राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शिमला, सोमवार, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़, 1935
हिमाचल प्रदेश सरकार
HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH, SHIMLA-171001
NOTIFICATION
Shimla the, 9th July, 2013
No. HHC/GAZ/14-290/2006.—Hon'ble the Chief Justice has been pleased to grant expost facto sanction of two days' commuted leave for 29-5-2013 & 30-5-2013 in favour of Shri Sidharth Sarpal, Civil Judge (Junior Division)-cum-JMIC, Kandaghat, District Solan, H. P.
Certified that Shri Sidharth Sarpal has joined the same post and at the same station from where he had proceeded on leave, after expiry of the above period of leave.
81-राजपत्र/2013-15-07-2013 (2253)2254 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 Also certified that Shri Sidharth Sarpal would have continued to hold the same post of Civil Judge (Junior Division)-cum-JMIC, Kandaghat, District Solan, H.P., but for his proceeding on leave for the above period.
By order, Sd/- Registrar General.
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FORESTS DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla, the 8th July, 2013
No. FFE-B-F(6) 1/2013.—In supersession of this Department Notification of even No. dated 7-5-2013, the Governor of Himachal Pradesh, in exercise of the powers vested in her under section 6 of the Wildlife (Protection) Act, 1972, is pleased to re-constitute the State Board for Wildlife as amended from time to time as under :
| 1. | Chief Minister | Chairman |
| 2. | Forest Minister | Vice-Chairman |
| 3. | Shri Khub Ram, MLA (Anni) | Member |
| 4. | Shri Ajay Mahajan, MLA (Nurpur) | Member |
| 5. | Shri Mohan Lal Brakta, MLA (Rohroo) | Member |
| 6. | Shri Chander Kumar, Ex-Forest Minister, Jawali, H.P. | Non-Official Member |
| 7. | Dr. Ranjit Singh, Former Spl. Secy. MoEF and Member National Board for Wildlife, Krishan Sar-5, Tiger Lane, WC-6 Lane, Saninik Farms, New Delhi. | -do- |
| 8. | Shri Vijay Bhushan, Former Secy. DOT, GOI, 28-G, Lajpat Nagar III, New Delhi. | -do- |
| 9. | Shri Rohit Thakur, R/o Shanti VIhar, Kasumpti, Shimla-9. | -do- |
| 10. | Shri Dushyant Singh, VPO Dhami, Tehsil & Distt. Shimla. | -do- |
| 11. | Shri Ashish Das Gupta, MIG-42, Sector-1A, Parwanoo, Distt. Solan, H.P-173220. | -do- |
| 12. | Shri Kamlesh, R/o Vill. Sachuin, P.O. & Tehsil Bharmour, Distt. Chamba, H.P. | -do- |
| 13. | Shri Kamal Dhaulta, Sumedha Bhawan, Dhingoo Road, Sanjauli, Shimla-6. | -do- |
| 14. | Smt. Pawna Sharma, Near Petrol Pump, Ghumarwin, Distt. Bilaspur, H.P. | -do- |
| 15. | Shri Arun Sen, R/o VPO Kuthar, Distt. Solan, H.P. | -do- |
| 16. | Shri Rattan Jit Singh, C/o Chapslee School, Shimla, H.P. | -do- |
| 17. | Shri Dev Raj, Former Chairman, R/o Vill. Chular, TGP Tunda, Tehsil Bharmour, Distt. Chamba, H.P. | -do- |
| 18. | Shri Amarjeet Singh, Himachal Birds, B-23, Sector-I, New Shimla, H.P. | -do- |
| 19. | Principal Secretary (Forests) to the Govt. of H.P. | Member |
| 20. | Principal Secretary (Tribal Dev.) to the Govt. of H.P. | -do- |
| 21. | Pr. Chief Conservator of Forests (HoFF) H.P. | -do- |
| 22. | M.D. Tourism Dev. Corporation, H.P. | -do- |
| 23. | Inspector General of Police (Nominated by DGP) | -do- |
| 24. | Brig. Adm. ARTRAC, Shimla | To be nominated by the Central Govt. |
| 25. | Director of Animal Husbandry, H.P. | Member |
| 26. | Director of Fisheries, H.P. | -do- |
| 27. | Representative/Officer of Wildlife Preservation, GOI, New Delhi. | To be nominated by Director, Wildlife Preservation, GOI. New Delhi. |
| 28. | Representative of Wildlife Institute of India, Dehradun. | To be nominated by Director, WII, Dehradun. |
| 29. | Representative of Botanical Survey of India. | To be nominated by the Central Govt. |
| 30. | Representative of Zoological Survey of India. | To be nominated by the Central Govt. |
| 31. | Chief Wildlife Warden, H.P. | Member Secretary. |
3. The functions and duties of the Board will be the same as described under section 8 of the Wildlife(Protection) Act, 1972 and amended from time to time.
4. The Term of a member of the board shall be three years from the date of his appointment and manner of filling up of vacancies/removal from board among them shall be prescribed in H.P. Wildlife (Protection) Rules, 1975.
5. The terms and conditions for granting TA/DA to the Non-Official members of the Board will be the same as issued from time to time by the Government.
By order, Sd/- Addl. Chief Secretary (Forests).
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II चन्द्रताल.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-9/2006 तारीख 14-05-2007 द्वारा 38.56 वर्ग किलोमीटर चन्द्रताल को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने हेतु एक आशय अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए सं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल सं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एन्वारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन इस आशय की अधिसूचनाएं जारी की थी;
2256 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचनाओं को जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए सं0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, पूर्वोक्त अधिनियम, की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 38. 56 वर्ग किलामीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से चन्द्रताल वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
चन्द्रताल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगीः--
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | चन्द्रताल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | चन्द्रताल | (i) लहौल एवं स्पिति (ii) स्पिति (वन्य जीव मण्डल) | उत्तर ः चन्द्रा नदी में एक नाले (उत्तर-पूर्व से बहने वाला) के मिलान से धार के साथ साथ उप मण्डल लाहौल स्पिति की सीमा तक, फिर उप-मण्डल सीमा पर एक चोटी तक जो बिन्दु 5561 मी0 व 5423 मी0 के मध्य स्थित है । फिर पूर्व की ओर उप-मण्डल सीमा के साथ पिंगूलंग असमा बिन्दु 5501 मी0 के समीप तक । प ू र्व : पिंगूलंग असमा (नजदीक बिन्दु 5501 मी0) से दक्षिण की ओर उप-मण्डल सीमा पर वाया 5190 मी0, 5584 मी0, 4855 मी0 और 4725 मी0, फिर बालहामा ला से 4807 मी0 बिन्दु तक । द क्षिण : बिन्दु 4807 मी0 से सीमा दक्षिण-पश्चिम की ओर धार पर मुड़ती हुई नीचे चन्द्रा नदी की ओर एक नाले (जो कुंजम ला से चन्द्रा नदी में बह रहा है) के चन्द्र ताल जाने वाले मार्ग के मिलान बिन्दु तक जो नाले के पार बिन्दु के सामने है। प श्चिम ः कुंजम ला से नीचे बहने वाले नाले व मार्ग के मिलान बिन्दु से चन्द्रताल को जाने वाले मार्ग के समानान्तर उपर की ओर वाले कन्टुर 4200 मीटर के साथ 1 किलो मीटर चन्द्र ताल से पीछे मार्ग को पार करते हुए चन्द्रा नदी के साथ-साथ ऊपर की ओर उत्तर सीमा के आरम्भ मिलान बिन्दु तक। |
क्षेेत्रफल.--38.56 वर्ग किलोमीटर
आदेश द्वारा, हस्तारित/- प्रधान सचिव (वन)।
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II किब्बर.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-29/99 तारीख 1-11-1999 द्वारा 1400.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र किब्बर को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचू ना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए स0ं 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल सं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्को,ं जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचूना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 1400 वर्ग किलामीटर क्षेत्र में 867 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन इस आशय की अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचनाओं को जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 1400.00 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त क्षेत्र को सम्मिलित किया गया है तथा किब्बरी गांव सहित 46.88 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को निकाल दिया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् अब किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य कुल 2220.12 वर्ग किलोमीटर (1400.00 वर्ग किलोमीटर 867.00 वर्ग किलोमीटर -46.88 वर्ग किलोमीटर) से गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 2220.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।2258 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगीः--
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | किब्बर वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र की सीमाएं |
| 1 | किब्बर | (i) लहौल एवं स्पिति (ii) स्पिति (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः अभ्यारण्य की उत्तरी सीमा लंगेहर नाला से आरम्भ होती है और नाले के साथ साथ नीचे की और मलंग नाला के मिलान बिन्दु को पार कर हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर राज्य की संयुक्त सीमा पर V आकार पर मिलती हुई हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर राज्य की संयुक्त सीमा के साथ साथ नूरबुला के नजदीक घुमाव बिन्दु तक । प र्व ः घुमाव बिन्दु से हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर राज्य ू की संयुक्त सीमा के साथ साथ और भारत व तिब्बत की अन्र्तराष्ट्रीय सीमा के गया चोटी की ऊंचाई 22290 फुट के मिलान बिन्दु पर मिलती हुई तथा अन्र्तराष्ट्रीय भारत तिब्बत सीमा के साथ साथ लिंगटी नदी के ऊपर से होती हुई अन्र्तराष्ट्रीय सीमा के साथ साथ सीमा पर V आकार बिन्दु तक । द क्षिण ः अभ्यारण्य की दक्षिण सीमा भारत व तिब्बत की अन्र्तराष्ट्रीय सीमा पर V आकार बिन्दु से आरम्भ होती हुई धार (रिज) के साथ साथ बढ़ती हुई स्पिति वन्य प्राणी मण्डल में प्रवेश कर के उत्तर में लिंगटी नदी व दक्षिण में स्पिति नदी के जल संग्रहण को अलग करते हुए किब्बरी नाले के ऊपर चोटी तक । प श्चिम ः पश्चिमी सीमा किब्बरी नाला के ऊपर चोटी से आरम्भ होती है और किब्बरी नाला और शिजी भांग के बीच एक धार (रिज) से लिंगटी नदी के मिलान बिन्दू से नदी के साथ नीचे की ओर चलती हुई सांगलं ग गावं के नजदीक तक ू जाती है और तदोपरान्त लिंगटी नदी को पार करके सांगलंग गांव को एक तरफ छोड़ खुखे नाला तक जाती है उसके उपरान्त फिर नाले के साथ साथ धार पर से चोटी तक लांजर गांव के नजदीक से दूसरी ओर जाकर उसी नाले के साथ-साथ नीचे की ओर शिल्ला नाला तक जाकर, शिल्ला नाला को पार कर पिछली ओर छोटा नाला से होती हुई दुनवाचेन की सबसे ऊंची चोटी 16900 फुट तक जाएगी फिर छोटे नाले में नाचे होती हुई जोकि पिछली तरफ है फिर उसी नाले के साथ नीचे की ओर पूरी लुंग बी के मिलान बिन्दु तक, फिर पूरी लुंग बी नाले के साथ साथ ऊपर की ओर पारंगला चोटी 18300 फुट फिर सीमा आगे बढ़ते हुए धार पर से पश्चिम में टाकलिंग नदी व पूर्व में टाकलिंग नाला पर एक जगह जहां से पश्चिम को मुड़ कर उसी धार के साथ-साथ दक्षिण में टाकलिंग, तानमू व किबजी नदी के जल संग्रहण और उत्तर में लंगेहर नदी व मलंग नदी को अलग करती हुई लंगेहर नाले में उत्तरी सीमा के आरम्भ बिन्दू पर मिलती है। |
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II दारनघाटी.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-22/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 167.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र दारनघाटी को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए सं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल सं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान भू-क्षेत्र 48.56 वर्ग किलामीटर में 127.87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन आशय अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचनाओं को जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 176.12 वर्ग किलोमीटर (यथा 167 वर्ग किलोमीटर के अधिसूचित क्षेत्र के स्थान पर) के क्षेत्र को सम्मिलित किया गया है और उसमें से 4.62 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र निकाल दिया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् 171.50 वर्ग किलोमीटर (48.25 वर्ग किलोमीटर 127 वर्ग किलोमीटर -4.62 वर्ग किलोमीटर) के कुल क्षेत्र से अब दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 171.50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | दारनघाटी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | दारनघाटी | (i) शिमला (ii) सराहन (वन्य जीव मण्डल) | उत्तरः सीमा कांडी धार से आगे सराहन नीजि भूमि के साथ साथ राई गाड़ के एक सहायक नाले से होती हुई ऊपर की ओर बशाल धार की चोटी 3070 मीटर फिर धराली खड्ड के दाईं ओर के नाले में मिलती हुई फिर दूसरे नाले के साथ |
| साथ उस की चोटी 3880 मीटर फिर शिमला और किन्नौर जिला की सीमा के साथ साथ आगे टेरमी बिन्दु 3979 मीटर ऊंचाई, का करब 4211, वेलन,ू गंगधारीधार पर बिन्दु 4396, बिन्दु 5148 से हंसवेशन बिन्दु 5240 तक । प ू र्व : हंसवेशन बिन्दु 5240 मीटर से किन्नौर व शिमला जिला की सीमा के साथ साथ बिन्दु 5236 मीटर से होती हुई क्रशिकरिंग बिन्दु 5088 मीटर तरेचा धार पर सरु झील से होती हुई कथरेच घाटी बिन्दु 4150 मीटर ऊंचाई तक । द क्षिण ः कथरेच घाटी बिन्दु 4150 मीटर ऊंचाई बिन्दु से ऊंचाई जालसू घाटी 4149 मीटर, पालधार बिन्दु 4308 मीटर, 4331 मीटर, झालसू घाटी 4190 मीटर, लोडर थाच 4314 मीटर, 4035 मीटर, मोराल दांडा, जरेयादा 3781 मीटर से मोराल कांडा बिन्दु 3732 मीटर तक । प श्चिम ः मोराल कोडा बिन्दु 3732 मीटर से सीमा धार पर बिन्दु 3485 मीटर, 3071 मीटर से दोपाढा 2808 मीटर तक फिर दांईं तरफ मुड़ते हुए सारटू गाड के छोटे सहायक नाले में नीचे की ओर बिन्दु 2195 मीटर फिर बांयें मुड़ते हुए पाली दोगरी, मराला और दरकाली खेती योग्य भूमि को अलग करते हुए रेयार होती हुई दरकाली के नजदीक छोटे सहायक नाले को पार करते हुए धार पर शारनू दर्रा बिन्दु 2860 मीटर, धार के साथ-साथ ऊंचाई 2971 मीटर जोकि डिबारी डांसा संरक्षित वन की सीमा के साथ साथ नोगली गाढ पर कोटला संरक्षित वन की सीमा में मिलती है फिर नोग ली गाढ के साथ-साथ ऊपर की ओर बिन्दु 2155 मीटर जोकि मिलान बिन्दु कातरी गाढ पर है फिर कातरी गाढ पर ऊपर की ओर जाते हुए बांर्इं तरफ मुड़ती है जहां कातरी गाढ दांर्इं तरफ मुड़ती है और जंगधार पर V आकार से धार पर आगे जाते हुए पाट व रेयारा संरक्षित वन की सीमा के साथ साथ मुनिष पूर्व संरक्षित वन से होती हुई बिन्दु 3106 मीटर, फिर रास्ते के साथ साथ विरनी धार से मुनिष और थारगाढ को पार करते हुए सहायक नाले पर V आकार से आगे मुनिष निजि भूमि और मुनिष पश्चिम संरक्षित वन की सीमा से होती हुई धार पर बिन्दु 2988 मीटर, 3064 मीटर से दारनघाटी दागे री मे ं 2960 मीटर नजदीक पी0 डब्ल्यू0 डी0 विश्राम गृह, सरी खड्ड के सहायक नाले के साथ नीचे की ओर सरी और रामा खड्ड के मिलान बिन्दु तक फिर रामा खड के साथ साथ ऊपर की ओर रामा दोगरी के नजदीक बांईं तरफ नाला पार करके कोटमी धार पर बिन्दु 2887 मीटर से होती हुई वन सीमा के साथ साथ छुआरीबाई के नजदीक वजडी़ गाढ में मिलते हुए फिर इसी गाढ के साथ ऊपर की तरफ फिर नाले के बीच से बांईं तरफ मुड़ते हुए जवाई धार को पार कर के खोल्टी गाढ में नीचे की तरफ नाले को पार करके रुनपू और बांगीशरण दोगरी की निजि भूमि को विभाजित करके सीमा के साथ-साथ कोटा गाढ में मिलती है फिर नाले के साथ ऊपर की ओर भगाट संरक्षित वन के साथ जाते हुए नाले को पार | |||
| करके जगधारा, बहाली, धवान निजि भूमि की सीमा के साथ-साथ गरटाढा खड्ड में जाकर मिलती है फिर इसी खड के साथ ऊपर की ओर चोटी पर बिन्दु 3655 मीटर तक फिर कनातरी धार के साथ-साथ बिन्दु 3022 मीटर, पिथवी व थाडा गांव की निजि भूमि को अलग करती हुई थाडा खड्ड में मिलने के बाद इसी नाले में ऊपर की तरफ बासल कांडा की तरफ मुड़ते हुए पंजगांव और रगोरी की निजि भूमि को अलग करते हुए कांडीधार व गाढधार तक । |
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और तालरा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप 6.48 वर्ग किलोमीटर (क्लक्टर शिमला की घोषणा के अनुसार) का अतिरिक्त क्षेत्र एतद्द्वारा सम्मिलित किया जाता है । युक्तिकरण के पश्चात् अब तालरा वन्य जीव अभ्यारण्य 46.48 वर्ग किलोमीटर (40.00 वर्ग किलोमीटर 6.48 वर्ग किलोमीटर) से गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 46.48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से तालरा वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
तालरा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगीः
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | तालरा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1. | तालरा | (i) शिमला (ii) शिमला (वन्य जीव मण्डल) | उत्तरः उत्तरी सीमा रावीगढ ़ सी-5 से बानकोट टिब्बा- थनाली थाच सी-5 के साथ साथ अशरी धार सी-6 रेतरु थाच/सबला थाच से सी-9 छाजपुर नाला, सी-12 और सी-13 छाजपुर (रोहडू वन मण्डल) सी-11 और सी-14 (बी) से होती हुई सी-15 सुरक्षित वन रोहडू वन मण्डल तक जाती है। इसके बाद सारी उत्तरी सीमा रोहड़ू वन मण्डल सीमा से होती हुई जाती है । प ू र्व : सीमा संरक्षित वन सी-15 जोकि रोहड़ू वन मण्डल (सी.17) के साथ है से आरम्भ हो कर काश्टा सी.1 वन तक फिर रोहडू़ वन मण्डल व उतराखंड राज्य सीमा पर से जाती है । द क्षिण ः उतराखंड राज्य सीमा और खोरा वन चौपाल मण्डल तक । प श्चिम ः ओली देहात, गुरार देहात, सराच वन, थनाल वन, रींजा वन को बाहर करते हुए लालों वन व रावीगढ ़ वन सी. 6 और सी.5 की चोटी तक । स ीमा पैमाना 1ः15,000 के अनुसार |
2264 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टोपो शीट नम्बर 53ई/12 व 53ई/16 और 53एफ/9 और 53एफ/13, (पैमाना 1ः50,000) पर दर्शाया गया है।
क्षेत्रफल : 46.48 वर्ग कि0 मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II चायल.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-25/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 109.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र चायल को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और चायल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 108.53 वर्ग किलोमीटर में से 92.53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (चक के रूप में सकोड़ी आरक्षित वन आर-18 कम्पार्टमैंट न0 2 बी के 141 किता मापन 3-06-86 है0 क्षेत्र से समाविष्ट मुख्य बाजार चायल सहित उपाबन्ध-I के अनुसार संलग्न 84 गांवों की सूची में समाविष्ट) को अभ्यारण्य से निकाल दिया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् 16.00 वर्ग किलामीटर (108.53 वर्ग किलोमीटर-92.53 वर्ग किलोमीटर) के शेष क्षेत्र से चायल वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, शेष 16.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से चायल वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।2265 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 चायल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगीः
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | चायल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1. | चायल | (i) सोलन व शिमला (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तरः उत्तरी सीमा बीनू आरक्षित वन/23 के सीमा स्तम्भ संख्या 22 से आरम्भ हो कर दांये मुड़ते हुए वन सीमा स्तम्भ नम्बर 21 के साथ-साथ बिन्दु 1955 मीटर व 2139 मीटर जोकि शिमला और सोलन जिला सीमा तथा शिमला व सोलन वन मण्डल सीमा पर स्थित है फिर इसी जिला व वन मण्डल सीमा के साथ-साथ सकौड़ी आरक्षित वन/24 से होते हुए सीमा स्तम्भ नम्बर 53, 52, 51, 50, 49 फिर दार्इं तरफ छोटे नाले के साथ ऊपर की तरफ सड़क तक फिर सड़क पार कर के बिन्दु 2230 मीटर के पास कई सड़कों के मिलान बिन्दु से होती हुई सड़क के साथ-साथ एम. ई. एस के विश्राम गृह तक फिर छोटी धार के साथ-साथ नीचे की तरफ भौजदीन आरक्षित वन/25 के सीमा स्तम्भ संख्या 4, 5, 6, 7 व 8 होती हुई फिर नीचे छोटा नाला एवं दितक गावं की बाहरी सीमा होती हुई मलान शील संरक्षित वन/89 के सीमा स्तम्भ संख्या 4 से सीमा स्तम्भ संख्या 3 तक । प ू र्व ः मलान शील संरक्षित वन/89 के सीमा स्तम्भ 3 से सीमा स्तम्भ संख्या 2, 1 बी, 1 ए और 1 होती हुई जिला एवं वन मण्डल सीमा के साथ-साथ बांईं तरफ मुड़ते हुए भौजदीन संरक्षित वन/89 के सीमा स्तम्भ संख्या 5 से 32 के साथ-साथ फिर एक छोटे नाले के साथ-साथ जोकि बिन्दु 2061 से बहता है सड़क तक फिर सड़क के साथ-साथ भौजदीन आरक्षित वन/25 के सीमा स्तम्भ संख्या 29 से फिर सीमा स्तम्भ संख्या 30 से होती हुई 36 तक । द क्षिण ः भौजदीन आरक्षित वन/25 के सीमा स्तम्भ 36 से सीमा स्तम्भ 37 से 46 होती हुई बिन्दु 2176 मीटर तक फिर हिन्नर पौधरोपण क्षेत्र के साथ-साथ से बाएं मुड़ते हुए छोटा नाला के साथ हिन्नर और करोग गांव वाले रास्ते की मिलान बिन्दू से होते हुए फिर उसी रास्ते के साथ-साथ बाएं मुड़ कर झांजा खड़यून संरक्षित वन/88 के सीमा स्तम्भ संख्या 17 से होते हुए फिर बाएं मुड़ कर सीमा स्तम्भ संख्या 17 और 16 के बीच से बिन्दु 1700 मीटर से आगे कन्टूर 1700 मीटर के साथ-साथ नाला जोकि झांजा खड़यून संरक्षित वन/88 सीमा स्तम्भ संख्या 6 से निकलता है फिर उसी नाले के साथ-साथ सीमा स्तम्भ 6 तक। प श्चिमः सीमा स्तम्भ 6 से आगे 5, 4, 3, 2 से होती हुई सीमा स्तम्भ संख्या 1 से पहले सड़क तक फिर इसी सड़क के साथ-साथ खड़यून आरिक्षत वन/21 के सीमा स्तम्भ 3 फिर छोटे नाले में नीचे की तरफ मुख्य नाले के मिलान बिन्दु काहला गांव के नीचे तक फिर उसी नाले के साथ-साथ |
| ऊपर की तरफ सीमा स्तम्भ संख्या 30 के पास नाले के उद्गम स्थल तक इसके बाद आगे सीमा स्तम्भ संख्या 24 से 1 आरक्षित वन/24 से सकौड़ी होती हुई बिनू आरक्षित वन/23 के सीमा स्तम्भ संख्या 13 से आगे सीमा स्तम्भ बिना नम्बर एवं सीमा स्तम्भ संख्या 56, 54, 53 से आगे बिनू आरक्षित वन/23 के सीमा स्तम्भ संख्या 22 तक । स ीमा पैमाना 1ः15,000 के अनुसार |
सोनाघाट
घरेण घेटली
टिक्कर
बखोर
22. बांजणी 23. सकौड़ी भढ़ेच 24. 25. डूनू 26. डून्टी 27. 28. चोकी 29. पुजारली शिलडू 30. धरयां 31. 32. दोची 33. पोआश 34. चोहड़ा 35. आंजी-II 36. कनैला 37. 38. 39. तैंतू 40. झाजा 41. खड़यून 42. चबरी 43. कोढो 44. कोहला शकोग 45. 46. महोग 47. काथला 48. कोट नायर 49. 50. चायल 51. नगाली 52. झड़याल 53. जेठना 54. बधेट 55. 56. बगेड़ 57. घेवा 58. मौरी 59. कानो 60. हुक्कल 61. मिहानी 62. सेवला धन्गील 63. 64. जखेढ 65. डमढार 66. 67. बनैर 68. काटल भूयिरा 69. 70. खरांजी 2268 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 71. छोब 72. कढोल 73. नौहरा 74. कुरगल 75. टकरैणा 76. डैहर 77. नौग 78. गौड़ा 79. रेहढ 80. चगांव 81. हिन्नर 82. कनोढी 83. टरांजी 84.
टिक्करी
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II सिम्बलबाड़ा.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-27/99 तारीख 1-11-1999 द्वारा 19.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र सिम्बलबाडा़ को वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए न0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा सिम्बलवाडा़ वन्य जीव अभ्यारण्य में विद्यमान 8.88 वर्ग किलामीटर का अतिरिक्त क्षेत्र सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 35(1) के अधीन आशय 27.88 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सिम्बलबाडा़ राष्ट्रीय पार्क के रुप में गठित करने के आषय की अधिसचू ना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की2269 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और सिम्बलबाडा़ वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप 8.88 वर्ग किलोमीटर का अतिरिक्त क्षेत्र एतद्द्वारा सम्मिलित किया जाता है । युक्तिकरण के पश्चात् 27.88 वर्ग किलोमीटर (19.00 वर्ग किलोमीटर 8.88 वर्ग किलोमीटर) के कुल क्षेत्र वाले वन्य जीव अभ्यारण्य से राष्ट्रीय पार्क के रुप में भी उन्नत (अपग्रेड ) किया जाता है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 35(4) के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 27.88 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से सिम्बलबाड़ा राष्ट्रीय पार्क घोषित करती हैं।
सिम्बलवाड़ा राष्ट्रीय पार्क की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगीः
| क्रम संख्या | राष्ट्रीय उद्यान का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | सिम्बलबाड़ा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र की सीमाएं। |
| 1. | सिम्बलबाड़ा | (i) सिरमौर (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल एवं पौन्टा मण्डल | उत्तरः वर्तमान सिम्बलवाड़ा वन्य जीव अभ्यारण्य की मुख्य शिवालिक रिज के साथ जगं ल कटा पत्थर के कम्र्पाटमैंट नं0 3 तक । प ू र्वः आरक्षित वन कटा पत्थर खाली के कम्र्पाटमैंट नं0 3, 4, 5, 6, 7, कटा पत्त्थर कम्र्पाटमैंट नं0 2. पानीवाली खाली कम्र्पाटमैंट न0 7 आरक्षित वन गुटृनपुर के कम्र्पाटमैंट नं0 1, 6, 10, 14, 17, 18, 19, (खण्ड), खाली कम्र्पाटमैटं नं0 1 जो साम्पोन वाली खली से अलग हुआ है खाली कम्र्पाटमैंट नं0 6, तथा धार जहां वृक्षों पर एक गोले निशान लगा है कम्र्पाटमैंट नं0 10,14 और 19 आरक्षित वन कोठीवाली के कम्र्पाठटमैंट नं0 1, 2, 8, खाली के कम्र्पाटमैंट नं0 2 और 8, आरक्षित वन मसताली सतिवाला गांव के कम्र्पाटमैंट न0ं 3, 5, 6, 7, 8, 9, व 10, व यमुनानगर सड़क अम्बवाली खाली के कम्र्पाटमैट नं0 1, 2, 3 तक जहां पेडों पर गोले लगे हैं । द क्षिण ः आरक्षित वन मारूसिध के अंतिम बिन्दू (मारूसिध मजार) से हरियाणा व हरियाणा सरकार के कलैसर राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के साथ-साथ आरक्षित वन अम्बुआली के कम्र्पाटमैंट नं0 3 तक राष्ट्रीय उद्यान की दक्षिणी सीमा के साथ-साथ है । प श्चिम ः राष्ट्रीय उद्यान की सीमा वर्तमान सिम्बलवाड़ा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमा रेखा और हिमाचल व हरियाणा राज्यों की सीमा रेखा है । स ीमा पैमाना 1ः15,000 |
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | मजाथल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1. | मजाथल | (i) सोलन एवं शिमला (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः जंदेरर धार के सतलजू नदी में मिलान बिन्दु से सतलूज नदी के साथ साथ ऊपर की ओर मंदरेच के पास सैंज खड्ड और सतलूज नदी के मिलान तक। प ू र्व ः सतलूज नदी और सैंज खड के मिलान बिन्दु मंदरेच से सैंज खड्ड के साथ साथ ऊपर की तरफ दरवाकोट धार के साथ साथ हरसंग मन्दिर के नजदीक परमा धार तक । द क्षिण : हरसंग मन्दिर के नजदीक परमा धार से धार पर कलोरटू गांव की निजि भूमि को बाहर करते हुए हरसगं संरक्षित वन सीमा के साथ-साथ रुदाल, सरयाली, पंजिना गांव को बाहर करते हुए पंजिना खड्ड को पार कर के वन सीमा गांव चालौनी देहात व वन सीमा के साथ साथ बिन्दु 1883 मी0 फिर आगे धार पर मजाथल संरक्षित वन सीमा पर तांसी होते हुए सरगदवारी चोटी 1965 मी0 के निकट तक । प श्चिमः सरगदवारी चोटी 1965 मी0 के निकट से जंदरेर धार पर नीचे की ओर झढोई होते हुए जंदरेर धार के सतलूज नदी में मिलान बिन्दु तक । |
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II चूड़धार.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-28/99 तारीख 1-11-1999 द्वारा 66.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र चूड़धार को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और चूड़धार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 66.70 वर्ग किलोमीटर में से 11.18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (5 गांव नामतः बटेअरी, सतानी, नौहरा, चूराह एवं कांडा से समाविष्ट) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य में से निकाल दिया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् 55.52 वर्ग किलोमीटर के शेष क्षेत्र से चूड़धार वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 55.52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से चूड़धार वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
चूड़धार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | चूड़धार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1. | चूड़धार | (i) सिरमौर एवं शिमला (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः उत्तरी सीमा बाई धार के नजदीक पताल खड्ड पर पुल व घाट गोदाम पुल से शुरु होती हुई बाई धार के साथ साथ बिन्दु 2655 मी0 हो कर |
| जोकि भैरोग संरक्षित वन अन्दर व सारा संरक्षित वन बाहर के बीच में से होती हुई रास्ते पर घुमाव बिन्दु से पताल खड्ड की उदगम चोटी 3108 मी0 के नजदीक तक । प ू र्व : बिन्दु 3108 मी0 के नजदीक से आगे भनाल व चूड़धार मन्दिर से आने वाले रास्तो ं के दोराहे की ओर आगे बिन्दु 3387 फिर चूड़धार मन्दिर परिसर को बाहर करते हुए बिन्दु 3647 मी0 से होती हुई पाल का पास जिला शिमला व सिरमौर की सीमा के साथ साथ ऊचैन टिब्बा 3544 मी0 फिर ऊचैन धार के साथ साथ बिन्दु 3506 मी0 व रास्ते के साथ साथ एनी धार, काकरालानी धार फिर खूरधार को मुड़ती है जो रिऊंडार का खाला अन्दर व बैरवों का खाला बाहर के जल संग्रहण के क्षेत्र को अलग करते हुए बिन्दु 2249 मी0 तक। द क्षिण : दक्षिणी सीमा खूरधार पर बिन्दु 2249 मी0 से आगे चौरास, खिलाग और घलवारी देहात व निजि भूमि को बाहर करते हुए आरक्षित वन की सीमा थांगा से कोटियान होती हुई राणा का खाले में ऊपर की तरफ शरयाल्टा और कचजूं का पत्थर तथा सिधाल गांव को बाहर करते हुए धार को पार कर के बिन्दु 2481 मी0 व घिना का खाला पार करते हुए वन सीमा के साथ साथ बराऊ धार के दोनों तरफ की निजि भूमि को बाहर करते हुए खनातियान के बाहर से चोटी 2700 मी0, फिर आगे संरक्षित वन की सीमा के साथ सतानी, डगूं सार, बटयोरी आरक्षित वन व गांव को बाहर करते हुए हरिपुर धार व नौहरा रोड़ के साथ साथ मरोरी के नीचे नालो को पार कर के कांडा व लगते गांव की निजि भूमि तथा देहात के बाहर से मारका का खाला व रोड़ तक । प श्चिमः पश्चिमी सीमा मारका का खाला सड़क से शुरु हो कर धार पर ऊपर बिन्दु 2962, झुलहासन टिब्बा 3355 मी0, 3342 मी0 और 3394 मी0 शिमला व सिरमौर की सीमा पर फिर इसी जिला सीमा पर थोड़ा आगे चल कर कोकली धार पर मुड़ते हुए बिन्दु 2946 मी0 नीचे की तरफ पताल खड उत्तरी सीमा की शुरुआत गोदाम पुल तक। | |||
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II दाड़लाघाट.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.टी.एस.(डी)-11/91-11 तारीख 5 अप्रैल, 2000 द्वारा 6.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र दाड़लाघाट को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और दाड़लाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप 6.00 वर्ग किलोमीटर के कुल क्षेत्र में से 5.33 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (जिसमें 11 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य से निकाल दिया गया है । इसके अतिरिक्त, शेष 0.67 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को संरक्षण आरक्षित क्षेत्र में परिवर्तित किया जाना है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए 0.67 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से दाड़लागांव संरक्षण आरक्षित क्षेत्र घोषित करती हैं ।
दाड़लाघाट संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगी :
| क्रम संख्या | संरक्षण आरक्षित क्षेत्र का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | दाड़लाघाट संरक्षण आरक्षित क्षेत्र सीमाएं |
| 1. | दाड़लाघाट | (i) सोलन (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः उत्तरी सीमा बाड़ी सीमा स्तम्भ-7 सीमांकित संरक्षित वन/55 से शुरु होती हुई बुईला और सरयांज अनारक्षित वन की सीमा के साथ सीमा स्तम्भ नम्बर 8, 9, 10 और 11 से गांव दुदली के नजदीक जीप योग्य रास्ते के मुड़ने वाले बिन्दु और बाड़ी सीमांकित संरक्षित वन/55 के भीतरी सीमा स्तम्भ नम्बर 12 तक । |
| पूर्व ः बुईला अनारक्षित वन व बाड़ह सीमांकित संरक्षित वन/55 को विभाजित करने वाली मुरारी ढांक की धार के साथ ऊपर की ओर सीमा स्तम्भ नम्बर 12 बिन्दु 1955 मी0 से बाड़ा देव मन्दिर तक । द क्षिण : शिविर स्थल के उपरी सीमा से बाड़ा देव मन्दिर और मन्दिर के रास्ते से बाड़ी अनारिक्षत वन के अन्दर से और अनारिक्षत वन गरड़नाग से बिन्दु 2069 मी0, बाड़ी सीमांकित संरक्षित वन के सीमा स्तम्भ नम्बर 4 से सीमा स्तम्भ नम्बर 5 बिन्दु 1951 तक । प श्चिमः सीमा स्तम्भ नम्बर 5 बिन्दु 1951 मीटर जीप योग्य रास्ते के मुड़ाव बिन्दू से शिविर स्थल के ऊपर बाड़ी सीमांकित संरक्षित वन/55 के सीमा स्तम्भ नम्बर 7 तक । स ीमा पैमाना 1ः15000 के अनुसार | |||
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II शिल्ली.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ-बी-एफ(6)-24/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 2.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र शिल्ली को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और शिल्ली वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 2.14 वर्ग किलोमीटर में से, 0.65 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (7 गांवों नामतः गहलान, बजरोल, चंगर, शिल्ली, शलकना, चोखला और मलाउन से समाविष्ट) को एतद्द्वारा अधिसूचना में से निकाल दिया जाता है । इसके अतिरिक्त, 1.49 वर्ग किलोमीटर के शेष क्षेत्र को किसी संरक्षण आरक्षित क्षेत्र में परिवर्तित किया जाना है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 1.49 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से शिल्ली संरक्षण आरक्षित क्षेत्र घोषित करती हैं ।
| क्रम संख्या | संरक्षण आरक्षित क्षेत्र का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | शिल्ली संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की सीमाएं |
| 1. | शिल्ली | (ii) सोलन (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर : सलाकना और शिल्ली गांव की निजी भूमि की बाहरी सीमा के साथ-साथ राजगढ़ को जाने वाल रास्ते पर पुराने पुल से होती हुई चौखला, बजलोग, मनून और ददोह के साथ-साथ होती हुई झानाें खड्ड तक । |
| पूर्व ः झानों खड्ड से मनून और माल्टीवाल गांव की बाहरी सीमा से होती हुई बिन्दु 1921 मी0 तक । द क्षिण ः धार पर बिन्दु 1921 मी0 से आरम्भ होती हुई खनोग टिब्बा से मटौल गांव तक । प श्चिम ः मटौल गांव से बजरोल व चांगर गांव की निजि भूमि की बाहरी सीमा से होती हुई सलाकना गांव की निजि भूमि तक । स ीमा पैमाना 1ः15,000 के अनुसार | |||
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2278 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और बान्दली वन्य जीव अभयारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 32. 11 वर्ग किलोमीटर पाया गया है तथा (32.11 वर्ग किलोमीटर का यह क्षेत्र) युक्तिकरण के पश्चात् अब बान्दली वन्य जीव अभ्यारण्य का गठन करेगा;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 32.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से बान्दली वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
बान्दली वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगीः
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | बान्दली वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | बान्दली | (i) मण्डी (ii) कुल्लू (वन्य जीव) मण्डल | उत्तरः बांदली सीमांकित आरक्षित जंगल (डी पी एफ) की सीमा स्तम्भ संख्या 61 से 80 तक बिन्दु 1763 मीटर, 1636 मीटर और खाले नाला सीमांकित आरक्षित जंगल (डी पी एफ) को पार करते हुए भदरोहलू नाला के साथ साथ। प र्वः बांदली सीमांकित आरक्षित जंगल (डी पी एफ) की सीमा ू स्तम्भ संख्या 94 से 95 सैरी खड तक । द क्षिण ः बांदली सीमांकित आरक्षित जंगल (डी पी एफ) की सीमा स्तम्भ संख्या 80 से 94 तक सैरी खड के साथ साथ। प श्चिम ः बांदली सीमांकित आरक्षित जंगल (डी पी एफ) की सीमा स्तम्भ संख्या 95 से 162 तथा बूर्जी संख्या 1 से 61 तक साथ लगती कृषि भूमि के छोड़ती हुई । |
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II मनाली.--पंजाब सरकार ने अधिसूचना संख्या 70 जी. पी. 53/97 तारीख 28-2-1954 द्वारा पंजाब वाइल्ड बर्डस एण्ड प्रोटैक्शन ऐक्ट, 1933 की धारा 8 के अधीन 29.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र मनाली को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्काें, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए सं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 29.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से मनाली वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं।
मनाली वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | मनाली वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | मनाली | (i) कुल्लू (ii) कुल्लू (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः बुंगडवारी जंगल के अनुभाग-5 के 2/5 की सीमांकित रेखा पर बिन्दु 3377 मी0 के साथ साथ । प ू र्व : 1/1 और 2/5 बजरुंडी सीमांकित रेखा अनुभाग 1 और कृषि भूमि के साथ साथ । द क्षिण : बनौन नाला और 2/6 सी 4 मोनाल गाहर जंगल की सीमांकन सीमा तक । प श्चिम ः जंगल की प्राकृतिक सीमा के साथ बुंगडवारी जंगल 2/5 अनुभाग 5 की सीमांकित रेखा तक । |
शिकारी देवी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | शिकारी देवी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | शिकारी देवी | (i) मण्डी (ii) कुल्लू (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः सीमा तुगंरासनी संरक्षित वन क्षेत्र के उत्तरी नाला के साथ आरम्भ होती हुई तुगंरासनी संरक्षित वन क्षेत्र की उत्तरी सीमा के साथ-साथ, दरोथा आरक्षित वन क्षेत्र, देवलानाल संरक्षित वन क्षेत्र बिएढ संरक्षित वन क्षेत्र, कमारला संरक्षित वन क्षेत्र और चिल्मागाड़ संरक्षित वन क्षेत्र से भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंचमार्क 2968 मीटर तक। प ू र्व : सीमा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 2968 मीटर से आरम्भ होती हुई रास्ते के साथ साथ बिन्दु फिर भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 3106 मीटर तंगराल नाले के साथ नीचे को जाती हुई छोटे नाले और तंगराल नाला के संगम बिन्दु के नजदीक गांव कयोलीनाल तक तथा उसके उपरान्त छोटे नाले में ऊपर की ओर बुढ़ा केदार, राएगढ़ आरक्षित वन क्षेत्र की पूर्वी सीमा के साथ साथ चंजवारा धार तक । द क्षिण ः सीमा चंजवारा धार के साथ साथ दक्षिण की ओर भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 2997 मीटर और 3076 मीटर से चोटी भारमबरी आरक्षित वन क्षेत्र की पश्चिम-उत्तरी सीमा तक । प श्चिम ः भारमबरी आरक्षित वन क्षेत्र की पश्चिम-उत्तरी सीमा से आरम्भ होती हुई भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 3208 मीटर, शिकारी धार भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 3255 मीटर, 3077 मीटर और तुगंरासनी संरक्षित वन क्षेत्र की पश्चिमी सीमा के साथ साथ तुगंरासनी संरक्षित वन उत्तरी सीमा के नाले तक। |
उपाबन्ध-I गांव की सूची जो शिकारी देवी अभ्यारण्य से बाहर किये जाने हैं।
क्रम संख्या गांव का नाम 1 रिउंसी 2. ओली 3. गरादी 4. थाच 5. बधारा 6. कटोर 7. मूरहाला 8. कनेश 9. मौजा 10. कस्या 11. टुंगरासनी 12. सपाकर 13. बगरियाण 14. सुरला 15. दोगली 16. घरू 17. व्याला 18. सुधा 19. फुटीजां 20. थुगला 21. फंजीटी 22. धरूच 23. धरवार 24. कटू 25. तनोट 26. स्वान 27. स्लार 28. तेाकरी 29. च्याली 30. तीर 31. नौर 32. मटौट 33. रयाडा 34. धलीयार 35. वनसोड 36. चैडा 37. सौधा 38. स्ांगलवार 39. लंव 40. भरेड 41. बुराहला 42. प्याला2283 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 43. भियांद 44. सैहल 45. जरैड 46. दिगांली 47. गुराडा 48. कुरासली 49. चींदी 50. नरौड 51. जनोट 52. झगेर 53. रूहाडा 54. खडौल 55. डवोला 56. चोलूथाच 57. केउलीनाल 58. शीहल 59. चुरासनी 60. लेाअर चुरासनी 61. ढुलानी 62. रूशाला 63. परनौट 64. झोथ 65. डिम 66. मझारला 67. चुनाडा 68. गलोन 69. शलाड 70. नेहरा 71. खनेहर 72. जमण धगयारी 73. कुतनास 74. कुटेर 75. वैसनीजान 76. मसोगल 77. खुड 78. नारथी 79. मतयाणी 80. वरसोआ 81. धरवार 82. वकारन 83. पलोची 84. भुमर 85. तनसेर 86. लताग 87. चनाग 88. शीजग2284 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 89. वाहन 90. कोचा 91. धार 92. होन 93. स्वार 94. वुरनाला 95. वुकरार 96. कथयाला 97. डीडी 98. लम्वीधार 99. स्वारनाला 100. मुरहाला 101. नसरार 102. छानेहनी 103. डमेहरी 104. थनार 105. झोतला 106. झाकरीनाल 107. खानुखली 108. पोखरीधार 109. नाघीनाल 110. पलाहर 111. बरेन्ड 112. जोकावली 113. कंडीधार
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II काइस.--पंजाब सरकार ने अधिसूचना संख्या 70 जी. पी. 53/97 तारीख 28-2-1954 द्वारा पंजाब वाइल्ड बर्डस एण्ड वाइल्ड एनिमलस प्रोटैक्शन ऐक्ट, 1933 की धारा 8 के अधीन 13.65 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र काइस को वन्य जीव अभ्यारण्य को घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्काें, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचूनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 19722285 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए सं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और काइस वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 12.61 वर्ग किलोमीटर पाया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् 12.61 वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र से काइस वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयागे करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 12.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से काइस वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं।
काइस वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | काइस वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | काइस | (i) कुल्लू (ii) वन्य प्राणी मण्डल, कुल्लू | उत्तर ः बासकट थाच से 2/32 माटी काछर व 2/27 पधरा राइज और 2/26 मराऔरी व काइस नाला की सीमांकित रेखा के साथ साथ जनीयाल थाच तक । प र्वः जनीयाल थाच से ब्यास व पार्वती नदी के जलग्रह क्षेत्र की धार ू के साथ साथ रुमटू धार से होती हुई जलाड़ा थाच बिन्दु 3481 मी0 तक । द क्षिण ः जलाडा़ थाच बिन्दु 3481 मी0 से माटीकोछर व पिन्सू संरक्षित वन क्षेत्र और 2/32 माटीकोछर अनुभाग 6 बी, अनुभाग 5 की सीमाओं को विभाजित करती हुई धार पर व फिर धार पर नीचे की ओर धारा से काइस नाला से ब्यास नदी में बहते हुए नाले की चोटी तक । प श्चिम : फिर माटीकोछर वन की सीमांओं के साथ-साथ और वन सीमा के साथ जाते हुए नाले में नीचे की ओर नाले के पश्चिम की ओर मुड़ने के बिन्दु तक, और रियून थाच, माटीकोछर की वन सीमा के साथ और सड़क के साथ-साथ बासकट थाच तक । |
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति.--उत्तर अक्षांश 320 03' 10" उत्तर और देशान्तर 770 12' 32" पूर्व ।2286 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935
वन विभाग
अधिसचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II खोखन.--पंजाब सरकार ने अधिसूचना संख्या 70 जी. पी. 53/97 तारीख 28-2-1954 द्वारा पंजाब वाइल्ड बर्डस एण्ड प्रोटैक्शन ऐक्ट, 1933 की धारा 8 के अधीन 13.36 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र खोखन को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए न0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और सरकार ने अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा खोखन वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 19.50 वर्ग किलामीटर भू-क्षेत्र में 2.95 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 18(1) के अधीन आशय अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और खोखन वन्य जीव अभयारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप खोखन वन्य जीव अभ्यारण्य में 2.95 वर्ग किलोमीटर का अतिरिक्त क्षेत्र सम्मिलित किया गया है और भू-क्षेत्र पर अर्थात 19.50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (यथा 13.36 वर्ग किलोमीटर अधिसूचित क्षेत्र के स्थान पर) में से 7.51 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र (जिसमें 27 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य में से निकाल दिया गया है। युक्तिकरण के पश्चात् अब 14.94 वर्ग किलोमीटर (19.50 वर्ग किलोमीटर 2.95 वर्ग किलोमीटर-7. 51 वर्ग किलोमीटर) के कुल क्षेत्र से खोखन वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 14.94 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से खोखन वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करती हैं ।2287 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | खोखन वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | खोखन | (i) कुल्लू (ii) कुल्लू (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर : सीमा राजगिरि संरक्षित वन क्षेत्र की पूर्वी सीमा से आरम्भ होती हुई ओरीवन संरक्षित वन क्षेत्र की उत्तरी सीमा के साथ ऊपर की ओर टिच्ची नाला में नागनी संरक्षित वन क्षेत्र की उत्तरी सीमा के साथ-साथ शांगली के ऊपर नागनी धार तक । प र्व : सीमा नागनी धार के ऊपर भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच ू मार्क 2594 मीटर, 2614 मीटर से होती हुई नागनी संरक्षित वन क्षेत्र की सीमा के साथ और फिर दुकन्न आरक्षित वन क्षेत्र से होती हुई गनोगी तक । द क्षिण ः सीमा दुकन्न आरक्षित वन क्षेत्र की सीमा के गनोगी से वन सीमा के साथ-साथ भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंचमार्क 2010 मीटर, 2659 मीटर, 2622 मीटर से होती हुई कुल्लू और मण्डी जिला की सीमा के ऊपर भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 2787 मीटर तक । प श्चिम : सीमा भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बैंच मार्क 2787 मीटर से मुंज का संरक्षित वन क्षेत्र और नियारग आरक्षित वन क्षेत्र की सीमा के साथ-साथ राजगिरि संरक्षित वन क्षेत्र की पूर्वी सीमा तक और फिर कुल्लू व मण्डी जिला के साथ 2328 मीटर से होती हुई उत्तरी सीमा के आरम्भ बिन्दु तक । |
2288 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 5. वदली रा ग्रां 6. दिनू सेरी 7. तेहन सेरी 8. सूवली 9. दियोग्रां 10. रोहलगी 11. धमच्याण 12. नूर-ग्रां 13. खारका 14. शगाह 15. भाखली 16. चेष्ट धार 17. कोशूई 18. चेष्टा 19. तीची 20. डावरी
21. जनाहल 22. शकराह 23. चौकीधार 24. चोरग्रां 25. भोटा रा ग्रां 26. सपाका 27. दोहरानाला
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II धौलाधार.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 944.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र धौलाधार को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एन्वारन्मेंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूि नयन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य के अधिसूचित 944.00 वर्ग किलामीटर क्षेत्र में 37.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन आशय अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसुचनाएं जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 19722289 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू0-क्षेत्र 1117.86 वर्ग किलोमीटर में से 135 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (जिसमें 43 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य में से निकाला जाता है ।
युक्तिकरण के पश्चात् अब धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य में शेष 982.86 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से गठित होगा । इसके अतिरिक्त 37 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जिसकी बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन सरकार की अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ (6)-11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा आशय अधिसूचना जारी की गई थी, को एतद्द्वारा वापिस लिया जाता है।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 982.86 वर्ग किलोमीटर के शेष क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :-
| क्रम संख्य | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | धौलाधार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | धौलाधार | (i) कागं डा़ (ii) हमीरपुर (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर : 5702 मीटर से जिला की सीमाओं के मिलान बिन्दु से होते हुए लाहौल और कांगड़ा जिलों की सयुंक्त सीमाओं से पूर्व दिशा की ओर, लाहौल, कुल्लू और कांगड़ा जिलों के मिलान बिन्दु तक, आशा गेट, 5033 मीटर लालूणी जोत 5438 मीटर, 5508 मीटर, 5118 मीटर, 6023 मीटर और 5934 मीटर त्रिकालपुर जोत 5741 मीटर, 5514 मीटर, 5487 मीटर से होते हुए मुकार बेही 6069 मीटर की ऊंचाई तक। प र्व ः जिला लाहौल, कुल्लू और कांगड़ा की सीमाओं के ू मिलान बिन्दु से होते हुए इसी जिला सीमा पर कुल्लू, मण्डी, और कांगड़ा जिला के मिलान बिन्दु शिरारा रा टिब्बा बिन्दु 4034 मीटर तक जोकि ब्यास कुण्ड-रीधार से होते हुए टेन्टू की जोत 4996 मीटर, हनुमान टिब्बा 5932 मीटर, थरोड दर्रा 5516 मीटर, 5307 मीटर, 4988 मीटर, 5204 मीटर और सागर जोत 4833 मीटर, खल्यानी जोत, काथीकुक्री जोत से 4639 मीटर तक फिर मकोरीधार 5161 मीटर, 4943 मीटर, 8494 मीटर, 4730 मीटर, 4753 मीटर, 4758 मीटर, 4412 मीटर, भेरलान्गा पास 4139 मीटर, 4603 मीटर, सरी धार 4210 मीटर सरी गलू 3737 मीटर, 4042 मीटर से होते हुए शिरारा रा टिब्बा 4034 मीटर तक । |
| दक्षिण ः शिरारा रा टिब्बा 4034 मीटर से कांगड़ा मण्डी जिला सीमा के साथ-साथ गारेट थाच 3734 मीटर, नारदू टिब्बा थाच सरी नाला के नीचे की तरफ फिर धनयारी गोट के साथ-साथ ऊपर को जाखलू गोट 3353 मीटर फिर दांई तरफ पार करते हुए लम्बा डग सहायक नाला गाई गोट ऊपर की तरफ धार पर तारमुंडा गोट, कयाली गोट 3667 मीटर, बाई गोट, लम्बा डग नाल को पार करते हुए लौहार गोट फिर नीचे मुड़ कर रास्ते के साथ देव नाला के ऊपर की तरफ 3693 मीटर से होती हुई नारु धार पर धंधनी गाट, 4177 मीटर, 3509 मीटर सानादूरनी गोट से होते हुए ऊहल नदी में नीचे की तरफ जाते हुए 2666 मीटर खरयोड गोट फिर नाले में ऊपर की तरफ धार की चोटी 3200 मीटर कन्टूर तक । प श्चिम : धार पर बिन्दु 3200 मीटर से होते हुए इसी कन्टूर के साथ-साथ 3277 मीटर और बिन्दु 3867 मीटर की ऊंचाई जोकि तत्तवाणी नाला व ऊहल नदी के बीच में है फिर बिन्दु 4581 मीटर से होते हुए जिला सीमा चम्बा व कांगड़ा के साथ-साथ लाहौल, चम्बा व कांगड़ा जिला सीमा मिलान बिन्दु तक, कनौर की धार पर से थामसर 5078 मीटर, 5076 मीटर, दांगी धार 4217 मीटर से नीचे की ओर राबी नदी 2294 मीटर के नजदीक फिर राबी नदी के साथ-साथ पलेड नाला के मिलान बिन्दु से पलेड नाला के साथ-साथ 4759 मीटर चोटी, निकोरा पास, निकोरा धार पर बिन्दु 5222 मीटर, 5416 मीटर और डोघ धार बिन्दु 5535 मीटर से बिन्दु 5702 मीटर उत्तरी सीमा आरम्भ बिन्दु तक । |
6. सरमण 7. धारमण 8. सराला 9. उहल धार 10. सरोटा 11. बाकोलोग 12. मुलथान 13. सेरी 14. छेरना 15. स्वार 16. जुधार 17. तरमेहड़ 18. लुआही 19. नलोटा 20. बड़ा ग्रां 21. बीड़ 22. चौगान 23. गुमेहड़ 24. कोटली 25. क्योरी 26. सुज्जा 27. लाहड़ 28. बाड़ी 29. लम्बाहड़ 30. रूलिंग 31. राजगुन्धा 32. करधाड़ 33. कक्ड़गुन्धा 34. कोठीकोहड़ 35. गगाल दी मलांह 36. चेल्लियां दी मलांह 37. कोहड़ उपरला 38. अन्धरली मलांह 39. खडी़ मलांह 40. रोपड़ू 41. नपोटा 42. पोलिंग 43 भुजलिंग
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II पौंग बांध झील.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 307.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र पौग बांध झील को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
2292 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एन्वारन्मैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन इस आशय की अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचना अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और पौंग बांध झील वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू0-क्षेत्र 253.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 46.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (जिसमें 52 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण में से निकाला जाता है। युक्तिकरण के पश्चात् 207.59 वर्ग किलोमीटर के शेष क्षेत्र से पौंग बांध झील वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 207.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र तुरन्त प्रभाव से पौंग बांध झील वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करती हैं ।
पौंग बांध वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगीः
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | पौंग बांध झील वन्य जीव अभ्यारण्य का क्षेत्र |
| 1 | पाैंग बांध झील | (i) कांगडा़ (ii) हमीरपुर वन्य प्राणी मण्डल | 1. पौंग बांध झील अभ्यारण्य का क्षेत्र जलमग्न क्षेत्र पौंग बांध टैरिस, (तलवाडा़) से ब्यास नदी पर देहरा पुल जोकि होशियारपुर दहरा सड़क में है के मध्य समुद्रतल से 1410 फुट क्षेत्र की ऊंचाई तक पड़ता है केवल बांध क्षेत्र के वनों को छोड़कर, जिसमें मुख्य रुप से उत्तर पश्चिम छोर आरक्षित वन संसारपुर, पूर्वी छोर सनल्यान आरक्षित वन एवं दक्षिण पूर्व छोर गुलेर जागिर आरक्षित वनों के पास समुद्रतल से ऊंचाई 1450 फुट ही रहेगी व समस्त द्वीप जो झील के अन्दर पड़ते हैं भी अभ्यारण्य में शामिल हैं। |
क्षेत्रफल : 207.59 वर्ग कि0मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।
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उपाबन्ध-I गांव की सूची जो पौंग बांध झील वन्य जीव अभ्यारण्य से बाहर किये जाने हैं
क्र0 सं0 गांव के नाम 1. देहरा बाड़ी राजगढ़ 2. मलेटा 3. रानीताल 4. भटोली 5. रोड़ डिब्बर 6. महेवा 7. हरिपुर 8. गुलेर 9. जलाड़ियां 10. नन्दपुर रानीताल 11. भयाल 2. बरियाल 13. लदरेट 14. खब्बल 15. बलोहर सुगनदा 16. बजेहरा 17. समलेटा 18. संगोली 19. जरोट 20. पनालथ 21. हरसड़ 22. हवाल 23. बड़ेहता 24. तपाहल 25. ज्वाली 26. थांगड़ 27. समकेड 28. पपाहन-गुगलाड़ा 29. झौंक रतियाल चबौहा 30. दुहकी बगलाहड़ 31. वनारा 32. खराड़ 33. झाखडा़ (ग्राम पंचायत) झाखडा़ 34. भरेटा 35. लोहारा बटाहरी तुतवान सिहाल 36. जगनोली 2294 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 37. तरा भटेकी 38. लोअर धमेटा मन समकेड बाड़ी 39. बसलेहड़ (पी) 40. गडोहल 41. चटवाल 42. बलघाट गुराला 43. कुथेड़ 44. सिब्बा डाडासिबा नंगल 45. बलोही (लोअर) 46. भांगड़ 47. जम्बल बस्सी 48. घियोड़ी 49. नंगल 50. चरूडू़ धनोटू बल्ला 51. बड़ा 52. स्वारा
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II श्री नैना देवी.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ-बी-एफ(6)-9/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 123.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र श्री नैना देवेवेवी को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्काें, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने से पूर्व वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और श्री नैना देवी वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप मौके पर भू-क्षेत्र 64.74 वर्ग किलोमीटर में से, 47.73 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (जिसमें 48 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य से निकाल दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, 17.01 वर्ग किलोमीटर का शेष क्षेत्र दो भागों में (भाग-I =12.00 वर्ग किलोमीटर और भाग-II =5.01 वर्ग किलोमीटर) को संरक्षण आरक्षित क्षेत्र में परिवर्तित किया जाना है;
2295 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और इसके पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 17.01 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से श्री नैनैना देवी संरक्षण आरक्षित क्षेत्र घोषित करती हैं।
श्री नैना देवी संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगी :
| भाग-I | |||
| क्रम संख्या | संरक्षण आरक्षित क्षेत्र का नाम | घटक (i) जिला/ (i) वन मण्डल | श्री नैना देवी संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की सीमाएं |
| 1 | श्री नैना देवी | (i) बिलासपुर (i) हमीरपुर (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर : काला कुण्ड पुली, पलसेड- खड्ड से शुरू होते हुए, सीमा स्तम्भ से बिजली सर्विस स्टेशन से होते हुए, भाखड़ा अनुभाग-2 से पक्की सड़क (भाखडा़-नैना देवी सड़क) के ऊपर तक । प ू र्व ः भाखड़ा अनुभाग-2 जंगल सीमा के साथ भाखडा़ नैनादेवी पक्की सड़क के ऊपर भाखड़ा सीमांकित संरक्षित वन, खुल्वीं अनुभाग-3 सीमांकित संरक्षित वन (सड़क के ऊपर) सीमा के साथ-साथ अनुभाग-6 सीमांकित संरक्षित वन मकड़ी तक, अनुभाग-6 सीमांकित संरक्षित वन मकड़ी से भाखड़ा से नैनादेवी सड़क के साथ-साथ अनुभाग-7 सीमांकित संरक्षित वन खाल तक व अनुभाग-7 सीमांकित संरक्षित वन खाल से पक्की सड़क के ऊपर अनुभाग-9 सीमांकित संरक्षित वन सलोआ तक व अनुभाग-9 सीमांकित संरक्षित वन सलोआ से सड़क के ऊपर अनुभाग-12 रछोह सीमांकित संरक्षित वन सीमा तक तक सड़क के ऊपर अनुभाग-12 रछोह सीमा के साथ-साथ अनुभाग-13 कनफाड़ा सीमांकित संरक्षित वन तक व पक्की सड़क नैना देवी के निचली तरफ अनुभाग-13 कनफाड़ा वन से अनुभाग-14 डडाहे सीमांकित संरक्षित वन तक व अनुभाग-14 डडोह सीमांकित संरक्षित वन सड़क (भाखड़ा से नैनादेवी) के ऊपर की तरफ सड़क के साथ-2 से सम्पर्क चौक खरकड़ी व अनुभाग-14 सीमांकित संरक्षित वन डडोह तक । द क्षिण ः अनुभाग-14 सीमांकित संरक्षित वन डडोह सम्पर्क चौक खरकड़ी से ऊपर की तरफ सीमा स्तम्भ गला से अनुभाग-14 डडोह तक फिर नाले के साथ-साथ जोकि मोहवाली से पलसेड खड्ड में बहता है होती हुई खुलबीन संरक्षित वन की सीमा के साथ से डोरियन, मोदर और कासला गांवों की निजि भूमि व मन्दिरों को बाहर करते हुए फिर लैहड़ी सीमांकित संरक्षित वन की सीमा, माकड़ी सीमांकित संरक्षित वन और सांधला सीमांकित संरक्षित वन सीमा के साथ नाला को पार करने वाले बिन्दु से जोकि चोटी 924 मीटर से तनूल खड में बहता है फिर इसी खड्ड के साथ-साथ नीचे की तरफ रास्ता पार करने के बिन्दु तक । प श्चिम : दक्षिण सीमा के अन्तिम बिन्दु खड रास्ता पार करने से शुरु हो कर वनों की प्राकृतिक सीमा के साथ-साथ गांवों सांधला, नीलावास, ऊपरलावास, दलेर, डुंगली, लैहड़ी, वन विश्राम गृह लैहड़ी, पलसेड, छामबान और काला कुण्ड को बाहर निकालते हुए नीजि भूमि हद के साथ-साथ उत्तरी सीमा के आरम्भ बिन्दु तक । |
| भाग-II | क्षेत्रफल= 12.00 वर्ग कि0मी0 | ||
| क्रम संख्या | संरक्षण आरक्षित क्षेत्र का नाम | घटक (i) जिला/ (ii)वन मण्डल | संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की सीमाएं |
| 1 | श्री नैना देवी श्री नैना देवी (i) बिलासपुर (ii) हमीरपुर वन्य प्राणी मण्डल | उत्तर ः बढोह संरक्षित वन की सीमा व सड़क के नजदीक वन विश्राम गृह से आरम्भ हो कर बढोह व गलुआ गांव की भूमि को बाहर करते हुए तथा गलुआ सीमांकित संरक्षित वन को अन्दर करते हुए सुएन वन बाहर तथा गलुआ अन्दर की सांझी सीमा के साथ-साथ नाले के साथ नीचे की ओर कालरी गांव की भूमि सीमा व कालरी सीमांकित संरक्षित वन सीमा के साथ V आकार तक उसके बाद कालरी सीमांकित संरक्षित वन में अन्दर की ओर मुड़ती हुई चोटी व सडक़ तक उसके बाद पंज पौरा क्षेत्र को व सड़क और चोटी पर गुरुद्वारा को बाहर करती हुई गरुद्वारा के साथ नीचे की ओर से कालरी सीमांकित संरक्षित वन की सीमा तक और फिर कालरी सीमांकित संरक्षित वन की सीमा के साथ-साथ काटला गांव की कृषि भूमि और कालरी सीमांकित संरक्षित वन की सीमा की विभाजित सीमा तक । प ू र्व ः उत्तरी सीमा के अन्तिम बिन्दु से कालरी वन सीमा के साथ-साथ बिन्दु 991 मी0 से होती हुई पंजाब व हिमाचल की अन्तर राज्य सीमा से होती हुई धरोट गांव की सीमा तक । द क्षिण : पूर्वी सीमा के अन्तिम बिन्दु से शुरु होते हुए गांव धरोट के नजदीक नाले तक फिर मुख्य नाले की बांईं ओर के नाले में ऊपर की तरफ नीमावाली संरक्षित वन की सीमा तक नजदीक पनसूई गांव के साथ और फिर नीमावाली संरक्षित वन सीमा के साथ-साथ दांईं ओर से मुख्य नाले तक उसके बाद मुख्य नाला में ऊपर की तरफ और गांव खडवाली की कृषि भूमि व देहात को बाहर करते हुए उसी नाले में आगे नीमावाली/जोल गांव की कृषि भूमि को बाहर करते हुए नीमावाली की ऊपरी सीमा व गलुआ सीमांकित संरक्षित वन की सीमा तक । प श्चिम : दक्षिण सीमा के अन्तिम बिन्दु से शुरु होते हुए नाले के साथ ऊपर की ओर बढोह गांव की निजी भूमि व बढोह अनारक्षित संरक्षित वन की सीमा के साथ-साथ वन विश्राम गृह बढोह के पास संरक्षण आरक्षित क्षेत्र भाग-II की उत्तरी सीमा के शुरु वाले बिन्दु तक । | |
| क्षेत्रफल= 5.01 वर्ग कि0मी0 |
क्षेत्रफल : 17.01 वर्ग कि0मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।
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उपाबन्ध-I श्री नैना देवी अभ्यारण्य से बाहर निकलने वाले गांवों की सूची
क्रं0 सं0 गांव का नाम 1. पलसेड 2. लैहरी 3. मोदर 4. डोहरियां 5. धलेत 6. थाना कोलियां 7. भाखड़ा 8. खुलबीन 9. माकड़ी 10. उट्टपर 11. खाल 12. सांधला 13. थाना 14. सलोआ 15. बरसू दा टिब्बा 16. सरनी 17. कनफारा 18. काहीवाला टिब्बा 19. गुरू का लाहौर 20. घटेवाल 21. भटेड़ 22. खरकड़ी 23. कमांदवाल 24. चील्ट 25. भरबाला 26. काला कुण्ड/मानक चक 27. मलेटा 28. डडोह 29. बडोह 30. मण्डयाली 31. गलुआ 32. चोचरू 33. कलरी 34. कोठी रियाला 35. कोटलू 2298 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 36. चलैला 37. स्वाना/नकराना 38. करैहल 39. मोहवाली 40. डोराकासला 41. घवांडल 42. बड़ीवाला टिब्बा 43. संदौटी 44. खड्ड बली 45. पनसुई 46. नीमावली/जोल 47. तुरखी घाट 48. खैंडल घाट
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II, गमगुल सियाबेही.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-4/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 109.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र गमगुलुल सियाबेहेही को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डबल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन इस आशय की अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा गमगुल सियाबेही वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 109.00 वर्ग किलामीटर क्षेत्र में 15.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन आशय अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
2299 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935और गमगुल सियाबेही वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप गमगुल सियाबेही वन्य जीव अभ्यारण्य के 109 वर्ग किलोमीटर के विद्यमान क्षेत्र में 15.00 वर्ग किलोमीटर के अतिरिक्त क्षेत्र को सम्मिलित किया गया है और उसमें से 15.60 वर्ग किलोमीटर (जिसमें 32 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य से निकाल दिया गया है । युक्तिकरण के पश्चात् गमगुल सियाबेही वन्य जीव अभ्यारण्य का कुल क्षेत्र 108.40 वर्ग किलोमीटर (109.00 वर्ग किलोमीटर 15.00 वर्ग किलोमीटर -15.60 वर्ग किलोमीटर) से गठित होगा ।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, पूर्वोक्त अधिनियम, की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोे करते हुए वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 108. 40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से गमगुल सियोबेही वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं। गमगुल सियाबही वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | गमगुल सियाबही वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | गमगुल सियाबही | (i) चम्बा (ii) चम्बा (वन्य जीव मण्डल) | उत्तर ः बाजू बाग गली से बिशोट बिन्दु 3289 मीटर की ऊंचाई पर और उसके बाद पटेरन 3916 मीटर ऊंचाई तक, सारी सीमा जम्मू और कश्मीर राज्य की सीमा के साथ-साथ होती हुई। प ू र्व ः पटेरन 3916 मीटर ऊंचाई से चालीपुर गली 3524 मीटर ऊंचाई पर और उसके बाद चाबी तक सिकडू दा नाला के साथ-साथ होती हुई । द क्षिण ः चाबी से कलेतरा आरक्षित वन थमरू आरक्षित वन, खोरन आरक्षित वन, जलाडी आरक्षित वन, बोडा आरक्षित वन, सठी आरक्षित वन, नलवाड आरक्षित वन, धार छनवाणी, गियूण नाल आरक्षित वन, लदेड आरक्षित वन, डांडी आरक्षित वन, राजल आरक्षित वन, गुवाडी आरक्षित वन, भंगोटली आरक्षित वन, बीड आरक्षित वन, गागली आरक्षित वन, से तलाई तक सभी जंगलो ं की बाहरी सीमा के साथ-साथ तलाई से सियूल नाला के साथ रनोल से कलेठू 3633 मीटर ऊंचाई तक । प श्चिम : कलेठू 3633 मीटर ऊंचाई से ऊदक 3530 मीटर ऊंचाई से बाजू बाग गली तक। |
उपाबन्ध-I गांव की सूचि जो गमगुल सियावेही वन्य प्राणी अभ्यारण्य से बाहर होंगे ।
क्रम संख्या गांव का नाम 1. सनूंह 2. गगल 3. कैंथली 4. अडाप 5. डडोडी 6. डुगली 7. भदरोह 8. जसोह 9. थरोली 10. झन्डूर 11. मन्डोग 12. थाथ 13. जलाडी 14. संधणी 15. करवाड 16. संघनेड 17. पुठियाल 18. कोलोई 19. भडेई 20. पथवाल 21. सगोडी 22. सूण 23. प्रैढ 24. चान्दू 25. धमोगी 26. चनेटी 27. किनसालू 28. डडरी 29. प्रंयूगल 30. लंगेरा 31. दिगोडी 32. खनेई
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II, कालाटोप खजियार.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-7/99 तारीख 23-10-1999 द्वारा 69.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र कालाटोप खजियार को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
2301 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डब्ल्यू डबल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन इस आशय की अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और कालाटोप खजियार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप 69.00 वर्ग किलोमीटर के कुल क्षेत्र में से 51.83 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (उपायुक्त चम्बा की सिफारिश के अनुसार 52.76 वर्ग किलोमीटर के बजाए) (जिसमें 261 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य में से निकाल दिया गया है। युक्तिकरण के पश्चात् 17.17 वर्ग किलोमीटर के शेष क्षेत्र से कालाटोप खजियार वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा। अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, पूर्वोक्त अधिनियम, की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 17.17 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से कालाटोप खजियार वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
कालाटोप खजियार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होगीः
| क्र म संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | कालाटोप खजियार वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1. | कालाटोप खजियार | (i) चम्बा (i) चम्बा (वन्य जीव) मण्डल, | उत्तरः-पुखरी गला से देवीघटू तथा उसके बाद सीमांकित संरक्षित वन खजरोठ की सीमा के साथ कालाटोप आरक्षित वन अनुभाग-II तक । प ू र्वः- देवीघटू से सीमांकित संरक्षित वन खजियार की सीमा के साथ कंजरेडी नाला तक से इसके उदगम स्थान भगोठ तक । द क्षिणः-भगोठ से जदडू रिज के साथ पोहलाणी मन्दिर तक । प श्चिमः-पोहलाणी मन्दिर से कालाटोप संरक्षित वन से कालाटोप संरक्षित वन अनुभाग-II तक। |
33. कोट दी वेही 34. नाढो 35. बनगोटू 36. चनेडा 37. टकटोला 38. धापरी 39. देहडी 40. भलोली 41. लिडबडारा 42. भुजल-दा डिम्मा 43. चलेहई 44. पुखरी 45. कुपाडा 46. दीवकरी 47. नाधुई 48. अच्छला 49. कुपाडी 50. तडोली 51. खुनेर 52. जनौता 53. पधरेटी 54. साच 55. कैलूहणी 56. टिप्परा 57. काथयाड 58. एैलनखोल 59. घ्राणवेही 60. छोनाला 61. पधरोटू 62. वसोधन 63. तलाई-I 64. छजौटी 65. मझीर 66. देवीदेहरा 67. सुनेड 68. भलोली 69. तलाई 70. रखैला 71. फाट 72. चांझुई 73. डुगली 74. बंगवेही 75. खब्बर 76. मियाडी 77. लहगा 78. दियोली 79. खालसा 80. मियाड़ी-II 81. चनाडू2304 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 82. रन्डोह 83. झलेई 84. गेट 85. बाडी 86. सांउ 87. रठियार 88. मदराणी 89. काकैला 90. लोधरी 91. लिन्डीवेही 92. भगरौता 93. डिबरी 94. पखरोग 95. क्सियाड 96. फाटी 97. वेही 98. खब्बर 99. डुग्ग 100. कोहलडी 101. कराचेड 102. कुन्ना 103. भमरौता 104. ररियारा 105. चेली 106. घराणू 107. चालगा 108. चील बंगला 109. खनियारू 110. धार-II 111. थोपला 112. ढांपू 113. चाहला 114. सुखरेई 115. चपडोल 116. कुपाडी 117. कुट 118. पन्जोह-I 119. पन्जोह-II 120. मल्हा-I 121. मल्हा-II 122. गलू 123. कान्दू 124. गुानियाला 125. करेलन 126. रिखनाली 127. कफरोटी 128. रेह 129. भिखनू व लौहली खड्ड 130. भटोली2305 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 131. चमलाडी 132. खडकली 133. सिया 134. गुतडी 135. गरगडा 136. टिकरू 137. मधयार 138. लहाणी 139. तवेला 140. द्रवड 141. ठन्डा पानी 142. गोली 143. मनोला 144. मुचयाणका 145. खनियारू 146. परधुडा 147. द्रडा 148. धार 149. गुणू 150. टिप्परी 151. परहलो 152. धट 153. डुग 154. कैहला 155. सरू 156. कुठार 157. पुखर 158. ठेडु 159. हुजारा 160. परिहार 161. मुकरेठी 162. संनुई 163. नमलीका 164. छणी लाहड 165. चमीणु 166. कोटा 167. रौणा 168. बडौली 169. वैसंका 170. सन्जूई 171. नधूई 172. छाणा 173. गडिंयार 174. दियलू 175. धरोटी 176. मधारका 177. वयारा 178. ठुकराला 179. दरवडा2306 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 180. ललयाडा 181. उडालका 182. मुनियारा 183. काथल 184. लिल्ली 185. सुदली 186. भमणीका 187. लडोट 188. कठुंई 189. करोटी 190. धनेटा 191. कडोठ 192. डाडर 193. पोलटा 194. हडौटा 195. कुन्ना 196. टाला 197. टिक्कर 198. भरयाह 199. चेहली 200. लंगागला 201. सालगा 202. सेरू 203. खब्बर 204. खालसा 205. देहरा 206. सपडी 207. छमबा 208. पध्धर 209. साडी 210. बाई 211. ढोला 212. चनेड 213. लुमठू 214. धरमूरी 215. वसना 216. पठानकरी 217. गदियाड 218. द्ररमणू 219. तडोली-I 220. तडोली-II 221. ढापू 222. धरनीयाड 223. उदेयपुर-II 224. उदेयपुर-II 225. गोथली 226. चिकडयाणी 227. बाधन 228. झुमार2307 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 229. चिम्हा-I 230. चिम्हा-II 231. डुल्ला-I 232. डुल्ला-11 233. धनेई 234. टिक्कर-I 235. सुरेई 236. दारू 237. तुनाआ 238. कुपाडा 239. रिण्डा 240. द्रवआ-I 241. द्रवआ-II 242. ओडा 243. लालेहन 244. खोली 245. कुट 246. टिक्कर-II 247. दुआरू 248. फतेहपुर 249. सिमली 250. रौडी 251. भुन्का 252. परगना 253. पधरोटू 254. टिक्क्र 255. मटौला 256. भगोडी 257. डडुण 258. लोहली खडउ 259. निहारू 260. द्रमणु 261. कालाटोप
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्याः एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-II/2005-II. सेचू तुआन नाला.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-3/99 तारीख 1-11-1999 द्वारा 103.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र सेचू तुआन नाला को वन्य जीव अभ्यारण्य के रुप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
2308 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन इस आशय की अधिसूचनाएं जारी की थी;
और अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई-बी-एफ.(6)11/2005 तारीख 28 जुलाई, 2010 द्वारा सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान अधिसूचित 103.00 वर्ग किलामीटर क्षेत्र में 113.27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सम्मिलित करने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के अधीन आशय अधिसूचना जारी की गई थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अंतिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रुप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरुप भू-क्षेत्र पर अर्थात सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य के विद्यमान 330.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 113.27 वर्ग किलोमीटर का अतिरिक्त क्षेत्र सम्मिलित किया गया है और उसमें से 52.98 वर्ग किलोमीटर (5 गांवों नामतः चासक बटोरी, चासक, सेचू, उड़ीन सन्धारी और हिलू तुआन को समाविष्ट करक)े अभ्यारण्य में से निकाल दिया गया है। युक्तिकरण के पश्चात् अब कुल 390.29 वर्ग किलोमीटर (330.00 वर्ग किलोमीटर 113.27 वर्ग किलोमीटर-52.98 वर्ग किलोमीटर) के क्षे, से सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा । अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, पूर्वोक्त अधिनियम, की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 390.29 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं। सेचू तुआन नाला वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होंगी :
| क्र म संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (i) वन मण्डल | सैचू तुआन नाला वन्य जीव अभयारण्य की सीमाएं |
| 1. | सैचू तुआन नाला | (i) चम्बा (i) चम्बा (वन्य जीव) मण्डल, | उत्तरः-बिन्दु 5856 मीटर ऊंचाई से 6072 मीटर ऊंचाई तक जम्मू कश्मीर राज्य की सीमा के साथ-साथ । प र्वः- मुख्य चोटी जसंकर की रिज बिन्दु 6072 ू मीटर ऊंचाई जम्मू और कश्मीर राज्य की सीमा से सेचू नाला तथा मियाड नाला के जलागम क्षेत्र की विभाजन रेखा के साथ उरधोष दर्रा से घोरधार दर्रा 5105 मीटर तक। द क्षिणः-घोरधार दर्रा 5105 मी0 ऊंचाई से दुफाहो जोत 6070 मी0 ऊंचाई से वैहाली जोत 6302 मी0 ऊंचाई तक चोटी के साथ-2 । |
| पश्चिमः-वैहाली जोत 6302 मी0 ऊंचाई के नजदीक से 5685 मी0 ऊंचाई, 6027 मी0 ऊंचाई और मैलाणू 5233 मी0 ऊंचाई से सिधाणी नाला तक चोटी के साथ-2 । उसके बाद सिधाणी नाला क े साथ 2727 मी0 ऊंचाई, चसक नाला के साथ-2 भटोर से कुलमा जोत 5459 मी0 ऊंचाई तक उसके बाद कुलमा जोत से 3923 मी0 ऊंचाई से 3434 मीटर ऊंचाई से खुड संरक्षित वन की सीमा तक चोटी के साथ-2, खुड संरक्षित वन से 4666 मीटर ऊंचाई से डिबरी तक चोटी के साथ-2, डिबरी से 4639 मीटर ऊंचाई से 3730 मीटर ऊंचाई से मनी गोट से हुडनाल नाला तक, हुड नाला से 5488 मी0 ऊंचाई से 5681 मी0 ऊंचाई से 6142 मी0 ऊंचाई से 5271 मी0 ऊंचाई से 5856 मी0 ऊंचाई तक चोटी के साथ-2 । | |||
2310 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए नं0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
और तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तिकरण के परिणामस्वरूप मौके पर भू-क्षेत्र 83.00 वर्ग किलोमीटर में से 19.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (जिसमें 18 गांव पड़ते हैं की सूची उपाबन्ध-I के अनुसार) को एतद्द्वारा अभ्यारण्य में से निकाल दिया गया है। युक्तिकरण के पश्चात् 64.00 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र से तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य गठित होगा।
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, पूर्वोक्त अधिनियम, की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 64.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं।
तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | तुन्दाह | (i) चम्बा (ii) चम्बा (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः-रिज पावांईट 5495 मीटर ऊंचाई से 5507 मीटर उंचाई से कालीछो दर्रा 4999 मीटर ऊंचाई तक लाहौल स्पिति जिला की सीमां के साथ-साथ। प ू र्व ः-कालीछो दर्रा 4999 मीटर ऊंचाई से 5783 मीटर ऊंचाई से बडाकण्डा 5857 मीटर ऊंचाई तक। द क्षिण ः-बडाकण्डा 5758 मीटर ऊंचाई से छोनाला से 2829 मीटर ऊंचाई से 2865 मीटर ऊंचाई से भद्रानाला से 2275 मीटर ऊंचाई से 2637 मीटर ऊंचाई शिलपडी संरक्षित वन की सीमां के साथ 3094 मीटर ऊंचाई तक उसके बाद तुन्दाह संरक्षित वन तथा गवाड संरक्षित वन की सीमां के साथ थल्ला नाला 3719 मीटर ऊंचाई तक। प श्चिम ः-3719 मीटर ऊंचाई से 3684 मीटर ऊंचाई से 3978 मीटर ऊंचाई से 4892 मीटर ऊंचाई से 5355 मीटर ऊंचाई से 5495 मीटर ऊंचाई तक चोटियों के साथ-साथ। |
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति : उत्तर अक्षांश 32० 40' 10" उत्तर और देशान्तर 76० 31' 17" पूर्व। पूर्व अक्षांश 32० 36' 15" उत्तर और देशान्तर 76० 37' 52" पूर्व। दक्षिण अक्षांश 32० 29' 15" उत्तर और देशान्तर 76० 26' 14" पूर्व और पश्चिम अक्षांश 32० 30' 18" उत्तर और देशान्तर 76० 24' 40" पूर्व। यह क्षेत्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टोपो शीट नम्बर 52डी/6 और 52डी/10, (पैमाना 1ः50,000) पर दर्शाता है। क्षेत्रफल : 64.00 वर्ग कि0मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।2311 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 उपाबन्ध-I गांव की सूचि जो तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य से बाहर होगें।
क्रम संख्या गांव का नाम 1. भ्रदा 2. बन्नी 3. मान्दा 4. कुमाहरकडी 5. सिलपडी 6. बडग्रां 7. खणबग 8. कुटल 9. लडोगी 10. मोरठू 11. चुलाड 12. तुन्दाह 13. गवाड 14. स्ूालो 15. बनार 16. पलानी 17. सरोठा 18. कुठार
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II रकच्छम छितकुल.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ. (6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 द्वारा 304.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र रकच्छम छितकुल को वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल न0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
2312 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, और पूर्ववर्ती अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 के अधिक्रमण में वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 304.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से रकच्छम छितकुल वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं। रकच्छम छितकुल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक i) जिला ii) वन मण्डल | रकच्छम छितकुल वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | रकच्छम छितकुल | i) किन्नौर ii) सराहन (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः-सीमा बिन्दू 5983 मीटर से आरम्भ होती हुई ऊंचाई बिन्दू 5990 मीटर, 5290 मीटर से डबोलिंग 6080 मीटर, 5635 मीटर, 5655 मीटर, 6032 मीटर और 5545 मीटर से चरांग घाटी के चोटी बिन्दू 5810 मीटर तक। प ू र्व :-बिन्दू 5810 मीटर से नीचे की ओर बास्पा नदी के साथ जोरया गरंग से बोरसू घाटी तक। द क्षिण ः-बोरसू घाटी से हिमाचल और उत्तराखण्ड की सीमा के साथ-साथ देवकीधार से ऊंचाई बिन्दू 5760 मीटर, 5930 मीटर, 5877 मीटर, 5480 मीटर, 5889 मीटर, खिमलोगा पास 5712 मीटर और उसके बाद नीचे की ओर सिन्गा घाटी के साथ-साथ 5424 मीटर से शिमला, उत्तराखण्ड व सांगला तहसील की सीमा के मिलान बिन्दू तक। प श्चिम :-सिंगा घाटी के साथ-साथ ऊंचाई बिन्दू 5260 मीटर, 5820 मीटर हनिया हिम नदी के साथ और उसके बाद सिंगा खड्ड के साथ नीचे की ओर चिसपिन से सीमा ऊपर की ओर बास्पा नदी में जाती हुई रिम दरंग नाला में ऊपर की ओर जाती हुई फिर नाले को पार करते हुए शिलप्या थाच और बिन्दू 4789 मीटर से शुशंग नाला से मंगसा गरंग, गोर गरंग 4435 मीटर, खरोगला गरंग से ऊंचाई बिन्दू 4440 मीटर और चोटी 5983 मीटर उत्तर तक। |
वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II लिप्पा आसरंग.--सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ. (6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 द्वारा 31.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र लिप्पा आंसरंग को वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए नं0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के के आदेश 7 मई, 2010 के अनुसरण में राज्य सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए नं0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, और पूर्ववर्ती अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 के अधिक्रमण में वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 31.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से लिप्पा आसरंग वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं।
तुन्दाह वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | लिप्पा आसरंग वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | लिप्पा आसरंग | (i) किन्नौर (ii) सराहन (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर :-टेटी गाढ़ के बिन्दू 3440 मीटर से नीचे की ओर बिन्दू 3225 मीटर तक जोकि दक्षिण पूर्व से बहती हुई नदी का टेटी गाढ़ में मिलान बिन्दू पर दर्शाया गया है। प र्व ः-बिन्दू 3225 मीटर से ढलानदार चोटी के साथ-साथ जोकि ू भोगतो दोगरी के पश्चिम में है से बिन्दू 4465 मीटर तक। द क्षिण ः-बिन्दू 4565 मीटर से चोटी के साथ (कल्पा और मोरंग की तहसील सीमा) ऊंचाई बिन्दू 4404 मीटर, 4977 मीटर, 5122 मीटर से ड्रिमबलिंग हिम नदी के ऊंचाई बिन्दू 5088 मीटर तक। |
| पश्चिम :-बिन्दू 5088 मीटर से ड्रिमबलिगं गाढ़ जोकि ड्रिमबलिंग हिम नदी से निकलती है के साथ नीचे की ओर टेटी गाढ़ में बिन्दू 3440 मीटर तक। |
शिमला वाटर कैचमैन्ट वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से हाेंगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | शिमला वाटर कैचमैन्ट वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | शिमला वाटर कैचमैन्ट | (i) शिमला (ii) शिमला (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर ः-वाटर कैचमैन्ट के प्रवेश का स्थान नजदीक ढली और हिन्दूस्तान तिब्बत राष्ट्रीय उच्च मार्ग-22 पर पानी के पम्प हाऊस से उसी राष्ट्रीय उच्च मार्ग के निचले छोर के साथ-साथ वाया छराबरा से कुफरी बाजार तक। प र्व ः-कुफरी बाजार से ढलवा लौहे के स्तम्भ नम्बर 35 के साथ ू कुफरी चायल सड़क से बिन्दू 2632 मीटर तक। द क्षिण ः-बिन्दू 2632 मीटर से नाहर संरक्षित वन को अन्दर की तरफ और पटगेहर संरक्षित वन को बाहर की तरफ विभाजित कर कुफरी सियोग से बहने वाले नाले में पड़ने वाले गावं की निजि भूमि को बाहर करते हुए वाटर कैचमैन्ट की सीमा और टिपरा गांव की निजि भूमि तक। प श्चिम :-वाटर कैचमैन्ट की सीमा और टिपरा गांव की निजि भूमि से ढलवा लौहे के स्तम्भ नम्बर 79 से होती हुई टिपरा, घरोग और बरेहा गांव की निजि भूमि को बाहर करते हुए उत्तरी सीमा के आरम्भ बिन्दू तक। |
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति : उत्तर अक्षांश 31० 07' 08" उत्तर और देशान्तर 77० 14' 00" पूर्व। पूर्व अक्षांश 31० 05' 32" उत्तर और देशान्तर 77० 16' 04" पूर्व। दक्षिण अक्षांश 31० 05' 11" उत्तर और देशान्तर 77० 15' 41" पूर्व और पश्चिम अक्षांश 31० 06' 36" उत्तर और देशान्तर 77० 13' 00" पूर्व। यह क्षेत्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टोपो शीट नम्बर 53ई/4 और 53 ई/8 (पैमाना 1ः50,000) पर दर्शाता है। क्षेत्रफल : 10.00 वर्ग कि0मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।
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वन विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 जून, 2013
संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-11/2005-II रुपी भाबा.—सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 26क के अधीन अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ.(6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 द्वारा 503.00 वर्ग किलोमीटर से समाविष्ट क्षेत्र रुपी भाबा को वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी;
2316 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 और हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों के युक्तिकरण की बाबत मामला आईए न0 139/2010 इन रिट पिटिशन सिविल नं0 337 ऑफ 1995 नामतः सेन्टर फॉर एनवारनमैंटल लॉ, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ-I बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया एण्ड अदर्ज में माननीय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 7 मई, 2010 के अनुसरण में सरकार ने वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों, जिनके लिए युक्तिकरण प्रस्तावित किया गया था, की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 के अधीन आशय अधिसूचनाएं जारी की थी;
और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तारीख 5-8-2011 द्वारा, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन अन्तिम अधिसूचना जारी करने से पूर्व, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18 से 26क और 35 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश दिए गए, जिस प्रक्रिया का सम्यक् रूप से अनुसरण किया गया था;
और माननीय उच्चतम न्यायालय ने आईए न0 155 (पहले आईए न0 139/2010) में पारित आदेश तारीख 1-2-2013 द्वारा, राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश में वन्य जीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों की सीमाओं के प्रस्तावित युक्तिकरण की बाबत वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क, 35(4) एवं 36क के अधीन अन्तिम अधिसूचनाएं जारी करने को अनुमत किया है;
अतः हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 26क के अधीन उनमें निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए, और पूर्ववर्ती अधिसूचना संख्या एफ.एफ.ई.-बी-एफ-(6)-2/99-II तारीख 7-9-2001 के अधिक्रमण में वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण, प्रसारण या विकसित करने के प्रयोजन के लिए, 503.00 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तुरन्त प्रभाव से रुपी भाबा वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित करती हैं ।
रुपी भाबा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं निम्न प्रकार से होगी :
| क्रम संख्या | वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम | घटक (i) जिला (ii) वन मण्डल | रुपी भाबा वन्य जीव अभ्यारण्य की सीमाएं |
| 1 | रुपी भाबा | (i) किन्नौर (ii) सराहन (वन्य जीव) मण्डल | उत्तर :-श्रीखण्ड की मुख्य धार की कोकशन चोटी 5625 मीटर से आरम्भ होती हुई ऊंचाई बिन्दू 5695 मीटर, 5530 मीटर, 5100 मीटर, 5205 मीटर, 5280 मीटर, 5365 मीटर, 4865 मीटर, 5430 मीटर और 5495 मीटर से 5567 मीटर तक। प र्व :-धार पर ऊंचाई बिन्दू 5567 मीटर से मुख्य श्रीखण्ड धार की ू श्रंखला से होती हुई दक्षिण में निचार को मुरंग तहसील से विभाजित करती हुई कल्पा तहसील से मुकिंम धार पर से चोटी 5496 मीटर तक। द क्षिण :-चोटी 5496 मीटर से धार पर नीचे की ओर लिसट्रंग गाढ़ में दक्षिण से खोसयान के लिस्ट्रंग गाढ़ के मिलान बिन्दू 3214 मीटर से नीचे की ओर रतबा के नीचे से सीमा अंग यार धार के साथ-साथ बिन्दू 4692 मीटर, 4853 मीटर, 5574 मीटर और 5349 मीटर से 5246 मीटर तक उसके बाद मुलिंग के नजदीक अंग यार नाले के ऊपर की धार के साथ-साथ फिर नीचे की ओर अंग यार नाले में वांगर खड्ड (भाबा नदी) और नदी को पार करती हुई दांई ओर की धार पर बिन्दू 5176 मीटर से सोलिंग धार के साथ-साथ |
| बिन्दू 4645 मीटर से 4336 मीटर, 3964 मीटर से 3550 मीटर तक और पूर्व की ओर मुड़ती हुई कंडारन खड्ड से साकनाथपा संरक्षित वन की नीचली बाहरी सीमा के साथ-साथ से पश्चिम की ओर मुड़ती हुई साकनाथपा संरक्षित वन की नीचली बाहरी सीमा के साथ शिल्पी कृषि भूमि को बाहर करते हुए और डगारंग संरक्षित वन, रक्छंग सलारंग संरक्षित वन, टिरा वन, छोटा खम्बा संरक्षित वन, बारा खम्बा संरक्षित वन की सीमा के साथ-साथ नीचे की ओर शोरंग खड्ड से बारा खम्बा की कूल के उद्गम तक उसके बाद सीमा पैदल रास्ते के साथ-साथ वन विश्राम गृह रुपी से होती हुई रुपी गांव की कृषि योग्य भूमि को बाहर करते हुए किन्नौर और शिमला जिला की सीमा पर श्रीखण्ड धार बिन्दू 3038 तक। प श्चिम :- ऊंचाई बिन्दू 3038 मीटर से शिमला और किन्नौर जिला की सीमा के साथ-साथ श्रीखण्ड धार से होती हुई वाया गुशू पिशू चोटी 5600 मीटर से कोकशेन चोटी 5525 मीटर तक। | |||
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति : उत्तर अक्षांश 31० 47' 18" उत्तर और देशान्तर 77० 57' 02" पूर्व। पूर्व अक्षांश 31० 41' 42" उत्तर और देशान्तर 78० 07' 19" पूर्व। दक्षिण अक्षांश 31० 34' 28" उत्तर और देशान्तर 780 59' 15" पूर्व और पश्चिम अक्षांश 31० 42' 49" उत्तर और देशान्तर 77० 45' 00" पूर्व। यह क्षेत्र भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टोपो शीट नम्बर 53 आई/13, 53 ई/14, 53 आई/1 और 53 आई/2 (पैमाना 1ः50,000) पर दर्शाता है।
क्षेत्रफल : 503.00 वर्ग कि0मी0
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (वन)।
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 19 जून, 2013
संख्याः डब्ल्यू एल.एफ. ए(3)7/96-II.—हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के परामर्श से इस विभाग की समसंख्यांक अधिसूचना तारीख 4-6-2007 द्वारा अधिसूचित, हिमाचल प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में बाल विकास परियोजना अधिकारी, वर्ग-II (राजपत्रित), भर्ती और प्रोन्नति नियम, 2007 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती हैं, अर्थातः-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, बाल विकास परियोजना अधिकारी वर्ग-II (राजपत्रित), भर्ती और प्रोन्नति (प्रथम संशोधन) नियम, 2013 है।
(2) ये नियम राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित किए जाने की तारीख से प्रवृत होंगे । 2318 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935 उपाबन्ध "क" का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, बाल विकास परियोजना अधिकारी वर्ग-II (राजपत्रित), भर्ती और प्रोन्नति नियम, 2007 के उपाबन्ध -"क" में :-
(क) स्तम्भ संख्या-10 के सामने विद्यमान उपबन्धों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थातः- "(i) अस्सी प्रतिशत प्रोन्नति द्वारा; और
(ii) बीस प्रतिशत सीधी भर्ती द्वारा, यथास्थिति, नियमित आधार पर या संविदा के आधार पर भर्ती द्वारा";
(ख) स्तम्भ संख्या : 11 के सामने विद्यमान उपबन्धों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः- "(i) पच्चीस प्रतिशत सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारियों में से प्रोन्नति द्वारा जिनका कम से कम पांच वर्ष का नियमित सेवाकाल या ग्रेड में की गई लगातार तदर्थ सेवा, यदि कोई हो, को सम्मिलित करके पांच वर्ष का नियमित सेवा काल हो;
(ii) पच्चीस प्रतिशत तहसील कल्याण अधिकारियों में से प्रोन्नति द्वारा जिनका कम से कम पांच वर्ष का नियमित सेवाकाल या गे्रड में की गई लगातार तदर्थ सेवा, यदि कोई हो, को सम्मिलित करके पांच वर्ष का नियमित सेवा काल हो; और
(iii) तीस प्रतिशत सांख्यिकी सहायकों में से प्रोन्नति द्वारा जिनका कम से कम पांच वर्ष का नियमित सेवाकाल या गे्रड में की गई लगातार तदर्थ सेवा, यदि कोई हो, को सम्मिलित करके पांच वर्ष का नियमित सेवाकाल हो । पदों को भरने हेतु निम्न रोस्टर लागू होगाः- पहला तथा सातवां पद सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी को ।
दूसरा तथा आठवां पद तहसील कल्याण अधिकारियों का।
तीसरा, छठा तथा नवां पद सांख्यिकी सहायकों को ।
चौथा पद बारी बारी से सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी/तहसील कल्याण अधिकारियों को ।
पांचवां तथा दसवां पद सीधी भर्ती द्वारा।
रोस्टर प्रत्येक दसवें पद के बाद दोहराया जाता रहेगा" ।
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव।
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नोट.--हिमाचल प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में बाल विकास परियोजना अधिकारी श्रेणी II (अराजपत्रित ) के भर्ती और प्रोन्नति नियम दिनांक 4-6-2007 में अधिसूचित किए गए थे जो कि बाद में दिनांक 16-1-2012 व दिनांक 21-9-2012 को संशोधित किए गए थे।2319 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935
[Authoritative English Text of this department notification NoWLF-A(3)7/96, Voll.II dated
19-6-2013 as required under clause (3) of Article 348 of the constitution of India].
SOCIAL JUSTICE & EMPOWERMENT DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2, the 19th June, 2013
No. WLF-A(3)7/96-Voll-II.—In exercise of the powers conferred by proviso to Article 309 of the Constitution of India, the Governor, Himachal Pradesh, in consultation with the H. P. Public service commission is pleased to make the following Rules further to amend the Himachal Pradesh, Social Justice & Empowerment Department, Child Development Project Officer, Class- II(Gazetted), Recruitment and Promotion, Rules, 2007 notified vide this Department Notification of even number dated 4-6-2007 namely:—
1. Short title and Commencement.—(1) These rules may be called the Himachal Pradesh, Social Justice & Empowerment Department, Child Development Project Officer,Class-II- (Gazetted) Recruitment and Promotion (First amendment) Rules, 2013
(2) These rules shall come into force from the date of publication in the Rajpatra, Himachal Pradesh.
2. Amendment of Annexure-A.—In Annexure "A" to the Himachal Pradesh Social Justice & Empowerment Department, Child Development Project Officer, Class-II (Gazetted) Recruitment and Promotion, Rules, 2007:—
(a) for the existing provisions against Col.No.10, the following shall be substituted, namely:—
"(i) 80% by promotion ; and
(ii) 20% By Direct recruitment on regular basis or by recruitment on contract basis as the case may be" ;
(b) for the existing provisions against Col.No.11, the following shall be substituted, namely:—
"(i) 25% by promotion from amongst the Assistant Child Development Project Officers having at least 5 years regular service or regular combined with continuous adhoc service rendered, if any, in the grade;
(ii) 25% by promotion from amongst the Tehsil Welfare Officers having at least 5 years regular service or regular combined with continuous adhoc service rendered, if any in the grade; and
(iii) 30% by promotion from amongst the Statistical Assistants having at least 5 years regular service or regular combined with continuous adhoc service rendered, if any in the grade.
2320 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 15 जुलाई, 2013/24 आषाढ़ 1935The following roster shall be applied for filling up the posts:—
Ist and 7 th post-------- Assistant Child Development Project Officer. 2nd & 8 th posts –Tehsil Welfare Officer. 3rd , 6th & 9th post -------Statistical Assistant 4th post in turn to ACDPO/TWO 5th & 10th post--------Direct Recruitment.
The roster will be repeated after every 10th post."
By order, Sd/- Pr. Secretary.
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Note.—The Himachal Pradesh Social Justice & Empowernment Department,Child Development Project Officer,Class-II(Gazetted) R&P Rules 2007 were notificed an 4th June, 2007 and subsequently amended vide Notification dated 16-1-2012 and 21-9-2012.
नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित।