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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 6, 07 April 2012

Published 07 April 2012

Gazette no.
6
Gazetteid
6/GAZETTE/2012-07/04/2012
Identifier
in.gazette.himachal.2012-04-07.6_gazette_2012-07_04_2012
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला, शनिवार 7 अप्रैल, 2012/18 चैत्र, 1934

हिमाचल प्रदेश सरकार

विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-17/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-21) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा। 6-राजपत्र/2012-7-4-2012 (275)276 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 2012 का विधेयक संख्यांक 21

म्ांत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) संशोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) अधिनियम, 2000 (2000 का अधिनियम संख्यांक 11) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--

1. संक्षिप्त नाम.-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) संशोधन अधिनियम, 2012 है।

2. धारा 3 का प्रतिस्थापन.-मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) अधिनियम, 2000 की धारा 3 (2000 का 11) की उपधारा (1) के खण्ड (क) से (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ः--

"(क) मुख्य मंत्री उनतालीस हजार रुपए प्रतिमास;

(ख) कैबिनेट मंत्री छत्तीस हजार रुपए प्रतिमास;

(ग) राज्य मंत्री तैंतीस हजार रुपए प्रतिमास; और

(घ) उप मन्त्री बत्तीस हजार रुपए प्रतिमास।''।

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उद्‌देश्यों और कारणों का कथन

निर्वाह व्यय और उन यथेष्ठ खर्चों, जो माननीय मन्त्रियों को जन प्रतिनिधि के रूप में जनजीवन की विभिन्न मांगों के कारण उपगत करने पड़ते हैं, में तीव्रता से वृद्धि के कारण उनके विद्यमान वेतन को बढ़ाना आवश्यक समझा गया है । इसलिए मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) अधिनियम, 2000 में संशोधन करना आवश्यक हो गया है ।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है ।

(प्रेम कुमार धूमल)

मुख्य मन्त्री। शिमला :

तारीख : ......................................., 2012277 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

वित्तीय ज्ञापन

विधयेक के खण्ड 2 के अधिनियमित किए जाने पर राजकोष से प्रतिवर्ष लगभग 7.20 लाख रुपए का अतिरिक्त आवर्ती व्यय होगा ।

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

--शून्य--

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भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशेें (जी.ए.डी.फाईल नं0 जी0ए0डी0 -सी (डी)(6)-1/2004)

हिमाचल प्रदेश कीे राज्यपाल, मंत्रियों के वेतन और भत्ता (हिमाचल प्रदेश) संशोधन विधयेक, 2012 की विषयवस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन, विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं।

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 21 of 2012

THE SALARIES AND ALLOWANCES OF MINISTERS (HIMACHAL PRADESH)

AMENDMENT BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Salaries and Allowances of Ministers (Himachal Pradesh) Act, 2000

(Act No. 11 of 2000).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follow:—

1. Short title.—This Act may be called the Salaries and Allowances of Ministers (Himachal Pradesh) Amendment Act, 2012.

2. Substitutions of section 3.—In section 3 of the Salaries and Allowances of Ministers (Himachal Pradesh) Act, 2000, (11 of 2000) in sub-section (1), for clauses (a) to (d), the following clauses shall be substituted, namely:—

"(a) Chief Minister: Rupees thirty nine thousand per mensem; (b) Cabinet Minister Rupees thirty six thousand per mensem; (c) Minister of State: Rupees thirty three thousand per mensem; and (d) Deputy Minister: Rupees thirty two thousand per mensem.".

278 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

Due to sharp increase in the cost of living and the considerable expenses which an Hon'ble Minister, as a public representative has to incur on account of various demands of the public life, it has been considered necessary to increase their existing salaries. This has necessitated amendment in the Salaries and Allowances of Ministers (Himachal Pradesh) Act, 2000.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

(PREM KUMAR DHUMAL) Chief Minister.

Shimla :

The .................... April, 2012.

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FINANCIAL MEMORANDUM

Clause 2 of the Bill, when enacted, will entail additional recurring expenditure out of the State Exchequer to the tune of Rs. 7.20 lakhs per annum approximately.

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MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil——

___________

RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207 OF THE

CONSTITUTION OF INDIA

(GAD File No. GAD-C (PA) (6)-1/2004-)

The Governor of Himachal Pradesh, having been informed of the subject matter of the Salaries and Allowances of Ministers (Himachal Pradesh) Amendment Bill, 2012, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill in the State Legislative Assembly.

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विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-16/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष279 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 के वेतन (संशोधन) विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-22) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 22 हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन (संशोधन) विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन अधिनियम, 1971 (1971 का अधिनियम संख्यांक 4) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--

1. संक्षिप्त नाम.-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम, हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन (संशोधन) अधिनियम, 2012 है।

2. धारा 3 का संशोधन.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन अधिनियम, 1971 (1971 का 4) (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 3 की उपधारा (1) में ''इक्तीस'' शब्द के स्थान पर ''छत्तीस'' शब्द रखा जाएगा।

3. धारा 4 संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) में, ''अट्‌ठाईस'' शब्द के स्थान पर ''तैंतीस'' शब्द रखा जाएगा।

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उद्‌देश्यों और कारणों का कथन

निर्वाह व्यय और उन यथेष्ठ खर्चों, जो माननीय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को जन प्रतिनिधि के रूप में जनजीवन की विभिन्न मांगों के कारण उपगत करने पड़ते हैं, में तीव्रता से वृद्धि के कारण उनके विद्यमान वेतन को बढ़ाना आवश्यक समझा गया है । इसलिए, हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन अधिनियम, 1971 में संशोधन किया जाना आवश्यक हो गया है।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है।

(प्रेम कुमार धूमल) मुख्य मन्त्री। शिमला :

तारीख : ................................, 2012280 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

वित्तीय ज्ञापन

विधयेक के खण्ड 2 और 3 के अधिनियमित किए जाने पर राजकोष से प्रतिवर्ष लगभग 1.20 लाख रुपए का अतिरिक्त आवर्ती व्यय होगा ।

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

--शून्य--

भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशेें (जी.ए.डी.फाईल नं0 जी0ए0डी0-सी (डी) (6) 1/2006)

हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन (संशोधन) विधेयक, 2012 की विषय-वस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन, विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं।

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL NO. 22 OF 2012

THE HIMACHAL PRADESH LEGISLATIVE ASSEMBLY SPEAKER'S AND

DEPUTY SPEAKER'S SALARIES (AMENDMENT) BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Legislative Assembly Speaker's and Deputy

Speaker's Salaries Act, 1971 (Act No. 4 of 1971).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follow:—

1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Legislative Assembly Speaker's and Deputy Speaker's Salaries (Amendment) Act, 2012.

2. Amendment of section 3.—In section 3 of the Himachal Pradesh Legislative Assembly Speaker's and Deputy Speaker's Salaries Act, 1971 (4 of 1971) (hereinafter referred to as the "principal Act"), in sub-section (1), for the words "thirty one", the words "thirty six" shall be substituted.

3. Amendment of section 4.—In section 4 of the principal Act, in sub-section (1), for the words "twenty eight", the words "thirty three" shall be substituted.

281 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

Due to sharp increase in the cost of living and the considerable expenses which Hon'ble Speaker and Deputy Speaker, as a public representative has to incur on account of various demands of the public life, it has been considered necessary to increase their existing salaries. This has necessitated amendments in the Himachal Pradesh Legislative Assembly Speaker's and Deputy Speaker's Salaries Act, 1971.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

(PREM KUMAR DHUMAL) Chief Minister.

Shimla :

The ................................, 2012.

________

FINANCIAL MEMORANDUM

Clauses 2 and 3 of the Bill, when enacted, will entail additional recurring expenditure out of the State Exchequer to the tune of Rs. 1.20 lakhs per annum approximately.

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MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

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RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207 OF THE

CONSTITUTION OF INDIA

(GAD File No. GAD-C-(D) (6) 1/2006)

The Governor of Himachal Pradesh, having been informed of the subject matter of the Himachal Pradesh Legislative Assembly Speaker's and Deputy Speaker' Salaries (Amendment) Bill, 2012, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill in the State Legislative Assembly.

282 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-18/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-23) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 23 हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) संशोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) अधिनियम, 2006 (2007 का अधिनियम संख्यांक 1) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः--

1. संक्षिप्त नाम.- इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम, हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) संशोधन विधेयक, 2012 है।

2. धारा 7 का संशोधन.-हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) विधेयक, 2006 (2007 का 1) की धारा 7 में "अट्‌ठारह हजार और सत्रह हजार" शब्दों के स्थान पर क्रमशः "तेईस हजार और बाईस हजार" शब्द रखे जाएंगे।

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उद्‌देश्यों और कारणों का कथन

निर्वाह व्यय और उन यथेष्ठ खर्चों, जो माननीय मुख्य संसदीय सचिवों और संसदीय सचिवों को जन प्रतिनिधि के रूप में जनजीवन की विभिन्न मांगों के कारण उपगत करने पड़ते हैं, में तीव्रता से वृद्धि के कारण उनके विद्यमान वेतन को बढ़ाना आवश्यक समझा गया है। इसलिए हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) अधिनियम, 2006 (2007 का अधिनियम संख्यांक 1) में संशोधन करना आवश्यक हो गया है। यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है।

(प्रेम कुमार धूमल) मुख्य मन्त्री। शिमला : तारीख : ....................................., 2012283 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

वित्तीय ज्ञापन

विधयेक के खण्ड 2 के अधिनियमित होने पर राजकोष से प्रतिवर्ष लगभग 1.20 लाख रुपए का अतिरिक्त आवर्ती व्यय होगा।

---------

प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

-शून्य-

---------

भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशें (जी.ए.डी.फाईल नं0 जी0ए0डी0-सी (डी) (6)-3/2006)

हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुख सुविधाएं) संशोधन विधेयक, 2012 की विषय-वस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन, विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं।

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL NO. 23 OF 2012

THE HIMACHAL PRADESH PARLIAMENTARY SECRETARIES (APPOINTMENT,

SALARIES, ALLOWANCES, POWERS, PRIVILEGES AND AMENITIES)

AMENDMENT BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries,

Allowances, Powers, Privileges and Amenities) Act, 2006 (Act No. 1 of 2007).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follow:—

1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries, Allowances, Powers, Privileges and Amenities) Amendment Act, 2012.

2. Amendment of section 7.—In section 7 of the Himachal Pradesh Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries, Allowances, Powers, Privileges and Amenities) Act, 2006, (1 of 2007) for the figures and signs "18,000/-" and "17,000/-", the figures and signs "23,000/-" and "22,000/-" shall respectively be substituted.

284 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

Due to sharp increase in the cost of living and the considerable expenses which Hon'ble Chief Parliamentary Secretaries and Parliamentary Secretaries, as a public representative has to incur on account of various demands of the public life, it has been considered necessary to increase their existing salaries. This has necessitated amendments in the Himachal Pradesh Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries, Allowances, Powers, Privileges and Amenities) Act, 2006 (Act No. 1 of 2007).

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

(PREM KUMAR DHUMAL) Chief Minister.

Shimla :

The ............................., 2012.

___________

FINANCIAL MEMORANDUM

Clause 2 of the Bill, when enacted, will entail additional recurring expenditure out of the State Exchequer to the tune of Rs. 1.20 lakhs per annum approximately.

_________

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

_________

RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207 OF THE

CONSTITUTION OF INDIA

(File No. GAD-C-(D) (6) 3/2006)

The Governor of Himachal Pradesh, having been informed of the subject matter of the Himachal Pradesh Parliamentary Secretaries (Appointment, Salaries, Allowances, Powers, Privileges and Amenities) Amendment Bill 2012, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill in the State Legislative Assembly.

285 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-19/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेन्शन) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-24) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 24 हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संषोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1971 (1971 का अधिनियम संख्यांक 8) का और संशोधन करने के लिए विधेयक ।

भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम.-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन अधिनियम, 2012 है ।

2. धारा 3 का संशोधन.- हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1971 (1971 का 8) (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ 'मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 3 की उपधारा (1) ़में ''पन्द्रह हजार रूपए'' शब्दों के स्थान पर ''बीस हजार रूपए'' शब्द रखे जाएंगे ।

3. धारा 4 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (ii) में "पांच सौ रूपए" शब्दों के स्थान पर ''एक हजार रूपए'' शब्द रखे जाएंगे ।

4. धारा 4-ख का संशोधन.- मूल अधिनियम की धारा 4-ख में "बीस हजार रूपए" शब्दों के स्थान पर "पैंतीस हजार रूपए'' शब्द रखे जाएंगे ।

5. धारा 5-क का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 5-क में "एक हजार पांच सौ रूपए" शब्दों के स्थान पर "तीन हजार रूपए'' शब्द रखे जाएंगे ।

6. धारा 6-ख का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 6-ख की उपधारा (1) में "चौदह हजार रूपए" शब्दों के स्थान पर "अठारह हजार रूपए'' शब्द रखे जाएंगे।286 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

उद्‌देश्यों और कारणों का कथन

निर्वाह व्यय और उन यथेष्ट खर्चों, जो राज्य विधान सभा के माननीय सदस्यों को जन-प्रतिनिधि के रूप में जन जीवन की विभिन्न मांगों के कारण उपगत करने पड़ते हैं, में तीव्रता से वृद्धि के कारण उनकी विद्यमान उपलब्धियों और सुख-सुविधाओं में संशोधन की लगातार मांग रही है इसलिए, हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेन्शन) अधिनियम, 1971 में संशोधन करना आवश्यक समझा गया है। यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है ।

प्रेम कुमार धूमल, मुख्य मन्त्री । षिमला :...........

तारीख :.....................अप्रैल, 2012.

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वित्तीय ज्ञापन

विधयेक के खण्ड 2 से 6 के अधिनियमित किए जाने पर राजकोष से प्रतिवर्ष लगभग 3.30 करोड़ रूपए का अतिरिक्त आवर्ती व्यय होगा ।

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

---शून्य--

भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल की सिफारिशेें

(जी.ए.डी.फाईल नं0 जी0ए0डी0-सी (डी) 5-1/2011)

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेन्शन) संशोधन विधेयक, 2012 की विषयवस्तु के बारे में सूचित किए जाने के पश्चात्‌, भारत के संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन, विधेयक को विधान सभा में पुरःस्थापित करने और उस पर विचार करने की सिफारिश करती हैं ।

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL NO. 24 OF 2012

THE HIMACHAL PRADESH LEGISLATIVE ASSEMBLY (ALLOWANCES AND

PENSION OF MEMBERS) AMENDMENT BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Himachal Pradesh Legislative Assembly (Allowances and Pension of

Members)Act, 1971 (Act No. 8 of 1971).

287 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follow:-

1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Legislative Assembly (Allowances and Pension of Members ) Amendment Act, 2012.

2. Amendment of section 3.—In section 3 of the Himachal Pradesh Legislative Assembly (Allowances and Pension of Members) Act, 1971 (8 of 1971) ( hereinafter referred to as the "principal Act"), in sub-section (1), for the words "fifteen thousand", the words " twenty thousand " shall be substituted.

3. Amendment of section 4.—In section 4 of the principal Act, in sub-section (1), in clause (ii), for the words "five hundred", the words "one thousand" shall be substituted.

4. Amendment of section 4-B.—In section 4-B of the principal Act, for the words "twenty thousand", the words "thirty five thousand" shall be substituted.

5. Amendment of section 5-A.—In section 5-A of the principal Act, for the words "one thousand five hundred", .the words "three thousand " shall be substituted.

6. Amendment of section 6-B.— In section 6-B of the principal Act, in sub-section (1), for the figures "14000", the figures and sign "18,000" shall be substituted.

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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

Due to sharp increase in the cost of living and the considerable expenses which the Hon'ble Members of the State Legislative Assembly as a public representative has to incur on account of various demands of the public life, there has been persistent demand for the revision of their existing emoluments and amenities. This has necessitated the amendments in the Himachal Pradesh Legislative Assembly (Allowances and Pension of Members) Act, 1971.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

PREM KUMAR DHUMAL, Chief Minister.

Shimla: The _______ April, 2012.

___________

FINANCIAL MEMORANDUM

Clause 2 to 6 of the Bill, when enacted, will entail additional recurring expenditure out of the State Exchequer to the tune of Rs.3.30 crore per annum approximately.

288 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—NIL—

___________

RECOMMENDATIONS OF THE GOVERNOR UNDER ARTICLE 207 OF THE

CONSTITUTION OF INDIA

(GAD File No. GAD-C (D)-5-1/2011)

The Governor of Himachal Pradesh, having been informed of the subject matter of the Himachal Pradesh Legislative Assembly (Allowances and Pension of Members) Amendment Bill, 2012, recommends, under article 207 of the Constitution of India, the introduction and consideration of the Bill in the State Legislative Assembly.

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विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-24/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ इमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नोलॉजी (स्थापना और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-13) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 13 बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ ईमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नोलॉजी (स्थापना और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में)

बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ ईमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नॉलोजी (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2009 (2009 का अधिनियम संख्यांक 21) का और संशोधन करने के लिए विधेयक ।289 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 भारत गणराज्य के तिरसठवेंं वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम.-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ ईमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नोलॉजी (स्थापना और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2012 है ।

2. धारा 2 का संशोधन.-बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ ईमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नोलॉजी (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2009 (2009 का 21) (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 में ,-

(क) खण्ड (ढ) में ''वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्‌'' शब्दों के पश्चात्‌ '',हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे ; और

(ख) खण्ड ''(फ)'' के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खण्ड ''(ब)'' अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''(ब) ''विनियामक आयोग'' से हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 की धारा 3 (2011 का 15) के अधीन स्थापित हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग अभिप्रेत है । '' ।

3. धारा 3 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 3 के खण्ड (ज) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (झ) और (ञ) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

''(झ) विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति के उद्‌देश्यों में सुभिन्न योगदान अर्थात्‌ परम्परागत संस्थाओं द्वारा नेमीतः प्रस्थापित सामान्य प्रकृति के कार्यक्रमों, जो कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, औषधि, दंत चिकित्सा, भेषजी, प्रबन्धन इत्यादि में परम्परागत उपाधियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं, से स्पष्टतया भिन्न शैक्षणिक विनियोजन करने के लिए सिद्ध योग्यता सहित, विशेषज्ञता के क्षेत्रों में लगे रहना; और

(ञ) सुदृढ़ अंतर-विषयक अभिविन्यास और संयोजन सहित, विभिन्न विषयों में विस्तृत आधारमुक्त और व्यवहार्य स्नातकपूर्व, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रम स्थापित करना । '' । 4. धारा 10 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 10 के द्वितीय परन्तुक के पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''परन्तु यह और कि विश्वविद्यालय की आय और सम्पत्ति का कोई भी भाग, प्रत्यक्षतः या परोक्षतः लाभांश, बोनस या अन्यथा, किसी भी तरह, लाभ के रूप में उन व्यक्तियों को, जो किसी समय विश्वविद्यालय के सदस्य थे या हैं या उनमें से किसी को या उनके माध्यम से दावा करने वाले किसी व्यक्ति को, संदत्त या अन्तरित नहीं किया जाएगा, परन्तु यहां इसमें अन्तर्विष्ट कोई बात विश्वविद्यालय को प्रदान की गई किसी सेवा के प्रतिफलस्वरूप पारिश्रमिक या उसके किसी सदस्य या अन्य व्यक्ति को अथवा यात्रा या अन्य भत्तों तथा ऐसे अन्य प्रभारों के लिए सद्‌भावपूर्वक संदाय से निवारित नहीं करेगी ।''।

5. धारा 18 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 18 के खण्ड (ग) में "पांच" शब्द के स्थान पर "तीन" शब्द रखा जाएगा ।

6. धारा 19 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 19 में,--

(क) उपधारा (1) के खण्ड (ख) से (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ :- ''(ख) दो से अनधिक संकायाध्यक्ष (वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा) ;

290 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 (ग) विख्यात शिक्षाविद्‌ों में से या प्रबन्धन क्षेत्र से प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ;

(घ) विनियामक आयोग के परामर्श से सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दो विख्यात शिक्षाविद्‌ ;";

(ख) इस प्रकार प्रतिस्थापित खण्ड (घ) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (ङ) और (च) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

''(ङ) वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा शिक्षकों (आचार्यों, सह आचार्यों) में से दो व्यक्ति ;

और

(च) रजिस्ट्रार सदस्य-सचिव होगा । "; और

(ग) उपधारा (5) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उपधारा (6) अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ :-

''(6) विश्वविद्यालय का प्रबंध बोर्ड अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक कृत्यों का पालन करने हेतु प्रायोजक निकाय से पूर्ण स्वायतता सहित स्वतन्त्र होगा । '' ।

7. धारा 31 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 31 की उपधारा (5) में ''राज्य सरकार'' शब्दों के स्थान पर ''विनियामक आयोग'' शब्द रखे जाएंगे ।

8. धारा 32 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 32 की उपधारा (1) में ''और इसे" शब्दों के पश्चात्‌ आए शब्दों "सरकार को अनुमोदन के लिए भेजेगा और सरकार प्रस्ताव प्राप्ति के एक मास के भीतर अनुमोदन प्रदान करेगी" के स्थान पर "विनियामक आयोग द्वारा प्रदान पाठ्‌यक्रमों के अनुमोदन सहित, प्रत्येक पूर्ववर्ती शैक्षणिक वर्ष के 31 दिसम्बर से पूर्व सरकार को इसके अनुमोदन के लिए भेजेगा तथा सरकार प्रस्ताव की प्राप्ति के तीन मास के भीतर अनुमोदन सूचित करेगी" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे और उपधारा (1) के नीचे आए प्रथम परन्तुक का लोप किया जाएगा ।

9. धारा 33 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 33 के परन्तुक में ''सरकार'' शब्द जहां-जहां यह आता है, के स्थान पर ''विनियामक आयोग'' शब्द रखे जाएंगे ।

10. धारा 34 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 34 की उपधारा (1) के परन्तुक में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है, के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

11. धारा 36 का प्रतिस्थापन.- मूल अधिनियम की धारा 36 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

''36. विश्वविद्यालय का प्रत्यायन.--विश्वविद्यालय, समय-समय पर राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ (एन.ए.ए.सी), बंगलौर से प्रत्यायन अभिप्राप्त करेगा और सरकार तथा ऐसे अन्य विनियमन निकायों को, जो विश्वविद्यालय द्वारा चलाए गए पाठ्‌यक्रमों से संबद्ध हैं, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए ग्रेड के बारे में सूचित करेगा तथा विश्वविद्यालय ऐसे प्रत्यायन को, ऐसी अवधि के पश्चात्‌, जैसी विहित की जाए, नवीकृत करवाएगा । ''।

12. धारा 38 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 38 की उपधारा (2) में ''वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियां'' शब्दों के पश्चात्‌ तथा ''सरकार'' शब्द से पूर्व ''विनियामक आयोग और'' शब्द रखे जाएंगे ।291 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 13. धारा 39 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 39 में ,--

(क) उपधारा (4) में ''तुलन-पत्र की प्रतियां,'' शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌ तथा ''सरकार'' शब्द से पूर्व ''विनियामक आयोग और" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और

(ख) उपधारा (5) में ''सरकार'' शब्द जहां-जहां यह आता है, के स्थान पर "विनियामक आयोग और सरकार" शब्द रखे जाएंगे ।

14. धारा 40 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 40 में ,-

(क) उपधारा (1) में ''सरकार'' शब्द के पश्चात्‌ ''या विनियामक आयोग'' शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और

(ख) उपधारा (2) में ''सरकार,'' शब्द और चिन्ह के स्थान पर ''यथास्थिति, सरकार या विनियामक आयोग" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे और उपधारा (3) में ''तो'' शब्द के पश्चात्‌ '',यथास्थिति, विनियामक आयोग या" चिन्ह और शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।

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उद्देश्यों और कारणों का कथन

राज्य सरकार ने प्राइवेट शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के समुचित स्तर, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान और छात्रों के हितों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य में हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 की धारा 3 के अधीन हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग स्थापित किया है । राज्य में स्थापित समस्त प्राइवेट विश्वविद्यालयों के अपने पृथक अधिनियम हैं, जिनमें विनियामक आयोग द्वारा जांच पड़ताल और पर्यवेक्षण से सम्बन्धित उपबन्ध अन्तर्विष्ट नहीं हैं । इसलिए, राज्य में प्राइवेट विश्वविद्यालयों को विनियमित करने वाले समस्त अधिनियमों में यथोचित संशोधन करना आवश्यक समझा गया है ताकि विनियामक आयोग को, ऐसे प्राइवेट विश्वविद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करने और उन्हें आवश्यक निदेश देने की शक्तियां प्राप्त हों और इन विश्वविद्यालयों के विरूद्ध प्राप्त हुए परिवादों (शिकायतों) का निपटारा करने की भी शक्तियां प्राप्त हों । इसलिए, बद्‌दी यूनिवर्सिटी ऑफ ईमर्जिंग सांईसिज़ एण्ड टैक्नोलॉजी (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2009 (2009 का अधिनियम संख्यांक 21) को, उसमें विनियामक आयोग को, जब भी अपेक्षित हो, निदेश जारी करने तथा विश्वविद्यालय के विरूद्ध प्राप्त परिवादों (शिकायतों) आदि, का निपटारा करने हेतु सशक्त करने वाले उपबन्धों को सम्मिलित करते हुए, संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है । इसके अतिरिक्त, शासी निकाय और प्रबन्ध बोर्ड के सदस्यों की संख्या को तथा प्रायोजक निकाय के प्रतिनिधित्व को कम करने का भी विनिश्चय किया गया है । इसके अतिरिक्त यह भी विनिश्चय किया गया है कि फीस संरचना के समझे गए अनुमोदन (डीम्ड अप्रूवल) के उपबन्ध का लोप किया जाए ताकि विश्वविद्यालय, इस उपबन्ध का, सरकार की ओर से अनवधानता से हुई देरी के कारण, दुरूपयोग न कर सके । इसलिए, पूर्वोक्त अधिनियम को संशोधित करना आवश्यक हो गया है।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है ।

ईश्वर दास धीमान,

प्रभारी मन्त्री । शिमला : तारीखः .............................., 2012292 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

वित्तीय ज्ञापन

-शून्य-

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

-शून्य-

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 13 of 2012

THE BADDI UNIVERSITY OF EMERGING SCIENCES AND TECHNOLOGY

(ESTABLISHMENT AND REGULATION) AMENDMENT BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Baddi University of Emerging Sciences and Technology (Establishment and Regulation) Act, 2009 (Act No. 21 of 2009).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follows:-

1. Short title.—This Act may be called the Baddi University of Emerging Sciences and Technology (Establishment and Regulation) Amendment Act, 2012.

2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Baddi University of Emerging Sciences and Technology (Establishment and Regulation) Act, 2009 (hereinafter referred to as the "principal Act"),—

(a) in clause (n), for the words "Council of Scientific and Indian Research", the words and sign "Council of Scientific and Industrial Research, the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission" shall be substituted.; and (b) after clause (v), the following new clause (w) shall be inserted, namely:—

"(w) "Regulatory Commission" means the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission, established under section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010 (Act No. 15 of 2011).".

293 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

3. Amendment of section 3.—In section 3 of the principal Act, after clause (h), the following new clauses (i) and (j) shall be inserted, namely:—

"(i) to engage in areas of specialization with proven ability to make distinctive contributions to the objectives of the University education system that is academic engagement clearly distinguishable from programmes of an ordinary nature that lead to conventional degrees in arts, science, engineering, medicine, dental, pharmacy, management, etc. routinely offered by conventional institutions; and

(j) to establish broad-based, and viable under graduate, post graduate and research programmes in several disciplines with firm interdisciplinary orientation and linkages.".

4. Amendment of section 10.—In section 10 of the principal Act, after second proviso, the following third proviso shall be inserted, namely:—

"Provided further that no portion of income and property of the University shall be paid or transferred directly or indirectly, by way of dividend, bonus or otherwise, howsoever, by way of profit to the persons who were at any time or are members of the University or to any of them or any person claiming through them; provided that nothing herein contained shall prevent the payment in good faith of remuneration to any member thereof or other person as consideration for any service rendered to the University or for travelling or other allowances and such other charges.".

5. Amendment of section 18.—In section 18 of the principal Act, in clause(c), for the word "five", the word "three" shall be substituted.

6. Amendment of section 19.—In section 19 of the principal Act,—

(a) in sub-section (1), for clauses (b) to (d), the following clauses shall be substituted, namely:—

"(b) Deans of Faculties not exceeding two (by rotation based on seniority);

(c) two persons, nominated by the sponsoring body from amongst eminent educationists or from management field;

(d) two eminent academicians to be nominated by the Government in consultation with the Regulatory Commission;";

(b) after clause (d) as so substituted, the following new clauses (e) and (f) shall be inserted, namely:—

"(e) two persons from amongst the teachers (from Professors, Associate Professors), by rotation based on seniority; and

(f) the Registrar shall be the Member Secretary."; and

(c) after sub-section (5), the following new sub-section (6) shall be inserted, namely:—

"(6) The Board of Management of the University shall be independent of the Sponsoring Body with full autonomy to perform its academic and administrative functions.".

294 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

7. Amendment of section 31.—In section 31 of the principal Act, in sub-section (5), for the words "State Government", the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

8. Amendment of section 32.—In section 32 of the principal Act, in sub-section (1), after the words "for its approval", the words and figures "before 31st December of every preceding academic year alongwith the approval of courses granted by the Regulatory Commission" shall be inserted and the first proviso appearing below sub-section (1) shall be omitted.

9. Amendment of section 33.—In section 33 of the principal Act, in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

10. Amendment of section 34.—In section 34 of the principal Act, in sub-section (1), in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

11. Substitution of section 36.—For section 36 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:—

"36. Accreditation of the University.—The University shall obtain accreditation from the National Council of Assessment and Accreditation (NAAC), Bangalore, as per the guidelines issued by the National Assessment and Accreditation Council from time to time and inform the Government and such other regulating bodies which are connected with the courses taken up by the University about the grade provided by NAAC to the University and the University shall get renewed such accreditation after such period as may be prescribed.".

12. Amendment of section 38.—In section 38 of the principal Act, in sub-section (2), after the words "presented to", the words "the Regulatory Commission and" shall be inserted.

13. Amendment of section 39.—In section 39 of the principal Act,—

(a) in sub-section (4), after the words "presented to the", the words "Regulatory Commission and the" shall be inserted; and

(b) in sub-section (5), for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission and the Government" shall be substituted.

14. Amendment of section 40.—In section 40 of the principal Act,—

(a) in sub-section (1), after the words "the Government", the words "or the Regulatory Commission" shall be inserted.; and

(b) in sub-sections (2) and (3), after the words "the Government", the words and signs "or the Regulatory Commission, as the case may be,", shall be inserted.

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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

In order to ensure appropriate standard of admission, teaching, examination, research and protection of interest of students in the Private Educational Institutions, the State Government has established the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) under295 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010, in the State. All the Private Universities established in the State have their separate Acts which do not contain the provisions relating to checking and supervision by the Regulatory Commission. Thus, it has been considered essential to make suitable amendments in all the Acts regulating the Private Universities in the State so that the Regulatory Commission may have the powers to conduct inspections from time to time and to issue necessary direction to such Private Universities and may also have the powers to deal with the complaints received against these Universities. As such, it has been decided to amend the Baddi University of Emerging Sciences and Technology (Establishment and Regulation) Act, 2009 (Act No. 21 of 2009) incorporating the provisions empowering the Regulatory Commission to issue directions as and when required and to deal with the complaints etc. received against the University. Further, it has also been decided to reduce the number of members in the Governing body and Board of Management and representation of the sponsoring body. Further, it has also been decided that provision of deemed approval of fee structure should be omitted so that the University may not misuse this provision due to some inadvertent delay from the Government. This has necessitated amendments in the Act ibid. This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

ISHWAR DASS DHIMAN,

Minister-in-Charge.

SHIMLA: The.....................2012.

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FINANCIAL MEMORANDUM

-Nil-

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MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

-Nil-

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विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-27/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-16) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को296 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 16 महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2010 का अधिनियम संख्यांक 22) का और संशोधन करने के लिए विधेयक ।

भारत गणराज्य के तिरसठवेंं वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2012 है ।

2. धारा 2 का संशोधन.--महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2010 का 22) (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 2 में ,- (क) खण्ड (ढ) में "वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्‌" शब्दों के पश्चात्‌ ",हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग" चिन्ह और शब्द रखे जाएंगे ; और (ख) खण्ड "(फ)" के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खण्ड "(ब)" अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः- "(ब) "विनियामक आयोग" से हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 (2011 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग अभिप्रेत है । " ।

3. धारा 3 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 3 के खण्ड (ज) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (झ) और (ञ) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(झ) विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति के उद्‌देश्यों में सुभिन्न योगदान अर्थात्‌ परम्परागत संस्थाओं द्वारा नेमीतः प्रस्थापित सामान्य प्रकृति के कार्यक्रमों, जो कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, औषधि, दंत चिकित्सा, भेषजी, प्रबन्धन इत्यादि में परम्परागत उपाधियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं, से स्पष्टतया भिन्न शैक्षणिक विनियोजन करने के लिए सिद्ध योग्यता सहित विशेषज्ञता के क्षेत्रों में लगे रहना ; और297 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 (ञ) सुदृढ़ अंतर-विषयक अभिविन्यास और संयोजन सहित विभिन्न विषयों में विस्तृत आधारमुक्त और व्यवहार्य स्नातकपूर्व, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रम स्थापित करना "। 4. धारा 10 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 10 के द्वितीय परन्तुक के पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

"परन्तु यह और कि विश्वविद्यालय की आय और सम्पत्ति का कोई भी भाग, प्रत्यक्षतः या परोक्षतः लाभांश, बोनस या अन्यथा, किसी भी तरह, लाभ के रूप में उन व्यक्तियों को, जो किसी समय विश्वविद्यालय के सदस्य थे या हैं या उनमें से किसी को या उनके माध्यम से दावा करने वाले किसी व्यक्ति को, संदत्त या अन्तरित नहीं किया जाएगा, परन्तु यहां इसमें अन्तर्विष्ट कोई बात विश्वविद्यालय को प्रदान की गई किसी सेवा के प्रतिफलस्वरूप पारिश्रमिक या उसके किसी सदस्य या अन्य व्यक्ति को अथवा यात्रा या अन्य भत्तों तथा ऐसे अन्य प्रभारों के लिए सद्‌भावपूर्वक संदाय से निवारित नहीं करेगी । " ।

5. धारा 18 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 18 के खण्ड (ग) में "पांच" शब्द के स्थान पर "तीन" शब्द रखा जाएगा ।

6. धारा 19 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 19 में ,-

(क) उपधारा (1) के खण्ड (ख) से (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(ख) दो से अनधिक संकायाध्यक्ष (वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा) ;

(ग) विख्यात शिक्षाविद्‌ों में से या प्रबन्धन क्षेत्र से प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ;

(घ) विनियामक आयोग के परामर्श से सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दो विख्यात शिक्षाविद्‌ ;";

(ख) इस प्रकार प्रतिस्थापित खण्ड (घ) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (ङ) और (च) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(ङ) वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा शिक्षकों (आचार्यों, सह आचार्यों) में से

दो व्यक्ति ; और

(च) रजिस्ट्रार सदस्य-सचिव होगा । "; और

(ग) उपधारा (5) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उपधारा (6) अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(6) विश्वविद्यालय का प्रबंध बोर्ड अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक कृत्यों का पालन करने हेतु प्रायोजक निकाय से पूर्ण स्वायत्तता सहित स्वतन्त्र होगा । " । 7. धारा 31 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 31 की उपधारा (5) में "राज्य सरकार" शब्दों के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

8. धारा 32 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 32 की उपधारा (1) में "और इसे" शब्दों के पश्चात्‌ आए शब्दों "सरकार को अनुमोदन के लिए भेजेगा और सरकार प्रस्ताव प्राप्ति के एक मास के भीतर 298 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 अनुमोदन प्रदान करेगी" के स्थान पर "विनियामक आयोग द्वारा प्रदान पाठ्‌यक्रमों के अनुमोदन सहित प्रत्येक पूर्ववर्ती शैक्षणिक वर्ष के 31 दिसम्बर से पूर्व सरकार को इसके अनुमोदन के लिए भेजेगा तथा सरकार प्रस्ताव की प्राप्ति के तीन मास के भीतर अनुमोदन सूचित करेगी" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे और उपधारा (1) के नीचे आए प्रथम परन्तुक का लोप किया जाएगा ।

9. धारा 33 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 33 के परन्तुक में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

10. धारा 34 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 34 की उपधारा (1) के परन्तुक में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है , के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

11. धारा 36 का प्रतिस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 36 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"36. विश्वविद्यालय का प्रत्यायन.-विश्वविद्यालय, समय-समय पर राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ (एन.ए.ए.सी.), बंगलौर से प्रत्यायन अभिप्राप्त करेगा और सरकार तथा ऐसे अन्य विनियमन निकायों को, जो विश्वविद्यालय द्वारा चलाए गए पाठयक्रमों से संबद्ध हैं, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए ग्रेड के बारे में सूचित करेगा तथा विश्वविद्यालय ऐसे प्रत्यायन को, ऐसी अवधि के पश्चात्‌ जैसी विहित की जाए, नवीकृत करवाएगा । " ।

12. धारा 38 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 38 की उपधारा (2) में "वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियां" शब्दों के पश्चात्‌ तथा "सरकार" शब्द से पूर्व "विनियामक आयोग और" शब्द रखे जाएंगे । 13. धारा 39 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 39 में ,-

(क) उपधारा (4) में "तुलन-पत्र की प्रतियां," शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌ तथा "सरकार" शब्द से पूर्व "विनियामक आयोग और" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और (ख) उपधारा (5) में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है के स्थान पर "विनियामक आयोग और सरकार" शब्द रखे जाएंगे ।

14. धारा 40 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 40 में ,-

(क) उपधारा (1) में "सरकार" शब्द के पश्चात्‌ "या विनियामक आयोग" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और

(ख) उपधारा (2) में "सरकार," शब्द और चिन्ह के स्थान पर "यथास्थिति, सरकार या विनियामक आयोग" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे और उपधारा (3) में "तो" शब्द के पश्चात्‌ ",यथास्थिति, विनियामक आयोग या" चिन्ह और शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।

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उद्देश्यों और कारणों का कथन

राज्य सरकार ने प्राइवेट शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के समुचित स्तर, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान और छात्रों के हितों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य में हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था299 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 की धारा 3 के अधीन हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग स्थापित किया है । राज्य में स्थापित समस्त प्राइवेट विश्वविद्यालयों के अपने पृथक अधिनियम हैं जिनमें विनियामक आयोग द्वारा जांच पड़ताल और पर्यवेक्षण से सम्बन्धित उपबन्ध अन्तर्विष्ट नहीं हैं । इसलिए, राज्य में प्राइवेट विश्वविद्यालयों को विनियमित करने वाले समस्त अधिनियमों में यथोचित संशोधन करना आवश्यक समझा गया है ताकि विनियामक आयोग को, ऐसे प्राइवेट विश्वविद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करने और उन्हें आवश्यक निदेश देने की शक्तियां प्राप्त हों और इन विश्वविद्यालयों के विरूद्ध प्राप्त हुए परिवादों (शिकायतों) का निपटारा करने की भी शक्तियां प्राप्त हों । इसलिए, महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2011 का अधिनियम संख्यांक 22) को, उसमें विनियामक आयोग को, जब भी अपेक्षित हो, निदेश जारी करने तथा विश्वविद्यालय के विरूद्ध प्राप्त परिवादों (शिकायतों) आदि, का निपटारा करने हेतु सशक्त करने वाले उपबन्धों को सम्मिलित करते हुए, संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है । इसके अतिरिक्त, शासी निकाय और प्रबन्ध बोर्ड के सदस्यों की संख्या को तथा प्रायोजक निकाय के प्रतिनिधित्व को कम करने का भी विनिश्चय किया गया है । इसके अतिरिक्त यह भी विनिश्चय किया गया है कि फीस संरचना के समझे गए अनुमोदन (डीम्ड अप्रूवल) के उपबन्ध का लोप किया जाए ताकि विश्वविद्यालय, इस उपबन्ध का, सरकार की ओर से अनवधानता से हुई देरी के कारण, दुरूपयोग न कर सके । इसलिए, पूर्वोक्त अधिनियम को संशोधित करना आवश्यक हो गया है ।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है ।

ईश्वर दास धीमान, प्रभारी मन्त्री । शिमला : तारीखः............................, 2012

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वित्तीय ज्ञापन -शून्य-

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

-शून्य-

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL No. 16 OF 2012

THE MAHARISHI MARKANDESHWAR UNIVERSITY (ESTABLISHMENT AND

REGULATION) AMENDMENT BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the Maharishi Markandeshwar University (Establishment and Regulation)

Act, 2010 (Act No. 22 of 2010).

300 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follows:-

1. Short title.—This Act may be called the Maharishi Markandeshwar University (Establishment and Regulation) Amendment Act, 2012.

2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Maharishi Markandeshwar University (Establishment and Regulation) Act, 2010 (3 of 2001) (hereinafter referred to as the "principal Act"), –

(a) in clause (n), after the words "Scientific and Industrial Research", the words and sign ", the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission" shall be inserted.; and

(b) after clause (v), the following new clause (w) shall be inserted, namely:– "(w) "Regulatory Commission" means the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission, established under section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010 (Act No. of 2011).".

3. Amendment of section 3.—In section 3 of the principal Act, after clause (h), the following new clauses (i) and (j) shall be inserted, namely:—

"(i) to engage in areas of specialization with proven ability to make distinctive contributions to the objectives of the University education system that is academic engagement clearly distinguishable from programmes of an ordinary nature that lead to conventional degrees in arts, science, engineering, medicine, dental, pharmacy, management, etc. routinely offered by conventional institutions; and

(j) to establish broad-based and viable under graduate, post graduate and research programmes in several disciplines with firm interdisciplinary orientation and linkages."

4. Amendment of section 10.—In section 10 of the principal Act, after second proviso, the following third proviso shall be inserted, namely:—

"Provided further that no portion of income and property of the University shall be paid or transferred directly or indirectly, by way of dividend, bonus or otherwise, howsoever, by way of profit to the persons who were at any time or are members of the University or to any of them or any person claiming through them; provided that nothing herein contained shall prevent the payment in good faith of remuneration to any member thereof or other person as consideration for any service rendered to the University or for travelling or other allowances and such other charges.".

5. Amendment of section 18.—In section 18 of the principal Act, in clause(c), for the word "five", the word "three" shall be substituted.

301 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

6. Amendment of section 19.—In section 19 of the principal Act,–

(a) in sub-section (1), for clauses (b) to (d), the following clauses shall be substituted, namely:–

"(b) Deans of Faculties not exceeding two (by rotation based on seniority);

(c) two persons, nominated by the sponsoring body from amongst eminent educationists or from management field;

(d) two eminent academicians to be nominated by the Government in consultation with the Regulatory Commission;";

(b) after clause (d) as so substituted, the following new clauses (e) and (f) shall be inserted, namely:-

"(e) two persons from amongst the teachers (from Professors, Associate Professors), by rotation based on seniority; and

(f) the Registrar shall be the Member Secretary."; and

(c) after sub-section (5), the following new sub-section (6) shall be inserted, namely:-

"(6) The Board of Management of the University shall be independent of the Sponsoring Body with full autonomy to perform its academic and administrative functions.".

7. Amendment of section 31.—In section 31 of the principal Act, in sub-section (5), for the words "State Government", the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

8. Amendment of section 32.—In section 32 of the principal Act, in sub-section (1), after the words "for its approval", the words and figures "before 31st December of every preceding academic year alongwith the approval of courses granted by the Regulatory Commission" shall be inserted and the first proviso appearing below sub-section (1) shall be omitted.

9. Amendment of section 33.—In section 33 of the principal Act, in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

10. Amendment of section 34.—In section 34 of the principal Act, in sub-section (1), in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

11. Substitution of section 36.—For section 36 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:-

"36. Accreditation of the University.— The University shall obtain accreditation from the National Council of Assessment and Accreditation (NAAC), Bangalore, as per the guidelines issued by the National Assessment and Accreditation Council from time to time and inform the Government and such other regulating bodies which are connected with the courses taken up by the University about the grade provided by NAA.C to the University302 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 and the University shall get renewed such accreditation after such period as may be prescribed.".

12. Amendment of section 38.—In section 38 of the principal Act, in sub-section (2), after the words "presented to", the words "the Regulatory Commission and" shall be inserted.

13. Amendment of section 39.—In section 39 of the principal Act,-

(a) in sub-section (4), after the words "presented to the", the words "Regulatory Commission and the" shall be inserted; and

(b) in sub-section (5), for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission and the Government" shall be substituted.

14. Amendment of section 40.—In section 40 of the principal Act,-

(a) in sub-section (1), after the words "the Government", the words "or the Regulatory Commission" shall be inserted; and

(b) in sub-sections (2) and (3), after the words "the Government", the words and signs "or the Regulatory Commission, as the case may be,", shall be inserted.

_______

STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS.

In order to ensure appropriate standard of admission, teaching, examination, research and protection of interest of students in the Private Educational Institutions, the State Government has established the Himachal Pradesj Private Educational Institutions (Regulatory Commission) under section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010 in the State. All the Private Universities established in the State, have their separate Acts which do not contain the provisions relating to checking and supervision by the Regulatory Commission. Thus, it has been considered essential to make suitable amendments in all the Acts regulating the Private Universities in the State so that the Regulatory Commission may have the powers to conduct inspections from time to time and to issue necessary direction to such Private Universities and may also have the powers to deal with the complaints received against these Universities. As such, it has been decided to amend the Maharishi Markandeshwar University (Establishment and Regulation) Act, 2010 (Act No. 22 of 2010) incorporating the provisions empowering the Regulatory Commission to issue directions as and when required and to deal with the complaints etc. received against the University. Further, it has also been decided to reduce the number of members in the Governing body and Board of Management and representation of the sponsoring body. Further, it has also been decided that provision of deemed approval of fee structure should be omitted so that the University may not misuse this provision due to some inadvertent delay from the Government. This has necessitated amendments in the Act ibid. This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

ISHWAR DASS DHIMAN, Minister-in-Charge.

SHIMLA: The.....................2012.

303 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

FINANCIAL MEMORANDUM

—Nil—

MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

__________

विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 5 अप्रैल, 2012

संख्या वि0स0-वि0-सरकारी विधेयक/1-23/2012.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियम) संशोधन विधेयक, 2012 (2012 का विधेयक संख्यांक-12) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2012 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ ई-राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

आदेश द्वारा, गोवर्धन सिंह,

सचिव,

हिमाचल प्रदेश विधान सभा।

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2012 का विधेयक संख्यांक 12 श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2012

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2011 का अधिनियम संख्यांक 3) का संशोधन करने के लिए विधेयक ।

भारत गणराज्य के तिरसठवेंं वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम.-इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2012 है । 304 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 2. धारा 2 का संशोधन.-श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2011 का 3) (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 2 में ,-

(क) खण्ड (ढ) में "वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद्‌" शब्दों के पश्चात्‌ ",हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे ; और

(ख) खण्ड "(फ)" के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खण्ड "(ब)" अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

"(ब) "विनियामक आयोग" से हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 (2011 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग अभिप्रेत है । " ।

3. धारा 3 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 3 के खण्ड (ज) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (झ) और (ञ) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(झ) विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति के उद्‌देश्यों में सुभिन्न योगदान अर्थात्‌ परम्परागत संस्थाओं द्वारा नेमीतः प्रस्थापित सामान्य प्रकृति के कार्यक्रमों, जो कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, औषधि, दंत चिकित्सा, भेषजी, प्रबन्धन इत्यादि में परम्परागत उपाधियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं, से स्पष्टतया भिन्न शैक्षणिक विनियोजन करने के लिए सिद्ध योग्यता सहित, विशेषज्ञता के क्षेत्रों में लगे रहना ; और

(ञ) सुदृढ़ अंतर-विषयक अभिविन्यास और संयोजन सहित, विभिन्न विषयों में विस्तृत आधारमुक्त और व्यवहार्य स्नातकपूर्व, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रम स्थापित करना । " । 4. धारा 10 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 10 के द्वितीय परन्तुक के पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

"परन्तु यह और कि विश्वविद्यालय की आय और सम्पत्ति का कोई भी भाग, प्रत्यक्षतः या परोक्षतः लाभांश, बोनस या अन्यथा, किसी भी तरह, लाभ के रूप में उन व्यक्तियों को, जो किसी समय विश्वविद्यालय के सदस्य थे या हैं या उनमें से किसी को या उनके माध्यम से दावा करने वाले किसी व्यक्ति को, संदत्त या अन्तरित नहीं किया जाएगा, परन्तु यहां इसमें अन्तर्विष्ट कोई बात विश्वविद्यालय को प्रदान की गई किसी सेवा के प्रतिफलस्वरूप पारिश्रमिक या उसके किसी सदस्य या अन्य व्यक्ति को अथवा यात्रा या अन्य भत्तों तथा ऐसे अन्य प्रभारों के लिए सद्‌भावपूर्वक संदाय से निवारित नहीं करेगी ।" ।

5. धारा 18 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 18 के खण्ड (ग) में "पांच" शब्द के स्थान पर "तीन" शब्द रखा जाएगा ।

6. धारा 19 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 19 में ,-

(क) उपधारा (1) के खण्ड (ख) से (घ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(ख) दो से अनधिक संकायाध्यक्ष (वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा) ;

(ग) विख्यात शिक्षाविद्‌ों में से या प्रबन्धन क्षेत्र से प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ;

(घ) विनियामक आयोग के परामर्श से सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दो विख्यात शिक्षाविद्‌ यष्य305 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 (ख) इस प्रकार प्रतिस्थापित खण्ड (घ) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नए खण्ड (ङ) और (च) अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ :-

"(ङ) वरिष्ठता पर आधारित चक्रानुक्रम द्वारा शिक्षकों (आचार्यों, सह आचार्यों) में से

दो व्यक्ति ; और

(च) रजिस्ट्रार सदस्य-सचिव होगा । "; और

(ग) उपधारा (5) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नई उपधारा (6) अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(6) विश्वविद्यालय का प्रबंध बोर्ड अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक कृत्यों का पालन करने हेतु प्रायोजक निकाय से पूर्ण स्वायतता सहित स्वतन्त्र होगा । " । 7. धारा 31 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 31 की उपधारा (5) में "राज्य सरकार" शब्दों के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

8. धारा 32 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 32 की उपधारा (1) में "और इसे" शब्दों के पश्चात्‌ आए शब्दों "सरकार को अनुमोदन के लिए भेजेगा और सरकार प्रस्ताव प्राप्ति के एक मास के भीतर अनुमोदन प्रदान करेगी" के स्थान पर "विनियामक आयोग द्वारा प्रदान पाठ्‌यक्रमों के अनुमोदन सहित, प्रत्येक पूर्ववर्ती शैक्षणिक वर्ष के 31 दिसम्बर से पूर्व सरकार को इसके अनुमोदन के लिए भेजेगा तथा सरकार प्रस्ताव की प्राप्ति के तीन मास के भीतर अनुमोदन सूचित करेगी" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे और उपधारा (1) के नीचे आए प्रथम परन्तुक का लोप किया जाएगा ।

9. धारा 33 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 33 के परन्तुक में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

10. धारा 34 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 34 की उपधारा (1) के परन्तुक में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है , के स्थान पर "विनियामक आयोग" शब्द रखे जाएंगे ।

11. धारा 36 का प्रतिस्थापन.-मूल अधिनियम की धारा 36 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"36. विश्वविद्यालय का प्रत्यायन.-विश्वविद्यालय, समय-समय पर राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ (एन.ए.ए.सी.), बंगलौर से प्रत्यायन अभिप्राप्त करेगा और सरकार तथा ऐसे अन्य विनियमन निकायों को, जो विश्वविद्यालय द्वारा चलाए गए पाठयक्रमों से संबद्ध हैं, राष्ट्रीय निर्धारण और प्रत्यायन परिषद्‌ द्वारा विश्वविद्यालय को दिए गए ग्रेड के बारे में सूचित करेगा तथा विश्वविद्यालय ऐसे प्रत्यायन को, ऐसी अवधि के पश्चात्‌, जैसी विहित की जाए, नवीकृत करवाएगा । " ।

12. धारा 38 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 38 की उपधारा (2) में "वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियां" शब्दों के पश्चात्‌ तथा "सरकार" शब्द से पूर्व "विनियामक आयोग और" शब्द रखे जाएंगे । 13. धारा 39 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 39 में ,-

(क) उपधारा (4) में "तुलन-पत्र की प्रतियां," शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌ तथा "सरकार" शब्द से पूर्व "विनियामक आयोग और" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और (ख) उपधारा (5) में "सरकार" शब्द जहां-जहां यह आता है के स्थान पर "विनियामक आयोग और सरकार" शब्द रखे जाएंगे ।306 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 14. धारा 40 का संशोधन.-मूल अधिनियम की धारा 40 में ,- (क) उपधारा (1) में "सरकार" शब्द के पश्चात्‌ "या विनियामक आयोग" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ; और

(ख) उपधारा (2) में "सरकार," शब्द और चिन्ह के स्थान पर "यथास्थिति, सरकार या विनियामक आयोग" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे और उपधारा (3) में "तो" शब्द के पश्चात्‌ ",यथास्थिति, विनियामक आयोग या" चिन्ह और शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।

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उद्देश्यों और कारणों का कथन

राज्य सरकार ने प्राइवेट शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के समुचित स्तर, अध्यापन, परीक्षा, अनुसंधान और छात्रों के हितों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य में हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था (विनियामक आयोग) अधिनियम, 2010 की धारा 3 के अधीन हिमाचल प्रदेश प्राइवेट शिक्षा संस्था विनियामक आयोग स्थापित किया है। राज्य में स्थापित समस्त प्राइवेट विश्वविद्यालयों के अपने पृथक अधिनियम हैं, जिनमें विनियामक आयोग द्वारा जांच पड़ताल और पर्यवेक्षण से सम्बन्धित उपबन्ध अन्तर्विष्ट नहीं हैं। इसलिए, राज्य में प्राइवेट विश्वविद्यालयों को विनियमित करने वाले समस्त अधिनियमों में यथोचित संशोधन करना आवश्यक समझा गया है ताकि विनियामक आयोग को, ऐसे प्राइवेट विश्वविद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करने और उन्हें आवश्यक निदेश देने की शक्तियां प्राप्त हों और इन विश्वविद्यालयों के विरूद्ध प्राप्त हुए परिवादों (शिकायतों) का निपटारा करने की भी शक्तियां प्राप्त हों। इसलिए, श्री साई विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2010 (2011 का अधिनियम संख्यांक 3) को, उसमें विनियामक आयोग को, जब भी अपेक्षित हो, निदेश जारी करने तथा विश्वविद्यालय के विरूद्ध प्राप्त परिवादों (शिकायतों) आदि, का निपटारा करने हेतु सशक्त करने वाले उपबन्धों को सम्मिलित करते हुए, संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है । इसके अतिरिक्त, शासी निकाय और प्रबन्ध बोर्ड के सदस्यों की संख्या को तथा प्रायोजक निकाय के प्रतिनिधित्व को कम करने का भी विनिश्चय किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी विनिश्चय किया गया है कि फीस संरचना के समझे गए अनुमोदन (डीम्ड अप्रूवल) के उपबन्ध का लोप किया जाए ताकि विश्वविद्यालय, इस उपबन्ध का, सरकार की ओर से अनवधानता से हुई देरी के कारण, दुरूपयोग न कर सके। इसलिए, पूर्वोक्त अधिनियम को संशोधित करना आवश्यक हो गया है।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है।

ईश्वर दास धीमान, प्रभारी मन्त्री । शिमला : तारीखः............................,2012

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वित्तीय ज्ञापन

-शून्य-

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प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन

-शून्य-307 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 12 of 2012

THE SRI SAI UNIVERSITY (ESTABLISHMENT AND REGULATION) AMENDMENT

BILL, 2012

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

further to amend the SRI SAI University (Establishment and Regulation) Act, 2010 (Act No. 3 of 2011).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-third Year of the Republic of India as follows:-

1. Short title.—This Act may be called the SRI SAI University (Establishment and Regulation) Amendment Act, 2012.

2. Amendment of section 2.—In section 2 of the SRI SAI University (Establishment and Regulation) Act, 2010 (hereinafter referred to as the "principal Act"), –

(a) in clause (n), after the words "Scientific and Industrial Research", the words and sign ", the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission" shall be inserted.; and

(b) after clause (v), the following new clause (w) shall be inserted, namely:– "(w) "Regulatory Commission" means the Himachal Pradesh Private Educational Institutions Regulatory Commission, established under section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010 (Act No. 15 of 2011).".

3. Amendment of section 3.—In section 3 of the principal Act, after clause (h), the following new clauses (i) and (j) shall be inserted, namely:—

"(i) to engage in areas of specialization with proven ability to make distinctive contributions to the objectives of the University education system that is academic engagement clearly distinguishable from programmes of an ordinary nature that lead to conventional degrees in arts, science, engineering, medicine, dental, pharmacy, management, etc. routinely offered by conventional institutions; and

(j) to establish broad-based and viable under graduate, post graduate and research programmes in several disciplines with firm interdisciplinary orientation and linkages.".

308 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

4. Amendment of section 10.—In section 10 of the principal Act, after second proviso, the following third proviso shall be inserted, namely:—

"Provided further that no portion of income and property of the University shall be paid or transferred directly or indirectly, by way of dividend, bonus or otherwise, howsoever, by way of profit to the persons who were at any time or are members of the University or to any of them or any person claiming through them; provided that nothing herein contained shall prevent the payment in good faith of remuneration to any member thereof or other person as consideration for any service rendered to the University or for travelling or other allowances and such other charges.".

5. Amendment of section 18.—In section 18 of the principal Act, in clause(c), for the word "five", the word "three" shall be substituted.

6. Amendment of section 19.—In section 19 of the principal Act,–

(a) in sub-section (1), for clauses (b) to (d), the following clauses shall be substituted, namely:–

"(b) Deans of Faculties not exceeding two (by rotation based on seniority);

(c) two persons, nominated by the sponsoring body from amongst eminent educationists or from management field;

(d) two eminent academicians to be nominated by the Government in consultation with the Regulatory Commission;";

(b) after clause (d) as so substituted, the following new clauses (e) and (f) shall be inserted, namely:-

"(e) two persons from amongst the teachers (from Professors, Associate Professors), by rotation based on seniority; and

(f) the Registrar shall be the Member Secretary."; and

(c) after sub-section (5), the following new sub-section (6) shall be inserted, namely:-

"(6) The Board of Management of the University shall be independent of the Sponsoring Body with full autonomy to perform its academic and administrative functions.".

7. Amendment of section 31.—In section 31 of the principal Act, in sub-section (5), for the words "State Government", the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

8. Amendment of section 32.—In section 32 of the principal Act, in sub-section (1), after the words "for its approval", the words and figures "before 31st December of every preceding academic year alongwith the approval of courses granted by the Regulatory Commission" shall be inserted and the first proviso appearing below sub-section (1) shall be omitted.

9. Amendment of section 33.—In section 33 of the principal Act, in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

309 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

10. Amendment of section 34.—In section 34 of the principal Act, in sub-section (1), in the proviso, for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission" shall be substituted.

11. Substitution of section 36.—For section 36 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:-

"36. Accreditation of the University.- The University shall obtain accreditation from the National Council of Assessment and Accreditation (NAAC), Bangalore, as per the guidelines issued by the National Assessment and Accreditation Council from time to time and inform the Government and such other regulating bodies which are connected with the courses taken up by the University about the grade provided by NAAC to the University and the University shall get renewed such accreditation after such period as may be prescribed.".

12. Amendment of section 38.—In section 38 of the principal Act, in sub-section (2), after the words "presented to", the words "the Regulatory Commission and" shall be inserted.

13. Amendment of section 39.—In section 39 of the principal Act,-

(a) in sub-section (4), after the words "presented to the", the words "Regulatory Commission and the" shall be inserted; and

(b) in sub-section (5), for the word "Government" wherever it occur, the words "Regulatory Commission and the Government" shall be substituted.

14. Amendment of section 40.—In section 40 of the principal Act,-

(a) in sub-section (1), after the words "the Government", the words "or the Regulatory Commission" shall be inserted.; and

(b) in sub-sections (2) and (3), after the words "the Government", the words and signs "or the Regulatory Commission, as the case may be," shall be inserted.

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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

In order to ensure appropriate standard of admission, teaching, examination, research and protection of interest of students in the Private Educational Institutions, the State Government has established the Himachal Pradesj Private Educational Institutions (Regulatory Commission) under section 3 of the Himachal Pradesh Private Educational Institutions (Regulatory Commission) Act, 2010 in the State. All the Private Universities established in the State have their separate Acts which do not contain the provisions relating to checking and supervision by the Regulatory Commission. Thus, it has been considered essential to make suitable amendments in all the Acts regulating the Private Universities in the State so that the Regulatory Commission may have the powers to conduct inspections from time to time and to issue necessary direction to such Private Universities and may also have the powers to deal with the complaints received against these Universities. As such, it has been decided to amend the SRI SAI University (Establishment and Regulation) Act, 2010 (Act No. 3 of 2011) incorporating the provisions empowering the Regulatory Commission to issue directions as and when required and to deal with the complaints etc. received against the University. Further, it has also been decided to reduce the number of310 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 members in the Governing body and Board of Management and representation of the sponsoring body. Further, it has also been decided that provision of deemed approval of fee structure should be omitted so that the University may not misuse this provision due to some inadvertent delay from the Government. This has necessitated amendments in the Act ibid.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

ISHWAR DASS DHIMAN, Minister-in-Charge.

SHIMLA: The.....................2012.

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FINANCIAL MEMORANDUM

—Nil—

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MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION

—Nil—

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प्रशासनिक सुधार संगठन

अधिसूचना

शिमला-171002, 4 अप्रैल, 2012

संख्या पर (प्रशा0 सुधार) ए (4)1/2007.-हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, आदेश करती हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 में अंतर्विष्ट पदावधि और सेवा की शर्तों के अनुसार, श्री सुरजीत सिंह परमार, राज्य सूचना आयुक्त, हिमाचल प्रदेश, राज्य सूचना आयोग के कार्यालय में इस रूप में 65 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर, तारीख 5 जून 2012 (अपराह्न) को हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग के कार्यालय से सेवानिवृत्त होंगे।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- मुख्य सचिव।

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[Authoritative English Text of Government Notification No. Per(AR)A(4) 1/2007- dated 4th

April,2012 as required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].

ADMINISTRATIVE REFORMS ORGANIZATION

NOTIFICATION

Shimla-171002, the 4th April, 2012

No. Per (AR)A(4)1/2007.—The Governor, Himachal Pradesh, is pleased to order that Shri Surjit Singh Parmar, State Information Commissioner Himachal Pradesh shall retire from the office311 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 of the H.P. State Information Commission, on 5thJune, 2012 (AN) after attaining the age of 65 years term as such, in the office of the H.P. State Information Commission as per term of office and conditions of service contained in Section 16 of the Right to Information Act, 2005.

By order, Sd/- Chief Secretary.

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HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH, SHIMLA – 171 001

NOTIFICATION

Shimla, the 3rd April, 2012

No. HHC/GAZ/14-328/2012.—Pursuant to the item No.17 of the Himachal Pradesh Government of Notification No. Home-B(G)4/95-Vol-III, dated 29.8.2008, three advance increments at the rate of ` 770/- each in the pay scale of ` 27700-770-33090-920-40450-1080- 44770 by raising her pay from ` 27700/- to ` 30010/- are granted in favour of Shri. Ashok Kumar, Civil Judge (Jr. Division), presently under training at Himachal Pradesh Judicial Academy, Shimla and posted as such in the High Court of Himachal Pradesh for the purpose of drawal of salary etc. against training reserve post w.e.f. 27.3.2012.

By order, Sd/- Registrar General.

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HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH,SHIMLA-171001

NOTIFICATION

Shimla, 3rd April, 2012

No. HHC/Admn.3 (50)/74-I.—6 days commuted leave on and w.e.f. 12.3.2012 to 17.3.2012 with permission to prefix second Saturday and Sunday falling on 10.3.2012 & 11.3.2012 and suffix Sunday falling on 18.3.2012 is hereby sanctioned, expost-facto, in favour of Sh. Saran Thakur, Deputy Registrar of this Registry.

Certified that Sh. Saran Thakur has joined the same post and at the same station from where he had proceeded on leave after the expiry of the above leave period.

Certified that Sh. Saran Thakur would have continued to officiate the same post of Deputy Registrar but for his proceeding on leave.

By order, Sd/- Registrar General.

312 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH, SHIMLA – 171 001

NOTIFICATION

Shimla the 2nd April, 2012

No. HHC/Admn. 6 (23)/74– XIV.—Hon'ble the Chief Justice in exercise of the powers vested in him under Rule 2(32) of Chapter 1 of H.P. Financial Rules, 2009 has been pleased to declare the Civil Judge (Senior Division)-cum-JMIC (I), Rohru, as Drawing and Disbursing Officer in respect of the Court of Civil Judge (Jr. Division)-cum-JMIC Jubbal and also the Controlling Officer for the purpose of T.A. etc. in respect of the establishment attached to the aforesaid Court under head "2014 Administration of Justice" during the earned leave period of Shri Vishal Bhamnotra, Civil Judge (Jr. Division)-cum-JMIC, Jubbal, w.e.f 2.4.2012 to 12.4.2012 with permission to prefix Sunday falling on 1.4.2012 and suffix Gazetted holiday,Second Saturday and Sunday falling on 13th, 14th and 15th April,2012 or until he returns from leave.

By order, Sd/- Registrar General.

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HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH, SHIMLA

NOTIFICATION

Shimla, 2nd April, 2012

No. HHC/15-35/Jus/Acctts/2007.— Pursuant to Notification No.13020/03/2011-US. II, date 28th March, 2011, issued by the Government of India, Ministry of Law and Justice (Department of Justice), New Delhi, Hon'ble Mr.Justice Kuldip Singh, Additional Judge, High Court of Himachal Pradesh, has assumed the charge of the office of the Judge of High Court of Himachal Pradesh today in the afternoon of April 02,2012.

By order, Sd/- Registrar General.

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ब अदालत श्री सोभिया राम कपूर, कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश श्री Lo Tsering पुत्र श्री Harjo Damdul, निवासी तिब्तियन रिफ्युजी हैण्डीक्राफ्ट कालोनी बकरोटा, डाकघर डलहौजी, तहसील डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

313 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र मय ब्यान हल्फी इस आशय से गुजारा है कि उसके पुत्र Tenzin Tophel की जन्म तिथि 9-4-1991 है, जो कि नगर परिषद्‌ डलहौजी के रिकार्ड में दर्ज न है, जिसे दर्ज किया जावे।

इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के पुत्र Tenzin Tophel की जन्म तिथि नगर परिषद्‌ डलहौजी के रिकार्ड में दर्ज करने बारे यदि किसी को कोई आपत्ति या एतराज हो तो वह दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है कोई एतराज दर्ज न होनेे की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 29-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। सोभिया राम कपूर,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री सोभिया राम कपूर, कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश श्री Thinley Woesar पुत्र श्री Dorjee Tsewang, निवासी तिब्तियन रिफ्युजी हैण्डीक्राफ्ट कालोनी बकरोटा, डाकघर डलहौजी, तहसील डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र मय ब्यान हल्फी इस आशय से गुजारा है कि उसकी (Thinley Woesar) की जन्म तिथि 2-2-1993 है, जो कि नगर परिषद्‌ डलहौजी के रिकार्ड में दर्ज न है, जिसे दर्ज किया जावे।

इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी Thinley Woesar की जन्म तिथि नगर परिषद्‌ डलहौजी के रिकार्ड में दर्ज करने बारे यदि किसी को कोई आपत्ति या एतराज हो तो वह दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है कोई एतराज दर्ज न होनेे की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 21-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। सोभिया राम कपूर,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।314 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत श्री सोभिया राम कपूर, कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश श्री अनिल कुमार पुत्र श्री सालो राम, निवासी गांव कोठा, डाकघर बाथरी, तहसील डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र मय ब्यान हल्फी इस आशय से गुजारा है कि उसकी पुत्री तनवी देवी की जन्म तिथि 16-10-2007 है, जो कि ग्राम पंचायत बाथरी के रिकार्ड में दर्ज न है, जिसे दर्ज किया जावे।

इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी की पुत्री तनवी देवी की जन्म तिथि ग्राम पंचायत बाथरी के रिकार्ड में दर्ज करने बारे यदि किसी को कोई आपत्ति या एतराज हो तो वह दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है कोई एतराज दर्ज न होनेे की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 29-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। सोभिया राम कपूर,

कार्यकारी दण्डाधिकारी,

डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।

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Hamirpur, Himachal Pradesh

In the matter of :

1. Shri Pawan Kumar, aged 27 years s/o Shri Dharam Singh, r/o Village Tringer, P. O. Kot, Tehsil and District Hamirpur (H. P.).

2. Sheela Devi, aged 22 years d/o Shri Ajit Singh, r/o Dalwana Brahmna, P. O. Kuthera, Tehsil and District Kangra (H. P.) . . Applicants.

Versus

General public

Subject.— Notice of the Intended Marriage.

Shri Pawan Kumar and Sheela Devi have filed an application alongwith affidavits in the Court of undersigned under Special Marriage Act, 1954 in which they stated they intend to solemnize marriage within three months.

315 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this Court on or before 26-4-2012. The objection received after 26-4-2012 will not be entertained and marriage will be registered accordingly.

Issued today on 26-3-2012 under my hand and seal of the court.

Seal.

PANKAJ RAI, Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Hamirpur, District Hamirpur (H. P.).

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ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 78 NT/11/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्री नरोतम दास बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री नरोतम दास पुत्र श्री सालो राम, निवासी जंहरागल, डाकखाना करडियाणा, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी पुत्री मन्नत की जन्म तिथि 15-2-2010 है परन्तु ग्राम पंचायत जंहरागल में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 87 NT/11/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्री रोहित सिंह बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

316 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 नोटिस बनाम आम जनता।

श्री रोहित सिंह पुत्र श्री रणजीत सिंह, निवासी ठेहड़, मौजा घन्यारा, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी रोहित सिंह की जन्म तिथि 15-4-1990 है परन्तु ग्राम पंचायत ठेहड़ में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 7/ NT/12/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्री राजेश गुप्ता बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री राजेश गुप्ता पुत्र स्व0 श्री कशमीरी लाल गुप्ता, निवासी होड़ल शिल्ला चौक, डाकखाना सिद्धपुर, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी पुत्री अपूर्वा गुप्ता (Apurba Gupta) की जन्म तिथि 25-3-1991 है परन्तु ग्राम पंचायत सिद्धपुर में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।317 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 79 NT/11/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्रीमती सरिता राणा बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्रीमती सरिता राणा पत्नी श्री नरेश बहादुर राणा, निवासी लैहसर, डाकखाना योल, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी पुत्री सुमन राणा की जन्म तिथि 22-2-1989 है परन्तु ग्राम पंचायत लैहसर योल में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे। आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 6 NT/12/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्री गुरबख्श सिंह बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री गुरबख्श सिंह पुत्र स्व0 श्री रण सिंह, निवासी टंग, मौजा टंग, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हाल वासी मूमता, तहसील कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसके पुत्र सुखवीर सिंह की जन्म तिथि 24-1-1991 है परन्तु ग्राम पंचायत टंगनखाण में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 30-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।318 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया। मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

--------

ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 84 NT/11/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

श्रीमती कौशल्या देवी बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्रीमती कौशल्या देवी पत्नी श्री राजिन्द्र कुमार, निवासी पुडवा, तहसील पालमपुर, हाल वासी मौजा सिद्धवाड़ी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसके पुत्र आदित्य कुमार की जन्म तिथि 26-8-1993 है परन्तु ग्राम पंचायत सिद्धवाड़ी में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 28-4-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 27-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नं0 19/NT/12/नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी

Mrs. Tsering Lhamo बनाम

आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।319 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 Mrs. Tsering Lhamo पत्नी श्री Jampa Chhojang c/o Shop No. 6, Temple Road Mcleodganj, तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा ने इस अदालत में शपथ-पत्र सहित मुकद्दमा दायर किया है कि उसकी भतीजी (Nie

ce) Tenzin Sangmo की जन्म तिथि 1-8-1975 है परन्तु एम0 सी धर्मशाला में उक्त तारीख पंजीकृत न हुई है। अतः इसे पंजीकृत किये जाने के आदेश दिये जायें। इस नोटिस के द्वारा समस्त जनता को तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त बच्ची की जन्म तिथि पंजीकरण किये जाने बारे कोई एतराज हो तो वह हमारी अदालत में दिनांक 9-5-2012 को असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा मुताबिक शपथ-पत्र जन्म तिथि पंजी—त किये जाने बारे आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 31-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया।

मोहर।

कर्म चन्द,

नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

धर्मशाला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

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In the Court of Shri Karam Chand, Naib Tehsildar-cum-Executive Magistrate,

Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh

1. Shri William Sharma s/o Late Shri Dev Raj Sharma, r/o Upper Sakoh, Tehsil Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh.

2. Smt. Saveta Sharma d/o Shri Sushil Kumar, r/o Kachari Adda Dogru Sweet Shop, . . Applicants.

Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh.

Versus

1. General Public, 2. Secretary G. P. Paddar

. . Respondents.

Subject.—Registration of marriage under section 8 (4) of the H. P. Registration of Marriages Act, 1996 (Act No. 21 of 1997).

PUBLIC NOTICE :

Whereas the above named applicants have made an application under section 8 (4) of the Himachal Pradesh Registration of Marriages Act, 1996 alongwith an affidavit stating therein that they have solemnized their marriage on 30-7-2010 at Sakoh but has not been found entered in the records of the Registrar of Marriages Sakoh.

And whereas, they have also stated that they were not aware of the laws for the registration of marriages with the Registrar of marriages and now, therefore, necessary order for the registration of their marriage be passed so that their marriage is registered by the concerned authority.

Now, therefore, objections are invited from the general public that if anyone has any objection regarding the registration of the marriage of the above named applicants they320 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 should appear before the court of undersigned on 24-5-2012 at Tehsil Office Dharamshala at 10.00 A. M. either personally or through their authorized agent.

In the event of their failure to do so, orders shall be passed exparte for the registration of marriage without affording any further opportunity of being heard.

Issued under my hand and seal of the Court on this 3rd day of August, 2011.

Seal.

KARAM CHAND,

Naib Tehsildar-cum-Executive Magistrate,

Dharamshala, District Kangra, Himachal Pradesh.

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ब अदालत श्री रमन गरसन्गी, कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

श्री राज कृष्ण महन्त, निवासी VPO जगतसुख, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

विषय.--प्रकाशन इश्तहार बावत जन्म तिथि पंजीकरण जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969.

नोटिस बनाम आम जनता।

श्री राज कृष्ण महन्त पुत्र श्री उधो दास महन्त, निवासी VPO जगतसुख, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश ने इस न्यायालय में आवेदन-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसके पुत्र सिद्धार्थ महन्त जिसका दिनांक 7-10-1990 को जन्म हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि ग्राम पंचायत जगतसुख के रिकार्ड में दर्ज नहीं की गई है, जिसे अब दर्ज करवाने के आदेश सादर फरमाए जावे। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सिद्धार्थ महन्त की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे आपत्ति हो तो वह दिनांक 27-4-2012 को या इससे पूर्व अदालत हजा में अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 25-4-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

श्री रमन गरसन्गी,

कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश।321 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री केवल राम पुत्र श्री नरगु राम, निवासी गांव नानस्पी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री केवल राम पुत्र श्री नरगु राम, निवासी गांव नानस्पी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनकी पुत्री का नाम रीना कुमारी है जोकि सही व दरुस्त है तथा स्कूल रिकार्ड में भी विद्यमान है। लेकिन ग्राम पंचायत तराण्डा के अभिलेख में उनकी पुत्री का नाम रंजना कुमारी दर्ज हुआ है, जोकि गलत है। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत तराण्डा को उनकी पुत्री का नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक की पुत्री का नाम ग्राम पंचायत तराण्डा के रिकार्ड में दरुस्ती करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री केवल राम की पुत्री का नाम बदल कर रंजना कुमारी की जगह रीना कुमारी दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री महाबीर सिंह पुत्र श्री हिरा नन्द, निवासी गांव तराण्डा, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री महाबीर सिंह पुत्र श्री हिरा नन्द, निवासी गांव तराण्डा, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनके पुत्र का नाम योग राज है जोकि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है इसलिए वह अपने पुत्र का नाम बदल कर योगराज की जगह आदित्य नेगी रखना चाहते हैं। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत तराण्डा को उनके पुत्र का नाम बदलने के आदेश जारी करने की —पा करें। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक के पुत्र का नाम ग्राम पंचायत तराण्डा के रिकार्ड में बदलने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 322 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री महाबीर सिंह के पुत्र का नाम बदल कर योगराज की जगह आदित्य नेगी दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे। आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री शिव राज पुत्र श्री प्रेम लाल, निवासी गांव व डाकघर उरनी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री शिव राज पुत्र श्री प्रेम लाल, निवासी गांव व डाकघर उरनी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनका अपना वास्तविक नाम शिव राज है जोकि सही है लेकिन ग्राम पंचायत उरनी के अभिलेख (पंचायत परिवार रजिस्टर) में उनका नाम शिव राम पुत्र प्रेम लाल दर्ज हुआ है, जोकि गलत है। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत उरनी को उनका नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक का नाम ग्राम पंचायत उरनी के रिकार्ड में दरुस्त करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री शिव राज पुत्र श्री प्रेम लाल का नाम बदल कर शिव राम की जगह शिव राज दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे। आज दिनांक 16-3-2012 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।323 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री रमेश चन्द पुत्र श्री बलदेव सिंह, निवासी गांव घरशु, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री रमेश चन्द पुत्र श्री बलदेव सिंह, निवासी गांव घरशु, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनका वास्तविक नाम रमेश चन्द है जोकि स्कूल व राजस्व रिकार्ड में विद्यमान है लेकिन ग्राम पंचायत छोटा कम्बा के अभिलेख में उनका नाम रमेश कुमार दर्ज हुआ है जोकि गलत है। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत छोटा कम्बा को उनका नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक का नाम ग्राम पंचायत छोटा कम्बा के रिकार्ड में दरुस्त करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री रमेश चन्द का नाम बदल कर रमेश कुमार की जगह रामेश चन्द दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री इशान नेगी पुत्र श्री कारमा, निवासी गांव कंगोस, डाकघर सोलडिंग, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री इशान नेगी पुत्र श्री कारमा, निवासी गांव कंगोस, डाकघर सोलडिंग, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनका वास्तविक नाम इशान नेगी है तथा वह इसी नाम से जाने जाते हैं लेकिन ग्राम पंचायत पौण्डा के अभिलेख में उनका नाम ईश्वर दास पुत्र श्री कारमा दर्ज हुआ है, जोकि गलत है। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत पौण्डा को उनका नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें। 324 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक का नाम ग्राम पंचायत पौण्डा के रिकार्ड में दरुस्त करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री इशान नेगी पुत्र श्री कारमा का नाम बदल कर ईश्वर दास की जगह ईशान नेगी दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्रीमती सुशीला देवी पत्नी श्री जगदीश, निवासी गांव पानवी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्रीमती सुशीला देवी पत्नी श्री जगदीश, निवासी गांव पानवी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनका वास्तविक नाम सुशीला देवी है जोकि सही है लेकिन ग्राम पंचायत पानवी के अभिलेख में उसका नाम लच्छमी देवी दर्ज है, जोकि सरासर गलत है। अतः आवेदिका ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत पानवी को उनका नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की — पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत पानवी के रिकार्ड में दरुस्त करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदिका का नाम लच्छमी देवी की जगह सुशीला देवी पत्नी जगदीश दर्ज करने के आदेश सचिव, ग्राम पंचायत पानवी को जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।325 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्रीमती सुदर्शना कुमारी पत्नी श्री —ष्ण कुमार, निवासी गांव काश्पो, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्रीमती सुदर्शना कुमारी पत्नी श्री —ष्ण कुमार, निवासी गांव काश्पो, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनका वास्तविक नाम सुदर्शना कुमारी है, जोकि सही है लेकिन ग्राम पंचायत निचार के अभिलेख में उनका नाम सुन्दर दर्ज हुआ है जोकि उसके बचपन का नाम है। अतः आवेदिका ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत निचार को उनका नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत निचार के रिकार्ड में दरुस्त करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदिका का नाम सुन्दर की जगह सुदर्शना कुमारी पत्नी श्री —ष्ण कुमार दर्ज करने के आदेश सचिव, ग्राम पंचायत निचार को जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री अशोक कुमार पुत्र श्री कमला नन्द, निवासी गांव बरी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत नाम दरुस्त करने बारे।

श्री अशोक कुमार पुत्र श्री कमला नन्द, निवासी गांव बरी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनके पुत्र का नाम राजेन्द्र सिंह पुत्र श्री अशोक कुमार है जोकि सही व दरुस्त है लेकिन ग्राम पंचायत बरी के अभिलेख में उनके पुत्र का नाम अशीष कुमार दर्ज हुआ है, जोकि गलत है। अतः अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत बरी को उनके पुत्र का नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें। 326 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक के पुत्र का नाम ग्राम पंचायत बरी के रिकार्ड में दरुस्ती करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक श्री अशोक कुमार के पुत्र का नाम बदल कर अशीष कुमार की जगह राजेन्द्र सिंह दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री ठाकुर सैन पुत्र श्री राख्या राम, निवासी गांव चगांव, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत पुत्र के पिता का नाम दरुस्त करने बारे।

श्री ठाकुर सैन पुत्र श्री राख्या राम, निवासी गांव चगांव, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनकी व उनके भाई जगदेव सिंह की शादी बजर दासी के साथ मुश्तरिका तौर पर हुई थी। बाद में उसके तुखम व बजर दासी के वतन से दो पुत्र क्रमशः गम्भीर सिंह व चन्द्र शेखर पैदा हुए लेकिन ग्राम पंचायत चगांव के अभिलेख में गम्भीर सिंह के पिता का नाम जगदेव सिंह दर्ज है जोकि गलत है जबकि गम्भीर सिंह उसका अपना लड़का है। अतः आवेदक ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत चगांव को उनके पुत्र गम्भीर सिंह के पिता का नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक के पुत्र के पिता का नाम ग्राम पंचायत चगांव के रिकार्ड में दरुस्ती करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो आवेदक के पिता का नाम जगदेव सिंह की जगह ठाकुर सैन दर्ज करने के आदेश सचिव ग्राम पंचायत चगांव को जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।327 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री दिवान सिंह पुत्र श्री सिवा, निवासी गांव व डाकघर निगुलसारी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

नोटिस बाबत पिता का नाम दरुस्त करने बारे।

श्री दिवान सिंह पुत्र श्री सिवा, निवासी गांव व डाकघर निगुलसारी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनके पिता का नाम स्व0 श्री सिवा पुत्र परस राम है जोकि सही व दरुस्त है लेकिन ग्राम पंचायत तराण्डा के अभिलेख (पंचायत परिवार रजिस्टर) में पिता का नाम ठाकर दास दर्ज है जोकि गलत है। अतः आवेदक ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत तराण्डा को उनके पिता का नाम दरुस्त करने के आदेश जारी करने की —पा करें।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदक के पिता का नाम ग्राम पंचायत तराण्डा के रिकार्ड में दरुस्ती करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपना उजर एवं एतराज इस अदालत में पेश करे। यदि उक्त अवधि तक कोई उजर व एतराज पेश नहीं हुआ तो दिवान सिंह के पिता का नाम ठाकर दास की जगह सिवा दर्ज करने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हजा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा शीर्षक :

श्रीमती सुशमीला देवी पुत्री श्री सुख लाल, निवासी गांव शौंग, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत परिवार रजिस्टर से नाम खारिज करने बारे।

श्रीमती सुशमीला देवी पुत्री श्री सुख लाल, निवासी गांव शौंग, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उनकी शादी श्री सुख देव पुत्र श्री सुख पत, निवासी गांव चगांव के साथ हुई थी लेकिन आपसी ताल्लूकात ठीक न होने के कारण उनका 2 मई, 2011 को स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार तलाक हो गया तथा उसने श्री जिश्यान, निवासी गांव टांगनू, तहसील 328 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 चिड़गांव, जिला शिमला के साथ दूसरी शादी की है तथा पूर्व पति सुख देव ने भी दूसरी शादी कर ली है लेकिन अभी तक उसका नाम ग्राम पंचायत चगांव के परिवार रजिस्टर में दर्ज है। अतः आवेदिका ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत चगांव को उसका नाम बतौर पत्नी सुख देव उनके परिवार रजिस्टर से काटने के आदेश दिए जाएं।

अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को उपरोक्त आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत चगांव के अभिलेख से बतौर पत्नी श्री सुख देव काटे जाने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत चगांव में श्री सुख देव के परिवार रजिस्टर से काटने के आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा शीर्षक :

श्री प्रेम पाल पुत्र श्री हिरा चन्द, निवासी गांव उरनी, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत पत्नी का नाम दर्ज करने बारे।

उपरोक्त दरख्वास्त बराए अपनी पत्नी श्रीमती सोनिया का नाम ग्राम पंचायत उरनी के परिवार रजिस्टर में दर्ज करने बारे श्री प्रेम पाल पुत्र श्री हिरा चन्द, निवासी गांव उरनी, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) से प्राप्त हुई है। उन्होंने गुजारिश की है कि उनकी शादी श्रीमती सोनिया पुत्री श्री देवी दास, निवासी गांव ग्रातम घराट, डाकघर बौण्डा, तहसील रामपुर बुशैहर, जिला शिमला के साथ सन्‌ 2008 को हुई थी लेकिन दम्पति के गैर इलाका रहने के कारण पत्नी का नाम ग्राम पंचायत उरनी के पंचायत परिवार रजिस्टर में आज तक दर्ज नहीं करा सका है। अतः प्रार्थी ने अनुरोध किया है कि सचिव, ग्राम पंचायत उरनी को उनकी पत्नी सोनिया का नाम ग्राम पंचायत परिवार रजिस्टर में दर्ज करने के आदेश दिए जाएं। अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी को उपरोक्त आवेदक की पत्नी श्रीमती सोनिया का नाम ग्राम पंचायत उरनी के परिवार रजिस्टर में बतौर पत्नी श्री प्रेम पाल पुत्र श्री हिरा चन्द दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदक की पत्नी सोनिया का नाम ग्राम पंचायत उरनी के अभिलेख में बतौर पत्नी श्री प्रेम पाल श्री हिरा चन्द दर्ज करने के आदेश सचिव ग्राम पंचायत उरनी को आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।329 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा शीर्षक :

श्री भगवान सिंह पुत्र श्री प्रेम सिंह, निवासी गांव चगांव, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत पत्नी का नाम दर्ज करने बारे।

उपरोक्त दरख्वास्त बराए अपनी पत्नी श्रीमती रक्षा कुमारी का नाम ग्राम पंचायत चगांव के परिवार रजिस्टर में दर्ज करने बारे श्री भगवान सिंह पुत्र श्री प्रेम सिंह, निवासी गांव चगांव, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) से प्राप्त हुई है। उन्होंने गुजारिश की है कि उनकी शादी श्रीमती रक्षा कुमारी पुत्री श्री रामसा राम, निवासी गांव भवाई, तहसील संगडा, जिला सिरमौर जिनकी जन्म तिथि 27 अप्रैल, 1987 है के साथ 22 जनवरी, 2009 को हुई थी तथा सम्बन्धित पंचायत से पत्नी रक्षा कुमारी का नाम भी काट दिया था लेकिन पत्नी का नाम ग्राम पंचायत चगांव के पंचायत रजिस्टर में दर्ज करने से पहले ही ग्राम पंचायत संगडा द्वारा जारी प्रमाण-पत्र गुम हो जाने के कारण पत्नी उपरोक्त का नाम पंचायत अभिलेख में दर्ज नहीं करा सका है। अतः प्रार्थी ने अनुरोध किया है कि सचिव ग्राम पंचायत चगांव को उनकी पत्नी रक्षा कुमारी का नाम ग्राम पंचायत परिवार रजिस्टर में दर्ज करने के आदेश दिए जाएं।

अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी को उपरोक्त आवेदक की पत्नी श्रीमती रक्षा कुमारी का नाम ग्राम पंचायत चगांव के परिवार रजिस्टर में बतौर पत्नी दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर हो कर अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदक की पत्नी श्रीमती रक्षा कुमारी का नाम ग्राम पंचायत चगांव के अभिलेख में बतौर पत्नी श्री भगवान सिंह पुत्र श्री प्रेम सिंह दर्ज करने के आदेश सचिव ग्राम पंचायत चगांव को आदेश जारी किए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश श्री कली राम पुत्र श्री भागी सुख, निवासी गांव गरांगे, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत जन्म तिथि दर्ज करने बारे।

उपरोक्त दरख्वास्त श्री कली राम पुत्र श्री भागी सुख, निवासी गांव गरांगे, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) से बराए अपनी पत्नी सुमित्रा देवी की जन्म तिथि ग्राम पंचायत निचार के अभिलेख में दर्ज 330 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 करने बारे प्राप्त हुआ है जिसने गुजारिश की है कि उनकी शादी सुमित्रा देवी के साथ हुई है जिसका नाम ग्राम पंचायत निचार के परिवार रजिस्टर में भी दर्ज किया जा चुका है लेकिन जन्म तिथि दर्ज नहीं की गई है। पत्नी उपरोक्त की जन्म तिथि 27 अक्तूबर, 1965 है जोकि सही व दरुस्त है, लेकिन ग्राम पंचायत निचार के अभिलेख में केवल नाम ही दर्ज है और जन्म तिथि दर्ज नहीं है। अतः प्रार्थी ने अनुरोध किया है कि सचिव ग्राम पंचायत निचार को उनकी पत्नी सुमित्रा देवी की जन्म तिथि 27 अक्तूबर, 1965 पंचायत अभिलेख में दर्ज करने के आदेश दिए जाएं।

अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी को उपरोक्त आवेदक की पत्नी की जन्म तिथि 27 अक्तूबर, 1965 ग्राम पंचायत निचार के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर हो कर अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदक की पत्नी सुमित्रा देवी की जन्म तिथि ग्राम पंचायत निचार के अभिलेख में दर्ज करने के आदेश दिए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा शीर्षक :

श्री बदरी सैन पुत्र श्री फुला जीत, निवासी गांव यांगपा-1, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत पुत्री का नाम पुनः पंचायत में दर्ज करने बारे।

श्री बदरी सैन पुत्र श्री फुला जीत, निवासी गांव यांगपा-1, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने गुजारिश की है कि उनकी पुत्री मोहन देवी की शादी श्री हीर चन्द पुत्र श्री चतर धर सिंह, निवासी गांव पोवारी, तहसील कल्पा, जिला किन्नौर के साथ 25-26 वर्ष पहले हुई थी तथा ग्राम पंचायत यांगपा से नाम काट दिया गया था। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही यानी पुत्री मोहन देवी का नाम ग्राम पंचायत पोवारी में दर्ज होने से पहले ही उनके आपसी ताल्लूकात ठीक न होने के कारण उनका तलाक हो गया तथा पोवारी की ग्राम पंचायत में नाम दर्ज नहीं करवाया। मोहन देवी तबसे अपने मायके अर्थात्‌ आवेदक के घर पर ही रह रही है इस प्रकार पुत्री मोहन देवी का नाम किसी भी पंचायत में दर्ज नहीं है। अब क्योंकि पुत्री मोहन देवी अपने मायके में ही रह रही है, अतः प्रार्थी ने अनुरोध किया है कि सचिव ग्राम पंचायत यांगपा को उनकी पुत्री मोहन देवी का नाम ग्राम पंचायत परिवार रजिस्टर में बतौर पुत्री श्री बदरी सैन पुनः दर्ज करने के आदेश दिए जाएं।

अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी को उपरोक्त आवेदक की पुत्री का नाम ग्राम पंचायत यांगपा में बतौर पुत्री श्री बदरी सैन दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर होकर331 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदक की पुत्री मोहन देवी का नाम ग्राम पंचायत यांगपा के अभिलेख में बतौर पुत्री श्री बदरी सैन पुनः दर्ज करने के आदेश सचिव ग्राम पंचायत यांगपा को दिए जाएंगे।

आज दिनांक 16-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत उप-मण्डल दण्डाधिकारी, निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश मुकद्दमा शीर्षक :

शालू देवी पुत्री श्री गोविन्द सिंह, निवासी गांव सूंगरा, तहसील निचार, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

बनाम

आम जनता

इश्तहार बाबत नाम पुनः पंचायत में दर्ज करने बारे।

शालू देवी पुत्री श्री गोविन्द सिंह, निवासी गांव सूंगरा, तहसील निचार, जिला किन्नौर (हि0 प्र0) ने गुजारिश की है कि उनकी शादी श्री विटू प्रताप पुत्र श्री डीनू राम डोगरा, निवासी गांव कापटी तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू के साथ 20 अगस्त, 2003 को हुई थी तथा ग्राम पंचायत सूंगरा से नाम काट दिया गया था। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही यानी उसका नाम ग्राम पंचायत कुशवा में दर्ज करने से पहले ही उनके आपसी ताल्लूकात ठीक न होने के कारण उनका सम्बन्ध विच्छेद हो गया तथा कुशवा की ग्राम पंचायत में नाम दर्ज नहीं करवाया। तबसे वह अपने मायके अर्थात्‌ गांव सूंगरा में अपने मां-बाप के घर पर ही रह रही है इस प्रकार उसका नाम किसी भी पंचायत में दर्ज नहीं है। अतः आवेदिका ने अनुरोध किया है कि सचिव ग्राम पंचायत सूंगरा को आदेश दिया जाए कि उसका नाम ग्राम पंचायत परिवार रजिस्टर में बतौर पुत्री श्री गाबिन्द सिंह पुनः दर्ज करें।

अतः आम जनता को इस इश्तहार के माध्यम से सूचित किया जाता है कि अगर किसी को उपरोक्त आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत सूंगरा में बतौर पुत्री श्री गोबिन्द सिंह दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 25-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे असालतन या वकालतन हजा अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश करें अन्यथा आवेदिका का नाम ग्राम पंचायत सूंगरा के अभिलेख में बतौर पुत्री श्री गोबिन्द सिंह पुनः दर्ज करने के आदेश सचिव ग्राम पंचायत सूंगरा को दिए जाएंगे।

आज दिनांक 24-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत हज़ा से जारी हुआ । मोहर। हस्ताक्षरित/-

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

निचार स्थित भावानगर, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।332 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 ब अदालत सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, कल्पा, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

मुकद्दमा नम्बर : 02-2012 तारीख रजुआ : 20-3-2012 तारीख फैसला :

श्री दिली राम पुत्र श्री मेहर चन्द, निवासी ग्राम पंचायत पांगी, तहसील कल्पा, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश . . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता

दरख्वास्त राजस्व अभिलेख में नाम की दरुस्ती करने बारे।

हरगाह नोटिस हजा से आम जनता व हितबद्ध व्यक्तियों को सूचित किया जाता है कि उपरोक्त श्री दिली राम पुत्र श्री मेहर चन्द, निवासी ग्राम पंचायत पांगी, तहसील कल्पा, जिला किन्नौर नेइस कार्यालय में एक दरख्वास्त मय दस्तावेज सहित गुजार रखी है। प्रार्थी का कहना है कि उसका नाम उप-महाल पांगी व नांग काशंग के राजस्व माल कागजात में गलती से दिली राम की जगह दिलू राम दर्ज किया गया है, जोकि गलत है जबकि अन्य दस्तावेजों में दिली राम दर्ज है। अतः मेरा नाम उप-महाल पांगी व नांग काशंग के राजस्व अभिलेख में दिलू राम की जगह दिली राम दर्ज किया जावे।

अतः इस इश्तहार के माध्यम से आम जनता व खास को सूचित किया जाता है कि अगर यदि किसी को उपरोक्त व्यक्ति के नाम दरुस्ती बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह असालतन व वकालतन हाजिर आकर दिनांक 10-4-2012 तक अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उपरोक्त व्यक्ति के नाम की दरुस्ती के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 28-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ है।

मोहर। हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

कल्पा, जिला किन्नौर, हिमाचल प्रदेश।

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In the Court of Tehsildar-cum-Executive Magistrate, Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H. P.)

Case No. 02/2012 Date of Institution : 02-01-2012 Shri Amit Kumar s/o Shri Budhi Ram, r/o Village Kalpa, Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H.P.) . . Applicant.

Application under section 8(4) of the H.P. Registration of Marriages Act, 1996 for Registration of

Marriage.

NOTICE

To, 1. General public 2. Registrar of Marriages, Gram Panchayat, Kalpa, Tehsil Kalpa.

333 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

Whereas the above named applicant has made an application under section 8(4) of the Himachal Pradesh Registration of Marriages Act, 1996 alongwith an affidavit stating therein that he has solemnized his marriage on 10-11-2008 with Smt. Mamta d/o Shri Bilku, r/o Village Nigani, Tehsil Nichar, District Kinnaur (H. P.) at Village Kalpa, Tehsil Kalpa as per custom of Kinnaur District but the marriage could not be registered with the registrar of Marriages, Gram Panchayat, Kalpa and thus requested for passing necessary orders for registration of their marriage under the Act ibid.

Now, therefore, objections are hereby invited from the general public that if anyone has any objection regarding the registration of marriage of the above named persons in the record of Gram Panchayat, Kalpa, Tehsil Kalpa, they should appear before the undersigned in my court on 21-04-2012 at 10 A.M. either personally or through their authorized agent.

Issued under my hand and seal of the court this 20th day of March, 2012.

Seal. Sd/-

Tehsildar-cum-Executive Magistrate,

Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H. P.).

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In the Court of Tehsildar-cum-Executive Magistrate, Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H. P.)

Case No. 02/2012 Date of Institution : 02-01-2012 Shri Birbal Kumar s/o Shri Ram Dass, r/o Village Kalpa, Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H.P.) . . Applicant.

Application under section 8(4) of the H.P. Registration of Marriages Act, 1996 for Registration of

Marriage.

NOTICE

To, 1. General public 2. Registrar of Marriages, Gram Panchayat, Kalpa, Tehsil Kalpa.

Whereas the above named applicant has made an application under section 8(4) of the Himachal Pradesh Registration of Marriages Act, 1996 alongwith an affidavit stating therein that he has solemnized his marriage on 15-01-2009 with Smt. Promila d/o Shri Lal Chand, r/o Village Umi, Tehsil Nichar, District Kinnaur (H. P.) at Village Kalpa, Tehsil Kalpa as per custom of Kinnaur District but the marriage could not be registered with the Registrar of Marriages, Gram Panchayat, Kalpa and thus requested for passing necessary orders for registration of their marriage under the Act ibid.

Now, therefore, objections are hereby invited from the general public that if anyone has any objection regarding the registration of marriage of the above named persons in the record of Gram Panchayat, Kalpa, Tehsil Kalpa, they should appear before the undersigned in my court on 21-04-2012 at 10 A.M. either personally or through their authorized agent.

Issued under my hand and seal of the court this 20th day of March, 2012.

Seal. Sd/-

Tehsildar-cum-Executive Magistrate,

Tehsil Kalpa, District Kinnaur (H. P.).

334 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

ब अदालत श्री रत्न गौतम, स्पैशल मैरिज अधिकारी (एस0डी0एम0), जोगिन्दर नगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश

ब मुकद्दमा :

अशिष शर्मा पुत्र श्री सुरेश शर्मा, निवासी व डा0 दु्रब्बल, तहसील जोगिन्दर नगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश . . पति। इन्द्रानी शर्मा पत्नी श्री अशिष शर्मा, निवासी व डा0 द्रुब्बल तहसील जोगिन्दर नगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश . . (पत्नी)।

बनाम

आम जनता

प्रार्थना-पत्र जेर धारा 15 चैपटर-III स्पैशल मैरिज ऐक्ट, 1954 के अन्तर्गत विवाह पंजी—त करने बारा। उपरोक्त मामला में अशिष शर्मा व इन्द्रानी शर्मा ने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 01-06-2010 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार शादी की है और तब से वह पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। अतः जेर धारा 15 चैपटर-III स्पैशल मैरिज एक्ट, 1954 के अन्तर्गत उनका विवाह पंजी—त किया जावे।

अतः आम जनता व उनके रिश्तेदारों, माता-पिता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को इस बारा कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 8-5-2012 को दोपहर 2.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजर अदालत होकर पेश करें अन्यथा एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर शादी पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जावेगा, तथा बाद में कोई भी उजर काबले समायत न होगा।

आज दिनांक 28-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ है।

मोहर। रत्न गौतम, स्पैशल मैरिज अधिकारी (एस0डी0एम0),

जोगिन्दर नगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री मनोज चौहान, उप-मण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश श्री रतिया पुत्र श्री खीजू, निवासी गांव सानल, डा0 बलग, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री रतिया पुत्र श्री खीजू, निवासी गांव सानल, डा0 बलग, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में राधा देवी के पुत्र बन्टी को अपने पुत्र के रूप में ग्राम पंचायत बलग के परिवार रजिस्टर अभिलेख में दर्ज करने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है।335 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 अतः इस इश्तहार के माध्यम से स्र्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करें अन्यथा दीगर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 22-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

मनोज चौहान,

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

-------- ब अदालत श्री मनोज चौहान, उप-मण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश श्री तोता राम पुत्र श्री सीता राम, निवासी गांव वाईला, डा0 केलवी, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री तोता राम पुत्र श्री सीता राम, निवासी गांव वाईला, डा0 केलवी, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपनी पुत्री अंजली जिसकी जन्म तिथि 12-5-2007 है को परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत केलवी के परिवार रजिस्टर अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है। अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करें अन्यथा दीगर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 22-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

मनोज चौहान,

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री मनोज चौहान, उप-मण्डल दण्डाधिकारी, ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश श्रीमती सुन्नी देवी पत्नी श्री सुदामा, निवासी गांव सगौत, डा0 कमाह, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

बनाम

आम जनता

आवेदन-पत्र जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

336 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 श्रीमती सुन्नी देवी पत्नी श्री सुदामा, निवासी गांव सगौत, डा0 कमाह, तहसील ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में अपना नाम व जन्म तिथि 25-12-1960 को परिवार रजिस्टर ग्राम पंचायत कमाह के परिवार रजिस्टर अभिलेख में दर्ज करवाने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है।

अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति अथवा रिश्तेदार को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-4-2012 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर अदालत आकर अपना एतराज पेश करे अन्यथा दीगर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 22-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

मनोज चौहान,

उप-मण्डल दण्डाधिकारी,

ठियोग, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश।

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In the Court of ShriVarinder Sharma, Tehsildar-cum-Assistant Collector, Ist Grade, Una,

District Una (H. P.)

Subject.—Attestation of mutation Maqfool-Ul-Khabri Chuhru s/o Devi Chand s/o Ghanya, Caste Brahmin, resident of Mauza Badehar, Tehsil and District Una (H. P.).

NOTICE

Whereas Shri Satish Kumar s/o Shri Sagli Ram s/o Shri Devi Chand, resident of Mauza Badehar, Tehsil and District Una has submitted an application to this court for entering and attestation of mutation Muqfool-Ul-Khabri of Shri Chuhru s/o Shri Devi Chand s/o Shri Ghanya, resident of Mauza Badehar, Tehsil and District Una (H. P.) in favour of legal heirs of Shri Chuhru Ram aforesaid.

Whereas the applicant has submitted that Shri Chuhru was 30 years old and bachelor when he disappeared and lost from house and surroundings and 60 years have gone past from the incidence of his disappearance, Now he would be of approximately 90 years old. No clue regarding his alive or dead has been traced out till date. It is apprehended that he may not be alive as so much long period has elapsed and no clue regarding of his alive or dead has been found. The applicant has submitted that no FIR has been lodged in this regard in Police Station.

Whereas the mutation Maqfool-Ul-Khabri estate of Chuhru aforsaid has been entered in revenue record in favour of legal heirs of Chuhru named Chaman Lal, Jugal Kishore sons, Smt. Leela Devi d/o Shri Babu Ram s/o Shri Devi Chand (equal share) of 3/20 share, Deepak, Raman Kumar, Balwinder Kumar sons, Smt. Babli Devi d/o Shri Ashok Kumar s/o Shri Babu Ram (equal share of 1/20 share Rahul, Rohit sons, Smt. Monika, Smt. Shalu daughters and Smt. Raj Kumari wd/o Shri Dharampal s/o Shri Babu Ram (equal share) of 1/20 share Satish Kumar, Kuldip Kumar sons, Smt. Kiran Bala, Smt. Manu Bala daughters and Smt. Surinder Kumari wd/o Shri Sagli s/o Devi Chand (equal share) 1/4 share, Smt. Achhri Devi, Smt. Rani Devi, Smt. Pushpa Devi daughters Smt. Brahmi d/o Devi Chand (equal share) 1/4 share, Smt. Kamla Devi, Smt. Kamlesh Devi, Smt. Abjora Devi, Smt. Raj Rani daughters of Smt. Savitri d/o Devi Chand (equal share) 1/4 share.

Whereas through this notice the general public has been made aware that if anyone has objection in this regard he may file his objection(s) to this court on or before 23-4-2012 failing337 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934 which it would be presumed that nobody has to say in this regard and further proceedings to attest the mutation Maqfool-Ul-Khabri of estate of Chuhru will be decided as per law on the subject.

Issued on 31-3-2012 under my hand and seal of Court.

Seal. VARINDER SHARMA, Tehsildar-cum-Assistant Collector, Ist Grade, Una, District Una (H. P.).

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ब अदालत श्री वरिन्द्र शर्मा, तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, ऊना, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश 1. इन्तकाल नम्बर 1433 वरास्त, उप-महाल कस्वाती मैहतपुर, 2. इन्तकाल नम्बर 428 वरास्त, उप-महाल जरेई मैहतपुर।

श्रीमती सुदेश कुमारी पत्नी जसवन्त सिंह पुत्र श्री दाता राम

बनाम

आम जनता

विषय.—इन्तकाल नम्बर 1433 वरास्त व इन्तकाल नम्बर 428 वरास्त मकफूद उल-खवरी दर्ज शुद्धा, उप- महाल कस्वाती मैहतपुर, उप-महाल जरेई मैहतपुर महाल मैहतपुर, तहसील व जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश।

प्रार्थिया श्रीमती सुदेश कुमारी पत्नी जसवन्त सिंह, गांव मैहतपुर ने प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि उसका पति जसवन्त सिंह 25 वर्षों से लापता है जिसकी वरास्त का इन्तकाल श्रीमती सुदेश कुमारी पत्नी व रविन्द्र कुमार व विक्रम ठाकुर पिसरान जसवन्त सिंह दर्ज किए गए हैं।

अतः इस इश्तहार राजपत्र हि0 प्र0 द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को जसवन्त सिंह पुत्र दाता राम महाल मैहतपुर की वरास्त के इन्तकाल तसदीक होने बारे आपत्ति हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 23-4-2012 सुबह 10.00 बजे अदालत में हाजर होकर अपना एतराज पेश कर सकता है अन्यथा गैर-हाजरी की सूरत में उपरोक्त इन्तकाल तस्दीक कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 31-3-2012 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर। वरिन्द्र शर्मा,

तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

ऊना, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश।

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ब अदालत श्री वरिन्द्र शर्मा, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, ऊना, तहसील व जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश

श्री किरपाल सिंह पुत्र श्री बाबू राम, निवासी अप्पर अरनियाला, तहसील व जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश।

बनाम338 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 7 अपै्रल, 2012/18 चैत्र, 1934

आम जनता

दरख्वास्त जेर धारा 13 (3) जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969.

श्री किरपाल सिंह पुत्र श्री बाबू राम, निवासी अप्पर अरनियाला, तहसील व जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश ने इस अदालत में दरख्वास्त दी है कि उसकी पुत्री सोफिया ठाकुर का जन्म रिजनल अस्पताल ऊना में दिनांक 3-7-1993 को हुआ था परन्तु इस बारे पंचायत के रिकॉर्ड में पंजीकरण नहीं करवाया जा सका। अब पंजीकरण करने के आदेश दिए जाएं।

अतः इस नोटिस के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त जन्म तिथि के पंजीकरण होने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 1-5-2012 को सुबह 10.00 बजे अधोहस्ताक्षरी के समक्ष असालतन/वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा उपरोक्त जन्म तिथि का पंजीकरण करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 27-3-2012 को हस्ताक्षर मेरे व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर। वरिन्द्र शर्मा, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, ऊना, तहसील व जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश। नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 07 April 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2012-04-07.6_gazette_2012-07_04_2012/. Archive identifier in.gazette.himachal.2012-04-07.6_gazette_2012-07_04_2012.