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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 104, 20 August 2011

Published 20 August 2011

Gazette no.
104
Gazetteid
104/GAZETTE/2011-20/08/2011
Identifier
in.gazette.himachal.2011-08-20.104_gazette_2011-20_08_2011
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल राजपत्र, हिमाचल राजपत्र, हिमाचल राजपत्र, हिमाचल प्रदेशप्रदेशप्रदेशप्रदेश हिमाचल हिमाचल हिमाचल हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशितप्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशितप्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशितप्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला,शिमला,शिमला,शिमला, शनिशनिशनिशनिवारवारवारवार 20202020 अगस्त अगस्त अगस्त अगस्त,,,, 2011 2011 2011 2011////22229999 श्रावणश्रावणश्रावणश्रावण,,,, 1933 1933 1933 1933

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश सरकारसरकारसरकारसरकार

राजस्व विभागराजस्व विभागराजस्व विभागराजस्व विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 18 अगस्त, 2011

संख्या रैव डी (जी)संख्या रैव डी (जी)संख्या रैव डी (जी)संख्या रैव डी (जी) 9-4/20089-4/20089-4/20089-4/2008....----हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश ग्राम शामलात भूमि निधान और उपयोग अधिनियम, 1974 (1974 का 18) की धारा 13 और हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 (1973 का 19) की धारा 26 द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त अधिनियमों के प्रायोजनों को कार्यान्वित करने के लिए निम्नलिखित नियमों को बनाने का प्रस्ताव करती है, और एत्‌दद्वारा इन्हें, हिमाचल प्रदेश ग्राम शामलात भूमि निधान और उपयोग अधिनियम, 1974 की धारा 13 की उप धारा (3) और हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 की धारा 26 की उप धारा (2) के अधीन यथा अपेक्षित के अनुसार जन साधारण की जानकारी हेतू राजपत्र हिमाचल प्रदेश में एत्‌दद्वारा प्रकाशित किया जाता है।

104-राजपत्र/2011-20-8-2011 (2373) 2374 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 इन नियमों से सम्भाव्य प्रभावित कोई व्यक्ति, यदि इन नियमों की बाबत कोई आक्षेप (पों) या सुझाव देना चाहे तो वह उसे (उन्हें) इन प्रारूप नियमों के राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में प्रकाशन की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, सचिव (राजस्व) हिमाचल प्रदेश सरकार शिमला-2 को भेज सकेगा :

उपयुक्त विनिदिर्ष्ट अवधि के भीतर प्राप्त आक्षेप (पों) या सुझाव (वों)े, यदि कोई हो (हों), पर इन नियमों को अन्तिम रूप देने से पूर्व राज्य सरकार द्वारा विचार किया जाएगा, अर्थात :-

प्रारूप नियमप्रारूप नियमप्रारूप नियमप्रारूप नियम

1111.... संक्षिप्त नाम और विस्तारसंक्षिप्त नाम और विस्तारसंक्षिप्त नाम और विस्तारसंक्षिप्त नाम और विस्तार....----(I) इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश पट्‌टा नियम, 2011 है।

(2) इन नियमों का विस्तार सम्पूर्ण हिमाचल प्रदेश राज्य पर होगा।

2222.... परिभाषाएं-परिभाषाएं-परिभाषाएं-परिभाषाएं-इन नियमों में जब तक कि कोई बात विषय या संदर्भ से विरूद्ध न हो- (क) ''सक्षम प्राधिकारी'' से नियम 7 के अधीन भूमि को पट्‌टे पर प्रदान करने वाला प्राधिकारी अभिप्रेत है;

(ख) ''सहजदृश्य स्थान'' से यथास्थिति, उपायुक्त कार्यालय, उपमण्डलाधिकारी (ना0) कार्यालय, तहसील कार्यालय, नगर पालिका कार्यालय, पंचांयत घर, महिला मण्डल और लोक समागम का कोई अन्य स्थान अभिप्रेत है;

(ग) ''सीमांकित संरक्षित वन'' से भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 30 के अधीन इस प्रकार घोषित वन अभिप्रेत है;

(घ) ''निदेशक ग्राम और नगर योजना'' से हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना अधिनियम, 1977 के अधीन नियुक्त निदेशक ग्राम और नगर योजना अभिप्रेत है;

(ङ) ''प्ररूप'' से इन नियमों से संलग्न प्ररूप, अभिप्रेत है; (च) ''उच्चतम बाजारी मूल्य'' से सम्बन्धित राजस्व सम्पदा में समरूप सव्यवहार के रजिस्ट्रीकरण हेतू उपयोग किया गया मूल्य अभिप्रेत है;

(छ) ''योजना क्षेत्र'' से हिमाचल प्रदेश नगर और ग्राम योजना अधिनियम, 1977 के अधीन कोई क्षेत्र जो योजना क्षेत्र घोषित किया गया है, अभिप्रेत है;

(ज) ''आरक्षित वन'' से भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के अधीन इस रूप में घोषित वन अभिप्रेत है; और

(झ) ''राज्य सरकार'' से हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है।

3333.... पट्‌टे पर भूमि प्रदान करनापट्‌टे पर भूमि प्रदान करनापट्‌टे पर भूमि प्रदान करनापट्‌टे पर भूमि प्रदान करना....----इन नियमों के अधीन यथा उपबंधित परियोजना और व्यक्तियों को, सक्षम अधिकारी की मंजूरी से, भूमि पट्‌टे पर प्रदान की जा सकेगीः-

(i) सरकार द्वारा आरक्षित और सीमांकित संरक्षित वनों और इस निमित राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर यथा अधिसूचित क्षेत्रों से बाहर राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन सरकारी भूमि पट्‌टे पर दी जा सकेगीः

परन्तु यदि राज्य सरकार किसी सीमांकित संरक्षित वन में भूमि पट्‌टे पर देना चाहती हो तो भारतीय वन अधिनियम की धारा 32 के खण्ड (छ) के अधीन बनाए गए नियमों और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अधीन केन्द्रीय सरकार की अनुज्ञा के अधीन रहते हुए भूमि पट्‌टे पर देने की अनुमति दे सकेगी, और

(ii) हिमाचल प्रदेश ग्राम शामलात भूमि निधान और उपयोग अधिनियम, 1974 की धारा 3 के अधीन और हिमाचल प्रदेश भू जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 की धारा 11 के अधीन राज्य2375 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 सरकार में निहित भूमि में से, राज्य के विकास के हित में, यदि राज्य सरकार का समाधान हो गया हो कि ऐसा करने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण हैं, किसी भी व्यक्ति को भूमि पट्‌टे पर दी जा सकेगीः

परन्तु हिमाचल प्रदेश ग्राम शामलात निधान और उपयोग अधिनियम, 1974 के अधीन राज्य सरकार में निहित भूमि, उक्त अधिनियम की धारा 8 के उपबन्धों के उल्लंघन में प्‌ट्‌टे पर नहीं दी जायेगी।

(परन्तु नगर में कोई भी भूमि पट्‌टे पर नहीं दी जाएगी)

2. (i) पट्‌टे पर भूमि, भूमि के उपयोग को विनियमित करने वाली किसी भी विधि के उल्लंघन में प्रदान नहीं की जाएगी।

(ii) हिमाचल प्रदेश अधिप्रति और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के उल्लंघन में किसी ऐसे व्यक्ति को जोकि उक्त अधिनियम की धारा 2 की उप-धारा (2) के अर्थ के अन्तर्गत कृषक नहीं है, भूमि पट्‌टे पर नहीं दी जाएगी।

(iii) इन नियमों के अधीन पट्‌टे पर कोई सरकारी भूमि नहीं की जाएगी, जहां उस परियोजन हेतू जिसके लिए पट्‌टे के लिए आवेदन किया गया है, उपयुक्त प्राइवेट भूमि सुगमता से उपलब्ध है। 4444.... प्रायोजन जिनके लिए भूमि पट्‌टे पर प्रदान की जा सकेगी प्रायोजन जिनके लिए भूमि पट्‌टे पर प्रदान की जा सकेगी....-निम्नलिखित एक या उससे अधिक प्रायोजन जिनके लिए भूमि पट्‌टे पर प्रदान की जा सकेगी प्रायोजन जिनके लिए भूमि पट्‌टे पर प्रदान की जा सकेगी परियोजनों के लिए भूमि पट्‌टे पर दी जा सकेगीः-

(i) शैक्षिणक संस्थानों के स्थापन/निस्तारण के लिए;

(ii) पेट्रोल पंप और/या गैस गोदाम स्थापित करने के लिए;

(iii) साक्षरता, वैज्ञानिक, पूर्त, स्वास्थ्य, कल्याण, संस्कृति के क्रिया क्लापों और शैक्षणिक प्रायोजनों के लिए;

(iv) खेल गतिविधियों के संवर्धन हेतू;

(v) चालीस वर्ष तक की छूट अवधि के साथ अवस्थिति विशिष्ट अवसंरचना परियोजनाओं जैसे कि जल-विद्युत परियोजनाएं, आकाशी रज्जुमार्ग, बस अड्‌डे, पार्किंग लाट, मार्गस्थ सुख-सुविधाएं, चूना पत्थर/अन्य खुदान;

(vi) चालीस वर्ष से अधिक अवधि की छूट के साथ अवस्थिति विशिष्ट अवसंरचना परियोजनाओं (अधिकतम 99 वर्ष के अध्यधीन) जैसे की सीमटें प्लांटों की अवसंरचना मांग; और

(vii) राज्य के विकास के हित में कोई अन्य लोक प्रायोजन।

5555.... प्रदान करने की अधिकतम सीमाप्रदान करने की अधिकतम सीमाप्रदान करने की अधिकतम सीमाप्रदान करने की अधिकतम सीमा....-पट्‌ट्‌े की मंजूरी की अधिकतम सीमा, रूटंग ऑफ विजनेस के अधीन विषय की बाबत सम्बद्ध विभाग द्वारा यथा अधिप्रमाणित और हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 के उपबन्धों के अध्यधीन, होगी।

पट्‌टे पर भूमि प्रदान करने के लिए पात्रता....-किसी परिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई व्यक्ति 6666.... पट्‌टे पर भूमि प्रदान करने के लिए पात्रता पट्‌टे पर भूमि प्रदान करने के लिए पात्रता पट्‌टे पर भूमि प्रदान करने के लिए पात्रता या विधिक अस्तित्व निम्नलिखित परन्तुकों के साथ पट्‌टे पर भूमि प्रदान किए जाने के लिए पात्र होंगेः- (i) शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने के प्रायोजन के लिए पट्‌टे की पात्रता, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटियों या भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास या अलाभ वाली संस्थाओं को विनियमित करने वाली विधियों तक सीमित रहेगी। 2376 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (ii) पैट्रोल पंप और गैस के गोदाम को स्थापित करने के प्रायोजन के लिए भूमि पट्‌टे की प्रात्रता, वास्तविक (स्थायी) हिमाचली (वरीयता भूतपूर्व सैनिक, युद्ध विधवाओं, बी0पी0एल0 परिवारों, एकल परितयक्त महिला और अपंग व्यक्तियों को दी जाएगी) और

(ख) कम्पनियां जो, पैट्रोल, डीजल/मिट्‌टी तेल/एल0पी0जी0 का विक्रय करने/वितरण करने के कारोबार में लगी हैं; तक सीमित रहेंगी।

(iii) साक्षरता, वैज्ञानिक, पूर्त, स्वास्थ्य, कल्याण, संस्कति के किन्ही क्रियाकलापों और शैक्षणिक प्रायोजनों के लिए पट्‌टे की पात्रता, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसायटियों या भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास या अलाभ वाली संस्थाओं को नियमित करने वाली विधियों तक सीमित रहेगी, और

(iv) खेल गतिविधियों के संम्बर्धन के प्रायोजन के लिए पट्‌टे की पात्रता, रजिस्ट्रीकृत खेल निकायों तक सीमित रहेगी।

7777.... पट्‌टे की मंजूरपट्‌टे की मंजूरपट्‌टे की मंजूरपट्‌टे की मंजूरीीीी....-इन नियमों के अधीन पट्‌टे की मंजूरी राज्य सरकार द्वारा, ऐसी अवधि के लिए दी जाएगी जैसी वह उचित समझे;

परन्तु राज्य सरकार किसी भी दशा में 99 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए भूमि का पट्‌टा प्रदान नहीं करेगी।

8888.... पट्‌टा राशिपट्‌टा राशिपट्‌टा राशिपट्‌टा राशि....-नये पट्‌टे के लिए या विद्यामान पट्‌टे के नवीनीकरण के लिए पट्‌टा राशि पट्‌टेदार से प्रतिवर्ष निम्नलिखित रीति में प्रभारित की जाएगी, अर्थात :-

(i) चालीस वर्ष की छूट की अवधि के साथ उपस्थिति विशिष्ट अवसंरचना परियोजनाएं जैसा कि जलविद्युत परियोजनाएं, आकाशी रज्जुमार्गों बस अड्‌डे, पार्किंग लाट, मार्ग स्थल सुख सुविधा, चूना पत्थर/अन्य खुदान इत्यादि जिसके लिए पट्‌टे पर दी गई भूमि के न्यूनतम बाजार मूल्य का 3.5 प्रतिशत (साढे तीन प्रतिशत) की दर से या पांच वर्ष का औसत बाजार मूल्य का दोगुना जो भी कम हो, प्रभारित किया जाएगा के सिवाय, पट्‌टे पर दी गई भूमि के नवीनतम अधिकतम बाजार मूल्य का 5 प्रतिशत या पांच वर्ष के औसत बाजार मूल्य का दोगुना जो भी कम हो । (ii) पट्‌टा राशि प्रत्येक पांच वर्ष में विद्यमान पट्‌टा राशि का 10 प्रतिशत या भूमि के चालू मूल्य पर प्रकतिपत पट्‌टा मूल्य, जो भी कम हो से बढ़ाई जाएगी;

परन्तु जहां भूमि सरकार के किसी विशिष्ट विभाग के नाम हो और किसी प्रायोजन के लिए पट्‌टे पर अंतरित की जानी उपेक्षित हो तो वह विभाग, जैसे वह उचित समझे, पट्‌टा राशि कम कर सकेगा। 9999.... उप-पट्‌टाउप-पट्‌टाउप-पट्‌टाउप-पट्‌टा....- पट्‌टाधारकों को केवल पट्‌टे की अवधि के भीतर निम्नलिखित विनिर्दिष्ट मामलों में उप-पट्‌टे के लिए अनुज्ञात किया जाएगाः

(क) जहां किसी लोक निजी (प्राइवेट) भागेदारी संविदा में उप-पट्‌टे का उपबन्ध हो वहां अवस्थिति विशिष्ट परियोजना पर उप-पट्‌टा अनुज्ञात किया जाएगा; और

(ख) जब कभी पट्‌टे के मुख्य परियोजन के लिए उप-पट्‌टे को आवश्यक व समुचित समझा जाए परन्तु ऐसे मामलों में, जहां भूमि, कटौती की दरों पर प्रदान की गई है, कोई उप-पट्‌टा अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।

10101010.... सरकारी भूमि की सूचसरकारी भूमि की सूचसरकारी भूमि की सूचसरकारी भूमि की सूची बनाए रखनाी बनाए रखनाी बनाए रखनाी बनाए रखना....-(1) राज्य सरकार द्वारा अधिकथित, रीति में वर्गीकृत सरकारी भूमि की सूचियां, प्रत्येक जिले में कलैक्टर द्वारा तैयार की जाएगी।2377 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (2) राज्य सरकार समय-समय पर यह अवधारित करेगी कि उप-नियम (1) के अधीन विनिदिर्ष्ट कौन सी भूमि पट्‌टे पर देने के लिए उपलब्ध है।

(3) राज्य सरकार द्वारा अधिकथित रूप विघान, पट्‌टे पर दी गई भूमि का एक आनलाइन पट्‌टा रजिस्टर जिला और तहसीलवार तैयार किया जाएगा।

11111111.... पट्‌टे के लिए आवेदनपट्‌टे के लिए आवेदनपट्‌टे के लिए आवेदनपट्‌टे के लिए आवेदन....-(1) आवेदन, प्ररूप ''क'' में अन्तिम नवीनतम जमाबन्दी, ततीमा, पांच वर्ष का औसत, विक्रय मूल्य, प्रस्तावित भूमि का अंतिम बाजारी मूल्य, सम्बद्ध विभाग से प्ररूप ''ग'' में अनिवार्यता प्रमाण पत्र, उप-मण्डलीय कलक्टर से प्ररूप (घ) में स्थानीय निवासियों/शेयरधारकों से अन्नापति प्रमाण पत्र सहित जिले के कलक्टर को (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ कलक्टर कहा गया है) दिया जाएगा।

(2) (क) विभाग, जिसके कार्यक्षेत्र के अधीन, प्रस्तावित क्रिया कलाप, जिसके लिए भूमि को पट्‌टे पर देने की मांग की गई है, अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए, सम्बन्धित विभाग होगा।

(ख) (1) उन संबंधित विभाग, विभागीय मानकों के आधार पर, जिनसे पट्‌टाधरी की पात्रता, प्रस्तावित क्रियाकलाप की आवश्यकता और उसके लिए अपेक्षित भूमि के विस्तार का निर्धारण होता है और (ii) लोक निर्माण विभाग/सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य/स्थानीय निकायों/राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण/ग्राम एवम्‌ नगर योजना/वन विभाग/प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/सिंचाई एवम्‌ जन स्वास्थ्य/हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड आदि सहित भू-उपयोग के विनियमन और सेवा के उपबन्धों के साथ सम्बद्ध समस्त सुसंगत प्राधिकरणों/विभागों से अन्नापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर भूमि की अवस्थिति और वर्गीकरण पर निर्भर करते हुए, सम्बन्धित विभाग, अनिवार्यता प्रमाणपत्र जारी करेगा।

3 (क) आवेदक, उप-मण्डलीय कलक्टर को अन्नापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करेगा, जो, जब आवश्यक हो, आवेदक से भूमि की निशानदेही करने, सर्वेक्षण करने और नक्शा बनाने की लागत जमा करने की अपेक्षा करेगा, और भूमि की निशानदेही, सर्वेक्षण करवायेगा और नक्शा बनवायेगा। उप-मण्डलीय कलक्टर, यह कथन करते हुए कि भूमि को दावाकृत प्रायोजन के लिए पट्‌टे पर प्रदान करने के लिए आवेदन किया गया है, एक अभिज्ञापन प्रकाशित करेगा और उक्त प्रयोजन के लिए समुचित निजी (प्राइवेट) भूमि तत्काल उपलब्ध करवाने के लिए किसी प्रस्ताव सहित समस्त दावे और आक्षेप एक मास के भीतर प्रस्तुत किए जाएंगे। (ख) प्रत्येक उद्‌घोषणा की एक प्रति तहसीलदार को टिप्पणी हेतू और एक महीने में रिपोर्ट करने के लिए भेजी जाएगी। तहसीलदार अधिकार धारकों के कथन भी अभिलिखित करेगा और उनके आक्षेप, यदि कोई हो, लिखेगा। यह उनके आक्षेपों को ध्यान में रखते हुए उप-मण्डलाधिकारी (नागरिक) को रिपोर्ट करेगा। (ग) उद्‌घोषणा को व्यापक परिचालन वाले दो स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाएगा और पट्‌टे के लिए आवेदित की गई भूमि के समीप सहन दृश्य स्थान पर चिपकाया जाएगा और इसके इस प्रकार प्रकाशित किए जाने के पश्चात, उक्त उद्‌घोषणा की प्रत्येक प्रति उप-मण्डलीय कलक्टर के कार्यालय और तहसील के कार्यालय में, जहां पर भूमि स्थित है पर भी चिपकाई जाएगी।

(घ) कलक्टर के कार्यालय में उद्‌घोषणा के चिपकाए जाने के एक मास के भीतर यदि कोई दावे या आक्षेप नहीं किए जाते हैं अथवा किसी दावे या आक्षेप के किए जाने की दशा में, उप-मण्डलीय कलक्टर, तहसीलदार से रिपोर्ट प्राप्त करेगा और यदि उसका समाधान हो जाता है कि स्थानीय निवासियों/अधिकार धारकों से कोई भी वैद्य आक्षेप नहीं आए हैं तो वह प्रस्तावित भूमि के लिए अन्नापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर देगा।

(4) अनुलग्नकों के साथ आवेदन की प्राप्ति पर, कलक्टर नियमों के समस्त उपबन्धों के सम्बन्ध में आवेदन का परीक्षण करेगा और या तो मामले को अस्वीकृत करेगा या निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए मामले की राज्य सरकार को संस्तुत करेगाः- 2378 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (5) हिमाचल प्रदेश ग्राम शामलात भूमि निधान और उपयोग अधिनियम, 1974 की घारा 3 के अधीन राज्य सरकार में निहित सरकारी भूमि से भूमि को पट्‌टा पर देने की दशा में यह ध्यान रखा जाएगा कि आरक्षित पूल में भूमि, राज्य सरकार में निहित भूमि के कम से कम 50 प्रतिशत की सीमा तक आवश्य रहनी चाहिए। भूमिहीन और पात्र व्यक्तियों को आवंटित करने के लिए भी आवंटनीय पूल में पर्याप्त भूमि रहनी चाहिए। कलक्टर द्वारा अपनी रिपोर्ट में उन तथ्यों का उल्लेख किया जाएगा।

(ख) कलक्टर पट्‌टे की अनुशंसा करने से पूर्व यह भी सुनिश्चित करेगा कि सम्पदा के निवासियों हेतू पशु चराने और अन्य आम परियोजनाें के लिए उस सम्पदा में समुचित भूमि विद्यमान है।

12121212.... कलक्टर की रिपोर्ट पर आदेशकलक्टर की रिपोर्ट पर आदेशकलक्टर की रिपोर्ट पर आदेशकलक्टर की रिपोर्ट पर आदेश....-सक्षम प्राधिकारी द्वारा कलक्टर की रिपोर्ट प्राप्त करने पर, वह इन नियमों के उपबन्धों के अध्यधीन पट्‌टे की अस्वीकृति या मंजूरी के सम्बन्ध में ऐसे आदेश पारित करेगा और पट्‌टे की मंजूरी की दशा में पट्‌टे के क्षेत्र, अवधि, निर्धारण और अन्य शर्तों के सम्बन्ध में ऐसे आदेश पारित करेगा जैसा सक्षम प्राधिकारी उचित समझेगा।

पट्‌टा विलेख का निष्पादन और कब्जा देना....-जब सक्षम अधिकारी द्वारा कोई पट्‌टा स्वीकृत कर 13131313.... पट्‌टा विलेख का निष्पादन और कब्जा देना पट्‌टा विलेख का निष्पादन और कब्जा देना पट्‌टा विलेख का निष्पादन और कब्जा देना दिया है तो कलक्टर, सक्षम प्राधिकारी द्वारा पट्‌टा स्वीकृत किए जाने से 6 मास की अवधि के भीतर प्रारूप ''ख'' में पट्‌टे को निष्पादित करेगा या करवाएगा। आवेदक को तब तक कब्जा नहीं दिया जाएगा जब तक कि पट्‌टा निष्पादित नहीं कर दिया जाए।

14141414.... दरें और उपकरदरें और उपकरदरें और उपकरदरें और उपकर....-पट्‌टेदार, प्रत्येक मामले में, भूमि पर प्रभार्य समस्त दरों और उपकरों को संहत करने के लिए सरकार से प्रसंविदा करेगा।

स्पष्टीकरणस्पष्टीकरणस्पष्टीकरणस्पष्टीकरण....-इस नियम में ''दरों'' और ''उपकरों'' पदो के वहीं अर्थ हाेंगे जो हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम, 1964 में उनके हैं।

15151515.... कब्जा लेने में असफलताकब्जा लेने में असफलताकब्जा लेने में असफलताकब्जा लेने में असफलता....-आवेदक को पट्‌टे का निष्पादन संसूचित किए जाने के छह मास के भीतर यदि व भूमि का कब्जा लेने में असफल रहता है या यदि किसी भी समय वह पट्‌टे की किसी भी शर्तों की अनुपालना करने में असफल रहता है तो कलक्टर पट्‌टे को निरस्त कर सकेगा और तथ्यों को सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट करेगा।

16161616.... सरकार के कतिपय अधिकारों का आरक्षण और सरकार के कतिपय अधिकारों का आरक्षण और सरकार के कतिपय अधिकारों का आरक्षण और सरकार के कतिपय अधिकारों का आरक्षण और विवादों का निपटारा विवादों का निपटारा....-प्रत्येक पट्‌टे में समस्त विवादों का निपटारा विवादों का निपटारा नदियां और नालों पर सरकार का अधिकार और विद्यामान आम रास्तों के प्रयोग और पारगामी प्रदान करने का जनता का अधिकार आरक्षित रहेगा। प्रत्येक पट्‌टे में समस्त, खानों, खनिजों, कोयला, स्वर्ण-धुलाई भू-तले और खदानें पट्‌टे पर भूमि में या इसके नीचे उक्त भूमि पर प्रवेश के अधिकार के साथ और समस्त ऐसे कृत्य और कारबार करने जो किन्हीं ऐसी खानों, खनिजों, कोयलों, स्वर्ण-धुलाई और खदानों की खोज, कार्यकरण, प्राप्त करने और वहन करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन हो, के अधिकार भी आरक्षित रहेंगे। 2. सरकार अपनी ओर से, प्रत्येक मामले में पट्‌टेदार के साथ उक्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए सभी घटित नुकसानों के लिए उसे यथोचित मुआवजा देने की प्रसंविदा करेगी ।

3. और पट्‌टेदार अपनी ओर से सरकार के साथ प्रसंविदा करेगा कि सम्पति और आरक्षित अधिकार या किसी आनुषंगिक या किसी भी ढ़ग से उससे सम्बन्धित मामले या यथा पूर्वोक्त किसी प्रतिकर के बारे पट्‌टेदार और सरकार के बीच उत्पन्न हुए विवाद की दशा में, प्रत्येक मामले पर, कलक्टर का विनिश्चय अंतिम समझा जाएगा और दोनों पक्षकारों पर बाध्य होगा ।

पट्‌टे पर दी गई भूमि का अनुपयोग या पट्‌टे की शर्र्तोें का भंग....----(1) पट्‌टेदार उसे पट्‌टे पर दी 17171717.... पट्‌टे पर दी गई भूमि का अनुपयोग या पट्‌टे की शर्र्तोें का भंग पट्‌टे पर दी गई भूमि का अनुपयोग या पट्‌टे की शर्र्तोें का भंग पट्‌टे पर दी गई भूमि का अनुपयोग या पट्‌टे की शर्र्तोें का भंग गई भूमि का उपयोग उसी प्रयोजन के लिए करेगा जिसके लिये उसे यह पट्‌टे पर दी गई है। यदि पट्‌टे पर दी गई भूमि उसके द्वारा किसी समय पर उस प्रयोजन जिसके लिये उसे यह पट्‌टे पर दी गई हो, प्रयोग नहीं की जाती तो पट्‌टा सारे विल्लगमों से मुक्त सक्षम प्राधिकारी द्वारा समाप्त कर दिया जाएगा और सरकार2379 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 पट्‌टान्तरित परिसर में पुनः प्रवेश करेगी, और पट्‌टा राशि को यदि सरकार को संदत कर दिया हो तो समंपहृत हो जाएगी और कोई भी व्यक्ति उस पर किए गये किसी सुधार और किसी भवन या उस पर निर्मित संरचना के लिए प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।

(2) यदि कोई पट्‌टेदार किसी समय पट्‌टा विलेख की किसी शर्त को भंग करता है तो उसका पट्‌टा सक्षम प्राधिकारी द्वारा समाप्त कर दिया जाएगा।

18181818.... पट्‌टे के अवसान पर प्रक्रियापट्‌टे के अवसान पर प्रक्रियापट्‌टे के अवसान पर प्रक्रियापट्‌टे के अवसान पर प्रक्रिया....-(1) पट्‌टे के अवसान पर, सरकार पूरी भूमि या इसके किसी भाग को पुनः ग्रहण कर सकेगी ।

(2) ऐसे पुनःग्रहण की असफलता पर, पट्‌टेदार भू-राजस्व की रकम, किराए या पट्‌टा राशि और उसके द्वारा संदत किए जाने वाले अन्य प्रभारों से सम्बन्धित ऐसे निबन्धन और ऐसी शर्तों पर पट्‌टे के नवीकरण का हकदार होगा जैसा सक्षम प्राधिकारी अवधारित करे।

(3) सक्षम प्राधिकारी, इन निबन्धनों और शर्तों को नियत करने में, तत्‌समय प्रवृत सरकारी भूमि के पट्‌टे के लिए नियमों द्वारा, मार्गदर्शित होगा जहां तक ये नियम लागू किए जा सकें।

19191919.... पुनर्विलोकनपुनर्विलोकनपुनर्विलोकनपुनर्विलोकन....-(i) कलक्टर, मण्डलायुक्त, वित्तायुक्त और राज्य सरकार द्वारा पारित आदेश राज्य सरकार के पुनर्विलोकन के अधीन हाेंगे जो इस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगी जैसे वह उचित समझे :

परन्तु यह कि ऐसे आदेश तब तक रूपान्तरित या प्रत्यावर्तित नहीं किए जाएंगे जब तक कि उसके द्वारा प्रभावित पक्षकार(रों) को व्यक्तिगत या उसके/उनके विधिक प्रतिनिधियों के माध्यम से उसके/उनके दावे के समर्थन में युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर प्रदान न कर दिया गया हो ।

(2) पुनर्विलोकन के लिए आवेदन तब तक ग्रहण नहीं किया जायेगा जब तक कि उसे ऐसे आदेश के पारित होने के नब्बे दिन के भीतर प्रस्तुत न किया गया हो, या आवेदक जब तक मंजूरी प्राधिकारी का समाधान नहीं करता कि उसके पास आवेदन अवधि के भीतर प्रस्तुत न करने के पर्याप्त कारण थे । 20202020.... पुनर्निरीक्षणपुनर्निरीक्षणपुनर्निरीक्षणपुनर्निरीक्षण....-राज्य सरकार, यथास्थिति, कलक्टर, मण्डलायुक्त या वित्तायुक्त द्वारा निपटाये गये किसी मामले के अभिलेख को किसी भी समय मंगवा सकेगी, और ऐसे आदेश, जैसे वह उचित समझे, पारित कर सकेगी :

परन्तु यह कि ऐसा आदेश तब तक रूपान्तरित और प्रत्यावर्तित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसके द्वारा प्रभावित पक्षकार (रों) को व्यक्तिगत या उसके/उनके विधिक प्रतिनिधियों के माध्यम से उसके/उनके दावे के समर्थन में, उपस्थित होने और सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान नहीं कर दिया गया हो। निरसन और व्यावृत्तियां....-(i) सरकार की अधिसूचना संख्या रैव डी (जी) 6-33/86-II, तारीख 21212121.... निरसन और व्यावृत्तियां निरसन और व्यावृत्तियां निरसन और व्यावृत्तियां 20 अक्तूबर, 1993 द्वारा अधिसूचित और राजपत्र, हिमाचल प्रदेश (असाधारण) में तारीख 5 नवम्बर, 1993 को प्रकाशित हिमाचल प्रदेश पट्‌टा नियम 1993 का एतद्‌द्वारा निरसन किया जाता है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित नियमों के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इन नियमों के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी ।2380 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

परिशिष्टपरिशिष्टपरिशिष्टपरिशिष्ट

प्ररूप-कप्ररूप-कप्ररूप-कप्ररूप-क

(नियम 11 देखें)

हिमाचल प्रदेश्हिमाचल प्रदेश्हिमाचल प्रदेश्हिमाचल प्रदेश मा मा मा में ें ें ें भभभभूूिूिूिमि के पटम के पटम के पटम के पट्‌्‌्‌्‌टे के लिए आवटे के लिए आवटे के लिए आवटे के लिए आवेदेदेदेदनननन

1. आवेदक का नाम........................................................................................ पुत्र श्री......................................................................................................... निवासी....................................................................................................... तहसील...................................................................................................... जिला............................................................राज्य........हिमाचल प्रदेश । ................................................................................................................................................... 2. उद्‌देश्य जिसके लिए भूमि का पट्‌टा अपेक्षित है .....................................................

3. पट्‌टे के लिए प्रस्तावित भूमि की विशिष्टियां : (i) जिला (ii) तहसील (iii) सम्पदा क े नाम के साथ सम्पदा (हदबस्त) की संख्या, ................................. (iv) क्षेत्रों और वर्गीकरण सहित खसरा नम्बर.........................................................

मैं सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान और घोषणा करता हूं :-

(i) कि जो भी ऊपर कथित है, मेरे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार सत्य है और उसमें से कोई भी बात छिपाई या दबाई नहीं गई है ।

मैं एतद्‌द्वारा वचन देता हूंूं और जिम्मा लेता हूंूं कि यदि मेरे पक्ष मेेंं पट्‌टे पर भूमि प्रदान की जाती है तो मैं प्रदान की गई भूमि के निबन्धनों और शर्तों का पालना करूंगा ।

तारीख................................

आवेदक के हस्ताक्षर ।

------

प्ररूप-खप्ररूप-खप्ररूप-खप्ररूप-ख

(नियम 13 देखें)

प्रथम पक्षकार के रूप में, हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल जिसे (इसमें इसके पश्चात्‌ सरकार कहा गया है) द्वारा किया गया पट्‌टा............................को और पुत्र............................... निवासी ग्राम ...............................तहसील... .................................जिला................................हिमाचल प्रदेश जिसे (इसमें इसके पश्चात्‌ पट्‌ट्‌ेदार कहा गया है) द्वितीय पक्षकार के रूप में :

पत्र संख्या.....................................तारीख.................में अन्तर्विष्ट से.....................................तक के आदेशों के अनुसरण में । पट्‌टेदार ने सरकार को......................................रूपये की रकम किराए की प्रथम किस्त के रूप में, संदत्त कर दी है जो इसमें इसके पश्चात्‌ आरक्षित है, और

पट्‌टे के निबन्धन :पट्‌टे के निबन्धन :पट्‌टे के निबन्धन :पट्‌टे के निबन्धन :

1. सरकार, एतद्‌द्वारा पट्‌टेदार को इसकी अनुसूची में अधिक विशिष्टतः वर्णित और अंकित की गई और इसमें इसके साथ संलग्न प्लान में .........................................रंग में दर्शाई गई भूमि का, न अधिक न2381 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 कम...................................................बीघा प्लाट, अपवादों और आरक्षणों के अध्यधीन रहते हुए इसमें आगे बताये गये निबन्धनों और शर्ताें पर पट्‌टांतरण करती है ।

2. (क) भूमि केवल.............................................प्रयोजन के लिए पट्‌टे पर दी गई है।

(ख) पट्‌टेदार, इसमें इसके पश्चात्‌ उल्लिखित संदायों और शर्तों के अध्यधीन वृक्षों और झाड़ियों के अतिरिक्त, भूमि की सतह पर उगने वाली समस्त प्राकृतिक उपज को अपने लिए ले सकता है ।

(ग) पट्‌टेदार, इसमें यथा-उपबन्धित भूमि पर खेती करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक ऐसे जलमार्गों, अस्थाई भवनों या समरूप सुधारों का सन्निर्माण, इसमें इसके पश्चात्‌ उपबन्धित शर्तों के अध्यधीन और इस शर्त पर कर सकेगा कि इसमें इसके पश्चात्‌ विनिर्दिष्ट रूप से उपबन्घित के सिवाए किसी प्रकार के सुधारों के लिए सरकार के विरूद्ध कोई दावा नहीं किया जाएगा ।

3. पट्‌टे की अवधि...............वर्षों के लिये होगी और .................के दिन से........प्रारम्भ हुई समझी जाएगी ।

4. (क) पट्‌टेदार.............................रुपये, प्रत्येक को दो अर्ध वार्षिक किस्तों में या............................... रूपये की एक वाषिर्क किस्त में.............................रुपये वार्षिक किराया संदत करेगा ।

(ख) रकम सबसे नजदीक कोषागार में संदत्त की जाएगी।

(ग) पट्‌टेदार आगे सभी अन्य दरें कर, उपकर, कर प्रभार और अन्य देय जो भू स्वामी या उसके अधिभागी द्वारा संदेय हो या संदेय होने वाले हों संदत करेगा ।

सरकार की ओर से अपवाद और आरक्षण :सरकार की ओर से अपवाद और आरक्षण :सरकार की ओर से अपवाद और आरक्षण :सरकार की ओर से अपवाद और आरक्षण :

5. सरकार, पट्‌टांतरण नहीं करती परन्तु भूमि की सतह पर, ऊपर या नीचे विद्यमान किसी भी प्रकार की समस्त खानों, खनिजों और खदानों को, उसी पूर्ण व्यापक रीति में जैसे कि यह पट्‌टा नहीं किया गया था, स्वतन्त्र रहते हुये खोजने, काम करने और उसे हटाने का अपवाद और आरक्षण अपने पास रखती है। 6. सरकार, पट्‌टांतरण नहीं करती, परन्तु भूमि पर अब विद्यमान या संलग्न प्लान में सन्निर्माण के लिये दर्शाये गये यथा प्रस्तावित उनके तलों और किनारों सहित समस्त नदियों और नालों समस्त जल स्त्रोत और जल निकास, जल मार्गों और समस्त सार्वजनिक आम रास्तों का अपवाद और आरक्षण अपने पास रखती है ।

7. जब भी कलक्टर द्वारा लोक हित में इसे वांछनीय समझा जाये, प्रतिकर का संदाय किए बिना सरकार भूमि के आर-पार चौडा़ई में तीन मीटर से अनधिक सार्वजनिक रास्ते का अधिकार सृजित करने का अधिकार आरक्षित रखती है ।

8. उसके प्राधिकृत अभिकर्ताओें के माध्यम से सरकार के लिये या सरकार के किसी अधिकार के लिये एतद्‌द्वारा अपवर्जित किसी सम्पति के संरक्षण और अनुरक्षण के लिये, एतद्‌द्वारा आरक्षित अधिकारों की पूर्ण खोज, उपभोग और प्रयोग करने के लिए या इसमें यथा उपबन्धित के सिवाय, पट्‌टेदार को व्यवसाय के ऐसे प्रयोग के लिये, कोई प्रतिकर दिये बिना, भूमि पर प्रवेश करना और उसका ऐसा प्रयोग करना जो इन प्रयोजनों के लिये अनिवार्य हो, बिधिपूर्ण होगा ।

पट्‌टेदार की बाध्यताएं :पट्‌टेदार की बाध्यताएं :पट्‌टेदार की बाध्यताएं :पट्‌टेदार की बाध्यताएं :

9. पट्‌टेदार एतद्‌द्वारा सरकार के साथ निम्नलिखित रूप में प्रसंविदा करता है :-

2382 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (क) सरकार को या की ओर से इस पट्‌टे के अधीन देय किराए को संदत्त करना और अन्य किन्ही संदायों को उचित समय और स्थान पर ऐसी रीति में जैसी विधि द्वारा या सक्षम प्राधिकारी के आदेश द्वारा विहित की जाये, संदत्त करना।

(ख) भूमि का पूर्ण या कोई भाग, उस प्रयोजनार्थ जिस के लिये यह प्रदान की गई थी, प्रयोग करना और इसे इस प्रकार प्रयोग न करना जिससे इसका मूल्य कम होने की संभावना हो या शहर और ग्राम योजना क्षेत्र में शहर और ग्राम योजना विभाग द्वारा यथाविहित भूमि प्रयोग का उल्लंघन। भूमि पर समस्त निर्माण और उपयोग, राज्य या केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिनियमित किये गये समस्त लागू विधियों/ंनियमों/परिनियमों और अन्य विधिक उपबन्धों के अनुपालन में होगा।

(ग) जब कलक्टर द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, एतद्‌द्वारा पटटे पर दी गई भूमि पर, स्वयं अपने खर्च पर, उसकी सीमाओं और परिसीमाओं का सही तरीके से सीमांकन करते हुए और स्थाई चिन्ह परिनिर्मित करना और कलक्टर द्वारा उस निमित समय-समय पर जारी किये गये किन्ही निदेशों के अनुसरण में हर समय उसे अच्छी मुरम्मत में बनाये रखना ।

(घ) सरकार के समस्त अधिकारियों या कर्मचारियों या सरकार द्वारा इस निमित सम्यक रूप से प्राधिकृत अन्य व्यक्तियों को बिना किराये व रूकावट के निम्नलिखित के लिये आवश्यक या आनुषंगिक सभी कार्य या बातें करने के लिये भूमि पर हर समय प्रविष्ट होने की अनुज्ञा देना :-

(i) इस पट्‌टे के किन्हीं निबन्धनों के अनुपालन को प्रवर्तित करने या यह अभिनिश्चित करने कि इनका सम्यक रूप से पालन या अनुपालन किया गया है के प्रयोजन के लिए या

(ii) प्रतिकर के दावे के बिना इसमें इसके पश्चात्‌ विनिदिर्ष्टतः यथा उपबन्धित के सिवाए, चाहे किराया घटाने के द्वारा या अन्यथा खनिज या इसमें इसके पश्चात्‌ सरकार के पास आरक्षित अन्य अधिकारों के पूर्ण उपभोग, खोज या प्रयोग से सम्बन्घित किसी प्रयोजन के लिए । (ड.) भूमि पर जनता द्वारा किसी आम रास्ते के विधिपूर्ण प्रयोग के साथ या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस पर अब विद्यमान किन्ही विद्यमान अधिकारों और सूखा चारों के प्रयोग से या जिससे उस पर किरायेदार इस पट्‌टे के निबन्धनों द्वारा सृष्ट करने या अनुज्ञात करने के लिये बाध्य है, में हस्तक्षेप नहीं करना। (च) यदि भूमि या उसका कोई भाग किसी लोक प्रयोजन के लिए, अपेक्षित हो तो इसके नीचे यथा उपबन्धित के सिवाए और केवल लगान की अनुपातिक छूट के अध्यधीन प्रतिकर का दावा किए बिना सम्पूर्ण या उतनी भूमि जितनी कलक्टर द्वारा मांग पर अपेक्षित हो, अभ्यर्पित करना।

(छ) निम्नलिखित संकर्मों की लागत के लिए ऐसी राशि, जैसी सरकार के साधारण या विशेष आदेशों के अधीन कार्य करते हुए कलक्टर अवधारित करे, संदत्त करना, चाहे लागत पहले ही अनुदान के समय ही उपगत की गई हो या उसके पश्चात उपगत की जाए :-

(क) भूमि का सर्वेक्षण और सीमांकन ।

(ख) उस सम्पदा पर, जिसमें भूमि अवस्थित है किसी जलमार्ग का विनिर्माण करना और जिससे भूमि के लिए जल का प्रदाय उपलब्ध हो।

(ग) उस राज्य, जिसमें भूमि स्थित है, की साधारण सुविधा के लिए आवश्यक किन्हीं सडकों, रास्तों, पुलियों या पुलों का विनिर्माण करना; ओर

(घ) किन्हीं ऐसी सड़कों, रास्तों, पुलियों या पुलों का अनुरक्षण और मरम्मत।

(ज)़ पटटे के पर्यवसान पर या उससे पूर्व भूमि को छोड़ देना और इसे कलक्टर को शान्तिपूर्वक अभ्यर्पित करना ।2383 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 10. निम्नलिखित किसी भी दशा में.-

(क) यदि पट्‌टेदार इस पट्‌टे के किन्हीं निबन्धनों और शर्तों को भंग करता है या उनका अनुपालन करने में असफल रहता है, या ऐसा भ्ांग या अपालन होने देता है या अनुज्ञा देता है, (ख) यदि पट्‌टेदार दिवालिया घोषित किया जाता है, या

(ग) यदि पट्‌टा कुर्क किया जाता है तो सरकार तत्पश्चात किसी भी समय भूमि पर पुनः प्रवेश कर सकेगी और इस पट्‌टान्तर को अवधारित कर सकेगी, उस दशा में पट्‌टेदार चालू सीजन के लिए इस विलेख के अधीन देय सभी संदाय संदत करेगा परन्तु पट्‌टे का ऐसा पर्यवसान पट्‌टेदार द्वारा इस करार के भंग के पूर्वगामी किसी भंग के बारे में सरकार की किसी कार्रवाई के अधिकार या उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा :

परन्तु यह और कि पट्‌टे के पर्यवसान से पूर्व पट्‌टाधारक को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जायेगा और किसी संबद्ध वित्तीय संस्था को भी इसके विषय में सूचित किया जाएगा ।

11. इस पटटे में आरक्षित अधिकारों में से किन्हीं के प्रयोग के बारे में या इसके नीचे यथा उपबन्धित के सिवाए, पट्‌टे के पर्यवसान पर पट्‌टेदार को सरकार द्वारा कोई प्रतिकर संदेय नहीं होगा, अर्थात.- (क) सरकार के पास आरक्षित खनिज अधिकारों के प्रयोग में भूमि पर प्रवेश करने को सम्यक्‌ रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति के कार्य या उपेक्षापूर्वक लोप द्वारा भूमि की सतह या उससे संलग्न किसी चीज या पट्‌टेदार की किसी सम्पत्ति को हुए नुक्सान के लिए ऐसा प्रतिकर जैसा कि कलक्टर द्वारा निर्धारित किया जाए;

(ख) जल स्त्रोतों के सन्निर्माण या परिवर्तन के अधिकार के प्रयोग में खडी़ फसलों को हुए नुक्सान के लिए, ऐसा प्रतिकर जो, वह अधिकारी जिसके आदेशों के अधीन ऐसी कार्रवाई की गई है, निर्धारित करें;

(ग) पट्‌टेदार के किसी व्यतिक्रम से अन्यथा पट्‌टे के पर्यवसान पर भूमि पर विद्यमान किन्हीं सुधारों के लिए ऐसा प्रतिकर जो कलक्टर द्वारा, अधिभोगी, पट्‌टेदार द्वारा प्रभावी सुधारों के लिए प्रतिकर के संदाय के लिए हिमाचल प्रदेश अभिघृति अधिनियम, 1972 के उपबन्धों के अनुसार निर्धारित किया जाए :

परन्तु सरकार द्वारा पट्‌टेदार को संदेय कोई प्रतिकर या पट्‌टेदार से सरकार को देय राशि या तो ऐसे प्रतिकर से कम की जा सकेगी या ऐसे प्रतिकर के विरूद्ध मुजराई की जा सकेगी या अन्यथा यथा और ऐसे समय जो सरकार उचित समझे वसूल की जा सकेगी ।

12. पट्‌टेदार स्टाम्प क्रय करेगा और निष्पादन की तारीख से चार मास के भीतर अपने खर्च पर इस लिखत को रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रस्तुत करेगा, ऐसा न करने पर अन्यथा सरकार के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी निष्फलता उसकी शर्तो का भंग माना जाएगा और कलक्टर किसी प्रतिकर, चाहे जितना भी हो के बिना उसे विखंडित और रदद्‌ करने का हकदार होगा ।

13. यदि, इन विलेखों या इसके किसी भाग के अर्थों या प्रवर्तन या संदेह प्रतिकर की राशि या किसी पक्ष के अधिकारों, कर्तव्यों और बाध्यताओं से किसी भी रूप में सम्बन्धित या उद्‌भूत होने वाला कोई प्रश्न, संदेह या आक्षेप उठेगा, तब इसमें इसके पूर्व जहां तक कि किसी विषय के विनिश्चय में, उपबंधित के लिए और ऐसे विनिश्चय के सिवाए, प्रत्यके ऐसा विषय आयुक्त के माध्यस्थम्‌ के लिए निर्दिष्ट किया जाएगा :-

14. इस विलेख में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होंः-

(क) ''कलक्टर'' ओैर ''आयुक्त'' से उस जिला या मण्डल जिसमें भूमि अवस्थित है का कलक्टर और आयुक्त अभिप्रेत है और इसमें निमित्त सरकार की ओर से कार्य करने के लिए साधारण या विशेष आदेश द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत कोई व्यक्ति सम्मिलित है;

2384 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (ख) ''सरकार'' में सरकार के उत्तरवर्ती और समनुदेशिती सम्मिलित है;

(ग) ''भूमि'' से ऐसी भूमि अभिप्रेत है जो उससे संबन्धित समस्त अधिकारों सहित एतद्‌द्वारा पट्‌टांतरित हो तथा इसमें अपवादित न हो;

(घ) ''पट्‌टेदार'' में उत्तराधिकारी, विधिक प्रतिनिधि और पट्‌टेदार के अनुज्ञात समनुदेशिती सम्मिलित हेै तथा यदि उक्त पद में सह-हिस्सेदार सम्मिलित हो, तो इस विलेख द्वारा अधिरोपित कोई दायित्व प्रत्येक हिस्सेदार का संयुक्त और पृथक दायित्व होगा;

(ङ) ''खनिज'' में, खनिज स्वरूप के समस्त उपादान, जिनको जमीन से कोयले, भू-तेल, स्वर्ण-धुलाई, पत्थर और मृदा के रूपों के रूप में प्राप्त किया जा सकता है तथा जिनको किसी लाभप्रद प्रयोजन या हटाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है, सम्मिलत है।

इसके साक्षय स्वरूप इसके पक्षकारों ने इसमें इसके पश्चात्‌, प्रत्येक विनिदिर्ष्ट मामलों में वर्णित तारीखों को अपने-अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

ऊपर वर्णित अनुऊपर वर्णित अनुऊपर वर्णित अनुऊपर वर्णित अनुससससूचूचूचूचीीीी

भभभभूमि का वर्णन औरूमि का वर्णन औरूमि का वर्णन औरूमि का वर्णन और सीमाएं सीमाएं सीमाएं सीमाएं

...........................................हैक्टेयर का क्षेत्र .....................................(बीघा के बराबर)............................................................. ....................मौजा ग्राम में स्थित तहसील............................................................जिला...................................नगर के स्थानीय प्राधिकारी के अभिलेख/अभिलेख में यथा दर्शित।

सं0.......................................और निम्न प्रकार से सीमांकित है :-

भूमि के उत्तर में....................................................हैं, भूमि के पूर्व में...................................................... ..हैं भूमि के दक्षिण में ..................................................हैं भूमि के पश्चिम में...................................................है

प्लानप्लानप्लानप्लान

हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल के आदेशों के अधीन कार्य करते हुए श्री/श्रीमति/कुमारी............................ .................पता ...................................................................................................(वर्णन) के उपस्थ्तिि में वर्ष दो हजार........... .........क.े .........................दिन..........................के अधिकारी द्वारा हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल के लिए और की ओर से हस्ताक्षरित ।

उक्त........................द्वारा..................................... (पता)..................... (वर्णन) की उपस्थिति मे वर्ष दो हजार...... ........................के ...............................दिन हस्ताक्षरित।

साक्षी अधिकारी (हस्ताक्षरित) (हस्ताक्षरित) साक्षी पटटेदार (हस्ताक्षरित) (हस्ताक्षरित)2385 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 प्रप्रप्रप्ररूप-गरूप-गरूप-गरूप-ग (नियम 11 देखें) अनिवार्यता प्रमाणपत्र के लिए प्रोफार्मा हिमाचल प्रदेश सरकार, ...............................विभाग

संख्याः............................. तारीख......................स्थान.....................

अनिवार्यता प्रमाणपत्रअनिवार्यता प्रमाणपत्रअनिवार्यता प्रमाणपत्रअनिवार्यता प्रमाणपत्र

प्रमाणित किया जाता है कि मुहाल/मौजा...................................तहसील.............................जिला........................ ...... में अवस्थित निम्न यथा ब्यौराकृत भूमि जिसका माप..........................बीघा है (नाम व पूरा पता)........................... ......द्वारा पटटे पर.......................प्रयोजन के लिए.............................अवधि के लिए आपेक्षित है,

प्रस्तावित भूमि की अदस्थिति खसरा नं0 क्षेत्रफल

(i) यह भूमि विभाग द्वारा अधिकथित मापदंड के अनुसार आवेदक की पात्रता सुनिश्चित करने के पश्चात्‌ पट्‌टे के लिए सिफारिश की जाती है।

(ii) यह भूमि आवेदक के पक्ष में पट्‌टे के लिए सिफारिश की जाती है, क्योंकि यह पूर्वोक्त क्रियाकलाप के लिए अनिवार्यतः अपेक्षित है । पूर्वोक्त क्रियाकलाप न्यूनतर क्षेत्र में नहीं चलाया जा सकता है। (iii) यह भूमि समस्त सुसंगत विभागों और प्राधिकरणों जैसे लोक निर्माण विभाग/राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण/स्थानिय निकाय/नगर एवं ग्राम योजना/वन विभाग/प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य/हिमाचल प्रदेश राज्य विधुत बोर्ड इत्यादि से निराक्षेप प्रमाणपत्र अभिप्राप्त करने के पश्चात्‌ पट्‌टे के लिए सिफारिश की जाती है।

संबद्ध अधिकारी

------

प्रप्रप्रप्ररूप-घरूप-घरूप-घरूप-घ

(नियम 11 देखें)

अनापत्ति (निराक्षेप) प्रमाण पत्रअनापत्ति (निराक्षेप) प्रमाण पत्रअनापत्ति (निराक्षेप) प्रमाण पत्रअनापत्ति (निराक्षेप) प्रमाण पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि मुहाल/मौजा...................................तहसील............................जिला......................... में अवस्थित सरकारी भूमि जिसका खसरा नं0.....................................खाता/खतौनी...................................................... है, ..............................प्रयोजन के लिए उपयुक्त है, और यदि उपरोक्त भूमि श्री/श्रीमति/कुमारी............................... पता .......................................................................................................को पट्‌टे पर उक्त...........................(प्रयोजन के लिए इस बाबत प्रात्त अक्षेप, (यदि कोई हो) संलग्न आख्यापाक आदेश द्वारा निपटाए गए है) प्रदान की जाती है तो किसी पक्ष में कोई सुसंगत अक्षेप नहीं है । 2386 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 यह भी प्रमामिणत किया जाता है कि इस प्रयोजन के लिए कोई निजी भू-स्वामी उपयुक्त भूमि उपलब्ध करवाने के लिए सहमत नहीं हुआ है।

उपमण्डल अधिकारी, उपमण्डल,.......................... जिला.................................

आदेश द्वारा,

वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव (राजस्व), हिमाचल प्रदेश सरकार ।

_______

[Authoritative English Text of Government Notification No .Rev D(G)9-4/2009 dated

18.8.2011 as required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].

REVENUE DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 18th August, 2011

No. Rev D(G)9-4/2008.—In exercise of the Powers conferred by section 13 of Himachal Pradesh Village Common Lands Vesting and Utilization Act 1974(Act 18 of 1974) and section 26 of the Himachal Pradesh Ceiling on Holdings Act, 1972(Act No. 19 of 1973), the Governor of Himachal Pradesh proposes to make the following rules to carry out the purposes of the said Acts and the same are hereby Published in Rajpatra, Himachal Pradesh for general information of the public as required under sub-section (3) of section 13 of the Himachal Pradesh Ceiling on Holdings Act, 1974 and subsection (2) of section 26 of the Himachal Pradesh Ceiling on Holdings Act, 1972.

If any person likely to be affected by these rules has any objection (s) or suggestion (s) to make in respect of these rules , he may send the same to the Secretary (Revenue) to the Government of Himachal Pradesh Shimla-2 within 30 days from the date of publication of these draft rules in the Rajpatra, Himachal Pradesh.

Objection(s) or suggestion(s), if any, received within the period specified above, shall be considered by the State Government before finalizing these rules, namely.

DRAFT RULES

1. Short title and extent.—(1) These rules may be called the Himachal Pradesh Lease Rules, 2011.

(2) They shall extend to whole of the State of Himachal Pradesh.

2. Definitions.—In these rules unless there is anything repugnant in the subject or context,-

(a) "Competent authority" means an authority to grant land on lease under rule 7;

2387 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

(aa) "conspicuous place" means Deputy Commissioner's office, Sub-Divisional Officer's (Civil) office, Tehsil office, Municipal Office/ Panchayat Ghars, Mahila Mandal and any other place of public gathering, as the case may be;

(b) "demarcated protected forest"means forest declared as such under section 30 of the Indian Forest Act,1927;

(c) "Director Country and Town Planning" means Director of Town and Country Planning appointed under the Himachal Pradesh Town and Country Planning Act, 1977;

(d) "Form"means a form appended to these rules; (e) "highest market value" means the price used for registration of similar transaction in the concerned revenue estate.

(f) "Planning Area" means any area declared to be a planning area under the Himachal Pradesh Town and Country Planning Act, 1977;

(g) "Reserved Forest" means a forest declared as such under section 20 of the Indian Forest Act, 1927; and

(h) "State Government" means the Government of Himachal Pradesh.

3. Grant of land on lease.—(1) The land may be granted on lease for purposes and to persons as provided under these rules with the sanction of the competent authority, out of :-

(i) Government lands owned by the State Government outside the reserved and demarcated protected forests and outside such other areas as may be notified from time to time by the State Government in this behalf:

Provided that if the State Government desires, lease in any demarcated protected forest may be allowed subject to the rules framed under clause (g) of section 32 of the Indian Forest Act and subject to the permission of the Central Government under Forest Conservation Act, 1980; and

(ii) lease may be granted to any person out of lands vested in the State Government under section 3 of the Himachal Pradesh Village Common Lands Vesting and Utilization Act, 1974 and the lands vested under section 11 of the Himachal Pradesh Ceiling on Land Holdings Act, 1972, in the interest of the development of the State, if the State Government is satisfied that there are sufficient reasons to do so:

Provided that land vested in the State Government under the Himachal Pradesh Village Common Lands Vesting and Utilization Act, 1974 shall not be leased out in contravention of the provisions of sections 8 of the said Act.

(2) (i) Lands on lease shall not be granted in contravention of any statute regulating the use of land;

(ii) No land shall be leased out in contravention of section 118 of the Himachal Pradesh Tenancy and Land Reforms Act, 1972 in favour of a person who is not an agriculturist within the meaning of sub-section (2) of section 2 of the said Act; and

(iii) No Government land shall be granted on lease under these rules where suitable private land is readily available for the purpose for which lease has been applied.

4. Purposes for which the lease may be granted.- The lease may be granted for one or more of the following purposes, namely:-

(i) establishment/extension of Educational Institutions; (ii) installation of Petrol Pumps and/or gas godowns;

2388 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (iii) activities of literary, scientific, charitable, health, welfare, culture and academic

purposes;

(iv) for promotion of sports activities; (v) Location specific infrastructure projects with a concession period of upto 40 years such as Hydro electric projects, aerial ropeways, bus stands, parking lots, wayside amenities, limestone/other mining;

(vi) Location specific infrastructure projects with a concession period of more than 40 years (subject to the maximum of 99 years) such as infrastructure needs of cement plants; and

(vii) any other public purpose in the interest of the development of the State.

5. Maximum limit of grant.—Maximum limit to sanction lease shall be as certified by the concerned Department dealing with the subject under the Rules of Business and subject to the provisions of Himachal Pradesh Ceiling on Land Holdings Act, 1972.

6. Eligibility for the grant of land on lease.—Any person or legal entity registered under any statute shall be eligible for grant of lease with the following provisos:

(i) Eligibility of lease for purpose of setting up educational institutions shall be restricted to Societies registered under Societies Registration Act, 1860 or Trust registered under the Indian Trust Act,1882 or similar statutes governing not for profit institutions;

(ii) Eligibility of lease for the purpose of installation of petrol pumps and gas godowns shall be restricted to Bonafide Himachalis{ preference shall given to Ex-servicemen, war widows, BPL families, single destitute women and handicapped persons;} and (b) Companies engaged in the business of selling/distributing petrol/diesel/kerosene/LPG;

(iii) Eligibility of lease for purpose of any activity of literary, scientific, charitable, health, welfare, culture and academic purpose shall be restricted to Societies/ Trust registered under Societies Registration Act, 1860/Indian Trust Act, 1882 or similar statutes governing not for profit institution; and

(iv) Eligibility of lease for the purpose of promotion of sports activities shall be restricted to registered sports bodies.

7. Sanction of lease.—The lease under these rules shall be sanctioned by the State Government for such a period as it may deem fit :

Provided that the State Government shall not grant the lease of land in any case for a period exceeding 99 years.

8. Lease amount.—The lease amount for a fresh lease or renewal of existing lease shall be charged from the lessee per annum in the following manner, namely:-

(1) 5% of the latest highest market value of the land leased or double the average market value of five years, whichever is less except for location specific infrastructure projects with a concession period of upto 40 years (such as Hydroelectric projects, aerial ropeways, bus stands, parking lots, wayside amenities, limestone/other mining, etc.) which shall be charged lease amount @ 3 ½ % of the latest highest market value of the land leased or double the average market value of five years, whichever is less.

(2) The lease amount shall be increased every 5 years by 10% of existing lease amount or lease value calculated on current value of the land, whichever is less:

2389 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

Provided that where land is in the name of a specific department of government is sought to be transferred on lease for any purpose that department may reduce the lease amount as it deems appropriate.

9. Sub-Lease.—Leaseholders shall be allowed to enter into sub-lease within the period of the lease only in the following specific cases:-

(a) Sub lease shall be allowed on location specific projects where there is provision for sub-lease in a public-private partnership contact; and

(b) Whenever sub lease is considered necessary or appropriate as an adjunct to the main purpose of lease:

Provided that no sub lease will be allowed in cases where land has been granted on reduced rates.

10. List of Government lands to be maintained.—(1) Lists of Government lands classified in a manner as laid down by the State government in each district shall be maintained by the Collector.

(2) The State Government shall determine from time to time as to which of the lands specified under sub-rule (1), shall be available for leasing.

(3) An online lease register of leased land shall be maintained District and Tehsil wise on a format laid down by the state government.

11. Application for lease.—(1) The application in Form-A along with latest jamabandi, tatima, five years average sale price, latest market value of the proposed land, Essentiality Certificates in Form-C from concerned department and Certificate of No Objection of local residents/shareholders from the Sub Divisional Collector in Form D shall be made to the Collector of the District (hereinafter called the Collector).

(2) (a) The department under whose purview the proposed activity for which grant of land on lease has been sought will be the concerned department to issue the Essentiality Certificate.

(b) The department concerned shall issue the Essentiality Certificate on the basis of (i) departmental norms which assess eligibility of the lessee, the necessity of the proposed activity and the extent of land required for the same, and (ii) No Objection Certificates from all relevant authorities/dependents concerned with regulation of land use and provisions of services including like Public Works Department/Irrigation and Public Health/Local bodies/National Highways Authority/Town and Country Planning/Forest departments/Pollution Control Board/ Irrigation and Public Health/Himachal Pradesh State Electricity Board, etc depending upon location and classification of land.

(3) (a) The applicant shall apply for a No Objection certificate to the Sub Divisional Collector, who, when necessary, shall require the applicant to deposit the cost of demarcating, surveying and mapping the land and cause the land to be demarcated, surveyed and mapped. The Sub-Divisional Collector shall publish a proclamation stating that the land has been applied for grant on lease for claimed purpose, and all claims and objections shall be preferred within one month, including any offer to make suitable private land readily available for the said purpose.

(b) A copy each of the proclamation shall be sent to the Tehsildar for comments and report within one month. The Tehsildar shall also record the statements of the right-holders and2390 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 note down their objections, if any. He shall make a report to the Sub-Divisional Officer (Civil) keeping in view their objections.

(c) The proclamation shall be published in two local newspapers having wide circulation and pasted at a conspicuous place in the vicinity of the land applied for on lease, and, after it has been so published, a copy each of the said proclamation shall also be pasted at the Sub Divisional Collector's office and at the office of the Tehsil in which the land is situated.

(d) If no claims or objections are preferred within one month of the pasting of the proclamation at the Collector's office, or in the event of any claim or objection being preferred, then the Sub Divisional Collector shall assess the report of the Tehsildar and if satisfied that there are no valid objections from local residents/right holders, shall issue the No Objection Certificate for the proposed land.

(4) On receipt of the application with enclosures, the Collector shall examine the application with regard to all provisions of the rules and either reject the case or recommend the case to the State Government keeping in view of following:-

(a) In case of lease of land from Government land vested in the State Government under section 3 of the Himachal Pradesh Village Common land vesting and Utilization Act, 1974 care shall be taken that the land in the reserve pool must remain to the extent of at least 50% of the land vested in the State Government . Sufficient land should also remain in the allotable pool for allotment of landless and eligible persons. These facts shall be mentioned by the Collector in his report.

(b) The Collector shall also ensure that adequate land exists in an estate for grazing and other common purposes for the inhabitants of the estate before recommending lease.

12. Orders on Collector's report.—On receipt of the report of the Collector by the competent authority, it shall, subject to the provisions of these rules, pass such order, in respect of the refusal or sanctioning of the lease, and, in the event of sanctioning the lease, in respect of the area, term, assessment and other conditions of the lease, as the competent authority shall think fit.

13. Execution of lease deed and giving of possession.—When a lease has been sanctioned by the competent authority, the Collector shall execute and cause to be executed a lease in Form-B within a period of six months from the sanction of lease by the Competent authority. Possession of the land shall not be given to the applicant until the lease has been executed.

14. Rates and Cesses.—A lessee, shall, in every case, covenant with Government to pay all rates and cesses chargeable on the lands.

Explanation.—The expressions 'rates'and 'cesses' in this rule shall have the same meanings as assigned to them in the Himachal Pradesh Land Revenue Act, 1954.

15. Failure to take possession.—If within six months of the execution of the lease having been communicated to the applicant, he fails to take possession of the land, or if at any time he fails to comply with any of the conditions of the lease, the Collector may cancel the lease and shall report the fact to the competent authority.

16. Reservation of certain rights of Government and settlement of disputes.—(1) There shall be reserved in every lease the right of Government over all rivers and streams, and the right of the public to use existing thoroughfares traversing the grant. These shall also be reserved in every lease, all mines, minerals, coals, gold-washings, earth-oil and quarries in or under the land2391 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 leased, together with the right of entering of the said land and doing all acts and things that may be necessary or expedient for the purpose of searching for, working, getting or carrying away any such mines, minerals, coals, gold-washings and quarries.

(2) The Government on its part shall, in every case, covenant with the lessee to make reasonable compensation to him for all damage occasioned by the exercise of the said rights.

(3) And the lessee on his part shall covenant with Government that, in case of a dispute arising between the lessee and Government as to the property and rights hereby reserved, or any matter incidental or in any way relating thereto, or as to any compensation as aforesaid, the decision thereon, in each case, of the Collector shall be considered final and binding on both parties.

17. Non-utilization of land leased or breach of conditions of lease.- (I) The lessee shall utilizes the land leased to him for the purpose for which it is leased. If the land leased is not used by him at any time for the purpose for which it has been leased out, the lease shall be terminated by the competent authority free from all encumbrances and the Government shall re-enter the demised premises and the lease money, if paid to the Government shall be forfeited and no person shall be entitled to any compensation for any improvement made and for any building or structures constructed thereon.

(2) If the lessee commits any breach of any of the conditions of the lease deed at any time, his lease shall be terminated by the competent authority.

18. Procedure on expiry of lease.—(1) On the expiry of the lease, the Government may resume the whole of the land, or any portion of it.

(2) Failing such resumption, the lessee may be entitled to a renewal of the lease for such term and on such conditions as to the amount of land revenue and rent or lease money and other charges to be paid by him as the competent authority may determine.

(3) In fixing these terms and conditions, the competent authority shall be guided by the rules for the lease of Government lands for the time being in force, so far as the rules can be made applicable.

19. Review.—(1) The orders passed by the Collector, Divisional Commissioner, Financial Commissioner and the State Government shall be subject to review by the State Government which may pass such orders on it as it may deem fit :

Provided that such an order shall not be modified or reversed unless reasonable opportunity has been given to the party (ies) affected thereby, of being heard either in person or through his/their legal representative in support of his/ their claim.

(2) An application for review shall not be entertained unless it is made within ninety days from the passing of the order, or unless the applicant satisfies the sanctioning authority that he had sufficient cause for not making the application within that period.

20. Revision.—The State Government may at any time call for the records of any case disposed of by the Collector or the Divisional Commissioner or Financial Commissioner, as the case may be, and pass such orders as it may deem fit:

Provided that such an order shall not be modified or reversed unless reasonable opportunity has been given to the party (ies) affected thereby, to appear and be heard either in person or through his/their legal representative (s) in support of his/their claim (s).

2392 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

21. Repeal and Savings.—(I) The Himachal Pradesh Lease Rules, 1993 notified vide Government notification No. Rev D(G)6-33/86-11 dated 20th October, 1993 and published in the Rajpatra, Himachal Pradesh (Extra-Ordinary) dated 5th November 1993, are hereby repealed.

(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the rules so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of these rules.

APPENDIX

FORM-A

(See rule 11)

APPLICATION FOR LEASE OF LAND IN HIMACHAL PRADESH

1. Name of applicant………..................…….son of …………...............…………….resident of…………………………..Tehsil………………………….District………………….State….....… …………………………………………….

2. Object for which lease of land is required.

3. Particulars of land proposed for lease :

(i) District. (ii) Tehsil. (iii) No. of estate (hadbast) with name of Estate. (iv) Khasra Nos. with areas and classification.

Solemnly affirm and declare :-

(i) That whatever has been stated above, is true to the best of my knowledge and belief and that nothing has been concealed or suppressed there from.

I hereby promise and undertake that if any grant of land on lease is made in my favour I shall abide by the terms and conditions of such grant.

Dated………………….

Signature of applicant

_______

FORM-B

(See rule 13)

A lease made by the Governor of Himachal Pradesh (hereinafter called Government) of the one part to…………………………..and……………………………….……………….Son/daughter of ………………………….............................……..resident of Village……………………………… Tehsil………………………………..District………………………………ofthe ..………………… State (hereinafter called the lessee) of the other part.

In pursuance of the orders contained in letter No………………..dated the…………………….from the………………..to the………………………………………

2393 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

Whereas the lessee has paid to Government the sum of…………………………..rupees, being the first installment of the rent hereinafter reserved, and

Terms of the Lease :

1. Government hereby demises to the lessee all that plot of land, containing…bighas more or less, more particularly described in the schedule hereto and delineated and colored………………………in the plan hereunto annexed, subject to the exceptions and reservations and on the terms and conditions hereinafter appearing.

2. (a) The land is leased for purposes of……………………….only.

(b) The lessee may take to himself all natural produce growing on the surface of the land, excluding trees and brushwood, subject to the payments and conditions hereinafter mentioned.

(c) The lessee may construct such water-courses, temporary buildings or similar improvements as may be necessary for the purpose of cultivating being the land as herein provided, subject to the conditions hereinafter provided, and to the condition that no claim shall be made against the Government for improvements of any kind, except as hereinafter specifically provided.

3. The period of the lease shall be for………………………….. years, and shall be deemed to have commenced with effect from the …………………………….the day of ……………………………….

4. (a) The lessee shall pay a yearly rent of ……………………………rupees in two equal half yearly installments of………………………….rupees each or one installment yearly of ……………………………..rupees.

(b) The amount shall be paid into the nearest Treasury. (c) The lessee shall further pay all other rates, cesses, taxes, charges and other out-goings which are or may become payable by the owner of the land or the occupier thereof.

Exceptions and reservations on behalf of Government:

5. Government does not demise but excepts and reserves to itself all mines, minerals and quarries of whatsoever nature existing on, over or below the surface of the land with liberty to search for, work and remove the same, in as full and ample manner as if this lease had not been made.

6. Government does not demise but excepts and reserves to itself all rivers and streams, with their beds and banks, all water courses and drainage channels and all public thoroughfare now existing on the land or shown as proposed for construction in the plan annexed.

7. Government reserves the right to create a public right of way not exceeding in three meters in the width across the land whenever this may be considered desirable in the public interest by the Collector, without paying any compensation.

8. For the full discovery, enjoyment and use of the rights hereby reserved, or for the protection and maintenance of any property hereby excluded, it shall be lawful for Government through its authorized agents or for any officer of the Government to enter upon the land and make2394 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 such use thereof as may be necessary for these purposes without making any compensation to the lessee for such use of occupation except as may be provided hereunder.

Obligations of the lessee.

9. The lessee hereby covenants with Government as follows :-

(a) To pay to or on behalf of Government the rent and any other payments which may become due under this lease at the proper time and place and in such manner as may be prescribed by law or by the order of any competent authority.

(b) To use the whole or any part of the land for the purpose for which it was granted and not to use it in any way likely to lessen its value or violation of land use as prescribed by the Town and Country Planning Department in TCP area. All construction on/use of the land will be in compliance of all applicable Laws, Rules, Statutes and other legal provisions enacted by the State or Central Government.

(c) At his own cost, when so required by the Collector, to erect permanent marks on the land hereby leased, demarcating correctly the boundaries and limits thereof, and at all times to maintain the same in good repair in accordance with any directions from time to time issued in that behalf by the Collector.

(d) To permit without let or hindrance all officers or servants of the Government or other persons duly authorized by Government in this behalf to enter the land at all times and do all acts and things necessary for or incidental to :-

(i) the purpose enforcing compliance with any of the terms of this lease, or of ascertaining whether these have been duly performed or observed; or (ii) any purpose connected with the full enjoyment, discovery and use of the mineral or other rights hereinafter reserved to Government, without claim to compensation whether by reduction of rent or otherwise except as hereinafter specifically provided.

(e) Not to interfere with the lawful use by the public of any thoroughfare on the land or with the exercise by any third person of any existing rights and easements now existing thereon or which the tenant thereon is bound by the terms of this lease to create or allow.

(f) If the land or any portion thereof is required for any public purpose, to surrender the whole or so much of the land as may be required on demand by the Collector, without claiming compensation except as provided hereunder, and subject only to a proportionate remission of rent.

(g) To pay such amount towards the cost of the following works as the Collector acting under the general or special orders of Government may determine, whether the cost has already been incurred at the time of the grant or may be incurred thereafter- (a) the survey and demarcation of the land, (b) the construction of any water -course on the estate in which the land is situated, and from which a supply of water is available for the land.

(c) the construction of any roads, paths, culverts or bridges necessary for the general convenience of the State in which the land is sittuated; and

(d) the maintenance and repair of any such roads, paths, culverts or bridges.

2395 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 (h) At the end or sooner termination of the lease to leave the land and surrender it

peaceably to the Collector.

10. In any of the following events.-

(a) if the lessee commits any breach or fails to perform any of the terms and conditions of this lease, or suffers or permits such breach or non-performance,

(b) if the lessee is declared insolvent, or (c) if the lease is attached, Government may at any time thereafter re-enter upon the land and determine this demise, in which case the lessee, shall make all the payments due under these presents for the current season, provided that such termination of the lease shall not prejudice any right of action or remedy of Government in respect of any antecedent breach of this agreement by the lessee:

Provided further that before termination of the lease, an opportunity of being heard shall be given to the lessee and any concerned Financial Institution shall also be informed about the same.

11. No compensation shall be payable by Government to the lessee in respect of the exercise of any of the rights reserved in this lease or on the termination of the lease, except as provided here under :-

(a) for damage caused to the surface of the land or to anything attached thereto, or to any property of the lessee by the act or negligent omission of any person duly authorized to enter the land in exercise of the minerals rights reserved to Government such compensation as may be assessed by the Collector;

(b) for damage to standing crops caused in exercise of the right to construct or alter water courses, such compensation as may be assessed by the officer under whose orders such action is taken;

(c) for any improvements existing on the land on the termination of the lease otherwise than through any default of the lessee such compensation as may be assessed by the Collector in accordance with the provisions of the Himachal Pradesh Tenancy Act, 1972 for the payment of compensation for improvements effected by occupancy lessee:

Provided that any compensation payable by Government to the lessee or any sum or sums otherwise due to Government from the lessee may either be deducted from or set off against any such compensation or may be recovered otherwise as and at such time as Government may deem fit.

12. The lessee shall purchase the stamp and within four months from the date of execution, shall present this Instrument for registration at his own cost failing which, without prejudice to Government rights otherwise, such failure shall be regarded as a breach of the conditions thereof and the Collector shall be entitled to rescind and cancel the same without any compensation whatsoever.

13. If any question, doubt or objection shall arise in any way connected with or arising out of these presents, or the meanings or operation of any part, thereof, or amount of compensation payable, or the rights, duties or obligations of either party then, save in so far as the decision of any such matter has been herein before, provided for and has been so decided every such matter shall be referred to the arbitration of the Commissioner.

2396 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

14. In these presents, unless context otherwise requires.—(a) "the Collector" and the "Commissioner" means the Collector and the Commissioner for the time being of the District or Division in which the land is situated and include any other person duly authorized by general or special order to act on behalf of Government in this behalf;

(b) "Government" includes the successors and assigns of Government;

(c) "the land" means the land hereby demised,together withl all rights appertaining thereto and not herein excepted;

(d) "the lessee"includes the heirs,legal representatives and permitted assigns of the lessee and if the said term includes co-sharers,any liability imposed by this deed shall be the joint and several liability of each co-sharer;

(e) "minerals" include all substances of a mineral nature which can be won from the earth such as coal, earth-oil, gold-washing, stones and forms of soil which can be used for a profitable purpose or removal.

In witness whereof the parties have hereto set their hand on the dates hereinafter in each case specified.

THE SCHEDULE ABOVE MENTIONED

Description and boundaries of the land:

An area of……….....…………Hec……......………aers……..............…………cents. (equal to…………...........…..Bigha) situated in mauza………........…………Tehsil…………………….. District…………………the town shown in the revenue record.

Records of the local authority No…………………….

And bounded as follows:- On the North by: On the East by: On the South by: On the West by:

THE PLAN

Signed for and on behalf of the Governor of the Himachal Pradesh by ………………officer of ……… acting under the orders of the Governor of the Himachal Pradesh in the presence of ……………..(sd) (address)………………..(description) on the ……………………day of …………..in the year two thousand ………………..signed by the said…………………in the presence of .................………………………….(address)…………………………………………… ……………………………..(description) on the ………………………………………………day of ……………………………………………………………………………….in the year two thousand……………………………

2397 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 1. Witness Officer

(Sd/-) (Sd/-)

2. Witness Lessee

(Sd/-) (Sd/-)

_______

FORM- C

(See rule 11)

PROFORMA FOR ESSENTIALITY CERTIFICATE

Government of Himachal Pradesh

Department of _________________________

No._______________________ Dated____________________Place______________

ESSENTIALITY CERTIFICATE

This is to certify that land measuring_______bighas as detailed below situated in

Mohal/Mauza______________Tehsil____________District____________ is required by

(complete name and address)_____________________________________________on lease for

the purpose of____________________ for a period of __________________

L ocation of land proposed Khasra Nos. Area

(i) This land is recommended for lease after ascertaining the eligibility of the

applicant as per criteria laid down by the department.

(ii) This land is recommended for lease in favor of the applicant as the same is

essentially required for the aforesaid activity. The aforesaid activity cannot be

run in a lesser area.

(iii) This land is recommended for lease after obtaining No Objection Certificates

from all relevant departments authorities like Public Works Departments

/National Highways Authority/Local bodies/Town and Country Planning/Forest

departments/Pollution Control Board/ Irrigation and Public Health /Himachal

Pradesh State Electricity Board etc.

Authority Concerned

2398 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

FORM -D

(See rule 11)

NO OBJECTION CERTIFICATE

It is certified that government land comprising of khasranumbers___________

_________________________Khata/Khataunino________________________ situated inmohal/mauza______________Tehsil__________________________

District __________________________is suitable for the purpose of ________

_____________________________________________________________and

there are no relevant objections from any quarter if the above land is given in

lease in favorof________________________address______________________

for purpose of ____________________________________________________[(objection (if any) received in this regard have been disposed of with the attached speaking order) It is also certified that no private landowner has agreed to make suitable land readily available for the purpose.

Sub Divisional Magistrate Sub Division ________________ District _____________________

By order, FC Cum Principal Secretary (Revenue) to The Government of Himachal Pradesh.

________

लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 19 अगस्त, 2011

संख्या पीसंख्या पीसंख्या पीसंख्या पी....बीबीबीबी....डब्लयू डब्लयू डब्लयू डब्लयू ((((बी)एफ (5) 45/2011बी)एफ (5) 45/2011बी)एफ (5) 45/2011बी)एफ (5) 45/2011....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव डी0पी0एफ0 घ्वाल/236, तहसील सुन्दरनगर, जिला मण्डी में सलापड़ ततापानी सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धोंं के अन्तर्गत जारी की जाती है2399 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोेग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्याें को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।

विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (बीघा-विस्वा) में मण्डी सुन्दरनगर डी0पी0एफ0 घ्वाल/236 758/725/368/1 1-8-13 कुल जोड किता-1 1-8-13

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (लोक निर्माण)।

-------

लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 19 अगस्त, 2011

संख्या पीसंख्या पीसंख्या पीसंख्या पी....बीबीबीबी....डब्लयू डब्लयू डब्लयू डब्लयू ((((बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) 166166166166/20/20/20/2008080808....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव झिकड़ी ठंहड़, उप-तहसील हारचक्कियां, जिला कांगड़ा में रानीताल-कोटला सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धोंं के अन्तर्गत जारी की जाती है

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोेग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्याें को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।2400 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 विवरणीविवरणीविवरणीविवरणी

जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0) में कांगड़ा हारचक्कियां झिकड़ी ठेहड 327/1 0-01-12 339/1 0-00-42 कुल जोड़ किता-2 0-01-54

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

--------

लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 19 अगस्त, 2011

संख्या पीसंख्या पीसंख्या पीसंख्या पी....बीबीबीबी....डब्लयू डब्लयू डब्लयू डब्लयू ((((बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) 169169169169/20/20/20/2008080808....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव वट्टबल्ला, उप-तहसील हारचक्कियां, जिला कांगड़ा में रानीताल-कोटला सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धोंं के अन्तर्गत जारी की जाती है

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोेग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्याें को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।

विवरणीविवरणीविवरणीविवरणी

जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0) में कांगड़ा हारचक्कियां वट्टबल्ला़ 4/1 0-01-56 7/1 0-00-74 144/2 0-02-81 कुल जोड़ किता-3 0-05-11

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।2401 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 19 अगस्त, 2011

संख्या पीसंख्या पीसंख्या पीसंख्या पी....बीबीबीबी....डब्लयू डब्लयू डब्लयू डब्लयू ((((बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) 223223223223/20/20/20/2008080808....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव रूम्बल, उप-तहसील हारचक्कियां, जिला कांगड़ा में रानीताल-कोटला सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धोंं के अन्तर्गत जारी की जाती है

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोेग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्याें को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।

विवरणीविवरणीविवरणीविवरणी

जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र (है0) में कांगड़ा हारचक्कियां रूम्बल 544/1 0-06-42 548/1 0-00-21 कुुल जोड़ किता-2 0-06-63

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

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लोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभागलोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 19 अगस्त, 2011

संख्या पीसंख्या पीसंख्या पीसंख्या पी....बीबीबीबी....डब्लयू डब्लयू डब्लयू डब्लयू ((((बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) बी)एफ (5) 27272727/2011/2011/2011/2011....--------यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव घरवासड़ा, उप-तहसील बलद्वाड़ा, जिला मण्डी में ऊना-अघार-जाहू-कलखर-नैर चौक सड़क के निर्माण हेतु भूमि 2402 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसेे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा, 4 के उपबन्धोंं के अन्तर्गत जारी की जाती है

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोेग करते हुए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्याें को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के तीस (30) दिन की अवधि के भीतर भू-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपत्ति दायर कर सकता है।

विवरणी

जिला उप-तहसील गांव खसरा नम्बर क्षेत्र है0 में मण्डी बलद्वाड़ा घरवासड़ा/424 848/1 0-00-48 कुुल जोड किता-1 0-00-48

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।

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ब अदालत श्री एन0 के0 शर्मा, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 67/NT/2011 ना0 तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

Ngodup Lhamo बनाम आम जनता। विषय.—प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री Nagodup Lhamo d/o श्री Lt. Khashe, निवासी Mcleodganj मौजा Dharamshala, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी पुत्री Tenzin Yougdhar का जन्म दिनांक 14-1-1999 को हुआ है। परन्तु एम0 सी0, धर्मशाला में जन्म पंजीकृत नहीं है, अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें।

इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता तथा सम्बन्धियों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्चे का जन्म पंजीकृत किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह अपना एतराज हमारी अदालत में दिनांक 24-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है। अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजीकृत किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।2403 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 आज दिनांक 8-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर। एन0 के0 शर्मा,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री एन0 के0 शर्मा, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 66/NT/2011 ना0 तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

Lobsang Dolma बनाम आम जनता। विषय.—प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री Lobsang Dolma d/o श्री Wangyal, निवासी Mcleodganj मौजा Dharamshala, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी भतीजी Phurbu Lhamo का जन्म दिनांक 10-9-1982 को हुआ है। परन्तु एम0 सी0, धर्मशाला में जन्म पंजीकृत नहीं है, अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें।

इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता तथा सम्बन्धियों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्चे का जन्म पंजीकृत किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह अपना एतराज हमारी अदालत में दिनांक 24-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है। अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजीकृत किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 8-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर। एन0 के0 शर्मा,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री एन0 के0 शर्मा, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 68/NT/2011 ना0 तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

Lobsang Dolkar बनाम आम जनता। विषय.—प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता। 2404 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 श्रीमती Lobsang Dolkar w/o श्री Sanga, निवासी Mcleodganj मौजा Dharamshala, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसके पुत्र Tenzin Dorjee का जन्म दिनांक 4-8-1974 को हुआ है। परन्तु एम0 सी0, धर्मशाला में जन्म पंजीकृत नहीं है, अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें।

इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता तथा सम्बन्धियों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्चे का जन्म पंजीकृत किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह अपना एतराज हमारी अदालत में दिनांक 24-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है। अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजीकृत किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 8-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर। एन0 के0 शर्मा,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत जनाब नरेश कुमार, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, ज्वाली, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

श्री गनेश कुमार उपनाम गनेश राज पुत्र श्री ध्यान सिंह, साकन महाल दरकारी, मौजा पलौहड़ा, तहसील ज्वाली, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

विषय.--नाम की दरुस्ती बारे।

उक्त प्रार्थी ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसका नाम भूमि खाता नं0 105, खतौनी नम्बर 272, खसरा कित्ता 4 रकबा तादादी 0-04-24 है0 वाकया महाल दरकारी, मौजा पलौहड़ा, तहसील ज्वाली में मेरा नाम गनेश कुमार पुत्र श्री ध्यान सिंह है जबकि स्कूल के प्रमाण-पत्र में पेरा नाम गनेश राज पुत्र ध्यान ंिसंह है। जबकि यह दोनों नाम एक ही आदमी के हैं प्रार्थी अपना नाम राजस्व रिकार्ड में गनेश कुमार उर्फ गनेश राज दर्ज करवाना चाहता है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि अगर उक्त नाम बारे किसी को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 31-10-2011 को न्यायालय में उपस्थित होकर असालतन या वकालतन एतराज पेश कर सकता है अन्यथा हाजिर न होने की सूरत में यकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नियमानुसार दरुस्ती करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 10-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर। नरेश कुमार, सहायक समाहर्ता, प्रथम श्रेणी,

ज्वाली, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।2405 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 ब अदालत श्री मनोज कुमार, तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता, प्रथम श्रेणी, देहरा, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

अनीता देवी बनाम आम जनता तस्दीक इन्तकाल मकफूद उलखबरी नम्बर 755, महाल मोईन व नम्बर 103, महाल रेही, तहसील देहरा।

श्रीमती अनीता देवी पत्नी श्री मदन लाल पुत्र श्री सन्त राम, निवासी मोईन, तहसील देहरा ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसका पति अरसा 20 वर्ष से लापता है तथा उसके जीवित होने या न होने बारे कोई पता नहीं है। श्री मदन लाल पुत्र श्री सन्त राम, निवासी मोईन के नाम महाल मोईन में अराजी खाता नम्बर 110, खतौनी नम्बर 121, खसरा कित्ता 4, रकबा तादादी 0-31-34 हैक्टेयर व महाल रेही में खाता नम्बर 41, खतौनी नम्बर 43, खसरा कित्ता 11, रकबा 0-55-07 हैक्टेयर है जिसे उसने अपने व अपने बच्चों के नाम करने बारे अनुरोध किया है। उपरोक्त दोनों महाल में श्री मदन लाल की बरास्त का मकफूद उलखबरी नम्बर 755 महाल मोईन व नम्बर 103 महाल रेही दर्ज है।

अतः इस इश्तहार द्वारा हर आम, खास व श्री मदन लाल के रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को श्री मदन लाल की सम्पत्ति को उसके वारसान के नाम करने बारे कोई आपत्ति हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 22-9-2011 को प्रातः दस बजे हाजिर आकर पेश कर सकता है उसके उपरान्त कोई भी उजर नहीं सुना जाएगा तथा उपरोक्त इन्तकाल का फैसला नियमानुसार कर दिया जाएगा।

आज दिनांक 23-7-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। मनोज कुमार, तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता, प्रथम श्रेणी,

देहरा, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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न्यायालय श्री हंस राज भाटिया, तहसीलदार व सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, खुण्डियां, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

श्री तारा चन्द उपनाम करतार चन्द सुपुत्र श्री लच्छमण, निवासी गांव भंदडू, डाकघर नाहलियां, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश . . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता . . प्रतिवादी। श्री करतार चन्द सुपुत्र श्री लच्छमण, निवासी गांव भंदडू, डाकघर नाहलियां, तहसील खुण्डियां ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र ब्यान हल्फी सहित पेश किया है कि उसका नाम ग्राम पंचायत नाहलियां व उसके स्कूल शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्र में करतार चन्द ही दर्ज है उसका प्रसिद्ध नाम भी करतार चन्द ही है। किन्तु राजस्व अभिलेख में गलती से उसका नाम तारा चन्द दर्ज हो गया है, जो गलत है। अतः नाम दरुस्ती का आदेश दिया जाए।

अतः इस इश्तहार के माध्यम से प्रतिवादी, आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त प्रार्थी के नाम की दरुस्ती बारे आपत्ति है तो वह दिनांक 25-8-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर होकर अपनी आपत्ति प्रकट कर सकता है अन्यथा दिनांक 25-8-2011 को कोई आपत्ति पेश 2406 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 न होने की सूरत में प्रतिवादीगण के विरूद्ध एकतरफा कार्यवाही अमल में लाते हुए राजस्व अभिलेख में तारा चन्द के नाम के साथ उपनाम करतार चन्द के नाम की प्रविष्टी दज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 28-7-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी हुआ।

मोहर। हंस राज भाटिया, तहसीलदार व सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

खुण्डियां, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री भूपेन्द्र कुमार अत्री, विशेष विवाह अधिकारी (एस0डी0एम0), निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

ब मुकद्दमा :

1. श्री राज कुमार पुत्र श्री —ण लाल, गांव व डाकघर अबधानीघाट, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश।

2. सपना देवी पुत्री श्री अमर सिंह, गांव व डाकघर अबधानीघाट, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश . . प्रार्थीगण।

बनाम

आम जनता . . प्रतिवादीगण। प्रार्थना-पत्र जेर धारा 15 विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अन्तर्गत विवाह पंजीकरण बारे। उपरोक्त मुकद्दमे में श्री राज कुमार पुत्र श्री —ष्ण लाल तथा सपना देवी पुत्री श्री अमर सिंह दोनों गांव व डाकघर अबधानीघाट, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर (हि0 प्र0) ने दिनांक 2 अगस्त, 2011 को अदालत हजा में प्रस्तुत होकर प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्हाेंने दिनांक 24 मई, 2011 को कार्यकारी दण्डाधिकारी निचार स्थित भावानगर के समक्ष शपथ-पत्र के आधार पर विवाह किया है और तब से पति-पत्नी के तौर पर रहते आ रहे हैं। अतः जेर धारा 15 विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अन्तर्गत उनका विवाह पंजीकरण करने की प्रार्थना की है।

अतः आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी व्यक्ति को इस विवाह बारे उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 5-9-2011 को प्रातः 10.00 बजे प्रातः या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत होकर अपना उजर/एतराज पेश करें अन्यथा दीगर कार्यवाही एकतरफा अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 2 अगस्त, 2011 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। भूपेन्द्र कुमार, विशेष विवाह अधिकारी (एस0डी0एम0), निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।2407 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 ब अदालत श्री बलवीर ठाकुर, उप-मण्डल दण्डाधिकारी, उप-मण्डल कार्यालय मनाली, हिमाचल प्रदेश Kelsang Dolker w/o Shri Gethar, r/o House No. 135, Ward No. 6 Gompa Road Manali, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

विषय.--प्रकाशन इश्तहार बावत जन्म तिथि पंजीकरण जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969.

Kelsang Dolker w/o Shri Gethar, r/o House No. 135, Ward No. 6 Gompa Road Manali, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में आवेदन-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसकी पुत्री Tsering Dolker जिसका जन्म दिनांक 17-8-1972 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि नगर परिषद्‌ मनाली के रिकार्ड में दर्ज नहीं की गई है, जिसे अब दर्ज करवाने के आदेश सादर फरमाए जावें। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को Tsering Dolker की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे आपत्ति हो तो वह दिनांक 1-9-2011 को या इससे पूर्व अदालत हजा में अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 2-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर। बलवीर ठाकुर,

उप-मण्डल दण्डाधिकारी, उप-मण्डल कार्यालय मनाली, हिमाचल प्रदेश।

__________

अज न्यायालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश मिसल नं0 तारीख मरजुआ तारीख पेशी ------ ---------- -------- 13/2011 6-7-2011 5-9-2011 श्री दिपक जसवाल पुत्र श्री रमेश कुमार, निवासी कोच्छु, डाकघर धमीरू, तहसील लड-भड़ोल, जिला . . वादी। मण्डी, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। विषय.--राजस्व मुहाल कोच्छु में नाम की दरुस्ती बारे आवेदन-पत्र।

श्री दिपक जसवाल पुत्र श्री रमेश कुमार, निवासी कोच्छु, डाकघर धमीरू, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में दावा दायर किया है कि प्रार्थी के पिता का वास्तविक नाम रमेश कुमार है जो ग्राम पंचायत अभिलेखों व प्रार्थी के शिक्षा दस्तावेजों में दर्ज हुआ है। परन्तु प्रार्थी के पिता का नाम राजस्व अभिलेख मुहाल कोच्छु में रमेश चन्द दर्ज हुआ है जिसकी दरुस्ती की जाए। 2408 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 अतः इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के पिता के नाम की दरुस्ती बारे यदि किसी को आपत्ति या एतराज हो तो वह दिनांक 5-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर अदालत अधोहस्ताक्षरी आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। कोई एतराज दर्ज न होने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दरुस्ती के आदेश दे दिए जाएंगे। आज दिनांक 8-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

-------

अज न्यायालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश मिसल नं0 तारीख मरजुआ तारीख पेशी ------ ---------- -------- 18/2011 3-8-2011 5-9-2011 सोनी देवी पुत्री श्री श्यामा राम, निवासी छन्छेहड़ (त्रिन्ढ), तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल . . वादी। प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। राजस्व मुहाल छन्छेहड़ में नाम की दरुस्ती बारे आवेदन-पत्र।

सोनी देवी पुत्री श्री श्यामा राम, निवासी छन्छेहड़ (त्रिन्ढ), तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में दावा दायर किया है कि प्रार्थिन के पिता का वास्तविक नाम श्यामा राम है जो ग्राम पंचायत अभिलेखों व प्रार्थिन के शिक्षा दस्तावेजों में दर्ज हुआ है। परन्तु प्रार्थिन के पिता का नाम राजस्व अभिलेख मुहाल छन्छेहड़ में श्याम सिंह दर्ज हुआ है जिसकी दरुस्ती की जाए।

अतः इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थिन के पिता के नाम की दरुस्ती बारे यदि किसी को आपत्ति या एतराज हो तो वह दिनांक 5-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर अदालत अधोहस्ताक्षरी आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। कोई एतराज दर्ज न होने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दरुस्ती के आदेश दे दिए जाएंगे। आज दिनांक 8-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।

-------

अज न्यायालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश मिसल नं0 तारीख मरजुआ तारीख पेशी ------ ---------- -------- 17/2011 28-7-2011 19-9-20112409 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 श्रीमती कौशल्या देवी विधवा श्री नरैण सिंह, निवासी बैरू, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल . . वादी। प्रदेश

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। राजस्व मुहाल बैरू में नाम की दरुस्ती बारे आवेदन-पत्र।

श्रीमती कौशल्या देवी विधवा श्री नरैण सिंह, निवासी बैरू, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में दावा दायर किया है कि उसके पति का वास्तविक नाम नरैण सिंह है जो सर्विस दस्तावेजों व शपथी प्रमाण-पत्र में भी दर्ज है। परन्तु राजस्व अभिलेख मुहाल बैरू में नैणू दर्ज हुआ है, जोकि गलत है। नैणू व नरैण सिंह उसी के नाम हैंं इसलिए महाल बैरू के अभिलेख में नैणू उपनाम नरैण सिंह दर्ज करने के आदेश दिए जाएंं।

अतः सर्वसाधारण को इश्तहार राजपत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी को प्रार्थिन के पति के नाम की दरुस्ती महाल बैरू के अभिलेख में करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 19-9-2011 को असालतन या वकालतन हाजिर होकर अपना उजर व एतराज पेश करें अन्यथा गैर हाजरी की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 9-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं तहसीलदार, सन्धोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

तारीख पेशी : 5-9-2011 उनवान मुकद्दमा : नाम दरुस्ती।

श्री सोहन सिंह पुत्र श्री लेघू, निवासी ललाणा, डाकघर मढी, तहसील सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

. . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता . . फरीकदोयम। श्री सोहन सिंह ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि मुहाल ललाणा के राजस्व अभिलेख में मेरा नाम सोहणू लिखा गया है जो गलत है मेरा वास्तविक नाम सोहन सिंह है। इसकी दरुस्ती के आदेश चाहे हैं।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दरुस्ती करने बारा कोई उजर व एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी दिनांक 5-9-2011 को सुबह 10 बजे हाजिर अदालत होकर अपना उजर पेश कर सकता है। बसूरत गैर-हाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दरुस्ती करने का आदेश पारित कर दिया जाएगा। 2410 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933 यह इश्तहार आज दिनांक 6-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी हुआ। मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं तहसीलदार,

सन्धोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं तहसीलदार, सन्धोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

तारीख पेशी : 5-9-2011 उनवान मुकद्दमा : मृत्यु तिथि दर्ज करने बारा।

श्रीमती मथरा देवी पत्नी स्व0 श्री मेहर चन्द, निवासी कंगोटा, तहसील सन्धोल, जिला कांगड़ा (हि0प्र0) . . प्रार्थीन।

बनाम

आम जनता . . फरीकदोयम। श्रीमती मथरा देवी ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसके ससुर स्व0 श्री भागी रथ की मृत्यु दिनांक 2-5-1977 को गांव कंगोटा में हुई है परन्तु अज्ञानतावश वह अपने ससुर की मृत्यु तिथि पंचायत अभिलेख में दर्ज नहीं करवा सकी। अब मृत्यु पंजीकरण के आदेश चाहे हैं।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त मृत्यु तिथि दर्ज करने बारा कोई उजर व एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी दिनांक 5-9-2011 को सुबह 10 बजे हाजिर अदालत होकर अपना उजर पेश कर सकता है। बसूरत गैर-हाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर मृत्यु तिथि दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया जाएगा। यह इश्तहार आज दिनांक 6-8-2011 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी हुआ। मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं तहसीलदार,

सन्धोल, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।

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In the Court of Shri Lalit Sharma, Executive Magistrate (Tehsildar), Kasauli, District Solan,

Himachal Pradesh

Case No. : 21/2011 Date of Institution : 8-8-2011 Date of Decision Pending for 19-9-2011 Shri Saraswati w/o Late Shri Prem Chand, resident of Village Baldiya, P. O. Kot Beja, . . Applicant. Tehsil Kasauli, District Solan, Himachal Pradesh

Versus

General Public

. . Respondent.

Application under section 13 (3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

2411 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

Shri Saraswati w/o Late Shri Prem Chand, resident of Village Baldiya, P. O. Kot Beja, Tehsil Kasauli, District Solan, Himachal Pradesh has moved an application before the undersigned under section 13 (3) of Birth and Death Registration Act, 1969 alongwith affidavits and other documents that her son Tara Chand died on 15-5-1995 at Village Baldiya, Tehsil Kasauli, District Solan, Himachal Pradesh but his date of death could not be registered by the applicant in the Gram Panchayat's death record, Kot Beja, Tehsil Kasauli, District Solan, Himachal Pradesh.

Therefore, by this proclamation the general public is hereby informed that any person having any objection for the registration of date of death of Tara Chand son of the applicant may submit his objection in writing in this court on or before 19-9-2011 at 10.00 A. M. failing which no objection will be entertained after expiry of date.

Given under my hand and seal of the court on this 9th day of August, 2011.

Seal.

LALIT SHARMA,

Executive Magistrate (Tehsildar),

Kasauli, District Solan, Himachal Pradesh.

2412 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 20 अगस्त, 2011/29 श्रावण, 1933

नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 20 August 2011. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2011-08-20.104_gazette_2011-20_08_2011/. Archive identifier in.gazette.himachal.2011-08-20.104_gazette_2011-20_08_2011.