Servants of Knowledge
Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 216, 22 January 2015

Published 22 January 2015

Gazette no.
216
Gazetteid
216/GAZETTE/2015-22/01/2015
Identifier
in.gazette.himachal.2015-01-22.216_gazette_2015-1_22_2015
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

click here for IIIF manifest

राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित

वीरवार, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

हिमाचल प्रदेश सरकार

सामान्य प्रशासन विभाग

(अनुभाग डी)

अधिसूचना

शिमला-02, 20 जनवरी, 2015

संख्याः जी0ए0डी0-डी0-7(जी)1-12/81-III.—हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, फण्डामैंटल रूल्ज के रूल 45 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, इस विभाग की अधिसूचना संख्याः जी0ए0डी0-डी0-7 (जी)1-12/81, तारीख प्रथम जून, 1994 द्वारा अधिसूचित और राजपत्र, हिमाचल प्रदेश (असाधारण) में 18 जुलाई, 1994 को प्रकाशित, हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम,1994 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती हैं, अर्थात्‌ः-

216-राजपत्र/2015-22-01-2015 (5711) 5712 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) (नौंवां संशोधन) नियम, 2015 है।

(2) ये नियम राजपत्र (ई-गजट) हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित किए जाने की तारीख से प्रवृत्त होंगे। 2. नियम 8 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 (जिन्हें इसमें इसके पश्चात्‌ 'उक्त नियम' कहा गया है) के नियम 8 में,-

(क) उप नियम (2) में, "उसकी नियमित या संविदा पर सेवारत" शब्दों के पश्चात्‌ "या करूणामूलक आधार पर नियुक्त दैनिक वेतनभोगी" शब्द अन्तः स्थापित किए जाएंगें; और

(ख) उप नियम (2) के प्रथम परन्तुक में, "नियमित या संविदा" शब्दों के पश्चात्‌ "या दैनिक वेतन" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।

3. नियम 16 का प्रतिस्थापन.--उक्त नियमों के नियम 16 के स्थान पर निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-,

"16. ऐसी जगह स्थानान्तरण जहां परिवार को नहीं रखा जा सकता,-यदि किसी अधिकारी/पदधारी का स्थानान्तरण हिमाचल प्रदेश के किसी अनुसूचित क्षेत्र या जिला शिमला के डोडराक्वार क्षेत्र में किया जाता है और इन नियमों के अधीन उसको आबंटित आवास उसके परिवार के सद्‌भाविक (वास्तविक) उपभोग के लिए अपेक्षित है, तो प्रत्येक मामले के गुणागुण के आधार पर उसे साधारण अनुज्ञप्ति फीस संदत्त करने पर आवास रखने की अनुमति दी जा सकेगी ।"

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव (सामान्य प्रशासन)।

--------

[Authoritative English Text of this Department's Notification No.GAD-D-7(G)1-12/81-III,

dated the 20-01-2015 as required under Clause(3) of Article 348 of the Constitution of India].

GENERAL ADMINISTRATION DEPARTMENT

(Section-D)

NOTIFICATION

Shimla-2,the 20th January, 2015

No.GAD-D-7(G)1-12/81-III.—In exercise of the powers conferred by rule 45 of the Fundamental Rules, the Governor, Himachal Pradesh, is pleased to make the following rules further to amend the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Rules, 1994, notified vide this Department's notification No.GAD-7(G)1-12/81, dated the Ist June,1994 and published in Rajpatra,Himachal Pradesh (Extra Ordinary) on 18th July,1994, namely:—

1. Short title and commencement.—(1) These rules may be called the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Ninth Amendment Rules, 2015.

(2) They shall come into force from the date of their publication in the Official Gazette (e-Gazette), Himachal Pradesh.

5713 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

2. Amendment of rule-8.—In rule 8 of the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Rules, 1994 (hereinafter referred to as the 'said rules'),—

(a) in sub-rule (2), after the words and sign "to the wife/husband regular or contractual", the words and signs, "or daily wager appointed on compassionate ground" shall be inserted; and

(b) in the first proviso to sub-rule (2), after the words "on regular or contract", the words "or daily wages" shall be inserted.

3. Substitution of rule, 16.—For rule, 16 of the said rules, the following rule shall be substituted, namely:—

"16 Transfer to non-family station.—If an officer/official is transferred to any Scheduled Area of Himachal Pradesh or Dodra Kawar of District Shimla and the residence allotted to him under these rules is required by the family for bonafide use, he may be allowed on merit of each case to retain the residence on payment of normal license fee".

By order, Sd/- Secretary (GAD).

_________

सामान्य प्रशासन विभाग

(डी अनुभाग)

अधिसूचना

शिमला-02, 13 अक्तूबर, 2014

संख्याःजी0ए0डी0-डी0-7(जी) 1-12/81-II.—हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, फण्डामैंटल रूल्ज के रूल 45 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, इस विभाग की अधिसूचना संख्याः जी0ए0डी0- डी0-7 (जी) 1-12/81, तारीख 1 जून, 1994 द्वारा अधिसूचित और तारीख 18 जुलाई, 1994 को राजपत्र, हिमाचल प्रदेश (असाधारण) में प्रकाशित हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती हैं, अर्थात्‌ः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) आठवां संशोधन नियम, 2014 है।

(2) ये नियम राजपत्र (ई-गजट) हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित किए जाने की तारीख से प्रवृत्त होंगे। 2. नियम 8 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994 के नियम 8 के उप नियम (9) में,--

(क) खण्ड (iii) के तृतीय परन्तुक का लोप किया जाएगा; और

(ख) विद्यमान खण्ड (iii) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खण्ड अन्तः स्थापित किया जाएगाए अर्थात्‌ः- "(iv) प्रैस संवाददाता को समाचार-पत्र/न्यूज एजैंसी/न्यूज चैनल में कार्य करने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए गए राज्य स्तरीय प्रत्यायन से वंचित होने पर या पैंसठ वर्ष की आयु पूरी कर लेने पर, जो भी पूर्वतर हो, उसे आबंटित सरकारी आवास को खाली करना होगाः 5714 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 परन्तु वे संवाददाता जिनके पास, हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) आठवां संशोधन नियम, 2014 को प्रकाशित किए जाने की तारीख को, सरकारी आवास हैं, वे ऐसे आबंटित आवास को, चाहे उन्होंनें पैंसठ वर्ष की आयु पार कर ली हो और उनके पास प्रत्यामन है तथा वे सक्रिय पत्रकारिता में हैं, रख सकेगें ।"

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- सचिव (सामान्य प्रशासन)

_________

[Authoritative English Text of this Department's Notification No.GAD-D-7(G)1-12/81-II,

dated the 13-10-2014 as required under Clause(3) of article 348 of the Constitution of India].

GENERAL ADMINISTRATION DEPARTMENT

(Section-D)

NOTIFICATION

Shimla-2, the 13th Oct., 2014

No. GAD-D-7(G)1-12/81-II.—In exercise of the powers conferred by rule 45 of the Fundamental Rules, the Governor, Himachal Pradesh, is pleased to make the following rules further to amend the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Rules, 1994, notified vide this Department's notification No.GAD-D-7(G)1-12/81, dated the 1st June,1994 and published in Rajpatra, Himachal Pradesh (Extra Ordinary) dated 18th July, 1994, namely:—

1. Short title and Commencement.—(1) These rules may be called the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Eighth Amendment Rules, 2014.

(2) They shall come into force from the date of publication in the Official Gazette (e-Gazette), Himachal Pradesh.

2. Amendment of Rule-8.—In Rule 8 of the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Rule, 1994, for sub-rule(9),—

(a) in clause (iii), the third proviso shall be omitted; and

(b) after the existing clause (iii), the following new clause shall be inserted, namely:—

"(iv) The press correspondent shall vacate the Government accommodation allotted to him, on losing State Level Accreditation accorded by the State Government for working in the newspaper/news agency/news channel or on attaining the age of 65 years, which ever is earlier:

Provided that the correspondents who are in possession of Government accommodation on the date of publication of the Himachal Pradesh Allotment of Government Residences (General Pool) Eighth Amendment Rules, 2014, may continue in possession of such allotted accommodation even if they have crossed the age of sixty-five years and if they have accreditation and are in active journalism".

By order, Sd/- Secretary (GAD).

5715 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

उद्योग विभाग

अधिसूचना

शिमला, 1 दिसम्बर, 2014

संख्या ः इण्ड-II(ए)18-1/2006-II.--विभागीय समसंख्यक पत्र दिनांक 13-12-2011 के क्रम में राज्यपाल हिमाचल प्रदेश अनुबन्ध-ड़ में निम्नलिखित संशोधन, हेतु सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं :-

क्रम संख्या वर्तमान प्रावधान संशोधित प्रावधान
1 (I) स्थानीय अद्यौगिक उत्पादक इकाईयो ं के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज :- 2 . पंजीकरण शुल्क राशि 500.00 रुपये जो कि भारतीय पोस्टल आर्डर के रूप में अतिरिक्त नियन्त्रक भण्डार शिमला-171001 क े नाम से होनी चाहिए। (I) स्थानीय अद्यौगिक उत्पादक इकाईयो ं के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज :- 2 . पंजीकरण शुल्क राशि 1000.00 रुपये जो कि भारतीय पोस्टल आर्डर के रूप में अतिरिक्त नियन्त्रक भण्डार शिमला-171001 के नाम से होनी चाहिए।
2 (II) आपूर्तिकर्ता (सप्लायर)/उत्पादक इकाईयो के पंजीकरण के लिए आवश्यक ं दस्तावेजः- 2. पंजीकरण शुल्क राशि 500.00 रुपये जो कि भारतीय पोस्टल आर्डर के रूप में अतिरिक्त नियन्त्रक भण्डार शिमला-171001 क े नाम से होनी चाहिए। (II) आपूर्तिकर्ता (सप्लायर)/उत्पादक इकाईयो ं के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजः- 2 . पंजीकरण शुल्क राशि 1000.00 रुपये जो कि भारतीय पोस्टल आर्डर के रूप में अतिरिक्त नियन्त्रक भण्डार शिमला-171001 के नाम से होनी चाहिए।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (उद्योग)।

-------

विधि विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 22 जनवरी, 2015

संख्याः एल0एल0आर0-डी0(6)-16/2014-लेज.--हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 18-1-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक संख्यांक, 2014 (2014 का विधेयक संख्यांक 11) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 6 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करती हैं।

आदेश द्वारा, (देवेन्द्र कुमार शर्मा), प्रधान सचिव (विधि)।5716 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 2015 का अधिनियम संख्यांक 6

हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2014

(राज्यपाल महोदया द्वारा तारीख 18 जनवरी, 2015 को यथाअनुमोदित)

हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक 12) का और संशोधन करने के लिए अधिनियम ।

भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2014 है।

2. धारा 16 का संशोधन.-- हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (2005 का 12) की धारा 16 में,-

(क) विद्यमान उपधारा (5) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(5) यदि किसी व्यौहारी को, उस द्वारा प्रस्तुत की गई किसी भी विवरणी में, किसी लोप या अन्य गलती का पता चलता है तो वह,-

(i) मासिक और त्रैमासिक विवरणी की दशा में, आगामी विवरणी को दाखिल करने के लिए विहित तारीख से पूर्व संशोधित विवरणी प्रस्तुत कर सकेगा, और

(ii) वार्षिक विवरणी की दशा में, वार्षिक विवरणी को दाखिल करने के लिए विहित की गई अंतिम तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर संशोधित विवरणी प्रस्तुत कर सकेगा,

और यदि संशोधित विवरणी में दर्शाए गए देय कर की रकम, मूल विवरणी में दर्शाए गए कर की रकम से अधिक है, तो उसके साथ उपधारा (4) के अनुसार अतिरिक्त रकम के संदाय को दर्शाने वाली रसीद संलग्न होगी ।''।

(ख) विद्यमान उपधारा (6) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(6) यदि कोई व्यौहारी, उपधारा (3) के अधीन यथा अपेक्षित विहित तारीख तक विवरणी को बिना किसी पर्याप्त हेतुक के प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो व्यौहारी शास्ति स्वरूप, व्यतिक्रम जारी रहने तक, प्रतिदिन दो सौ रूपए के बराबर की राशि संदत्त करने के लिए दायी होगा, किन्तु ऐसी शास्ति पच्चीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी :

परन्तु जहां वार्षिक कर दायित्व बीस लाख रूपए से अधिक है, तो वहां व्यतिक्रम जारी रहने तक, बिना किसी ऊपरी सीमा के, प्रतिदिन एक हजार रुपए के बराबर की राशि शास्तिस्वरूप प्रभारित की जाएगी।"।5717 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Act No. 6 of 2015

THE HIMACHAL PRADESH VALUE ADDED TAX

(AMENDMENT) ACT, 2014

(As ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 18TH JANUARY, 2015)

AN

ACT

further to amend the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 (Act No. 12 of 2005).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-fifth Year of the Republic of India as follows:—

1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment) Act, 2014.

2. Amendment of section 16.—In section 16 of the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005,—

(a) for existing sub-section (5), the following sub-section shall be substituted, namely:— "(5) If any dealer discovers any omission or other error in any return furnished by him, he may,—

(i) in the case of monthly and quarterly return, furnish a revised return before the date prescribed for filing of next return, and

(ii) in the case of annual reurn, furnish a revised return within a period of sixty days from the last date prescribed for filing of annual return,

and if the revised return shows a greater amount of tax to be due against the tax shown in the original return, it shall be accompanied with a receipt showing payment of extra amount in accordance with sub-section(4).".; and

(b) for the existing sub-section(6), the following sub-section shall be substituted, namely:—

"(6) If a dealer fails without sufficient cause to furnish the return by the prescribed date as required under sub-section (3), the dealer shall be liable to pay, by way of penalty, a sum equal to Rs. 200/- per day till the default continues, but such penalty shall not exceed Rs. 25,000/-:

Provided that where annual tax liability is more than twenty lakh Rupees, a sum equal to Rs. 1000/- per day shall be charged as penalty till the default continues without any upper limit.".

5718 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

विधि विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 22 जनवरी, 2015

संख्याः एल0एल0आर0-डी0(6)-10/2014-लेज.--हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 18-1-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर द्वितीय संशोधन विधेयक, 2014 (2014 का विधेयक संख्यांक 8) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 3 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करती हैं।

आदेश द्वारा, (देवेन्द्र कुमार शर्मा), प्रधान सचिव (विधि)।

-------

2015 का अधिनियम संख्यांक 3 हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर द्वितीय संशोधन

अधिनियम, 2014

(राज्यपाल महोदया द्वारा तारीख 18 जनवरी, 2015 को यथाअनुमोदित)

हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 (1979 का अधिनियम संख्यांक 15) का और संशोधन करने के लिए अधिनियम।

भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2014 है।

2. धारा 6-ङ का संशोधन.-- हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 (1979 का 15) की धारा 6-ङ में,-

(क) शीर्षक "जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों या पिछड़ी पंचायतों में नए होटलों के स्वत्वधारियों द्वारा विलास-वस्तु कर का संदाय करने से छूट की बाबत विशेष उपबन्ध" के स्थान पर "कतिपय मामलों में विलास-वस्तु कर के संदाय से छूट" शीर्षक रखा जाएगा;

(ख) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, यदि सरकार की यह राय है कि राज्य में जनजातीय, दुर्गम या ग्रामीण क्षेत्रों या पिछड़ी पंचायतों में पर्यटन को बढ़ावा देने के आशय से लोकहित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, तो वह एक स्कीम अधिसूचित कर सकेगी और नए होटलों के रजिस्ट्रीकृत स्वत्वधारियों को, जो ऐसे जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों में प्रथम अप्रैल, 2012 के पश्चात्‌, पिछड़ी पंचायतों में प्रथम अप्रैल, 2013 के पश्चात्‌ और ग्रामीण क्षेत्र में प्रथम अप्रैल, 2014 के पश्चात्‌ प्रचालन में5719 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 आए हैं, ऐसे होटलों के प्रचालन में आने की तारीख से दस वर्ष की अवधि के लिए, विलास-वस्तु कर के संदाय से, ऐसे निर्बन्धनों और शर्तों के अध्यधीन, जैसी उक्त स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाएं, छूट दे सकेगी।" ; और

(ग) उपधारा (2) में स्पष्टीकरण I और II के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-

"स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजन के लिए,-

(I) "जनजातीय और दुर्गम क्षेत्र" से,

(i) जिला लाहौल एवं स्पिति, (ii) चम्बा जिला का पांगी और भरमौर उप-मण्डल, (iii) रोहडू़ उप-मण्डल का डोडरा क्वार क्षेत्र, (iv) जिला शिमला की रामपुर तहसील का पन्द्रह बीस परगना, मुनिश, दरकाली और ग्राम पंचायत काशापाट,

(v) कुल्लू जिला का पन्द्रह बीस परगना, (vi) कांगड़ा जिला के बैजनाथ उप-मण्डल के बड़ा भंगाल क्षेत्र, (vii) जिला किन्नौर, (viii) सिरमौर जिला में उप तहसील कमरउ के काठवाड़ और कोरगा पटवार वृत्त, रेणुकाजी तहसील के भलाड़-भलौना और सांगना पटवार वृत्त और शिलाई तहसील का कोटा पाब पटवार वृत्त, और

(ix) मण्डी जिला में करसोग तहसील का खन्योल-बगड़ा पटवार वृत्त, बाली चौकी उप- तहसील के गाडा गुसैणीं, मठयानी, घनयाड़, थाची, बागी, सोमगाड़ और खोलानाल, पद्धर तहसील के झारवाड़, कुटगढ़, ग्रामन, देवगढ़, ट्रैला, रोपा, कथोग, सिल्ह-हढ़वानी, हस्तपुर, ग्रामचार और भटेनहर पटवार वृत्त, थुनाग तहसील के चियूणी, कालीपार, मानगढ़, थाच-बगड़ा, उत्तरी मगरू और दक्षिणी मगरू पटवार वृत्त और सुन्दरनगर तहसील का बटवाड़ा पटवार वृत्त, अभिप्रेत है;

(II) "पिछड़ी पंचायतों" से ऐसी पंचायतें अभिप्रेत हैं, जो सरकार द्वारा पिछड़ी पंचायतें अधिसूचित की जाएं; और

(III) ''ग्रामीण क्षेत्र'' से ऐसे स्थापित पर्यटन क्षेत्र, जो सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, के सिवाय किसी नगरपालिका की ठीक बाहरी सीमाओं से तीन किलोमीटर से बाहर का क्षेत्र अभिप्रेत है।"।

________

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Act No. 3 of 2015

THE HIMACHAL PRADESH TAX ON LUXURIES (IN HOTELS AND LODGING

HOUSES) SECOND AMENDMENT ACT, 2014

(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 18TH JANUARY, 2015)

AN

5720 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

ACT

further to amend the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (in Hotels and Lodging Houses)

Act, 1979 (Act No.15 of 1979).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-fifth Year of the Republic of India as follows:—

1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (in Hotels and Lodging Houses) Second Amendment Act, 2014.

2. Amendment of section 6-E.—In section 6-E of the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (in Hotels and Lodging Houses) Act, 1979,—

(a) for the heading "Special provisions relating to exemption from payment of luxury tax by proprietors of new hotels in tribal and hard areas or in backward Panchayats", the heading "Exemption from payment of luxury tax in certain cases" shall be substituted;

(b) for sub-section (1), the following sub-section shall be substituted, namely:—

"(1) Notwithstanding anything contained in this Act, if the Government is of the opinion that in order to promote tourism in the tribal, hard or rural areas or in backward Panchayats in the State, it is necessary and expedient in public interest so to do, it may notify a scheme and exempt the registered proprietor of new hotels in such tribal or hard areas which came in to operation after 1st April, 2012, in backward Panchayats which came into operation after 1st April, 2013 and in rural area which came into operation after 1st April, 2014, from the payment of luxury tax for a period of ten years from the date the hotels commences operation, subject to such restrictions and conditions as may be specified in the said scheme."; and

(c) in sub-section (2), for explanations I and II, the following Explanation shall be substituted, namely:—

"Explanation.- For the purpose of this section,—

(I) " tribal and hard areas" means,—

(i) District Lahaul Spiti,

(ii) Pangi and Bharmour Sub-division of Chamba District,

(iii) Dodra Kawar Areas of Rohru Sub-division,

(iv) Pandrah Bis Pargana, Munish Darkali and Kashapat Gram Panchayat of Rampur Tehsil of District Shimla,

(v) Pandrah Bis Pargana of Kullu District,

(vi) Bara Bangal Areas of Baijnath Sub-division of Kangra District, (vii) District Kinnaur,5721 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (viii) Kathwar and Korga Patwar Circles of Kamrau Sub-Tehsil, Bhaladh Bhalona and Sangna Patwar Circles of Renukaji Tehsil and Kota Pab Patwar Circle of Shillai Tehsil, in Sirmour District, and

(ix) Khanyol-Bagra Patwar Circle of Karsog Tehsil, Gada-Gussaini, Mathyani, Ghanyar, Thachi, Baggi, Somgad and Kholanal of Bali-Chowki Sub-Tehsil, Jharwar,Kutgarh, Graman, Devgarh, Trailla, Ropa, Kathog, Silh-Hadhwani, Hatpur, Ghamrchar and Bhatenhar Patwar Circle of Padhar Tehsil, Chiuni, Kalipar, Mangarh, Thach-Bagra, North Magru and South Magru Patwar Circles of Thunag Tehsil and Batwara Patwar Circle of Sunder Nagar Tehsil in Mandi District ;

(II) "backward Panchayats" means such Panchayats as may be notified backward Panchayats by the Government ; and

(III) "rural areas" means area falling beyond three kilometres from the immediate outer limits of a municipality, except such established tourist area as may be notified by the Government.".

__________

विधि विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 22 जनवरी, 2015

संख्याः एल0एल0आर0-डी0(6)-20/2014-लेज.--हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 19-1-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2014 (2014 का विधेयक संख्यांक 12) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 1 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करती हैं।

आदेश द्वारा, (देवेन्द्र कुमार शर्मा), प्रधान सचिव (विधि)।

-------

2015 का अधिनियम संख्यांक 1 हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2014

(राज्यपाल महोदया द्वारा तारीख 19 जनवरी, 2015 को यथाअनुमोदित)

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्यांक 4) का और संशोधन करने के लिए अधिनियम ।

भारत गणराज्य के पैैंसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.-- (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2014 है। 5722 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (2) यह 20 सितम्बर, 2014 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।

2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 2 में,-

(क) खण्ड (13) के पश्चात्‌ निम्नलिखित नया खण्ड (13-क) अन्तःस्थापित किया जाएगा और विद्यमान खण्ड (13-क) और (13-ख) को क्रमशः (13-ख) और (13-ग) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

''(13-क) ''मुख्य कार्यकारी अधिकारी'' से इस अधिनियम की धारा 134 के अधीन नियुक्त पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ का मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिप्रेत है;''; और (ख) खण्ड (27-क) में, ''ग्राम पंचायत द्वारा'' शब्दों के स्थान पर ''पंचायत द्वारा'' शब्द रखे जाएंगे। 3. धारा 134 का प्रतिस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 134 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

''134. पंचायत समिति और जिला परिषद्‌ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सचिव की नियुक्ति.-(1) प्रत्येक पंचायत समिति में, खण्ड विकास अधिकारी इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा और प्रत्येक जिला परिषद्‌ में, सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा। पंचायत निरीक्षक, पंचायत समिति का सचिव होगा और जिला पंचायत अधिकारी, जिला परिषद्‌ का सचिव होगा।

(2) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी-

(क) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसे विनिर्दिष्ट रूप से अधिरोपित या प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा;

(ख) सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, यथास्थिति, पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ के अधिकारियों और कर्मचारियों का पर्यवेक्षण और नियन्त्रण करेगा;

(ग) सभी संकर्मांे के निष्पादन का पर्यवेक्षण और नियन्त्रण करेगा;

(घ) सभी संकर्मांे और विकासात्मक स्कीमों के शीघ्र निष्पादन के लिए आवश्यक उपाय करेगा;

(ङ) पंचायत समिति और सम्बद्ध विभागों के खण्ड स्तर के कार्यालयों के बीच समन्वय स्थापित करेगा और, यथास्थिति, पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ के प्रस्तावों का समय के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करेगा;

(च) यथास्थिति, पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ की प्रत्येक बैठक में और उसकी किसी अन्य समिति की बैठक में उपस्थित रहेगा तथा विचार-विमर्श में भाग लेगा, किन्तु उसे कोई प्रस्ताव पेश करने या मत देने का अधिकार नहीं होगा; और (छ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा, जैसे उसे पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ या राज्य सरकार द्वारा न्यस्त किए जाएं।5723 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, सचिव- (क) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसे विनिर्दिष्ट रूप से अधिरोपित या प्रदत्त सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा;

(ख) सभी संकर्मांे के निष्पादन का पर्यवेक्षण करेगा;

(ग) पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ तथा इसकी स्थायी समितियों और अन्य समितियों की बैठकों की कार्यवाहियों से सम्बन्धित सामान्य मुद्रा और समस्त कागज-पत्रों तथा दस्तावेजों की अभिरक्षा करेगा;

(घ) पंचायत की निधि में से धन का आहरण और संवितरण करेगा;

(ङ) पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ की प्रत्येक बैठक में और इसकी किसी अन्य समिति की बैठक में उपस्थित रहेगा तथा विचार-विमर्श में भाग लेगा, किन्तु उसे कोई प्रस्ताव पेश करने या मत देने का अधिकार नहीं होगा। यदि उसकी राय में पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ के समक्ष कोई प्रस्ताव इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के उपबन्धों, तद्‌धीन बनाए गए नियम या किए गए आदेश का उल्लंघन करने वाला है या असंगत है, तो उसका यह कर्त्तव्य होगा कि वह उसे, यथास्थिति, पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ के ध्यान में लाए;

(च) पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ और इसकी समितियों की बैठकों की कार्यवाहियाँॅं अभिलिखित करेगा; और

(छ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगा, जो उसे समय-समय पर पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ द्वारा न्यस्त किए जाएं।

(4) प्रत्येक व्यक्ति, जिसके कब्जे में ग्राम पंचायत या पंचायत समिति या जिला परिषद्‌ से सम्बन्धित धन, लेखे, अभिलेख या अन्य सम्पत्ति है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी की, इस प्रयोजन के लिए लिखित अध्यपेक्षा पर, उक्त अधिकारी या अध्यपेक्षा में उसे प्राप्त करने के लिए उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को तत्काल ऐसा धन सौंपेगा या ऐसे लेखों, अभिलेखों या अन्य सम्पत्ति को परिदत्त करेगा।''।

4. 2014 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 5 का निरसन और व्यावृत्तियां.-- (1) हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2014 का एतद्‌द्वारा निरसन किया जाता है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी।

------

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Act No. 1 of 2015

THE HIMACHAL PRADESH PANCHAYATI RAJ (AMENDMENT) ACT, 2014

(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 19TH JANUARY, 2015)

AN

ACT

further to amend the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994 (Act No. 4 of 1994).

5724 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-fifth Year of the Republic of India as follows:—

1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh Panchayati Raj (Amendment) Act, 2014.

(2) It shall be deemed to have come into force on 20th day of September, 2014.

2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994 (hereinafter referred to as the 'principal Act'),-

(a) after clause (13), the following new clause (13-A) shall be inserted and existing clauses (13-A) and (13-B) shall respectively be renumbered as (13-B) and (13-C), namely:-

"(13-A) "Chief Executive Officer" means Chief Executive Officer of Panchayat Samiti or Zila Parishad appointed under section 134 of this Act;"; and

(b) in clause (27-A), for the words "by the Gram Panchayat", the words "by the Panchayat" shall be substituted.

3. Substitution of section 134.—For section 134 of the principal Act, the following section shall be substituted, namely:-

"134. Appointment of Chief Executive Officer and Secretary of Panchayat Samiti and Zila Parishad.— (1) In every Panchayat Samiti, the Block Development Officer, and in every Zila Parishad, the officer appointed by the Government, shall be its Chief Executive Officer. The Panchayat Inspector shall be the Secretary of Panchayat Samiti and the District Panchayat Officer shall be the Secretary of Zila Parishad.

(2) Save as otherwise expressly provided by or under this Act, the Chief Executive Officer shall—

(a) exercise all the powers specifically imposed or conferred upon him by or under this Act or under any other law for the time being in force ;

(b) supervise and control officers and officials of the Panchayat Samiti or Zila Parishad, as the case may be, in accordance with the rules made by the Government ;

(c) supervise and control the execution of all works;

(d) take necessary measures for the speedy execution of all works and developmental schemes;

(e) co-ordinate between the Panchayat Samiti and Block level offices of the concerned departments and shall ensure timely execution of resolutions of the Panchayat Samiti or Zila Parishad, as the case may be;

(f) attend every meeting of the Panchayat Samiti or Zila Parishad, as the case may be, and the meeting of any other committee thereof and to take part in the discussion, but shall not have the right to move any resolution or to vote; and

(g) exercise such other powers and discharge such other functions as may be entrusted to him by the Panchayat Samiti or Zila Parishad or State Government.

5725 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) Save as otherwise expressly provided by or under this Act, the Secretary shall—

(a) exercise all the powers specifically imposed or conferred upon him by or under this Act or under any other law for the time being in force;

(b) supervise execution of all works;

(c) have custody of common seal and all papers and documents connected with the proceedings of the meetings of the Panchayat Samiti or the Zila Parishad and of its Standing Committees and other Committees;

(d) draw and disburse money out of the Panchayat fund;

(e) attend every meeting of the Panchayat Samiti or Zila Parishad and the meeting of any other Committee thereof and to take part in the discussion, but shall not have the right to move any resolution or to vote. If in his opinion any proposal before the Panchayat Samiti or the Zila Parishad is in contravention or is inconsistent with the provisions of this Act, or any other law, rule or order made thereunder, it shall be his duty to bring the same to the notice of the Panchayat Samiti or the Zila Parishad, as the case may be ;

(f) record proceedings of the meetings of Panchayat Samiti or Zila Parishad and its Committees ; and

(g) exercise such other powers and discharge such other functions as may be entrusted to him by the Panchayat Samiti or Zila Parishad from time to time.

(4) Every person in possession of moneys, accounts, records or other property pertaining to Gram Panchayat or Panchayat Samiti or Zila Parishad shall, on the requisition for this purpose in writing of the officer referred to in sub-section (1), forthwith hand over such moneys or deliver such accounts, records or other property to the said officer or the person authorized by him in the requisition to receive the same.".

4. Repeal of H.P. Ordinance No. 5 of 2014 and savings.—(1) The Himachal Pradesh Panchayati Raj (Second Amendment) Ordinance, 2014 is hereby repealed.

(2) Notwithstanding such repeal anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.

________

विधि विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 22 जनवरी, 2015

संख्या ः एल0एल0आर0-डी0(6)-15/2014-लेज.--हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 20-1-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश विद्युत वितरण प्रबंधन उत्तरदायित्व विधेयक, 2014 (2014 का विधेयक संख्यांक 10) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 5 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करती हैं।

आदेश द्वारा, (देवेन्द्र कुमार शर्मा), प्रधान सचिव (विधि)।5726 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

हिमाचल प्रदेश विद्युत वितरण प्रबंधन उत्तरदायित्व अधिनियम, 2014

धाराओं का क्रम

धारा : 1. स्ांक्षिप्त नाम, लागू होना, विस्तार और प्रारम्भ ।

2. परिभाषाएं ।

3. राज्य विद्युत वितरण प्रबंधन विवरणी का राज्य विधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाना । 4. राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की धारणीयता के लिए दीर्घकालिक योजना ।

5. राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना ।

6. लेखा उपाय ।

7. निगमित शासन प्रणाली ।

8. विनियामक अनुपालन और टैरिफ दाखिल करना ।

9. समझौता ज्ञापन ।

10. अनुश्रवण तंत्र ।

11. अनुपालन प्रवर्तित करने के उपाय ।

12. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति।

13. नियमों का राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाना ।

14. सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण ।

15. अन्य विधियों का लागू होना वर्जित नहीं ।

16. कठिनाईयां दूर करने की शक्ति ।

17. अधिनियम का कतिपय मामलों में लागू न होना ।

-------

2015 का अधिनियम संख्यांक 5 हिमाचल प्रदेश विद्युत वितरण प्रबंधन उत्तरदायित्व अधिनियम, 2014

(राज्यपाल महोदया द्वारा तारीख 20 जनवरी, 2015 को यथाअनुमोदित)

दीर्घकालिक योजना, निगमित शासन प्रणाली विनियामक अनुपालन के क्षेत्रों में वित्तीय पुनर्गठन धारणीय आधार पर समर्थन के माध्यम से उपभोक्ताओं को पर्याप्त विद्युत प्रदाय को समर्थ बनाने के लिए राज्य के स्वामित्वाधीन वितरण अनुज्ञप्तिधारी की वित्तीय और प्रतिचालन प्रतिवर्तन तथा दीर्घकालिक धारणीयता सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार के उत्तरदायित्वों तथा उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक नीति निदेशों और विभिन्न अन्य उपाय अधिकथित करने हेतु उपबन्ध करने के लिए अधिनियम।

भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम, लागू होना, विस्तार और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश विद्युत वितरण प्रबंधन उत्तरदायित्व अधिनियम, 2014 है ।

(2) इस अधिनियम के उपबन्ध, वित्तीय पुनर्गठन योजना के उद्देश्यों के अनुसार, विद्युत के वितरण में लगे हुए राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी या राज्य सरकार के अधीन बोर्ड या विभाग को लागू होंगे।5727 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) इसका विस्तार सम्पूर्ण हिमाचल प्रदेश राज्य में होगा ।

(4) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा, जैसी राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे । 2. परिभाषाएं.--(1) इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "कार्य योजना" का वही अर्थ होगा जो इस अधिनियम की धारा 3 में इसको समनुदेशित है;

(ख) " संकलित तकनीकी और वाणिज्यिक हानि" या " ए.टी.एण्ड सी लॉस" से वितरण प्रणाली के ऊर्जा आगत और प्राप्य ऊर्जा का अन्तर अभिप्रेत है जिसमें प्राप्य ऊर्जा देयकांकित ऊर्जा के उत्पादन और संग्रहण क्षमता के बराबर होगी;

(ग) "प्राधिकरण" से विद्युत अधिनियम की धारा 70 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(घ) "बोर्ड" का वही अर्थ होगा जो विद्युत अधिनियम, 2003 में इसे समनुदेशित है;

(ङ) "संग्रहण क्षमता" से उसी वर्ष के लिए देयकांकित कुल राजस्व के कुल वसूलीय राजस्व का अनुपात अभिप्रेत है;

(च) " विद्युत अधिनियम" से यथा प्रवृत्त विद्युत अधिनियम, 2003 अभिप्रेत है;

(छ) " राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन सीमा" से समय-समय पर यथा प्रवृत्त, राज्य के राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन से सम्बन्धित, परिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार की राज्य सरकार के उधार पर अधिरोपित सीमा अभिप्रेत है;

(ज) "वित्तीय पुनर्गठन योजना" या "एफ आर पी" से केन्द्रीय सरकार द्वारा कार्यालय ज्ञापन संख्याः 20/11/2012-एपीडीआरपी तारीख 5 अक्तूबर, 2012 के निबन्धनों के अनुसार अधिसूचित वित्तीय पुनर्गठन स्कीम के उपबन्धों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय पुनर्गठन के लिए योजना अभिपे्रत है;

(झ) "प्रमुख निष्पादन संकेतक (केपीआईज)" से राज्य आयोग द्वारा अधिकथित निष्पादन मानक, यदि कोई है, और/या वित्तीय पुनर्गठन योजना, यदि कोई है, अभिपे्रत है और ऐसी अवधि तक जब तक कि केपीआईज अधिकथित नहीं कर दिए जाते तो इस अधिनियम की अनुसूची में यथा उपबंधित केपीआईज विद्यमान रहेंगे;

() "नोडॅल बैंक" से राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय पुनर्गठन के प्रयोजनों के लिए और राज्य सरकार राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी और भागीदार उधारदाता के साथ समन्वय के प्रयोजन के लिए वित्तीय सेवाओं के विभाग द्वारा नामनिर्देशित बैंक अभिप्रेत है;

(ट) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(ठ) "अनुसूची" से इस अधिनियम से संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है;

(ड) "राज्य आयोग" से विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) की धारा 82 के अधीन गठित हिमाचल प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग अभिप्रेत है;

5728 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

(ढ) "राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी" या "वितरण अनुज्ञप्तिधारी" से विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 (1948 का 54) की धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन गठित हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद्‌ सीमित या सरकारी कम्पनी या राज्य सरकार के अन्तर्गत विद्युत के वितरण के लिए अभियोजित विभाग अभिप्रेत है; और

(ण) " राज्य सरकार" से हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है;

(2) इस अधिनियम में उन समस्त शब्दों, जो इसमें अभिव्यक्त रुप से परिभाषित नहीं हैं, के वही अर्थ होंगे जो वित्तीय पुनर्गठन योजना, विद्युत अधिनियम, 2003 या तद्‌धीन जारी की गई अधिसूचनाओं, बनाए गए नियमों और विनियमों के अधीन उनके लिए समनुदेशित किए गए हैं ।

3. राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी का राज्य विधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाना.--(1)राज्य सरकार, दीर्घकालिक योजना, उपभोक्ता संरक्षण, विनियामक अनुपालना, निगमित शासन प्रणाली, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय पुनर्गठन के क्षेत्र सहित राज्य सरकार द्वारा राज्य में विद्युत वितरण से सम्बन्धित किए गए उपायों पर राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में बजट सत्र के दौरान राज्य विधान सभा के समक्ष रखेगी ताकि उन्हें धारणीय आधार पर राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की परिचालन और वित्तीय क्षमता के अनुरुप लाया जा सके और जिसमें निम्नलिखित समाविष्ट होगाः-

(क) आगामी वित्तीय वर्ष के लिए धारा 4,5,6 और 8 के अधीन उपबन्धित शर्तों या उपबन्धों से सम्बन्धित प्रमुख निष्पादन संकेतक प्राप्त करने हेतु और अन्य कार्यकलापों की विशिष्टियां, जिनकी राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की वित्तीय और परिचालन प्रतिवर्तन पर सम्भाव्य विवक्षाएं हैं, सरकार की पॉलिसियों और युक्तियां अधिकथित करते हुए राज्य विद्युत वितरण योजना की विवरणी;

(ख) समयबद्ध कार्यक्रम अधिकथित करते हुए दीर्घकालिक, मध्यम कालिक, अल्पकालिक आधार पर निम्न के लिए कार्य योजना-

(i) प्रमुख निष्पादन संकेतकों को प्राप्त करने हेतु युक्तिगत पूर्विकताओं को निष्पादित करना;

(ii) प्रमुख निष्पादन संकेतकों और युक्तिगत पूर्विकताओं का अनुश्रवण करना और उनकी अनुपालना सुनिश्चित करना;

(iii) प्रकिया में/प्रक्रिया के दौरान प्रतिसूचना पथ; और

(iv) ऐसे अन्य कार्यकलाप जो इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा संत्यक्त बाध्यताओं को पूरा करने और इस अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपेक्षित होंः परन्तु कार्य योजना में वास्तविक निष्पादन और प्रमुख निष्पादन संकेतकाें में विचलन का विलोपन करने और न्यूनतम करने के लिए उपाय अन्तर्विष्ट होंगे;

(ग) यथास्थिति, राज्य विद्युत अनुज्ञप्तिधारी या राज्य सरकार द्वारा ऐसी शर्तों या इस अधिनियम की धारा 4,5,6 और 8 के अधीन उपबन्धित उपबन्धों सहित अनुपालना के निर्धारण अधिकथित करते हुए राज्य वितरण निष्पादन विवरणी ।

(2) राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी ऐसे प्ररुप में होगी, जैसा विहित किया जाए ।

(3) राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी किन्हीं परिणामों, जिससे अनुज्ञप्तिधारी विद्युत अधिनियम, 2003 के अधीन, विशिष्टतया उक्त अधिनियम की धारा 55 में निर्दिष्ट समय सीमा के लिए दायी होगा और उक्त5729 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 अधिनियमिति के अधीन किन्हीं अपेक्षाओं के सम्बन्ध में प्राधिकारियों के किन्हीं आदेशों और निदेशों के प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगीः

परन्तु इस धारा की कोई भी बात विद्युत अधिनियम, 2003 के अधीन किसी अपेक्षा की छूट अतर्हित नहीं होगी ।

4. राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की धारणीयता के लिए दीर्घकालीक योजना.--(1) राज्य सरकार निम्नलिखित मामलों के लिए समुचित उपायों की व्यवस्था करेगी, अर्थात्‌ः-

(क) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की मांग का आकलन, संकलित तकनीकी और वाणिज्यिक हानि और दीर्घकालिक आधार पर विद्युत की उपलब्धता तथा राज्य आयोग के अनुमोदन से मांग की पूर्ति के लिए ऊर्जा के क्रय हेतु, दीर्घकालिक या मध्यमकालिक या अल्पकालिक करारों के माध्यम से संविदाएं;

(ख) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी राज्य आयोग के अनुमोदन से संकलित तकनीकी और वाणिज्यिक हानि को कम करने के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करनाः

परन्तु रोडमैप इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से छह मास के भीतर तैयार किया जाएगा;

(ग) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी ऊर्जा परिकलन और समस्त 33 के0वी0 फीडरों, 11 के0वी0 फीडरों की संपरीक्षा और उपभोक्ता अनुक्रमणिका सहित वितरण ट्रांसफार्मरों तथा उपभोक्ताओं के प्रत्येक प्रवर्ग की समयबद्ध मीटरिंग का जिम्मा लेता है और ऐसा करते समय वितरण अनुज्ञप्तिधारी को मीटरिंग प्रौद्योगिकियों में नवीनतम परिवर्धन पर विचार करना होगाः

परन्तु ऊर्जा के परिकलन और अंकेक्षण की बाबत रोडमैप और समस्त उपभोक्ताओं के लिए समयबद्ध मीटरिंग इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से छह मास के भीतर तैयार किया जाएगा और इसके लिए राज्य आयोग से अनुमोदन लिया जाएगाः

परन्तु यह और कि उपभोक्ता अनुक्रमणिका इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर पूर्ण की जाएगीः

परन्तु यह और भी कि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी ऊर्जा अंकेक्षण, संपरीक्षा, मीटरिंग और फीडरों तथा वितरण ट्र्‌ांसफार्मर-वार उपभोक्ता अनुक्रमणिका की बाबत अर्धवार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्राधिकरण और राज्य आयोग को प्रस्तुत करेगा;

(घ) यदि राज्य सरकार किसी उपभोक्ता या उपभोक्ताओं की किसी श्रेणी को कोई सहायकी प्रदान करना अपेक्षित समझती है तो राज्य सरकार स्पष्टतया उपभोक्ता या उपभोक्ताओं की किसी श्रेणी, जिसको इसे प्रदान किया जाना है, का वर्णन करते हुए अग्रिम में सहायकी की प्रमात्रा घोषित करेगी और ऐसा करते समय राज्य सरकार विनियामकों की फोरम द्वारा विविध वर्ष के लिए तैयार किए गए वितरण टैरिफ के विनियमाें द्वारा निर्देशित होगी;

(ङ) वार्षिक बजट का प्रावधान करना और यदि प्रतिबद्धता है तो विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 65 के अनुसार समय पर सहायकी भी जारी करना;

(च) यह सुनिश्चित करना कि इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख को या इससे पूर्व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं को विद्युत प्रदाय के लिए विद्युत प्रभारों का कोई बकाया नहीं है और ऐसा करने में असफल रहने की दशा में इसे वार्षिक बजट अनुदान में समायोजित किया जाएगाः 5730 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 परन्तु राज्य सरकार इसके विभिन्न विभागों और संस्थाओं को प्रदाय की गई विद्युत के लिए प्रभार देय तारीख के भीतर राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी को संदाय करना सुनिश्चित करने के लिए अनुदानों सहित बजट प्रावधान करेगी;

(छ) इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के प्रारम्भ की तारीख से एक वर्ष के भीतर वहां विशेष न्यायालय स्थापित करना जहां विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 153 से 157 के अनुसार बिजली की चोरी को पकड़ने के लिए यह स्थापित नहीं किए गए हैं;

(ज) यह सुनिश्चित करना कि स्टेट लोड डिस्पैच सेंंटर को किसी राज्य अधिनियम के अधीन या द्वारा, जैसा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, स्थापित या गठित किसी सरकारी कम्पनी या किसी प्राधिकरण या निगम (राज्य पारेषण उपयोगिता से अन्यथा) द्वारा इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से छह मास के भीतर परिचालित हो और अन्य उपायों की व्यवस्था करना जो क्रियाशील और वित्तीय स्वायत्तता, स्वतन्त्र और धारणीय राजस्व स्त्रोत और पर्याप्त जनशक्ति सुनिश्चित करेगीः

परन्तु ऐसी सरकारी कम्पनी या कोई प्राधिकरण या निगम, विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 32 और 33 के अधीन विनिर्दिष्ट से अन्यथा किसी कृत्य में शामिल नहीं होगी;

(झ) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के सम्बन्ध में, समनुषंगी, संयुक्त जोखिम उठाने वाली कम्पनियों का गठन या डिवीजन की अन्य स्कीमों, समामेलन, विलय या पुनर्गठन या व्यवस्थाएं करना जो परिणामी एन्टटी की लाभदायिकता और क्षमता में अभिवृद्धि करेगी, आर्थिक दक्षता, लोक निजी भागीदारी, प्रतियोगिता को प्रोत्साहन और उपभोक्ता हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना; और (ञ) ऐसे अन्य उपाय जो विहित किए जाएं ।

5. राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना.--(1) वित्तीय पुनर्गठन योजना अधिसूचित हो जाने पर, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय पुनर्गठन के प्रचालन करने के साथ-साथ, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय करेगी कि वित्तीय पुनर्गठन योजना में परिचालन और वित्तीय प्राचल के प्रक्षेप-पथ नियत समय सीमा के भीतर प्राप्त हो जाएं ।

(2) राज्य सरकार, राज्य आयोग के किसी आदेश या निदेश के अध्यधीन, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय दायित्वों का जिम्मा लेने के लिए और राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की वित्तीय परिचालन हानियों और हितों के वित्तपोषण के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना में विचारित परिचालन और वित्तीय प्रक्षेप-पथों को प्राप्त करने के लिए तथा ऐसे अन्य उपायों, जो किसी वित्तीय पुनर्गठन योजना या किसी अन्य वित्तीय पुनर्गठन स्कीम में विनिर्दिष्ट किए जाएं, के लिए योजना अधिसूचित करनाः

परन्तु ये राजकोषीय उत्तरदायित्व, राज्य राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन सीमा, यदि कोई है, में उपलब्ध बजट प्रतिबन्धों/वित्तीय सीमाओं के संगत होंगेः

परन्तु यह और कि राज्य सरकार राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी को ऋण के रुप में किसी भी वित्तीय दायित्व को उनसे वापस लिए जाने के पश्चात्‌, समायोजित नहीं करेगी'ः

परन्तु यह और कि यदि वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्ध अधिनियम, 2005, यदि कोई है, के अधीन ऋण-सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात सहित यदि राजकोषीय अन्तर पाया जाता है तो सरकार वित्त आयोग द्वारा समय-समय पर यथा अधिसूचित सुसंगत राजकोषीय वर्ष की उसकी शुद्ध ऋण लेने की सीमा को पार नहीं करेगीः

परन्तु यह और भी कि यदि किसी विशिष्ट वर्ष में राज्य सरकार का वित्तीय अन्तर मूलतः प्रक्षिप्त से अधिक पाया जाता है तो यह यथासाध्यशीघ्र अतिरिक्त दायित्वों को हाथ में लेगी ।5731 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) राज्य सरकार, राज्य वित्त पर इसके प्रभाव के प्रभावी अनुश्रवण के लिए, राज्य बजट विवरणियों के भाग-रुप राजकोषीय पुनर्गठन योजना या ऐसी अन्य विभागीय स्कीम बनाएगी ।

(4) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी वित्तीय पुनर्गठन योजना में यथा उपबन्धित के सिवाय प्रचालन हानि के लिए निधि का प्रावधान करने के लिए अल्पकालिक ऋण नहीं लेगा ।

6. लेखा उपाय.--(1) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से छह मास के भीतर सशक्त समिति स्थापित करेगी जो राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के लेखा खातों में प्राप्य तथा डूबत और शंकास्पद ऋण की पहचान व्यवस्था, और बट्‌टे-खाते डालना सुनिश्चित करेगीः

परन्तु राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी लेखा पॉलिसियाँ तैयार करेगा, जो इसके वित्तीय प्रबन्धन और इसके प्राप्याें के प्रबन्धन और डूबत और शंकास्पद ऋण के लिए उपबन्ध करने हेतु, जिसमें बट्‌टे-खाते में डालने के लिए समय-सीमा अन्तर्विष्ट हो, व्यवस्था करेगी ।

(2) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वितरण अनुज्ञप्तिधारी ने इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर वित्तीय लेखा मानकों के अन्तर्गत स्थिर परिसम्पत्तियों की सामान्यतः स्वीकृत परिभाषा के अनुसार स्थिर परिसम्पत्ति रजिस्टर की अस्तित्व जांच पूर्ण कर ली है और उसे तैयार कर लिया हैः

परन्तु उपधारा (2) में निर्दिष्ट उक्त योजना को राज्य आयोग को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

(3) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, निम्नलिखित से मिलकर बनने वाली एक सशक्त समिति गठित करेगीे,-

(i) प्रधान सचिव (वित्त), हिमाचल प्रदेश सरकार अध्यक्ष;

(ii) प्रधान सचिव (ऊर्जा), हिमाचल प्रदेश सरकार सदस्य; और

(iii) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी का प्रमुख सदस्य-सचिव ।

7. निगमित शासन प्रणाली.-- (1) राज्य सरकार का यह सुनिश्चित करना कर्त्तव्य होगा कि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के निदेशक बोर्ड में क्रियाशील, नामनिर्देशिती और स्वतन्त्र निदेशकों का अनुकूलतम संयोजन होः

परन्तु यह कि क्रियाशील निदेशकों की संख्या (अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक/प्रबन्ध निदेशक सहित) बोर्ड की वास्तविक संख्या के पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगीः

परन्तु यह और कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त नामनिर्देशित निदेशकों की संख्या दो से अधिक नहीं होगीः

परन्तु यह और कि स्वतन्त्र निदेशकों की संख्या कम्पनी अधिनियम, 1956 के उपबन्धों के अनुसार होगी । स्पष्टीकरणः-'स्वतन्त्र निदेशक' से वितरण अनुज्ञप्तिधारी का अंशकालीन निदेशक अभिप्रेत होगा, जो,- 5732 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (क) निदेशक का पारिश्रमिक प्राप्त करने के अलावा, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी, इसके निदेशकों, इसके प्रवर प्रबन्धन, इसकी नियंत्री कम्पनी इसके समनुषंगियों और सहयुक्तों तथा राज्य सरकार, जो निदेशक की स्वतन्त्रता को प्रभावित करे, के साथ कोई सारवान धनीय सम्बन्ध या संव्यवहार न रखता हो;

(ख) बोर्ड स्तर पर या बोर्ड से एक स्तर नीचे प्रबन्धन हैसियतें रखने वाले व्यक्तियों से सम्बन्धित नहीं है;

(ग) पूर्ववर्ती तीन वर्ष के दौरान निम्नलिखित में से, किसी का भागीदारी या कार्यपालक नहीं है, या भागीदार या कार्यपालक नहीं थाः-

(i) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के साथ सम्बन्धित कानूनी लेखा परीक्षा फर्म या आन्तरिक लेखा परीक्षा फर्म या कर लेखा परीक्षा फर्म या ऊर्जा लेखा परीक्षा फर्म या प्रबन्धन लेखा परीक्षा फर्म या जोखिम लेखा परीक्षा फर्म या बीमा लेखा परीक्षा फर्म; और

(ii) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के साथ सारवान्‌ सम्बन्ध रखने वाले अधिवक्ता(ओं) का पैनल या कानूनी फर्म (फर्माें) या परामर्शदात्री फर्म (फर्माें) या विशेषज्ञ( विशेषज्ञों);

(घ) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी का सारवान्‌ प्रदायकर्ता, सेवा प्रदान करने वाला या ग्राहक या पट्‌टाकर्ता या पट्‌टाधारी नहीं है जो निदेशक की स्वतन्त्रता को प्रभावित करे;

(ङ) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी, अर्थात्‌ मतदान किए जाने वाले शेयरों के ब्लॉक का 2 प्रतिशत या उससे अधिक का स्वामी है, का सारवान शेयरधारक नहीं है; और

(च) योग्यता, सत्यनिष्ठा, प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति है जो इंजीनियरिंग या विधि या अर्थशास्त्र या वाणिज्य या वित्त या प्रबन्धन में अर्हता रखता हो और विद्युत उत्पादन या पारेषण या वितरण के क्षेत्रों में ज्ञान और अनुभव रखता हो ।

(2) राज्य सरकार, पब्लिक उपक्रम विभाग, भारत सरकार द्वारा, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारियों के समस्त बोर्ड सदस्यों और वरिष्ठ प्रबन्धकगण के लिए यथा अधिसूचित पब्लिक सेक्टर उपक्रमों के लिए निगमित शासन प्रणाली पर मार्गदर्शक सिद्धान्तों की पद्धति पर आचार संहिता अधिकथित करेगी, जिसमें बोर्ड और प्रबन्धन के मध्य उत्तरदायित्वों की भूमिका और विभाजन की स्पष्ट रूप रेखा तो सम्मिलित होगी परन्तु इस तक सीमित नहीं होगी।

8. विनियामक अनुपालन और टैरिफ दाखिल करना.--(1) राज्य सरकार, विद्युत अधिनियम, 2003 और तद्‌धीन बनाए गए नियमों और विनियमों तथा विनियामक निर्देशकों और नीतियों की राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी द्वारा अनुपालना की प्रास्थिति का एक वर्ष में दो बार मूल्यांकन करने के साथ-साथ ऐसे अंतिम मूल्यांकन से अननुपालन की प्रेरणा को परिशोधित किए जाने हेतु उठाए गए कदमों का भी मूल्यांकन करेगी । (2) राज्य सरकार, सही (ट्रूअप) याचिकाओें, संकलित राजस्व अपेक्षा और टैरिफ याचिकाओं तथा राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी द्वारा, राज्य आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट आदेशों या विनियमों के अनुसार ईंधन और क्रय की गई विद्युत लागत के कारण समायोजन याचिकाओं का नियमित और समय पर दायर करना सुनिश्चित करेगी।

(3) उपधारा (2) के होते हुए भी, राज्य सरकार का यह कत्र्तव्य होगा कि वह राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी को निम्नलिखित को कम करने या समाप्त करने हेतु, राजकोषीय उपबन्ध या अनुदान की व्यवस्था करे, यदि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी की असफलता के कारण कोई प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव पड़ता हैः- (क) वास्तविक ऊर्जा क्रय लागत और राज्य आयोग द्वारा अनुमोदित ऊर्जा क्रय लागत में फेरफार;

5733 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

(ख) संकलित राजस्व अपेक्षा की अन्य मदों की वास्तविक और अनुमोदित व्यय में फेरफार जैसे कि परिचालन और अनुरक्षण व्यय तथा पूंजीगत व्यय, परन्तु उस तक सीमित नहीं; और

(ग) आपूर्ति की औसत लागत और राजस्व की औसत वसूली के मध्य फेरफारः

परन्तु आपूर्ति की औसत लागत और राजस्व की औसत वसूली के मध्य में फेरफार, यदि कोई हो, को इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से तीन से पांच वर्ष की अवधि के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

(4) राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विनियामक परिसम्पत्तियाँ, यदि कोई हो, इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से तीन से पांच वर्ष की अवधि के भीतर या राज्य आयोग द्वारा ऐसी किसी नियत अवधि, यदि कोई हा,े के भीतर, जो भी पूर्वतर हो, शीघ्रता से परिनिर्धारित की गई है।

9. समझौता ज्ञापन.--(1) राज्य सरकार और राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी, इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से छह मास से अनधिक की अवधि के भीतर प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए, राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के प्रमुख निष्पादन संकेतकों और निष्पादन मूल्यांकन के लिए, लक्ष्य निर्धारित करने हेतु इस निमित्त एक समझौता ज्ञापन करेगीः

परन्तु समझौता ज्ञापन, राज्य संवितरण अनुज्ञप्तिधारी को, इसकी विधिक और विनियामक बाध्यताओं के निष्पादन तथा अनुपालन हेतु अधिकतम स्वायत्तता प्रदान करने पर केन्द्रित होगा जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित होगा परन्तु उसी तक सीमित नहीं होगाः-

(क) वार्षिक राजस्व अपेक्षा और टैरिफ याचिकाओं को समय पर दायर करना और राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी द्वारा क्रय किए गए ईंधन और ऊर्जा की लागत के लेखे समायोजन;

(ख) विवेकपूर्ण निवेश और पूंजीगत व्यय योजना; और

(ग) उपभोक्ताओं को पर्याप्त और वहन करने योग्य विद्युत प्रदाय उपलब्ध करवाने हेतु वित्तीय प्रबन्धनः परन्तु यह भी कि समझौता ज्ञापन, इस अधिनियम और राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी में उपबन्धित समस्त वित्तीय और प्रचालन प्राचलों के लिए निष्पादन मील पत्थर साबित होगा । (2) राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी, राज्य सरकार को प्रत्येक छह मास में इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के अधीन यथा अपेक्षित, इसके परिचालन और वित्तीय निष्पादन पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगाः परन्तु यह कि रिपोर्ट में निष्पादन मीलपत्थर और इन निष्पादन मीलपत्थरों के वास्तविक निष्पादन प्राप्त करने के लिए ऐसी युक्ति और योजना अधिकथित होगी जैसी राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएः परन्तु यह और कि राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी यदि करार पाए गए मीलपत्थरों को प्राप्त करने में असफल रहते हैं तो वे पुनरीक्षित युक्तियां और योजनाएं इंगित करेंगे ।

10. अनुश्रवण तन्त्र.-- (1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रभावी कार्यन्वयन हेतु, अधिसूचना द्वारा निम्न से गठित एक समिति की स्थापना करेगीः-

(क) मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार अध्यक्ष;

(ख) प्रधान सचिव (वित्त), हिमाचल प्रदेश सरकार सदस्य;

(ग) प्रधान सचिव (ऊर्जा), हिमाचल प्रदेश सरकार सदस्य-सचिव;

5734 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (घ) राज्य संवितरण अनुज्ञप्तिधारी का प्रमुख सदस्य;

(ङ) राज्य के स्वामित्व वाली उत्पादन (जनरेटिंग) सदस्य; कम्पनी का प्रमुख

(च) राज्य के स्वामित्व वाले पारेषण अनुज्ञप्तिधारी सदस्य; का प्रमुख

(छ) नोडल बैंक के प्रतिनिधि और सदस्य; और राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के तीन मुख्य उधारदाता

(ज) केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण से प्रतिनिधि सदस्य।

11. अनुपालन प्रवर्तित करने के उपाय.-- (1) धारा 10 के अधीन स्थापित समिति, प्रत्येक तीन मास में, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर संत्यक्त दायित्वों के अनुपालन का पुनरीक्षण करेगी और उपचारी उपायों, यदि कोई हाें, की संस्तुति करेगी और राज्य सरकार, ऐसे पुनरीक्षणों का निष्कर्ष राज्य विधान सभा के समक्ष रखेगी।

(2) इस अधिनियम में यथा उपबन्धित के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर संत्यक्त दायित्वों को पूरा करने में राज्य विधान सभा के अनुमोदन के बिना कोई विचलन अनुमत्त नहीं किया जाएगा। (3) जहां अकल्पित परिस्थितियों के कारण, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर संत्यक्त दायित्वों को पूर्ण करने में कोई विचलन है, वहां धारा 10 के अधीन स्थापित समिति राज्य विधान सभा के समक्ष निम्नलिखित स्पष्ट करते हुए एक कथन देगीः-

(i) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर संत्यक्त दायित्वों को पूर्ण करने में विचलन के कारण;

(ii) क्या ऐसा विचलन सारभूत है और इसकी राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के वित्तीय तथा परिचालन प्रतिवर्तन पर सम्भाव्य विवक्षाएं हैं; और

(iii) धारा 10 के अधीन स्थापित समिति द्वारा की गई संस्तुतियों पर राज्य सरकार द्वारा किए जाने वाले प्रस्तावित उपचारी उपाय ।

(4) राज्य सरकार द्वारा कर्त्तव्यों के अननुपालन पर केन्द्रीय सरकार समुचित कार्यवाही कर सकेगी जिससे अनाबंटन कोटा, आदि से ऊर्जा हेतु राज्य अपात्र हो सकेगा ।

12. राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति.-- (1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए, अधिसूचना द्वारा, नियम बनाएगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित समस्त या किसी मामले हेतु उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात्‌ः-

(i) धारा 3 में निर्दिष्ट राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी का प्ररुप;

(ii) दीर्घकालिक योजना हेतु ऐसे अन्य उपाय जैसे धारा 4 के अधीन अपेक्षित हों; और (iii) कोई अन्य मामला जिसे विहित किया जाना अपेक्षित है या जो विहित किया जाए । 13. नियमों का राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाना.-- राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम इसके बनाए जाने के पश्चात्‌ यथा-शक्यशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा ।5735 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 14. सद्‌भावपूर्वक की गई कार्यवाई के लिए संरक्षण.--इस अधिनियम के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही राज्य सरकार या राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी या राज्य सरकार के किसी अधिकारी या राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के विरूद्ध नहीं होगी ।

15. अन्य विधियों का लागू होना वर्जित नहीं.-- इस अधिनियम के उपबन्ध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में ।

16. कठिनाईयां दूर करने की शक्ति.-- (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों कोे कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबन्ध कर सकेगी, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों और जो ऐसी कठिनाईयों को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हाें :

परन्तु ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से तीन मास की अवधि के अवसान के पश्चात्‌ नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अध्ीान किया गया प्रत्येक आदेश उसके इस प्रकार किए जाने के पश्चात्‌ यथा-शक्यशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रख जाएगा।

17. अधिनियम का कतिपय मामलों में लागू न होना.-- (1) इस अधिनियम की कोई भी बात ऐसे किसी वितरण अनुज्ञप्तिधारी को लागू नहीं होगी जो राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियन्त्रणाधीन नहीं है या राज्य वितरण अनुज्ञप्तिधारी के अस्तित्व उत्तराधिकारी को जो राज्य सरकार द्वारा स्वामित्वाधीन या नियन्त्रणाधीन नहीं है ।

(2) उपधारा (1) के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा जारी समस्त निदेश उस अवधि के लिए लागू रहेंगे जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा ऐसे निदेश जारी किए गए थे।

--------

अनुसूची (धारा 2 (1) (ठ) और (3) देखें) दृष्टान्त प्रमुख निष्पादन संकेतक (के आई पीज़)

इस अधिनियम की धारा 3 में यथा उपबन्धित राज्य विद्युत वितरण प्रबन्धन विवरणी में निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रमुख निष्पादन संकेतक सम्मिलित किए जाएंगे परन्तु ऐसे क्षेत्रों तक सीमित नहीं होंगेः-

I. योजना :

(क) दीर्घकालिक, मध्यमकालिक और अल्पकालिक आधार पर ऊर्जा और शीर्ष कमियों को दूर करने हेतु सही मांग प्राक्कलन सहित विद्युत उत्पादन एक वर्ष के भीतर संकलित तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों की मांग और प्राक्कलन के पूर्वानुमान, द्वितीय वर्ष से आगे पूर्वानुमान के अनुसार विद्युत का उपापन और आगामी तीन से पांच वर्षों में उपभोक्तओं को शत-प्रतिशत विद्युत की आपूर्ति का जिम्मा लेना;

(ख) सरकारी विभागों और संस्थाओं द्वारा विद्युत देयों का संदाय.-चालू देय बिलों के आने की देय तारीख के भीतर संदत्त किए जाने हैं;

(ग) वितरण हानि कमी प्रक्षेप पथ.-संकलित तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों के 30 प्रतिशत से अधिक हानियों के लिए 3 प्रतिशत वार्षिक की दर से और 30 प्रतिशत से नीचे की हानियों के लिए 1.5 प्रतिशत की दर से कम किया जाना है;

5736 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (घ) सहायिकी के लिए व्यवस्था.-इसके लिए उपबन्ध सरकार द्वारा बजट में व्यवस्था के माध्यम से अग्रिम में किया जाना चाहिए;

(ङ) समस्त 33 के0वी0 फीडरों, 11 के0वी0 फीडरों और वितरण ट्रांसफार्मरों के ऊर्जा लेखे और ऊर्जा संपरीक्षा.-एक से दो वर्ष के भीतर पूरा किया जाना है;

(च) शत-प्रतिशत मीटरिंग और उपभोक्ता सूचकांक.-तीन वर्ष के भीतर प्राप्त किया जाना है;

(छ) चोरी के मामलों को निपटाने के लिए एक वर्ष के भीतर विशेष न्यायालय स्थापित करना, यदि वे पहले से स्थापित नहीं हैं ।

II. वित्तीय पुनर्गठनः

(क) संग्रहण दक्षता में सुधार.-यदि यह 95 प्रतिशत से 99 प्रतिशत के बीच है, तो 1.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से,यदि यह 90 प्रतिशत से 95 प्रतिशत के बीच है, तो 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से और यदि यह 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत के बीच है, तो 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ाई जानी है;

(ख) पूर्ववर्ती प्राप्यों की वसूली.-जब तक कामकाज पूंूजी संगणना में आयोग द्वारा मानक सम्बन्धी स्तर तक अनुज्ञात नहीं कर दिया जाता है, पूर्ववर्ती प्राप्यों का,े 20 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से कम किया जाना है;

(ग) संदेयों और अन्य दायित्वों का परिनिर्धारण.-जब तक मानक सम्बन्धी स्तर प्राप्त नहीं हो जाता है, प्रति वर्ष 20 प्रतिशत की कमी;

(घ) पूंंजीगत व्यय के साथ-साथ इसकी निधिगत योजना.-आयोग द्वारा विनिर्दिष्ट किए गए मानकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष समय पर अनुमोदित किया जाना;

(ङ) अल्पकालिक विद्युत क्रय की प्रमात्रा और दर.-प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत से अधिक नही;

(च) आकास्मिकी दायित्वों का निर्वहन.-प्रत्येक वर्ष 20 प्रतिशत;

(छ) कर्मचारियों के कालिक प्रसुविधा दायित्वों का निर्वहन.-पूर्ववर्ती कर्मचारियों के लिए एक वर्ष के भीतर और वर्तमान तथा सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की तारीख को । III. लेखा उपाय :

(क) वार्षिक लेखों को समय पर तैयार किया जाना और उनकी संपरीक्षा (वार्षिक लेखे 30 सितम्बर की देय तारीख के भीतर तैयार किए जाने हैं और उन्हें चालू लेखों के मानदण्डों के साथ पुनः श्रेणीबद्ध किया जाएगा) ;

(ख) डूबत और शंकास्पद ऋणों/बट्‌टे खातों के लिए उपबन्ध करना ।

IV. निगमित शासन प्रणाली :

(क) क्रियाशील निदेशकों की संख्या.-केन्द्रीय पब्लिक सेक्टर उपक्रमों हेतु निगमित शासन प्रणाली के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार;

(ख) स्वतन्त्र निदेशकों की संख्या.-केन्द्रीय पब्लिक सेक्टर उपक्रमों हेतु निगमित शासन प्रणाली के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार ।

V. विनियामक उपाय :

(क) औसत राजस्व वसूली और आपूर्ति की औसत लागत के मध्य अन्तर.- तीन से पांच वर्ष की अवधि में दूर किया जाना है;

(ख) विनियामक परिसम्पत्तियों का परिसमापन.-तीन से पांच वर्ष की अवधि में परिसमाप्त किया जाना है;

5737 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

THE HIMACHAL PRADESH ELECTRICITY DISTRIBUTION MANAGEMENT

RESPONSIBILITY ACT, 2014

ARRANGEMENT OF SECTIONS

Sections :

1. Short title, applicability, extent and commencement. 2. Definitions. 3. State Electricity Distribution Management Statement to be laid before the State Legislature.

4. Long term planning for sustainability of State Distribution Licensee. 5. Financial Restructuring Plan for State Distribution Licensee. 6. Accounting measures. 7. Corporate Governance. 8. Regulatory compliance and tariff filings. 9. Memorandum of understanding. 10. Monitoring Mechanism. 11. Measures to enforce compliance. 12. Power of State Government to make rules. 13. Rules to be laid before State Legislature. 14. Protection of action taken in good faith. 15. Application of other laws not barred. 16. Power to remove difficulties. 17. Act not to apply in certain cases.

-------

Act No. 5 of 2015

THE HIMACHAL PRADESH ELECTRICITY DISTRIBUTION

MANAGEMENT RESPONSIBILITY ACT, 2014

(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 20TH JANUARY, 2015)

AN

ACT

to provide for responsibilities of the State Government to ensure financial and operational turn-around and long-term sustainability of the State-owned Distribution Licensee to enable adequate electricity supply to consumers through financial restructuring, support on sustainable basis in the areas of long term planning, corporate governance, regulatory compliances, and laying down of policy directives and various other measures connected therewith or incidental thereto.

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty- fifth Year of the Republic of India as follows:-

1. Short title applicability, extent and commencement.—(1) This Act may be called The Himachal Pradesh State Electricity Distribution Management Responsibility Act, 2014.

5738 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (2) The provisions of this Act shall, in accordance with the objectives of the Financial Restructuring Plan, apply to the State Distribution Licensee owned by the State Government or the Board or the Department under the State Government engaged in distribution of electricity.

(3) It extends to the State of Himachal Pradesh.

(4) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification in the Official Gazette, appoint.

2. Definitions.—(1) In this Act, unless the context otherwise requires –

(a) "Action Plan" shall have the meaning assigned to it in section 3 of this Act; (b) "Aggregate Technical & Commercial Loss" or "AT&C Loss" means the difference between the energy input into the distribution system and the energy realised wherein the energy realised shall be equal to the product of energy billed and collection efficiency;

(c) "Authority" means the Central Electricity Authority referred to in sub- section (1) of section 70 of the Electricity Act;

(d) "Board" shall have the meaning assigned to it under the Electricity Act, 2003;

(e) "Collection efficiency" means the ratio of total revenue realized to the total revenue billed for the same year;

(f) "Electricity Act" means the Electricity Act, 2003 as in force;

(g) "fiscal responsibility and budget management limit" means limit imposed on State Government borrowings from Central Government under the statute relating to fiscal responsibility and budget management of the State, as may be in force from time to time;

(h) "Financial Restructuring Plan or "FRP" means a plan for financial restructuring of the Distribution Licensee as notified by the State Government in accordance with the provisions of the Financial Restructuring Scheme notified by the Central Government in terms of Office Memorandum No. 20/11/2012-APDRP, dated 5th October, 2012;

(i) "Key Performance Indicators (KPIs)" means the performance standards laid by the State Commission, if any, and/or in the Financial Restructuring Plan, if any, and till such time the KPIs are laid down, the KPIs as provided for in the Schedule to this Act;

(j) "Nodal Bank" means the bank nominated by the Department of Financial Services, for the purposes of financial restructuring of the State Distribution Licensee and for the purposes of co-ordination with the State Government, State Distribution Licensee and the participating Lenders;

(k) "prescribed" means prescribed by rules made by the State Government under this Act;

(l) "Schedule" means schedule appended to this Act;

5739 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (m) "State Commission'' means the Himachal Pradesh Electricity Regulatory

Commission constituted under section 82 of the Electricity Act, 2003 (36 of 2003);

(n) "State Distribution Licensee" or "Distribution Licensee" means the Himachal Pradesh State Electricity Board Ltd. constituted under sub-section (1) of section 5 of the Electricity (Supply) Act, 1948 (54 of 1948) or the Government Company or the Department under the State Government engaged in distribution of electricity; and (o) "State Government" means the Government of Himachal Pradesh.

(2) All other words in this Act, not expressly defined herein, shall have the meanings assigned thereto under the Financial Restructuring Plan, the Electricity Act, 2003, or notifications, rules, and regulations made thereunder.

3. State Elecctricity Distribution Management Statement to be laid before the State Legislature.—(1) The State Government shall lay, in each financial year during the Budget Session, before the State Legislature, a State Electricity Distribution Management Statement on the measures taken by the State Government in relation to electricity distribution in the State including, in the areas of long-term planning, consumer protection, regulatory compliance, corporate governance, financial restructuring of the State Distribution Licensee, so as to bring about the operational and financial viability of the State Distribution Licensee, on sustainable basis and which shall comprise of the following :—

(a) State Electricity Distribution Strategy Statement laying down the policies and strategies of the State Government for achieving the Key Performance Indicators, for the ensuing financial year, relating to the conditions or provisions provided under sections 4,5,6 and 8 and description of other activities which have potential implications on financial and operational turn-around of the State Distribution Licensee;

(b) action plan, on long-term, medium term and short-term basis, laying down time bound programme to-

(i) execute strategic priorities to achieve Key Performance Indicators;

(ii) monitor and ensure compliance of the Key Performance Indicators, and strategic priorities;

(iii) feedback loop for in/ mid-course corrections; and

(iv) such other actions as may be required to meet the obligations cast under this Act on the State Government and achieve the objectives of this Act:

Provided that the action plan shall contain steps for eliminating and minimizing deviation in actual performance and Key Performance Indicators; and

(c) State Electricity Distribution Performance Statement laying down an assessment of compliance, by the State Electricity Distribution Licensee or the State Government, as the case may be, with the conditions or provisions provided under sections 4,5,6 and 8 of this Act.

(2) The State Electricity Distribution Management Statement shall be in such form as may be prescribed.

5740 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) The State Electricity Distribution Management Statement shall be without prejudice to any consequences to which the State Distribution Licensee may be liable under the Electricity Act, 2003 in particular, the timeline referred to in section 55 of the said Act, and any orders and directions of the authorities in relation to any of the requirements under the said enactment:

Provided that nothing in this section shall imply relaxation of any requirement under the Electricity Act, 2003.

4. Long term Planning for sustainablity of State Distribution Licensee.—The State Government shall take, appropriate measures, to provide for the following matters, namely:—

(a) that the State Distribution Licensee estimates the demand, Aggregate Technical and Commercial loss and availability of electricity on long term basis and contracts with the approval of the State Commission, through long or medium or short term agreements for purchase of power to meet the demand;

(b) that the State Distribution Licensee prepares, with the approval of the State Commission, a time bound road map for Aggregate Technical and Commercial loss reduction:

Provided that the road map shall be prepared within six months from the date of coming into force of this Act;

(c) that the State Distribution Licensee undertakes energy accounting and auditing of all 33 kV feeders, 11 kV feeders and Distribution Transformers alongwith consumer indexing and time bound metering of each category of consumers and in doing so the Distribution Licensee should consider latest developments in metering technologies:

Provided that the road map in relation to energy accounting and auditing and time bound metering of all consumers shall be prepared within six months from the date of coming into force of this Act and approval for the same shall be sought from the State Commission:

Provided further that the consumer indexing shall be completed within two years from the date of coming into force of this Act:

Provided further that the State Distribution Licensee shall submit to the Authority and the State Commission half yearly progress reports with respect to energy accounting, auditing, metering and feeders and Distribution Transformers wise consumer indexing;

(d) that if the State Government requires the grant of any subsidy to any consumer or class of consumers, the State Government shall declare the quantum of subsidy in advance categorically stating the consumer or the class of consumers to whom it is to be provided and in doing so, the State Government shall be guided by the Regulations for Multi Year Distribution Tariff evolved by Forum of Regulators;

(e) create annual budgetary provision and also timely release of subsidies, if committed, in accordance with section 65 of the Electricity Act, 2003 on actual basis;

(f) ensure that there are no arrears of electricity charges for electricity supplied to various Departments and Institutions of the State Government on or before the date of coming into force of this Act, and in case of failure to do so, it would be adjusted against the budgetary grant:

5741 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

Provided that the State Government shall make budgetary provisions including grants, to ensure payment to the State Distribution Licensee within due date of the charge for electricity supplied to its various Departments and Institutions;

(g) set up, within one year from the date of coming into force of this Act, special courts, where it has not been done, to tackle theft of electricity in accordance with sections 153 to 157 of the Electricity Act, 2003;

(h) ensure that the State Load Despatch Centre is operated within six months from the date of coming into force of this Act, by a Government company or any authority or corporation (other than the State Transmission Utility) established or constituted by or under any State Act, as may be notified by the State Government, and provide for other measures which shall ensure functional and financial autonomy, independent and sustainable revenue streams and adequate manpower:

Provided that such Government company or any authority or corporation shall not engage in any functions other than those specified under sections 32 and 33 of the Electricity Act, 2003;

(i) provide for the formation of subsidiaries, joint venture companies or other schemes of division, amalgamation, merger or reconstruction or arrangements in relation to the State Distribution Licensee which shall promote the profitability and viability of the resulting entity, ensure economic efficiency, public private partnership, encourage competition and protect consumer interests; and

(j) such other measures as may be prescribed.

5. Financial Restructuring Plan for State Distribution Licensee.— (1) In the event that a Financial Restructuring Plan has been notified, inter-alia, to operationalize the financial restructuring of the State Distribution Licensee, the State Government shall take appropriate measures, to ensure that the trajectories of the operational and financial parameters in the Financial Restructuring Plan, are achieved within the stipulated time frame.

(2) The State Government shall, subject to any order or direction of the State Commission, notify a Plan to undertake financial liabilities of the State Distribution Licensee and for achieving the operational and financial trajectories considered in the Financial Restructuring Plan for financing of operational losses and interest of the State Distribution Licensee and such other measures as may be specified in the Financial Restructuring Plan or any other financial restructuring scheme:

Provided that these fiscal responsibilities shall be consistent with the budgetary constraints / fiscal limits available in the State fiscal responsibility and budget management limit, if any:

Provided further that the State Government shall not adjust any financial liability, after it has taken them over, as loan to the State Distribution Licensee:

Provided further that if the fiscal space including Debt- Gross State Domestic Product ratio under the Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2005, if any, is available, the State Government shall not exceed its net borrowing ceiling of the relevant fiscal year as notified by the Finance Commission from time to time:

Provided further that if in a particular year the State Government has fiscal space available more than the originally projected, it shall take over the additional liabilities as soon as possible.

5742 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (3) The State Government shall make Financial Restructuring Plan or such other financial scheme a part of the State budget statements for effective monitoring of its impact on the State finances.

(4) The State Government shall ensure that the State Distribution Licensee does not resort to short term loans for funding operational losses except as provided in the Financial Restructuring Plan.

6. Accounting Measures.—(1) The State Government shall ensure that the State Distribution Licensee establishes, within six months from the date of coming into force of this Act, an Empowered Committee to ensure identification, provisioning and write offs of receivables and bad and doubtful debts in the books of accounts of the State Distribution Licensee:

Provided that the State Distribution Licensee shall prepare accounting policies which shall provide for its financial management and management of its receivables and provisioning for bad and doubtful debts containing timeline for writing them off.

(2) The State Government shall ensure that the Distribution Licensee completes physical verification and preparation of fixed assets register on a commonly accepted definition of fixed assets under the financial accounting standards within two years from the date of coming into force of this Act:

Provided that the said plan referred to in sub-section (2) shall be submitted to the State Commission for approval.

(3) The State Government, by notification, shall establish an Empowered Committee consisting of,-

(i) Principal Secretary (Finance) to the Chairperson; Government of Himachal Pradesh

(ii) Principal Secretary (Power) to the Member; and Government of Himachal Pradesh:

(iii) Head of the State Distribution Member-Secretary Licensee:

7. Corporate Governance.— (1) It shall be duty of the State Government to ensure that the Board of Directors of the State Distribution Licensee has an optimum combination of functional, nominee and independent directors:

Provided that the number of functional directors (including Chairman-cum-Managing Director/Managing Director) shall not exceed fifty percent of the actual strength of the Board:

Provided further that the number of nominee Directors appointed by the State Government shall be restricted to a maximum of two:

Provided further that the number of Independent Directors shall be as per provisions under the Companies Act, 2013.

Explanation:-'Independent Director' shall mean a part-time director of the distribution licensee who,-5743 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (a) apart from receiving director's remuneration, does not have any material pecuniary relationship or transaction with the State Distribution Licensee, its Directors, its senior management, its holding company, its subsidiaries and associates, and the State Government, which may affect the independence of the Director;

(b) is not related to persons occupying management positions at the Board level or at one level below the Board;

(c) is not a partner or an executive, or was not a partner or an executive during the preceding three years, of any of the following:-

(i) the statutory audit firm or the internal audit firm or tax audit firm or energy audit firm or management audit firm or risk audit firm or insurance audit firm, that is associated with the State Distribution Licensee; and

(ii) the panel of advocate(s) or legal firm(s) or consultant(s) and consulting firm(s) or expert(s) that have a material association with the State Distribution Licensee;

(d) is not a material supplier, service provider or customer or a lessor or lessee of the State Distribution Licensee, which may affect the independence of the Director;

(e) is not a substantial shareholder of the State Distribution Licensee i.e. owning 2% or more of the block of voting shares; and

(f) is a person of ability, integrity and standing, having qualification in engineering or law or economics or commerce or finance or management and having knowledge and experience in the areas of generation or transmission or distribution of electricity.

(2) The State Government shall lay down a code of conduct in line with the Guidelines on Corporate Governance for Public Sector Enterprises, as notified by the Department of Public Enterprises, Government of India, for all Board Members and senior management of the State Distribution Licensee, which shall include but be not limited to a clear delineation of the roles and division of responsibilities between the Board and the management.

8. Regulatory Compliance and Tariff Filings.— (1) The State Government shall, twice in a year, evaluate the status of compliance by the State Distribution Licensee with the Electricity Act, 2003 and Rules and Regulations made thereunder as also regulatory directives and policies as well as steps taken to rectify instances of non-compliances since the last such evaluation.

(2) The State Government shall ensure regular and timely filing of true-up petitions, Aggregate Revenue Requirement and tariff petitions, and petitions for adjustments on account of fuel and cost of power purchased by the State Distribution Licensee, as per the orders or regulations specified by the State Commission.

(3) Notwithstanding sub-section (2), it shall be the duty of the State Government to make fiscal provision or provision of grant to the State Distribution Licensee if there is an adverse financial impact due to the failure of the State Distribution Licensee to minimize or eliminate the following :-

(a) variations in the actual power purchase cost and the power purchase cost approved by the State Commission;

(b) variations in the actual and approved expenditure of other items of the Aggregate Revenue Requirement such as but not limited to Operation and maintenance expenditure and capital expenditure; and 5744 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (c) variation between average cost of supply and average realization of revenue:

Provided that the variation, if any, between average cost of supply and average realization of revenue, shall be bridged/ filled in a period of three to five years from the date of coming into force of this Act.

(4) The State Government shall ensure that the regulatory assets, if any, are liquidated expeditiously in a period of three to five years from the date of coming into force of this Act, or within such period stipulated, if any, by the State Commission, whichever is earlier.

9. Memorandum of Understanding.—(1) The State Government and the State Distribution Licensee, shall, within a period not exceeding six months from the date of coming into force of this Act in this behalf, enter into a memorandum of understanding for setting targets for Key Performance Indicators and performance evaluation of the State Distribution Licensee for each financial year:

Provided that the memorandum of understanding shall be aimed at providing greater autonomy to the State Distribution Licensee to perform and comply with its legal and regulatory obligations including but not limited to.-

(a) timely filing of Annual Revenue Requirement and tariff petitions and adjustments on account of fuel and cost of power purchased by the State Distribution Licensee;

(b) prudent investment and capital expenditure planning; and

(c) financial management, to enable adequate and affordable electricity supply to consumers:

Provided also that the memorandum of understanding shall provide for performance milestones for all the financial and operational parameters provided in this Act and State Electricity Distribution Management Statement.

(2) The State Distribution Licensee shall submit every six months, a report to the State Government, on its operational and financial performance as required under various provisions of this Act:

Provided that the report shall lay down the strategy and plan for achieving the performance milestones and actual performance against these performance milestones as may be prescribed by the State Government:

Provided further that the State Distribution Licensee shall indicate revised strategies and plans in case they fail to achieve the agreed milestones.

10. Monitoring mechanism.—(1) The State Government shall, by notification, establish a Committee for effective implementation of this Act, consisting of:

(a) Chief Secretary Chairperson; Government of Himachal Pradesh:

(b) Principal Secretary (Finance) to the Member; Government of Himachal Pradesh:

(c) Principal Secretary (Power) to the Member-Secretary; Government of Himachal Pradesh:

5745 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (d) Head of the State Distribution Licensee: Member;

(e) Head of the State owned Generating Member; Company:

(f) Head of the State owned Transmission Member; Licensee:

(g) Representatives of the Nodal Bank Members; and and three major Lenders of the State Distribution Licensee:

(h) Representative from Central Electricity Member. Authority :

11. Measures to enforce compliance.—(1) The Committee established under section 10 shall review and recommend remedial measures, if any, every quarter, compliance of the obligations cast on the State Government under this Act, and the State Government shall place before the State Legislative Assembly, the outcome of such reviews.

(2) Except as may be provided under this Act, no deviation in fulfilling the obligations cast on the State Government under this Act, shall be permissible without approval of the State Legislative Assembly.

(3) Where owing to unforeseen circumstances, there is a deviation in fulfilling the obligations cast on the State Government under this Act, the Committee established under section 10 shall make a statement before the State Legislative Assembly explaining-

(i) the reasons for deviation in fulfilling the obligations cast on the State Government under this Act;

(ii) whether such deviation is substantial and has potential implications on financial and operational turn-around of the State Distribution Licensee; and

(iii) the remedial measures that the State Government proposes to take on the recommendations made by the Committee established under section 10.

(4) Non-compliance of the duties by the State Government may attract appropriate action by the Central Government that may render the State ineligible for power from the unallocated quota, etc.

12. Power of State Government to make rules.—(1) The State Government shall, by notification, make rules for carrying out the provisions of this Act.

(2) In particular and without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for all or any of the following matters, namely:-

(i) the form of the State Electricity Distribution Management Statement referred to in section 3;

(ii) such other measures for long term planning as may be required under section 4; and (iii) any other matter which is required to be, or may be, prescribed.

13. Rules to be laid before State Legislature.—Every rule made by the State Government shall be laid, as soon as may be after it is made, before the State Legislature.

5746 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 14. Protuction of action taken in good faith.—No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against the State Government or State Distribution Licensee or any officer of the State Government or State Distribution Licensee, for anything which is in good faith done or intended to be done under this Act.

15. Application of other laws not barred.—The provisions of this Act shall be in addition to and not in derogation of the provisions of any other law for the time being in force.

16. Power to remove difficulties.— (1) If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the State Government may, by order published in the Official Gazette, make such provisions, not inconsistent with the provisions of this Act, as may appear to be necessary for removing the difficulty:

Provided that no such order shall be made after the expiry of a period of three months from the date of coming into force of this Act.

(2) Every order made under this section shall be laid, as soon as may be after it is made, before the State Legislative Assembly.

17. Act not to apply in certain cases.—(1) Nothing in this Act shall apply to any Distribution Licensee that is not owned or controlled by the State Government or to a successor entity of the State Distribution Licensee that is not owned or controlled by the State Government. (2) Notwithstanding sub-section (1), all directives issued by the State Government under this Act shall continue to apply for the period for which such directions were issued by the State Government.

________

SCHEDULE

(Sections 2(1)(l) and 3)

Illustrative Key Performance Indicators (KPIs)

The State Electricity Distribution Management Statement as provided in section 3 of this Act shall include but not limited to, the Key Performance Indicators in the following areas:-

I. Planning :

(a) power Procurement with accurate Demand Estimation to mitigate Energy and Peak Shortages on long-term, medium-term and short-term basis-undertake forecasting of demand and estimation of Aggregate Technical and Commercial losses within one year, procurement of power as per forecast from second year onwards and 100% electricity supply to consumers in next three to five years;

(b) payment of dues of electricity by Government Departments and Institutions.—the current dues have to be paid within due date of raising of bills;

(c) distribution loss reduction trajectory.—Aggregate Technical and Commercial losses to be reduced @3% per year for losses above 30% and @ 1.5% per year for losses below 30%;

(d) provisioning of subsidy.—it should be provided upfront by the Government by way of budgetary provision;

5747 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 (e) energy accounting and energy auditing of all 33 kV feeders, 11 kV feeders and

distribution transformers.—to be achieved within one and two years;

(f) 100% Metering and Consumer Indexing.—to be achieved within three years;

(g) setting up Special Courts for settling theft cases.—to be set up within one year, if not already set up.

II. Financial Restructuring:

(a) improvement in collection efficiency.—to be increased @ 1.5% per year if it is between 95 to 99%, @ 3% per year if it is between 90 to 95% and @ 5% per year if it is between 80 to 90%;

(b) recovery of past receivables.—past receivables to be reduced @ 20% per year till the normative level allowed by the Commission in the working capital computation;

(c) liquidation of payables and other liabilities.—20% reduction every year till normative levels are achieved;

(d) Capital Expenditure alongwith its funding plan.—to get timely approved every year as per the norms specified by the Commission;

(e) quantum and rate of short term power purchase.—not more than 10 to 15% every year;

(f) discharge of Contingent liabilities.—20% every year; and

(g) discharge of terminal benefit liabilities of the employees.—within one year for the past employees and for currently retiring - on the date of retirement;

III. Accounting Measures :

(a) timely preparation and audit of Annual Accounts (Annual Accounts to be prepared within due date of 30th September and realigned with the current accounting standards); and (b) provision for bad and doubtful debts/write offs;

IV. Corporate Governance :

(a) number of Functional Directors.—as per Guidelines for Corporate Governance for Central Public Sector Undertakings; and

(b) number of Independent Directors.—as per Guidelines for Corporate Governance for Central Public Sector Undertakings;

V. Regulatory Measures,-

(a) gap between Average Revenue Realization and Average Cost of Supply.—to be eliminated in a period of three to five years; and

(b) liquidation of Regulatory Assets.—to be liquidated in a period of three to five years.

5748 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936

ब अदालत श्री मोहिन्द्र सिंह राणा, कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश श्री संजय कुमार सुपुत्र श्री सोम राज, निवासी गांव कंडेई, डाकघर चूहन, तहसील डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।

विषय.- प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

उपरोक्त प्रार्र्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र, ब्यान-हल्फी बमय अन्य कागजात इस आशय से गुजारा है कि उसकी पुत्री शीतल देवी की जन्म तिथि 19-9-2012 है, जोकि ग्राम पंचायत समलेऊ के रिकॉर्ड में दर्ज न है। जिसे दर्ज किया जाये।

इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी की पुत्री की जन्म तिथि ग्राम पंचायत समलेऊ के रिकॉर्ड में दर्ज करने पर यदि किसी को कोई उजर-एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी दिनांक 10-2-2015 को हाजिर आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 29-12-2014 को मेरे हस्ताक्षर व अदालत मोहर से जारी हुआ।

मोहिन्द्र सिंह राणा मोहर। कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।

-----

ब अदालत श्री मोहिन्द्र सिंह राणा, कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश श्रीमती लक्ष्मी देवी पत्नी स्व0 श्री अमर नाथ, निवासी गांव लूठनू, डाकघर बाथरी, तहसील डलहौजी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।

विषय.- प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

उपरोक्त प्रार्थिया ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र, ब्यान-हल्फी बमय अन्य कागजात इस आशय से गुजारा है कि उसके पुत्र विजय कुमार की जन्म तिथि 13-3-1978 है, जोकि ग्राम पंचायत ओसल के रिकॉर्ड में दर्ज न है। जिसे दर्ज किया जाये।

इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थिया के पुत्र की जन्म तिथि ग्राम पंचायत ओसल के रिकॉर्ड में दर्ज करने पर यदि किसी को कोई उजर-एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी दिनांक 10-2-2015 को हाजिर आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।

आज दिनांक 3-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व अदालत मोहर से जारी हुआ।

मोहर। मोहिन्द्र सिंह राणा कार्यकारी दण्डाधिकारी, डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।5749 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) केस नं0 : 3/D.E./T/Misc. तारीख पेशी : 5-1-2015 अगली तारीख : 4-2-2015 श्री चमन लाल बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री चमन लाल सुपुत्र श्री राम चन्द, निवासी नलहाच, डा0 भेखली, तहसील व जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी माता रेपती देवी की मृत्यु दिनांक 8-11-2013 को हुई है परन्तु उसकी मृत्यु तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नलहाच के अभिलेख में दर्ज न किया गया है।

अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को रेपती देवी की मृत्यु तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 4-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार मृत्यु तिथि दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 5-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी,

तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,

कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

------

ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) केस नं0 : 4/D.E./T/Misc./2015 तारीख पेशी : 7-1-2015 अगली तारीख : 6-2-2015 श्री संजय कुमार बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री संजय कुमार सुपुत्र श्री चतरभुज, निवासी अप्पर सुल्तानपुर, डा0 सुल्तानपुर, तहसील व जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी माता गीता देवी की मृत्यु दिनांक 5-9-1983 को हुई है परन्तु उसकी मृत्यु तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश नगर परिषद्‌ कुल्लू के अभिलेख में दर्ज न की गई है।

अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को गीता देवी की मृत्यु तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 6-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेरे समायत न होगा तथा नियमानुसार मृत्यु तिथि दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 7-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।5750 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) केस नं0 : 5/B.E./T/Misc./2015 तारीख पेशी : 8-1-2015 अगली तारीख : 7-2-2015 श्री गुड्‌डू राम बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री गुड्‌डू राम सुपुत्र श्री घांथू राम, निवासी लारीं, डा0 नेऊली, तहसील व जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी पुत्री प्रीती का जन्म दिनांक 22-6-2013 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नेऊली के अभिलेख में दर्ज न किया गया है। अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को प्रीती की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 7-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेरे समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 8-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

------

ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) केस नं0 : 6/B.E./T/Misc./2015 तारीख पेशी : 8-1-2015 अगली तारीख : 7-2-2015 श्री गुड्‌डू राम बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री गुड्‌डू राम सुपुत्र श्री घांथू राम, निवासी लारीं, डा0 नेऊली, तहसील व जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी पुत्री पूजा का जन्म दिनांक 23-6-2011 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नेऊली के अभिलेख में दर्ज न किया गया है। अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को पूजा की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 7-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेरे समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 8-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।5751 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) केस नं0 : 7/B.E./T/Misc./2015 तारीख पेशी : 8-1-2015 अगली तारीख : 7-2-2015 श्री गुड्‌डू राम बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री गुड्‌डू राम सुपुत्र श्री घांथू राम, निवासी लारी, डा0 नेऊली, तहसील व जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी पुत्री हेमलता का जन्म दिनांक 15-6-2010 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नेऊली के अभिलेख में दर्ज न किया गया है।

अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को हेमलता की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 7-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेरे समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 8-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

------

ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

केस नं0 : 1/M.E./T/Misc. तारीख पेशी : 8-1-2015 अगली तारीख : 7-2-2015 1. श्री आशु पाल पुत्र श्री वेलू राम, निवासी लारी, डाकघर नेऊली, तह0 व जिला कुल्लू (हि0 प्र0)। 2. श्रीमती जय देई पुत्री श्री दुनी चन्द, हाल पत्नी श्री आशु पाल, निवासी लारी, डा0 नेऊली, तह0 . . प्रार्थीगण। व जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादीगण। विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।

उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 26-12-2014 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 31-3-2013 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान लारी में शादी कर ली है और तब से पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण ने अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है। 5752 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 अतः सर्वसाधारण व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगण की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 7-2-2015 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 8-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

------

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी उप-तहसील निन्था, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

श्री यश पाल पुत्र श्री हरि राम, निवासी निन्था, डा0 नित्थर, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

. . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री यश पाल पुत्र श्री हरि राम, निवासी निन्था, डा0 नित्थर, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने आवेदन पत्र शपथ पत्र सहित गुजारा है कि उसकी पुत्री कु0 अनुशका का जन्म दिनांक 1-1-2007 को हुआ है लेकिन भूल के कारण उक्त सन्तान की जन्म तिथि ग्राम पंचायत नित्थर में दर्ज नहीं करवा सका है।

अतः इस नोटिस हजा द्वारा आम जनता तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उक्त सन्तान की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 6-2-2015 को सुबह 10.00 बजे इस अदालत में हाजिर आकर पेश करें। गैर हाजिरी की सूरत में सम्बन्धित पंचायत को उक्त सन्तान की जन्म तिथि 1-1-2007 दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 6-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

-------

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

श्री उमेश कुमार पुत्र श्री प्रितम देव, निवासी दुराह, डा0 दुराह, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

. . प्रार्थी।

बनाम5753 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 आम जनता

. . प्रतिवादी। विषय.-प्रार्थना-पत्र अधीन जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री उमेश कुमार पुत्र श्री प्रितम देव, निवासी दुराह, डा0 दुराह, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने आवेदन पत्र शपथ कथन सहित गुजारा है कि उसकी पुत्री कु0 अंशिका का जन्म दिनांक 2-10-2012 को हुआ है लेकिन भूल के कारण उक्त सन्तान की जन्म तिथि ग्राम पंचायत दुराह में दर्ज नहीं करवा सका है।

अतः इस नोटिस हजा द्वारा आम जनता तथा सम्बन्धित रिश्तेदारों को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उक्त सन्तान की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 6-2-2015 को सुबह 10.00 बजे इस अदालत में हाजिर आकर पेश करें। गैर हाजिरी की सूरत में सम्बन्धित पंचायत को उक्त सन्तान की जन्म तिथि 2-10-2012 दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 6-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी हुआ।

मोहर।

रघुवीर सिंह शाशनी, कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील नित्थर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

-------

समक्ष तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0) श्री भाग सिंह पुत्र चैना राम, निवासी गवैला़, डाकघर व तहसील सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

. . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता

. . फरीकदोयम। प्रार्थी श्री भाग सिंह पुत्र चैना राम, निवासी गवैला ने शपथ-पत्र सहित आवेदन किया है कि उसका वास्तविक नाम भाग सिंह है परन्तु राजस्व अभिलेख महाल गवैला व सन्धो में भागमल लिखा गया है, जो गलत है। अब प्रार्थी ने उसकी दरुस्ती के आदेश चाहे हैं। अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दरुस्ती करने बारा कोई उजर-एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी दिनांक 7-2-2015 को 10.00 बजे इस अदालत में हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है। बसूरत गैरहाजिरी एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दरुस्ती के आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 7-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी हुआ। मोहर।

हस्ताक्षरित/-

तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।5754 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 समक्ष तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0) श्री रुप लाल पुत्र श्री शान्ति स्वरुप, निवासी सोहर, डाकघर व तहसील सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

. . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता

. . फरीकदोयम। प्रार्थी श्री रुप लाल पुत्र श्री शान्ति स्वरुप, निवासी सोहर ने शपथ-पत्र सहित आवेदन किया है कि उसके पिता का वास्तविक नाम शान्ति स्वरुप है परन्तु राजस्व अभिलेख महाल सन्धोल में शक्ति राम लिखा गया है, जो गलत है। अब प्रार्थी ने उसकी दरुस्ती के आदेश चाहे हैं। अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दरुस्ती करने बारा कोई उजर-एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी दिनांक 11-2-2015 को 10.00 बजे इस अदालत में हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है। बसूरत गैरहाजिरी एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दरुस्ती के आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 12-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी हुआ। मोहर।

हस्ताक्षरित/-

तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

-------

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

मिसल नं0 : 1/2015 तारीख मरजुआ : 6-1-2015 तारीख पेशी : 14-2-2015 श्री विकेश चौहान पुत्र श्री श्याम सिंह, निवासी गांव व डाकघर खददर, तहसील लड-भड़ोल, जिला . . प्र्रार्थी। मण्डी (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थीगण। विषय.-ग्राम पंचायत अभिलेख में जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे।

उपरोक्त मुकद्दमा में श्री विकेश चौहान पुत्र श्री श्याम सिंह, निवासी गांव व डाकघर खददर, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0) नेे इस न्यायालय में अधीन धारा 13(3) के अन्तर्गत अपनी जन्म तिथि ग्राम पंचायत खददर के जन्म अभिलेख में दर्ज करने हेतु आवेदन-पत्र गुजार रखा है कि प्रार्थी की वास्तविक जन्म तिथि 21-9-1991 है जो कि प्रार्थी के शिक्षा अभिलेख व ग्राम पंचायत अभिलेख, परिवार भाग-1 में भी दर्ज है परन्तु प्रार्थी की जन्म तिथि ग्राम पंचायत खददर के जन्म अभिलेख में दर्ज नहीं हुई है। प्रार्थी अपनी जन्म तिथि ग्राम पंचायत खददर के जन्म अभिलेख में वास्तविक जन्म तिथि 21-9-1991 दर्ज करवाना चाहता है, जिसे ग्राम पंचायत खददर के जन्म अभिलेख में दर्ज करने के आदेश दिये जायें।

अतः आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि प्रार्थी की जन्म तिथि 21-9-1991 ग्राम पंचायत खददर के जन्म अभिलेख में दर्ज करने बारे किसी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह5755 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 असालतन या वकालतन दिनांक 14-2-2015 को अपना उजर व एतराज न्यायालय में पेश कर सकते हैं। गैर-हाजिरी की सूरत में एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 6-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

------

ब अदालत सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

मिसल नं0 : 01/2015 तारीख मरजुआ : 6-1-2015 तारीख पेशी : 14-2-2015 श्रीमती कौसल्या देवी पत्नी स्व0 श्री तुलसी राम, निवासी पनीरु, डाकघर पन्डोल, तहसील . . प्र्रार्थी। लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थीगण। विषय.-राजस्व अभिलेख में नाम दरुस्ती करवाने बारे।

उपरोक्त मुकद्दमा में श्रीमती कौसल्या देवी पत्नी स्व0 श्री तुलसी राम, निवासी पनीरु, डाकघर पन्डोल, तहसील लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0) नेे इस न्यायालय में अधीन धारा 35 ता 37 के अन्तर्गत अपने नाम की दरुस्ती राजस्व अभिलेख में करने हेतु आवेदन-पत्र गुजारा है कि प्रार्थीन के पति का वास्तविक नाम तुलसी राम है जो कि प्र्रार्थीन के भूतपूर्व सैनिक की विध्वा पहचान पत्र में भी दर्ज है। परन्तु प्रार्थीन के पति का नाम राजस्व अभिलेख महाल पनीरु में टिटा राम गलत दर्ज हो चुका है। प्रार्थीन अपने पति के नाम की राजस्व अभिलेख महाल पनीरु में दरुस्ती करवाना चाहती है, जिसे राजस्व अभिलेख महाल पनीरु में दरुस्त करने के आदेश दिये जायें।

अतः आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि प्रार्थीन के पति के नाम की दरुस्ती राजस्व अभिलेख मुहाल पनीरु में टिटा राम के स्थान पर तुलसी राम दर्ज करने बारे किसी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 14-2-2015 को अपना उजर व एतराज न्यायालय में पेश कर सकते हैं अन्यथा गैर-हाजिरी की सूरत में एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

आज दिनांक 6-1-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।

मोहर।

हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

लड-भड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)। 5756 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 22 जनवरी, 2015/2 माघ, 1936 ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पावंटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)

श्री मान सिंह पुत्र श्री पूर्ण सिंह, निवासी सूरजपूर (पातलियों), तहसील पावंटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादी। (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। प्रकरण संख्या : 01/2015.

उनवान मुकद्दमा.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

श्री मान सिंह पुत्र श्री पूर्ण सिंह, निवासी सूरजपूर (पातलियों), तहसील पावंटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0) ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपने पुत्र विशांत कुमार की जन्म तिथि 4-12-1990 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ-पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत पातलियों में अपने उपर वर्णित पुत्र की जन्म तिथि को दर्ज करने का अनुरोध किया है।

इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को विशांत कुमार की जन्म तिथि को ग्राम पंचायत पातलियोंं, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 20-2-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित व मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जाएगा कि उक्त विशांत कुमार की जन्म तिथि ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण करने के आदेश जारी कर दिए जायेंगे।

आज दिनांक 2-1-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।

मोहर। हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, पावंटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)। नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम्‌ ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 22 January 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2015-01-22.216_gazette_2015-1_22_2015/. Archive identifier in.gazette.himachal.2015-01-22.216_gazette_2015-1_22_2015.