration Act, 1969.ORDER
Whereas Shri Sahi Ram s/o Sh. Padma Ram, Village Chanjhal, P. O. Deot, Tehsil Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh appeared before me and submitted an application along with affidavit to effect that his daughter Miss Pritika was born on 7-12-2006 and he could not get entered the date of birth entry with the local Registrar of Birth and Death, Gram Panchayat and the same be ordered to be entered Gram Panchayat record.
Hence, proclamation is hereby made to the respondents General Public/Gram Panchayat Deot inviting the objection if any regarding registration of birth, he may appear before the undersigned on or before 5-5-2011 failing which ex parte proceeding will be initiated and the order of the registration ofdate of birth be announced.
Given under my hand and the seal of the court on dated 29-3-2011.
Seal. Sd/- Sub Divisional Magistrate, Chaupal, District Shimla, Himachal Pradesh.
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ब अदालत श्री मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0) श्री संजय पुत्र श्री हरू, वासी ग्राम दसाना, डाकघर बगैण, तहसील ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)
. . प्रार्थी।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी। आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री संजय पुत्र श्री हरू, वासी ग्राम दसाना, डाकघर बगैण, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपने पुत्र अंकुश व पुत्री अनु का नाम परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत बगैण के अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है।
अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारा किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2011 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करे अन्यथा दीगर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 24-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)।
-------- ब अदालत श्री मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0) श्री हीरा सिंह पुत्र श्री भम्बू, निवासी गांव पनोली, डाकघर सतोग, तहसील ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)
. . प्रार्थी।राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 279 बनाम आम जनता
. . प्रतिवादी। आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री हीरा सिंह पुत्र श्री भम्बू, निवासी गांव पनोली, डाकघर सतोग, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपनी पुत्री कविता का नाम परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत सतोग के अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है।
अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2011 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करे अन्यथा दीगर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 24-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)।
--------
ब अदालत श्री मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0) श्री राजेश गुप्ता पुत्र स्व0 श्री सूरत राम, निवासी गांव कुफटा, डाकघर सरोग, तहसील ठियोग, जिला . . प्रार्थी। शिमला (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी। आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री राजेश गुप्ता पुत्र स्व0 श्री सूरत राम, निवासी गांव कुफटा, डाकघर सरोग, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपनी पत्नी श्रीमती आशा गुप्ता व अपली पुुत्री कृति का नाम परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत सरोग के अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है। अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2011 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करे अन्यथा दीगर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 24-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)।280 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 ब अदालत श्री मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0) श्री दौलत राम पुत्र श्री पनिया, निवासी गांव कलगांव, डाकघर कुठार, तहसील ठियोग, जिला शिमला . . प्रार्थी। (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी। आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री दौलत राम पुत्र श्री पनिया, निवासी गांव कलगांव, डाकघर कुठार, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपने पोते यशवर्धन का नाम बदल कर रविकान्त मणी रखने बारे परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत कु ठार के अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है।
अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2011 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करे अन्यथा दीगर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 24-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
मनोज चौहान, उपमण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला (हि0 प्र0)।
--------
In the Court of Shri Layak Ram Negi, Sub-Divisional Magistrate Shimla (R), District Shimla,
Himachal Pradesh
Shri Hitesh Kumar s/o Shri Puran Chand, r/o Village Nalag, P. O. Pahal, Gram Panchayat ..Applicant. Pahal, Tehsil Suni, Distt. Shimla (H. P.)
Versus
General Public
..Respondent.
Whereas Shri Hitesh Kumar s/o Shri Puran Chand, r/o Village Nalag, P. O. Pahal, Gram Panchayat Pahal, Tehsil Suni, Distt. Shimla has filed an application along with an affidavit in the court of undersigned under section 13 of the Births and Deaths Registration Act, 1969 to enter his Grandmother named Sanehru's date of death in the Parivar Register in Gram Panchayat Pahal, has stated no objection to register the name of the applicant vide resolution No. 41 dated 1-4-2011 .
| Sl. No. | Name of the family members | Relation | Date of death |
| 1. | Saneheru | w/o Late Shri Sewa Nand | 19-3-2001 |
Hence, this proclamation is issued to the general public if they have any objection/claim regarding registration of name and date of death of the applicant may file their claim/objection onराजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 281 or before one month of publication of this notice in Government Gazette in this court, failing which necessary orders will be passed.
Given today the 31st March, 2011 under my signature and seal of the court.
Seal.
LAYAK RAM NEGI,
Sub-Divisional Magistrate Shimla (R),
District Shimla, Himachal Pradesh.
————
ब अदालत श्री बी0 एस0 गर्ग, कार्यकारी दण्डाधिकारी, नाहन, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री किशन चन्द पुत्र श्री बिलायती राम, निवासी प्रताप भवन, नाहन, तहसील नाहन, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री किशन चन्द पुत्र श्री बिलायती राम, निवासी प्रताप भवन, नाहन, तहसील नाहन, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनके पुत्र लक्की की जन्म तिथि 1-8-1995 है, का नाम नगरपालिका नाहन के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 4-5-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे, बसूरत दीगर लक्की का नाम एवं जन्म तिथि को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 25-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। बी0 एस0 गर्ग,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, नाहन, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री सोहन सिंह सारटा, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री देवेन्द्र सिंह पुत्र श्री बलवीर सिंह, निवासी ग्राम कोटला बरोग, डाकघर दाड़ो देवरिया, तहसील पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
दरख्वास्त जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
देवेन्द्र सिंह पुत्र श्री बलवीर सिंह, निवासी ग्राम कोटला बरोग, डाकघर दाड़ो देवरिया, तहसील पच्छाद ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसके पिता बलबीर सिंह पुत्र श्री जीत सिंह की मृत्यु मिति 23-10-2007 को हुई, जिसका इन्द्राज ग्राम पंचायत दाड़ो देवरिया, तहसील पच्छाद में दर्ज नहीं हुआ है। 282 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 अतः इस इश्तहार द्वारा हर आम व खास को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उक्त नाम या तिथि पंचायत रिकार्ड में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 13-5-2011 को या इससे पूर्व अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश कर सकता है अन्यथा सचिव ग्राम पंचायत को सम्बन्धित उक्त नाम व तिथि दर्ज करने बारे आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। सोहन सिंह सारटा,
नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री सोहन सिंह सारटा, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री सोम दत्त पुत्र श्री सूरत राम, निवासी ग्राम रूणजा, डाकघर ठाकुर द्वारा, तहसील पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
दरख्वास्त जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
सोम दत्त पुत्र श्री सूरत राम, निवासी ग्राम रूणजा, डाकघर ठाकुर द्वारा, तहसील पच्छाद ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसके पुत्र स्व0 जय प्रकाश पुत्र श्री सोम दत्त की मृत्यु मिति 21-8-2010 को हुई, जिसका इन्द्राज ग्राम पंचायत जामन की सैर, तहसील पच्छाद में दर्ज नहीं हुआ है।
अतः इस इश्तहार द्वारा हर आम व खास को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उक्त नाम या तिथि पंचायत रिकार्ड में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 13-5-2011 को या इससे पूर्व अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश कर सकता है अन्यथा सचिव ग्राम पंचायत को सम्बन्धित उक्त नाम व तिथि दर्ज करने बारे आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। सोहन सिंह सारटा,
नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
पच्छाद, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री गुल मो0 पुत्र श्री फते मो0, निवासी वाता मण्डी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनामराजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 283 आम जनता उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री गुल मो0 पुत्र श्री फते मो0, निवासी वाता मण्डी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी पत्नी रोशनी जिसकी मृत्यु तिथि 10-8-1995 है, का नाम ग्राम पंचायत भाटा वाली के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर रोशनी पत्नी गुल मो0 की मृत्यु तिथि 10-8-1995 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री प्रमीन्द्र सिंह पुत्र श्री गुरदीत सिंह, निवासी अर्जुन नगर जगादरी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री प्रमीन्द्र सिंह पुत्र श्री गुरदीत सिंह, निवासी अर्जुन नगर जगादरी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी पुत्री सिमरन जीत कौर जिसकी जन्म तिथि 10-10-1999 है, का नाम ग्राम पंचायत पातलीयो के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर सीमरन जीत कौर की जन्म तिथि 10-10-1999 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
-------- ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री प्रीतम सिंह पुत्र श्री राम सरण, निवासी खोड़ो वाला, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।284 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री प्रीतम सिंह पुत्र श्री राम सरण, निवासी खोड़ो वाला, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी पुत्री रूपा देवी जिसकी जन्म तिथि 17-7-2005 है, का नाम ग्राम पंचायत गोरखू वाला के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर रूपा देवी की जन्म तिथि 17-7-2005 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री पवन पाल पुत्र श्री रामस्वरूप, निवासी गुरूवाला, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री पवन पाल पुत्र श्री रामस्वरूप, निवासी गुरूवाला, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनके पुत्र कृष पाल जिसकी जन्म तिथि 14-12-2004 है, का नाम ग्राम पंचायत भगानी के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर कृष पाल की जन्म तिथि 14-12-2004 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश। राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 285 ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री गुरवीन्द्र सिंह पुत्र श्री सरदार गुरदेव सिंह, निवासी बद्रीपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री गुरवीन्द्र सिंह पुत्र श्री सरदार गुरदेव सिंह, निवासी बद्रीपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी पुत्री कवल पृत कौर जिसकी जन्म तिथि 15-1-2000 है, का नाम नगर पालिका पांवटा साहिब के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर कवल पृत कौर की जन्म तिथि 15-1-2000 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री Tenzin Phuntsok पुत्र श्री Tsering Norgyal, निवासी Bhup Pur तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री Tenzin Phuntsok पुत्र श्री Tsering Norgyal, निवासी Bhup Pur तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी स्वयं की (Tenzin Phuntsok) जन्म तिथि 20-10-1989 है, का नाम ग्राम पंचायत भाटा वाली के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर Tenzin Phuntsok की जन्म तिथि 20-10-1989 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।286 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2011/21 चैत्र, 1933 ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री Tenzin Yangkyi पुत्र श्री Dawa Tsering, निवासी Bhup Pur तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री Tenzin Yangkyi पुत्र श्री Dawa Tsering, निवासी Bhup Pur तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी स्वयं की (Tenzin Yangkyi) जन्म तिथि 7-5-1984 है, का नाम ग्राम पंचायत Bhattawali के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर Tenzin Yangkyi की जन्म तिथि 7-5-1984 को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जावेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत श्री चेतन चौहान, कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश श्री होशियार सिंह पुत्र श्री बलवीर सिंह, निवासी कोलर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
उपरोक्त प्रार्थना-पत्र श्री होशियार सिंह पुत्र श्री बलवीर सिंह, निवासी कोलर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने अधीन धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत प्रस्तुत करके प्रार्थना की है कि उनकी माता नसीबो देवी जिसकी मृत्यु तिथि 19-10-2006 है, का नाम ग्राम पंचायत कोलर के रिकार्ड में दर्ज नहीं करवाया गया है। जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में यदि किसी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह स्वयं अथवा अपने प्रतिनिधि द्वारा मिति 25-4-2011 को सुबह दस बजे इस अदालत में उपस्थित आकर प्रस्तुत करे बसूरत दीगर नसीबो देवी पत्नी बलवीर ंिसंह की मृत्यु तिथि को दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए जायेंगे।
आज दिनांक 26-3-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। चेतन चौहान,
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब,
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश। नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित